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कुर्सी पर बैठते ही होने लगता है पीठ दर्द? ये 5 आसान एक्सरसाइज आपको बना देंगे फिट

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Last Updated:May 16, 2026, 23:52 IST आजकल लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना पीठ दर्द की सबसे बड़ी वजह बन गया है. गलत पोश्चर, लगातार स्क्रीन देखना और कम शारीरिक गतिविधि के कारण कमर और रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे दर्द और अकड़न महसूस होने लगती है. लेकिन कुछ आसान एक्सरसाइज को रोजाना करने से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है और शरीर को फिट व एक्टिव रखा जा सकता है. ख़बरें फटाफट आजकल लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने की आदत ने पीठ दर्द को एक आम समस्या बना दिया है. खासकर ऑफिस वर्क, लैपटॉप पर लगातार बैठना और गलत पोश्चर के कारण रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे कमर और ऊपरी पीठ में अकड़न और दर्द होने लगता है. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान एक्सरसाइज रोजाना करने से इस दर्द को काफी हद तक कम किया जा सकता है और शरीर को लचीला बनाए रखा जा सकता है. कैट-काउ स्ट्रेच (Cat-Cow Stretch)यह एक्सरसाइज रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है.कैसे करें: हाथ और घुटनों के बल जमीन पर आएं. सांस लेते हुए पीठ को नीचे झुकाएं और सिर ऊपर उठाएं. फिर सांस छोड़ते हुए पीठ को गोल करें और ठुड्डी को अंदर करें. इसे 10 से 15 बार दोहराएं. यह रीढ़ की जकड़न कम करता है. चेयर स्ट्रेच (Chair Stretch)यह एक्सरसाइज सीधे कुर्सी पर बैठकर की जा सकती है.कैसे करें: कुर्सी पर सीधा बैठें, हाथों को ऊपर उठाएं और धीरे-धीरे शरीर को पीछे की ओर झुकाएं. 10 सेकंड रोकें और वापस आएं. यह कमर और कंधों की स्ट्रेचिंग करता है. नी-टू-चेस्ट स्ट्रेच (Knee to Chest Stretch)यह एक्सरसाइज लोअर बैक पेन के लिए बहुत असरदार है.कैसे करें: पीठ के बल लेट जाएं, एक घुटने को पकड़कर छाती की ओर खींचें. 15 सेकंड रोकें और फिर बदलें. यह कमर की मांसपेशियों को आराम देता है. सीटेड ट्विस्ट (Seated Twist)यह एक्सरसाइज रीढ़ की घुमाव क्षमता को बेहतर बनाती है.कैसे करें: कुर्सी पर सीधे बैठें, एक हाथ कुर्सी की पीठ पर रखें और धीरे-धीरे शरीर को उसी दिशा में घुमाएं. दोनों तरफ 10-10 बार करें. यह बैक की stiffness कम करता है. शोल्डर रोल्स (Shoulder Rolls)यह सबसे आसान लेकिन प्रभावी एक्सरसाइज है.कैसे करें: सीधे बैठकर कंधों को आगे से पीछे और पीछे से आगे गोल घुमाएं. 15-20 बार करें. यह कंधों और ऊपरी पीठ के दर्द में राहत देता है. इन एक्सरसाइज को रोजाना सिर्फ 10-15 मिनट करने से पीठ दर्द में काफी राहत मिल सकती है और लंबे समय तक बैठने के बावजूद शरीर एक्टिव और हेल्दी रहता है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi

ऑक्सीजन भी बन सकती है जानलेवा! मालदीव में स्कूबा डाइविंग करते वक्त 5 लोगों की मौत, 160 फीट नीचे क्या हुआ?

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Last Updated:May 16, 2026, 23:45 IST Oxygen Toxicity: स्कूबा डाइविंग एक एडवेंचर एक्टिविटी है. लेकिन यदि इसे सावधानी और सतर्कता के साथ न किया जाए तो ये जानलेवा भी साबित हो सकता है. हाल ही में मालदीव में 5 लोगों की मौत का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि इसका कारण ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी हो सकता है. ये क्या होता है, चलिए इस लेख में समझते हैं. ख़बरें फटाफट मालदीव में हाल ही में हुई स्कूबा डाइविंग दुर्घटना ने समुद्र की गहराई में छिपी एक जानलेवा खतरे को उजागर किया है. दरअसल, इस हादसे में 5 इटालियन टूरिस्ट की मौत हुई है जो अंडरवाटर केव को एक्सप्लोर करने के लिए गहरे पानी में उतरे थें. बताया जा रहा है कि हादसा मालदीव के वावू एटोल इलाके के पास हुआ, जहां गोताखोर लगभग 160 फीट गहराई तक उतर गए थे. मृतकों में प्रसिद्ध समुद्री जीव वैज्ञानिक मोनिका मोंटेफाल्कोन और उनकी 20 साल की बेटी भी शामिल थीं. इनके अलावा रिसर्च फेलो म्यूरियल ओडेनिनो, मरीन बायोलॉजी ग्रेजुएट फेडेरिको गुआल्तियेरी और डाइविंग इंस्ट्रक्टर जियानलुका बेनेडेट्टी की भी जान चली गई. रिपोर्ट के अनुसार, 14 मई को ये ग्रुप अलीमाथा द्वीप के पास समुद्र के अंदर बनी गुफाओं की खोज कर रहा था, लेकिन डाइविंग के बाद वे वापस सतह पर नहीं लौट सके. ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी मौत की वजह?विशेषज्ञों का मानना है कि इस हादसे की एक बड़ी वजह “ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी” हो सकती है. ऑक्सीजन हमारे जीवन के लिए जरूरी है, लेकिन ज्यादा दबाव वाली परिस्थितियों में यही ऑक्सीजन शरीर के लिए खतरनाक बन सकती है. समुद्र में गहराई बढ़ने के साथ दबाव भी बढ़ता जाता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का असर सामान्य से ज्यादा हो जाता है. ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन भी जानलेवाएक्सपर्ट के मुताबिक, ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन शरीर में जहरीले तत्व पैदा कर सकती है, जो दिमाग और शरीर के अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं. गहरे समुद्र में डाइविंग के दौरान सबसे बड़ा खतरा “सेंट्रल नर्वस सिस्टम ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी” का होता है. इसके लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं. ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी के लक्षणऑक्सीजन टॉक्सिसिटी के दौरान चक्कर आना, उलझन महसूस होना, आंखों के सामने धुंधलापन, मांसपेशियों में झटके, मतली और अचानक दौरे पड़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अगर पानी के अंदर किसी डाइवर को दौरा पड़ जाए, तो उसके डूबने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. समुद्र की गहराई में छिपा खतराआमतौर पर स्कूबा डाइविंग में लोग सामान्य हवा जैसी गैस का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ज्यादा गहराई पर यही गैस खतरनाक हो सकती है. अनुभवी डाइवर कई बार विशेष गैस मिश्रण का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अगर उसकी मात्रा सही न हो तो ऑक्सीजन जहरीली साबित हो सकती है. गुफाओं में डाइविंग करना और भी ज्यादा जोखिम भरा होता है. वहां रोशनी कम होती है, पानी का बहाव तेज हो सकता है और घबराहट बढ़ने से सांस तेज चलने लगती है. इससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रभाव और बढ़ सकता है. खराब मौसम, तेज हवाएं, तनाव और थकान भी इस खतरे को बढ़ाने वाले कारण माने जाते हैं. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

इस छुटकू से बीज में छिपे हैं बड़े-बड़े फायदे, त्वचा से लेकर पेट तक कैसे पहुंचाता हैं लाभ?

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Last Updated:May 16, 2026, 23:32 IST मिठाइयों में स्वाद बढ़ाने वाली छोटी सी चिरौंजी सिर्फ एक ड्राई फ्रूट नहीं, बल्कि सेहत का खजाना भी मानी जाती है. आयुर्वेद में खास जगह रखने वाली चिरौंजी त्वचा को चमकदार बनाने, पाचन को बेहतर रखने और शरीर को पोषण देने में मददगार बताई जाती है. मिठाइयों, हलवे और ड्राई फ्रूट्स का स्वाद बढ़ाने वाली चिरौंजी सिर्फ एक स्वादिष्ट मेवा नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी मानी जाती है. आयुर्वेद में इसे खास महत्व दिया गया है, क्योंकि इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं. त्वचा को स्वस्थ रखने से लेकर पाचन संबंधी परेशानियों में राहत देने तक, चिरौंजी का इस्तेमाल कई घरेलू और आयुर्वेदिक उपचारों में किया जाता है. बिहार सरकार का पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग लोगों को चिरौंजी के पेड़ और उसके फायदों के बारे में जागरूक कर रहा है. विभाग लोगों से अपील कर रहा है कि वे चिरौंजी के पेड़ों की पहचान करें, उनका संरक्षण करें और इसके महत्व को समझें. चिरौंजी का पेड़ मध्यम आकार का पतझड़ी वृक्ष होता है, जिसकी ऊंचाई लगभग 15 मीटर तक हो सकती है. इसकी छाल गहरे स्लेटी रंग की होती है, जो देखने में मगरमच्छ की त्वचा जैसी नजर आती है. वहीं, छाल के अंदर का हिस्सा लाल रंग का होता है, जिससे इसे आसानी से पहचाना जा सकता है. मिठाइयों में बढ़ाता है स्वादचिरौंजी के बीज स्वाद में बादाम जैसे होते हैं और इन्हें ड्राई फ्रूट्स की श्रेणी में काफी पसंद किया जाता है. भारतीय पारंपरिक मिठाइयों में इसका इस्तेमाल स्वाद और टेक्सचर बढ़ाने के लिए किया जाता है. खीर, हलवा, लड्डू, आइसक्रीम और कई तरह की स्वीट डिशेज में चिरौंजी खास तौर पर डाली जाती है. स्वादिष्ट होने के साथ-साथ यह पोषण से भी भरपूर होती है. आयुर्वेद में क्यों है खास महत्वअगर इसके औषधीय गुणों की बात करें, तो आयुर्वेद में चिरौंजी को बेहद उपयोगी माना गया है. इसकी जड़ों की तासीर ठंडी और स्वाद कसैला होता है, जो दस्त और पेट से जुड़ी समस्याओं में राहत पहुंचाने में सहायक माना जाता है. इसके अलावा चिरौंजी त्वचा संबंधी परेशानियों में भी फायदेमंद मानी जाती है और नियमित सेवन से त्वचा में प्राकृतिक निखार बना रहता है. पर्यावरण के लिए भी है जरूरीयह पेड़ सिर्फ स्वास्थ्य और स्वाद के लिहाज से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. यही वजह है कि बिहार सरकार लोगों को इसके संरक्षण के लिए प्रेरित कर रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस बहुमूल्य वृक्ष और इसके फायदों का लाभ उठा सकें. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi

What is the right way to eat watermelon: तरबूज खाने का सही तरीका

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Last Updated:May 16, 2026, 23:16 IST Watermelon Eating Tips: तरबूज खाने से कई लोगों की गंभीर रूप से तबीयत बिगड़ने और मौत की खबर लगातार आ रही है. ऐसे में ये लेख आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. यहां आप तरबूज खाने का सही तरीका जान सकते हैं, जो सेहत को बनाएं रखने के लिए बहुत जरूरी हैं. ख़बरें फटाफट गर्मी के मौसम में लोग सबसे ज्यादा तरबूज और खरबूजा खाना पसंद करते हैं. ये दोनों फल शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ पानी की कमी भी पूरी करते हैं. तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच ये फल शरीर को तरोताजा रखने में मदद करते हैं. हालांकि, इन फलों को सही तरीके से खाना बहुत जरूरी होता है. अगर इन्हें गलत चीजों के साथ खाया जाए, तो फायदा मिलने की जगह पेट से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं. आयुर्वेद में कुछ खाद्य पदार्थों को एक साथ खाने से मना किया गया है. इसे ‘विरुद्ध आहार’ कहा जाता है. इसका मतलब है ऐसी चीजें जिन्हें साथ खाने से पाचन खराब हो सकता है. तरबूज और खरबूजा भी ऐसे फल हैं जिन्हें सोच-समझकर खाना चाहिए. खासतौर पर इनके साथ दूध, दही या दूसरी डेयरी चीजें नहीं खानी चाहिए. ऐसा करने से खाना ठीक से पच नहीं पाता और गैस, पेट दर्द या भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. तरबूज खाने का सही तरीका बहुत से लोग गर्मियों में ठंडे फल खाने के साथ तला-भुना खाना भी पसंद करते हैं, लेकिन यह आदत नुकसान पहुंचा सकती है. तरबूज और खरबूजे जैसे पानी से भरपूर फलों के साथ ज्यादा ऑयली या मसालेदार खाना खाने से पेट पर असर पड़ सकता है. इससे अपच, एसिडिटी और पेट में जलन जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं. गर्मी में शरीर पहले ही गर्म रहता है, इसलिए हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना ज्यादा अच्छा माना जाता है. इन फलों को भारी भोजन या ज्यादा अनाज के साथ भी नहीं खाना चाहिए. अगर आप खाना खाने के तुरंत बाद तरबूज या खरबूजा खाते हैं, तो पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. इससे शरीर में आलस, भारीपन और बेचैनी महसूस हो सकती है. इसलिए इन्हें अकेले खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. बहुत ठंडे पेय पदार्थों के साथ भी तरबूज और खरबूजा खाना सही नहीं माना जाता. कुछ लोग इन फलों के साथ आइस्ड ड्रिंक या बर्फ वाला पानी पी लेते हैं, जिससे पेट की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. इससे दस्त, पेट दर्द या पाचन संबंधी दूसरी समस्याएं हो सकती हैं. आयुर्वेद के अनुसार, पानी वाले फलों को अकेले या फिर उसी तरह के दूसरे फलों के साथ खाना बेहतर होता है. इससे शरीर को पोषण सही तरीके से मिलता है और पाचन भी अच्छा रहता है. ये हैं हेल्दी विकल्पअगर किसी कारण से आप तरबूज या खरबूजा नहीं खा सकते, तो गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए दूसरे विकल्प भी अपनाए जा सकते हैं. नारियल पानी, बेल का शरबत, नींबू पानी और छाछ जैसी चीजें शरीर को ठंडक देने और पानी की कमी दूर करने में मदद करती हैं. इसके साथ ही सही खानपान, पर्याप्त पानी और आराम भी गर्मियों में स्वस्थ रहने के लिए बहुत जरूरी है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

डीके बनाम एचडीके: बिदादी की लड़ाई कैसे शिवकुमार के खिलाफ गौड़ा परिवार के युद्ध में बदल गई | भारत समाचार

GT skipper Shubman Gill.

आखरी अपडेट:16 मई, 2026, 22:00 IST राजनीतिक तापमान तब बढ़ गया जब एचडी देवेगौड़ा मैदान में उतरे, अपने बेटे का पुरजोर समर्थन किया और शिवकुमार और कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। कर्नाटक के डिप्टी सीएम शिवकुमार (बाएं) और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी। फ़ाइल छवि बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के बीच राजनीतिक खींचतान के रूप में जो शुरू हुआ वह अब पूर्ण पैमाने पर गौड़ा परिवार के आक्रामक रूप में बदल गया है, पूर्व प्रधान मंत्री एचडी देवेगौड़ा खुद युद्ध के मैदान में उतर रहे हैं। टकराव के केंद्र में शिवकुमार का आरोप है कि कुमारस्वामी, जिन्होंने 2006-07 में मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान पहली बार बिदादी टाउनशिप परियोजना शुरू की थी, अब राजनीतिक सुविधा के लिए उसी परियोजना का विरोध कर रहे हैं। शिवकुमार ने यह सुझाव देकर अपने हमले को तेज कर दिया है कि परियोजना और इसके आसपास की भूमि राजनीति कुमारस्वामी के रुख में विरोधाभासों को उजागर करती है, यहां तक ​​​​कि वह भूमि, व्यापार और राजनीतिक हितों पर बड़े सवालों का संकेत भी देते हैं। शिवकुमार ने कहा है कि कांग्रेस सरकार केवल उस परियोजना को जारी रख रही है जिसकी परिकल्पना मूल रूप से कुमारस्वामी के नेतृत्व में की गई थी। शिवकुमार ने कुमारस्वामी पर पलटवार करते हुए कहा, “हम केवल आपके द्वारा शुरू की गई बिदादी टाउनशिप परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री “हमारी आलोचना किए बिना राजनीतिक रूप से जीवित नहीं रह सकते”। कर्नाटक के डिप्टी सीएम ने कुमारस्वामी के भूमि अधिग्रहण के विरोध को भी चुनौती देते हुए पूछा है कि जब उनके पास मौका था तो उन्होंने खुद जमीन को पूरी तरह से डीनोटिफाई क्यों नहीं किया। शिवकुमार ने कहा, “किसान मुझ पर पत्थर फेंक सकते हैं; वे मेरे खिलाफ नारे लगा सकते हैं। क्या मुझे डरना चाहिए? जो मायने रखता है वह उनका भविष्य, उनके बच्चों का भविष्य और उनकी जमीन का भविष्य है। अब से बीस साल बाद, बिदादी और दक्षिण बेंगलुरु मुझे याद रखेंगे।” हालांकि, कुमारस्वामी ने सिद्धारमैया सरकार पर रियल एस्टेट ब्रोकर बनने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया, “किसानों की जमीन छीनने वाले वे कौन होते हैं? सरकार दलाल की तरह काम कर रही है, प्रति वर्ग फुट पर रियल एस्टेट कारोबार कर रही है। सिद्धारमैया दलाल के रूप में उभरे हैं,” उन्होंने राज्य से परियोजना को रद्द करने का आग्रह किया। लेकिन राजनीतिक तापमान तब तेजी से बढ़ गया जब देवेगौड़ा अपने बेटे का पुरजोर समर्थन करते हुए मैदान में उतरे और शिवकुमार और कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। शिवकुमार की टिप्पणी का मजाक उड़ाते हुए देवेगौड़ा ने कहा, “वे कहते हैं कि मैं बैठकों में रोता हूं। आज मैं इस व्यवस्था पर हंस रहा हूं।” देवेगौड़ा ने सिद्धारमैया को अपना राजनीतिक मित्र बताते हुए साथ ही उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी लड़ाई अब शुरू होती है. “मेरा संघर्ष आज से शुरू हो रहा है। गरीबों की जमीन कैसे अधिग्रहीत की गई? कोर्ट के आदेश के बाद क्या हुआ? मैं पूरी जानकारी के साथ मुख्यमंत्री को पत्र लिखूंगा।” उन्होंने सरकार पर बिदादी के किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और सवाल किया कि कोई भी वरिष्ठ अधिकारी या विधायक उनसे मिलने क्यों नहीं गया। “सिद्धारमैया को मेरे साथ बिदादी आने दीजिए। किसी भी तहसीलदार, डीसी या विधायक ने उन किसानों के प्रति शिष्टाचार नहीं दिखाया है।” प्रत्यक्ष राजनीतिक चेतावनी में, देवेगौड़ा ने अपने लंबे विरोध इतिहास – देवराज उर्स से लेकर एसएम कृष्णा से लेकर बीएस येदियुरप्पा तक का जिक्र किया – जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वह एक अंतिम आंदोलन के लिए तैयार हैं। “मैंने जीवन भर गरीबों के लिए संघर्ष किया है। अगर मुझे जीवन के अंत में भी लड़ना पड़े तो मैं तैयार हूं।” उन्होंने कांग्रेस की आंतरिक सत्ता राजनीति पर भी कटाक्ष किया. सिद्धारमैया-डीके शिवकुमार के उत्तराधिकार की चर्चा पर स्पष्ट रूप से चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा, “वे जन्मदिन पर सत्ता हस्तांतरण का जश्न मना रहे हैं।” देवेगौड़ा ने आगे दावा किया कि उन्होंने सिद्धारमैया को पत्र लिखकर लगभग 20,000 एकड़ भूमि के स्वामित्व की जांच की मांग की थी और आरोप लगाया था कि राजनीतिक दबाव में बेंगलुरु को संकट में धकेला जा रहा है। हालाँकि, सबसे तीखी टिप्पणी शिवकुमार के इस दावे के लिए आरक्षित थी कि वह नाराज किसानों का सामना करने के लिए तैयार थे। देवेगौड़ा ने पलटवार करते हुए कहा, “क्या वह वहां जाएंगे और किसानों द्वारा पीटे जाएंगे? पहले उन्हें जाने दीजिए। मैं डीके शिवकुमार के वहां जाने और किसानों द्वारा पीटे जाने के बाद बोलूंगा।” सैटेलाइट टाउनशिप के माध्यम से बेंगलुरु में भीड़भाड़ कम करने के लिए कुमारस्वामी के नेतृत्व में पहली बार प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप अब एक शहरी नियोजन परियोजना से एक भयंकर राजनीतिक हथियार में बदल गई है – पुराने फैसलों, वर्तमान विरोधाभासों और शिवकुमार, कुमारस्वामी और देवेगौड़ा के बीच एक नए त्रिकोणीय युद्ध को उजागर करना। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया डीके बनाम एचडीके: बिदादी की लड़ाई कैसे शिवकुमार के खिलाफ गौड़ा परिवार के युद्ध में बदल गई अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

हार्ट से लेकर ब्रेन तक… आगरा के इन हॉस्पिटल्स में मिलती हैं आधुनिक सुविधाएं, लोगों को है सबसे ज्यादा भरोसा

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Last Updated:May 16, 2026, 21:48 IST आगरा में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार आधुनिक होती जा रही हैं. शहर में कई ऐसे अस्पताल मौजूद हैं, जो बेहतर इलाज, आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की वजह से लोगों के बीच खास पहचान बना चुके हैं. हार्ट, ब्रेन, आईवीएफ और इमरजेंसी सेवाओं से लेकर सामान्य उपचार तक, ये अस्पताल मरीजों को कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं. आगरा के आवास विकास क्षेत्र में स्थित जे. जे. हॉस्पिटल काफी पुराना और प्रसिद्ध अस्पताल माना जाता है. आसपास के कई लोग यहां अपना इलाज कराने पहुंचते हैं. यह अस्पताल कम बजट में बेहतर उपचार देने के लिए जाना जाता है. छोटे-मोटे इलाज और सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं यहां आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं. स्थानीय लोगों की नजर में यह अस्पताल किफायती होने के साथ-साथ बेहतर इलाज के लिए भी जाना जाता है. आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में स्थित रेनबो हॉस्पिटल एक पुराना और विश्वसनीय अस्पताल माना जाता है. यहां विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं और इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं. यह अस्पताल विशेष रूप से आधुनिक आईवीएफ तकनीक के लिए जाना जाता है. लंबे समय से संतान सुख से वंचित दंपतियों के इलाज के लिए यहां आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उपचार किया जाता है. इसके अलावा नई प्रजनन तकनीकों की मदद से भी मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. आगरा के आईएसबीटी के सामने स्थित असोपा हॉस्पिटल एक काफी पुराना और प्रसिद्ध अस्पताल माना जाता है. इस अस्पताल की स्थापना प्रो. एच. एस. असोपा ने की थी. तब से यह लगातार मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता आ रहा है. यहां कम खर्च में बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की कोशिश की जाती है. हालांकि, आगरा में नए अस्पताल खुलने के बाद इसकी लोकप्रियता पहले की तुलना में कुछ कम हुई है, लेकिन आज भी कई लोग इस अस्पताल पर भरोसा करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google आगरा के दिल्ली गेट के पास स्थित पुष्पांजलि हॉस्पिटल अपने बेहतर इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जाना जाता है. यहां क्रिटिकल मरीजों को तुरंत भर्ती कर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. एमरजेंसी मामलों को संभालने में भी इस अस्पताल के चिकित्सकों को अनुभवी माना जाता है. खासतौर पर हृदय और ब्रेन से जुड़ी चिकित्सा सेवाओं के लिए यह अस्पताल काफी प्रसिद्ध है. आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में स्थित शांति वेद हॉस्पिटल एक नया और आधुनिक अस्पताल माना जाता है. बताया जाता है कि यहां अत्याधुनिक तकनीक से लैस कई आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से विभिन्न प्रकार के इलाज किए जाते हैं. यहां जटिल मामलों को भी संभालने की सुविधा मौजूद है. साथ ही, कई विशेषज्ञ चिकित्सक दूर-दूर से यहां मरीजों को देखने के लिए विजिट पर आते हैं. आगरा में प्रभा हॉस्पिटल की दो शाखाएं हैं. इसकी एक शाखा सिकंदरा और दूसरी ट्रांस यमुना क्षेत्र में स्थित है. यह अस्पताल आधुनिक इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जाना जाता है. यहां मरीजों को विभिन्न प्रकार की चिकित्सकीय सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं. खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए यह अस्पताल एक अच्छा विकल्प माना जाता है, जहां अपेक्षाकृत कम खर्च में डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. आगरा के दीवानी चौराहे के सामने स्थित लॉट्स हॉस्पिटल कई वर्षों से संचालित हो रहा है. यहां विभिन्न प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जाता है. यह अस्पताल विशेष रूप से हृदय रोगियों के इलाज के लिए जाना जाता है. यहां हार्ट से जुड़ी समस्याओं के लिए अलग-अलग प्रकार की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं. साथ ही, मरीजों के उपचार के लिए आधुनिक मशीनों का भी उपयोग किया जाता है. आगरा के सिविल लाइन इलाके में स्थित राम रघु हॉस्पिटल अपनी आधुनिक तकनीक और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जाना जाता है. यहां दिमाग से संबंधित कई गंभीर बीमारियों का इलाज किया जाता है. इस अस्पताल में अनुभवी और विशेषज्ञ चिकित्सक मरीजों का उपचार करते हैं. नई तकनीकों और आधुनिक सुविधाओं के कारण यह अस्पताल लोगों के बीच खास पहचान बना चुका है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

चांदी के इम्पोर्ट पर सरकार ने लगाई कड़ी पाबंदी:अब बिना मंजूरी नहीं ला सकेंगे सिल्वर बार; रुपया मजबूत बनाने के लिए फैसला

चांदी के इम्पोर्ट पर सरकार ने लगाई कड़ी पाबंदी:अब बिना मंजूरी नहीं ला सकेंगे सिल्वर बार; रुपया मजबूत बनाने के लिए फैसला

केंद्र सरकार ने चांदी के इम्पोर्ट पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, चांदी की कई कैटेगरीज को ‘फ्री’ लिस्ट से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ यानी प्रतिबंधित कैटेगिरी में डाल दिया गया है। सरकार ने यह फैसला कीमती धातुओं के बढ़ते आयात को रोकने और देश के बढ़ते इम्पोर्ट बिल को कंट्रोल करने के लिए लिया है। नए नियमों के बाद, अब कोई भी कंपनी चांदी की सिल्लियां (सिल्वर बार), अनरॉट सिल्वर (बिना गढ़ी चांदी) या चांदी का पाउडर अपनी मर्जी से सीधे भारत नहीं ला सकेगी। इसके लिए अब पहले सरकार से बकायदा मंजूरी (लाइसेंस) लेना होगा। इसके साथ ही, चांदी मंगाने की कुछ कैटेगरीज को रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के दायरे में भी लाया गया है।

India Silver Import Ban | Rupee Strengthen Decision

India Silver Import Ban | Rupee Strengthen Decision

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने शनिवार को चांदी की कई कैटेगरी के आयात पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब 99.9% शुद्धता वाली सिल्वर बार अनरॉट सिल्वर (बिना गढ़ी चांदी) या चांदी पाउडर को विदेश से मंगाने के लिए सरकार की अनुमति लेनी होगी। पहले इनका आयात आसानी से किया जा सकता था, लेकिन अब इन्हें ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कैटेगरी में डाल दिया गया है। सरकार ने यह फैसला पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच लिया है, ताकि सोना-चांदी के आयात पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सके। इससे पहले 13 मई सरकार ने सोना और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी भी 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था। इस फैसले का असर आसान सवाल-जवाब में समझते हैं… सवाल 1: सरकार ने चांदी के इम्पोर्ट को लेकर क्या नया आदेश जारी किया है? जवाब: सरकार ने नए नोटिफिकेशन के जरिए चांदी की कई कैटेगरीज के आयात नियम सख्त कर दिए हैं। अब तक चांदी का इम्पोर्ट ‘फ्री’ कैटेगिरी में था, जिसे बदलकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ (प्रतिबंधित) कैटेगिरी में डाल दिया गया है। सवाल 2: इस पाबंदी के दायरे में चांदी के कौन-कौन से प्रोडक्ट्स आएंगे? जवाब: नए नियमों के तहत अब कोई भी कंपनी या कारोबारी सिल्वर बार (चांदी की सिल्लियां), अनरॉट सिल्वर (बिना गढ़ी कच्ची चांदी), चांदी का पाउडर या सेमी-मैन्युफैक्चरर्ड सिल्वर सीधे भारत नहीं ला सकेगा। सवाल 3: अगर कोई चांदी भारत मंगाना चाहता है, तो अब उसका क्या तरीका होगा? जवाब: अब चांदी का इम्पोर्ट करने के लिए कंपनियों को सरकार से लाइसेंस लेना होगा। इसके बिना कस्टम क्लीयरेंस नहीं मिलेगा। साथ ही, चांदी की कुछ खास कैटेगरीज को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की निगरानी के दायरे में भी लाया गया है। सवाल 4: सरकार को चांदी के इम्पोर्ट पर अचानक यह प्रतिबंध क्यों लगाना पड़ा? जवाब: इसका मुख्य उद्देश्य कीमती धातुओं के तेजी से बढ़ते आयात को रोकना है। बढ़ते इम्पोर्ट से देश का इम्पोर्ट बिल (आयात खर्च) और व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) बढ़ रहा है। इसे कंट्रोल करने और विदेशी बाजार के दबाव के बीच रुपये को मजबूती देने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। सवाल 5: एक्सपोर्टर्स के लिए ‘एडवांस ऑथराइजेशन’ स्कीम में क्या बदलाव हुआ है? जवाब: विदेश व्यापार महानिदेशक (DGFT) ने इस स्कीम के तहत ड्यूटी-फ्री (बिना टैक्स) सोना मंगाने के नियम सख्त कर दिए हैं। अब कोई भी एक्सपोर्टर एक लाइसेंस पर अधिकतम 100 किलोग्राम तक ही सोना इम्पोर्ट कर पाएगा। इससे ज्यादा सोना मंगाने की अनुमति नहीं होगी। सवाल 6: जो लोग पहली बार ड्यूटी-फ्री सोने के लिए अप्लाई कर रहे हैं, उनके लिए क्या नियम है? जवाब: नए आवेदकों के लिए फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। पहली बार अप्लाई करने वाले एक्सपोर्टर्स को अप्रूवल से पहले अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी या फैक्ट्री की भौतिक जांच करानी होगी। अधिकारियों की मंजूरी के बाद ही लाइसेंस जारी होगा। सवाल 7: पुराने एक्सपोर्टर्स जो दोबारा लाइसेंस (रिपीट ऑथराइजेशन) चाहते हैं, उनके लिए क्या शर्त है? जवाब: DGFT ने रिपीट आवेदकों के लिए भी नियम सख्त किए हैं। नया या फ्रेश ऑथराइजेशन तभी जारी होगा, जब कंपनी पिछले लाइसेंस के तहत मिली कुल एक्सपोर्ट देनदारी (जितना माल बाहर भेजने का वादा किया था) का कम से कम 50% पूरा कर चुकी हो। सवाल 8: टैक्स-फ्री सोना मंगाने वाली कंपनियों की निगरानी कैसे की जाएगी? जवाब: कंपनियों को हर 15 दिन में अपने इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट देनी होगी। इसे चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से सर्टिफाइड कराना अनिवार्य होगा। क्षेत्रीय अधिकारी इसकी कंसोलिडेटेड मंथली रिपोर्ट बनाकर DGFT मुख्यालय को भेजेंगे। सवाल 9: देश में सोने का इम्पोर्ट इस समय किस स्तर पर पहुंच गया है? जवाब: साल 2025-26 में भारत का गोल्ड इम्पोर्ट 24% से ज्यादा बढ़कर रिकॉर्ड $71.98 अरब पर पहुंच गया है। इस दौरान सोने की मात्रा (वॉल्यूम) में थोड़ी कमी आई, लेकिन ग्लोबल मार्केट में कीमतें बढ़ने से कुल बिल बढ़ गया। भारत सबसे ज्यादा सोना स्विट्जरलैंड से मंगाता है। इसके बाद यूएई (UAE) और दक्षिण अफ्रीका का नंबर आता है। सवाल 10: सरकार के इन सख्त फैसलों पर ज्वेलरी इंडस्ट्री का क्या कहना है? जवाब: ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी काउंसिल समेत कई इंडस्ट्री बॉडीज ने इस पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इम्पोर्ट ड्यूटी 15% करने और चांदी पर प्रतिबंध लगाने से ग्रे-मार्केट (अवैध कारोबार) सक्रिय हो सकता है। इससे सोने-चांदी की स्मगलिंग (तस्करी) बढ़ने और ईमानदार कारोबारियों को नुकसान होने की आशंका है। सोना इस साल 25 हजार और चांदी 38 हजार महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 25,015 रुपए और चांदी 38,080 रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.58 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.69 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। पीएम ने एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की प्रधानमंत्री ने कहा ‘एक समय था, जब संकट आने पर देशहित में लोग सोना दान दे देते थे। आज दान की जरूरत नहीं है, लेकिन देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें यह स्वीकार करके विदेशी मुद्रा बचानी होगी।’ ऐसा क्यों कहा: पीएम मोदी ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए ये अपील की। भारत अपने इस्तेमाल का करीब 99% सोना विदेशों से खरीदता है। 2025-26 में सोने का ये इम्पोर्ट बिल करीब 6.4 लाख करोड़ रुपए का था। विदेशों से खरीदे जाने वाले सामान के कुल खर्चे में 9% हिस्सेदारी के साथ सोना दूसरे नंबर पर है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… सोना ₹9,345 और चांदी ₹22,853 महंगी: इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% करने का असर, PM ने 3 दिन पहले कहा था- सोना न खरीदें केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी है।

Andhra Pradesh Population Policy; Chandrababu Naidu Announces Cash Incentive For Third, Fourth Child

Andhra Pradesh Population Policy; Chandrababu Naidu Announces Cash Incentive For Third, Fourth Child

Hindi News National Andhra Pradesh Population Policy; Chandrababu Naidu Announces Cash Incentive For Third, Fourth Child आंध्र प्रदेश13 मिनट पहले कॉपी लिंक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को श्रीकाकुलम जिले में जनसभा की। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को घोषणा करते हुए कहा कि राज्य में तीसरे बच्चे के जन्म पर परिवार को 30 हजार रुपए और चौथे बच्चे के जन्म पर 40 हजार रुपए दिए जाएंगे। नायडू श्रीकाकुलम जिले में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि पहले वह जनसंख्या नियंत्रण के पक्ष में थे, लेकिन अब समय बदल गया है। अब जन्म दर बढ़ाने की जरूरत है। एक महीने के भीतर इसकी पूरी जानकारी जारी की जाएगी। इससे पहले आंध्र सरकार दूसरे बच्चे के जन्म पर 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने के प्रस्ताव पर भी विचार कर चुकी है। 5 मार्च को मुख्यमंत्री ने विधानसभा में इसकी जानकारी दी थी। नायडू बोले- बच्चों को बोझ न समझें नायडू ने कहा कि बच्चों को बोझ नहीं, बल्कि देश की संपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। किसी भी समाज की जनसंख्या स्थिर रखने के लिए प्रति महिला औसतन 2.1 बच्चों की जन्म दर जरूरी होती है। उन्होंने दावा किया कि कई देशों में घटती आबादी और बुजुर्ग होती जनसंख्या से अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है। नायडू ने महिलाओं से ज्यादा बच्चा पैदा करने की अपील की थी मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अप्रैल 2025 में महिलाओं से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील भी की। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा था कि सरकारी महिला कर्मचारियों को बच्चों की संख्या चाहे जितनी हो, हर बच्चे पर 26 हफ्ते यानी 6 महीने की मातृत्व अवकाश मिलेगा। तब तक यह अवकाश सिर्फ पहले दो बच्चों तक सीमित था। दो से ज्यादा बच्चे होने पर 12 हफ्ते की छुट्टी मिलती थी। महिला दिवस के कार्यक्रम में नायडू ने कहा था कि यह फैसला जनसंख्या संतुलन बनाए रखने और महिलाओं को नौकरी व परिवार के बीच संतुलन बनाने में मदद करने के लिए लिया गया है। नायडू का कहना था कि दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी युवाओं की संख्या घट रही है और बुजुर्ग आबादी बढ़ रही है। इसी वजह से वे लंबे समय की जनसंख्या नीति पर जोर दे रहे हैं। नायडू के बयान परिसीमन से जोड़कर देखा जा रहा नायडू के बयान को लोकसभा परिसीमन से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, केंद्र की भाजपा सरकार परिसीमन को लेकर बिल संसद में एक बार रख चुकी है। दक्षिणी राज्यों को डर है कि 46 साल से रुका हुआ परिसीमन जनसंख्या को आधार मानकर हुआ, तो लोकसभा में हिंदीभाषी राज्यों के मुकाबले उनकी सीटें घट जाएंगी। हालांकि यह बिल पास नहीं हो पाया था। साथ ही गृहमंत्री अमित शाह ने भी संसद में बोलते हुए समझाया था कि परिसीमन से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि लोकसभा की सीटें 543 से 850 कैसे होंगी। शाह ने बताया था- 850 का आंकड़ा कहां से आया शाह ने कहा, ‘मैं समझाता हूं। मान लीजिए 100 सीटें हैं और 33% महिलाओं के लिए आरक्षण देना है। यदि कुल सीटों में 50% वृद्धि कर दी जाए, तो यह 150 हो जाती हैं। और जब 150 का 33% आरक्षण लागू होता है, तो यह लगभग 100 सीटों के बराबर हो जाता है।’ ‘अभी लोकसभा में 543 सदस्य हैं। परिसीमन के बाद सीटों में 50% वृद्धि की जाएगी और कुल संख्या 816 हो जाएगी। इसमें से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 850 एक राउंड फिगर है, वास्तविक संख्या 816 होगी।’ आंध्र की सीटें 25 से 28 हो जाएंगी दक्षिण के पांच राज्यों की कुल लोकसभा सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। उनका प्रतिशत 23.76 से बढ़कर 23.87 हो जाएगा। इस तरह प्रस्तावित 50% सीट वृद्धि से दक्षिण भारत के हर राज्य को अधिक सीटें मिलेंगी। तमिलनाडु को 20, केरल को 10, तेलंगाना को 9 और आंध्र प्रदेश को 13 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। उत्तर प्रदेश के बाद लोकसभा में दूसरे सबसे अधिक सांसदों वाला राज्य महाराष्ट्र है, जिसे 24 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। ———————- ये खबर भी पढ़िए… आज का एक्सप्लेनर:CM स्टालिन बोले- जल्दी बच्चे पैदा करो, नायडू ने कहा- छुट्टियों की परवाह न करना; आखिर क्यों डरे हैं दक्षिण के राज्य? तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पिछले हफ्ते कहा था कि लोगों को अब तुरंत बच्चे पैदा करने की जरूरत है। 8 मार्च को आंध्र प्रदेश के CM ने भी कहा है कि महिला कर्मचारियों को बच्चों की संख्या की परवाह किए बिना मैटर्निटी लीव दी जाएगी। एक TDP सांसद ने तो तीसरा बच्चा लड़की होने पर 50 हजार रुपए और लड़का होने पर एक गाय देने का ऐलान कर दिया। दक्षिणी राज्यों के नेता पिछले कुछ वक्त से जनसंख्या बढ़ाने के संकेत दे रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Andhra Pradesh Population Policy; Chandrababu Naidu Announces Cash Incentive For Third, Fourth Child

Hindi News National Andhra Pradesh Population Policy; Chandrababu Naidu Announces Cash Incentive For Third, Fourth Child आंध्र प्रदेश2 घंटे पहले कॉपी लिंक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को श्रीकाकुलम जिले में जनसभा की। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को घोषणा करते हुए कहा कि राज्य में तीसरे बच्चे के जन्म पर परिवार को 30 हजार रुपए और चौथे बच्चे के जन्म पर 40 हजार रुपए दिए जाएंगे। नायडू श्रीकाकुलम जिले में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि पहले वह जनसंख्या नियंत्रण के पक्ष में थे, लेकिन अब समय बदल गया है। अब जन्म दर बढ़ाने की जरूरत है। एक महीने के भीतर इसकी पूरी जानकारी जारी की जाएगी। इससे पहले आंध्र सरकार दूसरे बच्चे के जन्म पर 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने के प्रस्ताव पर भी विचार कर चुकी है। 5 मार्च को मुख्यमंत्री ने विधानसभा में इसकी जानकारी दी थी। नायडू बोले- बच्चों को बोझ न समझें नायडू ने कहा कि बच्चों को बोझ नहीं, बल्कि देश की संपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। किसी भी समाज की जनसंख्या स्थिर रखने के लिए प्रति महिला औसतन 2.1 बच्चों की जन्म दर जरूरी होती है। उन्होंने दावा किया कि कई देशों में घटती आबादी और बुजुर्ग होती जनसंख्या से अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है। नायडू ने महिलाओं से ज्यादा बच्चा पैदा करने की अपील की थी मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अप्रैल 2025 में महिलाओं से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील भी की। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा था कि सरकारी महिला कर्मचारियों को बच्चों की संख्या चाहे जितनी हो, हर बच्चे पर 26 हफ्ते यानी 6 महीने की मातृत्व अवकाश मिलेगा। तब तक यह अवकाश सिर्फ पहले दो बच्चों तक सीमित था। दो से ज्यादा बच्चे होने पर 12 हफ्ते की छुट्टी मिलती थी। महिला दिवस के कार्यक्रम में नायडू ने कहा था कि यह फैसला जनसंख्या संतुलन बनाए रखने और महिलाओं को नौकरी व परिवार के बीच संतुलन बनाने में मदद करने के लिए लिया गया है। नायडू का कहना था कि दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी युवाओं की संख्या घट रही है और बुजुर्ग आबादी बढ़ रही है। इसी वजह से वे लंबे समय की जनसंख्या नीति पर जोर दे रहे हैं। नायडू के बयान परिसीमन से जोड़कर देखा जा रहा नायडू के बयान को लोकसभा परिसीमन से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, केंद्र की भाजपा सरकार परिसीमन को लेकर बिल संसद में एक बार रख चुकी है। दक्षिणी राज्यों को डर है कि 46 साल से रुका हुआ परिसीमन जनसंख्या को आधार मानकर हुआ, तो लोकसभा में हिंदीभाषी राज्यों के मुकाबले उनकी सीटें घट जाएंगी। हालांकि यह बिल पास नहीं हो पाया था। साथ ही गृहमंत्री अमित शाह ने भी संसद में बोलते हुए समझाया था कि परिसीमन से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि लोकसभा की सीटें 543 से 850 कैसे होंगी। शाह ने बताया था- 850 का आंकड़ा कहां से आया शाह ने कहा, ‘मैं समझाता हूं। मान लीजिए 100 सीटें हैं और 33% महिलाओं के लिए आरक्षण देना है। यदि कुल सीटों में 50% वृद्धि कर दी जाए, तो यह 150 हो जाती हैं। और जब 150 का 33% आरक्षण लागू होता है, तो यह लगभग 100 सीटों के बराबर हो जाता है।’ ‘अभी लोकसभा में 543 सदस्य हैं। परिसीमन के बाद सीटों में 50% वृद्धि की जाएगी और कुल संख्या 816 हो जाएगी। इसमें से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 850 एक राउंड फिगर है, वास्तविक संख्या 816 होगी।’ आंध्र की सीटें 25 से 28 हो जाएंगी दक्षिण के पांच राज्यों की कुल लोकसभा सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। उनका प्रतिशत 23.76 से बढ़कर 23.87 हो जाएगा। इस तरह प्रस्तावित 50% सीट वृद्धि से दक्षिण भारत के हर राज्य को अधिक सीटें मिलेंगी। तमिलनाडु को 20, केरल को 10, तेलंगाना को 9 और आंध्र प्रदेश को 13 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। उत्तर प्रदेश के बाद लोकसभा में दूसरे सबसे अधिक सांसदों वाला राज्य महाराष्ट्र है, जिसे 24 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। ———————- ये खबर भी पढ़िए… आज का एक्सप्लेनर:CM स्टालिन बोले- जल्दी बच्चे पैदा करो, नायडू ने कहा- छुट्टियों की परवाह न करना; आखिर क्यों डरे हैं दक्षिण के राज्य? तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पिछले हफ्ते कहा था कि लोगों को अब तुरंत बच्चे पैदा करने की जरूरत है। 8 मार्च को आंध्र प्रदेश के CM ने भी कहा है कि महिला कर्मचारियों को बच्चों की संख्या की परवाह किए बिना मैटर्निटी लीव दी जाएगी। एक TDP सांसद ने तो तीसरा बच्चा लड़की होने पर 50 हजार रुपए और लड़का होने पर एक गाय देने का ऐलान कर दिया। दक्षिणी राज्यों के नेता पिछले कुछ वक्त से जनसंख्या बढ़ाने के संकेत दे रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…