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Amazon’s Jeff Bezos says human water consumption is limiting AI’s potential

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पेरिस14 मिनट पहले

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अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस का मानना है कि AI नौकरियों को खत्म करने के बजाय नए रोजगार पैदा करेगी। उन्होंने कहा कि यह टेक्नोलॉजी इनोवेशन की रफ्तार बढ़ाएगी, जिससे भविष्य में बेरोजगारी के बजाय लेबर शॉर्टेज पैदा हो सकती है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पानी की कमी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार रुक सकती है।

पेरिस में आयोजित ‘विवाटेक 2026’ कॉन्फ्रेंस में जेफ बेजोस ने AI और रोजगार को लेकर चल रही वैश्विक बहस पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि AI नई समस्याओं को पहचानने और उन्हें सुलझाने की प्रोसेस को आसान बनाकर इंसानी क्रिएटिविटी का दायरा बढ़ाएगा।

बेजोस ने कहा कि AI लेबर शॉर्टेज पैदा करने जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए लोग ज्यादा से ज्यादा समस्याओं को पहचानने में सक्षम हो सकेंगे। इस चर्चा में ब्लू ओरिजिन के चीफ एग्जीक्यूटिव देव लिम्प ने भी हिस्सा लिया था।

बेजोस ने नए वेंचर ‘प्रोमेथियस’ के बारे में बताया

बेजोस ने अपने नए वेंचर ‘प्रोमेथियस’ का जिक्र करते हुए बताया कि यह एक AI स्टार्टअप है। इसका उद्देश्य एक ‘आर्टिफिशियल जनरल इंजीनियर’ तैयार करना है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह की टेक्नोलॉजी इनोवेशन साइकल की रफ्तार को काफी तेज कर देगी और उन आइडियाज पर काम करना संभव बनाएगी, जिन्हें पहले सोचना भी नामुमकिन था।

बेजोस ने कहा कि अगर हम ड्रीम-बिल्ड लूप (सोचने और बनाने के चक्र) को तेज कर सकें, तो सभी आइडियाज मुमकिन हो जाएंगे। इसके बाद हम अपनी क्षमताओं से नहीं, बल्कि अपनी कल्पनाओं से सीमित होंगे।

सुपर-इंटेलिजेंस के लिए कूलिंग रिसोर्सेज जरूरी

बेजोस ने AI के कारण पर्यावरण पर पड़ रहे असर, खासकर डेटा सेंटर्स के लिए भारी मात्रा में पानी और बिजली की जरूरत पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अगर AI की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करना है, तो इसके इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कुछ खास संसाधनों को प्राथमिकता देनी होगी। बायोलॉजिकल लिमिट्स सच हैं, लेकिन डिजिटल पोटेंशियल असीम है।

अगर हम सिर्फ बुनियादी इंसानी आराम को बनाए रखने के लिए अपने डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से कूलिंग रिसोर्सेज (पानी और कूलिंग के साधन) को रोकते हैं, तो हम एक ऐसी सुपर-इंटेलिजेंस के जन्म में देरी कर रहे हैं, जो शुरुआत में ही हमारी सभी संसाधन संबंधी समस्याओं को हल कर सकती है। बेजोस के इस बयान ने डेटा सेंटर्स के विस्तार और पर्यावरण के बीच के संतुलन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

सिर्फ घूमने नहीं, चांद पर रहने जा रहे हैं

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अलावा बेजोस ने स्पेस एक्सप्लोरेशन को लेकर भी अपना लॉन्ग-टर्म विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी से बाहर इंसानों की स्थायी बस्तियां बसाने की दिशा में चंद्रमा पहला कदम होगा।

बेजोस ने कहा कि हम चंद्रमा पर रहने के लिए जा रहे हैं, सिर्फ घूमने के लिए नहीं। उन्होंने बताया कि चंद्रमा पर मौजूद संसाधन और वहां से कम लॉन्चिंग कॉस्ट (कम लागत) इसे भविष्य के स्पेस मिशनों के लिए एक मुख्य केंद्र बनाएंगे।

मंगल पर बस्ती का रास्ता होगा साफ

बेजोस ने आगे कहा कि चंद्रमा पर खोज के जरिए आगे चलकर मंगल ग्रह और अन्य जगहों पर इंसानी बस्तियां बसाने का रास्ता साफ होगा।

उन्होंने अंतरिक्ष में इंसानी विस्तार को बेहद जरूरी बताया, ताकि पृथ्वी पर चल रही आर्थिक ग्रोथ और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक सही संतुलन बनाया जा सके।

क्या होता है ‘आर्टिफिशियल जनरल इंजीनियर’?

टेक की दुनिया में यह एक ऐसी एडवांस्ड AI प्रणाली को संदर्भित करता है जो इंसानी इंजीनियरों की तरह ही खुद से किसी जटिल समस्या को समझ सकती है, उसका ब्लूप्रिंट तैयार कर सकती है और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के उसे कोड या डिजाइन के जरिए हल कर सकती है। जेफ बेजोस का नया स्टार्टअप ‘प्रोमेथियस’ इसी विजन पर काम कर रहा है।

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अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस का मानना है कि AI नौकरियों को खत्म करने के बजाय नए रोजगार पैदा करेगी। उन्होंने कहा कि यह टेक्नोलॉजी इनोवेशन की रफ्तार बढ़ाएगी, जिससे भविष्य में बेरोजगारी के बजाय लेबर शॉर्टेज पैदा हो सकती है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पानी की कमी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार रुक सकती है।

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बेजोस ने कहा कि AI लेबर शॉर्टेज पैदा करने जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए लोग ज्यादा से ज्यादा समस्याओं को पहचानने में सक्षम हो सकेंगे। इस चर्चा में ब्लू ओरिजिन के चीफ एग्जीक्यूटिव देव लिम्प ने भी हिस्सा लिया था।

बेजोस ने नए वेंचर ‘प्रोमेथियस’ के बारे में बताया

बेजोस ने अपने नए वेंचर ‘प्रोमेथियस’ का जिक्र करते हुए बताया कि यह एक AI स्टार्टअप है। इसका उद्देश्य एक ‘आर्टिफिशियल जनरल इंजीनियर’ तैयार करना है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह की टेक्नोलॉजी इनोवेशन साइकल की रफ्तार को काफी तेज कर देगी और उन आइडियाज पर काम करना संभव बनाएगी, जिन्हें पहले सोचना भी नामुमकिन था।

बेजोस ने कहा कि अगर हम ड्रीम-बिल्ड लूप (सोचने और बनाने के चक्र) को तेज कर सकें, तो सभी आइडियाज मुमकिन हो जाएंगे। इसके बाद हम अपनी क्षमताओं से नहीं, बल्कि अपनी कल्पनाओं से सीमित होंगे।

सुपर-इंटेलिजेंस के लिए कूलिंग रिसोर्सेज जरूरी

बेजोस ने AI के कारण पर्यावरण पर पड़ रहे असर, खासकर डेटा सेंटर्स के लिए भारी मात्रा में पानी और बिजली की जरूरत पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अगर AI की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करना है, तो इसके इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कुछ खास संसाधनों को प्राथमिकता देनी होगी। बायोलॉजिकल लिमिट्स सच हैं, लेकिन डिजिटल पोटेंशियल असीम है।

अगर हम सिर्फ बुनियादी इंसानी आराम को बनाए रखने के लिए अपने डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से कूलिंग रिसोर्सेज (पानी और कूलिंग के साधन) को रोकते हैं, तो हम एक ऐसी सुपर-इंटेलिजेंस के जन्म में देरी कर रहे हैं, जो शुरुआत में ही हमारी सभी संसाधन संबंधी समस्याओं को हल कर सकती है। बेजोस के इस बयान ने डेटा सेंटर्स के विस्तार और पर्यावरण के बीच के संतुलन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

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मंगल पर बस्ती का रास्ता होगा साफ

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उन्होंने अंतरिक्ष में इंसानी विस्तार को बेहद जरूरी बताया, ताकि पृथ्वी पर चल रही आर्थिक ग्रोथ और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक सही संतुलन बनाया जा सके।

क्या होता है ‘आर्टिफिशियल जनरल इंजीनियर’?

टेक की दुनिया में यह एक ऐसी एडवांस्ड AI प्रणाली को संदर्भित करता है जो इंसानी इंजीनियरों की तरह ही खुद से किसी जटिल समस्या को समझ सकती है, उसका ब्लूप्रिंट तैयार कर सकती है और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के उसे कोड या डिजाइन के जरिए हल कर सकती है। जेफ बेजोस का नया स्टार्टअप ‘प्रोमेथियस’ इसी विजन पर काम कर रहा है।

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