Toxic Box Office Collection | Yash Movie Earnings Dip After Negative Reviews

1 घंटे पहले कॉपी लिंक फिल्म टॉक्सिक 26 अगस्त को रिलीज हुई है। कन्नड़ स्टार यश की फिल्म टॉक्सिक पर नेगेटिव रिव्यू और रेटिंग का बुरा असर पड़ा है। पहले दिन दर्शक बड़ी संख्या में ये फिल्म देखने पहुंचे और भारत में फिल्म ने करीब 101 करोड़ रुपए का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कर लिया। हालांकि खराब रिव्यू के चलते दूसरे दिन ही फिल्म की कमाई में 64% गिरावट आ गई। फिल्म ने पहले दिन के मुकाबले तीन गुना कम कमाई की है। इंडस्ट्री ट्रैकर वेबसाइट सैकनिल्क के मुताबिक, गुरुवार को दूसरे दिन टॉक्सिक ने देशभर में सभी भाषाओं को मिलाकर 22,629 शोज से 36.40 करोड़ रुपए की नेट कमाई की। बुधवार को फिल्म ने 101.10 करोड़ रुपए कमाए थे। इसके मुकाबले दूसरे दिन कमाई 63.99% घट गई। करीब 500 करोड़ रुपए के बजट में बनी टॉक्सिक ने दो दिन में भारत में 164.50 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन किया है। फिल्म का भारत में नेट कलेक्शन 137.50 करोड़ रुपए हो गया है। फिल्म को आज रक्षाबंधन और लॉन्ग वीकेंड का फायदा मिल सकता है, लेकिन दर्शकों द्वारा जिस तरह फिल्म की आलोचना की जा रही है, उससे ये अनुमान गलत साबित भी हो सकता है। हिंदी वर्जन से सबसे ज्यादा कमाई दूसरे दिन भी टॉक्सिक की सबसे ज्यादा कमाई हिंदी डब वर्जन से हुई। हालांकि, हिंदी वर्जन की कमाई पहले दिन के मुकाबले काफी घट गई। बुधवार को रिलीज के दिन हिंदी वर्जन ने 55.00 करोड़ रुपए का नेट बिजनस किया था। गुरुवार को यह कमाई घटकर 23.00 करोड़ रुपए रह गई। विदेशों में भी कमाई घटी यश, नयनतारा, कियारा आडवानी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत की फिल्म की विदेशों में भी दूसरे दिन कमाई कम हुई। ओपनिंग डे पर फिल्म ने ओवरसीज मार्केट में 16.25 करोड़ रुपए का ग्रॉस बिजनस किया था। दूसरे दिन विदेशों से 10.00 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन हुआ। दो दिनों में टॉक्सिक ने विदेशों से कुल 26.25 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन किया है। भारत और विदेशों को मिलाकर फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 190.75 करोड़ रुपए हो गया है। धुरंधर 2 के मुकाबले आधी कमाई भी नहीं टॉक्सिक पहले दिन देश में रणवीर सिंह की धुरंधर 2 के ओपनिंग डे रिकॉर्ड के करीब पहुंची थी। धुरंधर 2 ने पहले दिन 102.55 करोड़ रुपए कमाए थे, जबकि टॉक्सिक की कमाई 101.10 करोड़ रुपए रही। दोनों फिल्मों की पहले दिन की कमाई की तुलना की जा रही है। हालांकि, आदित्य धर के डायरेक्शन में बनी धुरंधर 2 ने दूसरे दिन देश में 80.72 करोड़ रुपए का बिजनस किया था। फिल्म को माउथ पब्लिसिटी का फायदा मिला था। इसके मुकाबले टॉक्सिक दूसरे दिन 36.40 करोड़ रुपए ही कमा सकी। फिल्म की कमाई धुरंधर 2 की दूसरे दिन की कमाई की आधी भी नहीं है। आवारापन 2 की 14वें दिन की कमाई टॉक्सिक की कमाई घटने का आवारापन 2 या बंटवारा 1947 को कोई फायदा नहीं मिला। गुरुवार को इमरान हाशमी की सुपरहिट फिल्म आवारापन 2 की कमाई भी कम हुई। 14वें दिन आवारापन 2 ने 1,085 शोज से 60 लाख रुपए की नेट कमाई की। इसके बाद भारत में फिल्म का कुल ग्रॉस कलेक्शन 171.90 करोड़ रुपए और कुल नेट कलेक्शन 144.25 करोड़ रुपए हो गया। आवारापन 2 का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 203.70 करोड़ रुपए है। नितिन कक्कड़ के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म 45 करोड़ रुपए के बजट में बनी है। बंटवारा 1947 का कलेक्शन सनी देओल की बंटवारा 1947 की कमाई 14वें दिन भी 5 लाख रुपए तक नहीं पहुंची। राजकुमार संतोषी के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म ने गुरुवार को 126 शोज से 3 लाख रुपए कमाए। 150 करोड़ रुपए के बजट में बनी बंटवारा 1947 का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब तक 53.88 करोड़ रुपए है। भारत में फिल्म ने 37.80 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया है। टॉक्सिक के मेकर्स पर नेगेटिव रेटिंग हटवाने के आरोप केजीएफ स्टार यश की फिल्म टॉक्सिक को लगातार दर्शकों के नेगेटिव रिव्यू मिल रहे हैं। सोशल मीडिया और अन्य वेबसाइट्स में फिल्म को काफी निराशाजनक रेटिंग मिली है। इसी बीच अब फिल्म के मेकर्स पर बुक माय शो से फिल्म की रेटिंग हटवाने के आरोप लग रहे हैं। बुक माय शो पर आमतौर पर हर रिलीज हुई फिल्म की रेटिंग दिखाई जाती है। कुछ समय पहले तक फिल्म टॉक्सिक को बुक माय शो पर 5.5 रेटिंग मिली थी, लेकिन अब ये रेटिंग हटा दी गई है। इसके बदले वेबसाइट पर सिर्फ लाइक नजर आ रहे हैं। जबकि अन्य फिल्मों की रेटिंग अब भी मौजूद है। सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि दर्शकों से खराब रिव्यू मिलने के बाद रेटिंग हटा दी गई। हालांकि, रेटिंग हटाने को लेकर बुक माय शो या फिल्म के निर्माताओं की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है। एक्स के एक यूजर ने आरोप लगाते हुए लिखा, “बुक माय शो ने टॉक्सिक फिल्म की रेटिंग बंद कर दी। यह इतनी खराब थी कि 5.5/10 मिली, BMS के इतिहास में सबसे खराब।” एक दिन में कमाए 100 करोड़, फिर फ्लॉप का डर क्यों? फिल्म टॉक्सिक 26 अगस्त को रिलीज हुई। इंडस्ट्री ट्रैकर वेबसाइट सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने पहले दिन ही भारत में 101 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है। लेकिन इसके बावजूद फिल्म के फ्लॉप होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। वजह है फिल्म की हाइप और अब आने वाले नेगेटिव रिव्यू। पहले दिन फिल्म को 24579 शोज मिले, जिसकी ऑक्यूपेंसी 57 पर्सेंट रही। वीक डे होने के बावजूद, दर्शक बड़ी संख्या में फिल्म देखने पहुंचे, लेकिन दोपहर तक फिल्म के नेगेटिव रिव्यू चर्चा में आ गए। फिल्म की आलोचना का एक कारण ये भी रहा कि पिछले कुछ महीनों से मेकर्स लगातार इसे बड़े स्केल और बड़े बजट में तैयार करने की बात कर रहे थे, जिससे फिल्म से ज्यादा उम्मीदें जुड़ी थीं। जानिए क्यों उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी टॉक्सिक 3 साल और 500-1000 करोड़ बजट- फिल्म 2023 में बनना शुरू हुई और 3 साल बाद 2026 में रिलीज हुई। फिल्म को 500-1000 करोड़ के बड़े बजट में बनाया गया, जिससे ये देश की सबसे महंगी फिल्मों में से एक बनी। जाहिर तौर पर इस बड़े बजट के साथ दर्शकों को बेहतरीन विजुअल
Madhya Pradesh Rajnath Singh Inauguration

Hindi News Career Madhya Pradesh Rajnath Singh Inauguration | Nepal Relief Aid Updates 6 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. भारत ने नेपाल को राहत सामग्री की दूसरी खेप भेजी 27 अगस्त को भारत ने बाढ़ प्रभावित नेपाल के लिए राहत सामग्री की दूसरी खेप भेजी। दूसरी खेप में भारत ने 37.5 टन राहत सामग्री भेजी हैं, इसमें दवाओं की खेप और खाने के पैकेट भेजे गए हैं। इससे पहले बुधवार को भी भारत ने 10 टन की पहली खेप भेजी थी, इसमें सहायता और आपदा राहत (HADR) सामग्री काठमांडू भेजी गई थी। भारत की पहली खेप में कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल थीं। ये राहत सामग्री भारतीय वायुसेना के सी-130जे विमान के जरिए हिंडन एयरबेस से भेजी गई थी। नेपाल में बुधवार को तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने रसुवा जिले में भारी तबाही मचाई, टिमुरे से त्रिशूली बाजार और बेत्रावती तक बाढ़ के पानी और मलबे ने घर, सड़कें और पुल तबाह कर दिए। इसमें अब तक मरने वालों का आंकड़ा 273 है। इनमें नेपाल में 270 और तिब्बत में 3 लोगों की जान गई है। वहीं, करीब 1,500 लोग अब भी लापता हैं। भारत ने ये मदद ह्यूमाइनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ सामग्री (HADR) के तहत भेजी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और राहत प्रयासों में सहयोग जारी रखेगा। अपॉइंटमेंट (APPOINTMENT) 2. नागेश सिंह नाउरू गणराज्य में भारत के अगले राजदूत होंगे 26 अगस्त को भारत सरकार ने नागेश सिंह को नाउरू गणराज्य का अगला राजदूत प्रतिनिधि अपॉइंट किया। वे वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में भारत के हाई कमिश्नर हैं और इसके साथ ही नाउरू की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। भारत के हाई कमिश्नर को नाउरू के लिए साथ ही मान्यता दी जाती है, क्योंकि नाउरू में भारत का अलग स्थायी दूतावास नहीं है। नागेश 1995 बैच के IFS ऑफिसर हैं और विदेश मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी के तौर पर भी काम कर चुके हैं। नागेश सिंह 2022 से 2025 तक थाईलैंड में भारत के राजदूत के तौर पर काम कर चुके हैं। निधन (DEATH) 3. पुलित्जर प्राइज विनर फोटोग्राफर साल वेडर का निधन 27 अगस्त को प्रसिद्ध अमेरिकी फोटो जर्नलिस्ट साल वेडर के निधन की जानकारी आई। वे 99 साल के थे। वेडर को उनकी ऐतिहासिक फोटो ‘बर्स्ट ऑफ जॉय’ के लिए जाना जाता है, जिसमें वियतनाम युद्ध से लौटे एक अमेरिकी युद्धबंदी के परिवार से मिलने की तस्वीर है। ये तस्वीर 17 मार्च 1973 को कैलिफोर्निया के ट्रैविस एयर फोर्स बेस पर ली गई थी। इस तस्वीर के लिए वेडर को 1974 में पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वेडर एसोसिएट प्रेस (AP) के प्रसिद्ध फोटोग्राफर थे। वेडर ने अपने करियर में वियतनाम युद्ध विरोधी प्रदर्शनों और कई अन्य महत्वपूर्ण अमेरिकी घटनाओं की भी तस्वीरें खींचीं। वेडर के निधन की ऑफिशियल खबर गुरुवार को आई और उनका निधन 22 अगस्त को हुआ। ये तस्वीर वियतनाम युद्ध में अमेरिकी भागीदारी के अंत और सैनिकों की घर वापसी का एक बड़ा प्रतीक बनी। 4. पोलका डॉट क्वीन यायोई कुसामा का निधन 26 अगस्त को जापान की मशहूर कलाकार यायोई कुसामा के निधन की जानकारी मिली। वे 97 साल की थी। गुरुवार को उनकी कंपनी ने उनके निधन की जानकारी दी। कुसामा दुनिया की सबसे मशहूर आर्टिस्ट थीं, उन्हे पोलका डॉट क्वीन भी कहा जाता था। कुसामा डॉटस के साथ ही इंफिनिटी, मिरर रूम और पंपकिन स्कल्पचर के लिए जानी जाती थीं। कुसामा 1957 में अमेरिका गईं और न्यूयॉर्क के एवेंट-ग्रेड आर्ट आंदोलन में महत्वपूर्ण नाम बनीं। कुसामा ने पेंटिंग और मूर्तिकला के अलावा परफॉर्मेंस आर्ट, फिल्म, फैशन, कविता और उपन्यास में भी काम किया। कुसामा ने 2017 में टोक्यो में यायोई कुसामा म्यूजियम खोला। जापान ने उन्हें ऑर्डर ऑफ कल्चर समेत कई बड़े सम्मान दिए। जापान ने यायोई कुसामा को ऑर्डर ऑफ कल्चर समेत कई बड़े सम्मान दिए। समझौता (AGREEMENT) 5. भारत और फ्रांस ने इंजन बनाने के लिए MoU किया 26 अगस्त को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और फ्रांस की Safran हेलिकॉप्टर इंजन ने SAFHAL हेलिकॉप्टर इनजंस प्राइवेट लिमिटेड के जरिए ‘अरावली’ नाम के नए हाई-पावर हेलीकॉप्टर इंजन के विकास और उत्पादन के लिए समझौता किया। इस इंजन की कैपिसीटी 3,500-4,000 शाफ़्ट हॉर्सपावर (shp) है। इस MoU के तहत दोनों मिलकर डिजाइन, डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई का काम करेंगे। ये भारत को हाई-पावर हेलीकॉप्टर इंजन की डिजाइन और निर्माण क्षमता में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इस MoU से भविष्य में विदेशी इंजन पर निर्भरता कम करने और भारत में एयरो-इंजन तकनीक तथा MRO क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी। भारत-फ्रांस HAL और Safran की साझेदारी से पहले चीता, चेतक के इंजन और ALH, LCH तथा LUH में इस्तेमाल होने वाले शक्ति इंजन के लिए भी काम कर चुके हैं। मिसलिनीयस 6. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 450 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया 27 अगस्त को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जबलपुर में 450 करोड़ रुपये की लागत वाले T-72 टैंक ओवरहॉल प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इस प्रोजेक्ट कर तहत इंडियन आर्मी के T-72 टैंकों की मरम्मत, जांच और तकनीकी अपग्रेड के लिए सुविधा तैयार की जाएगी। प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद जबलपुर में भी सेना के T-72 टैंकों को लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाएगा। पहले चरण में यहां हर साल 12 T-72 टैंकों का पूरा ओवरहॉल और अपग्रेड होगा। इसके लिए आधुनिक प्लांट के साथ टेस्टिंग ट्रैक भी बनाया जाएगा। T-72 टैंकों के ओवरहॉल की मुख्य जिम्मेदारी आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) की हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF), आवड़ी की है। नई सुविधा बनने के बाद जबलपुर में टैंकों के ओवरहॉल की क्षमता बढ़ सकेगी। इससे सेना के जिन T-72 टैंकों को बड़ी मरम्मत या तकनीकी सुधार की जरूरत होगी, उन्हें जल्द दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा सकेगा। 472 करोड़ की परियोजना शुरू होने से पहले ही व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर ने इसका ट्रायल किया गया था। फैक्ट्री ने दो T-72 टैंकों का ओवरहॉल पूरा करके भारतीय
Nepal-Tibet Border Flood | Missing Indians Rescue Operation Update

15 मिनट पहले कॉपी लिंक नेपाल बाढ़ में 32 देशों के नागरिक लापता नेपाल में बाढ़ के बाद 32 देशों के 1400 से ज्यादा नागरिक शामिल हैं। इनमें ट्रेकिंग, टूर और कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए पहुंचे लोग भी शामिल हैं। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, लापता लोगों में 113 नेपाली पर्यटक, सेना-पुलिस के 85 जवान और रसुवा जिले के 161 लोग शामिल हैं। अब तक 50 विदेशियों को हेलिकॉप्टर से सुरक्षित निकाला गया है। लापता लोगों में भारत के 290, अमेरिका के 90, यूक्रेन के 55, मलेशिया के 51, ऑस्ट्रेलिया के 39, ब्रिटेन के 33, कनाडा के 25, दक्षिण कोरिया के 9, सिंगापुर, जर्मनी और रूस के 8-8, दक्षिण अफ्रीका और लातविया के 6-6, जापान और न्यूजीलैंड के 5-5, फ्रांस के 4 नागरिक शामिल हैं।
रेडियो खराबी से ट्रम्प का हेलिकॉप्टर विमान के करीब पहुंचा:एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को एक हफ्ते पहले से दिक्कत की जानकारी थी; फिर भी चूक हुई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हेलिकॉप्टर मरीन वन और एक यात्री विमान के करीब पहुंचने की वजह सामने आई है। जांच के मुताबिक, रेडियो संपर्क में आई खराबी के कारण एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को हेलिकॉप्टर की उड़ान से पहले मिलने वाली जरूरी चेतावनी नहीं मिल पाई। यह घटना 4 अगस्त को हुई थी। ट्रम्प को लेकर मरीन वन व्हाइट हाउस के पास से उड़ान भर रहा था, तभी रीगन नेशनल एयरपोर्ट से एक यात्री विमान को भी टेकऑफ की मंजूरी मिल गई। दोनों विमान कुछ देर के लिए काफी करीब आ गए, लेकिन पायलटों की सतर्कता से टकराव टल गया। जांच में यह भी सामने आया कि एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को इस रेडियो खराबी की जानकारी एक हफ्ते पहले ही हो गई थी। इसके बावजूद घटना वाले दिन राष्ट्रपति की सुरक्षा में चूक हुई। व्हाइट हाउस में निर्माण के कारण रेडियो में खराबी आई जांच में पता चला कि व्हाइट हाउस में चल रहे निर्माण के कारण मरीन वन के उड़ान भरने की जगह बदल दी गई थी। हेलिकॉप्टर अब द एलिप्स से उड़ान भर रहा था। नई जगह और रीगन एयरपोर्ट के पास लगे रेडियो रिसीवर के बीच सीधा संपर्क ठीक नहीं था। इसी वजह से हेलिकॉप्टर की रेडियो कॉल कंट्रोल टावर तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही थी। एक हफ्ते पहले मीटिंग में दिक्कत पर चर्चा हुई थी घटना से करीब एक हफ्ते पहले 30 जुलाई को मरीन वन के पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स की बैठक हुई थी। इसमें तीन मिनट पहले दी जाने वाली उड़ान चेतावनी के कंट्रोल टावर तक नहीं पहुंचने की बात सामने आई थी। तब तय किया गया था कि रेडियो संपर्क न होने पर किसी दूसरे विमान या व्यक्ति के जरिए यह सूचना दी जाएगी। 4 अगस्त को पायलटों ने ज्वाइंट बेस एनाकोस्टिया-बोलिंग के जरिए भी कंट्रोल टावर तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की। हालांकि, यह तरीका भी काम नहीं आया। कंट्रोलर्स को मरीन वन के उड़ान भरने की जानकारी नहीं मिली और इसी दौरान यात्री विमान को टेकऑफ की मंजूरी दे दी गई। ट्रम्प का हेलिकॉप्टर और विमान सिर्फ 1.3 किमी दूर थे NTSB के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, दोनों विमानों के बीच सबसे कम दूरी करीब 1.3 किलोमीटर थी। उनकी ऊंचाई में भी महज 250 फीट का अंतर रह गया था। यात्री विमान के टक्कर से बचाने वाले सिस्टम ने चेतावनी दी थी। मरीन वन के पायलटों ने भी विमान को देख लिया और कुछ देर रुक गए, जिससे दोनों अलग हो गए। FAA के नियम के मुताबिक, ऐसे हालात में दो विमानों के बीच कम से कम 2.4 किलोमीटर की दूरी या ऊंचाई में 500 फीट का अंतर होना जरूरी है। अब रेडियो सिस्टम ठीक किया गया घटना के बाद FAA की तकनीकी टीम ने रेडियो सिस्टम की जांच की। रिसीवर को रिहायशी इलाके से हटाकर रीगन एयरपोर्ट के कंट्रोल टावर के ऊपर लगा दिया गया। इसके बाद किए गए परीक्षणों में रेडियो संपर्क ठीक पाया गया। यह घटना पिछले साल के रीगन एयरपोर्ट हादसे के बाद और गंभीर मानी जा रही है। 29 जनवरी 2025 को एक यात्री विमान और अमेरिकी सेना के ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर की टक्कर में 67 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद एयरपोर्ट के आसपास हेलिकॉप्टर और विमानों की आवाजाही को लेकर सुरक्षा नियम कड़े किए गए थे।
रेडियो खराबी से ट्रम्प का हेलिकॉप्टर विमान के करीब पहुंचा:एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को एक हफ्ते पहले से दिक्कत की जानकारी थी; फिर भी चूक हुई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हेलिकॉप्टर मरीन वन और एक यात्री विमान के करीब पहुंचने की वजह सामने आई है। जांच के मुताबिक, रेडियो संपर्क में आई खराबी के कारण एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को हेलिकॉप्टर की उड़ान से पहले मिलने वाली जरूरी चेतावनी नहीं मिल पाई। यह घटना 4 अगस्त को हुई थी। ट्रम्प को लेकर मरीन वन व्हाइट हाउस के पास से उड़ान भर रहा था, तभी रीगन नेशनल एयरपोर्ट से एक यात्री विमान को भी टेकऑफ की मंजूरी मिल गई। दोनों विमान कुछ देर के लिए काफी करीब आ गए, लेकिन पायलटों की सतर्कता से टकराव टल गया। जांच में यह भी सामने आया कि एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स को इस रेडियो खराबी की जानकारी एक हफ्ते पहले ही हो गई थी। इसके बावजूद घटना वाले दिन राष्ट्रपति की सुरक्षा में चूक हुई। व्हाइट हाउस में निर्माण के कारण रेडियो में खराबी आई जांच में पता चला कि व्हाइट हाउस में चल रहे निर्माण के कारण मरीन वन के उड़ान भरने की जगह बदल दी गई थी। हेलिकॉप्टर अब द एलिप्स से उड़ान भर रहा था। नई जगह और रीगन एयरपोर्ट के पास लगे रेडियो रिसीवर के बीच सीधा संपर्क ठीक नहीं था। इसी वजह से हेलिकॉप्टर की रेडियो कॉल कंट्रोल टावर तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही थी। एक हफ्ते पहले मीटिंग में दिक्कत पर चर्चा हुई थी घटना से करीब एक हफ्ते पहले 30 जुलाई को मरीन वन के पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स की बैठक हुई थी। इसमें तीन मिनट पहले दी जाने वाली उड़ान चेतावनी के कंट्रोल टावर तक नहीं पहुंचने की बात सामने आई थी। तब तय किया गया था कि रेडियो संपर्क न होने पर किसी दूसरे विमान या व्यक्ति के जरिए यह सूचना दी जाएगी। 4 अगस्त को पायलटों ने ज्वाइंट बेस एनाकोस्टिया-बोलिंग के जरिए भी कंट्रोल टावर तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की। हालांकि, यह तरीका भी काम नहीं आया। कंट्रोलर्स को मरीन वन के उड़ान भरने की जानकारी नहीं मिली और इसी दौरान यात्री विमान को टेकऑफ की मंजूरी दे दी गई। ट्रम्प का हेलिकॉप्टर और विमान सिर्फ 1.3 किमी दूर थे NTSB के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, दोनों विमानों के बीच सबसे कम दूरी करीब 1.3 किलोमीटर थी। उनकी ऊंचाई में भी महज 250 फीट का अंतर रह गया था। यात्री विमान के टक्कर से बचाने वाले सिस्टम ने चेतावनी दी थी। मरीन वन के पायलटों ने भी विमान को देख लिया और कुछ देर रुक गए, जिससे दोनों अलग हो गए। FAA के नियम के मुताबिक, ऐसे हालात में दो विमानों के बीच कम से कम 2.4 किलोमीटर की दूरी या ऊंचाई में 500 फीट का अंतर होना जरूरी है। अब रेडियो सिस्टम ठीक किया गया घटना के बाद FAA की तकनीकी टीम ने रेडियो सिस्टम की जांच की। रिसीवर को रिहायशी इलाके से हटाकर रीगन एयरपोर्ट के कंट्रोल टावर के ऊपर लगा दिया गया। इसके बाद किए गए परीक्षणों में रेडियो संपर्क ठीक पाया गया। यह घटना पिछले साल के रीगन एयरपोर्ट हादसे के बाद और गंभीर मानी जा रही है। 29 जनवरी 2025 को एक यात्री विमान और अमेरिकी सेना के ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर की टक्कर में 67 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद एयरपोर्ट के आसपास हेलिकॉप्टर और विमानों की आवाजाही को लेकर सुरक्षा नियम कड़े किए गए थे। ————————————— यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने माना- ईरान के डर से प्लेन बदलना पड़ा:हमला होता तो एयरफोर्स वन पर होता; ट्रक में छिपकर दूसरे विमान तक पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मान लिया है कि उन्होंने पिछले महीने तुर्किये में ईरान के डर से प्लेन बदला था। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से NATO समिट में हिस्सा लेने गए थे उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। पूरी खबर पढ़ें…
नेपाल में फिर बाढ़ की संभावना, बिहार में आएगी तबाही?:गंगा और गंडक उफन रहीं, अबकी ग्लेशियर टूटा तो नियंत्रण में नहीं रहेंगे हालात

‘हालात काबू में हैं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है।’ नेपाल में तबाही के बाद CM सम्राट चौधरी के इस बयान ने बिहार के 21 जिलों के लोगों को फौरी तौर पर राहत तो दी है। लेकिन साथ ही आगे की चुनौती के लिए भी आगाह कर दिया है। नेपाल में क्या फिर तबाही आने वाली है, अगर आई तो बिहार का क्या होगा, गंगा-गंडक-कोसी में क्या चल रहा, समझेंगे; बूझे की नाही में…। क्या नेपाल में फिर से बाढ़ आने की संभावना है? वैज्ञानिकों ने आगे के खतरे से इनकार नहीं किया है। एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि घाटी की अस्थिर ढलानें और आंशिक रूप से ढहा हुआ ग्लेशियर आने वाले दिनों में मलबे के नए बहाव से दूसरी बाढ़ की स्थिति पैदा कर सकता है। नेपाल के गृह मंत्री सूडान गुरुंग ने कहा कि ल्हेन्डे नदी अभी पूरी तरह से साफ नहीं हुई है। ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) ने कहा कि बादलों के ढके होने के कारण क्षेत्र की उपग्रह से निगरानी करने में भी दिक्कत आई है। वहीं, काठमांडू यूनिवर्सिटी के जलवायु शोधकर्ता और प्रोफेसर रिजन भक्त कायस्थ ने कहा, ‘शुरुआत में चिंता थी कि ऊपर की ओर एक और बड़ी झील बन सकती है, लेकिन अभी तक ऐसी झील के अस्तित्व की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।’ कायस्थ ने कहा, ‘जोखिम अभी भी बना हुआ है। बढ़ता तापमान ग्लेशियरों के पिघलने, बर्फ और चट्टानों के टूटने तथा हिमालय में हिमस्खलन की संभावना को बढ़ाता है। लेकिन हम सटीक रूप से यह नहीं कह सकते कि अगली घटना कहां होगी।’ नेपाल में ग्लेशियर टूटेगा तो बिहार को खतरा क्यों बिहार से करीब 400 फीट की ऊंचाई (समुंद्र तल से) पर स्थित नेपाल की सभी नदियों का पानी घूम फिर कर बिहार ही आता है। इससे नदियों के 3 रूट से ऐसे समझिए… रूट-1ः नेपाल की नारायणी से चंपारण, सारण तबाह रूट-2ः नेपाल की सप्तकोशी से सहरसा-सुपौल का एरिया प्रभावित रूट-3ः UP के रास्ते भी बिहार में आता है नेपाल का पानी मतलब यह कि नेपाल के उत्तर में हादसा हो या पश्चिम में सारा पानी बिहार ही पहुंचेगा। ऐसे में नेपाल की नदियों की हलचल का बिहार पर ज्यादा असर पड़ता है। अब नीचे के मैप से समझिए…नदियों का रूट …दूसरा ग्लेशियर टूटा तो क्या बिहार में बिगड़ेंगे हालात? बिल्कुल। अभी ताजा हालात है कि नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को आई बाढ़ के बाद बिहार के गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। वाल्मीकिनगर बैराज से हर घंटे औसतन डेढ़ लाख से ज्यादा क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, गंडक में 3 मीटर ऊंची लहरें उठ सकती हैं, फ्लैश फ्लड आने की भी आशंका है। अब 2 कारणों से समझिए, कैसे बिगड़ सकते हैं हालात… 1. गंगा-गंडक उफान पर, पानी का बढ़ रहा दबाव बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के मुताबिक, 27 अगस्त की शाम 4 बजे तक गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक, पटना में गंगा, खगड़िया में बुढ़ी गंडक, सीवान के दरौली में घाघरा, कटिहार के कुरसेला में कोसी नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। नेपाल के पानी के कारण गंडक और गंगा में पानी का फ्लो बढ़ रहा है। खगड़िया में गंगा और बूढ़ी गंडक में पानी के कारण 20 पंचायतों में 50 हजार से ज्यादा घर पानी में डूब गए हैं। अगर नेपाल में दूसरा ग्लेशियर टूटा तो बिहार में हालात खराब हो जाएंगे। क्योंकि अभी ही नदियों में पानी काफी बढ़ गया है। आगे पानी आने पर तबाही ही मचेगी। CM सम्राट चौधरी ने 27 अगस्त को निरीक्षण करने के बाद कहा, ‘खतरा अभी टला नहीं है। भगवान की कृपा रही तो सब ठीक होगा।’ 2. अगले 5 दिन तक बिहार और नेपाल में बारिश का अलर्ट नेपाल और बिहार में अगले 5 दिन तक यानी 2 सितंबर तक बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज यानी 28 अगस्त को बिहार में तेज बारिश का अलर्ट है। वहीं, नेपाल में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। हालांकि, 29 अगस्त से 2 सितंबर तक नेपाल और बिहार में रुक-रुक कर धीमी बारिश की चेतावनी दी गई है। अगर मौसम विभाग का अनुमान सही साबित हुआ तो यह बिहार के गंडक, कोसी, गंगा के किनारे रहने वाले लोगों को खासा दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। …लेकिन राहत की 2 बातें पहली- बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के मुताबिक, नेपाल की सभी 22 नदियों का जलस्तर 27 अगस्त की शाम 5 बजे तक खतरे के निशान से नीचे हैं। खास बात है कि त्रिशूली यानी नारायणी और भोटेकोशी यानी सप्तकोशी नदी खतरे के निशान से क्रमशः 4 और 3 फीट नीचे बह रही है। मतलब अभी वहां नदियों में ज्यादा पानी नहीं है। अगर थोड़ी बारिश हुई भी तो नदियां उफान नहीं मारेंगी, बशर्ते ग्लेशियर या बादल न फट जाए। दूसरी- जल संसाधन विभाग के मुताबिक, गंडक बैराज का अपस्ट्रीम 353.770 फीट और डाउनस्ट्रीम 350.930 फीट है। जो तय मानक 362 फीट से करीब 8 फीट कम है। इसका मतलब हुआ कि अभी बैराज पर 8 फीट ज्यादा तक पानी स्टोर किया जा सकता है। अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम के पानी के स्तर में मामूली अंतर (2.84 फीट) बता रहा है कि बांध के गेट खुले हुए हैं और बांध पर ज्यादा दबाव नहीं है। मतलब पानी की गति सामान्य व नियंत्रित है।
Sanjay Dutt Rakshabandhan Memories | Sisters Tied Rakhi in Thane Jail

9 मिनट पहले कॉपी लिंक सुनील दत्त और नरगिस के तीनों बच्चों में संजय दत्त सबसे बड़े हैं, नम्रता दत्त मंझली हैं और प्रिया दत्त सबसे छोटी हैं। रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है। भाई भी अपनी बहन को कुछ न कुछ गिफ्ट देता है, लेकिन संजय दत्त की जिंदगी में एक रक्षाबंधन ऐसा भी आया था, जब उनकी बहनों ने उन्हें जेल में राखी बांधी और उन्हें तोहफे में 2-2 रुपए के कूपन दिए थे। बहन प्रिया दत्त (बाईं ओर) और नम्रता दत्त (दाईं ओर) के साथ संजय दत्त की पुरानी तस्वीर। 1994 में संजय दत्त ठाणे सेंट्रल जेल में थे बात जुलाई 1994 की है। अवैध हथियार रखने के मामले में संजय दत्त की अंतरिम जमानत रद्द हो गई थी। इसके बाद उन्हें ठाणे सेंट्रल जेल भेज दिया गया। उन्हें जेल की सबसे कड़ी सुरक्षा वाली अंडा बैरक में रखा गया था। यहां खतरनाक अपराधियों और टाडा के आरोपियों को रखा जाता था। संजय दत्त पर लिखी यासिर उस्मान की किताब के मुताबिक, संजय दत्त जिस बैरक में थे, वह करीब 10×10 फीट की थी। वहां न धूप आती थी और न बाहर की दुनिया दिखाई देती थी। कमरे में एक छोटा बल्ब, गद्दा और बिना फ्लश वाला शौचालय था। संजय ने बाद में बताया था कि जेल में शुरुआती डेढ़ महीने काफी मुश्किल रहे। उन्हें दूसरे कैदियों से मिलने की इजाजत भी नहीं थी। अकेलापन इतना ज्यादा था कि वह समय बिताने के लिए घंटों चींटियों को चलते देखते थे। इस मुश्किल समय में उनके पिता सुनील दत्त बेटे की जमानत के लिए लगातार कोशिश कर रहे थे। वहीं उनकी बहनें प्रिया और नम्रता भी संजय से मिलने जेल जाती थीं। कई बार उन्हें भाई से दूर से ही मिलने का मौका मिलता था। वहीं, रक्षाबंधन पर बहनों ने जेल में उन्हें राखी बांधी। उस समय संजय के पास देने के लिए कोई तोहफा नहीं था। उन्होंने अपनी बहनों को सिर्फ जेल की कैंटीन के दो-दो रुपए वाले चाय-नाश्ते के कूपन दिए और कहा था, ‘मेरे पास फिलहाल यही है।’ बता दें कि संजय दत्त और उनकी बहनों के रिश्ते में उतार-चढ़ाव आए। साल 2008 में संजय दत्त ने मान्यता दत्त से शादी की थी। शुरुआत में परिवार के कुछ सदस्यों ने इस रिश्ते को आसानी से स्वीकार नहीं किया था। प्रिया और मान्यता के बीच भी कुछ समय तक दूरी रही। संजय के राजनीति में आने को लेकर भी प्रिया से उनके मतभेद सामने आए थे। लेकिन बाद में परिवार में रिश्ते सुधरते गए। संजय और मान्यता के जुड़वां बच्चों के जन्म के बाद दूरियां कम हुईं। साल 2020 में संजय दत्त को कैंसर हुआ, तो उनकी बहनें फिर उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं। प्रिया और नम्रता ने इलाज के दौरान भाई का साथ दिया। ……….. यह खबर भी पढ़ें… ‘अरे बेवकूफों, क्या एक मुसलमान, मुसलमान को राखी बांधता है?’: पत्नी जरीना वहाब को दाऊद इब्राहिम से जोड़ने पर भड़के थे आदित्य पंचोली 2000 के दशक में कुछ हिंदी अखबारों और मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि मुंबई में आदित्य पंचोली की ‘दादागिरी’ इसलिए चलती है क्योंकि उनकी पत्नी और अभिनेत्री जरीना वहाब अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को राखी बांधती हैं। इस दावे पर आदित्य पंचोली ने कड़ी नाराजगी जताई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Sanjay Dutt Rakshabandhan Memories | Sisters Tied Rakhi in Thane Jail

1 घंटे पहले कॉपी लिंक सुनील दत्त और नरगिस के तीनों बच्चों में संजय दत्त सबसे बड़े हैं, नम्रता दत्त मंझली हैं और प्रिया दत्त सबसे छोटी हैं। रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है। भाई भी अपनी बहन को कुछ न कुछ गिफ्ट देता है, लेकिन संजय दत्त की जिंदगी में एक रक्षाबंधन ऐसा भी आया था, जब उनकी बहनों ने उन्हें जेल में राखी बांधी और उन्हें तोहफे में 2-2 रुपए के कूपन दिए थे। बहन प्रिया दत्त (बाईं ओर) और नम्रता दत्त (दाईं ओर) के साथ संजय दत्त की पुरानी तस्वीर। 1994 में संजय दत्त ठाणे सेंट्रल जेल में थे बात जुलाई 1994 की है। अवैध हथियार रखने के मामले में संजय दत्त की अंतरिम जमानत रद्द हो गई थी। इसके बाद उन्हें ठाणे सेंट्रल जेल भेज दिया गया। उन्हें जेल की सबसे कड़ी सुरक्षा वाली अंडा बैरक में रखा गया था। यहां खतरनाक अपराधियों और टाडा के आरोपियों को रखा जाता था। संजय दत्त पर लिखी यासिर उस्मान की किताब के मुताबिक, संजय दत्त जिस बैरक में थे, वह करीब 10×10 फीट की थी। वहां न धूप आती थी और न बाहर की दुनिया दिखाई देती थी। कमरे में एक छोटा बल्ब, गद्दा और बिना फ्लश वाला शौचालय था। संजय ने बाद में बताया था कि जेल में शुरुआती डेढ़ महीने काफी मुश्किल रहे। उन्हें दूसरे कैदियों से मिलने की इजाजत भी नहीं थी। अकेलापन इतना ज्यादा था कि वह समय बिताने के लिए घंटों चींटियों को चलते देखते थे। इस मुश्किल समय में उनके पिता सुनील दत्त बेटे की जमानत के लिए लगातार कोशिश कर रहे थे। वहीं उनकी बहनें प्रिया और नम्रता भी संजय से मिलने जेल जाती थीं। कई बार उन्हें भाई से दूर से ही मिलने का मौका मिलता था। वहीं, रक्षाबंधन पर बहनों ने जेल में उन्हें राखी बांधी। उस समय संजय के पास देने के लिए कोई तोहफा नहीं था। उन्होंने अपनी बहनों को सिर्फ जेल की कैंटीन के दो-दो रुपए वाले चाय-नाश्ते के कूपन दिए और कहा था, ‘मेरे पास फिलहाल यही है।’ बता दें कि संजय दत्त और उनकी बहनों के रिश्ते में उतार-चढ़ाव आए। साल 2008 में संजय दत्त ने मान्यता दत्त से शादी की थी। शुरुआत में परिवार के कुछ सदस्यों ने इस रिश्ते को आसानी से स्वीकार नहीं किया था। प्रिया और मान्यता के बीच भी कुछ समय तक दूरी रही। संजय के राजनीति में आने को लेकर भी प्रिया से उनके मतभेद सामने आए थे। लेकिन बाद में परिवार में रिश्ते सुधरते गए। संजय और मान्यता के जुड़वां बच्चों के जन्म के बाद दूरियां कम हुईं। साल 2020 में संजय दत्त को कैंसर हुआ, तो उनकी बहनें फिर उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं। प्रिया और नम्रता ने इलाज के दौरान भाई का साथ दिया। ……….. यह खबर भी पढ़ें… ‘अरे बेवकूफों, क्या एक मुसलमान, मुसलमान को राखी बांधता है?’: पत्नी जरीना वहाब को दाऊद इब्राहिम से जोड़ने पर भड़के थे आदित्य पंचोली 2000 के दशक में कुछ हिंदी अखबारों और मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि मुंबई में आदित्य पंचोली की ‘दादागिरी’ इसलिए चलती है क्योंकि उनकी पत्नी और अभिनेत्री जरीना वहाब अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को राखी बांधती हैं। इस दावे पर आदित्य पंचोली ने कड़ी नाराजगी जताई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Aditya Pancholi Controversy | Zarina Wahab Dawood Ibrahim Rakhi Rumor

8 मिनट पहले कॉपी लिंक जरीना वहाब का जन्म 1959 में हुआ था और आदित्य पंचोली का 1965 में। जरीना उम्र में आदित्य से 6 साल बड़ी हैं। 2000 के दशक में कुछ हिंदी अखबारों और मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि मुंबई में आदित्य पंचोली की ‘दादागिरी’ इसलिए चलती है क्योंकि उनकी पत्नी और अभिनेत्री जरीना वहाब अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को राखी बांधती हैं। इस दावे पर आदित्य पंचोली ने कड़ी नाराजगी जताई थी। आप की अदालत में दिए एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “मेरी बीवी 17 साल की उम्र से फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रही है। एक भी उंगली आज तक उस पर नहीं उठी। वह एक मुस्लिम औरत है। मैं बोलता हूं, वो पाक है, देवी है।” उन्होंने आगे कहा था, “उसके बारे में लिखा गया कि वो इसलिए दादागिरी करता है क्योंकि आदित्य पंचोली की बीवी जरीना वहाब, दाऊद इब्राहिम को राखी बांधती है। अरे बेवकूफों, लिखने से पहले सोचो, क्या एक मुसलमान, मुसलमान को राखी बांधता है?” आदित्य और जरीना की मुलाकात 1986 में हुई थी आदित्य पंचोली और जरीना वहाब की लव स्टोरी बॉलीवुड की सबसे चर्चित और अनोखी कहानियों में से एक है। दोनों की पहली मुलाकात साल 1986 में नारी हीरा की वीडियो फिल्म ‘कलंक का टीका’ के सेट पर हुई थी। जरीना वहाब के मुताबिक, आदित्य उनसे उम्र में लगभग 5 साल छोटे थे और पहली मुलाकात में ही उन्हें बेहद हैंडसम लगे थे। फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आए और उन्हें प्यार हो गया। दोनों का प्यार इस कदर परवान चढ़ा कि पहली मुलाकात के महज 15 से 20 दिनों के अंदर ही दोनों ने साल 1986 में शादी कर ली। यह शादी उस दौर में इसलिए भी बहुत चर्चा में रही क्योंकि जरीना मुस्लिम थीं और आदित्य हिंदू। शादी के बाद आदित्य पंचोली का नाम कुछ अभिनेत्रियों के साथ जुड़ा, जिनमें 1993 में पूजा बेदी और 2004 के दौरान कंगना रनोट के साथ उनके रिश्ते काफी विवादों में रहे। जरीना की मां रिश्ते को लेकर चिंतित थीं जरीना ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी मां शुरुआत में इस रिश्ते को लेकर काफी चिंतित थीं, क्योंकि आदित्य दूसरे धर्म के थे और उम्र में छोटे थे। लेकिन जरीना ने अपनी मां को समझाते हुए कहा था, “‘मां, हिंदू-मुसलमान सब एक जैसे हैं। आप ही कहती हैं कि अल्लाह की मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। तो मेरी जिंदगी का इतना बड़ा फैसला भी अल्लाह ने ही लिया है। यह फैसला मैंने नहीं, उन्होंने लिया है।’” जरीना की बात सुनकर उनके परिवार ने इस शादी को स्वीकार कर लिया। जरीना ने लहरें को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उनकी शादी निकाह के तरीके से हुई थी। जब उनसे पूछा गया था कि क्या आदित्य ने इस्लाम कबूल किया था, तो उन्होंने कहा, “उन्होंने धर्म नहीं बदला था, लेकिन मुस्लिम रीति के अनुसार उन्हें अपना नाम बदलना पड़ा था, इसलिए उन्होंने ऐसा किया।” आदित्य पंचोली का असली नाम निर्मल पंचोली है। जरीना वहाब ने बताया था कि उनकी बेटी का नाम सना एक पाकिस्तानी शो के किरदार से प्रेरित था। वहीं बेटे का नाम सूरज रखा गया, क्योंकि आदित्य की एक फिल्म में उनके किरदार का नाम सूरज था। बच्चों के नाम मुस्लिम या हिंदू रखने को लेकर परिवार में कोई चर्चा नहीं हुई। जरीना ने कहा था कि सना और सूरज को अपनी धार्मिक पहचान खुद चुनने की आजादी दी गई। जरीना वहाब और आदित्य पंचोली के दो बच्चे बेटा सूरज पंचोली और बेटी सना हैं। दोनों के करियर की बात करें तो जरीना वहाब ने 1970 के दशक में फिल्मों में पहचान बनाई। 1976 की ‘चितचोर’ और 1977 की ‘घरौंदा’ उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल हैं। ‘घरौंदा’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस के लिए नॉमिनेशन भी मिला था। उन्होंने हिंदी के साथ मलयालम और दूसरी भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया। बाद में टीवी और फिल्मों में चरित्र भूमिकाओं में भी नजर आईं। वहीं आदित्य पंचोली ने 1980 के दशक में अभिनय की शुरुआत की। ‘दयावान’, ‘कब तक चुप रहूंगी’, ‘कातिल’ जैसी फिल्मों से उन्होंने पहचान बनाई। आगे चलकर ‘यस बॉस’, ‘बॉडीगार्ड’, ‘रेस 2’, ‘जय हो’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। उनके करियर में हीरो के साथ-साथ विलेन और कैरेक्टर रोल भी अहम रहे। ……….. यह खबर भी पढ़ें… जब जेल में बहनों ने बांधी संजय दत्त को राखी: रक्षाबंधन पर बहनों को तोहफे में दिए थे चाय-नाश्ते के 2-2 रुपए के कूपन रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है। भाई भी अपनी बहन को कुछ न कुछ गिफ्ट देता है, लेकिन संजय दत्त की जिंदगी में एक रक्षाबंधन ऐसा भी आया था, जब उनकी बहनों ने उन्हें जेल में राखी बांधी और उन्हें तोहफे में 2-2 रुपए के कूपन दिए थे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Disha Patani Success Story Facts; Heropanti Rejection

23 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक मॉडलिंग से अभिनय तक, दिशा पाटनी ने हर पड़ाव पर खुद को साबित किया और ग्लैमर के साथ एक्शन व अलग-अलग किरदारों में भी अपनी पहचान बनाई। दिशा पाटनी की बॉलीवुड तक पहुंचने की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बरेली से निकलकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बीच मॉडलिंग शुरू करने वाली दिशा 500 रुपए लेकर मुंबई पहुंची थीं। यहां उन्हें लगातार ऑडिशन देने पड़े और ‘हीरोपंती’ का ऑडिशन फेल हो गया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और इंजीनियरिंग छोड़कर एक्टिंग को करियर बना लिया। 2015 में ‘लोफर’ से फिल्मी सफर शुरू हुआ, लेकिन 2016 की ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई। इसके बाद ‘बागी 2’, ‘भारत’, ‘मलंग’ और ‘कल्कि 2898 एडी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया। हाल में उनकी मल्टीस्टार फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ और ‘अवारापन 2’ रिलीज हुई है। आज की सक्सेस स्टोरी में दिशा पाटनी की निजी जिंदगी और करियर से जुड़ी कुछ और खास बातें… बरेली में जन्म, पुलिस अधिकारी पिता और हेल्थ इंस्पेक्टर मां का परिवार दिशा पाटनी का जन्म 13 जून 1992 को उत्तर प्रदेश के बरेली में हुआ। उनका परिवार उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की राजपूत पृष्ठभूमि से आता है। उनके पिता जगदीश सिंह पाटनी पुलिस अधिकारी और मां हेल्थ इंस्पेक्टर हैं। बड़ी बहन खुशबू पाटनी भारतीय सेना में मेजर रह चुकी हैं और फिटनेस से भी जुड़ी हैं। छोटा भाई सूर्यांश पाटनी है। जिस दुनिया में दिशा बाद में ग्लैमर और फिल्म स्टारडम के लिए पहचानी गईं, उसकी शुरुआत एक सामान्य और अनुशासित पारिवारिक माहौल से हुई थी। फैमिली फोटो में दिशा पाटनी अपने पिता, मां, बहन और भाई के साथ। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बीच आया मॉडलिंग का मौका दिशा ने लखनऊ की एमिटी यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की थी। लेकिन उनकी जिंदगी में ऐसा मोड़ आया, जिसने उन्हें पढ़ाई से कैमरे की दुनिया तक पहुंचा दिया। दिशा ने बाद में ‘आज तक’ को दिए इंटरव्यू में बताया था कि वह नोएडा से बीटेक कर रही थीं और सेकेंड ईयर में उन्हें मॉडलिंग के ऑफर मिलने लगे। इन्हीं ऑफर्स से उनका मुंबई आना-जाना शुरू हुआ। पढ़ाई और मॉडलिंग के बीच संतुलन बनाना मुश्किल होता गया। आखिरकार उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई दूसरे साल में छोड़ दी और मॉडलिंग को करियर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। तब शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि कैमरे के सामने किया यह काम आगे चलकर उन्हें बॉलीवुड के बड़े सितारों के बीच पहुंचा देगा। 18 साल की उम्र में मॉडलिंग, फिर मिस इंडिया तक पहुंचीं दिशा ने कम उम्र में मॉडलिंग शुरू कर दी थी। 2020 में ‘फिल्मीबीट’ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्होंने 18 साल की उम्र में मॉडल के तौर पर काम शुरू किया था। उनके मुताबिक उस समय उन पर कई जिम्मेदारियां थीं और उन्होंने परिवार पर आर्थिक रूप से निर्भर रहने के बजाय खुद काम करके अपना खर्च संभाला। 19 साल की उम्र में जब वह मुंबई आई थीं, तब शहर में उन्हें कोई जानने वाला नहीं था। फिल्मी परिवार से न होने के कारण उन्हें अपना रास्ता खुद बनाना था। वह अकेली रहती थीं, ऑडिशन देती थीं और अपनी जरूरतों का खर्च खुद उठाती थीं। मुंबई आने के समय उनके पास सिर्फ 500 रुपए थे। टीवी विज्ञापनों के ऑडिशन रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए थे। किराया देने का दबाव इतना था कि उनके लिए हर काम पहले नौकरी जैसा था। मॉडलिंग के दौरान दिशा ने कई विज्ञापनों में काम किया। 2013 में उन्होंने पॉन्ड्स फेमिना मिस इंडिया इंदौर प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और फर्स्ट रनर-अप रहीं। इससे उन्हें मॉडलिंग में और पहचान मिली। दिशा का लक्ष्य सिर्फ रैंप तक सीमित नहीं था। कैमरे के सामने काम करते हुए उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें एक्टिंग ज्यादा पसंद है। मॉडलिंग उनके लिए मंजिल के बजाय बॉलीवुड तक पहुंचने का रास्ता बनने लगी। पहला ऑडिशन सफल नहीं हुआ, ‘हीरोपंती’ में मौका हाथ से निकला दिशा की कहानी का दिलचस्प हिस्सा यह है कि उनका पहला बड़ा फिल्मी ऑडिशन सफल नहीं हुआ था। उन्होंने टाइगर श्रॉफ की डेब्यू फिल्म ‘हीरोपंती’ के लिए ऑडिशन दिया था। उस समय दिशा और टाइगर एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे। ‘बॉलीवुड हंगामा’ को दिए इंटरव्यू में दिशा ने बताया था कि उस समय वह पढ़ाई कर रही थीं और एक शूट के सिलसिले में मुंबई आई थीं। वह खुद को एक्टर नहीं मानती थीं और एक्टिंग के बारे में ज्यादा नहीं जानती थीं। उन्हें सिर्फ ऑडिशन के लिए बुलाया गया था। दिशा ने माना कि उनका ऑडिशन खराब था। उन्होंने यह भी बताया कि वह फिल्म के बारे में ज्यादा नहीं जानती थीं और मुंबई शिफ्ट भी नहीं हुई थीं। जिस फिल्म से टाइगर श्रॉफ का बॉलीवुड डेब्यू हुआ, उसी फिल्म में दिशा का सफर शुरू नहीं हो सका। लेकिन यह असफलता आगे की कहानी में अहम साबित हुई, क्योंकि दिशा रुकी नहीं। फिल्म ‘लोफर’ में दिशा पाटनी ने साउथ एक्टर वरुण तेज के साथ काम किया था। तेलुगु फिल्म ‘लोफर’ से एक्टिंग डेब्यू 2015 में दिशा को फिल्मी दुनिया में पहला बड़ा मौका मिला। उन्होंने पुरी जगन्नाध की तेलुगु फिल्म ‘लोफर’ में वरुण तेज के साथ काम किया। फिल्म में उन्होंने मौनी का किरदार निभाया था। यहीं से उनका आधिकारिक एक्टिंग करियर शुरू हुआ। ‘लोफर’ बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी। लेकिन दिशा के लिए यह फिल्म महत्वपूर्ण थी, क्योंकि उन्हें पहली बार बड़े पर्दे पर खुद को साबित करने का मौका मिला था। कई कलाकारों के लिए पहली फिल्म की असफलता करियर रोक देती है। दिशा के मामले में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने अगले मौके का इंतजार किया और वही फिल्म उनके करियर की बड़ी शुरुआती सीढ़ी बनी। ‘एमएस धोनी’ ने बदली किस्मत 2016 में दिशा को वह फिल्म मिली जिसने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई- ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’। नीरज पांडे निर्देशित इस फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत ने महेंद्र सिंह धोनी की भूमिका निभाई थी। दिशा ने प्रियंका झा का किरदार निभाया, जो धोनी की जिंदगी का बेहद भावनात्मक अध्याय था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता साबित हुई और दिशा के काम







