भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास:रूसी तेल खरीदने वाले 5 देशों पर कार्रवाई; 86 सांसदों ने पक्ष में वोट किया, 11 विरोध में

अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। बिल के मुताबिक भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। यह बिल रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के समर्थन से लाया गया। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। 23 जुलाई को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके तहत रूस के अधिकारियों, शैडो टैंकर बेड़े, केंद्रीय बैंक और सरकारी ऊर्जा परियोजनाओं पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। पहले बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। भारत ने पिछले महीने आधे से ज्यादा तेल रूस से खरीदा भारत ने जून 2026 में रूस से रिकॉर्ड 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो देश के कुल तेल आयात का 52.4% था। यानी पिछले महीने भारत में आयात होने वाले हर दो बैरल तेल में एक से ज्यादा बैरल रूस से आया। रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। मई के मुकाबले जून में रूस से तेल आयात में करीब 39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बना:सबसे ज्यादा LNG भी US से आ रही; कतर से सप्लाई 91% घटी

अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बन गया है। होर्मुज संकट के बाद भारत की जरूरत की लगभग 67% कुकिंग गैस यानी LPG अमेरिका से ही आ रही। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के कार्यक्रम में शुक्रवार को यह बात कही है। मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज स्ट्रैट में सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पॉलिसी में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। वहीं इक्विरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका कतर को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लायर भी हो गया है। मई से जुलाई 2026 के दौरान कतर से भारत को एलएनजी का इंपोर्ट 91% घटा है, जबकि अमेरिका से सप्लाई में 253% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मई-जुलाई में भारत ने मंगाया 7.08 मिलियन टन LNG इक्विरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, मई से जुलाई 2026 के तीन महीनों में भारत ने कुल 7.08 मिलियन टन (MT) LNG का इंपोर्ट किया। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 15% ज्यादा है। भारत का एलएनजी आयात अब कतर से कम होकर अमेरिका, अफ्रीका और गैर-कतरी मिडिल ईस्ट के सप्लायर्स की ओर तेजी से शिफ्ट हुआ है। ओमान से सप्लाई में 341% की सबसे तेज बढ़त मई-जुलाई की अवधि के दौरान अमेरिका ने 2.19 मिलियन टन एलएनजी सप्लाई की और भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया। इसके बाद नाइजीरिया 1.31 मिलियन टन के साथ दूसरे स्थान पर रहा। ओमान से सप्लाई में सबसे तेज 341% की ग्रोथ दर्ज की गई। कतर से सप्लाई गिरकर महज 0.23 मिलियन टन रह गई, जो साल-दर-साल 91% की गिरावट है। देश में गैस की कुल मांग 197 mmscmd पर पहुंची रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में नेचुरल गैस की खपत में सुधार हुआ है। जून महीने में कुल गैस मांग बढ़कर 197 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (mmscmd) हो गई, जो पिछले महीने की तुलना में 7% और पिछले साल से 2% ज्यादा है। पावर सेक्टर को छोड़कर गैस की मांग 176 mmscmd रही, जो संकट से पहले के स्तर के करीब है। एलएनजी की खपत मई से 13% और पिछले साल से 10% बढ़कर 110 mmscmd हो गई, जबकि घरेलू गैस की खपत 87 mmscmd पर स्थिर रही। इसके साथ ही भारत की गैस आयात निर्भरता 56% दर्ज की गई। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर सबसे बड़ा ग्राहक क्षेत्रवार खपत की बात करें तो 58 mmscmd मांग के साथ सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) सबसे बड़ा ग्राहक रहा। इसके बाद फर्टिलाइजर सेक्टर में 55 mmscmd और अन्य उद्योगों में 41 mmscmd गैस की खपत हुई। पावर सेक्टर से गैस की मांग सुधरकर 21 mmscmd हुई, रिफाइनरी सेक्टर ने 15 mmscmd की खपत की और पेट्रोकेमिकल सेक्टर की मांग 7 mmscmd रही, हालांकि यह पिछले साल के मुकाबले अब भी 48% कम है। ग्लोबल मार्केट में स्पॉट दाम $20 के पार, जुलाई में भी मजबूत रहेगी मांग ग्लोबल लेवल पर ऊंची कीमतों के बावजूद भारत का एलएनजी आयात मजबूत रहा। मई में 2.4 मिलियन टन और जून में 2.3 मिलियन टन एलएनजी बर्थ अराइवल्स दर्ज किए गए, जिससे वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कुल अराइवल्स 6.2 मिलियन टन रहा। जुलाई में प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार 2.1 मिलियन टन अराइवल्स हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया कि चीन का एलएनजी आयात मौसमी औसत से ऊपर चला गया है। यूरोप में सर्दियों से पहले गैस स्टोरेज 58% पर है जो ऐतिहासिक औसत से नीचे है, जबकि एशियाई स्पॉट एलएनजी की कीमतें 20 डॉलर प्रति mmbtu के ऊपर बनी हुई हैं। इक्विरस के अनुसार, जुलाई में भारत की गैस मांग मजबूत रहेगी, जबकि अगस्त में मोरबी और मौसमी कारणों से इसमें थोड़ी नरमी आ सकती है। होर्मुज संकट के बावजूद देश का एक भी पेट्रोल पंप खाली नहीं रहा: हरदीप सिंह पुरी केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने CII के कार्यक्रम में कहा कि मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज बंद होने के बावजूद भारत ने देश में एलपीजी या क्रूड ऑयल की कोई किल्लत नहीं होने दी। उन्होंने बताया कि युद्ध शुरू होने से पहले भारत अपना 50% क्रूड ऑयल, 90% एलपीजी और 60% अन्य गैस इसी रूट से मंगाता था। सप्लाई बाधित होते ही भारत ने तुरंत अपने इंपोर्ट सोर्स को बढ़ाया और घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाया। मंत्री ने कहा कि मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि देश के 1.07 लाख से अधिक फ्यूल आउटलेट्स में से एक भी पंप सूखा नहीं रहा। 2014 में देश में केवल 52,000 आउटलेट्स थे। क्रूड सप्लाई सोर्स को 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक फैलाया भारत ने अपने क्रूड सप्लाई सोर्स को 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक फैला दिया है और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन के दायरे को 55 भौगोलिक क्षेत्रों से बढ़ाकर 309 तक पहुंचा दिया है। भारत के पास हमेशा लगभग 60 दिनों का क्रूड ऑयल कवर मौजूद रहा। समुद्र मंथन प्रोग्राम: गहरे समुद्र में तेल-गैस खोज के लिए ₹84,000 करोड़ की योजना आपातकालीन सुरक्षा के साथ-साथ लंबे समय के लिए सरकार ने ₹84,000 करोड़ के समुद्र मंथन प्रोग्राम को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य गहरे समुद्र में तेल और नेचुरल गैस की खोज को बढ़ावा देना है। हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि ड्रिलिंग का काम सरकार नहीं बल्कि प्राइवेट प्लेयर्स करेंगे। जोखिम भरे ऑफशोर एक्सप्लोरेशन में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रति कुआं ₹650 करोड़ तक या ड्रिलिंग लागत का 50% तक आर्थिक सहयोग प्रदान करेगी। ये खबर भी पढ़ें… सरकार बोली– Meta डीपफेक और प्रोपेगैंडा कंटेंट तेजी से हटाए: कंपनी ने माना उनके सिस्टम में कमियां, काम के तरीके में बदलाव की जरूरत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा को जरूरी बदलाव करने और कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी से एक डिटेल्ड रोडमैप भी मांगा है। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बना:सबसे ज्यादा LNG भी US से आ रही; कतर से सप्लाई 91% घटी

अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बन गया है। होर्मुज संकट के बाद भारत की जरूरत की लगभग 67% कुकिंग गैस यानी LPG अमेरिका से ही आ रही। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के कार्यक्रम में शुक्रवार को यह बात कही है। मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज स्ट्रैट में सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पॉलिसी में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। वहीं इक्विरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका कतर को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लायर भी हो गया है। मई से जुलाई 2026 के दौरान कतर से भारत को एलएनजी का इंपोर्ट 91% घटा है, जबकि अमेरिका से सप्लाई में 253% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मई-जुलाई में भारत ने मंगाया 7.08 मिलियन टन LNG इक्विरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, मई से जुलाई 2026 के तीन महीनों में भारत ने कुल 7.08 मिलियन टन (MT) LNG का इंपोर्ट किया। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 15% ज्यादा है। भारत का एलएनजी आयात अब कतर से कम होकर अमेरिका, अफ्रीका और गैर-कतरी मिडिल ईस्ट के सप्लायर्स की ओर तेजी से शिफ्ट हुआ है। ओमान से सप्लाई में 341% की सबसे तेज बढ़त मई-जुलाई की अवधि के दौरान अमेरिका ने 2.19 मिलियन टन एलएनजी सप्लाई की और भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया। इसके बाद नाइजीरिया 1.31 मिलियन टन के साथ दूसरे स्थान पर रहा। ओमान से सप्लाई में सबसे तेज 341% की ग्रोथ दर्ज की गई। कतर से सप्लाई गिरकर महज 0.23 मिलियन टन रह गई, जो साल-दर-साल 91% की गिरावट है। देश में गैस की कुल मांग 197 mmscmd पर पहुंची रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में नेचुरल गैस की खपत में सुधार हुआ है। जून महीने में कुल गैस मांग बढ़कर 197 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (mmscmd) हो गई, जो पिछले महीने की तुलना में 7% और पिछले साल से 2% ज्यादा है। पावर सेक्टर को छोड़कर गैस की मांग 176 mmscmd रही, जो संकट से पहले के स्तर के करीब है। एलएनजी की खपत मई से 13% और पिछले साल से 10% बढ़कर 110 mmscmd हो गई, जबकि घरेलू गैस की खपत 87 mmscmd पर स्थिर रही। इसके साथ ही भारत की गैस आयात निर्भरता 56% दर्ज की गई। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर सबसे बड़ा ग्राहक क्षेत्रवार खपत की बात करें तो 58 mmscmd मांग के साथ सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) सबसे बड़ा ग्राहक रहा। इसके बाद फर्टिलाइजर सेक्टर में 55 mmscmd और अन्य उद्योगों में 41 mmscmd गैस की खपत हुई। पावर सेक्टर से गैस की मांग सुधरकर 21 mmscmd हुई, रिफाइनरी सेक्टर ने 15 mmscmd की खपत की और पेट्रोकेमिकल सेक्टर की मांग 7 mmscmd रही, हालांकि यह पिछले साल के मुकाबले अब भी 48% कम है। ग्लोबल मार्केट में स्पॉट दाम $20 के पार, जुलाई में भी मजबूत रहेगी मांग ग्लोबल लेवल पर ऊंची कीमतों के बावजूद भारत का एलएनजी आयात मजबूत रहा। मई में 2.4 मिलियन टन और जून में 2.3 मिलियन टन एलएनजी बर्थ अराइवल्स दर्ज किए गए, जिससे वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कुल अराइवल्स 6.2 मिलियन टन रहा। जुलाई में प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार 2.1 मिलियन टन अराइवल्स हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया कि चीन का एलएनजी आयात मौसमी औसत से ऊपर चला गया है। यूरोप में सर्दियों से पहले गैस स्टोरेज 58% पर है जो ऐतिहासिक औसत से नीचे है, जबकि एशियाई स्पॉट एलएनजी की कीमतें 20 डॉलर प्रति mmbtu के ऊपर बनी हुई हैं। इक्विरस के अनुसार, जुलाई में भारत की गैस मांग मजबूत रहेगी, जबकि अगस्त में मोरबी और मौसमी कारणों से इसमें थोड़ी नरमी आ सकती है। होर्मुज संकट के बावजूद देश का एक भी पेट्रोल पंप खाली नहीं रहा: हरदीप सिंह पुरी केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने CII के कार्यक्रम में कहा कि मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज बंद होने के बावजूद भारत ने देश में एलपीजी या क्रूड ऑयल की कोई किल्लत नहीं होने दी। उन्होंने बताया कि युद्ध शुरू होने से पहले भारत अपना 50% क्रूड ऑयल, 90% एलपीजी और 60% अन्य गैस इसी रूट से मंगाता था। सप्लाई बाधित होते ही भारत ने तुरंत अपने इंपोर्ट सोर्स को बढ़ाया और घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाया। मंत्री ने कहा कि मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि देश के 1.07 लाख से अधिक फ्यूल आउटलेट्स में से एक भी पंप सूखा नहीं रहा। 2014 में देश में केवल 52,000 आउटलेट्स थे। क्रूड सप्लाई सोर्स को 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक फैलाया भारत ने अपने क्रूड सप्लाई सोर्स को 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक फैला दिया है और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन के दायरे को 55 भौगोलिक क्षेत्रों से बढ़ाकर 309 तक पहुंचा दिया है। भारत के पास हमेशा लगभग 60 दिनों का क्रूड ऑयल कवर मौजूद रहा। समुद्र मंथन प्रोग्राम: गहरे समुद्र में तेल-गैस खोज के लिए ₹84,000 करोड़ की योजना आपातकालीन सुरक्षा के साथ-साथ लंबे समय के लिए सरकार ने ₹84,000 करोड़ के समुद्र मंथन प्रोग्राम को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य गहरे समुद्र में तेल और नेचुरल गैस की खोज को बढ़ावा देना है। हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि ड्रिलिंग का काम सरकार नहीं बल्कि प्राइवेट प्लेयर्स करेंगे। जोखिम भरे ऑफशोर एक्सप्लोरेशन में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रति कुआं ₹650 करोड़ तक या ड्रिलिंग लागत का 50% तक आर्थिक सहयोग प्रदान करेगी। ये खबर भी पढ़ें… सरकार बोली– Meta डीपफेक और प्रोपेगैंडा कंटेंट तेजी से हटाए: कंपनी ने माना उनके सिस्टम में कमियां, काम के तरीके में बदलाव की जरूरत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा को जरूरी बदलाव करने और कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी से एक डिटेल्ड रोडमैप भी मांगा है। पूरी खबर पढ़ें…
जापान में 200kmph की रफ्तार से बढ़ रहा डॉल्फिन तूफान:2.6 लाख लोगों को घर छोड़ने का आदेश; टोयोटा ने 9 फैक्ट्रियों में काम रोका

जापान की ओर करीब 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से डॉल्फिन तूफान बढ़ रहा है। इसकी वजह से 2.6 लाख लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए गए हैं। जबकि 500 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। हालात को देखते हुए टोयोटा ने भी अपनी 9 फैक्ट्रियों में काम रोक दिया है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, डॉल्फिन कैटेगरी-1 का तूफान है। इसकी लगातार हवा की रफ्तार 144 किमी प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 198 किमी प्रति घंटा तक पहुंच रही है। यह तूफान क्यूशू और ओकिनावा के बीच स्थित द्वीपों की ओर बढ़ रहा है। ओकिनावा द्वीप पर सबसे ज्यादा असर तूफान की वजह से जापान का ओकिनावा द्वीप बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वहां छुट्टियां मनाने गए कई हांगकांग के पर्यटक उड़ानें रद्द होने के कारण फंस गए हैं। उन्हें अब जरूरी सामान की कमी, बिजली कटने और पानी की सप्लाई बाधित होने की आशंका का सामना करना पड़ रहा है। हांगकांग से जुड़े ट्रैवल सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा की गई तस्वीरों में सुपरमार्केट की ब्रेड की अलमारियां खाली दिखाई दे रही हैं। वहीं, कई इलाकों में मूसलाधार बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। रविवार को चीन पहुंच सकता है तूफान डॉल्फिन तूफान तेजी से चीन के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार तक यह तूफान तट से करीब 820 किलोमीटर दूर था। इसके रविवार दोपहर से सोमवार सुबह के बीच झेजियांग और उत्तरी फुजियान के बीच कहीं टकराने की आशंका है। मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी रखा है, जो चार स्तरों वाली चेतावनी प्रणाली में तीसरा सबसे गंभीर स्तर है। झेजियांग, फुजियान और ताइवान में तेज हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम वैज्ञानिक शेन यूयांग के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तक इस तूफान का दायरा झेजियांग प्रांत से करीब 13 गुना बड़ा हो चुका था। झेजियांग का आकार भारत के बिहार राज्य के बराबर है। मौसम विभाग ने कहा कि तूफान का दायरा बहुत बड़ा है, इसलिए सिर्फ तटीय नहीं बल्कि अंदरूनी इलाकों के लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। चीन में AI और ड्रोन की मदद से बचाव कार्य फिलहाल यह साफ नहीं है कि चीन में टकराने के बाद यह किस दिशा में जाएगा। तूफान के 48 घंटे के अलर्ट जोन में पहुंचने के बाद चीन ने तैयारियां और तेज कर दी हैं। सरकारी टीवी सीसीटीवी के मुताबिक, नेशनल मरीन एनवायरनमेंटल फोरकास्टिंग सेंटर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम तैयार किया है, जो अगले 240 घंटे (10 दिन) तक तूफान की दिशा, ताकत और कहां टकराएगा, इसका अनुमान लगा सकता है। इसके साथ ही ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
जापान में 200kmph की रफ्तार से बढ़ रहा डॉल्फिन तूफान:2.6 लाख लोगों को घर छोड़ने का आदेश; टोयोटा ने 9 फैक्ट्रियों में काम रोका

जापान की ओर करीब 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से डॉल्फिन तूफान बढ़ रहा है। इसकी वजह से 2.6 लाख लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए गए हैं। जबकि 500 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। हालात को देखते हुए टोयोटा ने भी अपनी 9 फैक्ट्रियों में काम रोक दिया है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, डॉल्फिन कैटेगरी-1 का तूफान है। इसकी लगातार हवा की रफ्तार 144 किमी प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 198 किमी प्रति घंटा तक पहुंच रही है। यह तूफान क्यूशू और ओकिनावा के बीच स्थित द्वीपों की ओर बढ़ रहा है। ओकिनावा द्वीप पर सबसे ज्यादा असर तूफान की वजह से जापान का ओकिनावा द्वीप बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वहां छुट्टियां मनाने गए कई हांगकांग के पर्यटक उड़ानें रद्द होने के कारण फंस गए हैं। उन्हें अब जरूरी सामान की कमी, बिजली कटने और पानी की सप्लाई बाधित होने की आशंका का सामना करना पड़ रहा है। हांगकांग से जुड़े ट्रैवल सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा की गई तस्वीरों में सुपरमार्केट की ब्रेड की अलमारियां खाली दिखाई दे रही हैं। वहीं, कई इलाकों में मूसलाधार बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। रविवार को चीन पहुंच सकता है तूफान डॉल्फिन तूफान तेजी से चीन के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार तक यह तूफान तट से करीब 820 किलोमीटर दूर था। इसके रविवार दोपहर से सोमवार सुबह के बीच झेजियांग और उत्तरी फुजियान के बीच कहीं टकराने की आशंका है। मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी रखा है, जो चार स्तरों वाली चेतावनी प्रणाली में तीसरा सबसे गंभीर स्तर है। झेजियांग, फुजियान और ताइवान में तेज हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम वैज्ञानिक शेन यूयांग के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तक इस तूफान का दायरा झेजियांग प्रांत से करीब 13 गुना बड़ा हो चुका था। झेजियांग का आकार भारत के बिहार राज्य के बराबर है। मौसम विभाग ने कहा कि तूफान का दायरा बहुत बड़ा है, इसलिए सिर्फ तटीय नहीं बल्कि अंदरूनी इलाकों के लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। चीन में AI और ड्रोन की मदद से बचाव कार्य फिलहाल यह साफ नहीं है कि चीन में टकराने के बाद यह किस दिशा में जाएगा। तूफान के 48 घंटे के अलर्ट जोन में पहुंचने के बाद चीन ने तैयारियां और तेज कर दी हैं। सरकारी टीवी सीसीटीवी के मुताबिक, नेशनल मरीन एनवायरनमेंटल फोरकास्टिंग सेंटर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम तैयार किया है, जो अगले 240 घंटे (10 दिन) तक तूफान की दिशा, ताकत और कहां टकराएगा, इसका अनुमान लगा सकता है। इसके साथ ही ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जापान और चीन में बार-बार टाइफून क्यों आते हैं? 1. भूमध्य रेखा के पास और उत्तर में स्थित होना पश्चिमी प्रशांत महासागर में हर साल सबसे ज्यादा 25 से 30 तूफान आते हैं। यह दुनिया भर में आने वाले कुल तूफानों का लगभग 30% है। इसकी वजह इस इलाके का भूमध्य रेखा के पास (उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में) स्थित होना है। पृथ्वी के घूमने के कारण यहां हवाओं को गोल घुमाने वाला बल (कोरियोलिस इफेक्ट) बहुत मजबूत होता है। तूफान बनने के बाद ये हवाओं के बहाव के साथ जापान, ताइवान, चीन, कोरिया और फिलीपींस की तरफ बढ़ते हैं। यही वजह है कि इन देशों में सबसे ज्यादा तूफान आते हैं। 2. समुद्र का तेजी से गर्म होना टाइफून बनने और मजबूत होने की सबसे बड़ी वजह गर्म समुद्र है। जब समुद्र की सतह का तापमान बढ़ता है, तो पानी तेजी से भाप बनकर ऊपर उठता है। यह भाप तूफान के लिए ईंधन का काम करती है, जिससे हवाएं और बारिश दोनों बेहद तेज हो जाती हैं। 1901 में दुनिया भर के महासागरों की सतह का औसत तापमान लगभग 15.2°C से 15.3°C था। बीते कुछ साल में यह औसतन वैश्विक समुद्र सतह तापमान 21.1°C को पार कर गया है, जो इतिहास में सबसे ज्यादा है।
DC Movie Review | Lokesh Kanagaraj Acting Performance Action Style Film

4 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी कॉपी लिंक हर खूबसूरत दिखने वाली फिल्म अच्छी हो, यह जरूरी नहीं। कुछ फिल्में अपने शानदार कैमरा वर्क, दमदार एक्शन और शानदार संगीत से शुरुआत में प्रभावित तो करती हैं, लेकिन जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उनका जादू उतरने लगता है। डीसी भी ऐसी ही फिल्म है। यहां स्टाइल भरपूर है, हिंसा भरपूर है, लेकिन दिल को छू लेने वाली कहानी और किरदारों का भावनात्मक सफर कहीं पीछे छूट जाता है। इस फिल्म की लेंथ 2 घंटा 22 मिनट है। दैनिक भास्कर ने इस फिल्म को 5 में से 2 स्टार की रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी कैसी है? कहानी देवदास (लोकेश कनगराज) की है, जो अपराध की दुनिया का बड़ा नाम है और पुलिस से बचता फिर रहा है। एक हादसा उसकी जिंदगी बदल देता है और इसी दौरान उसकी मुलाकात चंद्रा (वामिका गब्बी) से होती है। चंद्रा बचपन से ही शोषण और हिंसा का शिकार रही है और अब उसकी जिंदगी में बचा ही क्या है, इसका जवाब वह खुद भी नहीं जानती। दो टूटे हुए लोग एक दूसरे का सहारा बनते हैं और फिर शुरू होती है खून, बदले और गोलियों से भरी लड़ाई। बीच में पार्वती (संजना कृष्णमूर्ति) की एंट्री होती है। शुरुआत में लगता है कि उनका किरदार कहानी की दिशा बदल देगा, लेकिन कुछ ही देर बाद वह सिर्फ एक अधूरी संभावना बनकर रह जाता है। पहला हिस्सा रहस्य और माहौल बनाने में सफल रहता है, लेकिन दूसरे हिस्से में फिल्म एक ही तरह के एक्शन और हिंसा को बार बार दोहराती रहती है। गोलियां चलती रहती हैं, लोग मरते रहते हैं, लेकिन कहानी वहीं की वहीं खड़ी नजर आती है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? मुख्य अभिनेता के तौर पर लोकेश कनगराज उम्मीद से बेहतर साबित होते हैं। अभिनय में अनुभव की कमी कहीं कहीं दिखती है, लेकिन किरदार को निभाने की उनकी ईमानदार कोशिश साफ नजर आती है। कम संवादों में भी वह चेहरे के भाव से असर छोड़ने की कोशिश करते हैं। वामिका गब्बी फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी हैं। दर्द, गुस्सा और बेबसी को उन्होंने बेहद सहज तरीके से पर्दे पर उतारा है। उनका किरदार सबसे ज्यादा याद रह जाता है। संजना कृष्णमूर्ति को जितनी अहमियत के साथ पेश किया जाता है, पटकथा उन्हें उतना ही जल्दी भूल जाती है। बाकी कलाकार अपने हिस्से का काम ठीक करते हैं, लेकिन किसी को भी यादगार बनने का मौका नहीं मिलता। निर्देशन और तकनीकी पक्ष अरुण मथेश्वरन की सबसे बड़ी ताकत हमेशा उनका विजुअल ट्रीटमेंट रहा है और यहां भी वही नजर आता है। हर फ्रेम बेहद खूबसूरती से रचा गया है। लाल और नीले रंग का इस्तेमाल सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि किरदारों की मानसिक स्थिति दिखाने के लिए किया गया है। लेकिन निर्देशन वहीं कमजोर पड़ जाता है जहां कहानी को भावनाओं की जरूरत होती है। फिल्म लगातार यह बताती रहती है कि किरदार टूटे हुए हैं, लेकिन दर्शक कभी उनके दर्द से जुड़ नहीं पाता। दूसरे हिस्से में एक्शन इतना ज्यादा हो जाता है कि कुछ देर बाद उसका असर ही खत्म होने लगता है। कैमरा वर्क बेहतरीन है। कई दृश्य किसी पेंटिंग जैसे लगते हैं। प्रोडक्शन डिजाइन और लोकेशन फिल्म को अलग पहचान देते हैं। संपादन भी तेज है, लेकिन मजबूत पटकथा के बिना तकनीकी चमक ज्यादा देर तक काम नहीं आती। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? अनिरुद्ध रविचंदर का संगीत फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। कई साधारण दृश्य भी उनके पृष्ठभूमि संगीत की वजह से बड़े और प्रभावशाली लगते हैं। एक्शन दृश्यों में उनका संगीत अलग ही रोमांच पैदा करता है। अफसोस, पटकथा उस स्तर का साथ नहीं दे पाती। फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं? डीसी ऐसी फिल्म है जो आंखों को प्रभावित करती है, कानों को रोमांचित करती है, लेकिन दिल तक नहीं पहुंच पाती। लोकेश कनगराज अभिनय में अच्छी शुरुआत करते हैं, वामिका गब्बी शानदार काम करती हैं और अनिरुद्ध रविचंदर का संगीत फिल्म को कई बार संभाल लेता है। लेकिन कमजोर पटकथा, दोहराव से भरा दूसरा हिस्सा और किरदारों से भावनात्मक दूरी इसे औसत अनुभव बनाकर छोड़ देती है। अगर आप सिर्फ स्टाइलिश एक्शन और शानदार विजुअल्स के लिए फिल्म देखना चाहते हैं तो शायद निराश नहीं होंगे। लेकिन मजबूत कहानी और यादगार भावनाओं की उम्मीद लेकर जाएंगे तो यह फिल्म अधूरी सी लगेगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
DC Movie Review | Lokesh Kanagaraj Acting Performance Action Style Film

20 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी कॉपी लिंक हर खूबसूरत दिखने वाली फिल्म अच्छी हो, यह जरूरी नहीं। कुछ फिल्में अपने शानदार कैमरा वर्क, दमदार एक्शन और शानदार संगीत से शुरुआत में प्रभावित तो करती हैं, लेकिन जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उनका जादू उतरने लगता है। डीसी भी ऐसी ही फिल्म है। यहां स्टाइल भरपूर है, हिंसा भरपूर है, लेकिन दिल को छू लेने वाली कहानी और किरदारों का भावनात्मक सफर कहीं पीछे छूट जाता है। इस फिल्म की लेंथ 2 घंटा 22 मिनट है। दैनिक भास्कर ने इस फिल्म को 5 में से 2 स्टार की रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी कैसी है? कहानी देवदास (लोकेश कनगराज) की है, जो अपराध की दुनिया का बड़ा नाम है और पुलिस से बचता फिर रहा है। एक हादसा उसकी जिंदगी बदल देता है और इसी दौरान उसकी मुलाकात चंद्रा (वामिका गब्बी) से होती है। चंद्रा बचपन से ही शोषण और हिंसा का शिकार रही है और अब उसकी जिंदगी में बचा ही क्या है, इसका जवाब वह खुद भी नहीं जानती। दो टूटे हुए लोग एक दूसरे का सहारा बनते हैं और फिर शुरू होती है खून, बदले और गोलियों से भरी लड़ाई। बीच में पार्वती (संजना कृष्णमूर्ति) की एंट्री होती है। शुरुआत में लगता है कि उनका किरदार कहानी की दिशा बदल देगा, लेकिन कुछ ही देर बाद वह सिर्फ एक अधूरी संभावना बनकर रह जाता है। पहला हिस्सा रहस्य और माहौल बनाने में सफल रहता है, लेकिन दूसरे हिस्से में फिल्म एक ही तरह के एक्शन और हिंसा को बार बार दोहराती रहती है। गोलियां चलती रहती हैं, लोग मरते रहते हैं, लेकिन कहानी वहीं की वहीं खड़ी नजर आती है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? मुख्य अभिनेता के तौर पर लोकेश कनगराज उम्मीद से बेहतर साबित होते हैं। अभिनय में अनुभव की कमी कहीं कहीं दिखती है, लेकिन किरदार को निभाने की उनकी ईमानदार कोशिश साफ नजर आती है। कम संवादों में भी वह चेहरे के भाव से असर छोड़ने की कोशिश करते हैं। वामिका गब्बी फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी हैं। दर्द, गुस्सा और बेबसी को उन्होंने बेहद सहज तरीके से पर्दे पर उतारा है। उनका किरदार सबसे ज्यादा याद रह जाता है। संजना कृष्णमूर्ति को जितनी अहमियत के साथ पेश किया जाता है, पटकथा उन्हें उतना ही जल्दी भूल जाती है। बाकी कलाकार अपने हिस्से का काम ठीक करते हैं, लेकिन किसी को भी यादगार बनने का मौका नहीं मिलता। निर्देशन और तकनीकी पक्ष अरुण मथेश्वरन की सबसे बड़ी ताकत हमेशा उनका विजुअल ट्रीटमेंट रहा है और यहां भी वही नजर आता है। हर फ्रेम बेहद खूबसूरती से रचा गया है। लाल और नीले रंग का इस्तेमाल सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि किरदारों की मानसिक स्थिति दिखाने के लिए किया गया है। लेकिन निर्देशन वहीं कमजोर पड़ जाता है जहां कहानी को भावनाओं की जरूरत होती है। फिल्म लगातार यह बताती रहती है कि किरदार टूटे हुए हैं, लेकिन दर्शक कभी उनके दर्द से जुड़ नहीं पाता। दूसरे हिस्से में एक्शन इतना ज्यादा हो जाता है कि कुछ देर बाद उसका असर ही खत्म होने लगता है। कैमरा वर्क बेहतरीन है। कई दृश्य किसी पेंटिंग जैसे लगते हैं। प्रोडक्शन डिजाइन और लोकेशन फिल्म को अलग पहचान देते हैं। संपादन भी तेज है, लेकिन मजबूत पटकथा के बिना तकनीकी चमक ज्यादा देर तक काम नहीं आती। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? अनिरुद्ध रविचंदर का संगीत फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। कई साधारण दृश्य भी उनके पृष्ठभूमि संगीत की वजह से बड़े और प्रभावशाली लगते हैं। एक्शन दृश्यों में उनका संगीत अलग ही रोमांच पैदा करता है। अफसोस, पटकथा उस स्तर का साथ नहीं दे पाती। फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं? डीसी ऐसी फिल्म है जो आंखों को प्रभावित करती है, कानों को रोमांचित करती है, लेकिन दिल तक नहीं पहुंच पाती। लोकेश कनगराज अभिनय में अच्छी शुरुआत करते हैं, वामिका गब्बी शानदार काम करती हैं और अनिरुद्ध रविचंदर का संगीत फिल्म को कई बार संभाल लेता है। लेकिन कमजोर पटकथा, दोहराव से भरा दूसरा हिस्सा और किरदारों से भावनात्मक दूरी इसे औसत अनुभव बनाकर छोड़ देती है। अगर आप सिर्फ स्टाइलिश एक्शन और शानदार विजुअल्स के लिए फिल्म देखना चाहते हैं तो शायद निराश नहीं होंगे। लेकिन मजबूत कहानी और यादगार भावनाओं की उम्मीद लेकर जाएंगे तो यह फिल्म अधूरी सी लगेगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
MeitY Directs Meta: Roadmap for Deepfake & Propaganda Control

Hindi News Business MeitY Directs Meta: Roadmap For Deepfake & Propaganda Control | 2026 Update नई दिल्ली11 मिनट पहले कॉपी लिंक सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा को अपने एल्गोरिदम में जरूरी बदलाव करने और कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कंपनी से एक डिटेल्ड कम्प्लायंस रोडमैप भी मांगा है। इस रोडमैप में कंपनी को यह स्पष्ट करना होगा कि वह अपने प्लेटफॉर्म्स से प्रोपेगैंडा, डीपफेक और अवैध कंटेंट को वायरल होने से रोकने के लिए क्या कदम उठाने जा रही है। यह निर्देश IT मिनिस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों और मेटा के प्रतिनिधियों के बीच हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दिए गए। बैठक में मेटा की टेक्निकल टीम ने नुकसानदेह ऑनलाइन कंटेंट से निपटने के लिए अपने मौजूदा सिस्टम्स और जारी प्रयासों पर एक प्रेजेंटेशन भी पेश किया। सरकार के निर्देशों की 3 प्रमुख बातें एल्गोरिदम में बदलाव: सरकार ने मेटा को अपने रिकमेंडेशन एल्गोरिदम में ऐसे बदलाव करने को कहा है, जिससे प्रोपेगैंडा, डीपफेक, मॉर्फ्ड इमेज और किसी भी तरह के हेरफेर किए गए कंटेंट की रीच को सीमित किया जा सके। डेटा लोकलाइजेशन: कंपनी को भारत के डेटा लोकलाइजेशन नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। कंटेंट तुरंत हटाना: अधिकृत सरकारी एजेंसियों द्वारा फ्लैग किए गए आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने की प्रोसेस को तेज करने के लिए कहा गया है। मेटा को सरकारी विभागों के साथ मिलकर काम करना होगा केंद्र सरकार ने मेटा से कहा है कि वह भारत सरकार के सभी विभागों की क्विक रिस्पॉन्स टीम्स (QRTs) के साथ नजदीकी तालमेल स्थापित करें और उन्हें मिलकर काम करना होगा। इस कदम का मकसद डीपफेक वीडियो, एडिटेड तस्वीरों और भ्रामक कंटेंट की रियल-टाइम में तेजी से पहचान करना और उन्हें तुरंत हटाना सुनिश्चित करना है। इससे झूठी और नुकसानदेह जानकारियों को तेजी से वायरल होने से रोका जा सकेगा। मेटा ने स्वीकार कीं अपने सिस्टम की कमियां सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब इसके कुछ ही घंटे पहले मेटा ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ चर्चा के दौरान अपने एल्गोरिदम सिस्टम में कमियां होने की बात स्वीकार की थी। बातचीत के दौरान कंपनी के रिकमेंडेशन एल्गोरिदम में मौजूद गैप्स और भारतीय कानूनों के पालन से जुड़े मुद्दों पर मुख्य रूप से फोकस किया गया। मेटा की ग्लोबल टीम भारत में ही रुककर करेगी चर्चा सरकार की चिंताओं और तकनीकी पहलुओं को सुलझाने के लिए मेटा की ग्लोबल टेक्निकल टीम भारत में ही रुककर आगे की बैठकों में हिस्सा लेगी। आने वाले दिनों में IT मिनिस्ट्री के साथ कुछ और दौर की चर्चाएं होनी तय हैं। जवाबदेही और AI तकनीक पर सरकार का रुख बैठक का मुख्य फोकस डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करना और सरकारी एजेंसियों व मेटा के बीच सहयोग को बढ़ाना था। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए फर्जी व भ्रामक कंटेंट बनाने की बढ़ती घटनाओं पर सरकार ने गहरी चिंता जताई है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को एआई-जनरेटेड और मैनिपुलेटेड कंटेंट रोकने के लिए अपने स्तर पर तकनीकी सेफगार्ड्स तुरंत लागू करने होंगे और कानूनी व रेग्युलेटरी जरूरतों का समय पर पालन करना होगा। क्या होता है एल्गोरिदम और क्विक रिस्पॉन्स टीम्स? सोशल मीडिया एल्गोरिदम: यह एक तरह का डिजिटल कोड या मैथमेटिकल फॉर्मूला होता है जो यह तय करता है कि आपकी फीड में कौन सा वीडियो या पोस्ट सबसे ऊपर दिखेगा। कंपनियां यूजर के एंगेजमेंट (लाइक, शेयर, कमेंट) के आधार पर ऐसा कंटेंट ज्यादा पुश करती हैं। क्विक रिस्पॉन्स टीम: यह किसी आपात स्थिति, अफवाह या फर्जी जानकारी को सोशल मीडिया पर वायरल होने से रोकने के लिए बनाई गई साइबर विशेषज्ञों की इंस्टेंट एक्शन टीम होती है। यह टीम 24×7 ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी करती है और आपत्तिजनक मामलों पर तुरंत कार्रवाई कराती है। ये खबर भी पढ़ें… फेसबुक-इंस्टाग्राम से युवाओं की मेंटल हेल्थ बिगड़ी: Meta पर अमेरिकी कोर्ट ने ₹9030 करोड़ का जुर्माना लगाया, युवाओं के इलाज पर ₹3993 करोड़ खर्च होंगे अमेरिकी राज्य न्यू मैक्सिको की अदालत ने गुरुवार को इंस्टाग्राम-फेसबुक की पेरेंट कंपनी Meta पर 942 मिलियन डॉलर यानी 9030 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने कहा कि प्लेटफॉर्म से युवाओं की मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचा। जुर्माने की रकम में से 420 मिलियन डॉलर यानी 3993 करोड़ रुपए युवाओं के इलाज पर खर्च होंगे। बाकी की रकम अगले 5 साल में अवेयरनेस, प्रिवेंशन, स्क्रीनिंग सर्विस पर खर्च की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
एक्टर प्रदीप रावत की प्रेयर मीट:अखिलेंद्र मिश्रा, मुकेश ऋषि और सुनील पाल समेत कई सेलेब्स पहुंचे

‘गजनी’ और ‘लगान’ फेम एक्टर प्रदीप रावत की शुक्रवार शाम मुंबई में प्रेयर मीट आयोजित की गई, जिसमें एक्टर अखिलेंद्र मिश्रा, मुकेश ऋषि और कॉमेडियन सुनील पाल समेत फिल्म इंडस्ट्री के कई लोग पहुंचे। सभी ने दिवंगत अभिनेता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार को सांत्वना दी। 74 साल की उम्र में मंगलवार को प्रदीप रावत का निधन हो गया था। बुधवार को मुंबई के गोरेगांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया था। आमिर खान और रजा मुराद समेत कई सेलेब्स प्रदीप रावत के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। अंतिम संस्कार देखें तस्वीरें- हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदीप रावत के मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी ने बताया था कि एक्टर कैंसर से पीड़ित थे। उन्हें यह बीमारी दोबारा लौट आई थी। पिछले एक महीने से उनका अस्पताल में इलाज चल रहा था। महाभारत में अश्वत्थामा का रोल निभाया था प्रदीप रावत ने एक्टिंग करियर की शुरुआत बीआर. चोपड़ा के टीवी शो महाभारत से की थी। वे अश्वत्थामा के रोल में नजर आए थे। प्रदीप ने इसके बाद हिंदी, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली और भोजपुरी फिल्मों में काम किया। हिंदी सिनेमा में वे लगान, सरफरोश, गजनी और ग्रैंड मस्ती जैसी फिल्मों में दिखाई दिए। तेलुगु फिल्म सई (Sye) से उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में कदम रखा और कई यादगार विलेन के किरदार निभाए। तमिल फिल्म गजनी (2005) में उनके डबल रोल को काफी पसंद किया गया। बाद में उन्होंने इसी भूमिका को हिंदी रीमेक गजनी में भी निभाया। इसके अलावा उन्होंने कन्नड़ फिल्म पैरोडी, मलयालम फिल्म चाइना टाउन, बंगाली फिल्म हीरो 420 और भोजपुरी फिल्म क्रैक फाइटर में भी एक्टिंग की थी। आमिर खान को बहन ने डांट दिया था फिल्म लगान में देवा का किरदार पहले एक्टर मुकेश ऋषि को ऑफर हुआ था, लेकिन साउथ की कई फिल्मों में व्यस्त होने के कारण उन्होंने यह फिल्म नहीं की। इसके बाद यह रोल प्रदीप रावत को मिला था। दरअसल, फिल्म सरफरोश में प्रदीप रावत का काम देखकर आमिर खान काफी प्रभावित हुए थे। उन्होंने आधी रात करीब 12 बजे प्रदीप के घर के लैंडलाइन पर फोन किया। उस समय प्रदीप घर पर नहीं थे। उनकी बहन ने फोन उठाया। ‘मैं आमिर खान बोल रहा हूं’ सुनकर उन्होंने इसे प्रैंक कॉल समझा। उन्होंने डांटते हुए कहा, ‘क्यों बदमाशी कर रहे हो?’ बाद में आमिर ने लेखक उमाशंकर पाठक से बात कराई, जिन्हें परिवार पहचानता था। तब सबको यकीन हुआ कि फोन सच में आमिर खान का है। आमिर ने प्रदीप को अगले दिन ऑफिस बुलाकर फिल्म का कॉन्ट्रैक्ट साइन कराया और साइनिंग अमाउंट का चेक दिया। फिर इस तरह उन्हें फिल्म लगान में काम मिला था। प्रदीप रावत के कारण सलमान को नहीं मिली गजनी 27 मार्च 2025 को मुंबई में फिल्म सिकंदर की प्रेस मीट के दौरान सलमान से पूछा गया था कि क्या वाकई आमिर से पहले आपको गजनी मिली थी। इस पर एक्टर ने कहा था, ‘मैंने भी सुना है। मैंने ये प्रदीप से सुना है। हम उसे गजनी बुलाते हैं। वो मेरे दोस्त हैं। हमने 4-5 फिल्में साथ की हैं। उसने एक बार कहा था, मुरुगदास (गजनी के डायरेक्टर) बहुत अनुशासित हैं, इतने सिंसियर हैं, सलमान कैसे काम कर लेगा उनके साथ, सलमान को गुस्सा बहुत आता है।’ सलमान ने आगे कहा, ‘मतलब वो मेरे साथ 5 पिक्चरें कर चुका है, उसके बाद वो ये बोलता है। उसके बाद मैं बेचारे से मिला ही नहीं। मिलेगा तो उससे पूछूंगा कि मैं कब गुस्सा हुआ तेरे से।’ प्रदीप रावत की 2 शादियां हुई थीं प्रदीप रावत की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उनकी दो शादियां हुईं। NBT की रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी पहली शादी ज्यादा समय तक नहीं चली और करीब साढ़े पांच महीने में दोनों का तलाक हो गया। प्रदीप रावत ने बताया था कि पहली पत्नी ने उन पर और उनके परिवार पर झूठे आरोप लगाए थे, हालांकि बाद में मामला खत्म हो गया। इसके बाद उनकी मुलाकात साउथ फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी कल्याणी रावत से हुई। दोनों ने कुछ समय तक एक-दूसरे को डेट किया और साल 2006 में शादी कर ली। इस शादी से उनका एक बेटा है, जिसका नाम विक्रमादित्य रावत है। यह खबर भी पढ़ें… फिल्ममेकर भारतीराजा का 84 साल की उम्र में निधन: राजेश खन्ना की फिल्म समेत 40 से ज्यादा फिल्में बनाई थीं; 6 नेशनल अवार्ड मिले फिल्ममेकर भारतीराजा का लंबी बीमारी और उम्र संबंधी दिक्कतों के कारण 10 जून, 2026 को 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। भारतीराजा को छह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, चार साउथ फिल्मफेयर पुरस्कार, छह तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार और एक नंदी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…
CM विजय की पत्नी ने तलाक की अर्जी वापस ली:बेवफाई का आरोप लगाकर फरवरी में केस किया था, श्रीलंका मूल की हैं संगीता

तमिलनाडु के CM सी जोसेफ विजय की पत्नी संगीता ने उनके खिलाफ दायर तलाक की अर्जी वापस ले ली है। इसके साथ ही चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में में मामला खत्म हो गया है। संगीता ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुई। उन्होंने जज सुजाता को अपनी अर्जी वापस लेने की जानकारी दी। जज ने करीब 15 मिनट तक उनसे पूछताछ की और फिर अर्जी स्वीकार करते हुए तलाक का मामला बंद कर दिया। फरवरी 2026 में दायर की थी अर्जी संगीता ने फरवरी 2026 में यह तलाक की अर्जी दायर की थी। अपनी याचिका में उन्होंने विजय पर बेवफाई का आरोप लगाया था। संगीता ने दावा किया था कि विजय का एक अभिनेत्री के साथ विवाहेतर संबंध है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस रिश्ते के बारे में अप्रैल 2021 में पता चला, जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा हुई। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि विजय का उस अभिनेत्री के साथ संबंध जारी रहने से उन्हें भावनात्मक कष्ट हुआ और बच्चों को शर्मिंदगी उठानी पड़ी। संगीता ने दावा किया कि 2021 से विजय उनसे भावनात्मक रूप से दूर हो गए थे और उन्हें मौखिक रूप अपमान झेलना पड़ा। साथ ही विजय पति की जिम्मेदारियों से भी पीछे हट गए। 1999 में हुई थी शादी विजय और संगीता की पहली मुलाकात 1996 में हुई थी। संगीता मूल रूप से श्रीलंकाई हैं और उनकी परवरिश ब्रिटेन में हुई थी। दंपती ने 1998 में यूके में अपनी शादी का पंजीकरण कराया था। इसके बाद 25 अगस्त 1999 को चेन्नई में हिंदू रीति-रिवाजों से उनका विवाह हुआ था। उनके दो बच्चे बेटा जेसन और बेटी दिव्या हैं। चुनाव के दौरान चर्चा में रहा था मामला इस मामले की कानूनी कार्यवाही 26 फरवरी को शुरू हुई थी। बाद में इसे 20 अप्रैल तक के लिए टाल दिया गया था, जो तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से तीन दिन पहले का समय था। चुनाव प्रचार के दौरान यह तलाक का मामला काफी चर्चा में रहा था। मद्रास हाईकोर्ट में भी उठी थी जांच की मांग यह घटनाक्रम मद्रास हाईकोर्ट में विजय के चुनावी हलफनामे की जांच की मांग वाली याचिका के बीच हुआ है। विजय ने हलफनामे में बताया था कि उन्होंने संगीता को 12.60 करोड़ रुपए उधार दिए थे। पेरंबूर निर्वाचन क्षेत्र के वोटर वेंकटेश ने इस घोषणा पर सवाल उठाए थे। याचिकाकर्ता ने एक निजी शैक्षणिक ट्रस्ट को दिए गए 20 करोड़ रुपए के खुलासे पर भी सवाल खड़े किए थे। हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट ने अप्रैल के अंत में इस याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इसी तरह की राहत मांगने वाली एक याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी है।







