US-Iran Tension | Why Trump Avoided Military Attack Strategy Explained

वॉशिंगटन डीसी6 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 14 अगस्त को न्यूयॉर्क के गार्डन सिटी में भाषण देते हुए। अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ 60 दिन का समझौता सोमवार को खत्म हो गया। इसका मकसद दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध को रोकना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद का समाधान निकालना था। समयसीमा खत्म होने के बाद भी न तो कोई अंतिम समझौता हुआ और न ही अमेरिका ने ईरान पर नया बड़ा हमला शुरू किया। 60 दिनों के दौरान ट्रम्प ने कई बार कहा कि अगर बातचीत नाकाम रही तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। इसलिए माना जा रहा था कि डेडलाइन खत्म होते ही अमेरिका ईरान पर फिर बड़ा हमला कर सकता है। समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले ट्रम्प का रुख बदलता दिख रहा है। एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा, “हम इसे लो-की कर रहे हैं।” वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक अमेरिका, ईरान को तीन तरीके से घेर रहा है। 1. आर्थिक दबाव- ईरान की कमाई और अर्थव्यवस्था को कमजोर करना। 2. नौसैनिक नाकाबंदी- ईरान के लिए समुद्र के रास्ते व्यापार मुश्किल करना। 3. बातचीत- सीधे या दूसरे देशों के जरिए ईरान से समझौते की कोशिश करना। यानी अभी अमेरिका सीधे बड़ा हमला करने की बजाय ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहा है, समुद्र के रास्ते उसका व्यापार रोक रहा है और बातचीत के जरिए समझौते की कोशिश भी कर रहा है। बजाय इसके कि अमेरिका तुरंत फिर से बड़े युद्ध में उतर जाए। ट्रम्प हमला रोककर क्या हासिल करना चाहते हैं? ट्रम्प की मौजूदा रणनीति को समझने के लिए सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका युद्ध को खत्म नहीं मान रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार को कहा कि संघर्ष खत्म नहीं हुआ है और अमेरिका कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य तीनों तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि ट्रम्प को लगता है कि फिलहाल ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना सैन्य हमले से ज्यादा असरदार हो सकता है। अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ने ईरान की आर्थिक मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। ट्रम्प का मानना है कि अगर ईरान युद्ध में नहीं उलझा रहेगा तो उसे अपनी असली आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ेगा। जैसे कि बर्बाद बुनियादी ढांचा, कमजोर अर्थव्यवस्था, महंगाई और पैसों की कमी। यानी अमेरिका का दांव यह है कि युद्ध रोककर ईरान को कमजोर होने दिया जाए। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि युद्ध जारी रहने पर ईरानी सरकार संघर्ष को अपनी आर्थिक परेशानियों के लिए जिम्मेदार ठहरा सकती है। लेकिन जब युद्ध नहीं होगा, तब जनता और सरकार को आर्थिक संकट का सामना सीधे करना पड़ेगा। इसीलिए ट्रम्प फिलहाल सैन्य हमले की जगह आर्थिक दबाव को समय देना चाहते हैं। ईरान में गरीबी दर इस साल 40% से ज्यादा होने का अनुमान है। ट्रम्प को ईरान के खिलाफ रणनीति क्यों बदलनी पड़ी? ट्रम्प ने फरवरी में इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। शुरुआत में उम्मीद थी कि संघर्ष ज्यादा लंबा नहीं चलेगा, लेकिन यह कई महीनों तक खिंच गया। अब अमेरिका के सामने दो तरह का दबाव है। एक तरफ वह ईरान के खिलाफ अपने सैन्य लक्ष्य हासिल करना चाहता है, दूसरी तरफ लंबे युद्ध की बढ़ती लागत भी उसके लिए चिंता बन रही है। ट्रम्प लगातार कहते रहे हैं कि ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत है। एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका के सामने दो रास्ते हैं- या तो ईरान को आर्थिक रूप से टूटने दिया जाए या फिर उस पर बहुत बड़ा सैन्य हमला किया जाए। फिलहाल ट्रम्प पहला रास्ता आजमाते दिख रहे हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि अमेरिका ने टकराव खत्म कर दिया है। रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रम्प सरकार चीन की उन रिफाइनरियों पर नए प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है जो ईरानी तेल खरीदती हैं। इसके अलावा ईरान के साथ लेन-देन करने वाले चीनी बैंकों और उन संस्थाओं पर भी कार्रवाई की तैयारी है, जिन पर प्रतिबंधों से बचने में ईरान की मदद करने का आरोप है। यानी हमला भले ही रुका हुआ है, लेकिन दबाव कम नहीं हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा सौदेबाजी का मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव में होर्मुज स्ट्रेट सबसे बड़ा दांव बन गया है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। इसलिए होर्मुज स्ट्रेट को लेकर किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। ईरान इस मुद्दे पर ओमान के साथ बातचीत कर रहा है। 9 अगस्त को ईरानी अधिकारियों ने कहा था कि ओमान के साथ समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। लेकिन तेहरान ने यह भी साफ कर दिया कि ओमान के साथ समझौता होने का मतलब यह नहीं है कि होर्मुज स्ट्रेट तुरंत अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करे, प्रतिबंध हटाए और युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा दे। यानी अमेरिका चाहता है कि समुद्री रास्ते और जहाजों की आवाजाही सामान्य हो, जबकि ईरान इसे अमेरिकी रियायतों से जोड़कर देख रहा है। इसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट अब सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं रह गया है। यह दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा सौदेबाजी का हथियार बन चुका है। युद्ध की बड़ी कीमत चुका रहा अमेरिका सूत्रों के मुताबिक, ईरान के साथ पांच महीने चले युद्ध में अमेरिका ने लंबी दूरी तक मार करने वाली बड़ी संख्या में मिसाइलें इस्तेमाल की हैं। इनमें ATACMS और प्रिसीजन स्ट्राइक मिसाइल शामिल हैं। दो सूत्रों ने दावा किया कि अमेरिका ने इन हथियारों का लगभग पूरा भंडार इस्तेमाल कर लिया है, हालांकि उन्होंने सटीक संख्या नहीं बताई। अमेरिका युद्ध के दौरान कम से कम 45 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन भी गंवा चुका है। यह उसके कुल बेड़े का करीब 25% है। अमेरिकी वायुसेना के मुताबिक, एक रीपर ड्रोन की कीमत उसके उपकरणों के आधार पर 3 से 5 करोड़ डॉलर तक हो सकती है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, इन नुकसानों की कुल कीमत 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकती
ट्रम्प ने ओमान पर बमबारी की धमकी दी:कहा- ईरान मुद्दे पर बीच में न आए; IRGC का अमेरिका से बातचीत का दावा खारिज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर ओमान को बमबारी की धमकी दी है। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, ट्रम्प ने कहा कि अगर ओमान अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में बाधा बना, तो अमेरिका उस पर ‘बमबारी करेगा’। रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को फोन पर हुई बातचीत में ट्रम्प ने यह धमकी दी। हालांकि, ट्रम्प ने यह नहीं बताया कि ओमान ने ऐसा क्या किया था जिसे वह रुकावट मान रहे हैं। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि अमेरिका का ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ सीक्रेट बातचीत जारी है। हालांकि, IRGC ने कुछ देर बाद ही ट्रम्प के इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि अमेरिका के साथ उसकी कोई बातचीत नहीं हो रही है। अमेरिका-ईरान की बातचीत में ओमान मध्यस्थ देश ओमान लंबे समय से खुद को इस संघर्ष में तटस्थ देश बताता रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में भी वह मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद ईरान की ओर से ओमान पर कई हमले हुए, लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत कराने में उसकी भूमिका बनी रही। ट्रम्प का बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह पहली बार है जब उन्होंने मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान को सीधे सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है। होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी है पूरी बातचीत ओमान इस समय होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के मुद्दे पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में अहम भूमिका निभा रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही काफी हद तक रोक रखी है। दुनिया 20% कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस समुद्री मार्ग को दोबारा खोलना दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। ईरान बोला- जहाजों के रास्ते पर समझ बनी ट्रम्प की धमकी से कुछ घंटे पहले ईरान ने दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझ बन गई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोमवार को तेहरान में पत्रकारों से कहा कि दोनों पक्ष जहाजों के आने-जाने के रास्ते पर सहमत हो गए हैं। अब सिर्फ बाकी तकनीकी और प्रशासनिक विवरण तय किए जाने हैं, जिसके बाद संयुक्त बयान जारी किया जाएगा। IRGC ने ट्रम्प के दावे को झूठ बताया ट्रम्प के इस दावे को ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम न्यूज के हवाले से IRGC ने खारिज कर दिया। IRGC के एक प्रवक्ता ने कहा कि उसके अधिकारियों और अमेरिका के बीच किसी तरह की बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने ट्रम्प के बयान को झूठ बताते हुए कहा कि यह युद्ध में हार और निराशा से पैदा हुई उनकी कल्पना है। IRGC ईरान की सबसे प्रभावशाली सैन्य संस्थाओं में से एक है। देश की सुरक्षा, राजनीति और अर्थव्यवस्था में भी उसकी अहम भूमिका मानी जाती है। होर्मुज स्ट्रेट खोलने के बदले मुआवजा चाहता है ईरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस महीने की शुरुआत में कह चुके हैं कि होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका ईरान को मुआवजा देता है या नहीं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने दोनों देशों के बीच हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का उल्लंघन किया है। रॉयटर्स ने पहले एक ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया था कि ईरान चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के माल की कीमत का 5 से 7% शुल्क लिया जाए। ट्रम्प बोले- युद्ध खत्म करने की कोई जल्दी नहीं फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रम्प ने कहा कि उन्हें ईरान के साथ युद्ध खत्म करने की कोई जल्दी नहीं है। उन्होंने ईरान की तुलना अच्छे पोकर खिलाड़ी से करते हुए कहा कि ईरान के लोग अच्छे खिलाड़ी हैं, लेकिन वे मर रहे हैं। ट्रम्प ने कहा कि उनकी कोई समय सीमा तय नहीं है। नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों का भी उनके फैसलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने अमेरिका के हथियारों के भंडार को लेकर उठ रही चिंताओं को भी खारिज करते हुए कहा कि इस्तेमाल किए गए हथियार उसकी कुल सैन्य क्षमता के मुकाबले बहुत कम हैं। अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन का MoU आज खत्म हो रहा अमेरिका और ईरान के बीच 18 जून को हुआ 60 दिन का एमओयू 17 अगस्त को खत्म हो रहा है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रखना और स्थायी समझौते तक पहुंचना था। हालांकि, दोनों देशों ने बाद में एक-दूसरे पर फिर हमले शुरू कर दिए और 8 जुलाई को ट्रम्प ने युद्धविराम खत्म होने का ऐलान कर दिया। अब MoU की अवधि पूरी होने के बीच दोनों देशों के बीच बातचीत का सबसे अहम मुद्दा फिर से होर्मुज स्ट्रेट को खोलना बना हुआ है। ट्रम्प ने फिर दोहराया- ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे MoU की अवधि खत्म होने से पहले ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यही रहेगी कि ईरान किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल न कर सके। यानी एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, वहीं दूसरी तरफ ट्रम्प ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अपना सख्त रुख भी बनाए हुए हैं।
ट्रम्प ने ओमान पर बमबारी की धमकी दी:कहा- ईरान मुद्दे पर बीच में न आए; IRGC का अमेरिका से बातचीत का दावा खारिज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर ओमान को बमबारी की धमकी दी है। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, ट्रम्प ने कहा कि अगर ओमान अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में बाधा बना, तो अमेरिका उस पर ‘बमबारी करेगा’। रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को फोन पर हुई बातचीत में ट्रम्प ने यह धमकी दी। हालांकि, ट्रम्प ने यह नहीं बताया कि ओमान ने ऐसा क्या किया था जिसे वह रुकावट मान रहे हैं। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि अमेरिका का ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ सीक्रेट बातचीत जारी है। हालांकि, IRGC ने कुछ देर बाद ही ट्रम्प के इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि अमेरिका के साथ उसकी कोई बातचीत नहीं हो रही है। अमेरिका-ईरान की बातचीत में ओमान मध्यस्थ देश ओमान लंबे समय से खुद को इस संघर्ष में तटस्थ देश बताता रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में भी वह मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद ईरान की ओर से ओमान पर कई हमले हुए, लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत कराने में उसकी भूमिका बनी रही। ट्रम्प का बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह पहली बार है जब उन्होंने मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान को सीधे सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है। होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी है पूरी बातचीत ओमान इस समय होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के मुद्दे पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में अहम भूमिका निभा रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही काफी हद तक रोक रखी है। दुनिया 20% कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस समुद्री मार्ग को दोबारा खोलना दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। ईरान बोला- जहाजों के रास्ते पर समझ बनी ट्रम्प की धमकी से कुछ घंटे पहले ईरान ने दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझ बन गई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोमवार को तेहरान में पत्रकारों से कहा कि दोनों पक्ष जहाजों के आने-जाने के रास्ते पर सहमत हो गए हैं। अब सिर्फ बाकी तकनीकी और प्रशासनिक विवरण तय किए जाने हैं, जिसके बाद संयुक्त बयान जारी किया जाएगा। IRGC ने ट्रम्प के दावे को झूठ बताया ट्रम्प के इस दावे को ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम न्यूज के हवाले से IRGC ने खारिज कर दिया। IRGC के एक प्रवक्ता ने कहा कि उसके अधिकारियों और अमेरिका के बीच किसी तरह की बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने ट्रम्प के बयान को झूठ बताते हुए कहा कि यह युद्ध में हार और निराशा से पैदा हुई उनकी कल्पना है। IRGC ईरान की सबसे प्रभावशाली सैन्य संस्थाओं में से एक है। देश की सुरक्षा, राजनीति और अर्थव्यवस्था में भी उसकी अहम भूमिका मानी जाती है। होर्मुज स्ट्रेट खोलने के बदले मुआवजा चाहता है ईरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस महीने की शुरुआत में कह चुके हैं कि होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका ईरान को मुआवजा देता है या नहीं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने दोनों देशों के बीच हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का उल्लंघन किया है। रॉयटर्स ने पहले एक ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया था कि ईरान चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के माल की कीमत का 5 से 7% शुल्क लिया जाए। ट्रम्प बोले- युद्ध खत्म करने की कोई जल्दी नहीं फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रम्प ने कहा कि उन्हें ईरान के साथ युद्ध खत्म करने की कोई जल्दी नहीं है। उन्होंने ईरान की तुलना अच्छे पोकर खिलाड़ी से करते हुए कहा कि ईरान के लोग अच्छे खिलाड़ी हैं, लेकिन वे मर रहे हैं। ट्रम्प ने कहा कि उनकी कोई समय सीमा तय नहीं है। नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों का भी उनके फैसलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने अमेरिका के हथियारों के भंडार को लेकर उठ रही चिंताओं को भी खारिज करते हुए कहा कि इस्तेमाल किए गए हथियार उसकी कुल सैन्य क्षमता के मुकाबले बहुत कम हैं। अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन का MoU आज खत्म हो रहा अमेरिका और ईरान के बीच 18 जून को हुआ 60 दिन का एमओयू 17 अगस्त को खत्म हो रहा है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रखना और स्थायी समझौते तक पहुंचना था। हालांकि, दोनों देशों ने बाद में एक-दूसरे पर फिर हमले शुरू कर दिए और 8 जुलाई को ट्रम्प ने युद्धविराम खत्म होने का ऐलान कर दिया। अब MoU की अवधि पूरी होने के बीच दोनों देशों के बीच बातचीत का सबसे अहम मुद्दा फिर से होर्मुज स्ट्रेट को खोलना बना हुआ है। ट्रम्प ने फिर दोहराया- ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे MoU की अवधि खत्म होने से पहले ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यही रहेगी कि ईरान किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल न कर सके। यानी एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, वहीं दूसरी तरफ ट्रम्प ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अपना सख्त रुख भी बनाए हुए हैं।
नेचिरवान बरजानी कौन हैं, जिनके जरिए हुई अमेरिका-ईरान बातचीत:ट्रम्प IRGC चीफ तक नहीं पहुंच पाए, बरजानी के जरिए हुई सीक्रेट बात

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान मई में दोनों देशों ने बातचीत के लिए एक सीक्रेट चैनल बनाया था। अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस के मुताबिक, इस बातचीत में इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिरवान बरजानी ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। बरजानी ऐसे नेता हैं, जिन पर अमेरिका और ईरान दोनों भरोसा करते हैं। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर बातचीत शुरू होनी थी। अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की तरफ से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची बातचीत का नेतृत्व कर रहे थे। ऐसे में अमेरिकी सरकार यह पता करना चाहती थी कि, ईरान की ओर से बातचीत कर रहे इन दोनों नेताओं को IRGC का समर्थन हासिल है या नहीं। इसके लिए बरजानी ने IRGC कमांडर जनरल अहमद वाहिदी से बात की। IRGC चीफ से संपर्क नहीं कर पा रहा था अमेरिका दरअसल, अमेरिका खुद वाहिदी से संपर्क नहीं कर पा रहा था। ईरान में सिर्फ सरकार की सहमति काफी नहीं होती। परमाणु और सुरक्षा मामलों में IRGC की भी बड़ी भूमिका है। इसलिए ट्रम्प टीम जानना चाहती थी कि, बातचीत में जो वादे किए जा रहे हैं, उन्हें IRGC का भी समर्थन हासिल है या नहीं। अमेरिका को बरजानी की जरूरत क्यों पड़ी नेचिरवान बरजानी इराक के उत्तरी हिस्से में मौजूद कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति हैं। यह इलाका इराक का हिस्सा है, लेकिन यहां की अपनी सरकार, विधानसभा और सुरक्षा बल हैं। यानी कई मामलों में यह अपने फैसले खुद लेता है। इसकी राजधानी एरबिल है। कुर्दिस्तान क्षेत्र लंबे समय से अमेरिका का करीबी सहयोगी रहा है। वहीं, इराक से लगी सीमा होने की वजह से उसके ईरान से भी अच्छे रिश्ते हैं। इसी कारण नेचिरवान बरजानी दोनों देशों के बीच भरोसेमंद नेता माने जाते हैं और कई बार तनाव के दौरान बातचीत कराने की भूमिका निभा चुके हैं। बरजानी के ईरान से पुराने संबंध हैं। ईरान-इराक युद्ध के दौरान उन्होंने ईरान में समय बिताया और तेहरान यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। वह फारसी भाषा बोलते हैं और ईरान के कई बड़े नेताओं से उनके निजी संबंध हैं। इसी वजह से बरजानी दोनों देशों के बीच भरोसेमंद कड़ी बन सके। उन्हें ऐसा नेता माना जाता है, जो बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश करता है। तुलसी गबार्ड ने बरजानी से संपर्क किया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की तत्कालीन राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने करीब 10 मई को बरजानी से पहली बार संपर्क किया। गबार्ड ने उनसे कहा कि अमेरिका को IRGC चीफ जनरल अहमद वाहिदी से संपर्क करने में उनकी मदद चाहिए। गबार्ड ने बरजानी से कहा कि वह राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति वेंस की मंजूरी के बाद उनसे बातचीत कर रही हैं। गबार्ड को यह भी पता करना चाहता था कि IRGC की अमेरिका से कोई अलग मांग तो नहीं है। बरजानी की IRGC चीफ से इन्क्रिप्टेड फोन पर बातचीत बरजानी ने गबार्ड की बात मानकर IRGC से संपर्क किया और वाहिदी तक अपना मैसेज पहुंचाया। वाहिदी ने इसके बाद बरजानी से सीधे बातचीत की इच्छा जताई। इसके बाद 14 मई को IRGC के एक अफसर ने राजधानी एरबिल में बरजानी के ऑफिस में मुलाकात की। अफसर ने बरजानी को एक एन्क्रिप्टेड फोन दिया, ताकि वह सुरक्षित तरीके से वाहिदी से बात कर सकें। इसके बाद ही बरजानी और वाहिदी की अमेरिका को लेकर सीधे बातचीत हुई। बरजानी ने वाहिदी से पूछा कि क्या वह ईरान की ओर से बातचीत कर रहे गालिबाफ और अराघची के साथ हैं। वाहिदी ने इसका जवाब हां में दिया था। वाहिदी का मैसेज व्हाइट हाउस तक पहुंचाया बातचीत के बाद बरजानी ने तुलसी गबार्ड से संपर्क किया और वाहिदी का मैसेज उन्हें बताया। इस बातचीत से ट्रम्प सरकार को यह भरोसा मिला कि ईरान की ओर से बातचीत कर रहे गालिबाफ और अराघची को IRGC का समर्थन हासिल है। इसके बाद ट्रम्प सरकार ने बरजानी से एक और मदद मांगी। अमेरिका चाहता था कि वह एरबिल में अमेरिकी और ईरानी डेलिगेशन की गुप्त बातचीत की मेजबानी करें। हालांकि, यह बैठक नहीं हो सकी। ईरान ने इसे ठुकरा दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी पक्ष को अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता थी।
अमिताभ बच्चन ने ₹21.88 करोड़ में 3-फ्लोर किराए पर दिए:हर महीने ₹33 लाख किराया मिलेगा; न्यूट्रिशन ब्रांड से 5 साल के लिए डील साइन

बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने मुंबई के रियल एस्टेट मार्केट में एक और बड़ी डील की है। उन्होंने मुंबई के अंधेरी वेस्ट इलाके में स्थित ‘सिग्नेचर’ बिल्डिंग में अपने 3 फ्लोर 5 साल के लिए किराए पर दिए हैं। इस प्रॉपर्टी से अमिताभ बच्चन को हर महीने 33 लाख रुपए मिलेंगे। 5 साल की पूरी लीज अवधि के दौरान उन्हें कुल ₹21.88 करोड़ की कमाई होगी। 8,428 वर्ग फीट कारपेट एरिया और 9 गाड़ियों की पार्किंग प्रॉपर्टी डॉक्युमेंट्स के मुताबिक, अमिताभ बच्चन ने यह जगह ‘ट्रूनैटिव’ नाम की एक न्यूट्रिशन कंपनी को किराए पर दी है। इस कंपनी को इस्तेमाल के लिए करीब 8428 वर्ग फीट जगह मिली है। इसके साथ ही, कंपनी के लोगों के लिए बिल्डिंग में 9 गाड़ियां खड़ी करने की खास पार्किंग भी अलग से दी गई है। नियम और शर्तें: इस रेंट एग्रीमेंट पर सरकारी मुहर 7 अगस्त को लगी थी, लेकिन कंपनी का किराया 15 अगस्त 2026 से शुरू माना गया है। एग्रीमेंट में यह शर्त भी रखी गई है कि हर साल इस जगह का किराया 5% बढ़ेगा। यानी जैसे-जैसे साल बीतेंगे, अमिताभ बच्चन को मिलने वाला महीने का किराया और ज्यादा होता जाएगा। पिछले साल वॉर्नर म्यूजिक को दिए थे 4 ऑफिस अमिताभ बच्चन के लिए प्रॉपर्टी किराए पर देकर मोटी कमाई करना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले साल 2023 में भी उन्होंने मुंबई की लोटस सिग्नेचर बिल्डिंग में अपने 4 ऑफिस वार्नर म्यूजिक प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी को किराए पर दिए थे। यह डील मार्च 2024 में हुई थी। इस डील से अमिताभ बच्चन को हर महीने ₹17.30 लाख का किराया मिल रहा है। इस सौदे के तहत उस कंपनी को गाड़ियां खड़ी करने के लिए 12 पार्किंग स्पेस भी दिए गए थे। अयोध्या में भी खरीदी ₹35 करोड़ की जमीन मुंबई के अलावा अमिताभ बच्चन ने यूपी के अयोध्या में भी प्रॉपर्टी खरीदी है। इसी साल मार्च में उन्होंने 2.67 एकड़ जमीन 35 करोड़ रुपए में ली है। जिस कंपनी (अभिनंदन लोढ़ा ग्रुप) से उन्होंने यह जमीन खरीदी है, उनका कहना है कि अयोध्या में बिग-बी का यह तीसरा बड़ा निवेश है। कंपनी के मुताबिक, जमीन 75 एकड़ में बन रहे लग्जरी प्रोजेक्ट ‘द सरयू’ के पास और राम मंदिर से सिर्फ 15-20 मिनट की दूरी पर है। कब-कब जमीनें खरीदीं वर्क फ्रंट: कौन बनेगा करोड़पति का 18वां सीजन होस्ट कर रहे फिल्मों और बिजनेस इन्वेस्टमेंट्स के साथ-साथ बिग बी TV स्क्रीन पर भी एक्टिव हैं। 80 पार की उम्र में भी उनका वर्क कमिटमेंट जारी है। इन दिनों वे लोकप्रिय क्विज रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) के 18वें सीजन को होस्ट कर रहे हैं। नॉलेज पार्ट: कारपेट एरिया और लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट क्या है ?
Bombay High Court Clerk Exam Controversy

Hindi News Career Bombay High Court Clerk Exam Controversy | Chhatrapati Sambhaji Nagar कुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में 16 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट क्लर्क भर्ती का टाइपिंग एग्जाम आयोजित किया गया था। इस परीक्षा को लेकर उम्मीदवारों का आरोप है कि एग्जाम के दौरान कई कम्प्यूटर, माउस और की-बोर्ड ने काम करना बंद कर दिया। यह एग्जाम मुंबई के कई परीक्षा केंद्रों पर हुआ था। कल्याण में 600 से अधिक उम्मीदवारों का प्रदर्शन परीक्षा 10 मिनट की थी, जिसमें 400 शब्दों का टाइपिंग पैसेज था। कई उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद सिस्टम ने उन्हें लॉग आउट कर दिया। कल्याण, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड, वाशिम और भंडारा समेत कई केंद्रों से तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें सामने आईं। कल्याण में 600 से अधिक उम्मीदवारों ने विरोध प्रदर्शन किया। कुछ केंद्रो से मिली तकनीकी खामियों की शिकायत बॉम्बे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ने कहा कि महाराष्ट्र में परीक्षा सामान्य रूप से आयोजित हुई, लेकिन कुछ केंद्रों, खासकर कल्याण और छत्रपति संभाजीनगर में तकनीकी समस्याओं की शिकायतें मिली हैं। एजेंसी की प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं की जांच की जा रही है हालांकि छात्रों का कहना है कि ये हमारा फेलियर नहीं है, ये सिस्टम की गलती है। उम्मीदवारों ने कहा कि जब इसकी कंप्लेंट की गई तो अथॉरिटीज ने कहा कि इन बच्चों में अक्ल नहीं है एग्जाम कैसे दिया जाता है। दीपके छात्रों के पक्ष में बोले छत्रपति संभाजीनगर में छात्रों के प्रदर्शन में अभिजीत दीपके भी शामिल होने पहुंचे। दीपके ने कहा – यह सिस्टम और सरकार की विफलता है, जो ऑनलाइन परीक्षा ठीक से कराने में सक्षम नहीं है। जब छात्रों ने अंदर अधिकारियों से शिकायत की तो उनसे कहा गया कि उनमें परीक्षा ठीक से देने की समझ नहीं है। अगर अधिकारियों के पास इन छात्रों से ज्यादा समझ थी तो उन्हें इसका इस्तेमाल बेहतर कंप्यूटर और काम करने वाले कीबोर्ड लगाने के साथ परीक्षा से पहले सर्वर को ठीक से चलने की स्थिति में रखने के लिए करना चाहिए था। दीपके ने कहा – परीक्षा केंद्र में एक जिला अदालत के जज मौजूद थे। उन्हें बाहर आकर लिखित आश्वासन देना चाहिए कि परीक्षा दोबारा कराई जाएगी और आज इस्तेमाल किए गए खराब कंप्यूटरों पर नहीं कराई जाएगी। ऐसी स्थिति दोबारा नहीं होनी चाहिए। छात्रों का भविष्य दांव पर है। अगर जिला न्यायाधीश बात करना चाहते हैं तो उन्हें यहां आना चाहिए परीक्षाएं ठीक से नहीं करा पाते तो आयोजित ही क्यों करते हो दीपके ने आगे कहा – अगर आपके पास जरूरी बुनियादी ढांचा नहीं है और आप ऑनलाइन परीक्षाएं ठीक से नहीं करा सकते तो इन्हें आयोजित ही क्यों करते हैं? यह पहली बार नहीं है। पूरे देश में और महाराष्ट्र में ऑनलाइन परीक्षाओं के दौरान सर्वर क्रैश होने या कीबोर्ड और माउस जैसे हार्डवेयर के काम नहीं करने की घटनाएं होती रहती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा हर परीक्षा में होता है। एक ऑनलाइन परीक्षा का नाम बताइए जो बिना किसी समस्या के हुई हो। जब आपको अच्छी तरह पता है कि आप इन ऑनलाइन परीक्षाओं को संभालने में सक्षम नहीं हैं, तो फिर इन्हें आयोजित करके छात्रों का भविष्य खतरे में क्यों डालते हैं। परीक्षा तीन सेशन में हाईकोर्ट की नागपुर और औरंगाबाद बेंच के तहत 1,300 क्लर्क पदों के लिए आयोजित की गई थी। तकनीकी गड़बड़ी की शिकायत सुबह 10 बजे से 11:15 बजे वाले सेशन में सामने आई। —————————————————————————— ये खबर भी पढ़ें एग्जाम रूम में पंखे न होने से 2 छात्राएं बेहोश:गुस्से में छात्राओं ने प्रिंसिपल के कमरे का पंखा बंद किया, दो घंटे तक बंधक बनाकर रखा दरभंगा के बहेड़ा में 12 अगस्त को ग्रेजुएशन के चौथे सेमेस्टर की परीक्षा चल रही थी। उस दौरान भीषण गर्मी और उमस के चलते दो छात्राएं बेहोश हो गईं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
पत्नी से विवाद के बीच थाईलैंड डांस करने पहुंचे गोविंदा:सुनीता का आरोप- बेटी की उम्र की लड़की घुमा रहे; गोविंदा बोले- हद में रहो,

एक्टर गोविंदा इन दिनों अपनी निजी जिंदगी और पत्नी सुनीता आहूजा के साथ चल रहे विवाद को लेकर चर्चा में हैं। इस बीच गोविंदा का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें वे थाईलैंड के पट्टाया स्थित एक क्लब में डांस करते नजर आ रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में गोविंदा अपने 90 के दशक के हिट गानों पर थिरकते दिखे। ब्लैक एंड व्हाइट सूट पहने गोविंदा बैकग्राउंड डांसर्स के साथ अपने सिग्नेचर स्टेप्स करते दिख रहे हैं। पट्टाया के क्लब में ‘सोनी दे नखरे’ पर दी परफॉर्मेंस क्लब में परफॉर्मेंस के दौरान गोविंदा ब्लैक एंड व्हाइट रंग के फॉर्मल सूट में नजर आए। स्टेज पर उनके साथ बैकग्राउंड डांसर्स की टीम भी मौजूद थी, जो उनके गानों की बीट्स पर ताल मिला रही थी। वायरल हो रहे वीडियो में गोविंदा ने अपनी सुपरहिट फिल्मों के गानों ‘सोनी दे नखरे’ और ‘सोने लगदे’ पर डांस किया। वे स्टेज पर पूरे जोश के साथ अपने पुराने अंदाज में डांस स्टेप्स करते नजर आ रहे हैं। कोमल रानी स्वर्णकार के साथ दिखे थे गोविंदा यह वीडियो ऐसे समय पर सामने आया है जब गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के बीच अनबन की खबरें चल रही हैं। कुछ समय पहले गोविंदा को मुंबई एयरपोर्ट पर अपनी आने वाली फिल्म की डेब्यू एक्ट्रेस कोमल रानी स्वर्णकार के साथ देखा गया था। दोनों का साथ में वीडियो वायरल होने के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में उनके अफेयर की अटकलें लगाई जाने लगी थीं। पत्नी बोलीं- बेटी की उम्र की लड़की घुमा रहे एक्ट्रेस के साथ दिखने पर सुनीता ने कहा, गोविंदा अपनी बेटी की उम्र की लड़की को लेकर घूम रहे हैं और उन्हें इस बात पर थोड़ी शर्म आनी चाहिए। सुनीता आहूजा ने गोविंदा साथ दिखीं एक्ट्रेस कोमल के ड्रेसिंग सेंस पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर सामने वाले का शुगर डैडी इतना अमीर है, तो कम से कम कपड़े तो ढंग के पहनने चाहिए। इंसान का अपना एक स्टैंडर्ड होना चाहिए। सुनीता ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि लोगों को देखना चाहिए कि वे किस तरह स्टाइल के साथ रहते हैं। उन्होंने पूरे वाकये को बहुत खराब और घटिया सोच करार दिया। गोविंदा बोले- हद में रहिए, बदनाम मत कीजिए पत्नी सुनीता के आपत्तिजनक बयानों पर गोविंदा भड़क गए। गोविंदा ने चेतावनी देकर कहा है कि उन्हें हद में रहना चाहिए। साथ ही एक्टर ने को-स्टार का बचाव भी किया और कहा कि सुनीता उन्हें बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। हाल ही में गोविंदा ने सुनीता पर कहा- ‘जो काम बाहर मिलता है, वो मैं करता नहीं हूं और जो मैं कर रहा हूं, उसमें आप हस्तक्षेप कर रही हैं। और जब अपना काम आप कर रही थीं, फिर चाहे वो कुकिंग शो (लाफ्टर शेफ) हो या लॉकअप हो, टीना (बेटी) से कहकर मुझे उसमें बुलवाया, मेरी सेवाएं लीं।
पत्नी से विवाद के बीच थाईलैंड डांस करने पहुंचे गोविंदा:सुनीता का आरोप- बेटी की उम्र की लड़की घुमा रहे; गोविंदा बोले- हद में रहो,

एक्टर गोविंदा इन दिनों अपनी निजी जिंदगी और पत्नी सुनीता आहूजा के साथ चल रहे विवाद को लेकर चर्चा में हैं। इस बीच गोविंदा का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें वे थाईलैंड के पट्टाया स्थित एक क्लब में डांस करते नजर आ रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में गोविंदा अपने 90 के दशक के हिट गानों पर थिरकते दिखे। ब्लैक एंड व्हाइट सूट पहने गोविंदा बैकग्राउंड डांसर्स के साथ अपने सिग्नेचर स्टेप्स करते दिख रहे हैं। पट्टाया के क्लब में ‘सोनी दे नखरे’ पर दी परफॉर्मेंस क्लब में परफॉर्मेंस के दौरान गोविंदा ब्लैक एंड व्हाइट रंग के फॉर्मल सूट में नजर आए। स्टेज पर उनके साथ बैकग्राउंड डांसर्स की टीम भी मौजूद थी, जो उनके गानों की बीट्स पर ताल मिला रही थी। वायरल हो रहे वीडियो में गोविंदा ने अपनी सुपरहिट फिल्मों के गानों ‘सोनी दे नखरे’ और ‘सोने लगदे’ पर डांस किया। वे स्टेज पर पूरे जोश के साथ अपने पुराने अंदाज में डांस स्टेप्स करते नजर आ रहे हैं। कोमल रानी स्वर्णकार के साथ दिखे थे गोविंदा यह वीडियो ऐसे समय पर सामने आया है जब गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के बीच अनबन की खबरें चल रही हैं। कुछ समय पहले गोविंदा को मुंबई एयरपोर्ट पर अपनी आने वाली फिल्म की डेब्यू एक्ट्रेस कोमल रानी स्वर्णकार के साथ देखा गया था। दोनों का साथ में वीडियो वायरल होने के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में उनके अफेयर की अटकलें लगाई जाने लगी थीं। पत्नी बोलीं- बेटी की उम्र की लड़की घुमा रहे एक्ट्रेस के साथ दिखने पर सुनीता ने कहा, गोविंदा अपनी बेटी की उम्र की लड़की को लेकर घूम रहे हैं और उन्हें इस बात पर थोड़ी शर्म आनी चाहिए। सुनीता आहूजा ने गोविंदा साथ दिखीं एक्ट्रेस कोमल के ड्रेसिंग सेंस पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर सामने वाले का शुगर डैडी इतना अमीर है, तो कम से कम कपड़े तो ढंग के पहनने चाहिए। इंसान का अपना एक स्टैंडर्ड होना चाहिए। सुनीता ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि लोगों को देखना चाहिए कि वे किस तरह स्टाइल के साथ रहते हैं। उन्होंने पूरे वाकये को बहुत खराब और घटिया सोच करार दिया। गोविंदा बोले- हद में रहिए, बदनाम मत कीजिए पत्नी सुनीता के आपत्तिजनक बयानों पर गोविंदा भड़क गए। गोविंदा ने चेतावनी देकर कहा है कि उन्हें हद में रहना चाहिए। साथ ही एक्टर ने को-स्टार का बचाव भी किया और कहा कि सुनीता उन्हें बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। हाल ही में गोविंदा ने सुनीता पर कहा- ‘जो काम बाहर मिलता है, वो मैं करता नहीं हूं और जो मैं कर रहा हूं, उसमें आप हस्तक्षेप कर रही हैं। और जब अपना काम आप कर रही थीं, फिर चाहे वो कुकिंग शो (लाफ्टर शेफ) हो या लॉकअप हो, टीना (बेटी) से कहकर मुझे उसमें बुलवाया, मेरी सेवाएं लीं।
Xi Jinping Statement on Tiananmen Protest

बीजिंग16 मिनट पहले कॉपी लिंक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में हजारों अधिकारियों और प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 1989 के तियानमेन प्रदर्शन को रोकने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी की गई कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जियांग जेमिन की भी तारीफ की। शी ने कहा कि उस समय जियांग ने पार्टी के फैसले का साथ दिया और शंघाई में हालात को काबू में रखने में अहम भूमिका निभाई। शी ने यह बात सोमवार को पूर्व राष्ट्रपति जियांग जेमिन की 100वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने चीन के सामने मौजूद चुनौतियों का भी जिक्र किया। शी ने लोगों से मुश्किल वक्त में हार न मानने और हर चुनौती का डटकर सामना करने की अपील की। जिनपिंग ने कहा कि चीन के सामने चाहे कितनी भी बड़ी चुनौती आए, वह पीछे नहीं हटेगा। शी जिनपिंग ने अपने भाषण में 1989 में तियानमेन स्क्वायर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई खूनी कार्रवाई की तारीफ की। 1989 में तियानमेन स्क्वायर पर क्या हुआ था? 1989 में चीन की राजधानी बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर पर लोकतांत्रिक सुधारों की मांग को लेकर बड़े प्रदर्शन हुए थे। कई हफ्तों तक चले इन प्रदर्शनों में हजारों छात्र और आम नागरिक शामिल हुए थे। इसके बाद चीनी सेना ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया और प्रदर्शन को कुचल दिया। कार्रवाई में सेना और टैंकों का इस्तेमाल किया गया था। इस घटना में कितने लोगों की मौत हुई, इसका कोई पक्का आंकड़ा नहीं है। चीन की सरकार ने 200 से ज्यादा लोगों की मौत की बात कही थी। वहीं, अलग-अलग विदेशी स्रोतों और अनुमानों में मृतकों की संख्या सैकड़ों से लेकर हजारों तक बताई गई है। तियानमेन की यह घटना आज भी चीन में बेहद संवेदनशील मानी जाती है। इस घटना से जुड़ी चर्चा और जानकारी के प्रसार पर चीन में कड़े प्रतिबंध हैं। टैंक मैन को तियानमेन नरसंहार के दौरान हुए विरोध के प्रतीकों में से एक माना जाता है। तियानमेन के बाद जियांग जेमिन बने चीन के टॉप लीडर तियानमेन प्रदर्शन कुचले जाने के कुछ समय बाद जियांग जेमिन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव बने थे। उनसे पहले इस पद पर झाओ जियांग थे। झाओ जियांग को प्रदर्शनकारियों के प्रति नरम रुख रखने वाला माना गया था। इसी वजह से उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद जियांग जेमिन तेजी से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में पहुंचे। 1993 तक जियांग चीन के सबसे ताकतवर नेताओं में शामिल हो चुके थे। वे 1993 से 2002 तक चीन के राष्ट्रपति रहे। 30 नवंबर 2022 को 96 साल की उम्र में उनका निधन हुआ था। चीन में 1980 के दशक के अंत से 2000 के दशक की शुरुआत तक देश का नेतृत्व करने वाले जियांग जेमिन को उनके जन्म की 100वीं वर्षगांठ पर याद किया गया। जियांग ने चीन की इकोनॉमी दुनिया के लिए खोली जियांग जेमिन के शासनकाल में चीन की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी। इस दौरान चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को दुनिया के लिए और खोला। अमेरिका के साथ उसके रिश्तों में भी सुधार हुआ। 2001 में चीन विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ का सदस्य बना। उस समय अमेरिका ने भी चीन के डब्ल्यूटीओ में शामिल होने का समर्थन किया था। इसके बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन की भूमिका और मजबूत हुई। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन के रिश्ते काफी बदल गए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर कई बार तनाव बढ़ा है। इसके अलावा ताइवान, तकनीक और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी दोनों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक टकराव बढ़ा है। जिनपिंग ने चीन की उपलब्धियों का जिक्र किया शी ने अपने भाषण में चीन की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चीन के लोगों का जीवन लगातार बेहतर हो रहा है। हालांकि, हाल के आर्थिक आंकड़े चीन की आर्थिक विकास दर में धीमापन दिखा रहे हैं। इसके बावजूद शी ने चीन के भविष्य को लेकर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि चीनी राष्ट्र के महान पुनरुत्थान की संभावनाएं उज्ज्वल हैं। उनके मुताबिक, कई पीढ़ियों से चीन जिस सपने को पूरा करने के लिए मेहनत कर रहा है, वह धीरे-धीरे हकीकत बन रहा है। जियांग जेमिन की 100वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में चीन के शीर्ष नेता मौजूद रहे। चीन की सबसे ताकतवर पोलित ब्यूरो स्थायी समिति के सभी सात सदस्य कार्यक्रम में शामिल हुए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Xi Jinping Statement on Tiananmen Protest

बीजिंग44 मिनट पहले कॉपी लिंक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में हजारों अधिकारियों और प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 1989 के तियानमेन प्रदर्शन को रोकने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी की गई कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जियांग जेमिन की भी तारीफ की। शी ने कहा कि उस समय जियांग ने पार्टी के फैसले का साथ दिया और शंघाई में हालात को काबू में रखने में अहम भूमिका निभाई। शी ने यह बात सोमवार को पूर्व राष्ट्रपति जियांग जेमिन की 100वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने चीन के सामने मौजूद चुनौतियों का भी जिक्र किया। शी ने लोगों से मुश्किल वक्त में हार न मानने और हर चुनौती का डटकर सामना करने की अपील की। जिनपिंग ने कहा कि चीन के सामने चाहे कितनी भी बड़ी चुनौती आए, वह पीछे नहीं हटेगा। शी जिनपिंग ने अपने भाषण में 1989 में तियानमेन स्क्वायर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई खूनी कार्रवाई की तारीफ की। 1989 में तियानमेन स्क्वायर पर क्या हुआ था? 1989 में चीन की राजधानी बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर पर लोकतांत्रिक सुधारों की मांग को लेकर बड़े प्रदर्शन हुए थे। कई हफ्तों तक चले इन प्रदर्शनों में हजारों छात्र और आम नागरिक शामिल हुए थे। इसके बाद चीनी सेना ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया और प्रदर्शन को कुचल दिया। कार्रवाई में सेना और टैंकों का इस्तेमाल किया गया था। इस घटना में कितने लोगों की मौत हुई, इसका कोई पक्का आंकड़ा नहीं है। चीन की सरकार ने 200 से ज्यादा लोगों की मौत की बात कही थी। वहीं, अलग-अलग विदेशी स्रोतों और अनुमानों में मृतकों की संख्या सैकड़ों से लेकर हजारों तक बताई गई है। तियानमेन की यह घटना आज भी चीन में बेहद संवेदनशील मानी जाती है। इस घटना से जुड़ी चर्चा और जानकारी के प्रसार पर चीन में कड़े प्रतिबंध हैं। टैंक मैन को तियानमेन नरसंहार के दौरान हुए विरोध के प्रतीकों में से एक माना जाता है। तियानमेन के बाद जियांग जेमिन बने चीन के टॉप लीडर तियानमेन प्रदर्शन कुचले जाने के कुछ समय बाद जियांग जेमिन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव बने थे। उनसे पहले इस पद पर झाओ जियांग थे। झाओ जियांग को प्रदर्शनकारियों के प्रति नरम रुख रखने वाला माना गया था। इसी वजह से उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद जियांग जेमिन तेजी से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में पहुंचे। 1993 तक जियांग चीन के सबसे ताकतवर नेताओं में शामिल हो चुके थे। वे 1993 से 2002 तक चीन के राष्ट्रपति रहे। 30 नवंबर 2022 को 96 साल की उम्र में उनका निधन हुआ था। चीन में 1980 के दशक के अंत से 2000 के दशक की शुरुआत तक देश का नेतृत्व करने वाले जियांग जेमिन को उनके जन्म की 100वीं वर्षगांठ पर याद किया गया। जियांग ने चीन की इकोनॉमी दुनिया के लिए खोली जियांग जेमिन के शासनकाल में चीन की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी। इस दौरान चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को दुनिया के लिए और खोला। अमेरिका के साथ उसके रिश्तों में भी सुधार हुआ। 2001 में चीन विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ का सदस्य बना। उस समय अमेरिका ने भी चीन के डब्ल्यूटीओ में शामिल होने का समर्थन किया था। इसके बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन की भूमिका और मजबूत हुई। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन के रिश्ते काफी बदल गए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर कई बार तनाव बढ़ा है। इसके अलावा ताइवान, तकनीक और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी दोनों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक टकराव बढ़ा है। जिनपिंग ने चीन की उपलब्धियों का जिक्र किया शी ने अपने भाषण में चीन की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चीन के लोगों का जीवन लगातार बेहतर हो रहा है। हालांकि, हाल के आर्थिक आंकड़े चीन की आर्थिक विकास दर में धीमापन दिखा रहे हैं। इसके बावजूद शी ने चीन के भविष्य को लेकर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि चीनी राष्ट्र के महान पुनरुत्थान की संभावनाएं उज्ज्वल हैं। उनके मुताबिक, कई पीढ़ियों से चीन जिस सपने को पूरा करने के लिए मेहनत कर रहा है, वह धीरे-धीरे हकीकत बन रहा है। जियांग जेमिन की 100वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में चीन के शीर्ष नेता मौजूद रहे। चीन की सबसे ताकतवर पोलित ब्यूरो स्थायी समिति के सभी सात सदस्य कार्यक्रम में शामिल हुए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…







