Tuesday, 21 Jul 2026 | 09:15 PM

Trending :

EXCLUSIVE

चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही:वित्त वर्ष-26 में 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी, फरवरी में सरकार ने यह अनुमान 7.6% बताया था

चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही:वित्त वर्ष-26 में 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी, फरवरी में सरकार ने यह अनुमान 7.6% बताया था

वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में GDP ग्रोथ 7.8% रही। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 5 जून को ये आंकड़े जारी किए। इस बार GDP की गणना बेस ईयर 2011-12 के बजाय 2022-23 के आधार पर की गई है। सरकार ने बताया कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में GDP 7.7% की दर से बढ़ी है, जो पिछले साल 7.1% थी। इससे पहले फरवरी में सरकार ने इसका अनुमान 7.6% बताया था। नौकरों, ड्राइवर और ई-वाहन डेटा भी शामिल किया GDP की नई सीरीज में 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है। आर्थिक अनुमानों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए इसमें अब जीएसटी नेटवर्क, ई-वाहन डेटाबेस और घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर और घरेलू नौकरों की सेवाओं से जुड़ा डेटा भी शामिल किया गया है। आमतौर पर हर 5 साल में बदला जाता है बेस-ईयर समय के साथ अर्थव्यवस्था में आने वाले बड़े बदलावों को दर्ज करने के लिए समय-समय पर बेस ईयर बदला जाता है। आमतौर पर मंत्रालय हर पांच साल में डेटा सीरीज को अपडेट करता है, लेकिन कोविड महामारी और जीएसटी लागू होने की वजह से इस काम में देरी हुई। 1950 तक के नए आंकड़े दिसंबर 2026 तक आएंगे सरकार सिर्फ नए आंकड़े ही नहीं जारी करेगी, बल्कि पुराने आंकड़ों को भी नए बेस ईयर के हिसाब से दोबारा कैलकुलेट करेगी। मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इस नए फ्रेमवर्क के तहत ‘बैक-सीरीज’ डेटा (1950-51 तक के आंकड़े) दिसंबर 2026 तक आने की उम्मीद है। नए माप से सटीकता बढ़ेगी; हर 5 से 10 साल में मानक बदलना चाहिए आखिर जीडीपी मापने का तरीका क्यों बदला गया? 2011-12 वाला पैमाना 14 साल पुराना हो गया था। तब यूपीआई, जोमैटो, ओटीटी, गिग इकोनॉमी जैसी चीजें थीं ही नहीं। इसीलिए ये जरूरी था। 2022-23 को ही आधार वर्ष क्यों चुना गया? यह साल ‘सामान्य’ था। कोरोना खत्म हो चुका था। अर्थव्यवस्था स्थिर थी। डिजिटल इंडिया स्थापित हो चुका था। आधार वर्ष हमेशा ऐसा चुनते हैं जब न बहुत उछाल हो, न गिरावट। इससे आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? जेब पर सीधा असर नहीं, लेकिन सही आंकड़ों से सरकार बेहतर नीतियां बनाएगी। सही जगह पैसा लगेगा और विदेशी निवेश भी बढ़ेगा, जिसका फायदा धीरे-धीरे आम नागरिक को मिलेगा। आंकड़े बदले या कुछ छुपाया तो नहीं गया? नहीं। नए पैमाने से नापने पर माप बदलती है, यह स्वाभाविक है। अमेरिका, ब्रिटेन, चीन सब यही करते हैं। आंकड़े बदलना सटीकता की निशानी है। ​कितने अंतराल पर इसे बदलना चाहिए? अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार हर 5 से 10 वर्ष में बदलना चाहिए। देश में 5 साल तय, पर 2017-18 में नोटबंदी व जीएसटी के कारण देरी हो गई। इसके बाद कोविड आ गया, इसलिए अब किया। नॉलेज पार्ट: क्या होता है बेस ईयर बेस ईयर वह साल है जिसकी कीमतों को ‘फिक्स’ मानकर आज की आर्थिक तरक्की को मापा जाता है। यह महंगाई के असर को हटाकर देश की ‘असली’ ग्रोथ दिखाने में मदद करता है। उदाहरण: अगर 2011 में एक पेन 5 रुपए का था और आज 10 रुपए का है। अगर हम आज भी 100 पेन बना रहे हैं, तो 2011 के हिसाब से जीडीपी 500 रुपए दिखेगी। वहीं ये आज के हिसाब से 1000 रुपए होगी। बेस ईयर हमें यह समझने में मदद करता है कि हम पेन ज्यादा बना रहे हैं या सिर्फ पेन महंगा हो गया है। इकोनॉमी की सेहत बताती है GDP GDP यानी देश के भीतर एक तय समय में कितनी वैल्यू का सामान बना और कितनी सर्विसेज दी गईं। इसे देश की आर्थिक सेहत का ‘रिपोर्ट कार्ड’ भी कह सकते हैं। इसमें भारतीय कंपनियां ही नहीं, बल्कि देश में काम करने वाली विदेशी कंपनियों का प्रोडक्शन भी जोड़ा जाता है। दो तरह की GDP: रियल और नॉमिनल रियल जीडीपी: इसमें सामान और सेवाओं की कीमत बेस से तय की जाती है। अभी तक इसका साल 2011-12 था। इससे पता चलता है कि देश में उत्पादन सच में बढ़ा है या नहीं। नॉमिनल जीडीपी: यह मौजूदा बाजार भाव पर आधारित होती है। इसमें महंगाई भी शामिल होती है। अगर चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, तो नॉमिनल जीडीपी भी बढ़ी हुई दिखेगी। कैसे की जाती है जीडीपी की गिनती? जीडीपी निकालने के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल होता है: $GDP = C + G + I + NX$ C (कंजम्प्शन): यानी हम और आप जो अपनी जरूरतों पर खर्च करते हैं। G (गवर्नमेंट): सरकार द्वारा देश के विकास और सुविधाओं पर किया गया खर्च। I (इन्वेस्टमेंट): कंपनियों द्वारा बिजनेस को बढ़ाने के लिए किया गया निवेश। NX (नेट एक्सपोर्ट): दूसरे देशों को बेचे गए सामान में से खरीदे गए सामान को घटाना।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Mohun Bagan vs East Bengal Live Score, ISL 2026. (Picture Credit: X/@mohunbagansg and @eastbengal_fc)

May 17, 2026/
10:25 pm

आखरी अपडेट:17 मई, 2026, 22:25 IST टीवीके केरल इकाई को लेकर चर्चा तब शुरू हुई जब वायनाड में विजय प्रशंसकों...

बैग से ट्रेन में 40 लाख के जेवर चोरी:उज्जैन से राजगढ़ आ रही थी महिला, चोरों ने बच्चों से जानकारी निकाली

April 27, 2026/
10:09 pm

राजगढ़ में बीना-नागदा ट्रेन में एक बड़ी चोरी की वारदात सामने आई है। उज्जैन से राजगढ़ शादी में आ रही...

Aiden Markram and Himmat Singh are building a partnership (Picture credit: AP)

May 4, 2026/
9:13 pm

आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 21:13 IST पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर पश्चिम बंगाल में कम से...

उत्तराखंड के स्पोर्ट्स कॉलेजों में दाखिले शुरू:महाराणा प्रताप में 60 सीटें, खेल का कोटा फिक्स नहीं; 5 कड़े टेस्ट पास करने वालों को मिलेगी एंट्री

May 9, 2026/
12:48 pm

उत्तराखंड में खेलों में अपना भविष्य बनाने का सपना देख रहे 10 से 13 साल के बच्चों के लिए प्रदेश...

करिश्मा कपूर@52, जया बच्चन ने सरेआम कहा बहू:कपूर खानदान की पहली एक्ट्रेस, हनीमून पर पति ने दोस्तों के साथ सोने को कहा

June 25, 2026/
4:30 am

90 के दशक में बॉलीवुड पर राज करने वालीं करिश्मा कपूर आज 52 साल की हो चुकी हैं। 65 से...

तस्वीर का विवरण

July 13, 2026/
6:42 pm

लौकी के ग्लौटी कबाब बनाने की सामग्री के लिए: 1 लोकी, 2 कटे हुए आलू, 1/2 कप बेसन, बेडक्रंब्स, 1...

भोजशाला देखने जाएंगे हाईकोर्ट जज, 2 को सुनवाई:याचिकाकर्ताओं की सुनवाई से पहले निरीक्षण करेंगे जस्टिस; सर्वे रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति

March 16, 2026/
9:29 am

मध्य प्रदेश की धार जिले में स्थित भोजशाला मामले में हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सोमवार को सुनवाई हुई। इस...

राजनीति

चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही:वित्त वर्ष-26 में 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी, फरवरी में सरकार ने यह अनुमान 7.6% बताया था

चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही:वित्त वर्ष-26 में 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी, फरवरी में सरकार ने यह अनुमान 7.6% बताया था

वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में GDP ग्रोथ 7.8% रही। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 5 जून को ये आंकड़े जारी किए। इस बार GDP की गणना बेस ईयर 2011-12 के बजाय 2022-23 के आधार पर की गई है। सरकार ने बताया कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में GDP 7.7% की दर से बढ़ी है, जो पिछले साल 7.1% थी। इससे पहले फरवरी में सरकार ने इसका अनुमान 7.6% बताया था। नौकरों, ड्राइवर और ई-वाहन डेटा भी शामिल किया GDP की नई सीरीज में 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है। आर्थिक अनुमानों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए इसमें अब जीएसटी नेटवर्क, ई-वाहन डेटाबेस और घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर और घरेलू नौकरों की सेवाओं से जुड़ा डेटा भी शामिल किया गया है। आमतौर पर हर 5 साल में बदला जाता है बेस-ईयर समय के साथ अर्थव्यवस्था में आने वाले बड़े बदलावों को दर्ज करने के लिए समय-समय पर बेस ईयर बदला जाता है। आमतौर पर मंत्रालय हर पांच साल में डेटा सीरीज को अपडेट करता है, लेकिन कोविड महामारी और जीएसटी लागू होने की वजह से इस काम में देरी हुई। 1950 तक के नए आंकड़े दिसंबर 2026 तक आएंगे सरकार सिर्फ नए आंकड़े ही नहीं जारी करेगी, बल्कि पुराने आंकड़ों को भी नए बेस ईयर के हिसाब से दोबारा कैलकुलेट करेगी। मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इस नए फ्रेमवर्क के तहत ‘बैक-सीरीज’ डेटा (1950-51 तक के आंकड़े) दिसंबर 2026 तक आने की उम्मीद है। नए माप से सटीकता बढ़ेगी; हर 5 से 10 साल में मानक बदलना चाहिए आखिर जीडीपी मापने का तरीका क्यों बदला गया? 2011-12 वाला पैमाना 14 साल पुराना हो गया था। तब यूपीआई, जोमैटो, ओटीटी, गिग इकोनॉमी जैसी चीजें थीं ही नहीं। इसीलिए ये जरूरी था। 2022-23 को ही आधार वर्ष क्यों चुना गया? यह साल ‘सामान्य’ था। कोरोना खत्म हो चुका था। अर्थव्यवस्था स्थिर थी। डिजिटल इंडिया स्थापित हो चुका था। आधार वर्ष हमेशा ऐसा चुनते हैं जब न बहुत उछाल हो, न गिरावट। इससे आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? जेब पर सीधा असर नहीं, लेकिन सही आंकड़ों से सरकार बेहतर नीतियां बनाएगी। सही जगह पैसा लगेगा और विदेशी निवेश भी बढ़ेगा, जिसका फायदा धीरे-धीरे आम नागरिक को मिलेगा। आंकड़े बदले या कुछ छुपाया तो नहीं गया? नहीं। नए पैमाने से नापने पर माप बदलती है, यह स्वाभाविक है। अमेरिका, ब्रिटेन, चीन सब यही करते हैं। आंकड़े बदलना सटीकता की निशानी है। ​कितने अंतराल पर इसे बदलना चाहिए? अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार हर 5 से 10 वर्ष में बदलना चाहिए। देश में 5 साल तय, पर 2017-18 में नोटबंदी व जीएसटी के कारण देरी हो गई। इसके बाद कोविड आ गया, इसलिए अब किया। नॉलेज पार्ट: क्या होता है बेस ईयर बेस ईयर वह साल है जिसकी कीमतों को ‘फिक्स’ मानकर आज की आर्थिक तरक्की को मापा जाता है। यह महंगाई के असर को हटाकर देश की ‘असली’ ग्रोथ दिखाने में मदद करता है। उदाहरण: अगर 2011 में एक पेन 5 रुपए का था और आज 10 रुपए का है। अगर हम आज भी 100 पेन बना रहे हैं, तो 2011 के हिसाब से जीडीपी 500 रुपए दिखेगी। वहीं ये आज के हिसाब से 1000 रुपए होगी। बेस ईयर हमें यह समझने में मदद करता है कि हम पेन ज्यादा बना रहे हैं या सिर्फ पेन महंगा हो गया है। इकोनॉमी की सेहत बताती है GDP GDP यानी देश के भीतर एक तय समय में कितनी वैल्यू का सामान बना और कितनी सर्विसेज दी गईं। इसे देश की आर्थिक सेहत का ‘रिपोर्ट कार्ड’ भी कह सकते हैं। इसमें भारतीय कंपनियां ही नहीं, बल्कि देश में काम करने वाली विदेशी कंपनियों का प्रोडक्शन भी जोड़ा जाता है। दो तरह की GDP: रियल और नॉमिनल रियल जीडीपी: इसमें सामान और सेवाओं की कीमत बेस से तय की जाती है। अभी तक इसका साल 2011-12 था। इससे पता चलता है कि देश में उत्पादन सच में बढ़ा है या नहीं। नॉमिनल जीडीपी: यह मौजूदा बाजार भाव पर आधारित होती है। इसमें महंगाई भी शामिल होती है। अगर चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, तो नॉमिनल जीडीपी भी बढ़ी हुई दिखेगी। कैसे की जाती है जीडीपी की गिनती? जीडीपी निकालने के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल होता है: $GDP = C + G + I + NX$ C (कंजम्प्शन): यानी हम और आप जो अपनी जरूरतों पर खर्च करते हैं। G (गवर्नमेंट): सरकार द्वारा देश के विकास और सुविधाओं पर किया गया खर्च। I (इन्वेस्टमेंट): कंपनियों द्वारा बिजनेस को बढ़ाने के लिए किया गया निवेश। NX (नेट एक्सपोर्ट): दूसरे देशों को बेचे गए सामान में से खरीदे गए सामान को घटाना।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.