Monday, 02 Nov 2026 | 10:19 PM

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Nishikant Dubey Demands Meta Apology Over PM Modi Video Controversy

Nishikant Dubey Demands Meta Apology Over PM Modi Video Controversy

Hindi News National Nishikant Dubey Demands Meta Apology Over PM Modi Video Controversy | Delhi 6 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी ने 23 जुलाई को पोस्ट किए वीडियो में पेपर लीक को गंभीर विषय बताया था। मामले पर फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही थी। कम्युनिकेशन और IT की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने सोमवार को कहा कि पीएम मोदी का वीडियो हटाने के लिए मेटा सीईओ मार्क जुकरबर्ग को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कमेटी ने पिछले महीने फेसबुक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाए जाने को गंभीरता से लिया है। इन कंपनियों की नीति नए लोगों को प्राथमिकता देने की है। अगर वे माफी नहीं मांगते तो IT एक्ट 79 के तहत मिलने वाला सेफ हार्बर प्रोटेक्शन वापस ले लिया जाएगा। दरअसल, पीएम मोदी ने 23 जुलाई को पेपर लीक को गंभीर विषय बताते हुए एक वीडियो जारी किया था। इसे मेटा ने रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक हटा दिया था। लेकिन बाद में उसे रिस्टोर कर दिया गया। मेटा ने अपनी सफाई में कहा कि दरअसल, यह एक टेक्निकल एरर था। क्या है सेफ हार्बर प्रोटेक्शन? IT एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाला सेफ हार्बर एक कानूनी सुरक्षा कवच है, जो इंटरनेट प्लेटफॉर्मों को उनके यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई किसी भी गलत या गैर-कानूनी सामग्री के लिए जिम्मेदार होने से बचाता है। इसका मतलब है कि यूजर के अपराध के लिए कंपनी या उसके अधिकारियों को सजा नहीं होगी, बशर्ते वे सरकार का आदेश मिलने पर वह पोस्ट हटा दें। मेटा के अलावा यह सुरक्षा यूट्यूब, एक्स (ट्विटर), गूगल, अमेज़न, फ्लिपकार्ट और जियो व एयरटेल को भी मिलती है। मेटा की ग्लोबल टीम से पूछताछ करेगी सरकार हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने मेटा इंडिया के हेड अरुण श्रीनिवास समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट हैंडलर्स के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायत पर दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। श्रीनिवास को दोनों मामलों में सह-आरोपी बनाया गया है। सोशल मीडिया अकाउंट्स से वीडियो शेयर करने वालों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस AI मॉर्फ्ड वीडियो बनाने वाले, सबसे पहले अपलोड करने और वायरल करने वालों की जांच कर रही है। साथ ही फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी कंटेंट रोकने वाले मेटा के सिस्टम और सुरक्षा उपायों की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मेटा की टीम से एल्गोरिदम में पक्षपात, एल्गोरिदम की कार्यप्रणाली और पब्लिक ऑर्डर में कंपनी की भूमिका पर सवाल पूछे जाएंगे। मेटा की ग्लोबल टीम अगले हफ्ते दिल्ली आएगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

India Hikes Windfall Tax on Petrol Diesel and ATF Exports

India Hikes Windfall Tax on Petrol Diesel and ATF Exports

Hindi News Business India Hikes Windfall Tax On Petrol Diesel And ATF Exports | Latest Update 7 मिनट पहले कॉपी लिंक सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी की है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह नई दरें 3 अगस्त से प्रभावी हो गई हैं। सरकार हर 15 दिन में इन दरों की समीक्षा करती है। सरकार ने डीजल के निर्यात यानी एक्सपोर्ट पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी यानी SAED को 15.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 25.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया है। वहीं, एटीएफ यानी जेट फ्यूल के निर्यात पर ड्यूटी को 14.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 22 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल के निर्यात पर भी ड्यूटी बढ़ाई गई है, जो अब 2.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 3.5 रुपए प्रति लीटर हो गई है। भारत में तेल की कमी न हो, इसलिए यह फैसला लिया गया है। घरेलू खपत के लिए दरों में कोई बदलाव नहीं वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि देश के भीतर खपत के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच 27 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर यह टैक्स लगाना शुरू किया था। इसके बाद 16 मई से पेट्रोल के निर्यात पर भी यह लेवी लागू कर दी गई थी। क्यों लगाया गया है यह टैक्स? विंडफॉल टैक्स लगाने का मुख्य मकसद देश में ईंधन की उपलब्धता को बढ़ाना है। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया था। ऐसे में निर्यातक कीमतों के अंतर का फायदा न उठा सकें और घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

India Hikes Windfall Tax on Petrol Diesel and ATF Exports

India Hikes Windfall Tax on Petrol Diesel and ATF Exports

Hindi News Business India Hikes Windfall Tax On Petrol Diesel And ATF Exports | Latest Update 4 मिनट पहले कॉपी लिंक सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी की है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह नई दरें 3 अगस्त से प्रभावी हो गई हैं। सरकार हर पखवाड़े इन दरों की समीक्षा करती है। सरकार ने डीजल के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी यानी SAED को 15.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 25.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। वहीं, एटीएफ (विमान ईंधन) के निर्यात पर ड्यूटी को 14.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल के निर्यात पर भी ड्यूटी बढ़ाई गई है, जो अब 2.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 3.5 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यह दरें 16 जुलाई को तय की गई थीं। घरेलू खपत के लिए दरों में कोई बदलाव नहीं वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि देश के भीतर खपत के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच 27 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर यह टैक्स लगाना शुरू किया था। इसके बाद 16 मई से पेट्रोल के निर्यात पर भी यह लेवी लागू कर दी गई थी। क्यों लगाया गया है यह टैक्स? विंडफॉल टैक्स लगाने का मुख्य मकसद देश में ईंधन की उपलब्धता को बढ़ाना है। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया था। ऐसे में निर्यातक कीमतों के अंतर का फायदा न उठा सकें और घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

लश्कर-ए-तयैबा का आतंकी बोला- हमारे 30 लोग मारे गए:भारतीय खुफिया एजेंसियों ने एजेंट भेजकर हत्या कराई

लश्कर-ए-तयैबा का आतंकी बोला- हमारे 30 लोग मारे गए:अज्ञात हमलावरों ने निशाना बनाया, कहा- इसके पीछे भारतीय एजेंट

इस्लामाबाद में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी रिजवान हनीफ ने दावा किया है कि पिछले तीन-चार साल में उनके संगठन के 30 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। उसके मुताबिक ये हमले पेशावर, कराची, रावलपिंडी, रावलकोट और मुजफ्फराबाद में अज्ञात हमलावरों ने किए। उसने आरोप लगाया कि ये हमलावर भारतीय एजेंट थे। इससे जुड़ा एक वीडियो सामने आया है। इसमें हनीफ कहता है, हमारे लोगों को भारतीय खुफिया एजेंसियों ने आजाद कश्मीर में अमन और चेन से नहीं रहने दिया। अपने एजेंट्स के जरिए उन्होंने हमारे लोगो को शहीद किया। 40 साल पहले हुआ लश्कर ए तैयबा का गठन लश्कर-ए-तैयबा की स्थापना 1987 में पाकिस्तान में हुई थी। यह संगठन सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान बने जिहादी नेटवर्क से निकला था। ओसामा बिन लादेन के मेंटर माने जाने वाले अब्दुल्ला अज्जाम और उसके दो साथियों ने मिलकर मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद नाम के धार्मिक संगठन की स्थापना की। मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद संगठन का सशस्त्र (मिलिटेंट) विंग बाद में लश्कर-ए-तैयबा कहलाया। अरबी में इसका अर्थ है पवित्र लोगों की सेना। शुरुआती दौर में संगठन के लड़ाके अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ लड़ने के लिए भेजे जाते थे। 1989 में सोवियत सेना की वापसी के बाद संगठन का फोकस जम्मू-कश्मीर पर आ गया। इसी साल पेशावर में एक बम धमाके में अब्दुल्लाह अज्जाम की मौत हो गई। इसके बाद हाफिज सईद ने इस संगठन की कमान संभाल ली। भारत, अमेरिका और कई पश्चिमी देशों का आरोप रहा है कि लश्कर-ए-तैयबा को लंबे समय तक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का समर्थन मिलता रहा। पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर इन आरोपों से इनकार करता है।

लश्कर-ए-तयैबा का आतंकी बोला- हमारे 30 लोग मारे गए:अज्ञात हमलावरों ने निशाना बनाया, कहा- इसके पीछे भारतीय एजेंट

लश्कर-ए-तयैबा का आतंकी बोला- हमारे 30 लोग मारे गए:अज्ञात हमलावरों ने निशाना बनाया, कहा- इसके पीछे भारतीय एजेंट

इस्लामाबाद में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी रिजवान हनीफ ने दावा किया है कि पिछले तीन-चार साल में उनके संगठन के 30 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। उसके मुताबिक ये हमले पेशावर, कराची, रावलपिंडी, रावलकोट और मुजफ्फराबाद में अज्ञात हमलावरों ने किए। उसने आरोप लगाया कि ये हमलावर भारतीय एजेंट थे। इससे जुड़ा एक वीडियो सामने आया है। इसमें हनीफ कहता है, हमारे लोगों को भारतीय खुफिया एजेंसियों ने आजाद कश्मीर में अमन और चेन से नहीं रहने दिया। अपने एजेंट्स के जरिए उन्होंने हमारे लोगो को शहीद किया। खबर अपडेट हो रही है…

स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने बेंगलुरु शो रद्द किए:हिंदू संगठनों ने किया था विरोध, CJP प्रोटेस्ट में राम-सीता के बयान से भी हुआ था विवाद

स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने बेंगलुरु शो रद्द किए:हिंदू संगठनों ने किया था विरोध, CJP प्रोटेस्ट में राम-सीता के बयान से भी हुआ था विवाद

बेंगलुरु में स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने अपने शो रद्द कर दिए हैं। व्हाइटफील्ड इलाके में होने वाले इन शो का हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया था। पुलिस ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, कुणाल कामरा ने रविवार को खुद व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन जाकर अधिकारियों को सूचित किया कि वे अपने निर्धारित शो आगे नहीं बढ़ाएंगे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कामरा ने हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते व्हाइटफील्ड में होने वाला इवेंट रद्द करने का फैसला लिया है। कोरमंगला में शिफ्ट किए गए शो कुणाल कामरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि सोमवार, मंगलवार, बुधवार और गुरुवार के शो अब कोरमंगला के एक वेन्यू में शिफ्ट कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि व्हाइटफील्ड शो के लिए खरीदे गए टिकटों का रिफंड बुकमायशो (BookMyShow) प्लेटफॉर्म द्वारा प्रोसेस किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने दर्शकों से कोरमंगला वेन्यू के लिए टिकट बुक करने का आग्रह किया है, जहां सीटों की संख्या सीमित है। इससे पहले कुणाल कामरा ने उनके शोज की आलोचना करने वाले एक ट्रोलर को सोशल मीडिया चेतावनी भी दी थी। साथ ही उन्होंने बताया था कि वो 2 अगस्त को पुलिस स्टेशन जाएंगे। हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने के थे आरोप यह घटनाक्रम तब हुआ जब हाल ही में हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति ने बेंगलुरु पुलिस को एक याचिका सौंपी थी। इसमें 3 अगस्त को यूआरयू (URU) व्हाइटफील्ड में होने वाले कामरा के स्टैंड-अप शो को रद्द करने की मांग की गई थी। समिति ने तर्क दिया था कि कामरा के शो से कानून-व्यवस्था और धार्मिक सद्भाव बिगड़ने का खतरा है। उनका आरोप था कि कामरा ने हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया है। CJP प्रोटेस्ट के बयान से भी लगे थे धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप 15 जुलाई को कुणाल कामरा जंतर-मंतर में हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने मंच पर भगवान राम और माता सीता पर बयान दिया। बयान सामने आने के बाद कुणाल कामरा के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में शिकायत दर्ज हुई थी। हाईकोर्ट के वकील विभु वीरभद्र सैनी ने याचिका में कहा कि 15 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कुणाल कामरा ने भगवान राम और माता सीता को लेकर कथित विवादित टिप्पणी की, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील विभु वीरभद्र सैनी ने 24 जुलाई को कुणाल कामरा के खिलाफ याचिका दायर की। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया गया कि जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान कॉमेडियन कुणाल कामरा ने भगवान राम व माता सीता के प्रति अभद्र टिप्पणी की। याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वकील की याचिका पर चंडीगढ़ पुलिस से रिपोर्ट तलब कर ली है। कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि आरोपों में प्रथम दृष्टया कोई आधार बनता है या नहीं और एफआईआर दर्ज करने की जरूरत है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। कुणाल कामरा के ये विवाद भी पढ़िए- 2025- एकनाथ शिंदे पर ‘गद्दार’ टिप्पणी: अपने स्टैंड-अप शो नया भारत में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर व्यंग्य किया और उन्हें कथित तौर पर “गद्दार” कहकर संबोधित किया। वीडियो वायरल होने के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं ने मुंबई के द हैबिटेट कॉमेडी क्लब में तोड़फोड़ की। कामरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। 2025- सलमान खान पर जोक: एक शो में सलमान खान के 1998 के काला हिरण शिकार और 2002 के हिट-एंड-रन मामले पर चुटकुले सुनाए। विवाद के बावजूद कुणाल कामरा ने माफी मांगने से इनकार कर दिया। 2022- गुरुग्राम शो रद्द: विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के विरोध के बाद उनका 2022 में होने वाला गुरुग्राम शो रद्द कर दिया गया। इसके बाद कामरा ने सार्वजनिक रूप से VHP को नाथूराम गोडसे की निंदा करने की चुनौती दी, जिससे विवाद और बढ़ गया। 2022- पीएम मोदी के लिए गाना गाने वाले बच्चे का एडिटेड वीडियो: जर्मनी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए गाना गाने वाले एक बच्चे के वीडियो को एडिट कर सोशल मीडिया पर शेयर किया। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने वीडियो हटाने को कहा। बाद में कामरा ने वीडियो हटा दिया और कहा कि उनका उद्देश्य सरकार की आर्थिक नीतियों पर व्यंग्य करना था, बच्चे पर नहीं। 2020- सुप्रीम कोर्ट पर ‘ब्राह्मण-बनिया’ टिप्पणी: एक स्टैंड-अप शो में सुप्रीम कोर्ट को लेकर “ब्राह्मण-बनिया” संबंधी टिप्पणी की। इस पर भी अदालत की अवमानना की याचिकाएं दायर हुईं। 2020- इंडिगो फ्लाइट में अर्नब गोस्वामी से बहस: मुंबई-लखनऊ इंडिगो फ्लाइट में पत्रकार अर्नब गोस्वामी से सवाल-जवाब करते हुए उनका वीडियो रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर साझा किया। इंडिगो ने पहले 6 महीने का फ्लाइट बैन लगाया, जिसे बाद में घटाकर 3 महीने किया गया। एयर इंडिया, स्पाइसजेट और गोएयर ने भी कुछ समय के लिए उड़ान प्रतिबंध लगाए थे।

स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने बेंगलुरु शो रद्द किए:हिंदू संगठनों ने किया था विरोध, CJP प्रोटेस्ट में राम-सीता के बयान से भी हुआ था विवाद

स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने बेंगलुरु शो रद्द किए:हिंदू संगठनों ने किया था विरोध, CJP प्रोटेस्ट में राम-सीता के बयान से भी हुआ था विवाद

बेंगलुरु में स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने अपने शो रद्द कर दिए हैं। व्हाइटफील्ड इलाके में होने वाले इन शो का हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया था। पुलिस ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, कुणाल कामरा ने रविवार को खुद व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन जाकर अधिकारियों को सूचित किया कि वे अपने निर्धारित शो आगे नहीं बढ़ाएंगे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कामरा ने हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते व्हाइटफील्ड में होने वाला इवेंट रद्द करने का फैसला लिया है। कोरमंगला में शिफ्ट किए गए शो कुणाल कामरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि सोमवार, मंगलवार, बुधवार और गुरुवार के शो अब कोरमंगला के एक वेन्यू में शिफ्ट कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि व्हाइटफील्ड शो के लिए खरीदे गए टिकटों का रिफंड बुकमायशो (BookMyShow) प्लेटफॉर्म द्वारा प्रोसेस किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने दर्शकों से कोरमंगला वेन्यू के लिए टिकट बुक करने का आग्रह किया है, जहां सीटों की संख्या सीमित है। इससे पहले कुणाल कामरा ने उनके शोज की आलोचना करने वाले एक ट्रोलर को सोशल मीडिया चेतावनी भी दी थी। साथ ही उन्होंने बताया था कि वो 2 अगस्त को पुलिस स्टेशन जाएंगे। हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने के थे आरोप यह घटनाक्रम तब हुआ जब हाल ही में हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति ने बेंगलुरु पुलिस को एक याचिका सौंपी थी। इसमें 3 अगस्त को यूआरयू (URU) व्हाइटफील्ड में होने वाले कामरा के स्टैंड-अप शो को रद्द करने की मांग की गई थी। समिति ने तर्क दिया था कि कामरा के शो से कानून-व्यवस्था और धार्मिक सद्भाव बिगड़ने का खतरा है। उनका आरोप था कि कामरा ने हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया है। CJP प्रोटेस्ट के बयान से भी लगे थे धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप 15 जुलाई को कुणाल कामरा जंतर-मंतर में हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने मंच पर भगवान राम और माता सीता पर बयान दिया। बयान सामने आने के बाद कुणाल कामरा के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में शिकायत दर्ज हुई थी। हाईकोर्ट के वकील विभु वीरभद्र सैनी ने याचिका में कहा कि 15 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कुणाल कामरा ने भगवान राम और माता सीता को लेकर कथित विवादित टिप्पणी की, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील विभु वीरभद्र सैनी ने 24 जुलाई को कुणाल कामरा के खिलाफ याचिका दायर की। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया गया कि जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान कॉमेडियन कुणाल कामरा ने भगवान राम व माता सीता के प्रति अभद्र टिप्पणी की। याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वकील की याचिका पर चंडीगढ़ पुलिस से रिपोर्ट तलब कर ली है। कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि आरोपों में प्रथम दृष्टया कोई आधार बनता है या नहीं और एफआईआर दर्ज करने की जरूरत है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। कुणाल कामरा के ये विवाद भी पढ़िए- 2025- एकनाथ शिंदे पर ‘गद्दार’ टिप्पणी: अपने स्टैंड-अप शो नया भारत में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर व्यंग्य किया और उन्हें कथित तौर पर “गद्दार” कहकर संबोधित किया। वीडियो वायरल होने के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं ने मुंबई के द हैबिटेट कॉमेडी क्लब में तोड़फोड़ की। कामरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। 2025- सलमान खान पर जोक: एक शो में सलमान खान के 1998 के काला हिरण शिकार और 2002 के हिट-एंड-रन मामले पर चुटकुले सुनाए। विवाद के बावजूद कुणाल कामरा ने माफी मांगने से इनकार कर दिया। 2022- गुरुग्राम शो रद्द: विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के विरोध के बाद उनका 2022 में होने वाला गुरुग्राम शो रद्द कर दिया गया। इसके बाद कामरा ने सार्वजनिक रूप से VHP को नाथूराम गोडसे की निंदा करने की चुनौती दी, जिससे विवाद और बढ़ गया। 2022- पीएम मोदी के लिए गाना गाने वाले बच्चे का एडिटेड वीडियो: जर्मनी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए गाना गाने वाले एक बच्चे के वीडियो को एडिट कर सोशल मीडिया पर शेयर किया। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने वीडियो हटाने को कहा। बाद में कामरा ने वीडियो हटा दिया और कहा कि उनका उद्देश्य सरकार की आर्थिक नीतियों पर व्यंग्य करना था, बच्चे पर नहीं। 2020- सुप्रीम कोर्ट पर ‘ब्राह्मण-बनिया’ टिप्पणी: एक स्टैंड-अप शो में सुप्रीम कोर्ट को लेकर “ब्राह्मण-बनिया” संबंधी टिप्पणी की। इस पर भी अदालत की अवमानना की याचिकाएं दायर हुईं। 2020- इंडिगो फ्लाइट में अर्नब गोस्वामी से बहस: मुंबई-लखनऊ इंडिगो फ्लाइट में पत्रकार अर्नब गोस्वामी से सवाल-जवाब करते हुए उनका वीडियो रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर साझा किया। इंडिगो ने पहले 6 महीने का फ्लाइट बैन लगाया, जिसे बाद में घटाकर 3 महीने किया गया। एयर इंडिया, स्पाइसजेट और गोएयर ने भी कुछ समय के लिए उड़ान प्रतिबंध लगाए थे।

Donald Trump Buys Japanese Yen

Donald Trump Buys Japanese Yen

13 मिनट पहले कॉपी लिंक जापान की प्रधानमंत्री शाने ताकाइची और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया कि अमेरिका ने एक दशक में पहली बार जापानी येन खरीदा है। येन को डॉलर के मुकाबले उसके 40 साल के सबसे निचले स्तर से उबारने के लिए ऐसा किया गया है। ट्रम्प ने कहा, “उनकी करेंसी कमजोर हो रही थी और वे थोड़ी मदद चाहते थे।” 10 सवाल-जवाब में जानें पूरी डिटेल्स… सवाल 1: जापान और अमेरिका ने हाल ही में बाजार में क्या और क्यों कदम उठाया है? जवाब: पिछले हफ्ते जापानी मुद्रा ‘येन’ डॉलर के मुकाबले 164 के स्तर पर पहुंच गई थी, जो पिछले 40 सालों का सबसे निचला स्तर है। इस तेज गिरावट को नियंत्रित करने के लिए जापान और अमेरिका ने मिलकर फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में हस्तक्षेप किया। इस हस्तक्षेप का मुख्य उद्देश्य येन की अत्यधिक अस्थिरता को रोकना और करेंसी स्पेक्युलेटर्स को नियंत्रित करना था। यह पिछले 15 सालों में यानी साल 2011 के बाद पहला मौका है जब जापान और अमेरिका ने करेंसी मार्केट में एक साथ मिलकर कदम उठाया है। इससे पहले 2011 में पूर्वी जापान में आए भूकंप और सुनामी के बाद दोनों देशों ने येन को कमजोर करने के लिए समन्वित कार्रवाई की थी। इस बार उद्देश्य येन को और अधिक गिरने से बचाना है। सवाल 2: इस हस्तक्षेप में दोनों देशों ने कितनी रकम का इस्तेमाल किया है? उत्तर: बैंक ऑफ जापान के आंकड़ों के अनुसार, टोक्यो ने शुक्रवार के आधिकारिक संयुक्त हस्तक्षेप से ठीक पहले, गुरुवार को न्यूयॉर्क बाजार में येन खरीदने के लिए लगभग 59 अरब डॉलर बेचे थे। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर अपनी खरीदी की राशि का खुलासा नहीं किया है, लेकिन कैबिनेट बैठक के दौरान अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट की नोटबुक की तस्वीर से संकेत मिला है, जिस पर लिखा था: “To Do: Buy Japanese Yen $5-10 bil” यानी 5 से 10 अरब डॉलर का येन खरीदना। मैरीलैंड के कैंप डेविड में 31 जुलाई, 2026 को एक कैबिनेट बैठक में भाग लेते हुए अमेरिकी वित्त मंत्री (ट्रेजरी सेक्रेटरी) स्कॉट बेसेंट के सामने रखी एक नोटपैड पर लिखा है: “To Do: Buy Japanese Yen $5-10 bil” (यानी 5 से 10 अरब डॉलर का जापानी येन खरीदना)। सवाल 3: इस संयुक्त कार्रवाई पर अमेरिका और जापान के अधिकारियों का क्या कहना है? जवाब: जापान का वित्त मंत्रालय: इस संयुक्त कार्रवाई से हाल के महीनों में येन में आई अत्यधिक अस्थिरता और अनियंत्रित चाल को रोकने में सफल रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी: स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि इस समन्वित कार्रवाई ने येन की अनियंत्रित चाल को नियंत्रित किया है। अमेरिका, येन के भारी अवमूल्यन को ठीक करने के लिए जापान के मौद्रिक और बाजार कदमों का पुरजोर समर्थन करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति: रविवार को संवाददाताओं से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा, “जापानी मुद्रा कमजोर हो रही थी और वे थोड़ी मदद चाहते थे। हम जापान की मदद के लिए हमेशा तैयार हैं।” सवाल 4: अमेरिका को जापान की मदद करने से क्या फायदा है? जवाब: ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स में जापान इकोनॉमिक्स के प्रमुख शिगेतो नागाई ने बताया कि अमेरिका इस समन्वित हस्तक्षेप में शामिल होने के लिए इसलिए सहमत हुआ क्योंकि यह उसके अपने राष्ट्रीय हित में है। यदि येन और जापानी सरकारी बॉन्ड्स में बिकवाली जारी रहती, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता और वॉशिंगटन के लिए भी कर्ज लेने की लागत बढ़ सकती थी। सवाल 5: इस हस्तक्षेप का करेंसी मार्केट पर तुरंत क्या असर देखने को मिला? उत्तर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों के बाद डॉलर 0.2% गिरकर 157.07 येन पर आ गया, जो पिछले महीने के 164 के रिकॉर्ड निचले स्तर से काफी बेहतर स्थिति है। सवाल 6: आगे क्या उम्मीद है? क्या दोनों देश भविष्य में भी ऐसा हस्तक्षेप करेंगे? जवाब: विशेषज्ञ शिगेतो नागाई के अनुसार, दोनों देश आगे भी समय-समय पर रुक-रुक कर और समन्वित तरीके से हस्तक्षेप जारी रख सकते हैं। जापान के वित्त मंत्रालय और अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी दोनों ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर वे दोबारा कदम उठाने से नहीं हिचकेंगे। सवाल 7: जापानी येन 40 साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंचा? इसके पीछे क्या कारण हैं? जवाब: 1990 के दशक की मंदी के बाद से जापान ने अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए लंबे समय तक अपनी ब्याज दरों को शून्य या नकारात्मक बनाए रखा था। 2024 में जापान ने ब्याज दरें बढ़ाईं जरूर, लेकिन फिर भी ये दुनिया के मुकाबले काफी कम रहीं। कम ब्याज दरों के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने येन में कर्ज लेकर उसे ज्यादा रिटर्न देने वाली करेंसी में लगाया। इसके अलावा जापानी कंपनियों का भारी विदेशी निवेश और उनकी विदेशी कमाई का विदेशों में ही बने रहना भी येन पर भारी पड़ा। इसने येन को 40 साल के निचले स्तर पर पहुंचा दिया था। सवाल 8: क्या अमेरिका-ईरान जंग का असर भी येन की गिरावट पर पड़ा? जवाब: हां। ईरान जंग ने येन की गिरावट को और तेज कर दिया। केइओ यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सायुरी शिराई के अनुसार, पूरी तरह ऊर्जा आयात पर निर्भर रहने के कारण तेल-गैस की बढ़ती कीमतों ने जापान के व्यापार संतुलन को बिगाड़ा। इससे महंगाई बढ़ी और येन की रिकवरी रुक गई। सवाल 9: मजबूत डॉलर और कमजोर येन से दोनों देशों को क्या फायदा-नुकसान हो रहा था? जवाब: अमेरिका के लिए: मजबूत डॉलर अमेरिकी एक्सपोर्ट को विदेशी उपभोक्ताओं के लिए महंगा बना देता है। इसका नुकसान अमेरिकी कंपनियों को होता है। जापान के लिए: कमजोर येन से जापानी एक्सपोर्टर्स और पर्यटकों को फायदा जरूर होता है, लेकिन जरूरी सामान का आयात महंगा हो जाता है, जिससे देश में महंगाई बढ़ती है। सवाल 10: क्या इस खरीदारी से येन की स्थिति में स्थायी सुधार आ सकता है? जवाब: बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज के शुसुके यामादा का मानना है कि करेंसी मार्केट में ऐसी खरीदारी से केवल कुछ समय के लिए ही राहत मिलती है। वहीं बार्कलेज बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साझा कदम का असर शुरुआती दिनों में तो दिखेगा, लेकिन लंबी अवधि में येन पर नीचे जाने का दबाव बना रह सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स

दुनिया के तीसरे सबसे छोटे देश ने अपना नाम बदला:अब 'नौरू' नहीं 'नाओएरो' कहलाएगा; UN रिकॉर्ड्स में आज से नया नाम लागू

दुनिया के तीसरे सबसे छोटे देश ने अपना नाम बदला:अब 'नौरू' नहीं 'नाओएरो' कहलाएगा; UN रिकॉर्ड्स में आज से नया नाम लागू

प्रशांत महासागर में बसे दुनिया के तीसरे सबसे छोटे देश नौरू ने ऐसा ही एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब यह देश आधिकारिक तौर पर ‘रिपब्लिक ऑफ नाओएरो’ कहलाएगा। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी अपने रिकॉर्ड में नया नाम लागू कर दिया है। करीब 12 हजार आबादी वाले इस द्वीपीय देश का कहना है कि ‘नाओएरो’ उसका असली नाम है, जबकि ‘नौरू’ विदेशी लोगों की सुविधा के लिए प्रचलन में आया था। अब सरकार का मानना है कि समय आ गया है कि देश दुनिया के सामने अपनी मूल पहचान के साथ जाना जाए। नाम बदलने का यह फैसला सिर्फ औपचारिकता नहीं है। सरकार इसे अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास को सम्मान देने की पहल मान रही है। इसी सोच के तहत देश ने दशकों पुराना नाम छोड़कर अपनी पारंपरिक पहचान को आधिकारिक रूप से वापस अपना लिया है। आखिर नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? नाओएरो सरकार का कहना है कि ‘नौरू’ उसकी पसंद नहीं, बल्कि विदेशियों की सुविधा का नाम था। असली नाम हमेशा ‘नाओएरो’ ही रहा, लेकिन इसका उच्चारण आसान नहीं होने की वजह से दुनिया ने धीरे-धीरे उसे ‘नौरू’ कहना शुरू कर दिया। समय के साथ यही नाम आधिकारिक पहचान भी बन गया। राष्ट्रपति डेविड एडियांग ने जनवरी में संसद में प्रस्ताव रखते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि देश दुनिया के सामने उसी नाम से जाना जाए, जिसे उसके अपने लोग पीढ़ियों से बोलते आए हैं। उनके मुताबिक, यह सिर्फ नाम बदलने का फैसला नहीं, बल्कि अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास को उसकी वास्तविक पहचान लौटाने की कोशिश है। शादी में विवाद के बाद 10 साल तक गृहयुद्ध चला 19वीं सदी के आखिर तक नाउरू एक छोटा-सा द्वीप था, जहां 12 स्थानीय जनजातियां रहती थीं। यहां कोई आधुनिक सरकार या सेना नहीं थी। लोगों का जीवन मछली पकड़ने, नारियल की खेती और समुद्र से मिलने वाले संसाधनों पर निर्भर था। 1870 के दशक में यूरोपीय व्यापारी नाउरू पहुंचने लगे। वे यहां नारियल और दूसरे सामान का व्यापार करते थे। बदले में उन्होंने स्थानीय लोगों को शराब और बंदूकें बेचना शुरू कर दिया। इससे द्वीप का सामाजिक संतुलन बिगड़ने लगा। 1878 में एक शादी समारोह के दौरान रीति-रिवाज को लेकर बहस हुई। बहस के बीच एक व्यक्ति ने पिस्तौल निकालकर गोली चला दी, जिससे एक कबीलाई प्रमुख के बेटे की मौत हो गई। नाउरू की पारंपरिक संस्कृति में ऐसी हत्या का बदला लेना सामाजिक जिम्मेदारी माना जाता था। यहीं से बदले का सिलसिला शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे पूरे द्वीप के 12 कबीलों के बीच गृहयुद्ध में बदल गया। यह संघर्ष करीब 10 साल तक चला, जिसे नाउरू सिविल वॉर के नाम से जाना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मारे गए, कई गांव उजड़ गए और लगभग हर परिवार किसी न किसी रूप में इस हिंसा से प्रभावित हुआ। हालात इतने खराब हो गए कि आखिरकार 1888 में जर्मनी ने हस्तक्षेप कर द्वीप पर नियंत्रण स्थापित किया, हथियार जब्त किए और इस लंबे खूनी संघर्ष को समाप्त कराया। जर्मनी के बाद ऑस्ट्रेलिया ने नौरू पर कब्जा किया 1914 में प्रथम विश्व युद्ध शुरू होते ही हालात बदल गए। ऑस्ट्रेलियाई सेना ने बिना ज्यादा प्रतिरोध के नाओएरो पर कब्जा कर लिया। युद्ध खत्म होने के बाद जर्मनी हार गया और उसे अपने कई विदेशी उपनिवेश छोड़ने पड़े। करीब पांच दशक तक विदेशी सरकार के कब्जे में रहने के बाद नाओएरो को 31 जनवरी 1968 को पूर्ण स्वतंत्रता मिली और यह एक संप्रभु गणराज्य बन गया। फॉस्फेट से बदली किस्मत, उसी वजह से कंगाल हुआ 1900 में ऑस्ट्रेलियाई भूवैज्ञानिक अल्बर्ट फुलर एलिस ने नाओएरो में फॉस्फेट के विशाल भंडार की खोज की। इसके छह साल बाद व्यावसायिक खनन शुरू हुआ। उस समय फॉस्फेट की दुनिया भर में जबरदस्त मांग थी, क्योंकि इसका इस्तेमाल खेती में खाद बनाने के लिए होता था। देखते ही देखते यह छोटा-सा द्वीप दुनिया के सबसे बड़े फॉस्फेट निर्यातकों में शामिल हो गया। 1968 में आजादी मिलने के बाद नाओएरो सरकार ने धीरे-धीरे फॉस्फेट उद्योग पर अपना नियंत्रण हासिल कर लिया। 1970 के दशक तक फॉस्फेट से होने वाली कमाई इतनी बढ़ गई कि यह दुनिया के सबसे अमीर देशों में गिना जाने लगा। प्रति व्यक्ति आय कई विकसित देशों के बराबर पहुंच गई। सरकार के पास इतना पैसा था कि शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी कई सुविधाएं लोगों को लगभग मुफ्त मिलने लगीं। देश ने विदेशों में होटल, इमारतें और दूसरी संपत्तियां खरीदकर भी निवेश किया। लेकिन यह समृद्धि ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। लगातार खनन की वजह से फॉस्फेट के भंडार तेजी से खत्म होने लगे। आय का सबसे बड़ा स्रोत सूख गया और विदेशों में किए गए कई निवेश भी घाटे में चले गए। 1990 के दशक तक नाओएरो गंभीर आर्थिक संकट में फंस गया। जिस फॉस्फेट ने कभी इस छोटे से द्वीप को दुनिया के सबसे अमीर देशों की सूची में पहुंचाया था, उसी के खत्म होने के बाद देश आर्थिक तंगी से जूझने लगा। आज भी देश उस दौर के असर से पूरी तरह उबर नहीं पाया है। अब जलवायु परिवर्तन से अस्तित्व पर खतरा आर्थिक चुनौतियों के बीच अब नाओएरो के सामने सबसे बड़ा संकट जलवायु परिवर्तन है। समुद्र का बढ़ता जलस्तर इस द्वीपीय देश के लिए लगातार खतरा बनता जा रहा है। कई वैज्ञानिक चेतावनी दे चुके हैं कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दशकों में देश के कई हिस्से रहने लायक नहीं बचेंगे। 1993 के बाद से नाओएरो के आसपास समुद्र का जलस्तर हर साल औसतन करीब 5 मिलीमीटर बढ़ रहा है, जो वैश्विक औसत से ज्यादा है। अगर यही रफ्तार बनी रही तो इस सदी के अंत तक समुद्र का स्तर 20 से 57 सेंटीमीटर तक और बढ़ सकता है। समस्या सिर्फ समुद्र के बढ़ने की नहीं है। नाओएरो के पास लोगों को बसाने के लिए सुरक्षित जमीन भी बहुत कम बची है। दशकों तक फॉस्फेट खनन की वजह से द्वीप का करीब 80% अंदरूनी हिस्सा बंजर हो चुका है। ऐसे में आबादी का बड़ा हिस्सा समुद्र किनारे रहने को मजबूर है, जहां हर साल तटीय कटाव और ऊंची लहरों का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसी खतरे से निपटने के लिए सरकार ने विदेशी नागरिकों को

आज सोने-चांदी के दाम में बढत:10 ग्राम सोना ₹1.43 लाख का बिक रहा, एक किलो चांदी ₹2.18 लाख पर पहुंची

आज सोने-चांदी के दाम में बढत:10 ग्राम सोना ₹1.43 लाख का बिक रहा, एक किलो चांदी ₹2.18 लाख पर पहुंची

सोने-चांदी की कीमत में आज यानी 3 अगस्त को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत 105 रुपए बढ़कर 2.17 लाख रुपए पर पहुंच गई है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 3 रुपए बढ़कर 1.43 लाख रुपए हो गया है। इस साल सोने में अब तक तेजी रही इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 10 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.43 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 12 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.18 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। सोने-चांदी में ETF के जरिए कर सकते हैं निवेश एक्सचेंज ट्रेडेड फंड सोने और चांदी के गिरते-चढ़ते भावों पर बेस्ड होते हैं। गोल्ड ETF या सिल्वर ETF की खरीद-बिक्री शेयर की ही तरह BSE और NSE पर की जा सकती है। हालांकि, इसमें आपको सोना या चांदी नहीं मिलता। आप जब इससे निकलना चाहें तब आपको उस समय के सोने-चांदी के भाव के बराबर पैसा मिल जाएगा। इसमें 500 रुपए से भी कम में निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। इसमें कैसे कर सकते हैं निवेश? ETF खरीदने के लिए आपको अपने ब्रोकर के माध्यम से डीमैट अकाउंट खोलना होता है। इसमें NSE पर उपलब्ध ETF के यूनिट आप खरीद सकते हैं और उसके बराबर की राशि आपके डीमैट अकाउंट से जुड़े बैंक अकाउंट से कट जाएगी। आपके डीमैट अकाउंट में ऑर्डर लगाने के दो दिन बाद ETF आपके अकाउंट में डिपॉजिट हो जाते हैं। ट्रेडिंग खाते के जरिए ही ETF को बेचा जाता है।