Wednesday, 30 Sep 2026 | 05:52 PM

Trending :

EXCLUSIVE

अमेरिका-भारतीय मूल के लड़के पर मां-भाई की हत्या का आरोप:ChatGPT पर परिवार को मारने से जुड़ी चैट मिली; पुलिस ने पार्किंग लॉट से पकड़ा

अमेरिका-भारतीय मूल के लड़के पर मां-भाई की हत्या का आरोप:ChatGPT पर परिवार को मारने से जुड़ी चैट मिली; पुलिस ने पार्किंग लॉट से पकड़ा

अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य में भारतीय मूल के 17 वर्षीय अर्जुन अरविंद पर अपनी मां और छोटे भाई की हत्या का आरोप लगा है। पुलिस ने उसे बुधवार सुबह गिरफ्तार किया। अधिकारियों के मुताबिक, उसने अपनी 45 वर्षीय मां सुधा वेंकटेशन और 14 वर्षीय भाई सिद्धार्थ अरविंद की हत्या की। उसके खिलाफ हत्या के दो मामलों के अलावा परिवार के सदस्यों पर हमला, मारपीट और बिना इजाजत मां की कार लेकर फरार होने समेत कई अन्य आरोप भी लगाए गए हैं। जांच के दौरान सामने आया कि अर्जुन पिछले कुछ समय से इंटरनेट और ChatGPT पर अपने परिवार की हत्या से जुड़ी काल्पनिक कहानियां और ऐसे विषयों पर जानकारी खोज रहा था। पुलिस अब उसकी ऑनलाइन गतिविधियों को भी जांच का हिस्सा मानकर पड़ताल कर रही है। अलग-अलग जगह पड़े मिले मां-बेटे के शव घटना का खुलासा उस समय हुआ, जब मंगलवार शाम करीब साढ़े छह बजे एक ट्यूटर पढ़ाने के लिए घर पहुंची। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला तो उसने अर्जुन के पिता को फोन किया। पिता भी पत्नी और बेटे से संपर्क नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने पुलिस से घर जाकर हालचाल देखने को कहा। पुलिस जब घर पहुंची तो बेसमेंट में सुधा वेंकटेशन और पहली मंजिल पर सिद्धार्थ अरविंद का शव मिला। अधिकारियों ने बताया कि दोनों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। हालांकि मौत की वजह और वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियार की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इसकी जांच जारी है। हत्या के बाद कार समेत गायब था आरोपी वारदात के बाद अर्जुन और उसकी मां की कार दोनों घर से गायब थीं। इससे पुलिस को शक हुआ कि आरोपी घटनास्थल से कार लेकर भागा है। इसके बाद पुलिस ने तुरंत उसकी तलाश शुरू की और आसपास के सभी शहरों की पुलिस को अलर्ट जारी कर दिया। बुधवार सुबह मैसाचुसेट्स के वेइलैंड इलाके में एक पार्किंग में पुलिस को संदिग्ध कार खड़ी मिली। अधिकारियों ने कार की घेराबंदी की और जांच करने पर अंदर अर्जुन मौजूद मिला। पुलिस ने उसे बिना किसी विरोध या झड़प के हिरासत में ले लिया। बाद में पूछताछ और शुरुआती जांच के आधार पर उसे अपनी मां सुधा वेंकटेशन और 14 वर्षीय भाई सिद्धार्थ अरविंद की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वारदात के बाद अर्जुन कहां-कहां गया और उसका मकसद क्या था।

अमेरिका-भारतीय मूल के लड़के पर मां-भाई की हत्या का आरोप:ChatGPT पर परिवार को मारने से जुड़ी चैट मिली; पुलिस ने पार्किंग लॉट से पकड़ा

अमेरिका-भारतीय मूल के लड़के पर मां-भाई की हत्या का आरोप:ChatGPT पर परिवार को मारने से जुड़ी चैट मिली; पुलिस ने पार्किंग लॉट से पकड़ा

अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य में भारतीय मूल के 17 वर्षीय अर्जुन अरविंद पर अपनी मां और छोटे भाई की हत्या का आरोप लगा है। पुलिस ने उसे बुधवार सुबह गिरफ्तार किया। अधिकारियों के मुताबिक, उसने अपनी 45 वर्षीय मां सुधा वेंकटेशन और 14 वर्षीय भाई सिद्धार्थ अरविंद की हत्या की। उसके खिलाफ हत्या के दो मामलों के अलावा परिवार के सदस्यों पर हमला, मारपीट और बिना इजाजत मां की कार लेकर फरार होने समेत कई अन्य आरोप भी लगाए गए हैं। जांच के दौरान सामने आया कि अर्जुन पिछले कुछ समय से इंटरनेट और ChatGPT पर अपने परिवार की हत्या से जुड़ी काल्पनिक कहानियां और ऐसे विषयों पर जानकारी खोज रहा था। पुलिस अब उसकी ऑनलाइन गतिविधियों को भी जांच का हिस्सा मानकर पड़ताल कर रही है। अलग-अलग जगह पड़े मिले मां-बेटे के शव घटना का खुलासा उस समय हुआ, जब मंगलवार शाम करीब साढ़े छह बजे एक ट्यूटर पढ़ाने के लिए घर पहुंची। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला तो उसने अर्जुन के पिता को फोन किया। पिता भी पत्नी और बेटे से संपर्क नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने पुलिस से घर जाकर हालचाल देखने को कहा। पुलिस जब घर पहुंची तो बेसमेंट में सुधा वेंकटेशन और पहली मंजिल पर सिद्धार्थ अरविंद का शव मिला। अधिकारियों ने बताया कि दोनों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। हालांकि मौत की वजह और वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियार की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इसकी जांच जारी है। हत्या के बाद कार समेत गायब था आरोपी वारदात के बाद अर्जुन और उसकी मां की कार दोनों घर से गायब थीं। इससे पुलिस को शक हुआ कि आरोपी घटनास्थल से कार लेकर भागा है। इसके बाद पुलिस ने तुरंत उसकी तलाश शुरू की और आसपास के सभी शहरों की पुलिस को अलर्ट जारी कर दिया। बुधवार सुबह मैसाचुसेट्स के वेइलैंड इलाके में एक पार्किंग में पुलिस को संदिग्ध कार खड़ी मिली। अधिकारियों ने कार की घेराबंदी की और जांच करने पर अंदर अर्जुन मौजूद मिला। पुलिस ने उसे बिना किसी विरोध या झड़प के हिरासत में ले लिया। बाद में पूछताछ और शुरुआती जांच के आधार पर उसे अपनी मां सुधा वेंकटेशन और 14 वर्षीय भाई सिद्धार्थ अरविंद की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वारदात के बाद अर्जुन कहां-कहां गया और उसका मकसद क्या था। ChatGPT से काल्पनिक कहानियां लिखने में मदद मांगी जांच में पता चला है कि अर्जुन पिछले कुछ समय से इंटरनेट और ChatGPT पर परिवार की हत्या जैसे विषयों पर जानकारी खोज रहा था। उसने ChatGPT से हत्या और रहस्य से जुड़ी काल्पनिक कहानियां लिखने में भी मदद मांगी थी। इन कहानियों में ऐसे किरदार थे, जो अपने ही परिवार के लोगों की हत्या करते हैं। उसने ChatGPT से इस तरह के कई सवाल भी पूछे थे। हालांकि, जांच एजेंसियों ने यह नहीं कहा है कि ChatGPT ने उसे हत्या करने का तरीका बताया या योजना बनाने में मदद की। अधिकारियों का सिर्फ इतना कहना है कि उसकी चैट हिस्ट्री में परिवार की हत्या से जुड़े काल्पनिक विषयों पर बातचीत और सर्च मिले हैं। हत्या के पीछे की वजह जानने की कोशिश कर रही पुलिस पुलिस ने अभी तक हत्या के पीछे की वजह (मोटिव) का खुलासा नहीं किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे और जानकारी सामने आ सकती है। अर्जुन को पहले किशोर अदालत में पेश किया जाना था। लेकिन अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य में हत्या जैसे गंभीर मामलों की सुनवाई किशोर अदालत में नहीं होती। इसलिए उसके खिलाफ हत्या और अन्य आरोपों की सुनवाई सामान्य अदालत (क्रिमिनल कोर्ट) में की जाएगी।

दाऊद की पार्टी में गाने पर बोले कुमार सानू:अनु मलिक लेकर गए, अखबार में फोटो छपी तब डर लगा; अबू सलेम के शो में भी गाया

दाऊद की पार्टी में गाने पर बोले कुमार सानू:अनु मलिक लेकर गए, अखबार में फोटो छपी तब डर लगा; अबू सलेम के शो में भी गाया

प्लेबैक सिंगर कुमार सानू ने 90 के दशक में अंडरवर्ल्ड से जुड़े अपने अनुभवों का खुलासा किया है। लल्लनटॉप को दिए एक इंटरव्यू में कुमार सानू ने बताया कि म्यूजिक डायरेक्टर नदीम और अनु मलिक उन्हें दुबई में एक बर्थडे पार्टी में गाने के लिए ले गए थे, जहां अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम भी मौजूद था। बाद में जब अखबारों में तस्वीरें छपीं, तब उन्हें मामले की गंभीरता समझ आई। इसके अलावा उन्होंने गैंगस्टर अबू सलेम के शो में भी गाना गाया था। पुलिस की चेतावनी और गिरफ्तारी की धमकी के बावजूद वे अपनी मजबूरी का हवाला देकर गाने गए थे। दुबई में दाऊद के सामने गाया गाना कुमार सानू ने बताया कि म्यूजिक डायरेक्टर नदीम उन्हें दुबई ले गए थे। उन्हें सिर्फ इतना बताया गया था कि किसी की बर्थडे पार्टी में गाना है। वहां दाऊद इब्राहिम अपने परिवार के साथ सामने बैठा था। उस इवेंट में अनु मलिक भी मौजूद थे। सानू ने बताया कि दाऊद ने उनके स्टेज पर गाए जाने वाले पसंदीदा गानों की रिक्वेस्ट की थी। उस वक्त उन्हें अंदाजा नहीं था कि वे किसके शो में आए हैं। जब भारत लौटने के बाद अखबारों में उनकी फोटो छपी, तब उन्हें डर लगा कि उन्होंने क्या कर दिया है। उस मुलाकात के बाद वे कभी दाऊद से नहीं मिले। अबू सलेम के शो पर पुलिस की चेतावनी, फिर भी गाने गए गैंगस्टर अबू सलेम से जुड़ा एक वाकया शेयर करते हुए सानू ने बताया कि उनसे कुछ लोगों ने पैसों की मांग की थी। सानू ने पैसे देने से मना कर दिया और कहा कि अगर कोई काम या शो हो तो वे गाना गा सकते हैं। इसके बाद वे अबू सलेम के एक शो में गाने के लिए दुबई गए। जाने से पहले पुलिस स्टेशन से फोन आया था और वहां न जाने की सलाह दी गई थी। पुलिस अधिकारियों ने कहा था कि अगर वे गए तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस पर सानू ने कहा कि वे सिंगर हैं और गाना उनकी मजबूरी है, इसलिए पुलिस उन्हें सुरक्षा दे। सुरक्षा न मिलने पर भी वे गए, परफॉर्म किया और सुरक्षित वापस लौट आए। बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड की फंडिंग पर बोले सानू 90 के दशक में बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड के कनेक्शन पर कुमार सानू ने कहा कि उस दौर में फिल्मों की ज्यादातर फंडिंग अंडरवर्ल्ड से आती थी। जो पैसा लगाता था, वही इंडस्ट्री पर राज करता था। सानू ने कहा कि उन्होंने कभी इन चीजों की ज्यादा गहराई में जाने की कोशिश नहीं की और हमेशा खुद को ऐसे मामलों से दूर रखा। वे सिर्फ अपने काम पर ध्यान देते थे, इसी वजह से वे सुरक्षित रहे और किसी का ध्यान उन पर नहीं गया। सानू ने गाए 20 हजार गाने कुमार सानू ने करियर की शुरुआत में बांग्लादेशी फिल्म ‘तीन कन्या’ से की थी। वैसे, सानू को हिंदी फिल्मों में लाने का क्रेडिट जगजीत सिंह को जाता है। उन्होंने कुमार सानू को फिल्म ‘आंधियां’ में गाना गाने का ऑफर दिया था। जगजीत सिंह ने उनकी मुलाकात कल्याणजी आनंद से कराई और उन्हीं के कहने के बाद उन्होंने अपना नाम केदारनाथ भट्टाचार्य से कुमार सानू कर लिया था। सानू ने करीब 20 हजार गाने गाए हैं। उन्होंने ‘दिल का आलम…’ (फिल्म ‘आशिकी’, 1990), ‘दिल का रिश्ता..’ (फिल्म ‘दिल का रिश्ता’, 2003), ‘राजा को रानी से…’ (फिल्म ‘अकेले हम अकेले तुम’, 1995), ‘परदेसी परदेसी…’ (फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’, 1996) जैसे कई बेहतरीन गाने गाए हैं। सानू ने म्यूजिक डायरेक्टर जोड़ी नदीम-श्रवण के लिए करीब 75 फिल्मों में गाने गाए हैं। इसके अलावा उन्होंने अनु मलिक के लिए 60 फिल्मों, जतिन-ललित के लिए 30 फिल्मों और राजेश रोशन के लिए 25 फिल्मों में गाने गाए हैं।

दाऊद की पार्टी में गाने पर बोले कुमार सानू:अनु मलिक लेकर गए, अखबार में फोटो छपी तब डर लगा; अबू सलेम के शो में भी गाया

दाऊद की पार्टी में गाने पर बोले कुमार सानू:अनु मलिक लेकर गए, अखबार में फोटो छपी तब डर लगा; अबू सलेम के शो में भी गाया

प्लेबैक सिंगर कुमार सानू ने 90 के दशक में अंडरवर्ल्ड से जुड़े अपने अनुभवों का खुलासा किया है। लल्लनटॉप को दिए एक इंटरव्यू में कुमार सानू ने बताया कि म्यूजिक डायरेक्टर नदीम और अनु मलिक उन्हें दुबई में एक बर्थडे पार्टी में गाने के लिए ले गए थे, जहां अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम भी मौजूद था। बाद में जब अखबारों में तस्वीरें छपीं, तब उन्हें मामले की गंभीरता समझ आई। इसके अलावा उन्होंने गैंगस्टर अबू सलेम के शो में भी गाना गाया था। पुलिस की चेतावनी और गिरफ्तारी की धमकी के बावजूद वे अपनी मजबूरी का हवाला देकर गाने गए थे। दुबई में दाऊद के सामने गाया गाना कुमार सानू ने बताया कि म्यूजिक डायरेक्टर नदीम उन्हें दुबई ले गए थे। उन्हें सिर्फ इतना बताया गया था कि किसी की बर्थडे पार्टी में गाना है। वहां दाऊद इब्राहिम अपने परिवार के साथ सामने बैठा था। उस इवेंट में अनु मलिक भी मौजूद थे। सानू ने बताया कि दाऊद ने उनके स्टेज पर गाए जाने वाले पसंदीदा गानों की रिक्वेस्ट की थी। उस वक्त उन्हें अंदाजा नहीं था कि वे किसके शो में आए हैं। जब भारत लौटने के बाद अखबारों में उनकी फोटो छपी, तब उन्हें डर लगा कि उन्होंने क्या कर दिया है। उस मुलाकात के बाद वे कभी दाऊद से नहीं मिले। अबू सलेम के शो पर पुलिस की चेतावनी, फिर भी गाने गए गैंगस्टर अबू सलेम से जुड़ा एक वाकया शेयर करते हुए सानू ने बताया कि उनसे कुछ लोगों ने पैसों की मांग की थी। सानू ने पैसे देने से मना कर दिया और कहा कि अगर कोई काम या शो हो तो वे गाना गा सकते हैं। इसके बाद वे अबू सलेम के एक शो में गाने के लिए दुबई गए। जाने से पहले पुलिस स्टेशन से फोन आया था और वहां न जाने की सलाह दी गई थी। पुलिस अधिकारियों ने कहा था कि अगर वे गए तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस पर सानू ने कहा कि वे सिंगर हैं और गाना उनकी मजबूरी है, इसलिए पुलिस उन्हें सुरक्षा दे। सुरक्षा न मिलने पर भी वे गए, परफॉर्म किया और सुरक्षित वापस लौट आए। बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड की फंडिंग पर बोले सानू 90 के दशक में बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड के कनेक्शन पर कुमार सानू ने कहा कि उस दौर में फिल्मों की ज्यादातर फंडिंग अंडरवर्ल्ड से आती थी। जो पैसा लगाता था, वही इंडस्ट्री पर राज करता था। सानू ने कहा कि उन्होंने कभी इन चीजों की ज्यादा गहराई में जाने की कोशिश नहीं की और हमेशा खुद को ऐसे मामलों से दूर रखा। वे सिर्फ अपने काम पर ध्यान देते थे, इसी वजह से वे सुरक्षित रहे और किसी का ध्यान उन पर नहीं गया। सानू ने गाए 20 हजार गाने कुमार सानू ने करियर की शुरुआत में बांग्लादेशी फिल्म ‘तीन कन्या’ से की थी। वैसे, सानू को हिंदी फिल्मों में लाने का क्रेडिट जगजीत सिंह को जाता है। उन्होंने कुमार सानू को फिल्म ‘आंधियां’ में गाना गाने का ऑफर दिया था। जगजीत सिंह ने उनकी मुलाकात कल्याणजी आनंद से कराई और उन्हीं के कहने के बाद उन्होंने अपना नाम केदारनाथ भट्टाचार्य से कुमार सानू कर लिया था। सानू ने करीब 20 हजार गाने गाए हैं। उन्होंने ‘दिल का आलम…’ (फिल्म ‘आशिकी’, 1990), ‘दिल का रिश्ता..’ (फिल्म ‘दिल का रिश्ता’, 2003), ‘राजा को रानी से…’ (फिल्म ‘अकेले हम अकेले तुम’, 1995), ‘परदेसी परदेसी…’ (फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’, 1996) जैसे कई बेहतरीन गाने गाए हैं। सानू ने म्यूजिक डायरेक्टर जोड़ी नदीम-श्रवण के लिए करीब 75 फिल्मों में गाने गाए हैं। इसके अलावा उन्होंने अनु मलिक के लिए 60 फिल्मों, जतिन-ललित के लिए 30 फिल्मों और राजेश रोशन के लिए 25 फिल्मों में गाने गाए हैं।

कंगना की फिल्म में जूनियर आर्टिस्ट थीं साई पल्लवी:डांस रियलिटी शो से एलिमिनेट किया गया, आज भारत की सबसे बड़ी फिल्म रामायण में सीता बनीं

कंगना की फिल्म में जूनियर आर्टिस्ट थीं साई पल्लवी:डांस रियलिटी शो से एलिमिनेट किया गया, आज भारत की सबसे बड़ी फिल्म रामायण में सीता बनीं

2017 में भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्म रामायण की घोषणा हुई। देशभर के नामी लोग इस प्रोजेक्ट से जुड़े और 2021 में फिल्म की को-प्रोड्यूसर मधु मंटेना ने घोषणा की कि इस फिल्म में भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे बड़ी स्टार कास्ट होगी। रणबीर कपूर और यश, भगवान राम और रावण के रोल के लिए चुने गए। हर किसी को इंतजार था कि आखिर माता सीता के रोल के लिए किस एक्ट्रेस का चुनाव होगा। आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण जैसे कई नाम की चर्चाएं हुईं। मेकर्स को एक ऐसे चेहरे की तलाश थी, जो सादगी और खूबसूरती से भरपूर हो और उस नाम के साथ कोई स्कैंडल या विवाद न हो। और फिर अगस्त 2023 में इस रोल के लिए साउथ एक्ट्रेस साई पल्लवी के नाम की घोषणा हुई। साई पल्लवी, एक ऐसी एक्ट्रेस, जो कुछ सालों पहले तक एक जूनियर आर्टिस्ट हुआ करती थीं। फिल्म में उन्हें छोटे-मोटे रोल दिए जाते थे, जिनके डायलॉग भी कम ही हुआ करते थे। वहीं फिल्मों में आने से पहले साई पल्लवी एक मेडिकल स्टूडेंट थीं और साउथ के एक डांस रियलिटी शो की कंटेस्टेंट थीं। वो शो की फाइनलिस्ट रहीं, लेकिन जीत नहीं सकीं, लेकिन कुछ सालों बाद इन्हीं साई पल्लवी के गाने राउडी बेबी ने 1 बिलियन व्यूज हासिल कर इतिहास रच दिया। आज सक्सेस स्टोरी के 3 चैप्टर्स में जानिए कभी जूनियर आर्टिस्ट रहीं साई पल्लवी की भारत की टॉप एक्ट्रेस बनने की प्रेरणादायक कहानी- 9 मई 1992 तमिलनाडू के कोयम्बटूर में एक्साइज ऑफिसर के घर साई पल्लवी का जन्म हुआ। उनका परिवार तमिलनाडु के कोटागिरी से ताल्लुक रखता है। शुरुआती पढ़ाई अविला कॉन्वेंट स्कूल से हुई। वो बैडमिंटन की भी बेहतरीन प्लेयर रहीं। लव लेटर लिखने पर घर में हुई पिटाई साई पल्लवी स्कूल के दिनों में बेहद शरारती थीं और स्कूल में पॉपुलर थीं। वह दूसरे बच्चों का जमकर मजाक उड़ाती थीं। देखने में बेहद खूबसूरत साई को कई लड़के अप्रोच करते थे। एक बार 7वीं क्लास में एक लड़के ने उनके बैग में लव लेटर रख दिया था। शाम को जब उनके पिता ने उनका बैग चेक किया तो उसमें लेटर निकला। ये देखकर उन्हें पिता की खूब मार पड़ी थी। साई ने खुद नेटफ्लिक्स के शो माय विलेज में ये किस्सा बताया था। कंगना की फिल्म में बनीं जूनियर आर्टिस्ट उनका फिल्म इंडस्ट्री से दूर-दूर तक कोई ताल्लुक नहीं था, इसके बावजूद घर में टीवी देखते हुए उनका झुकाव डांस और एक्टिंग की तरफ था। उन्होंने टीवी शो देखकर डांस सीखा। पहली बार उनका फिल्मी दुनिया से परिचय 2005 की फिल्म कस्तूरी मान से हुआ। वो फिल्म से हीरो-हीरोइन के पीछे डांस करने वालीं बैकग्राउंड डांसर के तौर पर जुड़ीं, लेकिन फिर फिल्म में उन्हें चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम करने का मौका मिला। कुछ लोगों से जान-पहचान की मदद से वो टीनएज में फिल्म धाम धूम (2008) में जूनियर आर्टिस्ट रहीं। वह छठी क्लास में थीं। इस फिल्म से बॉलीवुड में नई-नई आईं कंगना रनोट ने तमिल सिनेमा में डेब्यू किया था। साई पल्लवी को फिल्म में कंगना रनोट के पीछे खड़े हुए देखा जा सकता है। इन फिल्मों में छोटे रोल करने के बाद साई पल्लवी ने पढ़ाई पर फोकस किया, हालांकि स्कूल में उन्होंने कल्चरल इवेंट में हिस्सा लेना जारी रखा। वो लोकल डांस कॉम्पिटिशन में भी हिस्सा लिया करती थीं। डांस स्कूल के कुछ साथियों की मदद से साई पल्लवी ने 2008 में साउथ के तमिल डांस रियलिटी शो उंगलिल यार अदुथा प्रभु देवा (कौन बनेगा अगला प्रभु देवा) में हिस्सा लिया। शो का फाइनलिस्ट बनने पर कंटेस्टेंट को प्रभु देवा से मिलने का मौका दिया जाने वाला था। साई इसके लिए बेहद एक्साइटेड थीं, लेकिन फिनाले से ठीक पहले उनका एलिमिनेशन हो गया। दुर्भाग्य से जिस दिन वो एलिमिनेट हुईं, उस दिन उनका बर्थडे था। साई का मानना था कि अगर बर्थडे के दिन रोए, तो पूरे साल रोना पड़ेगा। एलिमिनेशन की घोषणा के बाद साई भावुक हो गईं, लेकिन आंसू रोककर रखे। घर लौटकर साई ने बर्थडे नहीं मनाया और सीधे बिस्तर पर लेट गईं। मां उनकी उदासी समझ गईं और कहा- ‘बेटा जिंदगी में जो होता है, अच्छे के लिए होता है। तुम अभी रोना चाहो, तो रो लो, आज के बाद कभी रोना नहीं पड़ेगा।’ पहले डांस शो से निकलने के बाद साई ने 2009 में धी अल्टीमेट डांस शो (D4) में हिस्सा लिया और फाइनलिस्ट रहीं। शो के एक एपिसोड में डांट पड़ने से साई पल्लवी मंच पर खड़ीं भावुक हो गईं। कैमरा उन्हें रोते हुए कैप्चर न करें, इसलिए वो पलट गईं और देर तक पीछे मुड़कर रोती रहीं। फ्राइज एंज पोटैटो को दिए इंटरव्यू में साई ने कहा था, ‘एक मास्टर ने मुझे डांटा तो मैं पीछे मुड़कर रोने लगी। शो की एंकर राम्या मुझे धीरे से कह रही थीं कि तुम्हें पलटना होगा। लेकिन मैंने कहा, नहीं, मैं नहीं चाहती कि लोग मुझे रोते हुए देखें। मैं दुखी लड़की की तरह नहीं लगना चाहती थी।’ शो न जीतने के बावजूद उनकी बेहतरीन हाई-एनर्जी डांस परफॉर्मेंस की वीडियो क्लिप अक्सर फेसबुक पर वायरल होती थीं। एक एपिसोड में सामंथा बतौर गेस्ट पहुंचीं और साई की जमकर तारीफ की थी। बेहतरीन कैमरा अपीयरेंस के चलते उन्हें कुछ टीवी एड और शॉर्ट फिल्म ‘काची पिजाई’ में काम मिला। शो के बाद साई पल्लवी की मां ने उन्हें मेडिकल स्टडीज के लिए जॉर्जिया भेजने का मन बना लिया। साई जाना नहीं चाहती थीं, लेकिन मां ने कहा कि उनकी कजिन भी बाहर जाकर पढ़ाई कर रही हैं, उन्हें शादी के लिए अच्छे लड़के मिलेंगे, अगर साई नहीं गईं, तो वो कजिन से पीछे रह जाएंगी। मां की बात मानकर साई ने जॉर्जिया जाने का फैसला किया। डांस रियलिटी शो की बदौलत कई फिल्में ऑफर हुईं, हर रोल ठुकराया साउथ फिल्ममेकर शेखर काम्मुला ने साई के डांस रियलिटी शो की एक क्लिप देखकर उन्हें फिल्म हैप्पी डेज ऑफर की। हालांकि साई ने पढ़ाई के लिए फिल्म ठुकरा दी। कुछ दिनों बाद उन्हें फिल्म मद्रास (2014) में लीड रोल ऑफर हुआ, लेकिन साई ने एकेडमिक्स के लिए ये ऑफर भी ठुकरा दिया। साई पल्लवी ने फ्राइज एंड पटेटो को दिए इंटरव्यू में कहा था, ‘जॉर्जिया जाने

India-Nepal Infrastructure Projects | India Grants Funds For Development

India-Nepal Infrastructure Projects | India Grants Funds For Development

Hindi News Career India Nepal Infrastructure Projects | India Grants Funds For Development 10 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इस्तीफा दिया 12 अगस्त को टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दिया। चंद्रशेखरन 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे। वे टाटा परिवार से बाहर के पहले ऐसे मैनेजर थे, जिन्होंने इस समूह की कमान संभाली। ये फैसला 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एजीएम से ठीक पहले आया है। हालांकि, वे फरवरी 2027 यानी अपना कार्यकाल खत्म होने तक इस पद पर बने रहेंगे। चंद्रशेखरन 2016 में टाटा संस बोर्ड में डायरेक्टर अपॉइंट हुए थे। जनवरी 2017 में चंद्रशेखरन टाटा संस के बोर्ड में एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अपॉइंट हुए और बाद में चेयरमैन बने। 2. टाटा ग्रुप के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने पद से इस्तीफा दिया 12 अगस्त को टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के दो मुख्य ट्रस्टों में शामिल सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। विजय सिंह का कार्यकाल 14 अगस्त को खत्म हो रहा था, उन्होंने उससे पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, वे टाटा ग्रुप के दूसरे मुख्य ट्रस्ट सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट यानी SDTT में ट्रस्टी के पद पर बने रहेंगे। टाटा ट्रस्ट्स- SRTT और SDTT के पास टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी है। विजय सिंह का ये फैसला टाटा ट्रस्ट्स के भीतर जारी अंदरूनी मतभेदों और रेगुलेटरी कार्यवाही के बीच आया है। विजय 1970 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के IAS हैं। विजय मध्य प्रदेश में जबलपुर व इंदौर संभाग के कमिश्नर और होम सेक्रेटरी जैसे पदों पर रहे। विजय 2018 से 2026 तक सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और टाटा ट्रस्ट से जुड़े रहे। 2022 में टाटा संस बोर्ड में विजय सिंह का कार्यकाल दोबारा बढ़ाया गया था। 3. FSSAI ने पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को बैन किया 12 अगस्त को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को बैन कर दिया है। नए नियमों के तहत कंपनियां अब सिर्फ पेपर, टिन या ग्लास कंटेनर में ही पान मसाला पैक करके बेच सकेंगी। FSSAI ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड पैकेजिंग अमेंडमेंट रेगुलेशन 2026 को नोटिफाई कर दिया है। ये नए नियम तुरंत लागू हो गए हैं। FSSAI के इस बैन की मुख्य वजह पर्यावरण सुरक्षा है। दरअसल प्लास्टिक और एल्युमिनियम फॉयल वाले पाउच सालों तक नष्ट नहीं होते और प्रदूषण बढ़ाते हैं। इस नियम का मकसद पान मसाला की पैकेजिंग को पूरी तरह प्लास्टिक फ्री और इको-फ्रेंडली बनाना है। ये फैसला पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के ‘प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016’ के प्रावधानों के तहत लिया गया है। इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 4. सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद को फांसी की सजा 11 अगस्त को सीरिया की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद और उनके छोटे भाई माहेर अल-असद को फांसी की सजा सुनाई। बशर और उनके भाई को गृहयुद्ध के दौरान लाखों लोगों की हत्या और अत्याचार के मामलों में दोषी ठहराया गया। बशर और माहेर दिसंबर 2024 में सरकार गिरने के बाद रूस भाग गए थे। पुतिन सरकार ने उन्हें शरण दी हुई है और दोनों को उनकी गैरमौजूदगी में सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही पूर्व सुरक्षा अधिकारी आतेफ नजीब को भी मौत की सजा सुनाई गई है। बशर को हत्या, यातना, मनमानी गिरफ्तारी और मानवता के खिलाफ ये सजा सुनाई गई है। बशर 17 जुलाई 2000 से 8 दिसंबर 2024 तक सीरिया के राष्ट्रपति रहे थे। पिता हाफिज अल-असद के निधन के बाद बशर ने ये पद संभाला था और दिसंबर 2024 में विद्रोहियों के आगे सरकार के पतन के बाद उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी थी। 5. लेबनान मृत्युदंड बंद करने वाला अरब देश बना 11 अगस्त को लेबनान की संसद ने डेथ पेनल्टी यानी, मृत्युदंड को खत्म करने के लिए कानून पारित किया। इसके साथ लेबनान मृत्युदंड को पूरी तरह समाप्त करने वाला पहला अरब देश बन गया। लेबनान ने मृत्युदंड की जगह आजीवन कारावास और कठोर श्रम का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही पहले से मृत्युदंड पाए लोगों की सजा को भी आजीवन कारावास में बदला गया। लेबनान की 128 सदस्यीय संसद ने मृत्युदंड समाप्त करने के प्रस्ताव को बहुमत से मंजूरी दी। लेबनान में 2004 से मृत्युदंड पर वास्तविक (de facto) रोक थी, लेकिन अदालतें मृत्युदंड की सजा दे सकती थीं। इस्लामिक चरमपंथी गुटों के हमलों में मारे गए या घायल हुए लेबनानी सैनिकों के परिवार इस माफी कानून का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों ने उनके परिवारों की जान ली, उन्हें सजा कम करने के बजाय कड़ी सजा मिलनी चाहिए। 6. एंड्रास बाका हंगरी के नए राष्ट्रपति चुने गए 11 अगस्त को हंगरी की संसद ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट प्रमुख एंड्रास (András) बाका को देश का नया राष्ट्रपति चुना है। एंड्रास ने संसद में शपथ ली और वे एकमात्र उम्मीदवार थे जिन्हें राष्ट्रपति पद के लिए समर्थन मिला। एंड्रास एक वरिष्ठ न्यायविद हैं। वे 1991 से 2008 तक यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (ECHR) में हंगरी के जज रहे हैं। एंड्रास को 2009 में हंगरी की संसद में सुप्रीम कोर्ट का अध्यक्ष चुना गया था। एंड्रास को पूर्व राष्ट्रपति सुलोक तामास का कार्यकाल समय से पहले 20 जुलाई को खत्म होने के बाद चुना गया है। हंगरी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति का चुनाव संसद द्वारा पांच साल के कार्यकाल के लिए किया जाता है। 7. भारत और नेपाल ने 8 MoU साइन किये 12 अगस्तको भारत और नेपाल के बीच विकास सहयोग को मजबूत करने के लिए 8 MoU ज्ञापनों पर साइन किये। इन MoU का फोकस नेपाल में स्थानीय स्तर के विकास और हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने पर है। ये MoU काठमांडू में भारतीय दूतावास, नेपाल के भूमि प्रबंधन, सहकारी, संघीय मामले और सामान्य प्रशासन मंत्रालय और नेपाली प्रशासनके बीच किए गए। भारत और नेपाल के बीच ये डेवलपमेंट प्रोजेक्ट शिक्षा,

Trump Iran Threat | Turkiye NATO Summit Security Alert & Plane Change

Trump Iran Threat | Turkiye NATO Summit Security Alert & Plane Change

15 मिनट पहले कॉपी लिंक 7 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प तुर्किये के अंकारा में हुए NATO शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे। – फाइल फोटो ईरानी एजेंट्स को पता था कि 7 जुलाई को तुर्की के अंकारा में हुए NATO समिट में ट्रम्प किस बिल्डिंग में रुके हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस ने यह आकलन किया है। ईरान को यह भी पता था कि ट्रम्प बिल्डिंग के किस फ्लोर पर रुके हैं। इसी जानकारी के बाद ट्रम्प को तुर्की से दूसरे विमान में ले जाया गया। मंगलवार को ट्रम्प ने भी ईरान के डर से विमान बदलने की बात मानी थी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से नाटो समिट में हिस्सा लेने गए थे, उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। ट्रम्प ने यह भी बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया। ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन में दाखिल हुए एयरफोर्स वन के पीछे एक केटरिंग ट्रक नजर आ रही है ट्रम्प के खिलाफ खास खतरे की जानकारी मिली रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रम्प को ले जाने वाले किसी भी विमान पर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल से हमला किया जा सकता था। अमेरिकी इंटेलिजेंस को पता चला कि नाटो शिखर सम्मेलन के आसपास एक व्यक्ति कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ भी देखा गया था। इसके बाद सीक्रेट सर्विस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने ट्रम्प को तुर्की से निकालने के लिए ऑपरेशन तैयार किया। कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था। इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया। वॉशिंगटन पोस्ट को मिले वीडियो में केटरिंग गाड़ी को पुराने एयरफोर्स वन के पास से निकलकर छोटे विमान की तरफ जाते देखा जा सकता है। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं। तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी पुराने एयर फोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी। उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी। ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।” ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे। इसके बाद उन्हें चुपचाप पुराने एयर फोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद फिर वे आधिकारिक प्लेन यानी कि एयरफोर्स वन में बैठ गए और उसी से अमेरिका पहुंचे। ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी। वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे। कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे। इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी अधिकारी बोले- मोदी-ट्रम्प टैरिफ का मुद्दा सुलझाएंगे:कहा- उनके बीच अच्छे संबंध; 5 दिन पहले अमेरिका में भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल पास हुआ था अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नवारो ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। दोनों नेता रूसी तेल से जुड़े 100% टैरिफ के मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। पूरी खबर पढ़ें… 8 जुलाई को बदला गया विमान यह खतरा 8 जुलाई को सामने आया, जब ट्रम्प नाटो शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन अंकारा से रवाना होने की तैयारी कर रहे थे। ट्रम्प ने सार्वजनिक

Trump Iran Threat | Turkiye NATO Summit Security Alert & Plane Change

Trump Iran Threat | Turkiye NATO Summit Security Alert & Plane Change

4 घंटे पहले कॉपी लिंक 7 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प तुर्किये के अंकारा में हुए NATO शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे। – फाइल फोटो ईरानी एजेंट्स को पता था कि 7 जुलाई को तुर्की के अंकारा में हुए NATO समिट में ट्रम्प किस बिल्डिंग में रुके हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस ने यह आकलन किया है। ईरान को यह भी पता था कि ट्रम्प बिल्डिंग के किस फ्लोर पर रुके हैं। इसी जानकारी के बाद ट्रम्प को तुर्की से दूसरे विमान में ले जाया गया। मंगलवार को ट्रम्प ने भी ईरान के डर से विमान बदलने की बात मानी थी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से नाटो समिट में हिस्सा लेने गए थे, उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। ट्रम्प ने यह भी बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया। ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन में दाखिल हुए एयरफोर्स वन के पीछे एक केटरिंग ट्रक नजर आ रही है ट्रम्प के खिलाफ खास खतरे की जानकारी मिली रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रम्प को ले जाने वाले किसी भी विमान पर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल से हमला किया जा सकता था। अमेरिकी इंटेलिजेंस को पता चला कि नाटो शिखर सम्मेलन के आसपास एक व्यक्ति कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ भी देखा गया था। इसके बाद सीक्रेट सर्विस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने ट्रम्प को तुर्की से निकालने के लिए ऑपरेशन तैयार किया। कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था। इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया। वॉशिंगटन पोस्ट को मिले वीडियो में केटरिंग गाड़ी को पुराने एयरफोर्स वन के पास से निकलकर छोटे विमान की तरफ जाते देखा जा सकता है। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं। तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी पुराने एयर फोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी। उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी। ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।” ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे। इसके बाद उन्हें चुपचाप पुराने एयर फोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद फिर वे आधिकारिक प्लेन यानी कि एयरफोर्स वन में बैठ गए और उसी से अमेरिका पहुंचे। ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी। वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे। कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे। इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी अधिकारी बोले- मोदी-ट्रम्प टैरिफ का मुद्दा सुलझाएंगे:कहा- उनके बीच अच्छे संबंध; 5 दिन पहले अमेरिका में भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल पास हुआ था अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नवारो ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। दोनों नेता रूसी तेल से जुड़े 100% टैरिफ के मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। पूरी खबर पढ़ें… 8 जुलाई को बदला गया विमान यह खतरा 8 जुलाई को सामने आया, जब ट्रम्प नाटो शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन अंकारा से रवाना होने की तैयारी कर रहे थे। ट्रम्प ने सार्वजनिक