Salman Khan Alvira Khan Court Notice

. ये कहना है चंडीगढ़ के ज्वेलरी कारोबारी अरूण गुप्ता का, जिन्होंने चंडीगढ़ जिला कोर्ट से सलमान खान, उनकी बहन अलवीरा खान और कंपनी के पदाधिकारियों को नोटिस भिजवाया है। जिसमें कोर्ट ने इन सभी से 5 अक्टूबर को जवाब मांगा है। बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान व उनके पॉपुलर ब्रॉन्ड से जुड़े मामले पर कथित फ्रॉड के आरोपों के बाद दैनिक भास्कर ने कारोबारी अरूण गुप्ता से एक्सक्लूसिव बातचीत की। चंडीगढ़ के कारोबारी अरूण गुप्ता ने मनीमाजरा में यह आलीशान शोरूम खोला था, जिसकी एंट्रेस के ठीक सामने सलमान खान की फोटो लगाई गई थी। जिसमें उन्होंने ज्वेलरी शोरूम खोलने, सलमान से मुलाकात से लेकर पूरे मामले पर खुलकर बात की। कारोबारी ने क्या कहा, ये जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट कंपनी के 2 लोग आए, सलमान का नाम लिया अरुण गुप्ता ने कहा- स्टाइल एंड क्यूंटेंट ज्वेलरी प्राइवेट लिमिटेड के 2 लोग मेरे पास यहां आए थे। उन्होंने कहा कि हमारी ये फ्रेंचाइजी ले लो। बीइंग ह्यूमन ज्वेलरी की ये फर्स्ट फ्रेंचाइजी खुल रही है। हम ज्वेलरी वगैरह बनाते हैं। ये सलमान खान की कंपनी है। मुझे इन्वेस्टमेंट के बारे में बताया। हम मान गए। उनसे सारी बातचीत हो गई। इसके बाद हमने शोरूम खोल लिया। शोरूम खोलने से पहले उन्होंने मुझे ये भरोसा दिया था कि ओपनिंग के लिए सलमान खान खुद आएंगे। 3 नवंबर को शोरूम की ओपनिंग थी। सलमान नहीं आए, वीडियो भेज दिया, फिर मुंबई बुलाया अरुण गुप्ता ने कहा- ओपनिंग के दिन सलमान खान नहीं आए। उन्होंने एक दिन पहले बिग बॉस के सेट से अपना एक वीडियो भेज दिया। जिसमें हम सबका नाम लेकर सलमान ने कहा कि मैं बिग बॉस और भारत की शूटिंग में बिजी हूं। मैं अपने ब्रदर इन लॉ आयुष शर्मा को भेज रहा हूं। आयुष ओपनिंग करके चले गए। दिसंबर 2018 में उन्होंने मुझे मुंबई इन्वॉइट किया। मैं अपनी फैमिली के साथ बिग बॉस के सेट पर मुंबई गया। वहां मैं सलमान खान से मिला। हमारी फोटो हुई। हमने बिग बॉस की शूटिंग देखी। इसके बाद मैं वापस आ गया। सलमान खान के साथ कारोबारी अरूण गुप्ता।- फाइल फोटो ज्वेलरी की कंप्लेंट आई, सलमान को भी भेजी अरुण गुप्ता ने कहा– 2019 में मुझे प्रॉब्लम आने लगी। मेरे पास ज्वेलरी की 1-2 कंप्लेंट आई। मैंने दिक्कत को जल्दी दूर करने के लिए सीधे सलमान खान को पर्सनली कंप्लेंट भेजी लेकिन मुझे कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। मैं इंतजार करता रह गया। इसके बाद हमें न मैटीरियल आया और न ही पैकिंग से जुड़ा कोई सामान आया। कंपनी ने सारे ऑफिस क्लोज किए अरुण गुप्ता ने कहा- 2020 में इन्होंने मुंबई में अपने सारे के सारे ऑफिस क्लोज कर दिए। मैंने सोचा कि कहीं कोरोना की वजह से शिफ्टिंग कर रहे होंगे। मुझे पता नहीं था कि क्या है क्या नहीं। कंपनी ने मुझे कहा कि एक महीने के भीतर फ्रेंचाइजी के 10 और शोरूम खुलेंगे। आपकी ये पहली है। एक साल तक मुझे लटकाकर रखा। दिल्ली जाकर पता चला, कॉन्सेप्ट ही खत्म कर दिया अरुण गुप्ता ने कहा– 2021 में मैं बेटे के साथ दिल्ली गया। वहां एक पार्टी थी जो ज्वेलरी का काम करती थी। उनसे पूछने पर पता चला कि इन्होंने ये कॉसेप्ट ही खत्म कर दिया है। इन्होंने मुझे एक साल तक बिल्कुल अंधेरे में रखा। मेरे साथ फ्रॉड किया। मुझे बिल्कुल भी नहीं बताया गया कि बीइंग ह्यूमन का ज्वेलरी का कॉन्सेप्ट बिल्कुल ही खत्म हो गया। कारोबारी अरूण गुप्ता परिवार समेत मुंबई जाकर सलमान खान से मिले थे।- फाइल फोटो चंडीगढ़ SSP को कंप्लेंट दी, उन्होंने बंद कर दी अरुण गुप्ता ने कहा- मैं चंडीगढ़ आया, 12 अप्रैल 2021 को यहां मैंने SSP को कंप्लेंट दी। उसके बाद पुलिस ने उन्हें समन जारी किए। मैं चंडीगढ़ के SP केतन बंसल से मिलकर आया। 23 सितंबर 2021 को उन्होंने मुझे कहा कि ये कंप्लेंट फोर्जरी (फ्रॉड) की नहीं है। ये सिविल कोर्ट का मामला बनता है, हम इसे क्लोज कर रहे हैं। घर आते ही हार्ट अटैक हुआ, पेसमेकर डालना पड़ा अरुण गुप्ता ने कहा- इसके बाद मैं घर आया। उसी दिन जब कहीं से सुनवाई होती नहीं दिखी तो मुझे हार्ट अटैक आ गया। करीब 7-8 दिन मैं मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती रहा। मेरे पेसमेकर डाला गया। मेरी पत्नी की भी तबीयत बिगड़ गई। वह भी 4-5 दिन उसी अस्पताल में एडमिट रही। मेरा जितना पैसा था, सब लोन का था। मैंने रेंट भी पे करना था। सेलरी भी देनी थी। सलमान के ब्रदर इन लॉ आयुष शर्मा ने शोरूम का उद्घाटन किया था। – फाइल फोटो लोन पर सारी इन्वेस्टमेंट की थी अरुण गुप्ता ने कहा- जब मैं कंपनी को पेमेंट भेजता था, तब माल आता था। जितनी भी मैंने इन्वेस्टमेंट की, लोन के ऊपर सारा दरोमदार था। मैंने बेटे को काम खुलवाकर देना था। अब मेरे साथ ये सब हो गया। मैंने करीब 2-ढाई करोड़ रुपए का लोन लिया था। जब मैंने शोरूम लिया तो उसका किराया सवा लाख रुपए था। इसके अलावा 50-60 हजार सेलरी और बिजली-पानी का अलग से जाता था। आज भी किराया दे रहे हैं। रेंट भी बढ़कर ढ़ाई–3 लाख हो चुका है। हार्ट अटैक के बाद भी नहीं पूछा अरुण गुप्ता ने कहा- 2023 में हमने कोर्ट में केस किया। अब कोर्ट ने नोटिस के ऑर्डर दिए हैं। अब उन्होंने आकर अपना पक्ष देना है कि मैंने जो आरोप लगाए हैं वह सही हैं या गलत। कंपनी ने मुझसे आखिरी बार तब टाईअप किया था, जब मैंने पुलिस को कंप्लेंट दी थी। अरुण गुप्ता ने कहा- जब मुझे हार्ट अटैक आया तो उसके बाद न तो उन्होंने कोई संपर्क किया और न ही कोई बात पूछी। बहन अलवीरा के साथ सलमान खान, अलवीरा की बीइंग ह्यूमन की ज्वेलरी वाली फ्रेंचाइजी को चलाती थी।- फाइल फोटो। पेमेंट नहीं लौटाई, मैंने ज्वेलरी गलाकर बेटे का काम चालू कराया अरुण गुप्ता ने कहा कि मैं उन्हें कह रहा था कि जो भी मेरे पास माल पड़ा है, उसे वापस ले लो। मेरी पेमेंट लौटा दो और मेरा पीछा छोड़ो। उन्होंने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया। जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो मैंने बीइंग ह्यूमन वाली सारी ज्वेलरी गलाकर मेल्ट करा दी और बेटे का काम चालू कराया।
Tewolde Gebremariam Named Air India CEO

Hindi News Career Tewolde Gebremariam Named Air India CEO | Plastic Currency India 2027 12 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. टेवोल्डे गेब्रेमरियम एयरइंडिया के नए CEO और MD बने 5 अगस्त को एयर इंडिया ने टेवोल्डे गेब्रेमरियम को अपना नया CEO और MD अपॉइंट किया। टेवोल्डे ने एयर इंडिया के पूर्व CEO कैंपबेल विल्सन की जगह ली। उन्होंने 2024 में अपने पद से इस्तीफा दिया था। टेवोल्डे, इथियोपियन एयरलाइंस के ग्रुप CEO रहे हैं। उन्हें अफ्रीका के सबसे सफल एविएशन लीडर्स में से एक माना जाता है। टेवोल्डे ने 11 साल के कार्यकाल के दौरान इथियोपियन एयरलाइंस ने तेजी से विस्तार किया और अफ्रीका की सबसे बड़ी एयरलाइन बनाया। टेवोल्डे कार्यकाल में एयरलाइन का बेड़ा 33 एयरक्राफ्ट से बढ़कर 130 एयरक्राफ्ट हो गया। टेवोल्डे यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी कोविड-19 महामारी से पहले सालाना यात्रियों की संख्या 30 लाख से बढ़कर 1.2 करोड़ तक पहुंच गई। एयर इंडिया एयर इंडिया की स्थापना 15 अक्टूबर 1932 को हुई। 1953 में भारत सरकार ने इसका राष्ट्रीयकरण किया। जनवरी 2022 में एयर इंडिया टाटा समूह के स्वामित्व में आई है। 2. कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन का कार्यकाल बढ़ा 6 अगस्त को केंद्र सरकार ने कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन के कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ा दिया है। सोमनाथन अब 30 अगस्त 2027 तक कैबिनेट सचिव के पद पर रहेंगे। सोमनाथन 1987 बैच के तमिलनाडु कैडर के IAS ऑफिसर हैं। सोमनाथन का वर्तमान कार्यकाल 30 अगस्त 2026 को पूरा होना था। वे अगस्त 2024 में कैबिनेट सचिव बने थे। सोमनाथन ने पीएम कार्यालय में अतिरिक्त सचिव और संयुक्त सचिव के तौर पर भी काम किया है। 2011 से 2015 तक सोमनाथन वाशिंगटन डीसी में वर्ल्ड बैंक ग्रुप के में डायरेक्टर के तौर भी रहे। सोमनाथन के साथ ही केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन का कार्यकाल भी एक साल के लिए बढ़ाया गया है। वे 22 अगस्त 2027 तक पद पर रहेंगे। सोमनाथन अगस्त 2024 में कैबिनेट सचिव अपॉइंट हुए थे। 3. बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल 2026 पारित हुआ 5 अगस्त को लोकसभा ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल पारित किया। ये बिल पुराने बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 की जगह लेगा। अब इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में मौजूद बैंक डॉक्युमेंट्स को कोर्ट में सीधे पेश किया जा सकेगा। इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे गए बैंक रिकॉर्ड को कानूनी साक्ष्य के रूप में अधिक स्पष्ट मान्यता मिलेगी। इसका उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र में हो रहे टेक्नोलॉजी बदलावों के साथ कानूनों को अपडेट करना है। कानून में डिजिटल साइन और सर्वर डेटा को भी शामिल किया गया है। नए कानून से न्यायालयों और जांच एजेंसियों के लिए डिजिटल बैंक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने की प्रक्रिया सरल होगी। इस कानून से डिजिटल ट्रांजैक्शन, ऑनलाइन एंट्रीज, ई-स्टेटमेंट और वर्चुअल रिकॉर्ड्स को अब अदालत में सीधे एविडेंस (सबूत) के रूप में स्वीकार किया जाएगा। इससे साइबर क्राइम, ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड और वित्तीय घोटालों के मामलों में डिजिटल सबूतों की मदद से जांच एजेंसियों को आरोपियों के खिलाफ केस मजबूत करने में मदद मिलेगी। बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट 1891 में आया था, जो एक बैंकिंग कानून है। अदालतों में बैंक के रिकॉर्ड और प्रतियों को सबूत के रूप में पेश करने के नियम तय करता है। इसके तहत बैंकों को हर मामले में मूल कागजी बहियों या दस्तावेजों को अदालत में लाने की जरूरत नहीं होती थी। बल्कि कॉपी को ही असली सुबूत मान लिया जाता था। वहीं आज 90% से ज्यादा बैंकिंग लेनदेन डिजिटल जैसे UPI, IMPS, ई-बैंकिंग हो चुके हैं। नए बिल से लीगल फ्रेमवर्क को आधुनिक टेक्नोलॉजी के हिसाब से बनाया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिल को विचार और पास कराने के लिए सदन के सामने रखा, जिसे ध्वनिमत से पारित किया गया। 4. RBI 2027 में प्लास्टिक नोट लॉन्च करेगा 6 अगस्त को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जानकारी दी कि साल 2027 में पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोट अगले लॉन्च होंगे। RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी में इसकी जानकारी दी। अप्रैल-मई के बीच ये नोट जारी किये जाएंगे। शुरुआत में कम वैल्यू के पॉलीमर करेंसी नोट जारी किए जाएंगे। इनका मार्केट में सर्कुलेशन और इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है। 27 जुलाई को केंद्र सरकार ने 10, 20 रुपए तक के प्लास्टिक नोट की टेस्टिंग को मंजूरी दी। रिजर्व बैंक टोटल 200 करोड़ पॉलिमर यानी प्लास्टिक से बने नोट छापेगी। पायलट प्रोजेक्ट के तहत 3,000 करोड़ रुपए मूल्य के पॉलीमर बैंक नोट जारी किए जाएंगे। केंद्र सरकार ने ये साफ किया है कि फिलहाल कागजी नोटों को पूरी तरह बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। बता दें कि पॉलीमर बैंकनोट्स कागज के बजाय एक खास किस्म के प्लास्टिक मटेरियल यानी पॉलीमर सबस्ट्रेट पर छापे जाते हैं। ये छूने में तो सामान्य नोटों जैसे ही हल्के होते हैं, लेकिन पानी में भीगने पर भी नहीं गलते और लंबे समय तक चलते हैं। ये नोट पानी, धूल और गंदगी से खराब नहीं होते और आसानी से फटते नहीं है और लंबी उम्र तक चलते हैं। पॉलीमर शीट पर एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स आसानी से जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। प्लास्टिक नोटों का जीवनकाल कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा होता है और इन्हें नकली बनाना कठिन है। भारत ने 2012 में भी पॉलिमर नोट लाने की कोशिश की थी लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण योजना टल गई। ये ऐसे मुद्रा नोट होते हैं जो कागज के बजाय पॉलीमर नामक विशेष प्लास्टिक से बनाए जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश है जिसने 1988 में पॉलीमर बैंक नोट जारी किए। इसके बाद कई देशों ने इन्हें अपनाया। भारत में पहली बार जनवरी 1946 में ब्रिटिश काल/आजादी से ठीक पहले तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने ₹500, ₹1000 और ₹10,000 के बड़े नोटों को बंद कर दिया था। तब काले धन और युद्ध के दौरान हुई अवैध कमाई को बाहर निकालना इसका उद्देश्य है। स्पोर्ट्स (SPORTS) 5. CWG 2026 पदक विजेताओं का अभिनंदन और नकद पुरस्कार 5 अगस्त को खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीतने वावे एथलीटस को को सम्मानित किया। केंद्र सरकार ने खेल पुरस्कार पॉलिसी के तहत सभी
अमेरिका में पहली बार 'बर्थ टूरिज्म' पर रोक:यहां पैदा हुए विदेशियों के बच्चे को भी नागरिकता नहीं; ट्रम्प बोले- बर्थराइट सिटीजनशिप मजाक बन गई थी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर अमेरिका में जन्म लेने वाले लोगों को नागरिकता मिलने के दायरे को सीमित करने की कोशिश की है। राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने इमिग्रेशन) से जुड़े दो कार्यकारी आदेश साइन किए हैं। इनमें से एक आदेश अमेरिका में पैदा होने वाले उन लोगों की संख्या को सीमित करेगा, जो अमेरिकी नागरिकता पाने के पात्र हैं। ट्रम्प ने बताया कि दूसरा आदेश ‘बर्थ टूरिज्म’ पर लगाम लगाने के लिए है। इसके तहत उन विदेशी पर्यटकों पर वीजा प्रतिबंध बढ़ाए जाएंगे, जो अमेरिका में आकर बच्चे को जन्म देना चाहते हैं। इससे पहले बर्थराइट सिटीजनशिप को सीमित करने की कोशिश को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था, लेकिन अब वे दोबारा इसके लिए कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इन आदेशों के बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन ट्रम्प का मानना है कि उनके ये नए कदम संवैधानिक होंगे। जून में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था इससे पहले जून में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने बर्थराइट सिटीजनशिप को बरकरार रखा था। कोर्ट ने ट्रम्प के उन पिछले प्रयासों को खारिज कर दिया था, जिनमें उन्होंने यह घोषित करने की कोशिश की थी कि अमेरिका में अवैध-अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के बच्चे अमेरिकी नागरिक नहीं हैं। कोर्ट ने कहा था कि अमेरिका में गैर-कानूनी या अस्थायी रूप से मौजूद लोगों के बच्चे अपने-आप अमेरिकी नागरिकता पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने ‘यूनाइटेड स्टेट्स बनाम वोंग किम आर्क’ मामले में अपने पहले के फैसले का भी हवाला दिया और कहा कि विदेशी माता-पिता से अमेरिका में पैदा हुए बच्चे इसके हकदार हैं। कैसे मिला था बर्थराइट सिटीजनशिप का अधिकार व्हाइट हाउस के सलाहकार स्टीफन मिलर ने कहा कि ये एग्जीक्यूटिव एक्शन 14वें संशोधन के मूल मकसद पर आधारित हैं। अमेरिकी संविधान में किया गया 14वां संशोधन खास तौर पर गृह युद्ध के बाद इसलिए बनाया गया था ताकि यह पक्का किया जा सके कि गुलामों के बच्चे नागरिक बन सकें। इसका उद्देश्य हर विदेशी नागरिक के बच्चे को स्वतः नागरिकता देना नहीं था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, ऐसी नागरिकता के लिए अयोग्य लोगों की कैटेगरी का दायरा बढ़ाने के लिए कमांडर-इन-चीफ के तौर पर अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। बर्थराइट-बर्थ टूरिज्म पर नए आदेश का असर 2024 में बर्थ टूरिज्म से पैदा हुए बच्चों की संख्या 9600 थी ट्रम्प प्रशासन इसे बहुत बड़े खतरे के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन आधिकारिक आंकड़े कुछ और बताते हैं। माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट (MPI) के मुताबिक अमेरिका में हर साल जन्म लेने वाले बच्चों में से एक बहुत ही छोटा हिस्सा ‘बर्थ टूरिज्म’ से जुड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक 22,000 से 26,000 बच्चों के पेरेंट्स अमेरिकी नागरिकता पाने के मकसद से वहां पहुंचते हैं। 2024 के सरकारी आंकड़ों में विदेशी पते वाली मांओं के केवल 9,600 जन्म दर्ज किए गए थे।





