चारधाम यात्रा में 25 दिनों में 40 श्रद्धालुओं की मौत:केदारनाथ में सबसे ज्यादा 22 की जान गई; बद्रीनाथ में 7, गंगोत्री-यमुनोत्री में भी बढ़ा आंकड़ा

चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार रिकॉर्ड बना रही है। 19 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा में 13 मई तक 12 लाख 64 हजार 217 श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं। लेकिन दूसरी ओर यात्रा के दौरान मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की 14 मई सुबह 10 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार अब तक चारधाम यात्रा में 40 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा 22 मौतें केदारनाथ धाम में दर्ज की गई हैं। वहीं बद्रीनाथ में 7, यमुनोत्री में 6 और गंगोत्री में 5 श्रद्धालुओं की जान गई है। सरकार लगातार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और मेडिकल तैयारियों का दावा कर रही है, लेकिन लगातार बढ़ते मौत के आंकड़े यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य चुनौतियों और हाई एल्टीट्यूड से जुड़ी परेशानियों की गंभीरता भी दिखा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अधिकांश मौतें हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाइपरटेंशन और अन्य स्वास्थ्य कारणों से हुई हैं। मौतों के पीछे हाई एल्टीट्यूड, हार्ट अटैक और पुरानी बीमारियां स्वास्थ्य विभाग के अनुसार चारधाम यात्रा में अब तक हुई अधिकांश मौतें स्वास्थ्य खराब होने, हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस जैसी समस्याओं के कारण हुई हैं। यात्रा मार्ग ऊंचाई वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जहां ऑक्सीजन का स्तर कम होने और लगातार चढ़ाई की वजह से बुजुर्गों और पहले से बीमार यात्रियों की तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आ रहे हैं। यात्रा से पहले जारी की गई थी एडवाइजरी चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले सरकार ने कई समीक्षा बैठकें की थीं। सभी विभागों को यात्रा शुरू होने से पहले तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए थे। सरकार का दावा है कि यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सेवाओं, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। यात्रियों के लिए एडवाइजरी भी जारी की गई थी, जिसमें बुजुर्गों, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी गई थी। स्वास्थ्य मंत्री ने भी यात्रियों से सावधानी बरतने और शरीर में परेशानी होने पर तुरंत रुकने की अपील की है। स्वास्थ्य मंत्री बोले- अति उत्साह भारी पड़ रहा प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल ने कहा कि कई यात्री शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर तेजी से यात्रा पूरी करने की कोशिश करते हैं। इससे हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड की समस्या बढ़ जाती है। 47 अस्पताल और 400 डॉक्टर तैनात स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार यात्रा मार्ग पर 47 अस्पताल बनाए गए हैं। इसके अलावा करीब 2820 स्वास्थ्य कर्मियों और 400 डॉक्टरों को अलग-अलग पड़ावों पर तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि पहली बार दून मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में 180 डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इन्हें हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाइपरटेंशन और शुगर मरीजों के उपचार की ट्रेनिंग दी गई है। बद्रीनाथ और केदारनाथ में अस्पताल शुरू करने की दिशा में भी काम चल रहा है। ट्रॉमा सेंटर बनाने की तैयारी सरकार अब यात्रा मार्ग पर डेडिकेटेड ट्रॉमा सेंटर बनाने की तैयारी में भी जुट गई है। दून मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में ट्रॉमा सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा कौड़ियाला समेत यात्रा मार्ग के अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी ट्रॉमा सेंटर बनाने की योजना है ताकि दुर्घटना या स्वास्थ्य आपात स्थिति में “गोल्डन ऑवर” के भीतर इलाज मिल सके और जान बचाई जा सके।
अंकुरित या भुना चना, किससे मिलेगा आपको ज्यादा मात्रा में प्रोटीन? जानिये दोनों में अंतर

अंकुरित चने और भुने चने में अंतर: भारतीय आहार का एक सस्ता और पौष्टिक स्रोत है, जो प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है. लोग इसे अलग‑अलग तरीकों से खाते हैं, भुना हुआ चना और अंकुरित (स्प्राउटेड) चना सबसे आम रूप हैं. लेकिन सवाल यह है कि इन दोनों में से किसमें ज्यादा प्रोटीन होता है और कौन ज्यादा फायदेमंद है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं. प्रोटीन की मात्रा में अंतरसामान्य तौर पर देखा जाए, तो भुने हुए चने और अंकुरित चने दोनों में प्रोटीन अच्छी मात्रा में होता है,चलिये जानते हैं. भुना हुआ चना: इसमें प्रोटीन की मात्रा थोड़ी अधिक होती है, क्योंकि इसमें पानी नहीं होता और पोषक तत्व सघन (concentrated) रूप में रहते हैं. अंकुरित चना: अंकुरण के दौरान चने में पानी की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे प्रोटीन का प्रतिशत थोड़ा कम दिखाई देता है, लेकिन उसकी गुणवत्ता और पचने की क्षमता बेहतर हो जाती है. यानी, मात्रा के हिसाब से भुने चने में प्रोटीन थोड़ा ज्यादा होता है, लेकिन शरीर के लिए उपयोग (absorption) के हिसाब से अंकुरित चना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. अंकुरित चने के फायदेप्रोटीन आसानी से पचता है.विटामिन C और B की मात्रा बढ़ जाती है.एंजाइम्स एक्टिव हो जाते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाते हैं.वजन घटाने और फिटनेस के लिए अच्छा. अंकुरित चना शरीर को ज्यादा पोषण देता है और हल्का भी होता है. भुने चने के फायदेलंबे समय तक ऊर्जा देते हैं.फाइबर भरपूर, जिससे भूख कम लगती है.यात्रा या स्नैक के लिए सुविधाजनक.जल्दी खराब नहीं होते. भुना चना एक अच्छा और हेल्दी स्नैक है, खासकर जब जल्द ऊर्जा चाहिए हो. कौन सा बेहतर है?ज्यादा प्रोटीन मात्रा के लिए: भुना चनाबेहतर पाचन और पोषण के लिए: अंकुरित चना निष्कर्षभुने हुए और अंकुरित, दोनों तरह के चने अपने‑अपने तरीके से फायदेमंद हैं. अगर आप ज्यादा प्रोटीन की मात्रा चाहते हैं, तो भुना चना अच्छा विकल्प है. लेकिन अगर आप शरीर को ज्यादा पौष्टिक और आसानी से पचने वाला प्रोटीन देना चाहते हैं, तो अंकुरित चना बेहतर है.
प्लैटिनम पर आयात शुल्क दोगुना:डीजल, हाइब्रिड कारों के दाम 18 हजार रुपए तक बढ़ सकते हैं

देश में डीजल एसयूवी और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारें खरीदना महंगा पड़ेगा। प्लैटिनम पर प्रभावी आयात शुल्क 6.4% से बढ़कर 15.4% होना इसकी वजह है। इसका असर उन गाड़ियों पर होगा, जिनमें प्रदूषण नियंत्रण के लिए कीमती मेटल इस्तेमाल होते हैं। ऑटो कंपनियां बढ़ी लागत का बोझ सीधे ग्राहकों पर डाल सकती हैं। इससे मिड-साइज डीजल एसयूवी के दाम 12 हजार और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों की कीमतें 18 हजार तक बढ़ सकती हैं। एंट्री-लेवल पेट्रोल कारें भी 4 हजार तक महंगी हो सकती हैं। प्लैटिनम का इस्तेमाल गाड़ियों में बीएस-6 मानक पूरा करने के लिए होता है। नीति आयोग के पूर्व निदेशक रणधीर सिंह के मुताबिक, प्लैटिनम पर ड्यूटी बढ़ने से प्रदूषण नियमों के पालन की लागत बढ़ जाएगी। टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां सबसे अधिक प्रभावित होंगी। स्कॉर्पियो-एन, थार, एक्सयूवी-700 जैसे मॉडलों पर महिंद्रा का खर्च बढ़ेगा। टोयोटा और मारुति की स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों की लागत भी बढ़ेगी। हाइब्रिड गाड़ियों में इंजन बार-बार स्टार्ट होता है। इनके फिल्टर में ज्यादा प्लैटिनम लगता है। भारी वाहनों में प्लैटिनम की खपत ज्यादा होती है इंजन में प्रदूषण रोकने के लिए प्लैटिनम का इस्तेमाल होता है। भारी वाहनों में इसकी मात्रा अधिक होने से उनकी निर्माण लागत पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। वाहन की कैटेगरी – प्लैटिनम की खपत कमर्शियल वाहन – 20+ हाइब्रिड कारें – 10-15 मंझौली डीजल एसयूवी – 6-10 पेट्रोल कारें – 2-4 (आंकड़े ग्राम में) राहत – पुराने साइलेंसर से निकलेगा सस्ता प्लैटिनम साइलेंसर फिल्टर के लिए विदेशी प्लैटिनम पर 7.5% टैक्स ही लगेगा। सरकार ने अब विदेश से पुराने और खराब फिल्टर मंगाने पर टैक्स घटाकर 4.35% कर दिया है। इससे खराब साइलेंसर से प्लैटिनम निकालकर और उसे दोबारा इस्तेमाल करना सस्ता होगा। इस फैसले से देश में रिसाइकिलिंग को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, प्लैटिनम महंगा होने से वेंडर अब ऑटो कंपनियों से ज्यादा कीमतें वसूलेंगे। असर – ईवी में बढ़ सकती है ग्राहकों की दिलचस्पी प्लैटिनम महंगा होने से इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड बढ़ सकती है। इनमें प्रदूषण नियंत्रण के लिए कैटालिटिक कन्वर्टर्स की जरूरत नहीं होती। कंपनियां हाइड्रोजन तकनीक पर भी फोकस बढ़ा सकती हैं। रिसर्च बढ़ने से भविष्य में ये कारें सस्ती हो सकती हैं। कंपनियां अभी ड्यूटी बढ़ने का असर आंक रही हैं।
जुनैद बोले-आमिर खान का बेटा होने से मिलता है काम:नेपोटिज्म शब्द से परेशानी नहीं, प्रोड्यूसर को फिल्म बेचना है इसलिए हमें चुनते हैं

आमिर खान के बेटे जुनैद खान ने बॉलीवुड में नेपोटिज्म और स्टार किड्स को मिलने वाले फायदों पर खुलकर बात की है। जुनैद की शुरुआती दो फिल्में ‘लव्यापा’ और ‘एक दिन’ बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाईं, लेकिन इसके बावजूद उनके पास काम की कमी नहीं है। जुनैद ने स्वीकार किया कि उन्हें आमिर खान का बेटा होने की वजह से इंडस्ट्री में आसानी से मौके मिल रहे हैं। ‘नेपोटिज्म शब्द से मुझे चिढ़ नहीं होती’ विक्की लालवानी को दिए एक इंटरव्यू में जुनैद ने अपनी प्रिविलेज को माना। उन्होंने कहा, “नेपोटिज्म शब्द मुझे परेशान नहीं करता क्योंकि यह सच है। मुझे आमिर खान का बेटा होने की वजह से बहुत काम मिलता है।” जुनैद का मानना है कि स्टार किड्स दर्शकों के लिए पहले से ही पहचाने हुए चेहरे होते हैं, जिससे प्रोड्यूसर्स के लिए फिल्म को मार्केट करना और बेचना आसान हो जाता है। प्रोड्यूसर्स को माल बेचना है, टैलेंट बाद में आता है कास्टिंग के मुद्दे पर बात करते हुए जुनैद ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में टैलेंट से ज्यादा मार्केटबिलिटी (बिकने की क्षमता) को अहमियत दी जाती है। उन्होंने बताया, “प्रोड्यूसर्स को अपनी फिल्में बेचनी होती हैं, इसलिए वे ऐसे किसी व्यक्ति को काम पर रखेंगे जिसे वे आसानी से बेच सकें।” उनके मुताबिक, कई बार मेकर्स यह नहीं देखते कि रोल के लिए बेस्ट एक्टर कौन है, बल्कि यह देखते हैं कि किसका चेहरा फिल्म को कमर्शियल फायदा पहुंचा सकता है। 2 फ्लॉप के बाद बोले- ‘सर काम करने दीजिए’ अपनी फिल्मों की असफलता पर जुनैद ने मजाकिया अंदाज में कहा, “सर, अभी 2 फ्लॉप के बाद भी काम मिल रहा है, तो प्लीज मुझे काम करने दीजिए।” फिल्म ‘एक दिन’ के प्रदर्शन पर बात करते हुए उन्होंने माना कि पूरी टीम को इस फिल्म से बेहतर उम्मीदें थीं। फिल्म में उनके साथ साई पल्लवी थीं और इसे आमिर खान के बैनर तले ही बनाया गया था। जुनैद ने कहा कि उन्हें पर्सनली फिल्म पसंद आई थी, लेकिन वह बड़े दर्शकों से नहीं जुड़ सकी। असफलता पर आमिर का रिएक्शन जुनैद ने यह भी बताया कि उनके पिता आमिर खान फिल्मों की असफलता को कैसे देखते हैं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में दशकों बिताने के बाद भी फ्लॉप फिल्में आमिर को भावनात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। हालांकि, आमिर खुद को काम में व्यस्त रखकर आगे बढ़ना पसंद करते हैं और नई ऊर्जा के साथ अगले प्रोजेक्ट पर ध्यान देते हैं। तमन्ना भाटिया के साथ आएंगे नजर जुनैद खान के भविष्य के प्रोजेक्ट्स की बात करें तो वे जल्द ही ‘रागिनी एमएमएस 3’ में दिखाई देंगे। इस फिल्म में उनके साथ तमन्ना भाटिया लीड रोल में हैं। हालांकि फिल्म की कहानी और रिलीज डेट को लेकर अभी ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है।
SIR Voter List Revision Phase 3 Update; Election Commission

Hindi News National SIR Voter List Revision Phase 3 Update; Election Commission | States UTs नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक चुनाव आयोग ने गुरुवार को स्पेशल इंटेशिव रिवीजन (SIR) के तीसरे फेज की घोषणा की है। इस चरण के तहत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में करोड़ों मतदाताओं का घर-घर जाकर वेरिफिकेशन किया जाएगा। चुनाव आयोग के अनुसार तीसरे फेज में 36.73 करोड़ मतदाताओं का वेरिफिकेशन होगा। इस प्रक्रिया में 3.94 लाख बूथ लेवल अधिकारी (BLO) तैनात होंगे। BLO की मदद के लिए राजनीतिक पार्टियों की तरफ नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी शामिल रहेंगे। यह खबर लगातार अपडेट की जा रही है… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
SIR Voter List Revision Phase 3 Update; Election Commission

Hindi News National SIR Voter List Revision Phase 3 Update; Election Commission | States UTs नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक चुनाव आयोग ने गुरुवार को स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) के तीसरे फेज की घोषणा की है। इस फेज के तहत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन किया जाएगा। 16 राज्यों में हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली (NCT), चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली एवं दमन-दीव शामिल हैं। SIR के तीसरे फेज के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर पूरे देश में SIR प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इन तीनों राज्यों में मौसम और जनगणना के दूसरे चरण को देखते हुए SIR के शेड्यूल की घोषणा बाद में की जाएगी। करीब 4 लाख BLO, 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट तैनात होंगे चुनाव आयोग ने बताया कि तीसरे फेज की SIR प्रक्रिया में 3.94 लाख बूथ लेवल अधिकारी (BLO) तैनात होंगे। BLO की मदद के लिए राजनीतिक पार्टियों की तरफ नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी शामिल रहेंगे। दिल्ली में SIR के बाद फाइनल वोटर लिस्ट 7 अक्टूबर को जारी की जाएगी। चुनाव आयोग ने कहा कि हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बर्फबारी और मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए SIR की तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी। SIR फेज 1-2 : 10 राज्य, 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हुए चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का आदेश दिया था। अब तक 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। पहले फेज में बिहार में SIR हुआ था। दूसरे फेज के तहत 28 अक्टूबर 2025 से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR हुआ। इनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तमिलनाडु, केरल, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप शामिल हुआ। आयोग ने बताया कि SIR के पहले दो फेज में करीब 59 करोड़ मतदाताओं को कवर किया गया था। इस दौरान 6.3 लाख BLO और 9.2 लाख BLA प्रक्रिया में शामिल हुए। SIR प्रक्रिया, 6 सवाल-जवाब में जानें… 1. SIR क्या है? यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें घर-घर जाकर लोगों से फॉर्म भरवाकर वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। 18 साल से ज्यादा के नए वोटरों को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है या जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। नाम, पते में गलतियों को भी ठीक किया जाता है। 2. पहले किस राज्य में हुआ? पहले फेज में बिहार में हुआ। फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर्स हैं। दूसरे फेज के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में SIR की घोषणा हुई। 3. कौन करता है? ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर वोटरों का वेरिफिकेशन करते हैं। 4. SIR में वोटर को क्या करना होगा? SIR के दौरान BLO/BLA वोटर को फॉर्म देंगे। वोटर को उन्हें जानकारी मैच करवानी है। अगर दो जगह वोटर लिस्ट में नाम है तो उसे एक जगह से कटवाना होगा। अगर नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो जुड़वाने के लिए फॉर्म भरना होगा और संबंधित डॉक्यूमेंट्स देने होंगे। 5. SIR के लिए कौन से दस्तावेज मान्य? पेंशनर पहचान पत्र किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र जन्म प्रमाणपत्र पासपोर्ट 10वीं की मार्कशीट स्थायी निवास प्रमाणपत्र वन अधिकार प्रमाणपत्र जाति प्रमाणपत्र राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) में नाम परिवार रजिस्टर में नाम जमीन या मकान आवंटन पत्र आधार कार्ड 6. SIR का मकसद क्या है? 1951 से लेकर 2004 तक का SIR हो गया है, लेकिन पिछले 21 साल से बाकी है। इस लंबे दौर में मतदाता सूची में कई परिवर्तन जरूरी हैं। जैसे लोगों का माइग्रेशन, दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होना। डेथ के बाद भी नाम रहना। विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाने पर हटाना। कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
किसान मोर्चा के नए अध्यक्ष ने वाहन रैली निकाली…नियुक्ति रद्द:18 दिन में ही गया भाजपा नेता का पद; पेट्रोल बचाओ अपील के बाद देश में पहली कार्रवाई

भिंड के भाजपा नेता सज्जन सिंह यादव को 100 से अधिक लग्जरी वाहनों के साथ शहर में प्रवेश करना भारी पड़ गया। नियुक्ति के 18 दिन में ही भाजपा ने उन्हें भिंड जिला भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष पद से हटा दिया है। वे अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद बुधवार शाम को शक्ति प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान शहर का ट्रैफिक बाधित हुआ तो हॉर्न बजाते और नारेबाजी के कारण शोर भी हुआ। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा ने यह कार्रवाई की है। इस मामले में देश में यह पहली कार्रवाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिन में दो बार ईंधन बचाने की अपील कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने अपने काफिले से वाहन कम कर दिए। देश के गृह मंत्री अमित शाह, अन्य विभागों के मंत्रियों, मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं मंत्रियों ने भी काफिले से वाहन कम कर दिए। इसके बाद भी सज्जन सिंह यादव अध्यक्ष बनने के बाद शक्ति प्रदर्शन कर रहे थे। पार्टी ने किया था जवाब तलब मामला सामने आने के बाद भाजपा संगठन ने सज्जन सिंह यादव से चर्चा की। उनसे जवाब तलब किया तो सज्जन सिंह यादव ने पार्टी नेतृत्व को सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी कार्यकर्ता या समर्थक को वाहन लेकर आने के लिए नहीं कहा था। लोग स्वेच्छा से काफिले में शामिल हुए थे और यह पार्टी के प्रति उनका उत्साह व प्रेम था। नियुक्ति रद्द होने के बाद अब कॉल रिसीव नहीं कर रहे दैनिक भास्कर ने जब इस संबंध में सज्जन सिंह यादव से संपर्क करने का प्रयास किया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष देवेंद्र नरवरिया ने कहा कि मामले में सज्जन सिंह यादव से चर्चा की। उनका कहना था कि उन्होंने किसी को काफिले के लिए आमंत्रित नहीं किया था। लोग स्वयं शामिल हुए थे। अनुशासनहीनता पर कार्रवाई की जाएगी जयपाल सिंह चावड़ा ने बताया कि मंगलवार के बाद जहां-जहां से ऐसे मामले सामने आए हैं, वहां की जानकारी लेकर जिम्मेदारों से चर्चा की जा रही है। अभी भिंड का मामला प्रकाश में आया था। इस मामले में भिंड के जिला अध्यक्ष को दायित्व मुक्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जहां भी इस तरह की अनुशासनहीनता सामने आएगी, उनके खिलाफ सख्त निर्णय लिए जाएंगे। इन्होंने भी की अनुशासनहीनता ………………… यह खबर भी पढ़ें सिंगरौली विकास प्राधिकरण अध्यक्ष ई-रिक्शा से बैढ़न पहुंचे: पीछे दौड़ा 200 वाहनों का काफिला सिंगरौली विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल गुरुवार को मोरवा स्थित अपने आवास से ई-रिक्शा में सवार होकर बैढ़न जिला मुख्यालय पहुंचे। उनकी इस यात्रा के पीछे 200 से अधिक वाहनों का लंबा काफिला भी चला। पढ़ें पूरी खबर
धुरंधर के बाद ल्यारी पर आई एक और फिल्म:पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी के फैसलाबाद में सिर्फ 22 टिकट बिके, कई शो कैंसिल

पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। यह फिल्म पाकिस्तान के ल्यारी इलाके पर आधारित थी। गौरतलब है कि ल्यारी का जिक्र भारतीय फिल्म धुरंधर में भी हुआ है, जो सुपरहिट साबित हुई थी। हालांकि, मेरा ल्यारी को बॉक्स ऑफिस पर कमजोर रिस्पॉन्स मिला। फेसबुक पेज ऑल पाकिस्तान शोबिज स्टार्स ने दावा किया कि पाकिस्तान की फिल्म मेरा ल्यारी को खराब शुरुआत के बाद फैसलाबाद के ताज महल सिनेमा से हटा दिया गया है। फिल्म पहले दिन सिर्फ 22 टिकट ही बेच पाई। कम दर्शक आने की वजह से अगले शो भी रद्द कर दिए गए। बता दें कि यह फिल्म धुरंधर और दूसरी फिल्मों को जवाब देने के लिए बनाई गई। फिल्म को कराची के ल्यारी इलाके की कहानी के तौर पर प्रमोट किया गया था। जहां फिल्मों में अक्सर इस इलाके को अपराध और गैंग हिंसा से जोड़कर दिखाया जाता है, वहीं मेरा ल्यारी में समुदाय, खेल और युवाओं की जिंदगी पर फोकस किया गया। महिला फुटबॉल पर आधारित है फिल्म की कहानी यह फिल्म महिला फुटबॉल पर आधारित है। अबू अलीहा के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में आयशा उमर, दनानीर मोबीन, सामिया मुमताज और ट्रिनेट लुकास हैं। फिल्म की कहानी महिला फुटबॉल, कम्युनिटी की एकता और ल्यारी में युवा खिलाड़ियों के सामने आने वाली चुनौतियों पर केंद्रित है। मेकर्स ने फिल्म के जरिए इलाके की एक अच्छी इमेज दिखाने की कोशिश की है। डायरेक्टर अबू अलीहा ने पहले कहा था कि फिल्म की 80 प्रतिशत कास्ट लोकल है, जिसमें फुटबॉल टीमों के सदस्य भी शामिल हैं। फिल्म को सिंध के सूचना मंत्री शरजील इनाम मेमन का भी सपोर्ट मिला।
धुरंधर के बाद ल्यारी पर आई एक और फिल्म:पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी के फैसलाबाद में सिर्फ 22 टिकट बिके, कई शो कैंसिल

पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। यह फिल्म पाकिस्तान के ल्यारी इलाके पर आधारित थी। गौरतलब है कि ल्यारी का जिक्र भारतीय फिल्म धुरंधर में भी हुआ है, जो सुपरहिट साबित हुई थी। हालांकि, मेरा ल्यारी को बॉक्स ऑफिस पर कमजोर रिस्पॉन्स मिला। फेसबुक पेज ऑल पाकिस्तान शोबिज स्टार्स ने दावा किया कि पाकिस्तान की फिल्म मेरा ल्यारी को खराब शुरुआत के बाद फैसलाबाद के ताज महल सिनेमा से हटा दिया गया है। फिल्म पहले दिन सिर्फ 22 टिकट ही बेच पाई। कम दर्शक आने की वजह से अगले शो भी रद्द कर दिए गए। बता दें कि यह फिल्म धुरंधर और दूसरी फिल्मों को जवाब देने के लिए बनाई गई। फिल्म को कराची के ल्यारी इलाके की कहानी के तौर पर प्रमोट किया गया था। जहां फिल्मों में अक्सर इस इलाके को अपराध और गैंग हिंसा से जोड़कर दिखाया जाता है, वहीं मेरा ल्यारी में समुदाय, खेल और युवाओं की जिंदगी पर फोकस किया गया। महिला फुटबॉल पर आधारित है फिल्म की कहानी यह फिल्म महिला फुटबॉल पर आधारित है। अबू अलीहा के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में आयशा उमर, दनानीर मोबीन, सामिया मुमताज और ट्रिनेट लुकास हैं। फिल्म की कहानी महिला फुटबॉल, कम्युनिटी की एकता और ल्यारी में युवा खिलाड़ियों के सामने आने वाली चुनौतियों पर केंद्रित है। मेकर्स ने फिल्म के जरिए इलाके की एक अच्छी इमेज दिखाने की कोशिश की है। डायरेक्टर अबू अलीहा ने पहले कहा था कि फिल्म की 80 प्रतिशत कास्ट लोकल है, जिसमें फुटबॉल टीमों के सदस्य भी शामिल हैं। फिल्म को सिंध के सूचना मंत्री शरजील इनाम मेमन का भी सपोर्ट मिला।
लौकी का जूस सेहत के लिये है बहुत ही फायदेमंद, जानिये इसे झटपट बनाने का तरीका

लौकी (घिया) को आमतौर पर एक साधारण सब्जी माना जाता है, लेकिन इसका जूस सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है. खास तौर पर गर्मियों में लौकी का जूस शरीर को ठंडक देने और कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है. इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है और यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है. लौकी का जूस कैसे बनाएंलौकी का जूस बनाना बहुत आसान है. ताजी और हरी लौकी लें.उसे छीलकर छोटे टुकड़ों में काट लें.मिक्सर में थोड़ा पानी डालकर पीस लें.छानकर इसमें थोड़ा नींबू और काला नमक मिला सकते हैं. ध्यान रखें कि लौकी कड़वी न हो, वरना जूस पीना नुकसानदायक हो सकता है. लौकी का जूस पीने के फायदे 1. शरीर को ठंडक देता हैलौकी में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने और लू से बचाने में मदद करती है. 2. वजन घटाने में सहायकलौकी का जूस कम कैलोरी वाला होता है और पेट को लंबे समय तक भरा रखता है.इससे ज्यादा खाने की आदत कम होती है और वजन नियंत्रित रहता है. 3. पाचन को बेहतर बनाता हैइसमें मौजूद फाइबर पाचन को सुधारता है और कब्ज, गैस जैसी समस्याओं से राहत देता है. 4. दिल के लिए फायदेमंदलौकी का जूस कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने में मदद करता है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है. 5. ब्लड प्रेशर को संतुलित करता हैलौकी में पोटैशियम होता है, जो हाई बीपी को नियंत्रित करने में मददगार है. 6. त्वचा को निखारता हैयह शरीर को डिटॉक्स करता है, जिससे त्वचा साफ और चमकदार बनती है. जरूरी सावधानियांहमेशा ताजी और मीठी लौकी का ही जूस बनाएं.अगर लौकी कड़वी लगे तो उसे बिल्कुल न पिएं.खाली पेट ज्यादा मात्रा में सेवन न करें.दिन में 1 गिलास से ज्यादा न लें. निष्कर्षलौकी का जूस एक प्राकृतिक और हेल्दी ड्रिंक है, जो शरीर को ठंडक देने के साथ‑साथ कई स्वास्थ्य लाभ देता है. अगर इसे सही तरीके से और सीमित मात्रा में पिया जाए, तो यह गर्मियों में आपके लिए एक बेहतरीन हेल्थ ड्रिंक साबित हो सकता.







