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वैभव सूर्यवंशी श्रीलंका के खिलाफ उतरेंगे रिकॉर्ड बनाने:आज इंडिया-A ट्राई सीरीज का पहला मुकाबला, IPL में अब तक 2 सेंचुरी लगा चुके

वैभव सूर्यवंशी श्रीलंका के खिलाफ उतरेंगे रिकॉर्ड बनाने:आज इंडिया-A ट्राई सीरीज का पहला मुकाबला, IPL में अब तक 2 सेंचुरी लगा चुके

IPL के बाद आज वैभव सूर्यवंशी पहली बार मैदान में उतरने वाले हैं। इंडिया-A ट्राई सीरीज का पहला मुकाबला आज खेला जाएगा। श्रीलंका के खिलाफ रिकॉर्ड बनाने के लिए वैभव उतरेंगे। ये मैच श्रीलंका के रंगिरी दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में सुबह 10 बजे से है। इस वन-डे ट्राई सीरीज की तीसरी टीम अफगानिस्तान-A है। इससे पहले वे एशिया कप राइजिंग स्टार्स और अंडर-वर्ल्डकप में इंडिया की ओर से खेल चुके हैं। इसी साल जनवरी में हुए अंडर-19 वर्ल्डकप फाइनल में उन्होंने 175 रन की पारी खेली थी। वे प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने थे। वैभव ने IPL 2026 में सबसे ज्यादा 776 रन बनाए और ऑरेंज कैप जीता। वैभव ने मोस्ट वैल्युएबल प्लेयर, इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर, सुपर स्ट्राइकर और सबसे ज्यादा छक्के लगाने का अवॉर्ड भी जीता। इस सीजन उन्होंने 36 गेंद पर शतक लगाया था, जबकि तीन बार 90 से 100 के बीच में आउट हुए थे। 12 साल में रणजी डेब्यू से इंडिया-A तक का सफर वैभव ने जनवरी 2024 में बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया। तब उनकी उम्र 12 साल थी। 2024 में मुंबई और छत्तीसगढ़ के खिलाफ उन्होंने दो फर्स्ट क्लास मैचों में 31 रन बनाए थे। वैभव ने सचिन तेंदुलकर (15 साल) और युवराज सिंह (18 साल) को पीछे छोड़ा और घरेलू फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बने। वैभव ने 13 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अंडर-19 यूथ टेस्ट सीरीज में सिर्फ 58 गेंदों पर शतक जड़ दिया। यह अंडर-19 टेस्ट क्रिकेट में दूसरा सबसे तेज शतक था। उन्होंने 62 गेंदों में 104 रन की पारी खेली, जिसमें 14 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। वैभव ने लिस्ट-A (50 ओवर) में अब तक 8 मैच खेले हैं। इस दौरान उन्होंने 44.12 की औसत और 164.95 के स्ट्राइक रेट से 353 रन बनाए। उनका बेस्ट स्कोर 190 रन रहा है। सूर्यवंशी ने इस फॉर्मेट में 1 शतक और 1 अर्धशतक लगाया है। उन्होंने 37 चौके और 23 छक्के भी जड़े हैं। वैभव का सिलेक्शन इंडियन टीम में हुआ IPL 2025 में वैभव ने सिर्फ 7 मैचों में 252 रन बनाए, जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल था। इन सभी परफॉरमेंस के आधार पर BCCI ने उन्हें इंडिया-A में जगह दी। वैभव का सिलेक्शन इंडियन टीम में हो गया है। वह इंडियन क्रिकेट टीम में चुने गए अब तक के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने सचिन तेंदुलकर का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पुरुष क्रिकेटर्स में सचिन तेंदुलकर 16 साल, 194 दिन की उम्र में भारतीय टीम में चुने गए थे। वहीं, वैभव 15 साल 71 दिन में चुने गए हैं। एशिया कप में 243 से ज्यादा का स्ट्राइक रेट वैभव ने एशिया कप राइजिंग स्टार्स 2025 टी-20 में 4 मैचों में 59.75 की औसत और 243.87 के स्ट्राइक रेट से 239 रन बनाए थे। इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर 144 रन रहा। सूर्यवंशी ने इस सीरीज में एक शतक भी लगाया था। उन्होंने 20 चौके और 22 छक्के लगाए।

Rajesh Mehta: No ₹15.5 Lakh Cr Scam, Just Data Confusion

Rajesh Mehta: No ₹15.5 Lakh Cr Scam, Just Data Confusion

Hindi News Business Rajesh Mehta: No ₹15.5 Lakh Cr Scam, Just Data Confusion | Rajesh Exports नई दिल्ली5 मिनट पहले कॉपी लिंक 15.15 लाख करोड़ रुपए के रेवेन्यू इन्फ्लेशन का मामला सामने आने के बाद सेबी ने कंपनी के प्रमोटर और चेयरमैन को शेयर बाजार से बैन कर दिया है। सेबी के अंतरिम आदेश के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर और चेयरमैन का कहना है कि मीडिया में चल रही 15.15 लाख करोड़ रुपए के घोटाले की बातें पूरी तरह से गलत हैं। यह केवल आंकड़ों को गलत तरीके से पढ़ने के कारण पैदा हुआ कन्फ्यूजन है। एक शेयरधारक की शिकायत पर सेबी ने यह जांच शुरू की थी। इसमें कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था। सेबी ने अपने 109 पन्नों के आदेश में कहा कि कंपनी ने अपने कुल राजस्व का 99% हिस्सा गलत तरीके से दिखाया है। पढ़िए राजेश एक्सपोर्ट के चेयरमैन राजेश मेहता का पूरा इंटरव्यू… सवाल 1: सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स का 99% रेवेन्यू इन्फ्लेटेड बताया है? सच क्या है? जवाब: यह सेबी का अंतरिम आदेश है… फाइनल ऑर्डर नहीं है। ये आरोप भी नहीं ऑब्जर्वेशन्स है। पिछले 2-3 दिनों से मीडिया रिपोर्ट्स में जो दावा किया जा रहा है कि राजेश एक्सपोर्ट्स में 15.15 लाख करोड़ रुपए का कोई घोटाला हुआ है, रेवेन्यू गलत दिखाया गया है या फिर झूठा एक्सपोर्ट किया गया है.. ऐसा कुछ भी नहीं है। ये सिर्फ समझने का मामला है। सवाल 2: SEBI ने कंपनी के खिलाफ क्या एक्शन लिया है, क्या कोई जुर्माना लगा है? जवाब: नहीं, SEBI ने कंपनी पर कोई जुर्माना या पेनल्टी नहीं लगाई है। SEBI को कुछ आंकड़ों पर केवल शंका थी, जिसके आधार पर उन्होंने ऑब्जर्वेशन दिए हैं और कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। सवाल 3: SEBI को कंपनी के रेवेन्यू और सेल्स को लेकर क्या संदेह है? जवाब: SEBI का संदेह यह है कि कंपनी ने 5 सालों (2021-2025) के दौरान अपनी बिक्री को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है। लेकिन, बात ये हैं कि SEBI ने आंकड़ों को समझने में थोड़ी चूक की है। उन्होंने शायद बिक्री के कुल आंकड़ों की जगह कंपनी के EBITDA के आंकड़ों को जोड़ लिया, जिससे उन्हें कुल सेल्स और बुक्स में बड़ा अंतर दिखाई दिया और यह संदेह पैदा हुआ। सवाल 4: यह 15.15 लाख करोड़ रुपए का रेवेन्यू असल में कहां से आया है? जवाब: यह रेवेन्यू राजेश एक्सपोर्ट्स की स्विट्जरलैंड स्थित एक स्टेप-डाउन सब्सिडियरी कंपनी वालकाम्बी का है। वालकाम्बी दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे प्रतिष्ठित गोल्ड रिफाइनरी है। यह कंपनी दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों और बड़े बुलियन डीलर्स को सोना बेचती है। कंपनी ने साल 2020 से 2025 तक के 5 सालों की बिक्री के बिल्कुल सही आंकड़े SEBI को सौंपे हैं। राजेश एक्सपोर्ट्स का रेवेन्यू (करोड़ रुपए में) डिटेल्स 2020-21 2021-22 2022-23 2023-24 2024-25 2025-26 कंसॉलिडेटेड ऑपरेशन्स से कुल रेवेन्यू (A) 2.58 लाख 2.43 लाख 3.39 लाख 2.80 लाख 4.23 लाख 7.78 लाख स्टैंडअलोन ऑपरेशन्स से कुल रेवेन्यू (B) 2.06 हजार 6.23 हजार 5.76 हजार 5.40 हजार 7.02 हजार 9.18 हजार सहायक कंपनियों से मिला रेवेन्यू (A-B) 2.56 लाख 2.36 लाख 3.33 लाख 2.75 लाख 4.16 लाख 7.69 लाख कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स / शुद्ध मुनाफा (C) 845 1.00 लाख 1.43 हजार 336 95 113 स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स / शुद्ध मुनाफा (D) 99 23 30 17 24 32 सहायक कंपनियों से मिला शुद्ध मुनाफा (C-D) 746 987 1,402 318 71 81 सवाल 5: गोल्ड रिफाइनरी के बिजनेस का रेवेन्यू मॉडल क्या होता है? जवाब: सोने के कारोबार में टर्नओवर बहुत बड़ा होता है, लेकिन प्रॉफिट मार्जिन बेहद कम होता है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए वालकाम्बी ने खदानों से ₹100 का अशुद्ध सोना इम्पोर्ट किया। उसे अपनी रिफाइनरी में प्रोसेस करके शुद्ध किया और बाजार में ₹101 में बेच दिया। इस स्थिति में कंपनी की कुल बिक्री ₹101 दर्ज होगी, जबकि ग्रॉस प्रॉफिट सिर्फ ₹1 होगा। सारे खर्चे काटने के बाद शुद्ध मुनाफा केवल 25 से 50 पैसे ही बचता है। SEBI ने इसी ₹1 के ग्रॉस प्रॉफिट को बेस मानकर बची हुई बड़ी बिक्री को मिसिंग समझ लिया, जबकि वह टर्नओवर का हिस्सा थी। सवाल 6: राजेश एक्सपोर्ट्स का रेवेन्यू मॉडल कैसे काम करता है? जवाब: कंपनी का टोटल रेवेन्यू दो मुख्य सोर्सेज से आता है, जिन्हें मिलाकर स्टॉक एक्सचेंज को ‘कंसॉलिडेटेड’ आंकड़े दिए जाते हैं: वालकाम्बी का रेवेन्यू: ग्लोबल मार्केट में ब्रांडेड बार्स बेचने से कंपनी का रेवेन्यू आता है। ये राजेश एक्सपोर्ट्स की सबसे मुख्य सब्सिडियरी है। मुख्य बिक्री वालकाम्बी से होती है। राजेश एक्सपोर्ट्स का रेवेन्यू: यह भारत की पैरेंट कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू है, जो ज्वेलरी और बुलियन के लोकल बिजनेस से आता है। इस 5 साल की अवधि में भारतीय कंपनी की बिक्री करीब 20,000 से 25,000 करोड़ रुपए रहा है। सवाल 7: क्या कंपनी ने फोरेंसिक ऑडिटर्स का सहयोग नहीं किया और डेटा छुपाया? जवाब: ये गलत बात है क्योंकि 2.5 साल से फॉरेंसिक ऑडिट चल रहा है। हमने कंपनी के ऑडिटर्स को पूरा सहयोग किया है और नियमों के मुताबिक सभी जरूरी वित्तीय रिकॉर्ड्स का एक्सेस दिया था। फॉरेंसिक ऑडिटर्स 3 महीने तक ऑफिस में बैठे रहे। फोरेंसिक ऑडिटर्स को ERP सिस्टम और बुक्स ऑफ अकाउंट्स का एक्सेस नहीं देने के दावें पूरी तरह से गलत है। सवाल 8: प्रमोटर के पर्सनल अकाउंट में ₹338 करोड़ के ट्रांसफर पर क्या कहना है? जवाब: यह लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी था। यह पैसा किस बिजनेस कारण से आया था और क्यों वापस गया, इसका पूरा विवरण और स्पष्टीकरण SEBI को दे दिया गया है। सवाल 9: क्या प्रमोटर्स ने कंपनी के पैसे का कोई व्यक्तिगत इस्तेमाल किया है? जवाब: प्रमोटर्स ने अपने निजी इस्तेमाल के लिए कंपनी से एक भी रुपया नहीं निकाला है। उल्टा, राजेश एक्सपोर्ट्स एक ऐसी कंपनी रही है जहां प्रमोटर्स ने जरूरत पड़ने पर हमेशा अपनी जेब से कंपनी को फंड दिया है। कंपनी के फंड का कोई गलत इस्तेमाल या पर्सनल बेनेफिट नहीं लिया गया है। सवाल 10: कंपनी में में LIC की 10% हिस्सेदारी है। क्या इससे आम निवेशकों को नुकसान हुआ? जवाब: LIC हमारी कंपनी में पिछले 15 से 20 सालों से धीरे-धीरे शेयर्स जमा कर रही है। वे हर साल

Rajesh Mehta: No ₹15.5 Lakh Cr Scam, Just Data Confusion

Rajesh Mehta: No ₹15.5 Lakh Cr Scam, Just Data Confusion

Hindi News Business Rajesh Mehta: No ₹15.5 Lakh Cr Scam, Just Data Confusion | Rajesh Exports नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक राजेश मेहता का कहना है कि कंपनी ने 2020 से 2025 तक की बिक्री के आंकड़े SEBI को सौंप दिए हैं। सेबी के अंतरिम आदेश के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर और चेयरमैन का कहना है कि मीडिया में चल रही 15.15 लाख करोड़ रुपए के घोटाले की बातें पूरी तरह से गलत हैं। यह केवल आंकड़ों को गलत तरीके से पढ़ने के कारण पैदा हुआ कन्फ्यूजन है। एक शेयरधारक की शिकायत पर सेबी ने यह जांच शुरू की थी। इसमें कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था। सेबी ने अपने 109 पन्नों के आदेश में कहा कि कंपनी ने अपने कुल राजस्व का 99% हिस्सा गलत तरीके से दिखाया है। पढ़िए राजेश एक्सपोर्ट के चेयरमैन राजेश मेहता का पूरा इंटरव्यू… सवाल 1: सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स का 99% रेवेन्यू इन्फ्लेटेड बताया है? सच क्या है? जवाब: यह सेबी का अंतरिम आदेश है… फाइनल ऑर्डर नहीं है। ये आरोप भी नहीं ऑब्जर्वेशन्स है। पिछले 2-3 दिनों से मीडिया रिपोर्ट्स में जो दावा किया जा रहा है कि राजेश एक्सपोर्ट्स में 15.15 लाख करोड़ रुपए का कोई घोटाला हुआ है, रेवेन्यू गलत दिखाया गया है या फिर झूठा एक्सपोर्ट किया गया है.. ऐसा कुछ भी नहीं है। ये सिर्फ समझने का मामला है। सवाल 2: SEBI ने कंपनी के खिलाफ क्या एक्शन लिया है, क्या कोई जुर्माना लगा है? जवाब: नहीं, SEBI ने कंपनी पर कोई जुर्माना या पेनल्टी नहीं लगाई है। SEBI को कुछ आंकड़ों पर केवल शंका थी, जिसके आधार पर उन्होंने ऑब्जर्वेशन दिए हैं और कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। सवाल 3: SEBI को कंपनी के रेवेन्यू और सेल्स को लेकर क्या संदेह है? जवाब: SEBI का संदेह यह है कि कंपनी ने 5 सालों (2021-2025) के दौरान अपनी बिक्री को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है। लेकिन, बात ये हैं कि SEBI ने आंकड़ों को समझने में थोड़ी चूक की है। उन्होंने शायद बिक्री के कुल आंकड़ों की जगह कंपनी के EBITDA के आंकड़ों को जोड़ लिया, जिससे उन्हें कुल सेल्स और बुक्स में बड़ा अंतर दिखाई दिया और यह संदेह पैदा हुआ। सवाल 4: यह 15.15 लाख करोड़ रुपए का रेवेन्यू असल में कहां से आया है? जवाब: यह रेवेन्यू राजेश एक्सपोर्ट्स की स्विट्जरलैंड स्थित एक स्टेप-डाउन सब्सिडियरी कंपनी वालकाम्बी का है। वालकाम्बी दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे प्रतिष्ठित गोल्ड रिफाइनरी है। यह कंपनी दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों और बड़े बुलियन डीलर्स को सोना बेचती है। कंपनी ने साल 2020 से 2025 तक के 5 सालों की बिक्री के बिल्कुल सही आंकड़े SEBI को सौंपे हैं। राजेश एक्सपोर्ट्स का रेवेन्यू (करोड़ रुपए में) डिटेल्स 2020-21 2021-22 2022-23 2023-24 2024-25 2025-26 कंसॉलिडेटेड ऑपरेशन्स से कुल रेवेन्यू (A) 2.58 लाख 2.43 लाख 3.39 लाख 2.80 लाख 4.23 लाख 7.78 लाख स्टैंडअलोन ऑपरेशन्स से कुल रेवेन्यू (B) 2.06 हजार 6.23 हजार 5.76 हजार 5.40 हजार 7.02 हजार 9.18 हजार सहायक कंपनियों से मिला रेवेन्यू (A-B) 2.56 लाख 2.36 लाख 3.33 लाख 2.75 लाख 4.16 लाख 7.69 लाख कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स / शुद्ध मुनाफा (C) 845 1.00 लाख 1.43 हजार 336 95 113 स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स / शुद्ध मुनाफा (D) 99 23 30 17 24 32 सहायक कंपनियों से मिला शुद्ध मुनाफा (C-D) 746 987 1,402 318 71 81 सवाल 5: गोल्ड रिफाइनरी के बिजनेस का रेवेन्यू मॉडल क्या होता है? जवाब: सोने के कारोबार में टर्नओवर बहुत बड़ा होता है, लेकिन प्रॉफिट मार्जिन बेहद कम होता है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए वालकाम्बी ने खदानों से ₹100 का अशुद्ध सोना इम्पोर्ट किया। उसे अपनी रिफाइनरी में प्रोसेस करके शुद्ध किया और बाजार में ₹101 में बेच दिया। इस स्थिति में कंपनी की कुल बिक्री ₹101 दर्ज होगी, जबकि ग्रॉस प्रॉफिट सिर्फ ₹1 होगा। सारे खर्चे काटने के बाद शुद्ध मुनाफा केवल 25 से 50 पैसे ही बचता है। SEBI ने इसी ₹1 के ग्रॉस प्रॉफिट को बेस मानकर बची हुई बड़ी बिक्री को मिसिंग समझ लिया, जबकि वह टर्नओवर का हिस्सा थी। सवाल 6: राजेश एक्सपोर्ट्स का रेवेन्यू मॉडल कैसे काम करता है? जवाब: कंपनी का टोटल रेवेन्यू दो मुख्य सोर्सेज से आता है, जिन्हें मिलाकर स्टॉक एक्सचेंज को ‘कंसॉलिडेटेड’ आंकड़े दिए जाते हैं: वालकाम्बी का रेवेन्यू: ग्लोबल मार्केट में ब्रांडेड बार्स बेचने से कंपनी का रेवेन्यू आता है। ये राजेश एक्सपोर्ट्स की सबसे मुख्य सब्सिडियरी है। मुख्य बिक्री वालकाम्बी से होती है। राजेश एक्सपोर्ट्स का रेवेन्यू: यह भारत की पैरेंट कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू है, जो ज्वेलरी और बुलियन के लोकल बिजनेस से आता है। इस 5 साल की अवधि में भारतीय कंपनी की बिक्री करीब 20,000 से 25,000 करोड़ रुपए रहा है। सवाल 7: क्या कंपनी ने फोरेंसिक ऑडिटर्स का सहयोग नहीं किया और डेटा छुपाया? जवाब: ये गलत बात है क्योंकि 2.5 साल से फॉरेंसिक ऑडिट चल रहा है। हमने कंपनी के ऑडिटर्स को पूरा सहयोग किया है और नियमों के मुताबिक सभी जरूरी वित्तीय रिकॉर्ड्स का एक्सेस दिया था। फॉरेंसिक ऑडिटर्स 3 महीने तक ऑफिस में बैठे रहे। फोरेंसिक ऑडिटर्स को ERP सिस्टम और बुक्स ऑफ अकाउंट्स का एक्सेस नहीं देने के दावें पूरी तरह से गलत है। सवाल 8: प्रमोटर के पर्सनल अकाउंट में ₹338 करोड़ के ट्रांसफर पर क्या कहना है? जवाब: यह लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी था। यह पैसा किस बिजनेस कारण से आया था और क्यों वापस गया, इसका पूरा विवरण और स्पष्टीकरण SEBI को दे दिया गया है। सवाल 9: क्या प्रमोटर्स ने कंपनी के पैसे का कोई व्यक्तिगत इस्तेमाल किया है? जवाब: प्रमोटर्स ने अपने निजी इस्तेमाल के लिए कंपनी से एक भी रुपया नहीं निकाला है। उल्टा, राजेश एक्सपोर्ट्स एक ऐसी कंपनी रही है जहां प्रमोटर्स ने जरूरत पड़ने पर हमेशा अपनी जेब से कंपनी को फंड दिया है। कंपनी के फंड का कोई गलत इस्तेमाल या पर्सनल बेनेफिट नहीं लिया गया है। सवाल 10: कंपनी में में LIC की 10% हिस्सेदारी है। क्या इससे आम निवेशकों को नुकसान हुआ? जवाब: LIC हमारी कंपनी में पिछले 15 से 20 सालों से धीरे-धीरे शेयर्स जमा कर रही है। वे हर साल ओपन मार्केट से थोड़ा-बहुत हिस्सा खरीदते रहे

Sensex Crosses 74,000, Nifty Surges 150 Points; Auto & Realty Lead

Sensex Crosses 74,000, Nifty Surges 150 Points; Auto & Realty Lead

मुंबई8 मिनट पहले कॉपी लिंक शेयर बाजार में आज यानी 9 जून को बढ़त है। सेंसेक्स 500 अंक (0.50%) की तेजी के साथ 74,000 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी करीब 150 अंकों (0.50%) की तेजी है, ये 23,259 के स्तर पर आ गया है। आज के कारोबार में निफ्टी ऑटो और रियल्टी में सबसे ज्यादा खरीदारी है। एशियाई बाजारों में आज मिलाजुला कारोबार इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज कोस्पी (साउथ कोरिया) 7716 +255 +3.79% निक्केई (जापान) 64654 +630 +0.98% हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) 24513 -144 -0.58% अमेरिकी बाजारों में कल मिलाजुला कारोबार रहा इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज डाउ जोन्स 50786 -81 -0.16% नैस्डैक 25930 +220 +0.86% S&P 500 7406 +22 +0.30% विदेशी निवेशकों ने 8 जून को 5,556 करोड़ रुपए के शेयर बेचे कैटेगरी लेटेस्ट बीते 7 दिन बीते 30 दिन DII 5,165 24,400 1,00,374.4 FII/FPI -5,556 -24,396 -81,561 नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले कल यानी यानी 8 जून को शेयर बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 719 अंक की गिरावट के साथ 73,524 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 244 अंकों की गिरावट रही थी, ये 23,123 पर बंद हुआ था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Sensex Crosses 74,000, Nifty Surges 150 Points; Auto & Realty Lead

Sensex Crosses 74,000, Nifty Surges 150 Points; Auto & Realty Lead

मुंबई7 मिनट पहले कॉपी लिंक शेयर बाजार में आज यानी 9 जून को बढ़त है। सेंसेक्स 100 अंक की तेजी के साथ 73,700 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी करीब 50 अंकों की तेजी है, ये 23,200 के स्तर पर पहुंच गया है। आज के कारोबार में निफ्टी ऑटो और रियल्टी में सबसे ज्यादा खरीदारी है। एशियाई बाजारों में आज मिलाजुला कारोबार इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज कोस्पी (साउथ कोरिया) 7716 +255 +3.79% निक्केई (जापान) 64654 +630 +0.98% हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) 24513 -144 -0.58% अमेरिकी बाजारों में कल मिलाजुला कारोबार रहा इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज डाउ जोन्स 50786 -81 -0.16% नैस्डैक 25930 +220 +0.86% S&P 500 7406 +22 +0.30% विदेशी निवेशकों ने 8 जून को 5,556 करोड़ रुपए के शेयर बेचे कैटेगरी लेटेस्ट बीते 7 दिन बीते 30 दिन DII 5,165 24,400 1,00,374.4 FII/FPI -5,556 -24,396 -81,561 नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले कल यानी यानी 8 जून को शेयर बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 719 अंक की गिरावट के साथ 73,524 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 244 अंकों की गिरावट रही थी, ये 23,123 पर बंद हुआ था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

मई में रिकॉर्ड 25.31 लाख गाड़ियां बिकीं:इनमें पहली बार EV की हिस्सेदारी 11% के पार, मिडल ईस्ट संकट से महंगे हुए ईंधन का असर

मई में रिकॉर्ड 25.31 लाख गाड़ियां बिकीं:इनमें पहली बार EV की हिस्सेदारी 11% के पार, मिडल ईस्ट संकट से महंगे हुए ईंधन का असर

मई महीने में देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने बिक्री का एक नया रिकॉर्ड बनाया है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के मुताबिक, मई 2026 में देश की कुल ऑटो रिटेल सेल्स 9.55% बढ़कर 25,31,067 यूनिट पर पहुंच गई। पिछले साल मई में यह आंकड़ा 23,10,451 यूनिट था। इस रिकॉर्ड बिक्री के बीच सबसे बड़ी बात यह रही कि देश में पहली बार कुल बिकने वाले वाहनों में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की हिस्सेदारी 11% के पार निकल गई है। मिडल ईस्ट संकट के कारण पिछले दिनों देश में ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई थी, उसकी वजह से ग्राहकों का रुझान ग्रीन और फ्यूल-एफिशिएंट वाहनों की तरफ बढ़ा है। मई में पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री 23.25% बढ़ी FADA के आंकड़ों के अनुसार, मई के महीने में पैसेंजर व्हीकल्स (कार) की रिटेल बिक्री 23.25% की भारी बढ़त के साथ रिकॉर्ड 4,02,591 यूनिट रही। पिछले साल मई 2025 में यह आंकड़ा 3,26,656 यूनिट था। इसके अलावा टू-व्हीलर्स (दोपहिया वाहनों) की बिक्री भी 7.54% बढ़कर 18,44,947 यूनिट रही। दोपहिया वाहन की बिक्री 7% बढ़ी दोपहिया वाहनों में EV का शेयर 9% के करीब पहुंचा मई में ईंधन की कीमतों में हुए बदलाव का असर ग्राहकों की पूछताछ पर साफ देखा गया। डीलर्स का कहना है कि लोग अब ज्यादा माइलेज देने वाले और वैकल्पिक ईंधन (जैसे EV और हाइब्रिड) वाले वाहनों के बारे में ज्यादा पूछ रहे हैं। यही वजह है कि दोपहिया वाहनों के बाजार में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) का शेयर एक साल पहले के 6.11% से बढ़कर अब 9.25% पर पहुंच गया है। कमर्शियल और थ्री-व्हीलर सेगमेंट का प्रदर्शन थ्री-व्हीलर्स की बिक्री पिछले महीने 3.56% बढ़कर 1,11,526 यूनिट रही, जो पिछले साल मई में 1,07,688 यूनिट थी। वहीं, कमर्शियल व्हीकल्स (CV) यानी भारी वाहनों के सेगमेंट में भी 5.29% की ग्रोथ देखी गई और यह रिकॉर्ड 83,823 यूनिट पर पहुंच गया। हालांकि, पिछले साल के ऊंचे बेस के कारण कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (पहियों वाले निर्माण उपकरण) की बिक्री में 17.51% की गिरावट आई है।

मई में रिकॉर्ड 25.31 लाख गाड़ियां बिकीं:इनमें पहली बार EV की हिस्सेदारी 11% के पार, मिडल ईस्ट संकट से महंगे हुए ईंधन का असर

मई में रिकॉर्ड 25.31 लाख गाड़ियां बिकीं:इनमें पहली बार EV की हिस्सेदारी 11% के पार, मिडल ईस्ट संकट से महंगे हुए ईंधन का असर

मई महीने में देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने बिक्री का एक नया रिकॉर्ड बनाया है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के मुताबिक, मई 2026 में देश की कुल ऑटो रिटेल सेल्स 9.55% बढ़कर 25,31,067 यूनिट पर पहुंच गई। पिछले साल मई में यह आंकड़ा 23,10,451 यूनिट था। इस रिकॉर्ड बिक्री के बीच सबसे बड़ी बात यह रही कि देश में पहली बार कुल बिकने वाले वाहनों में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की हिस्सेदारी 11% के पार निकल गई है। मिडल ईस्ट संकट के कारण पिछले दिनों देश में ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई थी, उसकी वजह से ग्राहकों का रुझान ग्रीन और फ्यूल-एफिशिएंट वाहनों की तरफ बढ़ा है। मई में पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री 23.25% बढ़ी FADA के आंकड़ों के अनुसार, मई के महीने में पैसेंजर व्हीकल्स (कार) की रिटेल बिक्री 23.25% की भारी बढ़त के साथ रिकॉर्ड 4,02,591 यूनिट रही। पिछले साल मई 2025 में यह आंकड़ा 3,26,656 यूनिट था। इसके अलावा टू-व्हीलर्स (दोपहिया वाहनों) की बिक्री भी 7.54% बढ़कर 18,44,947 यूनिट रही। दोपहिया वाहन की बिक्री 7% बढ़ी दोपहिया वाहनों में EV का शेयर 9% के करीब पहुंचा मई में ईंधन की कीमतों में हुए बदलाव का असर ग्राहकों की पूछताछ पर साफ देखा गया। डीलर्स का कहना है कि लोग अब ज्यादा माइलेज देने वाले और वैकल्पिक ईंधन (जैसे EV और हाइब्रिड) वाले वाहनों के बारे में ज्यादा पूछ रहे हैं। यही वजह है कि दोपहिया वाहनों के बाजार में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) का शेयर एक साल पहले के 6.11% से बढ़कर अब 9.25% पर पहुंच गया है। कमर्शियल और थ्री-व्हीलर सेगमेंट का प्रदर्शन थ्री-व्हीलर्स की बिक्री पिछले महीने 3.56% बढ़कर 1,11,526 यूनिट रही, जो पिछले साल मई में 1,07,688 यूनिट थी। वहीं, कमर्शियल व्हीकल्स (CV) यानी भारी वाहनों के सेगमेंट में भी 5.29% की ग्रोथ देखी गई और यह रिकॉर्ड 83,823 यूनिट पर पहुंच गया। हालांकि, पिछले साल के ऊंचे बेस के कारण कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (पहियों वाले निर्माण उपकरण) की बिक्री में 17.51% की गिरावट आई है।

World News Updates; Iran Israel War | Cuba Earthquake

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13 मिनट पहले कॉपी लिंक क्यूबा के उत्तर-पश्चिमी तट के पास सोमवार को 6.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंपका केंद्र पश्चिमी क्यूबा के मंटुआ शहर से करीब 104 किलोमीटर दूर समुद्र में था। इसकी गहराई लगभग 26 किलोमीटर दर्ज की गई। भूकंप के झटकों से क्यूबा के कई इलाकों में इमारतें हिल गईं और लोग घरों व दफ्तरों से बाहर निकल आए। राजधानी हवाना समेत कई शहरों में कंपन महसूस किया गया। झटकों का असर अमेरिका के फ्लोरिडा तक पहुंचा। मियामी, फोर्ट लॉडरडेल और ऑरलैंडो के आसपास के इलाकों में भी लोगों ने कंपन महसूस होने की जानकारी दी। एहतियात के तौर पर कुछ सरकारी कार्यालय खाली कराए गए। मेक्सिको के युकातान प्रायद्वीप, कैंकून, प्लाया डेल कारमेन और टुलुम में भी झटके महसूस किए गए। हालांकि क्यूबा, अमेरिका और मेक्सिको में कहीं से भी बड़े नुकसान या जनहानि की खबर नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस इलाके में इतने शक्तिशाली भूकंप बेहद दुर्लभ हैं। 1880 के बाद पहली बार इतनी तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया है। भूकंप के बाद सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। हालांकि अधिकारियों ने लोगों को आफ्टरशॉक की संभावना को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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30 मिनट पहले कॉपी लिंक क्यूबा के उत्तर-पश्चिमी तट के पास सोमवार को 6.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंपका केंद्र पश्चिमी क्यूबा के मंटुआ शहर से करीब 104 किलोमीटर दूर समुद्र में था। इसकी गहराई लगभग 26 किलोमीटर दर्ज की गई। भूकंप के झटकों से क्यूबा के कई इलाकों में इमारतें हिल गईं और लोग घरों व दफ्तरों से बाहर निकल आए। राजधानी हवाना समेत कई शहरों में कंपन महसूस किया गया। झटकों का असर अमेरिका के फ्लोरिडा तक पहुंचा। मियामी, फोर्ट लॉडरडेल और ऑरलैंडो के आसपास के इलाकों में भी लोगों ने कंपन महसूस होने की जानकारी दी। एहतियात के तौर पर कुछ सरकारी कार्यालय खाली कराए गए। मेक्सिको के युकातान प्रायद्वीप, कैंकून, प्लाया डेल कारमेन और टुलुम में भी झटके महसूस किए गए। हालांकि क्यूबा, अमेरिका और मेक्सिको में कहीं से भी बड़े नुकसान या जनहानि की खबर नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस इलाके में इतने शक्तिशाली भूकंप बेहद दुर्लभ हैं। 1880 के बाद पहली बार इतनी तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया है। भूकंप के बाद सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। हालांकि अधिकारियों ने लोगों को आफ्टरशॉक की संभावना को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

राहुल का ‘100% धांधली’ आरोप, सोनिया की ‘शेरनी’ प्रशंसा: घर में आलोचना के तहत, दीदी को मिली इंडिया लाइफलाइन | भारत समाचार

Smoke rises from the site of an Israeli airstrike that targeted a neighborhood in the southern Lebanese coastal city of Tyre on June 7. (Photo: AFP)

आखरी अपडेट:09 जून, 2026, 08:28 IST सूत्रों ने कहा कि बनर्जी को गठबंधन सहयोगियों से समर्थन मिला, नेताओं ने कहा कि चुनावी प्रक्रियाओं के बारे में उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं, उन्हें सामूहिक विपक्षी अभियान बनाने की जरूरत है चुनाव में हार और पार्टी के अंदर विद्रोह के बाद टीएमसी को सबसे कठिन राजनीतिक क्षणों में से एक का सामना करने के बावजूद विपक्षी दलों ने ममता बनर्जी को घेर लिया है। (पीटीआई) विधानसभा चुनाव में मिली असफलताओं के बाद से इंडिया ब्लॉक की सबसे महत्वपूर्ण बैठक ममता बनर्जी के जोरदार बचाव के साथ शुरू हुई, क्योंकि विपक्षी नेता तृणमूल कांग्रेस प्रमुख के पीछे एकजुट हो गए और चर्चा को चुनावी प्रक्रिया पर व्यापक हमले में बदल दिया। चर्चा से परिचित नेताओं ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि बनर्जी ने गठबंधन सहयोगियों से कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव में लगभग 60 प्रतिशत – जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य में जीत हासिल कर इतिहास रचा था – “धांधली” हुई थी। इसने राहुल गांधी को तुरंत आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. कमरे में मौजूद कई नेताओं से सहमति जताते हुए कांग्रेस नेता ने जवाब दिया, “60 प्रतिशत नहीं। एक सौ प्रतिशत।” यह भी पढ़ें | उन्होंने टीएमसी के प्रति कोई ‘ममता’ नहीं दिखाई: बंगाल चुनाव में हार के बाद किसने छोड़ा? अतीत में विभाजित होने वाली पार्टियों की व्याख्या इस आदान-प्रदान ने एक बैठक के लिए माहौल तैयार कर दिया, जिसमें विपक्षी दलों ने बनर्जी के इर्द-गिर्द करीबी रुख अपनाया, बावजूद इसके कि तृणमूल कांग्रेस विधानसभा चुनाव में हार के बाद अपने सबसे कठिन राजनीतिक क्षणों में से एक का सामना कर रही थी और इसके बाद पार्टी के अंदर विद्रोह हुआ। टीएमसी और कांग्रेस के बीच कड़वाहट की बातचीत को खत्म करने के संकेत में, सोनिया गांधी ने बनर्जी को “शेरनी” (शेरनी) के रूप में वर्णित किया, प्रतिभागियों द्वारा इस कदम को एक संदेश के रूप में देखा गया कि विपक्षी गठबंधन टीएमसी प्रमुख के पीछे मजबूती से खड़ा है। सूत्रों ने कहा कि बनर्जी को गठबंधन सहयोगियों से पूरा समर्थन मिला, नेताओं ने तर्क दिया कि चुनावी प्रक्रियाओं के बारे में उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं, उन्हें राज्य-विशिष्ट शिकायत के बजाय सामूहिक विरोध अभियान बनने की जरूरत है। उमर अब्दुल्ला का संदेश बैठक में सबसे मजबूत हस्तक्षेपों में से एक उमर अब्दुल्ला का था। सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि विपक्षी दलों को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर करीब से ध्यान देने और उन्हें निरंतर राजनीतिक अभियानों में बदलने की जरूरत है। समझा जाता है कि अब्दुल्ला ने साथी नेताओं से कहा, “हमें उन मुद्दों से सीखने की जरूरत है जो वे उठा रहे हैं। सीजेपी को इससे दूर न जाने दें।” सहयोगी कॉर्नर कांग्रेस बैठक ने जहां चुनावी मुद्दों पर एकजुटता प्रदर्शित की, वहीं यह सहयोगियों के लिए कांग्रेस के खिलाफ लंबे समय से चली आ रही शिकायतों को सामने लाने का मंच भी बन गई। वाम दलों ने शिकायत की कि केरल चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस नेताओं ने उन पर ऐसी भाषा में हमला किया जो अक्सर भाजपा की आलोचना से अलग नहीं लगती थी। यह भी पढ़ें | टीएमसी में उथल-पुथल गहराने से आंतरिक असंतोष गहराने पर ममता ने फिर से जमीन हासिल करने के लिए इंडिया ब्लॉक पर दांव लगाया सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने चिंता को स्वीकार किया लेकिन कुछ बयानबाजी का बचाव करते हुए कहा कि कांग्रेस को अपनी राज्य इकाइयों के विचारों और राजनीतिक मजबूरियों पर भी विचार करना होगा। समझा जाता है कि राहुल ने नेताओं से कहा, ”मुझे अपनी राज्य इकाई की भी बात सुननी होगी।” एक्सचेंज ने बैठक से पहले कई भारतीय ब्लॉक भागीदारों द्वारा सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट की गई चिंताओं को प्रतिबिंबित किया। क्षेत्रीय दलों के नेताओं ने कांग्रेस से सहयोगियों के साथ व्यवहार में अधिक संयम दिखाने और उन राज्यों में अनावश्यक टकराव से बचने का आग्रह किया जहां विपक्षी दल एक-दूसरे के खिलाफ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। कई सहयोगियों ने कांग्रेस से आग्रह किया कि यदि भारत गुट को 2029 तक प्रभावी रहना है तो उसे और अधिक “बड़े दिल वाला” होना चाहिए। शिकायतों से आम सहमति तक यह बैठक गठबंधन के भीतर स्पष्ट तनाव के बीच हुई। द्रमुक सभा में शामिल नहीं हुई, केरल में कांग्रेस और वाम दलों के बीच तनाव अनसुलझा है और कई क्षेत्रीय दलों ने निजी तौर पर विपक्षी रणनीति पर हावी होने की कांग्रेस की प्रवृत्ति के बारे में शिकायत की है। फिर भी चर्चा के अंत तक, नेता एकता प्रदर्शित करने के लिए प्रतिबद्ध दिखे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राहुल गांधी ने गठबंधन के भीतर “प्यार” और सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए, एक सौहार्दपूर्ण संदेश के साथ सहयोगी चिंताओं का जवाब दिया। कांग्रेस नेताओं ने साझेदारों को यह भी आश्वासन दिया कि आगे चलकर बेहतर समन्वय तंत्र बनाया जाएगा, जो विपक्ष के भीतर बढ़ती चिंता को दर्शाता है कि हालांकि कई मुद्दों पर सार्वजनिक असंतोष मौजूद है, गठबंधन अक्सर उनके आसपास एक एकीकृत राष्ट्रीय कथा बनाने के लिए संघर्ष करता रहा है। सामान्य सूत्र: चुनाव जिस बात ने कमरे को एकजुट किया वह यह विश्वास था कि चुनावी मुद्दे गठबंधन का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकते हैं। बनर्जी के दावों, राहुल गांधी की प्रतिक्रिया और उमर अब्दुल्ला के हस्तक्षेप के इर्द-गिर्द हुई चर्चा से व्यापक सहमति बनी कि विपक्ष को मतदाता सूची, चुनाव प्रबंधन और चुनावी पारदर्शिता पर अधिक आक्रामक तरीके से अभियान चलाना चाहिए। यह बैठक के बाद इंडिया ब्लॉक के औपचारिक निर्णयों में परिलक्षित हुआ, जिसमें चुनावी मुद्दों पर एक समन्वित अभियान, अधिक संसदीय समन्वय और गठबंधन सहयोगियों के बीच अधिक लगातार बैठकें शामिल थीं। जाहिर है, बैठक का महत्व उसके बाद घोषित पांच सूत्री कार्ययोजना नहीं थी. यह कमरे के अंदर भेजा गया संदेश था. ऐसे समय में जब ममता बनर्जी घरेलू स्तर पर राजनीतिक उथल-पुथल का सामना कर रही हैं और जब कई गठबंधन सहयोगी कांग्रेस से नाखुश हैं, तो विपक्ष के शीर्ष नेताओं ने सार्वजनिक रूप से एकजुट होकर फैसला किया कि अगली राजनीतिक लड़ाई नेतृत्व के सवालों पर कम और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर अधिक लड़ी जाएगी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स