Friday, 09 Oct 2026 | 10:30 AM

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Kriti Sanon Controversy | Rakshabandhan Ad Statement & Social Media Reply

Kriti Sanon Controversy | Rakshabandhan Ad Statement & Social Media Reply

10 मिनट पहले कॉपी लिंक एक्ट्रेस कृति सेनन ने अपने हालिया रक्षाबंधन एडवर्टाइजमेंट को लेकर हुई ट्रोलिंग पर चुप्पी तोड़ी है। इस एड में रिवीलिंग ड्रेस और पालतू कुत्ते (पेट डॉग) को राखी बांधने पर सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना हुई थी। इस विवाद पर मंगलवार को इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए प्रतिक्रिया देते हुए कृति ने लिखा कि त्योहारों का असली मतलब पहनावे में नहीं, बल्कि परंपराओं के प्रति भावनाओं में होता है। इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं के कपड़ों पर सवाल उठाने वालों को भी कड़ा जवाब दिया है। लोगों ने इस एड पर त्योहार के गलत चित्रण और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप लगाया। ‘संस्कृति दिल में होती है, नेकलाइन में नहीं’ कृति सेनन ने अपने पोस्ट में लिखा कि एथनिक फैशन में समय के साथ बदलाव आया है, लेकिन आज भी महिलाओं के अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान को सिर्फ उनके कपड़ों से नापा जाता है। एक्ट्रेस ने सवाल उठाया कि समाज महिलाओं को क्या पहनना चाहिए, यह बताना कब बंद करेगा? उन्होंने कहा कि संस्कृति और परंपराएं इंसान के दिल में होती हैं, उसकी नेकलाइन में नहीं। ‘बहन और पेट डॉग्स को भी बांधती हूं राखी’ रक्षाबंधन पर बात करते हुए कृति ने कहा कि यह त्योहार सुरक्षा और प्यार के रिश्ते का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि वे और उनकी बहन नूपुर सेनन एक-दूसरे को राखी बांधती हैं, क्योंकि वे दोनों एक-दूसरे की सुरक्षा किसी भाई से कम नहीं करती हैं। कृति ने आगे लिखा कि यही प्यार पेट डॉग्स के लिए भी है, क्योंकि वे भी उनके परिवार का ही हिस्सा हैं। एड में पहनावे और पेट डॉग को लेकर हुआ था विवाद यह पूरा विवाद जीवा (GIVA) ज्वेलरी ब्रांड के रक्षाबंधन एड के सामने आने के बाद शुरू हुआ था। एडवर्टाइजमेंट में कृति इंडो-वेस्टर्न ब्रालेट स्टाइल ब्लाउज में नजर आई थीं और वीडियो में वे एक पालतू कुत्ते को भी राखी बांधती दिखी थीं। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति का अपमान बताते हुए एक्ट्रेस के कपड़ों को लेकर नाराजगी जताई थी और शिकायत दर्ज करने की मांग की थी। धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस एडवर्टाइजमेंट को हिंदू धर्म और त्योहारों के प्रति असंवेदनशील करार दिया। एक यूजर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि रक्षाबंधन के पवित्र त्योहार के गलत चित्रण और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में एक्ट्रेस के खिलाफ केस दर्ज होना चाहिए। लोगों ने इस एड पर त्योहार के गलत चित्रण और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप लगाया। विवाद बढ़ने के बाद कृति सेनन के बचाव में भी कई लोग आगे आए हैं। सपोर्ट करने वाले यूज़र्स का कहना है कि कृति का आउटफिट किसी भी तरह से आपत्तिजनक नहीं है और लोगों को दूसरों के कपड़ों को जज करना बंद करना चाहिए। ‘कॉकटेल 2’ में नजर आई थीं कृति सेनन कृति सेनन के वर्कफ्रंट की बात करें तो उन्हें हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘कॉकटेल 2’ में देखा गया था। होमी अदजानिया के निर्देशन में बनी इस फिल्म में कृति के साथ शाहिद कपूर और रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिका में थे। ‘कॉकटेल 2’ में शाहिद कपूर और रश्मिका मंदाना के साथ कृति भी मुख्य भूमिका में थीं। यह फिल्म 2012 में आई सैफ अली खान और दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘कॉकटेल’ का सीक्वल थी, जिसे बॉक्स ऑफिस पर मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला था। ये खबर भी पढ़ें हिट फिल्म के बाद भी 15 महीने बेरोजगार रहीं कृति:स्टारकिड्स ने छीने बड़े रोल, जिस किरदार पर सवाल उठे, उसी ने दिलाया नेशनल अवॉर्ड कृति सेनन बॉलीवुड की सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। उनके नाम नेशनल अवॉर्ड, कई सुपरहिट फिल्में और अपना प्रोडक्शन हाउस है। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता रिजेक्शन, अकेलेपन, तानों और आत्मविश्वास की लड़ाई से होकर गुजरा है। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

अंतरराष्ट्रीय फर्टिलिटी टूरिज्म में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा:ब्रिटेन के 30 परिवारों ने यूरोपीय डोनर चुने, बच्चों का डीएनए तुर्किये व अन्य देशों से मिला

अंतरराष्ट्रीय फर्टिलिटी टूरिज्म में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा:ब्रिटेन के 30 परिवारों ने यूरोपीय डोनर चुने, बच्चों का डीएनए तुर्किये व अन्य देशों से मिला

ब्रिटेन से मेडिकल टूरिज्म के तहत उत्तरी साइप्रस में आईवीएफ कराने वाले ब्रिटेन के 30 परिवारों के साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई। आरोप है कि आईवीएफ क्लिनिक ने उनकी पसंद के स्पर्म-एग डोनर इस्तेमाल करने का दावा किया था, लेकिन 11 बच्चों के डीएनए टेस्ट से पता चला कि ये उन स्पर्म-एग डोनर के नहीं हैं, जिसे उनके माता-पिता ने चुना था। आईवीएफ से पैदा इन बच्चों का डीएनए तुर्किये और अरब देशों के लोगों के डीएनए से मिल रहा है, जबकि उनके माता-पिता ने फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे पश्चिम यूरोपीय देशों के पूरी तरह से स्क्रीन किए गए और स्वस्थ डोनर्स को चुना था। बीबीसी की खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय घोटाले के लगभग आधे मामले अकेले ‘डोगस आईवीएफ सेंटर’ से सामने आए हैं। दुनिया के सबसे बड़े स्पर्म बैंक ‘क्रायोस इंटरनेशनल’ ने स्पष्ट किया है कि उसने 2016 में ही डोगस क्लिनिक को ब्लैकलिस्ट कर दिया था और वहां कभी स्पर्म की सप्लाई ही नहीं की। इसके बावजूद क्लिनिक सालों तक क्रायोस के साथ अपने आधिकारिक जुड़ाव का झूठा विज्ञापन देकर संतान चाहने वाले जोड़ों को ठगता रहा। निजी डेटा की अनदेखी – माता-पिता ने डोनर की मेडिकल हिस्ट्री, रूप-रंग, शिक्षा और शौक के आधार पर चयन किया था, ताकि बच्चा 18 साल की उम्र में अपने जैविक मूल को जान सके। फर्जी डोनर के इस्तेमाल से बच्चों के मूलभूत मानवाधिकारों का हनन हुआ है। ब्रिटिश फर्टिलिटी सोसाइटी के अनुसाार, 30 से अधिक बच्चों के मामलों में ऐसा होना एक संगठित आपराधिक नेटवर्क, गंभीर लापरवाही और संस्थागत धोखाधड़ी है। उत्तरी साइप्रस तुर्किये के कब्जे में है और कानून लचर हैं। वैश्विक फर्टिलिटी रिपोर्ट्स और मेडिकल टूरिज्म डेटा के अनुसार, सस्ता होने से हर साल 5-8 हजार विदेशी जोड़े आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए नार्दन साइप्रस आते हैं और पिछले 10 वर्षों में 50,000 से 70,000 विदेशी नागरिकों ने नॉर्दन साइप्रस के क्लिनिकों में आईवीएफ ट्रीटमेंट कराया है। इनमें बड़ी संख्या ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के लोगों की है। रैचेल का दावा – 13 साल बाद डीएनए टेस्ट से शक पक्का हुआ रिपोर्ट में रैचेल नाम की एक मां का केस बताया गया है। रैचेल ने 2012 में डोगस में करीब 4.43 लाख रु. में आईवीएफ कराया। रैचेल ने क्रायोस वेबसाइट से डेनमार्क के एक डोनर को चुना था। प्रोफाइल में लिखा था कि 18 साल बाद बच्चा चाहे तो डोनर की पहचान जान सकता है। रैचेल का कहना है कि क्लिनिक ने बार-बार मेडिकल रिपोर्ट भेजने से इनकार किया, जिससे शक बढ़ा। अब डीएनए टेस्ट से यह सामने आया कि जोना उनका बायोलॉजिकल बेटा है, लेकिन चुना गया डोनर उसका पिता नहीं है। रैचेल ने कहा कि दुख यह है कि जोना भविष्य में अपने डोनर से संपर्क का मौका खो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय फर्टिलिटी टूरिज्म में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा:ब्रिटेन के 30 परिवारों ने यूरोपीय डोनर चुने, बच्चों का डीएनए तुर्किये व अन्य देशों से मिला

अंतरराष्ट्रीय फर्टिलिटी टूरिज्म में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा:ब्रिटेन के 30 परिवारों ने यूरोपीय डोनर चुने, बच्चों का डीएनए तुर्किये व अन्य देशों से मिला

ब्रिटेन से मेडिकल टूरिज्म के तहत उत्तरी साइप्रस में आईवीएफ कराने वाले ब्रिटेन के 30 परिवारों के साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई। आरोप है कि आईवीएफ क्लिनिक ने उनकी पसंद के स्पर्म-एग डोनर इस्तेमाल करने का दावा किया था, लेकिन 11 बच्चों के डीएनए टेस्ट से पता चला कि ये उन स्पर्म-एग डोनर के नहीं हैं, जिसे उनके माता-पिता ने चुना था। आईवीएफ से पैदा इन बच्चों का डीएनए तुर्किये और अरब देशों के लोगों के डीएनए से मिल रहा है, जबकि उनके माता-पिता ने फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे पश्चिम यूरोपीय देशों के पूरी तरह से स्क्रीन किए गए और स्वस्थ डोनर्स को चुना था। बीबीसी की खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय घोटाले के लगभग आधे मामले अकेले ‘डोगस आईवीएफ सेंटर’ से सामने आए हैं। दुनिया के सबसे बड़े स्पर्म बैंक ‘क्रायोस इंटरनेशनल’ ने स्पष्ट किया है कि उसने 2016 में ही डोगस क्लिनिक को ब्लैकलिस्ट कर दिया था और वहां कभी स्पर्म की सप्लाई ही नहीं की। इसके बावजूद क्लिनिक सालों तक क्रायोस के साथ अपने आधिकारिक जुड़ाव का झूठा विज्ञापन देकर संतान चाहने वाले जोड़ों को ठगता रहा। निजी डेटा की अनदेखी – माता-पिता ने डोनर की मेडिकल हिस्ट्री, रूप-रंग, शिक्षा और शौक के आधार पर चयन किया था, ताकि बच्चा 18 साल की उम्र में अपने जैविक मूल को जान सके। फर्जी डोनर के इस्तेमाल से बच्चों के मूलभूत मानवाधिकारों का हनन हुआ है। ब्रिटिश फर्टिलिटी सोसाइटी के अनुसाार, 30 से अधिक बच्चों के मामलों में ऐसा होना एक संगठित आपराधिक नेटवर्क, गंभीर लापरवाही और संस्थागत धोखाधड़ी है। उत्तरी साइप्रस तुर्किये के कब्जे में है और कानून लचर हैं। वैश्विक फर्टिलिटी रिपोर्ट्स और मेडिकल टूरिज्म डेटा के अनुसार, सस्ता होने से हर साल 5-8 हजार विदेशी जोड़े आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए नार्दन साइप्रस आते हैं और पिछले 10 वर्षों में 50,000 से 70,000 विदेशी नागरिकों ने नॉर्दन साइप्रस के क्लिनिकों में आईवीएफ ट्रीटमेंट कराया है। इनमें बड़ी संख्या ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के लोगों की है। रैचेल का दावा – 13 साल बाद डीएनए टेस्ट से शक पक्का हुआ रिपोर्ट में रैचेल नाम की एक मां का केस बताया गया है। रैचेल ने 2012 में डोगस में करीब 4.43 लाख रु. में आईवीएफ कराया। रैचेल ने क्रायोस वेबसाइट से डेनमार्क के एक डोनर को चुना था। प्रोफाइल में लिखा था कि 18 साल बाद बच्चा चाहे तो डोनर की पहचान जान सकता है। रैचेल का कहना है कि क्लिनिक ने बार-बार मेडिकल रिपोर्ट भेजने से इनकार किया, जिससे शक बढ़ा। अब डीएनए टेस्ट से यह सामने आया कि जोना उनका बायोलॉजिकल बेटा है, लेकिन चुना गया डोनर उसका पिता नहीं है। रैचेल ने कहा कि दुख यह है कि जोना भविष्य में अपने डोनर से संपर्क का मौका खो सकता है।

IIT Delhi Student Suicide Controversy

IIT Delhi Student Suicide Controversy

Hindi News Career IIT Delhi Student Suicide Controversy | Protest Over Hostel Room Issues 3 मिनट पहले कॉपी लिंक बेगूसराय के ऋषिकेश कुमार ने 22 अगस्त को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के कैंपस में सुसाइड कर लिया। उसने IIT दिल्ली के लेक्चरर हाल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी। सुसाइड के 4 दिन बाद दिल्ली से ऋषिकेश का शव गांव मक्खाचक लाया गया। जहां अंतिम संस्कार हुआ। ऋषिकेश IIT दिल्ली में MSc फिजिक्स का छात्र था। पुलिस के अनुसार 22 अगस्त को वह करीब सुबह 8 बजे मेन गेट से कैंपस में आया। 8:33 बजे घटना की PCR कॉल मिली। उसे IIT अस्पताल ले जाया गया, जहां मृत घोषित किया गया। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। उसका मोबाइल फोन जांच के लिए लिया गया है। ऋषिकेश सुसाइड केस को लेकर 24 अगस्त को IIT दिल्ली के छात्रों ने लेक्चरर हाल कॉम्प्लेक्स के बाहर प्रदर्शन और धरना शुरू किया। बड़ी संख्या में छात्र जुटे और कक्षाओं का बहिष्कार किया। हॉस्टल में कमरा न मिलने से परेशान था ऋषिकेश हॉस्टल में कमरा न मिलने से परेशान था। कई कोशिशों के बाद भी जब उसे हॉस्टल में कमरा नहीं मिला तो वह अपनी मां के साथ कॉलेज के बाहर रूम लेकर रहने लगा। इतना ही नहीं उसके प्रोजेक्ट रुक गए। प्रशासन के फैसलों ने ऋषिकेश को मानसिक रूप से तोड़ दिया। छात्रों का तर्क है कि इससे वे अपने क्लासमेट और कैंपस सपोर्ट नेटवर्क से और अलग हो गया। छात्रों की मांग है कि स्टूडेंट अफेयर्स ऑफिस के डीन, एसोसिएट डीन और फिजिक्स डिपार्टमेंट के हेड तुरंत इस्तीफा दें। छात्रों की मांग में ऋषिकेश के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देना भी शामिल है। ऋषिकेश की मानसिक स्थिति पिता की मौत के बाद बिगड़ी प्रदर्शन के बाद IIT दिल्ली ने 5 सदस्यीय बाहरी जांच समिति गठित की है। समिति छात्रों, शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों से बात करेगी। साथ ही संस्थान की प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल्स की समीक्षा करेगी। उसे करीब दो सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा गया है। छात्रों की बैठक हुई और ऋषिकेश की परिस्थितियों को लेकर कई प्रशासनिक सवाल सामने आए। छात्रों के अनुसार ऋषिकेश की मानसिक स्थिति पिता की मौत के बाद बिगड़ी थी। दोस्त ने बताया ऋषिकेश का हाल ऋषिकेश की मौत के बाद उसके दोस्त ने 17 मिनट का एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें उसने बताया कि उसे हॉस्टल नहीं दिया गया। लिस्ट से उसका नाम हटा दिया। 10-12 दिन से उसके मन में सुसाइड का ख्याल आ रहा था। ऋषिकेश की मां ने लगाए गंभीर आरोप मृतक की मां आशा पोद्दार ने IIT दिल्ली के हॉस्टल प्रशासन और डीन पर आरोप लगाए हैं। मां का कहना है कि हॉस्टल अलॉटमेंट में लगातार टालमटोल और डीन के अपमान से आहत होकर बेटे ने जान दी। घटना के बाद हमने दिल्ली पुलिस के किशनगढ़ थाना (दक्षिण-पश्चिम दिल्ली) में लिखित शिकायत दर्ज करवाई है। 20 जुलाई को ऋषिकेश यहां आया था और 22 अगस्त को आत्महत्या कर ली। IIT कैंपस में यह इस साल सुसाइड की दूसरी घटना इससे पहले इसी साल मार्च में 19 वर्षीय फर्स्ट-ईयर बीटेक छात्र ने IIT दिल्ली कैंपस के एक अपार्टमेंट में सुसाइड कर लिया था। छात्र को कमरे में पंखे से लटका पाया गया। अस्पताल में मेडिकल जांच के बाद उसे मृत घोषित किया गया। ऋषिकेश का सुसाइड कर लेना IIT दिल्ली कैंपस में सुसाइड की दूसरी घटना है। JNU ने भी किया विरोध प्रदर्शन IIT दिल्ली के अलावा 23 अगस्त को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) ने IIT दिल्ली के गेट नंबर 5 के बाहर प्रदर्शन किया। छात्र की मौत की जवाबदेही तय करने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने इसे IIT दिल्ली की उदासीनता का मामला बताते हुए कहा कि इस साल IIT दिल्ली में यह दूसरी छात्र मौत है। छात्रों ने संस्थान से छात्र मौतों के लंबे सिलसिले को गंभीरता से लेने की मांग की। इसके कारणों पर जवाब देने को भी अपनी मांग में शामिल किया। JNUSU महासचिव सुनील यादव ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि संस्थानों को छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। JNUSU ने इस मुद्दे को छात्रों के साथ भेदभाव और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के छात्रों की समस्याओं से भी जोड़ा तथा Rohith Act की मांग का उल्लेख किया। Rohith Act क्या है रोहित एक्ट या रोहित वेमुला एक्ट एक प्रस्तावित कानून है। इसका उद्देश्य कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव और उत्पीड़न को रोकना है। इसका नाम हैदराबाद विश्वविद्यालय के PhD रिसर्चर रोहित वेमुला के नाम पर रखा गया है। इसकी 17 जनवरी 2016 को आत्महत्या के बाद देशभर के कैंपस में जातिगत भेदभाव को लेकर आंदोलन हुए थे। ये खबर भी पढ़ें छात्रों के धरने से बदली खस्ता हाल स्कूल की हालत:जर्जर भवन गिरा, मरम्मत का काम शुरू; आशुतोष रांका ने शेयर किया वीडियो सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने अपने X अकाउंट पर जोधावास स्थित उस सरकारी स्कूल का वीडियो शेयर किया है जिसके खिलाफ कुछ दिन पहले ही स्कूल के छात्रों ने आंदोलन किया था। इस स्कूल का नाम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Jamie Lever Reacts to Viral AI Wedding Video With Yashvardhan Ahuja

Jamie Lever Reacts to Viral AI Wedding Video With Yashvardhan Ahuja

5 मिनट पहले कॉपी लिंक गोविंदा के बेटे के साथ जेमी की जो फेक AI तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें एक में जॉनी लीवर भी दिख रहे हैं। जॉनी लीवर की बेटी और एक्ट्रेस जेमी लीवर ने कहा कि उनकी शादी की खबरें फर्जी हैं। दरअसल, हाल ही में एक फर्जी AI वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें दावा किया गया कि जेमी और गोविंदा के बेटे यशवर्धन की शादी हो गई है। वीडियो में दोनों की शादी से जुड़े AI विजुअल भी दिखाए गए थे। जिसके बाद जेमी ने सोमवार को वीडियो शेयर कर कहा कि मेरी शादी के लिए मुझे पता है कि बहुत सारे लोग चिंतित हैं, सोच रहे हैं, हो रही है, कब हो रही है और इसके चलते कुछ AI, फेक वीडियो बनाए गए हैं, जो इंटरनेट पर सर्कुलेट हो रहे हैं। पहले मुझे काफी हंसी आई, मैंने एंजॉय किया। हम लोग कजिन्स आपस में एक-दूसरे को वीडियो भेज रहे थे और हम काफी हंस रहे थे, लेकिन अब ऐसा हो गया है कि बहुत सारे कॉल आने लग गए हैं और मुझे बधाई देने के लिए। जेमी ‘किस किसको प्यार करूं’, ‘हाउसफुल 4’, ‘भूत पुलिस’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। उन्होंने आगे कहा कि लेकिन ये सारे वीडियो और सारी जानकारी फेक है। अब इसकी वजह से दिक्कत होने लग गई है क्योंकि ऐसे कॉल आने लग गए हैं मुबारकबाद देने के लिए, बधाई देने के लिए कि जो असली रिश्ते आने वाले थे ना मेरे, जो आ रहे थे, वो भी आना बंद हो गए हैं। जेमी लीवर ने वीडियो में यशवर्धन आहूजा का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि जिस इंसान के साथ उनकी शादी की फर्जी खबरें उड़ाई जा रही हैं, वह उनके छोटे भाई जैसा है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों एक फिल्म पर साथ में काम कर रहे हैं। जेमी ने लोगों से फालतू के वीडियो न बनाने की अपील करते हुए कहा कि ये उनके लिए बहुत बुरा है। यशवर्धन बॉलीवुड में डेब्यू करने वाले हैं गोविंदा और सुनीता आहूजा के बेटे यशवर्धन आहूजा जल्द ही बॉलीवुड में कदम रखने जा रहे हैं। उनकी पहली फिल्म में वो अपनी मां सुनीता के साथ स्क्रीन शेयर करेंगे। फिल्म का नाम ‘हीरो की हॉररइन’ है, जिसे एकता कपूर, शोभा कपूर और अमर बुटाला प्रोड्यूस कर रहे हैं। यशवर्धन की फिल्म ‘हीरो की हॉररइन’ 7 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म का निर्देशन साजिद खान ने किया है। ‘हीरो की हॉररइन’ में यशवर्धन के साथ ‘लापता लेडीज’ फेम एक्ट्रेस नितांशी गोयल नजर आएंगी। जेमी लीवर, चंकी पांडे, बृजेंद्र काला और सिमरत कौर रंधावा भी फिल्म का हिस्सा हैं। …………… जेमी लीवर से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जेमी लीवर से कपड़े उतारने की मांग की गई थी:वीडियो कॉल पर ऑडिशन लिया जा रहा था, एक्ट्रेस ने आपबीती सुनाई जेमी लीवर ने एक ऑडिशन के नाम पर हुए अपने बुरे अनुभव को शेयर किया था। जेमी ने बताया था कि उनसे एक वीडियो कॉल पर कपड़े उतारने को कहा गया था। यह घटना तब की थी जब जेमी के पास कोई मैनेजर नहीं था और वह खुद ही काम के लिए संपर्क कर रही थीं। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Tapsee Pannu Gandhari Netflix Film Controversy

Tapsee Pannu Gandhari Netflix Film Controversy

4 मिनट पहले कॉपी लिंक नेटफ्लिक्स इंडिया और उसकी कंटेंट हेड मोनिका शेरगिल पर कहानी चोरी का आरोप लगा है। तापसी पन्नू स्टारर अपकमिंग फिल्म ‘गांधारी’ के 3 सितंबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने से पहले बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्क्रीनराइटर कल्याण बंदी ने नेटफ्लिक्स इंडिया और उसकी कंटेंट हेड मोनिका शेरगिल पर कहानी चोरी का आरोप लगाया है। कल्याण का दावा है कि उन्होंने साल 2019 में ‘गांधारी’ नाम की अपनी कहानी मोनिका शेरगिल को ईमेल की थी, जिसे तब रिजेक्ट कर दिया गया था। अब उसी टाइटल और कॉन्सेप्ट पर फिल्म बनाई जा रही है। कल्याण ने नेटफ्लिक्स को लीगल नोटिस भी भेजा है, लेकिन कंपनी ने 11 महीने से इसका कोई जवाब नहीं दिया है। तापसी पन्नू स्टारर फिल्म ‘गांधारी’ का पोस्टर। नेटफ्लिक्स हेड को ईमेल की थी कहानी मिड-डे की रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी मद्रास से पढ़ें कल्याण बंदी ने 2019 में ‘गांधारी’ नाम से एक कहानी लिखी थी और इसे स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन में रजिस्टर्ड कराया था। यह कहानी एक मां की है जो चाइल्ड ट्रैफिकिंग नेटवर्क से अपनी बच्ची को बचाती है। कल्याण ने बताया कि उन्होंने अप्रैल 2019 में लिंक्डइन के जरिए मोनिका शेरगिल से संपर्क किया था। उस समय मोनिका वूट में थीं। उनके मांगने पर कल्याण ने 8 पेज की कहानी और 2 पेज का सिनोप्सिस उन्हें भेजा था। मई 2019 में मोनिका ने यह कहकर कहानी रिजेक्ट कर दी कि यह उनके काम की नहीं है। नेटफ्लिक्स इंडिया की कंटेंट हेड मोनिका शेरगिल पर कहानी चोरी का आरोप लगा है। नेटफ्लिक्स के ऐलान के बाद प्रोड्यूसर्स ने खींचे हाथ कल्याण बंदी ने बताया कि कहानी रिजेक्ट होने के बाद वे दूसरे प्रोडक्शन हाउस से बात कर रहे थे। साल 2023 में बवेजा स्टूडियोज इसे थिएटर रिलीज के लिए डेवलप करने पर राजी हुआ। हालांकि, सितंबर 2024 में जब नेटफ्लिक्स इंडिया ने कनिका ढिल्लों की लिखी ‘गांधारी’ फिल्म का ऐलान किया, तो कल्याण हैरान रह गए। कल्याण का आरोप है कि नेटफ्लिक्स के इस ऐलान के बाद दिसंबर 2024 में प्रोड्यूसर्स ने उनसे चुपचाप प्रोजेक्ट वापस ले लिया। इससे उन्हें भारी आर्थिक और प्रोफेशनल नुकसान हुआ। लीगल नोटिस का जवाब नहीं दिया, कोर्ट जाने से पीछे हटे इंडिया टुडे से बातचीत में कल्याण बंदी ने बताया कि नेटफ्लिक्स से कोई जवाब न मिलने पर उन्होंने स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन (SWA) से सलाह ली। इसके बाद सितंबर 2025 में उन्होंने नेटफ्लिक्स और मोनिका शेरगिल को लीगल नोटिस भेजा, जिसमें 40 लाख रुपए मुआवजे और क्रेडिट की मांग की गई थी। कल्याण के मुताबिक, 11 महीने बीत जाने के बाद भी नेटफ्लिक्स ने नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि नेटफ्लिक्स की बड़ी लीगल टीम से लड़ाई लड़ना एक सरकारी कर्मचारी के रूप में आसान नहीं था, इसलिए वे कोर्ट नहीं जा सके और सोशल मीडिया पर मामला उठाया। गांधारी फिल्म की प्रोड्यूसर कनिका ढिल्लों । प्रोडक्शन हाउस ने आरोपों को बताया गलत दूसरी तरफ, फिल्म की राइटर और प्रोड्यूसर कनिका ढिल्लों के प्रोडक्शन हाउस ‘कथा पिक्चर्स’ ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कथा पिक्चर्स ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि ‘गांधारी’ एक पूरी तरह से ओरिजिनल प्रोजेक्ट है और इसकी कहानी व स्क्रीनप्ले कनिका ढिल्लों ने खुद लिखे हैं। मेकर्स ने मीडिया और दर्शकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रहे इन दावों को सच न मानें। वहीं, मिड-डे के संपर्क करने पर नेटफ्लिक्स इंडिया और मोनिका शेरगिल ने अब तक इस विवाद पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ये खबर भी पढ़ें लॉकअप तक क्यों पहुंचा नेटफ्लिक्स?:भारत के सबसे बड़े OTT की सबसे बड़ी बेचैनी, दबाव और बदलते बाजार की कहानी भारत में नेटफ्लिक्स के पास बड़े सितारे, बड़े बजट और वैश्विक पहचान है। फिर भी वह अमेजन प्राइम, जियोहॉटस्टार और दूसरे ओटीटी प्लेटफॉर्म जैसा सांस्कृतिक प्रभाव नहीं बना पाया। सवाल सिर्फ फ्लॉप शो का नहीं, दर्शकों से जुड़ाव का भी है। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

‘आप एक्टिंग छोड़ो, एयरफोर्स जॉइन करो’:अभय वर्मा को मिला यह कॉम्प्लीमेंट, बोले- इससे बड़ा सम्मान मेरे लिए शायद कुछ हो ही नहीं सकता

‘आप एक्टिंग छोड़ो, एयरफोर्स जॉइन करो’:अभय वर्मा को मिला यह कॉम्प्लीमेंट, बोले- इससे बड़ा सम्मान मेरे लिए शायद कुछ हो ही नहीं सकता

अभिनेता अभय वर्मा इन दिनों ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में भारतीय वायुसेना के अधिकारी आरएस धालीवाल का किरदार निभाकर चर्चा में हैं। इस भूमिका ने उन्हें अभिनेता के तौर पर चुनौती दी और देश के अनसंग हीरोज को करीब से समझने का मौका दिया। अभय बताते हैं कि एयरफोर्स स्टेशन में जवानों से मुलाकात, मिग-21 में बैठने और पूर्व एयर चीफ मार्शल धनोआ से मिलने के अनुभव उनके लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक रहे। धालीवाल के परिवार से मुलाकात को वह अपने करियर का खास सम्मान मानते हैं। उन्होंने युद्ध, परिवार, वर्दी और देश के लिए बलिदान पर भी बात की। सवाल: ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में काम करने का आपकी जिंदगी पर कितना असर पड़ा? जवाब: मेरे लिए एक्टिंग का एक ही फंडा है कि मैं हर दिन एक बेहतर इंसान बनूं। पिछले किरदार से जितनी खूबियां सीखूं, उन्हें अगले प्रोजेक्ट में इस्तेमाल करूं और एक बेहतर एक्टर बनूं। ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में हमारे देश के हीरोज को निभाने का मौका मिला। इसके साथ बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी महसूस हुई। आज हम अपने परिवार के साथ चैन से सोते हैं, देश पर गर्व करते हैं और हमारे युवा सेना में जाने का सपना देखते हैं, तो इसमें इन अनसंग हीरोज का बहुत बड़ा योगदान है। एक्टर के तौर पर ऐसा किरदार मिलना मेरे लिए किसी एथलीट के ओलंपिक के लिए चुने जाने जैसा है। सवाल: आपका जन्म 27 जुलाई 1998 को हुआ और कारगिल विजय दिवस 26 जुलाई 1999 को था। जब आपने कारगिल और ऑपरेशन सफेद सागर को करीब से समझा तो क्या महसूस हुआ? जवाब: जब कारगिल युद्ध हुआ, तब मैं सिर्फ एक साल का था। उस समय मुझे कुछ पता नहीं था, लेकिन ‘कारगिल’ शब्द बहुत मशहूर हो गया था। बाद में किताबों के जरिए इसके बारे में जाना। ‘ऑपरेशन विजय’ के बारे में तो हम बहुत सुनते आए हैं, लेकिन ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की कहानी हमारे सामने नहीं आई थी। जब पहली बार डायरेक्टर ने इसके बारे में बताया तो मैंने उनसे पूछा- ‘सर, ये सच में हुआ था?’ सवाल बचकाना था, लेकिन कहानी इतनी अविश्वसनीय थी कि मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि ऐसा हुआ भी था और हमें पता भी नहीं। सबसे खास बात यह थी कि मैं पहले से अपने हीरो के बारे में सोचकर नहीं आया था। किरदार निभाते-निभाते आरएस धालीवाल मेरे हीरो बन गए। उनकी बहादुरी, जज्बा और साहस ने मुझे बहुत प्रभावित किया। सवाल: एयरफोर्स के लोगों से मिलने पर आपको अपने किरदार की अहमियत कैसे महसूस हुई? जवाब: जब मैं एयरफोर्स स्टेशन में लोगों से मिला और बताया कि मैं आरएस धालीवाल का किरदार निभा रहा हूं, तो उनकी आंखों में अलग चमक आ गई। उनकी छाती गर्व से चौड़ी हो गई। एक व्यक्ति ने दोबारा मेरा हाथ मिलाकर कहा, ‘आप धाली को प्ले कर रहे हैं?’ हाल ही में रात में पुलिस अल्कोहल चेक कर रही थी। मैंने शीशा नीचे किया तो हवलदार ने मुझे दो बार देखा और पूछा कि आपने धाली का किरदार निभाया है ना? उन्होंने जाते-जाते दोबारा हाथ मिलाया। हमारे हीरोज के लिए लोगों के मन में जो सम्मान है, उसे महसूस करना मेरे लिए खास था। सवाल: आरएस धालीवाल बहुत कम बोलने वाले, आत्मविश्वासी और निडर अधिकारी थे। उन्हें निभाने की तैयारी कैसे की? जवाब: सबसे पहले तो मुझे डर लग रहा था, क्योंकि वह बहुत कम बोलते थे और मैं बहुत बोलता हूं। यही मेरी पहली चुनौती थी। हालांकि असली तैयारी हमारे डायरेक्टर और राइटर ने कराई। मुझे लगता है कि हर इंसान जो वर्दी पहनता है, वह भगवान का भेजा हुआ इंसान है। वह हमें बचाने के लिए वर्दी पहनता है, बिना कुछ मांगे अपना काम करता है। यह गुण मैंने अपनी मां और इन हीरोज में देखा है। वे कुछ कर जाते हैं, लेकिन उसके बारे में बताते नहीं हैं। मेडल नहीं मांगते। बस अपना काम करते हैं। हमारे शो में भी एक लाइन है कि वर्दी ऐसी चीज नहीं है जिसे कोई राह चलता आदमी खरीदकर पहन ले। जिसे इसे पहनने का मौका मिलता है, वह आम इंसान से ऊपर होता है। मैं आखिरी दिन तक खुद को तैयार करता रहा, लेकिन मुझे लगता है कि ऐसे लोगों जैसा पूरी तरह बनना संभव नहीं है। हम सिर्फ उनके जैसा बनने की कोशिश कर सकते हैं। सवाल: इस प्रोजेक्ट का ऑडिशन कैसे हुआ? जवाब: मैंने पहले ऑडिशन दिया था। वह ऑडिशन मुकेश छाबड़ा सर के ऑफिस में हुआ था। वह हर प्रोजेक्ट में कोशिश करते हैं कि मैं ऑडिशन दूं। मुझे यह बात अच्छी लगती है कि इंडस्ट्री में कुछ काम करने के बाद भी ऑडिशन देने में मुझे कोई दिक्कत नहीं होती। ऑडिशन पसंद आने के बाद जब मैं डायरेक्टर से मिला तो उन्होंने मुझे ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के बारे में विस्तार से बताया। मैं हैरान था कि ऐसा कुछ हमारे इतिहास में हुआ है और हमें इसके बारे में ज्यादा पता नहीं है। मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी यह थी कि मुझे वर्दी पहनने और एक ऐसे इंसान को निभाने का मौका मिलेगा, जो आने वाली पीढ़ी के लिए उदाहरण है। सवाल: आपको दर्शकों से सबसे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या मिला? जवाब: एक व्यक्ति ने मुझे डीएम किया और लिखा- ‘आप एक्टिंग छोड़ो, एयरफोर्स जॉइन कर लो।’ इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट मेरे लिए कुछ नहीं हो सकता। इसके अलावा एयर चीफ एपी सिंह जी मुझसे मिले और उन्होंने कहा, ‘यार, तू लग रहा है। तुमने कमाल का काम किया है।’ यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। एयरफोर्स के सबसे बड़े अधिकारी जब आपके काम की तारीफ करें और आशीर्वाद दें तो उससे बड़ा सम्मान क्या हो सकता है। सवाल: धालीवाल की बेटी से मुलाकात कैसी रही? जवाब: स्क्रीनिंग के दौरान उनकी बेटी से मुलाकात हुई। वह दो मिनट की भावुक मुलाकात थी। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि मुझसे क्या कहें और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उनसे क्या कहूं। ऐसा लग रहा था कि वह मेरी आंखों में अपने पिता की झलक देख रही हैं और मैं उनकी आंखों में धालीवाल साहब का एक हिस्सा देख रहा था। हम दोनों के पास शब्द कम पड़ गए थे। बस यही इच्छा थी कि जहां भी धालीवाल

‘आप एक्टिंग छोड़ो, एयरफोर्स जॉइन करो’:अभय वर्मा को मिला यह कॉम्प्लीमेंट, बोले- इससे बड़ा सम्मान मेरे लिए शायद कुछ हो ही नहीं सकता

‘आप एक्टिंग छोड़ो, एयरफोर्स जॉइन करो’:अभय वर्मा को मिला यह कॉम्प्लीमेंट, बोले- इससे बड़ा सम्मान मेरे लिए शायद कुछ हो ही नहीं सकता

अभिनेता अभय वर्मा इन दिनों ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में भारतीय वायुसेना के अधिकारी आरएस धालीवाल का किरदार निभाकर चर्चा में हैं। इस भूमिका ने उन्हें अभिनेता के तौर पर चुनौती दी और देश के अनसंग हीरोज को करीब से समझने का मौका दिया। अभय बताते हैं कि एयरफोर्स स्टेशन में जवानों से मुलाकात, मिग-21 में बैठने और पूर्व एयर चीफ मार्शल धनोआ से मिलने के अनुभव उनके लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक रहे। धालीवाल के परिवार से मुलाकात को वह अपने करियर का खास सम्मान मानते हैं। उन्होंने युद्ध, परिवार, वर्दी और देश के लिए बलिदान पर भी बात की। सवाल: ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में काम करने का आपकी जिंदगी पर कितना असर पड़ा? जवाब: मेरे लिए एक्टिंग का एक ही फंडा है कि मैं हर दिन एक बेहतर इंसान बनूं। पिछले किरदार से जितनी खूबियां सीखूं, उन्हें अगले प्रोजेक्ट में इस्तेमाल करूं और एक बेहतर एक्टर बनूं। ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में हमारे देश के हीरोज को निभाने का मौका मिला। इसके साथ बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी महसूस हुई। आज हम अपने परिवार के साथ चैन से सोते हैं, देश पर गर्व करते हैं और हमारे युवा सेना में जाने का सपना देखते हैं, तो इसमें इन अनसंग हीरोज का बहुत बड़ा योगदान है। एक्टर के तौर पर ऐसा किरदार मिलना मेरे लिए किसी एथलीट के ओलंपिक के लिए चुने जाने जैसा है। सवाल: आपका जन्म 27 जुलाई 1998 को हुआ और कारगिल विजय दिवस 26 जुलाई 1999 को था। जब आपने कारगिल और ऑपरेशन सफेद सागर को करीब से समझा तो क्या महसूस हुआ? जवाब: जब कारगिल युद्ध हुआ, तब मैं सिर्फ एक साल का था। उस समय मुझे कुछ पता नहीं था, लेकिन ‘कारगिल’ शब्द बहुत मशहूर हो गया था। बाद में किताबों के जरिए इसके बारे में जाना। ‘ऑपरेशन विजय’ के बारे में तो हम बहुत सुनते आए हैं, लेकिन ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की कहानी हमारे सामने नहीं आई थी। जब पहली बार डायरेक्टर ने इसके बारे में बताया तो मैंने उनसे पूछा- ‘सर, ये सच में हुआ था?’ सवाल बचकाना था, लेकिन कहानी इतनी अविश्वसनीय थी कि मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि ऐसा हुआ भी था और हमें पता भी नहीं। सबसे खास बात यह थी कि मैं पहले से अपने हीरो के बारे में सोचकर नहीं आया था। किरदार निभाते-निभाते आरएस धालीवाल मेरे हीरो बन गए। उनकी बहादुरी, जज्बा और साहस ने मुझे बहुत प्रभावित किया। सवाल: एयरफोर्स के लोगों से मिलने पर आपको अपने किरदार की अहमियत कैसे महसूस हुई? जवाब: जब मैं एयरफोर्स स्टेशन में लोगों से मिला और बताया कि मैं आरएस धालीवाल का किरदार निभा रहा हूं, तो उनकी आंखों में अलग चमक आ गई। उनकी छाती गर्व से चौड़ी हो गई। एक व्यक्ति ने दोबारा मेरा हाथ मिलाकर कहा, ‘आप धाली को प्ले कर रहे हैं?’ हाल ही में रात में पुलिस अल्कोहल चेक कर रही थी। मैंने शीशा नीचे किया तो हवलदार ने मुझे दो बार देखा और पूछा कि आपने धाली का किरदार निभाया है ना? उन्होंने जाते-जाते दोबारा हाथ मिलाया। हमारे हीरोज के लिए लोगों के मन में जो सम्मान है, उसे महसूस करना मेरे लिए खास था। सवाल: आरएस धालीवाल बहुत कम बोलने वाले, आत्मविश्वासी और निडर अधिकारी थे। उन्हें निभाने की तैयारी कैसे की? जवाब: सबसे पहले तो मुझे डर लग रहा था, क्योंकि वह बहुत कम बोलते थे और मैं बहुत बोलता हूं। यही मेरी पहली चुनौती थी। हालांकि असली तैयारी हमारे डायरेक्टर और राइटर ने कराई। मुझे लगता है कि हर इंसान जो वर्दी पहनता है, वह भगवान का भेजा हुआ इंसान है। वह हमें बचाने के लिए वर्दी पहनता है, बिना कुछ मांगे अपना काम करता है। यह गुण मैंने अपनी मां और इन हीरोज में देखा है। वे कुछ कर जाते हैं, लेकिन उसके बारे में बताते नहीं हैं। मेडल नहीं मांगते। बस अपना काम करते हैं। हमारे शो में भी एक लाइन है कि वर्दी ऐसी चीज नहीं है जिसे कोई राह चलता आदमी खरीदकर पहन ले। जिसे इसे पहनने का मौका मिलता है, वह आम इंसान से ऊपर होता है। मैं आखिरी दिन तक खुद को तैयार करता रहा, लेकिन मुझे लगता है कि ऐसे लोगों जैसा पूरी तरह बनना संभव नहीं है। हम सिर्फ उनके जैसा बनने की कोशिश कर सकते हैं। सवाल: इस प्रोजेक्ट का ऑडिशन कैसे हुआ? जवाब: मैंने पहले ऑडिशन दिया था। वह ऑडिशन मुकेश छाबड़ा सर के ऑफिस में हुआ था। वह हर प्रोजेक्ट में कोशिश करते हैं कि मैं ऑडिशन दूं। मुझे यह बात अच्छी लगती है कि इंडस्ट्री में कुछ काम करने के बाद भी ऑडिशन देने में मुझे कोई दिक्कत नहीं होती। ऑडिशन पसंद आने के बाद जब मैं डायरेक्टर से मिला तो उन्होंने मुझे ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के बारे में विस्तार से बताया। मैं हैरान था कि ऐसा कुछ हमारे इतिहास में हुआ है और हमें इसके बारे में ज्यादा पता नहीं है। मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी यह थी कि मुझे वर्दी पहनने और एक ऐसे इंसान को निभाने का मौका मिलेगा, जो आने वाली पीढ़ी के लिए उदाहरण है। सवाल: आपको दर्शकों से सबसे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या मिला? जवाब: एक व्यक्ति ने मुझे डीएम किया और लिखा- ‘आप एक्टिंग छोड़ो, एयरफोर्स जॉइन कर लो।’ इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट मेरे लिए कुछ नहीं हो सकता। इसके अलावा एयर चीफ एपी सिंह जी मुझसे मिले और उन्होंने कहा, ‘यार, तू लग रहा है। तुमने कमाल का काम किया है।’ यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। एयरफोर्स के सबसे बड़े अधिकारी जब आपके काम की तारीफ करें और आशीर्वाद दें तो उससे बड़ा सम्मान क्या हो सकता है। सवाल: धालीवाल की बेटी से मुलाकात कैसी रही? जवाब: स्क्रीनिंग के दौरान उनकी बेटी से मुलाकात हुई। वह दो मिनट की भावुक मुलाकात थी। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि मुझसे क्या कहें और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उनसे क्या कहूं। ऐसा लग रहा था कि वह मेरी आंखों में अपने पिता की झलक देख रही हैं और मैं उनकी आंखों में धालीवाल साहब का एक हिस्सा देख रहा था। हम दोनों के पास शब्द कम पड़ गए थे। बस यही इच्छा थी कि जहां भी धालीवाल

फ्रांस में टॉरनेडो से 41 लोग घायल:300 घरों को नुकसान, छतें उड़ीं; ट्रेन-सड़क और हवाई सेवाओं पर भी असर

फ्रांस में टॉरनेडो से 41 लोग घायल:300 घरों को नुकसान, छतें उड़ीं; ट्रेन-सड़क और हवाई सेवाओं पर भी असर

फ्रांस के एक गांव में सोमवार को टॉरनेडो आया। इसमें 41 लोग घायल हुए और सैकड़ों घरों को नुकसान पहुंचा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टॉरनेडो से सबसे ज्यादा नुकसान करीब 1,000 आबादी वाले पोमास गांव में हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, यहां करीब 300 घरों को नुकसान पहुंचा और कुछ घरों की छतें पूरी तरह उड़ गईं। परिवहन मंत्री फिलिपे तबारो ने बताया कि ट्रेनें लेट हुईं, सड़कें बंद करनी पड़ीं और हवाई अड्डों पर देरी और उड़ानें रद्द हुईं। देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से के कई इलाकों में तूफान को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया था। टॉरनेडो से जुड़ी तस्वीरें… 117 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली राष्ट्रीय मौसम सेवा मेटेओ-फ्रांस ने बताया कि पास के अरकेट्स-एन-वाल गांव में हवा की रफ्तार 117.48 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई थी। देश के उत्तर में स्थित पेरिस के हवाई अड्डे पर भी देरी और उड़ानें रद्द होने की जानकारी दी गई। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि मौके पर 120 से ज्यादा बचावकर्मियों को तैनात किया गया। घायलों में से 15 लोगों को अस्पताल ले जाया गया। घायलों में एक गर्भवती महिला भी शामिल है। उसके पति ने एएफपी को बताया कि घर गिरने से महिला घायल हुई। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

Kriti Sanon Rakshabandhan Ad Controversy

Kriti Sanon Rakshabandhan Ad Controversy

कुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक कृति सेनन हाल ही में रक्षाबंधन के लिए बने एक ज्वेलरी ब्रांड के विज्ञापन में नजर आई थीं। विज्ञापन में उन्होंने इंडो-वेस्टर्न कपड़े पहने थे, जिसमें ब्रालेट जैसा ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थी। इस लुक को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया। कुछ यूजर्स ने कहा कि पारंपरिक त्योहार पर बने विज्ञापन में यह आउटफिट सही नहीं है। अब इस पर कंगना रनोट का भी रिएक्शन सामने आया है। हालांकि, उन्होंने कृति सेनन का नाम नहीं लिया। कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा- “महिला होने के लिए यह शानदार समय है। हमारी अलमारियां कई तरह के कपड़ों से भरी हैं और आज की महिला ग्लोबल महिला है। कॉकटेल ड्रेस से लहंगा चोली, जींस से साड़ी और बिकिनी से सलवार-कमीज तक, आज हमारे पास कपड़ों के इतने विकल्प हैं। फिर आप अपने भाई को बिकिनी या अंडरगारमेंट्स में राखी क्यों बांधेंगी? आपके पास स्टाइलिंग के इतने विकल्प कहां गए? हा हा, यह विज्ञापन जानबूझकर अजीब बनाया गया लगता है।” कृति सेनन का विज्ञापन विवादों में घिरा बता दें कि कृति सेनन अपने एक नए एडवर्टाइजमेंट को लेकर विवादों में घिर गई हैं। रक्षाबंधन की थीम पर बने इस एड में कृति अपने ऑन-स्क्रीन भाई को राखी बांधती नजर आ रही हैं। हालांकि, एड में उनके रिवीलिंग ड्रेस (ब्रालेट आउटफिट) को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराजगी जताई। एडवर्टाइजमेंट में कृति ब्रालेट आउटफिट पहने दिखाई दीं। ब्रालेट ब्लाउज पहन राखी बांधने पर जताई नाराजगी जीवा (GIVA) ज्वेलरी ब्रांड के इस एडवर्टाइजमेंट में कृति सेनन ने केप के साथ ब्रालेट स्टाइल ब्लाउज और ड्रेप्ड स्कर्ट पहना हुआ है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोगों ने उनके कपड़ों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। यूजर्स का कहना है कि त्योहार के हिसाब से कपड़े पहनना कॉमन सेंस की बात है। विवाद बढ़ने के दौरान कई यूजर्स ने इस मामले में धर्म की तुलना भी शुरू कर दी। पूरी खबर यहां पढ़ें… कंगना ने अभिजीत दीपके पर तंज कसा वहीं, कंगना ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के फाउंडर अभिजीत दीपके पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया। इस रील में पहले अभिजीत दीपके को अंग्रेजी में बयान देते हुए दिखाया गया, इसके बाद कंगना रनोट की अंग्रेजी बोलते हुए क्लिप दिखाई गई। वीडियो के कैप्शन में दोनों के अंग्रेजी बोलने के लेवल की तुलना की गई। वीडियो में लिखा था कि एक तरफ 12वीं पास कंगना हैं, जबकि दूसरी तरफ बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़े सीजेपी दीपके हैं। वीडियो में कैप्शन में लिखा था कि एक में आग है, जबकि दूसरे को रीबूट की जरूरत है। बता दें कि वीडियो में कंगना ने बताया था कि करियर की शुरुआत में अंग्रेजी को लेकर उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा था और ‘कॉफी विद करण’ में सोनम कपूर ने उनका मजाक उड़ाया था। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उन्होंने शालीनता और आत्मविश्वास बनाए रखा। …………. कंगना रनोट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… कंगना रनोट ने आलोचकों पर साधा निशाना:बोलीं- आशुतोष राणा, सोनू सूद, तापसी और राखी मेरी तरह 1% भी सफल नहीं हुए, उनका ज्ञान नहीं सुनूंगी भाजपा सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने आलोचकों पर निशाना साधा। उन्होंने आशुतोष राणा, सोनू सूद, राखी सावंत और तापसी पन्नू का नाम लेकर कहा कि अगर लोग उनकी तरह एक प्रतिशत भी सफल नहीं हुए हैं तो वह उनका ज्ञान नहीं सुनेंगी। कंगना ने बाबा रामदेव पर भी मर्यादा लांघने का आरोप लगाया। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔