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पाकिस्तान में पुलिस फायरिंग में ऑस्ट्रेलियाई बच्ची की मौत:घूमने आए परिवार से लुटेरों ने गहने लूटे; पुलिस ने डकैत समझकर गोली चलाई

पाकिस्तान में पुलिस फायरिंग में ऑस्ट्रेलियाई बच्ची की मौत:घूमने आए परिवार से लुटेरों ने गहने लूटे; पुलिस ने डकैत समझकर गोली चलाई

पाकिस्तान में 9 साल की ऑस्ट्रेलियाई बच्ची हानिया अहमद की पुलिस की गोलीबारी में मौत हो गई। हानिया अपने परिवार के साथ पाकिस्तान घूमने आई थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर के केवडेल इलाके का यह परिवार पंजाब के चकवाल शहर में अपने रिश्तेदारों से मिलने आया था। बुधवार रात वे किराये की कार से सफर कर रहे थे, तभी कुछ बदमाशों ने उनके गहने लूट लिए। बताया गया है कि मोटरसाइकिल पर सवार दो लुटेरे वारदात के बाद भाग रहे थे। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी की नजर उन पर पड़ गई। लुटेरे मौके से फरार हो गए और परिवार की किराये की कार भी वहां से आगे बढ़ गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पुलिस ने गलती से परिवार की कार को लुटेरों की गाड़ी समझ लिया और उस पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गोलियां लगने से 9 साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि उसके पिता और बड़े भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। बच्ची की मां सुरक्षित है। पुलिस बोली- लुटेरों ने पहले गोली चलाई, पिता ने नकारा पंजाब पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध लुटेरों ने एक पुलिस अधिकारी पर गोली चलाई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। हालांकि हानिया के पिता ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि पुलिस ने ही सबसे पहले गोली चलाई थी। इस घटना पर बयान देते हुए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। जांच पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि सबसे पहले परिवार और फिर बाकी लोगों को भी सच्चाई पता चल सके। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि वह मृत बच्ची के परिवार और घायल ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को हर संभव कांसुलर सहायता उपलब्ध करा रहा है। मंत्रालय ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना भी व्यक्त की। रिपोर्ट के मुताबिक, यह परिवार हाल ही में मक्का की धार्मिक यात्रा (हज/उमरा) पूरी करके पाकिस्तान पहुंचा था। पंजाब पुलिस ने अधिकारी को निलंबित किया पुलिस ने गोली चलाने वाले अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। घटना की जांच के लिए एक संयुक्त जांच टीम (जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम) भी बनाई गई है। पुलिस का कहना है कि लूटपाट में शामिल दो संदिग्ध लोगों को बाद में एक अलग मुठभेड़ में मार गिराया गया। इस घटना के बाद पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों में लोगों में नाराजगी है। परिवार ऑस्ट्रेलिया में रहता था। पाकिस्तान के सीनियर पुलिस अधिकारियों ने इसे गलत पहचान की वजह से हुई एक दुखद घटना बताया है और कहा है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के जरिए परिवार को न्याय दिलाया जाएगा। इस मामले ने पाकिस्तान में पुलिस के कामकाज पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान बल प्रयोग और आम लोगों की मौत होने पर जवाबदेही तय करने के तरीकों पर चर्चा तेज हो गई है। मानवाधिकार संगठनों ने लंबे समय से पुलिस फायरिंग, हिरासत में दुर्व्यवहार और कथित फर्जी मुठभेड़ों को लेकर चिंता जताई है। वहीं अधिकारी भी मानते रहे हैं कि पुलिस की ट्रेनिंग और लोगों का भरोसा बढ़ाने के लिए सुधारों की जरूरत है। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह पीड़ित परिवार की हर संभव मदद कर रहा है। मंत्रालय ने बताया कि वह मृत ऑस्ट्रेलियाई बच्ची के परिवार और इस घटना में घायल हुए दो ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को काउंसुलर सहायता उपलब्ध करा रहा है। ———————– ये खबर भी पढ़ें PoK में अब तक 46 प्रदर्शनकारियों की मौत:1100 गिरफ्तार; शरणार्थी सीटें खत्म करने के लिए आंदोलन, पाकिस्तानी सेना का विरोध पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK ) में बीते 4 दिनों से चल रहे आंदोलन में अब तक 46 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, चार दिनों में 1100 से ज्यादा लोगों की भी गिरफ्तारी हुई है। पूरी खबर पढ़ें

‘खेला होबे…’: टीएमसी संकट गहराया, बागी सांसद पार्टी चिन्ह और नाम पर नियंत्रण चाहते हैं | भारत समाचार

Starting from 2026, CBSE has introduced a two-exam system for Class 10 students.(Representative/File Photo)

आखरी अपडेट:16 जून, 2026, 10:54 IST वरिष्ठ विद्रोही नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि गुट खुद को “असली” टीएमसी के रूप में स्थापित करने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाएगा। बागी टीएमसी सांसदों का एनसीपीआई में विलय. (एएनआई) टीएमसी अशांति: हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए तनाव बढ़ता जा रहा है क्योंकि बागी सांसदों ने संकेत दिया है कि वे जल्द ही पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा कर सकते हैं, जिससे संभावित रूप से कानूनी लड़ाई शुरू हो सकती है। 20 असंतुष्ट टीएमसी सांसदों द्वारा नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय की घोषणा के एक दिन बाद, विद्रोही सांसद अरूप चक्रवर्ती ने जोर देकर कहा कि अलग हुए गुट ने टीएमसी को नहीं छोड़ा है, बल्कि पार्टी को “सुधारने” का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि समूह असली टीएमसी के रूप में मान्यता मांगेगा और अपने प्रतिष्ठित जुड़वां-फूल चुनाव चिह्न पर दावा करेगा। समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से चक्रवर्ती ने कहा, “हमने टीएमसी नहीं छोड़ी है; हम टीएमसी में हैं और पार्टी को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। इसे नुकसान क्यों हुआ, इस पर चर्चा नहीं की जा रही है। हम पार्टी के प्रतीक के लिए लड़ेंगे; हमारे पास 20 सदस्य हैं, हमें प्रतीक के लिए क्यों नहीं लड़ना चाहिए।” उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक “नया खेल” शुरू हो गया है। उन्होंने कहा, ”एक नया खेल शुरू हो गया है…’खेला होबे”, उन्होंने दावा किया कि इस कदम से पश्चिम बंगाल में विकास और रोजगार आएगा। हालाँकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले संगठन ने इस कदम को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अवैध करार दिया। पिछले हफ्ते रविवार को 20 बागी टीएमसी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और घोषणा की कि वे त्रिपुरा स्थित पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल एनसीपीआई में विलय कर रहे हैं। समूह ने संसद में बैठने की अलग व्यवस्था की भी मांग की। टीएमसी प्रमुख पर हमला करते हुए चक्रवर्ती ने कहा, “ममता बनर्जी डरी हुई हैं; वह पार्टी की बैठक भी नहीं बुला सकतीं. वह चुनाव से पहले अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक बैठक भी नहीं कर सकतीं.” चक्रवर्ती ने यह भी कहा कि काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बंद्योपाध्याय उनके समूह के “नेता” थे। वरिष्ठ विद्रोही नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि गुट खुद को “असली” टीएमसी के रूप में स्थापित करने और पार्टी के प्रतीक के स्वामित्व का दावा करने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाएगा। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने इस कदम का कड़ा विरोध किया और तर्क दिया कि यह दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन है। राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची यह स्पष्ट करती है कि विधायकों को अयोग्यता से सुरक्षा मांगने से पहले एक राजनीतिक दल का विलय या विभाजन होना चाहिए। एक्स पर एक पोस्ट में घोष ने कहा, “दो-तिहाई बहुमत और दल-बदल विरोधी कानून पर बड़े पैमाने पर गलत जानकारी प्रसारित की जा रही है। 10वीं अनुसूची और सुप्रीम कोर्ट ने इसे पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है।” उन्होंने कहा, “यह संसद के बाहर की राजनीतिक पार्टी है (संसद के अंदर बैठे पार्टी के प्रतिनिधि नहीं) जिसे पहले विभाजित या विलय करना होगा, और फिर इस स्थिति के बाद, अगर दो-तिहाई अलग होने का विकल्प चुनते हैं तो अंदर के लोगों पर दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होता है।” वयोवृद्ध टीएमसी नेता सौगत रॉय ने विद्रोही सांसदों पर उस जनादेश को धोखा देने का आरोप लगाया जिसके आधार पर वे चुने गए थे और कहा कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी के नेतृत्व में बनी हुई है। “टीएमसी चुनाव चिन्ह पर चुने गए बीस सांसदों ने अवैध रूप से मोदी के नेतृत्व में एनडीए के लिए अपना समर्थन घोषित करते हुए, एक अस्पष्ट पार्टी, कुछ नेशनल (आईएसटी) सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल होकर अपने मतदाताओं को धोखा देने का फैसला किया।” उन्होंने कहा, “उन्होंने जाहिर तौर पर संविधान की अनुसूची 10(4) के प्रावधानों से बचने के लिए ऐसा किया। लोग इस खबर को देख रहे हैं।” राजनीतिक लड़ाई पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी सामने आ रही है, जहां पार्टी के 80 में से 64 विधायक हाल ही में अलग हो गए और एक अलग विधायी गठन के रूप में मान्यता हासिल कर ली। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे ने उस फैसले को कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। प्रतिद्वंद्वी खेमे अब कानूनी और राजनीतिक टकराव की तैयारी कर रहे हैं, आने वाले हफ्तों में टीएमसी के नाम, प्रतीक और संगठनात्मक नियंत्रण पर विवाद तेज होता दिख रहा है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में शोभित गुप्ता शोभित गुप्ता News18.com में उप-संपादक हैं और भारत और अंतर्राष्ट्रीय समाचारों को कवर करते हैं। वह भारत के रोजमर्रा के राजनीतिक मामलों और भू-राजनीति में रुचि रखते हैं। उन्होंने बीए पत्रकारिता (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की…और पढ़ें जगह : कोलकाता (कलकत्ता), भारत, भारत न्यूज़ इंडिया ‘खेला होबे…’: टीएमसी संकट गहराया, बागी सांसद पार्टी चिन्ह और नाम पर नियंत्रण चाहते हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

UPSC Recruitment 400 Posts | No PrelimsMains Exam

UPSC Recruitment 400 Posts | No PrelimsMains Exam

Hindi News Career UPSC Recruitment 400 Posts | No PrelimsMains Exam | Salary Up To 1.44 Lakh 16 मिनट पहले कॉपी लिंक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने केंद्रीय सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में 400 पदों पर सीधी भर्ती निकाली है। इस भर्ती में सिलेक्ट होने के लिए यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तरह Prelims और मेन्स रिटन एग्जाम नहीं होगी। यानी इस भर्ती से कई युवाओं को सीधे अफसर बनने का मौका मिल सकता है। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : संबंधित क्षेत्र में बैचलर डिग्री, पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल डिग्री या सीनियर एकेडमिक या स्पेशलिस्ट पोस्ट के लिए पीएचडी,पद से संबंधित कार्य अनुभव एज लिमिट : सरकारी नियमों के अनुसार सैलरी : 44,900 – 1,44,200 रुपए प्रतिमाह सिलेक्शन प्रोसेस : योग्यता और अनुभव के आधार पर सिलेक्शन इसके बाद इंटरव्यू होगा। ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं। होम पेज पर दिए गए वन टाइम रजिस्ट्रेशन टैब पर क्लिक करें। मोबाइल नंबर, मेल आईडी आदि दर्ज कर रजिस्ट्रेशन करें। मांगे गए डाक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट कर दें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक सरकारी नौकरी की ये खबर भी पढ़ें आज की सरकारी नौकरी:PSPCL में 6289 वैकेंसी; UPSSSC में 1829 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, C-DAC में 951 ओपनिंग्स आज की सरकारी नौकरी में जानकारी पंजाब में 6,289 पदों पर निकली भर्ती, UPSSSC में 1829 पदों का नोटिफिकेशन जारी होने की। साथ में C-DAC में 951 पदों पर भर्ती और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स में 495 वैकेंसी की। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

UPSC Civil Services Prelims Result 2026 Released

UPSC Civil Services Prelims Result 2026 Released

Hindi News Career UPSC Civil Services Prelims Result 2026 Released | DAF Form For Mains 6 मिनट पहले कॉपी लिंक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने प्रीलिम्स परीक्षा 2026 का रिजल्ट 15 जून को देर रात जारी किया। कुल 13,343 कैंडिडेट्स ने ये परीक्षा क्वालीफाई की है। अब 13,343 कैंडिडेट्स मेन्स परीक्षा में शामिल होंगे, ये परीक्षा 933 पदों के लिए हुई है। इस साल 2025 के मुकाबले कम कैंडिडेट्स क्वालीफाई हुए हैं। UPSC प्रीलिम्स परीक्षा 2025 में कुल 14,161 कैंडिडेट्स क्वालीफाई हुए थे। 24 मई को 2 शिफ्ट में हुई एग्जाम UPSC प्रीलिम्स एग्जाम 24 मई 2026 को देशभर में आयोजित की गई थी। परीक्षा ऑफलाइन मोड में ओएमआर शीट के माध्यम से दो शिफ्ट में हुई थी। पहली शिफ्ट में सामान्य अध्ययन (GS) का पेपर हुआ, जबकि दूसरी शिफ्ट में सीसैट (CSAT) हुआ था । 933 पदों पर होगी भर्ती इस साल UPSC प्रीलिम्स एग्जाम के लिए 8.19 लाख उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इंटरव्यू के बाद टोटल 933 पदों पर भर्ती की जाएगी। यह एग्जाम 83 शहरों के 2,072 सेंटर्स पर आयोजित किया गया था। । आयोग द्वारा जारी किए गए डेटा के मुताबिक 5.49 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे। मेन्स के लिए भरना होगा डीएएफ फॉर्म प्रीलिम्स परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को मेन्स एग्जाम के लिए DAF-I (डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म) भरना होगा। ये फॉर्म 19 जून से ऑफिशियल वेबसाइट पर एक्टिव होगा। कैंडिडेट्स 28 जून तक इस फॉर्म को भर सकेंगे। परीक्षा के चार दिन बाद जारी हुई आंसर की इस बार UPSC ने परीक्षा के केवल चार दिन बाद 28 मई को प्रोविजनल आंसर-की जारी कर एक नया कदम उठाया। पहले आमतौर पर आंसर-की पूरी परीक्षा प्रक्रिया समाप्त होने के बाद जारी की जाती थी। जारी आंसर-की में यह भी बताया गया कि 100 प्रश्नों में से एक प्रश्न को हटाया गया है। 21 अगस्त को मेन्स एग्जाम UPSC द्वारा मेन्स एग्जाम का आयोजन 21 अगस्त को किया जाएगा। मेन्स में 9 क्वेश्चन पेपर होते हैं। मेन्स एग्जाम में सफल हुए उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। फाइनल सिलेक्शन मेन्स और इंटरव्यू में मिले अंकों के आधार पर किया जाएगा। 21 अगल-अलग ग्रुप ए और बी सेवाओं में भर्ती UPSC सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से केंद्र सरकारी की 21 अगल-अलग ग्रुप ए और बी सेवाओं में भर्ती की जाती है। इनमें आईएएस, आईपीएस और आईएफएस के अलावा भारतीय राजस्व सेवा, भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा, भारतीय कॉर्पोरेट कानून सेवा, भारतीय व्यापार सेवा जैसी अन्य सेवाएं शामिल हैं। उम्मीदवारों का फाइनल सिलेक्शन रैंक, कैटेगरी और वरीयता के आधार पर किया जाएगा। —————- ये खबर भी पढ़ें इस साल से आईआईटी कानपुर लॉन्च करेगा साइबर सिक्योरिटी कोर्स:जेईई एडवांस्ड स्कोर जरूरी नहीं, 60 सीटों पर एडमिशन IIT कानपुर अपने नए एकेडमिक सेशन से इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर ने नए यूजी प्रोग्राम के तहत बैचलर ऑफ साइबर सिक्योरिटी कोर्स की शुरुआत की है। कोडिंग, एथिकल हैकिंग और डिजिटल सिक्योरिटी की दुनिया में करियर बनाने वाल कैंडिडेट्स साइबर सिक्योरिटी कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

एनसीपीआई की कहानी: कैसे महज 840 वोटों वाली एक पार्टी 20 बागी सांसदों का घर बन गई | भारत समाचार

Starting from 2026, CBSE has introduced a two-exam system for Class 10 students.(Representative/File Photo)

आखरी अपडेट:16 जून, 2026, 10:18 IST नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया को 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में केवल 0.03 प्रतिशत वोट मिले और उसके तीनों उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। बागी टीएमसी सांसदों का एनसीपीआई में विलय. (एएनआई) नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) – जो अब 20 टीएमसी विद्रोहियों का घर है – की चुनावी यात्रा 2023 में त्रिपुरा की तीन विधानसभा सीटों पर सिर्फ 840 वोटों के साथ शुरू हुई थी। तीन साल बाद, यह एक लोकप्रिय जनादेश के बजाय संसदीय पुनर्गठन के माध्यम से लोकसभा में सबसे बड़े गुटों में से एक के रूप में उभर सकता है। यह विरोधाभास राजनीतिक उथल-पुथल के पैमाने को दर्शाता है। पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (आरयूपीपी) के रूप में सूचीबद्ध एनसीपीआई को 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में केवल 0.03 प्रतिशत वोट मिले। यह एकमात्र चुनाव रहा है जब पार्टी ने राज्य में तीन विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था। 2022-23 में पार्टी के खातों में समापन शेष मात्र 75 रुपये था। 2023 के चुनाव में, राज्य भर में लगभग 28 लाख (2.8 मिलियन) वैध वोट डाले गए। 0.03 प्रतिशत का वोट शेयर पूरे राज्य में लगभग 840 वोटों का मतलब है। तृणमूल विद्रोहियों द्वारा अल्पज्ञात पार्टी के साथ विलय का निर्णय लेने के बाद एनसीपीआई ने 2024 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा और न ही कोई संसदीय या विधानसभा सीट जीती। पार्टी, जिसका वस्तुतः कोई चुनावी पदचिह्न नहीं है, चुनाव आयोग के साथ एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी के रूप में पंजीकृत है। लेकिन यह अपने ज्ञात चुनावी इतिहास में लगभग 800-900 वोटों से आगे बढ़कर रातोंरात संसद में सबसे बड़े गुटों में से एक बन जाएगा – भारतीय राजनीति में लगभग एक अभूतपूर्व विकास। एनसीपीआई उम्मीदवारों ने 2023 में चुनाव लड़ी सभी तीन सीटों पर अपनी जमानत खो दी। यही बात वर्तमान विकास को इतना असाधारण बनाती है: एक पार्टी जिसका संपूर्ण ज्ञात चुनावी इतिहास राज्य चुनाव में सिर्फ 840 वोटों का है, अब 20 बागी टीएमसी सांसदों के साथ संसद में एक महत्वपूर्ण ताकत होगी। बीजेपी के बाद वह एनडीए का सबसे बड़ा घटक दल होगा. चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अमन शर्मा अमन शर्मा, कार्यकारी संपादक – सीएनएन-न्यूज़18 में राष्ट्रीय मामले, और दिल्ली में न्यूज़18 के ब्यूरो चीफ, के पास राजनीति और प्रधान मंत्री के व्यापक स्पेक्ट्रम को कवर करने का दो दशकों से अधिक का अनुभव है…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया एनसीपीआई की कहानी: कैसे महज 840 वोटों वाली एक पार्टी 20 बागी सांसदों का घर बन गई अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया(टी)एनसीपीआई त्रिपुरा चुनाव(टी)टीएमसी विद्रोहियों का विलय(टी)गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल भारत(टी)लोकसभा पुनर्गठन(टी)एनडीए सबसे बड़ा ब्लॉक(टी)त्रिपुरा विधानसभा वोट(टी)भारतीय संसदीय राजनीति

‘बड़ा मजाक, राजनीतिक रूप से अपरिपक्व’: डीएमके ने राहुल गांधी के खिलाफ पूरी ताकत झोंक दी | भारत समाचार

Starting from 2026, CBSE has introduced a two-exam system for Class 10 students.(Representative/File Photo)

आखरी अपडेट:16 जून, 2026, 10:06 IST डीएमके के ‘मुरासोली’ में प्रकाशित संपादकीय में राहुल गांधी पर सार्वजनिक रूप से भारतीय गुट के साझेदारों के बीच एकता की वकालत करने के बावजूद विपक्षी खेमे के भीतर विभाजन में योगदान देने का आरोप लगाया गया। टीवीके से हाथ मिलाने के बाद कांग्रेस ने डीएमके से गठबंधन तोड़ दिया। (पीटीआई फ़ाइल) तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भारी हार झेलने के एक महीने बाद, डीएमके ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर जोरदार दोतरफा हमला किया है और उन पर विपक्षी एकता को कमजोर करने और राजनीतिक सहयोगियों को धोखा देने का आरोप लगाया है। दोनों पूर्व सहयोगियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच, डीएमके की आईटी विंग और पार्टी के आधिकारिक मुखपत्र ‘मुरासोली’ दोनों के माध्यम से आलोचना हुई। डीएमके ने राहुल गांधी का मजाक उड़ाया चुनाव के बाद तमिलनाडु में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन को छोड़ने के पार्टी के फैसले के बाद डीएमके आईटी विंग ने राहुल गांधी और कांग्रेस की आलोचना करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। गठबंधन से कांग्रेस के बाहर निकलने का जिक्र करते हुए, द्रमुक आईटी विंग ने पोस्ट किया: “जब कांग्रेस अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए लड़ रही थी, तब हमने उन्हें अपने कंधों पर उठाया था, जैसे ही उन्होंने एक चमकदार नया खिलौना देखा, वे कूद पड़े।” पोस्ट के अंत में राहुल गांधी को “एक बड़ा मजाक” बताया गया। विधानसभा चुनावों के बाद दोनों पार्टियों के बीच मतभेद के बाद से यह टिप्पणी कांग्रेस नेता पर द्रमुक द्वारा किए गए सबसे तीखे सार्वजनिक हमलों में से एक है। डीएमके ने विपक्षी एकता के राहुल के आह्वान पर सवाल उठाए उसी समय, सोमवार को “मुरासोली” में प्रकाशित एक संपादकीय में राहुल गांधी पर सार्वजनिक रूप से भारत ब्लॉक भागीदारों के बीच एकता की वकालत करने के बावजूद विपक्षी खेमे के भीतर विभाजन में योगदान देने का आरोप लगाया गया। संपादकीय में हाल ही में इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद राहुल गांधी द्वारा की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई गई और तर्क दिया गया कि उन्होंने खुद विपक्षी दलों के बीच सहयोग को कमजोर करने में भूमिका निभाई है। “राहुल गांधी एकता पर व्याख्यान दे रहे हैं। लेकिन विभिन्न राज्यों में उस एकता को किसने कमजोर किया?” संपादकीय ने पूछा। लेख में तर्क दिया गया कि कांग्रेस विपक्षी एकता के बारे में नहीं बोल सकती जबकि कई गठबंधन सहयोगियों ने उस पर अपने राजनीतिक हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया था। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘बड़ा मजाक, राजनीतिक रूप से अपरिपक्व’: डीएमके ने राहुल गांधी के खिलाफ पूरी ताकत झोंक दी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राहुल गांधी(टी)डीएमके(टी)कांग्रेस डीएमके(टी)डीएमके कांग्रेस गठबंधन(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)डीएमके राहुल गांधी की आलोचना(टी)डीएमके बनाम कांग्रेस(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)विपक्षी एकता भारत ब्लॉक(टी)डीएमके आईटी विंग(टी)मुरासोली संपादकीय(टी)कांग्रेस गठबंधन से बाहर निकलना(टी)राहुल गांधी की आलोचना

ऑपरेशन टाइगर एंड द घोस्ट ऑफ 2022: क्यों उद्धव ठाकरे नए दलबदल के डर से जूझ रहे हैं | व्याख्याकार समाचार

Starting from 2026, CBSE has introduced a two-exam system for Class 10 students.(Representative/File Photo)

आखरी अपडेट:16 जून, 2026, 10:07 IST जून 2022 में, एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे बड़े विद्रोहों में से एक का नेतृत्व किया, जब वह शिवसेना के अधिकांश विधायकों के साथ चले गए, जिससे उद्धव सरकार गिर गई। क्योंकि शिवसेना पहले ही एक बार विनाशकारी विभाजन का अनुभव कर चुकी है, यहां तक ​​​​कि एक ताजा विद्रोह की अफवाहें भी संगठन के भीतर चिंता पैदा करने के लिए पर्याप्त हैं। (एआई-जनरेटेड इमेज) लगता है ये बगावत का मौसम है. जहां बंगाल में राजनीतिक सुर्खियां तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के नाटकीय ढंग से एनसीपीआई में जाने पर टिकी हुई हैं, वहीं महाराष्ट्र एक और संभावित विद्रोह की अटकलों से घिरा हुआ है। इस बार, फोकस शिव सेना (यूबीटी) पर है, जहां कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ की अफवाहों ने यह आशंका पैदा कर दी है कि उद्धव ठाकरे के कुछ सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली प्रतिद्वंद्वी शिव सेना में शामिल हो सकते हैं। चर्चा इतनी गंभीर हो गई कि पार्टी की ताकत का आकलन करने और आसन्न विभाजन की अफवाहों को दूर करने के प्रयास में, उद्धव ठाकरे ने अपने मुंबई निवास मातोश्री में सभी नौ शिवसेना (यूबीटी) लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई। हालाँकि, यह बैठक जल्द ही राज्य में अफवाह फैलाने वालों के लिए चारा बन गई। ‘ऑपरेशन टाइगर’ क्या है? सीधे शब्दों में कहें तो, इस वाक्यांश का इस्तेमाल महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना द्वारा उद्धव खेमे से दलबदल कराने के कथित प्रयास का वर्णन करने के लिए किया जा रहा है। रिपोर्टों से पता चला है कि शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसद शिंदे गुट के नेताओं के संपर्क में हैं और हाल के हफ्तों में दिल्ली में इस पर चर्चा हुई है। यह भी पढ़ें | ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा बढ़ने पर मनसे नेता ने राज-उद्धव पुनर्मिलन का समर्थन किया केंद्रीय मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप जाधव के इस दावे के बाद अटकलों को बल मिला कि सेना (यूबीटी) के सभी सांसद एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। ठाकरे खेमे के कुछ सांसदों के शामिल होने की गोपनीय बैठकों की भी खबरें सामने आईं। हालाँकि, शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने सार्वजनिक रूप से प्रतिद्वंद्वी दलों को तोड़ने के किसी भी प्रयास से इनकार किया है और ‘ऑपरेशन टाइगर’ की बात को राजनीतिक अटकल के रूप में खारिज कर दिया है। मंगलवार को, सेना नेता शाइना एनसी ने कहा, “हमें किसी भी पार्टी को तोड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमारे नेता एकनाथ शिंदे की लोकप्रियता सभी ने देखी है, क्योंकि वह आम लोगों के प्रति वफादार हैं और जमीनी स्तर पर काम करते हैं। वह घर से काम नहीं करते हैं, और जिस तरह से लोग हर दिन आ रहे हैं और शिवसेना में शामिल हो रहे हैं, उससे एक बात स्पष्ट है: पूरे महाराष्ट्र में प्रगति का माहौल है। इसलिए, कोई ऑपरेशन टाइगर नहीं है, बल्कि ऑपरेशन प्रोग्रेस है।” क्यों चिंतित हैं उद्धव? उद्धव के लिए विद्रोह कोई नई बात नहीं है. जून 2022 में, शिंदे ने महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे बड़े विद्रोहों में से एक का नेतृत्व किया जब वह शिवसेना के अधिकांश विधायकों के साथ चले गए, जिससे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई। विद्रोह ने अंततः शिवसेना को दो प्रतिद्वंद्वी गुटों में विभाजित कर दिया और पार्टी के नाम और प्रतीक पर एक लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई छिड़ गई। चुनाव आयोग ने बाद में शिंदे गुट को आधिकारिक शिव सेना के रूप में मान्यता दी और इसे पार्टी का पारंपरिक धनुष-बाण प्रतीक आवंटित किया, जिससे उद्धव के खेमे को शिव सेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के रूप में काम करने के लिए छोड़ दिया गया। क्योंकि पार्टी पहले ही एक बार विनाशकारी विभाजन का अनुभव कर चुकी है, यहां तक ​​​​कि एक ताजा विद्रोह की अफवाहें भी संगठन के भीतर चिंता पैदा करने के लिए पर्याप्त हैं। नवीनतम संकट किस कारण से उत्पन्न हुआ? इसका तात्कालिक कारण उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई मातोश्री बैठक में उपस्थिति पैटर्न था। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, केवल चार सांसद भौतिक रूप से शामिल हुए, जबकि चार अन्य वर्चुअल रूप से शामिल हुए और एक सांसद ने बाद में फोन पर ठाकरे से बात की। इस तथ्य से कि कई सांसद व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए, इस अटकल को बल मिला कि संसदीय शाखा के भीतर असंतोष पनप रहा है। अफवाहें तब और तेज हो गईं जब शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय देशमुख, जो बैठक में शामिल नहीं हुए थे, बाद में नई दिल्ली में शिंदे खेमे के केंद्रीय मंत्री प्रताप जाधव से मिलते देखे गए। बैठक में तुरंत नए सवाल उठने लगे कि क्या कुछ सांसद उद्धव खेमे के बाहर राजनीतिक विकल्प तलाश रहे हैं। पार्टी क्या कह रही है? शिवसेना (यूबीटी) नेताओं ने किसी भी तरह के विभाजन से दृढ़ता से इनकार किया है। वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बार-बार कहा है कि सभी नौ लोकसभा सांसद पार्टी के साथ बने रहेंगे। पार्टी का कहना है कि प्रत्येक सांसद ने या तो शारीरिक रूप से भाग लिया, वस्तुतः शामिल हुआ या फोन कॉल के माध्यम से भाग लिया, हालांकि पार्टी ने सांसदों की आभासी उपस्थिति का कोई सबूत साझा नहीं किया। बैठक में, उद्धव ने कथित तौर पर सांसदों से दलबदल की अफवाहों को सार्वजनिक रूप से खारिज करने और पार्टी कार्यकर्ताओं को आश्वस्त करने के लिए कहा कि कोई आसन्न विभाजन नहीं है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने नेताओं से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से जुड़े रहने और अटकलों को फैलने से रोकने का भी आग्रह किया। पार्टी नेताओं ने यह तर्क देते हुए एकता प्रदर्शित करने की कोशिश की है कि मौजूदा चर्चा को राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। क्या वास्तव में दलबदल हो सकता है? द वीक से बात करते हुए राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने कहा कि पक्ष बदलने की इच्छा रखने वाले सांसदों के किसी भी समूह को दलबदल विरोधी प्रावधानों का पालन करना होगा। रिपोर्टों में सुझाव दिया गया है कि कम से कम छह से सात सांसद कथित तौर पर शिंदे खेमे के संपर्क में हैं, हालांकि ये दावे असत्यापित हैं और शिवसेना (यूबीटी) ने इसका खंडन किया है। यह

फिल्म गदर के 25 साल पूरे:अमीषा पटेल बोलीं- सनी देओल अभी भी जवान हैं; सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन में अमरीश पुरी को किया गया याद

फिल्म गदर के 25 साल पूरे:अमीषा पटेल बोलीं- सनी देओल अभी भी जवान हैं; सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन में अमरीश पुरी को किया गया याद

फिल्म का क्रेज इतना ज्यादा था कि सिनेमाघरों के बाहर सुबह से लंबी कतारें लग जाती थीं। उसी दिन आमिर खान की फिल्म ‘लगान’ भी रिलीज हुई थी, हालांकि क्लैश के बावजूद दोनों फिल्मों ने शानदार प्रदर्शन किया। फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ की रिलीज के 25 साल पूरे होने पर इसकी सिल्वर जुबली सेलिब्रेट की गई। इस मौके पर सनी देओल, अमीषा पटेल, डायरेक्टर अनिल शर्मा और फिल्म की अन्य स्टार कास्ट एक साथ नजर आई। कार्यक्रम में सनी देओल ने केक काटा और अमीषा पटेल के साथ पैपराजी के सामने फोटो खिंचवाईं। दोनों को एक साथ देखकर फैंस भी उत्साहित नजर आए। सनी देओल ने अमीषा और अनिल शर्मा को केक खिलाकर फिल्म के 25 साल पूरे होने का जश्न मनाया। अमीषा पटेल का लुक भी चर्चा में रहा। वह इस मौके पर लहंगा-चोली और दुपट्टे के साथ भारतीय पहनावे में नजर आईं। वहीं इवेंट के दौरान पैपराजी ने कहा कि AI का जमाना है और इससे इन्हें भी जवान किया जा सकता है। जिस पर अमीषा ने सनी देओल की ओर हाथ पॉइंट करते हुए कहा, “ये जवान हैं।” 2001 में रिलीज हुई थी गदर बता दें कि सनी देओल और अमीषा पटेल स्टारर फिल्म गदर 15 जून 2001 को रिलीज हुई थी। फिल्म का क्रेज इतना ज्यादा था कि सिनेमाघरों के बाहर सुबह से लंबी कतारें लग जाती थीं। उसी दिन आमिर खान की फिल्म ‘लगान’ भी रिलीज हुई थी, हालांकि क्लैश के बावजूद दोनों फिल्मों ने शानदार प्रदर्शन किया। 18 करोड़ के बजट में बनी थी गदर करीब 18 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 133 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की थी। वहीं, इसके दूसरे पार्ट ‘गदर 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर कुल 691 करोड़ रुपये से अधिक का शानदार वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था। जिसका बजट 60 करोड़ रुपये था। फिल्म में सनी देओल का तारा सिंह और अमीषा पटेल का सकीना का किरदार दर्शकों के बीच आज भी फेमस है। फिल्म का निर्देशन अनिल शर्मा ने किया था। इसमें अमरीश पुरी ने सकीना के पिता की भूमिका निभाई थी। सिल्वर जुबली पर अमरीश पुरी को याद किया गया फिल्म की सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन के दौरान सनी देओल ने अमरीश पुरी को याद करते हुए कहा, “अमरीश जी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वह हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।” डायरेक्टर अनिल शर्मा ने कहा, “जब तक ‘गदर’ का नाम रहेगा, तब तक अमरीश पुरी जी भी इससे जुड़े रहेंगे। उनकी यादें हमेशा इस फिल्म का हिस्सा रहेंगी।” वहीं अमीषा पटेल ने कहा, “हम अमरीश पुरी जी को बहुत मिस करते हैं।”

Sensex Jumps 250 Points, Nifty Gains 100; Trading at 76,500

Sensex Jumps 250 Points, Nifty Gains 100; Trading at 76,500

मुंबई2 मिनट पहले कॉपी लिंक शेयर बाजार में आज यानी 16 जून को बढ़त है। सेंसेक्स 250 अंक की तेजी के साथ 76,500 पर कारोबार कर रहा है। वहीं निफ्टी में भी करीब 100 की बढ़त है, ये 23,950 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। आज FMCG और IT शेयर्स में ज्यादा खरीदारी है। आज एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज कोस्पी (साउथ कोरिया) 8662 +131 +1.56% निक्केई (जापान) 69234 -83 -0.12% हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) 24525 -318 -1.28% शुक्रवार को अमेरिका के बाजार में रही तेजी इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज डाउ जोन्स 51671 +469 +0.92% नैस्डैक 26684 +795 +3.07% S&P 500 7554 +123 +1.65% विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में 4,994 करोड़ के शेयर बेचे कैटेगरी लेटेस्ट बीते 7 दिन बीते 30 दिन DII +3,189 +15,879 +1,03,888 FII/FPI +200 -4,994 -77,538 नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी तेजी इससे पहले कल यानी 16 जून को शेयर बाजार में बढ़त रही थी। सेंसेक्स 736 अंक की तेजी के साथ 76,264 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 231 अंक की तेजी रही थी, ये 23,853 के स्तर पर बंद हुआ था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Sensex Jumps 250 Points, Nifty Gains 100; Trading at 76,500

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मुंबई8 मिनट पहले कॉपी लिंक शेयर बाजार में आज यानी 16 जून को बढ़त है। सेंसेक्स 250 अंक की तेजी के साथ 76,500 पर कारोबार कर रहा है। वहीं निफ्टी में भी करीब 100 की बढ़त है, ये 23,950 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। आज FMCG और IT शेयर्स में ज्यादा खरीदारी है। आज एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज कोस्पी (साउथ कोरिया) 8662 +131 +1.56% निक्केई (जापान) 69234 -83 -0.12% हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) 24525 -318 -1.28% शुक्रवार को अमेरिका के बाजार में रही तेजी इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज डाउ जोन्स 51671 +469 +0.92% नैस्डैक 26684 +795 +3.07% S&P 500 7554 +123 +1.65% विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में 4,994 करोड़ के शेयर बेचे कैटेगरी लेटेस्ट बीते 7 दिन बीते 30 दिन DII +3,189 +15,879 +1,03,888 FII/FPI +200 -4,994 -77,538 नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी तेजी इससे पहले कल यानी 15 जून को शेयर बाजार में बढ़त रही थी। सेंसेक्स 736 अंक की तेजी के साथ 76,264 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 231 अंक की तेजी रही थी, ये 23,853 के स्तर पर बंद हुआ था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…