NEET PG 2026 Exam Update

नई दिल्ली17 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने NEET PG 2026 परीक्षा के लिए कई बड़े सुधारों की घोषणा की है। इसमें परीक्षार्थियों की यात्रा और परीक्षा में किसी भी प्रकार की धांधली रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। इस बार परीक्षा 30 अगस्त को होनी है। इसके लिए 2.73 लाख उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जो पिछले साल की तुलना में 12.5% ज्यादा है। परीक्षा देशभर के 340 शहरों के लगभग 1300 सेंटर्स पर होगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक से सबक लेते हुए परीक्षा के पूरे इकोसिस्टम की सुरक्षा पुख्ता करना शुरू कर दिया है। इसके लिए 7.5 करोड़ का टेंडर जारी किया है। इसमें एनटीए मुख्यालय समेत संवेदनशील जगहों पर 24 घंटे सिक्योरिटी दी जाएगी। यह टेंडर 25 जुलाई को जारी हुआ है। 17 अगस्त को बोलियां खोली जाएंगी। जो भी एजेंसी नियुक्त होगी, उसे दो साल काम मिलेगा। ये बदलाव: फिंगर प्रिंट नहीं मिले तो आंखों की पुतली स्कैन कर देंगे एंट्री आधार की जांच: आवेदन और एग्जाम के दिन ‘आधार’ आधारित वैरिफिकेशन होगा। बायोमीट्रिक जांच होगी। इसके लिए छात्रों को 2-3 घंटे पहले सेंटर पहुंचना होगा। फिंगरप्रिंट न मिलने पर आईरिस (आंखों की पुतली) स्कैन की जाएगी। एकस्ट्रा सिक्योरिटी: 60,000 से ज्यादा कर्मियों की तैनाती, सीसीटीवी, सिग्नल जैमर और स्वतंत्र पर्यवेक्षक लाइव निगरानी करेंगे। क्वेश्चनर पेपर: परीक्षा के कुल 210 मिनट (3 घंटे 30 मिनट) को अलग-अलग सेक्शन (ए, बी, सी) में बांटा है। हर सेक्शन को हल करने के लिए समय मिलेगा। एक बार सेक्शन सबमिट होने या उसका समय समाप्त होने के बाद अभ्यर्थी उस पर वापस नहीं लौट सकेंगे। नेगेटिव मार्किंग: प्रत्येक सही उत्तर के लिए +4 नंबर दिए जाएंगे, जबकि प्रत्येक गलत उत्तर पर -1 नंबर (25% नेगेटिव मार्किंग) काटा जाएगा। जिन प्रश्नों का जवाब नहीं दिया, उनके लिए 0 नंबर होगा। इमरजेंसी: यदि किसी केंद्र पर तकनीकी खराबी या सर्वर समस्या के कारण इमरजेंसी स्थिति बनती है, तो त्वरित बैकअप व्यवस्था की जाएगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
अमेरिका-ईरान में आज से फिर बातचीत शुरू होगी:ट्रम्प ने एलान किया; बोले- कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन लोगों को मारना नहीं चाहता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि सोमवार से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू होगी। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वार्ता मध्यस्थों के जरिए होगी। ट्रम्प ने कहा, “हम जब चाहें कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन मैं लोगों को मारना नहीं चाहता। अगर समझौता हो जाता है तो बहुत-सी जानें बच जाएंगी। देखते हैं बातचीत का क्या नतीजा निकलता है।” ट्रम्प के मुताबिक, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान के साथ हुई कूटनीतिक बातचीत के बाद उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित बड़ा हमला टाल दिया। उन्होंने दावा किया कि बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। हालांकि, ईरान ने ट्रम्प के कई दावों से इनकार किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अभी कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
फरहाना भट्ट बोलीं- डॉक्टर ने मना किया था:फिर भी 'खतरों के खिलाड़ी 15' में गईं; डर नहीं, बस एक कदम आगे बढ़ाना जरूरी है

‘खतरों के खिलाड़ी 15’ में नजर आ रहीं एक्ट्रेस फरहाना भट्ट ने बताया कि डॉक्टरों ने उन्हें शो में हिस्सा लेने से मना किया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने शो के मुश्किल स्टंट्स, अपनी बीमारी, फैंस की उम्मीदों, रुबीना दिलैक के साथ दोस्ती और होस्ट रोहित शेट्टी से मिले हौसले पर खुलकर बात की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश… सवाल: ‘खतरों के खिलाड़ी’ का अनुभव कैसा रहा? जवाब: यह मेरी जिंदगी का ‘वन्स इन अ लाइफटाइम’ अनुभव रहा। शायद मैं दोबारा लाख कोशिश करूं, तब भी ऐसा अनुभव नहीं मिल पाएगा। इस सीजन के स्टंट बेहद मुश्किल और पहले से अलग हैं। पुराने स्टंट्स को भी नए ट्विस्ट के साथ पेश किया गया है। कई बार ऐसा लगा कि अब शरीर और दिमाग दोनों जवाब दे देंगे, लेकिन खुद को एक कदम और आगे बढ़ाने की हिम्मत ही सबसे बड़ी जीत थी। शो से लौटने के बाद जिंदगी काफी व्यस्त हो गई है, लेकिन यह सफर पूरी तरह यादगार रहा। सवाल: आपकी पहचान एक निडर इंसान की है। क्या कोई ऐसा डर था, जिसे आपने इस शो में हराया? जवाब: स्टंट करते समय हर किसी को डर लगता है, चाहे वह ऊंचाई हो, पानी हो, कीड़े हों या मगरमच्छ। लेकिन मेरा सबसे बड़ा डर यह था कि मेरे फैंस मुझसे निराश न हों। मैं नहीं चाहती थी कि उन्हें कभी लगे कि यह स्टंट मैं कर सकती थी, लेकिन मैंने कोशिश ही नहीं की। मेरे लिए जीत-हार से ज्यादा जरूरी हर स्टंट में अपना 100 प्रतिशत देना था। अगर मैं पूरी कोशिश करती हूं तो वही मेरे लिए सबसे बड़ी जीत है। सवाल: फैंस की उम्मीदों का दबाव कितना महसूस हुआ? जवाब: मुझे इस बात की चिंता नहीं थी कि मैं कमजोर दिखूंगी। मैं चाहती थी कि लोग यह देखें कि मैंने पूरी ईमानदारी से कोशिश की। स्टंट करते समय डर चेहरे पर दिखना स्वाभाविक है, लेकिन पीछे हटना मुझे मंजूर नहीं था। मेरे फैंस को हमेशा लगे कि फरहाना ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। सवाल: शो में सबसे अच्छी दोस्ती किसके साथ हुई? जवाब: रुबीना दिलैक, ऑरी, करण, रित्विक, अविनाश और रुहानिका सभी के साथ अच्छा रिश्ता बना। रुहानिका उम्र में छोटी हैं, लेकिन बेहद मजबूत और फोकस्ड हैं। कई बार उनके स्टंट देखकर मुझे भी चिंता होती थी कि कहीं वह डर न जाएं। इस शो में सभी एक-दूसरे की तकलीफ समझते हैं, इसलिए रिश्ते अपने आप बन जाते हैं। सवाल: रुबीना दिलैक ने आपका खास ख्याल रखा। उसके बारे में बताइए? जवाब: शो से पहले ही मुझे पेट से जुड़ी गंभीर समस्या थी। डॉक्टर ने साफ कहा था कि इस साल शो मत करो, लेकिन मैंने दवाइयों के भरोसे जाने का फैसला किया। केपटाउन में शूटिंग इतनी व्यस्त थी कि मैं समय पर दवा भी नहीं ले पाई। भारत लौटने के बाद हालत बिगड़ गई और मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। जैसे ही रुबीना को पता चला, वह अस्पताल मिलने पहुंच गईं। सेट पर भी वह हमेशा पूछती थीं कि मैंने खाना खाया या नहीं, दवा ली या नहीं। वह जबरदस्ती घी खिलाती थीं ताकि मेरी सेहत ठीक रहे। उनका यह अपनापन मैं कभी नहीं भूलूंगी। सवाल: डॉक्टर ने मना किया था, फिर भी आपने शो क्यों किया? जवाब: सच कहूं तो आज भी नहीं पता कि मैं इस शो को लेकर इतनी उत्साहित क्यों थी। मुझे पता था कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है। मैं जिम भी नहीं जाती और न ही खुद को बहुत फिट मानती हूं। एक स्टंट के बाद मेरी पूरी बॉडी टूट गई थी। तब वहां के एक स्टंटमैन ने मुझसे कहा, ‘तुम जितना सोचती हो, उससे कहीं ज्यादा मजबूत हो।’ शायद मेरी सबसे बड़ी ताकत मेरा दिमाग था। कई बार शरीर जवाब दे देता था, लेकिन मेरा मन हार मानने को तैयार नहीं होता था। मुझे लगता था कि अब मुझसे नहीं होगा, लेकिन फिर भी मैं खुद को आगे बढ़ाती रही। सवाल: क्या कभी ऐसा लगा कि अब यह स्टंट नहीं हो पाएगा? जवाब: हां, कई बार ऐसा लगा कि अब बस यहीं रुक जाऊंगी। कुछ स्टंट इतने मुश्किल थे कि डर अपने चरम पर था। लेकिन मैंने खुद से कहा कि बस एक कदम और बढ़ाना है। मुझे हमेशा भरोसा था कि शो की मेडिकल टीम हमारे साथ है और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। इसी भरोसे ने मुझे हर बार हिम्मत दी। सवाल: होस्ट रोहित शेट्टी से क्या सीखने को मिला? जवाब: रोहित सर की तारीफ सुनना अपने आप में बहुत बड़ी बात होती है। जब वह किसी स्टंट के बाद कहते हैं, ‘आई एम प्राउड ऑफ यू’, तो लगता है जैसे सारी मेहनत सफल हो गई। कई बार मैं सिर्फ इसलिए और बेहतर करने की कोशिश करती थी ताकि उनके मुंह से ये शब्द सुन सकूं। अगर कभी लगता था कि मैं और अच्छा कर सकती थी, तो सबसे ज्यादा अफसोस इसी बात का होता था। रोहित सर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह बिना कोई खास टिप दिए भी आपका आत्मविश्वास बढ़ा देते हैं। अगर कोई डर रहा हो तो वह इस तरह हौसला बढ़ाते हैं कि मुश्किल स्टंट भी आसान लगने लगता है। सवाल: क्या रोहित शेट्टी के साथ फिर काम करने की इच्छा है? जवाब: बिल्कुल। मैं पहले भी उनके साथ काम कर चुकी हूं। अगर भविष्य में उनकी किसी फिल्म में मेरे लिए जगह बनती है तो वह मेरे करियर का सबसे बड़ा मौका होगा। मैं उम्मीद करती हूं कि दोबारा उनके साथ काम करने का अवसर जरूर मिलेगा। सवाल: आपके हिसाब से इस सीजन के मजबूत फाइनलिस्ट कौन हो सकते हैं? जवाब: इस शो में कई मजबूत खिलाड़ी हैं। रुबीना, अविनाश, ऑरी, करण, रित्विक और मैं खुद भी फाइनल तक पहुंच सकते हैं। सभी की पर्सनैलिटी अलग है, लेकिन एक चीज सबमें समान थी-हर कोई जीतने के इरादे से आया था। यही इस सीजन की सबसे बड़ी खासियत है। सवाल: ‘खतरों के खिलाड़ी’ ने आपको क्या सिखाया? जवाब: मैंने सीखा कि जिंदगी में कितनी भी मुश्किल स्थिति आ जाए, सबसे पहले खुद को शांत रखना चाहिए। कोई भी परिस्थिति उतनी कठिन नहीं होती, जितना हम उसे अपने दिमाग में बना लेते हैं।
फरहाना भट्ट बोलीं- डॉक्टर ने मना किया था:फिर भी 'खतरों के खिलाड़ी 15' में गईं; डर नहीं, बस एक कदम आगे बढ़ाना जरूरी है

‘खतरों के खिलाड़ी 15’ में नजर आ रहीं एक्ट्रेस फरहाना भट्ट ने बताया कि डॉक्टरों ने उन्हें शो में हिस्सा लेने से मना किया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने शो के मुश्किल स्टंट्स, अपनी बीमारी, फैंस की उम्मीदों, रुबीना दिलैक के साथ दोस्ती और होस्ट रोहित शेट्टी से मिले हौसले पर खुलकर बात की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश… सवाल: ‘खतरों के खिलाड़ी’ का अनुभव कैसा रहा? जवाब: यह मेरी जिंदगी का ‘वन्स इन अ लाइफटाइम’ अनुभव रहा। शायद मैं दोबारा लाख कोशिश करूं, तब भी ऐसा अनुभव नहीं मिल पाएगा। इस सीजन के स्टंट बेहद मुश्किल और पहले से अलग हैं। पुराने स्टंट्स को भी नए ट्विस्ट के साथ पेश किया गया है। कई बार ऐसा लगा कि अब शरीर और दिमाग दोनों जवाब दे देंगे, लेकिन खुद को एक कदम और आगे बढ़ाने की हिम्मत ही सबसे बड़ी जीत थी। शो से लौटने के बाद जिंदगी काफी व्यस्त हो गई है, लेकिन यह सफर पूरी तरह यादगार रहा। सवाल: आपकी पहचान एक निडर इंसान की है। क्या कोई ऐसा डर था, जिसे आपने इस शो में हराया? जवाब: स्टंट करते समय हर किसी को डर लगता है, चाहे वह ऊंचाई हो, पानी हो, कीड़े हों या मगरमच्छ। लेकिन मेरा सबसे बड़ा डर यह था कि मेरे फैंस मुझसे निराश न हों। मैं नहीं चाहती थी कि उन्हें कभी लगे कि यह स्टंट मैं कर सकती थी, लेकिन मैंने कोशिश ही नहीं की। मेरे लिए जीत-हार से ज्यादा जरूरी हर स्टंट में अपना 100 प्रतिशत देना था। अगर मैं पूरी कोशिश करती हूं तो वही मेरे लिए सबसे बड़ी जीत है। सवाल: फैंस की उम्मीदों का दबाव कितना महसूस हुआ? जवाब: मुझे इस बात की चिंता नहीं थी कि मैं कमजोर दिखूंगी। मैं चाहती थी कि लोग यह देखें कि मैंने पूरी ईमानदारी से कोशिश की। स्टंट करते समय डर चेहरे पर दिखना स्वाभाविक है, लेकिन पीछे हटना मुझे मंजूर नहीं था। मेरे फैंस को हमेशा लगे कि फरहाना ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। सवाल: शो में सबसे अच्छी दोस्ती किसके साथ हुई? जवाब: रुबीना दिलैक, ऑरी, करण, रित्विक, अविनाश और रुहानिका सभी के साथ अच्छा रिश्ता बना। रुहानिका उम्र में छोटी हैं, लेकिन बेहद मजबूत और फोकस्ड हैं। कई बार उनके स्टंट देखकर मुझे भी चिंता होती थी कि कहीं वह डर न जाएं। इस शो में सभी एक-दूसरे की तकलीफ समझते हैं, इसलिए रिश्ते अपने आप बन जाते हैं। सवाल: रुबीना दिलैक ने आपका खास ख्याल रखा। उसके बारे में बताइए? जवाब: शो से पहले ही मुझे पेट से जुड़ी गंभीर समस्या थी। डॉक्टर ने साफ कहा था कि इस साल शो मत करो, लेकिन मैंने दवाइयों के भरोसे जाने का फैसला किया। केपटाउन में शूटिंग इतनी व्यस्त थी कि मैं समय पर दवा भी नहीं ले पाई। भारत लौटने के बाद हालत बिगड़ गई और मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। जैसे ही रुबीना को पता चला, वह अस्पताल मिलने पहुंच गईं। सेट पर भी वह हमेशा पूछती थीं कि मैंने खाना खाया या नहीं, दवा ली या नहीं। वह जबरदस्ती घी खिलाती थीं ताकि मेरी सेहत ठीक रहे। उनका यह अपनापन मैं कभी नहीं भूलूंगी। सवाल: डॉक्टर ने मना किया था, फिर भी आपने शो क्यों किया? जवाब: सच कहूं तो आज भी नहीं पता कि मैं इस शो को लेकर इतनी उत्साहित क्यों थी। मुझे पता था कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है। मैं जिम भी नहीं जाती और न ही खुद को बहुत फिट मानती हूं। एक स्टंट के बाद मेरी पूरी बॉडी टूट गई थी। तब वहां के एक स्टंटमैन ने मुझसे कहा, ‘तुम जितना सोचती हो, उससे कहीं ज्यादा मजबूत हो।’ शायद मेरी सबसे बड़ी ताकत मेरा दिमाग था। कई बार शरीर जवाब दे देता था, लेकिन मेरा मन हार मानने को तैयार नहीं होता था। मुझे लगता था कि अब मुझसे नहीं होगा, लेकिन फिर भी मैं खुद को आगे बढ़ाती रही। सवाल: क्या कभी ऐसा लगा कि अब यह स्टंट नहीं हो पाएगा? जवाब: हां, कई बार ऐसा लगा कि अब बस यहीं रुक जाऊंगी। कुछ स्टंट इतने मुश्किल थे कि डर अपने चरम पर था। लेकिन मैंने खुद से कहा कि बस एक कदम और बढ़ाना है। मुझे हमेशा भरोसा था कि शो की मेडिकल टीम हमारे साथ है और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। इसी भरोसे ने मुझे हर बार हिम्मत दी। सवाल: होस्ट रोहित शेट्टी से क्या सीखने को मिला? जवाब: रोहित सर की तारीफ सुनना अपने आप में बहुत बड़ी बात होती है। जब वह किसी स्टंट के बाद कहते हैं, ‘आई एम प्राउड ऑफ यू’, तो लगता है जैसे सारी मेहनत सफल हो गई। कई बार मैं सिर्फ इसलिए और बेहतर करने की कोशिश करती थी ताकि उनके मुंह से ये शब्द सुन सकूं। अगर कभी लगता था कि मैं और अच्छा कर सकती थी, तो सबसे ज्यादा अफसोस इसी बात का होता था। रोहित सर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह बिना कोई खास टिप दिए भी आपका आत्मविश्वास बढ़ा देते हैं। अगर कोई डर रहा हो तो वह इस तरह हौसला बढ़ाते हैं कि मुश्किल स्टंट भी आसान लगने लगता है। सवाल: क्या रोहित शेट्टी के साथ फिर काम करने की इच्छा है? जवाब: बिल्कुल। मैं पहले भी उनके साथ काम कर चुकी हूं। अगर भविष्य में उनकी किसी फिल्म में मेरे लिए जगह बनती है तो वह मेरे करियर का सबसे बड़ा मौका होगा। मैं उम्मीद करती हूं कि दोबारा उनके साथ काम करने का अवसर जरूर मिलेगा। सवाल: आपके हिसाब से इस सीजन के मजबूत फाइनलिस्ट कौन हो सकते हैं? जवाब: इस शो में कई मजबूत खिलाड़ी हैं। रुबीना, अविनाश, ऑरी, करण, रित्विक और मैं खुद भी फाइनल तक पहुंच सकते हैं। सभी की पर्सनैलिटी अलग है, लेकिन एक चीज सबमें समान थी-हर कोई जीतने के इरादे से आया था। यही इस सीजन की सबसे बड़ी खासियत है। सवाल: ‘खतरों के खिलाड़ी’ ने आपको क्या सिखाया? जवाब: मैंने सीखा कि जिंदगी में कितनी भी मुश्किल स्थिति आ जाए, सबसे पहले खुद को शांत रखना चाहिए। कोई भी परिस्थिति उतनी कठिन नहीं होती, जितना हम उसे अपने दिमाग में बना लेते हैं।
Vice Admiral Pramod Appointed Navy Deputy Chief

Hindi News Career Vice Admiral Pramod Appointed Navy Deputy Chief | India China Trade News 3 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. ए.एन. प्रमोद ने डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ का पद संभाला 1 अगस्त तक वाइस एडमिरल प्रमोद भारतीय नौसेना के डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (DCNS) का पदभार संभाला। ए.एन. प्रमोद ने वाइस एडमिरल तरुण सोबती की जगह ली। वाइस एडमिरल प्रमोद कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एक्सपर्ट हैं। साथ ही नेवल एयर ऑपरेशंस ऑफिसर भी हैं। वाइस एडमिरल प्रमोद 1 जुलाई 1990 भारतीय नौसेना में कमीशन हुए थे। वाइस एडमिरल प्रमोद अप्रैल 2022 में नौसेना मुख्यालय में असिस्टेंट चीफ ऑफ नेवल स्टाफ बने। जनवरी 2024 में वाइस एडमिरल के पद पर प्रमोट होकर डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशन्स (DGNO) अपॉइंट हुए। वाइस एडमिरल प्रमोद 2025-26 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की समुद्री रणनीति और अभियानों के प्रमुख योजनाकारों में शामिल रहे। ऑपरेशन सिंदूर में योगदान के लिए वाइस एडमिरल प्रमोद को युद्ध सेवा मेडल (YSM) भी दिया गया था। वाइस एडमिरल नौसेना के ऑपरेशन्स, स्ट्रेटजी, आधुनिकीकरण, युद्ध तैयारी और नौसैनिक प्रोजेक्ट्स की निगरानी करते हैं। डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ भारतीय नौसेना के सबसे सीनियर ऑफिसर होते हैं। 2. एयर मार्शल तेजपाल सिंह DCAS बने 1 अगस्त को एयर मार्शल तेजपाल सिंह ने भारतीय वायु सेना में डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ (DCAS) का पदभार ग्रहण किया। एयर मार्शल सिंह ने पूर्व एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती की जगह ली है। वह ‘कैट ए’ क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं। एयर मार्शल सिंह के पास 3,500+ घंटे से ज्यादा लड़ाकू विमानों की उड़ान का अनुभव है। जून 1990 में एयर मार्शल सिंह ने भारतीय वायु सेना (IAF) की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन लिया था। एयर मार्शल सिंह 2018 में एयर कमांडर के पद अपॉइंट हुए थे और फरवरी 2023 में एयर वाइस मार्शल बने थे। एयर मार्शल सिंह की सेवा के लिए उन्हें जनवरी 2011 में वायु सेना मेडल और जनवरी 2021 में अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। 2023 से 2026 तक एयर मार्शल सिंह ने इंडियन एयर फोर्स हेडक्वाटर्र कई ऑपरेशन्स को लीड किया। डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ का काम चीफ ऑफ एयर स्टाफ (CAS) को रणनीतिक एवं प्रशासनिक फैसलों में मदद करना होता है। डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ भारतीय वायु सेना के मुख्यालय में एक वरिष्ठ स्टाफ अधिकारी होता है। स्पोर्ट्स (SPORTS) 3. टेनिस प्लेयर रामकुमार, विजय सुंदर की जोड़ी ने बॉन ओपन 2026 जीता 2 अगस्त को भारत के टेनिस प्लेयर रामकुमार रामनाथन और विजय सुंदर प्रशांत ने आज बॉन ओपन 2026 में डबल्स का खिताब जीता। बिना सीडिंग वाले इन भारतीय खिलाड़ियों ने एक घंटे 31 मिनट तक चले फाइनल में इंग्लैंड के स्कॉट डंकन और स्वीडन के एडम हेइनोनन को 7-6(4), 6-3 से हराया। ये रामकुमार का इस साल का दूसरा ATP चैलेंजर डबल्स जीत है। इससे पहले उन्होंने टेक्सास स्पाइन एंड जॉइंट चैलेंजर मेन्स चैंपियनशिप जीती थी। 31 साल के रामकुमार अब अपने करियर में 13 ATP चैलेंजर खिताब जीत चुके हैं। विजय सुंदर ने साल 2024 में अपने करियर की बेस्ट ATP ग्रुप रैंकिंग 80 हासिल की थी। बॉन ओपन, जर्मनी के बॉन शहर में क्ले कोर्ट पर खेला जाने वाला एक प्रोफेशनल पुरुष टेनिस टूर्नामेंट है। ये टूर्नामेंट में ATP चैलेंजर टूर का हिस्सा है, जो 27 जुलाई से 2 अगस्त तक खेला गया था। 4. ग्लासगो कॉमनवेल्थ में भारत ने एक दिन में 8 गोल्ड जीते 1 अगस्त को कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों ने 7 बॉक्सिंग गोल्ड समेत कुल 8 गोल्ड जीते। महिला कैटेगरी में प्रीति पवार ने 54 किग्रा कैटेगरी में, जैस्मिन लांबोरिया ने 57 किग्रा कैटेगरी में, साक्षी चौधरी ने 51 किग्रा कैटेगरी में, प्रिया घंघास ने 60 किग्रा कैटेगरी में और अरुंधति चौधरी ने में गोल्ड जीते। पुरुष कैटेगरी में सचिन ने 60 किग्रा कैटेगरी में और अंकुश पंघाल ने 70 किग्रा में गोल्ड जीता। इसके साथ ही पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में गुलवीर सिंह ने ब्रॉन्ज जीता और वे 5 और 10 हजार मीटर कैटेगरी में मेडल जीतने वाले पहले एथलीट बने। भारत ने अब तक कुल 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज जीते और भारत चौथे नंबर पर है। मिसलीनियस (Miscellaneous) 5. भारत-चीन के बीच दोबारा व्यापार शुरू हुआ 1 अगस्त को भारत और चीन के बीच सिक्किम में स्थित नाथुला दर्रे से बॉर्डर ट्रेड छह साल बाद शुरू हुआ। साल 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान सीमा पर तनाव के चलते ये व्यापार पूरी तरह बंद था। ये व्यापार पूर्वी सिक्किम के नाथू ला दर्रे और उत्तराखंड के लिपु लेख दर्रे से शुरू हुआ। इससे पहले भारत के नाथू ला दर्रे से होकर गुजरने वाला पुराना रेशम मार्ग जुलाई, 2006 में दोबारा खोला गया था। इससे दोनों देशों के नाथू ला दर्रे के आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि लाने में भी मदद मिलने की उम्मीद थी। नाथू ला दर्रे से होकर गुजरने वाला सीमा व्यापार आधिकारिक तौर पर हर साल मई से नवंबर तक लगभग छह महीने के लिए खुला रहता है। दोनों देशों के बीच ये व्यापार सप्ताह में सोमवार से गुरुवार तक संचालित होगा। इस साल पहले फेज में 38 रजिस्टर्ड स्थानीय व्यापारियों को पास दिए गए हैं, जो हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों सहित लगभग 36 स्वीकृत वस्तुओं को आपस में एक्सचेंज करेंगे। इसके साथ ही लगभग छह साल के बाद हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में शिपकी-ला के रास्ते भारत और चीन के बीच भी सीमा-पार व्यापार फिर से शुरू हुआ है। 1962 के बाद 6 जुलाई 2006 को यानी, 44 साल के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार के लिए बॉर्डर खोला गया था। 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद नाथुला दर्रा से व्यापार पहली बार बंद किया गया था। 6. डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट ‘जलावतरण’ नौसेना में शामिल 1 अगस्त को कोलकाता के टीटागढ़ में डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट (DSC) प्रोजेक्ट का पांचवां और आखिरी जहाज डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट यानी, DSCA24 जलावतरण लॉन्च किया। ये जहाज पानी के भीतर ऑपरेट किया जा सकता है। इसका उपयोग नौसेना के गोताखोरों को समुद्र में विभिन्न अभियानों में सहायता देने के लिए



