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Once a waiter and sleeping on the streets, he is now a successful filmmaker honored by France.

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मुंबई2 मिनट पहले

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फिल्म निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्यप अपनी नई फिल्म बंदर को लेकर चर्चा में हैं।- फाइल फोटो

मशहूर फिल्म निर्माता-निर्देशक और पटकथा लेखक अनुराग कश्यप आज सिनेमा जगत के स्थापित चेहरे हैं। लेकिन उनका करिअर गंभीर चुनौतियों से भरा रहा है। फिलहाल वे अपनी नई फिल्म “बंदर’ को लेकर चर्चा में हैं। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी……

लीक से हटकर फिल्में बनाने के लिए प्रख्यात अनुराग का जीवन खुद किसी सिनेमाई पटकथा जैसा है। गोरखपुर में 10 सितंबर 1972 को जन्मे अनुराग वैज्ञानिक बनना चाहते थे। दिल्ली के हंसराज कॉलेज में उन्होंने जूलॉजी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया, लेकिन यहां हॉस्टल में रहते हुए उन पर थिएटर और फिल्मों का जुनून सवार हो गया। इसी जुनून ने उनकी राह बदल दी।

संघर्ष – सड़कों पर सोए, अवसाद में दो बार दिल का दौरा पड़ा

फिल्म निर्माण का सपना लेकर 21 वर्ष के अनुराग मुम्बई पहुंचे तो जेब में महज 5 हजार रुपए थे। महीनों तक वे सड़क की बेंचों पर सोए, छात्रावासों में खाना खाया। फिल्मों से जुड़ने के लिए पृथ्वी थिएटर में वेटर की नौकरी की। 1995 में उन्होंने ऑटो नारायण और जयते फिल्मों की कहानी लिखी, लेकिन दोनों रिलीज ही नहीं हो पाईं। फिल्म निर्माण में भी पहली फिल्म “पांच’ सेंसर बोर्ड की आपत्ति के चलते रिलीज नहीं हई, जबकि ब्लैक फ्राइडे भी तीन साल तक अटकी रही। कोरोना काल में कश्यप सुकेतु मेहता की किताब मैक्सिमम सिटी पर फिल्म बना रहे थे लेकिन बीच में ही नेटफ्लिक्स ने प्रोजेक्ट रद्द कर दिया। इससे उन्हें गंभीर आर्थिक संकट झेलना पड़ा। अवसाद के कारण उन्हें दो बार दिल के दौरे तक पड़े।

सफलता – सत्या में मिला ब्रेक, गैंग्स ऑफ वासेपुर से हुए हिट

कश्यप को 1998 में पहला बड़ा ब्रेक रामगोपाल वर्मा की “सत्या’ में को-राइटर के तौर पर मिला। निर्देशक के तौर पर वर्ष 2009 टर्निंग प्वाइंट रहा, जब उनकी “देव डी’ बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई और “गुलाल’ ने खासी प्रशंसा बटोरी। इससे उनकी पहचान लीक से हट कर फिल्में बनाने वाले निर्देशक के तौर पर मजबूत हुई। 2012 में “गैंग्स ऑफ वासेपुर’ की बड़ी सफलता ने अनुराग को बॉलीवुड के नामचीन निर्माता-निर्देशकों की कतार में स्थापित कर दिया। अनुराग “क्वीन’, “लंच बॉक्स”, “उड़ान’, “सुपर 30′ जैसी बेहतरीन फिल्मों समेत करीब 120 फिल्मों का निर्माण व निर्देशन कर चुके हैं। 46 फिल्मों में उन्होंने अभिनय भी किया है।

उन्हें फिल्मफेयर और आईआईएफए समेत कई पुरस्कार मिल चुके। फ्रांस सरकार ने उन्हें अपने सर्वोच्च सांस्कृतिक सम्मान से नवाजा है ।

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मशहूर फिल्म निर्माता-निर्देशक और पटकथा लेखक अनुराग कश्यप आज सिनेमा जगत के स्थापित चेहरे हैं। लेकिन उनका करिअर गंभीर चुनौतियों से भरा रहा है। फिलहाल वे अपनी नई फिल्म “बंदर’ को लेकर चर्चा में हैं। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी……

लीक से हटकर फिल्में बनाने के लिए प्रख्यात अनुराग का जीवन खुद किसी सिनेमाई पटकथा जैसा है। गोरखपुर में 10 सितंबर 1972 को जन्मे अनुराग वैज्ञानिक बनना चाहते थे। दिल्ली के हंसराज कॉलेज में उन्होंने जूलॉजी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया, लेकिन यहां हॉस्टल में रहते हुए उन पर थिएटर और फिल्मों का जुनून सवार हो गया। इसी जुनून ने उनकी राह बदल दी।

संघर्ष – सड़कों पर सोए, अवसाद में दो बार दिल का दौरा पड़ा

फिल्म निर्माण का सपना लेकर 21 वर्ष के अनुराग मुम्बई पहुंचे तो जेब में महज 5 हजार रुपए थे। महीनों तक वे सड़क की बेंचों पर सोए, छात्रावासों में खाना खाया। फिल्मों से जुड़ने के लिए पृथ्वी थिएटर में वेटर की नौकरी की। 1995 में उन्होंने ऑटो नारायण और जयते फिल्मों की कहानी लिखी, लेकिन दोनों रिलीज ही नहीं हो पाईं। फिल्म निर्माण में भी पहली फिल्म “पांच’ सेंसर बोर्ड की आपत्ति के चलते रिलीज नहीं हई, जबकि ब्लैक फ्राइडे भी तीन साल तक अटकी रही। कोरोना काल में कश्यप सुकेतु मेहता की किताब मैक्सिमम सिटी पर फिल्म बना रहे थे लेकिन बीच में ही नेटफ्लिक्स ने प्रोजेक्ट रद्द कर दिया। इससे उन्हें गंभीर आर्थिक संकट झेलना पड़ा। अवसाद के कारण उन्हें दो बार दिल के दौरे तक पड़े।

सफलता – सत्या में मिला ब्रेक, गैंग्स ऑफ वासेपुर से हुए हिट

कश्यप को 1998 में पहला बड़ा ब्रेक रामगोपाल वर्मा की “सत्या’ में को-राइटर के तौर पर मिला। निर्देशक के तौर पर वर्ष 2009 टर्निंग प्वाइंट रहा, जब उनकी “देव डी’ बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई और “गुलाल’ ने खासी प्रशंसा बटोरी। इससे उनकी पहचान लीक से हट कर फिल्में बनाने वाले निर्देशक के तौर पर मजबूत हुई। 2012 में “गैंग्स ऑफ वासेपुर’ की बड़ी सफलता ने अनुराग को बॉलीवुड के नामचीन निर्माता-निर्देशकों की कतार में स्थापित कर दिया। अनुराग “क्वीन’, “लंच बॉक्स”, “उड़ान’, “सुपर 30′ जैसी बेहतरीन फिल्मों समेत करीब 120 फिल्मों का निर्माण व निर्देशन कर चुके हैं। 46 फिल्मों में उन्होंने अभिनय भी किया है।

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