UN में पहली बार महिला चीफ बन सकती है:रेस में अभी 8 दावेदार, इनमें 5 महिलाएं; गुयाना की बिर्केट सबसे आगे

संयुक्त राष्ट में अगला महासचिव चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शुक्रवार को हुई दूसरे दौर की अनौपचारिक वोटिंग में गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे हैं। वहीं दूसरे पायदान पर कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन हैं। महासचिव बनने की रेस में इस समय कुल 8 दावेदार हैं। इनमें 5 महिलाएं हैं। यानी UN के 80 साल के इतिहास में यह पहली बार हो सकता है जब कोई महिला महासचिव बने। संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। अब उनके बाद अगला महासचिव चुना जाना है। UN महासचिव का चुनाव कैसे होता है? महासचिव बनने के लिए UNSC के स्थायी सदस्यों का साथ जरूरी विकसित देशों से महासचिव क्यों नहीं बनता ? 1. हर इलाके को मौका देने की कोशिश संयुक्त राष्ट्र में यह कोशिश रहती है कि महासचिव का पद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के देशों को मिलता रहे। यानी हर बार एक ही इलाके के व्यक्ति को यह पद न मिले। इससे बाकी देशों को भी लगता है कि संयुक्त राष्ट्र सबका है। 1997 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी कहा था कि महासचिव चुनते समय अलग-अलग क्षेत्रों को मौका देने और महिला-पुरुष बराबरी का ध्यान रखा जाना चाहिए। हालांकि, यह कोई पक्का नियम नहीं है। 2. महासचिव किसी एक बड़े देश का आदमी न लगे महासचिव को पूरी दुनिया का चेहरा माना जाता है। इसलिए अगर अमेरिका या चीन जैसी बड़ी ताकत के किसी बड़े नेता को यह पद मिल जाए, तो दूसरे देशों को डर हो सकता है कि संयुक्त राष्ट्र पर उस देश का असर बढ़ जाएगा। इसी वजह से ऐसे व्यक्ति को तरजीह मिलती है, जिसे किसी एक बड़ी ताकत के करीब न माना जाए। 3. एशिया-अफ्रीका के देशों की संख्या ज्यादा संयुक्त राष्ट्र में कुल 193 देश हैं। इनमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के बहुत से देश हैं। इन देशों की भी इच्छा रहती है कि संयुक्त राष्ट्र का मुखिया सिर्फ यूरोप या अमेरिका की सोच वाला न हो, बल्कि दुनिया के बाकी हिस्सों की आवाज भी समझता हो। लेकिन ऐसा नहीं है कि विकसित देशों के लोगों को कभी मौका ही नहीं मिला। 1991 में कनाडा, नीदरलैंड और नॉर्वे के उम्मीदवार भी महासचिव पद की दौड़ में थे। 2016 में पुर्तगाल के एंतोनियो गुटेरेस महासचिव बने। उस समय पूर्वी यूरोप से महासचिव बनाने की मांग भी काफी जोर पकड़ रही थी। 2006 में शशि थरूर भी भारत से दावेदार रहे भारत के सांसद शशि थरूर भी UN महासचिव पद के दावेदार रह चुके हैं। 2006 में मनमोहन सिंह सरकार ने उन्हें UN महासचिव पद के लिए उम्मीदवार बनाया था। थरूर 1978 से UN में काम कर रहे थे। भारत ने उनके लंबे UN अनुभव और अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ को उनकी ताकत बताया। साथ ही, भारत ने कहा कि अब अगला महासचिव एशिया से होना चाहिए। भारत ने दुनियाभर में थरूर के लिए समर्थन जुटाया। मनमोहन सिंह ने कई देशों के नेताओं को पत्र लिखे, जबकि थरूर ने खुद भी अलग-अलग देशों के नेताओं से मुलाकात की। हालांकि, वे महासचिव नहीं बन सके। अनौपचारिक वोटिंग में थरूर दूसरे नंबर पर रहे, जबकि दक्षिण कोरिया के बान की-मून लगातार सबसे आगे रहे। —————— यह खबर भी पढ़ें… संयुक्त राष्ट्र में इजराइली राजदूत ने UN अफसर को फटकारा:यौन हिंसा से जुड़ी रिपोर्ट में इजराइल का नाम आने से नाराज थे संयुक्त राष्ट्र (UN) में शुक्रवार को एक बैठक के दौरान इजराइल के राजदूत डैनी डैनन और UN महासचिव की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन के बीच तीखी बहस हो गई। पूरी खबर पढ़ें…
UN Secretary General Election | Carolyn Rodrigues Birkett Leads Race

5 मिनट पहले कॉपी लिंक UN के 80 साल के इतिहास में पहली बार कोई महिला महासचिव बन सकती है। फिलहाल इस रेस में कुल 8 दावेदार हैं। इनमें 5 महिलाएं हैं। शुक्रवार को हुई दूसरे दौर की अनौपचारिक वोटिंग में गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे हैं। वहीं दूसरे पायदान पर कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन हैं। संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। इसलिए अगला महासचिव चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। UN महासचिव पद की उम्मीदवार गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट। (फाइल फोटो) UN महासचिव का चुनाव कैसे होता है? संयुक्त राष्ट्र का महासचिव सीधे जनता या सभी देशों की वोटिंग से नहीं चुना जाता। पहले सुरक्षा परिषद (UNSC) उम्मीदवारों के नामों पर विचार करती है। सुरक्षा परिषद में उम्मीदवारों को लेकर कई दौर की अनौपचारिक और सीक्रेट वोटिंग होती है। इसमें 15 सदस्य देश बताते हैं कि वे उम्मीदवार के साथ हैं, उसके खिलाफ हैं या उनकी कोई राय नहीं है। यह अंतिम या औपचारिक चुनाव नहीं होता। इसका मकसद यह देखना होता है कि कौन उम्मीदवार कितना मजबूत है। अगर किसी उम्मीदवार को कम समर्थन मिलता है, तो वह अपनी दावेदारी वापस भी ले सकता है। महासचिव बनने के लिए UNSC के स्थायी सदस्यों का साथ जरूरी सुरक्षा परिषद में कुल 15 देश होते हैं। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं। इन पांचों के पास वीटो पावर है। किसी उम्मीदवार को सुरक्षा परिषद से आगे बढ़ने के लिए कम से कम 9 वोट चाहिए। लेकिन सिर्फ 9 वोट मिल जाना काफी नहीं है। पांच स्थायी सदस्यों में से किसी एक का विरोध भी उम्मीदवार की राह रोक सकता है। इसलिए उम्मीदवार को बाकी देशों का समर्थन जुटाने के साथ यह भी देखना होता है कि पांचों स्थायी देशों में से कोई उसके खिलाफ न हो। जब बातचीत और वोटिंग के बाद किसी एक उम्मीदवार के नाम पर पर्याप्त सहमति बन जाती है, तो सुरक्षा परिषद औपचारिक बैठक में उस नाम की सिफारिश करती है। इसके बाद उम्मीदवार का नाम संयुक्त राष्ट्र महासभा के पास जाता है। महासभा में संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देश होते हैं। महासभा सुरक्षा परिषद की सिफारिश के आधार पर नए महासचिव की नियुक्ति करती है। कई बार यह मंजूरी बिना औपचारिक वोटिंग के सर्वसम्मति से भी हो जाती है। नियुक्ति के बाद महासचिव का सामान्य कार्यकाल 5 साल का होता है। उसे दूसरी बार भी चुना जा सकता है। वोटिंग की प्रक्रिया अनौपचारिक वोटिंग में UNSC के 15 सदस्य हर उम्मीदवार के लिए अपनी राय देते हैं। इसमें तीन विकल्प होते हैं: 1. समर्थन 2. विरोध 3. कोई राय नहीं इसका मतलब यह है कि हर देश को उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में ही वोट देना जरूरी नहीं है। वह ‘कोई राय नहीं’ भी चुन सकता है। जैसे 30 जुलाई की पहली अनौपचारिक वोटिंग में रेबेका ग्रिन्सपैन को सबसे ज्यादा समर्थन मिला था। उन्हें 10 देशों का समर्थन, 1 का विरोध और 4 देशों ने कोई राय नहीं दी थी। 21 अगस्त की अनौपचारिक वोटिंग में कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे रहीं। उन्हें 8 देशों का समर्थन, 3 का विरोध और 4 देशों ने कोई राय नहीं दी। हालांकि इन वोटिंग के ये आंकड़े अंतिम चुनाव के नतीजे नहीं होते। इनका मकसद सिर्फ यह पता लगाना होता है कि कौन उम्मीदवार सबसे मजबूत स्थिति में है और किसके नाम पर UNSC में सहमति बन सकती है। विकसित देशों से महासचिव क्यों नहीं बनता ? 1. हर इलाके को मौका देने की कोशिश संयुक्त राष्ट्र में यह कोशिश रहती है कि महासचिव का पद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के देशों को मिलता रहे। यानी हर बार एक ही इलाके के व्यक्ति को यह पद न मिले। इससे बाकी देशों को भी लगता है कि संयुक्त राष्ट्र सबका है। 1997 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी कहा था कि महासचिव चुनते समय अलग-अलग क्षेत्रों को मौका देने और महिला-पुरुष बराबरी का ध्यान रखा जाना चाहिए। हालांकि, यह कोई पक्का नियम नहीं है। 2. महासचिव किसी एक बड़े देश का आदमी न लगे महासचिव को पूरी दुनिया का चेहरा माना जाता है। इसलिए अगर अमेरिका या चीन जैसी बड़ी ताकत के किसी बड़े नेता को यह पद मिल जाए, तो दूसरे देशों को डर हो सकता है कि संयुक्त राष्ट्र पर उस देश का असर बढ़ जाएगा। इसी वजह से ऐसे व्यक्ति को तरजीह मिलती है, जिसे किसी एक बड़ी ताकत के करीब न माना जाए। 3. एशिया-अफ्रीका के देशों की संख्या ज्यादा संयुक्त राष्ट्र में कुल 193 देश हैं। इनमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के बहुत से देश हैं। इन देशों की भी इच्छा रहती है कि संयुक्त राष्ट्र का मुखिया सिर्फ यूरोप या अमेरिका की सोच वाला न हो, बल्कि दुनिया के बाकी हिस्सों की आवाज भी समझता हो। लेकिन ऐसा नहीं है कि विकसित देशों के लोगों को कभी मौका ही नहीं मिला। 1991 में कनाडा, नीदरलैंड और नॉर्वे के उम्मीदवार भी महासचिव पद की दौड़ में थे। 2016 में पुर्तगाल के एंतोनियो गुटेरेस महासचिव बने। उस समय पूर्वी यूरोप से महासचिव बनाने की मांग भी काफी जोर पकड़ रही थी। 2006 में शशि थरूर भी भारत से दावेदार रहे भारत के सांसद शशि थरूर भी UN महासचिव पद के दावेदार रह चुके हैं। 2006 में मनमोहन सिंह सरकार ने उन्हें UN महासचिव पद के लिए उम्मीदवार बनाया था। थरूर 1978 से UN में काम कर रहे थे। भारत ने उनके लंबे UN अनुभव और अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ को उनकी ताकत बताया। साथ ही, भारत ने कहा कि अब अगला महासचिव एशिया से होना चाहिए। भारत ने दुनियाभर में थरूर के लिए समर्थन जुटाया। मनमोहन सिंह ने कई देशों के नेताओं को पत्र लिखे, जबकि थरूर ने खुद भी अलग-अलग देशों के नेताओं से मुलाकात की। हालांकि, वे महासचिव नहीं बन सके। अनौपचारिक वोटिंग में थरूर दूसरे नंबर पर रहे, जबकि दक्षिण कोरिया के बान की-मून लगातार सबसे आगे रहे। —————— यह खबर भी पढ़ें… UN में चीफ गुटेरेस की जगह किसे मिलेगी:आज दूसरे दौर की वोटिंग, रेस में 8 दावेदार, कोस्टा रिका की ग्रिन्सपैन सबसे आगे
पाकिस्तान ने पत्रकार को आतंकी सूची में डाला:PoK प्रदर्शन कवर करने वाले दानिश इरशाद पर बिना मुकदमे कार्रवाई, बैंक-यात्रा पर रोक

पाकिस्तान ने PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार और शोधकर्ता डेनिश इरशाद का नाम आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची यानी फोर्थ शेड्यूल में डाल दिया है। खास बात यह है कि उनके खिलाफ किसी खास आतंकवादी गतिविधि का आरोप या अदालत का कोई फैसला सामने नहीं आया है। इरशाद पिछले करीब 10 साल से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान की राजनीति और वहां के हालात पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने PoK में हुए प्रदर्शनों, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की स्थिति को प्रमुखता से कवर किया था। अब उनका नाम उस सूची में डाला गया है, जिसमें सरकार उन लोगों को रखती है, जिन्हें वह आतंकवाद या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ा मानती है। इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर डेनिश इरशाद ने ऐसा क्या किया, जिसके आधार पर उन्हें फोर्थ शेड्यूल में डाला गया? उपलब्ध आदेश में इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। डेनिश इरशाद कौन हैं? डेनिश इरशाद रावलपिंडी में रहने वाले पत्रकार और शोधकर्ता हैं। उन्होंने 2015 में इस्लामाबाद से पत्रकारिता शुरू की थी। इसके बाद से वे लगातार PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान की राजनीति, इतिहास और वहां के सामाजिक-राजनीतिक हालात पर काम कर रहे हैं। वे लाहौर स्थित नियो न्यूज के साथ काम करते हैं और जम्मू से प्रकाशित कश्मीर टाइम्स में कॉलम भी लिखते हैं। वे 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर के इतिहास पर एक किताब भी लिख चुके हैं। बीबीसी उर्दू के पत्रकार रोहान अहमद ने उन्हें पेशेवर पत्रकार और शोधकर्ता बताया है। उनके मुताबिक, इरशाद उन लोगों की आवाज सामने लाने की कोशिश करते रहे हैं, जिन्हें अपनी बात रखने के लिए मदद की जरूरत होती है। इरशाद ने ऐसा क्या किया? पाकिस्तान के जिस आदेश के आधार पर डेनिश इरशाद का नाम फोर्थ शेड्यूल में डाला गया है, उसमें उनके खिलाफ कोई खास आरोप नहीं बताया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि उन्होंने ऐसा कौन सा काम किया, जिसे आतंकवाद से जोड़कर देखा गया। कश्मीर टाइम्स के मुताबिक, इरशाद का नाम PoK के 24 लोगों की सूची में 12वें नंबर पर है। आदेश में जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी जेके-जेएएसी से जुड़े कार्यकर्ताओं का भी जिक्र है। पाकिस्तान सरकार ने जेएएसी को जून में प्रतिबंधित कर दिया था। हाल के महीनों में इरशाद ने PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की लगातार रिपोर्टिंग की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांगों और वहां की स्थिति को कवर करने के साथ उन परिवारों से भी बातचीत की, जिनके बच्चों के पाकिस्तान की सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे जाने का आरोप है। यानी उनकी रिपोर्टिंग में आंदोलनकारियों और प्रभावित परिवारों का पक्ष भी सामने आया। हालांकि, सरकार के आदेश में यह नहीं बताया गया कि उनकी ऐसी कौन सी रिपोर्टिंग या गतिविधि फोर्थ शेड्यूल में नाम डालने का आधार बनी। इरशाद के मुताबिक, उन्हें न तो किसी मामले में अदालत में पेश किया गया और न ही किसी अपराध में दोषी ठहराया गया। उन्हें सरकार की तरफ से सीधे यह जानकारी भी नहीं दी गई कि उनका नाम सूची में क्यों डाला गया। उन्हें 18 अगस्त को सोशल मीडिया के जरिए इस कार्रवाई का पता चला। इसके बाद उन्होंने PoK के गृह विभाग के एक सूत्र से इसकी पुष्टि की। फोर्थ शेड्यूल क्या है? पाकिस्तान में फोर्थ शेड्यूल आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची है। इसमें उन लोगों को रखा जा सकता है, जिन्हें सरकार आतंकवाद या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ा मानती है। इस सूची में नाम आने के बाद संबंधित व्यक्ति पर कई तरह की पाबंदियां लग सकती हैं। इनमें विदेश यात्रा पर रोक, पासपोर्ट से जुड़ी पाबंदियां, बैंक खातों पर कार्रवाई, कर्ज या क्रेडिट कार्ड लेने में परेशानी और हथियार का लाइसेंस लेने पर रोक जैसी पाबंदियां शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा सरकारी निगरानी भी बढ़ सकती है। इसलिए किसी पत्रकार का नाम इस सूची में डाला जाना सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं मानी जाती। इससे उस व्यक्ति की आवाजाही, आर्थिक गतिविधियों और सार्वजनिक कामकाज पर गंभीर असर पड़ सकता है। PoK में क्या चल रहा है? डेनिश इरशाद के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब PoK में लंबे समय से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी कर रही है। प्रदर्शनकारी राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सब्सिडी और शासन व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे उठा रहे हैं। उनकी मांगों में PoK विधानसभा में पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना भी शामिल है। पाकिस्तान सरकार ने 5 जून को जेएएसी पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव बढ़ गया। इस दौरान इंटरनेट बंद करने और मीडिया पर पाबंदियां लगाने जैसी कार्रवाई भी हुई। जेएएसी का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 80 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं। यह आंकड़ा संगठन का दावा है। इसी दौरान डेनिश इरशाद लगातार PoK के हालात की रिपोर्टिंग कर रहे थे। उन्होंने प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के अलावा प्रभावित परिवारों से भी बात की। यही वजह है कि उनके खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनकी रिपोर्टिंग और आंदोलन को कवर करने की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी पत्रकारों ने क्या कहा? डेनिश इरशाद को फोर्थ शेड्यूल में डाले जाने की पाकिस्तान के कुछ पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने भी आलोचना की है। पाकिस्तानी पत्रकार सालेह सफीर अब्बासी ने इसे प्रेस की आजादी पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि असहमति रखना अपराध नहीं, बल्कि एक अधिकार है। ब्रिटेन में रहने वाले पाकिस्तानी कार्यकर्ता अजहर अहमद ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी पत्रकार के खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है। इससे उन पत्रकारों में डर पैदा हो सकता है, जो विरोध प्रदर्शनों, सरकारी कार्रवाई और मानवाधिकारों की स्थिति पर रिपोर्टिंग करते हैं। न्यूयॉर्क की पाकिस्तानी खोजी पत्रकार अरीबा फातिमा ने भी सवाल उठाया कि इरशाद के खिलाफ न कोई मुकदमा है और न अदालत का आदेश, फिर उन्हें आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची में किस आधार पर डाला गया? सिर्फ
Journalist Danish Irshad Added To Pakistan Terror List Over PoK Reporting

इस्लामाबाद50 मिनट पहले कॉपी लिंक पत्रकार दानिश इरशाद PoK में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करते हुए। पाकिस्तान ने PoK में हो रहे प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार और रिसर्चर दानिश इरशाद का नाम आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची यानी फोर्थ शेड्यूल में डाल दिया है। खास बात यह है कि सरकार ने उनके खिलाफ न तो किसी आतंकी गतिविधि का आरोप बताया है और न ही किसी अदालत का फैसला सामने आया है। दानिश इरशाद पिछले करीब 10 साल से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान की राजनीति और वहां के हालात पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने PoK में सुरक्षा बलों की कार्रवाई से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों की लगातार रिपोर्टिंग की थी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दानिश इरशाद ने ऐसा क्या किया, जिसके आधार पर उनका नाम फोर्थ शेड्यूल में डाला गया? उपलब्ध सरकारी आदेश में इसका कोई साफ जवाब नहीं मिलता। 10 साल से पत्रकारिता कर रहे दानिश इरशाद दानिश इरशाद रावलपिंडी के रहने वाले हैं। उन्होंने 2015 में इस्लामाबाद से पत्रकारिता शुरू की थी। वे लाहौर स्थित नियो न्यूज के साथ काम करते हैं और जम्मू से प्रकाशित कश्मीर टाइम्स में कॉलम भी लिखते हैं। वे 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर के इतिहास पर एक किताब भी लिख चुके हैं। कश्मीर टाइम्स के मुताबिक, PoK के 24 वॉन्टेड लोगों की सूची में इरशाद का नाम 12वें नंबर पर है। इसी आदेश में JAAC से जुड़े कार्यकर्ताओं का भी जिक्र है। पाकिस्तान सरकार ने जून में JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया था। इरशाद के मुताबिक, उन्हें न तो किसी मामले में अदालत में पेश किया गया और न ही किसी अपराध में दोषी ठहराया गया। सरकार ने भी उन्हें सीधे यह नहीं बताया कि उनका नाम सूची में क्यों डाला गया। उन्हें 18 अगस्त को सोशल मीडिया के जरिए इस कार्रवाई का पता चला। इसके बाद उन्होंने PoK के गृह विभाग के एक सूत्र से इसकी पुष्टि की। फोर्थ शेड्यूल क्या है? पाकिस्तान में फोर्थ शेड्यूल आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची है। इसमें उन लोगों को रखा जा सकता है, जिन्हें सरकार आतंकवाद या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ा मानती है। इस सूची में नाम आने के बाद उस व्यक्ति पर कई तरह की पाबंदियां लग सकती हैं। यानी वह आसानी से विदेश नहीं जा सकता, उसके बैंक खाते या पैसों से जुड़े कामों में दिक्कत आ सकती है और उस पर सरकारी निगरानी भी बढ़ सकती है। इसलिए किसी पत्रकार का नाम इस सूची में आना काफी गंभीर कार्रवाई मानी जाती है। PoK में क्या चल रहा है? इरशाद के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब PoK में लंबे समय से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। इनका नेतृत्व JAAC कर रही है। प्रदर्शनकारी राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सब्सिडी और शासन व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे उठा रहे हैं। उनकी मांगों में PoK विधानसभा में पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना भी शामिल है। पाकिस्तान सरकार ने 5 जून को JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव बढ़ गया। इस दौरान इंटरनेट बंद करने और मीडिया पर पाबंदियां लगाने जैसी कार्रवाई भी हुई। JAAC का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 80 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं। इसी दौरान इरशाद ने प्रदर्शनों, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की स्थिति को लगातार कवर किया। रावलकोट में 8 जून को पुलिस और JAAC कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। पाकिस्तानी पत्रकारों ने क्या कहा? दानिश इरशाद को फोर्थ शेड्यूल में डाले जाने की पाकिस्तान के कुछ पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने भी आलोचना की है। पाकिस्तानी पत्रकार सालेह सफीर अब्बासी ने इसे प्रेस की आजादी पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि असहमति रखना अपराध नहीं, बल्कि एक अधिकार है। ब्रिटेन में रहने वाले पाकिस्तानी कार्यकर्ता अजहर अहमद ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी पत्रकार के खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है। इससे उन पत्रकारों में डर पैदा हो सकता है, जो विरोध प्रदर्शनों, सरकारी कार्रवाई और मानवाधिकारों की स्थिति पर रिपोर्टिंग करते हैं। न्यूयॉर्क की पाकिस्तानी खोजी पत्रकार अरीबा फातिमा ने भी सवाल उठाया कि इरशाद के खिलाफ न कोई मुकदमा है और न अदालत का आदेश, फिर उन्हें आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची में किस आधार पर डाला गया। ——————————- यह खबर भी पढ़ें… शांत रहने वाला PoK पाकिस्तान के लिए परेशानी कैसे बना:12 रिजर्व सीटें क्यों खत्म कराना चाहते हैं प्रदर्शनकारी, मांगें क्यों नहीं मान रही सरकार PoK में महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल चुका है। इसे कई वर्षों में पाकिस्तान सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Arti Singh On Govinda-Sunita Ahuja Controversy

14 मिनट पहले कॉपी लिंक गोविंदा और सुनीता आहूजा के रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उनकी भांजी और एक्ट्रेस आरती सिंह ने प्रतिक्रिया दी है। हाल ही में एक कार्यक्रम में पैपराजी ने उनसे मामा गोविंदा और मामी सुनीता के रिश्ते को लेकर सवाल किया। आरती ने कहा कि वह अपने से बड़ों के मामले में नहीं बोलतीं और यह परिवार का निजी मामला है। उन्होंने कहा कि जो महसूस करती हैं, वह परिवार के लोगों से साझा करेंगी, दुनिया को बताने की जरूरत नहीं है। इस दौरान उन्होंने विवाद से फुटेज लेने की कोशिश करने वालों पर भी तंज कसा। परिवार के मामले में बोलने से आरती ने किया इनकार गोविंदा और सुनीता आहूजा के रिश्ते को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार खबरें आ रही हैं। इसी बीच आरती सिंह से इस मामले पर सवाल किया गया, तो उन्होंने सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। आरती ने कहा कि वह अपने से बड़ों के बीच नहीं बोलतीं। उन्होंने इसे गोविंदा और सुनीता का मामला बताते हुए कहा कि वह परिवार के निजी मसले पर सार्वजनिक राय नहीं रखना चाहतीं। उन्होंने साफ कहा कि वह इस मामले में बीच में नहीं पड़ेंगी, क्योंकि वह परिवार का हिस्सा हैं। आरती सिंह गोविंदा की बहन पद्मा शर्मा की बेटी और कृष्णा अभिषेक की बहन हैं। बोलीं- मामी और परिवार से बात करूंगी आरती ने बताया कि वह जो महसूस कर रही हैं, उसे परिवार के लोगों के साथ साझा करेंगी। उन्होंने कहा कि वह कृष्णा अभिषेक को फोन करके बात करेंगी। इसके अलावा टीना आहूजा, यशवर्धन आहूजा, सुनीता आहूजा और अपनी मां से भी भावनाएं साझा करेंगी। आरती का कहना था कि उनकी जो भी फीलिंग है, उसे परिवार तक पहुंचाना जरूरी है, लेकिन पूरी दुनिया को बताने की जरूरत वह नहीं समझतीं। यानी उन्होंने इस मामले पर सार्वजनिक बयान देने के बजाय परिवार के भीतर बातचीत को प्राथमिकता दी। ‘जो लोग फुटेज लेना चाहते हैं, वो अच्छा वाला ले रहे हैं’ आरती ने उन लोगों पर भी तंज कसा, जो गोविंदा और सुनीता के विवाद पर लगातार प्रतिक्रियाएं लेने की कोशिश कर रहे हैं। पैपराजी से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैंने जैसा कहा पहले भी, मैं अपने से बड़ों के बीच में नहीं बोलती हूं। ये उनका मामला है और जो लोग फुटेज लेना चाहते हैं, वो बहुत अच्छे से ले रहे हैं। मैं उनमें से नहीं हूं, क्योंकि मैं परिवार का हिस्सा हूं।” आरती के इस बयान से साफ है कि वह इस पारिवारिक विवाद को सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाने से बचना चाहती हैं। करीब डेढ़-दो साल से चर्चा में है गोविंदा-सुनीता का विवाद गोविंदा और सुनीता आहूजा के रिश्ते में तनाव की खबरें पिछले करीब डेढ़ से दो साल से आती रही हैं। इस दौरान दोनों के रिश्ते को लेकर कई चर्चाएं हुईं। हालिया घटनाक्रम में सुनीता ने गोविंदा के खिलाफ दायर तलाक की याचिका वापस ले ली। तलाक की याचिका वापस लेने के बाद सुनीता को बेटे यशवर्धन आहूजा और वकील के साथ फैमिली कोर्ट के बाहर देखा गया था। गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने भी याचिका वापस लिए जाने की पुष्टि की थी। सुनीता ने गोविंदा के अफेयर को लेकर लगाए थे आरोप इस विवाद के दौरान सुनीता आहूजा ने गोविंदा के कथित अफेयर को लेकर कई बार सार्वजनिक तौर पर बातें कीं। हाल में गोविंदा को एक्ट्रेस कोमल रानी स्वर्णकार के साथ देखे जाने पर भी सुनीता ने प्रतिक्रिया दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुनीता ने गोविंदा और कोमल रानी के रिश्ते को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने गोविंदा को कोमल का ‘शुगर डैडी’ तक कहा था। हालांकि, गोविंदा के मैनेजर ने दूसरी शादी की चर्चाओं और इन दावों का खंडन किया है। गोविंदा भी दे चुके हैं प्रतिक्रिया सुनीता के बयानों के बाद गोविंदा की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई थी। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर सुनीता के बयानों और भाषा पर आपत्ति जताई थी। इस विवाद के बीच गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने भी मामले के सार्वजनिक होने पर सवाल उठाए और कहा था कि परिवार की बातें घर के भीतर बैठकर सुलझाई जा सकती थीं। फिलहाल सुनीता द्वारा तलाक की याचिका वापस लेने के बाद गोविंदा और सुनीता के रिश्ते की वास्तविक स्थिति को लेकर चर्चाएं जारी हैं। वहीं, आरती सिंह ने सार्वजनिक राय देने से दूरी बनाकर साफ कर दिया है कि वह अपनी भावनाएं परिवार के लोगों से साझा करना चाहती हैं, न कि मीडिया या सोशल मीडिया के जरिए दुनिया के सामने रखना। _________________________ यह खबर भी पढ़ें.. पत्नी को छोड़कर दूसरी शादी करने वाले थे गोविंदा:सुनीता बोलीं- इसलिए तलाक का केस लिया वापस, सोचो बीवी होकर मुझे कैसा लगता है गोविंदा से अनबन के बीच पत्नी सुनीता ने 19 अगस्त को बांद्रा फैमिली कोर्ट पहुंचकर तलाक का केस वापस ले लिया है। अब सुनीता की मानें तो गोविंदा, गर्लफ्रेंड कोमल से दूसरी शादी का प्लान बना रहे थे, यही वजह है कि सुनीता ने विरोध करते हुए तलाक का केस वापस ले लिया है।पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Arti Singh On Govinda-Sunita Ahuja Controversy

33 मिनट पहले कॉपी लिंक गोविंदा और सुनीता आहूजा के रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उनकी भांजी और एक्ट्रेस आरती सिंह ने प्रतिक्रिया दी है। हाल ही में एक कार्यक्रम में पैपराजी ने उनसे मामा गोविंदा और मामी सुनीता के रिश्ते को लेकर सवाल किया। आरती ने कहा कि वह अपने से बड़ों के मामले में नहीं बोलतीं और यह परिवार का निजी मामला है। उन्होंने कहा कि जो महसूस करती हैं, वह परिवार के लोगों से साझा करेंगी, दुनिया को बताने की जरूरत नहीं है। इस दौरान उन्होंने विवाद से फुटेज लेने की कोशिश करने वालों पर भी तंज कसा। परिवार के मामले में बोलने से आरती ने किया इनकार गोविंदा और सुनीता आहूजा के रिश्ते को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार खबरें आ रही हैं। इसी बीच आरती सिंह से इस मामले पर सवाल किया गया, तो उन्होंने सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। आरती ने कहा कि वह अपने से बड़ों के बीच नहीं बोलतीं। उन्होंने इसे गोविंदा और सुनीता का मामला बताते हुए कहा कि वह परिवार के निजी मसले पर सार्वजनिक राय नहीं रखना चाहतीं। उन्होंने साफ कहा कि वह इस मामले में बीच में नहीं पड़ेंगी, क्योंकि वह परिवार का हिस्सा हैं। आरती सिंह गोविंदा की बहन पद्मा शर्मा की बेटी और कृष्णा अभिषेक की बहन हैं। बोलीं- मामी और परिवार से बात करूंगी आरती ने बताया कि वह जो महसूस कर रही हैं, उसे परिवार के लोगों के साथ साझा करेंगी। उन्होंने कहा कि वह कृष्णा अभिषेक को फोन करके बात करेंगी। इसके अलावा टीना आहूजा, यशवर्धन आहूजा, सुनीता आहूजा और अपनी मां से भी भावनाएं साझा करेंगी। आरती का कहना था कि उनकी जो भी फीलिंग है, उसे परिवार तक पहुंचाना जरूरी है, लेकिन पूरी दुनिया को बताने की जरूरत वह नहीं समझतीं। यानी उन्होंने इस मामले पर सार्वजनिक बयान देने के बजाय परिवार के भीतर बातचीत को प्राथमिकता दी। ‘जो लोग फुटेज लेना चाहते हैं, वो अच्छा वाला ले रहे हैं’ आरती ने उन लोगों पर भी तंज कसा, जो गोविंदा और सुनीता के विवाद पर लगातार प्रतिक्रियाएं लेने की कोशिश कर रहे हैं। पैपराजी से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैंने जैसा कहा पहले भी, मैं अपने से बड़ों के बीच में नहीं बोलती हूं। ये उनका मामला है और जो लोग फुटेज लेना चाहते हैं, वो बहुत अच्छे से ले रहे हैं। मैं उनमें से नहीं हूं, क्योंकि मैं परिवार का हिस्सा हूं।” आरती के इस बयान से साफ है कि वह इस पारिवारिक विवाद को सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाने से बचना चाहती हैं। करीब डेढ़-दो साल से चर्चा में है गोविंदा-सुनीता का विवाद गोविंदा और सुनीता आहूजा के रिश्ते में तनाव की खबरें पिछले करीब डेढ़ से दो साल से आती रही हैं। इस दौरान दोनों के रिश्ते को लेकर कई चर्चाएं हुईं। हालिया घटनाक्रम में सुनीता ने गोविंदा के खिलाफ दायर तलाक की याचिका वापस ले ली। तलाक की याचिका वापस लेने के बाद सुनीता को बेटे यशवर्धन आहूजा और वकील के साथ फैमिली कोर्ट के बाहर देखा गया था। गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने भी याचिका वापस लिए जाने की पुष्टि की थी। सुनीता ने गोविंदा के अफेयर को लेकर लगाए थे आरोप इस विवाद के दौरान सुनीता आहूजा ने गोविंदा के कथित अफेयर को लेकर कई बार सार्वजनिक तौर पर बातें कीं। हाल में गोविंदा को एक्ट्रेस कोमल रानी स्वर्णकार के साथ देखे जाने पर भी सुनीता ने प्रतिक्रिया दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुनीता ने गोविंदा और कोमल रानी के रिश्ते को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने गोविंदा को कोमल का ‘शुगर डैडी’ तक कहा था। हालांकि, गोविंदा के मैनेजर ने दूसरी शादी की चर्चाओं और इन दावों का खंडन किया है। गोविंदा भी दे चुके हैं प्रतिक्रिया सुनीता के बयानों के बाद गोविंदा की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई थी। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर सुनीता के बयानों और भाषा पर आपत्ति जताई थी। इस विवाद के बीच गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने भी मामले के सार्वजनिक होने पर सवाल उठाए और कहा था कि परिवार की बातें घर के भीतर बैठकर सुलझाई जा सकती थीं। फिलहाल सुनीता द्वारा तलाक की याचिका वापस लेने के बाद गोविंदा और सुनीता के रिश्ते की वास्तविक स्थिति को लेकर चर्चाएं जारी हैं। वहीं, आरती सिंह ने सार्वजनिक राय देने से दूरी बनाकर साफ कर दिया है कि वह अपनी भावनाएं परिवार के लोगों से साझा करना चाहती हैं, न कि मीडिया या सोशल मीडिया के जरिए दुनिया के सामने रखना। _________________________ यह खबर भी पढ़ें.. पत्नी को छोड़कर दूसरी शादी करने वाले थे गोविंदा:सुनीता बोलीं- इसलिए तलाक का केस लिया वापस, सोचो बीवी होकर मुझे कैसा लगता है गोविंदा से अनबन के बीच पत्नी सुनीता ने 19 अगस्त को बांद्रा फैमिली कोर्ट पहुंचकर तलाक का केस वापस ले लिया है। अब सुनीता की मानें तो गोविंदा, गर्लफ्रेंड कोमल से दूसरी शादी का प्लान बना रहे थे, यही वजह है कि सुनीता ने विरोध करते हुए तलाक का केस वापस ले लिया है।पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
एक्ट्रेस पूनम ढिल्लों अस्पताल में भर्ती:डेंगू से संक्रमित होने के बाद लीलावती अस्पताल में चल रहा इलाज

वेटरन एक्ट्रेस और सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) की प्रेसिडेंट पूनम ढिल्लों डेंगू से संक्रमित होने के बाद मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती हैं। उनका पिछले कई दिनों से अस्पताल में इलाज चल रहा है। यह जानकारी पत्रकार विक्की ललवानी ने सोशल मीडिया के जरिए शेयर की। उन्होंने बताया कि पूनम ढिल्लों से सुबह मैसेज पर बात हुई और एक्ट्रेस ने अपनी तबीयत में सुधार की जानकारी दी। विक्की ललवानी ने लिखा कि पूनम ढिल्लों कई दिनों से अस्पताल में हैं और अब रिकवरी कर रही हैं। उन्होंने एक्ट्रेस के जल्द पूरी तरह ठीक होने की कामना भी की। गौरतलब है कि पूनम ढिल्लों हाल ही में CINTAA को लेकर भी चर्चा में रही हैं। CINTAA की एग्जीक्यूटिव कमेटी के 8 सदस्यों ने हाल ही में अपने पदों और कमेटी से इस्तीफा दे दिया। इन सदस्यों ने आरोप लगाया था कि उन्हें संगठन की मौजूदा लीडरशिप पर कोई भरोसा नहीं है। उन्होंने नए चुनाव कराने की मांग भी की थी। वहीं, पूनम ढिल्लों ने अपने और वाइस प्रेसिडेंट पद्मिनी कोल्हापुरे के खिलाफ लगे आरोपों को बहुत आपत्तिजनक बताया था। पूनम ढिल्लों ने अपने खिलाफ लगाए आरोपों को खारिज किया। उन्होंने ANI से बात करते हुए कहा था, बात यह थी कि चीजें उनके हिसाब से नहीं हो रही थीं। वे CAWT (सिने आर्टिस्ट्स वेलफेयर ट्रस्ट) के जरिए CINTAA सदस्यों पर नियंत्रण रखने की कोशिश कर रहे थे। जब ऐसा नहीं हो पाया तो उन्होंने हमारे खिलाफ अजीब और गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए। पूनम ने आरोपों की भाषा पर नाराजगी जताते हुए कहा था, आप यकीन नहीं करेंगे कि आरोप कितने अश्लील थे। वे इतने आपत्तिजनक थे कि अगर हम चाहते तो इसमें शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई करने पर विचार कर सकते थे। ऐसे आरोप, दुख पहुंचाने वाले बयान और आपत्तिजनक भाषा बड़े स्तर पर फैलाई गई। पूनम ने बताया था कि इस विवाद का उन पर इमोशनल असर पड़ा और उन्होंने कई बार कार्यकारी समिति से इस्तीफा देने के बारे में सोचा। उन्होंने कहा कि दो या तीन लोग, जिन्हें उन्होंने पेड प्रवक्ता बताया, इसी तरह की बातें करते थे। उन्होंने कहा था कि उनमें से एक या दो CINTAA के सदस्य भी थे। उन्होंने बहुत अनुचित और दुख पहुंचाने वाले बयान दिए। फिर भी हमने चुप रहना चुना। पूनम ने आत्मसम्मान को सबसे जरूरी बताया पूनम ने कहा था कि मैं सिर्फ एक बात कहना चाहूंगी। मेरा आत्मसम्मान और ईमानदारी मेरे लिए बहुत जरूरी है। हमने जो कुछ वर्षों में कमाया है, वह एक-दो साल में नहीं कमाया। हमने अपने व्यवहार, गरिमा, मौजूदगी और लोगों के साथ व्यवहार व बातचीत के तरीके से दशकों में अपनी प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान बनाया है। हिंदुस्तान टाइम्स के साथ एक और इंटरव्यू में पूनम ने कहा कि वह और पद्मिनी CINTAA के लिए गुडविल बनाने के लिए अपने रिसोर्स और कनेक्शन का इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका मकसद पर्सनल फायदा नहीं है। पूनम ने कहा कि संगठन के सदस्यों के लिए कुछ करने की पहल कोई और नहीं कर रहा था, इसलिए मैं उनके आरोपों से हैरान हूं। CAWT और कार्यक्रम से जुटाई रकम पर सफाई पूनम ने कहा था कि इस्तीफा देने वाले सदस्य CAWT को बचाने की कोशिश कर रहे थे। यह ट्रस्ट दिवंगत दिलीप कुमार, अमरीश पुरी, अमजद खान और दूसरे वरिष्ठ कलाकारों ने बनाया था। उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट ने सदस्यों को मेडिकल सुविधाएं देने की अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की है। पूनम के मुताबिक, पिछले कुछ दशकों में मौजूदा समिति के किसी सदस्य ने CAWT के लिए रकम नहीं जुटाई। उन्होंने बताया कि हाल में एक कार्यक्रम के जरिए रकम जुटाई गई। कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाली कलाकार कविता कृष्णमूर्ति और मधुश्री को साड़ियां दी गईं, जबकि बिना फीस प्रस्तुति देने वाले नितिन मुकेश को कुर्ता दिया गया। पूनम ने कहा, इस्तीफा देने वाले सदस्य हम पर साड़ियां खरीदने का आरोप लगा रहे हैं। क्या हमने वे साड़ियां अपने लिए खरीदी थीं? हम यह मानते हैं कि इन कलाकारों ने बिना फीस हमारे लिए प्रस्तुति दी थी, इसलिए उन्हें ये उपहार दिए गए। पद्मिनी और मैंने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया था और अपने अनुरोध पर उनसे प्रस्तुति करवाई थी। इन गायकों ने CINTAA के लिए मदद की। हमने इन परफॉर्मेंस से 1 करोड़ रुपए जुटाए। ऐसे में अगर हम कलाकारों के उपहारों पर 1 लाख रुपए खर्च करते हैं तो इसमें समस्या क्या है? ‘42 साल से इंडस्ट्री में हूं, क्या ऐसा विश्वासघात कर सकती हूं’ पूनम ने सवाल किया था कि फिल्म इंडस्ट्री में दशकों तक काम करने के बाद क्या उन पर संगठन से विश्वासघात करने का आरोप लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा था, हम इस इंडस्ट्री में 42 साल से हैं। कुछ लोग 45 साल से और कुछ 48 साल से इसका हिस्सा हैं। क्या आपको सच में लगता है कि इतने वर्षों बाद हम ऐसा विश्वासघात कर सकते हैं? मैं आपके साथ एक बहुत निजी बात साझा करना चाहती हूं। पिछले एक या डेढ़ साल में कई बार ऐसा लगा कि CINTAA की कार्यकारी समिति से इस्तीफा देकर अलग हो जाऊं। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा था कि इन लोगों ने हमारा जीवन बहुत मुश्किल बना दिया था। हर एक चीज का विरोध किया गया। हर पहल का विरोध किया गया।
Sara Ali Khan Paparazzi Fight in Mumbai

कुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक सारा अली खान शुक्रवार को स्पॉट हुईं। इसी दौरान वो पोज दे रही थीं, तभी उनके सामने दो पैपराजी फोटोग्राफर्स के बीच कैमरा स्पेस को लेकर बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते दोनों एक-दूसरे को धक्का देने लगे और मामला अपशब्दों तक पहुंच गया। अचानक हुए इस विवाद से सारा अली खान कुछ देर के लिए हैरान नजर आईं। वीडियो में वह स्थिति को देखकर नर्वस होकर मुस्कुराती भी दिखीं और इसके बाद वहां से आगे बढ़ गईं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सारा अली खान का पैपराजी के साथ तनावपूर्ण स्थिति का यह पहला मामला नहीं है। हाल ही में वह मंदिर के बाहर जरूरतमंदों को खाना बांटते समय लगातार तस्वीरें लेने पर फोटोग्राफर्स से कैमरे बंद करने की अपील करती नजर आई थीं। वहीं, इससे पहले नवंबर 2021 में सारा अली खान जब अपनी फिल्म ‘अतरंगी रे’ के गाने ‘चका चक’ के प्रमोशन के लिए एक कॉलेज पहुंची थीं। तब इवेंट के दौरान भारी भीड़ और पैपराजी की मौजूदगी के चलते धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। इसी दौरान एक सुरक्षाकर्मी ने एक फोटोग्राफर को धक्का दे दिया, जिससे वह गिर पड़ा। घटना की जानकारी मिलते ही सारा ने अपने सुरक्षा गार्ड को सबके सामने फटकार लगाई और पैपराजी से माफी भी मांगी थी। हालांकि, अगले दिन जब सारा दोबारा मीडिया के सामने आईं, तो फोटोग्राफर्स ने उन्हें बताया कि धक्का देने वाला शख्स उनका निजी बॉडीगार्ड नहीं था। इसके बाद सारा ने अपने बॉडीगार्ड का बचाव करते हुए कहा था कि उन्हें पहले से पता था कि उनकी गलती नहीं हो सकती। सारा ने कहा कि इवेंट आयोजकों की सिक्योरिटी टीम के एक सदस्य ने फोटोग्राफर्स को धक्का दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि उनका बॉडीगार्ड कभी ऐसा व्यवहार नहीं कर सकता। सारा अली खान के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह आखिरी बार फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ में नजर आई थीं। यह फिल्म 15 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। अब सारा जल्द ही फिल्म ‘उड़ता तीर’ में नजर आएंगी। इस फिल्म में वह एक बार फिर आयुष्मान खुराना के साथ स्क्रीन शेयर करेंगी। फिल्म का निर्देशन आकाश ए. कौशिक कर रहे हैं। फिल्म को धर्मा प्रोडक्शंस और सिख्या एंटरटेनमेंट ने प्रोड्यूस किया है। ‘उड़ता तीर’ अब 9 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। …………… सारा अली खान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… सारा अली खान ने रोहित शेट्टी से हाथ जोड़कर मांगा था काम: ऐश्वर्या से एक्ट्रेस बनने की प्रेरणा मिली बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा से इंडस्ट्री में अपनी एक खास जगह बनाई है। हालांकि, वो फिल्मों से ज्यादा पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में रहती हैं। नेपोटिज्म की वजह से अक्सर ट्रोल होती रहती हैं। ट्रोलिंग पर सारा अली खान ने कहा था, ‘मैं अपने मां- बाप को तो नहीं बदल सकती। मैं हमेशा चाहती हूं कि लोग मुझे मेरे काम से पहचानें।’ पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Ludhiana Tibetan Protest | Rally Against China Ethnic Unity Law latest update

लुधियाना में तिब्बती युवाओं ने चीन की कम्युनिस्ट सरकार और उसकी विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण रोष मार्च निकाला। लुधियाना में तिब्बती युवाओं ने चीन की कम्युनिस्ट सरकार और उसकी विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ आज शांतिपूर्ण रोष मार्च निकाला। तिब्बती युवा कांग्रेस के नेतृत्व में डिवीजन नंबर 3 से सुंदर नगर तक निकाले गए मार्च में 500 से अधिक तिब्बती नागरिकों ने हिस्सा . प्रदर्शनकारियों ने चीन की तिब्बत नीति के विरोध में भी नारेबाजी की। “तिब्बत एक राष्ट्र था, तिब्बत एक राष्ट्र है और जल्द ही तिब्बत आजाद होगा” जैसे नारे लगाए गए। मार्च को लुधियाना के स्थानीय होजरी व्यापारियों का भी समर्थन मिला। यह प्रदर्शन तिब्बती युवा कांग्रेस की ओर से शुरू किए गए अंतरराष्ट्रीय चेन प्रोटेस्ट का हिस्सा है। संगठन के अनुसार, यह आंदोलन शहीद लोबगा रांगजेन के बलिदान की याद में किया जा रहा है। संगठन का दावा है कि उन्होंने तिब्बत की स्थिति और तिब्बती लोगों के संघर्ष की ओर दुनिया का ध्यान खींचने के लिए संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के सामने आत्मदाह किया था। शांतिपूर्ण रोष मार्च के दौरान नारेबाजी करते हुए तिब्बती युवा। कैंडल मार्च और रैलियां आयोजित तिब्बती युवा कांग्रेस ने कहा कि धर्मशाला से शुरू हुई यह मुहिम अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी है। इसके तहत भूख हड़ताल, कैंडल मार्च और रैलियां आयोजित की जा रही हैं। संगठन का कहना है कि चीन के खिलाफ ठोस कार्रवाई होने तक यह अभियान जारी रखा जाएगा। एथनिक यूनिटी लॉ का विरोध, UN प्रवक्ता के बयान पर भी निशाना प्रदर्शनकारियों ने 1 जुलाई को चीन की ओर से लागू किए गए कथित एथनिक यूनिटी लॉ (Ethnic Unity Law) का विरोध किया। तिब्बती युवा कांग्रेस का आरोप है कि इस कानून के जरिए तिब्बत समेत अन्य क्षेत्रों की अलग सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। संगठन ने चीन पर कॉलोनियल बोर्डिंग स्कूलों के जरिए बच्चों को उनके समुदायों से अलग करने और उनकी पहचान पर प्रभाव डालने का भी आरोप लगाया। तिब्बती युवा कांग्रेस ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक के उस कथित बयान की भी आलोचना की, जिसमें तिब्बत को चीन की अल्पसंख्यक आबादी का हिस्सा बताया गया था। संगठन ने इसे ऐतिहासिक रूप से गलत बताते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र को ऐसी भाषा से बचना चाहिए, जिसे वह चीन के कब्जे को वैध ठहराने वाला मानता है।
Kareena Kapoor Khan Pregnancy Rumors Mumbai Video Clarification

11 मिनट पहले कॉपी लिंक शुक्रवार को स्पॉट किए जाने के दौरान करीना कपूर ने ब्लैक स्लीवलेस टॉप पहना हुआ था। उन्होंने इसके साथ ब्लैक सनग्लासेस लगाए थे। एक्ट्रेस करीना कपूर खान के तीसरी बार प्रेग्नेंट होने की खबरों को उनकी टीम ने गलत बताया है। सोशल मीडिया पर प्रेग्नेंसी की अफवाहें फैलने के बाद टीम ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में इसकी पुष्टि की कि करीना प्रेग्नेंट नहीं हैं। शुक्रवार को मुंबई में करीना का एक वीडियो सामने आया था। इसके बाद लोगों ने कयास लगाए कि वह तीसरी बार मां बनने वाली हैं। वायरल क्लिप में करीना कपूर अपनी कार की ओर जाती दिख रही हैं। उनके साथ उनकी टीम के कुछ सदस्य भी चल रहे थे। एक जगह टीम का एक सदस्य करीना के सामने छाता कर देता है, जिससे पैपराजी उन्हें ठीक से नहीं देख पाते। वीडियो में उनका हुलिया और कैमरों से बचाने की कोशिश देखकर सोशल मीडिया पर उनकी प्रेग्नेंसी को लेकर चर्चा शुरू हुई। करीना का वीडियो सामने आने के बाद कई फैंस ने कमेंट सेक्शन में सवाल किए। एक व्यक्ति ने लिखा, “एक पल के लिए मुझे लगा कि यह उनका तीसरा बच्चा है।” दूसरे ने पूछा, “क्या वह प्रेग्नेंट हैं?” एक और कमेंट में लिखा गया, “लगता है बेबी बंप है यार।” यूजर का कमेंट। यूजर का कमेंट। यूजर का कमेंट। करीना कपूर खान और सैफ अली खान पहले से दो बेटों के माता-पिता हैं। उनके बेटे तैमूर 9 साल के और जेह अली खान 5 साल के हैं। तैमूर का जन्म 20 दिसंबर 2016 को और जेह (जहांगीर) का जन्म 21 फरवरी 2021 को हुआ था। परिवार बढ़ाने पर करीना ने पहले क्या कहा था करीना ने इससे पहले वोग को दिए एक इंटरव्यू में फैमिली प्लानिंग पर बात की थी। उन्होंने कहा था, “सैफ ने हर दशक में एक बच्चा किया है- बीस की उम्र में, तीस की उम्र में, चालीस की उम्र में और अब पचास की उम्र में। मैंने उनसे कहा है कि साठ की उम्र में ऐसा नहीं होने वाला।” करीना ने आगे कहा था, “मुझे लगता है कि सैफ जैसा खुले विचारों वाला आदमी ही अलग-अलग उम्र के चार बच्चों का पिता हो सकता है। वह सभी को अपना समय देते हैं।” उन्होंने कहा था, “अब जेह के साथ हम इसे बैलेंस करने की कोशिश कर रहे हैं। हमने तय किया है कि जब वह किसी फिल्म की शूटिंग कर रहे होंगे, तब मैं उसी समय फिल्म में काम नहीं करने की कोशिश करूंगी और इसके उलट भी ऐसा ही होगा।” सैफ अली खान, अमृता सिंह के साथ अपनी पिछली शादी से सारा अली खान और इब्राहिम अली खान के भी पिता हैं। करीना के वर्कफ्रंट की बात करें तो वो आखिरी बार फिल्म सिंघम अगेन (2024) में नजर आई थीं। वहीं वो जल्द मेघना गुलजार द्वारा निर्देशित फिल्म दायरा में दिखाई देंगी। दायरा में करीना एक पुलिस अधिकारी (Cop) की भूमिका में नजर आएंगी। …………… करीना से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… करीना@45, प्यार में कमरे का ताला तोड़ा:शादी पर लव जिहाद विवाद, नेपोटिज्म पर बोलीं- मत देखो फिल्म; जीरो फिगर ट्रेंड लाने वालीं एक्ट्रेस चाहे स्टाइलिश ‘पू’ हो या चुलबुली ‘गीत’ करीना कपूर ने अपने हर किरदार को खास बना दिया है। जहां उनके परिवार में लगभग सभी लोग फिल्मों में आने का सपना देखते थे, वहीं करीना ने पहले वकालत का रास्ता चुना था। हालांकि एक्टिंग के प्रति झुकाव के कारण वह अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सकीं। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔





