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रक्षा-समझौते की आड़ में हथियारों का जखीरा भर रहा पाकिस्तान:तुर्किये से ड्रोन की सप्लाई, 60 घंटे में दर्जनों सैन्य विमान पहुंचे

रक्षा-समझौते की आड़ में हथियारों का जखीरा भर रहा पाकिस्तान:तुर्किये से ड्रोन की सप्लाई, 60 घंटे में दर्जनों सैन्य विमान पहुंचे

सऊदी और तुर्किये से हुए रक्षा समझौते की आड़ में पाकिस्तान हथियारों का जखीरा बढ़ाता जा रहा है। 19 से 21 अगस्त के बीच करीब 60 घंटे में तुर्किये के दर्जनों सैन्य विमानों ने पाकिस्तान के अलग-अलग एयरबेस पर लैंडिंग और टेकऑफ की। इनमें सी-130 सैन्य परिवहन विमान और ए400एम जंबो मिलिट्री विमान शामिल थे। रावलपिंडी के नूरखान और कराची के मसरूर एयरबेस पर तुर्किये के सी-130 सैन्य विमानों की लगातार आवाजाही रही। वहीं, तुर्किये का ए400एम विमान भी मुरीद एयरबेस पर पहुंचा। इसकी पहचान कॉल-साइन टीयूएएफ 526 से हुई। इन विमानों से तुर्किये ने पाकिस्तान को ड्रोन की बड़ी खेप पहुंचाई। ड्रोन की सप्लाई रात के अंधेरे में की गई, ताकि सैटेलाइट ट्रैकिंग से गतिविधियों को छिपाया जा सके। तुर्किये से पहुंची ड्रोन की खेप को बहावलपुर और रावलपिंडी की मिलिट्री स्टोरेज फैसिलिटीज में रखा गया है। पाकिस्तान को AI-गाइडेड केमांके क्रूज मिसाइल भी मिली ड्रोन के साथ पाकिस्तान को तुर्किये से एयर-डिफेंस सिस्टम और आधुनिक हथियार भी मिले हैं। इनमें एचक्यू सीरीज या इसी तरह का एयर-डिफेंस/सैम सिस्टम शामिल है। बायरक्तार TB2 ड्रोन: दुनिया के सबसे चर्चित आर्म्ड ड्रोन में शामिल है। रूस इसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ कर रहा है। अकिंसी ड्रोन: भारी पेलोड ले जाने वाला हाई-एंड कॉम्बैट ड्रोन। यह करीब 250 किमी तक की दूरी पर एक्सप्लोसिव पेलोड ले जा सकता है। केमांके क्रूज मिसाइल: AI-गाइडेड मिसाइल है, जो खुद टारगेट खोजने की क्षमता रखती है। इसकी रेंज 200+ किमी बताई गई है और इसे ड्रोन से भी लॉन्च किया जा सकता है। F-16 अपग्रेड किट: पाकिस्तान के पुराने F-16 लड़ाकू विमानों के बेड़े के लिए तुर्किये से इंटीग्रेशन किट भी मिली है। मुनीर ने एर्दोगान को ड्रोन देने के लिए राजी किया मक्का में हुए रक्षा समझौते के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगान से ड्रोन देने को कहा था। मुनीर ने बताया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को काफी नुकसान हुआ था। चीन से पाकिस्तान को जे-सीरीज के लड़ाकू विमान पर्याप्त संख्या में मिल चुके थे, लेकिन इस दौरान उसके ड्रोन का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया था। बलूचिस्तान में बड़े ऑपरेशन की तैयारी में मुनीर बलूचिस्तान में विद्रोहियों से घिरे मुनीर अब बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी में हैं। इसके लिए सेना की टुकड़ियां रवाना की जा रही हैं। यह कार्रवाई अगले 48 घंटे में शुरू हो सकती है। जुलाई में ‘ऑपरेशन शाबान’ शुरू करने के बाद भी बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की पकड़ कमजोर हुई है। सेना की 25 से ज्यादा चेकपोस्ट खाली हो चुकी हैं और कई जगहों पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों का कब्जा है। ईरान सीमा से लगे बलूचिस्तान के इलाकों में भी पाकिस्तानी सेना को लगातार चुनौती मिल रही है। रावलपिंडी GHQ में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात बलूच विद्रोहियों के हमले की आशंका के चलते रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान आर्मी के हेडक्वार्टर में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं। शहबाज सरकार ने शनिवार को रावलपिंडी के GHQ को अगले 6 महीने के लिए संवेदनशील जोन घोषित किया है।

रक्षा-समझौते की आड़ में हथियारों का जखीरा भर रहा पाकिस्तान:तुर्किये से ड्रोन की सप्लाई, 60 घंटे में दर्जनों सैन्य विमान पहुंचे

रक्षा-समझौते की आड़ में हथियारों का जखीरा भर रहा पाकिस्तान:तुर्किये से ड्रोन की सप्लाई, 60 घंटे में दर्जनों सैन्य विमान पहुंचे

सऊदी और तुर्किये से हुए रक्षा समझौते की आड़ में पाकिस्तान हथियारों का जखीरा बढ़ाता जा रहा है। 19 से 21 अगस्त के बीच करीब 60 घंटे में तुर्किये के दर्जनों सैन्य विमानों ने पाकिस्तान के अलग-अलग एयरबेस पर लैंडिंग और टेकऑफ की। इनमें सी-130 सैन्य परिवहन विमान और ए400एम जंबो मिलिट्री विमान शामिल थे। रावलपिंडी के नूरखान और कराची के मसरूर एयरबेस पर तुर्किये के सी-130 सैन्य विमानों की लगातार आवाजाही रही। वहीं, तुर्किये का ए400एम विमान भी मुरीद एयरबेस पर पहुंचा। इसकी पहचान कॉल-साइन टीयूएएफ 526 से हुई। इन विमानों से तुर्किये ने पाकिस्तान को ड्रोन की बड़ी खेप पहुंचाई। ड्रोन की सप्लाई रात के अंधेरे में की गई, ताकि सैटेलाइट ट्रैकिंग से गतिविधियों को छिपाया जा सके। तुर्किये से पहुंची ड्रोन की खेप को बहावलपुर और रावलपिंडी की मिलिट्री स्टोरेज फैसिलिटीज में रखा गया है। पाकिस्तान को AI-गाइडेड केमांके क्रूज मिसाइल भी मिली ड्रोन के साथ पाकिस्तान को तुर्किये से एयर-डिफेंस सिस्टम और आधुनिक हथियार भी मिले हैं। इनमें एचक्यू सीरीज या इसी तरह का एयर-डिफेंस/सैम सिस्टम शामिल है। बायरक्तार TB2 ड्रोन: दुनिया के सबसे चर्चित आर्म्ड ड्रोन में शामिल है। रूस इसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ कर रहा है। अकिंसी ड्रोन: भारी पेलोड ले जाने वाला हाई-एंड कॉम्बैट ड्रोन। यह करीब 250 किमी तक की दूरी पर एक्सप्लोसिव पेलोड ले जा सकता है। केमांके क्रूज मिसाइल: AI-गाइडेड मिसाइल है, जो खुद टारगेट खोजने की क्षमता रखती है। इसकी रेंज 200+ किमी बताई गई है और इसे ड्रोन से भी लॉन्च किया जा सकता है। F-16 अपग्रेड किट: पाकिस्तान के पुराने F-16 लड़ाकू विमानों के बेड़े के लिए तुर्किये से इंटीग्रेशन किट भी मिली है। मुनीर ने एर्दोगान को ड्रोन देने के लिए राजी किया मक्का में हुए रक्षा समझौते के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगान से ड्रोन देने को कहा था। मुनीर ने बताया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को काफी नुकसान हुआ था। चीन से पाकिस्तान को जे-सीरीज के लड़ाकू विमान पर्याप्त संख्या में मिल चुके थे, लेकिन इस दौरान उसके ड्रोन का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया था। बलूचिस्तान में बड़े ऑपरेशन की तैयारी में मुनीर बलूचिस्तान में विद्रोहियों से घिरे मुनीर अब बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी में हैं। इसके लिए सेना की टुकड़ियां रवाना की जा रही हैं। यह कार्रवाई अगले 48 घंटे में शुरू हो सकती है। जुलाई में ‘ऑपरेशन शाबान’ शुरू करने के बाद भी बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की पकड़ कमजोर हुई है। सेना की 25 से ज्यादा चेकपोस्ट खाली हो चुकी हैं और कई जगहों पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों का कब्जा है। ईरान सीमा से लगे बलूचिस्तान के इलाकों में भी पाकिस्तानी सेना को लगातार चुनौती मिल रही है। रावलपिंडी GHQ में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात बलूच विद्रोहियों के हमले की आशंका के चलते रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान आर्मी के हेडक्वार्टर में 3 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं। शहबाज सरकार ने शनिवार को रावलपिंडी के GHQ को अगले 6 महीने के लिए संवेदनशील जोन घोषित किया है। ———————- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान ने पत्रकार को आतंकी लिस्ट में डाला:PoK प्रदर्शन कवर करने वाले दानिश इरशाद पर बिना मुकदमे कार्रवाई, बैंक अकाउंट सीज-यात्रा पर रोक पाकिस्तान ने PoK में हो रहे प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार और रिसर्चर दानिश इरशाद का नाम आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची यानी फोर्थ शेड्यूल में डाल दिया है। खास बात यह है कि सरकार ने उनके खिलाफ न तो किसी आतंकी गतिविधि का आरोप बताया है और न ही किसी अदालत का फैसला सामने आया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Iran Rejects Trump Claim on Hormuz Strait

Iran Rejects Trump Claim on Hormuz Strait

3 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को ‘अमेरिकी इलाका’ बताया है। ट्रम्प इससे पहले 18 अगस्त को भी कह चुके हैं कि अमेरिका जल्द होर्मुज को अपने इलाके के तौर पर घोषित कर सकता है। वहीं ईरान ने ट्रम्प के दावे को खारिज किया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा कि अमेरिका ने बातचीत, कूटनीति और अपने हस्ताक्षर तक के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि अब ईरान को अमेरिका के साथ अपने बातचीत के तरीके में बदलाव करना होगा। रेजाई ने कहा कि होर्मुज अभी बंद है और अमेरिका के अपना रवैया सुधारने तक नहीं खुलेगा। उन्होंने कहा कि इस बार अमेरिका को पहले अपनी जिम्मेदारियां और किए गए वादे पूरे करने होंगे। ट्रम्प ने शनिवार देर रात ट्रुथ सोशल पर होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिकी हिस्सा बताने वाला पोस्ट शेयर किया। होर्मुज स्ट्रेट पर किसका अधिकार है? होर्मुज स्ट्रेट का उत्तरी हिस्सा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी हिस्सा ओमान के मुसंदम क्षेत्र से लगता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले जहाज इसी रास्ते से अरब सागर और फिर हिंद महासागर की ओर जाते हैं। इसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि कई देशों के लिए अहम समुद्री मार्ग है। अमेरिका यहां अपने युद्धपोत और नौसैनिक बल तैनात रखता है ताकि समुद्री व्यापार और अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। खाड़ी देशों से दुनिया को भेजे जाने वाले करीब 20% कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से होती है। फरवरी में अमेरिका-ईरान जंग शुरू होने से पहले हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल इस रास्ते से होकर गुजरता था। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की एनर्जी सप्लाई काफी हद तक इसी रास्ते पर निर्भर है। रेजाई बोले- ट्रम्प के हमले से परमाणु हथियारों की होड़ बढ़ सकती है रेजाई ने कहा कि ट्रम्प के ईरान पर हमले से दुनिया में परमाणु हथियारों को लेकर डर और बढ़ गया है। उनका कहना है कि अब दूसरे देशों को भी लग सकता है कि बिना परमाणु हथियार के वे सुरक्षित नहीं हैं। रेजाई ने कहा कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य है और अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक अपने परमाणु कार्यक्रम की जांच भी कराता रहा है। इसके बावजूद अमेरिका ने उस पर हमला किया। उन्होंने कहा कि इससे दुनिया के दूसरे देशों में परमाणु हथियार हासिल करने की इच्छा बढ़ सकती है। रेजाई के मुताबिक, अमेरिका की कार्रवाई ने परमाणु सुरक्षा मजबूत करने के बजाय उल्टा खतरा बढ़ा दिया है। ईरानी राष्ट्रपति बोले- युद्ध नहीं बातचीत से समाधान चाहते हैं ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता। वह बातचीत के जरिए समस्या का हल निकालना चाहता है। पजशकियान ने कहा कि ईरान किसी के दबाव में नहीं आएगा, लेकिन ताकत और समझदारी से बातचीत कर समाधान निकाला जा सकता है। अमेरिका और इजराइल के साथ तनाव के बीच हुए समझौते में ईरान ने एक भी शर्त नहीं छोड़ी है। उनके मुताबिक, ईरान की सुरक्षा परिषद में सभी पक्षों ने इस समझौते को सही रास्ता माना था। ——————————- होर्मुज से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- होर्मुज पर जल्द अमेरिका का फुल कंट्रोल होगा:ईरान की नेवी और एयरफोर्स खत्म, उसके पास सिर्फ कुछ मिसाइल और ड्रोन बचे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह कंट्रोल कर लेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान की नेवी, एयरफोर्स और मिलिट्री लीडरशिप को बहुत नुकसान हुआ है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Government Job Vacancy Update | Rajasthan Bihar Recruitment List 2026

Government Job Vacancy Update | Rajasthan Bihar Recruitment List 2026

Hindi News Career Government Job Vacancy Update | Rajasthan Bihar Recruitment List 2026 15 मिनट पहले कॉपी लिंक इस हफ्ते निकली हैं बिहार लोक सेवा आयोग और राजस्थान अर्बन डेवलपमेंट सहित कई विभागों में 63,525 पदों पर नौकरियां। अगर आप भी इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इन 6 नौकरियों की डिटेल्ड जानकारी 6 ग्राफिक्स के जरिए जानिए : ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक . दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… टीचर की पिटाई से 6 साल के बच्चे की मौत: क्‍या है स्‍कूल में पिटाई को लेकर कानून; साइकोलॉजिस्ट ने कहा-साइकोमैट्रिक टेस्ट जरूरी जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर एक साल में सिर्फ 8.25% ग्रेजुएट्स को मिली नौकरी: 80% डिग्री में प्रैक्टिकल और इंडस्ट्री एक्‍सपीरियंस नहीं; नीति आयोग की रिपोर्ट जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर सर और मैडम बाथरूम में बंद होकर प्यार करते हैं: बच्चों की शिकायत- 3 बजे छुट्‌टी कर देते हैं, अंदर किसी को आने नहीं देते जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर

सायरा बानो@82, दिलीप कुमार से शादी की भविष्यवाणी हुई सच:मेहमानों ने शादी से चुराए कांटे-छुरी, खाना कम पड़ा; शाहरुख को बेटा माना; जानिए किस्से

सायरा बानो@82, दिलीप कुमार से शादी की भविष्यवाणी हुई सच:मेहमानों ने शादी से चुराए कांटे-छुरी, खाना कम पड़ा; शाहरुख को बेटा माना; जानिए किस्से

साल 1955 तमिलनाडु के कोयंबटूर में फिल्म ‘आजाद’ की शूटिंग चल रही थी। इसी दौरान फिल्म प्रोड्यूसर एस.एस. वासन ने दिलीप कुमार की मुलाकात एक मशहूर ज्योतिषी से कराई। ज्योतिषी ने दिलीप कुमार का चेहरा देखा, हाथ की रेखाएं पढ़ीं और फिर उनकी कुंडली बनाई। इसके बाद उन्होंने ऐसी भविष्यवाणी की, जिसे सुनकर खुद दिलीप कुमार भी हैरान रह गए। ज्योतिषी ने कहा कि दिलीप कुमार की शादी 40 साल की उम्र के बाद होगी। उनकी दुल्हन उनसे करीब आधी उम्र की होगी। इतना ही नहीं, वह भी फिल्मों से जुड़ी होगी। भविष्यवाणी यहीं खत्म नहीं हुई। ज्योतिषी ने यह भी कहा कि उस महिला को एक गंभीर बीमारी भी होगी। यह सुनकर दिलीप कुमार ने कहा था, “मैं तो कभी फिल्म वाली लड़की से शादी ही नहीं करूंगा।” उस वक्त दिलीप कुमार ने इस भविष्यवाणी को गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन करीब 11 साल बाद ज्योतिषी की कही लगभग हर बात सच हो गई। 1966 में 44 साल के दिलीप कुमार ने 22 साल की एक्ट्रेस सायरा बानो से निकाह किया। आज सायरा बानो के 82वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी और दिलीप कुमार के साथ उनकी प्रेम कहानी के कुछ अनसुने किस्से। दिलीप कुमार के चलते उर्दू सीखनी शुरू की सायरा बानो का जन्म 1944 में मशहूर अदाकारा नसीम बानो और प्रोड्यूसर मियां एहसान-उल-हक के घर हुआ था। दिलचस्प बात ये है कि जिस साल सायरा दुनिया में आईं, उसी साल दिलीप कुमार की पहली फिल्म ज्वार भाटा (1944) रिलीज हुई थी। सायरा करीब 6 साल की थीं, जब उनको पढ़ाई के लिए यूनाइटेड किंगडम भेज दिया गया। लंदन के मशहूर एलीट स्कूल क्वीन्स हाउस में उनकी पढ़ाई हुई। छुट्टियां होतीं, तो सायरा हिंदुस्तान आती थीं। ऐसी ही एक छुट्टी में 12 साल की सायरा अपनी मां के साथ घर पर फिल्म आन देख रही थीं। फिल्म महबूब खान ने बनाई थी और हीरो थे दिलीप कुमार। दिलीप साहब की अदाकारी ने सायरा के दिल पर ऐसा असर किया कि फिल्म खत्म होते ही उन्होंने मां के सामने अपनी ख्वाहिश जाहिर कर दी। सायरा ने साफ कह दिया- अगर शादी करेंगी, तो सिर्फ दिलीप कुमार से। लंदन में पढ़ाई के दौरान भी सायरा बानो के दिल में एक ही ख्वाब था- एक दिन वह मिसेज दिलीप कुमार बनेंगी। सायरा ने दैनिक भास्कर को दिए एक पुराने इंटरव्यू में यह बात बताई थी। सायरा की मां नसीम बानो उनसे कहती थीं कि अगर उन्हें दिलीप कुमार की पत्नी बनना है, तो पहले उनकी पसंद-नापसंद और शौक को समझना होगा। बस फिर क्या था, सायरा ने भी दिलीप साहब की पसंद की चीजें सीखना शुरू कर दिया। जब उन्हें मालूम हुआ कि दिलीप कुमार को उर्दू और शायरी बेहद पसंद है, तो सायरा ने बाकायदा मौलवी साहब से उर्दू पढ़ना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, दिलीप साहब को सितार पसंद था, तो सायरा ने सितार सीखने की कोशिश भी की। काम करने को लेकर दिलीप कुमार ने सफेद बाल दिखा दिए सायरा की मां नसीम एक एक्ट्रेस थीं, इसलिए दिलीप कुमार की नसीम बानो से मुलाकात होती रहती थी। वो सायरा के बारे में भी जानते थे। जब सायरा ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने का फैसला किया और निर्माता एस. मुखर्जी ने यह बात दिलीप कुमार से कही तो उन्होंने कहा था कि सायरा को फिल्मों में करियर बनाने से रोका जाना चाहिए। 1960 के दशक की शुरुआत में फिल्म ‘दिल दिया दर्द लिया’ की कास्टिंग शुरू होने वाली थी। इसी दौरान निर्माता एस. मुखर्जी ने दिलीप कुमार से कहा था, “यूसुफ, यह लड़की आपके साथ काम करने के लिए पागल है।” जिस पर दिलीप कुमार ने अपने सफेद-काले बालों में हाथ फेरकर सायरा से कहा था, “क्या तुमने मेरे ये सफेद बाल देखे हैं? मैं तुमसे बहुत ज्यादा उम्र का हूं और मैं सुअर की तरह खाता हूं!” शम्मी कपूर की डांट सुनकर सायरा रोने लगी थीं सायरा बानो की पहली फिल्म 1961 में रिलीज हुई ‘जंगली’ थी। हालांकि फिल्मों में कदम रखने का फैसला उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था। परिवार, खासकर उनकी मां नसीम बानो, इसके खिलाफ थीं, लेकिन सायरा ने अपने इस ख्वाब को छोड़ना मंजूर नहीं किया। उन्होंने स्कूल की छुट्टियों के दौरान ‘जंगली’ की शूटिंग शुरू की। कुछ महीने शूटिंग करने के बाद वह वापस लंदन चली गईं और अपनी पढ़ाई पूरी करने लगीं। लेकिन फिल्म की शूटिंग से लेकर रिलीज तक, कुछ ऐसे वाकये हुए, जिन्होंने सायरा को रुला दिया। दरअसल, सायरा बानो ने फिल्म ‘जंगली’ साइन तो कर ली थी, लेकिन उन्हें एक्टिंग का कोई तजुर्बा नहीं था। शूटिंग के पहले दिन वह कश्मीर के शालीमार बाग पहुंचीं। वहां हजारों लोग शूटिंग देखने के लिए जमा थे। सायरा वैसे भी काफी शर्मीली थीं। उन्हें ‘कश्मीर की कली’ गाने की एक लाइन पर घूमकर लिप-सिंक करना था, लेकिन वह बार-बार गलती कर रही थीं। लिप-सिंक पर ध्यान देतीं, तो गलत दिशा में घूम जातीं। घूमने पर ध्यान देतीं, तो गाने की लाइन छूट जाती। कई रीटेक के बाद शम्मी कपूर ने उन्हें डांटते हुए कहा कि अगर काम करना है, तो ठीक से करो। यह सुनकर सायरा बहुत शर्मिंदा हुईं और रोने लगीं। उनकी बहन ने भी कहा कि अभी वक्त है, चाहो तो एक्टिंग छोड़कर वापस चल सकते हैं, लेकिन सायरा ने हार नहीं मानी। उन्होंने दोबारा वही सीन किया और इस बार बिल्कुल सही कर दिया। लेकिन रिलीज से पहले एक और वाकये ने सायरा को परेशान कर दिया। एक दिन वह अपनी मां के साथ मुंबई की एक दुकान पर गई थीं। वहां एक सेल्समैन दिलीप कुमार का बड़ा फैन था। उसने सायरा की मां से पूछा कि बेटी की फिल्म कब आ रही है? मां ने बताया कि अगले महीने। यह सुनते ही सेल्समैन बोला कि अगले महीने दिलीप कुमार की ‘गंगा जमुना’ भी रिलीज हो रही है। दोनों फिल्में साथ आईं, तो सायरा की फिल्म कौन देखेगा? यह सुनकर सायरा घबरा गईं और वहीं रोने लगीं। उन्हें लगा कि उनकी फिल्म फ्लॉप हो जाएगी। लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा। ‘जंगली’ और ‘गंगा जमुना’ एक हफ्ते के अंतर से रिलीज हुईं और दोनों फिल्मों ने शानदार कामयाबी हासिल की। पार्टी में पहली बार दिलीप कुमार

सायरा बानो@82, दिलीप कुमार से शादी की भविष्यवाणी हुई सच:मेहमानों ने शादी से चुराए कांटे-छुरी, खाना कम पड़ा; शाहरुख को बेटा माना; जानिए किस्से

सायरा बानो@82, दिलीप कुमार से शादी की भविष्यवाणी हुई सच:मेहमानों ने शादी से चुराए कांटे-छुरी, खाना कम पड़ा; शाहरुख को बेटा माना; जानिए किस्से

साल 1955 तमिलनाडु के कोयंबटूर में फिल्म ‘आजाद’ की शूटिंग चल रही थी। इसी दौरान फिल्म प्रोड्यूसर एस.एस. वासन ने दिलीप कुमार की मुलाकात एक मशहूर ज्योतिषी से कराई। ज्योतिषी ने दिलीप कुमार का चेहरा देखा, हाथ की रेखाएं पढ़ीं और फिर उनकी कुंडली बनाई। इसके बाद उन्होंने ऐसी भविष्यवाणी की, जिसे सुनकर खुद दिलीप कुमार भी हैरान रह गए। ज्योतिषी ने कहा कि दिलीप कुमार की शादी 40 साल की उम्र के बाद होगी। उनकी दुल्हन उनसे करीब आधी उम्र की होगी। इतना ही नहीं, वह भी फिल्मों से जुड़ी होगी। भविष्यवाणी यहीं खत्म नहीं हुई। ज्योतिषी ने यह भी कहा कि उस महिला को एक गंभीर बीमारी भी होगी। यह सुनकर दिलीप कुमार ने कहा था, “मैं तो कभी फिल्म वाली लड़की से शादी ही नहीं करूंगा।” उस वक्त दिलीप कुमार ने इस भविष्यवाणी को गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन करीब 11 साल बाद ज्योतिषी की कही लगभग हर बात सच हो गई। 1966 में 44 साल के दिलीप कुमार ने 22 साल की एक्ट्रेस सायरा बानो से निकाह किया। आज सायरा बानो के 82वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी और दिलीप कुमार के साथ उनकी प्रेम कहानी के कुछ अनसुने किस्से। दिलीप कुमार के चलते उर्दू सीखनी शुरू की सायरा बानो का जन्म 1944 में मशहूर अदाकारा नसीम बानो और प्रोड्यूसर मियां एहसान-उल-हक के घर हुआ था। दिलचस्प बात ये है कि जिस साल सायरा दुनिया में आईं, उसी साल दिलीप कुमार की पहली फिल्म ज्वार भाटा (1944) रिलीज हुई थी। सायरा करीब 6 साल की थीं, जब उनको पढ़ाई के लिए यूनाइटेड किंगडम भेज दिया गया। लंदन के मशहूर एलीट स्कूल क्वीन्स हाउस में उनकी पढ़ाई हुई। छुट्टियां होतीं, तो सायरा हिंदुस्तान आती थीं। ऐसी ही एक छुट्टी में 12 साल की सायरा अपनी मां के साथ घर पर फिल्म आन देख रही थीं। फिल्म महबूब खान ने बनाई थी और हीरो थे दिलीप कुमार। दिलीप साहब की अदाकारी ने सायरा के दिल पर ऐसा असर किया कि फिल्म खत्म होते ही उन्होंने मां के सामने अपनी ख्वाहिश जाहिर कर दी। सायरा ने साफ कह दिया- अगर शादी करेंगी, तो सिर्फ दिलीप कुमार से। लंदन में पढ़ाई के दौरान भी सायरा बानो के दिल में एक ही ख्वाब था- एक दिन वह मिसेज दिलीप कुमार बनेंगी। सायरा ने दैनिक भास्कर को दिए एक पुराने इंटरव्यू में यह बात बताई थी। सायरा की मां नसीम बानो उनसे कहती थीं कि अगर उन्हें दिलीप कुमार की पत्नी बनना है, तो पहले उनकी पसंद-नापसंद और शौक को समझना होगा। बस फिर क्या था, सायरा ने भी दिलीप साहब की पसंद की चीजें सीखना शुरू कर दिया। जब उन्हें मालूम हुआ कि दिलीप कुमार को उर्दू और शायरी बेहद पसंद है, तो सायरा ने बाकायदा मौलवी साहब से उर्दू पढ़ना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, दिलीप साहब को सितार पसंद था, तो सायरा ने सितार सीखने की कोशिश भी की। काम करने को लेकर दिलीप कुमार ने सफेद बाल दिखा दिए सायरा की मां नसीम एक एक्ट्रेस थीं, इसलिए दिलीप कुमार की नसीम बानो से मुलाकात होती रहती थी। वो सायरा के बारे में भी जानते थे। जब सायरा ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने का फैसला किया और निर्माता एस. मुखर्जी ने यह बात दिलीप कुमार से कही तो उन्होंने कहा था कि सायरा को फिल्मों में करियर बनाने से रोका जाना चाहिए। 1960 के दशक की शुरुआत में फिल्म ‘दिल दिया दर्द लिया’ की कास्टिंग शुरू होने वाली थी। इसी दौरान निर्माता एस. मुखर्जी ने दिलीप कुमार से कहा था, “यूसुफ, यह लड़की आपके साथ काम करने के लिए पागल है।” जिस पर दिलीप कुमार ने अपने सफेद-काले बालों में हाथ फेरकर सायरा से कहा था, “क्या तुमने मेरे ये सफेद बाल देखे हैं? मैं तुमसे बहुत ज्यादा उम्र का हूं और मैं सुअर की तरह खाता हूं!” शम्मी कपूर की डांट सुनकर सायरा रोने लगी थीं सायरा बानो की पहली फिल्म 1961 में रिलीज हुई ‘जंगली’ थी। हालांकि फिल्मों में कदम रखने का फैसला उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था। परिवार, खासकर उनकी मां नसीम बानो, इसके खिलाफ थीं, लेकिन सायरा ने अपने इस ख्वाब को छोड़ना मंजूर नहीं किया। उन्होंने स्कूल की छुट्टियों के दौरान ‘जंगली’ की शूटिंग शुरू की। कुछ महीने शूटिंग करने के बाद वह वापस लंदन चली गईं और अपनी पढ़ाई पूरी करने लगीं। लेकिन फिल्म की शूटिंग से लेकर रिलीज तक, कुछ ऐसे वाकये हुए, जिन्होंने सायरा को रुला दिया। दरअसल, सायरा बानो ने फिल्म ‘जंगली’ साइन तो कर ली थी, लेकिन उन्हें एक्टिंग का कोई तजुर्बा नहीं था। शूटिंग के पहले दिन वह कश्मीर के शालीमार बाग पहुंचीं। वहां हजारों लोग शूटिंग देखने के लिए जमा थे। सायरा वैसे भी काफी शर्मीली थीं। उन्हें ‘कश्मीर की कली’ गाने की एक लाइन पर घूमकर लिप-सिंक करना था, लेकिन वह बार-बार गलती कर रही थीं। लिप-सिंक पर ध्यान देतीं, तो गलत दिशा में घूम जातीं। घूमने पर ध्यान देतीं, तो गाने की लाइन छूट जाती। कई रीटेक के बाद शम्मी कपूर ने उन्हें डांटते हुए कहा कि अगर काम करना है, तो ठीक से करो। यह सुनकर सायरा बहुत शर्मिंदा हुईं और रोने लगीं। उनकी बहन ने भी कहा कि अभी वक्त है, चाहो तो एक्टिंग छोड़कर वापस चल सकते हैं, लेकिन सायरा ने हार नहीं मानी। उन्होंने दोबारा वही सीन किया और इस बार बिल्कुल सही कर दिया। लेकिन रिलीज से पहले एक और वाकये ने सायरा को परेशान कर दिया। एक दिन वह अपनी मां के साथ मुंबई की एक दुकान पर गई थीं। वहां एक सेल्समैन दिलीप कुमार का बड़ा फैन था। उसने सायरा की मां से पूछा कि बेटी की फिल्म कब आ रही है? मां ने बताया कि अगले महीने। यह सुनते ही सेल्समैन बोला कि अगले महीने दिलीप कुमार की ‘गंगा जमुना’ भी रिलीज हो रही है। दोनों फिल्में साथ आईं, तो सायरा की फिल्म कौन देखेगा? यह सुनकर सायरा घबरा गईं और वहीं रोने लगीं। उन्हें लगा कि उनकी फिल्म फ्लॉप हो जाएगी। लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा। ‘जंगली’ और ‘गंगा जमुना’ एक हफ्ते के अंतर से रिलीज हुईं और दोनों फिल्मों ने शानदार कामयाबी हासिल की। पार्टी में पहली बार दिलीप कुमार