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Paper Setters Monitored; Digital Devices Banned

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Hindi News Career NEET UG Re Exam: Paper Setters Monitored; Digital Devices Banned 3 मिनट पहले कॉपी लिंक नीट यूजी परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 सेंटर्स में हुई थी। इस एग्जाम में 22 लाख छात्र शामिल हुए। NEET UG 2026 में पेपर लीक के चलते एग्जाम कैंसिल किया गया है। इस धांधली के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुए थे। NTA के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया। 12 मई को परीक्षा रद्द की गई और री-एग्जाम का फैसला लिया गया। लॉकडाउन में रहेंगे पेपर सेटर्स अब 21 जून 2026 को नीट दोबारा आयोजित की जाएगी। एग्जाम का आयोजन 2 से 5:15 बजे तक पेन और पेपर मोड में होगा। एग्जाम के दौरान पेपर सेटर्स को कड़े प्रतिबंध का पालन करना होगा। यहां तक कि पेपर सेटर्स को 21 जून तक लॉकडाउन में रखा जाएगा ताकि पेपर लीक होने की आशंका न रहे। एग्जाम आयोजन के लिए देश भर के 551 शहर और विदेशों में 14 शहरों को चुना गया है। पेपर ले जाने के लिए एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल अधिकारियों के अनुसार एग्जाम से संबंधित सभी काम जैसे प्रश्नों की सेटिंग, ट्रांसलेशन, प्रिंटिंग, पैकेजिंग, स्टोरेज से लेकर ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रिब्यूशन की कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सरकार द्वारा क्वेश्चन पेपर से संबंधित सभी सामान ले जाने के लिए इंडियन एयरफोर्स एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया जाएगा। डिजिटल क्षेत्र में अधिकारी 24 घंटे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग पर नजर जमाए हुए हैं ताकि फेक क्वेश्चन पेपर, गलत सूचनाओं और संदिग्ध गतिविधियों को एग्जाम से दूर रखा जा सके। एक्सपर्ट को खुद पता नहीं होगा कि किस एग्जाम के पेपर बना रहे हैं NTA ऐसा नया सिस्टम बनाने पर काम कर रही है, जिसमें सवाल तैयार करने वाले एक्पर्ट्स को भी पता नहीं होगा कि वह किस एग्जाम के क्वेश्चन पेपर बना रहे हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की नई योजना के तहत अलग-अलग सब्जेक्ट के एक्सपर्ट्स सिर्फ प्रश्न तैयार करेंगे। इन प्रश्नों को एक बड़े डिजिटल बैंक में रखा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, इसमें करीब 10 हजार प्रश्न हो सकते हैं। बाद में टेक्निक की मदद से इन प्रश्नों से फाइनल एग्जाम पेपर तैयार होगा। NEET से 1 लाख से ज्यादा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में एडमिशन के लिए होने वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी। इस परीक्षा के माध्यम से देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष (BAMS, BHMS) और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में एडमिशन मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। —————— दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

‘सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं’: टीएमसी की बागी सांसद काकोली ने 40 साल बाद ममता छोड़ने पर खुलकर बात की | भारत समाचार

Bangladesh Vs Australia Live Score: Follow Latest Updates From The 1st ODI. (AFP Photo)

आखरी अपडेट:09 जून, 2026, 11:23 IST काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उन्होंने पिछले 40 वर्षों से ममता बनर्जी का समर्थन किया है, लेकिन उन्होंने एनडीए में शामिल होने के फैसले के पीछे कुशासन और अराजकता का हवाला दिया। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार (फाइल इमेज) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार पार्टी के लोकसभा सदस्यों के भीतर विद्रोह का एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं, उन्होंने दावा किया है कि कम से कम 20 असंतुष्ट सांसद अब सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने के लिए बातचीत कर रहे हैं, जो उस पार्टी के लिए एक अभूतपूर्व झटका है, जिसकी कभी पश्चिम बंगाल में लगभग निर्विवाद वफादारी थी। दस्तीदार ने कहा कि वह पिछले 40 वर्षों से बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ काम कर रही थीं, यहां तक ​​कि 2011 में सत्ता संभालने से पहले भी। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था में पार्टी के खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए एनडीए को समर्थन देने के अपने फैसले को उचित ठहराया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारी पार्टी के कुछ नेताओं की इच्छा के अनुसार काम कर रहे थे, जिसके परिणामस्वरूप 2026 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी की करारी हार हुई। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “बहुत सारी वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं, जो आज साबित हो रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और फिल्म उद्योग जैसे विभिन्न क्षेत्र पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं, कानून और व्यवस्था इष्टतम नहीं थी, और सरकारी अधिकारियों पर कुछ नेतृत्व की सनक और इच्छा के अनुसार काम करने का बहुत अधिक दबाव था, जो राज्य के विकास के लिए अनुकूल कामकाजी माहौल नहीं है।” उन्होंने उन आरोपों पर भी पलटवार किया कि वह हाल की चुनावी हार के कारण पार्टी छोड़ रही हैं, उन्होंने कहा कि उन्होंने ममता बनर्जी को एक “मार्गदर्शक, संरक्षक और एक नेता” के रूप में देखा था और जब वह सत्ता में नहीं थीं तब भी उन्होंने उनका समर्थन किया था। ‘सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं’ काकोली घोष दस्तीदारबारासात से तीन बार के सांसद, ने पहले कई प्रमुख संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं, जिनमें अखिल भारतीय तृणमूल महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और पार्टी के बांग्ला जननी आउटरीच कार्यक्रम से जुड़ी भूमिकाएं शामिल थीं। पार्टी के सभी पदों से उनके इस्तीफे से पार्टी के भीतर व्यापक असंतोष की अटकलें शुरू हो गईं। अपना रुख स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि असंतुष्ट सांसदों ने संसद में अलग बैठने की व्यवस्था के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा था और वे पिछले कुछ वर्षों में अराजकता और कुशासन का हवाला देते हुए पश्चिम बंगाल के विकास के लिए केंद्र और भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के साथ काम करने के इच्छुक थे। कई टीएमसी नेताओं द्वारा एनडीए के साथ गठबंधन करने के लिए असंतुष्ट सांसदों की आलोचना करने पर दस्तीदार ने कहा, “मैं शुरू से ही ममता बनर्जी के साथ रहा हूं। मैंने 2001 में वाम मोर्चा के खिलाफ एक पार्षद के रूप में लड़ाई लड़ी थी। मैं एक राजनीतिक परिवार से आता हूं। मेरा सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं। मैंने बहुत सह लिया (मेरा सिर कट सकता है, लेकिन मैं कभी नहीं झुकूंगा। मैंने काफी सहन किया है)। ऐसे लोगों की बातों का बिल्कुल कोई असर नहीं होता है।” मैं।” #देखें | दिल्ली: लोकसभा सांसद काकोली घोष का कहना है, “मेरा सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं…मैंने बहुत सह लिया…2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद मैं यहां नहीं आई; मैं यहां 40 साल से लड़ रही हूं। और जैसा कि मैंने कहा, ऐसे लोगों की बातें बिल्कुल… pic.twitter.com/KKmfQlpUFl– एएनआई (@ANI) 9 जून, 2026 उन्होंने किसी भी धमकी की रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया, जिसने सांसदों के एनडीए में शामिल होने के फैसले को प्रभावित किया। उन्होंने कहा, “आप खुद देख सकते हैं, मैं यहां अकेली बैठी हूं। धमकी कहां है?… हम सभी 20 सांसद बैठे और हस्ताक्षर किए।” यह पूछे जाने पर कि क्या बनर्जी ने इस्तीफा देने के बाद उनसे संपर्क करने की कोशिश की, टीएमपी सांसद ने दावा किया, “उस तरफ से किसी ने भी पहुंचने की कोशिश नहीं की।” उन्होंने पार्टी द्वारा नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें ”बस किनारे कर दिया गया।” उनकी टिप्पणी पार्टी के भीतर गहराते संकट के बीच आई है, जिसमें चुनावी हार के बाद इस्तीफे, दलबदल और असंतोष के सार्वजनिक प्रदर्शनों की एक श्रृंखला देखी गई है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अवीक बनर्जी अवीक बनर्जी News18 में वरिष्ठ उप संपादक हैं। ग्लोबल स्टडीज में मास्टर की डिग्री के साथ नोएडा में रहने वाले अवीक के पास डिजिटल मीडिया और न्यूज क्यूरेशन में तीन साल से अधिक का अनुभव है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं’: टीएमसी की बागी सांसद काकोली ने 40 साल बाद ममता छोड़ने पर खुलकर बात की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)काकोली घोष दस्तीदार(टी)काकोली घोष दस्तीदार विद्रोह(टी)तृणमूल कांग्रेस विद्रोह(टी)टीएमसी संकट(टी)टीएमसी बागी सांसद(टी)एनडीए गठबंधन वार्ता(टी)ममता बनर्जी नेतृत्व(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति(टी)लोकसभा असंतुष्ट सांसद(टी)टीएमसी चुनावी हार

Gujarat GSRTC Recruitment | 8917 Driver Conductor Jobs; 12th Pass Eligible

Gujarat GSRTC Recruitment | 8917 Driver Conductor Jobs; 12th Pass Eligible

Hindi News Career Gujarat GSRTC Recruitment | 8917 Driver Conductor Jobs; 12th Pass Eligible 12 मिनट पहले कॉपी लिंक गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम (GSRTC) ने कंडक्टर और ड्राइवर के 8,917 पदों पर भर्ती निकाली है। इसमें कंडक्टर के लिए 4318 और ड्राइवर के लिए 4599 पद शामिल है। उम्मीदवार GSRTC की ऑफिशियल वेबसाइट ojas.gujarat.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कंडक्टर : कैटेगरी वाइस वैकेंसी डिटेल्स : एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास। कंप्यूटर की बेसिक जानकारी होनी चाहिए। RTO का वैलिड कंडक्टर लाइसेंस और बैज होना चाहिए। शारीरिक योग्यता : पुरुष : न्यूनतम हाइट : 162 सेमी एसटी कैटेगरी के पुरुष : 160 सेमी महिला : न्यूनतम हाइट : 158 सेमी एज लिमिट : ड्राइवर के लिए न्यूनतम : 25 साल कंडक्टर के लिए न्यूनतम : 18 साल सामान्य वर्ग के पुरुष : अधिकतम 35 साल आयु की गणना 5 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी। SC/ST/SEBC/EWS पुरुष : अधिकतम 40 साल महिलाओं के लिए अधिकतम : 45 साल फीस : जनरल : 300 + जीएसटी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, SEBC, EWS, पूर्व सैनिक, दिव्यांग और सभी वर्गों की महिला : 200 रुपए + जीएसटी सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम ड्राइविंग टेस्ट डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन इंटरव्यू सैलरी : 22,000 – 28,000 रुपए प्रतिमाह अन्य अलाउंस का लाभ भी मिलेगा। ऐसे करें आवेदन : नया रजिस्ट्रेशन करें (नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आदि भरें)। लॉगिन करके आवेदन फॉर्म भरें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स, फोटो और सिग्नेचर अपलोड करें। ऑनलाइन फीस जमा करें। फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑफिशियल वेबसाइट लिंक ऑनलाइन आवेदन लिंक सरकारी नौकरी की ये खबरें भी पढ़ें यूपी लोअर PCS की 2285 भर्तियां, नेशनल कोलफील्‍ड्स में 1607 वैकेंसी; इस हफ्ते निकलीं 4,689 नौकरियां इस हफ्ते निकली हैं UPSSSC और BSNL समेत कई विभागों में 4,689 पदों पर नौकरियां। अगर आप भी इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

चिन्मय सुथार की नजरें IPL पर:मुंबई लीग में ऑरेंज कैप जीती थी; बीमारी की वजह से 11 महीने मैदान से दूर रहे थे

चिन्मय सुथार की नजरें IPL पर:मुंबई लीग में ऑरेंज कैप जीती थी; बीमारी की वजह से 11 महीने मैदान से दूर रहे थे

मराठा रॉयल्स के स्टार बल्लेबाज और पिछले साल मुंबई क्रिकेट लीग में ऑरेंज कैप अपने नाम करने वाले चिन्मय सुथार ने आगामी सीजन को लेकर अपनी रणनीतियों का खुलासा किया है। सुथार ने कहा कि इस साल मुंबई क्रिकेट लीग में वह अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर IPL फ्रेंचाइजी टीमों को प्रभावित करने का पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों, करियर के उतार-चढ़ाव और अपनी सफलता में पिता के योगदान को लेकर खुलकर बात की। 5 साल की उम्र से बल्ला थामने वाले चिन्मय ने बताया कि वे खुद को मुख्य रूप से एक प्योर बल्लेबाज मानते हैं, जो जरूरत पड़ने पर स्पिन गेंदबाजी भी कर सकता है। पिता राजेश ने सचिन तेंदुलकर के साथ की थी ओपनिंग, वहीं से मिली प्रेरणा चिन्मय सुधार ने अपने पारिवारिक बैकग्राउंड और क्रिकेट की तरफ झुकाव को लेकर बताया कि उनके घर में हमेशा से ही खेल का माहौल रहा है। उनके पिता राजेश खुद एक बेहतरीन क्रिकेटर रह चुके हैं और उन्होंने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के साथ ओपनिंग भी की थी। अपने पिता के प्रभाव पर बात करते हुए चिन्मय ने कहा, “मैं बचपन से ही अपने पापा को क्रिकेट खेलते हुए देखता आया हूं। उन्हें देखकर मुझे हमेशा लगता था कि मुझे भी क्रिकेट खेलना चाहिए। इसी तरह क्रिकेट के लिए मेरा प्यार डेवलप हुआ। जब पापा मैदान पर खेलते थे, तो मुझे बहुत अच्छा लगता था और देखने में बहुत मजा आता था। मेरी इसी दिलचस्पी को देखकर उन्होंने मेरा क्रिकेट करियर स्टार्ट करवाया। 5 साल की उम्र में शुरू किया खेल, अंडर-14 के दिनों में समझा प्रोफेशनल क्रिकेट जब चिन्मय से पूछा गया कि क्या उन्होंने बचपन में ही तय कर लिया था कि आगे चलकर प्रोफेशनल क्रिकेटर बनना है, तो उन्होंने कहा, ‘नहीं, बिल्कुल नहीं। शुरुआत में ऐसा कुछ भी तय नहीं किया था। मुझे बस खेलने में मजा आता था और मैं गेम को पूरी तरह एंजॉय करता था। लेकिन जब मैंने पापा को खेलते देखा और आगे जाकर खुद एज ग्रुप के मैच खेलने लगा, तब समझ आया कि प्रोफेशनल क्रिकेट क्या होता है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘स्कूल गेम्स खेलने के बाद जब मैंने अंडर-14 जैसे एज़ ग्रुप और फिर ए-डिवीजन क्लब क्रिकेट खेलना शुरू किया, तब मुझे असल मायने में इस बात का आईडिया आया कि प्रोफेशनल क्रिकेट की राह कैसी होती है और कौन से मैच खेलकर हम जिंदगी में आगे बढ़ सकते हैं। 15 साल की उम्र में बीमारी का सामना, 11 महीने तक मैदान से रहे दूर करियर के शुरुआती दिनों में ही इस युवा खिलाड़ी को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। 15 साल की उम्र में वे गंभीर रूप से बीमार हो गए, जिससे उनके खेल पर ब्रेक लग गया। उस मुश्किल दौर को याद करते हुए चिन्मय ने कहा, ‘वह समय मेरे लिए मानसिक रूप से बहुत सेंसिटिव (भावुक) था। उस बीमारी के दौरान मैं लगभग 10 से 11 महीने तक क्रिकेट नहीं खेल पाया था। एक खिलाड़ी के लिए इतने लंबे समय तक मैदान से दूर रहना बेहद कठिन होता है, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।’ ‘पापा ही मेरे कोच और लाइफ के सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम’ मुश्किल दौर से उबरने और हर परिस्थिति में साथ देने के लिए चिन्मय ने अपने पिता को अपना सबसे बड़ा मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा, “बिल्कुल, मेरे पापा ही मेरे कोच हैं और मैं बचपन से उन्हें फॉलो करते आया हूं। जब भी मैं क्रिकेट या लाइफ में डाउन फील करता था, तो वो हमेशा मेरी मदद करते थे और आज भी करते हैं। वो मेरी लाइफ के सबसे बड़े पार्ट हैं। जब मेरा समय अच्छा नहीं होता है, तो वो मुझे संभालते हैं। मैं बहुत लकी हूं कि मेरे पास ऐसे पापा हैं जो मुझे क्रिकेट की हर बारीकी समझाते हैं।” खुद को मानते हैं टॉप ऑर्डर बैटर, स्पिन बॉलिंग भी कर लेते हैं अपनी खेल शैली और टीम में अपनी भूमिका पर बात करते हुए मराठा रॉयल्स के इस खिलाड़ी ने साफ किया कि वे ऑलराउंडर से ज्यादा अपनी बल्लेबाजी पर भरोसा करते हैं। मुंबई क्रिकेट लीग में शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने वाले चिन्मय ने अपनी पोजीशन को लेकर कहा,’मैं पूरी तरह से एक बैटर हूं और टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। हां, मैं टीम के लिए स्पिन गेंदबाजी भी डाल लेता हूं, लेकिन मेरी मुख्य पहचान बल्लेबाजी ही है। खुद को मानते हैं टॉप ऑर्डर बैटर, स्पिन बॉलिंग भी कर लेते हैं अपनी खेल शैली और टीम में अपनी भूमिका पर बात करते हुए मराठा रॉयल्स के इस खिलाड़ी ने साफ किया कि वे ऑलराउंडर से ज्यादा अपनी बल्लेबाजी पर भरोसा करते हैं। मुंबई क्रिकेट लीग में शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने वाले चिन्मय ने अपनी पोजीशन को लेकर कहा, “मैं पूरी तरह से एक बैटर हूं और टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। हां, मैं टीम के लिए स्पिन गेंदबाजी भी डाल लेता हूं, लेकिन मेरी मुख्य पहचान बल्लेबाजी ही है। ——————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… विमेंस टी-20 वर्ल्डकप प्रैक्टिस मैच में भारतीय जीती:वेस्टइंडीज को 26 रन से हराया; भारती की नाबाद फिफ्टी, श्रेयांका को 4 विकेट भारतीय विमेंस टीम ने बल्लेबाजों और स्पिनरों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत पहले वार्म-अप मैच में वेस्टइंडीज को 26 रन से हरा दिया। सोमवार को कार्डिफ में खेले गए मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट पर 179 रन बनाए। जवाब में वेस्टइंडीज की 8 विकेट खोकर 153 रन ही बना सकी। पूरी खबर

चिन्मय सुतार की नजरें IPL पर:मुंबई लीग में ऑरेंज कैप जीती थी; बीमारी की वजह से 11 महीने मैदान से दूर रहे थे

चिन्मय सुथार की नजरें IPL पर:मुंबई लीग में ऑरेंज कैप जीती थी; बीमारी की वजह से 11 महीने मैदान से दूर रहे थे

मराठा रॉयल्स के स्टार बल्लेबाज और पिछले साल मुंबई क्रिकेट लीग में ऑरेंज कैप अपने नाम करने वाले चिन्मय सुतार ने आगामी सीजन को लेकर अपनी रणनीतियों का खुलासा किया है। सुथार ने कहा कि इस साल मुंबई क्रिकेट लीग में वह अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर IPL फ्रेंचाइजी टीमों को प्रभावित करने का पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों, करियर के उतार-चढ़ाव और अपनी सफलता में पिता के योगदान को लेकर खुलकर बात की। 5 साल की उम्र से बल्ला थामने वाले चिन्मय ने बताया कि वे खुद को मुख्य रूप से एक प्योर बल्लेबाज मानते हैं, जो जरूरत पड़ने पर स्पिन गेंदबाजी भी कर सकता है। पिता राजेश ने सचिन तेंदुलकर के साथ की थी ओपनिंग, वहीं से मिली प्रेरणा चिन्मय सुतार ने अपने पारिवारिक बैकग्राउंड और क्रिकेट की तरफ झुकाव को लेकर बताया कि उनके घर में हमेशा से ही खेल का माहौल रहा है। उनके पिता राजेश खुद एक बेहतरीन क्रिकेटर रह चुके हैं और उन्होंने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के साथ ओपनिंग भी की थी। अपने पिता के प्रभाव पर बात करते हुए चिन्मय ने कहा, “मैं बचपन से ही अपने पापा को क्रिकेट खेलते हुए देखता आया हूं। उन्हें देखकर मुझे हमेशा लगता था कि मुझे भी क्रिकेट खेलना चाहिए। इसी तरह क्रिकेट के लिए मेरा प्यार डेवलप हुआ। जब पापा मैदान पर खेलते थे, तो मुझे बहुत अच्छा लगता था और देखने में बहुत मजा आता था। मेरी इसी दिलचस्पी को देखकर उन्होंने मेरा क्रिकेट करियर स्टार्ट करवाया। 5 साल की उम्र में शुरू किया खेल, अंडर-14 के दिनों में समझा प्रोफेशनल क्रिकेट जब चिन्मय से पूछा गया कि क्या उन्होंने बचपन में ही तय कर लिया था कि आगे चलकर प्रोफेशनल क्रिकेटर बनना है, तो उन्होंने कहा, ‘नहीं, बिल्कुल नहीं। शुरुआत में ऐसा कुछ भी तय नहीं किया था। मुझे बस खेलने में मजा आता था और मैं गेम को पूरी तरह एंजॉय करता था। लेकिन जब मैंने पापा को खेलते देखा और आगे जाकर खुद एज ग्रुप के मैच खेलने लगा, तब समझ आया कि प्रोफेशनल क्रिकेट क्या होता है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘स्कूल गेम्स खेलने के बाद जब मैंने अंडर-14 जैसे एज़ ग्रुप और फिर ए-डिवीजन क्लब क्रिकेट खेलना शुरू किया, तब मुझे असल मायने में इस बात का आईडिया आया कि प्रोफेशनल क्रिकेट की राह कैसी होती है और कौन से मैच खेलकर हम जिंदगी में आगे बढ़ सकते हैं। 15 साल की उम्र में बीमारी का सामना, 11 महीने तक मैदान से रहे दूर करियर के शुरुआती दिनों में ही इस युवा खिलाड़ी को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। 15 साल की उम्र में वे गंभीर रूप से बीमार हो गए, जिससे उनके खेल पर ब्रेक लग गया। उस मुश्किल दौर को याद करते हुए चिन्मय ने कहा, ‘वह समय मेरे लिए मानसिक रूप से बहुत सेंसिटिव (भावुक) था। उस बीमारी के दौरान मैं लगभग 10 से 11 महीने तक क्रिकेट नहीं खेल पाया था। एक खिलाड़ी के लिए इतने लंबे समय तक मैदान से दूर रहना बेहद कठिन होता है, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।’ ‘पापा ही मेरे कोच और लाइफ के सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम’ मुश्किल दौर से उबरने और हर परिस्थिति में साथ देने के लिए चिन्मय ने अपने पिता को अपना सबसे बड़ा मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा, “बिल्कुल, मेरे पापा ही मेरे कोच हैं और मैं बचपन से उन्हें फॉलो करते आया हूं। जब भी मैं क्रिकेट या लाइफ में डाउन फील करता था, तो वो हमेशा मेरी मदद करते थे और आज भी करते हैं। वो मेरी लाइफ के सबसे बड़े पार्ट हैं। जब मेरा समय अच्छा नहीं होता है, तो वो मुझे संभालते हैं। मैं बहुत लकी हूं कि मेरे पास ऐसे पापा हैं जो मुझे क्रिकेट की हर बारीकी समझाते हैं।” खुद को मानते हैं टॉप ऑर्डर बैटर, स्पिन बॉलिंग भी कर लेते हैं अपनी खेल शैली और टीम में अपनी भूमिका पर बात करते हुए मराठा रॉयल्स के इस खिलाड़ी ने साफ किया कि वे ऑलराउंडर से ज्यादा अपनी बल्लेबाजी पर भरोसा करते हैं। मुंबई क्रिकेट लीग में शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने वाले चिन्मय ने अपनी पोजीशन को लेकर कहा,’मैं पूरी तरह से एक बैटर हूं और टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। हां, मैं टीम के लिए स्पिन गेंदबाजी भी डाल लेता हूं, लेकिन मेरी मुख्य पहचान बल्लेबाजी ही है। खुद को मानते हैं टॉप ऑर्डर बैटर, स्पिन बॉलिंग भी कर लेते हैं अपनी खेल शैली और टीम में अपनी भूमिका पर बात करते हुए मराठा रॉयल्स के इस खिलाड़ी ने साफ किया कि वे ऑलराउंडर से ज्यादा अपनी बल्लेबाजी पर भरोसा करते हैं। मुंबई क्रिकेट लीग में शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने वाले चिन्मय ने अपनी पोजीशन को लेकर कहा, “मैं पूरी तरह से एक बैटर हूं और टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। हां, मैं टीम के लिए स्पिन गेंदबाजी भी डाल लेता हूं, लेकिन मेरी मुख्य पहचान बल्लेबाजी ही है। ——————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… विमेंस टी-20 वर्ल्डकप प्रैक्टिस मैच में भारतीय जीती:वेस्टइंडीज को 26 रन से हराया; भारती की नाबाद फिफ्टी, श्रेयांका को 4 विकेट भारतीय विमेंस टीम ने बल्लेबाजों और स्पिनरों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत पहले वार्म-अप मैच में वेस्टइंडीज को 26 रन से हरा दिया। सोमवार को कार्डिफ में खेले गए मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट पर 179 रन बनाए। जवाब में वेस्टइंडीज की 8 विकेट खोकर 153 रन ही बना सकी। पूरी खबर

₹25 लाख खर्च कर हरियाणा पहुंचा युवक का शव:अमेरिका में सड़क हादसे में मौत, ₹50 लाख लगाकर भेजा था; प्लॉट-दुकान भी बिके

₹25 लाख खर्च कर हरियाणा पहुंचा युवक का शव:अमेरिका में सड़क हादसे में मौत, ₹50 लाख लगाकर भेजा था; प्लॉट-दुकान भी बिके

करनाल के एक युवक की अमेरिका में सड़क हादसे में मौत हो गई। सोमवार देर शाम उसका शव अमेरिका से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा। यहां से एम्बुलेंस के जरिए शव मंगलवार सुबह गांव लाया गया। कफन में लिपटे बेटे के शरीर को देखते ही मां और बहन बेहोश होकर जमीन पर गिर गईं। परिजनों का कहना है कि ट्रक हादसे में 27 मई को गौरव की मौत हो गई थी। अमेरिकी पुलिस अधिकारियों ने उन्हें हादसे की जानकारी दी। उसका शव लाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से बात की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद 25 लाख रुपए खर्च कर अमेरिका में रह रहे भारतीय की मदद से गौरव का शव गांव आया। गौरव को 2 साल पहले अमेरिका भेजने में 50 लाख रुपए का खर्च आया था। इसके लिए उन्हें एक प्लॉट भी बेचना पड़ा। गांव बालरागड़ान में उसका अंतिम संस्कार किया गया। पिता ने बेटे के शव को मुखाग्नि दी। गौरव के अंतिम संस्कार के PHOTOS सिलसिलेवार जानिए, कैसे हुआ हादसा… 26 मई को आखिरी बार बात हुई करनाल के बालरागड़ान गांव निवासी रामफल ने बताया कि 27 मई को उनका बेटा गौरव (24) अमेरिका के कैलिफोर्निया से ट्रक लेकर निकला था। उसे कैलिफोर्निया में किसी दूसरी जगह ट्रक से डिलीवरी करनी थी। इस दौरान जब गौरव एक रेस्टोरेंट पर रुका तो उसकी कॉल आई। कुछ देर बातचीत में बताया कि अभी चाय पीने के लिए रुका है, इसके बाद बात करेगा। ट्रक का बैलेंस बिगड़ा, खाई में गिरने से मौत पिता रामफल के अनुसार, अमेरिकी पुलिस से उन्हें पता चला है कि रेस्टोरेंट से निकलने के बाद कुछ ही दूर चलने पर गौरव के ट्रक का एक्सीडेंट हो गया। इसके बाद ट्रक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गया। इस हादसे में गौरव की मौके पर ही मौत हो गई। दोपहर करीब ढाई बजे उन्हें अमेरिका पुलिस अधिकारी का फोन आया, जिसने इस हादसे की जानकारी दी। शव भारत लाने में 25 लाख रुपए खर्च रामफल ने आगे बताया कि बेटे की मौत की सूचना पर पूरा परिवार बिखर गया। गौरव के शव लाने में भी काफी अड़चन आई। प्रशासनिक अधिकारों से भी इस बारे में मदद मांगी, लेकिन कही से कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद अमेरिका में रह रहे कुछ परिचितों ने गौरव के शव को भारत पहुंचाने में मदद की। इसमें उनके करीब 25 लाख रुपए भी खर्च हो गए। 6 माह में डंकी के रास्ते पहुंचा था अमेरिका पिता रामफल ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए करीब 2 साल पहले गौरव अमेरिका गया था। मैंने गौरव को वहां जाने से काफी रोका था, लेकिन वह फिर भी अमेरिका जाने की जिद पर अड़ा रहा। उसकी जिद के आगे झुकते हुए उसे अमेरिका भेजना पड़ा। एक एजेंट के जरिए गौरव करीब 6 महीने में डंकी रूट से अमेरिका पहुंचा था। इसके लिए एक प्लॉट और दुकान भी बेचनी पड़ी थी। पिता के पास 2 एकड़ जमीन, खेती से चलता है परिवार रामफल ने बताया कि उनका परिवार खेती-किसानी पर निर्भर है। परिवार के पास करीब 2 एकड़ जमीन है, जिससे ही घर का खर्च चलता है। उन्होंने बताया कि गौरव परिवार का इकलौता बेटा था। परिवार में उसकी एक छोटी बहन भी है, जिसकी करीब एक साल पहले शादी हो चुकी है। बेटे के जाने के बाद परिवार में केवल रामफल और उनकी पत्नी ही रह गए हैं। —————— यह खबर भी पढ़ें…. करनाल के युवक की अमेरिका में गोली मारकर हत्या:मौत से 3 घंटे पहले परिवार से वीडियो कॉल की, ₹60 लाख खर्च कर गया था करनाल जिला में इन्द्री क्षेत्र के गांव समौरा के एक युवक की अमेरिका के जॉर्जिया में गोली मारकर हत्या कर दी गई। युवक करीब दो साल पहले रोजगार की तलाश में विदेश गया था और वहीं पर स्टोर में काम कर रहा था। (पूरी खबर पढ़ें)

बिहार फिर से यूपी में? कांग्रेस को अखिलेश यादव के ‘बड़े दिल’ वाले संदेश के पीछे का डर | भारत समाचार

Bangladesh Vs Australia Live Score: Follow Latest Updates From The 1st ODI. (AFP Photo)

आखरी अपडेट:09 जून, 2026, 10:27 IST सपा की प्राथमिकता स्पष्ट होती जा रही है: सफल 2024 गठबंधन मॉडल को दोहराते हुए यह सुनिश्चित करना कि उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाला मुकाबला बना रहे। इंडिया ब्लॉक की बैठक में अखिलेश के हस्तक्षेप को उत्तर प्रदेश के प्रति उनके दृष्टिकोण के पूर्वावलोकन के रूप में पढ़ा जा सकता है। (एक्स @राहुलगांधी) जब समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने सोमवार को इंडिया ब्लॉक की बैठक में कांग्रेस नेताओं से कहा कि उन्हें सहयोगियों के प्रति “बड़ा दिल” दिखाना चाहिए, तो कमरे में कई लोगों ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की राजनीति पर एक टिप्पणी के रूप में देखा। हालाँकि, टिप्पणी में उत्तर प्रदेश का स्पष्ट संदेश भी था। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के करीब आने के साथ, यादव उस चीज से बचने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे हैं जिसे विपक्षी दल तेजी से “बिहार की गलती” के रूप में वर्णित कर रहे हैं – सीट-बंटवारे में देरी, अवास्तविक मांगें, गठबंधन में घर्षण और नेतृत्व पर भ्रम का एक संयोजन जो बिहार में भारतीय ब्लॉक की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाता है। क्षेत्रीय दलों द्वारा खुले तौर पर कांग्रेस को स्वीकार करने के बारे में उनकी टिप्पणियाँ, जबकि ग्रैंड ओल्ड पार्टी अक्सर प्रतिक्रिया देने में विफल रही, कई सहयोगियों द्वारा साझा की गई व्यापक शिकायत को प्रतिबिंबित करती है: कि राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को क्षेत्रीय वास्तविकताओं की कीमत पर नहीं आना चाहिए। बिहार में वास्तव में क्या हुआ? विपक्षी हलकों में, बिहार एक सतर्क कहानी बन गया है। यह भी पढ़ें | विपक्ष को एकजुट रखने के लिए इंडिया ब्लॉक की 5-सूत्री योजना की व्याख्या: DMK और AAP के बिना क्या बदलाव आएगा? खुद कांग्रेस नेताओं ने निजी तौर पर बिहार चुनाव को “महंगा अनुभव” बताया है। News18 ने पहले रिपोर्ट दी थी कि पार्टी का मानना ​​है कि सीट-बंटवारे की बातचीत में देरी, लंबी बातचीत और गठबंधन सहयोगियों के बीच “दोस्ताना लड़ाई” ने विपक्ष की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया है। नतीजा इतना महत्वपूर्ण था कि द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, कांग्रेस ने महीनों पहले ही उत्तर प्रदेश में जीतने योग्य सीटों की पहचान करना शुरू कर दिया था और सीट-बंटवारे की बातचीत पहले से कहीं पहले पूरी करना चाहती थी। अखिलेश यादव के लिए, बिहार ने एक पुराने राजनीतिक सिद्धांत को मजबूत किया: सबसे मजबूत क्षेत्रीय पार्टी को राज्य चुनाव में गठबंधन की रणनीति का नेतृत्व करना चाहिए। एसपी क्यों मानती है कि वह बड़े हिस्से का हकदार है? लोकसभा चुनाव के विपरीत, विधानसभा चुनाव मूल रूप से स्थानीय प्रतियोगिताएं हैं। समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में प्रमुख विपक्षी ताकत के रूप में 2027 की दौड़ में प्रवेश कर रही है, वह पार्टी जिसकी विधानसभा में उपस्थिति कहीं अधिक है और जिसने 2024 में कांग्रेस की छह की तुलना में यूपी में 37 लोकसभा सीटें जीतीं। यही कारण है कि सपा के अंदरूनी सूत्र पहले से ही कांग्रेस की किसी भी आक्रामक मांग का विरोध करने के संकेत दे रहे हैं। यह बात पार्टी द्वारा किए गए आंतरिक मूल्यांकन के दौरान सामने आई, जिसने आधिकारिक तौर पर इस साल मई में राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC के साथ अपना अनुबंध समाप्त कर दिया, और जमीन पर नजर रखने के लिए एक निजी एजेंसी को काम पर रखा है। वास्तव में, यादव स्वयं राज्य के 403 निर्वाचन क्षेत्रों में जीतने योग्य चेहरों के चयन की प्रक्रिया की देखरेख कर रहे हैं। मनीकंट्रोल द्वारा उद्धृत एक आंतरिक आकलन में कहा गया है कि अगर गठबंधन जारी रहता है तो कांग्रेस 100 से अधिक विधानसभा सीटें मांग सकती है। हालांकि, एसपी को सलाह देने वाली सर्वे टीम ने सहयोगी दल की हिस्सेदारी करीब 70-75 सीटों तक सीमित रखने की सिफारिश की है. इस बीच, कांग्रेस ने लगभग 80 सीटों पर बातचीत के लिए आंतरिक रूप से तैयारी की है, 100-120 निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान की है जहां उसका मानना ​​​​है कि वह प्रतिस्पर्धा कर सकती है। इससे पता चलता है कि अंततः सौदेबाजी का क्षेत्र 70 से 80 सीटों के बीच हो सकता है, जिसमें एसपी यूपी के 403 निर्वाचन क्षेत्रों में से 320 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी। क्यों मुस्लिम बहुल सीटें बन सकती हैं सबसे बड़ा मुद्दा? सबसे कठिन बातचीत संख्या के बारे में नहीं बल्कि भूगोल के बारे में हो सकती है। दोनों पार्टियों का मानना ​​है कि कई मुस्लिम-प्रभावित निर्वाचन क्षेत्रों पर उनका दावा है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट है कि 2024 के लोकसभा प्रदर्शन के आधार पर कांग्रेस द्वारा सहारनपुर और अमरोहा जैसी सीटों पर जोर देने की उम्मीद है। हालाँकि, सपा इनमें से कई क्षेत्रों को अपने सामाजिक गठबंधन के केंद्र के रूप में देखती है। यह एक परिचित गठबंधन समस्या पैदा करता है जहां कांग्रेस विकास चाहती है, सपा अपने मूल आधार की रक्षा करना चाहती है और न ही राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक निर्वाचन क्षेत्रों को छोड़ना चाहती है। दोनों पक्ष इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं यह निर्धारित कर सकता है कि बातचीत सुचारू रहेगी या विवादास्पद हो जाएगी। अखिलेश की ‘बड़े दिल वाली’ टिप्पणी इंडिया ब्लॉक की बैठक में अखिलेश के हस्तक्षेप को उत्तर प्रदेश के प्रति उनके दृष्टिकोण के पूर्वावलोकन के रूप में पढ़ा जा सकता है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उनका तर्क ये नहीं है कि कांग्रेस ख़त्म हो जानी चाहिए. वास्तव में, सपा अभी भी उस गठबंधन में मूल्य देखती है जिसने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में भाजपा की संख्या को नाटकीय रूप से कम करने में मदद की थी। इसके बजाय, वह यह तर्क देते नजर आते हैं कि कांग्रेस को उन राज्यों में राजनीतिक वास्तविकताओं को पहचानना चाहिए जहां क्षेत्रीय दल मजबूत हैं। व्यावहारिक रूप से, इसका अर्थ है शीघ्र सीट-बंटवारा, कम सार्वजनिक विवाद, क्षेत्रीय सहयोगियों के प्रति अधिक सम्मान और आकांक्षा के बजाय जीतने की क्षमता के आधार पर आवंटन। अंतिम फॉर्मूला कैसा दिख सकता है? यदि वर्तमान संकेत सही हैं, तो एक संभावित रूपरेखा ऐसी हो सकती है जहां एसपी के पास लगभग 320-330 सीटें हों, जबकि कांग्रेस के पास 70-80 सीटें हों, शेष सीटों के लिए भारत के छोटे सहयोगी हों। सटीक संख्या बातचीत पर निर्भर करेगी, लेकिन एसपी की प्राथमिकता स्पष्ट होती जा रही है: सफल 2024 गठबंधन मॉडल को दोहराना

स्ट्रीट डॉग की मौत पर रो पड़ीं मंजरी फडनिस:एक्ट्रेस ने कुत्ते की पीट-पीटकर हत्या का दावा किया, न्याय की मांग की

स्ट्रीट डॉग की मौत पर रो पड़ीं मंजरी फडनिस:एक्ट्रेस ने कुत्ते की पीट-पीटकर हत्या का दावा किया, न्याय की मांग की

एक्ट्रेस मंजरी फडनिस ने एक स्ट्रीट कुत्ते की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले पर गहरा दुख जताया है। माइकी की देखभाल मंजरी और उनकी सोसायटी के अन्य निवासी पिछले सात सालों से कर रहे थे। मंजरी ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल वीडियो शेयर कर बताया कि माइकी नाम का लंबे बालों वाला स्ट्रीट कुत्ता था, जिसे उसके परिवार ने छोड़ दिया था। वह 2019-20 से सोसायटी में रह रहा था। कुछ समय पहले उसके अचानक लापता होने के बाद निवासी उसकी तलाश में जुट गए थे। उन्होंने बताया कि माइकी को खोजने के लिए पोस्टर लगाए गए, सुरक्षा गार्डों और स्टाफ से पूछताछ की गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। मंजरी ने दावा किया- माइकी पर हमला हुआ मंजरी के अनुसार, बाद में एक व्यक्ति ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि माइकी पर उस समय हमला किया गया जब वह बिल्डिंग के बेसमेंट क्षेत्र के पास सो रहा था। एक्ट्रेस ने आरोप लगाया कि उसके सिर पर किसी बड़े डंडे या लोहे की रॉड से वार किया गया, जिसके बाद उसे सीढ़ियों के पास घसीटकर और मारा गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि घायल कुत्ते को बाद में एक बोरे में डालकर बिल्डिंग के पीछे स्थित खाड़ी क्षेत्र में फेंक दिया गया। मंजरी ने कहा कि फिलहाल उसके शव की तलाश की जा रही है। मंजरी ने माइकी के लिए न्याय मांगा वीडियो में इमोशनल होते हुए मंजरी ने स्ट्रीट एनिमल की सुरक्षा पर सवाल उठाए और इस मामले में न्याय की मांग की। उन्होंने कहा कि माइकी बेहद शांत स्वभाव का कुत्ता था और सोसायटी के लोग उसकी देखभाल करते थे। वे उसे घर ले जाकर नहलाते, ग्रूमिंग करते और उसके बाल सुलझाते थे। कई फिल्मों में भी बना चुकी हैं पहचान मंजरी फडनिस पशु प्रेमी हैं और सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी पोस्ट शेयर करती हैं। करियर की बात करें तो उन्हें इमरान खान और जेनेलिया डिसूजा के साथ फिल्म ‘जाने तू… या जाने ना’ से पहचान मिली। वह ‘ग्रैंड मस्ती’, ‘वार्निंग’, ‘किस किसको प्यार करूं’, ‘होटल मिलन’ समेत हिंदी और क्षेत्रीय सिनेमा के कई प्रोजेक्ट्स में काम कर चुकी हैं।

स्ट्रीट डॉग की मौत पर रो पड़ीं मंजरी फडनिस:एक्ट्रेस ने कुत्ते की पीट-पीटकर हत्या का दावा किया, न्याय की मांग की

स्ट्रीट डॉग की मौत पर रो पड़ीं मंजरी फडनिस:एक्ट्रेस ने कुत्ते की पीट-पीटकर हत्या का दावा किया, न्याय की मांग की

एक्ट्रेस मंजरी फडनिस ने एक स्ट्रीट कुत्ते की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले पर गहरा दुख जताया है। माइकी की देखभाल मंजरी और उनकी सोसायटी के अन्य निवासी पिछले सात सालों से कर रहे थे। मंजरी ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल वीडियो शेयर कर बताया कि माइकी नाम का लंबे बालों वाला स्ट्रीट कुत्ता था, जिसे उसके परिवार ने छोड़ दिया था। वह 2019-20 से सोसायटी में रह रहा था। कुछ समय पहले उसके अचानक लापता होने के बाद निवासी उसकी तलाश में जुट गए थे। उन्होंने बताया कि माइकी को खोजने के लिए पोस्टर लगाए गए, सुरक्षा गार्डों और स्टाफ से पूछताछ की गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। मंजरी ने दावा किया- माइकी पर हमला हुआ मंजरी के अनुसार, बाद में एक व्यक्ति ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि माइकी पर उस समय हमला किया गया जब वह बिल्डिंग के बेसमेंट क्षेत्र के पास सो रहा था। एक्ट्रेस ने आरोप लगाया कि उसके सिर पर किसी बड़े डंडे या लोहे की रॉड से वार किया गया, जिसके बाद उसे सीढ़ियों के पास घसीटकर और मारा गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि घायल कुत्ते को बाद में एक बोरे में डालकर बिल्डिंग के पीछे स्थित खाड़ी क्षेत्र में फेंक दिया गया। मंजरी ने कहा कि फिलहाल उसके शव की तलाश की जा रही है। मंजरी ने माइकी के लिए न्याय मांगा वीडियो में इमोशनल होते हुए मंजरी ने स्ट्रीट एनिमल की सुरक्षा पर सवाल उठाए और इस मामले में न्याय की मांग की। उन्होंने कहा कि माइकी बेहद शांत स्वभाव का कुत्ता था और सोसायटी के लोग उसकी देखभाल करते थे। वे उसे घर ले जाकर नहलाते, ग्रूमिंग करते और उसके बाल सुलझाते थे। कई फिल्मों में भी बना चुकी हैं पहचान मंजरी फडनिस पशु प्रेमी हैं और सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी पोस्ट शेयर करती हैं। करियर की बात करें तो उन्हें इमरान खान और जेनेलिया डिसूजा के साथ फिल्म ‘जाने तू… या जाने ना’ से पहचान मिली। वह ‘ग्रैंड मस्ती’, ‘वार्निंग’, ‘किस किसको प्यार करूं’, ‘होटल मिलन’ समेत हिंदी और क्षेत्रीय सिनेमा के कई प्रोजेक्ट्स में काम कर चुकी हैं।

वैभव सूर्यवंशी श्रीलंका के खिलाफ उतरेंगे रिकॉर्ड बनाने:आज इंडिया-A ट्राई सीरीज का पहला मुकाबला, IPL में अब तक 2 सेंचुरी लगा चुके

वैभव सूर्यवंशी श्रीलंका के खिलाफ उतरेंगे रिकॉर्ड बनाने:आज इंडिया-A ट्राई सीरीज का पहला मुकाबला, IPL में अब तक 2 सेंचुरी लगा चुके

IPL के बाद आज वैभव सूर्यवंशी पहली बार मैदान में उतरने वाले हैं। इंडिया-A ट्राई सीरीज का पहला मुकाबला आज खेला जाएगा। श्रीलंका के खिलाफ रिकॉर्ड बनाने के लिए वैभव उतरेंगे। ये मैच श्रीलंका के रंगिरी दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में सुबह 10 बजे से है। इस वन-डे ट्राई सीरीज की तीसरी टीम अफगानिस्तान-A है। इससे पहले वे एशिया कप राइजिंग स्टार्स और अंडर-वर्ल्डकप में इंडिया की ओर से खेल चुके हैं। इसी साल जनवरी में हुए अंडर-19 वर्ल्डकप फाइनल में उन्होंने 175 रन की पारी खेली थी। वे प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने थे। वैभव ने IPL 2026 में सबसे ज्यादा 776 रन बनाए और ऑरेंज कैप जीता। वैभव ने मोस्ट वैल्युएबल प्लेयर, इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर, सुपर स्ट्राइकर और सबसे ज्यादा छक्के लगाने का अवॉर्ड भी जीता। इस सीजन उन्होंने 36 गेंद पर शतक लगाया था, जबकि तीन बार 90 से 100 के बीच में आउट हुए थे। 12 साल में रणजी डेब्यू से इंडिया-A तक का सफर वैभव ने जनवरी 2024 में बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया। तब उनकी उम्र 12 साल थी। 2024 में मुंबई और छत्तीसगढ़ के खिलाफ उन्होंने दो फर्स्ट क्लास मैचों में 31 रन बनाए थे। वैभव ने सचिन तेंदुलकर (15 साल) और युवराज सिंह (18 साल) को पीछे छोड़ा और घरेलू फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बने। वैभव ने 13 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अंडर-19 यूथ टेस्ट सीरीज में सिर्फ 58 गेंदों पर शतक जड़ दिया। यह अंडर-19 टेस्ट क्रिकेट में दूसरा सबसे तेज शतक था। उन्होंने 62 गेंदों में 104 रन की पारी खेली, जिसमें 14 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। वैभव ने लिस्ट-A (50 ओवर) में अब तक 8 मैच खेले हैं। इस दौरान उन्होंने 44.12 की औसत और 164.95 के स्ट्राइक रेट से 353 रन बनाए। उनका बेस्ट स्कोर 190 रन रहा है। सूर्यवंशी ने इस फॉर्मेट में 1 शतक और 1 अर्धशतक लगाया है। उन्होंने 37 चौके और 23 छक्के भी जड़े हैं। वैभव का सिलेक्शन इंडियन टीम में हुआ IPL 2025 में वैभव ने सिर्फ 7 मैचों में 252 रन बनाए, जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल था। इन सभी परफॉरमेंस के आधार पर BCCI ने उन्हें इंडिया-A में जगह दी। वैभव का सिलेक्शन इंडियन टीम में हो गया है। वह इंडियन क्रिकेट टीम में चुने गए अब तक के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने सचिन तेंदुलकर का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पुरुष क्रिकेटर्स में सचिन तेंदुलकर 16 साल, 194 दिन की उम्र में भारतीय टीम में चुने गए थे। वहीं, वैभव 15 साल 71 दिन में चुने गए हैं। एशिया कप में 243 से ज्यादा का स्ट्राइक रेट वैभव ने एशिया कप राइजिंग स्टार्स 2025 टी-20 में 4 मैचों में 59.75 की औसत और 243.87 के स्ट्राइक रेट से 239 रन बनाए थे। इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर 144 रन रहा। सूर्यवंशी ने इस सीरीज में एक शतक भी लगाया था। उन्होंने 20 चौके और 22 छक्के लगाए।