Wednesday, 01 Jul 2026 | 02:39 PM

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Ukraine Drones Attack Russia | Semiconductor Plant, Oil Refinery Targeted

यूक्रेन का रूस पर 1000 ड्रोन से हमला:सेमीकंडक्टर प्लांट, ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया; 1 भारतीय समेत 4 की मौत

मॉस्को1 मिनट पहले कॉपी लिंक यूक्रेन ड्रोन हमले के बाद रूस में कई जगह आग लग गई। यूक्रेन ने शनिवार रात को रूस के कई इलाकों पर 1000 से ज्यादा ड्रोन से हमला किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई है। इसमें 1 भारतीय मजदूर भी शामिल है। रूस में भारतीय दूतावास ने इसकी पुष्टि की है। दूतावास के मुताबिक 3 भारतीय घायल भी हैं। अधिकारियों ने हमले की जगह का दौरा किया और अस्पताल में भर्ती घायलों से मुलाकात भी की। अभी तक मारे गए और घायल लोगों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। रूस के अधिकारियों ने बताया कि हमले में मॉस्को इलाके में तीन लोगों की मौत हुई, जबकि यूक्रेन सीमा से लगे बेलगोरोद इलाके में एक और व्यक्ति की जान गई। मॉस्को में कुल 12 लोग घायल हुए हैं। इनमें तेल रिफाइनरी में काम करने वाले मजदूर भी शामिल हैं। कीव इंडिपेंडेंस की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन ने मॉस्को इलाके में सैन्य और ईंधन से जुड़े अहम ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एंगस्ट्रेम प्लांट शामिल है, जो रूस की सेना के लिए सेमीकंडक्टर बनाता है। इसके अलावा मॉस्को ऑयल रिफाइनरी, सोलनेचनोगोर्स्क और वोलोडार्स्कोये ईंधन स्टेशन को भी निशाना बनाया गया। यूक्रेन ने क्रीमिया पर भी हमला किया यूक्रेन ने दावा किया कि कब्जे वाले क्रीमिया में भी हमला किया गया। वहां बेलबेक एयरफील्ड पर एयर डिफेंस सिस्टम, एस-400 रडार सिस्टम का हैंगर, ड्रोन कंट्रोल सिस्टम, डेटा ट्रांसमिशन सेंटर और एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर को निशाना बनाया गया। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, यह हमला हाल के महीनों में मॉस्को पर हुए सबसे बड़े यूक्रेनी ड्रोन हमलों में से एक था। रातभर राजधानी और आसपास के इलाकों में एयर रेड सायरन बजते रहे, कई धमाके सुनाई दिए और अलग-अलग जगहों पर मलबा गिरा। हमले की 3 तस्वीरें… मॉस्को के नारो-फोमिंस्क जिले के सुब्बोतिनो गांव में यूक्रेन के ड्रोन हमले के बाद एक घर में लगी आग। मॉस्को के क्रास्नोगोर्स्क में यूक्रेन के ड्रोन हमले के बाद इमारत में एक शख्स टूटी खिड़कियों का मलबा साफ करता हुआ। मॉस्को के क्रास्नोगोर्स्क में क्षतिग्रस्त अपार्टमेंट इमारत के सामने खड़े लोग। जेलेनोग्राद का टेक्नोपार्क भी हमले में जला रूस के एक टेलीग्राम चैनल के मुताबिक, जेलेनोग्राद का एल्मा टेक्नोपार्क भी हमले में जल गया। यहां माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स और रिसर्च से जुड़ी कंपनियां काम करती हैं। वहीं दुबना इलाके में राडुगा डिजाइन ब्यूरो को भी निशाना बनाए जाने की खबर है, जहां क्रूज मिसाइलें बनाई जाती हैं। ड्रोन हमलों का असर मॉस्को के एयरपोर्ट्स पर भी पड़ा। शेरमेत्येवो एयरपोर्ट पर करीब 200 फ्लाइट्स लेट या रद्द हुईं, जबकि व्नुकोवो एयरपोर्ट पर करीब 100 फ्लाइट्स प्रभावित हुईं। एयरपोर्ट परिसर में ड्रोन के टुकड़े भी गिरे, हालांकि वहां किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है। यूक्रेन के ड्रोन हमले के बाद मॉस्को में घर की आग बुझाते हुए दमकलकर्मी। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने हमले को जायज बताया यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस हमले को रूस के हमलों को जायज बताया है। उन्होंने कहा कि रूस लगातार यूक्रेन के आम नागरिकों को निशाना बना रहा है, इसलिए यह कार्रवाई की गई। यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसी SBU ने हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उन्होंने यह ऑपरेशन उसने सेना के साथ मिलकर किया। यूक्रेन ने दावा किया कि कब्जे वाले क्रीमिया में भी हमला किया गया। वहां बेलबेक एयरफील्ड पर एयर डिफेंस सिस्टम, S-400 रडार सिस्टम का हैंगर, ड्रोन कंट्रोल सिस्टम, डेटा ट्रांसमिशन सेंटर और एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर को निशाना बनाया गया। रूस ने 24 घंटे में 1000 से ज्यादा ड्रोन गिराए रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसने 24 घंटे में 1054 यूक्रेनी ड्रोन, 8 गाइडेड बम और 2 मिसाइलों को मार गिराया। मंत्रालय ने यह भी कहा कि उसने फ्लेमिंगो क्रूज मिसाइल और नेपच्यून-एमडी मिसाइल को भी रोका, हालांकि यूक्रेन ने इन मिसाइलों के इस्तेमाल पर कुछ नहीं कहा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आसमान में चमक और कई जगह आग लगने के विजुअल हैं। खिमकी, क्लिन, जेलेनोग्राद और मॉस्को के कई हिस्सों में धमाकों की खबरें आईं। शेरमेत्येवो एयरपोर्ट के आसपास भी हलचल देखी गई। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने बताया कि कपोतन्या इलाके में स्थित ऑयल रिफाइनरी के पास 12 लोग घायल हुए, जिनमें ज्यादातर निर्माण मजदूर थे। इस हमले का असर मॉस्को के एयरपोर्ट्स पर भी पड़ा। शेरमेत्येवो एयरपोर्ट पर करीब 200 फ्लाइट्स लेट या रद्द हो गईं, जबकि व्नुकोवो एयरपोर्ट पर करीब 100 फ्लाइट्स प्रभावित हुईं। ———————————— जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ईरान के बाद क्यूबा पर अमेरिकी हमले का खतरा:सरकार ने जंग के लिए तैयार रहने को कहा, लोगों को गुरिल्ला लड़ाई सिखा रहे अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के प्रमुख जॉन रैटक्लिफ की हवाना यात्रा के बाद क्यूबा में अमेरिकी हमले की आशंका बढ़ गई है। क्यूबा सरकार ने संभावित सैन्य टकराव को देखते हुए युद्ध जैसी तैयारियां तेज कर दी हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

तिलक वर्मा और श्रीलीला के अफेयर की खबरें अफवाह:दावा- दोनों कभी एक-दूसरे से मिले तक नहीं; सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहें

तिलक वर्मा और श्रीलीला के अफेयर की खबरें अफवाह:दावा- दोनों कभी एक-दूसरे से मिले तक नहीं; सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहें

साउथ फिल्म एक्ट्रेस श्रीलीला और भारतीय क्रिकेटर तिलक वर्मा के बीच किसी तरह का रिलेशनशिप नहीं है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक मामले से जुड़े एक सूत्र ने इस बात की पुष्टि की है। दरअसल पिछले की दिनों से सोशल मीडिया पर दोनों के रिलेशन की चर्चा की जा रही थी। सूत्र ने इन दावों को पूरी तरह से गलत और बिना किसी आधार का बताया है। सोर्स के मुताबिक, श्रीलीला और तिलक वर्मा कभी एक-दूसरे से मिले भी नहीं है और न ही दोनों के बीच कभी कोई बात हुई है। सोशल मीडिया पर दोनों को लेकर फैलाई जा रही बातें पूरी तरह से अफवाह है। सोशल मीडिया पर ऐसे शुरू हुई थी चर्चा इंटरनेट पर पिछले कुछ समय से दोनों के रिलेशनशिप को लेकर कई तरह की बातें की जा रही थी। फैन पेज और इंस्टा अकाउंट्स ने अलग-अलग इवेंट्स की तस्वीरों को मिलाकर यह अनुमान लगाना शुरू कर दिया था। कुछ अनवेरिफाइड रिपोर्ट्स में कहा गया कि दोनों एक ही समय के आसपास अलग-अलग जगहों पर नजर आए थे। इसमें मंदिर के दर्शन और स्पोर्ट्स मैच शामिल थे। इन बातों का कोई पुख्ता सबूत नहीं था, फिर भी इसे दोनों के अफेयर से जोड़कर देखा जाने लगा। सोर्स बोले- अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं मामले से जुडे एक करीबी सोर्स ने इस पूरे विवाद पर खुलकर बात की है। सोर्स ने कहा कि तिलक वर्मा और श्रीलीला को लेकर जो भी बातें कही जा रही है, वे पूरी तरह से आधारहीन और झूठी है। दोनों कभी एक-दूसरे से आमने-सामने नहीं मिले है। सोर्स ने यह भी साफ किया कि लोगों को बिना किसी फैक्ट या सच्चाई के ऐसी मनगढंत बातें सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करना चाहिए। नेशनल अवार्ड फिल्म में काम कर चुकी है श्रीलीला एक्ट्रेस श्रीलीला साउथ सिनेमा का एक बड़ा नाम है। उन्होंने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत बेहद कम उम्र में की थी। फिल्म ‘भगवंत केसरी’ से उन्हें इंडस्ट्री में पहचान मिली। इस फिल्म को 71वें नेशनल फिल्म अवार्ड्स में बेस्ट तेलुगु फीचर फिल्म का अवार्ड भी मिला है। श्रीलीला को आखिरी बार फिल्म ‘उस्ताद भगत सिंह’ में देखा गया था। आने वाले समय में वह धनुष की फिल्म ‘धनुष 55’ में नजर आने वाली है। इसके अलावा वह बॉलीवुड के कुछ बडे प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है।

तिलक वर्मा और श्रीलीला के अफेयर की खबरें अफवाह:दावा- दोनों कभी एक-दूसरे से मिले तक नहीं; सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहें

तिलक वर्मा और श्रीलीला के अफेयर की खबरें अफवाह:दावा- दोनों कभी एक-दूसरे से मिले तक नहीं; सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहें

साउथ फिल्म एक्ट्रेस श्रीलीला और भारतीय क्रिकेटर तिलक वर्मा के बीच किसी तरह का रिलेशनशिप नहीं है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक मामले से जुड़े एक सूत्र ने इस बात की पुष्टि की है। दरअसल पिछले की दिनों से सोशल मीडिया पर दोनों के रिलेशन की चर्चा की जा रही थी। सूत्र ने इन दावों को पूरी तरह से गलत और बिना किसी आधार का बताया है। सोर्स के मुताबिक, श्रीलीला और तिलक वर्मा कभी एक-दूसरे से मिले भी नहीं है और न ही दोनों के बीच कभी कोई बात हुई है। सोशल मीडिया पर दोनों को लेकर फैलाई जा रही बातें पूरी तरह से अफवाह है। सोशल मीडिया पर ऐसे शुरू हुई थी चर्चा इंटरनेट पर पिछले कुछ समय से दोनों के रिलेशनशिप को लेकर कई तरह की बातें की जा रही थी। फैन पेज और इंस्टा अकाउंट्स ने अलग-अलग इवेंट्स की तस्वीरों को मिलाकर यह अनुमान लगाना शुरू कर दिया था। कुछ अनवेरिफाइड रिपोर्ट्स में कहा गया कि दोनों एक ही समय के आसपास अलग-अलग जगहों पर नजर आए थे। इसमें मंदिर के दर्शन और स्पोर्ट्स मैच शामिल थे। इन बातों का कोई पुख्ता सबूत नहीं था, फिर भी इसे दोनों के अफेयर से जोड़कर देखा जाने लगा। सोर्स बोले- अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं मामले से जुडे एक करीबी सोर्स ने इस पूरे विवाद पर खुलकर बात की है। सोर्स ने कहा कि तिलक वर्मा और श्रीलीला को लेकर जो भी बातें कही जा रही है, वे पूरी तरह से आधारहीन और झूठी है। दोनों कभी एक-दूसरे से आमने-सामने नहीं मिले है। सोर्स ने यह भी साफ किया कि लोगों को बिना किसी फैक्ट या सच्चाई के ऐसी मनगढंत बातें सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करना चाहिए। नेशनल अवार्ड फिल्म में काम कर चुकी है श्रीलीला एक्ट्रेस श्रीलीला साउथ सिनेमा का एक बड़ा नाम है। उन्होंने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत बेहद कम उम्र में की थी। फिल्म ‘भगवंत केसरी’ से उन्हें इंडस्ट्री में पहचान मिली। इस फिल्म को 71वें नेशनल फिल्म अवार्ड्स में बेस्ट तेलुगु फीचर फिल्म का अवार्ड भी मिला है। श्रीलीला को आखिरी बार फिल्म ‘उस्ताद भगत सिंह’ में देखा गया था। आने वाले समय में वह धनुष की फिल्म ‘धनुष 55’ में नजर आने वाली है। इसके अलावा वह बॉलीवुड के कुछ बडे प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है।

Sisters Lover Murder, Girl Beaten Outside Club; CNG Price Hike

Sisters Lover Murder, Girl Beaten Outside Club; CNG Price Hike

. पंजाब में आज की सबसे बड़ी खबर CNG के रेट बढ़ने से जुड़ी रही। CNG की कीमत में 2 रुपए प्रति किलोग्राम तक बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए थे। अब गैस से चलने वाली गाड़ियों पर भी बोझ पड़ेगा। दिनभर की 10 चुनिंदा बड़ी खबरों को VIDEO में देखने के लिए ऊपर क्लिक करें… इन 10 बड़ी खबरों को विस्तार से यहां पढ़ भी सकते हैं। तो आइए जानते हैं, पंजाब-चंडीगढ़ में दिनभर में क्या कुछ खास रहा… 1. पेट्रोल-डीजल और दूध के बाद अब CNG महंगी पंजाब और चंडीगढ़ में पेट्रोल-डीजल और दूध के बाद अब कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) के रेट भी बढ़ गए हैं। थिंक गैस ने CNG की कीमत में 2 रुपए प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी कर दी है। वहीं इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने CNG के दाम में 1.25 रुपए की बढ़ोतरी की। नई दरें बीते कल से लागू हो चुकी हैं। लुधियाना में थिंक गैस की CNG अब 88.75 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से मिल रही है। इससे पहले यहां CNG की कीमत 86.75 रुपए प्रति किलो थी। जबकि मोहाली में अडानी गैस ने सवा रुपए की बढ़ोतरी की। मोहाली में पहले रेट 93 रुपए थे, जो कि 94.25 रुपए हो गए हैं। चंडीगढ़ में पहले IOCL की CNG का रेट 93 रुपए प्रति किलो था, जो बढ़कर अब 94.25 रुपए प्रति किलो हो गया है। इससे पहले 15 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम में 3-3 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी। जालंधर में अडानी टोटल गैस लिमिटेड ने CNG के रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। (पढ़ें पूरी खबर) 2. प्रॉपर्टी डीलर नहर में कूदा, मरने से पहले वीडियो बनाया लुधियाना में प्रॉपर्टी कारोबारी ने नीलों पुल से सरहिंद नहर में छलांग लगा दी। घटना से पहले कारोबारी ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने अपनी मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के नामों का जिक्र किया है। जानकारी के अनुसार, वह 15 मई को खाना खाने के बाद दुकान के लिए निकला था, लेकिन वह वहां नहीं पहुंचा। कुछ देर बाद उसके नंबर से बड़े भाई के वॉट्सऐप पर दो वीडियो आए। जिससे परिवार को पता चला। नहर में कूदने के बाद कारोबारी लापता हो गया था। पुलिस और गोताखोरों की टीम उसकी तलाश में जुटी। इसके बाद पुलिस ने गांव गुरथली में आज सरहिंद नहर से उसका शव बरामद कर लिया है। (पढ़ें पूरी खबर) 3. VVIP-अफसरों के काफिले की गाड़ियां होगी कम पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील की है। इसका असर अब पंजाब में भी दिखना शुरू हो गया है। इसी कड़ी में चंडीगढ़ में आगामी बुधवार को सभी सरकारी दफ्तरों के कर्मचारी बसों या साइकिल से ऑफिस आएंगे। वहीं, अधिकारियों व वीवीआईपी के काफिलों में चलने वाले वाहनों की संख्या भी कम होगी। पंजाब के गवर्नर एवं चंडीगढ़ प्रशासक ने यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने सिक्योरिटी विभाग को पत्र लिखा है, ताकि बाद में किसी तरह की दिक्कत न हो। उन्होंने कहा कि मैंने तो पहले ही दिन सबको कह दिया था कि बुधवार के दिन हमारा कोई भी स्टाफ मेंबर अपनी सरकारी गाड़ी का उपयोग नहीं करेगा। चाहे वो साइकिल से आए, चाहे पैदल आए, चाहे जो बसें हमारी चलती हैं, उनसे आए। अगर उससे भी नहीं हो, तो उसका परिवार का कोई व्यक्ति उसे छोड़कर जाए। लेकिन एक प्रयास अगले बुधवार से हम कर रहे हैं। (पढ़ें पूरी खबर) 4. किन्नरों ने युवती को पीटा, जमीन पर गिरा जमकर लात-घूंसे मारे चंडीगढ़ में क्लब के बाहर किन्नरों ने एक युवती की जमकर पिटाई कर दी। इसका VIDEO सामने आया है। इसमें किन्नर एक युवती को घसीटते हैं और फिर नीचे गिराकर मारपीट करते हुए नजर आते हैं। वह युवती को जमकर लात-घूंसे मार रहे हैं। इस दौरान वहां कुछ युवक भी खड़े हैं लेकिन किन्नरों की वजह से कोई बीच-बचाव नहीं करता। हालांकि इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर झूठे दावे के साथ शेयर किया गया है। जिसमें कहा गया कि चंडीगढ़ के सेक्टर 26 के मशहूर क्लब के बाहर शराब के नशे में धुत लड़कियों के बीच फाइट हो रही है। दैनिक भास्कर की टीम सच्चाई जानने सेक्टर 26 पहुंची तो पता चला कि यह लड़ाई किन्नरों ने की थी। यह वीडियो 2 दिन पुराना है। मौके से यह पता चला कि जिस लड़की के साथ मारपीट की गई, वह नशे में थी। उसने किन्नरों पर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी, जिस वजह से उन्होंने युवती पर हमला कर दिया। पुलिस का कहना है कि वीडियो की जांच की जा रही है। (पढ़ें पूरी खबर) 5. मंत्री अरोड़ा के बाद 2 अफसरों समेत 4 को समन पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद ED ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, ईडी ने अब पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर बसंत गर्ग को तलब किया है। इसके अलावा 3 अन्य लोगों को भी सोमवार को पेश होने के आदेश दिए गए हैं। इनमें पावरकॉम की डायरेक्टर (कमर्शियल) हरशरण कौर त्रेहन, 2 कारोबारी साझेदार हेमंत सूद और चंद्रशेखर शामिल हैं। यह मामला मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़ी एक निजी कंपनी को करोड़ों रुपए की बैंक गारंटी कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से वापस कर फायदा पहुंचाने से संबंधित है। सोमवार को ही संजीव अरोड़ा की याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई होगी, जिसमें ईडी की ओर से जवाब दाखिल किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इस नोटिस के बाद पावरकॉम इस मामले से संबंधित सभी फाइलें और रिकॉर्ड ईडी को सौंपने की तैयारी में है। अधिकारी मांगे गए दस्तावेज जांच एजेंसी के कार्यालय लेकर जाएंगे। (पढ़ें पूरी खबर) 6. पुलिस कस्टडी से भागे कैदी की मौत का VIDEO सामने आया होशियारपुर में पुलिस कस्टडी से भागने की कोशिश कर रहे कैदी की पुलिस मुठभेड़ में मौत का वीडियो सामने आया है। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि एक पुलिसकर्मी ई-रिक्शा के अंदर बैठा है और कैदी को उसमें बैठाने की कोशिश कर रहा

कोरोना के बाद एक और वायरस की ग्लोबल इमरजेंसी, अफ्रीकी देशों में मची तबाही, चपेट में आए तो मौत पक्की !

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Ebola Outbreak Worsens in Africa: इबोला वायरस का सबसे खतरनाक वेरिएंट इस वक्त अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो (DRC) और युगांडा में तबाही मचा रहा है. इस वेरिएंट का नाम बुंडीबुग्यो वायरस है. यह खतरनाक वायरस इन 2 देशों में तेजी से फैल रहा है और अब तक 88 लोगों की मौत हो चुकी है. करीब 300 से ज्यादा लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं और इसने दुनिया भर में हेल्थ एक्सपर्ट्स की टेंशन बढ़ा दी है. लगातार बढ़ते मामलों और मौतों को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC) घोषित कर दिया है. कोविड के बाद पहली बार WHO ने किसी वायरस को लेकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी का ऐलान किया है. WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने औपचारिक इमरजेंसी कमेटी की बैठक से पहले ही रविवार को इसे PHEIC घोषित करने का फैसला लिया. इसका मतलब है कि बीमारी के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने का खतरा गंभीर माना जा रहा है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी जल्दी लिया गया निर्णय इस बात का संकेत है कि स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है और तुरंत कार्रवाई की जरूरत है. WHO का मानना है कि इबोला के बुंडीबुग्यो वेरिएंट के कारण होने वाली मौतें और संक्रमित लोगों की संख्या बहुत ज्यादा हो सकती है, क्योंकि संघर्ष प्रभावित इलाकों में जांच और रिपोर्टिंग बेहद मुश्किल है. कई संक्रमित लोग अस्पताल तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं और उससे पहले ही दम तोड़ रहे हैं. क्या है इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन? बुंडीबुग्यो वायरस इबोला के 3 प्रमुख स्ट्रेन में से एक है और इसे सबसे दुर्लभ वेरिएंट माना जाता है. यह इबोला वायरस डिजीज (EVD) का कारण बनता है. चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि इस स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई वैक्सीन, इलाज या विशेष टेस्ट उपलब्ध नहीं है. WHO ने कहा कि इबोला के जेयर स्ट्रेन (Zaire strain) के लिए वैक्सीन और कुछ ट्रीटमेंट मौजूद हैं, लेकिन बुंडीबुग्यो के खिलाफ अभी तक कोई प्रभावी स्वीकृत मेडिकल सुरक्षा नहीं है. यही वजह है कि WHO ने इस प्रकोप को असाधारण स्थिति बताया है. अगर इबोला की बात करें, तो यह बेहद संक्रामक और जानलेवा वायरस है. यह संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, पसीने, लार और अन्य बॉडी फ्लूइड्स के संपर्क से फैलता है. यह बीमारी इंसानों के साथ-साथ कुछ जानवरों में भी फैल सकती है. यह वायरस शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है और गंभीर मामलों में अंदरूनी और बाहरी ब्लीडिंग शुरू हो सकती है. इस वजह से इसे ब्लीडिंग फीवर भी कहा जाता है. बुंडीबुग्यो वायरस के लक्षण क्या हैं? इबोला वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई दे सकते हैं, जिसकी वजह से शुरुआत में इसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है. संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, सिरदर्द, गले में दर्द, शरीर और मांसपेशियों में तेज दर्द, कमजोरी और अत्यधिक थकान महसूस हो सकती है. जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, बीमारी गंभीर रूप लेने लगती है. मरीज को उल्टी, दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर रैश, आंखों में लालिमा और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं होने लगती हैं. गंभीर मामलों में शरीर के अंदर और बाहर ब्लीडिंग भी शुरू हो सकती है, जो इस बीमारी को बेहद जानलेवा बना देती है. WHO के अनुसार इबोला के लक्षण संक्रमण के 2 से 21 दिनों के भीतर कभी भी दिखाई दे सकते हैं. क्या है ट्रीटमेंट और कैसे करें बचाव? इबोला वायरस के लिए फिलहाल कोई असरदार और सभी स्ट्रेन्स पर काम करने वाला इलाज नहीं है, लेकिन समय पर मेडिकल देखभाल मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है. डॉक्टर मरीज को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए शरीर में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स देते हैं, ऑक्सीजन सपोर्ट, ब्लड प्रेशर कंट्रोल और संक्रमण से जुड़ी अन्य समस्याओं का इलाज किया जाता है. कुछ मामलों में एंटीवायरल दवाओं और एक्सपेरिमेंटल ट्रीटमेंट का भी इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष दवा मौजूद नहीं है. बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, उल्टी, लार और अन्य बॉडी फ्लूइड्स के संपर्क से बचना बेहद जरूरी है. बार-बार साबुन से हाथ धोना, मास्क और ग्लव्स का इस्तेमाल करना, संक्रमित मरीजों को आइसोलेशन में रखना और भीड़भाड़ वाले संक्रमित क्षेत्रों की यात्रा से बचना संक्रमण रोकने के सबसे प्रभावी तरीके माने जाते हैं. क्या यह महामारी बन सकता है? WHO ने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह स्थिति महामारी की श्रेणी में नहीं आती, लेकिन पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने का मकसद अंतरराष्ट्रीय समर्थन और संसाधनों को तेजी से जुटाना है. अफ्रीका CDC के महानिदेशक डॉ. जीन कसेया के अनुसार अधिकारियों को अभी तक यह नहीं पता चल पाया है कि संक्रमण की शुरुआत कहां से हुई. देर से पहचान होने के कारण वायरस को फैलने का समय मिल गया. बुंडीबुग्यो वायरस का पहला ज्ञात मामला 24 अप्रैल को एक नर्स में सामने आया था. इसके अलावा युगांडा में जिन लोगों में इस वायरस का संक्रमण मिला है, वे कॉन्गो की यात्रा से वापस आए थे. ऐसे में इंटरनेशनल ट्रैवलिंग के कारण इस वायरस के अन्य देशों में फैलने का भी खतरा है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

Chitrak Cheeta Benefits I चित्रक जड़ के फायदे

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Last Updated:May 17, 2026, 17:19 IST आयुर्वेद में चित्रक चीता को एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग कफ, गैस, अपच, कमजोरी और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं में किया जाता रहा है. हालांकि इसकी तासीर तेज मानी जाती है, इसलिए इसका सेवन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार कुछ औषधीय पौधों को शरीर में जमा कफ को संतुलित करने में सहायक माना जाता है. चित्रक चीता भी ऐसे पौधों में शामिल बताया जाता है, पारंपरिक चिकित्सा में इसका उपयोग सर्दी-जुकाम, कफ और मौसम बदलने पर होने वाली कुछ सामान्य परेशानियों में किया जाता रहा है. माना जाता है कि यह शरीर की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. हालांकि, इसका उपयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति के शरीर पर इसका असर अलग हो सकता है. भारत में आयुर्वेद का इतिहास काफी पुराना है. प्राचीन समय से ही कई औषधीय पौधों का उपयोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है. ऐसे ही खास पौधों में चित्रक चीता का नाम भी शामिल है. आयुर्वेद में इसे महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है. इसकी जड़ और कुछ अन्य हिस्सों का उपयोग पारंपरिक उपचारों में लंबे समय से किया जाता रहा है. हालांकि किसी भी औषधीय पौधे का इस्तेमाल डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए. आयुर्वेद में चित्रक चीता का उपयोग कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में भी बताया गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका इस्तेमाल अलग-अलग तरीकों से किया जाता रहा है. माना जाता है कि इसके कुछ गुण त्वचा से जुड़ी परेशानियों में सहायक हो सकते हैं. हालांकि इसकी तासीर तेज मानी जाती है, इसलिए इसका उपयोग बहुत सावधानी और सही मात्रा में करना जरूरी होता है. बिना जानकारी या विशेषज्ञ की सलाह के इसका प्रयोग करना नुकसानदायक भी हो सकता है. किसी भी औषधीय पौधे की तरह इसका उपयोग भी चिकित्सकीय सलाह के बाद ही करना बेहतर माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google  आजकल अनियमित खानपान और तली-भुनी चीजों के अधिक सेवन से कई लोगों को गैस और पेट फूलने की समस्या हो जाती है. आयुर्वेद में चित्रक चीता को पेट से जुड़ी परेशानियों में उपयोगी माना गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और गैस की समस्या को कम करने के लिए किया जाता रहा है. हालांकि, किसी भी औषधीय पौधे का सेवन विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि आयुर्वेद में चित्रक चीता को पाचन तंत्र के लिए लाभकारी माना गया है. कहा जाता है कि यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. अपच, पेट भारी रहना, गैस या भोजन ठीक से न पचने जैसी समस्याओं में पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है. हालांकि इसका सेवन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार चित्रक चीता को शरीर की कमजोरी और थकान दूर करने में उपयोगी माना जाता है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह शरीर को ऊर्जा देने और सुस्ती कम करने में मदद कर सकता है. जब व्यक्ति लगातार थकान या कमजोरी महसूस करता है, तब पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग बताया जाता है। हालांकि इसके प्रभाव व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर कर सकते हैं. कुछ आयुर्वेदिक जानकारों के अनुसार चित्रक चीता में ऐसे गुण बताए जाते हैं, जो शरीर की सूजन से जुड़ी समस्याओं में सहायक हो सकते हैं. कई बार शरीर में सूजन थकान, चोट या अन्य कारणों से भी हो सकती है. पारंपरिक उपचारों में चित्रक चीता का उपयोग ऐसी परेशानियों को कम करने के लिए किया जाता रहा है. हालांकि इसके प्रभाव को लेकर हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है. आज के समय में लोग प्राकृतिक और आयुर्वेदिक चीजों की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. लेकिन किसी भी पौधे को चमत्कारी मानकर इस्तेमाल करने से पहले सही जानकारी लेना जरूरी है. आयुर्वेद में चित्रक चीता का विशेष महत्व जरूर बताया गया है, लेकिन सुरक्षित और सही उपयोग ही सबसे ज्यादा जरूरी होता है. स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी परेशानी में डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना हमेशा बेहतर विकल्प माना जाता है. बढ़ती उम्र, बदलती जीवनशैली और शरीर में पोषण की कमी के कारण कई लोगों को जोड़ों के दर्द और शरीर में अकड़न की समस्या होने लगती है. इससे चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी हो सकती है. आयुर्वेद में चित्रक चीता को ऐसी समस्याओं में उपयोगी माना गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है. कुछ आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि यह जोड़ों से जुड़ी परेशानियों में सहायक हो सकता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। उत्तर प्रदेश की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|

भारत में घुसपैठ के बाद आतंकी हेयर ट्रांसप्लांट कराने पहुंचा:स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने आया था; जांच एजेंसी से बोला- कश्मीर देखकर मकसद बदल गए

भारत में घुसपैठ के बाद आतंकी हेयर ट्रांसप्लांट कराने पहुंचा:स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने आया था; जांच एजेंसी से बोला- कश्मीर देखकर मकसद बदल गए

भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए घुसपैठ करने वाले लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक पाकिस्तानी आतंकी ने अपना सपना पूरा करने के लिए मिशन को बीच में रोक दिया। आतंकी ने श्रीनगर में हेयर ट्रांसप्लांट कराया और फर्जी आधार-पैन बनवाकर भारत से भागने की योजना बना रहा था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने रविवार को बताया कि आतंकी का नाम मोहम्मद उस्मान जट उर्फ ‘चाइनीज’ है। पूछताछ में उसने दावा किया कि कश्मीर की असली जिंदगी देखने के बाद उसके मकसद पूरी तरह बदल गए। आतंकी ने बताया कि पाकिस्तान में लश्कर के ट्रेनिंग कैंपों में उसे कश्मीर को लेकर जो बताया गया था, वहां तस्वीर बिल्कुल अलग थी। श्रीनगर पुलिस ने पिछले महीने उस्मान जट और अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा को गिरफ्तार किया था। दोनों को जम्मू-कश्मीर के बाहर स्लीपर आतंकी ठिकाने बनाने का काम सौंपा गया था। पूछताछ के दौरान जट ने बताया कि दोनों ने जम्मू-कश्मीर में उत्तरी हिस्से में कहां से घुसपैठ की थी। उसने किन-किन जगहों पर रहे, वह भी बताया। अधिकारियों के मुताबिक, अबू हुरैरा लश्कर-ए-तैयबा का सबसे लंबे समय तक बचा रहने वाला आतंकी है। वहीं उस्मान जट लाहौर का रहने वाला है और लश्कर का प्रशिक्षित ऑपरेटिव है। वह उत्तर और मध्य कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा। गिरफ्तार आतंकी ने बताया कि वह कई सालों से गंभीर हेयर लॉस की समस्या से जूझ रहा था, जिससे उसका आत्मविश्वास काफी प्रभावित हुआ था। उसने कहा कि उसने पहले भी हेयर रिस्टोरेशन प्रक्रिया के बारे में सुना था, लेकिन उसे लगता था कि यह सिर्फ पश्चिमी देशों में मिलने वाली महंगी सुविधा है। अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर की ऊपरी पहाड़ियों में रहने के दौरान उसकी मुलाकात पाकिस्तानी आतंकियों जरगाम और अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा से हुई। उसने उन लोगों के बारे में भी जानकारी दी जिनके साथ वह ठहरा था। इसी जानकारी के आधार पर श्रीनगर पुलिस ने उत्तर कश्मीर और श्रीनगर शहर में सक्रिय आतंकियों के ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) के पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। OGW नेटवर्क के बारे में जानकारी देते हुए गिरफ्तार आतंकी ने कहा कि जरगाम उसे एक दुकान पर ले गया और बताया कि दुकान का मालिक भरोसेमंद व्यक्ति है। दुकानदार से बातचीत के दौरान जट को पता चला कि उसने खुद भी हेयर ट्रांसप्लांट कराया है। इसके बाद आतंकी लगातार उस दुकानदार के संपर्क में रहा और उससे हेयर ट्रांसप्लांट कराने में मदद मांगी। अधिकारियों ने बताया कि आखिरकार उसे शहर के भीतर ही एक क्लिनिक ले जाया गया, जहां उसका हेयर ट्रांसप्लांट किया गया। कई बार प्रक्रिया के दौरान उसे क्लिनिक में रातभर रुकना भी पड़ा।प्रक्रिया पूरी होने के बाद जट, जिसने पहले ही अबू हुरैरा के साथ संपर्क बना लिया था, यात्री वाहन से जम्मू गया और फिर स्लीपर बस से पंजाब के मालेरकोटला पहुंचा। अधिकारियों के मुताबिक वहां उसने तुर्की के टीवी शो देखे और अंग्रेजी सीखने की कोशिश की। गिरफ्तार आतंकी ने पूछताछ में बताया कि वह असली आधार कार्ड, पैन कार्ड और बाद में पासपोर्ट बनवाना चाहता था ताकि उमर उर्फ ‘खरगोश’ की तरह भारत से भाग सके। अधिकारियों के अनुसार उमर फर्जी पासपोर्ट के जरिए भारत से निकलकर इंडोनेशिया पहुंच गया था और वहां से किसी अन्य फर्जी यात्रा दस्तावेज के सहारे खाड़ी देश में जाकर छिपा हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान के कराची निवासी उमर ने 2012 के बाद भारत में घुसपैठ की थी और 2024 में राजस्थान के जयपुर से बनवाए गए फर्जी पासपोर्ट के जरिए फरार हो गया था।

भारत में घुसपैठ के बाद आतंकी हेयर ट्रांसप्लांट कराने पहुंचा:स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने आया था; जांच एजेंसी से बोला- कश्मीर देखकर मकसद बदल गए

भारत में घुसपैठ के बाद आतंकी हेयर ट्रांसप्लांट कराने पहुंचा:स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने आया था; जांच एजेंसी से बोला- कश्मीर देखकर मकसद बदल गए

भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने के मकसद से घुसे लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक पाकिस्तानी आतंकी ने अपना सपना पूरा करने के लिए मिशन को बीच में रोक दिया। आतंकी ने श्रीनगर में हेयर ट्रांसप्लांट कराया और फर्जी आधार-पैन बनवाकर भारत से भागने की योजना बना रहा था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने रविवार को बताया कि आतंकी का नाम मोहम्मद उस्मान जट्ट उर्फ ‘चाइनीज’ है। पिछले महीने श्रीनगर पुलिस ने जट्ट और अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा को गिरफ्तार किया था। दोनों पर जम्मू-कश्मीर से बाहर स्लीपर बेस तैयार करने का आरोप है। बाद में जांच NIA को सौंप दी गई। NIA की पूछताछ में जट्ट ने दावा किया कि कश्मीर की असली जिंदगी देखने के बाद उसके मकसद पूरी तरह बदल गए। उसने बताया कि पाकिस्तान में लश्कर के ट्रेनिंग कैंपों में उसे कश्मीर को लेकर जो बताया गया था, वहां तस्वीर बिल्कुल अलग थी। भारत में स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने आया था आतंकी अधिकारियों के मुताबिक, उस्मान जट्ट लाहौर का रहने वाला है और लश्कर का प्रशिक्षित ऑपरेटिव है। वह उत्तर और मध्य कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा। उसे भारत में घुसपैठ के बाद जम्मू-कश्मीर के बाहर आतंकियों का स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने का काम सौंपा गया था। NIA के अनुसार, जट्ट भारत में घुसने के बाद श्रीनगर की ऊपरी पहाड़ियों में रहा। इस दौरान उसकी मुलाकात पाकिस्तानी आतंकियों- जरगाम और अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा से हुई। अबू हुरैरा लश्कर से जुड़ा पुराना आतंकी है। दुकानदार से हेयर ट्रांसप्लांट की जानकारी मिली जट्ट के मुताबिक, आतंकी जरगाम श्रीनगर में उसे एक दुकान पर ले गया और बताया कि दुकान का मालिक भरोसेमंद व्यक्ति है। दुकानदार से बातचीत के दौरान जट्ट को पता चला कि उसने हेयर ट्रांसप्लांट कराया है। इसके बाद आतंकी जट्ट ने भी हेयर ट्रांसप्लांट ट्रीटमेंट लेने का फैसला किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह कई सालों से गंभीर हेयर लॉस की समस्या से जूझ रहा था। वह हेयर ट्रांसप्लांट कराना चाहता था, लेकिन उसे लगता था कि यह सुविधाएं सिर्फ पश्चिमी देशों में ऊंचे दामों पर मिलती है। आतंकी पंजाब गया, अंग्रेजी सीखने की कोशिश की आतंकी ने अधिकारियों को बताया कि वह दुकानदार के संपर्क में रहा और उससे हेयर ट्रांसप्लांट कराने में मदद मांगी। इसके बाद वह दुकानदार उसे शहर के भीतर ही एक क्लिनिक ले गया, जहां आतंकी का हेयर ट्रांसप्लांट किया गया। इस दौरान कई सेशन हुए। इसके लिए आतंकी को कई बार क्लिनिक में रातभर रुकना भी पड़ा। ट्रांसप्लांट के बाद जट्ट पैसेंजर गाड़ी से जम्मू गया और फिर स्लीपर बस से पंजाब के मालेरकोटला पहुंचा। वहां उसने तुर्की के टीवी शो देखे और अंग्रेजी सीखने की कोशिश की। फर्जी आधार-पैन और पासपोर्ट बनवाने की तैयारी पूछताछ में आतंकी ने बताया कि वह असली आधार कार्ड, PAN कार्ड और बाद में पासपोर्ट बनवाना चाहता था ताकि भारत से भाग सके। अधिकारियों के अनुसार वह उमर उर्फ ‘खरगोश’ की तरह भागने की योजना बना रहा था। उमर पाकिस्तान के कराची का रहने वाला आतंकी है, जो 2024 में जयपुर से फर्जी पासपोर्ट बनवाकर इंडोनेशिया भाग गया था। अभी खाड़ी के देश में छिपा है। दिल्ली बम धमाके के बाद भी पकड़ाया था टेरर मॉड्यूल लश्कर-ए-तैयबा के इस अंतरराज्यीय मॉड्यूल का खुलासा नवंबर 2025 में अल-फलाह मॉड्यूल के भंडाफोड़ के करीब छह महीने बाद हुआ है। उस मॉड्यूल में डॉक्टरों समेत कई पढ़े-लिखे लोगों के कट्टरपंथी नेटवर्क का खुलासा हुआ था। आरोपियों में अल फलाह यूनिवर्सिटी का डॉ. उमर-उन-नबी भी शामिल था, जो पिछले साल 10 नवंबर को लाल किले के बाहर विस्फोटकों से भरी कार चला रहा था। उस धमाके में एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी

Foreign investors pull Rs 27,000 crore in May from Indian Market; 2026 outflows cross Rs 2.2 lakh crore mark

Foreign investors pull Rs 27,000 crore in May from Indian Market; 2026 outflows cross Rs 2.2 lakh crore mark

Hindi News Business Foreign Investors Pull Rs 27,000 Crore In May From Indian Market; 2026 Outflows Cross Rs 2.2 Lakh Crore Mark मुंबई9 मिनट पहले कॉपी लिंक विदेशी निवेशकों (FPIs) ने इस महीने (मई) भारतीय शेयर बाजार से अब तक ₹27,048 करोड़ की नकदी निकाल ली है। ग्लोबल इकोनॉमिक एनवायरमेंट और जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार भारतीय इक्विटी बाजार में अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं। इस ताजा बिकवाली के साथ साल 2026 में अब तक कुल आउटफ्लो ₹2.2 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है, जो साल 2025 की कुल बिकवाली से भी ज्यादा है। FPI ने फरवरी छोड़कर हर महीने बिकवाली की नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के डेटा के मुताबिक, साल 2026 में फरवरी महीने को छोड़कर विदेशी निवेशक हर महीने नेट सेलर्स (बिकवाल) रहे हैं। जनवरी में निवेशकों ने ₹35,962 करोड़ बाजार से निकाले थे। इसके बाद फरवरी में ट्रेंड बदला और उन्होंने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया, जो पिछले 17 महीनों में किसी एक महीने का सबसे बड़ा इनफ्लो था। मार्च में बना था ₹1.17 लाख करोड़ का रिकॉर्ड फरवरी की राहत के बाद मार्च में विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ के शेयर बेचे। बिकवाली का यह सिलसिला अप्रैल में भी जारी रहा, जब बाजार से ₹60,847 करोड़ का नेट आउटफ्लो हुआ। मई में भी यह कमजोरी बनी रही और अब तक ₹27,048 करोड़ से ज्यादा की रकम निकाली जा चुकी है। साल 2026 में अब तक हुई ₹2.2 लाख करोड़ की कुल बिकवाली पिछले पूरे साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। साल 2025 में पूरे साल के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से कुल ₹1.66 लाख करोड़ रुपए निकाले थे। इस साल पांच महीनों में ही यह आंकड़ा पार हो गया है। डॉलर-अमेरिकी बॉन्ड यील्ड मजबूत होने से दबाव बढ़ा मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल – मैनेजर रिसर्च, हिमांशु श्रीवास्तव ने इस ट्रेंड पर कहा कि वैश्विक विकास (ग्लोबल ग्रोथ) को लेकर बनी अनिश्चितता, मुख्य क्षेत्रों में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की अस्थिर कीमतों की वजह से उभरते बाजारों (इमर्जिंग मार्केट्स) के प्रति निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ी हुई यूएस बॉन्ड यील्ड इस बिकवाली के मुख्य कारण हैं। विकसित बाजारों में बेहतर रिटर्न मिलने से सुरक्षित संपत्तियों का आकर्षण बढ़ा है और निवेशक डिफेंसिव रुख अपना रहे हैं। इसके अलावा ग्लोबल इन्फ्लेशन (महंगाई) और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती के समय को लेकर बनी अनिश्चितता भी फंड एलोकेशन के फैसलों को प्रभावित कर रही है। रुपए पर दबाव बढ़ा, ₹96.14 के स्तर पर पहुंचा जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वी के विजयकुमार के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और बढ़ते करंट अकाउंट डेफिसिट (चालू खाता घाटा) के कारण रुपए पर भारी दबाव देखा जा रहा है। साल की शुरुआत में डॉलर के मुकाबले रुपया 90 के स्तर पर था, जो 15 मई को 96 के स्तर को पार करते हुए 96.14 पर पहुंच गया है। AI कंपनियों की तरफ डायवर्ट हो रहा है फंड वी के विजयकुमार ने बताया कि अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही और कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने रहे, तो रुपया आगे और कमजोर हो सकता है। इसके साथ ही दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर फोकस करने वाली कंपनियों में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। इस वजह से भारत जैसे देशों से फंड डायवर्ट हो रहा है, जिन्हें AI के क्षेत्र में थोड़ा पीछे माना जा रहा है। हालांकि, जब AI ट्रेड का मौजूदा बबल शांत होगा, तब यह ट्रेंड वापस बदल सकता है। FPI और बॉन्ड यील्ड क्या होते हैं? फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI): जब किसी देश के नागरिक या कंपनियां दूसरे देश के शेयर बाजार, बॉन्ड या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो उसे फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट कहा जाता है। इन्हें शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टर भी माना जाता है जो बाजार के हालातों को देखकर तेजी से पैसा निकालते या निवेश करते हैं। बॉन्ड यील्ड: बॉन्ड यील्ड वह रिटर्न या ब्याज होता है जो एक निवेशक को बॉन्ड में निवेश करने पर मिलता है। जब अमेरिका जैसे विकसित देशों में सरकारी बॉन्ड की यील्ड (रिटर्न) बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक भारतीय बाजार जैसे जोखिम वाले शेयर बाजारों से पैसा निकालकर वहां सुरक्षित सरकारी बॉन्ड में निवेश करने लगते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Foreign investors pull Rs 27,000 crore in May from Indian Market; 2026 outflows cross Rs 2.2 lakh crore mark

Foreign investors pull Rs 27,000 crore in May from Indian Market; 2026 outflows cross Rs 2.2 lakh crore mark

Hindi News Business Foreign Investors Pull Rs 27,000 Crore In May From Indian Market; 2026 Outflows Cross Rs 2.2 Lakh Crore Mark मुंबई42 मिनट पहले कॉपी लिंक विदेशी निवेशकों (FPIs) ने इस महीने (मई) भारतीय शेयर बाजार से अब तक ₹27,048 करोड़ की नकदी निकाल ली है। ग्लोबल इकोनॉमिक एनवायरमेंट और जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार भारतीय इक्विटी बाजार में अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं। इस ताजा बिकवाली के साथ साल 2026 में अब तक कुल आउटफ्लो ₹2.2 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है, जो साल 2025 की कुल बिकवाली से भी ज्यादा है। FPI ने फरवरी छोड़कर हर महीने बिकवाली की नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के डेटा के मुताबिक, साल 2026 में फरवरी महीने को छोड़कर विदेशी निवेशक हर महीने नेट सेलर्स (बिकवाल) रहे हैं। जनवरी में निवेशकों ने ₹35,962 करोड़ बाजार से निकाले थे। इसके बाद फरवरी में ट्रेंड बदला और उन्होंने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया, जो पिछले 17 महीनों में किसी एक महीने का सबसे बड़ा इनफ्लो था। मार्च में बना था ₹1.17 लाख करोड़ का रिकॉर्ड फरवरी की राहत के बाद मार्च में विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ के शेयर बेचे। बिकवाली का यह सिलसिला अप्रैल में भी जारी रहा, जब बाजार से ₹60,847 करोड़ का नेट आउटफ्लो हुआ। मई में भी यह कमजोरी बनी रही और अब तक ₹27,048 करोड़ से ज्यादा की रकम निकाली जा चुकी है। साल 2026 में अब तक हुई ₹2.2 लाख करोड़ की कुल बिकवाली पिछले पूरे साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। साल 2025 में पूरे साल के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से कुल ₹1.66 लाख करोड़ रुपए निकाले थे। इस साल पांच महीनों में ही यह आंकड़ा पार हो गया है। डॉलर-अमेरिकी बॉन्ड यील्ड मजबूत होने से दबाव बढ़ा मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल – मैनेजर रिसर्च, हिमांशु श्रीवास्तव ने इस ट्रेंड पर कहा कि वैश्विक विकास (ग्लोबल ग्रोथ) को लेकर बनी अनिश्चितता, मुख्य क्षेत्रों में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की अस्थिर कीमतों की वजह से उभरते बाजारों (इमर्जिंग मार्केट्स) के प्रति निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ी हुई यूएस बॉन्ड यील्ड इस बिकवाली के मुख्य कारण हैं। विकसित बाजारों में बेहतर रिटर्न मिलने से सुरक्षित संपत्तियों का आकर्षण बढ़ा है और निवेशक डिफेंसिव रुख अपना रहे हैं। इसके अलावा ग्लोबल इन्फ्लेशन (महंगाई) और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती के समय को लेकर बनी अनिश्चितता भी फंड एलोकेशन के फैसलों को प्रभावित कर रही है। रुपए पर दबाव बढ़ा, ₹96.14 के स्तर पर पहुंचा जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वी के विजयकुमार के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और बढ़ते करंट अकाउंट डेफिसिट (चालू खाता घाटा) के कारण रुपए पर भारी दबाव देखा जा रहा है। साल की शुरुआत में डॉलर के मुकाबले रुपया 90 के स्तर पर था, जो 15 मई को 96 के स्तर को पार करते हुए 96.14 पर पहुंच गया है। AI कंपनियों की तरफ डायवर्ट हो रहा है फंड वी के विजयकुमार ने बताया कि अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही और कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने रहे, तो रुपया आगे और कमजोर हो सकता है। इसके साथ ही दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर फोकस करने वाली कंपनियों में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। इस वजह से भारत जैसे देशों से फंड डायवर्ट हो रहा है, जिन्हें AI के क्षेत्र में थोड़ा पीछे माना जा रहा है। हालांकि, जब AI ट्रेड का मौजूदा बबल शांत होगा, तब यह ट्रेंड वापस बदल सकता है। FPI और बॉन्ड यील्ड क्या होते हैं? फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI): जब किसी देश के नागरिक या कंपनियां दूसरे देश के शेयर बाजार, बॉन्ड या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो उसे फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट कहा जाता है। इन्हें शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टर भी माना जाता है जो बाजार के हालातों को देखकर तेजी से पैसा निकालते या निवेश करते हैं। बॉन्ड यील्ड: बॉन्ड यील्ड वह रिटर्न या ब्याज होता है जो एक निवेशक को बॉन्ड में निवेश करने पर मिलता है। जब अमेरिका जैसे विकसित देशों में सरकारी बॉन्ड की यील्ड (रिटर्न) बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक भारतीय बाजार जैसे जोखिम वाले शेयर बाजारों से पैसा निकालकर वहां सुरक्षित सरकारी बॉन्ड में निवेश करने लगते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…