Saturday, 22 Aug 2026 | 08:45 AM

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Ladakh News | Jammu-Kashmir High Court Bench & IT Ministry PhonePe MoU

Ladakh News | Jammu-Kashmir High Court Bench & IT Ministry PhonePe MoU

Hindi News Career Ladakh News | Jammu Kashmir High Court Bench & IT Ministry PhonePe MoU 8 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति बने 21 अगस्त को सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति की शपथ ली। संसद में उन्हें 255 वोट मिले थे, जबकि विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को 88 वोट मिले थे। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद ये पद खाली था। बांग्लादेश में 1991 के बाद ये पहला मौका है जब राष्ट्रपति पद के लिए सीधी सीधी वोटिंग हुई है। बीते कुछ दशकों में ये पद ज्यादातर आम सहमति से बिन किसी विरोध के भरा जाता था। 2001 में आलमगीर पहली बार ठाकुरगांव-1 से सांसद बने थे और 2001-2005 तक आलमगीर राज्य कृषि मंत्री रहे। BNP का पद संभाला और 10 साल तक महासचिव रहे। राष्ट्रपति का चुनाव गुरुवार को संसद भवन में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान हुआ था। 2. भारत और जापान ने समुद्री सुरक्षा के लिए MoU साइन किया 21 अगस्त को भारत और जापान के बीच नई दिल्ली में रक्षा मंत्रियों की बैठक हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी ने बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस बैठक में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने, ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने और रणनीतिक विश्वास बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन भी किया। इससे एक दिन पहले कोइजुमी ने मुंबई में पश्चिमी नौसेना कमान और आईएनएस चेन्नई का दौरा किया था। भारत और जापान ने नौसैनिक जहाजों के संयुक्त विकास और निर्माण की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति जताई। दोनों देशों ने मैरीटाइम डॉमेन अवेयरनेस (MDA), सूचना साझाकरण औरह्यूमन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ (HADR) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए। भारत की ‘महासागर’ दृष्टि और जापान के FOIP विजन के बीच बेहतर तालमेल बनाया गया। बैठक भारत-जापान के स्पेशल स्ट्रैटजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप की रक्षा एवं समुद्री क्षेत्र में और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो 3 दिन की यात्रा पर 19 अगस्त को भारत आए थे। स्पोर्ट्स (SPORTS) 3. जेवलिन थ्रोअर शिवपाल सिंह पर 10 साल का बैन 21 अगस्त को भारत के जेवलिन थ्रोअर शिवपाल सिंह पर 10 साल का बैन लगा। शिवपाल टोक्यो ओलिंपियन रहे हैं और दूसरी बार डोपिंग के दोषी पाए गए हैं। शिवपाल नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी के डिसिप्लिनरी पैनल ने प्रतिबंधित पदार्थ मेथेंडिएनोन के लिए पॉजिटिव पाए गए हैं। 31 वर्षीय शिवपाल 2019 एशियन चैंपियनशिप में 86.23 मीटर के पर्सनल बेस्ट के साथ सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। इससे पहले शिवपाल का सैंपल 2021 में हुए आउट-ऑफ-कंपटीशन टेस्ट में स्टेरॉयड के लिए पॉजिटिव आया था। अगस्त 2022 में NADA के डिसिप्लिनरी पैनल ने उन्हें दोषी मानते हुए 4 साल का बैन लगाया था। शिवपाल ने अपील में कहा था कि जिस सप्लीमेंट का उन्होंने इस्तेमाल किया था, उसमें प्रतिबंधित पदार्थ मिला हुआ था। जनवरी 2023 में NADA के अपील पैनल ने उनका पक्ष स्वीकार करते हुए बैन को 4 साल से घटाकर 1 साल कर दिया। इसके बाद उन्होंने अप्रैल 2023 में वापसी की थी। शिवपाल ने वापसी के बाद जून 2023 में भुवनेश्वर में नेशनल इंटर-स्टेट चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। स्प्रिंटर एमवी जिल्ना को भी दूसरे डोपिंग मामले में प्रोविजनली सस्पेंड किया गया है। उनका सैंपल प्रतिबंधित पदार्थ मेफेन्टरमाइन के लिए पॉजिटिव पाया गया है। शिवपाल ने गोवा में हुए 2023 नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल भी जीता था। 4. लद्दाख में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की एक बेंच स्थापित होगी 20 अगस्त को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की एक बेंच स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ये जानकारी दी है। इस बेंच की स्थापना से हाईकोर्ट से जुड़े मामलों के लिए लद्दाख के आम लोगों को अब जम्मू या श्रीनगर की तक नहीं जाना पड़ेगा। इस बेंच की स्थापना के बाद लद्दाख के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए न्याय तक पहुंच आसान हो सकेगी। लद्दाख एक केंद्र शासित प्रदेश है। निधन (DEATH) 5. दक्षिण भारतीय एक्टर्स सौकार जानकी का निधन 21 अगस्त को दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री सौकार जानकी का निधन हो गया। वे 94 साल की थीं। सौकार जानकी ने तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम सिनेमा में काम किया और उनका फिल्मी करियर 70 सालों से ज्यादा रहा। सौकार ने 1949-50 में एल.वी. प्रसाद की तेलुगु फिल्म ‘शवुकारु’ से फिल्मी करियर की शुरुआत। इसी फिल्म के कारण उन्हें ‘सौकार जानकी’ नाम से पहचान मिली। सौकार ने 1952 में फिल्म ‘वाल्यापथ’ से तमिल सिनेमा में शुरुआत की थी और 1954 कन्नड़ फिल्म ‘देवकनिका’ से कन्नड़ सिनेमा में शुरुआत की। सौकार तेलुगु और तमिल सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल थीं। उन्होंने अपने करियर में लगभग 400 फिल्मों में एक्टिंग की। सौकार को ‘इरु कॉडगल’ के लिए तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान मिला था। 2022 में भारतीय सिनेमा और कला में योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार ने पद्म श्री से सम्मानित किया था। सौकार जानकी ने तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम सिनेमा में काम किया। समझौता (AGREEMENT) 6. सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने PhonePe के साथ MoU किया 20 अगस्त को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ऑनलाइन पेमेंट और फिनटेक कंपनी PhonePe के साथ एक समझौता (MoU) किया। इस MoU के तहत सरकार और PhonePe मिलकर डिजिटल पेमेंट और फिनटेक के क्षेत्र को और मजबूत बनाने पर काम करेंगे। इस MoU का उद्देश्य MeitY और PhonePe के बीच डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना और फिनटेक क्षेत्र में नई टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाना है। PhonePe भारत की प्रमुख डिजिटल पेमेंट कंपनी है और MeitY भारत में डिजिटल टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े कामों की देखरेख करता है। इस MoU के तहत PhonePe के एंटरप्राइज डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ‘पल्सप्रो’ के मेट्रिक्स को पीएम गतिशक्ति

मनोज मुंतशिर बोले- श्रीकृष्ण थे दुनिया के पहले साइकोलॉजिस्ट:भगवद्गीता हर दुख का इलाज; राधा-कृष्ण के एक ना होने का कारण बताया

मनोज मुंतशिर बोले- श्रीकृष्ण थे दुनिया के पहले साइकोलॉजिस्ट:भगवद्गीता हर दुख का इलाज; राधा-कृष्ण के एक ना होने का कारण बताया

गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर का नाट्य शो ‘राधा से रणभूमि तक’ आज 22 और 23 अगस्त को इंदौर के लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में मंचित होने जा रहा है। नीलम मुंतशिर और विक्रम मेहरा ने इस शो का निर्माण किया है। पुनीत जे। पाठक के निर्देशन में बने इस शो में श्रीकृष्ण की अनकही यात्रा को जीवंत किया गया है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में मनोज मुंतशिर ने श्रीकृष्ण के मनोविज्ञान, 50 से अधिक किताबों के अध्ययन से जुड़ी 2 साल की लेखन यात्रा, राधा-कृष्ण के अटूट प्रेम और आज की जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी के लिए श्रीकृष्ण के संदेशों पर खुलकर बात की। सवाल: ‘राधा से रणभूमि तक’ पहुंचते-पहुंचते कृष्ण में सबसे बड़ा बदलाव क्या पाते हैं? जवाब:कृष्ण में कुछ बदला ही नहीं। कृष्ण सदैव से ही पूर्ण थे प्रेम में भी, नीति में भी, युद्ध में भी और दर्शन में भी। जो पूर्ण हो वो बदलेगा कैसे? सवाल: दर्शक यह शो क्यों देखें? जवाब: हमारा शो किसी रेस में नहीं है। हम किसी से अच्छा या बेहतर बनने की कोशिश नहीं कर रहे। हम बस कृष्ण की एक ऐसी यात्रा आपके सामने रखना चाहते हैं, जो आपने इससे पहले किसी मंच, सिनेमा या टेलीविजन पर नहीं देखी होगी। शो में कुछ ऐसे पल हैं, जिनपर मैंने दर्शकों की हिचकियां सुनी हैं, उनका रोना सुना है, वहीं अनेक ऐसे पल भी हैं जहां लोग सीट्स से उठकर नाचते हैं। राधा-कृष्ण की अंतिम मुलाकात, गांधारी का श्राप, कृष्ण की मृत्यु, द्रौपदी का चीरहरण और जिस तरह हम गीता सार प्रस्तुत कर पाए। ये सभी क्षण अविस्मरणीय बन के उभरे हैं। और सबसे बड़ी बात, यह पूरे परिवार के लिए एक मनोरंजक और भावनात्मक अनुभव है। बच्चे इसे युद्ध के भव्य दृश्यों के लिए देख सकते हैं, बड़े इसके संगीत और वैभव के लिए और बुजुर्ग गीता सार के दौरान भावुक हुए बिना शायद रह ही नहीं पाएंगे। इस शो को लिखने के लिए मैंने 50 से अधिक किताबें पढ़ीं। श्रीमद्भागवत और हरिवंश पुराण सहित अनेक शास्त्रों और कृष्ण पर लिखे गए ग्रंथों का अध्ययन किया और दो साल से अधिक की लेखन यात्रा के बाद इसे आकार दिया। मैं आपसे सिर्फ एक बार यह शो देखने का आग्रह करता हूं। उसके बाद दर्शक खुद इसे सात-आठ बार देखने वापस आते हैं। मुंबई में हमें कई ऐसे लोग मिले जो लगातार आठवीं बार शो देखने आए थे। हमारे निर्माता श्री विक्रम मेहरा और नीलम मुंतशिर और निर्देशक पुनीत जे। पाठक ने मिलकर ऐसा शो तैयार किया है, जिसपर मुझे आकाश भर गर्व है। सवाल: प्ले के नाम में ही एक पूरी यात्रा है। आपके लिए कृष्ण क्या हैं प्रेमी, रणनीतिकार, दार्शनिक या योद्धा? जवाब: मेरे कृष्ण पूर्ण परमेश्वर हैं। वो मनुष्य योनि में जन्मे, इसलिए प्रेमी भी हैं, सखा भी, गुरु भी, बेटे भी और पिता भी। लेकिन मेरे लिए कृष्ण सबसे बड़े दार्शनिक योद्धा हैं, जो कहते हैं कि “वो शांति निंदनीय है जो युद्ध से घबराये और वो युद्ध वंदनीय है जो शांति के लिए लड़ा जाए”। सवाल: इस कहानी में आपकी सबसे बड़ी अनकही बात क्या है? जवाब:एक ऐसा प्रश्न है जो मुझे हमेशा व्यथित करता रहा। जब कृष्ण अपने अंतिम क्षणों में मृत्यु के सामने थे, तब उनके मन में क्या चल रहा था? भगवान क्या सोच रहे थे? हमने उसी अनकहे क्षण को समझने और महसूस करने की कोशिश की है। सवाल: कृष्ण की यात्रा में आपको सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली घटना कौन-सी है? जवाब: कोई एक हो तो बताऊं। लेकिन दो बातें मुझे विशेष तौर पर प्रभावित करती हैं, युद्ध और शांति के बीच वो संतुलन जो कृष्ण बना पाये। आज की दुनिया यही संतुलन बना पाने में असफल हो रही है। और दूसरी बात, सफलता को सुख समझने की हमारी भूल। कृष्ण की जीवन यात्रा से आप समझेंगे की सफलता और सुख में अंतर है। एक बार कृष्ण की और लौटिए, सारे उत्तर मिल जाएंगे। सवाल: राधा और कृष्ण कभी एक क्यों नहीं हो पाए? जवाब: राधा और कृष्ण एक कैसे होते, जब दो थे ही नहीं! कृष्ण कभी राधा से दूर गए ही नहीं। वे सर से पांव तक स्वयं राधा बन गए थे। आज भी अगर आपको कृष्ण को बुलाना हो, तो राधा रानी का नाम लेना पड़ता है। ‘राधे-राधे बोले, चले आएंगे बिहारी।’ सवाल:कृष्ण का सबसे बड़ा हथियार क्या था बुद्धि, नीति या मनोविज्ञान? जवाब:कृष्ण का सबसे बड़ी सुपरपावर था मनोविज्ञान। कृष्ण दुनिया के सबसे पहले मनोवैज्ञानिक चिकित्सक थे। पश्चिम का ये दावा एकदम आधारहीन है कि मनोविज्ञान के जनक सिग्मंड फ्रायड थे। फ्रायड से 5000 पहले मनोविज्ञान का सबसे बड़ा शास्त्र अवतरित हो चुका था जिसे हम श्रीमद्भगवद्गीता कहते हैं। 700 श्लोकों का एक कैप्सूल है भगवद्गीता, जो संसार के हर दुख की दवा है। गीता को सहजता से समझना है तो एक बार राधा से रणभूमि तक देखिए, गीता का इस से भावुक रूप शायद आपने अब तक नहीं देखा होगा। सवाल:अगर कृष्ण स्वयं आपसे पूछें ‘मेरी कहानी लिखते समय मुझे कितना समझा?’ तो आप क्या कहेंगे? जवाब:मैं कृष्ण को समझने का दावा बिल्कुल नहीं करता। एक ही दावा है मेरा और वो अभिमान की हद तक है। मैं कृष्ण में विश्वास करता हूं, मैंने उनके हाथ पकड़ लिए हैं, वो जहां चाहे ले जाएं। मैं अपने सभी श्रोताओं और दर्शकों से एक ही आग्रह करता हूं। कृष्ण का हाथ पकड़ के चलिए, जीवन में कभी किसी के पांव पकड़ने की नौबत नहीं आएगी। सवाल:लेखक के तौर पर क्या डर लगा कि कहीं आस्था आड़े न आ जाए या कल्पना मर्यादा न लांघ जाए? जवाब: मैंने पहले खुद को कृष्ण के बारे में जितना संभव हो सका, उतना भरा और उसके बाद लिखना शुरू किया। 50 से अधिक किताबें पढ़ीं, कृष्ण पर लिखे गए ग्रंथ पढ़े, गीता पढ़ी और पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ इस यात्रा में उतरा। और जब हमारे साथ श्रीनाथजी का आशीर्वाद हो, तो फिर चिंता किस बात की? हमने पूरे देश में लगभग 30 हाउसफुल शो किए हैं और हर जगह से सिर्फ प्रशंसा ही सुनने को मिली। यह कृष्ण जी की ही कृपा है। अब 22 और 23 अगस्त को इंदौर के लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में चार शो हैं। माँ अहिल्याबाई

मनोज मुंतशिर बोले- श्रीकृष्ण थे दुनिया के पहले साइकोलॉजिस्ट:भगवद्गीता हर दुख का इलाज; राधा-कृष्ण के एक ना होने का कारण बताया

मनोज मुंतशिर बोले- श्रीकृष्ण थे दुनिया के पहले साइकोलॉजिस्ट:भगवद्गीता हर दुख का इलाज; राधा-कृष्ण के एक ना होने का कारण बताया

गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर का नाट्य शो ‘राधा से रणभूमि तक’ आज 22 और 23 अगस्त को इंदौर के लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में मंचित होने जा रहा है। नीलम मुंतशिर और विक्रम मेहरा ने इस शो का निर्माण किया है। पुनीत जे। पाठक के निर्देशन में बने इस शो में श्रीकृष्ण की अनकही यात्रा को जीवंत किया गया है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में मनोज मुंतशिर ने श्रीकृष्ण के मनोविज्ञान, 50 से अधिक किताबों के अध्ययन से जुड़ी 2 साल की लेखन यात्रा, राधा-कृष्ण के अटूट प्रेम और आज की जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी के लिए श्रीकृष्ण के संदेशों पर खुलकर बात की। सवाल: ‘राधा से रणभूमि तक’ पहुंचते-पहुंचते कृष्ण में सबसे बड़ा बदलाव क्या पाते हैं? जवाब:कृष्ण में कुछ बदला ही नहीं। कृष्ण सदैव से ही पूर्ण थे प्रेम में भी, नीति में भी, युद्ध में भी और दर्शन में भी। जो पूर्ण हो वो बदलेगा कैसे? सवाल: दर्शक यह शो क्यों देखें? जवाब: हमारा शो किसी रेस में नहीं है। हम किसी से अच्छा या बेहतर बनने की कोशिश नहीं कर रहे। हम बस कृष्ण की एक ऐसी यात्रा आपके सामने रखना चाहते हैं, जो आपने इससे पहले किसी मंच, सिनेमा या टेलीविजन पर नहीं देखी होगी। शो में कुछ ऐसे पल हैं, जिनपर मैंने दर्शकों की हिचकियां सुनी हैं, उनका रोना सुना है, वहीं अनेक ऐसे पल भी हैं जहां लोग सीट्स से उठकर नाचते हैं। राधा-कृष्ण की अंतिम मुलाकात, गांधारी का श्राप, कृष्ण की मृत्यु, द्रौपदी का चीरहरण और जिस तरह हम गीता सार प्रस्तुत कर पाए। ये सभी क्षण अविस्मरणीय बन के उभरे हैं। और सबसे बड़ी बात, यह पूरे परिवार के लिए एक मनोरंजक और भावनात्मक अनुभव है। बच्चे इसे युद्ध के भव्य दृश्यों के लिए देख सकते हैं, बड़े इसके संगीत और वैभव के लिए और बुजुर्ग गीता सार के दौरान भावुक हुए बिना शायद रह ही नहीं पाएंगे। इस शो को लिखने के लिए मैंने 50 से अधिक किताबें पढ़ीं। श्रीमद्भागवत और हरिवंश पुराण सहित अनेक शास्त्रों और कृष्ण पर लिखे गए ग्रंथों का अध्ययन किया और दो साल से अधिक की लेखन यात्रा के बाद इसे आकार दिया। मैं आपसे सिर्फ एक बार यह शो देखने का आग्रह करता हूं। उसके बाद दर्शक खुद इसे सात-आठ बार देखने वापस आते हैं। मुंबई में हमें कई ऐसे लोग मिले जो लगातार आठवीं बार शो देखने आए थे। हमारे निर्माता श्री विक्रम मेहरा और नीलम मुंतशिर और निर्देशक पुनीत जे। पाठक ने मिलकर ऐसा शो तैयार किया है, जिसपर मुझे आकाश भर गर्व है। सवाल: प्ले के नाम में ही एक पूरी यात्रा है। आपके लिए कृष्ण क्या हैं प्रेमी, रणनीतिकार, दार्शनिक या योद्धा? जवाब: मेरे कृष्ण पूर्ण परमेश्वर हैं। वो मनुष्य योनि में जन्मे, इसलिए प्रेमी भी हैं, सखा भी, गुरु भी, बेटे भी और पिता भी। लेकिन मेरे लिए कृष्ण सबसे बड़े दार्शनिक योद्धा हैं, जो कहते हैं कि “वो शांति निंदनीय है जो युद्ध से घबराये और वो युद्ध वंदनीय है जो शांति के लिए लड़ा जाए”। सवाल: इस कहानी में आपकी सबसे बड़ी अनकही बात क्या है? जवाब:एक ऐसा प्रश्न है जो मुझे हमेशा व्यथित करता रहा। जब कृष्ण अपने अंतिम क्षणों में मृत्यु के सामने थे, तब उनके मन में क्या चल रहा था? भगवान क्या सोच रहे थे? हमने उसी अनकहे क्षण को समझने और महसूस करने की कोशिश की है। सवाल: कृष्ण की यात्रा में आपको सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली घटना कौन-सी है? जवाब: कोई एक हो तो बताऊं। लेकिन दो बातें मुझे विशेष तौर पर प्रभावित करती हैं, युद्ध और शांति के बीच वो संतुलन जो कृष्ण बना पाये। आज की दुनिया यही संतुलन बना पाने में असफल हो रही है। और दूसरी बात, सफलता को सुख समझने की हमारी भूल। कृष्ण की जीवन यात्रा से आप समझेंगे की सफलता और सुख में अंतर है। एक बार कृष्ण की और लौटिए, सारे उत्तर मिल जाएंगे। सवाल: राधा और कृष्ण कभी एक क्यों नहीं हो पाए? जवाब: राधा और कृष्ण एक कैसे होते, जब दो थे ही नहीं! कृष्ण कभी राधा से दूर गए ही नहीं। वे सर से पांव तक स्वयं राधा बन गए थे। आज भी अगर आपको कृष्ण को बुलाना हो, तो राधा रानी का नाम लेना पड़ता है। ‘राधे-राधे बोले, चले आएंगे बिहारी।’ सवाल:कृष्ण का सबसे बड़ा हथियार क्या था बुद्धि, नीति या मनोविज्ञान? जवाब:कृष्ण का सबसे बड़ी सुपरपावर था मनोविज्ञान। कृष्ण दुनिया के सबसे पहले मनोवैज्ञानिक चिकित्सक थे। पश्चिम का ये दावा एकदम आधारहीन है कि मनोविज्ञान के जनक सिग्मंड फ्रायड थे। फ्रायड से 5000 पहले मनोविज्ञान का सबसे बड़ा शास्त्र अवतरित हो चुका था जिसे हम श्रीमद्भगवद्गीता कहते हैं। 700 श्लोकों का एक कैप्सूल है भगवद्गीता, जो संसार के हर दुख की दवा है। गीता को सहजता से समझना है तो एक बार राधा से रणभूमि तक देखिए, गीता का इस से भावुक रूप शायद आपने अब तक नहीं देखा होगा। सवाल:अगर कृष्ण स्वयं आपसे पूछें ‘मेरी कहानी लिखते समय मुझे कितना समझा?’ तो आप क्या कहेंगे? जवाब:मैं कृष्ण को समझने का दावा बिल्कुल नहीं करता। एक ही दावा है मेरा और वो अभिमान की हद तक है। मैं कृष्ण में विश्वास करता हूं, मैंने उनके हाथ पकड़ लिए हैं, वो जहां चाहे ले जाएं। मैं अपने सभी श्रोताओं और दर्शकों से एक ही आग्रह करता हूं। कृष्ण का हाथ पकड़ के चलिए, जीवन में कभी किसी के पांव पकड़ने की नौबत नहीं आएगी। सवाल:लेखक के तौर पर क्या डर लगा कि कहीं आस्था आड़े न आ जाए या कल्पना मर्यादा न लांघ जाए? जवाब: मैंने पहले खुद को कृष्ण के बारे में जितना संभव हो सका, उतना भरा और उसके बाद लिखना शुरू किया। 50 से अधिक किताबें पढ़ीं, कृष्ण पर लिखे गए ग्रंथ पढ़े, गीता पढ़ी और पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ इस यात्रा में उतरा। और जब हमारे साथ श्रीनाथजी का आशीर्वाद हो, तो फिर चिंता किस बात की? हमने पूरे देश में लगभग 30 हाउसफुल शो किए हैं और हर जगह से सिर्फ प्रशंसा ही सुनने को मिली। यह कृष्ण जी की ही कृपा है। अब 22 और 23 अगस्त को इंदौर के लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में चार शो हैं। माँ अहिल्याबाई