इमरान खान को अस्पताल ले जाने की तैयारी:इस्लामाबाद के शिफा अस्पताल में भारी सुरक्षा; सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इलाज

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को रावलपिंडी की अडियाला जेल से इलाज के लिए इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने की तैयारी शुरू हो गई है। CNN-न्यूज18 को मिली जानकारी के मुताबिक, उन्हें कुछ ही देर में कड़ी सुरक्षा के बीच अस्पताल शिफ्ट किया जा सकता है। यह कदम पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठाया जा रहा है। उनके परिवार और वकीलों ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई थी और अपनी पसंद के डॉक्टरों से इलाज के लिए उन्हें निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की थी। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
अमेरिकन वॉरशिप जॉर्ज वॉशिंगटन की अरब सागर में एंट्री:250 दिन से तैनात अब्राहम लिंकन की जगह ली, ईरान के करीब अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी बढ़ी

अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर शिप USS जॉर्ज वॉशिंगटन ने पश्चिम एशिया में ऑपरेशन शुरू कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। जॉर्ज वॉशिंगटन अरब सागर क्षेत्र में USS अब्राहम लिंकन की जगह पहुंचा है। अब्राहम लिंकन लगातार 250 दिनों से ज्यादा समय से इस इलाके में तैनात था। जॉर्ज वॉशिंगटन इससे पहले साउथ चाइना सी में तैनात था USS जॉर्ज वॉशिंगटन इससे पहले साउथ चाइना सी में तैनात था। हाल ही में उसने वियतनाम के दा नांग में पोर्ट कॉल भी पूरा किया है। यह पहली बार नहीं है, जब यह एयरक्राफ्ट कैरियर अरब सागर में पहुंचा है। 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों में भी इसने फारस की खाड़ी में कई ऑपरेशन किए थे। इनमें इराक के कुवैत पर हमले के दौरान की गई तैनाती, 1994 का ऑपरेशन विजिलेंट वॉरियर, 1998 का ऑपरेशन डेजर्ट थंडर और 2002 में अफगान युद्ध के दौरान ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम शामिल हैं। दावा- वॉरशिप अब्राहम लिंकन से नौसैनिकों ने कूदने की कोशिश की थी अमेरिकी वॉरशिप USS अब्राहम लिंकन पर तैनात अमेरिकी नौसैनिक मानसिक और शारीरिक तनाव से गुजर रहे हैं। नेवी टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जहाज पर तैनात 6 अमेरिकी सैन्यकर्मियों ने जहाज से समुद्र में कूदने की कोशिश की थी। USS अब्राहम लिंकन करीब 9 महीने से समुद्र में है। ये वॉरशिप ईरान जंग के दौरान बिना किसी पोर्ट पर रुके समुद्र में चल रहा है। इस पर करीब 5,000 अमेरिकी मरीन तैनात हैं। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
Esha Deol Recreates Sunny Deol Damini Dialogue in Rakshabandhan Ad

6 मिनट पहले कॉपी लिंक अभिनेत्री ईशा देओल रक्षाबंधन के मौके पर एक डिलीवरी ऐप के विज्ञापन में नजर आई हैं। इसमें उन्होंने अपने भाई और अभिनेता सनी देओल की फिल्म ‘दामिनी’ के मशहूर डायलॉग ‘ढाई किलो का हाथ’ को रीक्रिएट किया है। वीडियो में ईशा इस डायलॉग में रक्षाबंधन का ट्विस्ट जोड़ते हुए भाई सनी के लिए ‘ढाई किलो की राखी’ मंगवाती दिख रही हैं। विज्ञापन में ‘ढाई किलो की राखी’ के साथ ईशा देओल। ‘दामिनी’ फिल्म के डायलॉग को रीक्रिएट किया विज्ञापन में ईशा देओल कहती नजर आती हैं कि जब भैया का ढाई किलो का हाथ उठता है तो सब तालियां बजाने लगते हैं। इसके बाद वे मजाकिया अंदाज में पूछती हैं कि यह हाथ इतना लेजेंड्री क्यों है। वीडियो में इस डायलॉग पर एक छोटा एक्सपेरिमेंट करके दिखाया गया है। इसके बाद ईशा डिलीवरी ऐप के जरिए अपने भाई सनी देओल के लिए खास ‘ढाई किलो की राखी’ मंगवाती हैं और उसे खुशी से दिखाती हैं। विज्ञापन में ईशा देओल कहती नजर आती हैं कि जब भैया का ढाई किलो का हाथ उठता है तो सब तालियां बजाने लगते हैं। सोशल मीडिया पर फैंस ने की बॉन्ड की तारीफ सोशल मीडिया पर वीडियो देखने के बाद फैंस कमेंट सेक्शन में लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। यूजर्स ने इसे भाई-बहन के बीच का बहुत प्यारा रिश्ता बताया है। कुछ फैंस ने इसे ‘तारा सिंह’ के किरदार से जोड़ा, तो वहीं एक यूजर ने लिखा कि सनी पाजी का ढाई किलो का हाथ और ईशा की ढाई किलो की राखी ही असल विरासत है। ‘बॉर्डर 2’ की स्पेशल स्क्रीनिंग में सनी को सपोर्ट करने पहुंची बहन ईशा और अहाना। सनी देओल की फिल्मों को हमेशा सपोर्ट करती हैं ईशा ईशा देओल सौतेली बहन होने के बावजूद अपने भाइयों सनी और बॉबी देओल के काफी करीब हैं और उन्हें हमेशा सपोर्ट करती हैं। वे अक्सर उनकी फिल्मों के प्रमोशन और स्क्रीनिंग में शामिल होती हैं। हाल ही में उन्होंने सनी की फिल्म ‘बंटवारा 1947’ की तारीफ करते हुए लोगों से इसे देखने की अपील की थी। इसके अलावा वे फिल्म ‘बॉर्डर 2’ की स्पेशल स्क्रीनिंग में भी नजर आई थीं। ईशा देओल के साथ सनी देओल की पुरानी तस्वीर। बचपन से बांधती आई हैं राखी, परिवार के रिश्तों में आया सुधार ईशा ने कई बार बताया है कि वे बचपन से ही सनी और बॉबी को राखी बांधती आ रही हैं। लोग उनके रिश्ते के बारे में जानना चाहते हैं, लेकिन वे इसे जाहिर करना जरूरी नहीं मानतीं। धर्मेंद्र ने पहली पत्नी प्रकाश कौर से शादी के बाद हेमा मालिनी से दूसरी शादी की थी। प्रकाश कौर से उनके बेटे सनी, बॉबी और बेटियां अजीता व विजेता हैं। वहीं हेमा मालिनी से ईशा और आहना दो बेटियां हैं। शुरुआत में परिवार के बीच दूरियों की खबरें आई थीं, लेकिन अब सभी के बीच रिश्ते काफी बेहतर हैं। ये खबर भी पढ़ें सन्नी देओल बोले- ‘भारत मेरी मां तो पाकिस्तान मौसी है’:फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के प्रमोशन के दौरान दिया बयान, सोशल मीडिया पर हुई ट्रोलिंग फिल्म ‘बंटवारा 1947’ की रिलीज से पहले सनी देओल अपने एक बयान को लेकर विवादों में आ गए। पटना में फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने अपने पिता धर्मेंद्र के एक पुराने बयान का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को मौसी बताया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल किया। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Rajpal Yadav Debt Controversy | Actor Statement on Bank Auction & Loss

7 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव ने चेक बाउंस और कर्ज विवाद के बीच दावा किया है कि पिछले 13 साल में उन्हें 200 से 250 करोड़ रुपए का निजी नुकसान हुआ है। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में 55 साल के एक्टर ने कहा कि वे एक जिम्मेदार इंसान हैं और जिन लोगों का पैसा बकाया है, वे उसे चुका देंगे या उनके घर तक पहुंचा देंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 16 करोड़ रुपए का कर्ज न चुकाने पर उनके पैतृक घर की नीलामी का नोटिस जारी किया है। ANI से बातचीत में राजपाल ने कहा की वे सबका कर्ज लौटाएंगे। फीस कम मिली, 50 से ज्यादा विदेशी टूर छूटे राजपाल यादव ने बताया कि 2013 से 2016 के बीच उनका सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि इस दौरान विदेश में उनके कम से कम 50 टूर छूट गए और मिलने वाली फीस भी काफी कम हो गई। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जहां उन्हें 100 रुपए मिलने चाहिए थे, वहां सिर्फ 10 रुपए मिले। हालांकि, राजपाल ने कहा कि वे आर्ट के स्टूडेंट हैं और वे पैसों से ज्यादा अपनी कला में परफेक्शन को अहमियत देते हैं। चेक बाउंस मामले में कोर्ट के बाहर मीडिया से बात करते राजपाल। ‘जिनका पैसा बकाया है, घर पहुंचा दूंगा’ अपनी आर्थिक स्थिति और कर्ज पर बात करते हुए राजपाल यादव ने कहा कि उन्होंने जिनसे भी पैसा उधार लिया था, उसे चुका दिया है या जल्द चुका देंगे। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने 200 लोगों से भी उधार लिया है, तो वे पैसा वापस करेंगे। राजपाल ने कहा कि कोई उन्हें 5 करोड़ या 250 करोड़ रुपए में खरीद नहीं सकता। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आर्थिक मुश्किलें उनके पूरे करियर को तय नहीं करतीं और आज भी एयरपोर्ट पर 500 लोग उनके साथ सेल्फी लेते हैं। बैंक नीलाम कर रहा 3.10 करोड़ की प्रॉपर्टी राजपाल यादव पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का कर्ज न चुकाने के कारण कार्रवाई चल रही है। राजपाल यादव ने सेंट्रल बैंक की मुंबई ब्रांच से पत्नी राधा यादव और मां गोदावरी के नाम पर 16.61 करोड़ रुपए का लोन लिया था। शाहजहांपुर में राजपाल यादव के इसी मकान में नोटिस चस्पा किया गया है। शाहजहांपुर में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने उनके पैतृक घर पर 16.61 करोड़ रुपए के बकाया लोन को लेकर कुर्की का नोटिस चस्पा किया है। चेक बाउंस केस में जेल जा चुके राजपाल राजपाल यादव का चेक बाउंस केस साल 2010 में शुरू हुआ था, जब उन्होंने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ का कर्ज लिया था। 2012 में रिलीज हुई यह फिल्म फ्लॉप हो गई। इसके बाद 2013 से चेक बाउंस का मामला अदालत में चल रहा है। 12 दिनों तक तिहाड़ जेल में रहने के बाद 17 फरवरी को रिहा हुए राजपाल। जुलाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने कर्ज न चुकाने पर उनकी मंशा पर सवाल उठाते हुए सरेंडर का आदेश दिया था। इससे पहले फरवरी 2026 में भी उन्होंने तिहाड़ जेल में सरेंडर किया था, जिसके बाद वे 12 दिन तक जेल में रहे थे। फिलहाल वे अक्षय कुमार के साथ फिल्म ‘हैवान’ और सलमान खान के साथ ‘SVC 63’ की तैयारी कर रहे हैं। राजपाल यादव का करियर हंगामा, हलचल जैसी फिल्मों से कॉमेडी किंग बने 2003 में फिल्म हंगामा, 2005 में गरम मसाला, 2006 में चुप चुप के और फिर हेरा फेरी और 2007 में भूल भुलैया जैसी फिल्मों से उन्हें कॉमेडी मे पहचान मिली। कॉमिक डायरेक्टर प्रियदर्शन के साथ उन्होंने लगभग 8 से 10 फिल्मों मे काम किया है। बेस्ट वर्सटाइल एक्टर अवॉर्ड जीत चुके हैं राजपाल राजपाल यादव को यश भारती अवॉर्ड मिला, जो उत्तर प्रदेश का सर्वोच्च सम्मान है। उन्हें यह अवॉर्ड 2003 की फिल्म ‘मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं’ के लिए मिला। यह सम्मान उनके कॉमेडी और गंभीर अभिनय के रोल के लिए दिया गया था। इससे पहले यह अवॉर्ड अमिताभ बच्चन और जया बच्चन जैसे बड़े नामों को मिल चुका है। उन्हें फिल्मफेयर और आईफा जैसे प्लेटफॉर्म पर बेस्ट कॉमिक एक्टर के लिए नॉमिनेट किया गया, लेकिन वे यह अवॉर्ड नहीं जीत पाए। मुंबई मे पहला सपना सिर्फ जिंदा रहना था’ एनएसडी से पढ़ाई पूरी होने के बाद राजपाल मुंबई आए। शुरुआत में उन्हें कोई सपोर्ट नहीं मिला। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनका पहला सपना मुंबई में जिंदा रहना था। कुछ समय के संघर्ष के बाद उन्हें काम मिलना शुरू हो गया। स्ट्रगल के दिनों में राजपाल ने 20-22 स्ट्रगलिंग एक्टर्स को अपने घर पर खाना खिलाया। एक इंटरव्यू मे नवाजुद्दीन सिद्दीकी बताते हैं कि, ‘राजपाल का घर लंगर जैसा था, फ्री का खाना और रहना।’ छोटू और बटला कहते थे स्कूल के दोस्त राजपाल यादव की हाइट लगभग 5 फीट 1 इंच है। स्कूल में छोटी हाइट की वजह से दोस्त उन्हें छोटू और बौना कहकर बुलाते थे। 20 साल की उम्र में गांव की ऑर्डनेंस क्लोदिंग फैक्ट्री में नौकरी मिली। 20 साल की उम्र में शादी राजपाल यादव ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वे लगभग 20 साल के थे, तब उनके परिवार ने उनकी शादी करा दी थी। उस समय वे गांव में ही रहते थे और नौकरी की शुरुआत कर रहे थे। बेटी के जन्म के 15 मिनट बाद पत्नी का निधन एक इंटरव्यू में राजपाल यादव ने बताया कि वे 20 साल के थे जब घरवालों के दबाव में उनकी शादी कराई गई। उनकी पहली पत्नी का नाम करुणा था। एक साल बाद बेटी ज्योति का जन्म हुआ, लेकिन डिलीवरी के 15 मिनट बाद ही उनकी पत्नी का निधन हो गया। वे कहते हैं, ‘मैं अगले दिन उनसे मिलने वाला था, लेकिन उनकी डेड बॉडी को कंधे पर उठाकर ले गया। 20 साल की उम्र में इतना दर्द सहना आसान नहीं होता।’ इसके बाद वे अकेले पिता बन गए और ज्योति की देखभाल उनकी मां और भाभी ने की। राजपाल ने एक इंटरव्यू में बताया कि दूसरी पत्नी राधा से उनकी मुलाकात कनाडा में हुई थी। उस समय वे सनी देओल और प्रीति जिंटा की फिल्म
Rajpal Yadav Debt Controversy | Actor Statement on Bank Auction & Loss

24 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव ने चेक बाउंस और कर्ज विवाद के बीच दावा किया है कि पिछले 13 साल में उन्हें 200 से 250 करोड़ रुपए का निजी नुकसान हुआ है। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में 55 साल के एक्टर ने कहा कि वे एक जिम्मेदार इंसान हैं और जिन लोगों का पैसा बकाया है, वे उसे चुका देंगे या उनके घर तक पहुंचा देंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 16 करोड़ रुपए का कर्ज न चुकाने पर उनके पैतृक घर की नीलामी का नोटिस जारी किया है। ANI से बातचीत में राजपाल ने कहा की वे सबका कर्ज लौटाएंगे। फीस कम मिली, 50 से ज्यादा विदेशी टूर छूटे राजपाल यादव ने बताया कि 2013 से 2016 के बीच उनका सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि इस दौरान विदेश में उनके कम से कम 50 टूर छूट गए और मिलने वाली फीस भी काफी कम हो गई। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जहां उन्हें 100 रुपए मिलने चाहिए थे, वहां सिर्फ 10 रुपए मिले। हालांकि, राजपाल ने कहा कि वे आर्ट के स्टूडेंट हैं और वे पैसों से ज्यादा अपनी कला में परफेक्शन को अहमियत देते हैं। चेक बाउंस मामले में कोर्ट के बाहर मीडिया से बात करते राजपाल। ‘जिनका पैसा बकाया है, घर पहुंचा दूंगा’ अपनी आर्थिक स्थिति और कर्ज पर बात करते हुए राजपाल यादव ने कहा कि उन्होंने जिनसे भी पैसा उधार लिया था, उसे चुका दिया है या जल्द चुका देंगे। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने 200 लोगों से भी उधार लिया है, तो वे पैसा वापस करेंगे। राजपाल ने कहा कि कोई उन्हें 5 करोड़ या 250 करोड़ रुपए में खरीद नहीं सकता। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आर्थिक मुश्किलें उनके पूरे करियर को तय नहीं करतीं और आज भी एयरपोर्ट पर 500 लोग उनके साथ सेल्फी लेते हैं। बैंक नीलाम कर रहा 3.10 करोड़ की प्रॉपर्टी राजपाल यादव पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का कर्ज न चुकाने के कारण कार्रवाई चल रही है। राजपाल यादव ने सेंट्रल बैंक की मुंबई ब्रांच से पत्नी राधा यादव और मां गोदावरी के नाम पर 16.61 करोड़ रुपए का लोन लिया था। शाहजहांपुर में राजपाल यादव के इसी मकान में नोटिस चस्पा किया गया है। शाहजहांपुर में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने उनके पैतृक घर पर 16.61 करोड़ रुपए के बकाया लोन को लेकर कुर्की का नोटिस चस्पा किया है। चेक बाउंस केस में जेल जा चुके राजपाल राजपाल यादव का चेक बाउंस केस साल 2010 में शुरू हुआ था, जब उन्होंने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ का कर्ज लिया था। 2012 में रिलीज हुई यह फिल्म फ्लॉप हो गई। इसके बाद 2013 से चेक बाउंस का मामला अदालत में चल रहा है। 12 दिनों तक तिहाड़ जेल में रहने के बाद 17 फरवरी को रिहा हुए राजपाल। जुलाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने कर्ज न चुकाने पर उनकी मंशा पर सवाल उठाते हुए सरेंडर का आदेश दिया था। इससे पहले फरवरी 2026 में भी उन्होंने तिहाड़ जेल में सरेंडर किया था, जिसके बाद वे 12 दिन तक जेल में रहे थे। फिलहाल वे अक्षय कुमार के साथ फिल्म ‘हैवान’ और सलमान खान के साथ ‘SVC 63’ की तैयारी कर रहे हैं। राजपाल यादव का करियर हंगामा, हलचल जैसी फिल्मों से कॉमेडी किंग बने 2003 में फिल्म हंगामा, 2005 में गरम मसाला, 2006 में चुप चुप के और फिर हेरा फेरी और 2007 में भूल भुलैया जैसी फिल्मों से उन्हें कॉमेडी मे पहचान मिली। कॉमिक डायरेक्टर प्रियदर्शन के साथ उन्होंने लगभग 8 से 10 फिल्मों मे काम किया है। बेस्ट वर्सटाइल एक्टर अवॉर्ड जीत चुके हैं राजपाल राजपाल यादव को यश भारती अवॉर्ड मिला, जो उत्तर प्रदेश का सर्वोच्च सम्मान है। उन्हें यह अवॉर्ड 2003 की फिल्म ‘मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं’ के लिए मिला। यह सम्मान उनके कॉमेडी और गंभीर अभिनय के रोल के लिए दिया गया था। इससे पहले यह अवॉर्ड अमिताभ बच्चन और जया बच्चन जैसे बड़े नामों को मिल चुका है। उन्हें फिल्मफेयर और आईफा जैसे प्लेटफॉर्म पर बेस्ट कॉमिक एक्टर के लिए नॉमिनेट किया गया, लेकिन वे यह अवॉर्ड नहीं जीत पाए। मुंबई मे पहला सपना सिर्फ जिंदा रहना था’ एनएसडी से पढ़ाई पूरी होने के बाद राजपाल मुंबई आए। शुरुआत में उन्हें कोई सपोर्ट नहीं मिला। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनका पहला सपना मुंबई में जिंदा रहना था। कुछ समय के संघर्ष के बाद उन्हें काम मिलना शुरू हो गया। स्ट्रगल के दिनों में राजपाल ने 20-22 स्ट्रगलिंग एक्टर्स को अपने घर पर खाना खिलाया। एक इंटरव्यू मे नवाजुद्दीन सिद्दीकी बताते हैं कि, ‘राजपाल का घर लंगर जैसा था, फ्री का खाना और रहना।’ छोटू और बटला कहते थे स्कूल के दोस्त राजपाल यादव की हाइट लगभग 5 फीट 1 इंच है। स्कूल में छोटी हाइट की वजह से दोस्त उन्हें छोटू और बौना कहकर बुलाते थे। 20 साल की उम्र में गांव की ऑर्डनेंस क्लोदिंग फैक्ट्री में नौकरी मिली। 20 साल की उम्र में शादी राजपाल यादव ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वे लगभग 20 साल के थे, तब उनके परिवार ने उनकी शादी करा दी थी। उस समय वे गांव में ही रहते थे और नौकरी की शुरुआत कर रहे थे। बेटी के जन्म के 15 मिनट बाद पत्नी का निधन एक इंटरव्यू में राजपाल यादव ने बताया कि वे 20 साल के थे जब घरवालों के दबाव में उनकी शादी कराई गई। उनकी पहली पत्नी का नाम करुणा था। एक साल बाद बेटी ज्योति का जन्म हुआ, लेकिन डिलीवरी के 15 मिनट बाद ही उनकी पत्नी का निधन हो गया। वे कहते हैं, ‘मैं अगले दिन उनसे मिलने वाला था, लेकिन उनकी डेड बॉडी को कंधे पर उठाकर ले गया। 20 साल की उम्र में इतना दर्द सहना आसान नहीं होता।’ इसके बाद वे अकेले पिता बन गए और ज्योति की देखभाल उनकी मां और भाभी ने की। राजपाल ने एक इंटरव्यू में बताया कि दूसरी पत्नी राधा से उनकी मुलाकात कनाडा में हुई थी। उस समय वे सनी देओल और प्रीति जिंटा की फिल्म
BPSC TRE 4 Protest in Patna

Hindi News Career BPSC TRE 4 Protest In Patna | Gardnibagh Student Satyagraha Demands 11 मिनट पहले कॉपी लिंक पिछले दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन और झारखंड आंदोलन के बाद बिहार में छात्रों का आंदोलन उग्र रूप ले चुका है। बिहार के पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षक भर्ती (BPSC TRE 4.0) की मांग को लेकर छात्रों का ‘स्टूडेंट जस्टिस सत्याग्रह’ आंदोलन गर्दनीबाग धरना स्थल पर हो रहा है। इस आंदोलन की शुरुआत में केवल नोटिफिकेशन की मांग थी, जो अब बढ़कर 13 सूत्रीय मांगों में बदल चुकी है, और इसे लेकर राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। जुलाई में हुई आंदोलन की शुरुआत बिहार में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी को लेकर उम्मीदवारों का विरोध अलग-अलग जगह पर शुरू हुआ। 14 जुलाई को BSSC कार्यालय के बाहर उम्मीदवारों ने प्रदर्शन किया और परीक्षा/भर्ती से जुड़ी मांगें उठाईं। उसके बाद पेपर लीक और परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर भी पटना समेत कई जगहों पर छात्र प्रदर्शन हुए। 6 अगस्त को STET उम्मीदवारों ने प्रदर्शन किया 6 अगस्त 2026 को STET उम्मीदवारों ने पटना में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। उनकी मांगों में TRE-4 में STET उम्मीदवारों को मौका मिलने, STET साल में दो बार किए जाने, परीक्षा कैलेंडर के अनुसार परीक्षा किए जाने और 2026 की परीक्षा की तारीख घोषित की जाने की मांग थी। पटना के गर्दनीबाग में ‘ऑल Ph.D. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले कैंडिडेट्स पिछले 13 दिनों से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं। सहायक प्राध्यापक बहाली में UGC Regulation 2018 के Table 3A लागू करने, बिहार में डोमिसाइल नीति प्रभावी करने और 70वीं BPSC परीक्षा निरस्त करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर उपवास कर रहे हैं। आंदोलन के चलते जारी हुआ भर्ती नोटिफिकेशन इस आंदोलन के चलते बिहार लोक सेवा आयोन ने शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। TRE-4 के तहत कुल 32,388 पदों पर भर्ती की जाएगी। 1 सितंबर से ऑनलाइन आवेदन शुरू होगा। आवेदन की आखिरी तारीख 30 सितंबर है। फिलहाल परीक्षा की तारीख घोषित नहीं की गई है। TRE-4 और अन्य लंबित परीक्षाओं की मांग को लेकर छात्र कई दिनों से पटना के गर्दनीबाग में अनिश्चितकालीन ‘छात्र न्याय सत्याग्रह’ पर बैठे हैं। छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र सत्याग्रह कर रहे हैं। नोटिफिकेशन जारी होने के बाद भी छात्रों का कहना कि उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। तेजस्वी यादव ने छात्रों के साथ मार्च निकाला 19 अगस्त 2026 को बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने छात्र-युवा मुद्दों और सीवान में छात्रों पर कथित AK-47 फायरिंग के विरोध में लोकभवन/राजभवन मार्च का नेतृत्व किया। इसे बिहार में चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच RJD के बड़े राजनीतिक प्रदर्शन के रूप में देखा गया। उनके मुख्य मुद्दे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान AK-47 से गोलीबारी, बिहार में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और युवाओं के मुद्दों के अलावा मामले की न्यायिक जांच की मांग भी है। आज भी जारी है प्रदर्शन पटना के TRE-4/BPSC शिक्षक भर्ती 20 अगस्त यानि आज भी जारी है। टीचर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद अब आंदोलनकर्ता परीक्षा को एक फेज में कराने और नेगेटिव मार्किंग खत्म करने पर जोर दे रहे हैं। बता दें कि इस साल TRE-4/BPSC शिक्षक भर्ती आंदोलन के चलते TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी हो गया है। इस साल परीक्षा प्रीलिम्स और मेन्स दो फेज में होगी। इसके साथ ही परीक्षा में निगेटिव मार्किंग भी की जाएगी। एग्जाम में निगेटिव मार्किंग खत्म करने की मांग अब छात्रों की मांग है कि परीक्षा सिर्फ एक फेज में हो और निगेटिव मार्किंग खत्म की जाए। TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी किए जाने की मांग से शुरू हुआ आंदोलन अब तक 13 मांगों को पूरा किए जाने तक पहुंच गया है। छात्रों के बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा विभाग और BPSC के अधिकारियों के साथ बैठक बुलाई। बैठक में TRE-4 में सीटें बढ़ाने और छात्रों की अन्य मांगों पर चर्चा हुई। फिलहाल बिहार के इस आंदोलन से परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता जैसे मुद्दे भी जुड़ते जा रहे हैं। इस प्रदर्शन के दौरान कई जगह पुलिस कार्रवाई और हिंसक झड़पों के मामले भी सामने आए हैं। ये खबर भी पढ़ें JSSC CGL सफल उम्मीदवारों का प्रदर्शन:कई रोने लगे, प्रदर्शनकारी बोले- परीक्षा रद्द होने से 2500 से ज्यादा कैंडिडेट्स फिर बेरोजगार होंगे 17 अगस्त 2026 को JSSC-CGL कैंसिल होने के बाद एक ओर जहां आंदोलनकारी खुशी से झूमते हुए नजर आए। वहीं एग्जाम में पास होने वाले उम्मीदवारों ने नया आंदोलन शुरू कर दिया। इस बार आंदोलन करने वाले छात्र वे हैं जिन्होंने JSSC-CGL पास करके नौकरी हासिल की थी। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
होर्मुज में अमेरिका पर ईरान भारी पड़ रहा:ट्रम्प की धमकी के बावजूद जहाज ईरानी रास्ते से जा रहे, सिर्फ 3 ने ओमानी रास्ता चुना

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले ज्यादातर जहाज अपनी पहचान या रास्ता छिपा रहे हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 से 19 अगस्त के बीच 236 जहाज यहां से गुजरे, लेकिन 148 जहाजों की राह साफ तौर पर पता नहीं चल सकी। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ट्रम्प की धमकियों के बावजूद कई जहाज ईरानी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे यह सवाल उठता है कि होर्मुज स्ट्रेट में इस समय अमेरिका का दबदबा ज्यादा है या ईरान का। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दावा है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री यातायात पर अमेरिकी सेना का नियंत्रण है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका इस इलाके की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेने की कोशिश कर सकता है। वहीं, ईरान का कहना है कि तेहरान की मंजूरी के बिना कोई जहाज होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजर सकता। ऐसे में दोनों देशों के दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि वास्तव में इस रणनीतिक जलमार्ग पर किसका नियंत्रण है। जहाजों की आवाजाही के आंकड़े इस सवाल का अहम संकेत देते हैं। ईरान और अमेरिका के अलग-अलग दावे ट्रम्प ने ओमान पर बमबारी की धमकी भी दी है। ओमान अमेरिका का सहयोगी है और होर्मुज स्ट्रेट के दूसरी तरफ ईरान के सामने स्थित है। स्ट्रेट का समुद्री इलाका ईरान और ओमान दोनों के अधिकार क्षेत्र में आता है। ट्रम्प की धमकी का मकसद मस्कट को तेहरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट का संयुक्त संचालन करने के समझौते से रोकना बताया गया है। युद्ध के बाद दो रास्तों में बंटा होर्मुज युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज को एक ही समुद्री रास्ता माना जाता था। जहाज तय रास्ते से गुजरते थे। उनका रास्ता बंदरगाह, जहाज के समझौते और सुरक्षा को देखकर तय होता था। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद यहां दो अलग रास्तों की बात होने लगी। ईरानी रास्ता: यह होर्मुज के उत्तरी हिस्से में ईरान के तट के पास है। यह लारक और किश्म द्वीपों के करीब से गुजरता है और ईरान के बंदरगाहों और तेल टर्मिनलों तक जाता है। ओमानी रास्ता: यह होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में ओमान के करीब है और ईरान के तट से दूर है। अमेरिका इसी रास्ते से जहाजों को गुजरने पर जोर देता है। अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में चलने वाले कई वाणिज्यिक जहाज भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। 80% से ज्यादा जहाजों का रास्ता पता नहीं समुद्री खुफिया कंपनी केप्लर के मुताबिक, 1 से 19 अगस्त के बीच 112 तेल, एलपीजी और एलएनजी ले जाने वाले जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। इनमें से 21 जहाज खुले तौर पर ईरानी रास्ते से गए, जबकि सिर्फ 2 जहाजों ने ओमानी रास्ते का इस्तेमाल किया। बाकी 89 जहाजों का रास्ता साफ नहीं था। यानी इस दौरान होर्मुज से गुजरने वाले 80% से ज्यादा तेल और गैस वाले जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ट्रैक नहीं हो सकी। ऐसा तब होता है जब जहाज अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद कर देते हैं। कई बार जहाज का AIS डेटा केप्लर के तय ईरानी या ओमानी रास्तों से मेल भी नहीं खाता। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि जहाज वास्तव में किस रास्ते से गुजरा। सभी तरह के जहाजों में भी ईरानी रास्ता आगे 1 से 19 अगस्त के बीच कुल 236 जहाज स्ट्रेट से गुजरे। इनमें तेल और गैस के अलावा सूखा माल और रसायन ले जाने वाले जहाज भी शामिल थे। यानी हर 10 में से 6 से ज्यादा जहाज किस रास्ते से गुजरे, यह साफ तौर पर पता नहीं चल सका। जहाज AIS क्यों बंद कर रहे हैं? युद्ध शुरू होने के बाद ईरान और अमेरिका दोनों ने अपने बताए समुद्री रास्तों या नियमों का पालन नहीं करने वाले जहाजों को चेतावनी दी। कुछ मामलों में जहाजों पर हमले भी हुए। इसी वजह से कई जहाज अपना ट्रांसपोंडर बंद कर रहे हैं। इससे उनकी सही स्थिति और वे किस रास्ते से जा रहे हैं, इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। ब्रिटेन के थिंक टैंक चैथम हाउस के एसोसिएट फेलो नील क्विलियम ने अल जजीरा से कहा कि ट्रांसपोंडर बंद करने से जहाज की आवाजाही कम दिखाई देती है। हालांकि, इससे समुद्री सुरक्षा का खतरा भी बढ़ जाता है। उनके मुताबिक, कुछ जहाज संचालकों को लगता है कि मौजूदा हालात में व्यापार जारी रखने का फायदा इन सुरक्षा जोखिमों से ज्यादा है। रास्ते में जहाजों के बीच सामान भी बदला जा रहा ट्रांसपोंडर बंद करने की एक वजह समुद्र में दो जहाजों के बीच सामान का ट्रांसफर भी है। एनर्जी एक्सपर्ट मार्क अयूब ने अल जजीरा से कहा कि सऊदी अरब, इराक और कुवैत समेत कुछ खाड़ी देशों ने ओमानी रास्ते से कुछ खेप भेजीं। इसके लिए कुछ जहाजों की ट्रैकिंग बंद की गई और रास्ते में दूसरे जहाजों को माल सौंपा गया। उनके मुताबिक, कुछ ईरानी जहाज भी ओमानी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका मकसद प्रतिबंधों और अमेरिकी नाकाबंदी से बचना है। क्या आंकड़े ईरान के दबदबे की ओर इशारा कर रहे हैं? 148 जहाजों का रास्ता साफ नहीं होने की वजह से यह तय करना मुश्किल है कि वास्तव में कितने जहाज ईरानी या ओमानी रास्ते से गुजरे। फिर भी उपलब्ध आंकड़ों से एक बात सामने आती है। अमेरिकी नाकाबंदी और ट्रम्प की धमकियों के बावजूद हर पांच में से एक जहाज खुले तौर पर ईरानी रास्ते से गुजरा। सभी तरह के जहाजों को मिलाकर देखें तो 35% जहाजों ने सार्वजनिक रूप से ईरानी रास्ते का इस्तेमाल किया। इसके मुकाबले ओमानी या पुराने रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बहुत कम रही। इससे संकेत मिलता है कि कई जहाज अमेरिकी धमकियों के बावजूद ईरानी रास्ते का इस्तेमाल करने को तैयार हैं। यानी मौजूदा हालात में ईरान को नाराज करने का डर ट्रम्प की धमकियों से ज्यादा असरदार दिखाई दे रहा है। होर्मुज दुनिया के लिए इतना अहम क्यों है अमेरिका-इजराइल का ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के तेल और एलएनजी की करीब एक-पांचवीं सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती थी। तब हर दिन करीब 130 जहाज यहां से गुजरते थे। इसके मुकाबले अगस्त के 19 दिनों में कुल 236
Hormuz Strait Shipping | Iran Defies Trump Threats Over US Dominance

33 मिनट पहले कॉपी लिंक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले ज्यादातर जहाज अपनी पहचान या रास्ता छिपा रहे हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 से 19 अगस्त के बीच 236 जहाज यहां से गुजरे, लेकिन 148 जहाजों की राह साफ तौर पर पता नहीं चल सकी। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ट्रम्प की धमकियों के बावजूद कई जहाज ईरानी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे यह सवाल उठता है कि होर्मुज स्ट्रेट में इस समय अमेरिका का दबदबा ज्यादा है या ईरान का। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दावा है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री यातायात पर अमेरिकी सेना का नियंत्रण है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका इस इलाके की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेने की कोशिश कर सकता है। वहीं, ईरान का कहना है कि तेहरान की मंजूरी के बिना कोई जहाज होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजर सकता। ऐसे में दोनों देशों के दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि वास्तव में इस रास्ते पर किसका कंट्रोल है। ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट के पास होर्मुज से कॉमर्शियल जहाज गुजरते हुए। ईरान और अमेरिका के अलग-अलग दावे ट्रम्प ने ओमान पर बमबारी की धमकी भी दी है। ओमान अमेरिका का सहयोगी है और होर्मुज स्ट्रेट के दूसरी तरफ ईरान के सामने स्थित है। स्ट्रेट का समुद्री इलाका ईरान और ओमान दोनों के अधिकार क्षेत्र में आता है। ट्रम्प की धमकी का मकसद मस्कट को तेहरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट का संयुक्त संचालन करने के समझौते से रोकना बताया गया है। युद्ध के बाद दो रास्तों में बंटा होर्मुज युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज को एक ही समुद्री रास्ता माना जाता था। जहाज तय रास्ते से गुजरते थे। उनका रास्ता बंदरगाह, जहाज के समझौते और सुरक्षा को देखकर तय होता था। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद यहां दो अलग रास्तों की बात होने लगी। ईरानी रास्ता: यह होर्मुज के उत्तरी हिस्से में ईरान के तट के पास है। यह लारक और किश्म द्वीपों के करीब से गुजरता है और ईरान के बंदरगाहों और तेल टर्मिनलों तक जाता है। ओमानी रास्ता: यह होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में ओमान के करीब है और ईरान के तट से दूर है। अमेरिका इसी रास्ते से जहाजों को गुजरने पर जोर देता है। अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में चलने वाले कई कॉमर्शियल जहाज भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। 80% से ज्यादा जहाजों का रास्ता पता नहीं समुद्री खुफिया कंपनी केप्लर के मुताबिक, 1 से 19 अगस्त के बीच 112 तेल, एलपीजी और एलएनजी ले जाने वाले जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। इनमें से 21 जहाज खुले तौर पर ईरानी रास्ते से गए, जबकि सिर्फ 2 जहाजों ने ओमानी रास्ते का इस्तेमाल किया। बाकी 89 जहाजों का रास्ता साफ नहीं था। यानी इस दौरान होर्मुज से गुजरने वाले 80% से ज्यादा तेल और गैस वाले जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ट्रैक नहीं हो सकी। ऐसा तब होता है जब जहाज अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद कर देते हैं। कई बार जहाज का AIS डेटा केप्लर के तय ईरानी या ओमानी रास्तों से मेल भी नहीं खाता। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि जहाज वास्तव में किस रास्ते से गुजरा। सभी तरह के जहाजों में भी ईरानी रास्ता आगे 1 से 19 अगस्त के बीच कुल 236 जहाज स्ट्रेट से गुजरे। इनमें तेल और गैस के अलावा सूखा माल और रसायन ले जाने वाले जहाज भी शामिल थे। 83 जहाज ईरानी रास्ते से गए 3 जहाज ओमानी रास्ते से गुजरे 2 जहाज पुराने रास्ते से गए 148 जहाजों के रास्ते का पता नहीं लगा यानी हर 10 में से 6 से ज्यादा जहाज किस रास्ते से गुजरे, यह साफ तौर पर पता नहीं चल सका। जहाज AIS क्यों बंद कर रहे हैं? युद्ध शुरू होने के बाद ईरान और अमेरिका दोनों ने अपने बताए समुद्री रास्तों या नियमों का पालन नहीं करने वाले जहाजों को चेतावनी दी। कुछ मामलों में जहाजों पर हमले भी हुए। इसी वजह से कई जहाज अपना ट्रांसपोंडर बंद कर रहे हैं। इससे उनकी सही स्थिति और वे किस रास्ते से जा रहे हैं, इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। ब्रिटेन के थिंक टैंक चैथम हाउस के एसोसिएट फेलो नील क्विलियम ने अल जजीरा से कहा कि ट्रांसपोंडर बंद करने से जहाज की आवाजाही कम दिखाई देती है। हालांकि, इससे समुद्री सुरक्षा का खतरा भी बढ़ जाता है। उनके मुताबिक, कुछ जहाज कंपनियां खतरे के बावजूद अपना कारोबार जारी रखना चाहती हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे होने वाला फायदा जोखिम से ज्यादा है। पिछले सप्ताह अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के दो जहाजों पर होर्मुज स्ट्रेट में हमला हुआ था। रास्ते में जहाजों के बीच सामान भी बदला जा रहा ट्रांसपोंडर बंद करने की एक वजह समुद्र में दो जहाजों के बीच सामान का ट्रांसफर भी है। एनर्जी एक्सपर्ट मार्क अयूब ने अल जजीरा से कहा कि सऊदी अरब, इराक और कुवैत समेत कुछ खाड़ी देशों ने ओमानी रास्ते से कुछ खेप भेजीं। इसके लिए कुछ जहाजों की ट्रैकिंग बंद की गई और रास्ते में दूसरे जहाजों को माल सौंपा गया। उनके मुताबिक, कुछ ईरानी जहाज भी ओमानी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका मकसद प्रतिबंधों और अमेरिकी नाकाबंदी से बचना है। क्या आंकड़े ईरान के दबदबे की ओर इशारा कर रहे हैं? 148 जहाजों का रास्ता साफ नहीं होने की वजह से यह तय करना मुश्किल है कि वास्तव में कितने जहाज ईरानी या ओमानी रास्ते से गुजरे। फिर भी उपलब्ध आंकड़ों से एक बात सामने आती है। अमेरिकी नाकाबंदी और ट्रम्प की धमकियों के बावजूद हर पांच में से एक जहाज खुले तौर पर ईरानी रास्ते से गुजरा। सभी तरह के जहाजों को मिलाकर देखें तो 35% जहाजों ने सार्वजनिक रूप से ईरानी रास्ते का इस्तेमाल किया। इसके मुकाबले ओमानी या पुराने रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बहुत कम रही। इससे संकेत मिलता है कि कई जहाज अमेरिकी धमकियों के बावजूद ईरानी रास्ते का इस्तेमाल करने को तैयार हैं। यानी मौजूदा हालात में ईरान को नाराज करने का डर ट्रम्प की धमकियों से ज्यादा असरदार दिखाई दे रहा
चीन बोला-जापान के पास 5500 परमाणु हथियार जितना प्लूटोनियम:रूस में राजदूत बोले- 44.4 टन निकाला हुआ, 191 टन और स्टोरेज में

चीन ने जापान की परमाणु क्षमता को लेकर फिर चिंता जताई है। रूस में चीन के राजदूत झांग हानहुई ने दावा किया कि जापान के पास इतना प्लूटोनियम है, जिससे करीब 5,500 परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं। रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी TASS में लिखे एक लेख में झांग ने कहा कि 2024 के अंत तक जापान के पास 44.4 टन प्लूटोनियम था। यह इस्तेमाल किए जा चुके परमाणु ईंधन से निकाला गया है। झांग के मुताबिक, जापान के इस्तेमाल किए गए परमाणु ईंधन के स्टोरेज में 191 टन और प्लूटोनियम मौजूद है, जिसे अभी निकाला नहीं गया है। उन्होंने कहा कि जापान के पास परमाणु ईंधन को दोबारा प्रोसेस करने और प्लूटोनियम निकालने की तकनीक भी है। चीन बोला- जापान परमाणु ताकत बन सकता है झांग ने कहा कि अगर जापान के पास परमाणु हथियार बनाने की इच्छा और जरूरी क्षमता है, तो उसका परमाणु शक्ति बनना अब सिर्फ कल्पना नहीं है। हालांकि, जापान के तीन गैर-परमाणु सिद्धांत हैं। इनके तहत जापान परमाणु हथियार न रखने, न बनाने और देश में न आने देने की नीति पर कायम है। खबर अपडेट हो रही है…
चीन बोला-जापान के पास 5500 परमाणु बम बनाने जितना प्लूटोनियम:राजदूत ने कहा- चाहे तो कभी भी परमाणु हथियार बना सकता है

चीन ने जापान की परमाणु क्षमता को लेकर फिर चिंता जताई है। रूस में चीन के राजदूत झांग हानहुई ने दावा किया कि जापान के पास इतना प्लूटोनियम है, जिससे करीब 5,500 परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं। प्लूटोनियम एक रेडियोऐक्टिव तत्व है जो परमाणु ऊर्जा बनाते वक्त यूरेनियम से बनता है। इसे प्रोसेस कर बहुत ज्यादा ऊर्जा बनाई जा सकती है जिसे परमाणु हथियार बनाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी TASS में लिखे एक लेख में झांग ने कहा कि जापान के पास परमाणु ईंधन को दोबारा प्रोसेस करने और प्लूटोनियम निकालने की तकनीक भी है। उन्होंने कहा कि अगर जापान के पास परमाणु हथियार बनाने की इच्छा और जरूरी क्षमता है, तो वह चाहे तो कभी भी परमाणु हथियार बना सकता है। चीन बोला- जापान का 2024 से 300% प्लूटोनियम बढ़ा झांग ने कहा कि 2024 के अंत तक जापान के पास 44.4 टन प्लूटोनियम था। यह इस्तेमाल किए जा चुके परमाणु ईंधन से निकाला गया है। अब जापानी स्टोरेज में 191 टन और प्लूटोनियम मौजूद है, जिसे अभी निकाला नहीं गया है। यानी करीब 300% का इजाफा। झांग ने आगे कहा, अगर टोक्यो परमाणु हथियार बनाने का फैसला करता है, तो पूर्वोत्तर एशिया का शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है। इससे इस इलाके में कभी भी परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है। जापान के पास इतना प्लूटोनियम कहा से आया? जापान के पास मौजूद ज्यादातर प्लूटोनियम परमाणु रिएक्टरों में इस्तेमाल होने वाले यूरेनियम से बना है। रिएक्टर में यूरेनियम के परमाणु टूटने के दौरान उसका कुछ हिस्सा बदलकर प्लूटोनियम में बदल जाता है। बाद में इस्तेमाल हो चुके ईंधन से प्लूटोनियम को अलग किया जाता है। जापान ने अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तहत ऐसे ईंधन को दोबारा इस्तेमाल करने की नीति अपनाई है। इसी वजह से उसके पास कई दशकों में बड़ी मात्रा में प्लूटोनियम जमा हुआ है। जापान गैर-परमाणु सिद्धांतों के कारण हथियार नहीं बनाता जापान के तीन गैर-परमाणु सिद्धांत हैं। यह एक राष्ट्र नीति है, जिसके तहत जापान ने 3 अहम संकल्प लिए हैं- 1. परमाणु हथियार न रखना 2. परमाणु हथियार न बनाना 3. परमाणु हथियार को अपने देश में न आने देना इन सिद्धांतों की घोषणा 1967 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ईसाकु सातो ने की थी। इसके पीछे हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमलों का डरावना असर और जापानी लोगों की परमाणु हथियारों के खिलाफ सोच थी। हालांकि ये सिद्धांत कानून नहीं हैं, लेकिन कई दशकों से ये जापान की सुरक्षा नीति और शांतिवादी संविधान का अहम हिस्सा बने हुए हैं। ————— यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले-आर्थिक हमले से ईरान को दुनिया से काट देंगे: जो देश ईरान का साथ देंगे, वे नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते का मौका गंवा दिया है। अब उसे आर्थिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…







