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घंटों बैठकर करते हैं लैपटॉप पर काम, तो पड़ सकता है रीढ़ की हड्डी के लिए भारी..यहां जानिए डॉक्टर की सलाह

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Last Updated:May 22, 2026, 12:22 IST आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक बैठकर काम करना लोगों की रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर डाल रहा है. फरीदाबाद के स्पाइन विशेषज्ञ डॉक्टर आशीष तोमर के अनुसार गलत पोश्चर, लगातार स्क्रीन देखने और व्यायाम की कमी से गर्दन और कमर दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है. नियमित वॉक, योग और सही तरीके से बैठना स्पाइन हेल्थ के लिए बेहद जरूरी है. फरीदाबाद: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना लोगों की मजबूरी बन गया है. दफ्तर हो या घर लगातार मोबाइल और लैपटॉप पर काम करने की आदत अब आम हो चुकी है. लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर हमारी रीढ़ की हड्डी पर पड़ रहा है. शुरुआत में लोग गर्दन, पीठ या कमर में हल्का दर्द समझकर इसे नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन धीरे-धीरे यही परेशानी बड़ी बीमारी का रूप ले सकती है. लंबे वक्त तक बैठकर काम करने से नुकसान Local18 से बातचीत में डॉक्टर आशीष तोमर फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल में ऑर्थोपेडिक्स और मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी विभाग के निदेशक बताते हैं कि लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर की बैक मसल्स कमजोर होने लगती हैं. हमारी मांसपेशियों का काम रीढ़ की हड्डी को सही स्थिति में बनाए रखना होता है लेकिन जब व्यक्ति लगातार बैठा रहता है तो ये मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाती हैं. क्या है काम करने का सही तरीका डॉक्टर आशीष तोमर बताते हैं बैठने के तरीके का भी सीधा असर कमर पर पड़ता है. अगर कोई व्यक्ति सीधे बैठता है तो कमर पर दबाव कम बनता है, लेकिन झुककर बैठने से रीढ़ की हड्डी पर ज्यादा दबाव पड़ता है. यही वजह है कि आगे चलकर डिस्क खिसकने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. कुर्सी पर सीधा बैठने से कमर पर लगभग डेढ़ गुना कम दबाव पड़ता है. गर्दन और कमर दर्द आज के समय में बहुत आम समस्या बन चुकी है. लगातार स्क्रीन देखने और गर्दन झुकाकर लैपटॉप पर काम करने से गर्दन पर काफी दबाव बढ़ जाता है. यही कारण है कि लोगों में गर्दन दर्द, अकड़न और पीठ दर्द तेजी से बढ़ रहा है. रोज थोड़ा बहुत व्यायाम करना बेहद जरूरी डॉक्टर आशीष बताते हैं शरीर को मजबूत रखने के लिए रोज थोड़ा बहुत व्यायाम करना बेहद जरूरी है. रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखने के लिए डॉक्टर आशीष तोमर बताते हैं मैं लोगो को रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतें अपनाने की सलाह देता हूं.शरीर की कोर मसल्स और पीठ की मांसपेशियां सबसे ज्यादा जरूरी होती हैं. इन्हें मजबूत रखने के लिए भुजंग आसन जैसे योग करने चाहिए. इसके अलावा नियमित रूप से टहलना और लंबे समय तक लगातार न बैठना भी जरूरी है. अगर कोई व्यक्ति आधे घंटे या एक घंटे से ज्यादा समय तक बैठा है तो उसे बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलना चाहिए. नजरअंदाज नहीं करना चाहिए शरीर के संकेत डॉक्टर आशीष तोमर बताते हैं कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. जैसे गर्दन का दर्द हाथों तक जाने लगे…हाथों में सुन्नपन महसूस हो, कमजोरी आए, रात में दर्द के कारण नींद न आए या गर्दन दबाने पर ज्यादा दर्द हो तो तुरंत विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए. इसी तरह कमर दर्द अगर पैरों तक पहुंचने लगे तो यह भी गंभीर संकेत हो सकता है. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Faridabad,Faridabad,Haryana

स्मिता पाटिल और राज बब्बर के रिश्ते पर बोले आर्य:कहा- किसे अच्छा लगेगा उसके पापा का अफेयर हो; सौतेले भाई प्रतीक बब्बर से जारी अनबन

स्मिता पाटिल और राज बब्बर के रिश्ते पर बोले आर्य:कहा- किसे अच्छा लगेगा उसके पापा का अफेयर हो; सौतेले भाई प्रतीक बब्बर से जारी अनबन

राज बब्बर के बेटे आर्य बब्बर ने हाल ही में पिता और स्मिता पाटिल के अफेयर पर बात की है। उनका कहना है कि दोनों के अफेयर से उन्हें काफी दिक्कत हुई थी। वहीं आर्य बब्बर का ये भी कहना है कि वो स्मिता पाटिल को स्मिता मां कहते हैं, लेकिन प्रतीक बब्बर अपने पिता को ही पिता नहीं मानते। उन्होंने ये भी कहा कि उनके और प्रतीक के बीच सुलह नहीं हो सकती। राज बब्बर ने नादिरा जहीर से शादी की थी, जिससे उन्हें दो बच्चे आर्य बब्बर और जूही हुए। आर्य महज 3 साल के थे, जब राज बब्बर ने स्मिता पाटिल से शादी कर पहली पत्नी और बच्चों को छोड़ दिया। हालांकि 3 साल में जब स्मिता ने बेटे प्रतीक को जन्म दिया, तो डिलीवरी कॉम्प्लिकेशन से उनका निधन हो गया। इसके बाद राज बब्बर, पहली पत्नी के साथ रहने लगे। इन सभी चीजों से पारिवारिक रिश्तों में तनाव रहा। हाल ही में प्रतीक बब्बर ने शादी में पिता को नहीं बुलाया और फिर अपने नाम से पिता का सरनेम हटाकर मां स्मिता का नाम जोड़ लिया। तब भी ये रिश्ते विवादों में रहे। अब हाल ही में विक्की ललवानी को दिए इंटरव्यू में आर्य बब्बर ने स्मिता-राज के रिश्ते पर कहा, मैं आज 44 साल का हूं, ये तब हुआ जब मैं 4-5 साल का था। मेरे पिता ने जिंदगी में बहुत कुछ किया उसके बाद। लेकिन सबसे जरूरी चीज जो हम सबकी रह गई है वो ये कि हमारे पापा का एक अफेयर हुआ था। एक रिश्ते को उन्होंने इज्जत दी, साथ दिया था। वो हम सबकी जिंदगी का इशू बन गया। जो शायद नहीं होना चाहिए, क्योंकि हम सब आगे बढ़ गए हैं। आगे जब पूछा गया कि क्या इससे पिता से रिश्ते बिगड़ गए, तो आर्य कहते हैं, किस बच्चे को अच्छा लगेगा कि उसके पापा का बाहर अफेयर हो। अगर आपको पता चलता कि आपके पापा का अफेयर है, आपको अच्छा लगता। हर कोई मूव ऑन कर गया। पापा ने मूव ऑन कर लिया, उनका दूसरा अफेयर भी हो गया। आर्य ने बातचीत में ये भी बताया कि स्मिता पाटिल के लिए राज बब्बर ने घर खरीदा था और वो परिवार को छोड़कर उनके साथ जाकर रहने लगे थे। उस घर में फिलहाल प्रतीक बब्बर अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। आगे आर्य ने कहा, मैं स्मिता मां को प्यार और इज्जत देता हूं, क्योंकि उन्हें वो प्यार और इज्जत मेरे पिता ने दी। हमारी मां ने हमें समझाया है कि चाहे कुछ भी हो, प्रतीक के साथ हमारा स्वाभाव गलत नहीं होना चाहिए। हमारी मां ने हमें सिखाया, पिता ने नहीं। यही वजह है कि हम उसके साथ अच्छे से रहते हैं। जब मैंने देखा कि प्रतीक मेरी मां को मां कह रहा है, तो मैं भी स्मिता को स्मिता मां कहने लगा। आखिर में आर्य ने कहा, जिस स्मिता मां के लिए पापा ने हमें छोड़ा, आज उन्हीं का बच्चा पापा को पापा नहीं मान रहा है। उन्होंने ये भी साफ किया कि अब उनके प्रतीक से रिश्ते कभी सुधर नहीं सकेंगे।

स्मिता पाटिल और राज बब्बर के रिश्ते पर बोले आर्य:कहा- किसे अच्छा लगेगा उसके पापा का अफेयर हो; सौतेले भाई प्रतीक बब्बर से जारी अनबन

स्मिता पाटिल और राज बब्बर के रिश्ते पर बोले आर्य:कहा- किसे अच्छा लगेगा उसके पापा का अफेयर हो; सौतेले भाई प्रतीक बब्बर से जारी अनबन

राज बब्बर के बेटे आर्य बब्बर ने हाल ही में पिता और स्मिता पाटिल के अफेयर पर बात की है। उनका कहना है कि दोनों के अफेयर से उन्हें काफी दिक्कत हुई थी। वहीं आर्य बब्बर का ये भी कहना है कि वो स्मिता पाटिल को स्मिता मां कहते हैं, लेकिन प्रतीक बब्बर अपने पिता को ही पिता नहीं मानते। उन्होंने ये भी कहा कि उनके और प्रतीक के बीच सुलह नहीं हो सकती। राज बब्बर ने नादिरा जहीर से शादी की थी, जिससे उन्हें दो बच्चे आर्य बब्बर और जूही हुए। आर्य महज 3 साल के थे, जब राज बब्बर ने स्मिता पाटिल से शादी कर पहली पत्नी और बच्चों को छोड़ दिया। हालांकि 3 साल में जब स्मिता ने बेटे प्रतीक को जन्म दिया, तो डिलीवरी कॉम्प्लिकेशन से उनका निधन हो गया। इसके बाद राज बब्बर, पहली पत्नी के साथ रहने लगे। इन सभी चीजों से पारिवारिक रिश्तों में तनाव रहा। हाल ही में प्रतीक बब्बर ने शादी में पिता को नहीं बुलाया और फिर अपने नाम से पिता का सरनेम हटाकर मां स्मिता का नाम जोड़ लिया। तब भी ये रिश्ते विवादों में रहे। अब हाल ही में विक्की ललवानी को दिए इंटरव्यू में आर्य बब्बर ने स्मिता-राज के रिश्ते पर कहा, मैं आज 44 साल का हूं, ये तब हुआ जब मैं 4-5 साल का था। मेरे पिता ने जिंदगी में बहुत कुछ किया उसके बाद। लेकिन सबसे जरूरी चीज जो हम सबकी रह गई है वो ये कि हमारे पापा का एक अफेयर हुआ था। एक रिश्ते को उन्होंने इज्जत दी, साथ दिया था। वो हम सबकी जिंदगी का इशू बन गया। जो शायद नहीं होना चाहिए, क्योंकि हम सब आगे बढ़ गए हैं। आगे जब पूछा गया कि क्या इससे पिता से रिश्ते बिगड़ गए, तो आर्य कहते हैं, किस बच्चे को अच्छा लगेगा कि उसके पापा का बाहर अफेयर हो। अगर आपको पता चलता कि आपके पापा का अफेयर है, आपको अच्छा लगता। हर कोई मूव ऑन कर गया। पापा ने मूव ऑन कर लिया, उनका दूसरा अफेयर भी हो गया। आर्य ने बातचीत में ये भी बताया कि स्मिता पाटिल के लिए राज बब्बर ने घर खरीदा था और वो परिवार को छोड़कर उनके साथ जाकर रहने लगे थे। उस घर में फिलहाल प्रतीक बब्बर अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। आगे आर्य ने कहा, मैं स्मिता मां को प्यार और इज्जत देता हूं, क्योंकि उन्हें वो प्यार और इज्जत मेरे पिता ने दी। हमारी मां ने हमें समझाया है कि चाहे कुछ भी हो, प्रतीक के साथ हमारा स्वाभाव गलत नहीं होना चाहिए। हमारी मां ने हमें सिखाया, पिता ने नहीं। यही वजह है कि हम उसके साथ अच्छे से रहते हैं। जब मैंने देखा कि प्रतीक मेरी मां को मां कह रहा है, तो मैं भी स्मिता को स्मिता मां कहने लगा। आखिर में आर्य ने कहा, जिस स्मिता मां के लिए पापा ने हमें छोड़ा, आज उन्हीं का बच्चा पापा को पापा नहीं मान रहा है। उन्होंने ये भी साफ किया कि अब उनके प्रतीक से रिश्ते कभी सुधर नहीं सकेंगे।

अमेरिकी विश्वविद्यालय मानक कड़े करेगा, 3 साल बाद समीक्षा:हार्वर्ड में 20% छात्रों को ही ‘ए’ ग्रेड; तर्क- सब टॉपर तो असाधारण प्रतिभा पहचानना मुश्किल

अमेरिकी विश्वविद्यालय मानक कड़े करेगा, 3 साल बाद समीक्षा:हार्वर्ड में 20% छात्रों को ही ‘ए’ ग्रेड; तर्क- सब टॉपर तो असाधारण प्रतिभा पहचानना मुश्किल

हर माता-पिता और छात्र का सपना होता है- परीक्षा में अच्छे अंक। लेकिन, दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने एक ऐतिहासिक फैसले में अंडरग्रेजुएट कोर्सों में ‘ए’ ग्रेड सीमित कर दिए हैं। 2027 से किसी भी क्लास में 20% छात्रों को ही ‘ए’ ग्रेड मिलेगा। इसके पक्ष में 458 फैकल्टी मेंबर्स ने वोट दिया, जबकि 201 विरोध में थे। तर्क है कि ग्रेड इन्फ्लेशन के कारण अंक असली क्षमता की पहचान का भरोसेमंद पैमाना नहीं रहे। सबका ‘ए’ ग्रेड होगा तो असाधारण प्रतिभा कैसे पहचानेंगे? दरअसल, हार्वर्ड में 2005 में करीब 24% छात्र ग्रेड ‘ए’ कैटेगरी में थे। 2025 में ये आंकड़ा 60% से ऊपर चला गया। पिछले अकादमिक सत्र में उच्चतम जीपीए पुरस्कार के लिए 55 छात्र बराबरी पर थे। यानी इतने ‘टॉपर’ थे कि ‘असली टॉपर’ की पहचान मुश्किल हो गई। येल में ‘ए’ और ‘ए माइनस’ ग्रेड 80% तक पहुंच गए। ब्राउन यूनिवर्सिटी में दो तिहाई छात्र ‘ए’ ग्रेड में थे। यानी ‘असाधारण’ धीरे-धीरे सामान्य होता गया। पिछले दो दशकों में विश्वविद्यालयों पर दबाव बढ़ा है कि छात्र खुश रहें, ताकि कोर्स इवैल्यूएशन अच्छे आएं और संस्थान प्रतियोगिता में न पिछड़े। ऐसे में, ग्रेडिंग लगातार नरम होती गई। हार्वर्ड के मनोवैज्ञानिक स्टीवन पिंकर कहते हैं कि ग्रेड इन्फ्लेशन ने विश्वविद्यालयों को मजाक बना दिया। प्रोफेसर दबाव में थे कि मानक ढीले नहीं रखे तो छात्र उनके कोर्सों से दूर हो जाएंगे। वहीं, हार्वर्ड के अर्थशास्त्री जेसन फर्मन और डेविड लैब्सन कहते हैं, ‘ज्यादातर शिक्षक सख्त ग्रेडिंग चाहते थे, पर अकेले ऐसा करने से डरते थे। छात्रों के खराब फीडबैक, कम नामांकन से उनके कॅरिअर पर असर पड़ सकता था। इसलिए पूरी फैकल्टी ने नियम बनाया।’ उनके मुताबिक, आसान ‘ए’ ग्रेड्स सीखने की प्रेरणा घटाते हैं। जब अंक तालिका छात्रों की मेधावी क्षमता में फर्क बताना बंद कर दे तो नियोक्ता रसूख और इंटर्नशिप जैसे कारकों पर ध्यान देते हैं। इससे मेरिट के बजाय विशेषाधिकार को लाभ मिलता है। एआई से औसत काम भी ‘परफेक्ट’ लग सकता है। शिक्षकों का तर्क है कि अगर विश्वविद्यालय असली प्रवीणता, मौलिकता और विश्लेषणात्मक सोच की पहचान नहीं कर पाएगा तो उसकी डिग्री पर भरोसा कमजोर होगा। दिलचस्प ये है कि प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी ने 2000 के दशक में ऐसी ही पॉलिसी लागू की थी, लेकिन छात्रों और फैकल्टी के दबाव में 2014 में हटानी पड़ी थी। हार्वर्ड में भी छात्र इस फैसले से खुश नहीं हैं। एक सर्वे में 94% छात्रों ने विरोध जताया। छात्रों की दलील है कि सीमित ‘ए’ ग्रेड्स प्रतिस्पर्धा को जहरीला बना देंगे। कम ग्रेड के जोखिम के बीच छात्र कठिन विषय लेने से बचेंगे। हार्वर्ड तीन साल बाद इस नीति की समीक्षा करेगा। ग्रेड इन्फ्लेशन, नौकरी में मार्कशीट को तवज्जो नहीं जॉब मार्केट में ग्रेड इन्फ्लेशन का असर दिख रहा है। प्लॉस वन के अध्ययन के मुताबिक ऊंचे ग्रेड से जीपीए की ‘सिग्नलिंग वैल्यू’ कमजोर हो रही है। नियोक्ता समझ नहीं पाते कि छात्र ने वाकई महारत हासिल की है या आसान ग्रेडिंग का लाभ मिला है। कंपनियां मार्कशीट से आगे स्किल देख रही हैं। एनएसीई के सर्वे के मुताबिक, 90% नियोक्ता समस्या समाधान की योग्यता और 80% टीमवर्क के प्रमाण चाहते हैं।

अमेरिकी विश्वविद्यालय मानक कड़े करेगा, 3 साल बाद समीक्षा:हार्वर्ड में 20% छात्रों को ही ‘ए’ ग्रेड; तर्क- सब टॉपर तो असाधारण प्रतिभा पहचानना मुश्किल

अमेरिकी विश्वविद्यालय मानक कड़े करेगा, 3 साल बाद समीक्षा:हार्वर्ड में 20% छात्रों को ही ‘ए’ ग्रेड; तर्क- सब टॉपर तो असाधारण प्रतिभा पहचानना मुश्किल

हर माता-पिता और छात्र का सपना होता है- परीक्षा में अच्छे अंक। लेकिन, दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने एक ऐतिहासिक फैसले में अंडरग्रेजुएट कोर्सों में ‘ए’ ग्रेड सीमित कर दिए हैं। 2027 से किसी भी क्लास में 20% छात्रों को ही ‘ए’ ग्रेड मिलेगा। इसके पक्ष में 458 फैकल्टी मेंबर्स ने वोट दिया, जबकि 201 विरोध में थे। तर्क है कि ग्रेड इन्फ्लेशन के कारण अंक असली क्षमता की पहचान का भरोसेमंद पैमाना नहीं रहे। सबका ‘ए’ ग्रेड होगा तो असाधारण प्रतिभा कैसे पहचानेंगे? दरअसल, हार्वर्ड में 2005 में करीब 24% छात्र ग्रेड ‘ए’ कैटेगरी में थे। 2025 में ये आंकड़ा 60% से ऊपर चला गया। पिछले अकादमिक सत्र में उच्चतम जीपीए पुरस्कार के लिए 55 छात्र बराबरी पर थे। यानी इतने ‘टॉपर’ थे कि ‘असली टॉपर’ की पहचान मुश्किल हो गई। येल में ‘ए’ और ‘ए माइनस’ ग्रेड 80% तक पहुंच गए। ब्राउन यूनिवर्सिटी में दो तिहाई छात्र ‘ए’ ग्रेड में थे। यानी ‘असाधारण’ धीरे-धीरे सामान्य होता गया। पिछले दो दशकों में विश्वविद्यालयों पर दबाव बढ़ा है कि छात्र खुश रहें, ताकि कोर्स इवैल्यूएशन अच्छे आएं और संस्थान प्रतियोगिता में न पिछड़े। ऐसे में, ग्रेडिंग लगातार नरम होती गई। हार्वर्ड के मनोवैज्ञानिक स्टीवन पिंकर कहते हैं कि ग्रेड इन्फ्लेशन ने विश्वविद्यालयों को मजाक बना दिया। प्रोफेसर दबाव में थे कि मानक ढीले नहीं रखे तो छात्र उनके कोर्सों से दूर हो जाएंगे। वहीं, हार्वर्ड के अर्थशास्त्री जेसन फर्मन और डेविड लैब्सन कहते हैं, ‘ज्यादातर शिक्षक सख्त ग्रेडिंग चाहते थे, पर अकेले ऐसा करने से डरते थे। छात्रों के खराब फीडबैक, कम नामांकन से उनके कॅरिअर पर असर पड़ सकता था। इसलिए पूरी फैकल्टी ने नियम बनाया।’ उनके मुताबिक, आसान ‘ए’ ग्रेड्स सीखने की प्रेरणा घटाते हैं। जब अंक तालिका छात्रों की मेधावी क्षमता में फर्क बताना बंद कर दे तो नियोक्ता रसूख और इंटर्नशिप जैसे कारकों पर ध्यान देते हैं। इससे मेरिट के बजाय विशेषाधिकार को लाभ मिलता है। एआई से औसत काम भी ‘परफेक्ट’ लग सकता है। शिक्षकों का तर्क है कि अगर विश्वविद्यालय असली प्रवीणता, मौलिकता और विश्लेषणात्मक सोच की पहचान नहीं कर पाएगा तो उसकी डिग्री पर भरोसा कमजोर होगा। दिलचस्प ये है कि प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी ने 2000 के दशक में ऐसी ही पॉलिसी लागू की थी, लेकिन छात्रों और फैकल्टी के दबाव में 2014 में हटानी पड़ी थी। हार्वर्ड में भी छात्र इस फैसले से खुश नहीं हैं। एक सर्वे में 94% छात्रों ने विरोध जताया। छात्रों की दलील है कि सीमित ‘ए’ ग्रेड्स प्रतिस्पर्धा को जहरीला बना देंगे। कम ग्रेड के जोखिम के बीच छात्र कठिन विषय लेने से बचेंगे। हार्वर्ड तीन साल बाद इस नीति की समीक्षा करेगा। ग्रेड इन्फ्लेशन, नौकरी में मार्कशीट को तवज्जो नहीं जॉब मार्केट में ग्रेड इन्फ्लेशन का असर दिख रहा है। प्लॉस वन के अध्ययन के मुताबिक ऊंचे ग्रेड से जीपीए की ‘सिग्नलिंग वैल्यू’ कमजोर हो रही है। नियोक्ता समझ नहीं पाते कि छात्र ने वाकई महारत हासिल की है या आसान ग्रेडिंग का लाभ मिला है। कंपनियां मार्कशीट से आगे स्किल देख रही हैं। एनएसीई के सर्वे के मुताबिक, 90% नियोक्ता समस्या समाधान की योग्यता और 80% टीमवर्क के प्रमाण चाहते हैं।

नारियल में पानी कम है या ज़्यादा? बिना काटे एक मिनट में ऐसे पहचाने; बस नोट कर लें ये 6 आसान ट्रिक्स

मीठे और पानी वाले नारियल की पहचान करें

22 मई 2026 को 11:21 IST पर अपडेट किया गया गर्मियों के मौसम में सेहत और ताजगी के लिए नारियल का पानी सबसे अच्छा विकल्प है। लेकिन अक्सर लोग असमंजस में रहते हैं कि किस तट में पानी ज्यादा होगा। इस लेख में बिना केट मीठा और भरपूर पानी वाला क्रिस्टोफर पैट्रिक की 6 आसान ट्रिक्स बताई गई हैं। आइए जानते हैं। अनुसरण करना : नारियल सहयोग समय उसे अपने कान के पास पसंद और अच्छी तरह हिलाएं। अगर नारियल से ‘छप-छप’ की तेज आवाज आती है तो इसमें आधा खाली है। विशालकाय पानी वाले नारियल से बहुत कम या बिल्कुल आवाज नहीं आती है। छवि: फ्रीपिक कई बार बड़े दिखने वाले नारियल के अंदर से पतले होते हैं। इसलिए हमेशा आकार पर जाने के बजाय दो समान आकार के नारियल हाथों में चित्र। जो मोटे तौर पर बड़े पैमाने पर भारी लगता है, उसे ही चुनें। छवि: फ्रीपिक यदि आप हरा नारियल खरीद रहे हैं, तो ध्यान दें कि उसका रंग कैसा होना चाहिए या चमकीला हरा होना चाहिए। अगर कोको पर बहुत ज्यादा पीले या भूरे रंग के धब्बे दिख रहे हैं, तो समझ लें कि उसने कितना भुगतान किया है। छवि: फ्रीपिक जो कोल्‍ड पूरी तरह से गोल होते हैं, उनमें पानी के सामान मलाई बनने की संभावना अधिक होती है। हमेशा के लिए भरपूर पानी के लिए लंबे समय तक या सीमित पानी का चुनाव करें। छवि: फ्रीपिक अगर आप पूजा या मंदिर वाले नारियल ले रहे हैं और उसमें पानी भी शामिल है, तो उसके ऊपर की तीन ‘आंखों’ को जरूर देखें। अगर ये आकृतियाँ आकर्षक और आकर्षक हैं, तो नारियल अंदर से अच्छा है। छवि: फ्रीपिक नारियल हरे को नीचे की तरफ से निकोलस से छोटा पेट देखें। यदि वह बहुत अधिक स्पाइनल या दबा हुआ महसूस करता है, तो इसका मतलब है कि मैनचेस्टर यूनाइटेड ने भुगतान किया है और उसका पानी सुख रहा है। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: आर्या पांडे प्रकाशित 22 मई 2026 11:21 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)नारियल पानी खरीदने का सही तरीका टिप्स(टी)सबसे अच्छा नारियल पानी खरीदने के विक्रेता रहस्य(टी)बिना खोले नारियल पानी कैसे चेक करें(टी)नारियल पानी कैसे लें(टी)ज्यादा पानी कैसे नारियल में होता है(टी)पानी वाला सही नारियल पानी कैसे चुनें

आतंकी हमजा बुरहान की हत्या का आरोपी हथियार सहित गिरफ्तार:2 संदिग्ध फरार; हमजा आज इस्लामाबाद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा

आतंकी हमजा बुरहान की हत्या का आरोपी हथियार सहित गिरफ्तार:2 संदिग्ध फरार; हमजा आज इस्लामाबाद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा

पुलवामा हमले में शामिल आतंकी हमजा बुरहान की हत्या के मामले में मुजफ्फराबाद के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) ने अब्दुल्ला कमाल नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है। अब्दुल्ला कमाल पाकिस्तान के वाह कैंट का रहने वाला है। CTD ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से हथियार भी बरामद किया गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या में इसी हथियार का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक घटना के दौरान मौजूद दो अन्य संदिग्ध मौके से भाग निकले। सुरक्षा एजेंसियां उनकी तलाश में जुटी हैं। मामले में आरोपी अब्दुल्ला कमाल की एक्सक्लूसिव फोटो भी सामने आई है। हमजा बुरहान 2019 के पुलवामा आतंकी हमले में शामिल था। 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 40 जवान शहीद हुए थे। हमजा बुरहान को आज इस्लामाबाद के बर्मा टाउन स्थित फातिमा स्कूल में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। जनाजे की नमाज भारतीय समयानुसार सुबह 11:30 बजे होगी। सिर में तीन गोलियां लगने से हमजा की मौत न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक हमजा पर गुरुवार को मुजफ्फराबाद के AIMS कॉलेज के बाहर अज्ञात हमलावरों ने कई गोलियां चलाईं, जिनमें से तीन उसके सिर में लगीं। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। हमजा बुरहान जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला था। वह पहले आतंकी संगठन अल बद्र से जुड़ा था और बाद में अल बराक के लिए काम करने लगा। वह मुजफ्फराबाद के चीला बांदी इलाके में भारी सुरक्षा के बीच रह रहा था। उसके पास कमांडो सुरक्षा, बुलेटप्रूफ गाड़ी और एस्कॉर्ट वाहन भी थे। भारत ने 2022 में उसे UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था। वह अबू दुजाना, अबू कासिम, बुरहान वानी और जाकिर मूसा का करीबी सहयोगी माना जाता था। उसके पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से भी करीबी संबंध थे। भारत से पाकिस्तान गया, फिर आतंकी संगठन से जुड़ा हमजा सरकार के मुताबिक, अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर पुलवामा के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था। 23 साल का हमजा, आतंकी संगठन अल बद्र से जुड़ा हुआ था। अल बद्र को सरकार ने आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है। वह कानूनी तरीके से पाकिस्तान गया था। वहां जाकर वह अल बद्र में शामिल हो गया और बाद में संगठन का सक्रिय आतंकी और कमांडर बन गया। अभी वह पाकिस्तान से ही काम कर रहा था। उस पर आरोप है कि वह युवाओं को अल बद्र में शामिल होने के लिए उकसाता था और फंडिंग भी करता था। जांच एजेंसियों के अनुसार 2020 में CRPF जवानों पर ग्रेनेड हमले और युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती कराने जैसी गतिविधियों में भी शामिल रहा। पुलवामा अटैक में 40 CRPF जवान शहीद हुए थे 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर आत्मघाती आतंकी हमला हुआ था। श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर लेथपोरा इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी आदिल अहमद डार ने विस्फोटकों से भरी SUV बसों से टकरा दी थी। धमाका इतना जबरदस्त था कि दो बसों के परखच्चे उड़ गए और 40 जवान शहीद हो गए। जांच में सामने आया कि हमले से पहले सुरक्षा एजेंसियों को कई इंटेलिजेंस इनपुट मिले थे, लेकिन आतंकी साजिश को रोका नहीं जा सका। बाद में NIA ने अपनी चार्जशीट में जैश-ए-मोहम्मद और उसके सरगना मसूद अजहर को हमले का मास्टरमाइंड बताया था। इसके अलावा हमजा जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के काकापोरा इलाके में 18 नवंबर 2020 को हुए आतंकी हमले में भी शामिल था। तब आतंकियों ने बंकर पर ग्रेनेड हमला किया था। हालांकि ग्रेनेड अपने निशाने से चूककर सड़क पर फट गया, जिससे 12 नागरिक घायल हो गए। बुरहान वानी का करीबी था हमजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमजा बुरहान लंबे समय से पाकिस्तान और PoK में सक्रिय था। बुरहान मुजफ्फराबाद के AIMS कॉलेज के बाहर मारा गया। वह अबू दुजाना, अबू कासिम, बुरहान वानी और जाकिर मूसा का करीबी सहयोगी था। बुरहान वानी 8 जुलाई 2016 को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। उसकी मौत के बाद कश्मीर में लंबे समय तक हिंसा और विरोध प्रदर्शन हुए थे। बुरहान वानी की मौत के बाद जाकिर मूसा हिजबुल का कमांडर बना था। वह 23 मई 2019 को पुलवामा जिले के त्राल इलाके में सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में मारा गया था। 4 महीने में पाकिस्तान के 4 बड़े आतंकियों की मौत पाकिस्तान में पिछले 4 महीने में 4 बड़े आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। इनके पीछे अज्ञात हमलावर का हाथ बताया जा रहा है, हालांकि इनकी पुष्टि नहीं हो पाई है। 1. लश्कर आतंकी- मोहम्मद कासिम गुज्जर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी मोहम्मद कासिम गुज्जर की फरवरी 2026 में पाकिस्तान के पेशावर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अज्ञात बंदूकधारियों ने उस पर हमला किया था। हालांकि इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई। कासिम गुज्जर उर्फ सलमान/सुलेमान को भारत सरकार ने 2024 में UAPA के तहत घोषित आतंकवादी घोषित किया था। भारतीय एजेंसियों के अनुसार, वह कई आतंकी गतिविधियों में शामिल था और जम्मू-कश्मीर में नए आतंकी मॉड्यूल तैयार करने का काम कर रहा था। उस पर आतंकियों को हथियार और फंडिंग पहुंचाने, सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए भर्ती करने और कई आतंकी हमलों में भूमिका निभाने के आरोप थे। 2. जैश-ए-मोहम्मद कमांडर- सलमान अजहर अप्रैल 2026 में पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के सीनियर कमांडर सलमान अजहर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, वो एक ‘हिट-एंड-रन’ जैसी घटना का शिकार हुआ। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स इसे टारगेट किलिंग बताया गया था। इसकी भी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई। सलमान अजहर को जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर का करीबी सहयोगी माना जाता था। जैश-ए-मोहम्मद वही आतंकी संगठन है जिसे भारत, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं। सलमान अजहर संगठन के ऑपरेशनल नेटवर्क और भर्ती अभियान से जुड़ा हुआ था। बहावलपुर को लंबे समय से जैश का प्रमुख ठिकाना माना जाता रहा है। 3. लश्कर कमांडर- शेख यूसुफ अफरीदी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी की अप्रैल 2026 को अज्ञात

‘अवसर का लाभ उठाएं’: कॉकरोच जनता पार्टी उन्माद के बीच शशि थरूर की विपक्ष को सलाह | भारत समाचार

NEP Vs USA Live Score: Follow latest updates from the match here. (Picture Credit: IG/cricketassociationofnepal)

आखरी अपडेट:22 मई, 2026, 10:54 IST शशि थरूर ने कॉकरोच जनता पार्टी इंस्टाग्राम के वायरल उछाल की सराहना की, इसके एक्स अकाउंट को ब्लॉक करने को विनाशकारी बताया, विपक्ष से युवा ऊर्जा और असहमति का उपयोग करने का आग्रह किया कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि वह इतने कम समय में कॉकरोच जनता पार्टी की व्यापक लोकप्रियता से प्रभावित हैं। (स्रोत: पीटीआई/एक्स) कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी की अचानक और भारी लोकप्रियता पर अपनी साज़िश व्यक्त की और इस वायरल प्रवृत्ति को एक “अवसर” कहा जिसे “विपक्ष को जब्त करना चाहिए”। शशि थरूर ने एक्स पर लिखा, “मैं #CockroachJantaParty के उदय से अविश्वसनीय रूप से उत्सुक हूं, जिसके केवल पांच दिनों में इंस्टाग्राम पर 15 मिलियन (अब 19 मिलियन से अधिक) फॉलोअर्स हो गए हैं।” इस रिपोर्ट के दाखिल होने तक पार्टी के इंस्टाग्राम पर 19 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हो गए हैं। थरूर ने कॉकरोच पार्टी के एक्स खाते को हटाने पर सवाल उठाया बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट, जिसके दो लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे, भारत में रोक दिया गया। यह भी पढ़ें: वायरल कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट भारत में रोका गया, संस्थापक ने लॉन्च किया नया हैंडल एक्स अकाउंट को ब्लॉक करने पर बोलते हुए थरूर ने इसे हटाए जाने पर सवाल उठाया और कहा कि अकाउंट को ब्लॉक करना “विनाशकारी और बेहद मूर्खतापूर्ण” था। उन्होंने कहा कि युवाओं को “खुद को अभिव्यक्त करने” के लिए एक आउटलेट की आवश्यकता है। मैं इसके उत्थान से अविश्वसनीय रूप से उत्सुक हूं #कॉकरोचजनतापार्टीजिसके पहले ही 15 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं @इंस्टाग्राम सिर्फ पांच दिनों में। मैं युवाओं की निराशा को समझता हूं और देखता हूं कि वे इसके साथ क्यों जुड़ रहे हैं। यही कारण है कि खाता… https://t.co/4qbaRN6oSz है – शशि थरूर (@ShashiTharoor) 21 मई 2026 “मैं युवाओं की निराशा को समझता हूं और देखता हूं कि वे इसके साथ क्यों जुड़ रहे हैं। यही कारण है कि एक्स पर अकाउंट को रोका जाना विनाशकारी और बेहद नासमझी है – युवाओं के लिए अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए एक आउटलेट होना चाहिए और इसलिए, सीजेपी के अकाउंट को बंद करने के बजाय उसे काम करने दें! लोकतंत्र को असहमति, हास्य, व्यंग्य और यहां तक ​​कि निराशा के लिए आउटलेट की आवश्यकता होती है,” कांग्रेस सांसद ने कहा। ‘एक अवसर जिसे विपक्ष को अवश्य भुनाना चाहिए’ थरूर ने आगे कहा कि वह पार्टी के भविष्य को लेकर अनिश्चित हैं, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि इस आंदोलन के पीछे काम करने वाले लोग अपनी ऊर्जा को मुख्यधारा की राजनीति में लगाने का रास्ता खोज लेंगे. उन्होंने कहा, “मैं इस आंदोलन के भविष्य के बारे में अनिश्चित हूं, लेकिन मुझे उम्मीद है कि इसके पीछे के युवा इस ऊर्जा को मुख्यधारा की राजनीति में लाने का एक रास्ता ढूंढ लेंगे या शायद बदलाव की आवाज बनने के लिए अपने वोट के माध्यम से इसे व्यक्त करेंगे और ऐसा करने पर इसे नजरअंदाज करना असंभव हो जाएगा।” अपने पोस्ट को समाप्त करते हुए, शशि थरूर ने कहा कि यह प्रवृत्ति विपक्षी दलों के लिए एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करती है, उन्होंने उनसे युवाओं के बीच बढ़ती भावनाओं का फायदा उठाने और देश के युवाओं को अपने राजनीतिक मंच पर आकर्षित करने के लिए मजबूत प्रयास करने का आग्रह किया। कांग्रेस सांसद ने कहा, “यह एक मौका है जिसका विपक्ष को फायदा उठाना चाहिए।” यह भी पढ़ें: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के लिए दो ट्रेडमार्क आवेदन दाखिल, अभिजीत डुबके आवेदकों में से नहीं कॉकरोच जनता पार्टी के बारे में सब कुछ व्यंग्य संगठन, जो कुछ ही दिन पहले ऑनलाइन सामने आया, ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर तेजी से लोकप्रियता हासिल की है। खुद को “युवाओं का, युवाओं द्वारा, युवाओं के लिए एक राजनीतिक मोर्चा” के रूप में ब्रांड करते हुए, समूह “आलसी और बेरोजगारों की आवाज़” का प्रतिनिधित्व करने का भी दावा करता है। यह मंच अभिजीत डुपके द्वारा लॉन्च किया गया था, जो खुद को “कॉकरोच जनता पार्टी” (सीजेपी) के “संस्थापक अध्यक्ष” के रूप में पहचानते हैं। इसकी वेबसाइट के पादलेख में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि यह पहल व्यंग्य के रूप में है। अपने ऑनलाइन अभियान के साथ, सीजेपी ने अपरंपरागत मांगों की एक श्रृंखला पेश करते हुए एक नकली घोषणापत्र जारी किया है। इनमें सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों को राज्यसभा में नामांकित होने से रोकना, कुल सीटों की संख्या बढ़ाए बिना संसद में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और दल बदलने वाले निर्वाचित प्रतिनिधियों पर 20 साल का राजनीतिक प्रतिबंध लगाना शामिल है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘अवसर का लाभ उठाएं’: कॉकरोच जनता पार्टी उन्माद के बीच शशि थरूर की विपक्ष को सलाह अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कॉकरोच जनता पार्टी(टी)शशि थरूर प्रतिक्रिया(टी)वायरल राजनीतिक रुझान(टी)कॉकरोच जनता पार्टी इंस्टाग्राम(टी)एक्स अकाउंट ब्लॉक किया गया भारत(टी)युवा राजनीतिक अभिव्यक्ति(टी)विपक्ष को जब्त करना होगा(टी)व्यंग्य और असहमति

पुनः आरंभ की खाली 24 नामांकन पर चुनाव की तारीखों का ऐलान, जानें कब होगी वोटिंग

पुनः आरंभ की खाली 24 नामांकन पर चुनाव की तारीखों का ऐलान, जानें कब होगी वोटिंग

चुनाव आयोग ने जून-जुलाई में 24 सीटों के लिए खाली होने की घोषणा कर दी है। इसके अलावा महाराष्ट्र और तमिलनाडु में भी राज्य के दो रेज़्यूमे की तारीख का खुलासा किया गया है। 10 राज्यों में सागर के 24 सदस्यों का कार्यकाल जून-जुलाई में समाप्त होने वाला है। इन सभी 24 नामांकनों के लिए आयोग ने चुनाव की तारीखें घोषित की हैं। कब होगा यूक्रेन की रिक्त पद पर चुनाव? 10 राज्यों में चुनाव के लिए राज्यसभा की शुरूआत होगी, जहां स्थायी सदस्यों का कार्यकाल 21 जून से 19 जुलाई के बीच अलग-अलग तारीखों पर समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग के अनुसार, 18 जून को द्विवार्षिक चुनावों के लिए मतदान होगा और उसी दिन नतीजे घोषित किये जायेंगे। चुनाव आयोग 1 जून की अधिसूचना जारी करेगा। 8 जून को नामांकन नामांकन की अंतिम तिथि जारी की गई है। किस प्रकार का आवेदन पर होगा चुनाव? आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की चार-चार सीटें, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीटें, झारखंड की दो सीटें और बौद्ध मठ, मेघालय, आंध्र प्रदेश और मिजोरम की एक-एक सीट पर होगी। नामांकन नामांकन की अंतिम तिथि आठ जून है. राजस्थान राज्यसभा चुनाव 2026: राजस्थान की तीन सीटों पर होगा मुकाबला! हो गई तारीखों का एलान” href=’https://www.abplive.com/states/rajस्थान/rajasthan-rajya-sabha-election-2027-contest-between-bjp-and-congress-for- three-rajya-sabha-seats-election-date-3133628″ target=”_self”>राजस्थान राज्यसभा चुनाव 2026: राजस्थान की तीन सीटों पर होगा मुकाबला! हो गई तारीखों का एलान दो चौथाई पर संकलन EC ने राज्य सभा के दो जिलों की भी घोषणा की है. दोनों क्रांतिकारी नेताओं के पद छोड़ने के बाद खाली हो गए हैं। महाराष्ट्र में सुनेत्रा की रिहाई के बाद सागर की एक सीट पर अंतिम विदाई हुई। उनका पद 4 जुलाई 2028 तक था, लेकिन राष्ट्रपति बनने के बाद उन्हें 6 मई को पद से हटा दिया गया था। वहीं, एआईएडीएमके नेता सीवी शनामुगम ने 7 मई को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मैलाम क्षेत्र से विधायक बनने के बाद संघ से इस्तीफा दे दिया। उनका यह सन्देश 29 जून 2028 को समाप्त हो गया था। आयोग की योजना के अनुसार, 18 जून को वोट होंगे और उसी दिन नतीजे घोषित किये जायेंगे। आयोग ने निर्देश दिया है कि स्वतंत्र और सिविल चुनाव के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करें, चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए आवश्यक शर्तें रखें। झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026: झारखंड में राज्यसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान, एक सीट 2025 से ही है खाली” href=’https://www.abplive.com/states/jharखण्ड/झारखंड-rajya-sabha-elections-2026-election-dates-announced-for-the-two-rajya-sabha-seats-3133632′ target=”_self”>झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026: झारखंड में राज्यसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान, एक सीट 2025 से ही है खाली (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)राज्यसभा(टी)राज्यसभा चुनाव(टी)राज्यसभा चुनाव 2026(टी)राज्यसभा चुनाव 2026 समाचार(टी)राज्यसभा चुनाव 2026 वोटिंग(टी)राज्यसभा चुनाव 2026 अपडेट(टी)राज्यसभा(टी)राज्यसभा चुनाव(टी)राज्यसभा चुनाव 2026(टी)राज्यसभा चुनाव 2026 समाचार(टी)राज्यसभा चुनाव 2026 वोट(टी)राज्यसभा चुनाव 2026 अपडेट

बच्चों में हीट स्ट्रोक कितना घातक? दिखें ये लक्षण तो न करें इग्नोर, इन बातों का रखें खास ध्यान

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Heat stroke in small kids: देशभर में इस समय भीषण गर्मी का असर देखने को मिल रहा है. कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. वहीं, 25 मई से 2 जून तक नौतपा शुरू होने वाला है, जिसके चलते गर्मी और अधिक बढ़ने की संभावना है. ऐसे में भारत सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को सतर्क रहने और सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं. खासकर, शिशुओं और 5-6 साल के बच्चों की सेहत का खास ख्याल रखें. इन्हें घर से बाहर न निकलने दें. शिशुओं को भी तेज धूप में न ले जाएं. जानें, किस तरह से रखें अपने बच्चे को हीट स्ट्रोक से बचाकर और कैसे नजर आते हैं बच्चों में हीट स्ट्रोक के लक्षण… छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के अनुसार, नवजात शिशु और छोटे बच्चे हीट स्ट्रोक के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं. तेज गर्मी में थोड़ी सी लापरवाही भी उनकी सेहत पर भारी पड़ सकती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि बच्चों का शरीर बहुत जल्दी गर्म हो जाता है और उनमें पसीना भी कम निकलता है. इसकी वजह से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है, जो हीट स्ट्रोक का कारण बनता है. बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सावधानियां गर्मी के मौसम में बच्चों की विशेष देखभाल बेहद जरूरी है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ आसान उपाय अपनाकर बच्चों को हीट स्ट्रोक से बचाया जा सकता है. बच्चों को हमेशा ठंडी और हवादार जगह पर रखें.उन्हें तेज धूप या बंद और गर्म कमरे में अकेला न छोड़ें.शरीर का तापमान समय-समय पर चेक करते रहें.बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ पिलाते रहें.छोटे बच्चों को समय-समय पर मां का दूध जरूर पिलाएं.कपड़ों और साफ-सफाई का रखें ध्यान विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को गर्मी में हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनाने चाहिए. ज्यादा कपड़े पहनाने से शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती. इसके अलावा बच्चों को ठंडे पानी से नहलाना या गीले कपड़े से शरीर साफ करना भी फायदेमंद रहता है. इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें यदि बच्चा लगातार रो रहा हो, चिड़चिड़ा हो जाए, ज्यादा नींद आए, उल्टी करे, तेज बुखार हो या सांस लेने में परेशानी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि शिशुओं में हीट स्ट्रोक के लक्षण जल्दी समझ में नहीं आते, इसलिए पेरेंट्स को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है. दोपहर में बाहर ले जाने से बचें डॉक्टरों की सलाह है कि बच्चों को दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर न ले जाएं. इस दौरान गर्मी और धूप सबसे ज्यादा होती है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.