आज सोने-चांदी के दाम में बढत:10 ग्राम सोना ₹1.43 लाख का बिक रहा, एक किलो चांदी ₹2.18 लाख पर पहुंची

सोने-चांदी की कीमत में आज यानी 3 अगस्त को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत 105 रुपए बढ़कर 2.17 लाख रुपए पर पहुंच गई है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 3 रुपए बढ़कर 1.43 लाख रुपए हो गया है। इस साल सोने में अब तक तेजी रही इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 10 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.43 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 12 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.18 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। सोने-चांदी में ETF के जरिए कर सकते हैं निवेश एक्सचेंज ट्रेडेड फंड सोने और चांदी के गिरते-चढ़ते भावों पर बेस्ड होते हैं। गोल्ड ETF या सिल्वर ETF की खरीद-बिक्री शेयर की ही तरह BSE और NSE पर की जा सकती है। हालांकि, इसमें आपको सोना या चांदी नहीं मिलता। आप जब इससे निकलना चाहें तब आपको उस समय के सोने-चांदी के भाव के बराबर पैसा मिल जाएगा। इसमें 500 रुपए से भी कम में निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। इसमें कैसे कर सकते हैं निवेश? ETF खरीदने के लिए आपको अपने ब्रोकर के माध्यम से डीमैट अकाउंट खोलना होता है। इसमें NSE पर उपलब्ध ETF के यूनिट आप खरीद सकते हैं और उसके बराबर की राशि आपके डीमैट अकाउंट से जुड़े बैंक अकाउंट से कट जाएगी। आपके डीमैट अकाउंट में ऑर्डर लगाने के दो दिन बाद ETF आपके अकाउंट में डिपॉजिट हो जाते हैं। ट्रेडिंग खाते के जरिए ही ETF को बेचा जाता है।
दुनिया के तीसरे सबसे छोटे देश ने अपना नाम बदला:अब 'नौरू' नहीं 'नाओएरो' कहलाएगा; UN रिकॉर्ड्स में आज से नया नाम लागू

प्रशांत महासागर में बसे दुनिया के तीसरे सबसे छोटे देश नौरू ने ऐसा ही एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब यह देश आधिकारिक तौर पर ‘रिपब्लिक ऑफ नाओएरो’ कहलाएगा। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी अपने रिकॉर्ड में नया नाम लागू कर दिया है। करीब 12 हजार आबादी वाले इस द्वीपीय देश का कहना है कि ‘नाओएरो’ उसका असली नाम है, जबकि ‘नौरू’ विदेशी लोगों की सुविधा के लिए प्रचलन में आया था। अब सरकार का मानना है कि समय आ गया है कि देश दुनिया के सामने अपनी मूल पहचान के साथ जाना जाए। नाम बदलने का यह फैसला सिर्फ औपचारिकता नहीं है। सरकार इसे अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास को सम्मान देने की पहल मान रही है। इसी सोच के तहत देश ने दशकों पुराना नाम छोड़कर अपनी पारंपरिक पहचान को आधिकारिक रूप से वापस अपना लिया है। आखिर नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? नाओएरो सरकार का कहना है कि ‘नौरू’ उसकी पसंद नहीं, बल्कि विदेशियों की सुविधा का नाम था। असली नाम हमेशा ‘नाओएरो’ ही रहा, लेकिन इसका उच्चारण आसान नहीं होने की वजह से दुनिया ने धीरे-धीरे उसे ‘नौरू’ कहना शुरू कर दिया। समय के साथ यही नाम आधिकारिक पहचान भी बन गया। राष्ट्रपति डेविड एडियांग ने जनवरी में संसद में प्रस्ताव रखते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि देश दुनिया के सामने उसी नाम से जाना जाए, जिसे उसके अपने लोग पीढ़ियों से बोलते आए हैं। उनके मुताबिक, यह सिर्फ नाम बदलने का फैसला नहीं, बल्कि अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास को उसकी वास्तविक पहचान लौटाने की कोशिश है। शादी में विवाद के बाद 10 साल तक गृहयुद्ध चला 19वीं सदी के आखिर तक नाउरू एक छोटा-सा द्वीप था, जहां 12 स्थानीय जनजातियां रहती थीं। यहां कोई आधुनिक सरकार या सेना नहीं थी। लोगों का जीवन मछली पकड़ने, नारियल की खेती और समुद्र से मिलने वाले संसाधनों पर निर्भर था। 1870 के दशक में यूरोपीय व्यापारी नाउरू पहुंचने लगे। वे यहां नारियल और दूसरे सामान का व्यापार करते थे। बदले में उन्होंने स्थानीय लोगों को शराब और बंदूकें बेचना शुरू कर दिया। इससे द्वीप का सामाजिक संतुलन बिगड़ने लगा। 1878 में एक शादी समारोह के दौरान रीति-रिवाज को लेकर बहस हुई। बहस के बीच एक व्यक्ति ने पिस्तौल निकालकर गोली चला दी, जिससे एक कबीलाई प्रमुख के बेटे की मौत हो गई। नाउरू की पारंपरिक संस्कृति में ऐसी हत्या का बदला लेना सामाजिक जिम्मेदारी माना जाता था। यहीं से बदले का सिलसिला शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे पूरे द्वीप के 12 कबीलों के बीच गृहयुद्ध में बदल गया। यह संघर्ष करीब 10 साल तक चला, जिसे नाउरू सिविल वॉर के नाम से जाना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मारे गए, कई गांव उजड़ गए और लगभग हर परिवार किसी न किसी रूप में इस हिंसा से प्रभावित हुआ। हालात इतने खराब हो गए कि आखिरकार 1888 में जर्मनी ने हस्तक्षेप कर द्वीप पर नियंत्रण स्थापित किया, हथियार जब्त किए और इस लंबे खूनी संघर्ष को समाप्त कराया। जर्मनी के बाद ऑस्ट्रेलिया ने नौरू पर कब्जा किया 1914 में प्रथम विश्व युद्ध शुरू होते ही हालात बदल गए। ऑस्ट्रेलियाई सेना ने बिना ज्यादा प्रतिरोध के नाओएरो पर कब्जा कर लिया। युद्ध खत्म होने के बाद जर्मनी हार गया और उसे अपने कई विदेशी उपनिवेश छोड़ने पड़े। करीब पांच दशक तक विदेशी सरकार के कब्जे में रहने के बाद नाओएरो को 31 जनवरी 1968 को पूर्ण स्वतंत्रता मिली और यह एक संप्रभु गणराज्य बन गया। फॉस्फेट से बदली किस्मत, उसी वजह से कंगाल हुआ 1900 में ऑस्ट्रेलियाई भूवैज्ञानिक अल्बर्ट फुलर एलिस ने नाओएरो में फॉस्फेट के विशाल भंडार की खोज की। इसके छह साल बाद व्यावसायिक खनन शुरू हुआ। उस समय फॉस्फेट की दुनिया भर में जबरदस्त मांग थी, क्योंकि इसका इस्तेमाल खेती में खाद बनाने के लिए होता था। देखते ही देखते यह छोटा-सा द्वीप दुनिया के सबसे बड़े फॉस्फेट निर्यातकों में शामिल हो गया। 1968 में आजादी मिलने के बाद नाओएरो सरकार ने धीरे-धीरे फॉस्फेट उद्योग पर अपना नियंत्रण हासिल कर लिया। 1970 के दशक तक फॉस्फेट से होने वाली कमाई इतनी बढ़ गई कि यह दुनिया के सबसे अमीर देशों में गिना जाने लगा। प्रति व्यक्ति आय कई विकसित देशों के बराबर पहुंच गई। सरकार के पास इतना पैसा था कि शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी कई सुविधाएं लोगों को लगभग मुफ्त मिलने लगीं। देश ने विदेशों में होटल, इमारतें और दूसरी संपत्तियां खरीदकर भी निवेश किया। लेकिन यह समृद्धि ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। लगातार खनन की वजह से फॉस्फेट के भंडार तेजी से खत्म होने लगे। आय का सबसे बड़ा स्रोत सूख गया और विदेशों में किए गए कई निवेश भी घाटे में चले गए। 1990 के दशक तक नाओएरो गंभीर आर्थिक संकट में फंस गया। जिस फॉस्फेट ने कभी इस छोटे से द्वीप को दुनिया के सबसे अमीर देशों की सूची में पहुंचाया था, उसी के खत्म होने के बाद देश आर्थिक तंगी से जूझने लगा। आज भी देश उस दौर के असर से पूरी तरह उबर नहीं पाया है। अब जलवायु परिवर्तन से अस्तित्व पर खतरा आर्थिक चुनौतियों के बीच अब नाओएरो के सामने सबसे बड़ा संकट जलवायु परिवर्तन है। समुद्र का बढ़ता जलस्तर इस द्वीपीय देश के लिए लगातार खतरा बनता जा रहा है। कई वैज्ञानिक चेतावनी दे चुके हैं कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दशकों में देश के कई हिस्से रहने लायक नहीं बचेंगे। 1993 के बाद से नाओएरो के आसपास समुद्र का जलस्तर हर साल औसतन करीब 5 मिलीमीटर बढ़ रहा है, जो वैश्विक औसत से ज्यादा है। अगर यही रफ्तार बनी रही तो इस सदी के अंत तक समुद्र का स्तर 20 से 57 सेंटीमीटर तक और बढ़ सकता है। समस्या सिर्फ समुद्र के बढ़ने की नहीं है। नाओएरो के पास लोगों को बसाने के लिए सुरक्षित जमीन भी बहुत कम बची है। दशकों तक फॉस्फेट खनन की वजह से द्वीप का करीब 80% अंदरूनी हिस्सा बंजर हो चुका है। ऐसे में आबादी का बड़ा हिस्सा समुद्र किनारे रहने को मजबूर है, जहां हर साल तटीय कटाव और ऊंची लहरों का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसी खतरे से निपटने के लिए सरकार ने विदेशी नागरिकों को
'रितेश की नौकरी खतरे में':होस्टिंग पर सलमान ने उड़ाया मजाक, सोहेल की पूर्व पत्नी पर कहा- महान भाई ने इल्जाम खुद पर लिए, मैं जानता हूं

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने हाल ही में पहली बार रियलिटी शो होस्ट कर रहे एक्टर रितेश देशमुख का मजाक उड़ाया है। छोटे भाई सोहेल को सपोर्ट करने पहुंचे सलमान ने उनकी पूर्व पत्नी पर भी तंज कसा है। उनका कहना है कि सोहेल ने तलाक का इल्जाम खुद पर लिया, लेकिन उन्होंने सारी चीजें देखी थीं। सोहेल खान अमेजन प्राइम के रियलिटी शो अलायंस का हिस्सा बने हैं। सलमान खान, हाल ही में सोहेल खान से मिलने शो में पहुंचे। शो में वो कई दिनों बाद भाई से मिलकर भावुक हो गए। आते साथ उन्होंने कहा- ‘परेशान मत हो, मैं यहां होस्ट नहीं हूं। इस दौरान उन्होंने शो की तारीफ करते हुए रितेश का मजाक उड़ाकर कहा- ‘मुझे रितेश देशमुख की नौकरी खतरे में लग रही है।’ सलमान का तंज, नेटफ्लिक्स के शो लॉकअप 2 पर था, जिसे रितेश होस्ट कर रहे हैं। सोहेल की पूर्व पत्नी पर उठाए सवाल शो से जुड़ा एक नया प्रोमो भी सामने आया है, जिसमें सलमान सोहेल से पूछ रहे हैं कि क्या तुम अभी भी सीमा की बात सुनते हो। इसके बाद उन्होंने कहा- पता नहीं कहना चाहिए या नहीं। लेकिन मेरे महान भाई ने सारा कसूर अपने ऊपर ले लिया, लेकिन एक भाई के रूप में मैं जानता हूं कि इसने कितनी कोशिश की। मैं जानता हूं कि हमने क्या देखा है। पूरे समय ये अपने ऊपर चीजें लेता गया। बता दें कि सोहेल खान की पूर्व पत्नी सीमा सचदेह भी शो में बतौर वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट पहुंची थीं। जब शो में सीमा की एंट्री हुई, तब सोहेल ने उनकी तारीफ की थी। होस्ट कुणाल खेमू ने सोहेल से पूछा था कि सीमा को शो में देखकर उन्हें कैसा लग रहा है। इस पर सोहेल खान ने कहा था कि उन्होंने सीमा के साथ अपनी जिंदगी के 25 साल बिताए हैं। उन्होंने सीमा को एक खूबसूरत और अच्छे दिल वाली महिला बताया। सोहेल ने यह भी कहा था कि अगर उनके रिश्ते में कभी कोई गलती हुई होगी, तो वह उनकी तरफ से हुई होगी। जेल के दिनों को याद कर भावुक हुए सलमान इस दौरान सलमान खान ने अपने जेल के अनुभव पर भी बात की। उन्होंने सोहेल और दूसरे इनमेट्स से कहा, सालं पहले, जब मैं जेल गया था तो सामने सलाखें थीं। वहां एक साथ 50-60-60 के लिए एक बाथरूम था। इंडियन स्टाइल कमोड था, जहां छिपकली थी। वहां पूरे समय ऊपर तक गंदगी भरी होती थी। शो में सलमान ने सोहेल के वजन घटने पर सवाल किया। जब दूसरे कंटेस्टेंट्स ने बताया कि सोहेल ने 12 किलो वजन कम किया है, तो सलमान ने बताया कि उन्होंने भी 16 किलो वजन घटाया है। शो अलायंस के बारे में-
'रितेश की नौकरी खतरे में':होस्टिंग पर सलमान ने उड़ाया मजाक, सोहेल की पूर्व पत्नी पर कहा- महान भाई ने इल्जाम खुद पर लिए, मैं जानता हूं

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने हाल ही में पहली बार रियलिटी शो होस्ट कर रहे एक्टर रितेश देशमुख का मजाक उड़ाया है। छोटे भाई सोहेल को सपोर्ट करने पहुंचे सलमान ने उनकी पूर्व पत्नी पर भी तंज कसा है। उनका कहना है कि सोहेल ने तलाक का इल्जाम खुद पर लिया, लेकिन उन्होंने सारी चीजें देखी थीं। सोहेल खान अमेजन प्राइम के रियलिटी शो अलायंस का हिस्सा बने हैं। सलमान खान, हाल ही में सोहेल खान से मिलने शो में पहुंचे। शो में वो कई दिनों बाद भाई से मिलकर भावुक हो गए। आते साथ उन्होंने कहा- ‘परेशान मत हो, मैं यहां होस्ट नहीं हूं। इस दौरान उन्होंने शो की तारीफ करते हुए रितेश का मजाक उड़ाकर कहा- ‘मुझे रितेश देशमुख की नौकरी खतरे में लग रही है।’ सलमान का तंज, नेटफ्लिक्स के शो लॉकअप 2 पर था, जिसे रितेश होस्ट कर रहे हैं। सोहेल की पूर्व पत्नी पर उठाए सवाल शो से जुड़ा एक नया प्रोमो भी सामने आया है, जिसमें सलमान सोहेल से पूछ रहे हैं कि क्या तुम अभी भी सीमा की बात सुनते हो। इसके बाद उन्होंने कहा- पता नहीं कहना चाहिए या नहीं। लेकिन मेरे महान भाई ने सारा कसूर अपने ऊपर ले लिया, लेकिन एक भाई के रूप में मैं जानता हूं कि इसने कितनी कोशिश की। मैं जानता हूं कि हमने क्या देखा है। पूरे समय ये अपने ऊपर चीजें लेता गया। बता दें कि सोहेल खान की पूर्व पत्नी सीमा सचदेह भी शो में बतौर वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट पहुंची थीं। जब शो में सीमा की एंट्री हुई, तब सोहेल ने उनकी तारीफ की थी। होस्ट कुणाल खेमू ने सोहेल से पूछा था कि सीमा को शो में देखकर उन्हें कैसा लग रहा है। इस पर सोहेल खान ने कहा था कि उन्होंने सीमा के साथ अपनी जिंदगी के 25 साल बिताए हैं। उन्होंने सीमा को एक खूबसूरत और अच्छे दिल वाली महिला बताया। सोहेल ने यह भी कहा था कि अगर उनके रिश्ते में कभी कोई गलती हुई होगी, तो वह उनकी तरफ से हुई होगी। जेल के दिनों को याद कर भावुक हुए सलमान इस दौरान सलमान खान ने अपने जेल के अनुभव पर भी बात की। उन्होंने सोहेल और दूसरे इनमेट्स से कहा, सालं पहले, जब मैं जेल गया था तो सामने सलाखें थीं। वहां एक साथ 50-60-60 के लिए एक बाथरूम था। इंडियन स्टाइल कमोड था, जहां छिपकली थी। वहां पूरे समय ऊपर तक गंदगी भरी होती थी। शो में सलमान ने सोहेल के वजन घटने पर सवाल किया। जब दूसरे कंटेस्टेंट्स ने बताया कि सोहेल ने 12 किलो वजन कम किया है, तो सलमान ने बताया कि उन्होंने भी 16 किलो वजन घटाया है। शो अलायंस के बारे में-
IBPS Bank Recruitment 2026 | Apply Online for Graduate Job Vacancies

Hindi News Career IBPS Bank Recruitment 2026 | Apply Online For Graduate Job Vacancies 7 मिनट पहले कॉपी लिंक इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS) राष्ट्रीय बैंकों में 11,403 पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट ibpsonline.ibps.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। इस भर्ती के लिए फीस जमा करने की आखिरी तारीख भी 21 अगस्त 2026 तय की गई है। प्रीलिम्स एग्जाम 10 और 11 अक्टूबर को होगी। वहीं मेन्स एग्जाम का आयोजन 27 दिसंबर 2026 को किया जाएगा। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रेजुएशन की डिग्री। एज लिमिट : न्यूनतम : 20 साल अधिकतम : 28 साल विशेष वर्ग के उम्मीदवारों को उम्र में छूट दी जाएगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति : 5 साल की छूट ओबीसी : 3 साल की छूट उम्र की गणना 1 अगस्त 2026 के अनुसार की जाएगी। सैलरी : 24,050 – 64,480 रुपए प्रतिमाह सिलेक्शन प्रोसेस : प्रीलिम्स एग्जाम मेन्स एग्जाम जरूरी डॉक्यूमेंट्स : ग्रेजुएशन की मार्कशीट उम्मीदवार का आधार कार्ड जाति प्रमाण पत्र मूल निवासी प्रमाण पत्र मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी पासपोर्ट साइज फोटो पर सिग्नेचर ऐसे करें आवेदन : उम्मीदवार वेबसाइट ibpsonline.ibps.in पर जाएं। ‘Recruitment of Clerk 2024’ के विकल्प पर क्लिक करें। अप्लाई ऑनलाइन पर क्लिक करें। मांगी गई डिटेल्स दर्ज करें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट कर दें। इसका प्रिंट आउट लेकर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ————– ये खबर भी पढ़ें… राजस्थान में सफाईकर्मी की 24,752 भर्तियां निकलीं: छत्तीसगढ़ में 2,292 वैकेंसी, देखें हफ्ते की टॉप जॉब्स इस हफ्ते निकली हैं राजस्थान और झारखंड सहित कई राज्यों में 29,209 पदों पर नौकरियां। अगर आप भी इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इन 6 नौकरियों की डिटेल्ड जानकारी 6 ग्राफिक्स के जरिए जानिए। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
क्या कंगना ने सोनाक्षी के पहनावे पर उठाए सवाल?:लिखा- पॉकेटमार जैसे कपड़े पहनती है, पहले सलीके के पहनती थी; पति-भाषा पर भी तंज

क्या कंगना ने सोनाक्षी के पहनावे पर उठाए सवाल?:लिखा- पॉकेटमार जैसे कपड़े पहनती है, पहले सलीके के पहनती थी; पति-भाषा पर भी तंज
क्या कंगना ने सोनाक्षी के पहनावे पर उठाए सवाल?:लिखा- पॉकेटमार जैसे कपड़े पहनती है, पहले सलीके के पहनती थी; पति-भाषा पर भी तंज

स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर लगातार विवादित बयान दे रहीं कंगना रनोट ने अब बिना नाम लिए एक एक्ट्रेस के लिए अपमानजनक टिप्पणी की है। उन्होंने एक्ट्रेस के लुक की तुलना पॉकेटमार से करते हुए उनकी भाषा, पति और पहनावे पर सवाल खड़े किए हैं। कंगना ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट री-शेयर की है, जिसमें लिखा है, ‘नाम नहीं लूंगा पर एक मोटी जिहादी कूद कूद कर नीट प्रोटेस्ट पर वीडियो बना रही थी। पर झारखंड प्रोटेस्ट के टाइम मुंह बंद है।’ इस पोस्ट को कंगना ने लाइक किया और फिर इसके साथ लिखा है, ‘मेरे बारे में भी इस तरह की कई फर्जी खबरें फैलाई जा रही हैं। यह वाली भी पूरी तरह झूठी है। मैं किसी को शर्मिंदा नहीं करना चाहती, लेकिन मैंने देखा है कि इन दिनों एक एक्ट्रेस ऐसे कपड़े पहनती है और ऐसे बात करती है जैसे कोई पॉकेटमार हो। वह हाफ पैंट, उल्टी कैप पहनती है और प्रदर्शनकारियों के गटरछाप व्यवहार का जोश के साथ समर्थन करते हुए जेबकतरे जैसी भाषा बोलती है।’ आगे कंगना ने लिखा, ‘मुझे हमेशा लगता है कि आप जिस तरह के कपड़े पहनते हैं, उसका सीधा असर आपकी सोच और व्यक्तित्व पर दिखाई देता है। मेरी प्यारी साथी एक्ट्रेस, अगर आपका पुरुष साथी आपको जेबकतरे जैसा महसूस करा रहा है, तो मुझे अफसोस है। आप पहले बहुत सलीके से कपड़े पहनती थीं और बेहद शालीनता से बात करती थीं। आपको क्या हो गया? आपकी राय आपकी अपनी है, लेकिन अपने स्टाइल पर थोड़ा और ध्यान दें। अगर आपको मदद की जरूरत हो, तो मैं हमेशा आपके लिए मौजूद हूं।’ पोस्ट शेयर करने के बाद कंगना ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि कुछ साथी एक्ट्रेसेस हमेशा धर्म और राजनीति के मुद्दे पर न्यूट्रल रहती हैं, लेकिन इस्लामिस्ट से संबंध रखने और शादी के बाद एक दम लेफ्टिस्ट कंट्टरपंथी बन जाती हैं। कंगना ने कहा है, ‘इसमें कोई आपत्ति नहीं है। संविधान इसकी इजाजत देता है, लेकिन दिक्कत ये है कि मैं एक मॉडरेट हिंदू थी। तो मुझे अब संघी बनने पर तंज क्यों दिया जाता है। मैं क्यों नहीं कन्वर्ट हो सकती।’ कंगना ने वीडियो में कहा है कि वो सालों पहले मॉडर्न थीं, लेकिन अब एक कट्टर हिंदू बन रही हूं, तो इसमें दूसरों को क्या आपत्ति है। क्या सोनाक्षी के लिए लिखी कंगना ने पोस्ट बता दें कि सोनाक्षी सिन्हा उन चुनिंदा एक्ट्रेसेस में शामिल हैं, जिन्होंने प्रोटेस्ट का खुलकर समर्थन किया और बेबाक राय रखी। प्रोटेस्ट पर बात करने पर सोनाक्षी को जमकर सराहना मिली थी। उन्होंने प्रोटेस्ट पर कई वीडियो बनाईं, जिनमें ज्यादातर वो शॉर्ट्स और कैप पहनी हुई थीं। बयानों से विवादों में हैं कंगना रनोट स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर भाजपा सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट लगातार विवादित बयान दे रही हैं। कुछ समय पहले ही उन्होंने जेन-जी लड़कियों को गटर जनरेशन कहा और साथ ही कहा कि इस जनरेशन की महिलाएं कई आदमियों से यौन संबंध बनाने को आजादी कहती हैं। ये हाउसवाइफ तक नहीं बन सकतीं। साथ ही उन्होंने कहा कि यंग लड़कियों को जल्दी सेक्शुअलाइज किया जा रहा है। कंगना के विवादित बयान की जमकर आलोचना हुई। सिंगर विशाल ददलानी और सोनू सूद जैसी बड़ी हस्तियों ने इसका विरोध किया। इसी बीच कंगना के पुराने मूवी सीन और बोल्ड फोटोज वायरल हो गए। इनके साथ कहा गया कि कंगना एक समय खुद भी अपनी निजी जिंदगी, अफेयर और पहनावे से सुर्खियों बटौर चुकी हैं, लेकिन नई पीढ़ी की उन्हीं बातों को निंदा कर रही हैं। इस पर कंगना ने लिखा, “आप मेरी फिल्मों के किरदारों वाले क्लिप्स इस्तेमाल करना चाहते हैं, जिनके लिए मुझे करोड़ों रुपये का भुगतान किया जाता है। आप मेरे हाई-प्रोफाइल शो और बिजनेस इवेंट्स की तस्वीरें और वीडियो इस्तेमाल करना चाहते हैं, जहां मैं अपनी टीम, इवेंट प्लानर्स और सुरक्षा कर्मियों से घिरी रहती हूं। आगे उन्होंने लिखा, क्या आप इन सबका इस्तेमाल करके किसी कम उम्र और आसानी से प्रभावित होने वाली लड़की को यह यकीन दिलाना चाहते हैं कि वह भी सड़क पर, स्कूल के कार्यक्रमों में या घटिया क्लबों में ऐसा ही व्यवहार कर सकती है? क्या दोनों बातें एक जैसी हैं? युवाओं को गुमराह मत कीजिए। यह एक जैसी बात नहीं है। आज आप दूसरों के बच्चों को गुमराह कर रहे हैं, कल यही बारी आपके अपने बच्चों की भी आ सकती है।”
आज से RBI MPC की 3- दिन की मीटिंग:रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम; 5 अगस्त को फैसलोें का ऐलान

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की तीन दिन की मीटिंग आज सोमवार 3 अगस्त से शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के स्थिर रख सकता है। महंगाई के रुख और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए यह फैसला लिया जा सकता है। 2025 में चार बार में 1.25% की कटौती RBI की पिछली मीटिंग जून में हुई थी रिजर्व बैंक ने नए वित्त वर्ष की दूसरी मीटिंग जून में की थी। इसमें रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा था। हालांकि 2027 में महंगाई के अनुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया था। इस वित्तीय वर्ष में कुल 6 बैठकें होनी हैं, ये इस वित्त वर्ष की तीसरी मीटिंग है। पहली बैठक अप्रैल में हुई थी। RBI ब्याज दर बदलाव में जल्दबाजी नहीं करेगा विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बावजूद RBI अभी ब्याज दरों में कोई बदलाव करने की जल्दबाजी नहीं करेगा। केंद्रीय बैंक का पूरा ध्यान घरेलू महंगाई, लिक्विडिटी और आर्थिक विकास पर रहने की उम्मीद है। दिसंबर में हो सकती है बढ़ोतरी इक्विरस सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड मौलिक पटेल ने भी दरों में बदलाव न होने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और मौसम की मार के कारण थोक और खुदरा महंगाई में तेजी देखी जा रही है। इन दबावों के चलते पूरे साल के लिए सीपीआई (CPI) 4.9 फीसदी रहने का अनुमान है। पटेल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर सख्त होती मौद्रिक नीतियों को देखते हुए RBI भविष्य के फैसलों में सावधानी बरतेगा। इक्विरस सिक्योरिटीज को उम्मीद है कि दिसंबर की पॉलिसी समीक्षा में RBI 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? रेपो रेट महंगाई से लड़ने का टूल है। जब महंगाई ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक इसे बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होने पर डिमांड घटती है और महंगाई कम हो जाती है। जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है, तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।
आज से RBI MPC की 3- दिन की मीटिंग:रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम; 5 अगस्त को फैसलोें का ऐलान

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की तीन दिन की मीटिंग आज सोमवार 3 अगस्त से शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के स्थिर रख सकता है। महंगाई के रुख और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए यह फैसला लिया जा सकता है। RBI की पिछली मीटिंग जून में हुई थी रिजर्व बैंक ने नए वित्त वर्ष की दूसरी मीटिंग जून में की थी। इसमें रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा था। हालांकि 2027 में महंगाई के अनुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया था। इस वित्तीय वर्ष में कुल 6 बैठकें होनी हैं, ये इस वित्त वर्ष की तीसरी मीटिंग है। पहली बैठक अप्रैल में हुई थी। RBI ब्याज दर बदलाव में जल्दबाजी नहीं करेगा विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बावजूद RBI अभी ब्याज दरों में कोई बदलाव करने की जल्दबाजी नहीं करेगा। केंद्रीय बैंक का पूरा ध्यान घरेलू महंगाई, लिक्विडिटी और आर्थिक विकास पर रहने की उम्मीद है। दिसंबर में हो सकती है बढ़ोतरी इक्विरस सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड मौलिक पटेल ने भी दरों में बदलाव न होने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और मौसम की मार के कारण थोक और खुदरा महंगाई में तेजी देखी जा रही है। इन दबावों के चलते पूरे साल के लिए सीपीआई (CPI) 4.9 फीसदी रहने का अनुमान है। पटेल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर सख्त होती मौद्रिक नीतियों को देखते हुए RBI भविष्य के फैसलों में सावधानी बरतेगा। इक्विरस सिक्योरिटीज को उम्मीद है कि दिसंबर की पॉलिसी समीक्षा में RBI 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? रेपो रेट महंगाई से लड़ने का टूल है। जब महंगाई ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक इसे बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होने पर डिमांड घटती है और महंगाई कम हो जाती है। जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है, तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।
ऑडी के 70% ग्राहक 50 साल से कम उम्र वाले:कंपनी की SUVs से 60% बिक्री; ऑडी इंडिया के ब्रांड डायरेक्टर बलबीर सिंह का इंटरव्यू

लग्जरी कारों की मांग अब सिर्फ दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है। टियर-II शहर, युवा खरीदार और इलेक्ट्रिक गाड़ियां इस बाजार को नया रूप दे रही हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में ऑडी इंडिया के ब्रांड डायरेक्टर बलबीर सिंह ढिल्लो ने कंपनी की ग्रोथ, उत्तर भारत में SUVs की मांग और फ्यूचर प्लान के बारे में बताया। पूरा इंटरव्यू पढ़ें… सवाल: टियर-II शहरों से ऑडी को कैसी ग्रोथ मिल रही है? जवाब: लखनऊ, जयपुर, चंडीगढ़, देहरादून और लुधियाना जैसे टियर-II शहरों में बढ़ती संपन्नता, स्टार्टअप्स और लग्जरी कारों की चाहत के कारण मांग तेजी से बढ़ रही है। इन शहरों के ग्राहकों को हमारी SUVs और परफॉर्मेंस गाड़ियां काफी पसंद आ रही हैं, जिसके लिए हम अपने नेटवर्क, डिजिटल सर्विसेज और आफ्टर-सेल्स सपोर्ट को और मजबूत कर रहे हैं। सवाल: उत्तर भारत में ऑडी की SUVs की मांग कितनी है और इसके लिए क्या तैयारी है? जवाब: उत्तर भारत में खराब सड़कों और लाइफस्टाइल जरूरतों की वजह से हमारी कुल बिक्री में 60% हिस्सा SUVs का है। ऑडी के पास Q3, Q3 स्पोर्ट्सबैक, Q5, Q7, Q8, RS Q8 और हाल ही में लॉन्च हुई SQ8 जैसी लग्जरी SUVs का एक बड़ा पोर्टफोलियो है जो हर तरह के ग्राहकों की पसंद से मेल खाता है। सवाल: युवा और पहली बार लग्जरी कार खरीदने वाले ग्राहकों के लिए ऑडी क्या नया कर रही? जवाब: ऑडी के लगभग 70% ग्राहक 50 साल से कम उम्र के हैं और हर 3 में से 1 ग्राहक हमारा रिपीट बायर्स है। युवा ग्राहकों के लिए लग्जरी का मतलब केवल गाड़ी का मालिकाना हक नहीं बल्कि एक अनुभव है, जिसके लिए हम ऑडी आइस ड्राइव, ऑडी क्वात्रो ड्राइव्स और जर्नीज विद ऑडी जैसे एक्सक्लूसिव इवेंट्स आयोजित करते हैं। सवाल: भारत में लग्जरी EV के भविष्य को लेकर ऑडी की क्या सोच है? जवाब: हम ऑडी e-tron रेंज के साथ भारत में लग्जरी EV की क्रांति की अगुवाई कर रहे हैं। हमारा मानना है कि देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का भविष्य बेहद मजबूत है और हम ग्राहकों के लिए नई टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट्स लाना जारी रखेंगे। सवाल: छोटी कारों से लग्जरी कारों में अपग्रेड करने वाले ग्राहकों के लिए ऑडी के पास क्या विकल्प हैं? जवाब: आम गाड़ियों से लग्जरी कार पर आने वाले ग्राहक युवा, टेक-सैवी और समझदार हैं। इनके लिए हमारे पास ‘ऑडी अप्रूव्ड: प्लस’ (सर्टिफाइड प्री-ओन्ड कार्स) का एक बेहतरीन ऑप्शन है, जिससे वे गारंटी के साथ ऑडी परिवार में एंट्री कर सकते हैं। इसके अलावा ऑडी Q3, A4 और Q3 स्पोर्ट्सबैक जैसी गाड़ियां भी पहली बार लग्जरी कार खरीदने वालों के लिए परफेक्ट हैं। सवाल: अगले 12 से 18 महीनों में ऑडी इंडिया की मुख्य प्राथमिकताएं क्या होंगी? जवाब: हमारा मुख्य फोकस एक टिकाऊ और लाभदायक बिजनेस बनाने पर है, जिसके तहत हम नेटवर्क विस्तार, डिजिटल पहलों को बढ़ावा देने और एक मजबूत प्रोडक्ट पोर्टफोलियो बनाए रखने पर काम करेंगे। सवाल: क्या इनपुट कॉस्ट बढ़ने की वजह से ऑडी अपनी गाड़ियों की कीमतें बढ़ाने जा रही है? जवाब: गाड़ियों की कीमत तय करना लागत, विदेशी मुद्रा दरों और बाजार की स्थितियों पर निर्भर करता है। फिलहाल हमारे पास कीमतों में किसी बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं है, और कोई भी फैसला बाजार व ग्राहकों के हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। सवाल: छोटे शहरों में सर्विस और वर्कशॉप का नेटवर्क बढ़ाने के लिए ऑडी का क्या प्लान है? जवाब: देशभर में हमारे 70 से अधिक टचपॉइंट्स हैं, जिन्हें हम टियर-II और टियर-III शहरों में मांग के हिसाब से लगातार बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, ग्राहकों को दूर न जाना पड़े इसके लिए हम डिजिटल समाधानों, मोबाइल सर्विस की सुविधाओं और कस्टमर-सेंट्रिक सर्विस प्रोग्राम्स का सहारा ले रहे हैं।






