Wednesday, 29 Jul 2026 | 06:27 AM

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Sugar Stock Limit India | Gold Silver Price Drop & Elon Musk X Money

Sugar Stock Limit India | Gold Silver Price Drop & Elon Musk X Money

25 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर शकर से जुड़ी रही। केंद्र सरकार ने देशभर में चीनी की कीमतों को कंट्रोल में रखने के लिए व्यापारियों के लिए अधिकतम 30 दिन की स्टॉक लिमिट और 4,000 क्विंटल की होल्डिंग लिमिट तय कर दी है। वहीं, सोने-चांदी की कीमतों में 28 जुलाई को गिरावट रही। IBJA के मुताबिक, एक किलो चांदी 7,098 रुपए सस्ती होकर 2.17 लाख रुपए पर आ गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 2,175 रुपए गिरकर 1.42 लाख रुपए पर आ गया है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज गिरावट देखने को मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा 4,000 क्विंटल तय:केंद्र ने अधिकतम 30 दिन स्टॉक रखने का आदेश दिया; 1 अगस्त से 30 नवंबर तक लागू रहेंगे नियम केंद्र सरकार ने देशभर में चीनी की कीमतों को कंट्रोल में रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आदेश जारी कर चीनी व्यापारियों के लिए अधिकतम 30 दिन की स्टॉक लिमिट और 4,000 क्विंटल की होल्डिंग लिमिट तय कर दी है। खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, यह नया आदेश 1 अगस्त 2026 से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। मानसून में कमी के अनुमान को देखते हुए घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला लिया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. मस्क ने X मनी फीचर लॉन्च किया:US में यूजर्स एप में ही खोल सकेंगे बैंक अकाउंट, बिल पेमेंट और मनी ट्रांसफर भी कर सकेंगे इलॉन मस्क ने X मनी फीचर का रोलआउट शुरू कर दिया है। यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को एवरीथिंग एप बनाने के प्लान के तहत एक बड़ा कदम है। कंपनी ने अभी सिर्फ अमेरिका में अपने प्रीमियम और प्रीमियम+ सब्सक्राइबर्स के लिए यह बैंकिंग सर्विसेज शुरू की हैं। इससे पहले इसे केवल इनवाइट-ओनली बीटा फेज के तहत टेस्ट किया जा रहा था, जिसके बाद 27 जुलाई से इसे ऑफिशियल तौर पर रोलआउट किया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. दिल्ली हाईकोर्ट ने पेटीएम-पेमेंट्स-बैंक को बंद करने का आदेश दिया:RBI ने जानकारी दी, नियमों के उल्लंघन पर बैंकिंग लाइसेंस रद्द हुआ था रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के लाइसेंस रद्द किए जाने के कुछ महीनों बाद अब दिल्ली हाईकोर्ट ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया है। RBI ने मंगलवार को इस कानूनी फैसले की जानकारी दी। हाईकोर्ट ने SBI के पूर्व चीफ जनरल मैनेजर गिरिकुमार एम नायर को पेटीएम पेमेंट्स बैंक का ऑफिशियल लिक्विडेटर नियुक्त किया है। नायर 8 जुलाई 2026 से बैंक के बोर्ड की सभी पावर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. चांदी ₹7,098 गिरकर ₹2.17 लाख पर आई:इस साल ₹13 हजार सस्ती हो चुकी, सोने के दाम में आज ₹2,175 की गिरावट सोने-चांदी की कीमतों में 28 जुलाई को गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 7,098 रुपए सस्ती होकर 2.17 लाख रुपए पर आ गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 2,175 रुपए गिरकर 1.42 लाख रुपए पर आ गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. Meta ने पहले मोदी का वीडियो हटाया, अब रीस्टोर किया:कहा- तकनीकी गड़बड़ी से हटा; PM ने 23 जुलाई को छात्रों को मैसेज दिया था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक से हटाया गया वीडियो Meta ने दोबारा रीस्टोर कर दिया है। कंपनी ने मंगलवार को कहा कि तकनीकी गड़बड़ी की वजह से वीडियो गलती से हट गया था। इससे पहले कुछ समय के लिए फेसबुक पर यह वीडियो दिखाई नहीं दे रहा था, जिसके बाद इस पर सवाल उठे। प्रधानमंत्री मोदी ने यह वीडियो 23 जुलाई को जारी किया था। इसमें उन्होंने जेन-जी और छात्रों को संबोधित करते हुए परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… मंगलवार के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Renuka Shahane Interview | Shah Rukh Khan Circus Days & Acting Career

Renuka Shahane Interview | Shah Rukh Khan Circus Days & Acting Career

18 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक रेणुका शहाणे ने थिएटर से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी। ‘अंधेर नगरी’ नाटक देखने के बाद उनका रुझान रंगमंच की ओर बढ़ा। थिएटर से अभिनय की शुरुआत, पीएचडी छोड़कर एक्टिंग को करियर बनाना, शाहरुख खान के साथ ‘सर्कस’ में काम करने का अनुभव, निर्देशन की नई पारी और सोशल मीडिया पर बेबाक राय। दैनिक भास्कर से बातचीत में रेणुका शहाणे ने करियर के कई किस्से साझा किए, जिनसे पता चलता है कि उन्होंने लोकप्रियता से ज्यादा अच्छे काम को महत्व दिया। सवाल: आपकी अभिनय यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? क्या बचपन से ही अभिनेत्री बनने का सपना था? जवाब: बिल्कुल नहीं। मैं मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज में साइकोलॉजी की पढ़ाई कर रही थी। कॉलेज में एक नाटक ‘अंधेर नगरी’ का मंचन होना था। मैं संगीत मंडल का हिस्सा थी, इसलिए बैकग्राउंड वोकल्स देने गई थी। वहीं पहली बार मैंने स्क्रिप्ट से स्टेज तक नाटक तैयार होते देखा। उस प्रक्रिया ने मुझे इतना प्रभावित किया कि मैंने तय कर लिया कि मुझे थिएटर का हिस्सा बनना है। उस समय अभिनेत्री बनने का सपना नहीं था, लेकिन थिएटर से प्यार हो गया था। रेणुका शहाणे ने बताया कि ‘सर्कस’ के सेट पर शाहरुख खान को देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ जुटती थी। सवाल: फिर थिएटर से जुड़ने का मौका कैसे मिला? जवाब: मेरी मां के मित्र पंडित सत्यदेव दुबे अक्सर हमारे घर आते थे। हर बार मुझसे पूछते थे, ‘अभिनय करोगी?’ और मैं मना कर देती थी। लेकिन कॉलेज के अनुभव के बाद जब वे दोबारा आए और उन्होंने वही सवाल पूछा, तो मैंने पहली बार कहा, ‘हां, करूंगी।’ इसके बाद उनके साथ वर्कशॉप की, एक्सपेरिमेंटल मराठी थिएटर किया और वहीं से सफर शुरू हो गया। सवाल: आपने तो क्लिनिकल साइकोलॉजी में एमए भी किया था। फिर पीएचडी क्यों नहीं की? जवाब: मेरा इरादा पीएचडी करने का ही था। क्लिनिकल साइकोलॉजी में एमए के बाद मैंने ‘सर्कस’ सीरियल किया। उसी दौरान निर्देशक अजीज मिर्जा ने मुझसे कहा, ‘अब पीछे मत देखो, पीएचडी छोड़ दो। तुम्हें अभिनय में ही आगे बढ़ना चाहिए।’ उनकी बात मान ली। उसके बाद मुझे ‘सुरभि’ का ऑफर मिला और जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया। सवाल: ‘सर्कस’ के दौरान शाहरुख खान के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: बहुत शानदार। उस समय शाहरुख फिल्मों के बारे में नहीं सोच रहे थे। उन्हें टेलीविजन में काम करने में मजा आता था। लेकिन उनकी लोकप्रियता तब भी जबरदस्त थी। ‘फौजी’ आ चुका था और लोग उनके दीवाने थे। जहां हम शूटिंग करते थे, वहां उन्हें देखने के लिए 10-20 हजार लोगों की भीड़ जुट जाती थी। तभी समझ में आ गया था कि उनमें कुछ अलग बात है। टीवी शो ‘सर्कस’ 1989 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ था। सवाल: क्या तब लगा था कि वे इतने बड़े सुपरस्टार बनेंगे? जवाब: सुपरस्टार बनेंगे, ऐसा शायद किसी ने नहीं सोचा था। लेकिन इतना जरूर महसूस होता था कि उनका करिश्मा बाकी कलाकारों से अलग है। और सिर्फ करिश्मा ही नहीं, उनके काम करने का तरीका भी कमाल का है। आज भी उनकी ऊर्जा, अनुशासन और वर्क एथिक्स वैसे ही हैं। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। सवाल: आज टीवी पर पहले जैसी गहरी कहानियां क्यों नहीं बन रहीं? जवाब: पहले वीकली शोज होते थे, इसलिए कहानी पर बहुत मेहनत होती थी। आज डेली सोप्स का दौर है। हर महीने इतने सारे एपिसोड बनाने हों तो उसी स्तर की गहराई बनाए रखना आसान नहीं होता। फिर भी मैं लेखकों और पूरी टीम को श्रेय देती हूं कि वे लगातार लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। मुझे आज भी लगता है कि अच्छे वीकली शोज की वापसी होनी चाहिए। सवाल: अभिनय के बाद आपने निर्देशन की तरफ भी कदम बढ़ाया है, अभी डायरेक्शन में नया क्या कर रही हैं? जवाब: मैंने हाल ही में ‘तर्पण’ नाम की शॉर्ट फिल्म बनाई है, जिसमें पहली बार अपने पति आशुतोष राणा को डायरेक्ट किया। शुरुआत में हम दोनों थोड़ा घबराए हुए थे, लेकिन अनुभव शानदार रहा। आशुतोष इतने बेहतरीन अभिनेता हैं कि उन्हें निर्देशित करना मेरे लिए सीखने जैसा अनुभव था। रेणुका शहाणे और आशुतोष राणा की शादी 25 मई 2001 को हुई थी। सवाल: निर्देशन की प्रेरणा कहां से मिली? जवाब: मैंने डॉ. विजया मेहता को असिस्ट किया था। उनके साथ काम करते हुए निर्देशन की प्रक्रिया करीब से देखी। मुझे लगा कि मेरे पास फिल्म स्कूल की डिग्री नहीं है, लेकिन उनसे जो सीखा वही मेरी सबसे बड़ी शिक्षा है। तभी तय कर लिया था कि एक दिन अपनी कहानियां खुद लिखूंगी और निर्देशित भी करूंगी। सवाल: फिल्म इंडस्ट्री में महिला निर्देशकों की संख्या आज भी कम है। इसकी वजह क्या मानती हैं? जवाब: मुझे लगता है कि इसकी सबसे बड़ी वजह आर्थिक भरोसा है। अगर किसी पुरुष निर्देशक ने कई फ्लॉप फिल्में भी दी हों, तब भी लोग उन पर पैसा लगाने को तैयार हो जाते हैं। लेकिन महिलाओं के मामले में ऐसा भरोसा कम देखने को मिलता है। हालात बदल रहे हैं, लेकिन कैमरे के पीछे महिलाओं की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। सवाल: अगर आपकी बायोपिक बने तो उसमें आपकी जिंदगी का कौन-सा पक्ष सबसे ज्यादा दिखना चाहिए? जवाब: मुझे लगता है कि अच्छी मां और अच्छी नागरिक के रूप में मेरा जीवन ज्यादा महत्वपूर्ण है। लोग शायद इसे बहुत ग्लैमरस न मानें, लेकिन समाज के लिए यही सबसे जरूरी भूमिकाएं हैं। रेणुका शहाणे ने कहा कि कलाकार की पहचान उसके काम से बनती है, सिर्फ सोशल मीडिया से नहीं। सवाल: आज सोशल मीडिया और लाइक्स का बहुत दबाव है। आप इसे कैसे देखती हैं? जवाब: मेरे लिए शायद इसलिए आसान है क्योंकि मुझे आज तक सोशल मीडिया की वजह से काम नहीं मिला। मुझे हमेशा काम की वजह से काम मिला है। दूसरी बात, मैं एक कैरेक्टर एक्टर हूं, इसलिए हर समय परफेक्ट दिखने का दबाव नहीं रहता। सोशल मीडिया अच्छा माध्यम है, लेकिन अगर हम अपनी खुशी और आत्मविश्वास को लाइक्स के भरोसे छोड़ देंगे, तो यह सही नहीं होगा। आखिरकार पहचान आपके काम से बनती है, न कि सिर्फ सोशल मीडिया से। _____________________________________ यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. सास मां बन जाए तो रिश्ते

Renuka Shahane Interview | Shah Rukh Khan Circus Days & Acting Career

Renuka Shahane Interview | Shah Rukh Khan Circus Days & Acting Career

34 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक रेणुका शहाणे ने थिएटर से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी। ‘अंधेर नगरी’ नाटक देखने के बाद उनका रुझान रंगमंच की ओर बढ़ा। थिएटर से अभिनय की शुरुआत, पीएचडी छोड़कर एक्टिंग को करियर बनाना, शाहरुख खान के साथ ‘सर्कस’ में काम करने का अनुभव, निर्देशन की नई पारी और सोशल मीडिया पर बेबाक राय। दैनिक भास्कर से बातचीत में रेणुका शहाणे ने करियर के कई किस्से साझा किए, जिनसे पता चलता है कि उन्होंने लोकप्रियता से ज्यादा अच्छे काम को महत्व दिया। सवाल: आपकी अभिनय यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? क्या बचपन से ही अभिनेत्री बनने का सपना था? जवाब: बिल्कुल नहीं। मैं मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज में साइकोलॉजी की पढ़ाई कर रही थी। कॉलेज में एक नाटक ‘अंधेर नगरी’ का मंचन होना था। मैं संगीत मंडल का हिस्सा थी, इसलिए बैकग्राउंड वोकल्स देने गई थी। वहीं पहली बार मैंने स्क्रिप्ट से स्टेज तक नाटक तैयार होते देखा। उस प्रक्रिया ने मुझे इतना प्रभावित किया कि मैंने तय कर लिया कि मुझे थिएटर का हिस्सा बनना है। उस समय अभिनेत्री बनने का सपना नहीं था, लेकिन थिएटर से प्यार हो गया था। रेणुका शहाणे ने बताया कि ‘सर्कस’ के सेट पर शाहरुख खान को देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ जुटती थी। सवाल: फिर थिएटर से जुड़ने का मौका कैसे मिला? जवाब: मेरी मां के मित्र पंडित सत्यदेव दुबे अक्सर हमारे घर आते थे। हर बार मुझसे पूछते थे, ‘अभिनय करोगी?’ और मैं मना कर देती थी। लेकिन कॉलेज के अनुभव के बाद जब वे दोबारा आए और उन्होंने वही सवाल पूछा, तो मैंने पहली बार कहा, ‘हां, करूंगी।’ इसके बाद उनके साथ वर्कशॉप की, एक्सपेरिमेंटल मराठी थिएटर किया और वहीं से सफर शुरू हो गया। सवाल: आपने तो क्लिनिकल साइकोलॉजी में एमए भी किया था। फिर पीएचडी क्यों नहीं की? जवाब: मेरा इरादा पीएचडी करने का ही था। क्लिनिकल साइकोलॉजी में एमए के बाद मैंने ‘सर्कस’ सीरियल किया। उसी दौरान निर्देशक अजीज मिर्जा ने मुझसे कहा, ‘अब पीछे मत देखो, पीएचडी छोड़ दो। तुम्हें अभिनय में ही आगे बढ़ना चाहिए।’ उनकी बात मान ली। उसके बाद मुझे ‘सुरभि’ का ऑफर मिला और जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया। सवाल: ‘सर्कस’ के दौरान शाहरुख खान के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: बहुत शानदार। उस समय शाहरुख फिल्मों के बारे में नहीं सोच रहे थे। उन्हें टेलीविजन में काम करने में मजा आता था। लेकिन उनकी लोकप्रियता तब भी जबरदस्त थी। ‘फौजी’ आ चुका था और लोग उनके दीवाने थे। जहां हम शूटिंग करते थे, वहां उन्हें देखने के लिए 10-20 हजार लोगों की भीड़ जुट जाती थी। तभी समझ में आ गया था कि उनमें कुछ अलग बात है। टीवी शो ‘सर्कस’ 1989 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ था। सवाल: क्या तब लगा था कि वे इतने बड़े सुपरस्टार बनेंगे? जवाब: सुपरस्टार बनेंगे, ऐसा शायद किसी ने नहीं सोचा था। लेकिन इतना जरूर महसूस होता था कि उनका करिश्मा बाकी कलाकारों से अलग है। और सिर्फ करिश्मा ही नहीं, उनके काम करने का तरीका भी कमाल का है। आज भी उनकी ऊर्जा, अनुशासन और वर्क एथिक्स वैसे ही हैं। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। सवाल: आज टीवी पर पहले जैसी गहरी कहानियां क्यों नहीं बन रहीं? जवाब: पहले वीकली शोज होते थे, इसलिए कहानी पर बहुत मेहनत होती थी। आज डेली सोप्स का दौर है। हर महीने इतने सारे एपिसोड बनाने हों तो उसी स्तर की गहराई बनाए रखना आसान नहीं होता। फिर भी मैं लेखकों और पूरी टीम को श्रेय देती हूं कि वे लगातार लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। मुझे आज भी लगता है कि अच्छे वीकली शोज की वापसी होनी चाहिए। सवाल: अभिनय के बाद आपने निर्देशन की तरफ भी कदम बढ़ाया है, अभी डायरेक्शन में नया क्या कर रही हैं? जवाब: मैंने हाल ही में ‘तर्पण’ नाम की शॉर्ट फिल्म बनाई है, जिसमें पहली बार अपने पति आशुतोष राणा को डायरेक्ट किया। शुरुआत में हम दोनों थोड़ा घबराए हुए थे, लेकिन अनुभव शानदार रहा। आशुतोष इतने बेहतरीन अभिनेता हैं कि उन्हें निर्देशित करना मेरे लिए सीखने जैसा अनुभव था। रेणुका शहाणे और आशुतोष राणा की शादी 25 मई 2001 को हुई थी। सवाल: निर्देशन की प्रेरणा कहां से मिली? जवाब: मैंने डॉ. विजया मेहता को असिस्ट किया था। उनके साथ काम करते हुए निर्देशन की प्रक्रिया करीब से देखी। मुझे लगा कि मेरे पास फिल्म स्कूल की डिग्री नहीं है, लेकिन उनसे जो सीखा वही मेरी सबसे बड़ी शिक्षा है। तभी तय कर लिया था कि एक दिन अपनी कहानियां खुद लिखूंगी और निर्देशित भी करूंगी। सवाल: फिल्म इंडस्ट्री में महिला निर्देशकों की संख्या आज भी कम है। इसकी वजह क्या मानती हैं? जवाब: मुझे लगता है कि इसकी सबसे बड़ी वजह आर्थिक भरोसा है। अगर किसी पुरुष निर्देशक ने कई फ्लॉप फिल्में भी दी हों, तब भी लोग उन पर पैसा लगाने को तैयार हो जाते हैं। लेकिन महिलाओं के मामले में ऐसा भरोसा कम देखने को मिलता है। हालात बदल रहे हैं, लेकिन कैमरे के पीछे महिलाओं की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। सवाल: अगर आपकी बायोपिक बने तो उसमें आपकी जिंदगी का कौन-सा पक्ष सबसे ज्यादा दिखना चाहिए? जवाब: मुझे लगता है कि अच्छी मां और अच्छी नागरिक के रूप में मेरा जीवन ज्यादा महत्वपूर्ण है। लोग शायद इसे बहुत ग्लैमरस न मानें, लेकिन समाज के लिए यही सबसे जरूरी भूमिकाएं हैं। रेणुका शहाणे ने कहा कि कलाकार की पहचान उसके काम से बनती है, सिर्फ सोशल मीडिया से नहीं। सवाल: आज सोशल मीडिया और लाइक्स का बहुत दबाव है। आप इसे कैसे देखती हैं? जवाब: मेरे लिए शायद इसलिए आसान है क्योंकि मुझे आज तक सोशल मीडिया की वजह से काम नहीं मिला। मुझे हमेशा काम की वजह से काम मिला है। दूसरी बात, मैं एक कैरेक्टर एक्टर हूं, इसलिए हर समय परफेक्ट दिखने का दबाव नहीं रहता। सोशल मीडिया अच्छा माध्यम है, लेकिन अगर हम अपनी खुशी और आत्मविश्वास को लाइक्स के भरोसे छोड़ देंगे, तो यह सही नहीं होगा। आखिरकार पहचान आपके काम से बनती है, न कि सिर्फ सोशल मीडिया से। _____________________________________ यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. सास मां बन जाए तो रिश्ते

USA Foreign Funding Controversy | Harvard China Funds Probe Demand

USA Foreign Funding Controversy | Harvard China Funds Probe Demand

वॉशिंगटन9 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में यूनिवर्सिटीज को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर सवालों के बीच नया खुलासा हुआ है। इससे यूनिवर्सिटीज और ट्रम्प प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। शिक्षा विभाग के पोर्टल के मुताबिक, हार्वर्ड को विदेशी स्रोतों से रिकॉर्ड 43,100 करोड़ रु. मिले हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है। इसमें से छह हजार करोड़ चीन से आए हैं। ट्रम्प प्रशासन की वीसा नीतियों और प्रवासियों पर सख्ती के बीच अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर विदेशी नागरिकों और पैसे पर अत्यधिक निर्भरता का आरोप लग रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौते की बात कही जा रही है। ट्रम्प प्रशासन से जांच शुरू करने की मांग उठी है। अन्य अमेरिकी यूनिवर्सिटीज भी राडार पर यह विवाद सिर्फ हार्वर्ड तक सीमित नहीं है। अमेरिका के वॉच-लिस्ट में शामिल शीर्ष पांच चीनी कंपनियों (जैसे हुआवेई और एयर चाइना) ने देश के अलग-अलग कॉलेजों को करीब 1,140 करोड़ रु. दिए हैं। इन्हें भी राडार पर लेकर जांच हो सकती है। लैब की जासूसी और सैन्य तकनीक चोरी का खतरा अमेरिकी विश्वविद्यालयों में आ रहा विदेशी पैसा सिर्फ दान नहीं, बल्कि रणनीतिक घुसपैठ का जरिया बन चुका है। फंड के इस खेल से अमेरिका के सामने कई बड़े खतरे खड़े हो गए हैं। यूनिवर्सिटी लैब्स में विदेशी फंड के जरिए गोपनीय रिसर्च और डेटा चुराए जाने की आशंका जताई जा रही है। आरोप हैं कि चीनी सेना से जुड़ी संस्थाएं फंडिंग देकर अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल अपने हथियारों को तैयार करने में कर सकती हैं। हार्वर्ड और विदेशी संस्थाओं में 7,089 वित्तीय सौदे हुए हार्वर्ड ने विदेशी संस्थाओं के साथ 7,089 अलग-अलग वित्तीय सौदे किए हैं। इस रिकॉर्ड वित्तीय सौदे के कारण हार्वर्ड अमेरिका में विदेशी फंडिंग हासिल करने वाला शीर्ष संस्थान बना है। हार्वर्ड को चीनी सैन्य विकास से जुड़ी संस्थाओं से करीब 4 करोड़ रुपए और विदेशी टैलेंट प्रोग्राम से 4 करोड़ रु. मिले हैं। ट्रम्प ने कहा था- यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निशाने पर रहती है। पिछले साल (16 अप्रैल, 205) उन्होंने एक बयान में कहा था कि यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है और यह सिर्फ वोक कर्मचारियों की भर्ती कर रहा है। अब हार्वर्ड को दुनिया की सबसे बेहतर यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की किसी भी लिस्ट में नहीं गिना जाना चाहिए। हार्वर्ड एक मजाक है जो नफरत और मूर्खता सिखाता है। इसे अब सरकारी पैसा नहीं मिलना चाहिए। ट्रम्प ने इस बयान के एक दिन पहले ही हार्वर्ड की 18 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग रोकी थी और उसका टैक्स फ्री दर्जा खत्म करने की बात कही थी। ————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की टैक्स छूट खत्म कर सकते हैं:₹18 हजार करोड़ की फंडिंग भी रोकी; ट्रम्प यूनिवर्सिटी पर कंट्रोल चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्स छूट खत्म करने की बात कही। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्ट छूट पर फिर से विचार किया जा सकता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

USA Foreign Funding Controversy | Harvard China Funds Probe Demand

USA Foreign Funding Controversy | Harvard China Funds Probe Demand

वॉशिंगटन59 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में यूनिवर्सिटीज को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर सवालों के बीच नया खुलासा हुआ है। इससे यूनिवर्सिटीज और ट्रम्प प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। शिक्षा विभाग के पोर्टल के मुताबिक, हार्वर्ड को विदेशी स्रोतों से रिकॉर्ड 43,100 करोड़ रु. मिले हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है। इसमें से छह हजार करोड़ चीन से आए हैं। ट्रम्प प्रशासन की वीसा नीतियों और प्रवासियों पर सख्ती के बीच अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर विदेशी नागरिकों और पैसे पर अत्यधिक निर्भरता का आरोप लग रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौते की बात कही जा रही है। ट्रम्प प्रशासन से जांच शुरू करने की मांग उठी है। अन्य अमेरिकी यूनिवर्सिटीज भी राडार पर यह विवाद सिर्फ हार्वर्ड तक सीमित नहीं है। अमेरिका के वॉच-लिस्ट में शामिल शीर्ष पांच चीनी कंपनियों (जैसे हुआवेई और एयर चाइना) ने देश के अलग-अलग कॉलेजों को करीब 1,140 करोड़ रु. दिए हैं। इन्हें भी राडार पर लेकर जांच हो सकती है। लैब की जासूसी और सैन्य तकनीक चोरी का खतरा अमेरिकी विश्वविद्यालयों में आ रहा विदेशी पैसा सिर्फ दान नहीं, बल्कि रणनीतिक घुसपैठ का जरिया बन चुका है। फंड के इस खेल से अमेरिका के सामने कई बड़े खतरे खड़े हो गए हैं। यूनिवर्सिटी लैब्स में विदेशी फंड के जरिए गोपनीय रिसर्च और डेटा चुराए जाने की आशंका जताई जा रही है। आरोप हैं कि चीनी सेना से जुड़ी संस्थाएं फंडिंग देकर अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल अपने हथियारों को तैयार करने में कर सकती हैं। हार्वर्ड और विदेशी संस्थाओं में 7,089 वित्तीय सौदे हुए हार्वर्ड ने विदेशी संस्थाओं के साथ 7,089 अलग-अलग वित्तीय सौदे किए हैं। इस रिकॉर्ड वित्तीय सौदे के कारण हार्वर्ड अमेरिका में विदेशी फंडिंग हासिल करने वाला शीर्ष संस्थान बना है। हार्वर्ड को चीनी सैन्य विकास से जुड़ी संस्थाओं से करीब 4 करोड़ रुपए और विदेशी टैलेंट प्रोग्राम से 4 करोड़ रु. मिले हैं। ट्रम्प ने कहा था- यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निशाने पर रहती है। पिछले साल (16 अप्रैल, 205) उन्होंने एक बयान में कहा था कि यह यूनिवर्सिटी एक मजाक है और यह सिर्फ वोक कर्मचारियों की भर्ती कर रहा है। अब हार्वर्ड को दुनिया की सबसे बेहतर यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की किसी भी लिस्ट में नहीं गिना जाना चाहिए। हार्वर्ड एक मजाक है जो नफरत और मूर्खता सिखाता है। इसे अब सरकारी पैसा नहीं मिलना चाहिए। ट्रम्प ने इस बयान के एक दिन पहले ही हार्वर्ड की 18 हजार करोड़ रुपए की फंडिंग रोकी थी और उसका टैक्स फ्री दर्जा खत्म करने की बात कही थी। ————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की टैक्स छूट खत्म कर सकते हैं:₹18 हजार करोड़ की फंडिंग भी रोकी; ट्रम्प यूनिवर्सिटी पर कंट्रोल चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्स छूट खत्म करने की बात कही। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्ट छूट पर फिर से विचार किया जा सकता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Sanjay Dutt Birthday Interesting Facts; Salman Khan BMW | Tina Munim Rajesh Khanna

Sanjay Dutt Birthday Interesting Facts; Salman Khan BMW | Tina Munim Rajesh Khanna

12 मिनट पहलेलेखक: अभय पांडेय कॉपी लिंक संजय दत्त अब तक 2026 में ‘धुरंधर 2’, ‘द राजा साहब’, ‘आखिरी सवाल’, ‘राजा शिवाजी’, ‘केडी – द डेविल’ और ‘7 डॉग्स’ फिल्मों में नजर आ चुके हैं। साल था 1994। मुंबई की ठाणे सेंट्रल जेल की सबसे कड़ी सुरक्षा वाली अंडा बैरक में बंद एक आरोपी रक्षाबंधन के दिन अपनी बहनों का इंतजार कर रहा था। लोहे की सलाखों के पीछे दोनों बहनों ने उसके हाथ पर राखी बांधी, लेकिन उस भाई की जेब पूरी तरह खाली थी। देने के लिए न कोई तोहफा था, न पैसे। कुछ पल तक वह चुप रहा। फिर जेल की कैंटीन से मिले दो-दो रुपए के चाय-नाश्ते के कूपन बहनों के हाथ में रख दिए और बोला, ‘मेरे पास फिलहाल यही है।’ यह वही शख्स था, जिसके नाम पर कभी सिनेमाघरों के बाहर भीड़ उमड़ती थी, जिसकी फिल्मों के पोस्टर शहरों में छाए रहते थे और जो करोड़ों लोगों का सुपरस्टार था, लेकिन वक्त ने ऐसी करवट बदली कि वही एक्टर जेल की चारदीवारी के भीतर अपनी बहनों को सिर्फ दो रुपए के कूपन ही दे सका। जी हां, हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के ‘संजू बाबा’ यानी संजय दत्त की। आज उनके 67वें जन्मदिन पर जानते हैं उनके कुछ अनसुने किस्से। इंदिरा गांधी की सलाह पर बोर्डिंग स्कूल भेजा गया संजय दत्त के जन्म के बाद सुनील दत्त और नरगिस ने अपने बेटे के नाम के लिए फिल्म पत्रिका ‘शमा’ के पाठकों से सुझाव मांगे थे। जिसके बाद देशभर से लगभग 15,000 से अधिक नाम आए थे। इसके बाद ‘संजय’ नाम आगरा की रहने वाली पुष्पा अग्रवाल ने सुझाया था। संजय बचपन से ही परिवार के सबसे लाड़ले थे। माता-पिता, नानी और रिश्तेदार उनकी हर इच्छा पूरी कर देते थे। इसी वजह से वे बेहद जिद्दी भी होते जा रहे थे। स्कूल हो या घर, हर जगह उन्हें विशेष तवज्जो मिलती थी। हालांकि, संजय सिर्फ जिद्दी नहीं थे, उनका दिल भी बहुत बड़ा था। एक बार दिल्ली में एक शादी के दौरान उन्होंने ठंड से कांप रहे एक गरीब बच्चे को अपना सूट उतारकर दे दिया था। माता-पिता के साथ संजय दत्त की बचपन की तस्वीर। (AI की मदद से तस्वीर की क्वालिटी बेहतर की गई है।) लेकिन उनकी शरारतें परिवार की चिंता भी बढ़ा रही थीं। पत्रकार यासिर उस्मान द्वारा संजय दत्त पर लिखी गई किताब के मुताबिक छह साल की उम्र में उन्होंने पिता सुनील दत्त को सिगरेट पीते देखा और खुद भी सिगरेट पीने की जिद करने लगे। सुनील दत्त को लगा कि एक बार सिगरेट पीने के बाद बेटे का शौक खत्म हो जाएगा, लेकिन संजय ने पूरी सिगरेट पी ली। कुछ साल बाद वे घर आए मेहमानों की फेंकी हुई सिगरेट की बुझी हुई बटें बगीचे में छिपकर पीते हुए भी पकड़े गए। जिस पर पिता ने उनकी पिटाई की थी। ऐसे में सुनील दत्त को एहसास हुआ कि जरूरत से ज्यादा लाड़-प्यार और फिल्मी माहौल का संजय पर गलत असर पड़ रहा है। तभी यह फैसला किया गया कि संजय को किसी बोर्डिंग स्कूल भेज दिया जाए। इसके बाद परिवार की करीबी मित्र और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सलाह दी कि संजय को मिलिट्री डिसिप्लिन के लिए हिमाचल प्रदेश के सनावर स्थित लॉरेंस स्कूल भेजा जाए। 1980 में इंदिरा गांधी सरकार ने नरगिस दत्त को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। वहीं, सुनील दत्त कांग्रेस के टिकट पर पांच बार लोकसभा सांसद चुने गए थे। संजय जूतों में हेरोइन छिपाकर न्यूयॉर्क गए थे 1980 में संजय दत्त अपनी पहली फिल्म ‘रॉकी’ की शूटिंग में बिजी थे। इसी दौरान उनकी मां नरगिस की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया। नरगिस को पैंक्रियाटिक कैंसर था और उन्हें इलाज के लिए न्यूयॉर्क के मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर ले जाना था। सुनील दत्त ने कांपती आवाज में अपने तीनों बच्चों संजय, नम्रता और प्रिया को बताया कि उनकी मां को कैंसर है। इसके बाद ‘रॉकी’ की शूटिंग रोक दी गई और 21 अगस्त 1980 को सुनील दत्त नरगिस को लेकर अमेरिका रवाना हो गए। न्यूयॉर्क में इलाज के दौरान नरगिस की कई सर्जरी हुईं, लेकिन ऑपरेशन के बाद लगातार खून बहने से वे कोमा में चली गईं। इसी दौरान संजय दत्त खुद भी नशे की लत से जूझ रहे थे। मां की गंभीर हालत के बावजूद वे ड्रग्स नहीं छोड़ पा रहे थे। यासिर उस्मान की किताब के मुताबिक, न्यूयॉर्क जाते समय वे अपने जूतों में करीब 30 ग्राम हेरोइन छिपाकर ले गए थे। बाद में उन्होंने स्वीकार किया था कि उस घटना को याद करके उन्हें शर्म आती है। यहां तक कि नशे की वजह से उन्हें अपनी मां के लिए खून दान करने की अनुमति भी नहीं मिली थी। ‘रॉकी’ के प्रीमियर में नरगिस की याद में कुर्सी खाली छोड़ी गई न्यूयॉर्क में करीब तीन महीने तक कोमा में रहने के बाद नरगिस को होश आया था। उनकी सबसे बड़ी इच्छा थी कि वे जल्द भारत लौटें और अपने बेटे की पहली फिल्म ‘रॉकी’ देखें। 6 मार्च 1981 को भारत लौटने के बाद 9 मार्च 1981 को सुनील दत्त उन्हें फिल्म ‘रॉकी’ दिखाने घर के प्रीव्यू थिएटर तक ले गए। कमजोरी के कारण वे पूरी फिल्म नहीं देख सकीं और सिर्फ सात रील देखने के बाद उन्हें वापस कमरे में ले जाना पड़ा, लेकिन जितना देखा, उससे वे बेहद खुश थीं। उन्हें विश्वास था कि उनका बेटा संजू बड़ा स्टार बनेगा। वहीं, संजय की डेब्यू फिल्म ‘रॉकी’ का प्रीमियर 7 मई 1981 को तय किया गया था। प्रीमियर से ठीक चार दिन पहले, 3 मई 1981 को नरगिस का निधन हो गया। इसके बाद फिल्म के प्रीमियर के दौरान सुनील दत्त ने थिएटर में संजय दत्त के बगल वाली कुर्सी नरगिस की याद में खाली रखी थी। ऋषि कपूर-राजेश खन्ना को पीटने पहुंच गए थे फिल्म ‘रॉकी’ की शूटिंग के दौरान संजय दत्त और एक्ट्रेस टीना मुनीम के बीच प्यार हुआ। इस रिश्ते में संजय बेहद पजेसिव बॉयफ्रेंड थे। दोनो का अफेयर लगभग 2 साल तक चला था। यासिर उस्मान की किताब के मुताबिक, फिल्म ‘कर्ज’ में टीना मुनीम ऋषि कपूर के साथ काम कर रही थीं। तब दोनों

Cryonics Pioneer Death | RBI Plastic Currency Update

Cryonics Pioneer Death | RBI Plastic Currency Update

Hindi News Career Cryonics Pioneer Death | RBI Plastic Currency Update | July 29 Current Affairs 12 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 1. भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने हुआ चुनयिंग से मुलाकात की 28 जुलाई, को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने चीन की उप-विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों प्रमुखों ने ट्रेड, इकोनॉमिक को-ऑपरेशन, कल्चरल एक्सचेंज और पीपल टू पीपल एक्सचेंज बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के महत्व को दोहराया। मिस्री ने इस यात्रा के दौरान प्रमुख राजनीतिज्ञ सुन हैयान से मुलाकात कर राजनीतिक, शैक्षणिक, थिंक-टैंक और जन-संपर्क सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। विक्रम मिस्री ने चीन के पूर्व बॉर्डर डिपार्टमेंट के पूर्व डायरेक्टर जनरल हांग लियांग से भी मुलाकात की। भारत-चीन संबंधों की समीक्षा, व्यापार एवं आर्थिक सहयोग को बढ़ावा, सीमा पर शांति बनाए रखना जैसे मुद्दों पर बात की। विदेश सचिव विक्रम मिस्री चीन के आधिकारिक दौर पर पहुंचे है। उन्होंने इस दौरान बीजिंग का भी दौरा किया। इस यात्रा का उद्देश्य भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाना, सीमा पर शांति बनाए रखना तथा द्विपक्षीय सहयोग के पहलुओं की समीक्षा करना था। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने चीनी जन राजनीतिक परामर्श सम्मेलन में भी हिस्सा लिया। नेशनल (NATIONAL) 2. RBI प्लास्टिक नोट की टेस्टिंग करेगी 27 जुलाई को केंद्र सरकार ने ₹10, ₹20 के प्लास्टिक नोट की टेस्टिंग को मंजूरी दी। RBI बैंक टोटल 200 करोड़ पॉलिमर यानी प्लास्टिक से बने नोट छापेगी। इस प्लास्टिक करेंसी का ट्रायल होगा, अगर ये सफल होता है तो आगे और नोट भी छापे जाएंगे। पायलट प्रोजेक्ट के तहत 3,000 करोड़ रुपए मूल्य के पॉलीमर बैंक नोट जारी किए जाएंगे। केंद्र सरकार ने ये साफ किया है कि फिलहाल कागजी नोटों को पूरी तरह बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। प्लास्टिक नोटों का जीवनकाल कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा होता है और इनके नकली नोट बनाना कठिन है। भारत ने 2012 में भी पॉलिमर नोट लाने की कोशिश की थी लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण योजना टल गई। प्लास्टिक के नोट कागज के नोटों की तुलना में 2-5 गुना ज्यादा समय तक चल सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश है जिसने 1988 में पॉलीमर बैंक नोट जारी किए। इसके बाद कई देशों ने इन्हें अपनाया। पॉलीमर नोट ऐसे मुद्रा नोट होते हैं जो कागज के बजाय पॉलीमर नामक विशेष प्लास्टिक से बनाए जाते हैं। 3. पेटीएम पेमेंट्स बैंक पूरी तरह बंद होंगे 28 जुलाई को RBI ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक के पूरी तरह बंद होने की जानकारी दी। RBI के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट ने SBI के पूर्व चीफ जनरल मैनेजर गिरिकुमार एम नायर को पेटीएम पेमेंट्स बैंक का ऑफिशियल लिक्विडेटर नियुक्त किया है। नायर 8 जुलाई 2026 से ही पेटीएम पेमेंट्स बैंक के बोर्ड की सभी पावर का इस्तेमाल कर रहे हैं। RBI ने बयान में बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 8 जुलाई 2026 के आदेश और 22 जुलाई 2026 के आदेश के साथ ये निर्देश जारी किया है। RBI ने अप्रैल 2026 में लगातार नियमों का पालन न करने की वजह से पेटीएम पेमेंट्स बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया था। उस समय RBI ने कहा था कि बैंक का कामकाज डिपॉजिटर्स के हितों के खिलाफ चलाया जा रहा। लाइसेंस रद्द करने के साथ ही RBI ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वह बैंक को बंद कराने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करेगा। हालांकि, पे टीएम ऐप, UPI और अन्य डिजिटल भुगतान सर्विस सामान्य रूप से चलती रहेंगी, क्योंकि वे Paytm Payments Bank से अलग ऑपरेट होती हैं। Paytm Payments Bank – PPBL पेटीएम पेमेंट्स बैंक भारत का ही एक बैंक है, जिसे 2017 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य डिजिटल बैंकिंग, बचत खाते, UPI, वॉलेट, FASTag और अन्य भुगतान सर्विस उपलब्ध कराना था। यह बैंक लोन नहीं दे सकता था, क्योंकि पेमेंट्स बैंकों को इसकी अनुमति नहीं होती। स्पोर्ट्स (SPORTS) 3. शर्मिला ने पैरा शॉट पुट F57 में गोल्ड जीता 27 जुलाई को भारत की शर्मिला धनकड़ ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के पैरा शॉट पुट F57 इवेंट में गोल्ड मेडल जीता। शर्मिला ने 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो कर यह उपलब्धि हासिल की। F57 कैटेगरी में उन पैरा एथलीट्स को शामिल किया जाता है, जिनके निचले अंग प्रभावित होते हैं या जिनकी मांसपेशियों की ताकत कम होती है। शर्मिला ने 34 साल की उम्र में सीटेड शॉट पुट इवेंट की ट्रेनिंग शुरू की थी। शर्मिला के घर में आर्थिक तंगी इतनी थी कि 2023 में ट्रेनिंग का खर्च जुटाने के लिए उन्होंने अपना घर बेच दिया था। शर्मिला ने इससे पहले पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 दुबई में गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद परिवार किराए के मकान में रहने लगा, लेकिन शर्मिला ने अभ्यास नहीं छोड़ा। इसी इवेंट में भारत की शिल्पा के. शायला ने ब्रॉन्ज मेडल जीता है। ये भारत का दूसरा गोल्ड मेडल है। शर्मिला से पहले रविवार को वेटलिफ्टिंग में मीरा बाई चानू ने 48 KG में गोल्ड जीता था। अन्य इवेंट्स में हाई जंप में सर्वेश कुशारे और वेटलिफ्टिंग के 79 किलोग्राम वर्ग में अजय बाबू ने सिल्वर मेडल जीता। बिंदियारानी देवी ने 58 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया, जबकि ज्ञानेश्वरी यादव ने 53 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीता। अब भारत के मेडल टैली में कुल 10 मेडल हो गए हैं और टीम आठवें नंबर पर है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 26 गोल्ड सहित 59 मेडल के साथ पहले नंबर पर है। निधन (DEATH) 4. एनाटॉमिस्ट डॉ. गुंटर वॉन हेगेंस का निधन 27 जुलाई को जर्मनी के प्रसिद्ध एनाटॉमिस्ट डॉ. गुंटर वॉन हेगेंस के निधन की खबर आई। ये खबर इंस्टीट्यूट फॉर प्लास्टिनेशन ने जारी की हेगेंस का निधन 24 जुलाई को हुआ, वे 81 साल के थे। डॉ. गुंटर वॉन हेगेंस प्लास्टिनेशन टेक्नोलॉजी के आविष्कारक थे। हेगेंस ने 1977 में प्लास्टिनेशन टेक्नोलॉजी का आविष्कार किया, जिसमें मानव या पशु टिशूस को विशेष पॉलिमर से बदलकर

Sanjay Dutt Birthday Interesting Facts; Salman Khan BMW | Tina Munim Rajesh Khanna

Sanjay Dutt Birthday Interesting Facts; Salman Khan BMW | Tina Munim Rajesh Khanna

2 घंटे पहलेलेखक: अभय पांडेय कॉपी लिंक संजय दत्त अब तक 2026 में ‘धुरंधर 2’, ‘द राजा साहब’, ‘आखिरी सवाल’, ‘राजा शिवाजी’, ‘केडी – द डेविल’ और ‘7 डॉग्स’ फिल्मों में नजर आ चुके हैं। साल था 1994। मुंबई की ठाणे सेंट्रल जेल की सबसे कड़ी सुरक्षा वाली अंडा बैरक में बंद एक आरोपी रक्षाबंधन के दिन अपनी बहनों का इंतजार कर रहा था। लोहे की सलाखों के पीछे दोनों बहनों ने उसके हाथ पर राखी बांधी, लेकिन उस भाई की जेब पूरी तरह खाली थी। देने के लिए न कोई तोहफा था, न पैसे। कुछ पल तक वह चुप रहा। फिर जेल की कैंटीन से मिले दो-दो रुपए के चाय-नाश्ते के कूपन बहनों के हाथ में रख दिए और बोला, ‘मेरे पास फिलहाल यही है।’ यह वही शख्स था, जिसके नाम पर कभी सिनेमाघरों के बाहर भीड़ उमड़ती थी, जिसकी फिल्मों के पोस्टर शहरों में छाए रहते थे और जो करोड़ों लोगों का सुपरस्टार था, लेकिन वक्त ने ऐसी करवट बदली कि वही एक्टर जेल की चारदीवारी के भीतर अपनी बहनों को सिर्फ दो रुपए के कूपन ही दे सका। जी हां, हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के ‘संजू बाबा’ यानी संजय दत्त की। आज उनके 67वें जन्मदिन पर जानते हैं उनके कुछ अनसुने किस्से। इंदिरा गांधी की सलाह पर बोर्डिंग स्कूल भेजा गया संजय दत्त के जन्म के बाद सुनील दत्त और नरगिस ने अपने बेटे के नाम के लिए फिल्म पत्रिका ‘शमा’ के पाठकों से सुझाव मांगे थे। जिसके बाद देशभर से लगभग 15,000 से अधिक नाम आए थे। इसके बाद ‘संजय’ नाम आगरा की रहने वाली पुष्पा अग्रवाल ने सुझाया था। संजय बचपन से ही परिवार के सबसे लाड़ले थे। माता-पिता, नानी और रिश्तेदार उनकी हर इच्छा पूरी कर देते थे। इसी वजह से वे बेहद जिद्दी भी होते जा रहे थे। स्कूल हो या घर, हर जगह उन्हें विशेष तवज्जो मिलती थी। हालांकि, संजय सिर्फ जिद्दी नहीं थे, उनका दिल भी बहुत बड़ा था। एक बार दिल्ली में एक शादी के दौरान उन्होंने ठंड से कांप रहे एक गरीब बच्चे को अपना सूट उतारकर दे दिया था। माता-पिता के साथ संजय दत्त की बचपन की तस्वीर। (AI की मदद से तस्वीर की क्वालिटी बेहतर की गई है।) लेकिन उनकी शरारतें परिवार की चिंता भी बढ़ा रही थीं। पत्रकार यासिर उस्मान द्वारा संजय दत्त पर लिखी गई किताब के मुताबिक छह साल की उम्र में उन्होंने पिता सुनील दत्त को सिगरेट पीते देखा और खुद भी सिगरेट पीने की जिद करने लगे। सुनील दत्त को लगा कि एक बार सिगरेट पीने के बाद बेटे का शौक खत्म हो जाएगा, लेकिन संजय ने पूरी सिगरेट पी ली। कुछ साल बाद वे घर आए मेहमानों की फेंकी हुई सिगरेट की बुझी हुई बटें बगीचे में छिपकर पीते हुए भी पकड़े गए। जिस पर पिता ने उनकी पिटाई की थी। ऐसे में सुनील दत्त को एहसास हुआ कि जरूरत से ज्यादा लाड़-प्यार और फिल्मी माहौल का संजय पर गलत असर पड़ रहा है। तभी यह फैसला किया गया कि संजय को किसी बोर्डिंग स्कूल भेज दिया जाए। इसके बाद परिवार की करीबी मित्र और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सलाह दी कि संजय को मिलिट्री डिसिप्लिन के लिए हिमाचल प्रदेश के सनावर स्थित लॉरेंस स्कूल भेजा जाए। 1980 में इंदिरा गांधी सरकार ने नरगिस दत्त को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। वहीं, सुनील दत्त कांग्रेस के टिकट पर पांच बार लोकसभा सांसद चुने गए थे। संजय जूतों में हेरोइन छिपाकर न्यूयॉर्क गए थे 1980 में संजय दत्त अपनी पहली फिल्म ‘रॉकी’ की शूटिंग में बिजी थे। इसी दौरान उनकी मां नरगिस की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया। नरगिस को पैंक्रियाटिक कैंसर था और उन्हें इलाज के लिए न्यूयॉर्क के मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर ले जाना था। सुनील दत्त ने कांपती आवाज में अपने तीनों बच्चों संजय, नम्रता और प्रिया को बताया कि उनकी मां को कैंसर है। इसके बाद ‘रॉकी’ की शूटिंग रोक दी गई और 21 अगस्त 1980 को सुनील दत्त नरगिस को लेकर अमेरिका रवाना हो गए। न्यूयॉर्क में इलाज के दौरान नरगिस की कई सर्जरी हुईं, लेकिन ऑपरेशन के बाद लगातार खून बहने से वे कोमा में चली गईं। इसी दौरान संजय दत्त खुद भी नशे की लत से जूझ रहे थे। मां की गंभीर हालत के बावजूद वे ड्रग्स नहीं छोड़ पा रहे थे। यासिर उस्मान की किताब के मुताबिक, न्यूयॉर्क जाते समय वे अपने जूतों में करीब 30 ग्राम हेरोइन छिपाकर ले गए थे। बाद में उन्होंने स्वीकार किया था कि उस घटना को याद करके उन्हें शर्म आती है। यहां तक कि नशे की वजह से उन्हें अपनी मां के लिए खून दान करने की अनुमति भी नहीं मिली थी। ‘रॉकी’ के प्रीमियर में नरगिस की याद में कुर्सी खाली छोड़ी गई न्यूयॉर्क में करीब तीन महीने तक कोमा में रहने के बाद नरगिस को होश आया था। उनकी सबसे बड़ी इच्छा थी कि वे जल्द भारत लौटें और अपने बेटे की पहली फिल्म ‘रॉकी’ देखें। 6 मार्च 1981 को भारत लौटने के बाद 9 मार्च 1981 को सुनील दत्त उन्हें फिल्म ‘रॉकी’ दिखाने घर के प्रीव्यू थिएटर तक ले गए। कमजोरी के कारण वे पूरी फिल्म नहीं देख सकीं और सिर्फ सात रील देखने के बाद उन्हें वापस कमरे में ले जाना पड़ा, लेकिन जितना देखा, उससे वे बेहद खुश थीं। उन्हें विश्वास था कि उनका बेटा संजू बड़ा स्टार बनेगा। वहीं, संजय की डेब्यू फिल्म ‘रॉकी’ का प्रीमियर 7 मई 1981 को तय किया गया था। प्रीमियर से ठीक चार दिन पहले, 3 मई 1981 को नरगिस का निधन हो गया। इसके बाद फिल्म के प्रीमियर के दौरान सुनील दत्त ने थिएटर में संजय दत्त के बगल वाली कुर्सी नरगिस की याद में खाली रखी थी। ऋषि कपूर-राजेश खन्ना को पीटने पहुंच गए थे फिल्म ‘रॉकी’ की शूटिंग के दौरान संजय दत्त और एक्ट्रेस टीना मुनीम के बीच प्यार हुआ। इस रिश्ते में संजय बेहद पजेसिव बॉयफ्रेंड थे। दोनो का अफेयर लगभग 2 साल तक चला था। यासिर उस्मान की किताब के मुताबिक, फिल्म ‘कर्ज’ में टीना मुनीम ऋषि कपूर के साथ काम कर रही थीं। तब दोनों