Sunday, 19 Jul 2026 | 05:26 PM

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मूंग दाल डोसा रेसिपी: सिर्फ 10 मिनट में मूंग दाल डोसा, स्वाद के साथ मिलेगा हाई प्रोटीन; प्रोजेक्ट के लिए है बेस्ट रेसिपी

तस्वीर का विवरण

मूंग दाल डोसा बनाने की सामग्री: 1 कप ढली हुई मूंग दाल, 2 हरी मिर्च, 1 इंच अदरक का टुकड़ा, 2-3 लहसुन की कलियां, 2-3 बड़ी काली मिर्च, 1/2 छोटा मसाला जीरा, स्वाद मसाला, हरा धनिया, तेल या घी छवि: सोशल मीडिया बनाने की विधि: सबसे पहले भीगी हुई मूंग दाल का पानी निकाल लें। अब दाल को मसाले में हरी मिर्च, अदरक, लहसुन, दही, जीरा और थोड़ा-सा पानी स्ट्रोमन पीस लें। छवि: एआई तैयार बैटर में नमक और तरबूज़ कटा हरा धनिया मॉड्यूल अच्छी तरह मिला लें। बैटर न सबसे बड़ा जानवर हो और न ही बहुत पतला हो। अब एक नॉन-स्टिक तवा गर्म करें और उस पर थोड़ा-सा तेल या घी लगाएं। छवि: सोशल मीडिया एक कलछी बैटर मैनुअल गोल आकार में हाथ से फैला हुआ। ऊपर से थोड़ा-सा तेल डाला और मध्यम गति पर 2-3 मिनट तक का समय लगा। नीचे की तरफ से डोसा सोनार और कुरकुरा हो जाए, तो पलटकर दूसरी तरफ भी सेक लें। छवि: एआई इस स्वादिष्ट खुराक को आप नारियल की चटनी, मूंगफली की चटनी, हरी धनिया की चटनी, टमाटर की चटनी या सांभर के साथ बना सकते हैं। बच्चों के लिए इसे टोमैटो सॉस के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है। छवि: फ्रीपिक यह प्रोटीन से भरपूर होता है, जिसमें शामिल हैं। लंबे समय तक पेट भरा रहता है, इसलिए बार-बार भूख नहीं लगती। पचने में प्रभाव होता है और नामांकन के लिए एक दस्तावेज़ विकल्प है। छवि: फ्रीपिक वजन कम कर रहे लोगों के लिए यह भी विकल्प माना जाता है। बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई इसे आसानी से खा सकता है। डोसा में ज्यादा कुरकुरा होना चाहिए तो बैटर में 1-2 मसाले का आटा मिला सकते हैं. छवि: एआई तवा अच्छी तरह गर्म के बाद ही बैटर फैल जाता है। बैटर बहुत सारे बास्केटबॉल लगे तो लिटिल-सा पानी संपूर्ण सही कंसिस्टेंसी बना लें। डाइट तो खुराक में पनीर या साबुत मिर्च की स्टफिंग भी भर सकते हैं। छवि: फ्रीपिक

Instagram Facebook Global Outage | Users Report Service Down Issues

Instagram Facebook Global Outage | Users Report Service Down Issues

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम डाउन हो गया है। इसके अलावा फेसबुक और मैसेंजर पर भी यूजर्स को दिक्कत हो रही है। आउटेज ट्रैक करने वाली वेबसाइट डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, 4000 से ज्यादा लोगों ने इंस्टाग्राम में आ रही समस्याओं की शिकायत की है। वहीं, फेसबुक पर 3000 से अधिक यूजर्स ने शिकायत की। वहीं, मैसेंजर पर भी 100 से ज्यादा लोगों ने सर्विस में रुकावट की रिपोर्ट की है। यह आउटेज पूरी तरह से ग्लोबल है। हालांकि, भारतीय यूजर्स ने डाउन की कोई शिकायत नहीं की है। हालांकि, इस आउटेज की असली वजह क्या है, यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है। मेटा या इसकी व्यक्तिगत सर्विसेज की तरफ से यूजर्स को आ रही दिक्कतों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं आया है। X पर एक यूजर्स ने कहा- प्रोफाइल और स्टोरीज लोड नहीं हो रही कई यूजर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी शिकायतें की हैं। एक इंस्टाग्राम यूजर ने बताया कि उनका फीड तो काम कर रहा है, लेकिन प्रोफाइल नहीं देख पा रहे हैं। दूसरे यूजर ने कहा कि होम पेज लोड नहीं हो रहा है और वे स्टोरीज पोस्ट नहीं कर पा रहे हैं। X पर एक यूजर ने लिखा, “इंस्टाग्राम डाउन है। मुझे फीड पर सिर्फ वेलकम पेज दिख रहा है, कोई नया कंटेंट नहीं आ रहा। क्या चल रहा है?” कुछ यूजर्स ने ब्लैंक फीड के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं। फेसबुक पर अकाउंट टेम्परेरी अनअवेलेबल का एरर मैसेज दिख रहा फेसबुक यूजर्स को लॉग-इन और फीड में एरर का सामना करना पड़ रहा है। एक यूजर ने रात 2 बजे लिखा, “फीड पर सिर्फ दो पोस्ट दिखे और फिर एरर आ गया, यह दोबारा लोड नहीं हो रहा है।” UK से लेकर अमेरिका के टेनेसी तक के लोगों ने मेटा की इस सर्विस में आ रही दिक्कतों की शिकायत की है। कई यूजर्स को स्क्रीन पर अकाउंट टेम्परेरी अनअवेलेबल (यानी साइट में दिक्कत के कारण आपका अकाउंट अभी उपलब्ध नहीं है) का मैसेज मिल रहा है। एक यूजर ने पूछा कि वे मोबाइल पर तो फेसबुक एक्सेस कर पा रहे हैं, लेकिन लैपटॉप पर नहीं, क्या किसी और के साथ भी ऐसा हो रहा है? दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Instagram Facebook Global Outage | Users Report Service Down Issues

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नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम डाउन हो गया है। इसके अलावा फेसबुक और मैसेंजर पर भी यूजर्स को दिक्कत हो रही है। आउटेज ट्रैक करने वाली वेबसाइट डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, 4000 से ज्यादा लोगों ने इंस्टाग्राम में आ रही समस्याओं की शिकायत की है। वहीं, फेसबुक पर 3000 से अधिक यूजर्स ने शिकायत की। वहीं, मैसेंजर पर भी 100 से ज्यादा लोगों ने सर्विस में रुकावट की रिपोर्ट की है। यह आउटेज पूरी तरह से ग्लोबल है। हालांकि, भारतीय यूजर्स ने डाउन की कोई शिकायत नहीं की है। हालांकि, इस आउटेज की असली वजह क्या है, यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है। मेटा या इसकी व्यक्तिगत सर्विसेज की तरफ से यूजर्स को आ रही दिक्कतों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं आया है। X पर एक यूजर्स ने कहा- प्रोफाइल और स्टोरीज लोड नहीं हो रही कई यूजर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी शिकायतें की हैं। एक इंस्टाग्राम यूजर ने बताया कि उनका फीड तो काम कर रहा है, लेकिन प्रोफाइल नहीं देख पा रहे हैं। दूसरे यूजर ने कहा कि होम पेज लोड नहीं हो रहा है और वे स्टोरीज पोस्ट नहीं कर पा रहे हैं। X पर एक यूजर ने लिखा, “इंस्टाग्राम डाउन है। मुझे फीड पर सिर्फ वेलकम पेज दिख रहा है, कोई नया कंटेंट नहीं आ रहा। क्या चल रहा है?” कुछ यूजर्स ने ब्लैंक फीड के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं। फेसबुक पर अकाउंट टेम्परेरी अनअवेलेबल का एरर मैसेज दिख रहा फेसबुक यूजर्स को लॉग-इन और फीड में एरर का सामना करना पड़ रहा है। एक यूजर ने रात 2 बजे लिखा, “फीड पर सिर्फ दो पोस्ट दिखे और फिर एरर आ गया, यह दोबारा लोड नहीं हो रहा है।” UK से लेकर अमेरिका के टेनेसी तक के लोगों ने मेटा की इस सर्विस में आ रही दिक्कतों की शिकायत की है। कई यूजर्स को स्क्रीन पर अकाउंट टेम्परेरी अनअवेलेबल (यानी साइट में दिक्कत के कारण आपका अकाउंट अभी उपलब्ध नहीं है) का मैसेज मिल रहा है। एक यूजर ने पूछा कि वे मोबाइल पर तो फेसबुक एक्सेस कर पा रहे हैं, लेकिन लैपटॉप पर नहीं, क्या किसी और के साथ भी ऐसा हो रहा है? दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

इंटरव्यू : राजकुमार हिरानी:बेटे वीर के लिए कोई शॉर्टकट नहीं रखा, कई ऑडिशन देकर बने 'प्रीतम'

इंटरव्यू : राजकुमार हिरानी:बेटे वीर के लिए कोई शॉर्टकट नहीं रखा, कई ऑडिशन देकर बने 'प्रीतम'

राजकुमार हिरानी ने वेब सीरीज ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ से ओटीटी डेब्यू किया। इससे उनके बेटे वीर का भी डेब्यू हुआ। बॉक्स ऑफिस के बाद अब हिरानी ओटीटी पर भी इतिहास रच रहे हैं। पढ़िए खास बातचीत… इस कहानी में ऐसा क्या था कि आपने इससे जुड़ने का फैसला किया? आज तकनीक रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है, लेकिन बुजुर्गों या तकनीक से कम परिचित लोगों के लिए यह आसान नहीं है। ट्रेन की टिकट बुक करने से लेकर बैंकिंग तक हर काम ऑनलाइन हो गया है। साइबर क्राइम की कुछ कहानियां पढ़ने के बाद लगा कि अब अपराध करने के तरीके ही नहीं, उन्हें सुलझाने का तरीके भी बदल चुके हैं। यहीं से मेरे मन में एक कहानी जन्मीं, जिसमें एक ईमानदार पुलिस अधिकारी अचानक साइबर सेल में भेज दिया जाए तो वह इस नई दुनिया में कैसे खुद को ढालेगा और क्राइम की जांच कैसे करेगा। इसके बाद प्रीतम का किरदार जुड़ा, जो युवा हैकर है। दोनों की अलग सोच और अनुभव से एक अनोखी दोस्ती और रोमांचक कहानी बनती है। शूटिंग के दौरान कौन-सा पल वेब सीरीज की असली जान लगा? शो की सबसे बड़ी ताकत आखिर में आने वाला गाना है। उसके बोल हैं- ‘कभी किसी से माफी मांग लो, कभी किसी को माफ कर भी दो। जिंदगी के सफर को थोड़ा आसान कर दो।’ कहानी लिखते समय मेरे मन में यही सवाल था कि आखिर हम दर्शकों से कहना क्या चाहते हैं। मैं नहीं चाहता था कि यह सिर्फ दोस्ती, जांच-पड़ताल या साइबर क्राइम तक सीमित रह जाए। जब ‘माफी’ का यह भाव कहानी का मूल विषय बनकर सामने आया, तब लगा कि सीरीज को उसकी असली आत्मा मिल गई। सीरीज से जुड़ा कोई ऐसा किस्सा जो अभी तक साझा नहीं किया हो? क्रिकेट खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग का सीरीज में गेस्ट अपीयरेंस। शूट के दौरान उन्होंने अपना पूरा सीन एक ही टेक में परफेक्ट कर दिया था। मैं खुद हैरान था। मैंने उनसे मजाक में कहा…‘शॉट तो परफेक्ट है, लेकिन एक और टेक कर लेते हैं। ऐसा लग रहा है जैसे आज स्कूल की छुट्टी जल्दी हो गई।’ मुझे याद है कि जब उन्हें फोन पर अप्रोच किया था तो उन्हें बताया कि सीरीज में एक छोटा-सा रोल है। उन्होंने बिना एक पल गंवाए जवाब दिया कि ‘मैं फलां तारीख को दिल्ली लौट रहा हूं, उसी दिन शूट कर लेते हैं।’ सहवाग के साथ साथ काम करने का अनुभव बेहद सुखद रहा। आम लोगों की असाधारण कहानियां कहने का नजरिया कहां से आता है? एक कहावत है…‘जिंदगी तब अच्छी लगती है, जब उसमें टकराव न हो। वहीं फिल्म तब अच्छी बनती है, जब उसमें टकराव हो।’ मेरा मानना है कि कहानी का नायक भले ही एक आम इंसान हो, लेकिन उसकी जिंदगी आम नहीं होनी चाहिए। अगर कहानी में कॉन्फ्लिक्ट न हो, तो उसका रोमांच और असर दोनों कम हो जाते हैं। क्या ओटीटी ने कहानी कहने का तरीका बदला है या सिर्फ मंच? फिल्मों और ओटीटी की राइटिंग में कुछ फर्क जरूर है, पर ड्रामा और इमोशन के मूल सिद्धांत वही रहते हैं। ओटीटी पर समय-सीमा नहीं होती। इसलिए आप लंबी कहानियां कह सकते हैं, किरदारों को अधिक डेप्थ से रच सकते हैं। साथ ही, दर्शकों की रुचि बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। वहीं दर्शकों को कुछ नया और रोमांचक भी देना पड़ता है, क्योंकि बोर हुए तो उनके पास दूसरे शो भी मौजूद हैं। हमेशा अलग कहानी कैसे लाते हैं? सबसे पहली कोशिश यही होती है कि ऐसी कहानी मिले, जो दर्शकों ने पहले कभी न देखी हो। हालांकि अब यह आसान नहीं है। हर साल ढेरों फिल्में और सीरीज बन रही हैं। दर्शकों के पास दुनिया भर का सिनेमा, डबिंग और सबटाइटल्स में मौजूद है। ऐसे में एक नई कहानी ढूंढना चुनौती है। आज सबसे अहम बात दर्शकों को अंत तक बांधे रखना है। सबसे ज्यादा खुशी किसी प्रोजेक्ट की सफलता से मिलती है या लोगों से? इसका सबसे बड़ा पैमाना दर्शकों की प्रतिक्रिया ही है। ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ के बाद जितने संदेश मिले, उतने शायद किसी फिल्म के बाद भी नहीं मिले। कई लोगों ने मुझे संदेश भेजकर कहा, ‘सोचा था सिर्फ एक एपिसोड देखेंगे, लेकिन पूरी रात निकल गई। 3 बजे तक जागकर सभी छह एपिसोड देख डाले।’ एक फिल्मकार के लिए यह प्यार और सराहना ही सबसे बड़ा सुकून है। बेटे वीर के साथ काम करते वक्त सबसे ज्यादा उत्साह था या जिम्मेदारी? मैंने बहुत पहले फैसला लिया था कि मैं वीर का पहला प्रोजेक्ट डायरेक्ट नहीं करूंगा। मैंने सिर्फ कहानी लिखी और सीरीज को प्रोड्यूस किया है। इसे अविनाश अरुण ने डायरेक्ट किया है। रोचक बात है कि वीर से पहले यह रोल कोई और एक्टर कर रहे थे। फिर कुछ डेट्स इश्यू हुए तो वीर ने इच्छा जताई कि वह यह रोल करना चाहते हैं। मैंने कहा, अविनाश से बात कीजिए और ऑडिशन दीजिए। फिर वीर ने अविनाश को पहले अपना नाटक ‘लेटर्स ऑफ सुरेश’ दिखाया, जिसे फिरोज अब्बास खान ने डायरेक्ट किया है। उन्होंने सीरीज के कम से कम 15 सीन्स ऑडिशन किए। यह सिलसिला कई दिनों तक चला। फिर एक दिन अविनाश ने आकर कहा कि वीर, प्रीतम के रोल के लिए बिल्कुल परफेक्ट हैं। क्या है इस सीरीज की कहानी गोवा की पृष्ठभूमि पर बनी इस 6-एपिसोड की सीरीज में पेड्रो (अरशद वारसी) एक पुराने खयालात वाले पुलिस वाले हैं, जिन्हें साइबर सेल में ट्रांसफर कर दिया जाता है। वहां उनकी मुलाकात प्रीतम (वीर हिरानी) से होती है, जो एक जीनियस एथिकल हैकर हैं। दोनों मिलकर अपहरण और साइबर अपराध जैसे जटिल मामलों को सुलझाते हैं। इस सीरीज में विक्रांत मैसी एक सनकी नेगेटिव किरदार में दिखाई दिए हैं, जबकि बोमन ईरानी और मोना सिंह भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में शामिल हैं।

मुंबई इवेंट में दुबले नजर आए सलमान खान:उतरा चेहरा, थकी आंखों के साथ दिखे एक्टर; फैंस ने सेहत को लेकर जताई चिंता

मुंबई इवेंट में दुबले नजर आए सलमान खान:उतरा चेहरा, थकी आंखों के साथ दिखे एक्टर; फैंस ने सेहत को लेकर जताई चिंता

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान हाल ही में मुंबई में एक पब्लिक इवेंट के दौरान दुबले नजर आए। उनके इस नए लुक के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद फैंस उनकी सेहत को लेकर चिंता जता रहे हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि वे काफी थके हुए और बीमार लग रहे हैं, वहीं कुछ फैंस ने उनका बचाव करते हुए कहा कि वे करीब 60 साल की उम्र में बिना किसी दिखावे के नेचुरल दिख रहे हैं। सलमान खान शुक्रवार को मुंबई में स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) के ऑफिस पहुंचे थे, जहां उनके इस लुक ने सबका ध्यान खींचा। SRA के इवेंट में पहुंचे थे सलमान खान सलमान खान शुक्रवार को मुंबई के स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) के दफ्तर में एक खास कार्यक्रम के सिलसिले में गए थे। वहां उन्होंने अथॉरिटी के नए डेटा कलेक्शन एंड वेरिफिकेशन सपोर्ट सेंटर (आईटी सर्वर रूम) का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद लाभार्थियों को उनके नए घरों की चाबियां भी सौंपीं। कार्यक्रम के दौरान सलमान खान के साथ उनके बॉडीगार्ड शेरा भी मौजूद थे। इस इवेंट के कई वीडियो इंटरनेट पर सामने आए, जिसके बाद उनकी शारीरिक हालत को लेकर चर्चा शुरू हो गई। देखें इवेंट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर फैंस ने किया कमेंट वायरल वीडियो को देखकर एक यूजर ने लिखा कि वे बीमार लग रहे हैं, भगवान उन्हें ठीक रखे। एक दूसरे यूजर ने कमेंट किया कि उन्हें कोई हेल्थ इश्यू लग रहा है, क्योंकि वे ठीक से चल भी नहीं पा रहे हैं। एक अन्य फैन ने लिखा कि उनकी आंखों में थकान साफ दिख रही है, फिल्मों में अकेले 50 लोगों से लड़ने वाले भाई का औरा इस वक्त गायब लग रहा है। हालांकि, कुछ लोगों ने सलमान का सपोर्ट भी किया। एक यूजर ने लिखा कि बॉलीवुड के स्टार्स अपनी कमियों को छिपाने के लिए किसी भी हद तक जाते हैं, लेकिन सलमान ने बिना किसी झिझक के कैमरे के सामने अपनी असली उम्र को स्वीकार किया है, इसके लिए उनकी तारीफ होनी चाहिए। विवादों में है सलमान खान की फिल्म मातृभूमि

ब्रेन ड्रेन : देश के एआई प्रोफेशनल अमेरिका जा रहे:वहीं स्टार्टअप भी शुरू कर रहे; ज्यादा सैलरी और एडवांस्ड AI प्रोजेक्ट बने आकर्षण

ब्रेन ड्रेन : देश के एआई प्रोफेशनल अमेरिका जा रहे:वहीं स्टार्टअप भी शुरू कर रहे; ज्यादा सैलरी और एडवांस्ड AI प्रोजेक्ट बने आकर्षण

देश का बेहतरीन एआई टैलेंट देश में काम करने के बजाय अमेरिका जाना पसंद कर रहा है। जो जा चुके, उनकी घर वापसी भी कम हो गई है। फोर्ब्स इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में ज्यादा सैलरी और एडवांस्ड एआई प्रोजेक्ट्स पर काम करने के बड़े मौके युवा प्रतिभाओं को आकर्षित कर रहे हैं। सिलिकॉन वैली की बैठकों में भारतीय रिसर्चर साफ कह रहे हैं कि उनके पास भारत लौटने की कोई ठोस वजह नहीं है। इसका असर ये हुआ कि कई भारतीय फाउंडर्स अपने नए एआई स्टार्टअप भारत के बजाय अमेरिका में ही शुरू कर रहे हैं। नतीजतन भारत एआई की वैश्विक रेस में लगातार पिछड़ता नजर आ रहा है। कुछ विशेषज्ञ भारत को एंटरप्राइज एआई टैलेंट का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र जरूर मानते हैं, लेकिन इसके बावजूद टॉप टैलेंट का बाहर जाना लगातार जारी है। हायरिंग : एआई जॉब 16% बढ़े, पर कुल भर्ती 3% घटी भारतीय आईटी कंपनियां लंबे समय बाद भर्ती बढ़ा रही हैं। दिक्कत यह है कि ज्यादातर नई भर्ती एआई एक्सपर्ट्स के लिए है। नौकरी जॉबस्पीक की जून, 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक एआई जॉब्स 16 फीसदी बढ़े हैं, जबकि कुल भर्ती 3 फीसदी घटी है। कंपनियां चुनिंदा भर्ती और कर्मचारियों की रीस्किलिंग पर जोर दे रही हैं। शॉर्टेज : 2027 तक 6 लाख एआई पेशेवरों की किल्लत नैसकॉम के मुताबिक 2027 तक भारत में 6 लाख से ज्यादा एआई प्रोफेशनल्स की कमी हो सकती है। शुरुआती करियर वाले 90% से ज्यादा टेक प्रोफेशनल्स एआई टूल्स का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन इनमें से केवल 23% में ही स्वतंत्र रूप से एआई सिस्टम बनाने और उसे लागू करने की तकनीकी गहराई है फाइंडेबिलिटी साइंसेज के सीईओ आनंद माहुरकर के अनुसार ग्रेजुएट्स को मशीन लर्निंग या पायथन कोडिंग तो आती है, लेकिन व्यावहारिक अनुभव नहीं होता। किताबी ज्ञान और कंपनियों के वास्तविक काम के बीच बड़ा अंतर होता है।

'रैंचो' का किरदार सोनम वांगचुक से प्रेरित नहीं:डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने बताया था- FTII के छात्र से मिली थी प्रेरणा

'रैंचो' का किरदार सोनम वांगचुक से प्रेरित नहीं:डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने बताया था- FTII के छात्र से मिली थी प्रेरणा

फिल्म 3 इडियट्स को रिलीज हुए 15 साल से ज्यादा समय हो चुका है। इस दौरान एक दावा लगातार दोहराया जाता रहा कि फिल्म का फेमस किरदार रैंचो उर्फ फुंसुख वांगडू शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक से प्रेरित था। यह बात अब इतनी बार कही जा चुकी है कि कई लोग इसे तथ्य मानने लगे हैं। हालांकि, उपलब्ध रिकॉर्ड और फिल्म से जुड़े लोगों के बयानों को देखने पर इस दावे को लेकर कई सवाल सामने आते हैं। रैंचो और सोनम वांगचुक में क्या हैं समानताएं? पहली नजर में दोनों के बीच कुछ समानताएं दिखाई देती हैं। दोनों इंजीनियर हैं, शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं, स्कूल चलाते हैं और लद्दाख से उनका संबंध है। फिल्म में रैंचो की असली पहचान फुंसुख वांगडू के रूप में दिखाई गई है, जिसका नाम भी सोनम वांगचुक से मिलता-जुलता लगता है। हालांकि, कहानी के मुख्य हिस्से में रैंचो का जीवन पूरी तरह अलग नजर आता है। फिल्म में वह एक अमीर परिवार के बेटे की पहचान अपनाकर इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई करता है। उसकी कहानी दोस्ती, पढ़ाई, परीक्षा, हॉस्टल जीवन और शिक्षा व्यवस्था के विरोध के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म के अंत में वह लद्दाख में एक स्कूल चलाते हुए दिखता है। यही हिस्सा सोनम वांगचुक से तुलना की सबसे बड़ी वजह माना जाता है। टाइमलाइन पर उठते हैं सवाल जांच से पता चला कि 3 इडियट्स की स्क्रिप्ट 1 अगस्त 2007 को स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन के साथ रजिस्टर हुई थी। मौजूद जानकारी से पता चलता है कि आमिर खान और सोनम वांगचुक पहली बार अप्रैल 2008 में सार्वजनिक रूप से मिले थे। अगर स्क्रिप्ट पहले से ही पूरी थी, तो यह सवाल उठता है कि क्या 2008 की मुलाकात से पहले लिखी गई कहानी बाद की किसी घटना से इंस्पायर्ड हो सकती है। लेखकों ने क्या कहा था? फिल्म के लेखक अभिजात जोशी और डायरेक्टर-को-राइटर राजकुमार हिरानी कई इंटरव्यू में कह चुके हैं कि रैंचो के किरदार की सोच एक अलग घटना से प्रेरित थी। उनके मुताबिक, फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) के एक छात्र की कहानी ने उन्हें प्रभावित किया था। बताया गया कि वह छात्र डिग्री के लिए नहीं, बल्कि सीखने के उद्देश्य से दूसरे छात्र की पहचान अपनाकर संस्थान पहुंचा था। लेखकों ने यह भी कहा है कि उनकी सोनम वांगचुक से कभी मुलाकात नहीं हुई। आमिर खान भी लगातार यह कहते रहे हैं कि रैंचो का किरदार सोनम वांगचुक के जीवन पर आधारित नहीं था। फिल्म के प्रचार में नहीं किया गया था ऐसा दावा फिल्म के 2009 के प्रमोशनल कैंपेन, ट्रेलर, प्रेस कॉन्फ्रेंस और इंटरव्यू में कहीं भी रैंचो को सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं बताया गया। यदि ऐसा दावा फिल्म के प्रमोशन का हिस्सा होता, तो उसके स्पष्ट रिकॉर्ड मिलने चाहिए थे। उपलब्ध सार्वजनिक सामग्री में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता। फिर यह धारणा बनी कैसे? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2010 में कुछ खबरों में लद्दाख के लोगों द्वारा रैंचो और सोनम वांगचुक के बीच समानता की चर्चा सामने आई। शुरुआती रिपोर्ट्स में इसे केवल एक संभावना बताया गया था। बाद के वर्षों में कई प्रकाशनों ने सोनम वांगचुक को सीधे रियल लाइफ रैंचो कहना शुरू कर दिया। समय के साथ यह तुलना कई खबरों, सोशल मीडिया पोस्ट और चर्चाओं में दोहराई जाती रही। इसी कारण यह धारणा धीरे-धीरे व्यापक रूप से स्वीकार की जाने लगी। अब भी कई सवाल बाकी अब भी कुछ सवालों के स्पष्ट जवाब सामने नहीं आए हैं। क्या फिल्म लिखे जाने से पहले निर्माता या लेखक सोनम वांगचुक से मिले थे? क्या उन्होंने उनके स्कूल का दौरा किया था? क्या 2009 में फिल्म के किसी आधिकारिक प्रचार में रैंचो को सोनम वांगचुक से प्रेरित बताया गया था? फिलहाल, उपलब्ध रिकॉर्ड यही दिखाते हैं कि रैंचो और सोनम वांगचुक के बीच तुलना समय के साथ लोकप्रिय हुई, लेकिन इसे ऐतिहासिक तथ्य मानने के लिए स्वतंत्र और ठोस प्रमाण जरूरी हैं।

'रैंचो' का किरदार सोनम वांगचुक से प्रेरित नहीं:डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने बताया था- FTII के छात्र से मिली थी प्रेरणा

'रैंचो' का किरदार सोनम वांगचुक से प्रेरित नहीं:डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने बताया था- FTII के छात्र से मिली थी प्रेरणा

फिल्म 3 इडियट्स को रिलीज हुए 15 साल से ज्यादा समय हो चुका है। इस दौरान एक दावा लगातार दोहराया जाता रहा कि फिल्म का फेमस किरदार रैंचो उर्फ फुंसुख वांगडू शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक से प्रेरित था। यह बात अब इतनी बार कही जा चुकी है कि कई लोग इसे तथ्य मानने लगे हैं। हालांकि, उपलब्ध रिकॉर्ड और फिल्म से जुड़े लोगों के बयानों को देखने पर इस दावे को लेकर कई सवाल सामने आते हैं। रैंचो और सोनम वांगचुक में क्या हैं समानताएं? पहली नजर में दोनों के बीच कुछ समानताएं दिखाई देती हैं। दोनों इंजीनियर हैं, शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं, स्कूल चलाते हैं और लद्दाख से उनका संबंध है। फिल्म में रैंचो की असली पहचान फुंसुख वांगडू के रूप में दिखाई गई है, जिसका नाम भी सोनम वांगचुक से मिलता-जुलता लगता है। हालांकि, कहानी के मुख्य हिस्से में रैंचो का जीवन पूरी तरह अलग नजर आता है। फिल्म में वह एक अमीर परिवार के बेटे की पहचान अपनाकर इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई करता है। उसकी कहानी दोस्ती, पढ़ाई, परीक्षा, हॉस्टल जीवन और शिक्षा व्यवस्था के विरोध के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म के अंत में वह लद्दाख में एक स्कूल चलाते हुए दिखता है। यही हिस्सा सोनम वांगचुक से तुलना की सबसे बड़ी वजह माना जाता है। टाइमलाइन पर उठते हैं सवाल जांच से पता चला कि 3 इडियट्स की स्क्रिप्ट 1 अगस्त 2007 को स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन के साथ रजिस्टर हुई थी। मौजूद जानकारी से पता चलता है कि आमिर खान और सोनम वांगचुक पहली बार अप्रैल 2008 में सार्वजनिक रूप से मिले थे। अगर स्क्रिप्ट पहले से ही पूरी थी, तो यह सवाल उठता है कि क्या 2008 की मुलाकात से पहले लिखी गई कहानी बाद की किसी घटना से इंस्पायर्ड हो सकती है। लेखकों ने क्या कहा था? फिल्म के लेखक अभिजात जोशी और डायरेक्टर-को-राइटर राजकुमार हिरानी कई इंटरव्यू में कह चुके हैं कि रैंचो के किरदार की सोच एक अलग घटना से प्रेरित थी। उनके मुताबिक, फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) के एक छात्र की कहानी ने उन्हें प्रभावित किया था। बताया गया कि वह छात्र डिग्री के लिए नहीं, बल्कि सीखने के उद्देश्य से दूसरे छात्र की पहचान अपनाकर संस्थान पहुंचा था। लेखकों ने यह भी कहा है कि उनकी सोनम वांगचुक से कभी मुलाकात नहीं हुई। आमिर खान भी लगातार यह कहते रहे हैं कि रैंचो का किरदार सोनम वांगचुक के जीवन पर आधारित नहीं था। फिल्म के प्रचार में नहीं किया गया था ऐसा दावा फिल्म के 2009 के प्रमोशनल कैंपेन, ट्रेलर, प्रेस कॉन्फ्रेंस और इंटरव्यू में कहीं भी रैंचो को सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं बताया गया। यदि ऐसा दावा फिल्म के प्रमोशन का हिस्सा होता, तो उसके स्पष्ट रिकॉर्ड मिलने चाहिए थे। उपलब्ध सार्वजनिक सामग्री में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता। फिर यह धारणा बनी कैसे? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2010 में कुछ खबरों में लद्दाख के लोगों द्वारा रैंचो और सोनम वांगचुक के बीच समानता की चर्चा सामने आई। शुरुआती रिपोर्ट्स में इसे केवल एक संभावना बताया गया था। बाद के वर्षों में कई प्रकाशनों ने सोनम वांगचुक को सीधे रियल लाइफ रैंचो कहना शुरू कर दिया। समय के साथ यह तुलना कई खबरों, सोशल मीडिया पोस्ट और चर्चाओं में दोहराई जाती रही। इसी कारण यह धारणा धीरे-धीरे व्यापक रूप से स्वीकार की जाने लगी। अब भी कई सवाल बाकी अब भी कुछ सवालों के स्पष्ट जवाब सामने नहीं आए हैं। क्या फिल्म लिखे जाने से पहले निर्माता या लेखक सोनम वांगचुक से मिले थे? क्या उन्होंने उनके स्कूल का दौरा किया था? क्या 2009 में फिल्म के किसी आधिकारिक प्रचार में रैंचो को सोनम वांगचुक से प्रेरित बताया गया था? फिलहाल, उपलब्ध रिकॉर्ड यही दिखाते हैं कि रैंचो और सोनम वांगचुक के बीच तुलना समय के साथ लोकप्रिय हुई, लेकिन इसे ऐतिहासिक तथ्य मानने के लिए स्वतंत्र और ठोस प्रमाण जरूरी हैं।

Nvidia CEO Jensen Huang Black Leather Jacket Auction

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16 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी टेक कंपनी एनवीडिया के CEO जेन्सन हुआंग की पहचान बन चुकी उनकी खास ब्लैक लेदर जैकेट करीब 9.4 करोड़ रुपए (9.60 लाख डॉलर) में नीलाम हुई है। ऑक्शन हाउस सोथबी द्वारा आयोजित इस नीलामी में जैकेट की कीमत उम्मीद से 16 गुना ज्यादा मिली है। पहले इसके 40 हजार से 60 हजार डॉलर (करीब 33 लाख से 50 लाख रुपए) में बिकने का अनुमान लगाया गया था। इस नीलामी से मिलने वाली पूरी रकम को टेक और साइंस सेक्टर के युवा इनोवेटर्स की मदद के लिए दान किया जाएगा। फेलोशिप और रिसर्च पर खर्च होगा नीलामी का पैसा फॉर्च्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नीलामी से मिली राशि सैन फ्रांसिस्को की वेंचर कैपिटल फर्म ‘लॉन्ग जर्नी वेंचर्स’ द्वारा शुरू की गई एक पहल में जाएगी। यह पहल ‘एज इंस्टीट्यूट’ नाम के एक नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन की मदद के लिए काम करती है। एज इंस्टीट्यूट टेक, साइंस, कल्चर और सोसाइटी से जुड़े लोगों को एक साथ लाता है ताकि वे नए आइडियाज पर काम कर सकें। स्टीव जॉब्स और जुकरबर्ग जैसा स्टाइल स्टेटमेंट सिलिकॉन वैली में जिस तरह एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स का ब्लैक टर्टलनेक और मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग की ग्रे टी-शर्ट या हुडी उनका सिग्नेचर स्टाइल रही है, उसी तरह जेन्सन हुआंग की ब्लैक लेदर जैकेट टेक जगत में एक बड़ा सिंबल बन चुकी है। जेन्सन एनवीडिया के बड़े प्रोडक्ट लॉन्चेस, डेवलपर कॉन्फ्रेन्स और कीनोट प्रेजेंटेशन्स में हमेशा इसी लुक में नजर आते हैं। साल 2016 में रेडिट के एक ‘आस्क मी एनीथिंग’ सेशन में जेन्सन ने मजाकिया अंदाज में लिखा था, “शायद आप मुझे ‘लेदर जैकेट वाले उस शख्स’ के रूप में बेहतर जानते होंगे जो अपनी बात को तीन बार दोहराता है।” उनका यह लुक इतना पॉपुलर हुआ कि 2021 में जब ‘टाइम’ मैगजीन ने उन्हें अपने कवर पेज पर जगह दी, तब भी वे इसी सिग्नेचर जैकेट में दिखे थे। ताइपे के इवेंट में पहनी थी यही टॉम फोर्ड जैकेट सोथबी में जिस जैकेट की नीलामी हुई है, वह लग्जरी ब्रांड टॉम फोर्ड की ब्लैक लेदर जैकेट है। हुआंग ने इसे 18 अक्टूबर 2023 को ताइपे में आयोजित ‘हॉन हाई टेक डे’ के दौरान पहना था। ऑक्शन हाउस ने इवेंट की तस्वीरों से इस जैकेट का मिलान किया है। साथ ही जैकेट पर जेन्सन हुआंग के ऑटोग्राफ की जांच ‘जेम्स स्पेंस ऑथेंटिकेशन’ द्वारा की गई है। टॉम फोर्ड जैकेट के दीवाने हैं हुआंग जेन्सन हुआंग को टॉम फोर्ड की जैकेट्स काफी पसंद हैं और यह सिलिकॉन वैली में चर्चा का विषय रहता है। फैशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जेन्सन की ज्यादातर जैकेट्स की कीमत कई हजार डॉलर से लेकर 10,000 डॉलर (करीब 8.3 लाख रुपए) से अधिक होती है। जेन्सेन हुआंग की नेटवर्थ 15.39 लाख करोड़ फोर्ब्स रियल टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के अनुसार, कंपनी के CEO जेन्सेन हुआंग 175 बिलियन डॉलर यानी 16.84 लाख करोड़ रुपए की नेटवर्थ के साथ दुनिया के 7वें सबसे अमीर आदमी हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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31 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी टेक कंपनी एनवीडिया के CEO जेन्सन हुआंग की पहचान बन चुकी उनकी खास ब्लैक लेदर जैकेट करीब 9.4 करोड़ रुपए (9.60 लाख डॉलर) में नीलाम हुई है। ऑक्शन हाउस सोथबी द्वारा आयोजित इस नीलामी में जैकेट की कीमत उम्मीद से 16 गुना ज्यादा मिली है। पहले इसके 40 हजार से 60 हजार डॉलर (करीब 33 लाख से 50 लाख रुपए) में बिकने का अनुमान लगाया गया था। इस नीलामी से मिलने वाली पूरी रकम को टेक और साइंस सेक्टर के युवा इनोवेटर्स की मदद के लिए दान किया जाएगा। फेलोशिप और रिसर्च पर खर्च होगा नीलामी का पैसा फॉर्च्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नीलामी से मिली राशि सैन फ्रांसिस्को की वेंचर कैपिटल फर्म ‘लॉन्ग जर्नी वेंचर्स’ द्वारा शुरू की गई एक पहल में जाएगी। यह पहल ‘एज इंस्टीट्यूट’ नाम के एक नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन की मदद के लिए काम करती है। एज इंस्टीट्यूट टेक, साइंस, कल्चर और सोसाइटी से जुड़े लोगों को एक साथ लाता है ताकि वे नए आइडियाज पर काम कर सकें। स्टीव जॉब्स और जुकरबर्ग जैसा स्टाइल स्टेटमेंट सिलिकॉन वैली में जिस तरह एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स का ब्लैक टर्टलनेक और मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग की ग्रे टी-शर्ट या हुडी उनका सिग्नेचर स्टाइल रही है, उसी तरह जेन्सन हुआंग की ब्लैक लेदर जैकेट टेक जगत में एक बड़ा सिंबल बन चुकी है। जेन्सन एनवीडिया के बड़े प्रोडक्ट लॉन्चेस, डेवलपर कॉन्फ्रेन्स और कीनोट प्रेजेंटेशन्स में हमेशा इसी लुक में नजर आते हैं। साल 2016 में रेडिट के एक ‘आस्क मी एनीथिंग’ सेशन में जेन्सन ने मजाकिया अंदाज में लिखा था, “शायद आप मुझे ‘लेदर जैकेट वाले उस शख्स’ के रूप में बेहतर जानते होंगे जो अपनी बात को तीन बार दोहराता है।” उनका यह लुक इतना पॉपुलर हुआ कि 2021 में जब ‘टाइम’ मैगजीन ने उन्हें अपने कवर पेज पर जगह दी, तब भी वे इसी सिग्नेचर जैकेट में दिखे थे। ताइपे के इवेंट में पहनी थी यही टॉम फोर्ड जैकेट सोथबी में जिस जैकेट की नीलामी हुई है, वह लग्जरी ब्रांड टॉम फोर्ड की ब्लैक लेदर जैकेट है। हुआंग ने इसे 18 अक्टूबर 2023 को ताइपे में आयोजित ‘हॉन हाई टेक डे’ के दौरान पहना था। ऑक्शन हाउस ने इवेंट की तस्वीरों से इस जैकेट का मिलान किया है। साथ ही जैकेट पर जेन्सन हुआंग के ऑटोग्राफ की जांच ‘जेम्स स्पेंस ऑथेंटिकेशन’ द्वारा की गई है। टॉम फोर्ड जैकेट के दीवाने हैं हुआंग जेन्सन हुआंग को टॉम फोर्ड की जैकेट्स काफी पसंद हैं और यह सिलिकॉन वैली में चर्चा का विषय रहता है। फैशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जेन्सन की ज्यादातर जैकेट्स की कीमत कई हजार डॉलर से लेकर 10,000 डॉलर (करीब 8.3 लाख रुपए) से अधिक होती है। जेन्सेन हुआंग की नेटवर्थ 15.39 लाख करोड़ फोर्ब्स रियल टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के अनुसार, कंपनी के CEO जेन्सेन हुआंग 175 बिलियन डॉलर यानी 16.84 लाख करोड़ रुपए की नेटवर्थ के साथ दुनिया के 7वें सबसे अमीर आदमी हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔