Monday, 14 Sep 2026 | 03:43 PM

Trending :

ईरान में अमेरिकी पायलट के रेस्क्यू का वीडियो सामने आया:बचने के लिए 2 दिन पहाड़ में छिपा रहा; अप्रैल में गिरा था F-15 विमान पाकिस्तान ने आतंकी मसूद-अजहर पर इनाम बढ़ाकर 70 लाख किया:भगोड़ा घोषित किया; अक्टूबर में FATF बैठक होनी है, उससे पहले कार्रवाई की हनुमान अंश ने 38वें दिन कमाए 22 करोड़:कुल कलेक्श 268 करोड़, मिर्जापुर-हैवान से ज्यादा हो रही कमाई; अब मेकर्स तुलसीदास पर बनाएंगे फिल्म राम बोला हनुमान अंश ने 38वें दिन कमाए 22 करोड़:कुल कलेक्श 268 करोड़, मिर्जापुर-हैवान से ज्यादा हो रही कमाई; अब मेकर्स तुलसीदास पर बनाएंगे फिल्म राम बोला लालबागचा राजा के दरबार में पहुंचे विद्युत जामवाल:आरती के साथ शंख और डमरू बजाकर लिया बप्पा का आशीर्वाद Sohail Khan Ganpati Puja | Salman Khan Arpita Alvira Visit Mumbai
EXCLUSIVE

Air India Basic Fare Launched

Air India Basic Fare Launched

Hindi News Business Air India Basic Fare Launched | No Free Meals, Chai Coffee Complimentary नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक एअर इंडिया ने चुनिंदा घरेलू रूट्स पर एक नई ‘बेसिक’ किराया कैटेगरी की शुरुआत की है। जिसके तहत यात्रियों को कम कीमत में सफर करने का ऑप्शन मिलेगा। इकोनॉमी क्लास टिकट में मुफ्त भोजन शामिल नहीं होगा, हालांकि यात्रियों को मुफ्त चाय या कॉफी दी जाएगी। एयरलाइन ने एक बयान में बताया कि इस किराए को अभी ट्रायल बेसिस पर शुरू किया गया है, जो उन यात्रियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जो कम खर्च में यात्रा करना चाहते हैं। लगेज के लिए मिलेगी 15 किलोग्राम की लिमिट एअर इंडिया की इस नई ‘बेसिक’ किराया कैटेगरी को चुनने वाले यात्रियों के लिए सामान ले जाने के नियम भी तय किए गए हैं। इस कैटेगरी के तहत यात्रा करने वाले पैसेंजर्स अपने साथ 15 किलोग्राम तक का चेक-इन बैगेज ले जा सकेंगे। इसके अलावा, उन्हें 7 किलोग्राम तक का केबिन बैगेज अपने साथ एयरक्राफ्ट के अंदर ले जाने की अनुमति होगी। 24 घंटे पहले बुक कर सकेंगे अपनी पसंद का भोजन भले ही इस बेसिक किराए में मुफ्त खाना शामिल नहीं है, लेकिन यात्रियों के पास खाना खरीदने का ऑप्शन रहेगा। बेसिक फेयर बुक करने वाले यात्री फ्लाइट के रवाना होने से 24 घंटे पहले तक अपने लिए भोजन प्री-परचेज कर सकते हैं। यात्रियों को भोजन के लिए वेजिटेरियन, नॉन वेजिटेरियन, जैन और डायबिटिक मील्स के ऑप्शन भी दिए जाएंगे। फ्लाइट री-शेड्यूल होने पर रिफंड या ट्रांसफर की सुविधा एअर इंडिया ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भोजन के रिफंड और ट्रांसफर को लेकर भी नियम स्पष्ट किए हैं। एयरलाइन के मुताबिक, यदि फ्लाइट के शेड्यूल में कोई बदलाव होता है या यात्री को किसी दूसरी फ्लाइट में शिफ्ट किया जाता है, तो पैसेंजर के पहले से खरीदा गया भोजन नई फ्लाइट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। यदि किसी स्थिति में भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता है, तो यात्री को उसके पैसे रिफंड कर दिए जाएंगे। एयरलाइन के पुराने किराए के ऑप्शन भी रहेंगे मौजूद एयरलाइन ने साफ किया है कि इस नए ऑप्शन के आने के बाद भी ग्राहकों के पास पुराने किरायों के विकल्प भी मौजूद रहेंगे। यात्री पहले की तरह ही एयरलाइन की मौजूदा वैल्यू, क्लासिक और फ्लेक्स किराया कैटेगरी को बुक करना जारी रख सकते हैं। इन तीनों ही पुरानी कैटेगरी में यात्रियों को पहले की तरह मुफ्त भोजन यानी कॉम्प्लिमेंट्री मील्स की सुविधा भी मिलती रहेगी। इन माध्यमों से की जा सकती है बुकिंग एअर इंडिया का कहना है कि यह बेसिक किराया वर्तमान में केवल कुछ चुनिंदा घरेलू रूट्स पर ही उपलब्ध है। जो यात्री इस किराए के तहत टिकट बुक करना चाहते हैं, वे एअर इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल एप, कॉन्टैक्ट सेंटर और एयरपोर्ट टिकटिंग ऑफिसेज के माध्यम से अपनी बुकिंग करा सकते हैं। फीडबैक के बाद लिया जाएगा फैसला एअर इंडिया के अनुसार, यह पूरी कवायद उन यात्रियों के लिए है जो किफायती यात्रा को प्राथमिकता देते हैं। एयरलाइन इस पायलट फेज (ट्रायल) के दौरान ग्राहकों से मिलने वाले रिपॉन्स और उनके फीडबैक का बारीकी से आकलन करेगी। इस ट्रायल से मिलने वाले अनुभवों और ग्राहकों की प्रतिक्रिया की समीक्षा करने के बाद ही कंपनी इस बेसिक किराया सर्विस को भविष्य में स्थायी रूप से लागू करने या आगे बढ़ाने पर कोई अंतिम फैसला लेगी। क्या होता है पायलट फेज या ट्रायल बेसिस? जब कोई कंपनी अपनी किसी नई सर्विस या प्रोडक्ट को पूरे बाजार में बड़े पैमाने पर लॉन्च करने से पहले कुछ चुनिंदा जगहों या रूट्स पर सीमित समय के लिए शुरू करती है, तो उसे पायलट फेज या ट्रायल कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों का रिस्पॉन्स देखना और आनी वाली कमियों को सुधारना होता है। ये खबर भी पढ़ें… बिगबास्केट के CEO हरि मेनन ने इस्तीफा दिया: अमेजन के अमित नंदा उनकी जगह लेंगे, टाटा ग्रुप की कंपनी में बड़ा फेरबदल टाटा के ओनरशिप वाले ऑनलाइन ग्रॉसरी प्लेटफॉर्म बिगबास्केट के को-फाउंडर हरि मेनन ने चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने 16 जून को इसकी आधिकारिक घोषणा की। ई-कॉमर्स सेक्टर की दिग्गज कंपनी अमेजन में 11 साल से ज्यादा समय बिता चुके अमित नंदा अब बिगबास्केट के नए CEO के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Trump G7 Zelensky Snub | White House Clash VIDEO

Trump G7 Zelensky Snub | White House Clash VIDEO

नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक यूक्रेनी प्रेसिडेंट जेलेंस्की ने जब हैलो कहा तो डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें इग्नोर किया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमीर जेलेंस्की को नजरअंदाज कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ट्रम्प अन्य नेताओं से मुलाकात और हाथ मिलाते नजर आते हैं, लेकिन जेलेंस्की से न तो उन्होंने हाथ मिलाया और न ही कोई खास बातचीत की। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब दोनों नेताओं के बीच व्हाइट हाउस में हुई तीखी बहस और तकरार को लेकर पहले भी चर्चा हो चुकी है। दरअसल, ट्रम्प और जेलेंस्की के संबंध पहले भी तनावपूर्ण रहे हैं। इसी साल व्हाइट हाउस में हुई एक बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हुई थी, जिसकी काफी चर्चा हुई थी। फ्रांस के शहर एवियां-ले-बैं में G-7 शिखर सम्मेलन 2026 आयोजित हो रहा है। 15 से 17 जून तक होने वाली इस समिट में दुनिया के 7 देशों के नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति, व्यापार, जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। यूक्रेनी प्रेसिडेंट जेलेंस्की ने मुस्कुराते हुए हैलो कहा लेकिन ट्रम्प उनकी तरफ देखे बिना ही आगे बढ़ गए। G-7 समिट के टॉप मोमेंट्स दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Trump G7 Zelensky Snub | White House Clash VIDEO

Trump G7 Zelensky Snub | White House Clash VIDEO

नई दिल्ली32 मिनट पहले कॉपी लिंक यूक्रेनी प्रेसिडेंट जेलेंस्की ने जब हैलो कहा तो डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें इग्नोर किया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमीर जेलेंस्की को नजरअंदाज कर दिया। वायरल वीडियो में ट्रम्प अन्य नेताओं से मुलाकात और हाथ मिलाते नजर आते हैं, लेकिन जेलेंस्की से न तो उन्होंने हाथ मिलाया और न ही कोई खास बातचीत की। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब दोनों नेताओं के बीच व्हाइट हाउस में हुई तीखी बहस और तकरार को लेकर पहले भी चर्चा हो चुकी है। दरअसल, ट्रम्प और जेलेंस्की के संबंध पहले भी तनावपूर्ण रहे हैं। इसी साल व्हाइट हाउस में हुई एक बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हुई थी, जिसकी काफी चर्चा हुई थी। फ्रांस के शहर एवियन में G-7 शिखर सम्मेलन 2026 आयोजित हो रहा है। 15 से 17 जून तक होने वाली इस समिट में दुनिया के 7 देशों के नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति, व्यापार, जलवायु परिवर्तन और सप्लाई चैन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। यूक्रेनी प्रेसिडेंट जेलेंस्की ने मुस्कुराते हुए हैलो कहा, लेकिन ट्रम्प उनकी तरफ देखे बिना ही आगे बढ़ गए। 1 मार्च 2025 को ट्रम्प और जेलेंस्की के बीच व्हाइट हाउस में हुई बातचीत बहस में बदल गई। इसके बाद दोनों के बीच मिनरल डील भी नहीं हुई। G-7 समिट के टॉप 8 मोमेंट्स… G-7 समिट में 12 देशों अमेरिका, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, कनाडा, इटली, जापान, जर्मनी, मिस्र, भारत, ब्राजील, केन्या, ब्रिटेन के नेताओं के साथ यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट और यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट शामिल हुए। G7 समिट दुनिया के 7 बड़े विकसित देशों का वार्षिक सम्मेलन है। इसकी मेजबानी हर साल G7 का अध्यक्ष देश करता है। G7 में वैश्विक आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है। इस बार के प्रमुख एजेंडे यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव हैं। मोदी की मैक्रों, मेलोनी और ट्रम्प से मुलाकात पीएम मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात की। मोदी 7वीं बार G7 समिट में शामिल हुए हैं। पीएम मोदी और ट्रम्प के बीच 16 महीने बाद मुलाकात हुई। इससे पहले दोनों फरवरी 2025 में वॉशिंगटन में मिले थे। मोदी और इटली की पीएम मेलोनी ने हाथ मिलाकर एक दूसरे का वेलकम किया। पिछले महीने 20 मई को मोदी के इटली दौरे के दौरान दोनों रोम में मिले थे। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने ट्रम्प को जर्मन राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की जर्सी भेंट की। इस जर्सी के पीछे ट्रम्प और नंबर 47 लिखा हुआ था, जो उनके अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति होने का प्रतीक है। समिट के वर्किंग सेशन के दौरान कुछ पढ़ते हुए ट्रम्प। ———————————- ये खबर भी पढ़ें… पीएम मोदी 16 महीने बाद ट्रम्प से मिले, फ्रांस में G7 समिट में साथ बैठे, 5 मिनट बात की पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच फ्रांस के एवियन शहर में G-7 समिट के दौरान मुलाकात हुई। दोनों के बीच करीब 5 मिनट तक बात चली। मीटिंग में दोनों एक-साथ बैठे नजर आए। यह मुलाकात 16 महीनों के बाद हुई है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

हॉरर-कॉमेडी फिल्म में नजर आएंगी ईशा देओल:फिल्म 'घूंघट' का एलान; पुरानी मान्यताओं को चुनौती देगी कहानी

हॉरर-कॉमेडी फिल्म में नजर आएंगी ईशा देओल:फिल्म 'घूंघट' का एलान; पुरानी मान्यताओं को चुनौती देगी कहानी

अभिनेत्री ईशा देओल अपने करियर में पहली बार हॉरर-कॉमेडी फिल्म में नजर आने वाली हैं। उनकी इस आगामी फिल्म का नाम ‘घूंघट’ है। इस फिल्म का निर्देशन ‘माय फ्रेंड गणेशा’ फेम डायरेक्टर राजीव एस रुइया कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण बेंगलुरु के प्रोड्यूसर देवेश कुमार नेटिव सिनेमाज के बैनर तले कर रहे हैं। ईशा ने बताया कि यह फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ समाज की पुरानी मान्यताओं को चुनौती देने और महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत संदेश देगी। फिल्म में ईशा का बिल्कुल अलग अंदाज देखने को मिलेगा। स्क्रिप्ट और जॉनर ने किया आकर्षित ईशा देओल ने फिल्म से जुड़ने के अपने फैसले पर बात की। उन्होंने कहा कि हॉरर-कॉमेडी जॉनर उनके लिए मुख्य आकर्षण था। इस तरह की फिल्मों में रोमांच और हास्य का अच्छा मेल होता है, जिसे आज के समय में दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं। ईशा के मुताबिक, जॉनर के अलावा फिल्म की स्क्रिप्ट और उनका अनोखा किरदार ही मुख्य वजह थे, जिन्होंने उन्हें इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया। पुरानी मान्यताओं पर सवाल उठाएगी फिल्म अभिनेत्री ने बताया कि ‘घूंघट’ सिर्फ लोगों को डराने या हंसाने तक सीमित नहीं है। इसमें एक जरूरी सामाजिक संदेश छिपा है। यह कहानी लोगों को सालों से चली आ रही पुरानी रीतियों और मान्यताओं पर सवाल उठाने का साहस देगी। फिल्म में भरपूर ड्रामा, भावनाएं और कॉमेडी होगी, लेकिन इसका मुख्य फोकस व्यक्तिगत पहचान और अपनी बात पर मजबूती से टिके रहने के महत्व को दिखाना है। ‘माय फ्रेंड गणेशा’ के डायरेक्टर संभाल रहे कमान फिल्म का निर्देशन कर रहे राजीव एस रुइया को अलग-अलग जॉनर की फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है। उन्हें बच्चों और परिवारों के बीच बेहद लोकप्रिय रही ‘माय फ्रेंड गणेशा’ फ्रेंचाइजी से पहचान मिली थी। इसके अलावा उन्होंने ‘मैं कृष्णा हूं’, ‘डायरेक्ट इश्क’ और हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘सांसें’ का भी निर्देशन किया है। मेकर्स का मानना है कि पारिवारिक मनोरंजन और हॉरर विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ इस फिल्म को बेहतर बनाएगी। हर उम्र के दर्शकों के लिए होगी फिल्म प्रोड्यूसर देवेश कुमार इस फिल्म को एक ऐसे विजन के साथ तैयार कर रहे हैं, जिससे हर उम्र के दर्शक जुड़ाव महसूस कर सकें। मेकर्स के मुताबिक, फिल्म में मनोरंजन और सार्थकता के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। हॉरर-कॉमेडी फिल्मों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच ईशा देओल के इस नए प्रोजेक्ट ने फिल्म जगत और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

हॉरर-कॉमेडी फिल्म में नजर आएंगी ईशा देओल:फिल्म 'घूंघट' का एलान; पुरानी मान्यताओं को चुनौती देगी कहानी

हॉरर-कॉमेडी फिल्म में नजर आएंगी ईशा देओल:फिल्म 'घूंघट' का एलान; पुरानी मान्यताओं को चुनौती देगी कहानी

अभिनेत्री ईशा देओल अपने करियर में पहली बार हॉरर-कॉमेडी फिल्म में नजर आने वाली हैं। उनकी इस आगामी फिल्म का नाम ‘घूंघट’ है। इस फिल्म का निर्देशन ‘माय फ्रेंड गणेशा’ फेम डायरेक्टर राजीव एस रुइया कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण बेंगलुरु के प्रोड्यूसर देवेश कुमार नेटिव सिनेमाज के बैनर तले कर रहे हैं। ईशा ने बताया कि यह फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ समाज की पुरानी मान्यताओं को चुनौती देने और महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत संदेश देगी। फिल्म में ईशा का बिल्कुल अलग अंदाज देखने को मिलेगा। स्क्रिप्ट और जॉनर ने किया आकर्षित ईशा देओल ने फिल्म से जुड़ने के अपने फैसले पर बात की। उन्होंने कहा कि हॉरर-कॉमेडी जॉनर उनके लिए मुख्य आकर्षण था। इस तरह की फिल्मों में रोमांच और हास्य का अच्छा मेल होता है, जिसे आज के समय में दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं। ईशा के मुताबिक, जॉनर के अलावा फिल्म की स्क्रिप्ट और उनका अनोखा किरदार ही मुख्य वजह थे, जिन्होंने उन्हें इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया। पुरानी मान्यताओं पर सवाल उठाएगी फिल्म अभिनेत्री ने बताया कि ‘घूंघट’ सिर्फ लोगों को डराने या हंसाने तक सीमित नहीं है। इसमें एक जरूरी सामाजिक संदेश छिपा है। यह कहानी लोगों को सालों से चली आ रही पुरानी रीतियों और मान्यताओं पर सवाल उठाने का साहस देगी। फिल्म में भरपूर ड्रामा, भावनाएं और कॉमेडी होगी, लेकिन इसका मुख्य फोकस व्यक्तिगत पहचान और अपनी बात पर मजबूती से टिके रहने के महत्व को दिखाना है। ‘माय फ्रेंड गणेशा’ के डायरेक्टर संभाल रहे कमान फिल्म का निर्देशन कर रहे राजीव एस रुइया को अलग-अलग जॉनर की फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है। उन्हें बच्चों और परिवारों के बीच बेहद लोकप्रिय रही ‘माय फ्रेंड गणेशा’ फ्रेंचाइजी से पहचान मिली थी। इसके अलावा उन्होंने ‘मैं कृष्णा हूं’, ‘डायरेक्ट इश्क’ और हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘सांसें’ का भी निर्देशन किया है। मेकर्स का मानना है कि पारिवारिक मनोरंजन और हॉरर विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ इस फिल्म को बेहतर बनाएगी। हर उम्र के दर्शकों के लिए होगी फिल्म प्रोड्यूसर देवेश कुमार इस फिल्म को एक ऐसे विजन के साथ तैयार कर रहे हैं, जिससे हर उम्र के दर्शक जुड़ाव महसूस कर सकें। मेकर्स के मुताबिक, फिल्म में मनोरंजन और सार्थकता के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। हॉरर-कॉमेडी फिल्मों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच ईशा देओल के इस नए प्रोजेक्ट ने फिल्म जगत और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

नेपाल ने चीन के सामने कालापानी-लिपुलेख का मुद्दा उठाया:कहा- भारत के साथ समझौता किस आधार पर हुआ; वांग यी बोले- बातचीत से विवाद सुलझाएं

नेपाल ने चीन के सामने कालापानी-लिपुलेख का मुद्दा उठाया:कहा- भारत के साथ समझौता किस आधार पर हुआ; वांग यी बोले- बातचीत से विवाद सुलझाएं

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के दौरान कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख विवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे के इस्तेमाल को लेकर हुए समझौते पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यह व्यवस्था किस आधार पर बनाई गई और इसकी प्रकृति क्या है। इसके जवाब में वांग यी ने कहा कि यह मूल रूप से भारत और नेपाल के बीच का मामला है और इसका समाधान बातचीत से ही निकलेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दे संबंधित देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता के जरिए सुलझाए जाने चाहिए। नेपाल ने दोहराया कि कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख उसके क्षेत्र का हिस्सा हैं। काठमांडू पहले भी नई दिल्ली और बीजिंग को विरोध नोट भेजकर कह चुका है कि उसकी सहमति के बिना इस इलाके से जुड़ा कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। खनाल ने भारत दौरे पर नहीं उठाया था मुद्दा दिलचस्प बात यह है कि शिशिर खनाल ने हाल की भारत यात्रा के दौरान यह मुद्दा नहीं उठाया था। उस समय उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत की थी। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में भी कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख का जिक्र नहीं था। ऐसे में कूटनीतिक हलकों में इस बात पर चर्चा है कि नेपाल ने नई दिल्ली के मुकाबले बीजिंग में ज्यादा सख्त रुख दिखाया। विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल दोनों पड़ोसियों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए सीमा विवाद को जिंदा रखना चाहता है, लेकिन खुलकर टकराव से भी बचना चाहता है। भारत-नेपाल में 2020 के बाद बढ़ा विवाद कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को लेकर विवाद कई दशक पुराना है। हालांकि, 2020 में भारत और चीन के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा और व्यापार के लिए लिपुलेख दर्रे के इस्तेमाल पर सहमति बनने के बाद मामला फिर गरमा गया था। नेपाल ने उस समय इसका कड़ा विरोध किया था। उसका कहना था कि यह फैसला उसकी भागीदारी के बिना लिया गया। इसके बाद उसने भारत और चीन दोनों को विरोध पत्र भेजे थे। इसके बावजूद भारत और चीन लगातार इस रास्ते का इस्तेमाल करते रहे हैं। विवाद के बाद कुछ समय के लिए भारत-नेपाल रिश्तों में तनाव बढ़ा था, लेकिन हाल के उच्चस्तरीय दौरों से दोनों देशों के संबंधों में धीरे-धीरे सुधार आया है। दो नदियों से तय हुई भारत-नेपाल की सीमा भारत, नेपाल और चीन सीमा से लगे इस इलाके में हिमालय की नदियों से मिलकर बनी एक घाटी है, जो नेपाल और भारत में बहने वाली काली या महाकाली नदी का उद्गम स्थल है। इस इलाके को कालापानी भी कहते हैं। यहीं पर लिपुलेख दर्रा भी है। यहां से उत्तर-पश्चिम की तरफ कुछ दूरी पर एक और दर्रा है, जिसे लिंपियाधुरा कहते हैं। अंग्रेजों और नेपाल के गोरखा राजा के बीच 1816 में हुए सुगौली समझौते में काली नदी के जरिए भारत और नेपाल के बीच सीमा तय की थी। समझौते के तहत काली नदी के पश्चिमी क्षेत्र को भारत का इलाका माना गया, जबकि नदी के पूर्व में पड़ने वाला इलाका नेपाल का हो गया। काली नदी के उद्गम स्थल, यानी ये सबसे पहले कहां से निकलती है, इसे लेकर दोनों देशों के बीच विवाद रहा है। भारत पूर्वी धारा को काली नदी का उद्गम मानता है। वहीं नेपाल पश्चिमी धारा को उद्गम धारा मानता है और इसी आधार पर दोनों देश कालापानी के इलाके पर अपना-अपना दावा करते हैं। —————————– ये खबर भी पढ़ें…. नेपाल बोला- भारतीय यात्री लिपुलेख से मानसरोवर न जाएं:ये हमारा इलाका; भारत बोला- नेपाल के दावे का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं नेपाल सरकार ने पिछले महीने भारतीय तीर्थयात्रियों से लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा न करने की अपील की। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र नेपाल का हिस्सा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

नेपाल ने चीन के सामने कालापानी-लिपुलेख का मुद्दा उठाया:कहा- भारत के साथ समझौता किस आधार पर; चीन बोला- ये आप दोनों का मामला

नेपाल ने चीन के सामने कालापानी-लिपुलेख का मुद्दा उठाया:कहा- भारत के साथ समझौता किस आधार पर; चीन बोला- ये आप दोनों का मामला

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के दौरान कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख विवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे के इस्तेमाल को लेकर हुए समझौते पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यह व्यवस्था किस आधार पर बनाई गई और इसकी प्रकृति क्या है। इसके जवाब में वांग यी ने कहा कि यह मूल रूप से भारत और नेपाल के बीच का मामला है और इसका समाधान बातचीत से ही निकलेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दे संबंधित देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता के जरिए सुलझाए जाने चाहिए। नेपाल ने दोहराया कि कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख उसके क्षेत्र का हिस्सा हैं। काठमांडू पहले भी नई दिल्ली और बीजिंग को विरोध नोट भेजकर कह चुका है कि उसकी सहमति के बिना इस इलाके से जुड़ा कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। 2020 में हुआ था भारत-चीन समझौता भारत और चीन ने 2020 में लिपुलेख दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमा पार व्यापार को फिर से शुरू करने पर सहमति बनाई थी। दोनों देशों ने इस मार्ग को तीर्थयात्रा और व्यापार के लिए इस्तेमाल करने की व्यवस्था पर सहमति जताई थी। नेपाल ने उस समय इसका विरोध किया था। काठमांडू का कहना था कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा उसके क्षेत्र का हिस्सा हैं, इसलिए उससे बिना राय लिए इस मार्ग को लेकर कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद नेपाल ने भारत और चीन दोनों को राजनयिक विरोध नोट भेजा था। इसके बावजूद भारत और चीन कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमावर्ती व्यापार के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल करते रहे हैं। खनाल ने भारत दौरे पर नहीं उठाया था मुद्दा दिलचस्प बात यह है कि शिशिर खनाल ने हाल की भारत यात्रा के दौरान यह मुद्दा नहीं उठाया था। उस समय उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत की थी। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में भी कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख का जिक्र नहीं था। ऐसे में कूटनीतिक हलकों में इस बात पर चर्चा है कि नेपाल ने नई दिल्ली के मुकाबले बीजिंग में ज्यादा सख्त रुख दिखाया। विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल दोनों पड़ोसियों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए सीमा विवाद को जिंदा रखना चाहता है, लेकिन खुलकर टकराव से भी बचना चाहता है। भारत-चीन में लिपुलेख दर्रा से व्यापार शुरू भारत-चीन सीमा पर स्थित लिपुलेख दर्रे से व्यापार दोबारा शुरू होने जा रहा है। गलवान घाटी में 2020 में हुए संघर्ष के बाद यह मार्ग बंद हो गया था। करीब छह साल बाद अब इस रास्ते से व्यापार बहाल करने की तैयारी शुरू हो गई है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से करीब 300 व्यापारियों के नाम विदेश मंत्रालय को भेजे गए हैं। इन्हें पासपोर्ट और वीजा के बजाय ट्रेड पास के जरिए तिब्बत के तकलाकोट बाजार तक जाने की अनुमति दी जाएगी। इस बार सीमा तक सड़क पहुंचने से व्यापारियों को बड़ा फायदा मिलेगा। पहले सामान घोड़े-खच्चरों के जरिए ले जाया जाता था, लेकिन अब वाहन सीधे सीमा तक पहुंच सकेंगे। इससे व्यापार की लागत और समय दोनों कम होंगे। लिपुलेख दर्रा भारत और तिब्बत के बीच सदियों पुराने व्यापार का हिस्सा रहा है। तिब्बती व्यापारी नमक, ऊन और बोरेक्स लेकर भारत आते थे, जबकि भारतीय व्यापारी कपड़ा, अनाज और मसाले तिब्बत ले जाते थे। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह मार्ग बंद हो गया था। 1991 में दोनों देशों के बीच समझौते के बाद इसे फिर खोला गया था। हालांकि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद व्यापारिक गतिविधियां बंद हो गई हुई थीं। दो नदियों से तय हुई भारत-नेपाल की सीमा भारत, नेपाल और चीन सीमा से लगे इस इलाके में हिमालय की नदियों से मिलकर बनी एक घाटी है, जो नेपाल और भारत में बहने वाली काली या महाकाली नदी का उद्गम स्थल है। इस इलाके को कालापानी भी कहते हैं। यहीं पर लिपुलेख दर्रा भी है। यहां से उत्तर-पश्चिम की तरफ कुछ दूरी पर एक और दर्रा है, जिसे लिंपियाधुरा कहते हैं। अंग्रेजों और नेपाल के गोरखा राजा के बीच 1816 में हुए सुगौली समझौते में काली नदी के जरिए भारत और नेपाल के बीच सीमा तय की थी। समझौते के तहत काली नदी के पश्चिमी क्षेत्र को भारत का इलाका माना गया, जबकि नदी के पूर्व में पड़ने वाला इलाका नेपाल का हो गया। काली नदी के उद्गम स्थल, यानी ये सबसे पहले कहां से निकलती है, इसे लेकर दोनों देशों के बीच विवाद रहा है। भारत पूर्वी धारा को काली नदी का उद्गम मानता है। वहीं नेपाल पश्चिमी धारा को उद्गम धारा मानता है और इसी आधार पर दोनों देश कालापानी के इलाके पर अपना-अपना दावा करते हैं। —————————– ये खबर भी पढ़ें…. नेपाल बोला- भारतीय यात्री लिपुलेख से मानसरोवर न जाएं:ये हमारा इलाका; भारत बोला- नेपाल के दावे का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं नेपाल सरकार ने पिछले महीने भारतीय तीर्थयात्रियों से लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा न करने की अपील की। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र नेपाल का हिस्सा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

'वैभव सूर्यवंशी उकसाने पर श्रीलंका के खिलाड़ियों से भिड़े':कोच बोले- गिल, रोहित से लीडरशिप सीख रहे, इकाना में कल इंडिया का मैच

'वैभव सूर्यवंशी उकसाने पर श्रीलंका के खिलाड़ियों से भिड़े':कोच बोले- गिल, रोहित से लीडरशिप सीख रहे, इकाना में कल इंडिया का मैच

भारत और अफगानिस्तान के बीच बुधवार को इकाना स्टेडियम में दूसरा वनडे मैच खेला जाएगा। इससे पहले दोनों ही टीमों ने जमकर पसीना बहाया। प्रैक्टिस सेशन के बाद दोनों टीमों ने बारी-बारी प्रेस कॉन्फ्रेंस की। भारतीय बॉलिंग कोच साईं राज ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी और श्रीलंकाई खिलाड़ियों के बीच इंडिया ए के मैच के विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। बोले- वैभव बेहद शांत स्वभाव के खिलाड़ी हैं और उन्हें किस तरह उकसाया गया, इसकी पूरी जानकारी नहीं है। हां, उनके साथ मौजूद टीम के वरिष्ठ कोच उन्हें सही मार्गदर्शन देंगे। साईं राज ने कहा कि वैभव अभी युवा हैं और देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ऐसे में वह इस घटना से सीखेंगे। श्रीलंकाई खिलाड़ियों को भी खेल भावना और व्यवहार के प्रति जागरूक किए जाने की जरूरत है। दूसरे वनडे मुकाबले से पहले कोच ने अपनी रणनीति के संकेत दिए, लेकिन प्लेइंग-11 के पत्ते नहीं खोले। वहीं, अफगानिस्तान की ओर कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए। उन्होंने कहा- यहां का मौसम हमारे लिए काफी मुफीद, इकाना हमारे लिए होम ग्राउंड जैसा है। हम यहां पहले भी प्रैक्टिस करते रहे हैं। प्लेइंग-11 पर दोनों टीमों ने बनाए रखा सस्पेंस दूसरे वनडे के लिए टीम कॉम्बिनेशन को लेकर पूछे गए सवाल पर भारतीय कोच ने कहा कि अंतिम फैसला पिच देखने के बाद लिया जाएगा। कुलदीप यादव को खिलाने के सवाल पर साईं राज ने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए गेंदबाजी लाइनअप तय किया जाएगा। वहीं अफगानिस्तान के कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर अभी सब कुछ बता दिया तो कल मैच खेलने का मजा ही क्या रहेगा। रणनीति जाननी है तो बाद में अकेले में आइए। रोहित शर्मा की लीडरशिप से सीख रहे शुभमन गिल रोहित शर्मा की भूमिका पर साईं राज ने कहा कि वह सिर्फ एक बल्लेबाज नहीं, बल्कि टीम के लिए प्रेरणा और अनुभव का बड़ा स्रोत हैं। उनकी कप्तानी और अनुभव से शुभमन गिल जैसे युवा खिलाड़ियों को काफी फायदा मिल रहा है। उन्होंने केएल राहुल को टीम का अहम खिलाड़ी बताते हुए कहा कि वह किसी भी बल्लेबाजी क्रम में खुद को ढाल सकते हैं और आगामी विश्व कप की योजनाओं में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। लखनऊ की पिच और परिस्थितियों से अफगानिस्तान वाकिफ अफगानिस्तान के कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने कहा कि इकाना स्टेडियम उनके लिए नया नहीं है। यहां अफगान टीम पहले भी वेस्टइंडीज के खिलाफ और 2023 विश्व कप के दौरान खेल चुकी है। उन्होंने कहा कि लखनऊ की पिच धीमी रहती है और स्पिन गेंदबाजों को मदद मिलती है। हालांकि भारतीय टीम ने यहां उनसे ज्यादा मैच खेले हैं, लेकिन अफगानिस्तान को भी परिस्थितियों का अच्छा अनुभव है और उसी के अनुसार रणनीति बनाई जाएगी। पहले वनडे में लगातार विकेट गंवाना पड़ा भारी पहले वनडे में हार पर शाहिदी ने कहा कि टीम ने अच्छा क्रिकेट खेला, लेकिन नियमित अंतराल पर विकेट गिरने से नुकसान हुआ। रहमानुल्लाह गुरबाज की शानदार पारी के बावजूद मिडिल ऑर्डर बड़ी साझेदारी नहीं कर पाया। उन्होंने कहा कि टीम ने अपनी गलतियों पर चर्चा की है और दूसरे मुकाबले में बल्लेबाजों के बीच बेहतर साझेदारियां देखने को मिलेंगी। लखनऊ की गर्मी पर बोले- मौसम नहीं, प्रदर्शन पर है पूरा ध्यान धर्मशाला की ठंड के बाद लखनऊ की गर्मी को लेकर भारतीय कोच साईं राज ने कहा कि प्रोफेशनल खिलाड़ियों को हर तरह के मौसम में खेलने की आदत होती है। उनका पूरा ध्यान प्रदर्शन पर है। वहीं शाहिदी ने कहा कि क्रिकेट गर्मी का खेल है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौसम को बहाना नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान का जलालाबाद भी लखनऊ की तरह गर्म रहता है और खिलाड़ी हर परिस्थिति के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं। जडेजा-अश्विन की बराबरी आसान नहीं भारतीय कोच ने कहा कि रवींद्र जडेजा और आर अश्विन जैसे दिग्गजों की जगह लेना आसान नहीं है। हालांकि मानव सुथार, सारांश जैन और शिवांग जैसे युवा स्पिनरों के लिए यह संक्रमण का दौर है और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अवसर दिए जाएंगे। वहीं अफगान कप्तान ने ऑलराउंडर अजमतुल्लाह उमरजई की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी रिस्ट पोजिशन और स्विंग शानदार है। इसी वजह से वह नई गेंद और डेथ ओवरों में टीम के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं। शाहिदी बोले- मुश्किल समय में पूरा देश उनके साथ शाहिदी ने बताया कि पहले वनडे से पहले दरविश रसूली के पिता का निधन हो गया था, जिसके कारण वह स्वदेश लौट गए थे। अब वह वापस टीम से जुड़ चुके हैं और अभ्यास सत्र में हिस्सा लिया है। अफगान कप्तान ने कहा कि यह उनके लिए बेहद कठिन समय है, लेकिन पूरी टीम और पूरा देश उनके साथ खड़ा है। …………….. ये खबर भी पढ़ें… लखनऊ में दिखा मोहर्रम का चांद:26 जून को मनाया जाएगा आशूरा; जुलूस मार्ग से हटाए गए रूमी गेट के स्टोन पिलर लखनऊ में मोहर्रम का चांद नजर आ गया है। शिया मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास ने बताया कि बुधवार, 17 जून से पहला मोहर्रम होगा। 26 जून को दस मोहर्रम होगी। इसी दिन आशूरा मनाया जाएगा। वहीं सुरक्षा को देखते हुए जुलूस मार्ग से रुमी गेट से स्टोन पिलर हटाए गए हैं। पढ़िए पूरी खबर…

हैदराबाद ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास रोड का नाम बदलकर ‘डोनाल्ड ट्रम्प एवेन्यू’ रखा, जो 23 जून को खुलेगा पीतल के ढेर

हैदराबाद ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास रोड का नाम बदलकर 'डोनाल्ड ट्रम्प एवेन्यू' रखा, जो 23 जून को खुलेगा पीतल के ढेर

तेलंगाना, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ राज्य के बढ़ते आर्थिक और राजनयिक संबंधों को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से, हैदराबाद के वित्तीय जिले में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से सटी एक सड़क, डोनाल्ड ट्रम्प एवेन्यू का उद्घाटन करने की तैयारी कर रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, एवेन्यू को औपचारिक रूप से 23 जून को खोला जाना है। मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने पहली बार दिसंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर सड़क का नामकरण करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ विवाद और पश्चिम एशिया में संघर्ष सहित वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इस योजना को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया था। तनाव कम होने के साथ, राज्य सरकार ने प्रस्ताव को पुनर्जीवित किया है और उद्घाटन के साथ आगे बढ़ रही है। $brasstacks n18oc_politicsn18oc_breaking-newsn18oc_indiaNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 16 जून, 2026, 19:49 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)राजनयिक संबंध(टी)डोनाल्ड ट्रंप(टी)डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू(टी)डोनाल्ड ट्रंप रोड(टी)आर्थिक संबंध(टी)हैदराबाद वित्तीय जिला(टी)हैदराबाद इंफ्रास्ट्रक्चर(टी)हैदराबाद नवीनतम समाचार(टी)हैदराबाद समाचार(टी)भारत अमेरिका संबंध(टी)भारत-अमेरिका संबंध(टी)रेवंत रेड्डी(टी)तेलंगाना विकास(टी)तेलंगाना सरकार(टी)तेलंगाना नवीनतम समाचार(टी)तेलंगाना समाचार(टी)तेलंगाना राजनीति(टी)ट्रम्प एवेन्यू हैदराबाद(टी)ट्रम्प भारत(टी)यूएस वाणिज्य दूतावास हैदराबाद(टी)यूएस&एलटी; भारत

Bigbasket ceo Hari Menon resigns amazon amit nanda takes charge quick commerce race tata group shuffle

Bigbasket ceo Hari Menon resigns amazon amit nanda takes charge quick commerce race tata group shuffle

Hindi News Business Bigbasket Ceo Hari Menon Resigns Amazon Amit Nanda Takes Charge Quick Commerce Race Tata Group Shuffle नई दिल्ली8 मिनट पहले कॉपी लिंक टाटा के ओनरशिप वाले ऑनलाइन ग्रॉसरी प्लेटफॉर्म बिगबास्केट के को-फाउंडर हरि मेनन ने चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने 16 जून को इसकी आधिकारिक घोषणा की। ई-कॉमर्स सेक्टर की दिग्गज कंपनी अमेजन में 11 साल से ज्यादा समय बिता चुके अमित नंदा अब बिगबास्केट के नए CEO के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। बोर्ड में बने रहेंगे को-फाउंडर हरि मेनन बिगबास्केट में हुए इस बड़े लीडरशिप बदलाव के बावजूद कंपनी के को-फाउंडर हरि मेनन और विपुल पारेख कंपनी का साथ पूरी तरह नहीं छोड़ रहे हैं। वे दोनों कंपनी के बोर्ड में बने रहेंगे। इसके साथ ही वे नए नेतृत्व और लीडरशिप टीम को मेंटर भी करते रहेंगे। क्विक कॉमर्स की रेस के बीच हुआ बदलाव बिगबास्केट की टॉप लीडरशिप में यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय बाजार में क्विक कॉमर्स की रेस बेहद तेज हो गई है। वर्तमान में ब्लिंकिट, स्विगी की इंस्टामार्ट, जेप्टो, फ्लिपकार्ट मिनट्स और अमेजन नाउ के बीच बाजार पर कब्जा जमाने की होड़ मची हुई है। अमेजन से अमित नंदा का आना क्यों है खास? अमित नंदा अमेजन में ‘डायरेक्टर ऑफ सेलिंग पार्टनर सर्विसेज’ के पद पर थे। उनका अमेजन छोड़ना और बिगबास्केट में आना बेहद महत्वपूर्ण समय पर हुआ है। अमेजन खुद इस समय क्विक-कॉमर्स कंपनियों को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। इंडस्ट्री से जुड़े लोग ‘अमेजन नाउ’ को इस मार्केट के टॉप टियर में जगह बनाने के लिए एक बेहद आक्रामक दावेदार के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, क्विक कॉमर्स के इस दौर में अमेजन के इस कदम को रिलेवेंट बने रहने के प्रयास के रूप में भी समझा जा रहा है, क्योंकि अब क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स के बीच का अंतर लगभग खत्म होता जा रहा है। अमेजन में 11 साल से ज्यादा समय बिता चुके अमित नंदा अब बिगबास्केट के नए CEO के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। (फाइल फोटो) हरि मेनन और टाटा डिजिटल के प्रमुख ने किया स्वागत इस्तीफे की घोषणा के साथ ही हरि मेनन ने कहा कि बिगबास्केट को उसकी शुरुआत से लेकर आज देश के सबसे भरोसेमंद कंज्यूमर प्लेटफॉर्म्स में से एक बनाने के बाद, वे अमित नंदा का CEO के रूप में स्वागत करते हुए बेहद खुश हैं। अमित की कंज्यूमर्स को लेकर गहरी समझ, बिजनेस को बढ़ाने का शानदार ट्रैक रिकॉर्ड और ई-कॉमर्स सेक्टर का लंबा अनुभव कंपनी को आगे ले जाने में मदद करेगा। वहीं टाटा डिजिटल के CEO और MD व बिगबास्केट के चेयरमैन सजित शिवनंदन ने भी अमित का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अमित का बड़े पैमाने पर बिजनेस को लीड करने और प्रोडक्ट व टेक्नोलॉजी स्ट्रेटजी का अनुभव उन्हें इस पद के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाता है। नए CEO अमित नंदा बोले- ग्रोथ के बड़े मौके तलाशेंगे अमित नंदा ने बिगबास्केट से जुड़ने पर उत्साह जताते हुए कहा कि बिगबास्केट की कस्टमर-फर्स्ट वैल्यू और टाटा ग्रुप की विरासत मिलकर भविष्य के लिए एक मजबूत नींव तैयार करती है। वे हरि और उनकी टीम द्वारा बनाए गए प्राइवेट लेबल्स के बड़े प्रशंसक हैं। वे पूरी लीडरशिप टीम के साथ मिलकर कंपनी के विजन को आगे बढ़ाने और विकास के बड़े अवसरों को हासिल करने के लिए काम करेंगे। पिछले कुछ महीनों से चल रहा था मैनेजमेंट में फेरबदल बिगबास्केट पिछले कुछ महीनों से अपनी लीडरशिप टीम को मजबूत करने और मैनेजमेंट पोजीशन में बदलाव करने में जुटी हुई है। इसके तहत कंपनी में हाल ही में दो और बड़े अप्वाइंटमेंट किए गए हैं… शेषु कुमार तिरुमला बने COO: करीब दो हफ्ते पहले कंपनी ने शेषु कुमार तिरुमला को चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) के पद पर प्रमोट किया था। शेषु साल 2014 से बिगबास्केट से जुड़े हैं और पहले नेशनल हेड (बाइंग एंड मर्चेंडाइजिंग) और बाद में चीफ बाइंग एंड मर्चेंडाइजिंग ऑफिसर रह चुके हैं। वे अब ऑपरेशन्स को लीड कर रहे हैं। अर्पित जयसवाल बने CGO: इससे पहले अप्रैल महीने में कंपनी ने अर्पित जयसवाल को चीफ ग्रोथ ऑफिसर (CGO) नियुक्त किया था। अर्पित इससे पहले गूगल पे में हेड ऑफ ग्रोथ और ग्रुप प्रोडक्ट मैनेजर के रूप में कार्यरत थे। उनकी नियुक्ति क्विक कॉमर्स और ऑनलाइन ग्रॉसरी में बढ़ते कॉम्पिटिशन के बीच प्रॉफिटेबल ग्रोथ हासिल करने के लिए की गई थी। क्या होता है क्विक कॉमर्स? ई-कॉमर्स का वह एडवांस रूप जहां ग्राहकों को डेली यूज का सामान, ग्रॉसरी या फल-सब्जियां बहुत ही कम समय (आमतौर पर 10 से 30 मिनट के भीतर) में डिलीवर कर दी जाती हैं। भारत में इस समय ब्लिंकिट, जेप्टो और इंस्टामार्ट जैसी कंपनियां इस मॉडल पर तेजी से काम कर रही हैं। ये खबर भी पढ़ें… NSE ने 11 नए सेक्टोरल इंडेक्स लॉन्च किए: निफ्टी पावर, रिटेल और हॉस्पिटल्स भी शामिल; अब कुल 34 इंडेक्स से इकोनॉमी ट्रैक करना होगा आसान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की इंडेक्स सर्विसेज कंपनी NSE इंडाइसेज लिमिटेड ने बाजार में 11 नए सेक्टोरल इंडेक्स लॉन्च किए हैं। इस कदम से अब निफ्टी के तहत कुल सेक्टोरल इंडेक्स की संख्या बढ़कर 34 हो गई है, जिससे भारत की इकोनॉमी के अलग-अलग सेक्टर्स को ज्यादा सटीकता से ट्रैक किया जा सकेगा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…