Wednesday, 22 Jul 2026 | 11:29 AM

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Praggnanandhaa Wins Norway Chess 2026

Praggnanandhaa Wins Norway Chess 2026

ओस्लो1 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रज्ञानानंदा ने जीत के बाद विन्सेंट कीमर से हाथ मिलाया। भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने इतिहास रचते हुए नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीत लिया है। 20 साल के प्रज्ञानानंदा इस टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। फाइनल राउंड में उन्होंने जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर यह उपलब्धि हासिल की। टूर्नामेंट के आखिरी दिन प्रज्ञानानंदा 15 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर थे। उन्होंने क्लासिकल मुकाबला जीतकर 3 अंक हासिल किए और कुल 18 अंकों के साथ खिताब अपने नाम कर लिया। आखिरी राउंड में पलटी बाजी, वेस्ली टाईब्रेकर जीतने के बावजूद हारे टूर्नामेंट के आखिरी राउंड में अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो 15.5 अंकों के साथ टॉप पर थे। लेकिन उनका मुकाबला ड्रॉ रहा और फैसला आर्मागेडन टाईब्रेकर में गया। इससे प्रज्ञानानंदा के लिए खिताब जीतने का रास्ता खुल गया। वेस्ली सो ने टाईब्रेकर तो जीत लिया, लेकिन उन्हें केवल 1.5 अंक मिले। इस तरह उनके कुल 17 अंक हुए, जो प्रज्ञानानंदा से एक कम थे। फ्रांस के अलीरजा फिरोजा 15.5 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। आखिरी दौर में मैग्नस कार्लसन ने गुकेश को हराया, लेकिन वह भी खिताब नहीं जीत सके। कार्लसन 13 अंकों के साथ 5वें स्थान पर रहे। प्रज्ञानानंदा ने वर्ल्ड नंबर-1 कार्लसन को दो बार हराया इस टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में प्रज्ञानानंदा का प्रदर्शन साधारण रहा, लेकिन बाद के मुकाबलों में उन्होंने शानदार वापसी की। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक वर्ल्ड नंबर-1 और सात बार के नॉर्वे चेस चैंपियन मैग्नस कार्लसन को दो बार क्लासिकल मुकाबलों में हराना रहा। नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंदा ने मैग्नस कार्लसन को दो बार हराया। आनंद और गुकेश भी नहीं जीत सके थे नॉर्वे चेस खिताब प्रज्ञानानंदा ने वह कर दिखाया जो भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद भी नहीं कर पाए थे। मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश भी अब तक यह टूर्नामेंट नहीं जीत सके हैं। 2013 में शुरू हुए इस टूर्नामेंट में पहली बार किसी भारतीय ने खिताब जीता है। प्रज्ञानानंदा दूसरी बार नॉर्वे चेस में खेल रहे थे। गुकेश 8 अंकों के साथ छठे (आखरी) स्थान पर रहे। क्या है नॉर्वे चेस का अर्मागेडन फॉर्मेट? नॉर्वे चेस टूर्नामेंट हर साल होने वाले दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और रोमांचक चेस टूर्नामेंट्स में से एक है। इस साल यह टूर्नामेंट 25 मई से 5 जून 2026 तक पहली बार नॉर्वे की राजधानी, ओस्लो में आयोजित किया गया था। इसमें ओपन और महिला कैटेगरी, दोनों में केवल 6-6 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जो आपस में दो-दो बार भिड़े। अगर दो खिलाड़ियों के बीच क्लासिकल मैच ड्रॉ होता है तो फैसला सडन-डेथ (अर्मागेडन) गेम से किया जाता है। इसमें सफेद मोहरों वाले खिलाड़ी को ज्यादा समय मिलता है, लेकिन उसे हर हाल में जीतना होता है। मुकाबला ड्रॉ होने पर काले मोहरों वाले खिलाड़ी को विजेता मानकर एक्स्ट्रा पॉइंट दिया जाता है। इससे हर दौर में नतीजा निकलना तय होता है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… भारत ने पाकिस्तान को अंडर-18 हॉकी एशिया कप में हराया: आखिरी 15 मिनट में 3 गोल कर सेमीफाइनल जीता भारतीय अंडर-18 मेंस हॉकी टीम ने शुक्रवार को सेमीफाइनल में पाकिस्तान को 5-3 से हरा दिया। इस जीत के साथ ही भारत ने एशिया कप के फाइनल में जगह बना ली है। फाइनल में भारत का सामना शनिवार को जापान से होगा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Praggnanandhaa Wins Norway Chess 2026

Praggnanandhaa Wins Norway Chess 2026

ओस्लो1 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रज्ञानानंदा ने जीत के बाद विन्सेंट कीमर से हाथ मिलाया। भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने इतिहास रचते हुए नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीत लिया है। 20 साल के प्रज्ञानानंदा इस टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। फाइनल राउंड में उन्होंने जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर यह उपलब्धि हासिल की। टूर्नामेंट के आखिरी दिन प्रज्ञानानंदा 15 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर थे। उन्होंने क्लासिकल मुकाबला जीतकर 3 अंक हासिल किए और कुल 18 अंकों के साथ खिताब अपने नाम कर लिया। आखिरी राउंड में पलटी बाजी, वेस्ली टाईब्रेकर जीतने के बावजूद हारे टूर्नामेंट के आखिरी राउंड में अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो 15.5 अंकों के साथ टॉप पर थे। लेकिन उनका मुकाबला ड्रॉ रहा और फैसला आर्मागेडन टाईब्रेकर में गया। इससे प्रज्ञानानंदा के लिए खिताब जीतने का रास्ता खुल गया। वेस्ली सो ने टाईब्रेकर तो जीत लिया, लेकिन उन्हें केवल 1.5 अंक मिले। इस तरह उनके कुल 17 अंक हुए, जो प्रज्ञानानंदा से एक कम थे। फ्रांस के अलीरजा फिरोजा 15.5 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। आखिरी दौर में मैग्नस कार्लसन ने गुकेश को हराया, लेकिन वह भी खिताब नहीं जीत सके। कार्लसन 13 अंकों के साथ 5वें स्थान पर रहे। प्रज्ञानानंदा ने वर्ल्ड नंबर-1 कार्लसन को दो बार हराया इस टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में प्रज्ञानानंदा का प्रदर्शन साधारण रहा, लेकिन बाद के मुकाबलों में उन्होंने शानदार वापसी की। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक वर्ल्ड नंबर-1 और सात बार के नॉर्वे चेस चैंपियन मैग्नस कार्लसन को दो बार क्लासिकल मुकाबलों में हराना रहा। नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंदा ने मैग्नस कार्लसन को दो बार हराया। आनंद और गुकेश भी नहीं जीत सके थे नॉर्वे चेस खिताब प्रज्ञानानंदा ने वह कर दिखाया जो भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद भी नहीं कर पाए थे। मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश भी अब तक यह टूर्नामेंट नहीं जीत सके हैं। 2013 में शुरू हुए इस टूर्नामेंट में पहली बार किसी भारतीय ने खिताब जीता है। प्रज्ञानानंदा दूसरी बार नॉर्वे चेस में खेल रहे थे। गुकेश 8 अंकों के साथ छठे (आखरी) स्थान पर रहे। क्या है नॉर्वे चेस का अर्मागेडन फॉर्मेट? नॉर्वे चेस टूर्नामेंट हर साल होने वाले दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और रोमांचक चेस टूर्नामेंट्स में से एक है। इस साल यह टूर्नामेंट 25 मई से 5 जून 2026 तक पहली बार नॉर्वे की राजधानी, ओस्लो में आयोजित किया गया था। इसमें ओपन और महिला कैटेगरी, दोनों में केवल 6-6 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जो आपस में दो-दो बार भिड़े। अगर दो खिलाड़ियों के बीच क्लासिकल मैच ड्रॉ होता है तो फैसला सडन-डेथ (अर्मागेडन) गेम से किया जाता है। इसमें सफेद मोहरों वाले खिलाड़ी को ज्यादा समय मिलता है, लेकिन उसे हर हाल में जीतना होता है। मुकाबला ड्रॉ होने पर काले मोहरों वाले खिलाड़ी को विजेता मानकर एक्स्ट्रा पॉइंट दिया जाता है। इससे हर दौर में नतीजा निकलना तय होता है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… भारत ने पाकिस्तान को अंडर-18 हॉकी एशिया कप में हराया: आखिरी 15 मिनट में 3 गोल कर सेमीफाइनल जीता भारतीय अंडर-18 मेंस हॉकी टीम ने शुक्रवार को सेमीफाइनल में पाकिस्तान को 5-3 से हरा दिया। इस जीत के साथ ही भारत ने एशिया कप के फाइनल में जगह बना ली है। फाइनल में भारत का सामना शनिवार को जापान से होगा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Neha Kakkar Birthday Interesting Facts; Struggle Story | Bhajan Jagrata

Neha Kakkar Birthday Interesting Facts; Struggle Story | Bhajan Jagrata

8 मिनट पहले कॉपी लिंक 6 जून 1988 नेहा कक्कड़ का जन्म ऋषिकेश के बेहद गरीब परिवार में हुआ। तीन भाई-बहनों में नेहा सबसे छोटी थीं। सोनू कक्कड़ (सिंगर) और टोनी कक्कड़ (सिंगर-कंपोजर) उनसे बड़े थे। पिता के पास गुजारे के लिए कोई पक्की नौकरी नहीं थी। वो पत्नी निती कक्कड़ और 3 बच्चों के साथ ऋषिकेश के एक 10 बाय 10 के किराए के कमरे में रहते थे। गरीबी का वो आलम था कि घर में किचन तक नहीं था। मां उसी कमरे में एक टेबल रखकर उस पर खाना पकातीं। उसी कमरे में सब उठते-बैठते, सोते, खेलते। नेहा कक्कड़ के ऋषिकेश स्थित घर की तस्वीर। नेहा महज 4 साल की थीं, जब पिता रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली शिफ्ट हो गए। वो एक छोटे से स्कूल के बाहर समोसे बेचने लगे। बड़ी बहन सोनू उसी स्कूल में पढ़ती थीं। स्कूल में पिता के काम के चलते उनका जमकर मजाक बनाया जाता था, जिससे वो काफी रोती थीं। परिवार का गुजारा मुश्किल होने लगा, तो पिता ने बड़ी बेटी सोनू कक्कड़ के साथ जगराते में गाना शुरू कर दिया। पिता को लिखने का शौक था, तो वो खुद जगराते के लिए गाने लिखा करते थे। समय के साथ भाई टोनी और फिर 4 साल की उम्र में नेहा ने भी पिता की आर्थिक मदद करने के लिए जगराते में गाना शुरू कर दिया। पूरा परिवार रिक्शे से जगराता करने जाता था। हर जगराते के उन्हें 500 रुपए तक मिलने लगे और घर के हालात भी बेहतर हो गए। समय के साथ पिता ने ट्रेवलिंग के लिए एक वैन ले ली। जब भी कभी रातभर जगराता होता, तो पिता वैन के पीछे वाली सीट खोलकर वहीं बच्चों के लिए गद्दे बिछा देते थे, जिससे बच्चों को आराम मिल सके। कभी चंद रुपयों के लिए अपना बचपन खोने वालीं नेहा कक्कड़ 38 साल की हो चुकी हैं और सिंगिंग स्टार हैं। नेहा के बर्थडे के खास मौके पर एक नजर उनकी जिंदगी की प्रेरणादायक कहानी पर- देखिए बचपन में जगराते से नेहा कक्कड़ की चुनिंदा तस्वीरें- इंडियन आइडल के एक एपिसोड में बचपन के दिनों को याद कर नेहा ने कहा था- मैंने 4 साल की उम्र में गाना शुरू किया। उस समय कोई टाइम लिमिट नहीं होती थी। जगराते कभी-कभी रात से शुरू होकर सुबह तक चलते थे और हम लगातार गाते थे। लोग हमारी तारीफ तक नहीं करते थे, कई बार तो ऐसा भी हुआ, जब हम रातभर गाने के चलते स्कूल नहीं जा सके। झगड़े में भाई की जांघ में मारा पैन नेहा कक्कड़, भले ही पढ़ाई से दूर रहीं, लेकिन शरारत में अव्वल थीं। सोनू उनसे बड़ी थीं, लेकिन टोनी से उम्र का फासला कम होने पर दोनों खूब झगड़ते थे। कपिल शर्मा शो में आए कक्कड़ भाई-बहनों ने बताया कि एक बहस के बाद नेहा ने भाई टोनी की जांघों पर पैन से ऐसा हमला किया कि आधा पैन उनकी जांघ में घुस गया था। बड़े भाई टोनी के साथ नेहा कक्कड़ की तस्वीर। 5 साल की उम्र में बड़ों को टक्कर देकर जीता म्यूजिक कॉम्पिटिशन नेहा कक्कड़ ने महज 5 साल की उम्र में ऋषिकेश में होने वाले एक म्यूजिकल कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया। उस कॉम्पिटिशन में कोई एज लिमिट नहीं थी, तो 5 साल की नेहा को 16-17 और उससे भी बड़े लोगों के साथ कंपीट करना पड़ा। नन्ही सी नेहा ने तब नई-नई आई फिल्म फूल और कांटे का गाना मैंने प्यार तुम्ही से किया है गाया था। नेहा ने अपनी मधुर आवाज से बड़ों को न सिर्फ कड़ी टक्कर दी, बल्कि वो कॉम्पिटिशन भी जीता। आगे वो शादियों और इवेंट में भी गाने लगीं। एक बार नेहा-सोनू को एक बड़े जागरण में गाने का मौका मिला, जिसमें उनसे ठीक पहले आशा भोसले ने परफॉर्मेंस दी थी। रिश्तेदार-पड़ोसियों ने बच्चों से गाना गंवाने पर दिए ताने समय के साथ नेहा-सोनू को भजन संध्या और जगराता के काफी काम मिलने लगे। वो दिल्ली, ऋषिकेश के अलावा भी चंडीगढ़ समेत नॉर्थ के कई शहरों में परफॉर्म करने जाती थीं, जिससे उनकी पढ़ाई ठीक तरह नहीं हो पाती थी। बच्चों की कमाई से ही एक समय घर चलने लगा, जिसके चलते आस-पड़ोस के लोग और रिश्तेदार उनके पेरेंट्स को काफी ताने देते थे। सोनू कक्कड़ को रियलिटी शो के बाद मिला था ‘बाबू जी जरा धीरे चलो’ गाना दिल्ली में गायिकी में मजबूत पकड़ बनाने के बाद बड़ी बहन सोनू कक्कड़ ने 2003 में मुंबई के सिंगिंग रियलिटी शो पॉपस्टार जीता। उस शो के जज संदीप चौटवा को सोनू की आवाज इतनी पसंद आई कि उन्होंने शो खत्म होते ही उन्हें ऑफिस बुलाकर, फिल्म ‘दम’ का गाना ‘बाबू जी जरा धीरे चलो…,’ ऑफर कर दिया। कम समय में ही सोनू ने म्यूजिक इंडस्ट्री में मजबूत पकड़ बनाते हुए कई हिट गाने दिए। 16 साल की उम्र में भाई के साथ पहुंचीं मुंबई सोनू की बढ़ती पॉपुलैरिटी के बीच ही नेहा कक्कड़ 16 साल की उम्र में भाई टोनी के साथ म्यूजिक में करियर बनाने के लिए मुंबई आ गईं। टोनी कक्कड़ को कंपोजिशन का शौक था, तो वो कंपोजर संदीप चौटवा के साथ बतौर लिरिसिस्ट काम सीखने लगे, वहीं नेहा कई सिंगिंग रियलिटी शोज में ऑडिशन दिया करती थीं। तब वो 11वीं क्लास में थीं। एक साल के लंबे संघर्ष के बाद उनका इंडियन आइडल सीजन 2 में सिलेक्शन हुआ। इंडियन आइडल के ऑडिशन में नेहा कक्कड़। ऑडिशन में जज रहे सोनू निगम ने नेहा से कहा कि उनकी आवाज फंसी-फंसी लग रही है। हालांकि थोड़ी देर उन्हें परेशान करने के बाद वो गोल्डन वर्ल्ड कहे गए, ‘आप मुंबई आ रही हैं।’ इंडियन आइडल-2 करते हुए नेहा कक्कड़ महज 16 साल की थीं। शो में नेहा ने कहा था कि वो इंडियन आइडन-1 के विनर अभिजीत सावंत जितनी फेमस होना चाहती हैं। नेहा की जर्नी शानदार रही, लेकिन वो 10वें नंबर पर शो से बाहर हो गईं। हालांकि अब नेहा कक्कड़ हुनर और मेहनत की बदौलत खुद इंडियन आइडन की पसंदीदा जजेस में से एक हैं। नेहा कक्कड़ इंडियन आइडल के 5 सीजन जज कर चुकी हैं। इंडियन आइडल 2 के विजेता संदीप आचार्या रहे, जिनका 2013 में महज 29 साल की उम्र में पीलिया

भारत-अफगानिस्तान में एकमात्र टेस्ट आज से:अफगान स्पिनर्स के सामने भारतीय बैटर्स का स्किल टेस्ट, अफ्रीका-न्यूजीलैंड ने क्लीन स्वीप किया था

भारत-अफगानिस्तान में एकमात्र टेस्ट आज से:अफगान स्पिनर्स के सामने भारतीय बैटर्स का स्किल टेस्ट, अफ्रीका-न्यूजीलैंड ने क्लीन स्वीप किया था

भारतीय क्रिकेट टीम करीब 8 महीने बाद कोई टेस्ट मैच खेलेगी। टीम का मुकाबला शनिवार को अफगानिस्तान से होगा। यह मैच सुबह 9:30 बजे से मुल्लांपुर के महाराजा यादविंद्र सिंह स्टेडियम में खेला जाएगा। इस मुकाबले में अफगानी स्पिनर्स भारतीय बैटर्स का स्किल टेस्ट भी लेंगे। विराट कोहली, रोहित शर्मा और चेतेश्वर पुजारा के रिटायरमेंट के बाद से भारत का बैटिंग ऑर्डर नया है। इसमें केएल राहुल के अलावा, किसी ने भी 50 मैच नहीं खेले हैं। पिछली सीरीज में टीम इंडिया को साउथ अफ्रीका ने 2-0 से क्लीन स्वीप किया था। कोलकाता और गुवाहाटी की पिचों पर भारतीय बैटर्स स्पिन के खिलाफ संघर्ष करते दिखे थे। गिल के सामने 2 सवाल? 1. नंबर-3 पर कौन उतरेगा? कप्तान शुभमन गिल को नंबर-3 के लिए बैटर तय करना होगा। क्योंकि, पुजारा के बाद टीम में इस पोजिशन के लिए कोई स्थायी बल्लेबाज नहीं है। टीम ने इस पोजिशन पर साई सुदर्शन और देवदत्त पडिक्कल जैसे बैटर्स को आजमाया है, लेकिन अब तक नंबर-3 पर कोई स्थायी बैटर नहीं मिला है। 2. जडेजा की जिम्मेदारी कौन संभालेगा? रवींद्र जडेजा को आराम दिया गया है। ऐसे में सवाल यह है कि उनकी जिम्मेदारी कौन संभालेगा। कप्तान के पास राजस्थान के मानव सुथार और विदर्भ के हर्ष दुबे जैसे ऑप्शंस हैं। सुथार अपनी ट्रेडिशनल लेफ्ट आर्म स्पिन से प्रभावित कर रहे हैं, जबकि दुबे गेंद और बल्ले दोनों से योगदान देने की क्षमता रखते हैं। भारत के पास 100% जीत का रिकॉर्ड भारत के नाम अफगानिस्तान के खिलाफ 100% जीत का रिकॉर्ड है। हालांकि, दोनों के बीच एक मैच ही खेला गया है। जोकि 2018 में बेंगलुरु के मैदान पर खेला गया था। यह अफगानिस्तान के करियर का पहला टेस्ट भी था। ओवरऑल टेस्ट रिकॉर्ड की बात करें तो… गिल और राहुल फॉर्म में, सिराज टॉप विकेट टेकर भारतीय कप्तान शुभमन गिल, केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल अच्छे फॉर्म में हैं। गिल ने 1 जनवरी 2025 के बाद से अब तक 9 मैचों में 983 रन बनाए हैं। वहीं, राहुल के नाम 10 मैचों में 813 और यशस्वी जायसवाल के नाम 10 मैच में 745 रन हैं। इस दौरान सबसे ज्यादा विकेट मोहम्मद सिराज ने झटके हैं। स्क्वॉड में शामिल कुलदीप यादव भी 20 विकेट ले चुके हैं। रहमत टॉप स्कोरर, राशिद को सबसे ज्यादा विकेट अफगानिस्तान ने एक जनवरी 2025 के बाद 2 मैच ही खेले हैं। इनमें सबसे ज्यादा रन रहमत शाह ने बनाए हैं। उन्होंने एक मैच की दो पारियों में 158 रन स्कोर किए हैं। जबकि राशिद खान 11 विकेट के साथ टॉप विकेट टेकर हैं। पहली बार टेस्ट मैच की मेजबानी करेगा मुल्लांपुर स्टेडियम न्यू चंडीगढ़ स्थित मुल्लांपुर का महाराजा यादविंद्र सिंह स्टेडियम पहली बार टेस्ट मैच की मेजबानी करेगा। यहां अब तक 2 वनडे और एक टी-20 मैच खेले गए हैं। मौसम भी मैच का अहम फैक्टर बन सकता है। यहां गर्मी प्लेयर्स की परीक्षा लेगी। ट्रेनिंग में कई प्लेयर्स को मेन ग्राउंड से नेट्स तक पहुंचने के लिए भी वाहनों का इस्तेमाल करना पड़ा। यहां अगले 5 दिन तक बारिश के आसार नहीं हैं। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-XI भारत: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल, यशस्वी जायसवाल, देवदत्त पडिक्कल/साई सुदर्शन, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्‌डी, वॉशिंगटन सुंदर, हर्ष दुबे/मानव सुथार, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा। अफगानिस्तान- हश्मतुल्लाह शाहिदी (कप्तान), अब्दुल मलिक, सेदीकुल्लाह अटल, रहमत शाह, रहमानुल्लाह गुरबाज (विकेटकीपर), अजमतुल्लाह ओमरजई, अफसर जजई, शराफुद्दीन अशरफ, नांगेयालिया खारोटे, कायस अहमद और बिलाल सामी।

Neha Kakkar Birthday Interesting Facts; Struggle Story | Bhajan Jagrata

Neha Kakkar Birthday Interesting Facts; Struggle Story | Bhajan Jagrata

20 मिनट पहले कॉपी लिंक 6 जून 1988 नेहा कक्कड़ का जन्म ऋषिकेश के बेहद गरीब परिवार में हुआ। तीन भाई-बहनों में नेहा सबसे छोटी थीं। सोनू कक्कड़ (सिंगर) और टोनी कक्कड़ (सिंगर-कंपोजर) उनसे बड़े थे। पिता के पास गुजारे के लिए कोई पक्की नौकरी नहीं थी। वो पत्नी निती कक्कड़ और 3 बच्चों के साथ ऋषिकेश के एक 10 बाय 10 के किराए के कमरे में रहते थे। गरीबी का वो आलम था कि घर में किचन तक नहीं था। मां उसी कमरे में एक टेबल रखकर उस पर खाना पकातीं। उसी कमरे में सब उठते-बैठते, सोते, खेलते। नेहा कक्कड़ के ऋषिकेश स्थित घर की तस्वीर। नेहा महज 4 साल की थीं, जब पिता रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली शिफ्ट हो गए। वो एक छोटे से स्कूल के बाहर समोसे बेचने लगे। बड़ी बहन सोनू उसी स्कूल में पढ़ती थीं। स्कूल में पिता के काम के चलते उनका जमकर मजाक बनाया जाता था, जिससे वो काफी रोती थीं। परिवार का गुजारा मुश्किल होने लगा, तो पिता ने बड़ी बेटी सोनू कक्कड़ के साथ जगराते में गाना शुरू कर दिया। पिता को लिखने का शौक था, तो वो खुद जगराते के लिए गाने लिखा करते थे। समय के साथ भाई टोनी और फिर 4 साल की उम्र में नेहा ने भी पिता की आर्थिक मदद करने के लिए जगराते में गाना शुरू कर दिया। पूरा परिवार रिक्शे से जगराता करने जाता था। हर जगराते के उन्हें 500 रुपए तक मिलने लगे और घर के हालात भी बेहतर हो गए। समय के साथ पिता ने ट्रेवलिंग के लिए एक वैन ले ली। जब भी कभी रातभर जगराता होता, तो पिता वैन के पीछे वाली सीट खोलकर वहीं बच्चों के लिए गद्दे बिछा देते थे, जिससे बच्चों को आराम मिल सके। कभी चंद रुपयों के लिए अपना बचपन खोने वालीं नेहा कक्कड़ 38 साल की हो चुकी हैं और सिंगिंग स्टार हैं। नेहा के बर्थडे के खास मौके पर एक नजर उनकी जिंदगी की प्रेरणादायक कहानी पर- देखिए बचपन में जगराते से नेहा कक्कड़ की चुनिंदा तस्वीरें- इंडियन आइडल के एक एपिसोड में बचपन के दिनों को याद कर नेहा ने कहा था- मैंने 4 साल की उम्र में गाना शुरू किया। उस समय कोई टाइम लिमिट नहीं होती थी। जगराते कभी-कभी रात से शुरू होकर सुबह तक चलते थे और हम लगातार गाते थे। लोग हमारी तारीफ तक नहीं करते थे, कई बार तो ऐसा भी हुआ, जब हम रातभर गाने के चलते स्कूल नहीं जा सके। झगड़े में भाई की जांघ में मारा पैन नेहा कक्कड़, भले ही पढ़ाई से दूर रहीं, लेकिन शरारत में अव्वल थीं। सोनू उनसे बड़ी थीं, लेकिन टोनी से उम्र का फासला कम होने पर दोनों खूब झगड़ते थे। कपिल शर्मा शो में आए कक्कड़ भाई-बहनों ने बताया कि एक बहस के बाद नेहा ने भाई टोनी की जांघों पर पैन से ऐसा हमला किया कि आधा पैन उनकी जांघ में घुस गया था। बड़े भाई टोनी के साथ नेहा कक्कड़ की तस्वीर। 5 साल की उम्र में बड़ों को टक्कर देकर जीता म्यूजिक कॉम्पिटिशन नेहा कक्कड़ ने महज 5 साल की उम्र में ऋषिकेश में होने वाले एक म्यूजिकल कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया। उस कॉम्पिटिशन में कोई एज लिमिट नहीं थी, तो 5 साल की नेहा को 16-17 और उससे भी बड़े लोगों के साथ कंपीट करना पड़ा। नन्ही सी नेहा ने तब नई-नई आई फिल्म फूल और कांटे का गाना मैंने प्यार तुम्ही से किया है गाया था। नेहा ने अपनी मधुर आवाज से बड़ों को न सिर्फ कड़ी टक्कर दी, बल्कि वो कॉम्पिटिशन भी जीता। आगे वो शादियों और इवेंट में भी गाने लगीं। एक बार नेहा-सोनू को एक बड़े जागरण में गाने का मौका मिला, जिसमें उनसे ठीक पहले आशा भोसले ने परफॉर्मेंस दी थी। रिश्तेदार-पड़ोसियों ने बच्चों से गाना गंवाने पर दिए ताने समय के साथ नेहा-सोनू को भजन संध्या और जगराता के काफी काम मिलने लगे। वो दिल्ली, ऋषिकेश के अलावा भी चंडीगढ़ समेत नॉर्थ के कई शहरों में परफॉर्म करने जाती थीं, जिससे उनकी पढ़ाई ठीक तरह नहीं हो पाती थी। बच्चों की कमाई से ही एक समय घर चलने लगा, जिसके चलते आस-पड़ोस के लोग और रिश्तेदार उनके पेरेंट्स को काफी ताने देते थे। सोनू कक्कड़ को रियलिटी शो के बाद मिला था ‘बाबू जी जरा धीरे चलो’ गाना दिल्ली में गायिकी में मजबूत पकड़ बनाने के बाद बड़ी बहन सोनू कक्कड़ ने 2003 में मुंबई के सिंगिंग रियलिटी शो पॉपस्टार जीता। उस शो के जज संदीप चौटवा को सोनू की आवाज इतनी पसंद आई कि उन्होंने शो खत्म होते ही उन्हें ऑफिस बुलाकर, फिल्म ‘दम’ का गाना ‘बाबू जी जरा धीरे चलो…,’ ऑफर कर दिया। कम समय में ही सोनू ने म्यूजिक इंडस्ट्री में मजबूत पकड़ बनाते हुए कई हिट गाने दिए। 16 साल की उम्र में भाई के साथ पहुंचीं मुंबई सोनू की बढ़ती पॉपुलैरिटी के बीच ही नेहा कक्कड़ 16 साल की उम्र में भाई टोनी के साथ म्यूजिक में करियर बनाने के लिए मुंबई आ गईं। टोनी कक्कड़ को कंपोजिशन का शौक था, तो वो कंपोजर संदीप चौटवा के साथ बतौर लिरिसिस्ट काम सीखने लगे, वहीं नेहा कई सिंगिंग रियलिटी शोज में ऑडिशन दिया करती थीं। तब वो 11वीं क्लास में थीं। एक साल के लंबे संघर्ष के बाद उनका इंडियन आइडल सीजन 2 में सिलेक्शन हुआ। इंडियन आइडल के ऑडिशन में नेहा कक्कड़। ऑडिशन में जज रहे सोनू निगम ने नेहा से कहा कि उनकी आवाज फंसी-फंसी लग रही है। हालांकि थोड़ी देर उन्हें परेशान करने के बाद वो गोल्डन वर्ल्ड कहे गए, ‘आप मुंबई आ रही हैं।’ इंडियन आइडल-2 करते हुए नेहा कक्कड़ महज 16 साल की थीं। शो में नेहा ने कहा था कि वो इंडियन आइडन-1 के विनर अभिजीत सावंत जितनी फेमस होना चाहती हैं। नेहा की जर्नी शानदार रही, लेकिन वो 10वें नंबर पर शो से बाहर हो गईं। हालांकि अब नेहा कक्कड़ हुनर और मेहनत की बदौलत खुद इंडियन आइडन की पसंदीदा जजेस में से एक हैं। नेहा कक्कड़ इंडियन आइडल के 5 सीजन जज कर चुकी हैं। इंडियन आइडल 2 के विजेता संदीप आचार्या रहे, जिनका 2013 में महज 29 साल की उम्र में पीलिया

भारत-अफगानिस्तान में एकमात्र टेस्ट आज से:अफगान स्पिनर्स के सामने भारतीय बैटर्स का स्किल टेस्ट, अफ्रीका-न्यूजीलैंड ने क्लीन स्वीप किया था

भारत-अफगानिस्तान में एकमात्र टेस्ट आज से:अफगान स्पिनर्स के सामने भारतीय बैटर्स का स्किल टेस्ट, अफ्रीका-न्यूजीलैंड ने क्लीन स्वीप किया था

भारतीय क्रिकेट टीम करीब 8 महीने बाद कोई टेस्ट मैच खेलेगी। टीम का मुकाबला शनिवार को अफगानिस्तान से होगा। यह मैच सुबह 9:30 बजे से मुल्लांपुर के महाराजा यादविंद्र सिंह स्टेडियम में खेला जाएगा। इस मुकाबले में अफगानी स्पिनर्स भारतीय बैटर्स का स्किल टेस्ट भी लेंगे। विराट कोहली, रोहित शर्मा और चेतेश्वर पुजारा के रिटायरमेंट के बाद से भारत का बैटिंग ऑर्डर नया है। इसमें केएल राहुल के अलावा, किसी ने भी 50 मैच नहीं खेले हैं। पिछली सीरीज में टीम इंडिया को साउथ अफ्रीका ने 2-0 से क्लीन स्वीप किया था। कोलकाता और गुवाहाटी की पिचों पर भारतीय बैटर्स स्पिन के खिलाफ संघर्ष करते दिखे थे। गिल के सामने 2 सवाल? 1. नंबर-3 पर कौन उतरेगा? कप्तान शुभमन गिल को नंबर-3 के लिए बैटर तय करना होगा। क्योंकि, पुजारा के बाद टीम में इस पोजिशन के लिए कोई स्थायी बल्लेबाज नहीं है। टीम ने इस पोजिशन पर साई सुदर्शन और देवदत्त पडिक्कल जैसे बैटर्स को आजमाया है, लेकिन अब तक नंबर-3 पर कोई स्थायी बैटर नहीं मिला है। 2. जडेजा की जिम्मेदारी कौन संभालेगा? रवींद्र जडेजा को आराम दिया गया है। ऐसे में सवाल यह है कि उनकी जिम्मेदारी कौन संभालेगा। कप्तान के पास राजस्थान के मानव सुथार और विदर्भ के हर्ष दुबे जैसे ऑप्शंस हैं। सुथार अपनी ट्रेडिशनल लेफ्ट आर्म स्पिन से प्रभावित कर रहे हैं, जबकि दुबे गेंद और बल्ले दोनों से योगदान देने की क्षमता रखते हैं। भारत के पास 100% जीत का रिकॉर्ड भारत के नाम अफगानिस्तान के खिलाफ 100% जीत का रिकॉर्ड है। हालांकि, दोनों के बीच एक मैच ही खेला गया है। जोकि 2018 में बेंगलुरु के मैदान पर खेला गया था। यह अफगानिस्तान के करियर का पहला टेस्ट भी था। ओवरऑल टेस्ट रिकॉर्ड की बात करें तो… गिल और राहुल फॉर्म में, सिराज टॉप विकेट टेकर भारतीय कप्तान शुभमन गिल, केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल अच्छे फॉर्म में हैं। गिल ने 1 जनवरी 2025 के बाद से अब तक 9 मैचों में 983 रन बनाए हैं। वहीं, राहुल के नाम 10 मैचों में 813 और यशस्वी जायसवाल के नाम 10 मैच में 745 रन हैं। इस दौरान सबसे ज्यादा विकेट मोहम्मद सिराज ने झटके हैं। स्क्वॉड में शामिल कुलदीप यादव भी 20 विकेट ले चुके हैं। रहमत टॉप स्कोरर, राशिद को सबसे ज्यादा विकेट अफगानिस्तान ने एक जनवरी 2025 के बाद 2 मैच ही खेले हैं। इनमें सबसे ज्यादा रन रहमत शाह ने बनाए हैं। उन्होंने एक मैच की दो पारियों में 158 रन स्कोर किए हैं। जबकि राशिद खान 11 विकेट के साथ टॉप विकेट टेकर हैं। पहली बार टेस्ट मैच की मेजबानी करेगा मुल्लांपुर स्टेडियम न्यू चंडीगढ़ स्थित मुल्लांपुर का महाराजा यादविंद्र सिंह स्टेडियम पहली बार टेस्ट मैच की मेजबानी करेगा। यहां अब तक 2 वनडे और एक टी-20 मैच खेले गए हैं। मौसम भी मैच का अहम फैक्टर बन सकता है। यहां गर्मी प्लेयर्स की परीक्षा लेगी। ट्रेनिंग में कई प्लेयर्स को मेन ग्राउंड से नेट्स तक पहुंचने के लिए भी वाहनों का इस्तेमाल करना पड़ा। यहां अगले 5 दिन तक बारिश के आसार नहीं हैं। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-XI भारत: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल, यशस्वी जायसवाल, देवदत्त पडिक्कल/साई सुदर्शन, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्‌डी, वॉशिंगटन सुंदर, हर्ष दुबे/मानव सुथार, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा। अफगानिस्तान- हश्मतुल्लाह शाहिदी (कप्तान), अब्दुल मलिक, सेदीकुल्लाह अटल, रहमत शाह, रहमानुल्लाह गुरबाज (विकेटकीपर), अजमतुल्लाह ओमरजई, अफसर जजई, शराफुद्दीन अशरफ, नांगेयालिया खारोटे, कायस अहमद और बिलाल सामी।

प्रधानमंत्री नेहरू के आधुनिक गणतंत्र से प्रधानमंत्री मोदी के सभ्यतागत राज्य तक: भारत का राजनीतिक केंद्र कैसे बदल गया | भारत समाचार

Gus Atkinson celebrates taking the wicket of New Zealand's Will O'Rourke (Picture credit: AP)

आखरी अपडेट:06 जून, 2026, 04:26 IST इन दो अलग-अलग युगों का अभिसरण भारत के लोकतांत्रिक विकास में एक दिलचस्प अध्ययन प्रस्तुत करता है सचेत रूप से दूर रहने वाले राज्य से सभ्यतागत लोकतंत्र में यह परिवर्तन भारतीय मतदाताओं के भीतर एक गहरे पुनर्संरेखण को दर्शाता है। फ़ाइल छवि/एक्स भारत 10 जून, 2026 को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मील के पत्थर के करीब पहुंच गया है, जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित, लगातार सरकार के प्रमुख के रूप में जवाहरलाल नेहरू को पीछे छोड़ने के लिए तैयार हैं। यह ऐतिहासिक परिवर्तन न केवल शासन में दीर्घायु का प्रतीक है; यह भारतीय सभ्यता के साथ राज्य के संबंधों में गहन वैचारिक विकास पर प्रकाश डालता है। जबकि नेहरू के संस्थापक कार्यकाल ने नव स्वतंत्र गणतंत्र को उत्तर-औपनिवेशिक आधुनिकतावाद में स्थापित किया, मोदी के लगातार जनादेश ने सांस्कृतिक निरंतरता, ऐतिहासिक पहचान और सभ्यतागत प्रतीकवाद को परिधि से राष्ट्रीय राजनीति के पूर्ण केंद्र में व्यवस्थित रूप से पुनर्स्थापित किया है। उत्तर-औपनिवेशिक आधुनिकतावाद का नेहरूवादी दृष्टिकोण स्वतंत्रता के मद्देनजर, जवाहरलाल नेहरू ने एक आधुनिक राष्ट्र-राज्य की कल्पना की, जो वैज्ञानिक स्वभाव, औद्योगिक प्रगति और शासन कला में जानबूझकर धर्मनिरपेक्ष तटस्थता द्वारा परिभाषित हो। उनके राजनीतिक दर्शन ने सार्वजनिक जीवन में प्रकट सभ्यतागत या धार्मिक दावों से सचेत दूरी बनाए रखी, उनका मानना ​​​​था कि एक नए जन्मे, विविध लोकतंत्र को प्राचीन ऐतिहासिक घर्षण से अलग एक दूरदर्शी पहचान की आवश्यकता होती है। नेहरू के लिए, आधुनिक भारत के मंदिर इसके मेगा-बांध, इस्पात संयंत्र और अनुसंधान संस्थान थे। इस दृष्टिकोण ने संस्थागत धर्मनिरपेक्षता और प्रशासनिक आधुनिकतावाद को प्राथमिकता देकर एक एकीकृत राष्ट्रीय चेतना बनाने की कोशिश की, जानबूझकर सभ्यतागत सुधार को औपचारिक राज्य नीति के क्षेत्र से बाहर छोड़ दिया। मोदी प्रतिमान और सभ्यतागत दावा इसके बिल्कुल विपरीत, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शासन मॉडल ने भारत की प्राचीन विरासत को राज्य की पहचान और राष्ट्रीय गौरव के प्राथमिक आधार के रूप में अपनाया है। सभ्यतागत प्रतीकवाद को विकास से अलग देखने के बजाय, वर्तमान प्रशासन ने सांस्कृतिक बहाली को राष्ट्रीय प्रगति का एक आवश्यक घटक माना है। यह प्रतिमान बदलाव हाई-प्रोफाइल राज्य-नेतृत्व वाली पहलों में प्रकट हुआ है, जिसमें ऐतिहासिक मंदिर परिसरों की भव्य बहाली, प्राचीन सांस्कृतिक गलियारों का पुनरुद्धार और एक सभ्यतागत राज्य या विश्वगुरु के रूप में भारत का वैश्विक प्रक्षेपण शामिल है। ऐतिहासिक पहचान को दैनिक शासन के ताने-बाने में बुनकर, आधुनिक नेतृत्व का तर्क है कि एक राष्ट्र अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पूरी तरह से अपनाए बिना वास्तव में उपनिवेशवाद से मुक्ति नहीं पा सकता है। निरंतरता और राजनीतिक पुनर्संरेखण के पुल सचेत रूप से दूर रहने वाले राज्य से सभ्यतागत लोकतंत्र में यह परिवर्तन भारतीय मतदाताओं के भीतर एक गहरे पुनर्संरेखण को दर्शाता है। जहां प्रारंभिक गणतंत्र सार्वभौमिक नागरिक संरचनाओं के माध्यम से एकजुटता की तलाश करता था, वहीं समकालीन परिदृश्य साझा विरासत और ऐतिहासिक गौरव से अपनी एकजुटता प्राप्त करता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस विकास ने आधुनिक बुनियादी ढांचे की खोज को प्रतिस्थापित नहीं किया है; बल्कि, यह इसके समानांतर चलता है। वर्तमान शासन कथा विरासत स्थलों के भव्य उत्सव के साथ डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और अंतरिक्ष अन्वेषण को सहजता से जोड़ती है, जो तकनीकी रूप से उन्नत लेकिन सांस्कृतिक रूप से निहित महाशक्ति की एकीकृत दृष्टि प्रस्तुत करती है। युगों का ऐतिहासिक संगम जैसे-जैसे शासन की घड़ी 10 जून की ओर बढ़ रही है, इन दो अलग-अलग युगों का अभिसरण लोकतांत्रिक विकास में एक आकर्षक अध्ययन प्रस्तुत करता है। नेहरू के निरंतर नेतृत्व ने आवश्यक संस्थागत नींव रखी जिसने भारतीय लोकतंत्र को अशांत बीसवीं शताब्दी में जीवित रहने और स्थिर रहने की अनुमति दी। दशकों बाद, पीएम मोदी के निरंतर कार्यकाल ने गणतंत्र की आत्मा को फिर से परिभाषित करने के लिए उसी लोकतांत्रिक स्थिरता का उपयोग किया है, यह दर्शाता है कि भारतीय प्रधान मंत्री का जनादेश केवल औपनिवेशिक राज्य के बाद के प्रबंधन से लेकर आधुनिक युग में एक प्राचीन सभ्यता को सक्रिय रूप से चलाने तक विकसित हुआ है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया प्रधानमंत्री नेहरू के आधुनिक गणतंत्र से लेकर प्रधानमंत्री मोदी के सभ्यतागत राज्य तक: भारत का राजनीतिक केंद्र कैसे बदल गया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

CBSE 12th Re-evaluation Deadline Extended to June 7

CBSE 12th Re-evaluation Deadline Extended to June 7

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक CBSE ने 12वीं बोर्ड परीक्षा की आंसर शीट के वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 6 जून से बढ़ाकर 7 जून कर दी है। बोर्ड के मुताबिक, यह फैसला छात्रों को ज्यादा समय देने और पोर्टल पर सामने आई तकनीकी समस्याओं को देखते हुए लिया है। CBSE ने 2 जून को पोस्ट-रिजल्ट दिक्कतों के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया था। इसके बाद कई छात्रों ने आंसर शीट देखने और वेरिफिकेशन, री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने के दौरान कई दिक्कत आने की शिकायत की थी। दूसरी तरफ बोर्ड ने पोर्टल पर साइबर हमलों के मामले में FIR दर्ज कराई है। दिल्ली पुलिस ने मामले जांच शुरू कर दी है। बोर्ड के अनुसार, 2 जून से शुरू हुए पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल पर पिछले तीन दिन में लगातार साइबर हमले किए गए, जिन्हें समय रहते रोक दिया गया। री-इवैल्युएशन के लिए 63 हजार आवेदन अधिकारियों के अनुसार, 4 जून तक पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल के जरिए कुल 70,433 आवेदन मिले हैं। इनमें 7,314 मार्क्स वेरिफिकेशन और 63,119 री-इवैल्यूएशन के आवेदन शामिल थे। CBSE का री-इवैल्यूएशन पोर्टल 1 जून को शुरू होना था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे 2 जून को लॉन्च किया गया। पोर्टल शुरू होते ही कुछ शरारती तत्वों ने इसे ठप करने की कोशिश की। उन्होंने ‘डिनायल ऑफ सर्विस’ हमला किया। इससे महज दो मिनट के भीतर वेबसाइट पर 15 लाख हिट्स आ गईं। इसके अलावा एक लाख से अधिक बार बिना अनुमति फाइल खोलने की कोशिश भी की गई। बोर्ड के अनुसार अब तक किसी भी तरह के डेटा लीक या अनधिकृत एक्सेस का कोई मामला सामने नहीं आया है। साइबर हमलों से निपटने के लिए IIT कानपुर, IIT मद्रास, डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन, I4C, CERT-In और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की साइबर सुरक्षा टीमों ने मदद की। रिजल्ट के बाद से विवादों में CBSE, 5 घटनाक्रम OSM सिस्टम की शुरुआत: CBSE ने 2026 की 12वीं बोर्ड परीक्षा से पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया। इसके तहत स्टूडेंट्स की कॉपी को स्कैन करके डिजिटल रूप से जांचा गया। बोर्ड का दावा था कि इससे मूल्यांकन ज्यादा पारदर्शी और सटीक होगा। 13 मई 2026 को रिजल्ट जारी: 13 मई 2026 को CBSE ने 12वीं का रिजल्ट घोषित किया। इस बार पास प्रतिशत 85.20% रहा, जो 2025 के 88.39% की तुलना में 3.19 प्रतिशत अंक कम था। रिजल्ट आते ही कई छात्रों ने अपेक्षा से कम अंक मिलने की शिकायतें शुरू कर दीं। छात्रों ने उठाए सवाल: रिजल्ट के बाद सोशल मीडिया पर छात्रों ने आरोप लगाया कि OSM सिस्टम में तकनीकी खामियां थीं। कुछ छात्रों ने दावा किया कि उनकी स्कैन की गई कॉपियां धुंधली थीं, कुछ उत्तरों की जांच नहीं हुई और कई मामलों में अंक उम्मीद से काफी कम मिले। स्टूडेंट वेदांत से दावे से विवाद बढ़ा: दिल्ली के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने दावा किया कि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में उसे अपनी फिजिक्स कॉपी की जगह किसी दूसरे छात्र की कॉपी भेज दी गई। CBSE ने गलती मानते हुए सही कॉपी उपलब्ध कराई। घटना ने OSM सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। CBSE चेयरमैन हटे, जांच और री-इवैल्यूएशन शुरू: केंद्र सरकार ने CBSE चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया। साथ ही OSM से जुड़ी खरीद प्रक्रिया और तकनीकी खामियों की जांच के आदेश दिए। ————————- CBSE 12वीं परीक्षा से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… राहुल गांधी ने CBSE छात्रों से बात की: स्टूडेंट्स ने कहा- हमें आतंकवादी-पाकिस्तानी बुलाया गया लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने CBSE 12वीं क्लास के छात्रों से मुलाकात की। छात्रों ने राहुल से कहा- आंसर शीट को लेकर सवाल पूछने पर हमें एंटी-नेशनल, डीप स्टेट एजेंट्स (जासूस), आतंकवादी और पाकिस्तानी कहा गया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

10 घंटे में 10 लाख साइन-अप: अन्नामलाई ने अपने नए आंदोलन के लिए ‘असाधारण प्रतिक्रिया’ की सराहना की | भारत समाचार

Nathan Smith celebrates taking the wicket of England's Josh Tongue (Picture credit: AP)

आखरी अपडेट:06 जून, 2026, 00:48 IST अन्नामलाई ने भाजपा से बाहर निकलने की घोषणा की और “वी द लीडर्स” का अनावरण किया, इसे “आम आदमी की राजनीति” को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत बताया। “वी द लीडर्स” द्वारा महत्वपूर्ण जनता का ध्यान आकर्षित करने के साथ, राजनीतिक पर्यवेक्षक अब बारीकी से देखेंगे कि अन्नामलाई 2031 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले आंदोलन को एक राजनीतिक ताकत में कैसे बदलते हैं। (एक्स फाइल फोटो) ऐसा प्रतीत होता है कि तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रमुख के अन्नामलाई के नए शुरू किए गए राजनीतिक आंदोलन ने समर्थकों के साथ तालमेल बिठा लिया है, इसके लॉन्च के 10 घंटों के भीतर 10 लाख से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है। अन्नामलाई, जिन्होंने अपना नया मंच, “वी द लीडर्स” लॉन्च करने के लिए शुक्रवार को भाजपा छोड़ दी, ने समर्थकों को इस पहल के लिए “असाधारण प्रतिक्रिया” के रूप में वर्णित करने के लिए धन्यवाद दिया। अन्नामलाई ने एक्स पर लिखा, “हमारे राजनीतिक आंदोलन ने एक मील का पत्थर हासिल किया है, जिसमें 10 लाख से अधिक नेताओं ने केवल 10 घंटों के भीतर पंजीकरण कराया है। यह असाधारण प्रतिक्रिया हमारे साझा दृष्टिकोण और सामूहिक मिशन में बढ़ते विश्वास का एक शक्तिशाली प्रतिबिंब है।” उन्होंने कहा, “मैं इस आंदोलन में अपना भरोसा जताने वाले हर व्यक्ति का दिल से आभार व्यक्त करता हूं।” हमारे राजनीतिक आंदोलन ने एक मील का पत्थर हासिल किया है, केवल 10 घंटों के भीतर 10 लाख से अधिक नेताओं ने पंजीकरण कराया है। यह असाधारण प्रतिक्रिया हमारे साझा दृष्टिकोण और सामूहिक मिशन में बढ़ते विश्वास का एक शक्तिशाली प्रतिबिंब है। मैं हर किसी के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं… pic.twitter.com/IFWW3InPAh – के.अन्नामलाई (@annamalai_k) 5 जून, 2026 अन्नामलाई की नई राजनीतिक यात्रा इससे पहले दिन में, अन्नामलाई ने भाजपा से बाहर निकलने की घोषणा की और “वी द लीडर्स” का अनावरण किया, इसे “आम आदमी की राजनीति” को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत बताया। 42 वर्षीय नेता ने कहा कि यह आंदोलन समावेशी और जन-केंद्रित शासन पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यक्तित्व पंथ, चाटुकारिता और वंशवादी राजनीति को अस्वीकार करेगा। तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के रूप में उनके प्रतिस्थापन और 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले अन्नाद्रमुक के साथ पार्टी के नए सिरे से गठबंधन के बाद उनके राजनीतिक भविष्य पर महीनों की अटकलों के बाद भाजपा से उनका प्रस्थान हुआ। भाजपा के भीतर अन्नामलाई का उदय भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी, अन्नामलाई अगस्त 2020 में भाजपा में शामिल हुए और तेजी से पार्टी में आगे बढ़े। कुछ ही हफ्तों में, उन्हें 2021 में तमिलनाडु भाजपा प्रमुख के रूप में पदोन्नत होने से पहले राज्य उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में भाजपा ने राज्य में अपना विस्तार किया। पार्टी ने अपना वोट शेयर 2019 के लोकसभा चुनावों में लगभग 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 2024 में लगभग 11 प्रतिशत कर लिया, हालांकि वह तमिलनाडु में एक संसदीय सीट जीतने में विफल रही। अन्नामलाई ने स्वयं 2021 का विधानसभा चुनाव अरावाकुरिची से और 2024 का लोकसभा चुनाव कोयंबटूर से लड़ा, लेकिन असफल रहे। चुनावी असफलताओं के बावजूद, वह तमिलनाडु में भाजपा के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक बनकर उभरे, खासकर युवा मतदाताओं के बीच। आईपीएस अधिकारी से राजनीतिक चैलेंजर तक 4 जून 1984 को करूर जिले में जन्मे अन्नामलाई ने पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, कोयंबटूर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और बाद में भारतीय प्रबंधन संस्थान, लखनऊ से एमबीए की उपाधि प्राप्त की। राजनीति में प्रवेश करने से पहले, उन्होंने कर्नाटक में एक आईपीएस अधिकारी के रूप में कार्य किया और अपनी पुलिसिंग शैली के लिए लोकप्रियता हासिल की, खासकर उडुपी में अपने कार्यकाल के दौरान। अपराध और कानून प्रवर्तन के प्रति उनके सख्त दृष्टिकोण के लिए उनके समर्थकों ने उन्हें “सिंघम” करार दिया। “वी द लीडर्स” द्वारा महत्वपूर्ण जनता का ध्यान आकर्षित करने के साथ, राजनीतिक पर्यवेक्षक अब बारीकी से देखेंगे कि अन्नामलाई 2031 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले आंदोलन को एक राजनीतिक ताकत में कैसे बदलते हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में -सौरभ वर्मावरिष्ठ उपसंपादक सौरभ वर्मा मुख्य उप-संपादक के रूप में News18.com के लिए सामान्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दैनिक समाचारों को कवर करते हैं। वह राजनीति पर गहरी नजर रखते हैं। आप उन्हें ट्विटर –twitter.com/saurbhkverma19 पर फ़ॉलो कर सकते हैं न्यूज़ इंडिया 10 घंटे में 10 लाख साइन-अप: अन्नामलाई ने अपने नए आंदोलन के लिए ‘असाधारण प्रतिक्रिया’ की सराहना की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)के अन्नामलाई नया राजनीतिक आंदोलन(टी)वी द लीडर्स मंच(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)पूर्व बीजेपी प्रमुख अन्नामलाई(टी)अन्नामलाई ने बीजेपी छोड़ी(टी)आम आदमी की राजनीति(टी)तमिलनाडु बीजेपी नेतृत्व(टी)आईपीएस अधिकारी बने राजनेता