Mamata Banerjee TMC Vs BJP; West Bengal Post Poll Violence Case

Hindi News National Mamata Banerjee TMC Vs BJP; West Bengal Post Poll Violence Case | Calcutta HC कोलकताकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस चीफ ममता बनर्जी एक बार फिर काला कोट पहनकर कोर्ट में दलीलें देने पहुंची। ममता गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पाल और जस्टिस पार्थसारथी सेन के सामने पेश हुईं। मामला हाल के राज्य विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद हुई चुनावी हिंसा से जुड़ी जनहित याचिका का था। सुनवाई के दौरान ममता ने कोर्ट को बताया कि राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। इसमें बुलडोजर एक्शन भी शामिल है। पुलिस FIR दर्ज करने की परमिशन नहीं दे रही है। उन्होंने TMC कार्यकर्ताओं पर हमले, आगजनी और हत्याओं के आरोप लगाते हुए कोर्ट से सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की। इधर, सुनवाई के बाद जब ममता कोर्ट रूम से बाहर निकलीं, तो गलियारों में मौजूद वकीलों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। ये सभी ममता को देखकर बुआ चोर-भतीजे चोर के नारे लगाने लगे। हाईकोर्ट में एडवोकेट ममता की तस्वीर… कोर्ट रूम में वकीलों के बीच बैठीं ममता बनर्जी, वे अपनी सिग्नेचर व्हाइट साड़ी पर काला कोट पहने नजर आईं। याचिका में दावा- TMC कार्यकर्ता घर छोड़ने मजबूर याचिका उत्तरपारा विधानसभा क्षेत्र से हारे हुए उम्मीदवार शिर्षान्या बंद्योपाध्याय ने दायर की थी। 12 मई को दायर की गई जनहित याचिका में पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा का आरोप लगाया गया है। साथ ही दावा किया गया है कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े होने के कारण कई लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट में भी दलीलें रख चुकी हैं ममता सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले पर सुनवाई की थी, जहां तब बंगाल की मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी ने भीं दलीलें रखीं थीं। कोर्ट रूम में ममता ने 13 मिनट तक अपनी बात रखी। बेंच के सामने हाथ जोड़कर खड़ी ममता ने कहा कि हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री ने कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखीं थीं। मुकदमों में आमतौर पर मुख्यमंत्रियों के वकील या सलाहकार ही पेश होते हैं। पढ़ें पूरी खबर… ममता के पास LLB की डिग्री, HC एडवोकेट बनकर करियर शुरू किया था ममता के इलेक्शन एफिडेविट के अनुसार, उन्होंने 1979 में कोलकाता यूनिवर्सिटी से MA करने के बाद, जोगेश चंद्र चौधरी कॉलेज (कोलकाता) में LLB कोर्स में एडमिशन लिया था। 1982 में उनका LLB पूरा हो गया था। ममता ने 1980 के दशक में कलकत्ता हाई कोर्ट में एक वकील के रूप में प्रैक्टिस की थी। उनका यह करियर लंबे समय तक नहीं चला, क्योंकि इसी दौरान वे पूरी तरह सक्रिय राजनीति में उतर गईं। ममता बनर्जी सीनियर या लंबे समय तक प्रैक्टिस करने वाली अधिवक्ता नहीं रहीं। लेकिन वे कानून ग्रेजुएट हैं और कोर्ट की कार्यप्रणाली और संवैधानिक प्रक्रियाओं की समझ रखती हैं। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… बंगाल में गायें काटने पर रोक, सार्वजनिक बूचड़खाने भी बंद, सुवेंदु सरकार 75 साल पुराना कानून लाई पश्चिम बंगाल की BJP सरकार ने राज्य में गाएं काटने पर रोक लगा दी है। CM सुवेंदु ने 1950 के बंगाल कानून और 2018 के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए एक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में यह कहा गया है कि बिना ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ के किसी भी मवेशी-भैंस की हत्या पूरी तरह से प्रतिबंध है। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
काला कोट पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी:चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े मामले में पैरवी की; बाहर निकलीं तो चोर-चोर के नारे लगे

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस चीफ ममता बनर्जी एक बार फिर काला कोट पहनकर कोर्ट में दलीलें देने पहुंची। ममता गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पाल के सामने पेश हुईं। मामला 2026 के राज्य विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद हुई चुनावी हिंसा से जुड़ी जनहित याचिका का था। सुनवाई के दौरान ममता ने कोर्ट को बताया कि राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। इसमें बुलडोजर एक्शन भी शामिल है। पुलिस FIR दर्ज करने की परमिशन नहीं दे रही है। इधर, सुनवाई के बाद जब ममता कोर्ट रूम से बाहर निकलीं, तो गलियारों में मौजूद वकीलों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। ये सभी ममता को देखकर चोर-चोर के नारे लगाने लगे। सुप्रीम कोर्ट में भी दलीलें रख चुकी हैं ममता सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले पर सुनवाई की थी, जहां तब बंगाल की मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी ने भीं दलीलें रखीं थीं। कोर्ट रूम में ममता ने 13 मिनट तक अपनी बात रखी। बेंच के सामने हाथ जोड़कर खड़ी ममता ने कहा कि हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री ने कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखीं थीं। मुकदमों में आमतौर पर मुख्यमंत्रियों के वकील या सलाहकार ही पेश होते हैं। पढ़ें पूरी खबर…
BJP Vs Rahul Gandhi Foreign Trips Funding; Sambit Patra Congress

Hindi News National BJP Vs Rahul Gandhi Foreign Trips Funding; Sambit Patra Congress | Political News नई दिल्ली37 मिनट पहले कॉपी लिंक राहुल 2025 में 17 दिसंबर से 20 दिसंबर तक जर्मनी गए थे। इस दौरान उन्होंने BMW मुख्यालय का दौरा किया था। भाजपा ने लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाया। गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने कहा- राहुल गांधी ने पिछले 22 साल में 54 विदेश यात्राएं की हैं। सितंबर 2025 में सीक्रेट यात्राएं भी की हैं। उन्होंने दावा किया कि हर विदेश दौरे में राहुल के साथ 3-4 लोग भी जाते थे। इन यात्राओं पर कुल खर्च करीब ₹60 करोड़ बैठता है। राहुल के हलफनामे के मुताबिक पिछले 10 साल में उनकी घोषित आय ₹11 करोड़ रही, तो इन यात्राओं का खर्च किसने उठाया, किसने फंडिंग की? राहुल फंडिंग का सोर्स बताएं। वियतनाम यात्रा पर भी सवाल उठाया इसी साल जनवरी में भाजपा ने दावा किया था कि राहुल वियतनाम दौरे पर गए हैं। आरोप लगाया था कि राहुल वियतनाम में भारत विरोधी लोगों के मेहमान बनकर देश के खिलाफ बोलेंगे। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा था कि राहुल विदेश जाकर भारत के खिलाफ जहर उगलने का काम करते हैं। उन्होंने कांग्रेस से मांग की कि यह साफ किया जाए कि राहुल गांधी को विदेशों में कौन लोग और किन मकसदों से आमंत्रित करते हैं। त्रिवेदी ने सवाल उठाया था कि जब कांग्रेस शासित राज्यों में भी राहुल गांधी को औपचारिक तौर पर बुलावा नहीं मिलता, तो विदेशों में उन्हें कौन और क्यों आमंत्रित करता है। भाजपा के इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राहुल की 2025 की विदेश यात्राएं… 17 दिसंबर से 20 दिसंबर- राहुल गांधी प्रोग्रेसिव अलायंस के आमंत्रण पर तीन दिन के दौरे पर 17 दिसंबर को जर्मनी पहुंचे थे। 25 जून से 6 जुलाई 2025: 2025 के मध्य में राहुल गांधी लंदन भी यात्रा पर रहे। सुरक्षा एजेंसियों के लेटर में यह विवरण आया है। 4 से 8 सितंबर 2025: इस दौरान उन्होंने मलेशिया का दौरा किया था। सितंबर 2025: राहुल दक्षिण अमेरिका के ब्राजील, कोलंबिया समेत चार देशों के दौरे पर रहे। इसमें छात्रों, व्यापारियों और नेताओं से बातचीत की थी। राहुल गांधी की यह तस्वीर सितंबर में सामने आई थी, जिसे लेकर दावा किया गया था कि वोटर अधिकार यात्रा के बाद वे सिंगापुर में छुटि्टयां मनाने गए थे। जून 2024 में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद राहुल के विदेश में 4 विवादित बयान 18 दिसंबर जर्मनी में कहा- BJP संविधान खत्म करने की साजिश रच रही राहुल गांधी ने 18 दिसंबर को जर्मनी में बीजेपी पर भारतीय संविधान को खत्म करने की साजिश रचने का आरोप लगाया था। राहुल ने कहा- बीजेपी संविधान की उस मूल भावना को खत्म करना चाहती है, जो सभी नागरिकों को समान अधिकार देती है। पूरी खबर पढ़ें… 2 अक्टूबरः कोलंबिया में कहा- RSS और भाजपा की विचारधारा में कायरता राहुल ने 2 अक्टूबर को कोलंबिया की EIA यूनिवर्सिटी में ‘द फ्यूचर इज टुडे’ कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने कहा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा की विचारधारा के मूल में कायरता है।’ इसके लिए उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर के 2023 में चीन को लेकर दिए बयान का हवाला दिया। पूरी खबर पढ़ें… 21 अप्रैलः अमेरिका में कहा- महाराष्ट्र चुनाव में गड़बड़ी साफ दिख रही राहुल गांधी ने 21 अप्रैल को अमेरिका के बॉस्टन में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव पर सवाल उठाए। उन्होंने भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह पूरी तरह साफ है कि भारतीय चुनाव आयोग समझौता कर चुका है। इस सिस्टम में कुछ गड़बड़ी है। पूरी खबर पढ़ें… 9 सितंबर 2024ः अमेरिका में कहा- सब कुछ मेड इन चाइना राहुल गांधी विपक्ष के नेता के तौर पर पहली बार विदेश दौरे पर थे। उन्होंने 9 सितंबर को अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के छात्रों से भारतीय राजनीति, इकोनॉमी और भारत जोड़ो यात्रा समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। राहुल ने कहा, “भारत में सब मेड इन चाइना है। चीन ने प्रोडक्शन पर ध्यान दिया है इसलिए चीन में रोजगार की दिक्कतें नहीं हैं।” राहुल गांधी ने 9 सितंबर 2024 को यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में कहा कि खुद के आइडिया को खत्म कर लोगों के बारे में सोचना ही देवता होना होता है। नेता प्रतिपक्ष बनने से पहले की विदेशी यात्राएं जो विवादित रहीं… मई 2022- राहुल गांधी ब्रिटेन के दौरे पर थे। उन्होंने CBI और ED का हवाला देते हुए भारत सरकार की तुलना पाकिस्तान सरकार से की थी। BJP ने राहुल पर विदेश में जाकर भारत को बदनाम करने का आरोप लगाया दिसंबर 2020- राहुल गांधी नानी से मिलने इटली गए थे। 28 दिसंबर को हर साल कांग्रेस का स्थापना दिवस मनाया जाता है। इसमें वे शामिल नहीं हुए। इस पर विवाद हुआ। कुछ महीने बाद पंजाब, गोवा, उत्तराखंड, मणिपुर और यूपी में चुनाव हुए। इसमें कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। इसके बाद कई कांग्रेस नेताओं ने इसे राहुल के विदेशी दौरे से जोड़ा। राहुल पर आरोप लगा कि इटली जाने के लिए उन्होंने पंजाब में रैली को कैंसिल करवा दिया। दिसंबर 2019- भारत में CAA के खिलाफ बड़ा आंदोलन चल रहा था। राहुल गांधी तब दक्षिण कोरिया चले गए थे। उनकी इस यात्रा को लेकर कई कांग्रेसी नेताओं ने भी सवाल उठाए थे। अक्टूबर 2019- हरियाणा और महाराष्ट्र में होने वाले चुनाव से सिर्फ 15 दिन पहले राहुल गांधी कंबोडिया चले गए। BJP ने कहा कि राहुल गांधी पर्सनल टूर पर बैंकॉक गए हैं। वहीं, कांग्रेस ने कहा कि वे मेडिटेशन के लिए कम्बोडिया गए हैं। ……………………… यह खबर भी पढ़ें… राहुल बोले- देश चलाना मोदी के बस की बात नहीं: सोना न खरीदें, विदेश न जाएं जैसी 7 अपीलें उपदेश नहीं; नाकामी के सबूत राहुल गांधी ने 11 मई को पश्चिम एशिया में चल रहे संकट से निपटने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की हालिया ‘सात अपीलों’ पर पलटवार किया था। उन्होंने इसे नाकामी करार दिया। कहा कि अब देश चलाना प्रधानमंत्री के बस में नहीं रह गया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को
कैसे कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने केरल का मुख्यमंत्री चुनने में अपना रास्ता अपनाया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:14 मई, 2026, 13:51 IST कई दिनों के गहन विचार-विमर्श के बाद, केरल विधानसभा चुनाव में यूडीएफ की प्रचंड जीत के बाद कांग्रेस ने वीडी सतीसन को सीएम पद के लिए चुना। केरल के मनोनीत मुख्यमंत्री वीडी सतीसन और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी की फ़ाइल छवि। (स्रोत: पीटीआई) केरल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन को नियुक्त करने के कांग्रेस के फैसले ने कांग्रेस के निर्णय लेने में, खासकर वायनाड से सांसद बनने के बाद केरल की राजनीति में, प्रियंका गांधी के बढ़ते प्रभाव को सूक्ष्मता से रेखांकित किया है। कई दिनों के गहन विचार-विमर्श और आंतरिक पैरवी के बाद, कांग्रेस नेतृत्व ने गुरुवार को केरल विधानसभा चुनावों में यूडीएफ की व्यापक जीत के बाद सतीसन को सीएम पद के लिए चुना। यह भी पढ़ें: वीडी सतीसन को केरल का नया मुख्यमंत्री नामित किया गया, कांग्रेस ने 11 दिनों का सस्पेंस खत्म किया जबकि वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल दिल्ली में मजबूत संगठनात्मक समर्थन के साथ एक मजबूत दावेदार बने रहे, कई मीडिया रिपोर्टों ने सुझाव दिया कि प्रियंका गांधी ने यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई कि नेतृत्व अंततः सतीसन की ओर झुका। सतीसन पर प्रियंका के दबाव के पीछे वायनाड फैक्टर? द स्टेट्समैन के अनुसार, प्रियंका गांधी वाड्रा कथित तौर पर अपने वायनाड निर्वाचन क्षेत्र में वीडी सतीसन के समर्थकों के दबाव में थीं, जिन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से उन्हें केरल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त करने का आग्रह करते हुए “ईमेल की बाढ़” भेजी थी। एक संगठित अभियान के हिस्से के रूप में, सतीसन के वायनाड समर्थकों ने उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाने की अपीलों के साथ उनके आधिकारिक ईमेल को भर दिया था। उन्होंने पार्टी के आलाकमान को यह दिखाने के लिए सार्वजनिक प्रदर्शन भी किए थे कि “जिस व्यक्ति ने लड़ाई का नेतृत्व किया” उसे राज्य का नेतृत्व करना चाहिए। कथित तौर पर प्रियंका गांधी केरल में राजनीतिक मूड के बारे में चिंतित थीं, खासकर वायनाड में, जो वह लोकसभा क्षेत्र है जिसका वह वर्तमान में प्रतिनिधित्व करती हैं। यह भी पढ़ें: मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन: कैसे कांग्रेस ने केरल में कर्नाटक दोहराने से इनकार कर दिया? सीएम चेहरे पर सहमति बनाने से पहले कांग्रेस नेतृत्व ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केरल के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की चर्चा की। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, ऐसी ही एक चर्चा के दौरान, प्रियंका ने राहुल गांधी से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को अंतिम रूप देने से पहले केरल में “मौजूदा राजनीतिक माहौल” को ध्यान में रखने का आग्रह किया। जैसे ही सीएम चेहरे पर सस्पेंस जारी रहा, वायनाड में राहुल और प्रियंका को निशाना बनाने वाले पोस्टर सामने आए, जिसमें नेतृत्व को वेणुगोपाल के पक्ष में सतीसन को दरकिनार करने के खिलाफ चेतावनी दी गई, अन्यथा उन्हें “अमेठी जैसा” भाग्य मिलेगा। संदेश में केरल कांग्रेस के कुछ वर्गों के भीतर चिंताओं को दर्शाया गया है कि सतीसन की अनदेखी, जिसे व्यापक रूप से यूडीएफ के एलडीएफ विरोधी अभियान के चेहरे के रूप में देखा जाता है, कैडरों और समर्थकों के बीच नाराजगी पैदा कर सकता है। सतीसन को बढ़त क्यों मिली? 2026 के केरल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को निर्णायक जीत दिलाने के बाद सतीसन ने महत्वपूर्ण राजनीतिक गति के साथ नेतृत्व की दौड़ में प्रवेश किया। यूडीएफ ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें हासिल कीं, जबकि कांग्रेस ने 63 सीटें जीतीं, जो गठबंधन के भीतर सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। यह भी पढ़ें: केरल के गेम ऑफ थ्रोन्स में वीडी सतीसन को मिला ताज लेकिन वेणुगोपाल के पास रही सत्ता विपक्ष के नेता के रूप में, सतीसन ने भ्रष्टाचार के आरोपों, शासन के मुद्दों और कानून-व्यवस्था की चिंताओं पर वाम सरकार पर आक्रामक रूप से निशाना साधा था, जिससे चुनाव से पहले कांग्रेस के राजनीतिक संदेश को तेज करने में मदद मिली। कांग्रेस में बढ़ रहा है प्रियंका का प्रभाव! केरल के मुख्यमंत्री के फैसले ने कांग्रेस के आंतरिक विचार-विमर्श में प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। वायनाड से संसद में प्रवेश करने के बाद से, प्रियंका ने केरल की राजनीति में अधिक प्रत्यक्ष हिस्सेदारी हासिल कर ली है और उन्हें राज्य के राजनीतिक मूड की गहरी समझ रखने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम), भारत, भारत न्यूज़ इंडिया कैसे कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने केरल का मुख्यमंत्री चुनने में अपना रास्ता अपनाया? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)प्रियंका गांधी केरल की राजनीति(टी)वीडी सतीसन मुख्यमंत्री(टी)केरल कांग्रेस नेतृत्व(टी)वायनाड निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति(टी)यूडीएफ की जीत केरल चुनाव(टी)राहुल गांधी प्रियंका प्रभाव(टी)केरल सीएम पद की दौड़(टी)कांग्रेस आंतरिक निर्णय लेना
Body Builder death reason| इंटरनेशनल बॉडीबिल्डर रण सिंह की अचानक मौत, 30 साल की उम्र में बड़े खिताब किए थे नाम, कैसे गई जान

Last Updated:May 14, 2026, 13:50 IST Bodybuilder Ron Singh Death: इंटरनेशनल बॉडीबिल्डर रण सिंह उर्फ सुखविंदर सिंह की अचानक मौत से पूरे शहर में सन्नाटा छा गया है. तांडा होशियारपुर के रण सिंह का निधन 30 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से हुआ है. इन्होंने ऑस्ट्रेलिया में कई खिताब जीते थे. इंटरनेशनल बॉडी बिल्डर रण सिंह का 30 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया है. Bodybuilder Ron Singh Death: मशहूर इंटरनेशनल बॉडीबिल्डर रण सिंह के अचानक निधन की खबर आ रही है. रण सिंह पंजाब के होशियारपुर में तांडा क्षेत्र के रहने वाले थे. महज 30 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग का बड़ा नाम बने सिंह की मौत से परिवार ही नहीं पूरे शहर में शोक छा गया है. रण सिंह का दूसरा नाम सुखविंदर सिंह था. जानकारी के अनुसार रण सिंह का निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ है. तांडा से निकलकर ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में प्रतियोगिताएं जीतने वाले इस बॉडीविल्डर की उम्र सिर्फ 30 साल थी. ऐसे में एक बार फिर यह बहस छिड़ गई है कि इतनी शारीरिक मेहनत और डायटिंग रूटीन से बॉडी बनाने और जिम करने वाले बॉडीबिल्डर को कार्डियक अरेस्ट कैसे हो गया? बता दें कि बॉडीबिल्डर रण सिंह उर्फ सुखविंदर सिंह को मंगलवार दोपहर अचानक दिल का दौरा पड़ा. तुरंत उन्हें अस्पताल जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की लेकिन नहीं बचा सके और निधन हो गया. मात्र 30 साल की उम्र में उनकी इस अचानक मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है. इलाके के चहेते रण सिंह की मौत की खबर फैलते ही उनके घर के बाहर लोग इकठ्ठे हो गए. इस दौरान लोगों ने बताया कि रण सिंह न सिर्फ तांडा बल्कि पूरे होशियारपुर जिले के लिए गौरव का प्रतीक थे. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमाई थी शोहरतरण सिंह ने बॉडीबिल्डिंग के क्षेत्र में अपनी मेहनत और समर्पण से कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था और पदक जीते थे. खासकर ऑस्ट्रेलिया में उन्होंने कई खिताब अपने नाम किए थे, जिससे उनका नाम देश-विदेश में चर्चा में रहा. वे युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत थे. जिम में घंटों कड़ी मेहनत करते और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देते थे. परिवार में पसरा मातमरण सिंह अपने पीछे बूढ़े माता-पिता, पत्नी और सिर्फ दो साल की छोटी बेटी छोड़कर गए हैं. वे अपने परिवार के इकलौते सहारे थे. उनकी अचानक मौत से पूरा परिवार टूट गया है. छोटी सी बच्ची अभी अपने पिता के चले जाने का मतलब भी नहीं समझ पा रही है. पहली घटना नहीं ये.. बता दें कि जिम में मेहनत करने के बाद हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट की ये पहली घटना नहीं है. आए दिन ऐसे मामले आते हैं जब रोजाना शारीरिक मेहनत करने के बावजूद लोगों को कार्डियक अरेस्ट हो रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारी वजन उठाने वाले एथलीट्स को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए, क्योंकि अत्यधिक व्यायाम और सप्लीमेंट्स के कारण हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
बीजेपी की नई टीम:नबीन के नेतृत्व में बीजेपी में बड़े बदलाव की तैयारी, मिलेनियल नेताओं को मिल सकता है बड़ा रोल

भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने सोमनाथ नबीन के साथ ही पार्टी में बड़े पैमाने पर बदलाव की चर्चा तेज हो गई थी। 45 साल की उम्र में उन्होंने मोहम्मद मोहम्मद का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हें “मिलेनियल नेता” और पार्टी का “बॉस” बताते हैं। माना जा रहा है कि नवीन की नई टीम के अनुभवी नेता और उभरते हुए युवा राहुल का मिश्रण होगा, जिसका लक्ष्य भाजपा के राष्ट्रीय सम्मेलन को अगले चरण तक ले जाना है। अब चर्चा ये है कि बीजेपी में जल्द ही संगठन में बदलाव होंगे। अब देखिए ये होगी बीजेपी की टीम मिलेनियल में कौन कौन शामिल होता है। नवीन का राजनीतिक सफर खुद भाजपा की नई रणनीति का संकेत माना जा रहा है। बिहार सरकार में घटक दल और शहर विकास मंत्री बने रहने के बाद भी उनके संगठन में शीर्ष भूमिका ऑनलाइन तक बनी रही, इस बात का उदाहरण यह है कि भाजपा और औद्योगिक अनुभव को साथ लेकर चलना पसंद है। इससे पहले राजनाथ सिंह और अमित शाह भी संगठन और सरकार के बीच अहम भूमिका निभा रहे हैं। आधिकारिक तौर पर कहा गया है, केंद्र में कुख्यात कैदियों और नई राष्ट्रीय टीम का गठन 2027 के चुनाव की तैयारी का हिस्सा है। पार्टी सात राज्यों में चुनाव से पहले बेंचमार्क बैलेंस, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और नए नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रही है। और पढ़ें: बिहार के नए मॉडल पर बनी बात! संजय झा और वैलेंटाइन की मुलाकात में क्या हुआ? जेडीयू नेताओं ने खुद बताया मोदी सरकार 3.0 में अविनाशी का स्मारक मोदी सरकार 3.0 के दो साल पूरे होने से पहले ही केंद्र सरकार में बड़े पैमाने पर किसानों की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। राजनीतिक सिद्धांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले कार्यकाल के दौरे में कहा गया है कि आने वाले महीनों में मंत्रिपरिषद में बदलाव संभव है। स्टॉक्स के समर्थित दावे ये जा रहे हैं कि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में नवंबर 2014 में पहली बार सरकार का विस्तार हुआ था, जबकि जुलाई 2016 और सितंबर 2017 में बड़े पैमाने पर प्रचार हुआ था। दूसरे अधिवेशन में जुलाई 2021 में बड़ा विस्तार हुआ और मई 2023 में लोकतंत्र के विभाजन में बदलाव हुआ। ऐसा माना जा रहा है कि मोदी 3.0 के दो साल बाद एक बार फिर से मंत्री परिषद की बहाली हो सकती है। 26 मई को केंद्र में मोदी सरकार के 12 साल पूरे हो जायेंगे, जबकि 9 जून को तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे हो जायेंगे. सचिवालय केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 72 सदस्य हैं, जबकि संवैधानिक रूप से 81 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसके नए अवशेष और कुछ संगीतकारों के प्रोटोटाइप में बदलावों का नवीनीकरण किया गया है। सूत्रों के मुताबिक 2027 चुनाव में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने हाल ही में एबीपी न्यूज से एक्सक्लूसिव बातचीत में भी कहा था, ”बीजेपी के कार्यकर्ता फुल टाइम पॉलिटिक्स करते हैं, 24X7 काम करते हैं,” जिसे पार्टी के कैडर आधारित मान्यता प्राप्त और लगातार विचारधारा की तैयारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। संगठन में युवा नेतृत्व जोर बीजेपी में 2027 के विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करते हुए चुनावी बदलावों की तैयारी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश बिहार और में बौद्ध मठ विस्तार के बाद कई नेताओं के संगठन में शामिल होने के संकेत मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, यूपी, पश्चिम बंगाल और झारखंड के कई नेताओं को नई टीम में जगह मिल सकती है। अगले साल होने वाले चुनाव में कई नेताओं को राज्य प्रभारी बनने का दायित्व मिल सकता है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में नई राष्ट्रीय टीम को लेकर चर्चा अंतिम चरण में घोषित की जा रही है। 20 जनवरी को राष्ट्रपति के पद पर नियुक्तियों के बाद नवीन कांस्टीट्यूशनल पद में बदलाव और प्रमुख पदों पर नियुक्तियां की जा रही हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही नई टीम की घोषणा हो सकती है. पासपोर्ट के मुताबिक, नई टीम में युवा नेताओं की अहम भूमिका हो सकती है. हालांकि आईसीआईसीआई बैलेंस भंडार के लिए अनुभवी नेताओं की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी कई नए राज्यों के ज्वालामुखी शामिल हो सकते हैं, ताकि अलग-अलग राज्यों के नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जा सके। इसके अलावा महिला नेताओं को भी नई टीम में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने के संकेत हैं। राजनीतिक सिद्धांतों का मानना है कि भाजपा संगठन और भारत सरकार में विचारधारा केवल सार्वभौमिक परिवर्तन नहीं, बल्कि लंबे समय की राजनीतिक तैयारी का हिस्सा हैं। पार्टी 2027 में होने वाले महत्वपूर्ण चुनावी चुनावों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपनी रणनीति को नए सिरे से आकार दे रही है। इसके साथ ही बीजेपी अगली पीढ़ी के नेतृत्व की तैयारी पर भी जोर दे रही है। माना जा रहा है कि संगठन और सरकार में बदलाव आने वाले समय में पार्टी की राजनीतिक दिशा, विचारधारा संदेश और नेतृत्व संरचना पर गहरा असर पड़ सकता है। और पढ़ें: भदोही में गरेरे बीजेपी अध्यक्ष पुतिन नबीन को बताया ‘नारी विरोधी’, बोले- जो बिले संकट थे, जनता उनकी वजूद देवता | (टैग्सटूट्रांसलेट)नितिन नबीन(टी)बीजेपी नेतृत्व(टी)बीजेपी संगठन(टी)मोदी 3.0(टी)नितिन नबीन बीजेपी(टी)बीजेपी के नए अध्यक्ष(टी)बीजेपी संगठनात्मक परिवर्तन(टी)मोदी 3.0 कैबिनेट फेरबदल(टी)बीजेपी युवा नेतृत्व(टी)बीजेपी की राष्ट्रीय टीम(टी)बीजेपी 2027 रणनीति(टी)नितिन नबीन सहस्राब्दी नेता(टी)बीजेपी पीढ़ीगत बदलाव(टी)नरेंद्र मोदी बीजेपी(टी)अमित शाह(टी)राजनाथ सिंह(टी)बीजेपी चुनाव रणनीति(टी)बीजेपी नेतृत्व परिवर्तन(टी)नितिन नबीन(टी)बीजेपी(टी)अमित शाह(टी)राजनाथ सिंह
अमिताभ बच्चन 83 साल की उम्र में कैसे रहते हैं इतने एक्टिव और फिट? हर दिन करते हैं ये काम, खुद बताया ये सीक्रेट

Last Updated:May 14, 2026, 13:40 IST Amitabh Bachchan fitness secret: 83 साल की उम्र में आज भी बॉलीवुड के शंहशाह अमिताभ बच्चन हर यंग एक्टर को अपनी फिटनेस से टक्कर दे सकते हैं. वे इस उम्र में भी लगातार काम कर रहे हैं. बड़े पर्दे से लेकर छोटे पर्दे पर एक्टिव हैं. आखिर कहां से लाते हैं बिग बी इतनी एनर्जी. कैसे रहते हैं वे इतने मेंटली और फिजिकली हैप्पी, कूल, हेल्दी और स्ट्रेस रहित? अमिताभ बच्चन का फिटनेस सीक्रेट जानकर आपको जरूर हैरानी होगी अमिताभ बच्चन के फिट रहने का मंत्र. PC: instagram/amitabhbachchan 83 साल की उम्र में भी बॉलीवुड के शहंशाह, बिग बी, एंग्री यंग मैन जैसे नामों से मशहूर एक्टर अमिताभ बच्चन अपने काम के प्रति काफी डेडिकेटेड रहते हैं. इस उम्र में भी वे लगातार एक्टिंग और होस्टिंग में एक्टिंग हैं. उनके फिटनेस, एनर्जी के सामने तो यंग एक्टर भी फेल हो जाएं. आखिर किस तरह से अमिताभ बच्चन इस उम्र में भी इतने स्वस्थ, फिट रखते हैं? क्या है उनकी फिटनेस का राज? अमिताभ बच्चन के फिटनेस के राज का खुलासा किया है आयुष मंत्रालय ने. दरअसल, कुछ दिनों पहले आयुष मंत्रालय ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पुराना वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें अमिताभ बच्चन अपनी सेहत और फिट रहने के बारे में बताते नजर आ रहे हैं. चलिए जानते हैं यहां अमिताभ बच्चन के फिटनेस का राज क्या है? अमिताभ बच्चन ने खुद बताया फिट रहने का मंत्र आयुष मंत्रालय ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर अमिताभ बच्चन का एक पुराना वीडियो शेयर किया है. मौका है विश्व योग दिवस को बढ़ावा देना. हर साल 21 जून का दुनिया भर में योग दिवस सेलिब्रेट किया जाता है. ऐसे में 83 वर्ष की उम्र में इतने फिट और एक्टिव रहने वाले अमिताभ बच्चन से बेहतर कोई और उदाहरण नहीं हो सकता था. वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा गया कि अमिताभ बच्चन की यह प्रेरणा लोगों को योग के प्रति जागरूक और उत्साहित कर सकती है. साथ ही यह भी बताया गया कि अभिनेता ने अपने स्वस्थ और संतुलित जीवन का राज योग को माना है. अमिताभ बच्चन ने कहा, मैं रोज योग करता हूं वीडियो में अमिताभ बच्चन कहते नजर आ रहे हैं कि वह प्रतिदिन योग करते हैं. इससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं. उनके अनुसार, योग ने उनके जीवन को बेहतर और समृद्ध बनाया है. बिग बी ने इस वीडियो में अपने फैंस को भी योग करने की सलाह दी. इसे रेगुलर प्रैक्टिस करने से जीवन को पूरी एनर्जी और क्षमता के साथ आप जी सकते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि योग हमेशा सही मार्गदर्शन और विशेषज्ञ की सलाह के साथ करना चाहिए. View this post on Instagram
कमजोरी, कब्ज और बढ़ते वजन से परेशान? ये कच्चा फल कर सकता है मदद, जानिए इस्तेमाल का तरीका

Last Updated:May 14, 2026, 13:34 IST अंजीर को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद फल माना जाता है. इसे ताजा और सूखे दोनों रूपों में खाया जाता है. आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और फाइबर से भरपूर अंजीर पाचन सुधारने, हड्डियां मजबूत करने, वजन नियंत्रित रखने और शरीर को ऊर्जा देने में मदद करता है. आयुर्वेद में भी अंजीर को कई स्वास्थ्य लाभों के लिए उपयोगी बताया गया है. अंजीर में मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. इसके सेवन से त्वचा में निखार आता है और शरीर को अंदर से पोषण मिलता है. वहीं, बालों को मजबूत बनाने और झड़ने की समस्या को कम करने में भी इसे सहायक माना जाता है. कई लोग अंजीर का फेस पैक भी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसका सबसे ज्यादा फायदा संतुलित खानपान के साथ नियमित सेवन करने पर मिलता है. डॉक्टर संतोष आगे बताते हैं कि कच्चे अंजीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. बढ़ती उम्र में हड्डियों की कमजोरी और जोड़ों के दर्द से बचाव के लिए इसका सेवन लाभकारी माना जाता है. बच्चों के शारीरिक विकास में भी यह काफी सहायक होता है. नियमित रूप से कच्चा अंजीर खाने से हड्डियां मजबूत बनी रहती हैं. अंजीर में आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिसकी वजह से यह शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है. अगर किसी को कमजोरी या खून की कमी की समस्या रहती है, तो उसके लिए अंजीर बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसे कच्चा खाने से शरीर को अधिक लाभ मिल सकता है. महिलाओं के लिए भी इसका सेवन काफी लाभकारी बताया जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google कच्ची अंजीर खाने का तरीका बेहद आसान है. इसे पेड़ से तोड़कर सीधे भी खाया जा सकता है. वहीं, अगर अंजीर सूख गई हो तो उसे रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाना फायदेमंद माना जाता है. अंजीर को दूध, दलिया, सलाद और मिठाइयों के साथ मिलाकर भी खाया जा सकता है. जिन लोगों का वजन अधिक होता है और वे वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए कच्ची अंजीर एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है. इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है. कच्ची अंजीर का सीमित मात्रा में सेवन शरीर को जरूरी पोषण देता है. इसके साथ ही यह अनहेल्दी स्नैक्स खाने की आदत को कम करने में भी मदद कर सकती है. अंजीर एक ऐसा फल है, जिसमें पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. ये तत्व हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. इसके साथ ही अंजीर शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में भी सहायक माना जाता है. अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो कच्चे अंजीर का सेवन फायदेमंद हो सकता है. अंजीर में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिससे पेट की सफाई आसानी से हो जाती है. अगर आपको कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याएं रहती हैं, तो यह फल काफी लाभकारी माना जाता है. सुबह 2-3 अंजीर खाने से पेट साफ रहता है और पाचन बेहतर होता है. यह आंतों को स्वस्थ बनाए रखने में भी मदद करता है. इसका नियमित सेवन करने से शरीर हल्का और ऊर्जा से भरपूर महसूस होता है. राजकीय मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अंजीर एक ऐसा फल है, जिसे ताजा और सूखे दोनों रूपों में खाया जाता है. इसमें फाइबर, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यही वजह है कि इसे सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. गांवों में इसे सूखे मेवे के रूप में भी खाया जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन: कैसे कांग्रेस कैडर नेतृत्व पर हावी रहा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:14 मई, 2026, 13:23 IST पार्टी सूत्रों के मुताबिक, केसी वेणुगोपाल को शीर्ष पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था. वीडी सतीसन ने केरल के नए मुख्यमंत्री की घोषणा की केरल के मुख्यमंत्री पद की दौड़: केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को भारी जीत हासिल होने के दस दिन बाद, गुरुवार को सबसे पुरानी पार्टी ने सस्पेंस खत्म कर दिया और वरिष्ठ नेता वीडी सतीसन को केरल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में नामित किया। केरल की एआईसीसी प्रभारी दीपा दासमुंशी और राज्य के लिए पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों अजय माकन और मुकुल वासनिक ने एक संवाददाता सम्मेलन में इस फैसले की घोषणा की। सतीसन ने दो अन्य दावेदारों, एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और पूर्व विपक्षी नेता रमेश चेन्निथला को पछाड़कर शीर्ष पद की दौड़ जीती। और पढ़ें: केसी वेणुगोपाल केरल के सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे थे: 48 घंटों में क्या बदल गया? वेणुगोपाल विधायकों और आलाकमान की लोकप्रिय पसंद होने के बावजूद, पार्टी के फैसले में कैडर प्रबल रहे क्योंकि आलाकमान को यह मानने के लिए मजबूर होना पड़ा कि सतीसन की जमीनी स्तर की मांग को नजरअंदाज करने से राज्य में पार्टी के भविष्य को नुकसान होगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक वेणुगोपाल को शीर्ष पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था. हालाँकि, केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा इस सप्ताह नई दिल्ली में राहुल गांधी के साथ चर्चा के बाद स्थिति बदल गई। सूत्रों ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी को बताया कि जनता की राय और कांग्रेस गठबंधन सहयोगी दोनों सतीसन को अगला मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पार्टी को ऐसे नेता का चयन करने से बचना चाहिए जो विधायक नहीं है, क्योंकि इससे उपचुनाव हो सकते हैं। पहले, सीएनएन-न्यूज18 ने बताया था कि पिछले हफ्ते तिरुवनंतपुरम में पर्यवेक्षकों अजय माकन और मुकुल वासनिक के साथ बैठक के दौरान 63 नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायकों में से 43 ने मुख्यमंत्री पद के लिए वेणुगोपाल का समर्थन किया था। वेणुगोपाल ने इनमें से कई निर्वाचित विधायकों के लिए टिकट हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, और कहा जाता है कि कई लोग व्यक्तिगत रूप से उनके प्रति आभारी महसूस करते थे। लेकिन सतीसन यूडीएफ के विजयी अभियान का चेहरा थे, उन्होंने असामान्य एकजुटता के साथ “टीम यूडीएफ” की कप्तानी की और जब गठबंधन खुद अनिश्चित लग रहा था तो अक्सर स्पष्टता पेश करते थे। और पढ़ें: वीडी सतीसन की कुल संपत्ति क्या है? केरल के नए मुख्यमंत्री के पास 6 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है 2021 से विपक्ष के नेता के रूप में, सतीसन ने लगातार विधानसभा के अंदर और बाहर पिनाराई विजयन सरकार पर कांग्रेस के हमले का नेतृत्व किया। यूडीएफ की 2021 की हार के बाद सतीसन ने सफलतापूर्वक कांग्रेस को एक आक्रामक विपक्षी ताकत के रूप में स्थापित किया। विरोध प्रदर्शनों, विधानसभा हस्तक्षेपों और मुद्दा-आधारित अभियानों के दौरान उनकी दृश्यता ने 2026 के चुनाव से पहले पार्टी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में मदद की। हालाँकि, यूडीएफ में कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, जिसके 22 विधायक हैं, को भी सतीसन का समर्थन करने के लिए कहा गया था। आईयूएमएल नेताओं ने कथित तौर पर कांग्रेस पर्यवेक्षकों से कहा कि मौजूदा विधायक को मुख्यमंत्री के रूप में चुनने से अनावश्यक उपचुनावों से बचने में मदद मिलेगी। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 140 विधानसभा सीटों में से 102 सीटों पर कब्जा कर लिया, जिससे एक दशक के बाद ऐतिहासिक वापसी हुई और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में वीडी सतीसन: कैसे कांग्रेस कैडर नेतृत्व पर हावी रहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल सीएम रेस(टी)वीडी सतीसन केरल(टी)केरल के मुख्यमंत्री(टी)कांग्रेस यूडीएफ की जीत(टी)केरल विधानसभा चुनाव(टी)केसी वेणुगोपाल(टी)रमेश चेन्निथला(टी)इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग
क्रिकेट में पकड़ मजबूत कर रहा जापान:एशियन गेम्स के लिए तैयार किया खास मैदान, रूल बुक साथ लेकर मैच देख रहे लोग

बेसबॉल के दीवाने देश जापान में अब क्रिकेट की आवाज भी सुनाई देने लगी है। नागोया शहर से करीब 40 मिनट दूर बने कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में जब बल्लेबाज ने गेंद को जोरदार छक्का लगाकर मैदान के बाहर रेत और झाड़ियों में पहुंचाया, तो दर्शक तालियां तो बजा रहे थे, लेकिन साथ ही हाथ में नियमों की किताब भी पकड़े हुए थे। उन्हें खेल समझ नहीं आ रहा था, लेकिन रोमांच जरूर महसूस हो रहा था। दरअसल, सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स से पहले जापान में क्रिकेट को लेकर माहौल बनना शुरू हो गया है। पहली बार यहां क्रिकेट के लिए खास मैदान तैयार किया गया है। इसी मैदान पर 2028 टी20 वर्ल्ड कप के ईस्ट एशिया-पैसिफिक क्वालिफायर खेले जा रहे हैं। इन मुकाबलों में जापान, वानुआतु, फिजी, समोआ, इंडोनेशिया, फिलीपींस, पापुआ न्यू गिनी, कुक आइलैंड्स और दक्षिण कोरिया जैसी टीमें हिस्सा ले रही हैं। भले ही ये बड़ी क्रिकेट ताकतें न हों, लेकिन जापान के लिए यह टूर्नामेंट किसी बड़े मौके से कम नहीं है। मैदान पर मौजूद 34 साल के स्थानीय निवासी यूया ओकिमासु पत्नी और बच्चों के साथ मैच देखने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने क्रिकेट का नाम पहली बार बच्चों के मशहूर ऑस्ट्रेलियाई कार्टून ‘ब्लूई’ में सुना था। मैच देखते हुए वे नियमों की किताब पलट रहे थे। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, ‘मुझे खेल पूरी तरह समझ नहीं आ रहा, लेकिन देखने में मजेदार लग रहा है।’ करीब 300 लोग जापान और वानुआतु का मुकाबला देखने पहुंचे थे। कई लोग कुर्सियां लगाकर बैठे थे और कमेंटेटर उन्हें आसान भाषा में क्रिकेट के नियम समझा रहा था। एशियन गेम्स के दौरान यहां अस्थाई स्टैंड लगाए जाएंगे, जिससे करीब 2000 दर्शक मैच देख सकेंगे। जापान में खिलाड़ियों की संख्या बढ़ रही है और टोक्यो के आसपास क्रिकेट धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहा है। बेसबॉल के देश जापान में क्रिकेट अभी नया मेहमान है, लेकिन जिस तरह लोग नियमों की किताब लेकर भी मैदान तक पहुंच रहे हैं, उससे साफ है कि यह खेल यहां धीरे-धीरे दिलों में जगह बना रहा है। श्रीलंका के क्यूरेटर तैयार करेंगे मैदान की पिच यह मैदान पहले बेसबॉल का था, इसलिए बाउंड्री लाइन के पास अब भी पिचर का छोटा टीला दिखाई देता है। मैदान की पिच तैयार करने की जिम्मेदारी श्रीलंका के अनुभवी क्यूरेटर असिथा विजयसिंघे के पास है, जो पल्लेकेले इंटरनेशनल स्टेडियम की पिच भी संभालते हैं। आयोजकों का कहना है कि यहां की पिच पाकिस्तान जैसी होगी, जहां गेंद उछाल भी लेगी और स्पिन गेंदबाजों को भी मदद मिलेगी।








