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चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही:वित्त वर्ष-26 में 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी, फरवरी में सरकार ने यह अनुमान 7.6% बताया था

चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही:वित्त वर्ष-26 में 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी, फरवरी में सरकार ने यह अनुमान 7.6% बताया था

वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में GDP ग्रोथ 7.8% रही। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 5 जून को ये आंकड़े जारी किए। इस बार GDP की गणना बेस ईयर 2011-12 के बजाय 2022-23 के आधार पर की गई है। सरकार ने बताया कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में GDP 7.7% की दर से बढ़ी है, जो पिछले साल 7.1% थी। इससे पहले फरवरी में सरकार ने इसका अनुमान 7.6% बताया था। नौकरों, ड्राइवर और ई-वाहन डेटा भी शामिल किया GDP की नई सीरीज में 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है। आर्थिक अनुमानों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए इसमें अब जीएसटी नेटवर्क, ई-वाहन डेटाबेस और घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर और घरेलू नौकरों की सेवाओं से जुड़ा डेटा भी शामिल किया गया है। आमतौर पर हर 5 साल में बदला जाता है बेस-ईयर समय के साथ अर्थव्यवस्था में आने वाले बड़े बदलावों को दर्ज करने के लिए समय-समय पर बेस ईयर बदला जाता है। आमतौर पर मंत्रालय हर पांच साल में डेटा सीरीज को अपडेट करता है, लेकिन कोविड महामारी और जीएसटी लागू होने की वजह से इस काम में देरी हुई। 1950 तक के नए आंकड़े दिसंबर 2026 तक आएंगे सरकार सिर्फ नए आंकड़े ही नहीं जारी करेगी, बल्कि पुराने आंकड़ों को भी नए बेस ईयर के हिसाब से दोबारा कैलकुलेट करेगी। मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इस नए फ्रेमवर्क के तहत ‘बैक-सीरीज’ डेटा (1950-51 तक के आंकड़े) दिसंबर 2026 तक आने की उम्मीद है। नए माप से सटीकता बढ़ेगी; हर 5 से 10 साल में मानक बदलना चाहिए आखिर जीडीपी मापने का तरीका क्यों बदला गया? 2011-12 वाला पैमाना 14 साल पुराना हो गया था। तब यूपीआई, जोमैटो, ओटीटी, गिग इकोनॉमी जैसी चीजें थीं ही नहीं। इसीलिए ये जरूरी था। 2022-23 को ही आधार वर्ष क्यों चुना गया? यह साल ‘सामान्य’ था। कोरोना खत्म हो चुका था। अर्थव्यवस्था स्थिर थी। डिजिटल इंडिया स्थापित हो चुका था। आधार वर्ष हमेशा ऐसा चुनते हैं जब न बहुत उछाल हो, न गिरावट। इससे आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? जेब पर सीधा असर नहीं, लेकिन सही आंकड़ों से सरकार बेहतर नीतियां बनाएगी। सही जगह पैसा लगेगा और विदेशी निवेश भी बढ़ेगा, जिसका फायदा धीरे-धीरे आम नागरिक को मिलेगा। आंकड़े बदले या कुछ छुपाया तो नहीं गया? नहीं। नए पैमाने से नापने पर माप बदलती है, यह स्वाभाविक है। अमेरिका, ब्रिटेन, चीन सब यही करते हैं। आंकड़े बदलना सटीकता की निशानी है। ​कितने अंतराल पर इसे बदलना चाहिए? अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार हर 5 से 10 वर्ष में बदलना चाहिए। देश में 5 साल तय, पर 2017-18 में नोटबंदी व जीएसटी के कारण देरी हो गई। इसके बाद कोविड आ गया, इसलिए अब किया। नॉलेज पार्ट: क्या होता है बेस ईयर बेस ईयर वह साल है जिसकी कीमतों को ‘फिक्स’ मानकर आज की आर्थिक तरक्की को मापा जाता है। यह महंगाई के असर को हटाकर देश की ‘असली’ ग्रोथ दिखाने में मदद करता है। उदाहरण: अगर 2011 में एक पेन 5 रुपए का था और आज 10 रुपए का है। अगर हम आज भी 100 पेन बना रहे हैं, तो 2011 के हिसाब से जीडीपी 500 रुपए दिखेगी। वहीं ये आज के हिसाब से 1000 रुपए होगी। बेस ईयर हमें यह समझने में मदद करता है कि हम पेन ज्यादा बना रहे हैं या सिर्फ पेन महंगा हो गया है। इकोनॉमी की सेहत बताती है GDP GDP यानी देश के भीतर एक तय समय में कितनी वैल्यू का सामान बना और कितनी सर्विसेज दी गईं। इसे देश की आर्थिक सेहत का ‘रिपोर्ट कार्ड’ भी कह सकते हैं। इसमें भारतीय कंपनियां ही नहीं, बल्कि देश में काम करने वाली विदेशी कंपनियों का प्रोडक्शन भी जोड़ा जाता है। दो तरह की GDP: रियल और नॉमिनल रियल जीडीपी: इसमें सामान और सेवाओं की कीमत बेस से तय की जाती है। अभी तक इसका साल 2011-12 था। इससे पता चलता है कि देश में उत्पादन सच में बढ़ा है या नहीं। नॉमिनल जीडीपी: यह मौजूदा बाजार भाव पर आधारित होती है। इसमें महंगाई भी शामिल होती है। अगर चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, तो नॉमिनल जीडीपी भी बढ़ी हुई दिखेगी। कैसे की जाती है जीडीपी की गिनती? जीडीपी निकालने के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल होता है: $GDP = C + G + I + NX$ C (कंजम्प्शन): यानी हम और आप जो अपनी जरूरतों पर खर्च करते हैं। G (गवर्नमेंट): सरकार द्वारा देश के विकास और सुविधाओं पर किया गया खर्च। I (इन्वेस्टमेंट): कंपनियों द्वारा बिजनेस को बढ़ाने के लिए किया गया निवेश। NX (नेट एक्सपोर्ट): दूसरे देशों को बेचे गए सामान में से खरीदे गए सामान को घटाना।

Hollywood Actor James Hendry Murdered

Hollywood Actor James Hendry Murdered

8 मिनट पहले कॉपी लिंक ‘जुमांजी’ और ‘टॉप गन: मैवेरिक’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके हॉलीवुड के वेटरन एक्टर जेम्स हैंडी की कैलिफोर्निया में उनके घर पर हत्या कर दी गई है। वे 81 साल के थे। लॉस एंजिल्स पुलिस डिपार्टमेंट के मुताबिक, जेम्स हैंडी के सीने पर चाकू से कई वार किए गए थे। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में उनकी गर्लफ्रेंड के 44 साल के बेटे माइकल ग्लेडहिल को गिरफ्तार किया है। 911 कॉल से मिली जानकारी लॉस एंजिल्स पुलिस को बुधवार को एक विचलित करने वाला 911 कॉल मिला था। कॉल करने वाले शख्स ने डिस्पैचर से कहा था, “मैं इंसान का बेटा हूं, मैंने अभी-अभी पाप के पुतले को मार दिया है।” इस सूचना के तुरंत बाद जब पुलिस टीम घटना स्थल पर पहुंची। यहां जेम्स हैंडी घर के सामने वाले हिस्से (फ्रंट यार्ड) में बेहोश पड़े मिले। उनके सीने पर चाकू के कई गहरे जख्म थे। उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। गर्लफ्रेंड का बेटा निकला हमलावर पुलिस जांच में सामने आया है कि हमला करने वाला शख्स 44 साल का माइकल ग्लेडहिल है। वारदात को अंजाम देने के बाद उसने खुद पुलिस से संपर्क किया और इस हमले की जिम्मेदारी ली। जांच अधिकारियों के मुताबिक, माइकल जेम्स हैंडी की गर्लफ्रेंड का बेटा है। हत्या के समय वह अपनी मां के घर पर ही रह रहा था। पुलिस ने उसे मर्डर के संदेह में मौके से ही गिरफ्तार कर लिया है। सीसीटीवी फुटेज और कपड़े मिले घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध शख्स घर के पास से आराम से पैदल गुजरता हुआ दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही क्राइम सीन की तस्वीरों में घर के सामने कुछ कपड़े भी छूटे हुए मिले हैं। पुलिस इन सभी सबूतों की बारीकी से जांच कर रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक हत्या के पीछे की मुख्य वजह या मकसद का खुलासा नहीं किया है। मामले की जांच अभी जारी है। जेम्स हैंडी का हॉलीवुड करियर जेम्स हैंडी ने हॉलीवुड में कई दशकों तक काम किया था और उनके नाम करीब 150 फिल्में और टीवी शोज दर्ज हैं। उन्होंने ‘जुमानजी’ और ‘टॉप गन: मैवेरिक’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं। इसके अलावा वे ‘द एक्स-फाइल्स’, ‘एनवाईपीडी ब्लू’ और ‘सीनफील्ड’ जैसे मशहूर टीवी शोज का भी हिस्सा रहे थे। उन्होंने इंडस्ट्री में एक लंबा समय बिताया था और अपनी अलग पहचान बनाई थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Hollywood Actor James Hendry Murdered

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25 मिनट पहले कॉपी लिंक ‘जुमांजी’ और ‘टॉप गन: मैवेरिक’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके हॉलीवुड के वेटरन एक्टर जेम्स हैंडी की कैलिफोर्निया में उनके घर पर हत्या कर दी गई है। वे 81 साल के थे। लॉस एंजिल्स पुलिस डिपार्टमेंट के मुताबिक, जेम्स हैंडी के सीने पर चाकू से कई वार किए गए थे। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में उनकी गर्लफ्रेंड के 44 साल के बेटे माइकल ग्लेडहिल को गिरफ्तार किया है। 911 कॉल से मिली जानकारी लॉस एंजिल्स पुलिस को बुधवार को एक विचलित करने वाला 911 कॉल मिला था। कॉल करने वाले शख्स ने डिस्पैचर से कहा था, “मैं इंसान का बेटा हूं, मैंने अभी-अभी पाप के पुतले को मार दिया है।” इस सूचना के तुरंत बाद जब पुलिस टीम घटना स्थल पर पहुंची। यहां जेम्स हैंडी घर के सामने वाले हिस्से (फ्रंट यार्ड) में बेहोश पड़े मिले। उनके सीने पर चाकू के कई गहरे जख्म थे। उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। गर्लफ्रेंड का बेटा निकला हमलावर पुलिस जांच में सामने आया है कि हमला करने वाला शख्स 44 साल का माइकल ग्लेडहिल है। वारदात को अंजाम देने के बाद उसने खुद पुलिस से संपर्क किया और इस हमले की जिम्मेदारी ली। जांच अधिकारियों के मुताबिक, माइकल जेम्स हैंडी की गर्लफ्रेंड का बेटा है। हत्या के समय वह अपनी मां के घर पर ही रह रहा था। पुलिस ने उसे मर्डर के संदेह में मौके से ही गिरफ्तार कर लिया है। सीसीटीवी फुटेज और कपड़े मिले घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध शख्स घर के पास से आराम से पैदल गुजरता हुआ दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही क्राइम सीन की तस्वीरों में घर के सामने कुछ कपड़े भी छूटे हुए मिले हैं। पुलिस इन सभी सबूतों की बारीकी से जांच कर रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक हत्या के पीछे की मुख्य वजह या मकसद का खुलासा नहीं किया है। मामले की जांच अभी जारी है। जेम्स हैंडी का हॉलीवुड करियर जेम्स हैंडी ने हॉलीवुड में कई दशकों तक काम किया था और उनके नाम करीब 150 फिल्में और टीवी शोज दर्ज हैं। उन्होंने ‘जुमानजी’ और ‘टॉप गन: मैवेरिक’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं। इसके अलावा वे ‘द एक्स-फाइल्स’, ‘एनवाईपीडी ब्लू’ और ‘सीनफील्ड’ जैसे मशहूर टीवी शोज का भी हिस्सा रहे थे। उन्होंने इंडस्ट्री में एक लंबा समय बिताया था और अपनी अलग पहचान बनाई थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

डीके शिवकुमार: क्या उनकी सरकार गिर जाएगी? मध्यावधि चुनावों पर एक साहसिक भविष्यवाणी से कर्नाटक चर्चा में है | बेंगलुरु-न्यूज़ न्यूज़

England Vs New Zealand Live Cricket Score, 1st Test Day 2: Stay updated with ENG vs NZ Ball by Ball Match Updates and Live Scorecard from Lord's. (Picture Credit: AP)

आखरी अपडेट:05 जून, 2026, 15:43 IST कर्नाटक के नए मंत्रिमंडल के गठन के कुछ दिनों बाद, पोर्टफोलियो आवंटन पर असहमति सामने आई है। इस विवाद ने भाजपा को सरकार पर निशाना साधने का नया मौका दे दिया है राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि पोर्टफोलियो आवंटन नए मुख्यमंत्री के सामने पहली बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है क्योंकि वह पार्टी के भीतर प्रतिस्पर्धी हितों को संतुलित करना चाहते हैं। डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली नवगठित कर्नाटक सरकार आंतरिक तनाव के पहले संकेतों का सामना कर रही है, मंत्रालय के गठन के कुछ ही दिनों के भीतर कैबिनेट पोर्टफोलियो आवंटन पर असहमति सामने आ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, कैबिनेट के गठन के तुरंत बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के बीच असंतोष उभर आया है, जिससे नेतृत्व दबाव में है क्योंकि वह प्रशासन को स्थिर करने का प्रयास कर रहा है। पोर्टफोलियो आवंटन फ्लैशप्वाइंट बन जाता है वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी द्वारा उन्हें सौंपे गए पोर्टफोलियो को लेकर अपने मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद विवाद गहरा गया। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता केएच मुनियप्पा के असंतोष की खबर आई, जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने उन्हें आवंटित विभाग के बारे में भी आपत्ति जताई थी। एक के बाद एक हुए घटनाक्रम ने सत्तारूढ़ दल के भीतर आंतरिक मतभेदों की ओर ध्यान आकर्षित किया है और कैबिनेट गठन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि पोर्टफोलियो आवंटन नए मुख्यमंत्री के सामने पहली बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है क्योंकि वह पार्टी के भीतर प्रतिस्पर्धी हितों को संतुलित करना चाहते हैं। बीजेपी को दिख रहे हैं अस्थिरता के संकेत विपक्षी भाजपा ने सरकार की आलोचना करने के लिए घटनाक्रम को जब्त कर लिया है। राज्य भाजपा अध्यक्ष और बीवाई विजयेंद्र ने दावा किया कि रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा नए प्रशासन में गिरने वाला “पहला विकेट” है और तर्क दिया कि सरकार की कार्यप्रणाली बढ़ती अस्थिरता का संकेत देती है। उन्होंने आगे सुझाव दिया कि राजनीतिक स्थिति अंततः मध्यावधि चुनाव का कारण बन सकती है, और कहा कि भाजपा ऐसे परिदृश्य के लिए तैयार है। विपक्ष के नेता आर अशोक ने भी सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर मतभेद तेजी से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल के भीतर बार-बार होने वाले विवाद इसके कामकाज में गहरी समस्याओं को दर्शाते हैं और राजनीतिक अस्थिरता की भविष्यवाणियों को प्रतिबिंबित करते हैं। सरकार की स्थिरता पर सवाल मंत्रालय के गठन के तुरंत बाद रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे ने सरकार की आंतरिक गतिशीलता की जांच तेज कर दी है। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने अभी तक सरकार की स्थिरता के लिए किसी खतरे का संकेत नहीं दिया है, लेकिन इस प्रकरण ने इस बात पर राजनीतिक बहस छेड़ दी है कि क्या वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रही असहमति आने वाले महीनों में शासन को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल, फोकस इस बात पर बना हुआ है कि मुख्यमंत्री पोर्टफोलियो आवंटन पर चिंताओं को कैसे संबोधित करते हैं और कैबिनेट के भीतर प्रतिस्पर्धी हितों का प्रबंधन करते हैं, क्योंकि प्रशासन अपनी शुरुआती राजनीतिक उथल-पुथल से आगे बढ़ना चाहता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : कर्नाटक, भारत, भारत समाचार शहर बेंगलुरु-समाचार डीके शिवकुमार: क्या उनकी सरकार गिर जाएगी? मध्यावधि चुनावों पर एक साहसिक भविष्यवाणी से कर्नाटक चर्चा में है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक सरकार कैबिनेट संकट(टी)कर्नाटक राजनीतिक अस्थिरता(टी)डीके शिवकुमार सरकार(टी)रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा(टी)कैबिनेट पोर्टफोलियो आवंटन(टी)कांग्रेस आंतरिक असंतोष(टी)भाजपा की आलोचना कर्नाटक(टी)कर्नाटक मध्यावधि चुनाव

डकैत: एक प्रेम कथा:अदिवि शेष ने कहा- दर्शक अब सिर्फ एक्शन नहीं, रोल्स को भी महसूस करना चाहता है

डकैत: एक प्रेम कथा:अदिवि शेष ने कहा- दर्शक अब सिर्फ एक्शन नहीं, रोल्स को भी महसूस करना चाहता है

अदिवि शेष इन दिनों अपनी एक्शन-ड्रामा फिल्म ‘डकैत: एक प्रेम कथा’ को लेकर चर्चा में हैं। ‘क्षणम’, ‘गूढ़ाचारी’ और ‘मेजर’ जैसी फिल्मों के जरिए अपनी अलग पहचान बना चुके शेष ने इस फिल्म के माध्यम से एक बार फिर दर्शकों के सामने नई कहानी पेश करने की तैयारी की है। दैनिक भास्कर के साथ इस विशेष बातचीत में अदिवि शेष ने अपनी आगामी से अपने जुड़ाव और इसके अन्य पहलुओं पर चर्चा की। मेरे लिए ‘डकैत’ का उद्देश्य केवल एक्शन दिखाना नहीं था ‘डकैत’ मूल रूप से सबसे पहले एक प्रेम कहानी है। मैं हमेशा इसे इसी तरह देखता हूं कि यह प्यार की कहानी में बुना गया एक्शन है, न कि एक्शन की कहानी में जोड़ा गया प्यार। अगर आपने फिल्म का गाना ‘रूबरू’ सुना है, जिसे फहीम अब्दुल्ला ने आवाज दी है, तो उसमें एक बेहद सादगी भरा, रूहानी और पुराने दौर के प्रेम का एहसास मिलता है। यह वैसी ही भावनाओं को दर्शाता है, जैसा कभी पुराने उपन्यासों या पिछली पीढ़ियों की प्रेम कहानियों में देखने को मिलता था। फिल्म का मूल विचार यही था कि जब इतने सरल, पवित्र और भावनात्मक प्रेम के बीच अचानक हिंसा और तीव्र एक्शन प्रवेश करता है, तो पूरा परिवेश किस तरह बदलता है। यही विरोधाभास इस कहानी की सबसे बड़ी ताकत है। मेरे लिए ‘डकैत’ का उद्देश्य केवल एक्शन दिखाना नहीं था, बल्कि यह दिखाना था कि भावनात्मक रूप से गहरे रिश्तों के बीच संघर्ष और हिंसा किस तरह असर डालते हैं। यही तत्व फिल्म को अलग, बड़े कैनवास वाली और विश्वसनीय बनाते हैं। मुझे अच्छी स्क्रिप्ट मिले, तो मैं जर्मन भाषा में भी फिल्म कर लूंगा मेरा नजरिया हमेशा से स्पष्ट रहा है। मैंने तब भी कहा था कि अगर मुझे अच्छी स्क्रिप्ट मिले, तो मैं जर्मन भाषा में भी फिल्म करने के लिए तैयार हूं। मेरे लिए भाषा नहीं, बल्कि कहानी महत्वपूर्ण है। ‘मेजर’ के बाद मुझे हिंदी और साउथ फिल्म इंडस्ट्री से 4-5 बड़ी वॉर फिल्में और बायोपिक्स ऑफर हुई थीं, लेकिन मेरे भीतर का लेखक मुझे बार-बार रोक रहा था। मुझे लगा कि मेजर संदीप उन्नीकृष्णन का किरदार निभाने के तुरंत बाद किसी दूसरी सैनिक-आधारित कहानी का हिस्सा बनना सही नहीं होगा। मैं उनके माता-पिता की भावनाओं और उनकी यादों के प्रति ईमानदार रहना चाहता था। मेरे लिए हमेशा वही कहानी मायने रखती है, जो भीतर तक प्रभावित करे। इंसानियत की शुरुआत ही माता-पिता से होती है मेरा मानना है कि प्यार कभी सामाजिक विषय नहीं रहा, बल्कि यह हमेशा एक बेहद व्यक्तिगत भावना रही है। इंसानियत की शुरुआत से ही माता-पिता, भाई-बहन और प्रेमियों के बीच भावनात्मक रिश्ते मौजूद रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि इन रिश्तों पर अब नई कहानियां नहीं कही जा सकतीं।

Gold & Silver Prices Fall

Gold & Silver Prices Fall

Hindi News Business Gold & Silver Prices Fall | 1kg Silver ₹2.55 Lakh, 10g Gold ₹1.54 Lakh नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी की कीमतों में 5 जून को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 6,138 रुपए घटकर 2.55 लाख रुपए पर आ गई है, जो गुरुवार को 2.61 लाख रुपए पर थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,896 रुपए घटकर 1.54 लाख रुपए आ गया है। इससे पहले 4 जून को यह 1.66 लाख पर था। सोना ऑल टाइम हाई से 127 दिन में 21,931 रुपए और चांदी 1,30,983 रुपए सस्ती हुई है। 29 जनवरी को सोना ₹1.76 लाख/10 ग्राम और चांदी ₹3.86 लाख/किलो थी। सोना ऑल टाइम हाई से ₹18 हजार सस्ता हुआ इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): ₹1.33 लाख ऑल टाइम हाई (29 जनवरी 2026): ₹1.76 लाख मौजूदा स्थिति: उच्चतम स्तर से सोना ₹18 हजार सस्ता होकर अब 1.58 लाख/10 ग्राम आ चुका है। चांदी में क्रैश: ₹3.86 लाख से ₹2.68 लाख तक चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव रहा और यह ऑल टाइम हाई से तेजी से नीचे आई है। शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): ₹2.30 लाख ऑल टाइम हाई (29 जनवरी 2026): ₹3.86 लाख गिरावट का आंकड़ा: पिछले 106 दिन में चांदी ₹1.17 लाख गिरकर ₹2.68 लाख/किलो पर आई। सोना-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़कर 15% हुई केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी है। सरकार का मकसद विदेशी खरीद कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को घटाना है। अमेरिकी-ईरान जंग के बीच सरकार ने ये फैसला लिया है। सरकार ने सोने पर 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) लगाया है। इस तरह कुल प्रभावी टैक्स 15% हो गया है। इससे पहले 2024 के बजट में वित्त मंत्री सीतारमण ने इंपोर्ट ड्यूटी 15% से घटाकर 6% की थी। टैक्स बढ़ने से तस्करी बढ़ने की संभावना वहीं, इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि टैक्स बढ़ने से तस्करी बढ़ सकती है। इससे पहले जब ड्यूटी कम की गई थी, तब स्मगलिंग में कमी आई थी। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने कहा कि सरकार ने करंट अकाउंट डेफिसिट (चालू खाता घाटा) को काबू में रखने के लिए यह कदम उठाया है। पहले से ही ऊंची कीमतों के बीच यह फैसला मांग को प्रभावित कर सकता है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Janhvi Kapoor Peddi Release | Tirupati Visit & Box Office ₹135Cr

Janhvi Kapoor Peddi Release | Tirupati Visit & Box Office ₹135Cr

13 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर अपनी नई फिल्म ‘पेद्दी’ की रिलीज के मौके पर आंध्र प्रदेश के तिरुपति में तिरुमाला मंदिर पहुंचीं। जाह्नवी अपनी जिंदगी और करियर के बड़े मौकों पर अक्सर इस मंदिर में दर्शन करने आती हैं। उनकी यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म मेकर्स के मुताबिक, राम चरण स्टारर इस फिल्म ने पहले ही दिन दुनिया भर में 135.36 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन कर बड़ी ओपनिंग की है। वहीं, घरेलू बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म ने मजबूत शुरुआत की है। सुबह कुर्ते में सीढ़ियां चढ़ीं, बाद में साड़ी में आईं नजर सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में जाह्नवी कपूर सुबह तड़के साधारण कुर्ता-पायजामा पहनकर मंदिर की सीढ़ियां चढ़ती हुई दिखाई दीं। इस दौरान उन्होंने अपने बालों का जूड़ा बनाया हुआ था और कानों में ईयरफोन लगा रखे थे। एक वीडियो क्लिप में वे चढ़ाई के दौरान एक कोने में बैठकर थोड़ा आराम करती भी नजर आईं। इसके बाद, मुख्य मंदिर में दर्शन के समय वे बैंगनी रंग की साड़ी, मैचिंग ज्वेलरी और माथे पर बिंदी लगाए हुए पारंपरिक लुक में घूमती दिखाई दीं। पहले दिन कमाए 135 करोड़ रुपए से ज्यादा डायरेक्टर बुची बाबू सना के निर्देशन में बनी फिल्म ‘पेद्दी’ को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म मेकर्स ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि फिल्म ने पहले दिन वर्ल्डवाइड 135.36 करोड़ रुपए का शानदार ग्रॉस कलेक्शन किया है। फिल्म में साउथ सुपरस्टार राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। जाह्नवी के करियर के लिहाज से इस फिल्म की ओपनिंग को काफी बड़ा माना जा रहा है। भारत में 51 करोड़ का नेट कलेक्शन, 12 हजार से ज्यादा शो बॉक्स ऑफिस ट्रैकर सैकनिल्क के मुताबिक, ‘पेड्डी’ ने भारत में अपने पहले दिन 51 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया है। फिल्म को पूरे देश में 12,412 शोज में रिलीज किया गया था। पहले दिन सिनेमाघरों में इसकी कुल ऑक्यूपेंसी यानी थिएटर में दर्शकों की संख्या करीब 45.5 प्रतिशत दर्ज की गई। ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वीकेंड में फिल्म की कमाई में और तेजी आ सकती है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Janhvi Kapoor Peddi Release | Tirupati Visit & Box Office ₹135Cr

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29 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर अपनी नई फिल्म ‘पेद्दी’ की रिलीज के मौके पर आंध्र प्रदेश के तिरुपति में तिरुमाला मंदिर पहुंचीं। जाह्नवी अपनी जिंदगी और करियर के बड़े मौकों पर अक्सर इस मंदिर में दर्शन करने आती हैं। उनकी यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म मेकर्स के मुताबिक, राम चरण स्टारर इस फिल्म ने पहले ही दिन दुनिया भर में 135.36 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन कर बड़ी ओपनिंग की है। वहीं, घरेलू बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म ने मजबूत शुरुआत की है। सुबह कुर्ते में सीढ़ियां चढ़ीं, बाद में साड़ी में आईं नजर सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में जाह्नवी कपूर सुबह तड़के साधारण कुर्ता-पायजामा पहनकर मंदिर की सीढ़ियां चढ़ती हुई दिखाई दीं। इस दौरान उन्होंने अपने बालों का जूड़ा बनाया हुआ था और कानों में ईयरफोन लगा रखे थे। एक वीडियो क्लिप में वे चढ़ाई के दौरान एक कोने में बैठकर थोड़ा आराम करती भी नजर आईं। इसके बाद, मुख्य मंदिर में दर्शन के समय वे बैंगनी रंग की साड़ी, मैचिंग ज्वेलरी और माथे पर बिंदी लगाए हुए पारंपरिक लुक में घूमती दिखाई दीं। पहले दिन कमाए 135 करोड़ रुपए से ज्यादा डायरेक्टर बुची बाबू सना के निर्देशन में बनी फिल्म ‘पेद्दी’ को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म मेकर्स ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि फिल्म ने पहले दिन वर्ल्डवाइड 135.36 करोड़ रुपए का शानदार ग्रॉस कलेक्शन किया है। फिल्म में साउथ सुपरस्टार राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। जाह्नवी के करियर के लिहाज से इस फिल्म की ओपनिंग को काफी बड़ा माना जा रहा है। भारत में 51 करोड़ का नेट कलेक्शन, 12 हजार से ज्यादा शो बॉक्स ऑफिस ट्रैकर सैकनिल्क के मुताबिक, ‘पेड्डी’ ने भारत में अपने पहले दिन 51 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया है। फिल्म को पूरे देश में 12,412 शोज में रिलीज किया गया था। पहले दिन सिनेमाघरों में इसकी कुल ऑक्यूपेंसी यानी थिएटर में दर्शकों की संख्या करीब 45.5 प्रतिशत दर्ज की गई। ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वीकेंड में फिल्म की कमाई में और तेजी आ सकती है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

‘नया राजनीतिक आंदोलन, लोकसभा चुनाव’: अन्नामलाई ने बीजेपी से बाहर निकलने के बाद भविष्य की योजनाएं बताईं | भारत समाचार

England Vs New Zealand Live Cricket Score, 1st Test Day 2: Stay updated with ENG vs NZ Ball by Ball Match Updates and Live Scorecard from Lord's. (Picture Credit: AP)

आखरी अपडेट:05 जून, 2026, 14:41 IST अन्नामलाई ने अपने इस कदम को “अपने सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक यात्रा का अगला चरण” बताया और युवाओं और आम लोगों से उनके साथ जुड़ने का आग्रह किया। अन्नामलाई 2020 में भाजपा में शामिल हुए और 10 महीने के भीतर, पार्टी की तमिलनाडु इकाई के सबसे युवा अध्यक्ष बन गए। (एक्स) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ अपने छह साल लंबे जुड़ाव को खत्म करने के कुछ घंटों बाद, के अन्नामलाई ने अपना एक्स बायो अपडेट किया: “अच्छी राजनीति की तलाश में एक आम आदमी।” तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रमुख, जो कभी राज्य में पार्टी के प्रमुख चेहरे थे, ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह अपना खुद का एक “राजनीतिक आंदोलन” शुरू करेंगे और अपने अगले राजनीतिक कदमों की रूपरेखा तैयार करते हुए आम चुनाव लड़ेंगे। उनके बाहर निकलने की अटकलें, जो कई हफ्तों से चल रही थीं, शुक्रवार को औपचारिक हो गईं जब पूर्व पुलिस अधिकारी से नेता बने ने भाजपा से अपना इस्तीफा दे दिया, जिससे पार्टी के साथ उनका कार्यकाल समाप्त हो गया। राष्ट्रीय राजधानी में भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ कई बैठकों के बाद नेता ने इस्तीफा दे दिया। हालाँकि, उनके “मुद्दों” को संबोधित करने के लिए पार्टी के आश्वासन ने अन्नामलाई के निर्णय को नहीं बदला, तमिलनाडु के पूर्व भाजपा प्रमुख ने कथित तौर पर अपने स्वयं के राजनीतिक पाठ्यक्रम को निर्धारित करने के लिए “सौहार्दपूर्ण अलगाव” का विकल्प चुना। भाजपा छोड़ने के बाद अपने मीडिया संबोधन में अन्नामलाई ने अपनी भविष्य की योजनाओं को विस्तार से बताया और घोषणा की कि वह जल्द ही एक नया राजनीतिक आंदोलन शुरू करेंगे। यह भी पढ़ें: ‘हम एक नया राजनीतिक आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं’: बीजेपी छोड़ने के बाद अन्नामलाई का बड़ा ऐलान अन्नामलाई ने इस फैसले को “अपने सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक यात्रा का अगला चरण” बताते हुए युवाओं और आम लोगों से उनके साथ जुड़ने की अपील की। उन्होंने एक नई, जन-केंद्रित राजनीति लाने का वादा करते हुए कहा, ”एक आम आदमी का राजनीति में आना एक बड़ी बात है।” नेता ने कहा, हम राजनीति को लोगों तक ले जाना चाहते हैं और “स्थायी विधायकों और सांसदों” की संस्कृति को खत्म करना चाहते हैं। बड़ी चुनावी महत्वाकांक्षा अपने राजनीतिक रोडमैप को रेखांकित करते हुए, अन्नामलाई ने कहा कि वह तमिलनाडु में अगला लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन “भविष्य के लिए कई नए नेताओं” को तैयार करने पर केंद्रित होगा और उन्होंने पारंपरिक पार्टियों के बजाय आम लोगों द्वारा संचालित एक मंच का वादा किया। कार्य के पैमाने को स्वीकार करते हुए, उन्होंने कहा कि पार्टी को “कदम दर कदम” बनाने के लिए “धैर्य और संयम” की आवश्यकता होगी। सिविल सेवाओं से राजनीति तक की अपनी व्यक्तिगत यात्रा का जिक्र करते हुए, उन्होंने खुद को “एक आईपीएस अधिकारी बताया, जो पूरे भारत में रहा और काम किया, गर्व से एक भारतीय और एक पारंपरिक तमिलियन दोनों के रूप में अपनी पहचान रखता है”। ‘मुझसे जुड़ें’ अपने राजनीतिक आंदोलन को “वैचारिक स्पष्टता के साथ आम लोगों की राजनीति” बताते हुए, अन्नामलाई ने युवाओं से “पंथ राजनीति और राजवंशों” को समाप्त करने के लिए उनके साथ जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “हम बदलाव की राजनीति का निर्माण कर रहे हैं, भावी पीढ़ियों के लिए नींव रख रहे हैं।” वह अपनी राजनीतिक यात्रा में समर्थन के लिए जनता के पास भी पहुंचे और लोगों से उन पर भरोसा करने को कहा। “कृपया मेरे साथ जुड़ें, मुझ पर विश्वास करें, मुझ पर विश्वास करें।” यह भी पढ़ें: अन्नामलाई ने छोड़ी बीजेपी, पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने स्वीकार किया इस्तीफा उन्होंने कहा, “हमारे लक्ष्य अब बहुत बड़े हैं। ऐसी राजनीति की जरूरत है जो वास्तविक बदलाव ला सके।” राज्य की राजनीतिक संस्कृति में बदलाव का आह्वान करते हुए, अन्नामलाई ने तर्क दिया कि राजनीति को व्यक्ति-केंद्रित नेतृत्व से हटकर आम लोगों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। “हमें व्यक्ति-संचालित राजनीति से बाहर आना होगा। हमें आम आदमी की राजनीति की ज़रूरत है।” ‘विचार बीजेपी से मेल नहीं खाते’ तमिल मुद्दों पर बोलना जारी रखने का वादा करते हुए, अन्नामलाई ने कहा कि “विचारधाराओं को भविष्य की पीढ़ियों के लिए अनुकूलित होना चाहिए या नष्ट हो जाना चाहिए।” उन्होंने कहा, “मेरा मानना ​​है कि एक मजबूत और एकजुट भारत का निर्माण इसके कई क्षेत्रों की गरिमा और आकांक्षाओं पर किया जाएगा,” और तमिलनाडु से संबंधित मुद्दों पर भाजपा के साथ अपने मतभेदों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पिछले 18 महीनों में पार्टी के साथ ये असहमति व्यक्त की है, उन्होंने कहा, “तमिलनाडु के संबंध में हमारे विचार मेल नहीं खाते हैं।” अन्नामलाई ने छह साल तक सेवा करने का अवसर देने के लिए भाजपा को धन्यवाद दिया और याद किया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर पार्टी में शामिल हुए हैं। पार्टी में अपने समय को अपनी राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण चरण बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे उन्हें बहुमूल्य अनुभव और सीख मिली। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका भविष्य का राजनीतिक दल भाजपा के साथ तमिलनाडु के अन्य राजनीतिक दलों से अलग व्यवहार नहीं करेगा। के अन्नामलाई ने शुक्रवार को भाजपा छोड़ दी, जिससे पार्टी के साथ उनका छह साल पुराना गठबंधन खत्म हो गया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में पृषा विभावरी प्रिशा News18.com में मुख्य उप-संपादक हैं, जिनके पास राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचारों में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह संपादकीय नेतृत्व, तीव्र समाचार निर्णय और उच्च प्रभाव वाली टिप्पणी में माहिर हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘नया राजनीतिक आंदोलन, लोकसभा चुनाव’: अन्नामलाई ने भाजपा के बाहर निकलने के बाद भविष्य की योजनाएं बताईं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार 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AI could surpass humans by 2030

AI could surpass humans by 2030

न्यूयॉर्क9 मिनट पहले कॉपी लिंक सीईओ हासाबिस ने एजीआई की तुलना ‘सिंगुलैरिटी’ से की, यानी वो पल जहां से पलटकर देखना मुमकिन नहीं होगा।- फाइल फोटो गूगल डीपमाइंड के सीईओ डेमिस हासाबिस ने हाल ही में एक ऐसी बात कही जो सुनने में उतनी ही रोमांचक है, जितनी डरावनी। उन्होंने कहा कि इंसान जैसी सोच रखने वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एजीआई अब महज कुछ साल दूर है। स्टैनफर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘शायद 2030, एक-दो साल कम या ज्यादा लग सकते हैं।’ यह सुनकर खुद उन्हें भी हैरानी होती है। हासाबिस ने एजीआई की तुलना ‘सिंगुलैरिटी’ से की, यानी वो पल जहां से पलटकर देखना मुमकिन नहीं होगा। उनके मुताबिक यह ‘एक नए मानव युग’ की शुरुआत होगी। और इसीलिए वे बार-बार यह कहते हैं कि नए दौर का सामना करने की तैयारी अभी से होनी चाहिए क्योंकि वक्त कम बचा है। हासाबिस इकलौते नहीं हैं जो इस तरह की बातें कर रहे हैं। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन का कहना है कि एआई की वजह से लाखों नौकरियां जा सकती हैं। एंथ्रोपिक के सीईओ डेरियो अमोदेई ने तो यहां तक कह चुके हैं कि अगले पांच वर्षों में आधे एंट्री-लेवल वाइट-कॉलर काम गायब हो सकते हैं। हां, यह भी सच है कि हाल के दिनों में इन तमाम दिग्गजों ने अपनी ‘कयामत की भाषा’ में थोड़ी नरमी लाई है, लेकिन मुख्य संदेश वही है। हासाबिस ने यह भी माना कि उनके कुछ साथी अपनी भविष्यवाणियों में ‘बहुत ज्यादा निश्चित’ हो जाते हैं। यह ठीक नहीं। उन्होंने एजीआई को सिर्फ खतरे का पर्याय नहीं बताया। उनके मुताबिक यही टेक्नोलॉजी मेडिकल साइंस में क्रांति ला सकती है। यह आर्थिक बदलाव की वजह बन सकती है और एक ऐसी दुनिया की नींव रख सकती है जहां ‘अभाव’ शब्द का अर्थ बदल जाए, जिसे भविष्यवादी ‘पोस्ट-स्कार्सिटी वर्ल्ड’ कहते हैं। युवाओं और छात्रों को उनका सीधा संदेश है- चाहे आप ‘ह्यूमैनिटीज’ पढ़ते हों या साइंस-टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग ले रहे हों, इस तकनीक से भागिए मत, इसे अपनाइए। उन्होंने सबसे दिलचस्प बात ये कही, ‘भविष्य अभी लिखा नहीं गया है, लेकिन अगले कुछ साल तय कर देंगे कि वो वास्तव में कैसा दिखेगा।’ एजीआई- जब मशीनें भी इंसान की तरह हर काम में माहिर होंगी एजीआई यानी आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस। यह एआई का वो स्तर है जब मशीन हर काम इंसान जितनी या उससे भी बेहतर क्षमता से कर सके। अभी का एआई किसी एक काम में माहिर होता है, एजीआई हर काम में माहिर होगा। हासाबिस का अनुमान है कि यह 2030 तक हकीकत बन सकता है। सैम ऑल्टमैन और डेरियो अमोदेई भी इसी समयसीमा के आसपास इशारा कर चुके हैं। एजीआई के संभावित फायदे- बीमारियों का इलाज, आर्थिक बदलाव, अभावमुक्त दुनिया। लेकिन इसके साथ नौकरियां कम होने के खतरे, नियंत्रण का सवाल, समाज पर अप्रत्याशित प्रभाव जैसी आशंकाएं भी जुड़ी हुई हैं। दुनिया के पास तैयारी के लिए शायद पांच साल भी नहीं हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔