मूंग दाल समोसा रेसिपी: आलू नहीं, घर पर बनाएं हाई प्रोटीन मूंग दाल वाला समोसा; एक मिनट में तैयार हो जाएगा

लेख के लिए: 2 कप मैदा, 3 बड़े चम्मच नमक, 3 बड़े चम्मच नमक, आवश्यकतानुसार पानी छवि: फ्रीपिक स्टफिंग: 1 कप बड़ा मूंगदाल, 1 छोटा मोटा जीरा, 1 छोटा मोटा मूंग दाल, 1/2 छोटा मोटा धनिया पाउडर, 1/2 छोटा मोटा धनिया पाउडर, 1/4 छोटा मोटा धनिया पाउडर, 1 छोटा छोटा मोटा गरम मसाला, 1 हरी मिर्च, 1 टुकड़ा अदरक, तेल, नमक छवि: सोशल मीडिया बनाने की विधि: सबसे पहले एक पाइथन में मैदा, नमक और तेल का निर्माण अच्छा तरह से मिला लें। अब थोड़ा-थोड़ा पानी डाले हुए सख्त आटा गूंध लें। 15-20 मिनट के लिए इंटरनेट पर फॉलो करें। छवि: फ्रीपिक अब भीगी हुई मूंग दाल का पानी, उसे दरदरा पीस लें। एक पैन में तेल गर्म करें और इसमें जीरा और सौंफ का मसाला चटकाएं। इसके बाद हरी मिर्च और प्रमुख स्मारक कुछ सेकंड। छवि: सोशल मीडिया इसमें पिसी हुई मूंग दाल डाली और मध्यम आंच पर 4-5 मिनट तक शुरुआती गति पकड़ी। लाल मिर्च, हल्दी, धनिया पाउडर, गर्म मसाला और नमक के टुकड़े अच्छी तरह मिला लें। छवि: सोशल मीडिया इसके बाद अटेच्ट्स की छोटी-छोटी लोएं निकलीं और उन्हें बेल लें। बीच से विखंडित कोन का आकार और इसमें मूंग दाल की स्टफिंग भर शामिल है। विद्यार्थियों को पानी भरने के लिए अच्छी तरह से बंद कर दें। छवि: एआई अब मसाले में तेल गर्म करें और समोसों को मिश्रण पर मसाले तक तल लें। अगर आपको तेल खाना पसंद है, तो एयर फ्रायर या अयाल में भी बेक कर सकते हैं। छवि: एआई गरमा-गरम मूंग दाल समोसे को हरी चटनी, इमली की चटनी या एक कप चाय के साथ बनाएं। इस शाम के लिए एक रॉकेट और टेस्टी विकल्प उपलब्ध है। छवि: फ्रीपिक मूंग दाल प्रोटीन और बेरोज़गार से अधिक होती है, जिससे बाकी हिस्सों से सबसे बड़ा रसायन बन जाता है। अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं या वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो यह रेसिपी जरूर आजमाएं। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)मूंग दाल समोसा रेसिपी(टी)मूंग दाल रेसिपी(टी)मूंग दाल समोसा(टी)समोसा रेसिपी(टी)हाई प्रोटीन स्नैक
सपा प्रमुख का पद छोड़ सकते हैं अखिलेश यादव, बीजेपी के संपर्क में हैं नेता: यूपी मंत्री का बड़ा दावा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:20 जून, 2026, 22:15 IST बीजेपी मंत्री ओम प्रकाश राजभर का दावा, समाजवादी पार्टी प्रमुख पद छोड़ सकते हैं अखिलेश यादव, बीजेपी के संपर्क में हैं एसपी नेता, एसपी ने नहीं दिया कोई जवाब, उत्तर प्रदेश में बढ़ी बहस समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव. (छवि: पीटीआई) उत्तर प्रदेश में राज्य मंत्री और भाजपा नेता ओम प्रकाश राजभर के इस दावे के बाद राजनीतिक विवाद छिड़ गया है कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ सकते हैं और कई सपा नेता भाजपा के संपर्क में हैं। राजभर ने पत्रकारों से बात करते हुए यह टिप्पणी की और आरोप लगाया कि हालिया राजनीतिक असफलताओं के बाद समाजवादी पार्टी के भीतर आंतरिक असंतोष बढ़ रहा है। बीजेपी मंत्री ने किया बड़ा दावा राजभर के मुताबिक समाजवादी पार्टी के नेताओं का एक वर्ग पार्टी की मौजूदा दिशा और नेतृत्व से नाखुश है. उन्होंने दावा किया कि कुछ सपा पदाधिकारी और नेता भाजपा के साथ संपर्क बनाए हुए हैं और सुझाव दिया कि आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। राजभर ने आगे आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अंततः पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ सकते हैं, हालांकि उन्होंने दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया। एसपी को अभी तक जवाब नहीं देना है समाजवादी पार्टी ने मंत्री की टिप्पणी पर तुरंत कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। अखिलेश यादव या वरिष्ठ सपा नेताओं की ओर से भी ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि पार्टी के नेतृत्व ढांचे में किसी बदलाव पर विचार किया जा रहा है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने कहा कि इसी तरह के दावे उत्तर प्रदेश की राजनीति में समय-समय पर सामने आते रहे हैं, खासकर प्रमुख चुनावों और संगठनात्मक फेरबदल से पहले। यूपी में सियासी पारा चढ़ा! यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश में भाजपा और विपक्ष के बीच तेज होती राजनीतिक लड़ाई के बीच आई है, जहां दोनों पक्ष आगामी चुनावी मुकाबलों के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं। जहां भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति के बारे में विश्वास जताने की कोशिश की है, वहीं विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ दल के नेताओं पर अटकलबाजी वाले बयानों के माध्यम से भ्रम पैदा करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। क्या राजभर के दावे वास्तविक राजनीतिक घटनाक्रम का संकेत देते हैं या व्यापक राजनीतिक संदेश का हिस्सा हैं, यह देखा जाना बाकी है, लेकिन टिप्पणियों ने पहले ही उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया सपा प्रमुख का पद छोड़ सकते हैं अखिलेश यादव, बीजेपी के संपर्क में हैं नेता: यूपी के मंत्री का बड़ा दावा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)उत्तर प्रदेश राजनीतिक विवाद(टी)ओम प्रकाश राजभर(टी)अखिलेश यादव का इस्तीफा(टी)समाजवादी पार्टी नेतृत्व(टी)बीजेपी एसपी संबंध(टी)उत्तर प्रदेश की राजनीति(टी)आंतरिक पार्टी असंतोष(टी)राजनीतिक घटनाक्रम यूपी
Amazon’s Jeff Bezos says human water consumption is limiting AI’s potential

Hindi News Business Amazon’s Jeff Bezos Says Human Water Consumption Is Limiting AI’s Potential पेरिस14 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस का मानना है कि AI नौकरियों को खत्म करने के बजाय नए रोजगार पैदा करेगी। उन्होंने कहा कि यह टेक्नोलॉजी इनोवेशन की रफ्तार बढ़ाएगी, जिससे भविष्य में बेरोजगारी के बजाय लेबर शॉर्टेज पैदा हो सकती है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पानी की कमी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार रुक सकती है। पेरिस में आयोजित ‘विवाटेक 2026’ कॉन्फ्रेंस में जेफ बेजोस ने AI और रोजगार को लेकर चल रही वैश्विक बहस पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि AI नई समस्याओं को पहचानने और उन्हें सुलझाने की प्रोसेस को आसान बनाकर इंसानी क्रिएटिविटी का दायरा बढ़ाएगा। बेजोस ने कहा कि AI लेबर शॉर्टेज पैदा करने जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए लोग ज्यादा से ज्यादा समस्याओं को पहचानने में सक्षम हो सकेंगे। इस चर्चा में ब्लू ओरिजिन के चीफ एग्जीक्यूटिव देव लिम्प ने भी हिस्सा लिया था। बेजोस ने नए वेंचर ‘प्रोमेथियस’ के बारे में बताया बेजोस ने अपने नए वेंचर ‘प्रोमेथियस’ का जिक्र करते हुए बताया कि यह एक AI स्टार्टअप है। इसका उद्देश्य एक ‘आर्टिफिशियल जनरल इंजीनियर’ तैयार करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह की टेक्नोलॉजी इनोवेशन साइकल की रफ्तार को काफी तेज कर देगी और उन आइडियाज पर काम करना संभव बनाएगी, जिन्हें पहले सोचना भी नामुमकिन था। बेजोस ने कहा कि अगर हम ड्रीम-बिल्ड लूप (सोचने और बनाने के चक्र) को तेज कर सकें, तो सभी आइडियाज मुमकिन हो जाएंगे। इसके बाद हम अपनी क्षमताओं से नहीं, बल्कि अपनी कल्पनाओं से सीमित होंगे। सुपर-इंटेलिजेंस के लिए कूलिंग रिसोर्सेज जरूरी बेजोस ने AI के कारण पर्यावरण पर पड़ रहे असर, खासकर डेटा सेंटर्स के लिए भारी मात्रा में पानी और बिजली की जरूरत पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अगर AI की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करना है, तो इसके इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कुछ खास संसाधनों को प्राथमिकता देनी होगी। बायोलॉजिकल लिमिट्स सच हैं, लेकिन डिजिटल पोटेंशियल असीम है। अगर हम सिर्फ बुनियादी इंसानी आराम को बनाए रखने के लिए अपने डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से कूलिंग रिसोर्सेज (पानी और कूलिंग के साधन) को रोकते हैं, तो हम एक ऐसी सुपर-इंटेलिजेंस के जन्म में देरी कर रहे हैं, जो शुरुआत में ही हमारी सभी संसाधन संबंधी समस्याओं को हल कर सकती है। बेजोस के इस बयान ने डेटा सेंटर्स के विस्तार और पर्यावरण के बीच के संतुलन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। सिर्फ घूमने नहीं, चांद पर रहने जा रहे हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अलावा बेजोस ने स्पेस एक्सप्लोरेशन को लेकर भी अपना लॉन्ग-टर्म विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी से बाहर इंसानों की स्थायी बस्तियां बसाने की दिशा में चंद्रमा पहला कदम होगा। बेजोस ने कहा कि हम चंद्रमा पर रहने के लिए जा रहे हैं, सिर्फ घूमने के लिए नहीं। उन्होंने बताया कि चंद्रमा पर मौजूद संसाधन और वहां से कम लॉन्चिंग कॉस्ट (कम लागत) इसे भविष्य के स्पेस मिशनों के लिए एक मुख्य केंद्र बनाएंगे। मंगल पर बस्ती का रास्ता होगा साफ बेजोस ने आगे कहा कि चंद्रमा पर खोज के जरिए आगे चलकर मंगल ग्रह और अन्य जगहों पर इंसानी बस्तियां बसाने का रास्ता साफ होगा। उन्होंने अंतरिक्ष में इंसानी विस्तार को बेहद जरूरी बताया, ताकि पृथ्वी पर चल रही आर्थिक ग्रोथ और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक सही संतुलन बनाया जा सके। क्या होता है ‘आर्टिफिशियल जनरल इंजीनियर’? टेक की दुनिया में यह एक ऐसी एडवांस्ड AI प्रणाली को संदर्भित करता है जो इंसानी इंजीनियरों की तरह ही खुद से किसी जटिल समस्या को समझ सकती है, उसका ब्लूप्रिंट तैयार कर सकती है और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के उसे कोड या डिजाइन के जरिए हल कर सकती है। जेफ बेजोस का नया स्टार्टअप ‘प्रोमेथियस’ इसी विजन पर काम कर रहा है। ये खबर भी पढ़ें… मृतक निवेशकों के शेयर-बॉन्ड्स आसानी से वारिसों के नाम होंगे: सेबी ने ट्रांसफर प्रोसेस को सरल बनाया, अब PAN की जरूरत भी नहीं होगी सेबी ने किसी निवेशक की मौत के बाद उसके कानूनी वारिसों या क्लेम करने वालों को शेयर ट्रांसफर करने की प्रोसेस को आसान बना दिया है। इसका मकसद डॉक्युमेंटेशन की जरूरतों को कम करके इस पूरी प्रोसेस को तेज और कम पेचीदा बनाना है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Amazon’s Jeff Bezos says human water consumption is limiting AI’s potential

Hindi News Business Amazon’s Jeff Bezos Says Human Water Consumption Is Limiting AI’s Potential पेरिस1 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस का मानना है कि AI नौकरियों को खत्म करने के बजाय नए रोजगार पैदा करेगी। उन्होंने कहा कि यह टेक्नोलॉजी इनोवेशन की रफ्तार बढ़ाएगी, जिससे भविष्य में बेरोजगारी के बजाय लेबर शॉर्टेज पैदा हो सकती है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पानी की कमी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार रुक सकती है। पेरिस में आयोजित ‘विवाटेक 2026’ कॉन्फ्रेंस में जेफ बेजोस ने AI और रोजगार को लेकर चल रही वैश्विक बहस पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि AI नई समस्याओं को पहचानने और उन्हें सुलझाने की प्रोसेस को आसान बनाकर इंसानी क्रिएटिविटी का दायरा बढ़ाएगा। बेजोस ने कहा कि AI लेबर शॉर्टेज पैदा करने जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए लोग ज्यादा से ज्यादा समस्याओं को पहचानने में सक्षम हो सकेंगे। इस चर्चा में ब्लू ओरिजिन के चीफ एग्जीक्यूटिव देव लिम्प ने भी हिस्सा लिया था। बेजोस ने नए वेंचर ‘प्रोमेथियस’ के बारे में बताया बेजोस ने अपने नए वेंचर ‘प्रोमेथियस’ का जिक्र करते हुए बताया कि यह एक AI स्टार्टअप है। इसका उद्देश्य एक ‘आर्टिफिशियल जनरल इंजीनियर’ तैयार करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह की टेक्नोलॉजी इनोवेशन साइकल की रफ्तार को काफी तेज कर देगी और उन आइडियाज पर काम करना संभव बनाएगी, जिन्हें पहले सोचना भी नामुमकिन था। बेजोस ने कहा कि अगर हम ड्रीम-बिल्ड लूप (सोचने और बनाने के चक्र) को तेज कर सकें, तो सभी आइडियाज मुमकिन हो जाएंगे। इसके बाद हम अपनी क्षमताओं से नहीं, बल्कि अपनी कल्पनाओं से सीमित होंगे। सुपर-इंटेलिजेंस के लिए कूलिंग रिसोर्सेज जरूरी बेजोस ने AI के कारण पर्यावरण पर पड़ रहे असर, खासकर डेटा सेंटर्स के लिए भारी मात्रा में पानी और बिजली की जरूरत पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अगर AI की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करना है, तो इसके इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कुछ खास संसाधनों को प्राथमिकता देनी होगी। बायोलॉजिकल लिमिट्स सच हैं, लेकिन डिजिटल पोटेंशियल असीम है। अगर हम सिर्फ बुनियादी इंसानी आराम को बनाए रखने के लिए अपने डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से कूलिंग रिसोर्सेज (पानी और कूलिंग के साधन) को रोकते हैं, तो हम एक ऐसी सुपर-इंटेलिजेंस के जन्म में देरी कर रहे हैं, जो शुरुआत में ही हमारी सभी संसाधन संबंधी समस्याओं को हल कर सकती है। बेजोस के इस बयान ने डेटा सेंटर्स के विस्तार और पर्यावरण के बीच के संतुलन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। सिर्फ घूमने नहीं, चांद पर रहने जा रहे हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अलावा बेजोस ने स्पेस एक्सप्लोरेशन को लेकर भी अपना लॉन्ग-टर्म विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी से बाहर इंसानों की स्थायी बस्तियां बसाने की दिशा में चंद्रमा पहला कदम होगा। बेजोस ने कहा कि हम चंद्रमा पर रहने के लिए जा रहे हैं, सिर्फ घूमने के लिए नहीं। उन्होंने बताया कि चंद्रमा पर मौजूद संसाधन और वहां से कम लॉन्चिंग कॉस्ट (कम लागत) इसे भविष्य के स्पेस मिशनों के लिए एक मुख्य केंद्र बनाएंगे। मंगल पर बस्ती का रास्ता होगा साफ बेजोस ने आगे कहा कि चंद्रमा पर खोज के जरिए आगे चलकर मंगल ग्रह और अन्य जगहों पर इंसानी बस्तियां बसाने का रास्ता साफ होगा। उन्होंने अंतरिक्ष में इंसानी विस्तार को बेहद जरूरी बताया, ताकि पृथ्वी पर चल रही आर्थिक ग्रोथ और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक सही संतुलन बनाया जा सके। क्या होता है ‘आर्टिफिशियल जनरल इंजीनियर’? टेक की दुनिया में यह एक ऐसी एडवांस्ड AI प्रणाली को संदर्भित करता है जो इंसानी इंजीनियरों की तरह ही खुद से किसी जटिल समस्या को समझ सकती है, उसका ब्लूप्रिंट तैयार कर सकती है और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के उसे कोड या डिजाइन के जरिए हल कर सकती है। जेफ बेजोस का नया स्टार्टअप ‘प्रोमेथियस’ इसी विजन पर काम कर रहा है। ये खबर भी पढ़ें… मृतक निवेशकों के शेयर-बॉन्ड्स आसानी से वारिसों के नाम होंगे: सेबी ने ट्रांसफर प्रोसेस को सरल बनाया, अब PAN की जरूरत भी नहीं होगी सेबी ने किसी निवेशक की मौत के बाद उसके कानूनी वारिसों या क्लेम करने वालों को शेयर ट्रांसफर करने की प्रोसेस को आसान बना दिया है। इसका मकसद डॉक्युमेंटेशन की जरूरतों को कम करके इस पूरी प्रोसेस को तेज और कम पेचीदा बनाना है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
पंजाब सरकार का दावा, फॉरेंसिक जांच में सीएम भगवंत मान और वायरल वीडियो में कोई मेल नहीं मिला | भारत समाचार

आखरी अपडेट:20 जून, 2026, 20:50 IST पंजाब सरकार का कहना है कि फोरेंसिक जांच में सीएम भगवंत मान और वायरल वीडियो के बीच कोई मेल नहीं पाया गया है, इसे साजिश बताया गया है, विपक्ष के साथ राजनीतिक विवाद जारी रहने पर डीजीपी जांच के आदेश दिए गए हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान. (पीटीआई फाइल फोटो) पंजाब सरकार ने शुक्रवार को दावा किया कि फोरेंसिक जांच में मुख्यमंत्री भगवंत मान और उस वायरल वीडियो के बीच कोई मेल नहीं पाया गया है, जिसने राज्य में राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया था। कथित वीडियो में मुख्यमंत्री की तरह दिखने वाले एक व्यक्ति को सिख गुरुओं के चित्रों पर शराब छिड़कते हुए दिखाया गया है। सरकार की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, वीडियो मनगढ़ंत था और मुख्यमंत्री की छवि खराब करने के उद्देश्य से एक बड़ी साजिश का हिस्सा था। सरकार ने दावा किया कि वीडियो के 1,191 फ़्रेमों के फोरेंसिक विश्लेषण से पता चला कि कोई भी भगवंत मान से मेल नहीं खाता है और दावा किया कि फुटेज में देखा गया व्यक्ति मुख्यमंत्री जैसा दिखने वाला एक अभिनेता था। सरकार ने लगाया सीएम को बदनाम करने की साजिश का आरोप पंजाब सरकार के अनुसार, विपक्षी दलों और कुछ राजनीतिक समूहों ने गलत सूचना फैलाने और जनता के बीच भ्रम पैदा करने के लिए वीडियो का इस्तेमाल किया था। बयान में कहा गया है कि मान शुरू से ही कहते रहे थे कि वीडियो फर्जी है और उन्होंने बार-बार मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। सरकार ने दावा किया कि निष्कर्षों ने मुख्यमंत्री की स्थिति की पुष्टि की है कि वीडियो वास्तविक नहीं था। जत्थेदार से मुलाकात को लेकर दावा बयान में आगे दावा किया गया कि मान ने अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज के समक्ष विवाद पर अपना पक्ष रखने का प्रयास किया था। सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान जत्थेदार को सूचित किया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति वह नहीं है और मामले को विस्तार से समझाने का अवसर मांगा। बयान में आरोप लगाया गया कि मान को पूरी तरह से अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया लेकिन पूरी बातचीत के दौरान गरिमा और सम्मान बनाए रखा गया। डीजीपी ने मामले की जांच का निर्देश दिया पंजाब सरकार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को वीडियो बनाने और प्रसारित करने में कथित रूप से शामिल लोगों की पहचान करने का निर्देश दिया है। बयान के अनुसार, मान ने अधिकारियों से कथित साजिश से जुड़े सभी व्यक्तियों का पता लगाने और उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। सरकार ने विवाद को “सच्चाई और झूठ” के बीच की लड़ाई बताया और कहा कि वीडियो बनाने या वितरित करने के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। राजनीतिक घमासान जारी यह विवाद पंजाब में चल रही राजनीतिक बहस के बीच आया है, जिसमें सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और विपक्षी दल वीडियो की प्रामाणिकता और मामले से निपटने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। जहां सरकार ने अपने दावों के समर्थन में फोरेंसिक निष्कर्षों का हवाला दिया है, वहीं विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सवाल उठाना जारी रखा है। यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है और राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में इस पर बहस जारी रहने की संभावना है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें जगह : चंडीगढ़, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया पंजाब सरकार का दावा है कि फॉरेंसिक जांच में सीएम भगवंत मान और वायरल वीडियो के बीच कोई मिलान नहीं पाया गया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)भगवंत मान का वायरल वीडियो(टी)पंजाब सरकार विवाद(टी)फॉरेंसिक जांच वीडियो(टी)मनगढ़ंत राजनीतिक वीडियो(टी)सीएम को बदनाम करने की साजिश(टी)आम आदमी पार्टी पंजाब(टी)विपक्ष गलत सूचना पंजाब(टी)अकाल तख्त जत्थेदार बैठक
‘भक्त वह सुन सकते हैं जो पीएम ने कभी नहीं कहा’: पवन खेड़ा ने मोदी-ट्रंप मुलाकात के रुख पर शशि थरूर को लताड़ा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:20 जून, 2026, 20:08 IST खेड़ा ने द्विपक्षीय आदान-प्रदान के थरूर के चरित्र-चित्रण और विदेश मंत्रालय (एमईए) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक रिकॉर्ड के बीच एक बड़ा अंतर बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर खेड़ा ने थरूर की सार्वजनिक टिप्पणी पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री के लिए उनके सहयोगी की प्रशंसा भौतिक वास्तविकताओं से कहीं अधिक है। फ़ाइल छवि/पीटीआई फ्रांस के एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हालिया द्विपक्षीय बैठक को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर तीखी सार्वजनिक असहमति पैदा हो गई है। कांग्रेस सांसद और विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष डॉ. शशि थरूर द्वारा सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री की कूटनीतिक पहुंच का समर्थन करने और समुद्री सुरक्षा के संबंध में भारत की चिंताओं को मजबूती से बताने के लिए उनकी प्रशंसा करने के बाद टकराव तेज हो गया। इस समर्थन पर साथी कांग्रेस नेता और मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने तुरंत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिन्होंने थरूर पर ऐसी कूटनीतिक सफलताओं की कल्पना करने का आरोप लगाया जो कभी नहीं हुईं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर खेड़ा ने थरूर की सार्वजनिक टिप्पणी पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री के लिए उनके सहयोगी की प्रशंसा भौतिक वास्तविकताओं से कहीं अधिक है। खेड़ा ने द्विपक्षीय आदान-प्रदान के थरूर के चरित्र-चित्रण और विदेश मंत्रालय (एमईए) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक रिकॉर्ड के बीच एक बड़ा अंतर बताया। उन्होंने तर्क दिया कि आधिकारिक रीडआउट में ज़बरदस्त दावे या मजबूत प्रतिवाद का कोई सबूत नहीं था, जिसे थरूर ने पता लगाने का दावा किया था, मज़ाक में उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री के भक्त” कुछ भी नहीं बोले जाने पर भी संदेश सुनने में सक्षम लगते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि मेरे वरिष्ठ सहयोगी डॉ. शशि थरूर की पीएम मोदी के प्रति प्रशंसा भौतिक दुनिया की सीमाओं को पार कर गई है। ऐसा लगता है कि वह अब वह सुनने में सक्षम हैं जो मोदी कहते भी नहीं हैं। मोदी-ट्रंप बैठक से इतर विदेश मंत्रालय की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार… pic.twitter.com/6U7BFRxAgZ – पवन खेड़ा 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ (@पवनखेरा) 20 जून, 2026 विपक्ष ने अनसुलझी सुरक्षा शिकायतों का हवाला दिया द्विपक्षीय वार्ता की अपनी आलोचना का समर्थन करने के लिए, खेड़ा ने तीन महत्वपूर्ण सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर प्रकाश डाला, उनका दावा है कि प्रधानमंत्री अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ अपनी बैठक के दौरान प्रभावी ढंग से चुनौती देने में विफल रहे। इनमें से प्रमुख था ओमान की खाड़ी में संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना द्वारा तीन भारतीय नागरिक नाविकों की नृशंस हत्या के संबंध में आधिकारिक उल्लेख की कमी, एक ऐसी घटना जिसने पहले नई दिल्ली से औपचारिक राजनयिक विरोध शुरू कर दिया था। खेड़ा ने यह भी देखा कि ऑपरेशन सिन्दूर की सालगिरह के बाद यह पहली मोदी-ट्रम्प बैठक होने के बावजूद, आधिकारिक रीडआउट ने कोई संकेत नहीं दिया कि भारत ने ट्रम्प के बार-बार किए गए सार्वजनिक दावे का खंडन किया है – जो 120 से अधिक बार किया गया है – कि उन्होंने भारत को जवाबी व्यापार परिणामों की धमकी देकर युद्धविराम के लिए मजबूर किया। इसके अलावा, कांग्रेस मीडिया प्रमुख ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना पर हालिया हमले के संबंध में किसी भी दस्तावेजी चर्चा के अभाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की। यह जहाज MILAN-2026 समुद्री अभ्यास के दौरान भारतीय नौसेना का आधिकारिक अतिथि था, और खेरा ने तर्क दिया कि भारत के रणनीतिक पिछवाड़े के भीतर ऐसे जहाज पर हमले के लिए सीधी कूटनीति की आवश्यकता होती है, जो कि विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि ऐसा नहीं हुआ। थरूर ने राष्ट्रीय सुरक्षा निरंतरता पर रुख का बचाव किया डॉ. शशि थरूर ने कहा है कि राष्ट्रीय हित और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मामले एक एकीकृत घरेलू मोर्चे की मांग करते हैं जो नियमित पक्षपातपूर्ण राजनीति से ऊपर उठे। जी7 द्विपक्षीय के रणनीतिक मूल्य पर बोलते हुए, थरूर ने तर्क दिया कि उनके सूत्रों ने पुष्टि की कि बैठक गर्मजोशी और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई, और प्रधान मंत्री ने सार्वजनिक बयानों और निजी सत्रों दोनों में भारत की स्थिति को उचित रूप से स्पष्ट किया था। थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम एशिया में वाणिज्यिक जहाजों पर काम करने वाले नागरिक नाविकों की सुरक्षा के संबंध में भारत का संदेश आवश्यक था, उन्होंने कहा कि निर्दोष नाविकों को कभी भी क्षेत्रीय नाकेबंदी में युद्ध का निशाना नहीं बनना चाहिए। व्यापार घर्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा के बारे में विपक्षी खेमे के भीतर अंतर्निहित चिंताओं को स्वीकार करते हुए, अनुभवी राजनयिक ने जोर देकर कहा कि अमेरिका एक अपरिहार्य वैश्विक शक्ति बना हुआ है, जिसके साथ भारत को रचनात्मक जुड़ाव बनाए रखना चाहिए, उन्होंने कहा कि विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के एक सामान्य सिद्धांत की राजनीतिक स्पेक्ट्रम में सराहना की जानी चाहिए। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में पथिकृत सेन गुप्ता पथिकृत सेन गुप्ता News18.com के वरिष्ठ एसोसिएट संपादक हैं और लंबी कहानी को छोटा करना पसंद करते हैं। वह राजनीति, खेल, वैश्विक मामलों, अंतरिक्ष, मनोरंजन और भोजन पर छिटपुट रूप से लिखते हैं। वह …और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘भक्त वह सुन सकते हैं जो पीएम ने कभी नहीं कहा’: पवन खेड़ा ने मोदी-ट्रंप मुलाकात के रुख पर शशि थरूर को घेरा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, 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एक फैसला, छह ‘लापता’ सांसद और एक सेना में फूट की चर्चा: क्यों महाराष्ट्र की राजनीति ओम राजे निंबालकर पर नजर रख रही है | भारत समाचार

आखरी अपडेट:20 जून, 2026, 19:00 IST निंबालकर उन छह शिव सेना (यूबीटी) सांसदों में से एक हैं, जो रिपोर्टों के मुताबिक, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना में जाने पर विचार कर रहे हैं। मुंबई की एक सीबीआई अदालत ने शनिवार को 2006 में महाराष्ट्र कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर की हत्या के मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। छवि/एएनआई मुंबई की एक विशेष केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अदालत ने 2006 के हाई-प्रोफाइल कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी के दोहरे हत्याकांड मामले में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री पदमसिंह पाटिल और सात अन्य को बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश एसआर नवांदर ने आरोपी से सरकारी गवाह बने पारसमल जैन के बयानों में पर्याप्त विरोधाभासों को देखते हुए फैसला सुनाया कि अभियोजन पक्ष साजिश की एक निश्चित श्रृंखला स्थापित करने में विफल रहा। ऐतिहासिक न्यायिक निर्णय बीस साल की कानूनी लड़ाई का नाटकीय समापन करता है जिसने धाराशिव जिले के राजनीतिक परिदृश्य को निर्धारित किया है। हालाँकि, कानूनी निष्कर्ष ने तुरंत एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। पवनराजे के बेटे, धाराशिव के सांसद ओमप्रकाश राजे निंबालकर के उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) द्वारा बुलाई गई लोकसभा सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं होने के कुछ ही घंटों बाद यह फैसला आया। 24 घंटे के सख्त अल्टीमेटम और पार्टी व्हिप के बावजूद ओमराजे और पांच अन्य पार्टी सांसदों की अनुपस्थिति ने उद्धव सेना के भीतर एक आसन्न संरचनात्मक विभाजन के बारे में तीव्र अटकलों को हवा दे दी है, विद्रोही विधायक कथित तौर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट के साथ विलय करने की स्थिति में हैं। कानूनी समापन और ऑपरेटिव दलबदल का अंतर्विरोध अदालत के फैसले और पार्टी के आंतरिक विद्रोह के अंतर्संबंध ने महाराष्ट्र की गुटीय राजनीति के ऑप्टिकल ढांचे को पूरी तरह से बदल दिया है। विपक्षी महा विकास अघाड़ी गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं ने पहले दावा किया था कि ओम राजे अपने परिवार के लिए अनुकूल कानूनी परिणाम के वादे के तहत सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में शामिल होने पर विचार कर रहे थे। पदमसिंह पाटिल – जो उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के जैविक भाई हैं – अब सभी सह-आरोपियों के साथ पूरी तरह दोषमुक्त हो गए हैं, धाराशिव सत्ता गलियारे के अंदर संरचनात्मक उत्तोलन बिंदु रातोंरात बदल गए हैं। ओम राजे निंबालकर की राजनीतिक पहचान पूरी तरह से 2006 में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर उनके पिता की नृशंस हत्या के कारण बनी, जिसने स्थानीय सहानुभूति की एक बड़ी लहर पैदा की और उन्हें 26 साल की उम्र में सार्वजनिक जीवन में प्रेरित किया। दो दशकों तक, पाटिल के मजबूत सहकारी चीनी व्यापारी नेटवर्क के खिलाफ न्याय की खोज ने ओम राजे की जमीनी स्तर की अपील के एकमात्र आधार के रूप में काम किया। बरी होने से लंबे समय से चले आ रहे कानूनी दाग को पवार परिवार के नेटवर्क से दूर कर दिया गया है, साथ ही ओम राजे को विकासात्मक आधार पर अपनी उत्तरजीविता रणनीतियों का सख्ती से मूल्यांकन करने के लिए मजबूर किया गया है। स्थानीय विचार-विमर्श गुटीय संरेखण की कुंजी है फैसले के बाद प्रेस को संबोधित करते हुए, ओम राजे ने न्यायिक परिणाम और अपने रणनीतिक बदलावों के बीच किसी भी सीधे संबंध से इनकार किया, इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान यूबीटी नेतृत्व के साथ उनकी आपत्तियां निर्वाचन क्षेत्र प्रबंधन की तीव्र वास्तविकताओं से उपजी हैं। उन्होंने तर्क दिया कि मतदाताओं का खाली हाथ सामना करना अस्थिर हो गया है, जो सत्तारूढ़ गठबंधन और अलग-थलग विपक्षी ब्लॉक के बीच धन आवंटन में भारी असंतुलन की ओर इशारा करता है। विधायक ने संगठनात्मक उपेक्षा के बारे में भी गंभीर सवाल उठाए, जिसमें शीर्ष पार्टी प्रबंधकों की ओर से जमीनी स्तर पर पहुंच की स्पष्ट कमी देखी गई। विद्रोही सांसद समूह के लिए तत्काल प्राथमिकता शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ कानूनी रूप से सुरक्षित विलय को अंजाम देने के लिए दल-बदल विरोधी कानून की संख्या सीमा को पार करना बनी हुई है। ओम राजे ने पुष्टि की है कि वह अपने अंतिम गठबंधन की घोषणा करने से पहले स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विस्तृत परामर्श करने के लिए धाराशिव लौटेंगे। जैसा कि राजनीतिक गुट प्रभाव के लिए तैयार हैं, 2006 की हत्या के मुकदमे का पतन साबित करता है कि महाराष्ट्र के अस्थिर पारिस्थितिकी तंत्र में, एक एकल अदालत का फैसला विधायी गणित को पूरी तरह से नया रूप देने की शक्ति रखता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में पथिकृत सेन गुप्ता पथिकृत सेन गुप्ता News18.com के वरिष्ठ एसोसिएट संपादक हैं और लंबी कहानी को छोटा करना पसंद करते हैं। वह राजनीति, खेल, वैश्विक मामलों, अंतरिक्ष, मनोरंजन और भोजन पर छिटपुट रूप से लिखते हैं। वह …और पढ़ें न्यूज़ इंडिया एक फैसला, छह ‘लापता’ सांसद और एक सेना में फूट की चर्चा: क्यों महाराष्ट्र की राजनीति ओम राजे निंबालकर पर नजर रख रही है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)महाराष्ट्र(टी)शिवसेना(टी)उद्धव ठाकरे(टी)एकनाथ शिंदे(टी)बीजेपी(टी)कोर्ट
‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा के बीच, शिवसेना यूबीटी सांसद ओम राजे निंबालकर का कहना है कि वह 2 दिनों में अगला कदम उठाएंगे | भारत समाचार

आखरी अपडेट:20 जून, 2026, 18:41 IST ऑपरेशन टाइगर की अटकलों के बीच, शिवसेना यूबीटी सांसद ओम राजे निंबालकर दो दिनों में अपने राजनीतिक रुख की घोषणा करेंगे, उन्होंने उद्धव या आदित्य ठाकरे की आलोचना नहीं करने की कसम खाई है। महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर की अटकलों के बीच, शिवसेना यूबीटी सांसद ओम राजे निंबालकर दो दिनों में अपने राजनीतिक रुख की घोषणा करेंगे, उन्होंने उद्धव या आदित्य ठाकरे की आलोचना नहीं करने की कसम खाई है। (छवि: एक्स) शिवसेना (यूबीटी) सांसद ओम राजे निंबालकर ने यह घोषणा करके अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों को हवा दे दी है कि वह अगले दो दिनों के भीतर अपना रुख स्पष्ट करेंगे, जबकि कथित “ऑपरेशन टाइगर” के आसपास चर्चा महाराष्ट्र की राजनीति पर हावी है। पुणे में बोलते हुए, निंबालकर ने कहा कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों और समर्थकों से परामर्श करने के बाद ही अंतिम निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा, “मैं जनता से परामर्श करने के बाद अपना राजनीतिक रुख स्पष्ट करूंगा। मैं अगले दो दिनों के भीतर अपने राजनीतिक भविष्य और कार्रवाई के बारे में अंतिम निर्णय लूंगा।” उद्धव, आदित्य ठाकरे की आलोचना से इंकार अपने अगले कदम को लेकर अनिश्चितता के बावजूद, उस्मानाबाद के सांसद ने स्पष्ट किया कि वह शिव सेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे या पार्टी नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ नहीं बोलेंगे। निंबालकर ने कहा, “मेरे राजनीतिक फैसले के बावजूद, मैंने कभी भी उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के खिलाफ नहीं बोला है और न ही कभी बोलूंगा।” उन्होंने कहा कि भविष्य में वह जो भी रास्ता चुनेंगे, वह दोनों नेताओं की आलोचना करने या उनके बारे में नकारात्मक टिप्पणी करने से बचेंगे। संदर्भ 2022 शिवसेना विभाजन निंबालकर ने पार्टी से संभावित निकास की अटकलों का भी जवाब दिया, उन्होंने बताया कि वह 2022 में शिवसेना विभाजन के दौरान उद्धव ठाकरे खेमे के साथ बने रहे। उन्होंने कहा, ”2022 में जब शिवसेना में विभाजन हुआ तो मैं छोड़ सकता था। इसलिए अब मेरे जाने को लेकर मुझ पर आरोप लगाना अनुचित है।” यह टिप्पणी “ऑपरेशन टाइगर” पर तीव्र राजनीतिक चर्चा के बीच आई है, एक शब्द जिसका इस्तेमाल महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में प्रतिद्वंद्वी शिविरों के नेताओं से जुड़े संभावित दलबदल और पुनर्गठन का वर्णन करने के लिए किया गया है। महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों पर पैनी नजर निंबालकर के बयान से अटकलें तेज होने की संभावना है कि क्या राज्य में आगामी राजनीतिक लड़ाई से पहले शिवसेना (यूबीटी) के और नेता पाला बदल सकते हैं। उनके फैसले पर बारीकी से नजर रखे जाने की उम्मीद है, खासकर तब जब सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी दल महाराष्ट्र के उभरते राजनीतिक परिदृश्य में अपनी रणनीतियों का आकलन करना जारी रख रहे हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा के बीच, शिवसेना यूबीटी सांसद ओम राजे निंबालकर का कहना है कि वह 2 दिनों में अगला कदम उठाएंगे अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)ओम राजे निंबालकर राजनीतिक भविष्य(टी)शिवसेना यूबीटी(टी)ऑपरेशन टाइगर महाराष्ट्र(टी)उद्धव ठाकरे(टी)आदित्य ठाकरे(टी)महाराष्ट्र राजनीति(टी)शिवसेना विभाजन 2022(टी)उस्मानाबाद एमपी
Trump Unveils New Air Force One Luxury Jet

वॉशिंगटन डीसी2 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को नए एयर फोर्स वन प्लेन का अनावरण किया। यह पहले कतर सरकार के पास था। पिछले साल मई में यह बोइंग 747 प्लेन ट्रम्प को गिफ्ट किया गया था। इसके बाद इसे अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान के रूप में तैयार किया गया। मैरीलैंड स्थित जॉइंड बेस एंड्रयू के एक विशाल हैंगर में आयोजित कार्यक्रम में ट्रम्प ने नए प्लेन को दुनिया का सबसे शानदार राष्ट्रपति विमान बताया। ट्रम्प ने कहा, “इस विमान को उड़ते हुए व्हाइट हाउस में बदला गया है। ऐसी लग्जरी दुनिया ने पहले कभी नहीं देखी होगी।” नए एयरफोर्स-1 की 3 फोटोज राष्ट्रपति ट्रम्प ने जॉइंट बेस एंड्रयूज’ (मैरीलैंड) में नए एयर फोर्स वन को दुनिया के सामने पेश किया। प्लेन से उतरते समय ट्रम्प के पसंदीदा गाना गॉड ब्लेस द यूएसए की धुन बज रही थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नए एयर फोर्स वन के सामने खड़े होकर भाषण देते हुए। पुराने एयर फोर्स-1 की पहचान खत्म, ट्रम्प की पसंद के रंगों में तैयार नए विमान का रंग-रूप मौजूदा एयर फोर्स वन से पूरी तरह अलग है। पुराने विमान के हल्के नीले रंग की जगह इसके निचले हिस्से को गहरे नेवी ब्लू रंग से रंगा गया है, जबकि उसके ऊपर लाल पट्टी बनाई गई है। विमान के उस हिस्से पर, जहां से राष्ट्रपति चढ़ते हैं, राष्ट्रपति की आधिकारिक मुहर लगाई गई है। वहीं पिछले हिस्से पर अमेरिकी झंडा बनाया गया है। ट्रम्प ने कहा कि जब यह प्लेन लंदन, जर्मनी या दुनिया के किसी अन्य एयरपोर्ट पर उतरेगा तो कोई भी इसकी बराबरी नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा, “हमारे देश का प्रतिनिधित्व इसी तरह होना चाहिए। रंग और डिजाइन मेरी पसंद के हैं, यह मैं मानता हूं।” उन्होंने यह भी बताया कि नया एयर फोर्स वन अगले महीने 4 जुलाई को अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान फ्लाईपास्ट करेगा। ट्रम्प नाटो समिट में हिस्सा लेने नए प्लेन से जाएंगे ट्रम्प ने पुष्टि की कि वह अगले महीने तुर्किए की राजधानी अंकारा में होने वाले नाटो समिट में इसी से जाएंगे। इसके बाद वे नवंबर में भी चीन दौरे पर इसका इस्तेमाल करेंगे। ट्रम्प ने कहा कि इस हफ्ते G7 समिट के दौरान फ्रांस दौरे पर उन्होंने आखिरी बार इस प्लेन का इस्तेमाल किया। 2028 तक ही कतर के गिफ्ट प्लेन का इस्तेमाल ट्रम्प सरकार का कहना है कि कतर से मिला यह प्लेन एक ‘ब्रिज एयरक्राफ्ट’ यानी अस्थायी समाधान है। इसका इस्तेमाल तब तक किया जाएगा, जब तक बोइंग नए राष्ट्रपति विमान तैयार नहीं कर देता। बोइंग के नए प्लेन 2024 में मिलने थे, लेकिन प्रोजेक्ट में देरी हो गई। अब उनकी डिलीवरी 2028 तक होने की संभावना है। ट्रम्प ने कहा, हम थोड़ी मुश्किल स्थिति में फंस गए थे क्योंकि नए प्लेन समय पर नहीं मिल रहे थे। इसलिए मैंने कतर के अमीर से पूछा कि क्या उनके किसी प्लेन का इस्तेमाल किया जा सकता है।सामान्य राष्ट्रपति ऐसा नहीं करते। वे इन सबसे दूरी बनाए रखना चाहते हैं। कतर के से मिले गिफ्ट पर उठे थे सवाल नए एयरफोर्स वन की अनुमानित कीमत करीब 40 करोड़ डॉलर (3600 करोड़ रुपए) बताई गई है। हालांकि विदेशी सरकार से इतना महंगा उपहार स्वीकार करने को लेकर अमेरिका में नैतिकता और कानूनी सवाल उठे थे। आलोचकों ने पूछा था कि क्या किसी विदेशी सरकार से इतना महंगा विमान लेना उचित है। ट्रम्प पहले कह चुके हैं कि राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद वह इस विमान का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उन्होंने कहा था कि बाद में इसे किसी राष्ट्रपति पुस्तकालय को दान कर दिया जाएगा। ट्रम्प को मई 2025 में जब लग्जरी बोइंग 747-8 जंबो जेट गिफ्ट मिला था, तब यह ऐसा दिखता था। ट्रम्प की पहली पारी से जुड़ा है रंग बदलने का विवाद राष्ट्रपति विमान का रंग बदलने की ट्रम्प की योजना नई नहीं है। अपने पहले कार्यकाल में भी उन्होंने नए एयर फोर्स वन को अपने निजी विमान की तरह लाल, सफेद और नेवी ब्लू रंग देने का फैसला किया था। लेकिन मार्च 2023 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यह फैसला बदल दिया था। एयर फोर्स की समीक्षा में कहा गया था कि गहरे रंगों के इस्तेमाल से लागत बढ़ सकती है और विमान की डिलीवरी में और देरी हो सकती है। हालांकि सत्ता में लौटने के बाद ट्रम्प ने फिर अपनी पसंद की रंग योजना लागू कर दी। एयर फोर्स ने यह भी बताया कि भविष्य में कैबिनेट मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के सरकारी विमानों पर भी इसी तरह का लाल, सफेद और नेवी ब्लू रंग इस्तेमाल किया जाएगा। पुराने एयर फोर्स वन अभी सर्विस में रहेंगे एयर फोर्स के एक अधिकारी के अनुसार मौजूदा राष्ट्रपति विमान, जिन्हें VC-25A कहा जाता है, अभी रिटायर नहीं होंगे। वे तब तक सेवा में बने रहेंगे जब तक नए VC-25B विमान पूरी तरह तैयार होकर बेड़े में शामिल नहीं हो जाते। इस दौरान कतर से मिला नया विमान और मौजूदा दोनों एयर फोर्स वन राष्ट्रपति की यात्राओं के लिए उपलब्ध रहेंगे। राष्ट्रपति एयरलिफ्ट ग्रुप हर मिशन की जरूरत के हिसाब से तय करेगा कि किस यात्रा में कौन सा विमान इस्तेमाल किया जाएगा। पुराने एयर फोर्स वन के बारे में जानिए ट्रम्प अब तक बोइंग 747-200B का एयर फोर्स वन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। बोइंग 747-200B अपनी सुरक्षा, संचार, और कमांड क्षमताओं के कारण दुनिया का सबसे सुरक्षित विमान माना जाता है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए एक चलते-फिरते ऑफिस की तरह है। वैसे तो दो बोइंग 747-200B विमान हैं, जिन्हें एक साथ तैयार रखा जाता है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति की सवारी वाला विमान ही एयर फोर्स वन कहलाता है। नए एयर फोर्स वन में हवा में ईंधन भरने वाली खूबियां नहीं एयर फोर्स वन में हवा में ही ईंधन भरने वाली खूबियां हैं जो नए एयर फोर्स वन में नहीं है। नए प्लेन को तैयार करने के बजट को कंट्रोल में रखने के लिए व्हाइट हाउस ने इस फीचर को हटाने का फैसला किया था, क्योंकि विमान में हवा में ईंधन भरने का सिस्टम लगाने में बहुत ज्यादा खर्च आता है। पिछले 30 साल के इतिहास में किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति के सवार रहते हुए कभी भी
Uttarakhand Cricketers Journey to Indian T20 Team & World Cup

घास काटने से लेकर विश्व कप तक का सफर तय करने वाली उत्तराखंड की बेटी प्रेमा रावत। कपकोट के दूरस्थ सुमटी गांव की पहाड़ियों पर दौड़ती एक छोटी-सी बच्ची भारतीय महिला टी-20 टीम में शामिल हो गई हैं। कभी भाइयों के साथ खेतों, आंगन और गली-मोहल्लों में क्रिकेट खेलने वाली प्रेमा रावत अब विश्व कप में भारत की जर्सी पहनकर उतरेंगी। . 24 वर्षीय प्रेमा का भारतीय टीम में चयन सिर्फ एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि पहाड़ के उस सपने की कहानी है, जो सीमित संसाधनों के बीच भी बड़ा होने का साहस रखता है। प्रेमा रावत बचपन में घास काटने और खेतों के काम में परिवार का हाथ बंटाती थीं। भाइयों के साथ खेलते-खेलते सीखा क्रिकेट प्रेमा ने कक्षा दो तक की पढ़ाई गांव के प्राथमिक विद्यालय में की। बाद में परिवार बरेली चला गया। बचपन में वह अपने भाइयों के साथ क्रिकेट खेलती थीं। घर के आंगन, खेतों और खाली मैदानों में शुरू हुआ खेल धीरे-धीरे उनका जुनून बन गया। परिवार ने कभी यह नहीं कहा कि क्रिकेट लड़कियों का खेल नहीं है। पिता केदार सिंह रावत, जो एयरफोर्स में कार्यरत हैं, और मां बसंती देवी ने हर कदम पर उनका साथ दिया। क्रिकेटर प्रेमा अपने भाई हिमांशु और विमल के साथ। डांट भी सुनी, लेकिन नहीं छोड़ा बल्ला गांव में जब अधिकांश लड़कियां पारंपरिक कामों तक सीमित रहती थीं, तब प्रेमा के हाथों में बल्ला और गेंद हुआ करती थी। कई बार गेंद खेतों में चली जाती, पड़ोसियों की नाराजगी भी झेलनी पड़ती, लेकिन उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। मई-जून की तेज गर्मी में भी बरेली के मैदानों में घंटों अभ्यास करना उनकी दिनचर्या बन गया। छुट्टियों में गांव आने पर भी वह मालूखेत मिनी स्टेडियम में युवाओं के साथ अभ्यास करना नहीं भूलती थीं। क्रिकेटर भी, घस्यारी भी मां बसंती देवी बताती हैं कि क्रिकेट में नाम कमाने के बाद भी प्रेमा गांव की बेटी ही बनी हुई हैं। उन्हें घास काटना, खेतों की निराई-गुड़ाई करना और मवेशियों की देखभाल करना भी आता है। गांव लौटने पर वह पूरी तरह पहाड़ी जीवन में ढल जाती हैं। यही सादगी और जमीन से जुड़ाव उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रेमा ने अपनी अलग पहचान बनाई और एक-एक सीढ़ी चढ़ते हुए राष्ट्रीय टीम तक पहुंचीं। उत्तराखंड टीम से खुला राष्ट्रीय टीम का रास्ता उत्तराखंड की अंडर-19, अंडर-23 और सीनियर टीम से खेलते हुए प्रेमा ने अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी लेग स्पिन गेंदबाजी लगातार प्रभावी रही। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें इंडिया-ए टीम में मौका मिला। हाल ही में महिला एशिया कप राइजिंग स्टार्स टूर्नामेंट में उन्होंने 8 विकेट लेकर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। फाइनल में उनकी मैच जिताऊ गेंदबाजी ने भारतीय टीम के दरवाजे खोल दिए। महिला एशिया कप इमर्जिंग टूर्नामेंट में शानदार गेंदबाजी और उपयोगी बल्लेबाजी से प्रेमा रावत चयनकर्ताओं की नजर में आईं। WPL ने दिया बड़ा मंच प्रेमा महिला प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम का हिस्सा भी रह चुकी हैं। देश और दुनिया की दिग्गज खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उनके करियर का अहम पड़ाव साबित हुआ। यहीं से उनके खेल में आत्मविश्वास बढ़ा और राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने का रास्ता मजबूत हुआ। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर पोस्ट कर बधाई दी। गांव में जश्न, बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा प्रेमा के चयन की खबर पहुंचते ही सुमटी गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने उनके घर पहुंचकर मां, दादी और परिवार के अन्य सदस्यों को मिठाई खिलाई। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि महेश सिंह कहते हैं कि प्रेमा की सफलता के बाद गांव की बेटियां भी खेलों में आगे बढ़ने का सपना देखने लगी हैं। हालांकि गांव में खेल सुविधाओं की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारतीय महिला टी-20 टीम में प्रेमा रावत के चयन की खबर मिलते ही सुमटी गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। इंग्लैंड-वेल्स में खेला जा रहा टी-20 विश्व कप इंग्लैंड और वेल्स की मेजबानी में महिला टी-20 विश्व कप 2026 खेला जा रहा है। 12 जून से शुरू हुए इस टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला 5 जुलाई को लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान में खेला जाएगा। इस बार 12 टीमें कुल 33 मैचों में खिताब के लिए मुकाबला कर रही हैं। भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में शानदार शुरुआत की है। टीम ने पाकिस्तान और नीदरलैंड को हराकर सेमीफाइनल की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत की है। ग्रुप-ए में भारत का अगला मुकाबला दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों से होना है। स्टार स्पिनर श्रेयंका पाटिल के चोटिल होने के बाद उत्तराखंड की प्रेमा रावत को भारतीय टीम में शामिल किया गया है। हाल ही में इंडिया-ए के लिए शानदार प्रदर्शन करने वाली प्रेमा पहली बार विश्व कप जैसे बड़े मंच पर भारतीय टीम का हिस्सा बनी हैं। ऐसे में उत्तराखंड समेत पूरे देश की निगाहें अब इस युवा लेग स्पिनर पर भी रहेंगी। —————- ये खबर भी पढ़ें : कुनाल बोले- मस्ट विन मैच था, इसलिए लंबा खेला: रणजी में 7 घंटे तक क्रीज पर डटे रहे उत्तराखंड के कप्तान, दोहरा शतक जड़ा रणजी ट्रॉफी के निर्णायक मुकाबले में उत्तराखंड के कप्तान कुनाल चंदेला ने 207 रन की मैराथन पारी खेली। देहरादून के अभिमन्यु क्रिकेट अकादमी मैदान पर असम के खिलाफ खेली गई यह पारी न सिर्फ टीम को संकट से बाहर निकालने वाली रही, बल्कि यह उनके फर्स्ट क्लास करियर का पहला दोहरा शतक भी बना। उन्होंने कहा- मस्ट विन मैच था, इसलिए एक-एक सत्र खेलता गया। पढ़ें पूरी खबर…






