Tunisia Coach Sacked | Neymar Group Stage Out
Hindi News Sports Tunisia Coach Sacked | Neymar Group Stage Out | Rafa 8.5 Year Jail स्पोर्ट्स डेस्क2 मिनट पहले कॉपी लिंक स्वीडन से मुकाबले के बाद ट्यूनीशिया के हेड कोच साबरी लामूशी। ट्यूनीशिया ने फुटबॉल वर्ल्ड कप में स्वीडन के खिलाफ मिली 1-5 की हार के बाद अपने हेड कोच साबरी लामूशी को हटा दिया है। लामूशी इस वर्ल्ड कप में पोस्ट गंवाने वाले पहले कोच बन गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लामूशी की विदाई की वजह केवल हार ही नहीं थी। टीम के भीतर असंतोष और ड्रेसिंग रूम में तनाव भी था। लामूशी ने महज 5 मैचों में ट्यूनीशिया की कोचिंग की। कोच मोंधेर केबायर को इंटरिम कोच बनाया जा सकता है। ट्यूनीशिया को अब ग्रुप चरण में जापान और नीदरलैंड्स जैसी मजबूत टीमों का सामना करना है। टीम 21 जून को जापान और 26 जून को नीदरलैंड्स से भिड़ेगी। ———————————- स्पोर्ट्स से जुड़ी यह खबरें भी पढ़िए… नेमार की फिटनेस पर कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है ब्राजील की मेडिकल टीम ब्राजील के स्टार फुटबॉलर नेमार फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज के सभी मुकाबले मिस कर सकते हैं। पिंडली की चोट से उबर रहे नेमार को लेकर ब्राजील की मेडिकल टीम कोई जोखिम नहीं लेना चाहती और उनका फोकस नॉकआउट चरण तक खिलाड़ी को पूरी तरह फिट करने पर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्राजील प्रबंधन नहीं चाहता कि जल्द वापसी के प्रयास में नेमार की चोट दोबारा उभर जाए और उनका टूर्नामेंट समय से पहले खत्म हो जाए। नेमार मोरक्को के खिलाफ ब्राजील के पहले मुकाबले में नहीं खेले थे। उन्हें शनिवार को हैती के खिलाफ होने वाले मुकाबले में नहीं उतारा जाएगा। 32 वर्षीय नेमार को 17 मई को सैंटोस के लिए खेलते हुए ग्रेड-2 पिंडली की चोट लगी थी। इसके बाद से वह रिकवरी प्रक्रिया में हैं। हाल के दिनों में उन्होंने जिम में ट्रेनिंग का लेवल बढ़ाया है, लेकिन अभी तक टीम के साथ मैदान पर रेग्युलर ट्रेनिंग सेशन शुरू नहीं किया है। ———————————————————– स्पेनिश फुटबॉलर राफा मिर को यौन उत्पीड़न मामले में साढ़े 8 साल की जेल स्पेन के फुटबॉलर राफा मिर को दो महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले में साढ़े आठ साल की जेल की सजा सुनाई गई है। स्पेन की एक अदालत ने उन्हें यौन उत्पीड़न और शारीरिक नुकसान पहुंचाने का दोषी ठहराया। मामले में शामिल एक अन्य फुटबॉलर को भी ढाई साल की सजा मिली है। स्पेन के वालेंसिया क्षेत्र की एक निचली अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि राफा मिर और एक अन्य खिलाड़ी ने 2024 में मिर के वालेंसिया स्थित घर पर दो महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया था। उस समय मिर वालेंसिया क्लब के लिए खेल रहे थे। अदालत ने 28 वर्षीय मिर को यौन उत्पीड़न के लिए सात साल और शारीरिक नुकसान पहुंचाने के लिए अतिरिक्त 18 महीने की सजा सुनाई। इस तरह कुल सजा साढ़े आठ साल की हुई। मामले में शामिल दूसरे खिलाड़ी पाब्लो जेजी को यौन उत्पीड़न और मारपीट के आरोप में ढाई साल की जेल की सजा दी गई। सुनवाई के दौरान राफा मिर ने सभी आरोपों को खारिज किया। उनका कहना था कि दोनों महिलाओं ने उनकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाए थे। हालांकि अदालत ने उनके तर्क को स्वीकार नहीं किया और दोषी ठहराया। ————————————————– दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Gold & Silver Surge Rs 8906 & Rs 2846; Crude Oil Drops on US-Iran Deal
नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर महंगाई से जुड़ी रही। मई में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.68% पर पहुंच गई है। इससे पहले अप्रैल में यह 8.26% पर थी। मई में महंगाई 43 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70% पर पहुंच गई थी। वहीं, सोना-चांदी के दाम में 15 जून को तेजी रही। एक किलो चांदी 8,906 रुपए बढ़कर 2.51 लाख रुपए पर पहुंच गई। इससे पहले इसकी कीमत 2.43 लाख रुपए प्रति किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,846 रुपए बढ़कर 1.50 लाख रुपए पर पहुंच गया है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार आज तेजी देखने को मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. थोक महंगाई 43 महीने में सबसे ज्यादा: मई में 9.68% पहुंची; फ्यूल महंगा हुआ, अनाज और तेल की कीमतें भी बढ़ीं मई में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.68% पर पहुंच गई है। इससे पहले अप्रैल में यह 8.26% पर थी। मई में महंगाई 43 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 15 जून को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। महंगाई बढ़ने की वजह रोजमर्रा की जरूरत के सामान और फ्यूल के दाम बढ़ना है। इसके अलावा अनाज और तेल भी महंगा हुआ है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच साढ़े तीन महीने से तनाव है। स्थितियां सामान्य नहीं हुईं तो महंगाई और बढ़ सकती है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. चांदी ₹8,906 बढ़कर ₹2.51 लाख पर पहुंची: इस साल कीमत ₹21 हजार बढ़ी, सोना आज ₹2,846 महंगा होकर ₹1.50 लाख/10gm हुआ सोना-चांदी के दाम में 15 जून को तेजी रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी 8,906 रुपए बढ़कर 2.51 लाख रुपए पर पहुंच गई। इससे पहले इसकी कीमत 2.43 लाख रुपए प्रति किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,846 रुपए बढ़कर 1.50 लाख रुपए पर पहुंच गया है। सोना-चांदी में ये तेजी अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता फिर शुरू होने से आई है। इससे कच्चे तेल की कीमतें गिरी हैं, महंगाई का डर कम हुआ और डॉलर कमजोर पड़ा, जिससे निवेशक सोने-चांदी की तरफ लौटे हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. US-ईरान समझौते से क्रूड ऑयल के दाम गिरे: 4.8% की कमी के साथ $83 पर आया; दुनियाभर के शेयर बाजारों में तेजी अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए समझौता हो गया है। इस खबर के बाद सोमवार को दुनियाभर के शेयर बाजारों में तेजी देखी जा रही है और क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 4.8% गिरकर 83.18 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। कुछ हफ्ते पहले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। युद्ध शुरू होने से पहले इसकी कीमत 70 डॉलर के करीब थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. ग्लोबल पेटेंट रैंकिंग में टॉप-20 में पहुंची जियो: ऐसा करने वाली अकेली भारतीय टेक कंपनी बनी; 320 पायदान की छलांग लगाई जियो प्लेटफॉर्म्स ने वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन की पेटेंट कोऑपरेशन ट्रीटी रैंकिंग में टॉप-20 में जगह बनाई है। कंपनी 2025 की सूची में 320 पायदान चढ़कर 20वें स्थान पर पहुंची है। जियो ग्लोबल टॉप-20 में जगह बनाने वाली अकेली भारतीय टेक इनोवेटर बन गई है। जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की टेक्नोलॉजी यूनिट है। इस नई रैंकिंग के बाद कंपनी अब हुआवे, सैमसंग, क्वालकॉम, एलजी, पैनासोनिक, नोकिया, गूगल, एपल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियों के ग्रुप में शामिल हो गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. 85% एथेनॉल से चलने वाली वैगन-आर ₹7.24 लाख में मिलेगी: पेट्रोल मॉडल से ₹86,000 महंगी; यह देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार मारुति सुजुकी ने सोमवार को भारत में पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार वैगन-आर बायोफ्लेक्स लॉन्च कर दी है। यह E85 फ्यूल (85% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल) से चलेगी। कार की शुरुआती कीमत 7.24 लाख रुपए रखी गई है और यह दो वैरिएंट में मिलेगी। E85 वैगन-आर स्टैंडर्ड मॉडल से ₹86 हजार महंगी है। वहीं, कॉमर्शियल सेगमेंट में मिलने वाली टूर H3 के मुकाबले इसकी कीमत ₹1.35 लाख से ₹2.25 लाख तक ज्यादा है। वैगन-आर टूर H3 की कीमत 4.99 लाख से 5.89 लाख रुपए के बीच है। फिलहाल इसे टैक्सी और फ्लीट जैसे कमर्शियल सेक्टर के लोग ही खरीद सकेंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Gold & Silver Surge Rs 8906 & Rs 2846; Crude Oil Drops on US-Iran Deal
नई दिल्ली21 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर महंगाई से जुड़ी रही। मई में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.68% पर पहुंच गई है। इससे पहले अप्रैल में यह 8.26% पर थी। मई में महंगाई 43 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70% पर पहुंच गई थी। वहीं, सोना-चांदी के दाम में 15 जून को तेजी रही। एक किलो चांदी 8,906 रुपए बढ़कर 2.51 लाख रुपए पर पहुंच गई। इससे पहले इसकी कीमत 2.43 लाख रुपए प्रति किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,846 रुपए बढ़कर 1.50 लाख रुपए पर पहुंच गया है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार आज तेजी देखने को मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. थोक महंगाई 43 महीने में सबसे ज्यादा: मई में 9.68% पहुंची; फ्यूल महंगा हुआ, अनाज और तेल की कीमतें भी बढ़ीं मई में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.68% पर पहुंच गई है। इससे पहले अप्रैल में यह 8.26% पर थी। मई में महंगाई 43 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 15 जून को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। महंगाई बढ़ने की वजह रोजमर्रा की जरूरत के सामान और फ्यूल के दाम बढ़ना है। इसके अलावा अनाज और तेल भी महंगा हुआ है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच साढ़े तीन महीने से तनाव है। स्थितियां सामान्य नहीं हुईं तो महंगाई और बढ़ सकती है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. चांदी ₹8,906 बढ़कर ₹2.51 लाख पर पहुंची: इस साल कीमत ₹21 हजार बढ़ी, सोना आज ₹2,846 महंगा होकर ₹1.50 लाख/10gm हुआ सोना-चांदी के दाम में 15 जून को तेजी रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी 8,906 रुपए बढ़कर 2.51 लाख रुपए पर पहुंच गई। इससे पहले इसकी कीमत 2.43 लाख रुपए प्रति किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,846 रुपए बढ़कर 1.50 लाख रुपए पर पहुंच गया है। सोना-चांदी में ये तेजी अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता फिर शुरू होने से आई है। इससे कच्चे तेल की कीमतें गिरी हैं, महंगाई का डर कम हुआ और डॉलर कमजोर पड़ा, जिससे निवेशक सोने-चांदी की तरफ लौटे हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. US-ईरान समझौते से क्रूड ऑयल के दाम गिरे: 4.8% की कमी के साथ $83 पर आया; दुनियाभर के शेयर बाजारों में तेजी अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए समझौता हो गया है। इस खबर के बाद सोमवार को दुनियाभर के शेयर बाजारों में तेजी देखी जा रही है और क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 4.8% गिरकर 83.18 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। कुछ हफ्ते पहले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। युद्ध शुरू होने से पहले इसकी कीमत 70 डॉलर के करीब थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. ग्लोबल पेटेंट रैंकिंग में टॉप-20 में पहुंची जियो: ऐसा करने वाली अकेली भारतीय टेक कंपनी बनी; 320 पायदान की छलांग लगाई जियो प्लेटफॉर्म्स ने वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन की पेटेंट कोऑपरेशन ट्रीटी रैंकिंग में टॉप-20 में जगह बनाई है। कंपनी 2025 की सूची में 320 पायदान चढ़कर 20वें स्थान पर पहुंची है। जियो ग्लोबल टॉप-20 में जगह बनाने वाली अकेली भारतीय टेक इनोवेटर बन गई है। जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की टेक्नोलॉजी यूनिट है। इस नई रैंकिंग के बाद कंपनी अब हुआवे, सैमसंग, क्वालकॉम, एलजी, पैनासोनिक, नोकिया, गूगल, एपल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियों के ग्रुप में शामिल हो गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. 85% एथेनॉल से चलने वाली वैगन-आर ₹7.24 लाख में मिलेगी: पेट्रोल मॉडल से ₹86,000 महंगी; यह देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार मारुति सुजुकी ने सोमवार को भारत में पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार वैगन-आर बायोफ्लेक्स लॉन्च कर दी है। यह E85 फ्यूल (85% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल) से चलेगी। कार की शुरुआती कीमत 7.24 लाख रुपए रखी गई है और यह दो वैरिएंट में मिलेगी। E85 वैगन-आर स्टैंडर्ड मॉडल से ₹86 हजार महंगी है। वहीं, कॉमर्शियल सेगमेंट में मिलने वाली टूर H3 के मुकाबले इसकी कीमत ₹1.35 लाख से ₹2.25 लाख तक ज्यादा है। वैगन-आर टूर H3 की कीमत 4.99 लाख से 5.89 लाख रुपए के बीच है। फिलहाल इसे टैक्सी और फ्लीट जैसे कमर्शियल सेक्टर के लोग ही खरीद सकेंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
UK to Ban Social Media for Children Under 16, New Rules Expected by 2027
10 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन में 16 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगेगा। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को इसकी घोषणा की। संबंधित नियम इस साल दिसंबर तक बन जाएंगे और 2027 मार्च- अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है। सरकार का तर्क है कि एल्गोरिदम आधारित प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। प्रस्ताव के तहत सोशल मीडिया के उपयोग से पहले उम्र सत्यापन सख्ती से लागू होगा और नियम पालन कराने की जिम्मेदारी कंपनियों पर होगी। बैन एप में स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। वॉट्सएप और सिग्नल जैसी मैसेजिंग सेवाएं फिलहाल प्रतिबंध में शामिल नहीं होंगी। ब्रिटिश सरकार के एक सर्वे में 10 में से 9 अभिभावकों ने इस प्रतिबंध का स्वागत किया है। ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ द्वारा 14-24 वर्ष के युवाओं के बीच किए सर्वे के मुताबिक स्नैपचैट, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम से डिप्रेशन, चिंता, अपने शरीर को लेकर हीन भावना और अकेलेपन में बढ़ोतरी होती है। अमेरिकी सर्जन जर्नल के मुताबिक रोज 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताने वाले किशोरों में मानसिक समस्याओं का खतरा दोगुना होता है। अमेरिका में एक परीक्षण में पाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बंद करने से युवाओं में खुशी, जीवन से संतुष्टि बढ़ी, डिप्रेशन-एंग्जाइटी में सुधार हुआ। 25 से ज्यादा देश किशोरों-बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में साल भर पहले प्रतिबंध लागू किया गया था। मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्राजील में भी इस साल की शुरुआत से प्रतिबंध लागू हो चुके हैं। नॉर्वे, फ्रांस, अमेरिका, चीन जैसे कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े नियम सख्त किए जा रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
UK to Ban Social Media for Children Under 16, New Rules Expected by 2027
30 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन में 16 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगेगा। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को इसकी घोषणा की। संबंधित नियम इस साल दिसंबर तक बन जाएंगे और 2027 मार्च- अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है। सरकार का तर्क है कि एल्गोरिदम आधारित प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। प्रस्ताव के तहत सोशल मीडिया के उपयोग से पहले उम्र सत्यापन सख्ती से लागू होगा और नियम पालन कराने की जिम्मेदारी कंपनियों पर होगी। बैन एप में स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। वॉट्सएप और सिग्नल जैसी मैसेजिंग सेवाएं फिलहाल प्रतिबंध में शामिल नहीं होंगी। ब्रिटिश सरकार के एक सर्वे में 10 में से 9 अभिभावकों ने इस प्रतिबंध का स्वागत किया है। ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ द्वारा 14-24 वर्ष के युवाओं के बीच किए सर्वे के मुताबिक स्नैपचैट, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम से डिप्रेशन, चिंता, अपने शरीर को लेकर हीन भावना और अकेलेपन में बढ़ोतरी होती है। अमेरिकी सर्जन जर्नल के मुताबिक रोज 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताने वाले किशोरों में मानसिक समस्याओं का खतरा दोगुना होता है। अमेरिका में एक परीक्षण में पाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बंद करने से युवाओं में खुशी, जीवन से संतुष्टि बढ़ी, डिप्रेशन-एंग्जाइटी में सुधार हुआ। 25 से ज्यादा देश किशोरों-बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में साल भर पहले प्रतिबंध लागू किया गया था। मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्राजील में भी इस साल की शुरुआत से प्रतिबंध लागू हो चुके हैं। नॉर्वे, फ्रांस, अमेरिका, चीन जैसे कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े नियम सख्त किए जा रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Belgium vs Egypt Football Match Ends 1-1
Hindi News Sports Belgium Vs Egypt Football Match Ends 1 1 | Lukaku Goal Romelu Lukaku सिएटल4 मिनट पहले कॉपी लिंक मिस्र का फुटबॉल वर्ल्ड कप में पहली जीत हासिल करने का 92 साल का इंतजार और बढ़ गया है। उसने मंगलवार को 9वें नंबर की टीम बेल्जियम पर बढ़त हासिल कर ली थी। लेकिन, बेल्जियम के स्टार स्ट्राइकर रोमेलू लुकाकू ने मैदान पर उतरते ही बॉक्स के अंदर अफरा-तफरी पैदा की। हड़बड़ी में मिस्र के डिफेंडर मोहम्मद हानी ने ऑन गोल कर दिया। सिएटल स्टेडियम में ग्रुप-जी के इस मुकाबले के बाद बेल्जियम की टीम पहले स्थान पर है। जबकि, मिस्र की टीम एक अंक के साथ दूसरे नंबर पर है। इस ग्रुप का एक अन्य मुकाबला ईरान और न्यूजीलैंड के बीच खेला जा रहा है। आशूर ने बेल्जियम का डिफेंस तोड़ा, टीम को दूसरी बार बढ़त 19वें मिनट में मिस्र के मिडफील्डर इमाम आशूर ने बेल्जियम की डिफेंस लाइन की गलती का फायदा उठाकर गोल दागा। यह आशूर के इंटरनेशनल करियर का पहला गोल था। आशूर अपने देश के लिए 30वां मैच खेल रहे थे। आशूर के गोल से मिस्र वर्ल्ड कप इतिहास में दूसरी बार बढ़त बनाने में सफल रही। इमाम आशूर को सुपीरियर प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। (फोटो- FIFA) लुकाकू के आते ही गोल, हानी से ऑन गोल हुआ बेल्जियम लगातार बराबरी की कोशिश करता रहा, लेकिन सफलता नहीं मिली। 66वें मिनट में कोच ने स्टार स्ट्राइकर रोमेलू लुकाकू को मैदान पर उतारा। उनके आने के सिर्फ 23 सेकेंड बाद ही बेल्जियम को बराबरी का गोल मिल गया। दाएं फ्लैंक से आए क्रॉस पर लुकाकू गेंद को गोल में पहुंचाने के लिए बढ़े, लेकिन मिस्र के डिफेंडर मोहम्मद हानी ने दबाव में गेंद अपने ही गोल में डाल दी। इसे आत्मघाती गोल माना गया और स्कोर 1-1 हो गया। लुकाकू (रेस जर्सी) के दबाव में मोहम्मद हानी से ऑन गोल हो गया। —————————————– फुटबॉल वर्ल्ड कप की यह खबर भी पढ़िए… 64वीं रैंक केप वर्डे ने स्पेन को ड्रॉ पर रोका; सऊदी अरब ने उरुग्वे से ड्रॉ खेला FIFA वर्ल्ड कप में डेब्यू कर रही केप वर्डे ने 2010 की चैंपियन स्पेन को 0-0 की बराबरी पर रोक दिया है। ग्रुप-H के एक अन्य मुकाबले में सऊदी अरब ने 2 बार की वर्ल्ड चैंपियन उरुग्वे को अंक साझा करने पर विवश कर दिया। यह मैच 1-1 की बराबरी पर छूटा। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
अमेरिका-ईरान में पीस डील पर डिजिटल साइन हुए:19 जून को जेनेवा में औपचारिक डील; ईरान को ₹8 लाख करोड़ दे सकता है अमेरिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका-ईरान समझौता पूरा हो चुका है और इस पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुआई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रम्प, जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ डिजिटल रूप से समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। हालांकि, समझौते का पूरा मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। ट्रम्प ने कहा कि दस्तावेज शुक्रवार के बाद जारी किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच 14 पॉइंट वाला एक शुरुआती मसौदा तैयार हुआ है, जिस पर आगे तकनीकी स्तर की बातचीत होगी। वहीं कुछ रिपोर्टों के मुताबिक ईरान को आर्थिक सहायता के लिए करीब 28 लाख करोड़ रुपए का पैकेज मिल सकता है, हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प बोले- ईरान शर्तें पूरी करे तभी राहत मिलेगी: अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि ईरान को प्रतिबंधों से राहत तभी मिलेगी, जब वह समझौते की सभी शर्तों का पालन करेगा। अमेरिका ने फिलहाल किसी भी तत्काल आर्थिक राहत से इनकार किया है। 2. इजराइल ने डील से किनारा किया: इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने कहा कि यह ट्रम्प की डील है और इजराइल इससे बंधा नहीं है। वहीं रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी साफ किया कि दक्षिणी लेबनान से सेना नहीं हटेगी। 3. मैक्रों ने यूरेनियम पर शर्त रखी: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को निष्क्रिय कर IAEA की निगरानी में रखा जाना चाहिए, ताकि उसका इस्तेमाल परमाणु हथियारों के लिए न हो सके। 4. ईरान ने समझौते को अपनी जीत बताया: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते को ‘जीत का दस्तावेज’ बताया। उन्होंने कहा कि इजराइल की नाराजगी ही साबित करती है कि बातचीत में ईरान मजबूत स्थिति में रहा। 5. दुनियाभर के देशों ने समझौते का स्वागत किया: UAE, कुवैत, स्विट्जरलैंड, कतर और पाकिस्तान समेत कई देशों ने अमेरिका-ईरान समझौते को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम बताया है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
California B-52 Bomber Crash | 8 Feared Dead
कैलिफोर्निया18 मिनट पहले कॉपी लिंक विमान ने सुबह करीब 11:20 बजे टेकऑफ किया था, कुछ ही समय बाद क्रैश हो गया। अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर सोमवार सुबह B-52 बॉम्बर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अमेरिकी वायुसेना के मुताबिक, विमान में सवार सभी 8 लोगों के मारे जाने की आशंका है। विमान ने सुबह करीब 11:20 बजे टेकऑफ किया था, कुछ ही समय बाद क्रैश हो गया। अधिकारियों ने अभी तक यह नहीं बताया है कि विमान में कौन लोग सवार थे और क्या बॉम्बर में हथियार मौजूद थे। हादसे के बाद एयरफील्ड को बंद कर दिया गया है और आने वाले विमानों को दूसरे एयरबेस की ओर भेजा जा रहा है। क्रैश की 4 तस्वीरें… विमान के क्रैश होने के बाद आसमान में काले रंग का धुआं उठा। विमान के क्रैश होने के बाद एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर अफरा-तफरी मच गई। विमान टेकऑफ के कुछ समय बाद ही क्रैश हुआ। B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस लंबी दूरी का बॉम्बर विमान है, जो 1955 से सेवा में है। यह पारंपरिक और परमाणु दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है। इसका इस्तेमाल वियतनाम से लेकर ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों तक में किया गया है। एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ जेफ गुजेटी ने कहा कि विमान जिस तरह उड़ान भरने के तुरंत बाद गिरा, उससे शुरुआती तौर पर फ्लाई कंट्रोल सिस्टम में खराबी की आशंका लगती है। हालांकि उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। गुजेटी के मुताबिक, यह मेंटेनेंस के बाद नियंत्रण प्रणाली में गड़बड़ी, इंजन की गंभीर खराबी या किसी परीक्षण उपकरण के फेल होने का मामला भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि परीक्षण उड़ानें सामान्य उड़ानों की तुलना में अधिक जोखिम भरी होती हैं। एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर होती है टेस्टिंग एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस लॉस एंजिलिस से करीब 161 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। यह अमेरिकी वायुसेना के विमान परीक्षण और विकास का प्रमुख केंद्र है। यहां नए विमानों, हथियार प्रणालियों, सॉफ्टवेयर और उपकरणों का परीक्षण किया जाता है। 21 मई: अमेरिका में EA-18G दो फाइटर जेट क्रैश हुए अमेरिका में 21 मई को दो EA-18G ग्रोलर फाइटर जेट क्रैश हो गए थे। हादसा इडाहो स्थित माउंटेन होम एयरफोर्स बेस पर एयर शो के दौरान हुआ। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक दोनों विमानों में सवार सभी 4 क्रू मेंबर हादसे से कुछ सेकेंड पहले सुरक्षित बाहर निकल गए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में भी चार पैराशूट दिखे हैं। पूरी खबर पढ़ें… ……………. यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में F-16 फाइटर जेट क्रैश:कुछ सेकेंड पहले पायलट सुरक्षित निकला, इस साल 8वीं बार क्रैश हुआ F-16 अमेरिका में गुरुवार को US एयरफोर्स का एक F-16 लड़ाकू विमान क्रैश हो गया। हादसे से कुछ सेकेंड पहले पायलट सुरक्षित बाहर निकल गया, जिससे उसकी जान बच गई। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
PM Narendra Modi France Slovakia Visit G7 Summit Photos Update
35 मिनट पहले कॉपी लिंक 52वां G7 समिट फ्रांस के इवियन शहर में हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16-17 जून को फ्रांस के एवियन में होने वाले 52वें G7 समिट में हिस्सा लेंगे। फिलहाल वे स्लोवाकिया में हैं। मोदी समिट के लिए आज ही फ्रांस लौट रहे हैं। समिट के दौरान मोदी G7 नेताओं, सहयोगी देशों के प्रतिनिधियों के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। पीएम मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से भी मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच ट्रेड डील पर बातचीत होगी। समिट से इतर, प्रधानमंत्री कई विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति सोमवार दोपहर ही फ्रांस के इवियन शहर पहुंच गए हैं। G7 के सदस्य देशों फ्रांस, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान और यूनाइटेड किंगडम के नेता ईरान और यूक्रेन पर भी चर्चा कर सकते हैं। पीएम मोदी 13 जून से फ्रांस-स्लोवाकिया के 6 दिन के दौरे पर हैं। 18 जून को वे पेरिस होते हुए भारत लौट आएंगे। फ्रांस पहुंचने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से द्विपक्षीय बैठक में मुलाकात की। पीएम मोदी का 100वां विदेशी दौरा मोदी का फ्रांस और स्लोवाकिया का एक हफ़्ते का मौजूदा दौरा, 12 साल पहले पद संभालने के बाद से उनका 100वां विदेशी दौरा है। PMO की वेबसाइट के मुताबिक, प्रधानमंत्री के तौर पर अपने 12 साल के कार्यकाल में मोदी अब तक 78 देशों की यात्रा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी का पहला दौरा 15 से 16 जून 2014 को भूटान का था। अपने पहले कार्यकाल में मोदी ने कुल 49 विदेशी दौरे किए। दूसरे कार्यकाल में कुल 27 विदेशी दौरे किए। 13 जून से शुरू हुआ फ्रांस-स्लोवाकिया का दौरान उनके तीसरे कार्यकाल का 24वां दौरा है। G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं? G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की ‘मॉडर्न इकोनॉमी’ वाला देश कहा जाता है। इनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी शामिल हैं। इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद यह G7 बन गया। 1998 में रूस को शामिल कर इसका नाम G8 कर दिया गया, लेकिन 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर रूस के कब्जे के बाद उसे समूह से बाहर कर दिया गया। इसके बाद यह फिर से G7 कहलाने लगा। भारत G7 में गेस्ट नेशन, पीएम 7वीं बार शामिल होंगे भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण वैश्विक भूमिका के कारण उसे अक्सर विशेष आमंत्रित देश (गेस्ट नेशन) के रूप में बुलाया जाता है। आमतौर पर भारत के प्रधानमंत्री को समिट का न्यौता मिलता है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2005 से 2013 के बीच पांच बार G7 (पहले G8) समिट में हिस्सा लिया था। PM मोदी को पहली बार 2019 में फ्रांस के बियारिट्ज में आयोजित G7 समिट में आमंत्रित किया गया था। 2020 में अमेरिका को मेजबानी करनी थी, लेकिन उसने तब समिट रद्द कर दी। इसके बाद 2021 में ब्रिटेन की मेजबानी में आयोजित सम्मेलन में PM मोदी वर्चुअली शामिल हुए। इसके अलावा मोदी 2022 में जर्मनी, 2023 में जापान, 2024 में इटली और 2025 में कनाडा में आयोजित G7 समिट में शामिल हुए। G7 समिट क्या है, इस बार इसके एजेंडे की खास बात क्या है? एक तय एजेंडे पर बातचीत के लिए हर साल G7 समिट होती है, जिसका आयोजन G7 का अध्यक्ष देश करता है। दरअसल, G7 के सभी 7 देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता करते हैं। इस साल फ्रांस अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में G7 समिट फ्रांस के एवियां शहर में होगी। इस समिट के एजेंडे में जियोपॉलिटिक्स क्राइसेस (यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, गाजा, लेबनान और होर्मुज रूट की स्थिति, मध्य पूर्व की सुरक्षा चुनौतियां), वैश्विक आर्थिक सहयोग और असंतुलन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा G7 के सदस्य देशों के लीडर्स और ऑफिसर्स साल में कई बैठकें करते हैं, जिनमें कई समझौते होते हैं और दुनिया की बड़ी घटनाओं पर आधिकारिक बयान जारी किए जाते हैं। शुरुआत में G7 का एजेंडा आर्थिक चुनौतियों और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों का हल निकालना था। बाद में राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए। वैश्विक मुद्दों पर G7 के फैसलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। उदाहरण के लिए G7 ने 2002 में मलेरिया और एड्स से लड़ने के लिए ग्लोबल फंड बनाया। 1998 में वित्तीय संकट के दौरान इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों को आर्थिक मदद की। रूस-यूक्रेन जंग के दौरान रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन की मदद करने का फैसला किया। G20 से कैसे अलग है G7 G7 का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है और इसके सदस्य देश कोई अंतरराष्ट्रीय कानून पारित नहीं कर सकते। G20 में सबसे बड़ा मुद्दा वर्ल्ड इकोनॉमी होता है, जबकि G7 के लिए राजनीतिक मुद्दे भी अहम होते हैं। 1999 में बने G20 में G7 के देशों के अलावा BRICS के देश भी शामिल हैं। इन देशों में भारत के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्किये और यूरोपीय संघ शामिल हैं। राजन कुमार के मुताबिक G20 में नई और बढ़ती हुई इकोनॉमी वाले देशों को भी शामिल किया गया है। भले ही G7 और G20 का एजेंडा एक जैसा हो, लेकिन इस समय G20 ज्यादा प्रभावी गुट है। 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी G7 को बहुत आउटडेटेड ग्रुप कहा था। ————————— मोदी के फ्रांस-स्लोवकिया दौरे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… भारत-फ्रांस के बीच FTA, डिफेंस और AI से जुड़े 13 बड़े समझौते हुए फ्रांस के नीस शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रविवार को द्विपक्षीय बैठक की। इसमें प्रधानमंत्री के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी शामिल रहे। इस दौरान दोनों देशों के बीच 13 बड़े समझौते हुए। पढ़ें पूरी खबर… पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री को भारत आने का न्योता दिया; मोदी का ब्रेड-नमक से स्वागत हुआ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्लोवाकियन पीएम रॉबर्ट फिको के बीच बातचीत के बाद द्विपक्षीय डिफेंस और ट्रेड
PM Narendra Modi France Slovakia Visit G7 Summit Photos Update
54 मिनट पहले कॉपी लिंक 52वां G7 समिट फ्रांस के इवियन शहर में हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16-17 जून को फ्रांस के एवियन में होने वाले 52वें G7 समिट में हिस्सा लेंगे। फिलहाल वे स्लोवाकिया में हैं। मोदी समिट के लिए आज ही फ्रांस लौट रहे हैं। समिट के दौरान मोदी G7 नेताओं, सहयोगी देशों के प्रतिनिधियों के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। पीएम मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से भी मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच ट्रेड डील पर बातचीत होगी। समिट से इतर, प्रधानमंत्री कई विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति सोमवार दोपहर ही फ्रांस के इवियन शहर पहुंच गए हैं। G7 के सदस्य देशों फ्रांस, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान और यूनाइटेड किंगडम के नेता ईरान और यूक्रेन पर भी चर्चा कर सकते हैं। पीएम मोदी 13 जून से फ्रांस-स्लोवाकिया के 6 दिन के दौरे पर हैं। 18 जून को वे पेरिस होते हुए भारत लौट आएंगे। फ्रांस पहुंचने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से द्विपक्षीय बैठक में मुलाकात की। पीएम मोदी का 100वां विदेशी दौरा मोदी का फ्रांस और स्लोवाकिया का एक हफ़्ते का मौजूदा दौरा, 12 साल पहले पद संभालने के बाद से उनका 100वां विदेशी दौरा है। PMO की वेबसाइट के मुताबिक, प्रधानमंत्री के तौर पर अपने 12 साल के कार्यकाल में मोदी अब तक 78 देशों की यात्रा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी का पहला दौरा 15 से 16 जून 2014 को भूटान का था। अपने पहले कार्यकाल में मोदी ने कुल 49 विदेशी दौरे किए। दूसरे कार्यकाल में कुल 27 विदेशी दौरे किए। 13 जून से शुरू हुआ फ्रांस-स्लोवाकिया का दौरान उनके तीसरे कार्यकाल का 24वां दौरा है। G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं? G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की ‘मॉडर्न इकोनॉमी’ वाला देश कहा जाता है। इनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी शामिल हैं। इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद यह G7 बन गया। 1998 में रूस को शामिल कर इसका नाम G8 कर दिया गया, लेकिन 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर रूस के कब्जे के बाद उसे समूह से बाहर कर दिया गया। इसके बाद यह फिर से G7 कहलाने लगा। भारत G7 में गेस्ट नेशन, पीएम 7वीं बार शामिल होंगे भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण वैश्विक भूमिका के कारण उसे अक्सर विशेष आमंत्रित देश (गेस्ट नेशन) के रूप में बुलाया जाता है। आमतौर पर भारत के प्रधानमंत्री को समिट का न्यौता मिलता है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2005 से 2013 के बीच पांच बार G7 (पहले G8) समिट में हिस्सा लिया था। PM मोदी को पहली बार 2019 में फ्रांस के बियारिट्ज में आयोजित G7 समिट में आमंत्रित किया गया था। 2020 में अमेरिका को मेजबानी करनी थी, लेकिन उसने तब समिट रद्द कर दी। इसके बाद 2021 में ब्रिटेन की मेजबानी में आयोजित सम्मेलन में PM मोदी वर्चुअली शामिल हुए। इसके अलावा मोदी 2022 में जर्मनी, 2023 में जापान, 2024 में इटली और 2025 में कनाडा में आयोजित G7 समिट में शामिल हुए। G7 समिट क्या है, इस बार इसके एजेंडे की खास बात क्या है? एक तय एजेंडे पर बातचीत के लिए हर साल G7 समिट होती है, जिसका आयोजन G7 का अध्यक्ष देश करता है। दरअसल, G7 के सभी 7 देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता करते हैं। इस साल फ्रांस अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में G7 समिट फ्रांस के एवियां शहर में होगी। इस समिट के एजेंडे में जियोपॉलिटिक्स क्राइसेस (यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, गाजा, लेबनान और होर्मुज रूट की स्थिति, मध्य पूर्व की सुरक्षा चुनौतियां), वैश्विक आर्थिक सहयोग और असंतुलन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा G7 के सदस्य देशों के लीडर्स और ऑफिसर्स साल में कई बैठकें करते हैं, जिनमें कई समझौते होते हैं और दुनिया की बड़ी घटनाओं पर आधिकारिक बयान जारी किए जाते हैं। शुरुआत में G7 का एजेंडा आर्थिक चुनौतियों और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों का हल निकालना था। बाद में राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए। वैश्विक मुद्दों पर G7 के फैसलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। उदाहरण के लिए G7 ने 2002 में मलेरिया और एड्स से लड़ने के लिए ग्लोबल फंड बनाया। 1998 में वित्तीय संकट के दौरान इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों को आर्थिक मदद की। रूस-यूक्रेन जंग के दौरान रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन की मदद करने का फैसला किया। G20 से कैसे अलग है G7 G7 का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है और इसके सदस्य देश कोई अंतरराष्ट्रीय कानून पारित नहीं कर सकते। G20 में सबसे बड़ा मुद्दा वर्ल्ड इकोनॉमी होता है, जबकि G7 के लिए राजनीतिक मुद्दे भी अहम होते हैं। 1999 में बने G20 में G7 के देशों के अलावा BRICS के देश भी शामिल हैं। इन देशों में भारत के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्किये और यूरोपीय संघ शामिल हैं। राजन कुमार के मुताबिक G20 में नई और बढ़ती हुई इकोनॉमी वाले देशों को भी शामिल किया गया है। भले ही G7 और G20 का एजेंडा एक जैसा हो, लेकिन इस समय G20 ज्यादा प्रभावी गुट है। 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी G7 को बहुत आउटडेटेड ग्रुप कहा था। ————————— मोदी के फ्रांस-स्लोवकिया दौरे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… भारत-फ्रांस के बीच FTA, डिफेंस और AI से जुड़े 13 बड़े समझौते हुए फ्रांस के नीस शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रविवार को द्विपक्षीय बैठक की। इसमें प्रधानमंत्री के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी शामिल रहे। इस दौरान दोनों देशों के बीच 13 बड़े समझौते हुए। पढ़ें पूरी खबर… पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री को भारत आने का न्योता दिया; मोदी का ब्रेड-नमक से स्वागत हुआ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्लोवाकियन पीएम रॉबर्ट फिको के बीच बातचीत के बाद द्विपक्षीय डिफेंस और ट्रेड








