रिपोर्ट- रूस सीक्रेट रूट से ईरान को हथियार भेज रहा:मिसाइल-ड्रोन पार्ट्स और गोला-बारूद शामिल; ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर समुद्री रास्ते का इस्तेमाल

रूस सीक्रेट रास्ते के जरीए ईरान के सैन्य भंडार को मजबूत करने में मदद कर रहा है। NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ईरान को TNT विस्फोटक, ड्रोन के पार्ट्स और गोला-बारूद भेज रहा है। रिपोर्ट में यूरोपीय सरकार के एक दस्तावेज के हवाले से बताया गया कि सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि इनमें बैलिस्टिक मिसाइल बनाने के लिए जरूरी कुछ पार्ट्स भी हो सकते हैं। ईरान के सैन्य भंडार हाल में अमेरिका और इजराइल के साथ हुए संघर्ष में काफी कम हुए थे। रूस इसके लिए कैस्पियन सागर का रास्ता इस्तेमाल कर रहा है। कैस्पियन सागर से रूस, ईरान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और अजरबैजान की सीमाएं लगती हैं। इस रास्ते से निकले जहाजों पर पश्चिमी देशों का नजर रखना मुश्किल है। अगर जहाज अपना ट्रैकिंग सिस्टम यानी AIS बंद कर दें तो इससे उनकी आवाजाही को ट्रैक करना और मुश्किल हो जाता है। पहले ईरान रूस को ड्रोन देता था, अब रूस मदद कर रहा यूक्रेन युद्ध के दौरान ईरान ने रूस को शाहेद जैसे ड्रोन दिए थे। अब, रूस ईरान को अपने घटे सैन्य भंडार को फिर से भरने में मदद कर रहा है। रूस की ओर से ईरान को सामान भेजे जाने की रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब इजराइल पहले ईरान के अहम बंदरगाह और सैन्य सप्लाई नेटवर्क को निशाना बना चुका है। द टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, इजराइली हमलों में बंदर अंजली पोर्ट की कुछ सुविधाओं और ईरानी नौसेना से जुड़े ठिकानों को नुकसान पहुंचा था। यह पोर्ट ईरान तक सैन्य सामान पहुंचाने वाले समुद्री नेटवर्क का हिस्सा है। चीन से भी मिसाइल के पार्ट्स ले रहा ईरान रूस ने ईरान की मदद करने से इनकार किया था रूस और ईरान ने इन सामानों की आपूर्ति को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। रूस पहले भी ईरान को सैन्य सामान देने की खबरों से इनकार करता रहा है। रूस ने घोषित सैन्य सहयोग के अलावा ईरान को किसी तरह की सैन्य सामग्री देने से लगातार इनकार किया है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियां सार्वजनिक रूप से यह बताने को तैयार नहीं हैं कि ईरान ने अपने सैन्य भंडार को कितनी तेजी से दोबारा तैयार किया है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइली खुफिया एजेंसियां इस बात से हैरान थीं कि ईरान अपने कुछ मिसाइल भंडार को इतनी तेजी से फिर तैयार करने में सफल रहा।
Dubai: Laxmanan Meyyappan Becomes World Youngest Chartered Accountant

Hindi News Career Dubai: Laxmanan Meyyappan Becomes World Youngest Chartered Accountant | CA 9 मिनट पहले कॉपी लिंक दुबई में रहने वाले लक्ष्मणन मेय्यप्पन को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया के सबसे कम उम्र के पुरुष चार्टर्ड अकाउंटेंट का दर्जा दिया है। उन्होंने महज 16 साल और 141 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की। मां ने दी अकाउंटिंग की जानकारी लक्ष्मणन मेय्यप्पन की अकाउंटिंग में दिलचस्पी कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान बढ़ी। कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने फाइनेंस और अकाउंटिंग की पढ़ाई को गंभीरता से लेना शुरू किया। उनकी मां खुद ACCA हैं और उन्होंने लॉकडाउन के दौरान मेय्यप्पन को अकाउंटिंग की शुरुआती जानकारी दी। केवल 15 साल की उम्र में इस प्रोफेशनल योग्यता की तैयारी शुरू की और लगभग एक साल में इसे पूरा कर लिया। ACCA पूरा करने के बाद उन्होंने पढ़ाई रोकने के बजाय फाइनेंस में और आगे बढ़ने का फैसला किया और CFA प्रोग्राम पूरा कर लिया। वे सितंबर 2025 में CFA इंस्टीट्यूट चार्टर होल्डर बने। सीनियर रिसर्च एनालिस्ट के तौर पर काम फिलहाल वह फाइनेंस में MSc कर रहे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वह दुबई की सेंचुरी फाइनेंशियल में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उनके काम में निवेश से जुड़ी रिसर्च, फाइनेंशियल एनालिसिस और निवेश संबंधी फैसलों के लिए जरूरी जानकारी तैयार करना शामिल है। घड़ियां डिजाइन करने के शौकीन मेयप्पन को घड़ियों को डिजाइन करने और बनाने में दिलचस्पी है। उनका मानना है कि केवल तेजी से योग्यता हासिल करना ही सफलता नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि सीखी गई चीजों का वास्तविक जीवन में इस्तेमाल कैसे किया जाए। —————- ये खबर भी पढ़ें… जर्जर स्कूल में पढ़ने को मजबूर स्टूडेंट्स ने धरना दिया:अधिकारियों से पूछा- अगर आपके बच्चे होते, तो क्या आप उन्हें ऐसी ही सुविधा देते अलवर के थानागाजी क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जोधावास में छात्र-छात्राओं ने धरना शुरू कर दिया। 13–14 अगस्त 2026 को जर्जर भवन और स्कूल की दूसरी बुनियादी समस्याओं को लेकर विद्यार्थियों ने विरोध किया। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
ट्रम्प ने होर्मुज को अमेरिका का नया इलाका बताया:सोशल मीडिया पर मैप पोस्ट किया; ईरान बोला- ट्रम्प की गलतफहमी जल्द दूर हो जाएगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताते हुए सोशल मीडिया पर मैप पोस्ट किया है। ट्रम्प के पोस्ट के बाद ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताना सिर्फ एक गलतफहमी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ट्रम्प को जल्द ही समझ आ जाएगा कि इस समुद्री रास्ते पर अमेरिका का कोई अधिकार नहीं है। ईरानी मंत्री ने ट्रम्प को पुराने बयान की याद दिलाई गरीबाबादी ने ट्रम्प को उनके पुराने बयान की भी याद दिलाई। दरअसल, कुछ महीने पहले ट्रम्प ने ‘फारस की खाड़ी’ का नाम बदलकर ‘अरब की खाड़ी’ कहने का सुझाव दिया था। इस पर ईरान ने कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि यह नाम सदियों से ‘फारस की खाड़ी’ ही है। अब ट्रम्प ने अपने पोस्ट में ‘फारस की खाड़ी’ शब्द का इस्तेमाल किया। इस पर तंज कसते हुए गरीबाबादी ने कहा कि जब ट्रम्प ने इस बार सही नाम का इस्तेमाल किया है, तो उम्मीद है कि उन्हें यह भी समझ आ जाएगा कि होर्मुज स्ट्रेट अमेरिका का इलाका नहीं है। ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल (2017) में ईरान पर भाषण देते हुए पहली बार फारस की खाड़ी को अरब की खाड़ी कहा था। ईरान में इसे राष्ट्रीय पहचान का मुद्दा माना जाता है, इसलिए इस पर बहुत विवाद हुआ था। ईरान बोला- शर्तें पूरी होने तक नहीं खुलेगा होर्मुज ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने मंगलवार को कहा कि होर्मुज स्ट्रेट तब तक बंद रहेगा, जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता और समझौता ज्ञापन में किए गए वादों को लागू नहीं करता। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित अपने भाषण में उन्होंने कहा कि तेहरान अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा और अमेरिकी शर्तों के बजाय अपने देश हितों के मुताबिक फैसला लूंगा। ओमान को भी दे चुके हैं धमकी इससे पहले ट्रम्प ने सोमवार को ओमान पर बमबारी की धमकी दी थी। उन्होंने कहा कि अगर ओमान, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में बाधा बना, तो अमेरिका उस पर ‘बमबारी करेगा’। हालांकि, ट्रम्प ने यह नहीं बताया कि ओमान ने ऐसा क्या किया था जिसे वह रुकावट मान रहे हैं। ओमान लंबे समय से खुद को इस संघर्ष में तटस्थ देश बताता रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में भी वह मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। ट्रम्प का बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह पहली बार है जब उन्होंने मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान को सीधे सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है।
Baba Ramdev Slams Kangana Ranaut Over Gen Z Gutter Generation Remark

5 मिनट पहले कॉपी लिंक योग गुरु बाबा रामदेव ने जेन Z को लेकर कंगना रनोट के ‘जेनरेशन गटर’ वाले बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को ‘गटर जेनरेशन’ कहना खराब मानसिकता को दर्शाता है। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने जेन Z को लेकर कंगना की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के जवान को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” साल 2006 में बाबा रामदेव ने आचार्य बालकृष्ण के साथ मिलकर ‘पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड’ की स्थापना की थी। जब सवाल पूछा गया कि वो आपके योग की प्रशंसक रही हैं तो बाबा रामदेव ने कहा कि “मेरी प्रशंसा करें, योग की प्रशंसा करें तो मैं उनके गुनाहों पर यहां लीपापोती कर दूं?” बाबा रामदेव ने यह भी कहा कि युवा की कोई जाति नहीं है। युवा में सब हैं। उसमें ब्राह्मणों के भी बालक हैं, क्षत्रियों के भी, वैश्यों के भी, दलित के भी, आदिवासी-वनवासी के, SC-ST के, सबके बालक हैं। आज युवा अपने आप में एक बहुत बड़ी ताकत है, उसको कोई नकार नहीं सकता। कंगना ने क्या कहा था दरअसल, हाल ही में कंगना ने एक इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा था, “सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात युवा हिंदू महिलाओं का व्यवहार है। वे स्वतंत्र और करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं, लेकिन उस आजादी को कमाना नहीं चाहतीं। जो महिलाएं वास्तव में स्वतंत्र होती हैं, वे विद्रोही फैसले लेती हैं, बेबाक राय रखती हैं, परंपराओं से हटकर करियर चुनती हैं और अपने हर फैसले की जिम्मेदारी भी खुद उठाती हैं, क्योंकि वे अपने दम पर जीवन जीती हैं। वे यह सब अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर नहीं करतीं। यह तथाकथित पश्चिमी सोच वाली भारतीय महिलाओं की नई पीढ़ी है, जिन्हें मैं ‘जनरेशन गटर’ कहती हूं।” …………… कंगना रनोट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… कंगना रनोट सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचीं:गणपति बप्पा का आशीर्वाद लिया; मुंबा देवी के भी दर्शन किए, देखें तस्वीरें बॉलीवुड एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनोट मंगलवार को मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचीं। उन्होंने मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और वहां कुछ समय बिताया। मंदिर दर्शन के दौरान कंगना पीली साड़ी में नजर आईं, जिस पर गोल्डन बॉर्डर था। उन्होंने इसके साथ मैचिंग ब्लाउज और ऑरेंज-गोल्डन दुपट्टा पहना था। लाल बिंदी, सिंपल ज्वेलरी और मिनिमल मेकअप से उन्होंने अपना लुक पूरा किया। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
DUSU Election 2026 Guidelines | 75% Attendance & Paperless Campaign Rules

Hindi News Career DUSU Election 2026 Guidelines | 75% Attendance & Paperless Campaign Rules 2 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) चुनाव 2026 के लिए मतदान 18 सितंबर को होगा, जबकि वोटों की गिनती 19 सितंबर को की जाएगी। नॉमिनेशन फाइल करने की लास्ट डेट 13 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक है। इसके बाद नॉमिनेशन पेपर्स की जांच तीन बजकर 15 मिनट तक की जाएगी और नॉमिनेटेड कैंडिडेट्स की फाइनल लिस्ट उसी दिन शाम 6 बजे तक जारी कर दी जाएगी। चुनाव से जुड़ी तारीखें जारी करने के साथ ही यूनिवर्सिटी ने आचार संहिता भी जारी कर दी है। डीयू चुनाव कैंपेन को लेकर इस साल के नियम : यूनियन या प्रतिनिधि संस्था में सिर्फ फुल टाइम कोर्स में एनरोल्ड रेगुलर स्टूडेंट्स ही चुनाव में शामिल हो सकते हैं। 17 से 22 साल की उम्र के UG स्टूडेंट्स आवेदन कर सकते हैं, जबकि, PG स्टूडेंट्स के लिए अधिकतम उम्र 25 साल है। न्यूनतम अटेंडेंस 75% होनी चाहिए। कैंडिडेट्स 12 सितंबर, 2026 को दोपहर 2 बजे तक चीफ इलेक्शन ऑफिसर के ऑफिस में 10 मिनट से कम का चुनावी भाषण वाला वीडियो क्लिप जमा कर सकते हैं। चीफ इलेक्शन ऑफिसर की मंजूरी के बाद वीडियो DU की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। कैंडिडेट्स प्रचार के लिए कागज के बजाय सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रत्याशी के किसी भी विषय में पेपर लंबित नहीं होना चाहिए। पिछले वर्ष में फेल होने या मौजूदा साल में दोबारा एडमिशन लेने वाले छात्र भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। कार्यकारी सदस्य के पद के लिए अधिकतम दो बार चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। कोई प्रत्याशी एक साथ दो पदों पर चुनाव नहीं लड़ सकेगा। प्रचार के लिए लाउडस्पीकर, वाहन और जानवरों का इस्तेमाल मना है। मनोरंजन या किसी चीज का प्रतिनिधित्व करने के लिए मैस्कॉट या कॉस्ट्यूम का इस्तेमाल करना सख्त मना है। कैंडिडेट्स को प्रचार के लिए प्रिंटेड पोस्टर, पैम्फलेट या किसी अन्य प्रिंटेड सामग्री का इस्तेमाल करने की परमिशन नहीं दी जाएगी। कैंडिडेट्स केवल हाथ से बने पोस्टर का इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रति कैंडिडेट अधिकतम खर्च 5000 रुपए है। DUSU चुनावों के लिए प्रचार का समय सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक है। कॉलेज कैंपस में प्रचार करते समय हर कैंडिडेट के साथ चार से ज्यादा छात्र नहीं हो सकते। उम्मीदवारों को प्रॉक्टर्स ऑफिस से ऑथराइज्ड व्हीकल स्टिकर लेना होगा। बिना स्टिकर वाले वाहनों को कैंपस/कॉलेज में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। फुटपाथ या सड़क पर ऐसी पार्किंग नहीं की जा सकती जिससे ट्रैफिक की दिक्क्त हो। किसी उम्मीदवार या उसके समर्थक को वाहन, पार्किंग ऐरिया, कैंपस या रोड़ साइड पर शराब या किसी नशीली चीजों का सेवन करते पाया गया, तो उम्मीदवार का नॉमिनेशनल कैंसिल किया जा सकता है। डीयू ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर कैंपेन के दौरान नियम लगातार तोड़े गए तो चुनाव रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है। शिकायतों के लिए बनेगी सेल डूसू चुनाव से संबंधित शिकायतें दूर करने के लिए सेल बनाया जाएगा। इसकी अध्यक्षता डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर करेंगे। सेल में एक सीनियर टीचर, एक सीनियर प्रशासनिक अधिकारी और फाइनल ईयर का एक छात्र व एक छात्रा को शामिल किया जाएगा। चुनाव से जुड़ी आपत्तिजनक घटनाओं की सूचना पुलिस को 12 घंटे के अंदर देने का प्रावधान भी किया गया है। साल 2024 में पोस्टर हटाने का खर्च 1 करोड़ दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में प्रचार के लिए इस्तेमाल पोस्टर को हटाने में खर्च हुए राशि की सीमा दिल्ली नगर निगम ने एक करोड़ रुपये बताई थी। इसकी जानकारी हाई कोर्ट को देते हुए भुगतान की मांग दिल्ली विश्वविद्यालय से की गई। इस विषय पर विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि उम्मीदवारों और छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय परिसर और आसपास की सार्वजनिक संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर प्रचार सामग्री लगाई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले दीवारों और सार्वजनिक संपत्ति को साफ किए जाने तक DUSU चुनाव की मतगणना पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि पहले पोस्टर-बैनर हटाकर संपत्ति को साफ किया जाए, उसके बाद मतगणना आगे बढ़े। MCD के अलावा DMRC ने भी सफाई पर लगभग ₹1 लाख खर्च होने की बात कही थी। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया था कि सफाई का खर्च संबंधित उम्मीदवारों से वसूलने का विकल्प देखा जा सकता है। 2025 के चुनाव के लिए ₹1 लाख का एंटी-डिफेसमेंट बॉन्ड लागू किया गया था। यह पोस्टर हटाने का खर्च नहीं, बल्कि उम्मीदवार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए था। इसके पीछे 2024 DUSU चुनाव के दौरान हुई भारी तोड़फोड़/पोस्टरबाजी की सफाई का खर्च था। ये खबर भी पढ़ें जर्जर स्कूल में पढ़ने को मजबूर स्टूडेंट्स ने धरना दिया:अधिकारियों से पूछा- अगर आपके बच्चे होते, तो क्या आप उन्हें ऐसी ही सुविधा देते अलवर के थानागाजी क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जोधावास में छात्र-छात्राओं ने धरना शुरू कर दिया। 13–14 अगस्त 2026 को जर्जर भवन और स्कूल की दूसरी बुनियादी समस्याओं को लेकर विद्यार्थियों ने विरोध किया। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Malavika Sharma Keralam Controversy | Actress Uncomfortable Over Beef Question

9 मिनट पहले कॉपी लिंक मालविका शर्मा की फिल्म खलीफा: द इंट्रो 20 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। एक्ट्रेस मालविका शर्मा हाल ही में केरलम में एक रिपोर्टर के सवाल से असहज हो गईं, जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें बीफ पसंद आया। जिस पर एक्ट्रेस ने कहा कि वह शाकाहारी हैं। रिपोर्टर के सवाल को लेकर सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने नाराजगी जताई। दरअसस एक्ट्रेस मालविका शर्मा अपनी अपकमिंग फिल्म ‘खलीफा’ के प्रमोशन के दौरान केरलम में मीडिया से बातचीत कर रही थीं। इसी दौरान उनसे पूछा गया कि केरलम में उन्हें कौन सा खाना पसंद आया? जिस पर उन्होंने कहा कि मुझे बहुत सारा खाना चखने का समय नहीं मिला, लेकिन आमतौर पर मुझे लगता है कि मैंने काफी सारा चावल, ग्रेवी और करी जैसी चीजें खाई हैं। लास्ट में एक्ट्रेस मालविका शर्मा ने रिपोर्टर को धन्यवाद भी किया। इसके बाद उनसे एक रिपोर्टर ने पूछा, क्या आपको बीफ पसंद आया? इस सवाल पर मालविका थोड़ी असहज नजर आईं और उन्होंने जवाब दिया, “मैं शाकाहारी हूं, इसलिए मैंने बीफ नहीं चखा है।” कई यूजर्स ने रिपोर्टर के सवाल पर नाराजगी जताई सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने रिपोर्टर के इस सवाल को लेकर नाराजगी जताई। एक एक्स यूजर ने लिखा, “क्या ऐसा बेवकूफी भरा सवाल पूछना वाकई जरूरी था?” वहीं दूसरे यूजर ने कहा, “वे सिर्फ विवाद पैदा करना चाहते हैं।” यूजर का कमेंट। एक अन्य यूजर ने दावा किया कि इसी केरलम मीडिया ने फिल्म प्रमोशन के दौरान प्रिय प्रकाश को भगवा रंग के कपड़े पहनने को लेकर भी ताना मारा था। मालविका शर्मा के इंस्टाग्राम पर 2 मिलियन फॉलोअर्स हैं। कौन हैं मालविका शर्मा? मालविका शर्मा एक एक्ट्रेस और मॉडल हैं, जो मुख्य रूप से तेलुगु फिल्मों में काम करती हैं। उनका जन्म 26 जनवरी 1999 को मुंबई में हुआ। उन्होंने साल 2018 में रवि तेजा के साथ फिल्म ‘नेला टिकट’ से एक्टिंग करियर की शुरुआत की। इसके बाद 2021 में वह फिल्म ‘रेड’ में नजर आईं। इस फिल्म में उन्होंने महिमा का किरदार निभाया था। मालविका ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री में भी काम किया। 2022 में वह ‘कॉफी विद काधल’ में दिखाई दीं। इसके बाद 2024 में उन्होंने तेलुगु फिल्मों ‘भीमा’ और ‘हरोम हारा’ में काम किया। बता दें कि मालविका ने रिजवी लॉ कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई की, जिसमें क्रिमिनोलॉजी उनकी स्पेशलाइजेशन रही। मालविका की अपकमिंग प्रोजेक्ट्स की बात करें तो वह मलयालम फिल्म ‘खलीफा’ और कन्नड़ फिल्म ‘बृंदाविहारी’ में नजर आएंगी। पृथ्वीराज सुकुमारन स्टारर फिल्म ‘खलीफा’ में मालविका शर्मा फिजा के रोल में नजर आएंगी। गौरतलब है कि हाल ही में फिल्म ‘ओरु अदार लव’ में अपनी मशहूर विंक से चर्चा में आईं एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश वारियर केरलम में एक इवेंट में शामिल हुईं। जहां पर उनके कपड़ों के रंग को लेकर सवाल किया गया था। इवेंट में प्रिया ने नारंगी यानी केसरिया रंग की ड्रेस पहनी थी। मीडिया से बातचीत के दौरान एक यूट्यूबर ने उनसे पूछा था कि क्या उन्होंने किसी खास वजह से केसरिया रंग की ड्रेस चुनी है। इस पर प्रिया ने शांति से जवाब देते हुए पूछा, “ड्रेस में समस्या क्या है?” पूरी खबर यहां पढ़ें…. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Malavika Sharma Keralam Controversy | Actress Uncomfortable Over Beef Question

44 मिनट पहले कॉपी लिंक मालविका शर्मा की फिल्म खलीफा: द इंट्रो 20 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। एक्ट्रेस मालविका शर्मा हाल ही में केरलम में एक रिपोर्टर के सवाल से असहज हो गईं, जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें बीफ पसंद आया। जिस पर एक्ट्रेस ने कहा कि वह शाकाहारी हैं। रिपोर्टर के सवाल को लेकर सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने नाराजगी जताई। दरअसस एक्ट्रेस मालविका शर्मा अपनी अपकमिंग फिल्म ‘खलीफा’ के प्रमोशन के दौरान केरलम में मीडिया से बातचीत कर रही थीं। इसी दौरान उनसे पूछा गया कि केरलम में उन्हें कौन सा खाना पसंद आया? जिस पर उन्होंने कहा कि मुझे बहुत सारा खाना चखने का समय नहीं मिला, लेकिन आमतौर पर मुझे लगता है कि मैंने काफी सारा चावल, ग्रेवी और करी जैसी चीजें खाई हैं। लास्ट में एक्ट्रेस मालविका शर्मा ने रिपोर्टर को धन्यवाद भी किया। इसके बाद उनसे एक रिपोर्टर ने पूछा, क्या आपको बीफ पसंद आया? इस सवाल पर मालविका थोड़ी असहज नजर आईं और उन्होंने जवाब दिया, “मैं शाकाहारी हूं, इसलिए मैंने बीफ नहीं चखा है।” कई यूजर्स ने रिपोर्टर के सवाल पर नाराजगी जताई सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने रिपोर्टर के इस सवाल को लेकर नाराजगी जताई। एक एक्स यूजर ने लिखा, “क्या ऐसा बेवकूफी भरा सवाल पूछना वाकई जरूरी था?” वहीं दूसरे यूजर ने कहा, “वे सिर्फ विवाद पैदा करना चाहते हैं।” यूजर का कमेंट। एक अन्य यूजर ने दावा किया कि इसी केरलम मीडिया ने फिल्म प्रमोशन के दौरान प्रिय प्रकाश को भगवा रंग के कपड़े पहनने को लेकर भी ताना मारा था। मालविका शर्मा के इंस्टाग्राम पर 2 मिलियन फॉलोअर्स हैं। कौन हैं मालविका शर्मा? मालविका शर्मा एक एक्ट्रेस और मॉडल हैं, जो मुख्य रूप से तेलुगु फिल्मों में काम करती हैं। उनका जन्म 26 जनवरी 1999 को मुंबई में हुआ। उन्होंने साल 2018 में रवि तेजा के साथ फिल्म ‘नेला टिकट’ से एक्टिंग करियर की शुरुआत की। इसके बाद 2021 में वह फिल्म ‘रेड’ में नजर आईं। इस फिल्म में उन्होंने महिमा का किरदार निभाया था। मालविका ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री में भी काम किया। 2022 में वह ‘कॉफी विद काधल’ में दिखाई दीं। इसके बाद 2024 में उन्होंने तेलुगु फिल्मों ‘भीमा’ और ‘हरोम हारा’ में काम किया। बता दें कि मालविका ने रिजवी लॉ कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई की, जिसमें क्रिमिनोलॉजी उनकी स्पेशलाइजेशन रही। मालविका की अपकमिंग प्रोजेक्ट्स की बात करें तो वह मलयालम फिल्म ‘खलीफा’ और कन्नड़ फिल्म ‘बृंदाविहारी’ में नजर आएंगी। पृथ्वीराज सुकुमारन स्टारर फिल्म ‘खलीफा’ में मालविका शर्मा फिजा के रोल में नजर आएंगी। गौरतलब है कि हाल ही में फिल्म ‘ओरु अदार लव’ में अपनी मशहूर विंक से चर्चा में आईं एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश वारियर केरलम में एक इवेंट में शामिल हुईं। जहां पर उनके कपड़ों के रंग को लेकर सवाल किया गया था। इवेंट में प्रिया ने नारंगी यानी केसरिया रंग की ड्रेस पहनी थी। मीडिया से बातचीत के दौरान एक यूट्यूबर ने उनसे पूछा था कि क्या उन्होंने किसी खास वजह से केसरिया रंग की ड्रेस चुनी है। इस पर प्रिया ने शांति से जवाब देते हुए पूछा, “ड्रेस में समस्या क्या है?” पूरी खबर यहां पढ़ें…. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
7 महीने में 3 गुना बढ़ा कंपनियों का AI खर्च:रैम्प के एआई इंडेक्स के मुताबिक टॉप फर्म्स प्रति कर्मचारी खर्च कर रहीं 7 लाख

अमेरिका की टॉप 1% कंपनियां अब एआई टूल्स पर हर कर्मचारी के लिए औसतन करीब 7 लाख रुपए खर्च कर रही हैं। रैम्प के एआई इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी में यही कंपनियां प्रति कर्मचारी करीब 2.47 लाख रुपए खर्च कर रही थीं। यानी 7 महीनों में खर्च लगभग 3 गुना हो गया। टॉप 10% कंपनियां एआई पर करीब 62 हजार रुपए प्रति कर्मचारी खर्च कर रही हैं। औसत खर्च करीब 1140 रुपए प्रति कर्मचारी बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी कंपनियां अब प्रति-टोकन मॉडल पर आ गई हैं। इसमें इस्तेमाल किए गए टोकन के हिसाब से पैसा लिया जाता है। यानी एआई से जितना ज्यादा काम, उतने ज्यादा टोकन और उतना ज्यादा बिल। हाल के महीनों में उबर, अमेजन और वॉलमार्ट ने जरूरत से ज्यादा एआई इस्तेमाल रोकने के लिए लिमिट लगाई है। एआई बॉस ने इंसानी कर्मचारी को नौकरी से निकाला दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर प्रयोग चल रहे हैं। सैन फ्रांसिस्को में एंडोन लैब नाम की फर्म ने लूना नामक एआई को एक रिटेल स्टोर चलाने की जिम्मेदारी सौंपी। हाल ही में लूना ने अपने एक इंसानी कर्मचारी को बर्खास्त करने की सिफारिश की। वह कर्मचारी 23 में से 17 शिफ्टों में देर से आया था। बाद में इंसानी कर्मचारियों ने इस सिफारिश को रिव्यू किया और उस कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया। एंडोन मार्केट ने अपने सोशल मीडिया पेज पर लिखा ‘पहली बार (हमारी जानकारी के अनुसार) किसी एआई बॉस ने किसी इंसानी कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया है। सैन फ्रांसिस्को में हमारे स्टोर को चलाने वाली एआई लूना ने बार-बार देर से आने के कारण एक कर्मचारी को बर्खास्त करने का फैसला किया। उस समय लूना क्लाउड ओपस 4.8 पर चल रही थी, लेकिन अधिकांश मॉडल ऐसा ही करते।’ अपनी अटेंडेंस नीति को भूल गया था एआई एंडोन लैब्स के मुताबिक लूना ने महीनों पहले अटेंडेंस संबंधी नीति बनाई थी, लेकिन बाद में वह उसे भूल गई। इसका नतीजा ये हुआ कि देर से आने वाला कर्मचारी कई महीनों तक वही गलती दोहराता रहा। आखिरकार एंडोन लैब्स ने लूना को अपनी मेमोरी में बनाई गई नीतियों को खोजने के लिए कहा और फिर उससे यह आकलन करने को कहा कि क्या कर्मचारी अभी भी कंपनी के लिए उपयुक्त है। इसके बाद लूना ने कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त करने की सिफारिश की।
रिपोर्ट- यूक्रेन ने ब्रिटिश ड्रोन से रूस पर हमला किया:नाराज मॉस्को बोला- ब्रिटेन जंग को और बढ़ा रहा, बड़ी कीमत चुकानी होगी

रूस ने ब्रिटेन पर यूक्रेन जंग में दखल देने का आरोप लगाया है। रूसी सरकार का दावा है कि यूक्रेन ने रूस पर हमले में जिस ड्रोन का इस्तेमाल किया था वह ब्रिटिश कंपनियों ने बनाया। रूस ने कहा कि इसके लिए ब्रिटेन को गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। यह मामला ब्रिटिश अखबार द संडे टाइम्स की रिपोर्ट के बाद सामने आया। दरअसल, इसी रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि यूक्रेन ने रूस में हमला करने के लिए 2 ब्रिटिश कंपनियों के बनाए ड्रोन का इस्तेमाल किया। संडे टाइम्स की यह रिपोर्ट अगर सही है, तो यह पहली बार होगा जब ब्रिटिश तकनीक से बने ड्रोन रूस पर हुए हमलों में इस्तेमाल हुए हैं। ब्रिटेन स्थित रूसी दूतावास ने कहा कि लंदन जानबूझकर यूक्रेन संकट को और भड़का रहा है। वह यूक्रेन के जरिए रूस को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। रूसी दूतावास ने कहा कि इसके गंभीर परिणाम होंगे और ब्रिटेन को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। ब्रिटेन बोला- यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़े हैं वहीं, ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस के हमलों से अपनी रक्षा करने के लिए यूक्रेन को जिन हथियारों की जरूरत होगी, ब्रिटेन उन्हें देता रहेगा। प्रवक्ता ने कहा कि रूस को ब्रिटेन की नीति को लेकर कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। ब्रिटेन यूक्रेन और अपने सहयोगी देशों के खिलाफ रूस की आक्रामकता का विरोध करता रहेगा। यूक्रेन ने रूस के अंदर हमले 3 गुना बढ़ाए यूक्रेन ने इस साल रूस के अंदर ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों से हमले काफी बढ़ा दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने जुलाई में जनवरी के मुकाबले 3 गुना ज्यादा हमले किए। अब यूक्रेन के हमले सिर्फ रूस की सीमा के पास के इलाकों तक सीमित नहीं हैं। यूक्रेन रूस के अंदर काफी दूर तक ड्रोन और मिसाइल भेजकर हमले कर रहा है। इन हमलों में रूस के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा हथियार और ईंधन के भंडार भी निशाने पर हैं। यूक्रेन रूस की तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और औद्योगिक ठिकानों पर भी हमला कर रहा है।
रिपोर्ट- यूक्रेन ने ब्रिटिश ड्रोन से रूस पर हमला किया:नाराज मॉस्को बोला- ब्रिटेन जंग को और बढ़ा रहा, बड़ी कीमत चुकानी होगी

रूस ने ब्रिटेन पर यूक्रेन जंग में दखल देने का आरोप लगाया है। रूसी सरकार का दावा है कि यूक्रेन ने रूस पर हमले में जिस ड्रोन का इस्तेमाल किया था वह ब्रिटिश कंपनियों ने बनाया। रूस ने कहा कि इसके लिए ब्रिटेन को गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। यह मामला ब्रिटिश अखबार द संडे टाइम्स की रिपोर्ट के बाद सामने आया। दरअसल, इसी रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि यूक्रेन ने रूस में हमला करने के लिए 2 ब्रिटिश कंपनियों के बनाए ड्रोन का इस्तेमाल किया। संडे टाइम्स की यह रिपोर्ट अगर सही है, तो यह पहली बार होगा जब ब्रिटिश तकनीक से बने ड्रोन रूस पर हुए हमलों में इस्तेमाल हुए हैं। ब्रिटेन स्थित रूसी दूतावास ने कहा कि लंदन जानबूझकर यूक्रेन संकट को और भड़का रहा है। वह यूक्रेन के जरिए रूस को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। रूसी दूतावास ने कहा कि इसके गंभीर परिणाम होंगे और ब्रिटेन को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। ब्रिटेन बोला- यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़े हैं वहीं, ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस के हमलों से अपनी रक्षा करने के लिए यूक्रेन को जिन हथियारों की जरूरत होगी, ब्रिटेन उन्हें देता रहेगा। प्रवक्ता ने कहा कि रूस को ब्रिटेन की नीति को लेकर कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। ब्रिटेन यूक्रेन और अपने सहयोगी देशों के खिलाफ रूस की आक्रामकता का विरोध करता रहेगा। यूक्रेन ने रूस के अंदर हमले 3 गुना बढ़ाए यूक्रेन ने इस साल रूस के अंदर ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों से हमले काफी बढ़ा दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने जुलाई में जनवरी के मुकाबले 3 गुना ज्यादा हमले किए। अब यूक्रेन के हमले सिर्फ रूस की सीमा के पास के इलाकों तक सीमित नहीं हैं। यूक्रेन रूस के अंदर काफी दूर तक ड्रोन और मिसाइल भेजकर हमले कर रहा है। इन हमलों में रूस के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा हथियार और ईंधन के भंडार भी निशाने पर हैं। यूक्रेन रूस की तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और औद्योगिक ठिकानों पर भी हमला कर रहा है। ब्रिटेन यूक्रेन के समर्थक देशों में शामिल ब्रिटेन यूक्रेन के सबसे बड़े समर्थक देशों में से एक है। युद्ध शुरू होने के बाद से लंदन ने यूक्रेन के लिए 25 अरब पाउंड ( करीब 3.24 लाख करोड़ रुपए ) की सहायता देने का वादा किया है। इसमें 16 अरब पाउंड की सैन्य मदद भी शामिल है। ब्रिटेन ने यूक्रेन को टैंक, मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और अन्य हथियार भी दिए हैं। इसके अलावा ब्रिटेन में 63 हजार से ज्यादा यूक्रेनी सैनिकों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। हाल ही में ब्रिटेन ने यूक्रेन को 1.5 लाख ड्रोन और 350 एयर डिफेंस मिसाइलें देने की भी घोषणा की थी। ये भी पढ़ें… PAK सुप्रीम कोर्ट बोला-इमरान को 2 दिन में अस्पताल भेजें: कहा- बहनों से मिलना उनका अधिकार पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अस्पताल भेजने का आदेश दिया। पूरी खबर पढ़ें…







