ग्लोबल पेटेंट रैंकिंग में टॉप-20 में पहुंची जियो:ऐसा करने वाली अकेली भारतीय टेक कंपनी बनी; 320 पायदान की छलांग लगाई
जियो प्लेटफॉर्म्स ने वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन की पेटेंट कोऑपरेशन ट्रीटी रैंकिंग में टॉप-20 में जगह बनाई है। कंपनी 2025 की सूची में 320 पायदान चढ़कर 20वें स्थान पर पहुंची है। जियो ग्लोबल टॉप-20 में जगह बनाने वाली अकेली भारतीय टेक इनोवेटर बन गई है। हुआवे, सैमसंग और एपल जैसी कंपनियों के ग्रुप में शामिल जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की टेक्नोलॉजी यूनिट है। इस नई रैंकिंग के बाद कंपनी अब हुआवे, सैमसंग, क्वालकॉम, एलजी, पैनासोनिक, नोकिया, गूगल, एपल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियों के ग्रुप में शामिल हो गई है। नेक्स्ट जनरेशन डिजिटल तकनीकों पर केंद्रित है पेटेंट फाइलिंग जियो की पेटेंट फाइलिंग नेक्स्ट जनरेशन डिजिटल तकनीकों पर केंद्रित है। इनमें मुख्य रूप से ये क्षेत्र शामिल हैं: इसके अलावा कंपनी सैटेलाइट कम्युनिकेशन और एजेंटिक AI की अगली दिशा ‘जियो ब्रेन’ जैसी उभरती तकनीकों पर भी काम कर रही है। आकाश अंबानी बोले- ये कई सालों की मेहनत का नतीजा इस उपलब्धि पर जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश एम. अंबानी ने कहा, “WIPO PCT रैंकिंग में जियो प्लेटफॉर्म्स का ग्लोबल टॉप-20 में आना हमारी डीप-टेक कंपनी बनने की दिशा में कई साल की मेहनत को दिखाता है। यह जियो में कई उन्नत तकनीकों पर हो रहे शानदार इनोवेशन का सबूत है, जो आने वाले सालों में और बढ़ेगा।” प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को समर्पित की उपलब्धि आकाश अंबानी ने आगे कहा कि वे इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन को समर्पित करते हैं। उनके अनुसार यह विजन भारत को दुनिया के लिए तकनीक का निर्माता, मालिक और निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि जियो भारत को ग्लोबल डीप-टेक पावरहाउस बनने की यात्रा में योगदान देकर गर्व महसूस करता है। 31 मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स ने 6,817 पेटेंट फाइल किए 31 मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स ने कुल 6,817 पेटेंट फाइल किए हैं। इनमें 2,393 पेटेंट भारत में और 4,424 पेटेंट विदेशी बाजारों में फाइल किए गए हैं। कंपनी के 1,009 पेटेंट अब तक वैश्विक स्तर पर मंजूर हो चुके हैं। इनमें 538 भारत में और 471 अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मिले हैं। जियो ने कहा है कि उसका इनोवेशन उन तकनीकों और प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिन्हें कंपनी ने बड़े पैमाने पर विकसित और कॉमर्शियलाइज किया है। कंपनी 5G/6G रेडियो, 5G/6G कोर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और एजेंटिक-AI की अगली दिशा- जियोब्रेन जैसी उभरती तकनीकों पर भी काम कर रही है। उपलब्धि भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़े बदलाव का संकेत जियो की यह उपलब्धि भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है। यह बदलाव केवल बड़े पैमाने पर तकनीक इस्तेमाल करने से आगे बढ़कर भारत में मूल तकनीक तैयार करने और उसे दुनिया तक ले जाने की दिशा में है।
टीएमसी बनाम बागी टीएमसी: कल्याण बनर्जी के खिलाफ काकोली घोष की 10 जून की नैतिक शिकायत पहुंची | न्यूज18
बागी टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार का कल्याण बनर्जी के खिलाफ लोकसभा एथिक्स पैनल को 10 जून का शिकायती पत्र मिला है। शिकायत में, काकोली “अपमानजनक शब्दों” के इस्तेमाल का आरोप लगा रही हैं, जो तृणमूल कांग्रेस के भीतर गहराती अंदरूनी कलह को एक नया मुद्दा बना रही है। यह शिकायत विद्रोही नेताओं और पार्टी के दिग्गजों के बीच सार्वजनिक टकराव को तेज कर रही है क्योंकि टीएमसी को कानूनी, राजनीतिक और संगठनात्मक उथल-पुथल का सामना करना पड़ रहा है। यह घटनाक्रम संसदीय आचरण, आंतरिक अनुशासन और क्या टीएमसी का गुटीय युद्ध अब पूरी तरह से संस्थागत मंचों पर फैल रहा है, पर सवाल उठाता है। -newsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 15 जून, 2026, 19:13 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)बंगाल राजनीति(टी)ब्रेकिंग न्यूज इंडिया(टी)सीएनएन-न्यूज18(टी)अपमानजनक शब्द(टी)नैतिकता शिकायत(टी)भारतीय राजनीति(टी)10 जून शिकायत पत्र(टी)काकोली कल्याण के खिलाफ शिकायत(टी)काकोली दस्तीदार(टी)काकोली घोष दस्तीदार(टी)काकोली विद्रोही टीएमसी एमपी(टी)काकोली टीएमसी(टी)कल्याण बनर्जी(टी)कल्याण बनर्जी टीएमसी(टी)लोक सभा शिकायत(टी)लोकसभा एथिक्स पैनल(टी)न्यूज18(टी)संसदीय आचरण(टी)राजनीतिक समाचार भारत(टी)टीएमसी(टी)टीएमसी संकट(टी)टीएमसी गुटीय युद्ध(टी)टीएमसी अंदरूनी कलह(टी)टीएमसी विद्रोही(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आलोचना के बीच संगठन की अपंजीकृत स्थिति का बचाव किया, खड़गे की आलोचना की
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन की अपंजीकृत स्थिति का बचाव करते हुए कहा कि हिंदू धर्म सहित कई संस्थाएं अपंजीकृत हैं। उन्होंने पंजीकरण की मांग को राजनीतिक नौटंकी कहकर खारिज कर दिया और कहा कि आरएसएस खुले तौर पर काम करता है और अपनी स्थापना के बाद से ही उसे चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। | आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने प्रियांक खड़गे को जवाब दिया: “कई चीजें अपंजीकृत हैं; हिंदुत्व पंजीकृत है। जिन्हें सरकार से धन की आवश्यकता है उन्हें खुद को पंजीकृत करने की आवश्यकता है; हम नहीं करते हैं। हम गुप्त नहीं हैं; सरकार जानती है कि हम मौजूद हैं” n18oc_breaking-newsn18oc_ Indian18oc_politicsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube
टीएमसी की पहचान की लड़ाई छिड़ गई है क्योंकि विद्रोही गुट का नई पार्टी में विलय हो गया है और वास्तविक टीएमसी स्थिति का दावा किया गया है
तृणमूल कांग्रेस की पहचान को लेकर कानूनी लड़ाई छिड़ गई है क्योंकि विद्रोही गुट एक छोटी पार्टी में विलय कर रहा है और असली टीएमसी होने का दावा कर रहा है। यह घटनाक्रम विलय की वैधता, पार्टी के नाम, प्रतीक और फंड के भविष्य और क्या विद्रोही गुट मूल पार्टी की पहचान पर दावा कर सकता है, इस पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। उम्मीद है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला खेमा दावों को चुनौती देगा, जिससे एक जटिल राजनीतिक और कानूनी टकराव पैदा होगा। यह विवाद अब आंतरिक विद्रोह से आगे बढ़ रहा है और संस्थागत क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है, जिसमें चुनाव आयोग, संसद और अदालतें संभावित रूप से मान्यता की लड़ाई में प्रमुख क्षेत्र बन रहे हैं। n18oc_ Indian18oc_politicsn18oc_plain-speakNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 15 जून, 2026, 19:06 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)बंगाल पॉलिटिक्स(टी)ब्रेकिंग न्यूज इंडिया(टी)सीएनएन-न्यूज18(टी)चुनाव आयोग(टी)भारतीय राजनीति(टी)ममता बनर्जी(टी)न्यूज18(टी)पार्टी फंड(टी)पार्टी का नाम विवाद(टी)पार्टी मान्यता(टी)राजनीतिक समाचार भारत(टी)राजनीतिक प्रतीक विवाद(टी)असली टीएमसी(टी)विद्रोही गुट का विलय(टी)छोटी पार्टी विलय(टी)टीएमसी(टी)टीएमसी संकट(टी)टीएमसी फंड्स(टी)टीएमसी पहचान की लड़ाई(टी)टीएमसी कानूनी लड़ाई(टी)टीएमसी विलय(टी)टीएमसी पार्टी चिन्ह(टी)टीएमसी विद्रोही गुट(टी)टीएमसी विद्रोह(टी)टीएमसी विभाजन(टी)टीएमसी प्रतीक(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति
आरएसएस के कार्यक्रम में तीन कुलपतियों के शामिल होने से केरल में राजनीतिक तूफान, मुख्यमंत्री ने की निंदा | #साफ बात
केरल में तीन कुलपतियों के आरएसएस कार्यक्रम में शामिल होने से राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है, जिसकी मुख्यमंत्री और विपक्षी नेताओं ने तीखी आलोचना की है। यह विवाद शैक्षणिक तटस्थता, संस्थागत स्वतंत्रता और विश्वविद्यालय स्थानों में राजनीतिक या वैचारिक संगठनों की भूमिका पर सवाल उठा रहा है। यह बहस सांप्रदायिक समूहों के साथ कांग्रेस पार्टी के पिछले गठबंधनों पर भी सवाल उठा रही है, जिससे केरल के राजनीतिक टकराव में एक और परत जुड़ रही है। जैसे-जैसे विवाद गहराता जा रहा है, ध्यान इस बात पर बना हुआ है कि क्या विश्वविद्यालय के नेताओं को वैचारिक कार्यक्रमों में भाग लेना चाहिए और अकादमिक जुड़ाव और राजनीतिक संबद्धता के बीच कहां रेखा खींची जानी चाहिए। n18oc_plain-speak n18oc_ Indian18oc_politicsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 15 जून, 2026, 19:04 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)शैक्षणिक स्वतंत्रता(टी)शैक्षणिक तटस्थता(टी)ब्रेकिंग न्यूज भारत(टी)कैंपस राजनीति(टी)मुख्यमंत्री आलोचना(टी)कांग्रेस(टी)कांग्रेस गठबंधन(टी)भारतीय राजनीति(टी)संस्थागत स्वतंत्रता(टी)केरल(टी)केरल सीएम(टी)केरल की राजनीति(टी)केरल के कुलपति(टी)न्यूज18(टी)विपक्षी नेता केरल(टी)राजनीतिक समाचार भारत(टी)राजनीतिक तूफान केरल(टी)आरएसएस कार्यक्रम(टी)आरएसएस पंक्ति केरल(टी)सांप्रदायिक समूह(टी)तीन कुलपति(टी)विश्वविद्यालय तटस्थता(टी)विश्वविद्यालय की राजनीति(टी)कुलपति आरएसएस कार्यक्रम में भाग लेते हैं(टी)कुलपति
एक्सक्लूसिव: बागी टीएमसी गुट ने एनसीपी (आई) के विलय के बाद ‘बंगाल का विकास’ लड़ाई की रणनीति शुरू की!
| एनसीपी (आई) के साथ विलय के बाद, बागी टीएमसी गुट एआईटीसी चुनाव चिह्न को लेकर अदालत जा रहा है। जनता का समर्थन हासिल करने के लिए, अलग हुए सांसदों ने रुकी हुई स्थानीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के समन्वय और तेजी से काम करने के लिए ‘बंगाल का विकास’ व्हाट्सएप ग्रुप लॉन्च किया n18oc_ Indian18oc_breaking-newsn18oc_politicsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube
बचपन के किस्से सुनाते हुए इमोशनल हुए महेश भट्ट:बीमार मां के बालों में सजाए थे जुगनू; बोले- जिंदगी भविष्य में नहीं इसी पल में है
सीनियर फिल्ममेकर और लेखक महेश भट्ट ने मुंबई में आयोजित कार्यक्रम ‘इन सर्च ऑफ ट्रुथ’ में जीवन के कई अनछुए पहलुओं पर बात की। वर्सोवा के आरडीएक्स स्टूडियो में स्क्रिप्ट राइटर और डायरेक्टर सुहृता दास के साथ हुए इस संवाद में उन्होंने अपने बचपन, करियर के संघर्षों और रिश्तों पर खुलकर चर्चा की। महेश भट्ट ने कहा कि लोग अक्सर अपनी जिंदगी को भविष्य के लिए टालते रहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि जीवन इसी पल और इसी सांस में है। इस कार्यक्रम में फिल्म निर्माण के अलावा मानसिक स्वास्थ्य और बच्चों के पालन-पोषण पर भी विचार साझा किए गए। राज खोसला से मिली थी शून्य से शुरुआत की सीख भट्ट ने अपने शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए डायरेक्टर राज खोसला की एक बात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज खोसला ने उनसे कहा था, “शून्य से शुरुआत करना एक बेहतरीन आंकड़ा है।” महेश भट्ट के मुताबिक, शून्य से शुरुआत करने में डरने की कोई बात नहीं है, बल्कि इस पर गर्व होना चाहिए क्योंकि हर बड़ी यात्रा की शुरुआत यहीं से होती है। उन्होंने बताया कि महज चार साल की उम्र में वे पहली बार सिनेमा की तरफ आकर्षित हुए थे और तभी से उनके भीतर कहानियां कहने की इच्छा जागी थी। बीमार मां के बालों में सजाए थे जुगनू बातचीत के दौरान महेश भट्ट अपनी मां को याद कर भावुक हो गए। उन्होंने बचपन का एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि एक बार उनकी मां काफी बीमार थीं। उन्हें हंसाने के लिए उन्होंने मां के बालों में जुगनू सजा दिए थे। उन्होंने कहा कि कला और बेहतरीन कहानियां अक्सर जीवन के ऐसे ही साधारण और मानवीय पलों से निकलती हैं। भट्ट ने माना कि उनकी ज्यादातर क्रिएटिविटी और फिल्में उनके निजी संघर्षों, असफलताओं और टूटे हुए दिल के अनुभवों का ही नतीजा हैं। पहले अलग दिखना चाहता था, अब लोगों से जुड़ना चाहता हूं अपने बचपन के विद्रोही स्वभाव पर बात करते हुए महेश भट्ट ने कहा कि एक समय था जब वे हमेशा भीड़ से अलग दिखना चाहते थे। लेकिन उम्र और अनुभव के साथ उन्हें समझ आया कि इंसान का असली विकास दूसरों से अलग होने में नहीं, बल्कि लोगों के साथ जुड़ने और जीवन को साझा करने में है। सफलता को लेकर उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि अगली कामयाबी हमें खुशी देगी, लेकिन संतुष्टि इसी वर्तमान समय में जीने से मिलती है। बच्चों के पालन-पोषण और युवाओं को दी सलाह कार्यक्रम के आखिरी हिस्से में एक सवाल-जवाब का सेशन रखा गया। इसमें आए छात्रों, थिएटर आर्टिस्ट्स और राइटर्स ने महेश भट्ट से कई सवाल पूछे। पेरेंटिंग पर जवाब देते हुए भट्ट ने कहा कि बच्चे माता-पिता के उपदेशों से नहीं, बल्कि उनके व्यवहार को देखकर सीखते हैं। इसलिए माता-पिता को बच्चों को सिर्फ निर्देश देने के बजाय उनकी बात को ध्यान से सुनना चाहिए। युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि असफलता से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सबसे बड़ी सीख अक्सर हार से ही मिलती है।
Maruti WagonR BioFlex Flex-Fuel Car Launched
नई दिल्ली18 मिनट पहले कॉपी लिंक मारुति सुजुकी ने आज (15 जून) भारत में पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार वैगनआर बायोफ्लेक्स लॉन्च कर दी है। नई वैगनआर पूरी तरह से E85 फ्यूल (85% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल) से चलने में सक्षम है। वैगनआर बायोफ्लेक्स को दो वैरिएंट में उतारा गया है। इसकी शुरुआती कीमत 7.24 लाख रुपए रखा गई है। कार फिलहाल टैक्सी और फ्लीट जैसे कमर्शियल सेक्टर के लोग खरीद सकेंगे। कमर्शियल मॉडल से ₹2.25 तक महंगा यह स्टैंडर्ड वैगनआर के टॉप वैरिएंट ZXi+ MT पर बेस्ड है और इसके डिजाइन में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन E85 फ्यूल के अनुकूल बनाने के लिए इसमें कई मैकेनिकल अपडेट्स किए गए हैं, इसलिए स्टैंडर्ड मॉडल से यह 86,000 रुपए महंगा है। वहीं, कमर्शियल सेगमेंट में पहले से मौजूद वैगनआर टूर H3 के मुकाबले फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन ₹1.35 लाख से ₹2.25 लाख तक महंगा पड़ेगा। वैगनआर टूर H3 की कीमत ₹4.99 लाख से ₹5.89 लाख के बीच है। कंपनी ने वैगनआर बायोफ्लेक्स के प्रोडक्शन मॉडल को पहल 4 जून को पहली बार पेश किया था। मारुति वैगनआर बायो फ्लेक्स स्टैंडर्ड मॉडल से ₹86,000 महंगा वैरिएंट वैगनआर बायो फ्लेक्स वैगनआर ZXi+ MT अंतर नॉन-मेटालिक पेंट ₹7.24 लाख ₹6.38 लाख + ₹86,000 मेटालिक पेंट ₹7.24 लाख ₹6.38 लाख + ₹86,000 डुअल-टोन पेंट – ₹6.49 लाख एक्सटीरियर: रेगुलर मॉडल जैसा ही बॉक्सी लुक, ‘फ्लेक्स फ्यूल’ की बैजिंग नई वैगन-आर फ्लेक्स फ्यूल का ओवरऑल डिजाइन स्टैंडर्ड मॉडल जैसा ही है, लेकिन इसे एक अलग पहचान देने के लिए कुछ कॉस्मेटिक बदलाव किए गए हैं। रेगुलर मॉडल से इस स्पेशल वैरिएंट को अलग करने के लिए कंपनी ने इसकी बॉडी पर जगह-जगह ‘Flex Fuel’ के ग्राफिक्स दिए हैं। टेलगेट पर एक छोटा ‘Flex Fuel’ का क्रोम बैज भी लगाया है। फ्रंट प्रोफाइल: सामने बड़े साइज में चौकोर हैलोजन हेडलैंप्स और एक चौड़ा बोनट दिया गया है। हेडलैंप्स के बीच में हॉरिजोंटल ग्रिल है, जिसमें सिंगल क्रोम स्लेट और हनीकॉम्ब डिटेलिंग दी गई है, जो इसे पहले से ज्यादा मॉडर्न लुक देती है। फ्रंट बंपर पर बड़ा एयर डैम है और काले घेरे के बीच फॉग लैंप्स को फिट किया गया है। साइड प्रोफाइल: साइड से कार का पारंपरिक ‘बॉक्सी और टॉल-बॉय’ शेप नजर आता है। कार में बड़े साइज की खिड़कियां हैं, जिससे केबिन अंदर से काफी खुला-खुला और हवादार महसूस होता है। स्मूद राइडिंग के लिए इसमें 14-इंच के अलॉय व्हील्स हैं। इसके अलावा, कार के सी-पिलर पर ब्लैक इंसर्ट का इस्तेमाल किया गया है जो इसे ‘फ्लोटिंग रूफ’ जैसा ट्रेंडी इफेक्ट देता है। रियर प्रोफाइल: कार का पिछला हिस्सा काफी फ्लैट और सिंपल है। यहां सिग्नेचर स्टाइल वाले बड़े वर्टिकल (खड़े) टेललैंप्स दिए गए हैं। टेलगेट (डिक्की के दरवाजे) पर नंबर प्लेट लगाने के लिए एक खांचा (कास्टिंग) बना है, जिसके ठीक ऊपर प्रीमियम लुक देने के लिए क्रोम गार्निश की पट्टी दी गई है। साथ ही रियर बंपर में भी एक ब्लैक इंसर्ट मिलता है। इंटीरियर: डुअल-टोन थीम के साथ मॉडर्न केबिन एक्सटीरियर की तरह नई वैगन-आर फ्लेक्स फ्यूल का अंदरूनी लेआउट भी इसके स्टैंडर्ड मॉडल जैसा रखा गया है। हालांकि, केबिन को ज्यादा प्रैक्टिकल और आरामदायक बनाने के लिए इसमें कई खास फीचर्स दिए गए हैं। डैशबोर्ड और थीम: कार में थोड़ा उठा हुआ डैशबोर्ड है, जो ड्राइवर को अच्छी फ्रंट विजिबिलिटी देता है। केबिन को प्रीमियम लुक देने के लिए इसमें ब्लैक और बेज कलर की डुअल टोन थीम दी गई है। डैशबोर्ड के बीच में टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम है। इसके दोनों तरफ वर्टिकल (खड़े शेप वाले) AC वेंट्स हैं। कंट्रोल्स और चार्जिंग: इंफोटेनमेंट सिस्टम के नीचे मैन्युअल AC कंट्रोल्स दिए गए हैं। मोबाइल और अन्य गैजेट्स को चार्ज करने के लिए नीचे चार्जिंग पोर्ट और 12-वोल्ट का पावर सॉकेट भी मिलता है। स्टीयरिंग व्हील और कंसोल: 3-स्पोक स्टीयरिंग व्हील पर ऑडियो और मीडिया कंट्रोल बटन (माउंटेड कंट्रोल्स) मिलते हैं। इसके सामने एनालॉग इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर है, जो MID (मल्टी इंफॉर्मेशन डिस्प्ले) स्क्रीन के साथ आता है, जहां गाड़ी से जुड़ी जरूरी जानकारियां दिखती हैं। सिटिंग और स्पेस: केबिन में फिक्स्ड हेडरेस्ट के साथ पतली फ्रंट सीटें हैं। टॉल-बॉय डिजाइन की वजह से इसकी पिछली (रियर) सीट इस सेगमेंट की दूसरी कारों के मुकाबले ज्यादा स्पेशियस है। ऊंचे कद वाले पैसेंजर्स के लिए भी इसमें हेडरूम और नीरूम की कमी नहीं है, जिससे लंबा सफर आरामदायक रहता है। फीचर्स: 7-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम नई वैगन-आर फ्लेक्स फ्यूल एक बेहतरीन और फीचर-लोडेड पैकेज है। इसमें 7-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम है, जो वायर्ड एंड्रॉइड ऑटो और एपल कारप्ले को सपोर्ट करता है। इसमें 4-स्पीकर वाला साउंड सिस्टम भी है। कनेक्टिविटी के लिए सिस्टम में ही इनबिल्ट नेविगेशन की सुविधा है। केबिन को ठंडा रखने के लिए मैनुअल AC, स्टीयरिंग पर ही ऑडियो कंट्रोल्स (स्टीयरिंग माउंटेड कंट्रोल्स) और चारों दरवाजों पर पावर विंडोज दी गई हैं। ड्राइविंग को आरामदायक बनाने के लिए टिल्ट एडजस्टेबल स्टीयरिंग व्हील और मैनुअल डे/नाइट IRVM दिया गया है। वहीं, इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल और पावर फोल्डिंग ORVMs मिलते हैं। परफॉर्मेंस: 1.2-लीटर फ्लेक्स-फ्यूल पेट्रोल इंजन फ्लेक्स फ्यूल वैगन-आर में परफॉर्मेंस के लिए एक नया 1.2-लीटर फ्लेक्स-फ्यूल पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो कि E85 एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के साथ कंपेटिबल है। इस बदलाव के कारण स्पेसिफिकेशन्स में थोड़ा अंतर आया है, जो रेगुलर 1.2-लीटर पेट्रोल इंजन थोड़ी ज्यादा पावर और टॉर्क देता है। हालांकि कंपनी ने फिलहाल नंबर शेयर नहीं किए हैं। इस इंजन के साथ फिलहाल 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स दिया जाएगा। सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग और ईएसपी जैसे एडवांस्ड फीचर्स कार में सेफ्टी के लिए 6 एयरबैग्स, रियर पार्किंग सेंसर्स, सीटबेल्ट रिमाइंडर, स्पीड सेंसिटिव डोर लॉक, गाड़ी को फिसलने से बचाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ESP) और बेहतरीन ब्रेकिंग के लिए ABS के साथ EBD, चढ़ाई पर कार को पीछे लुढ़कने से रोकने के लिए इसमें हिल होल्ड असिस्ट (HHA) जैसे फीचर्स हैं। ———————— ये खबर भी पढ़ें… 85% इथेनॉल मिक्स वाला फ्लेक्स फ्यूल लॉन्च: दिल्ली में पहला पंप खुला; पेट्रोल से 20 रुपए सस्ता मिलेगा, कीमत ₹82.12 प्रति लीटर 85% एथेनॉल मिक्स वाला E85 फ्यूल दिल्ली में आधिकारिक तौर पर लॉन्च हो गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इंडियन ऑयल (IOC) के पूसा रोड आउटलेट पर दिल्ली के पहले E85 फ्यूल डिस्पेंसिंग स्टेशन का उद्घाटन
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नई दिल्ली13 मिनट पहले कॉपी लिंक मारुति सुजुकी ने आज (15 जून) भारत में पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार वैगनआर बायोफ्लेक्स लॉन्च कर दी है। नई वैगनआर पूरी तरह से E85 फ्यूल (85% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल) से चलने में सक्षम है। वैगनआर बायोफ्लेक्स को दो वैरिएंट में उतारा गया है। इसकी शुरुआती कीमत 7.24 लाख रुपए रखा गई है। कार फिलहाल टैक्सी और फ्लीट जैसे कमर्शियल सेक्टर के लोग खरीद सकेंगे। कमर्शियल मॉडल से ₹2.25 तक महंगा यह स्टैंडर्ड वैगनआर के टॉप वैरिएंट ZXi+ MT पर बेस्ड है और इसके डिजाइन में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन E85 फ्यूल के अनुकूल बनाने के लिए इसमें कई मैकेनिकल अपडेट्स किए गए हैं, इसलिए स्टैंडर्ड मॉडल से यह 86,000 रुपए महंगा है। वहीं, कमर्शियल सेगमेंट में पहले से मौजूद वैगनआर टूर H3 के मुकाबले फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन ₹1.35 लाख से ₹2.25 लाख तक महंगा पड़ेगा। वैगनआर टूर H3 की कीमत ₹4.99 लाख से ₹5.89 लाख के बीच है। कंपनी ने वैगनआर बायोफ्लेक्स के प्रोडक्शन मॉडल को पहल 4 जून को पहली बार पेश किया था। मारुति वैगनआर बायो फ्लेक्स स्टैंडर्ड मॉडल से ₹86,000 महंगा वैरिएंट वैगनआर बायो फ्लेक्स वैगनआर ZXi+ MT अंतर नॉन-मेटालिक पेंट ₹7.24 लाख ₹6.38 लाख + ₹86,000 मेटालिक पेंट ₹7.24 लाख ₹6.38 लाख + ₹86,000 डुअल-टोन पेंट – ₹6.49 लाख परफॉर्मेंस: 1.2-लीटर फ्लेक्स-फ्यूल पेट्रोल इंजन फ्लेक्स फ्यूल वैगन-आर में परफॉर्मेंस के लिए एक नया 1.2-लीटर फ्लेक्स-फ्यूल पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो कि E85 एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के साथ कंपेटिबल है। E85 फ्लेक्स फ्यूल को झेलने के लिए इंजन में कई मैकेनिकल बदलाव किए गए हैं। कंपनी ने इसमें अपग्रेडेड फ्यूल इंजेक्टर्स, नया फ्यूल पंप, नई फ्यूल लाइन्स, री-कैलिब्रेटेड ECU और एक स्पेशल इथेनॉल सेंसर लगाया है। इस बदलाव के कारण स्पेसिफिकेशन्स में थोड़ा अंतर आया है, जो रेगुलर 1.2-लीटर पेट्रोल इंजन थोड़ी ज्यादा पावर और टॉर्क देता है। हालांकि कंपनी ने फिलहाल नंबर शेयर नहीं किए हैं। इस इंजन के साथ फिलहाल 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स दिया जाएगा। वहीं, माइलेज की बात करें तो कंपनी ने अभी ऑफिशियल आंकड़े जारी नहीं किए हैं। हालांकि, हाल ही में हुए फ्यूल टेस्ट के मुताबिक, E85 फ्यूल पर चलने से माइलेज में करीब 24% तक की गिरावट देखी जा सकती है। स्टैंडर्ड पेट्रोल वैगनआर मैनुअल में 23.56kmpl का माइलेज देती है। एक्सटीरियर: रेगुलर मॉडल जैसा ही बॉक्सी लुक, ‘फ्लेक्स फ्यूल’ की बैजिंग नई वैगन-आर फ्लेक्स फ्यूल का ओवरऑल डिजाइन स्टैंडर्ड मॉडल जैसा ही है, लेकिन इसे एक अलग पहचान देने के लिए कुछ कॉस्मेटिक बदलाव किए गए हैं। रेगुलर मॉडल से इस स्पेशल वैरिएंट को अलग करने के लिए कंपनी ने इसकी बॉडी पर जगह-जगह ‘Flex Fuel’ के ग्राफिक्स दिए हैं। टेलगेट पर एक छोटा ‘Flex Fuel’ का क्रोम बैज भी लगाया है। फ्रंट प्रोफाइल: सामने बड़े साइज में चौकोर हैलोजन हेडलैंप्स और एक चौड़ा बोनट दिया गया है। हेडलैंप्स के बीच में हॉरिजोंटल ग्रिल है, जिसमें सिंगल क्रोम स्लेट और हनीकॉम्ब डिटेलिंग दी गई है, जो इसे पहले से ज्यादा मॉडर्न लुक देती है। फ्रंट बंपर पर बड़ा एयर डैम है और काले घेरे के बीच फॉग लैंप्स को फिट किया गया है। साइड प्रोफाइल: साइड से कार का पारंपरिक ‘बॉक्सी और टॉल-बॉय’ शेप नजर आता है। कार में बड़े साइज की खिड़कियां हैं, जिससे केबिन अंदर से काफी खुला-खुला और हवादार महसूस होता है। स्मूद राइडिंग के लिए इसमें 14-इंच के अलॉय व्हील्स हैं। इसके अलावा, कार के सी-पिलर पर ब्लैक इंसर्ट का इस्तेमाल किया गया है जो इसे ‘फ्लोटिंग रूफ’ जैसा ट्रेंडी इफेक्ट देता है। रियर प्रोफाइल: कार का पिछला हिस्सा काफी फ्लैट और सिंपल है। यहां सिग्नेचर स्टाइल वाले बड़े वर्टिकल (खड़े) टेललैंप्स दिए गए हैं। टेलगेट (डिक्की के दरवाजे) पर नंबर प्लेट लगाने के लिए एक खांचा (कास्टिंग) बना है, जिसके ठीक ऊपर प्रीमियम लुक देने के लिए क्रोम गार्निश की पट्टी दी गई है। साथ ही रियर बंपर में भी एक ब्लैक इंसर्ट मिलता है। इंटीरियर: डुअल-टोन थीम के साथ मॉडर्न केबिन एक्सटीरियर की तरह नई वैगन-आर फ्लेक्स फ्यूल का अंदरूनी लेआउट भी इसके स्टैंडर्ड मॉडल जैसा रखा गया है। हालांकि, केबिन को ज्यादा प्रैक्टिकल और आरामदायक बनाने के लिए इसमें कई खास फीचर्स दिए गए हैं। डैशबोर्ड और थीम: कार में थोड़ा उठा हुआ डैशबोर्ड है, जो ड्राइवर को अच्छी फ्रंट विजिबिलिटी देता है। केबिन को प्रीमियम लुक देने के लिए इसमें ब्लैक और बेज कलर की डुअल टोन थीम दी गई है। डैशबोर्ड के बीच में टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम है। इसके दोनों तरफ वर्टिकल (खड़े शेप वाले) AC वेंट्स हैं। कंट्रोल्स और चार्जिंग: इंफोटेनमेंट सिस्टम के नीचे मैन्युअल AC कंट्रोल्स दिए गए हैं। मोबाइल और अन्य गैजेट्स को चार्ज करने के लिए नीचे चार्जिंग पोर्ट और 12-वोल्ट का पावर सॉकेट भी मिलता है। स्टीयरिंग व्हील और कंसोल: 3-स्पोक स्टीयरिंग व्हील पर ऑडियो और मीडिया कंट्रोल बटन (माउंटेड कंट्रोल्स) मिलते हैं। इसके सामने एनालॉग इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर है, जो MID (मल्टी इंफॉर्मेशन डिस्प्ले) स्क्रीन के साथ आता है, जहां गाड़ी से जुड़ी जरूरी जानकारियां दिखती हैं। सिटिंग और स्पेस: केबिन में फिक्स्ड हेडरेस्ट के साथ पतली फ्रंट सीटें हैं। टॉल-बॉय डिजाइन की वजह से इसकी पिछली (रियर) सीट इस सेगमेंट की दूसरी कारों के मुकाबले ज्यादा स्पेशियस है। ऊंचे कद वाले पैसेंजर्स के लिए भी इसमें हेडरूम और नीरूम की कमी नहीं है, जिससे लंबा सफर आरामदायक रहता है। फीचर्स: 7-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम नई वैगन-आर फ्लेक्स फ्यूल एक बेहतरीन और फीचर-लोडेड पैकेज है। इसमें 7-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम है, जो वायर्ड एंड्रॉइड ऑटो और एपल कारप्ले को सपोर्ट करता है। इसमें 4-स्पीकर वाला साउंड सिस्टम भी है। कनेक्टिविटी के लिए सिस्टम में ही इनबिल्ट नेविगेशन की सुविधा है। केबिन को ठंडा रखने के लिए मैनुअल AC, स्टीयरिंग पर ही ऑडियो कंट्रोल्स (स्टीयरिंग माउंटेड कंट्रोल्स) और चारों दरवाजों पर पावर विंडोज दी गई हैं। ड्राइविंग को आरामदायक बनाने के लिए टिल्ट एडजस्टेबल स्टीयरिंग व्हील और मैनुअल डे/नाइट IRVM दिया गया है। वहीं, इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल और पावर फोल्डिंग ORVMs मिलते हैं। सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग और ईएसपी जैसे एडवांस्ड फीचर्स कार में सेफ्टी के लिए 6 एयरबैग्स, रियर पार्किंग सेंसर्स, सीटबेल्ट रिमाइंडर, स्पीड सेंसिटिव डोर लॉक, गाड़ी को फिसलने से बचाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ESP) और बेहतरीन ब्रेकिंग के लिए ABS के साथ EBD, चढ़ाई
Once a waiter and sleeping on the streets, he is now a successful filmmaker honored by France.
Hindi News Entertainment Once A Waiter And Sleeping On The Streets, He Is Now A Successful Filmmaker Honored By France. मुंबई2 मिनट पहले कॉपी लिंक फिल्म निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्यप अपनी नई फिल्म बंदर को लेकर चर्चा में हैं।- फाइल फोटो मशहूर फिल्म निर्माता-निर्देशक और पटकथा लेखक अनुराग कश्यप आज सिनेमा जगत के स्थापित चेहरे हैं। लेकिन उनका करिअर गंभीर चुनौतियों से भरा रहा है। फिलहाल वे अपनी नई फिल्म “बंदर’ को लेकर चर्चा में हैं। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी…… लीक से हटकर फिल्में बनाने के लिए प्रख्यात अनुराग का जीवन खुद किसी सिनेमाई पटकथा जैसा है। गोरखपुर में 10 सितंबर 1972 को जन्मे अनुराग वैज्ञानिक बनना चाहते थे। दिल्ली के हंसराज कॉलेज में उन्होंने जूलॉजी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया, लेकिन यहां हॉस्टल में रहते हुए उन पर थिएटर और फिल्मों का जुनून सवार हो गया। इसी जुनून ने उनकी राह बदल दी। संघर्ष – सड़कों पर सोए, अवसाद में दो बार दिल का दौरा पड़ा फिल्म निर्माण का सपना लेकर 21 वर्ष के अनुराग मुम्बई पहुंचे तो जेब में महज 5 हजार रुपए थे। महीनों तक वे सड़क की बेंचों पर सोए, छात्रावासों में खाना खाया। फिल्मों से जुड़ने के लिए पृथ्वी थिएटर में वेटर की नौकरी की। 1995 में उन्होंने ऑटो नारायण और जयते फिल्मों की कहानी लिखी, लेकिन दोनों रिलीज ही नहीं हो पाईं। फिल्म निर्माण में भी पहली फिल्म “पांच’ सेंसर बोर्ड की आपत्ति के चलते रिलीज नहीं हई, जबकि ब्लैक फ्राइडे भी तीन साल तक अटकी रही। कोरोना काल में कश्यप सुकेतु मेहता की किताब मैक्सिमम सिटी पर फिल्म बना रहे थे लेकिन बीच में ही नेटफ्लिक्स ने प्रोजेक्ट रद्द कर दिया। इससे उन्हें गंभीर आर्थिक संकट झेलना पड़ा। अवसाद के कारण उन्हें दो बार दिल के दौरे तक पड़े। सफलता – सत्या में मिला ब्रेक, गैंग्स ऑफ वासेपुर से हुए हिट कश्यप को 1998 में पहला बड़ा ब्रेक रामगोपाल वर्मा की “सत्या’ में को-राइटर के तौर पर मिला। निर्देशक के तौर पर वर्ष 2009 टर्निंग प्वाइंट रहा, जब उनकी “देव डी’ बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई और “गुलाल’ ने खासी प्रशंसा बटोरी। इससे उनकी पहचान लीक से हट कर फिल्में बनाने वाले निर्देशक के तौर पर मजबूत हुई। 2012 में “गैंग्स ऑफ वासेपुर’ की बड़ी सफलता ने अनुराग को बॉलीवुड के नामचीन निर्माता-निर्देशकों की कतार में स्थापित कर दिया। अनुराग “क्वीन’, “लंच बॉक्स”, “उड़ान’, “सुपर 30′ जैसी बेहतरीन फिल्मों समेत करीब 120 फिल्मों का निर्माण व निर्देशन कर चुके हैं। 46 फिल्मों में उन्होंने अभिनय भी किया है। उन्हें फिल्मफेयर और आईआईएफए समेत कई पुरस्कार मिल चुके। फ्रांस सरकार ने उन्हें अपने सर्वोच्च सांस्कृतिक सम्मान से नवाजा है । दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔







