Friday, 09 Oct 2026 | 09:35 AM

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मोहन भागवत न्यूयॉर्क पहुंचे, तीन देशों के दौरे की शुरुआत:अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे; RSS के 100 साल पूरे होने पर कार्यक्रम में शामिल होंगे

मोहन भागवत न्यूयॉर्क पहुंचे, तीन देशों के दौरे की शुरुआत:अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे; RSS के 100 साल पूरे होने पर कार्यक्रम में शामिल होंगे

RSS प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार को न्यूयॉर्क पहुंचे। यह उनके तीन देशों के दौरे का पहला पड़ाव है। वह अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे। यह दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के मौके पर हो रहा है। उन्हें विदेशों में मौजूद भारतीय समुदाय के संगठनों ने आमंत्रित किया है। न्यूयॉर्क पहुंचने पर मोहन भागवत का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। दौरे के दौरान वह भारतीय मूल के लोगों और स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। RSS के मुताबिक, संगठन के 100 साल पूरे होने के मौके पर विदेशों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में कार्यक्रम मोहन भागवत शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसका आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) फोरम कर रहा है। कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। यह कार्यक्रम रक्षाबंधन के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें एकता, नागरिक जिम्मेदारी और वैश्विक सद्भाव का संदेश दिया जाएगा। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी और अलग-अलग धर्मों से जुड़े प्रमुख वक्ता शामिल होंगे। 25 अगस्त से शुरू हुआ तीन देशों का दौरा RSS के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया था कि मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर रहेंगे। यह दौरा विदेशों में मौजूद स्थानीय संगठनों और संस्थाओं के निमंत्रण पर हो रहा है। दौरे का समय RSS के शताब्दी वर्ष से भी जुड़ा है। RSS पर USCIRF की टिप्पणी से विवाद भागवत के दौरे से पहले RSS को लेकर अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की टिप्पणियों पर भारत ने आपत्ति जताई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने USCIRF को ‘पक्षपाती संस्था’ बताया था। उन्होंने कहा था कि आयोग भारत को लेकर बार-बार गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है। USCIRF ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताते हुए RSS समेत कुछ संगठनों और लोगों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। भारत ने आयोग की रिपोर्ट को ‘पक्षपातपूर्ण और चुनिंदा तथ्यों पर आधारित’ बताते हुए खारिज कर दिया था।

इमरान के बेटे का दावा-पाकिस्तान तानाशाही की ओर बढ़ रहा:पिता के साथ जेल में बुरे बर्ताव का आरोप लगाया, कहा- सेना का इसमें बड़ा रोल

इमरान के बेटे का दावा-पाकिस्तान तानाशाही की ओर बढ़ रहा:पिता के साथ जेल में बुरे बर्ताव का आरोप लगाया, कहा- सेना का इसमें बड़ा रोल

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटे सुलैमान ईसा खान ने दावा किया है कि पाकिस्तान तानाशाही की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने अपने पिता के लंबे समय से जेल में होने को इसका उदाहरण बताया। न्यूज एजेंसी ANI के साथ वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुलैमान ने कहा कि पिछले कई साल से उनके पिता के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है और इसमें सेना की बड़ी भूमिका है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चर्चा की गई। सुलैमान के साथ उनके भाई कासिम खान, अंतरराष्ट्रीय वकील जेरेड जेनसर और अंतरराष्ट्रीय मामलों तथा मीडिया के सलाहकार सैयद बुखारी भी शामिल हुए। वकील का आरोप- जनरल मुनीर मनमाना शासन चला रहे इमरान खान के अंतरराष्ट्रीय वकील जेरेड जेनसर ने पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने देश के सैन्य नेतृत्व को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और सेना प्रमुख असीम मुनीर पर ‘ऑथॉरिटेरियनिज्म’ यानी दमनकारी शासन का आरोप लगाया। जेनसर ने कहा, इमरान खान और उनकी पत्नी के खिलाफ जिस तरह कार्रवाई हो रही है, वह किसी लोकतांत्रिक सरकार के तरीके जैसी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इमरान खान के खिलाफ सैकड़ों मामले मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर दर्ज किए गए हैं। यह मामला अब सिर्फ उनकी जेल तक सीमित नहीं है। जेनसर के मुताबिक, उनकी गिरफ्तारी उन लोगों के लिए भी एक चेतावनी है, जो पाकिस्तान में सत्ता को चुनौती देने की कोशिश कर सकते हैं। जेनसर ने आगे कहा, उन्हें जेल में रखकर शासन पाकिस्तान के लोगों को साफ संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उन्हें सत्ता के खिलाफ खड़ा होने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जेनसर ने कहा, “कल्पना कीजिए कि अगर हम इमरान खान के साथ ऐसा कर सकते हैं, जिन्हें पूरी दुनिया जानती है, तो उस व्यक्ति के साथ क्या किया जा सकता है, जिसे दुनिया नहीं जानती?” इमरान खान के इलाज को लेकर भी विवाद इमरान खान की सेहत और जेल में उनके इलाज को लेकर भी विवाद बना हुआ है। 18 अगस्त को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि इमरान खान को इलाज के लिए 48 घंटे के भीतर अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि इमरान खान की जांच एक स्वतंत्र मेडिकल पैनल करे। इसमें हृदय रोग विशेषज्ञ, आंखों के डॉक्टर, सामान्य चिकित्सक और उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान को शामिल किया जाना था। हालांकि, 20 अगस्त को अधिकारियों ने इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने के बजाय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) पहुंचाया। वहां कई घंटों तक उनकी मेडिकल जांच की गई। इसके बाद उन्हें चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित कर वापस अदियाला जेल भेज दिया गया। इमरान खान की टीम का आरोप है कि जेल से शिफा अस्पताल की दिशा में एक ‘डमी काफिला’ भेजा गया, ताकि ऐसा लगे कि इमरान खान को वहां ले जाया जा रहा है। टीम ने यह भी दावा किया कि उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान शिफा अस्पताल में उनका इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें इमरान खान की जांच करने का मौका नहीं दिया गया। खबर अपडेट हो रही है…

डायरेक्टर कुकू कोहली का 77 साल की उम्र में निधन:हार्ट अटैक आया था, फिल्म फूल और कांटे से अजय देवगन को लॉन्च किया था

डायरेक्टर कुकू कोहली का 77 साल की उम्र में निधन:हार्ट अटैक आया था, फिल्म फूल और कांटे से अजय देवगन को लॉन्च किया था

वेटरन फिल्ममेकर कुकू कोहली का 77 साल की उम्र में मंगलवार को निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में आखिरी सांस ली। कुकू कोहली को हार्ट अटैक आया था। फिल्ममेकर अशोक पंडित ने इसकी पुष्टि की। कुकू कोहली ने अजय देवगन को फिल्म फूल और कांटे से फिल्म इंडस्ट्री में लॉन्च किया था। यह फिल्म सुपरहिट रही और अजय देवगन को पहचान मिली। इसके बाद कुकू कोहली ने कोहराम, सुहाग, हकीकत और जुल्मी जैसी फिल्में बनाईं। (खबर अपडेट की जा रही है)

Salman Khan Extortion Threat Case

Salman Khan Extortion Threat Case

4 मिनट पहले कॉपी लिंक मुंबई पुलिस ने एक्टर सलमान खान को दी गई रंगदारी की धमकी मामले में फर्जी साजिश का खुलासा किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने किसी गैंगस्टर गैंग के नाम पर झूठी वॉट्सऐप चैट और फर्जी पहचान बनाई थी ताकि सलमान खान से पैसे ऐंठे जा सकें। आरोपी की ओर से किए गए दावों और सीसीटीवी फुटेज में अंतर मिलने के बाद पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, जिसमें उसने पूरी कहानी गढ़ने की बात कबूल कर ली है। यह जानकारी न्यूज एजेंसी IANS की रिपोर्ट से सामने आई है। बांद्रा सी-फ्रंट से बरामद किए दो मोबाइल फोन पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने इलेक्ट्रॉनिक तरीकों का इस्तेमाल करके फर्जी वॉट्सऐप चैट तैयार की थीं। उसने डराने की नीयत से खुद को किसी गैंगस्टर गैंग का हिस्सा दिखाया था। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने बांद्रा सी-फ्रंट के पास छिपाकर रखे गए दो मोबाइल फोन बरामद कर लिए हैं। इसके अलावा गवाहों की मौजूदगी में फर्जी वॉट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट भी जब्त किए गए हैं। सलमान को महाराष्ट्र सरकार की तरफ से Y+ कैटेगरी की सुरक्षा मिली हुई है। 11 जवान हर समय साथ रहते हैं। पिछले साल अप्रैल में मिली थी मर्डर की धमकी सलमान खान को पिछले साल अप्रैल में जान से मारने की धमकी मिली थी। मुंबई के वर्ली स्थित ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में अज्ञात शख्स ने वॉट्सएप मैसेज कर सलमान खान की कार को बम से उड़ाने की बात कही। देर रात भेजे गए इस मैसेज में लिखा है- हम सलमान खान को घर में घुसकर मारेंगे। पुलिस ने इस मामले में गुजरात से एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। बिहार से फोनपे पर मंगाए गए थे 1.30 लाख रुपए जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी को बिहार के सीवान से फोनपे के जरिए लगभग 1.30 लाख रुपए मिले थे। यह रकम उसने बांद्रा में एक मनी ट्रांसफर एजेंट से कैश में हासिल की थी। मुंबई पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 336(3), 351(3), 353(2), 271, 340 और 248 के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 66(C) और 66(D) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि उसने अकेले यह काम किया या इसमें कोई और भी शामिल था। सलमान के गैलेक्सी अपार्टमेंट पर हो चुकी फायरिंग इससे पहले 14 अप्रैल 2024 को सुबह करीब 5 बजे सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट पर 7.6 बोर की पिस्टल से 4 राउंड फायरिंग हुई थी। इस समय सलमान खान घर में ही मौजूद थे। 14 अप्रैल 2024 को सुबह करीब 5 बजे सलमान के गैलेक्सी अपार्टमेंट पर फायरिंग हुई थी। CCTV फुटेज में घटनास्थल से भागते हुए बाइक सवार दिखे थे। सलमान को Y+ कैटेगरी की सुरक्षा, 24 घंटे 11 जवान साथ 2023 में लॉरेंस गैंग से धमकी मिलने के बाद ही सलमान की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। उन्हें महाराष्ट्र सरकार की तरफ से Y+ कैटेगरी की सुरक्षा मिली हुई है। 11 जवान हर समय साथ रहते हैं, इसमें एक या दो कमांडो और 2 PSO भी शामिल होते हैं। सलमान की गाड़ी के आगे और पीछे एस्कॉर्ट करने के लिए दो गाड़ियां हमेशा रहती हैं। इसके साथ-साथ सलमान की गाड़ी भी पूरी तरह बुलेटप्रूफ है। गैलेक्सी अपार्टमेंट पर हुई फायरिंग के बाद जनवरी में सलमान के अपार्टमेंट की बालकनी बुलेटप्रूफ कर दी गई है। साथ ही हाई रेजोल्यूशन कैमरे भी चारों तरफ लगाए गए हैं। ‘बिग बॉस 20’ को होस्ट कर रहे सलमान ‘बिग बॉस 20’ की मेजबानी की तैयारी में सलमान वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान खान रियलिटी शो ‘बिग बॉस 20’ को होस्ट करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। शो के नए सीजन के बारे में बात करते हुए सलमान ने कहा कि हर सीजन में नए गेम और ट्विस्ट होते हैं, लेकिन इस बार शो के केंद्र में एक रहस्य है। ये शो 6 सितंबर से शुरू हो रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Bangladesh Mecca Defence Pact Strategy; India Vs Islamic NATO | Pakistan Saudi Turkey

Bangladesh Mecca Defence Pact Strategy; India Vs Islamic NATO | Pakistan Saudi Turkey

18 दिन पहले सऊदी, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच मक्का में एक डिफेंस एग्रीमेंट हुआ। इसमें NATO की तरह करार है कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। अब इसमें कुछ और इस्लामिक देशों के शामिल होने की अटकलें लग रही हैं। इनमें सबसे बड़ा . क्या वाकई ‘इस्लामिक NATO’ जॉइन करेगा बांग्लादेश, ये भारत के लिए कितना बड़ा खतरा और सरकार कैसे काउंटर करेगी; आज के एक्सप्लेनर में जानेंगे… सवाल-1: मक्का एग्रीमेंट में बांग्लादेश के शामिल होने की चर्चा क्यों उठी? जवाबः कोई औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन बांग्लादेश के दो मंत्रियों ने बयानों से चर्चा शुरू हुई… बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर 21 अगस्त को बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री बने। उसी रोज उन्होंने कहा, ‘सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के फ्रेमवर्क में शामिल होने को लेकर बांग्लादेश का रुख पॉजिटिव है। ये फैसला बांग्लादेश अपने हितों को ध्यान में रखकर लेगा।’ 21 अगस्त को ही दूसरी विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने भी कहा, ‘हमारा किसी भी पैक्ट में शामिल होना इस बात से तय होगा कि इससे बांग्लादेश के हित सुरक्षित रहेंगे या नहीं। हुमायूं कबीर ने कहा, ‘बांग्लादेश की अब अपनी पहचान है। मिडिल ईस्ट और इसके हिस्सेदार इस्लामिक देश बांग्लादेश की लीडरशिप को मक्का पैक्ट में शामिल होने का न्योता दे रहे हैं। हुमायूं कबीर ने ये भी बताया कि पीएम तारिक रहमान को सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने राजधानी रियाद आने का न्योता दिया है। सवाल-2: तो बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होगा या नहीं? जवाब: सीनियर डिफेंस जर्नलिस्ट मनोज जोशी कहते हैं, ‘अगर ये सुन्नी देशों के बीच का पैक्ट है, तो बांग्लादेश भी इसमें शामिल हो सकता है। अगर इसका मकसद मिडिल ईस्ट की रीजनल सिक्योरिटी है, तो इसमें बांग्लादेश की कोई खास अहमियत नहीं है।’ स्ट्रैटेजिक एनालिस्ट ब्रह्म चेलानी भी कहते हैं, ‘ये पैक्ट 4 सुन्नी देशों का गठबंधन बन सकता है। सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी, BNP के इस्लामिक ताकतों के साथ गहरे रिश्ते रहे हैं। रहमान की विदेश नीति उनकी पार्टी की उसी पुरानी स्ट्रैटेजी की तरफ जाती दिख रही है।’ दरअसल, बांग्लादेश में इस वक्त BNP की सरकार है, जो अपने कट्टर सुन्नी इस्लामिक रुख के लिए जानी जाती है। बीते कुछ समय से ये कट्टर रुख बढ़ रहा है, इसके कुछ संकेत हैं… हुमायूं कबीर ने समझौते के बारे में बयान देते हुए कहा कि मक्का बांग्लादेश के लोगों के दिल में बसा हुआ है। बांग्लादेश के मौजूदा सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान ने मई 2026 में हज से लौटने के बाद दाढ़ी बढ़ा ली है। वो इस्लामिक संदेश देते हैं। वाकर-उज-जमान ने सेना की चार यूनिट्स के नाम इस्लाम के 4 खलीफाओं के नाम पर रखे हैं। पैक्ट में शामिल होने से बांग्लादेश को सऊदी अरब से विदेशी रोजगार, निवेश और तेल मिल सकता है। तुर्किये से डिफेंस टेक्नोलॉजी, हथियार और ट्रेनिंग मिल सकती है। पाकिस्तान इस्लामी मंचों पर राजनीतिक समर्थन दे सकता है। हालांकि बांग्लादेश के पूर्व राजनयिक एम शाहिदुल इस्लाम लिखते हैं, ‘बांग्लादेश को अपने फैसले दूसरों को खुश करने के लिए नहीं लेने चाहिए। मक्का पैक्ट की लागत बहुत ज्यादा है, लेकिन फायदा स्पष्ट नहीं है। समझौते में शामिल दूसरे देश बांग्लादेश जैसे छोटे देश पर दबाव भी बना सकते हैं। बांग्लादेश को पूछना होगा कि क्या उसे भारत-पाकिस्तान या ईरान-सऊदी के संघर्ष से दूर रहने की आजादी होगी।’ सवाल-3: अगर बांग्लादेश मक्का-पैक्ट में शामिल हुआ, तो भारत के लिए क्या खतरा? जवाब: दो बड़े खतरे हैं… 1. साउथ एशिया में भारत का प्रभाव, सिक्योरिटी, आर्थिक रिश्तों पर असर ब्रह्म चेलानी कहते हैं, ‘पैक्ट में बांग्लादेश के शामिल होने से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और भूमध्य सागर के इलाके में सिक्योरिटी से जुड़ा पूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर बदलेगा ।’ बांग्लादेश से भी भारत के राजनयिक और आर्थिक रिश्ते बदल जाएंगे।’ भारत की घेराबंदी बढ़ सकती है, क्योंकि तारिक रहमान चीन से भी रिश्ते बढ़ा रहे हैं। जून में चीन दौरे पर उन्होंने चीन को ‘सबसे कीमती और भरोसेमंद पार्टनर’ कहा था। मक्का पैक्ट से पाकिस्तान-अमेरिका के रिश्ते भी बेहतर होंगे, क्योंकि ट्रम्प, इसको खिलाफ ईरान के खिलाफ बनने वाला गठबंधन मान रहे हैं और वो इसके समर्थन में हैं। इससे साउथ एशिया में भारत के लिए पाकिस्तान की चुनौती बढ़ेगी।’ तुर्किये भी यूरोप, मिडिल ईस्ट से लेकर साउथ एशिया तक भारत के मुकाबले प्रभाव बढ़ाना चाहता है। तुर्किये एशिया और यूरोप के बीच लैंड-ब्रिज का काम करता है। भारत के ज्यादातर इस्लामिक देशों के साथ आर्थिक रिश्ते हैं। सऊदी अरब और UAE भारत के टॉप-5 ट्रेड पार्टनर्स में हैं। अब इन व्यापारिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है। पीएम नरेंद्र मोदी 15 मई को UAE की यात्रा पर गए थे। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीर। 2. पाकिस्तान से जंग हुई, तो मुश्किल बढ़ेगी बांग्लादेश शामिल हुआ, तो सऊदी-पाकिस्तान-तुर्किये को साउथ एशिया में मजबूत पकड़ मिल जाएगी। इनकी पहुंच भारत के पूर्व तक हो जाएगी। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, तुर्किये ने पाकिस्तान को सैन्य मदद- खास तौर पर एडवांस्ड ड्रोन दिए और पाक के समर्थन में बयान भी दिए। ब्रह्म चेलानी के मुताबिक, ‘पैक्ट के चलते आगे कोई जंग हो, तो भारत के लिए जवाबी कार्रवाई मुश्किल हो जाएगी। भारत, पाकिस्तान में कोई एक्शन ले, तो पाकिस्तान, भारत के खिलाफ ये पैक्ट लागू कर सकता है।’ ‘सऊदी का पैसा, तुर्किये की डिफेंस टेक्नोलॉजी, पाकिस्तान और बांग्लादेश की स्ट्रैटेजिक पोजिशन से चौतरफा इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार होता है। इससे उनको डिफेंस रिसर्च, खुफिया जानकारी शेयर करने में भी मदद आएगी।’ पाकिस्तान भारत से संघर्ष में बांग्लादेशी सैन्य ठिकानों का भी इस्तेमाल कर सकता है। सऊदी का पैसा और तुर्किये की टेक्नोलॉजी भी भारत के खिलाफ इस्तेमाल हो सकती है। सवाल-4: भारत इसे कैसे काउंटर करेगा? जवाब: भारत को घेरने का इरादा तो दिखता है, लेकिन लंबे समय तक भारत जैसी इकॉनोमिक पावर का विरोध करना मुमकिन नहीं है। भारत 2 तरह की तैयारी कर सकता है… 1. सऊदी, तुर्किये जैसे देशों से रिश्ते बेहतर करना भारत के पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुनायत कहते हैं, ‘हमें दूसरे देशों से आउटरीच पर जोर देना होगा। सऊदी से हमारे रिश्ते बहुत अच्छे हैं

Dungarpur School Roof Collapse | Rajasthan Primary School Accident

Dungarpur School Roof Collapse | Rajasthan Primary School Accident

Hindi News Career Dungarpur School Roof Collapse | Rajasthan Primary School Accident 4 मिनट पहले कॉपी लिंक राजस्थान के डूंगरपुर जिले के दोवड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सत्तु देवकी स्थित अपर प्राइमरी स्कूल में एक कमरे की छत गिर गई। उस समय स्कूल में 120 बच्चे मौजूद थे। ये बच्चे अपनी-अपनी कक्षाओं में बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान स्कूल परिसर में लंबे समय से बंद पड़ी एक जर्जर कक्षा की छत अचानक नीचे गिर गई। छत गिरने की तेज आवाज सुनकर स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। बच्चे और टीचर तुरंत कक्षाओं से बाहर निकल गए। स्कूल के 2 कमरे लंबे समय से जर्जर गनीमत रही कि जिस कमरे की छत गिरी, उस वक्त उसमें कोई बच्चा या शिक्षक मौजूद नहीं था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। इस स्कूल में कुल 10 कमरे हैं। इनमें से करीब 2 कमरे लंबे समय से जर्जर हो चुके हैं। इसलिए इन कमरों को बंद कर दिया गया था। यहां कोई क्लास भी नहीं ली जाती थी। इसी वजह से छत गिरने के बावजूद कोई छात्र या टीचर घायल नहीं हुए। अधिकारियों ने किया जर्जर कमरों का निरीक्षण छत गिरने के बाद स्कूल के टीचर्स ने पीईईओ पंकज वर्मा को सूचना दी। पंकज वर्मा और सीबीईओ दीपक शाह मौके पर पहुंचे और स्कूल की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने जर्जर कमरों का निरीक्षण किया और स्कूल के मैनेजमेंट से जानकारी ली। राजस्थान के स्कूल में इस साल छत गिरने की दूसरी घटना राजस्थान के झालावाड़ ज़िले में 25 जुलाई 2026 को एक स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी। यह घटना मनोहरथाना ब्लॉक के पिपलोदी गांव में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की है। छत गिरने के बाद दीवार भी ढह गई। इस हादसे में 7 मृत बच्चों के अलावा कई अन्य बच्चों के मलबे में दबे होने से घायल हो गए। स्कूल भवन की छत जर्जर अवस्था में थी, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। वहीं भारी बारिश के कारण दीवार में नमी आने से दीवारें कमजोर हो गईं। ————————————————————————————- ये खबर भी पढ़ें… छात्रों के धरने से बदली खस्ता हाल स्कूल की हालत:जर्जर भवन गिरा, मरम्मत का काम शुरू; आशुतोष रांका ने शेयर किया वीडियो सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने अपने X अकाउंट पर जोधावास स्थित उस सरकारी स्कूल का वीडियो शेयर किया है जिसके खिलाफ कुछ दिन पहले ही स्कूल के छात्रों ने आंदोलन किया था। इस स्कूल का नाम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

US Air Force C-17A Globemaster Lands in Moscow

US Air Force C-17A Globemaster Lands in Moscow

मॉस्को4 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका और रूस के बीच तनाव के बीच अमेरिकी वायुसेना का एक बड़ा मिलिट्री प्लेन मंगलवार को मॉस्को में उतरा। C-17A ग्लोबमास्टर III की इस लैंडिंग ने इसलिए ध्यान खींचा, क्योंकि रूस की राजधानी में किसी अमेरिकी सैन्य प्लेन का पहुंचना बेहद असामान्य है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इस प्लेन को रूस क्यों भेजा गया? फ्लाइट-ट्रैकिंग मॉनिटर के मुताबिक, प्लेन ने मॉस्को के समय के अनुसार सुबह करीब 8:50 बजे लातविया की राजधानी रीगा से उड़ान भरी और लगभग 74 मिनट बाद मॉस्को पहुंचा। इस उड़ान की एक और खास बात यह रही कि प्लेन रूस के हवाई क्षेत्र से होकर मॉस्को पहुंचा। किसी अमेरिकी सैन्य प्लेन को इस रास्ते से उड़ान भरने के लिए रूसी अधिकारियों की मंजूरी जरूरी होती है। प्लेन के मिशन पर अब भी सस्पेंस रिकॉर्ड के मुताबिक, यही प्लेन 23 अगस्त को वॉशिंगटन डीसी के पास जॉइंट बेस एंड्रयूज से रीगा पहुंचा था। यह वही अमेरिकी सैन्य अड्डा है जहां राष्ट्रपति के विमानों का बेड़ा रहता है, जिसमें एयर फोर्स वन भी शामिल है। अमेरिका और रूस दोनों ने अब तक यह नहीं बताया कि प्लेन को मॉस्को क्यों भेजा गया था। प्लेन में कौन था और क्या सामान था, इसकी जानकारी भी सामने नहीं आई है। मॉस्को में अमेरिकी सैन्य प्लेन की असामान्य लैंडिंग के बाद प्लेन पर नजर रखने वाले लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच कई कयास लगाए जाने लगे। कुछ लोगों ने इसे कैदियों की अदला-बदली, यूक्रेन युद्ध को लेकर किसी गुप्त बातचीत या अमेरिकी दूतावास से जुड़े काम से जोड़कर देखा। हालांकि, इनमें से किसी भी दावे की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अमेरिकी C-17 को मॉस्को भेजने के पीछे वजह क्या थी? प्लेन में क्या था, अभी पता नहीं मॉस्को जाने वाला यह प्लेन RCH4555 नाम से उड़ रहा था। प्लेन में कौन था और उसके अंदर क्या सामान था, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। यही वजह है कि रूस और अमेरिका के बीच तनाव के इस दौर में इस उड़ान ने इतना ध्यान खींचा है। फिलहाल कैदियों की अदला-बदली, रूस-अमेरिका के बीच किसी खास बातचीत या अमेरिकी दूतावास से जुड़े काम जैसी बातें सिर्फ अंदाजे हैं। इनमें से किसी की भी पुष्टि नहीं हुई है। जब तक अमेरिका या रूस की तरफ से कोई जानकारी नहीं आती, तब तक यह साफ नहीं होगा कि अमेरिकी C-17 प्लेन को अचानक मॉस्को भेजने की असली वजह क्या थी। C-17 ग्लोबमास्टर- टैंक से सैनिकों तक ले जाने में सक्षम C-17A ग्लोबमास्टर III अमेरिकी वायुसेना का बहुत बड़ा सामान ढोने वाला सैन्य प्लेन है। इसका इस्तेमाल सैनिकों, सैन्य गाड़ियों और भारी सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए किया जाता है। इस प्लेन को बोइंग ने बनाया है। इसकी उड़ने की सामान्य रफ्तार करीब 834 किमी प्रति घंटा है। इतना बड़ा प्लेन होने के बावजूद C-17 करीब 3,500 फीट लंबी रनवे से भी उड़ान भर सकता है और उतर सकता है। इसकी एक खासियत यह भी है कि यह अपनी ताकत से पीछे की ओर भी चल सकता है। अमेरिकी वायुसेना इसका इस्तेमाल कहां करती है? C-17 का काम सिर्फ सैनिकों और हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना नहीं है। अमेरिकी वायुसेना इसका इस्तेमाल सैनिकों और सामान को पहुंचाने, हवा से सामान गिराने, घायल लोगों को बाहर निकालने और जरूरत के समय मदद पहुंचाने के लिए भी करती है। यह कोई लड़ाकू प्लेन या बम गिराने वाला प्लेन नहीं है। इसका मुख्य काम भारी सामान और सैन्य उपकरणों को जल्दी एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

School Students Block Road Over Muddy Path

School Students Block Road Over Muddy Path

7 मिनट पहले कॉपी लिंक मध्य प्रदेश में स्कूल तक जाने वाली कच्ची और कीचड़ भरी सड़क से परेशान छात्राओं ने अपनी-अपनी साइकिल सड़क पर रखकर चक्का जाम किया। यह घटना ग्राम मझगुआ पतोल, थाना हटा, जिला दमोह की है। इस जाम से सड़के के दोनों ओर लोगों का आना – जाना रूक गया। स्कूल तक जाने वाला करीब 1 किलोमीटर का रास्ता कच्चा और बदहाल है। बारिश में रास्ता कीचड़ से भर जाता है, जिससे बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है। यह प्रदर्शन 22 अगस्त 2026 को दोपहर साढ़े 11 बजे शुरू हुआ। शनिवार दोपहर करीब 12 बजे तेज बारिश होने लगी। ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थी गांव की मुख्य सड़क पर पहुंच गए। छात्राओं के प्रदर्शन में जमा हुई ग्रामीणों की भीड़ बारिश के बीच स्कूली ड्रेस में छात्राओं के प्रदर्शन का वीडियो बनाया गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। स्कूली छात्राओं द्वारा किए जाने वाले प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों की भीड़ भी जमा हो गई। ग्रामीणों ने विद्यार्थियों की मांग को जायज बताया। उनका कहना है कि करीब एक किलोमीटर के इस कच्चे रास्ते का इस्तेमाल सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण और किसान भी करते हैं। उन्हें भी यहां से गुजरने में परेशानी होती है। प्रशासन ने दिया व्यवस्था का आश्वासन बच्चों ने हाथों में तख्तियां लेकर पक्की सड़क बनाने की मांग की। सूचना मिलने पर कार्यपालिका मजिस्ट्रेट और तहसीलदार उमेश तिवारी मौके पर पहुंचे। पटवारी सुधीर राज भी मौजूद रहे। तहसीलदार ने विद्यार्थियों के साथ स्कूल तक जाकर कच्चे रास्ते का निरीक्षण किया। छात्राएं हाथों में तख्तियां और सड़कों पर साइकिल रखकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं प्रशासन ने तत्काल वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया। आश्वासन के बाद छात्रों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया। हालांकि छात्राओं की मांग स्कूल तक स्थायी पक्की सड़क बनाने की है। छात्रों और ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी सड़क बनने से ही हर साल बारिश के मौसम में होने वाली परेशानी से निजात मिल सकेगी। ये खबर भी पढ़ें छात्रों के धरने से बदली खस्ता हाल स्कूल की हालत:जर्जर भवन गिरा, मरम्मत का काम शुरू; आशुतोष रांका ने शेयर किया वीडियो सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने अपने X अकाउंट पर जोधावास स्थित उस सरकारी स्कूल का वीडियो शेयर किया है जिसके खिलाफ कुछ दिन पहले ही स्कूल के छात्रों ने आंदोलन किया था। इस स्कूल का नाम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

ट्रम्प कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदल सकते हैं:कहा- ‘लेक ओंटारियो’ का नाम ‘लेक अमेरिका’ करने की सोच रहा

ट्रम्प कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदल सकते हैं:कहा- ‘लेक ओंटारियो’ का नाम ‘लेक अमेरिका’ करने की सोच रहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदलने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ रखने पर विचार कर रहे हैं। लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित है। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका और कनाडा ने एक-दूसरे पर 50% टैरिफ लगा दिया है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, लेक ओंटारिया का नाम बदलने को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है और न ही औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है। यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने किसी जगह का नाम बदलने की बात कही हो। जनवरी 2025 में उन्होंने अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ को ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ कहने का आदेश दिया था। हालांकि, उस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली थी। क्यों अहम है लेक ओंटारियो? लेक ओंटारियो उत्तरी अमेरिका की पांच बड़ी झीलों (ग्रेट लेक्स) में से एक है। इसका उत्तरी किनारा कनाडा के ओंटारियो प्रांत और दक्षिणी किनारा अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य से जुड़ा है। यह झील दोनों देशों के लिए पीने के पानी, सामान की आवाजाही, मछली पालन और पर्यटन के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। सेंट लॉरेंस नदी के जरिए यह अटलांटिक महासागर से जुड़ती है, इसलिए यहां से सामान की आवाजाही भी होती है। झील की देखभाल और सुरक्षा के लिए अमेरिका और कनाडा मिलकर काम करते हैं और कई समझौते कर चुके हैं। क्या अमेरिका अकेले नाम बदल सकता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अपने सरकारी रिकॉर्ड, नक्शों और दस्तावेजों में किसी स्थान का नाम बदल सकता है। लेकिन यदि वह स्थान किसी दूसरे देश के साथ साझा है, तो नया नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार नहीं हो जाता। यानी अमेरिका अपने आधिकारिक दस्तावेजों में लेक ओंटारियो को कोई नया नाम दे सकता है, लेकिन कनाडा या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं उसे मानने के लिए बाध्य नहीं होंगी। यही स्थिति पहले ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ मामले में भी देखने को मिली थी। जनवरी 2025 में ट्रम्प ने अमेरिकी सरकारी इस्तेमाल में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने का आदेश दिया था। अमेरिका ने इसे अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में लागू कर दिया, लेकिन मैक्सिको और दूसरे देशों ने पुराने नाम का इस्तेमाल जारी रखा। खबर अपडेट हो रही है…

ट्रम्प कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदल सकते हैं:कहा- ‘लेक ओंटारियो’ का नाम ‘लेक अमेरिका’ करने की सोच रहा

ट्रम्प कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदल सकते हैं:कहा- ‘लेक ओंटारियो’ का नाम ‘लेक अमेरिका’ करने की सोच रहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदलने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ रखने पर विचार कर रहे हैं। लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित है। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका और कनाडा ने एक-दूसरे पर 50% टैरिफ लगा दिया है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, लेक ओंटारिया का नाम बदलने को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है और न ही औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है। यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने किसी जगह का नाम बदलने की बात कही हो। जनवरी 2025 में उन्होंने अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ को ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ कहने का आदेश दिया था। हालांकि, उस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली थी। क्यों अहम है लेक ओंटारियो? लेक ओंटारियो उत्तरी अमेरिका की पांच बड़ी झीलों (ग्रेट लेक्स) में से एक है। इसका उत्तरी किनारा कनाडा के ओंटारियो प्रांत और दक्षिणी किनारा अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य से जुड़ा है। यह झील दोनों देशों के लिए पीने के पानी, सामान की आवाजाही, मछली पालन और पर्यटन के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। सेंट लॉरेंस नदी के जरिए यह अटलांटिक महासागर से जुड़ती है, इसलिए यहां से सामान की आवाजाही भी होती है। झील की देखभाल और सुरक्षा के लिए अमेरिका और कनाडा मिलकर काम करते हैं और कई समझौते कर चुके हैं। लेक ओंटारियो को उसका नाम कैसे मिला? ‘ओंटारियो’ नाम मूलनिवासी ह्यूरॉन लोगों की भाषा से आया माना जाता है। इसका अर्थ ‘सुंदर झील’ है। बाद में यूरोपीय लोगों ने भी इस नाम का इस्तेमाल शुरू किया और यही नाम प्रचलित हो गया। इसी से कनाडा के ओंटारियो राज्य का नाम भी पड़ा। यूरोपीय मानचित्रों में यह नाम 17वीं सदी से दिखाई देने लगा था। यानी ‘ओंटारियो’ नाम नया नहीं है, बल्कि सदियों पुराना है। एक दिलचस्प बात यह भी है कि लेक ओंटारियो ग्रेट लेक्स में सबसे छोटी झील है, लेकिन इसका आर्थिक महत्व बहुत बड़ा है। क्या अमेरिका अकेले नाम बदल सकता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अपने सरकारी रिकॉर्ड, नक्शों और दस्तावेजों में किसी स्थान का नाम बदल सकता है। लेकिन यदि वह स्थान किसी दूसरे देश के साथ साझा है, तो नया नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार नहीं हो जाता। यानी अमेरिका अपने आधिकारिक दस्तावेजों में लेक ओंटारियो को कोई नया नाम दे सकता है, लेकिन कनाडा या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं उसे मानने के लिए बाध्य नहीं होंगी। यही स्थिति पहले ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ मामले में भी देखने को मिली थी। जनवरी 2025 में ट्रम्प ने अमेरिकी सरकारी इस्तेमाल में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने का आदेश दिया था। अमेरिका ने इसे अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में लागू कर दिया, लेकिन मैक्सिको और दूसरे देशों ने पुराने नाम का इस्तेमाल जारी रखा।