Sunday, 06 Sep 2026 | 05:06 PM

Trending :

EXCLUSIVE

चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही:वित्त वर्ष-26 में 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी, फरवरी में सरकार ने यह अनुमान 7.6% बताया था

चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही:वित्त वर्ष-26 में 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी, फरवरी में सरकार ने यह अनुमान 7.6% बताया था

वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में GDP ग्रोथ 7.8% रही। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 5 जून को ये आंकड़े जारी किए। इस बार GDP की गणना बेस ईयर 2011-12 के बजाय 2022-23 के आधार पर की गई है। सरकार ने बताया कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में GDP 7.7% की दर से बढ़ी है, जो पिछले साल 7.1% थी। इससे पहले फरवरी में सरकार ने इसका अनुमान 7.6% बताया था। नौकरों, ड्राइवर और ई-वाहन डेटा भी शामिल किया GDP की नई सीरीज में 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है। आर्थिक अनुमानों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए इसमें अब जीएसटी नेटवर्क, ई-वाहन डेटाबेस और घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर और घरेलू नौकरों की सेवाओं से जुड़ा डेटा भी शामिल किया गया है। आमतौर पर हर 5 साल में बदला जाता है बेस-ईयर समय के साथ अर्थव्यवस्था में आने वाले बड़े बदलावों को दर्ज करने के लिए समय-समय पर बेस ईयर बदला जाता है। आमतौर पर मंत्रालय हर पांच साल में डेटा सीरीज को अपडेट करता है, लेकिन कोविड महामारी और जीएसटी लागू होने की वजह से इस काम में देरी हुई। 1950 तक के नए आंकड़े दिसंबर 2026 तक आएंगे सरकार सिर्फ नए आंकड़े ही नहीं जारी करेगी, बल्कि पुराने आंकड़ों को भी नए बेस ईयर के हिसाब से दोबारा कैलकुलेट करेगी। मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इस नए फ्रेमवर्क के तहत ‘बैक-सीरीज’ डेटा (1950-51 तक के आंकड़े) दिसंबर 2026 तक आने की उम्मीद है। नए माप से सटीकता बढ़ेगी; हर 5 से 10 साल में मानक बदलना चाहिए आखिर जीडीपी मापने का तरीका क्यों बदला गया? 2011-12 वाला पैमाना 14 साल पुराना हो गया था। तब यूपीआई, जोमैटो, ओटीटी, गिग इकोनॉमी जैसी चीजें थीं ही नहीं। इसीलिए ये जरूरी था। 2022-23 को ही आधार वर्ष क्यों चुना गया? यह साल ‘सामान्य’ था। कोरोना खत्म हो चुका था। अर्थव्यवस्था स्थिर थी। डिजिटल इंडिया स्थापित हो चुका था। आधार वर्ष हमेशा ऐसा चुनते हैं जब न बहुत उछाल हो, न गिरावट। इससे आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? जेब पर सीधा असर नहीं, लेकिन सही आंकड़ों से सरकार बेहतर नीतियां बनाएगी। सही जगह पैसा लगेगा और विदेशी निवेश भी बढ़ेगा, जिसका फायदा धीरे-धीरे आम नागरिक को मिलेगा। आंकड़े बदले या कुछ छुपाया तो नहीं गया? नहीं। नए पैमाने से नापने पर माप बदलती है, यह स्वाभाविक है। अमेरिका, ब्रिटेन, चीन सब यही करते हैं। आंकड़े बदलना सटीकता की निशानी है। ​कितने अंतराल पर इसे बदलना चाहिए? अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार हर 5 से 10 वर्ष में बदलना चाहिए। देश में 5 साल तय, पर 2017-18 में नोटबंदी व जीएसटी के कारण देरी हो गई। इसके बाद कोविड आ गया, इसलिए अब किया। नॉलेज पार्ट: क्या होता है बेस ईयर बेस ईयर वह साल है जिसकी कीमतों को ‘फिक्स’ मानकर आज की आर्थिक तरक्की को मापा जाता है। यह महंगाई के असर को हटाकर देश की ‘असली’ ग्रोथ दिखाने में मदद करता है। उदाहरण: अगर 2011 में एक पेन 5 रुपए का था और आज 10 रुपए का है। अगर हम आज भी 100 पेन बना रहे हैं, तो 2011 के हिसाब से जीडीपी 500 रुपए दिखेगी। वहीं ये आज के हिसाब से 1000 रुपए होगी। बेस ईयर हमें यह समझने में मदद करता है कि हम पेन ज्यादा बना रहे हैं या सिर्फ पेन महंगा हो गया है। इकोनॉमी की सेहत बताती है GDP GDP यानी देश के भीतर एक तय समय में कितनी वैल्यू का सामान बना और कितनी सर्विसेज दी गईं। इसे देश की आर्थिक सेहत का ‘रिपोर्ट कार्ड’ भी कह सकते हैं। इसमें भारतीय कंपनियां ही नहीं, बल्कि देश में काम करने वाली विदेशी कंपनियों का प्रोडक्शन भी जोड़ा जाता है। दो तरह की GDP: रियल और नॉमिनल रियल जीडीपी: इसमें सामान और सेवाओं की कीमत बेस से तय की जाती है। अभी तक इसका साल 2011-12 था। इससे पता चलता है कि देश में उत्पादन सच में बढ़ा है या नहीं। नॉमिनल जीडीपी: यह मौजूदा बाजार भाव पर आधारित होती है। इसमें महंगाई भी शामिल होती है। अगर चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, तो नॉमिनल जीडीपी भी बढ़ी हुई दिखेगी। कैसे की जाती है जीडीपी की गिनती? जीडीपी निकालने के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल होता है: $GDP = C + G + I + NX$ C (कंजम्प्शन): यानी हम और आप जो अपनी जरूरतों पर खर्च करते हैं। G (गवर्नमेंट): सरकार द्वारा देश के विकास और सुविधाओं पर किया गया खर्च। I (इन्वेस्टमेंट): कंपनियों द्वारा बिजनेस को बढ़ाने के लिए किया गया निवेश। NX (नेट एक्सपोर्ट): दूसरे देशों को बेचे गए सामान में से खरीदे गए सामान को घटाना।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
PSL में बांग्लादेशी खिलाड़ियों के खेलने पर सस्पेंस::BCB बोला-सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही पाकिस्तान जाएंगे प्लेयर्स; सुरक्षा कारणों से फैसला

March 20, 2026/
8:27 am

पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) में बांग्लादेशी खिलाड़ियों की भागीदारी अब सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगी। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB)...

World News Updates; Trump Pakistan China

February 22, 2026/
10:06 am

46 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में हिंदू सबसे ज्यादा शिक्षित धार्मिक समुदाय हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की 2023-24 रिलिजियस...

पश्चिम बंगाल चुनाव: बंगाल में बिधाननगर काउंटींग सेंटर के बाहर तूफान! टीएमसी-बीजेपी में हुई महंगाई, पुलिस ने की लाठियां

May 3, 2026/
1:57 pm

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के विधाननगर में एक तृतीयक केंद्र के बाहर रविवार (3 मई 2026) को...

टीएमसी के बागी सांसद पार्टी की पहचान और प्रतीक पर कानूनी लड़ाई शुरू करने के लिए तैयार, एनसीपीआई में विलय की संभावना | न्यूज18

June 15, 2026/
4:22 pm

सूत्रों का कहना है कि बागी टीएमसी सांसद तृणमूल कांग्रेस की पहचान और प्रतीक पर कानूनी लड़ाई शुरू करने के...

हाथी के बच्चे बराबर वजन, इंसानों को जिंदा निगलती है:सड़ा-गला मांस खाती है, नेपाल से बहकर बिहार आईं खतरनाक मछलियों की कहानी

September 1, 2026/
5:42 am

26 अगस्त को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का मलबा अब बिहार पहुंच रहा है और उसके साथ बहकर आ...

सेंसेक्स 100 अंक गिरकर 78,400 पर कारोबार कर रहा:निफ्टी में 50 अंक की गिरावट, बैंकिंग और IT शेयर्स में बिकवाली

April 20, 2026/
9:22 am

शेयर बाजार में आज यानी सोमवार, 20 अप्रैल को गिरावट है। सेंसेक्स करीब 100 अंक की गिरावट के साथ 78,400...

उज्जैन के स्टूडेंट को कनाडा में कार चढ़ाकर मार डाला:कॉलेज के 10-12 छात्रों ने आपसी रंजिश में पीटा; बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई करने गए थे

March 15, 2026/
7:00 pm

मध्य प्रदेश के उज्जैन के एक छात्र की कनाडा में कॉलेज के छात्रों ने हत्या कर दी। 10-12 युवकों ने...

टीम से बाहर होने के बाद सूर्या का पहला रिएक्शन:स्क्वाड को ‘ऑल द बेस्ट’ कहा; सूर्यवंशी के लिए लिखा- आपने यह मौका कमाया

June 6, 2026/
5:28 pm

भारतीय टी-20 टीम से बाहर किए जाने के बाद सूर्यकुमार यादव का सोशल मीडिया के जरिए पहला रिएक्शन आया है।...

राजनीति

चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही:वित्त वर्ष-26 में 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी, फरवरी में सरकार ने यह अनुमान 7.6% बताया था

चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही:वित्त वर्ष-26 में 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी, फरवरी में सरकार ने यह अनुमान 7.6% बताया था

वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में GDP ग्रोथ 7.8% रही। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 5 जून को ये आंकड़े जारी किए। इस बार GDP की गणना बेस ईयर 2011-12 के बजाय 2022-23 के आधार पर की गई है। सरकार ने बताया कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में GDP 7.7% की दर से बढ़ी है, जो पिछले साल 7.1% थी। इससे पहले फरवरी में सरकार ने इसका अनुमान 7.6% बताया था। नौकरों, ड्राइवर और ई-वाहन डेटा भी शामिल किया GDP की नई सीरीज में 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है। आर्थिक अनुमानों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए इसमें अब जीएसटी नेटवर्क, ई-वाहन डेटाबेस और घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर और घरेलू नौकरों की सेवाओं से जुड़ा डेटा भी शामिल किया गया है। आमतौर पर हर 5 साल में बदला जाता है बेस-ईयर समय के साथ अर्थव्यवस्था में आने वाले बड़े बदलावों को दर्ज करने के लिए समय-समय पर बेस ईयर बदला जाता है। आमतौर पर मंत्रालय हर पांच साल में डेटा सीरीज को अपडेट करता है, लेकिन कोविड महामारी और जीएसटी लागू होने की वजह से इस काम में देरी हुई। 1950 तक के नए आंकड़े दिसंबर 2026 तक आएंगे सरकार सिर्फ नए आंकड़े ही नहीं जारी करेगी, बल्कि पुराने आंकड़ों को भी नए बेस ईयर के हिसाब से दोबारा कैलकुलेट करेगी। मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इस नए फ्रेमवर्क के तहत ‘बैक-सीरीज’ डेटा (1950-51 तक के आंकड़े) दिसंबर 2026 तक आने की उम्मीद है। नए माप से सटीकता बढ़ेगी; हर 5 से 10 साल में मानक बदलना चाहिए आखिर जीडीपी मापने का तरीका क्यों बदला गया? 2011-12 वाला पैमाना 14 साल पुराना हो गया था। तब यूपीआई, जोमैटो, ओटीटी, गिग इकोनॉमी जैसी चीजें थीं ही नहीं। इसीलिए ये जरूरी था। 2022-23 को ही आधार वर्ष क्यों चुना गया? यह साल ‘सामान्य’ था। कोरोना खत्म हो चुका था। अर्थव्यवस्था स्थिर थी। डिजिटल इंडिया स्थापित हो चुका था। आधार वर्ष हमेशा ऐसा चुनते हैं जब न बहुत उछाल हो, न गिरावट। इससे आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? जेब पर सीधा असर नहीं, लेकिन सही आंकड़ों से सरकार बेहतर नीतियां बनाएगी। सही जगह पैसा लगेगा और विदेशी निवेश भी बढ़ेगा, जिसका फायदा धीरे-धीरे आम नागरिक को मिलेगा। आंकड़े बदले या कुछ छुपाया तो नहीं गया? नहीं। नए पैमाने से नापने पर माप बदलती है, यह स्वाभाविक है। अमेरिका, ब्रिटेन, चीन सब यही करते हैं। आंकड़े बदलना सटीकता की निशानी है। ​कितने अंतराल पर इसे बदलना चाहिए? अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार हर 5 से 10 वर्ष में बदलना चाहिए। देश में 5 साल तय, पर 2017-18 में नोटबंदी व जीएसटी के कारण देरी हो गई। इसके बाद कोविड आ गया, इसलिए अब किया। नॉलेज पार्ट: क्या होता है बेस ईयर बेस ईयर वह साल है जिसकी कीमतों को ‘फिक्स’ मानकर आज की आर्थिक तरक्की को मापा जाता है। यह महंगाई के असर को हटाकर देश की ‘असली’ ग्रोथ दिखाने में मदद करता है। उदाहरण: अगर 2011 में एक पेन 5 रुपए का था और आज 10 रुपए का है। अगर हम आज भी 100 पेन बना रहे हैं, तो 2011 के हिसाब से जीडीपी 500 रुपए दिखेगी। वहीं ये आज के हिसाब से 1000 रुपए होगी। बेस ईयर हमें यह समझने में मदद करता है कि हम पेन ज्यादा बना रहे हैं या सिर्फ पेन महंगा हो गया है। इकोनॉमी की सेहत बताती है GDP GDP यानी देश के भीतर एक तय समय में कितनी वैल्यू का सामान बना और कितनी सर्विसेज दी गईं। इसे देश की आर्थिक सेहत का ‘रिपोर्ट कार्ड’ भी कह सकते हैं। इसमें भारतीय कंपनियां ही नहीं, बल्कि देश में काम करने वाली विदेशी कंपनियों का प्रोडक्शन भी जोड़ा जाता है। दो तरह की GDP: रियल और नॉमिनल रियल जीडीपी: इसमें सामान और सेवाओं की कीमत बेस से तय की जाती है। अभी तक इसका साल 2011-12 था। इससे पता चलता है कि देश में उत्पादन सच में बढ़ा है या नहीं। नॉमिनल जीडीपी: यह मौजूदा बाजार भाव पर आधारित होती है। इसमें महंगाई भी शामिल होती है। अगर चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, तो नॉमिनल जीडीपी भी बढ़ी हुई दिखेगी। कैसे की जाती है जीडीपी की गिनती? जीडीपी निकालने के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल होता है: $GDP = C + G + I + NX$ C (कंजम्प्शन): यानी हम और आप जो अपनी जरूरतों पर खर्च करते हैं। G (गवर्नमेंट): सरकार द्वारा देश के विकास और सुविधाओं पर किया गया खर्च। I (इन्वेस्टमेंट): कंपनियों द्वारा बिजनेस को बढ़ाने के लिए किया गया निवेश। NX (नेट एक्सपोर्ट): दूसरे देशों को बेचे गए सामान में से खरीदे गए सामान को घटाना।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.