छह शिव सेना यूबीटी सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए, जिससे महाराष्ट्र में राजनीतिक विभाजन गहरा गया

महाराष्ट्र की शिव सेना में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विभाजन गहरा गया है क्योंकि छह सांसद एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो गए हैं, जो एक औपचारिक विभाजन और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले खेमे के लिए एक बड़ा झटका है। यह कदम उद्धव ठाकरे के नेतृत्व, शिव सेना यूबीटी के भविष्य और क्या और अधिक दल-बदल का अनुसरण कर सकता है, के बारे में गंभीर सवाल उठाता है। शिंदे गुट के मजबूत होने के साथ, महाराष्ट्र का राजनीतिक परिदृश्य पुनर्गठन, गठबंधन की गणना और सत्ता परिवर्तन के एक और दौर के लिए तैयार है। दलबदल ने वफादारी, वैधता और शिवसेना ब्रांड की भविष्य की दिशा पर लड़ाई को भी तेज कर दिया है। n18oc_ Indian18oc_politicsn18oc_brass-tacks News18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 22 जून, 2026, 19:59 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)6 सांसदों ने शिंदे(टी)गठबंधन राजनीति महाराष्ट्र(टी)बीजेपी-शिवसेना(टी)एकनाथ शिंदे(टी)एकनाथ शिंदे शिव सेना(टी)भारतीय राजनीति(टी)महाराष्ट्र राजनीतिक परिदृश्य(टी)महाराष्ट्र राजनीतिक विभाजन(टी)महाराष्ट्र राजनीति(टी)अधिक दलबदल की संभावना(टी)एमपी दलबदल(टी)एनडीए महाराष्ट्र(टी)ऑपरेशन टाइगर(टी)शिंदे गुट(टी)शिवसेना(टी)शिवसेना औपचारिक विभाजन(टी)शिवसेना एमपीएस(टी)शिवसेना विभाजन(टी)शिवसेना यूबीटी(टी)छह सांसद दोष(टी)यूबीटी संकट(टी)यूबीटी एमपीएस दोष(टी)उद्धव खेमा(टी)उद्धव ठाकरे
संजू बोले- धोनी क्रिकेट के फेडरर, कोहली अल्काराज जैसे:विमेंस वर्ल्डकप जीतना इंस्पायरिंग था, ऑस्ट्रेलिया से खेलने का अब डर नहीं

विंबलडन 2026 से पहले भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन ने क्रिकेट और टेनिस के प्लेयर्स के बीच तुलना की। उन्होंने जियोस्टार से बातचीत में कहा कि अगर क्रिकेट में किसी खिलाड़ी की तुलना रोजर फेडरर से की जा सकती है तो वह पूर्व भारतीय कप्तान एम एस धोनी हैं। वहीं उन्होंने विराट कोहली की तुलना टेनिस स्टार कार्लोस अल्काराज से की। सैमसन ने 2025 में भारत की महिला टीम के वनडे वर्ल्ड कप खिताब को भी याद किया। उन्होंने कहा कि पूरा देश फाइनल देख रहा था और उस जीत ने भारतीय क्रिकेट को नई दिशा दी। सैमसन ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने को लेकर भी अपनी राय दी। उन्होंने कहा, जब हम बड़े हो रहे थे तब लगभग हर वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया ही जीतता था। यही वजह है कि उनके लिए हमारे मन में काफी सम्मान है। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। हम चैंपियन हैं और उसी सोच के साथ मुकाबला करते हैं। इसलिए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सम्मान तो है, लेकिन डर नहीं। धोनी में फेडरर जैसा धैर्य सैमसन ने कहा, क्रिकेट के रोजर फेडरर एमएस धोनी हैं। वह जिस तरह अपने काम को अंजाम देते हैं। उसमें गजब का धैर्य और शांति दिखती है। जब वह अच्छा खेलते हैं तो सब कुछ बेहद आसान नजर आता है, लेकिन उसका असर बहुत बड़ा होता है। दूसरी ओर कार्लोस अल्काराज काफी अटैकिंग प्लेयर हैं। विराट भाई ने भी अपने करियर की शुरुआत उसी अंदाज में की थी। वे एनर्जी से भरे रहते हैं, इसलिए उनकी तुलना अल्काराज से की जा सकती है। महिला वर्ल्ड कप जीत ने बढ़ाया भरोसा सैमसन ने 2025 में भारत की वर्ल्ड कप जीत पर कहा, हम सभी फाइनल देख रहे थे। मेरा परिवार और देशभर के लोग टीवी के सामने बैठे थे। यह पूरे देश के लिए बेहद खास पल था। हमें हमेशा विश्वास था कि हम वर्ल्ड कप जीत सकते हैं, लेकिन मंजिल अभी भी दूर लगती थी। नवंबर 2025 के फाइनल में भारत ने साउथ अफ्रीका को हराया था। बोपन्ना ने सिनर और रयबाकिना को बताया दावेदार पूर्व भारतीय टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना भी संजू के साथ मौजूद थे। उन्होंने भी विंबलडन 2026 के मेंस में मौजूदा चैंपियन यानिक सिनर को खिताब का सबसे बड़ा दावेदार बताया, जबकि महिला एकल में एलेना रयबाकिना पर भरोसा जताया। विंबलडन 2026 29 जून से 12 जुलाई तक होगा। ————————- यह खबर भी पढ़ें… हरमनप्रीत 200 टी-20 खेलने वाली पहली क्रिकेटर साउथ अफ्रीका ने विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप में भारत को 6 विकेट से हरा दिया। साउथ अफ्रीका ने 159 रन का टारगेट हासिल किया। यह टी-20 वर्ल्ड कप का तीसरा और साउथ अफ्रीका का सबसे बड़ा रनचेज रहा। पढ़ें पूरी खबर…
संजू बोले- धोनी क्रिकेट के फेडरर, कोहली अल्काराज जैसे:विमेंस वर्ल्डकप जीतना इंस्पायरिंग था, ऑस्ट्रेलिया से खेलने का अब डर नहीं

विंबलडन 2026 से पहले भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन ने क्रिकेट और टेनिस के प्लेयर्स के बीच तुलना की। उन्होंने जियोस्टार से बातचीत में कहा कि अगर क्रिकेट में किसी खिलाड़ी की तुलना रोजर फेडरर से की जा सकती है तो वह पूर्व भारतीय कप्तान एम एस धोनी हैं। वहीं उन्होंने विराट कोहली की तुलना टेनिस स्टार कार्लोस अल्काराज से की। सैमसन ने 2025 में भारत की महिला टीम के वनडे वर्ल्ड कप खिताब को भी याद किया। उन्होंने कहा कि पूरा देश फाइनल देख रहा था और उस जीत ने भारतीय क्रिकेट को नई दिशा दी। सैमसन ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने को लेकर भी अपनी राय दी। उन्होंने कहा, जब हम बड़े हो रहे थे तब लगभग हर वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया ही जीतता था। यही वजह है कि उनके लिए हमारे मन में काफी सम्मान है। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। हम चैंपियन हैं और उसी सोच के साथ मुकाबला करते हैं। इसलिए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सम्मान तो है, लेकिन डर नहीं। धोनी में फेडरर जैसा धैर्य सैमसन ने कहा, क्रिकेट के रोजर फेडरर एमएस धोनी हैं। वह जिस तरह अपने काम को अंजाम देते हैं। उसमें गजब का धैर्य और शांति दिखती है। जब वह अच्छा खेलते हैं तो सब कुछ बेहद आसान नजर आता है, लेकिन उसका असर बहुत बड़ा होता है। दूसरी ओर कार्लोस अल्काराज काफी अटैकिंग प्लेयर हैं। विराट भाई ने भी अपने करियर की शुरुआत उसी अंदाज में की थी। वे एनर्जी से भरे रहते हैं, इसलिए उनकी तुलना अल्काराज से की जा सकती है। महिला वर्ल्ड कप जीत ने बढ़ाया भरोसा सैमसन ने 2025 में भारत की वर्ल्ड कप जीत पर कहा, हम सभी फाइनल देख रहे थे। मेरा परिवार और देशभर के लोग टीवी के सामने बैठे थे। यह पूरे देश के लिए बेहद खास पल था। हमें हमेशा विश्वास था कि हम वर्ल्ड कप जीत सकते हैं, लेकिन मंजिल अभी भी दूर लगती थी। नवंबर 2025 के फाइनल में भारत ने साउथ अफ्रीका को हराया था। बोपन्ना ने सिनर और रयबाकिना को बताया दावेदार पूर्व भारतीय टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना भी संजू के साथ मौजूद थे। उन्होंने भी विंबलडन 2026 के मेंस में मौजूदा चैंपियन यानिक सिनर को खिताब का सबसे बड़ा दावेदार बताया, जबकि महिला एकल में एलेना रयबाकिना पर भरोसा जताया। विंबलडन 2026 29 जून से 12 जुलाई तक होगा। ————————- यह खबर भी पढ़ें… हरमनप्रीत 200 टी-20 खेलने वाली पहली क्रिकेटर साउथ अफ्रीका ने विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप में भारत को 6 विकेट से हरा दिया। साउथ अफ्रीका ने 159 रन का टारगेट हासिल किया। यह टी-20 वर्ल्ड कप का तीसरा और साउथ अफ्रीका का सबसे बड़ा रनचेज रहा। पढ़ें पूरी खबर…
From Journalist to ‘King of the North’ and Labour Leadership Contender

Hindi News International Andy Burnham Profile: From Journalist To ‘King Of The North’ And Labour Leadership Contender लंदन3 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह एंडी बर्नहैम नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं। बर्नहैम ने पीएम पद के लिए दावेदारी भी पेश कर दी है। बर्नहैम 19 जून को मेकरफील्ड से उपचुनाव जीतकर सांसद बने थे। पार्टी में उनकी लोकप्रियता के चलते तभी से ही स्टार्मर की मुश्किलें बढ़ गईं थी। इस स्टोरी में जानिए पत्रकारिता से करियर की शुरुआत करने वाले बर्नहैम कैसे इंग्लैंड के ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ बने… टीवी सीरियल देखने के बाद राजनीति में आए बर्नहैम बर्नहैम का जन्म 1970 में लिवरपूल में हुआ था, लेकिन उनका बचपन चेशायर के कुलचेथ गांव में बीता। उनके पिता टेलीकॉम कंपनी BT में इंजीनियर थे, जबकि मां एक क्लिनिक में रिसेप्शनिस्ट थीं। दोनों लेबर पार्टी के समर्थक थे। एंडी बर्नहैम का राजनीति में आने का फैसला किसी नेता के भाषण से नहीं, बल्कि एक टीवी ड्रामा देखकर हुआ था। उन्होंने बताया है कि 14 साल की उम्र में BBC का फेमस सीरियल बॉयज फ्रॉम द ब्लैकस्टफ देखने के बाद उन्होंने लेबर पार्टी से जुड़ने का मन बनाया। यह ड्रामा लिवरपूल में बेरोजगारी और आर्थिक संकट की कहानी पर आधारित था। आयरिश मूल के बर्नहैम की पहचान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। वह लिवरपूल के एवर्टन फुटबॉल क्लब के बड़े फैन हैं। स्कूल के दिनों की तस्वीर11 साल के एंडी बर्नहैम (दाएं), अपने भाइयों निक (बाएं) और जॉन (सामने) और मां एलीन के साथ। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान फुटबॉल खेलते एंडी बर्नहैम (सबसे बाएं), यूनिवर्सिटी एफसी टीम के साथ। कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान नीदरलैंड की मैरी से प्यार हुआ एंडी बर्नहैम ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की, लेकिन वहां का माहौल उनके लिए आसान नहीं था। अपनी किताब ‘हेड नॉर्थ’ में उन्होंने लिखा है कि कई बार उन्हें लगता था कि वे वहां के नहीं हैं और खुद को एक ‘बाहरी’ की तरह महसूस करते थे। पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि म्यूजिक में बढ़ी। मैनचेस्टर के इंडी बैंड्स- द स्मिथ्स और द स्टोन रोजेज के गानों ने उनकी सोच और व्यक्तित्व को काफी प्रभावित किया। बर्नहैम के मुताबिक, इसी म्यूजिक कल्चर ने उन्हें अपनी अलग पहचान दी। एंडी बर्नहैम की लव स्टोरी की शुरुआत कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से हुई थी। यहीं उनकी मुलाकात नीदरलैंड में जन्मीं मैरी-फ्रांस वैन हील से हुई। दोनों इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई के दौरान करीब आए और कई साल बाद 2000 में शादी कर ली। आज उनके तीन बच्चे हैं। बर्नहैम ने 2009 में द गार्जियन को दिए इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआती दौर में वे परिवार बढ़ाने की योजना नहीं बना रहे थे। उनका मानना था कि जिंदगी में पहले स्थिरता हासिल करना जरूरी है। एंडी बर्नहैम अपनी पत्नी मैरी फ्रांस वैन हील और पहले बच्चे जिमी के साथ। 31 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने एंडी बर्नहैम ने करियर की शुरुआत राजनीति से नहीं, बल्कि पत्रकारिता से की थी। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने टैंक वर्ल्ड और पैसेंजर वर्ल्ड मैनेजमेंट जैसी पत्रिकाओं में काम किया। 20 साल की उम्र में उन्हें राजनीति में पहला मौका मिला, जब वह लेबर सांसद टेसा जोवेल के रिसर्चर बने। इसके बाद बर्नहैम ने तेजी से राजनीति में पहचान बनाई। वह संस्कृति मंत्री क्रिस स्मिथ के सलाहकार रहे और 2001 में ग्रेटर मैनचेस्टर के लीघ सीट से पहली बार सांसद चुने गए। संसद पहुंचने के बाद बर्नहैम ने टोनी ब्लेयर सरकार में जूनियर मंत्री के तौर पर काम किया। गॉर्डन ब्राउन के कार्यकाल में उनका कद और बढ़ा और उन्हें कैबिनेट में जगह मिली। इस दौरान उन्होंने वित्त, संस्कृति और स्वास्थ्य जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। 2010 में स्वास्थ्य सचिव के रूप में एंडी बर्नहैम, तत्कालीन प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के साथ। दो बार लेबर पार्टी का चुनाव हारे, फिर भी नहीं छोड़ी दावेदारी 2010 में लेबर पार्टी की चुनावी हार के बाद एंडी बर्नहैम ने पहली बार पार्टी नेता बनने की कोशिश की, लेकिन पांच उम्मीदवारों में चौथे स्थान पर रहे। पार्टी की कमान एड मिलिबैंड के हाथ में चली गई। पांच साल बाद 2015 में बर्नहैम ने दूसरी बार किस्मत आजमाई। इस बार उन्हें जेरेमी कॉर्बिन ने हरा दिया। लगातार दो हार के बावजूद उन्होंने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर काम जारी रखा। आलोचक अक्सर बर्नहैम पर राजनीतिक रुख बदलने के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, ब्रेक्जिट के मुद्दे पर वह लगातार यूरोपीय यूनियन के पक्ष में रहे। 2016 के जनमत संग्रह में उन्होंने ब्रिटेन के EU में बने रहने का समर्थन किया था। बाद में उन्होंने कहा कि वह अपने जीवनकाल में ब्रिटेन को दोबारा यूरोपीय संघ का हिस्सा बनते देखना चाहते हैं। गॉर्डन ब्राउन ने एंडी बर्नहैम को अपनी कैबिनेट में शामिल किया था। सरकार से भिड़े तो ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ का नाम मिला दो बार लेबर पार्टी का नेता बनने से चूकने के बाद एंडी बर्नहैम ने 2017 में नई पारी शुरू की। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति छोड़ ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले सीधे चुने गए मेयर का चुनाव लड़ा और 60% से ज्यादा वोटों के साथ जीत दर्ज की। 2021 में उन्होंने और बड़े अंतर से दोबारा जीत हासिल की। कोविड महामारी के दौरान बर्नहैम ने नॉर्थ इंग्लैंड के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला। उस समय लंदन की सत्ता से उनकी टक्कर ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई और मीडिया ने उन्हें ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ कहना शुरू कर दिया। अपनी ही पार्टी की सरकार पर सवाल उठाए स्टार्मर की सरकार बनने के बाद भी बर्नहैम ने चुप्पी नहीं साधी। उन्होंने सरकार की खर्च और कर्ज से जुड़ी आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए, जिसके चलते पार्टी के भीतर ही उनके खिलाफ आवाजें उठने लगीं। हालांकि, 2025 तक उन्हें लेबर पार्टी के अगले बड़े चेहरे और संभावित नेता के तौर पर देखा जाने लगा था। जनवरी 2026 में जब ग्रेटर मैनचेस्टर के सांसद एंड्रयू ग्विन ने सीट छोड़ने का ऐलान किया, तो बर्नहैम की वेस्टमिंस्टर वापसी की चर्चा तेज हो गई। लेकिन उपचुनाव में पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। माना गया कि
From Journalist to ‘King of the North’ and Labour Leadership Contender

Hindi News International Andy Burnham Profile: From Journalist To ‘King Of The North’ And Labour Leadership Contender लंदन19 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह एंडी बर्नहैम नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं। बर्नहैम ने पीएम पद के लिए दावेदारी भी पेश कर दी है। बर्नहैम 19 जून को मेकरफील्ड से उपचुनाव जीतकर सांसद बने थे। पार्टी में उनकी लोकप्रियता के चलते तभी से ही स्टार्मर की मुश्किलें बढ़ गईं थी। इस स्टोरी में जानिए पत्रकारिता से करियर की शुरुआत करने वाले बर्नहैम कैसे इंग्लैंड के ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ बने… टीवी सीरियल देखने के बाद राजनीति में आए बर्नहैम बर्नहैम का जन्म 1970 में लिवरपूल में हुआ था, लेकिन उनका बचपन चेशायर के कुलचेथ गांव में बीता। उनके पिता टेलीकॉम कंपनी BT में इंजीनियर थे, जबकि मां एक क्लिनिक में रिसेप्शनिस्ट थीं। दोनों लेबर पार्टी के समर्थक थे। एंडी बर्नहैम का राजनीति में आने का फैसला किसी नेता के भाषण से नहीं, बल्कि एक टीवी ड्रामा देखकर हुआ था। उन्होंने बताया है कि 14 साल की उम्र में BBC का फेमस सीरियल बॉयज फ्रॉम द ब्लैकस्टफ देखने के बाद उन्होंने लेबर पार्टी से जुड़ने का मन बनाया। यह ड्रामा लिवरपूल में बेरोजगारी और आर्थिक संकट की कहानी पर आधारित था। आयरिश मूल के बर्नहैम की पहचान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। वह लिवरपूल के एवर्टन फुटबॉल क्लब के बड़े फैन हैं। स्कूल के दिनों की तस्वीर11 साल के एंडी बर्नहैम (दाएं), अपने भाइयों निक (बाएं) और जॉन (सामने) और मां एलीन के साथ। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान फुटबॉल खेलते एंडी बर्नहैम (सबसे बाएं), यूनिवर्सिटी एफसी टीम के साथ। कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान नीदरलैंड की मैरी से प्यार हुआ एंडी बर्नहैम ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की, लेकिन वहां का माहौल उनके लिए आसान नहीं था। अपनी किताब ‘हेड नॉर्थ’ में उन्होंने लिखा है कि कई बार उन्हें लगता था कि वे वहां के नहीं हैं और खुद को एक ‘बाहरी’ की तरह महसूस करते थे। पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि म्यूजिक में बढ़ी। मैनचेस्टर के इंडी बैंड्स- द स्मिथ्स और द स्टोन रोजेज के गानों ने उनकी सोच और व्यक्तित्व को काफी प्रभावित किया। बर्नहैम के मुताबिक, इसी म्यूजिक कल्चर ने उन्हें अपनी अलग पहचान दी। एंडी बर्नहैम की लव स्टोरी की शुरुआत कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से हुई थी। यहीं उनकी मुलाकात नीदरलैंड में जन्मीं मैरी-फ्रांस वैन हील से हुई। दोनों इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई के दौरान करीब आए और कई साल बाद 2000 में शादी कर ली। आज उनके तीन बच्चे हैं। बर्नहैम ने 2009 में द गार्जियन को दिए इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआती दौर में वे परिवार बढ़ाने की योजना नहीं बना रहे थे। उनका मानना था कि जिंदगी में पहले स्थिरता हासिल करना जरूरी है। एंडी बर्नहैम अपनी पत्नी मैरी फ्रांस वैन हील और पहले बच्चे जिमी के साथ। 31 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने एंडी बर्नहैम ने करियर की शुरुआत राजनीति से नहीं, बल्कि पत्रकारिता से की थी। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने टैंक वर्ल्ड और पैसेंजर वर्ल्ड मैनेजमेंट जैसी पत्रिकाओं में काम किया। 20 साल की उम्र में उन्हें राजनीति में पहला मौका मिला, जब वह लेबर सांसद टेसा जोवेल के रिसर्चर बने। इसके बाद बर्नहैम ने तेजी से राजनीति में पहचान बनाई। वह संस्कृति मंत्री क्रिस स्मिथ के सलाहकार रहे और 2001 में ग्रेटर मैनचेस्टर के लीघ सीट से पहली बार सांसद चुने गए। संसद पहुंचने के बाद बर्नहैम ने टोनी ब्लेयर सरकार में जूनियर मंत्री के तौर पर काम किया। गॉर्डन ब्राउन के कार्यकाल में उनका कद और बढ़ा और उन्हें कैबिनेट में जगह मिली। इस दौरान उन्होंने वित्त, संस्कृति और स्वास्थ्य जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। 2010 में स्वास्थ्य सचिव के रूप में एंडी बर्नहैम, तत्कालीन प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के साथ। दो बार लेबर पार्टी का चुनाव हारे, फिर भी नहीं छोड़ी दावेदारी 2010 में लेबर पार्टी की चुनावी हार के बाद एंडी बर्नहैम ने पहली बार पार्टी नेता बनने की कोशिश की, लेकिन पांच उम्मीदवारों में चौथे स्थान पर रहे। पार्टी की कमान एड मिलिबैंड के हाथ में चली गई। पांच साल बाद 2015 में बर्नहैम ने दूसरी बार किस्मत आजमाई। इस बार उन्हें जेरेमी कॉर्बिन ने हरा दिया। लगातार दो हार के बावजूद उन्होंने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर काम जारी रखा। आलोचक अक्सर बर्नहैम पर राजनीतिक रुख बदलने के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, ब्रेक्जिट के मुद्दे पर वह लगातार यूरोपीय यूनियन के पक्ष में रहे। 2016 के जनमत संग्रह में उन्होंने ब्रिटेन के EU में बने रहने का समर्थन किया था। बाद में उन्होंने कहा कि वह अपने जीवनकाल में ब्रिटेन को दोबारा यूरोपीय संघ का हिस्सा बनते देखना चाहते हैं। गॉर्डन ब्राउन ने एंडी बर्नहैम को अपनी कैबिनेट में शामिल किया था। सरकार से भिड़े तो ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ का नाम मिला दो बार लेबर पार्टी का नेता बनने से चूकने के बाद एंडी बर्नहैम ने 2017 में नई पारी शुरू की। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति छोड़ ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले सीधे चुने गए मेयर का चुनाव लड़ा और 60% से ज्यादा वोटों के साथ जीत दर्ज की। 2021 में उन्होंने और बड़े अंतर से दोबारा जीत हासिल की। कोविड महामारी के दौरान बर्नहैम ने नॉर्थ इंग्लैंड के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला। उस समय लंदन की सत्ता से उनकी टक्कर ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई और मीडिया ने उन्हें ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ कहना शुरू कर दिया। अपनी ही पार्टी की सरकार पर सवाल उठाए स्टार्मर की सरकार बनने के बाद भी बर्नहैम ने चुप्पी नहीं साधी। उन्होंने सरकार की खर्च और कर्ज से जुड़ी आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए, जिसके चलते पार्टी के भीतर ही उनके खिलाफ आवाजें उठने लगीं। हालांकि, 2025 तक उन्हें लेबर पार्टी के अगले बड़े चेहरे और संभावित नेता के तौर पर देखा जाने लगा था। जनवरी 2026 में जब ग्रेटर मैनचेस्टर के सांसद एंड्रयू ग्विन ने सीट छोड़ने का ऐलान किया, तो बर्नहैम की वेस्टमिंस्टर वापसी की चर्चा तेज हो गई। लेकिन उपचुनाव में पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। माना गया कि
Meta Invests ₹8,550 Crore in CRED | Kunal Shah WhatsApp Global Head

Hindi News Business Meta Invests ₹8,550 Crore In CRED | Kunal Shah WhatsApp Global Head | Will Cathcart AI नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा ने क्रेड (CRED) एप के फाउंडर कुणाल शाह को चैटिंग एप वॉट्सएप का नया ग्लोबल हेड बनाने क फैसला लिया है। वे विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जो पिछले 7 साल से वॉट्सएप की कमान संभाल रहे थे। कैथकार्ट अब मेटा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े नए प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। यह जानकारी मेटा CEO ने अपनी पोस्ट में दी। वॉट्सएप के ग्लोबल हेड की कमान संभालने के लिए कुणाल शाह क्रेड के CEO के अपने मौजूदा ऑपरेटिंग पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद वह मेटा हिस्सा बनेंगे। इसके साथ ही मेटा बिल पेमेंट एप क्रेड में करीब 8,550 करोड़ रुपए निवेश करने का फैसला किया है। इसके बदले मेटा को क्रेड में 20% की हिस्सेदारी मिलेगी। इस नए निवेश के बाद अब क्रेड कंपनी की कुल कीमत बढ़कर ₹43,239 करोड़ हो गई है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
पश्चिम बंगाल बजट 2026: कल्याण प्रोत्साहन, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और धर्म-आधारित योजनाओं का अंत

एक ऐतिहासिक पहली घटना में, पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के साथ कल्याण के मिश्रण वाले बजट का अनावरण किया, जिसमें धर्म-आधारित वित्तीय योजनाओं को खत्म करते हुए महिलाओं, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए धन आवंटित किया गया। आलोचक इसकी व्यवहार्यता और रोजगार सृजन पर प्रभाव पर सवाल उठाते हैं। -speakn18oc_indiaNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 22 जून, 2026, 18:50 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)बंगाल सरकार का बजट(टी)बंगाल की राजनीति(टी)ब्रेकिंग न्यूज भारत(टी)सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत(टी)आर्थिक नीति भारत(टी)शिक्षा बजट भारत(टी)राजकोषीय नीति भारत(टी)भारत(टी)भारत बजट समाचार(टी)बुनियादी ढांचा विकास भारत(टी)ताजा समाचार(टी)ममता बनर्जी(टी)राजनीतिक बहस पश्चिम बंगाल(टी)धर्म आधारित योजनाएं(टी)डब्ल्यूबी बजट 2026(टी)कल्याण योजनाएं पश्चिम बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल बजट(टी)पश्चिम बंगाल समाचार(टी)महिला कल्याण योजना भारत
Punjab Lecturer Recruitment | 829 Posts, Age Limit 37, Apply Online

Hindi News Career Punjab Lecturer Recruitment | 829 Posts, Age Limit 37, Apply Online 15 मिनट पहले कॉपी लिंक पंजाब स्कूल शिक्षा निदेशालय ने लेक्चरर के 829 पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट erd.punjab.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : न्यूनतम 55% अंकों के साथ पीजी डिग्री यूजीसी नेट, पीएचडी की डिग्री 10वीं तक पंजाबी एक भाषा के रूप में पढ़ी होना चाहिए। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 37 साल रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम इंटरव्यू फीस : केवल पंजाब राज्य के पूर्व सैनिक, ईडब्ल्यूएस, पीडब्ल्यूडी, पूर्व सैनिकों के वंशज : 500 रुपए सभी राज्यों के अनुसूचित जाति, जनजाति, पंजाब के उपराज्य : 750 रुपए अन्य : 1500 रुपए सैलरी : 7वें वेतन आयोग के अनुसार ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट erd.punjab.gov.in पर जाएं। होमपेज पर जाकर ‘पंजाब लेक्चरर भर्ती 2026’ लिंक पर क्लिक करें। मांगी डिटेल्स से रजिस्ट्रेशन करें। नए बनाए गए क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके लॉग इन करें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स की स्कैन की हुई कॉपी अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल वेबसाइट लिंक ————– सरकारी नौकरी की ये खबर भी पढ़ें… हफ्ते की टॉप जॉब्स: SBI PO की 1500 वैकेंसी, UPSC ने निकालीं ग्रेजुएट्स की 400 भर्तियां; इस हफ्ते 6 हजार से ज्यादा नौकरियां इस हफ्ते निकली हैं DSSSB और एम्स सहित कई विभागों में 6312 पदों पर नौकरियां। अगर आप भी इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इन 5 नौकरियों की डिटेल्ड जानकारी 5 ग्राफिक्स के जरिए जानिए। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
#ब्रेकिंगन्यूज़ | मुंबई में शिव सेना के 6 यूबीटी सांसद शिव सेना में शामिल हुए

महाराष्ट्र में एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में, शिव सेना (यूबीटी) के छह सांसद आधिकारिक तौर पर मुंबई में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना में शामिल हो गए हैं। शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना में शामिल होने वाले सांसद हैं: • संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमप्रकाश निंबालकर, संजय पाटिल, संजय देशमुख, नागेश अष्टिकर। यह कदम उद्धव ठाकरे के गुट के लिए एक महत्वपूर्ण झटका है और महाराष्ट्र की राजनीति में एकनाथ शिंदे की स्थिति को और मजबूत करता है। यह पदस्थापना मुंबई में वरिष्ठ शिव सेना नेताओं और समर्थकों की उपस्थिति में हुई। इस घटनाक्रम का राज्य में आगामी चुनावी लड़ाई से पहले राजनीतिक परिदृश्य पर बड़ा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। n18oc_politicsn18oc_breaking-newsn18oc_indiaNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube
India vs Pakistan Hockey FIH Pro League London 2026

स्पोर्ट्स डेस्क8 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय मेंस हॉकी टीम मंगलवार को FIH प्रो लीग के लंदन लेग के अपने पहले मैच में पाकिस्तान से खेलेगी। मुकाबला लंदन के ली वेली हॉकी सेंटर में भारतीय टाइमिंग के हिसाब से शाम 7 बजे शुरू होगा। दोनों टीमें करीब दो साल बाद आमने-सामने हो रही हैं। इनकी पिछली भिड़ंत 2024 एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में हुई थी। तब भारत ने कप्तान हरमनप्रीत सिंह के 2 गोल की बदौलत 2-1 से जीत हासिल की थी। पॉइंट्स टेबल में भारत 8वें और पाकिस्तान 9वें स्थान पर 9 टीमों के पॉइंट्स टेबल में भारतीय टीम 8वें स्थान पर मौजूद है। वहीं, पाकिस्तान की टीम भारत से ठीक एक पायदान नीचे 9वें स्थान पर है और उसे अभी टूर्नामेंट में अपना पहला पॉइंट्स हासिल करना बाकी है। टूर्नामेंट के होम लेग में भारत का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था, जहां टीम 4 मैचों में एक भी जीत दर्ज नहीं कर सकी थी और कुल 19 गोल खाए थे। तीन बार की चैंपियन नीदरलैंड को 3-2 से हराया भारतीय टीम ने अपने रॉटरडैम में हुए पिछले लेग में 4 में से 2 मैच जीते थे। भारत ने वर्ल्ड नंबर-2 और तीन बार की चैंपियन नीदरलैंड को 3-2 से हराया। साथस ही भारतीय टीम ने जर्मनी के खिलाफ 3-1 से जीत हासिल की थी। इस लेग में भारतीय टीम इन दोनों टीमों से 1-1 मैच हारी भी थी। मुश्किल दौर से गुजर रही पाकिस्तानी टीम लंदन लेग से पहले पाकिस्तान की टीम बेहद खराब दौर से गुजर रही है। टीम जर्मनी, नीदरलैंड्स, बेल्जियम और स्पेन के खिलाफ अपने सभी 12 प्रो लीग मैच हार चुकी है और उस पर टूर्नामेंट से बाहर (रेलीगेशन) होने का खतरा मंडरा रहा है। इस सीजन 13 स्टेज खेले जा रहे FIH प्रो लीग का यह सातवां सीजन है। 2025-26 सीजन में कुल 13 स्टेजेस (लेग) खेले जा रहे हैं, जो 10 देशों में आयोजित किए जा रहे हैं। टूर्नामेंट 9 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ था और 28 जून 2026 तक चलेगा। इस सीजन में मेंस और विमेंस कैटेगरी में 9-9 टीमें हिस्सा ले रही हैं। प्रत्येक टीम 16 मैच खेलती है और मुकाबले अलग-अलग स्टेज में खेले जाते हैं, जहां कई टीमें एक ही वेन्यू पर इकट्ठा होकर दो-दो मैच खेलती हैं। FIH प्रो लीग में चैंपियन कैसे चुना जाता है? FIH प्रो लीग में हर जीत पर 3 पॉइंट्स मिलते हैं। हारने वाली टीम को कोई अंक नहीं मिलता। ड्रॉ होने पर मैच शूटआउट में जाता है। शूटआउट जीतने वाली टीम को 2 और हारने वाली टीम को 1 अंक मिलता है। लीग स्टेज के अंत में पॉइंट्स टेबल में सबसे ऊपर रहने वाली टीम को चैंपियन घोषित किया जाता है। इसके अलावा, 2025-26 सीजन की चैपिंयन टीम को 2028 लॉस एंजिलिस ओलिंपिक के लिए सीधा कोटा भी मिलेगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…







