Friday, 10 Jul 2026 | 05:57 AM

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PM Modi New Zealand Visit

PM Modi New Zealand Visit

Hindi News National PM Modi New Zealand Visit | Auckland FTA Deal & 40k Indians Address Photo ऑकलैंड36 मिनट पहले कॉपी लिंक ऑस्ट्रेलियन पीएम अल्बनीज के साथ मोदी की यह तस्वीर मेलबर्न के MCG स्टेडियम की है। उनका स्वागत करने के लिए करीब 30 हजार भारतीय समुदाय के लोगों की भीड़ जमा थी। पीएम मोदी अपने छह दिवसीय दौरे के आखिरी फेस में आज न्यूजीलैंड पहुंचेंगे। यह 40 सालों बाद किसी भारतीय पीएम की न्यूजीलैंड यात्रा है। इससे पहले 1986 में स्व. राजीव गांधी ने न्यूजीलैंड की यात्रा की थी। पीएम का दौरे की शुरुआत न्यूजीलैंड सरकार के साथ द्विपक्षीय बातचीत से शुरू होगी। इस दौरान दोनों देश FTA समझौते को फाइनल करेंगे। साथ ही पीएम एक बिजनेस इवेंट और फिर एक स्पोर्टिंग इवेंट में शामिल होंगे।। इसके बाद वे ऑकलैंड में 40 हजार भारतीयों को भी संबोधित करेंगे। पीएम के स्वागत के लिए भारतीय समुदाय ने ‘किया ओरा मोदी’ कार्यक्रम का आयोजन किया है। ऑस्ट्रेलिया में यूरेनियम डील पर मुहर लगी इससे पहले गुरुवार को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम डील पर मुहर लगी। मेलबर्न में पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज ने मीटिंग के बाद जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, स्पेस और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) समेत कई क्षेत्र में समझौतों की घोषणा की। मोदी ने कहा- भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर भी विकसित करेंगे। कोकोस (कीलिंग) द्वीप पर स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल बनाया जाएगा, जिससे भारत के गगनयान मिशन को मदद मिलेगी। मोदी ने 16 साल के बच्चों को सोशल मीडिया बैन करने के मामले में ऑस्ट्रेलिया की तारीफ की। इसके बाद मेलबोर्न में 30 हजार भारतीयों को संबोधित किया। पीएम के ऑस्ट्रेलिया दौरे की 5 तस्वीरें… 1. गवर्नमेंट हाउस में गार्ड ऑफ ऑनर मिला मुलाकात से पहले गवर्नमेंट हाउस में मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। गवर्नमेंट हाउस, विक्टोरिया के गवर्नर का आधिकारिक आवास है। 2. विक्टोरिया की गवर्नर से मुलाकात पीएम ने मेलबर्न में विक्टोरिया की गवर्नर मार्गरेट गार्डनर से मुलाकात की। 3. CEO फोरम में शामिल पीएम ने ऑस्ट्रेलिया-भारत CEO फोरम में शामिल होने के बाद X पर तस्वीरें शेयर कीं। 4. मोदी-अल्बनीज की सेल्फी CEO फोरम के बाद ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने पीएम मोदी के साथ सेल्फी ली। 5. मेलबर्न में भारतीयों को संबोधित किया मोदी ने मेलबर्न में भारतीयों को संबोधित किया। इस दौरान उनकी अपील पर वहां मौजूद लोगों ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम के सम्मान में मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाई। —————————— पीएम के ऑस्ट्रेलिया दौरे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… भारत को यूरेनियम सप्लाई करेगा ऑस्ट्रेलिया: मोदी ऑस्ट्रेलियन पीएम से बोले-हम आपसे सीख रहे भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच गुरुवार को यूरेनियम डील पर मुहर लग गई है। मेलबर्न में पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज ने मीटिंग के बाद जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, स्पेस और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) समेत कई क्षेत्र में समझौतों की घोषणा की। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Sourav Ganguly ICC Hall of Fame

Sourav Ganguly ICC Hall of Fame

Hindi News Career Sourav Ganguly ICC Hall Of Fame | July 10 Current Affairs India Australia Minerals Corridor 12 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 1. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम की खरीद को लेकर डील हुई 9 जुलाई को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम को लेकर डील हुई। ये डील पीएम नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज की वार्ता के दौरान हुई। भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर भी विकसित करेंगे। ऑस्ट्रेलिया भारत को सिविल न्यूक्लियर रिएक्टरों के लिए यूरेनियम उपलब्ध कराएगा। इससे ऑस्ट्रेलिया अब भारत के शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए यूरेनियम की आपूर्ति कर सकेगा। समझौता भारत के 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को समर्थन देगा। दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स, ग्रीन हाइड्रोजन, समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। मेलबर्न में पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में डिफेंस, ट्रेड, एनर्जी, स्पेस और क्रिटिकल मिनरल्स समेत कई क्षेत्र में समझौतों की घोषणा की। नेशनल (NATIONAL) 2. DRDO ने पिनाका लॉन्ग-रेंज गाइडेड रॉकेट की सफल टेस्टिंग की 8 जुलाई को DRDO ने ओडिशा के चांदीपुर से पिनाका लॉन्ग-रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। रॉकेट ने उड़ान के दौरान तय सभी युद्धाभ्यास पूरे किए और टारगेट पर सटीक वार किया। इस नए गाइडेड वेरिएंट को भारतीय सेना में पहले से इस्तेमाल हो रहे ‘पिनाका लॉन्चर’ से ही दागा गया है। LRGR को एक ही लॉन्चर के जरिए अलग-अलग रेंज वाले पिनाका वेरिएंट्स से लॉन्च किया जा सकता है। पिनाका LRGR को DRDO की आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE) लैब और हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL) ने मिलकर डिजाइन किया है। रक्षा सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह टेस्टिंग के समय मौजूद रहे। स्पोर्ट्स (SPORTS) 3. भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल होंगे 10 जुलाई को भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल करने का ऐलान किया। इसकी घोषणा 11 जुलाई को स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग में ICC की सालाना कॉन्फ्रेंस में होगी। गांगुली हॉल ऑफ फेम में जगह बनाने वाले भारत के 12वें क्रिकेटर होंगे। मैच फिक्सिंग विवाद के बाद 2000 में गांगुली ने भारतीय टीम की कप्तानी संभाली थी। गांगुली की कप्तानी में भारत ने 2002 चैंपियंस ट्रॉफी जीती और 2003 वनडे वर्ल्ड कप का फाइनल खेला। 2004 में पाकिस्तान में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीती और ऑस्ट्रेलिया की लगातार 16 मैचों की टेस्ट जीत का रिकॉर्ड भी तोड़ा। गांगुली ने भारत के लिए 113 टेस्ट में 7212 रन बनाए, जिसमें 16 शतक शामिल हैं। 311 वनडे में उनके नाम 11363 रन और 22 शतक दर्ज हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 132 विकेट भी लिए। बल्लेबाजी के बाद वे BCCI अध्यक्ष और वर्तमान में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के अध्यक्ष भी रहे हैं। हॉल ऑफ फेम हॉल ऑफ फेम इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) का सबसे बड़ा व्यक्तिगत सम्मान होता है। इसमें उन महान खिलाड़ियों, अंपायर्स या प्रशासकों को शामिल किया जाता है, जिन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में असाधारण प्रदर्शन किया हो। किसी भी खिलाड़ी को इस हॉल ऑफ फेम में शामिल करने से पहले उसके संन्यास लिए कम से कम 5 साल पूरे होना जरूरी होता है। अब तक भारत के 12 खिलाड़ियों को ये सम्मान दिया जा चुका है, इसमें सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, कपिल देव और एमएस धोनी शामिल हैं। हॉल ऑफ फेम सम्मान में चुने गए मेंबर को ICC एक विशेष ‘हॉल ऑफ फेम कैप’ देता है। 4. चेस प्लेयर अश्वथ एस 98वें ग्रेंडमास्टर बने 9 जुलाई को 17 साल के अश्वथ एस. ने अपना तीसरा और आखिरी ग्रैंडमास्टर (GM) नॉर्म हासिल किया। अश्वथ ने पुणे इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर राउंड रॉबिन 2026 जीतकर भारत के 98वें शतरंज ग्रैंडमास्टर बन गए हैं। वर्तमान में उनकी स्टैंडर्ड फिडे रेटिंग 2517 है। अश्वथ ने इस साल की शुरुआत में जर्मनी में ग्रेनके ओपन ए में अपना पहला ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल किया था। अश्वथ ने नौ मैचों में 8 पॉइंट के साथ टाई-ब्रेक पर टूर्नामेंट जीता और 2779 की हाईएस्ट रैंकिंग दर्ज की। अश्वथ ने 2023 में इंटरनेशनल मास्टर (IM) का खिताब हासिल किया था और 2500 अंकों की फिडे रेटिंग को पा लिया था। कन्याकुमारी में जन्मे अश्वथ महज 3 साल की उम्र से चेस खेल रहे हैं। उनके पिता एसी शिवा उनके पहले कोच भी थे। ग्रैंडमास्टर (GM) नॉर्म ग्रैंडमास्टर चेस का सबसे बड़ा इंटरनेशनल खिताब है, जिसे FIDE देता है। ग्रांड मास्टर बनने के लिए तीन ग्रांड मास्टर नॉर्म हासिल करने जरूरी होते हैं। इसके साथ ही कैंडीडेट को 2500 या उससे ज्यादा FIDE रेटिंग हासिल करनी होती है। सितंबर 2023 में अश्वथ ने एशियन जूनियर ओपन शतरंज चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। 5.न्यूजीलैंड ने भारत के लिए 57% एक्सपोर्ट टैरिफ फ्री किया 9 जुलाई को न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने 57% एक्सपोर्ट को टैरिफ फ्री करने का ऐलान किया। न्यूजीलैंड पीएम ने ये ऐलान पीएम नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा के ठीक पहले किया है। मोदी शुक्रवार को न्यूजीलैंड पहुंचेंगे। इस ऐलान के बाद भारत से एक्सपोर्ट होने वाली कीवी फल, सेब, मीट प्रोडक्ट, वन और लकड़ी प्रोडक्ट 57% एक्सपोर्ट फ्री रहेंगे। इसके साथ ही सभी डेयरी प्रोडक्ट टैरिफ-फ्री नहीं होंगे। इसके साथ ही कुछ री-एक्सपोर्ट डेयरी और बल्क इन्फेंट फॉर्मूला प्रोडक्ट ड्यूटी फ्री होंगे। भारत के सभी एक्सपोर्ट को न्यूजीलैंड के बाजार में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा। भारत और न्यूजीलैंड के बीच समय-समय पर मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बात होती रही है। इसके बाद अप्रैल 2026 में ऐतिहासिक भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर आधिकारिक रूप से साइन किए गए थे। इस समझौते के तहत, भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड में 100% टैरिफ (ड्यूटी) फ्री पहुंच प्राप्त हुई है। वहीं, भारत ने न्यूजीलैंड से आने वाले 95% प्रोडक्ट पर टैरिफ कम या खत्म किया है, जिसमें 57% प्रोडक्ट लागू होने के पहले ही दिन से पूरी तरह टैरिफ-मुक्त हो जाएंगे। सबसे पहला मुक्त व्यापार समझौता भारत और श्रीलंका के बीच 1998 में साइन हुआ था, जिसे 2000 से लागू किया गया था। ये समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और

Prince Narula Yuvika Chaudhary Divorce Rumors | Anxiety Battle

Prince Narula Yuvika Chaudhary Divorce Rumors | Anxiety Battle

9 मिनट पहले कॉपी लिंक टीवी कपल प्रिंस नरूला और युविका चौधरी ने अपनी शादी टूटने और तलाक की अफवाहों पर पहली बार खुलकर बात की है। नेहा धूपिया और अंगद बेदी के चैट शो ‘डबल डेट’ में कपल ने माना कि एक समय उनके बीच हालात इतने मुश्किल हो गए थे कि उन्होंने अलग होने का फैसला कर लिया था। दरअसल, कुछ समय पहले दोनों ने इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो कर दिया था और प्रिंस के एक व्लॉग के बाद उनके अलग होने की खबरें थीं, जिससे फैंस के बीच उनके रिश्ते को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी। प्रिंस नरूला और उनकी पत्नी युविका चौधरी। एक व्लॉग की वजह से आई तलाक की खबर प्रिंस नरूला ने चैट शो में सफाई देते हुए बताया कि उनके एक पुराने व्लॉग की बात को लोगों ने पूरी तरह गलत समझ लिया था। प्रिंस के मुताबिक, उस समय वे काफी दबाव में थे। युविका की प्रेग्नेंसी चल रही थी, नया घर बन रहा था और काम का भी प्रेशर था। वे चाहते थे कि बच्चा नए घर में आए। धूल-मिट्टी से एलर्जी से बचाने के लिए उन्होंने युविका को कुछ समय के लिए उनकी मां के घर भेज दिया था। व्लॉग में प्रिंस ने कह दिया कि ‘हम अब साथ नहीं रहते’, जिसका मतलब सिर्फ अलग-अलग घर था, लेकिन लोगों ने इसे तलाक से जोड़ दिया। तनाव के कारण अलग होने का आ गया था विचार प्रिंस नरूला ने स्वीकार किया कि उनके रिश्ते में एक ऐसा दौर भी आया था जब दोनों मानसिक रूप से बहुत थक चुके थे। हालात इतने खराब हो गए थे कि उन्होंने अलग होने के बारे में भी सोच लिया था। प्रिंस ने कहा कि उस समय न तो युविका गलत थीं और न ही मैं गलत था। हम दोनों ही सही मानसिक स्थिति में नहीं थे। हालांकि, उन्होंने इस मुश्किल दौर का सामना किया और अपने रिश्ते को टूटने से बचा लिया। शादी के छह साल बाद, साल 2024 में दोनों बेटी के माता-पिता बने। पोस्टपार्टम और एंग्जाइटी से साथ जूझा कपल मां बनने के बाद के अनुभव पर बात करते हुए युविका चौधरी भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि डिलीवरी के बाद का समय शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत कठिन था। वजन बढ़ने के कारण आत्मविश्वास कम होने लगा था। युविका ने रोते हुए बताया कि वे एक तरफ पोस्टपार्टम डिप्रेशन से जूझ रही थीं और दूसरी तरफ प्रिंस की एंग्जाइटी को भी संभाल रही थीं। उस मुश्किल समय में उन्होंने सिर्फ अपनी बेटी के लिए खुद को मजबूत बनाए रखा ताकि उस पर इस तनाव का असर न पड़े। इंस्टाग्राम पर अनफॉलो करने से फिर शुरू हुई चर्चा युविका और प्रिंस के तलाक की खबरें हाल ही में तब दोबारा शुरू हुईं जब दोनों ने इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो कर दिया। फैंस कयास लगाने लगे कि उनके बीच सब ठीक नहीं है। कपल ने कहा कि शुरुआत में इन अफवाहों से उन्हें परेशानी हुई, लेकिन बाद में उन्होंने तय किया कि उन्हें हर बात का जवाब दुनिया को देने की जरूरत नहीं है। पहली बार माता-पिता बनने का यह सफर उनके लिए नई जिम्मेदारियों और भावनात्मक उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। प्रिंस नरूला और युविका चौधरी की पहली मुलाकात साल 2015 में रियलिटी शो ‘बिग बॉस 9’ में हुई थी। बिग बॉस 9 से शुरू हुआ था दोनों का सफर प्रिंस नरूला और युविका चौधरी की पहली मुलाकात साल 2015 में रियलिटी शो ‘बिग बॉस 9’ में हुई थी। शो के दौरान दोनों की दोस्ती हुई जो बाद में प्यार में बदल गई। इसके बाद साल 2018 में दोनों ने शादी कर ली। शादी के छह साल बाद, साल 2024 में दोनों IVF के जरिए एक बेटी के माता-पिता बने। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Arshad Warsi Success Story Explained; Munna Bhai Circuit

Arshad Warsi Success Story Explained; Munna Bhai Circuit

11 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक बचपन के संघर्षों ने ही अरशद वारसी को बॉलीवुड का सफल अभिनेता बनाया। 14 साल की उम्र में अरशद वारसी ने ऐसा दर्द देखा, जिसने उन्हें वक्त से पहले बड़ा बना दिया। डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने मां को पानी नहीं दिया था और कुछ घंटों बाद उनका निधन हो गया। इस बात का मलाल उन्हें आज भी है। माता-पिता के निधन के बाद घर की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई और उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। उन्होंने बसों और घर-घर जाकर लिपस्टिक बेची, फोटो लैब में नौकरी की और छोटे-छोटे काम करके गुजारा किया। हालात इतने मुश्किल थे कि कई बार भविष्य अंधेरे में नजर आता था। लेकिन इसी संघर्ष ने उन्हें ऐसा कलाकार बनाया, जिसने ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ के ‘सर्किट’ बनकर करोड़ों लोगों का दिल जीता। उन्हें भी इस किरदार की इतनी बड़ी सफलता की उम्मीद नहीं थी। आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं अरशद वारसी के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें। माता-पिता के निधन के बाद कम उम्र में ही अरशद वारसी ने जिम्मेदारियां संभाल ली थीं। बचपन में खुशहाल जिंदगी, फिर सब कुछ बदल गया 19 अप्रैल 1968 को मुंबई में जन्मे अरशद वारसी का शुरुआती बचपन आर्थिक रूप से अच्छा था। उनके पिता अहमद अली खान वारसी शायर और गायक थे। परिवार का जीवन आरामदायक था, लेकिन समय के साथ हालात बिगड़ने लगे। कानूनी विवादों और आर्थिक नुकसान के कारण परिवार की संपत्ति चली गई। बड़ा घर छोड़कर उन्हें छोटे घरों में रहना पड़ा। 14 साल की उम्र में अनाथ हो गए अरशद की जिंदगी का सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब उन्होंने कम उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया। राज शमानी के पॉडकास्ट में उन्होंने बताया कि वह सिर्फ 14 साल के थे, जब उनके सिर से माता-पिता का साया उठ गया। इस घटना ने उन्हें उम्र से पहले जिम्मेदार बना दिया। अरशद ने कहा था- “मैं अपनी उम्र के हिसाब से काफी मैच्योर हो गया था। पिताजी के जाने के बाद हालात लगातार खराब होते गए। मां के निधन के बाद मैं तुरंत रो भी नहीं पाया, क्योंकि मुझे लगा कि अब सब कुछ मुझे ही संभालना है। कई हफ्तों बाद मैं टूटकर रोया।” मां की आखिरी याद आज भी नहीं भूले अरशद ने बताया कि उनकी मां साधारण गृहिणी थीं और बहुत अच्छा खाना बनाती थीं। उन्हें किडनी फेल होने की बीमारी हो गई थी, इसलिए नियमित डायलिसिस कराना पड़ता था। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने सख्त हिदायत दी थी कि उन्हें पानी नहीं देना है। लेकिन उनकी मां बार-बार पानी मांगती थीं और अरशद ने डॉक्टरों की सलाह मानते हुए हर बार मना कर दिया। उन्होंने कहा कि निधन से ठीक पहले वाली रात मां ने उन्हें बुलाकर पानी मांगा था, लेकिन उन्होंने पानी नहीं दिया। उसी रात उनकी मां का निधन हो गया। अरशद के मुताबिक, यह घटना आज भी उन्हें अंदर तक झकझोर देती है। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें लगता था कि अगर उन्होंने मां को पानी पिला दिया और उसके बाद उनका निधन हो गया, तो पूरी जिंदगी खुद को जिम्मेदार मानते। अब उन्हें लगता है कि शायद मां की आखिरी इच्छा पूरी कर देनी चाहिए थी। उनका मानना है कि कई बार परिवार वाले मरीज की इच्छा से ज्यादा अपने अपराधबोध के आधार पर फैसले लेते हैं। आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी, बेची लिपस्टिक माता-पिता के निधन के बाद घर चलाने की जिम्मेदारी अरशद के कंधों पर आ गई। आर्थिक संकट इतना गहरा था कि उन्हें दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। गुजारा करने के लिए उन्होंने कई छोटे-मोटे काम किए। उन्होंने कॉस्मेटिक्स कंपनी में डोर-टू-डोर सेल्समैन के तौर पर काम किया। कई रिपोर्टों के मुताबिक वे मुंबई की बसों में लिपस्टिक और कॉस्मेटिक उत्पाद भी बेचते थे। अरशद वारसी कहते हैं, “मैं घर-घर जाकर लिपस्टिक बेचता था। कई लोग दरवाजा बंद कर देते थे, लेकिन उसी दौर ने मुझे लोगों से बात करना और जिंदगी का सामना करना सिखाया।” उन्होंने बताया कि उस दौर में वह सप्ताहभर मेहनत करके कुछ सौ रुपए ही कमा पाते थे, जबकि मां के इलाज पर हर सप्ताह लगभग 800 रुपए खर्च हो जाते थे। उन्होंने कहा, “मैं वीकेंड पर म्यूजिकल शो करता था, जिसके 175 रुपए मिलते थे। तभी मुझे समझ आया कि जिंदगी में आर्थिक रूप से मजबूत होना कितना जरूरी है।” डांस ने बदली जिंदगी संघर्ष के बीच अरशद का डांस का शौक कभी नहीं छूटा। उन्हें बचपन से नृत्य में रुचि थी। धीरे-धीरे उन्होंने डांस को ही करियर बनाने का फैसला किया। डांस के प्रति जुनून ने उनकी जिंदगी बदल दी। वे अकबर सामी के डांस ग्रुप से जुड़े। 1991 में ऑल इंडिया डांस प्रतियोगिता जीती और 1992 में लंदन में आयोजित वर्ल्ड डांस चैंपियनशिप के मॉडर्न जैज वर्ग में चौथा स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने डांस स्टूडियो शुरू किया और फिल्मों में कोरियोग्राफी करने लगे। उन्होंने ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ के टाइटल ट्रैक के अलावा ‘ठिकाना’ और ‘काश’ जैसी फिल्मों में भी कोरियोग्राफी की। यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। जया बच्चन की नजर पड़ी, मिल गया पहला मौका कोरियोग्राफर के रूप में काम करते समय उनकी मुलाकात कई फिल्मी हस्तियों से हुई। इसी दौरान जया बच्चन ने उनकी प्रतिभा देखकर अमिताभ बच्चन कॉरपोरेशन लिमिटेड (ABCL) की फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ में अभिनय का मौका दिया। 1996 में रिलीज हुई ‘तेरे मेरे सपने’ से अरशद वारसी ने बतौर अभिनेता बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म अमिताभ बच्चन कॉरपोरेशन लिमिटेड (ABCL) के बैनर तले बनी थी और निर्देशक जॉय ऑगस्टीन थे। इससे पहले वह बतौर कोरियोग्राफर पहचान बना चुके थे। उनकी एंट्री किसी फिल्मी परिवार की वजह से नहीं, बल्कि प्रतिभा के दम पर हुई। अरशद ने कहा था कि वह अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और जॉय ऑगस्टीन के आभारी रहेंगे, जिन्होंने उन पर भरोसा किया। पहली फिल्म के बाद नहीं मिला मनचाहा काम ‘तेरे मेरे सपने’ के बाद अरशद को लगा था कि उनके करियर की रफ्तार तेज होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अगले कुछ वर्षों में उन्होंने ‘हीरो हिंदुस्तानी’, ‘होगी प्यार की जीत’, ‘मुझे मेरी बीवी से बचाओ’, ‘जानी दुश्मन: एक अनोखी कहानी’ समेत कई

Prince Narula Yuvika Chaudhary Divorce Rumors | Anxiety Battle

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1 घंटे पहले कॉपी लिंक टीवी कपल प्रिंस नरूला और युविका चौधरी ने अपनी शादी टूटने और तलाक की अफवाहों पर पहली बार खुलकर बात की है। नेहा धूपिया और अंगद बेदी के चैट शो ‘डबल डेट’ में कपल ने माना कि एक समय उनके बीच हालात इतने मुश्किल हो गए थे कि उन्होंने अलग होने का फैसला कर लिया था। दरअसल, कुछ समय पहले दोनों ने इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो कर दिया था और प्रिंस के एक व्लॉग के बाद उनके अलग होने की खबरें थीं, जिससे फैंस के बीच उनके रिश्ते को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी। प्रिंस नरूला और उनकी पत्नी युविका चौधरी। एक व्लॉग की वजह से आई तलाक की खबर प्रिंस नरूला ने चैट शो में सफाई देते हुए बताया कि उनके एक पुराने व्लॉग की बात को लोगों ने पूरी तरह गलत समझ लिया था। प्रिंस के मुताबिक, उस समय वे काफी दबाव में थे। युविका की प्रेग्नेंसी चल रही थी, नया घर बन रहा था और काम का भी प्रेशर था। वे चाहते थे कि बच्चा नए घर में आए। धूल-मिट्टी से एलर्जी से बचाने के लिए उन्होंने युविका को कुछ समय के लिए उनकी मां के घर भेज दिया था। व्लॉग में प्रिंस ने कह दिया कि ‘हम अब साथ नहीं रहते’, जिसका मतलब सिर्फ अलग-अलग घर था, लेकिन लोगों ने इसे तलाक से जोड़ दिया। तनाव के कारण अलग होने का आ गया था विचार प्रिंस नरूला ने स्वीकार किया कि उनके रिश्ते में एक ऐसा दौर भी आया था जब दोनों मानसिक रूप से बहुत थक चुके थे। हालात इतने खराब हो गए थे कि उन्होंने अलग होने के बारे में भी सोच लिया था। प्रिंस ने कहा कि उस समय न तो युविका गलत थीं और न ही मैं गलत था। हम दोनों ही सही मानसिक स्थिति में नहीं थे। हालांकि, उन्होंने इस मुश्किल दौर का सामना किया और अपने रिश्ते को टूटने से बचा लिया। शादी के छह साल बाद, साल 2024 में दोनों बेटी के माता-पिता बने। पोस्टपार्टम और एंग्जाइटी से साथ जूझा कपल मां बनने के बाद के अनुभव पर बात करते हुए युविका चौधरी भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि डिलीवरी के बाद का समय शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत कठिन था। वजन बढ़ने के कारण आत्मविश्वास कम होने लगा था। युविका ने रोते हुए बताया कि वे एक तरफ पोस्टपार्टम डिप्रेशन से जूझ रही थीं और दूसरी तरफ प्रिंस की एंग्जाइटी को भी संभाल रही थीं। उस मुश्किल समय में उन्होंने सिर्फ अपनी बेटी के लिए खुद को मजबूत बनाए रखा ताकि उस पर इस तनाव का असर न पड़े। इंस्टाग्राम पर अनफॉलो करने से फिर शुरू हुई चर्चा युविका और प्रिंस के तलाक की खबरें हाल ही में तब दोबारा शुरू हुईं जब दोनों ने इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो कर दिया। फैंस कयास लगाने लगे कि उनके बीच सब ठीक नहीं है। कपल ने कहा कि शुरुआत में इन अफवाहों से उन्हें परेशानी हुई, लेकिन बाद में उन्होंने तय किया कि उन्हें हर बात का जवाब दुनिया को देने की जरूरत नहीं है। पहली बार माता-पिता बनने का यह सफर उनके लिए नई जिम्मेदारियों और भावनात्मक उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। प्रिंस नरूला और युविका चौधरी की पहली मुलाकात साल 2015 में रियलिटी शो ‘बिग बॉस 9’ में हुई थी। बिग बॉस 9 से शुरू हुआ था दोनों का सफर प्रिंस नरूला और युविका चौधरी की पहली मुलाकात साल 2015 में रियलिटी शो ‘बिग बॉस 9’ में हुई थी। शो के दौरान दोनों की दोस्ती हुई जो बाद में प्यार में बदल गई। इसके बाद साल 2018 में दोनों ने शादी कर ली। शादी के छह साल बाद, साल 2024 में दोनों IVF के जरिए एक बेटी के माता-पिता बने। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

US H-1B Visa Rules Tighten

US H-1B Visa Rules Tighten

वॉशिंगटन डीसी20 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका का ट्रम्प प्रशासन नए इमिग्रेशन नियमों की तैयारी कर रहा है, जिससे एच-1बी वीजा, रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड और छात्र वीसा की प्रक्रिया पहले से अधिक सख्त हो सकती है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर भारतीय पेशेवरों, छात्रों और अमेरिकी कंपनियों के लिए नियमों का पालन करना अधिक कठिन और महंगा हो सकता है। ये प्रस्ताव अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग, श्रम विभाग और विदेश विभाग के एकीकृत रेगुलेटरी एजेंडा में शामिल हैं। इसके लिए अगस्त में बदलाव का प्रस्ताव आ सकता है। अगस्त में आ सकता है प्रस्ताव एच-1बी: विश्वविद्यालयों और कुछ शोध संस्थानों को मिलने वाली एच-1बी कैप छूट सीमित की जा सकती है। कई ऐसे प्रस्ताव हैं जिनसे कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। ग्रीन कार्ड: एच-1बी व ग्रीन कार्ड के लिए लागू न्यूनतम वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव है। साथ ही भर्ती नियमों, अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी से जुड़े प्रावधानों और भेदभाव-रोधी उपायों में बदलाव प्रस्तावित हैं। छात्र वीसा: प्रस्ताव के तहत विदेशी छात्रों के लिए मौजूदा ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ व्यवस्था खत्म कर निश्चित अवधि का प्रवास तय किया जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने 19 सितंबर 2025 को H-1B वीजा को लेकर नियमों में बदलाव से जुड़े ऑर्डर पर साइन किया था। जयशंकर ने भी उठाया था मुद्दा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसी साल मई में यह मामला अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के सामने उठाया था। रूबियो ने माना था कि नए इमिग्रेशन सिस्टम में बदलाव के दौरान कुछ दिक्कतें और तनाव हो सकते हैं। हालांकि, रूबियो ने कहा था कि अमेरिका इमिग्रेशन सिस्टम को ज्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश कर रहा है और लंबे समय में इसका फायदा सभी पक्षों को मिलेगा। रूबियो ने यह भी कहा था कि यह कदम खासतौर पर भारत को निशाना बनाकर नहीं उठाया गया। उनके मुताबिक अमेरिका पिछले कुछ सालों में बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों की समस्या से जूझ रहा है। 2 करोड़ से ज्यादा लोग गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में दाखिल हुए और उसी चुनौती से निपटने के लिए यह बदलाव किए जा रहे हैं। —————————————– ये खबर भी पढ़ें… H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर वसूलने का आदेश रद्द:कोर्ट बोला- ट्रम्प फीस के नाम पर टैक्स नहीं ले सकते; भारतीयों को सबसे ज्यादा राहत अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने 9 जून को ट्रम्प के H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर (करीब 95 लाख रुपए) फीस वसूलने वाली नीति को रद्द कर दिया था। बॉस्टन कोर्ट ने कहा कि यह फीस नहीं बल्कि एक टैक्स है और इसे लागू करने के लिए राष्ट्रपति नहीं, बल्कि संसद की मंजूरी जरूरी थी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…