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'अंग्रेजों के सम्मान में लिखा गया जन गण मन':मुकेश खन्ना बोले- ये राष्ट्रगान नहीं हो सकता; इसमें अंग्रेजों को भाग्य विधाता बताया गया

'अंग्रेजों के सम्मान में लिखा गया जन गण मन':मुकेश खन्ना बोले- ये राष्ट्रगान नहीं हो सकता; इसमें अंग्रेजों को भाग्य विधाता बताया गया

शक्तिमान एक्टर मुकेश खन्ना ने एक बार फिर ‘वंदे मातरम’ को ‘जन गण मन’ की जगह देश का राष्ट्रगान बनाने की मांग की है। ANI से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि ‘जन गण मन’ ब्रिटिश शासन के दौरान जॉर्ज पंचम की तारीफ में लिखा गया था। इसलिए इसे राष्ट्रगान नहीं माना जाना चाहिए। ‘जन गण मन’ ब्रिटिश शासक के लिए लिखा गया था
मुकेश खन्ना ने कहा कि ‘जन गण मन’ में ‘अधिनायक’ शब्द ब्रिटिश हुक्मरान के लिए इस्तेमाल किया गया है, जिन्हें भारत के भाग्य का विधाता बताया गया था। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ में मातृभूमि के प्रति भक्ति दिखाई देती है, इसलिए इसे राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा महत्व मिलना चाहिए। मुकेश खन्ना के मुताबिक, आजादी के सालों बाद भी देश में अंग्रेजी शिक्षा और ब्रिटिश दौर की व्यवस्थाओं को जरूरत से ज्यादा तरजीह दी जा रही है। पहले रानी एलिजाबेथ का नाम लेकर हुए थे ट्रोल
इससे पहले भी मुकेश खन्ना राष्ट्रगान को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। तब उन्होंने दावा किया था कि ‘जन गण मन’ रवींद्रनाथ टैगोर ने रानी एलिजाबेथ की तारीफ में लिखा था। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें ट्रोल किया था। यूज़र्स ने याद दिलाया था कि ‘जन गण मन’ पहली बार 1911 में गाया गया था, जबकि रानी एलिजाबेथ द्वितीय का जन्म ही 1926 में हुआ था। केंद्र सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन
इससे पहले केंद्र सरकार ने राष्ट्रगान जन-गण-मन और राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को नए निर्देश जारी किए थे। मंत्रालय ने कहा है कि नियमों में पहले से तय है कि किन कार्यक्रमों में दोनों को गाना या बजाना जरूरी है। मंत्रालय ने कहा कि एक ही कार्यक्रम में दोनों में से पहले वंदे और फिर जन-गण-मन होगा। जिन राज्यों में राज्य गीत होता है, वहां भी सीक्वेंस का पालन करना होगा। 9 जुलाई को सभी राज्यों और मंत्रालयों को पत्र भेजा गया, जिसकी जानकारी शुक्रवार को सामने आई है। सभी राज्यों से कहा गया है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत हमेशा उनके असली शब्दों, सही उच्चारण और तय नियमों के अनुसार ही गाया और बजाया जाए। इसके लिए दोनों की ऑफिशियल कॉपी मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई है। राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं। वंदे मातरम एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था। 1911 में लिखा गया था राष्ट्रगान ‘जन गण मन’
ऐतिहासिक तथ्यों के मुताबिक, ‘जन गण मन’ की रचना नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने 1911 में की थी। इसे पहली बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गाया गया था। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया था। वहीं बंकिम चंद्र चटर्जी के लिखे गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत (नेशनल सॉन्ग) का दर्जा दिया गया है।

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'अंग्रेजों के सम्मान में लिखा गया जन गण मन':मुकेश खन्ना बोले- ये राष्ट्रगान नहीं हो सकता; इसमें अंग्रेजों को भाग्य विधाता बताया गया

'अंग्रेजों के सम्मान में लिखा गया जन गण मन':मुकेश खन्ना बोले- ये राष्ट्रगान नहीं हो सकता; इसमें अंग्रेजों को भाग्य विधाता बताया गया

शक्तिमान एक्टर मुकेश खन्ना ने एक बार फिर ‘वंदे मातरम’ को ‘जन गण मन’ की जगह देश का राष्ट्रगान बनाने की मांग की है। ANI से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि ‘जन गण मन’ ब्रिटिश शासन के दौरान जॉर्ज पंचम की तारीफ में लिखा गया था। इसलिए इसे राष्ट्रगान नहीं माना जाना चाहिए। ‘जन गण मन’ ब्रिटिश शासक के लिए लिखा गया था
मुकेश खन्ना ने कहा कि ‘जन गण मन’ में ‘अधिनायक’ शब्द ब्रिटिश हुक्मरान के लिए इस्तेमाल किया गया है, जिन्हें भारत के भाग्य का विधाता बताया गया था। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ में मातृभूमि के प्रति भक्ति दिखाई देती है, इसलिए इसे राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा महत्व मिलना चाहिए। मुकेश खन्ना के मुताबिक, आजादी के सालों बाद भी देश में अंग्रेजी शिक्षा और ब्रिटिश दौर की व्यवस्थाओं को जरूरत से ज्यादा तरजीह दी जा रही है। पहले रानी एलिजाबेथ का नाम लेकर हुए थे ट्रोल
इससे पहले भी मुकेश खन्ना राष्ट्रगान को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। तब उन्होंने दावा किया था कि ‘जन गण मन’ रवींद्रनाथ टैगोर ने रानी एलिजाबेथ की तारीफ में लिखा था। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें ट्रोल किया था। यूज़र्स ने याद दिलाया था कि ‘जन गण मन’ पहली बार 1911 में गाया गया था, जबकि रानी एलिजाबेथ द्वितीय का जन्म ही 1926 में हुआ था। केंद्र सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन
इससे पहले केंद्र सरकार ने राष्ट्रगान जन-गण-मन और राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को नए निर्देश जारी किए थे। मंत्रालय ने कहा है कि नियमों में पहले से तय है कि किन कार्यक्रमों में दोनों को गाना या बजाना जरूरी है। मंत्रालय ने कहा कि एक ही कार्यक्रम में दोनों में से पहले वंदे और फिर जन-गण-मन होगा। जिन राज्यों में राज्य गीत होता है, वहां भी सीक्वेंस का पालन करना होगा। 9 जुलाई को सभी राज्यों और मंत्रालयों को पत्र भेजा गया, जिसकी जानकारी शुक्रवार को सामने आई है। सभी राज्यों से कहा गया है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत हमेशा उनके असली शब्दों, सही उच्चारण और तय नियमों के अनुसार ही गाया और बजाया जाए। इसके लिए दोनों की ऑफिशियल कॉपी मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई है। राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं। वंदे मातरम एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था। 1911 में लिखा गया था राष्ट्रगान ‘जन गण मन’
ऐतिहासिक तथ्यों के मुताबिक, ‘जन गण मन’ की रचना नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने 1911 में की थी। इसे पहली बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गाया गया था। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया था। वहीं बंकिम चंद्र चटर्जी के लिखे गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत (नेशनल सॉन्ग) का दर्जा दिया गया है।

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