Saturday, 17 Oct 2026 | 06:16 PM

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Apple CEO Tim Cook Resigns & Lionel Messi Retires From Football

Apple CEO Tim Cook Resigns & Lionel Messi Retires From Football

Hindi News Career Apple CEO Tim Cook Resigns & Lionel Messi Retires From Football | Current Affairs 6 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. टिम कुक ने Apple के CEO का छोड़ा 1 सितंबर को टिम कुक ने Apple के CEO का पद छोड़ दिया है। अब वे Apple के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालेंगे। टिम अब एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर ग्लोबल पॉलिसी से जुड़े काम करेंगे । टिम कुक की जगह पर अब जॉन टर्नस Apple के नए CEO बन गए हैं। टिम कुक ने अगस्त 2011 में स्टीव जॉब्स के बाद CEO का पद संभाला था। टिम1998 में टिम Apple के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बने थे। टिम 2011 से 2026 CEO के रूप में Apple वॉच, एयरपॉडस, Apple विजन प्रो, Apple पे, Apple म्यूजिक, Apple टीवी का विस्तार किया। जॉन टर्नस ने Apple के पूर्व सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रहे हैं। हाल ही में उनकी टीम ने अल्ट्राथिन iPhone Air और नए MacBook Neo को लॉन्च किया है। टिम कुक की जगह पर अब जॉन टर्नस Apple के नए CEO बन गए हैं। 2. पीएम मोदी SCO शिखर सम्मेलन में शामिल हुए 1 सितंबर को पीएम नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। ये समिट SCO के 25 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित की गई है। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। SCO देशों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी, बिजनेस और इंवेस्टमेंट बढ़ाने के लिए काम करता है। इस SCO समिट का मुख्य उद्देश्य सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी पर बात करना है। PM मोदी ने इस बैठक में आतंकवाद के खिलाफ एकजुट और सख्त कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। इस समिट में पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अन्य नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकातें भी की। SCO की स्थापना 2001 में हुई थी और इसका मुख्यालय मुख्यालय चीन के बीजिंग में है। अपॉइंटमेंट (APPOINTMENT) 3. जॉर्ज कूवर पारले बिस्किट्स के पहले CEO अपॉइंट हुए 1 सितंबर को पारले बिस्किट्स ने पेप्सिको के पूर्व जॉर्ज कूवर को अपना CEO अपॉइंट किया है। कूवर ने पेप्सिको में तीन दशक से ज्यादा समय तक काम किया है। कूवर के पास 30 साल से ज्यादा का अनुभव है और उन्होंने कई ग्लोबल मार्केट्स में जिम्मेदारी संभाली है। पारले का डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क भारत में 75 लाख से ज्यादा रिटेल आउटलेट तक फैला है। कंपनी ने एशिया और अफ्रीका समेत इंटरनेशनल मार्केट्स में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। 1929 में मुंबई के विले पारले में पारले की शुरूआत हुई थी। पारले बिस्किट और कन्फेक्शनरी के कारोबार में है। पारले के ब्रांड्स में पारले-जी, मोनाको, क्रैकजैक, हाइड एंड सीक और मेलोडी शामिल हैं। पारले-जी बिक्री की मात्रा के हिसाब से दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाले बिस्किट ब्रांड्स में शामिल है। पेप्सिको में उन्होंने कंज्यूमर बिजनेस और अलग-अलग बाजारों से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। स्पोर्ट्स (SPORTS) 4. लियोनेल मेसी ने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास लिया 1 सितंबर को स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी ने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास लिया। मेसी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर हाथ से लिखे नोट की तस्वीर के साथ संन्यास का ऐलान किया। 39 साल के मेसी ने बताया कि फाइनल के 2 दिन बाद 21 जुलाई को ही उन्होंने संन्यास का फैसला लिख लिया था। मेसी ने अपना आखिरी मैच वर्ल्ड कप फाइनल स्पेन के खिलाफ हार मिली थी। मेसी 2005 में अर्जेंटीना के लिए डेब्यू किया था। वे टीम के लिए 6 वर्ल्ड कप खेले चुके हैं। मेसी ने 2022 में कतर में अर्जेंटीना को वर्ल्ड कप जिताया था। अर्जेंटीना ने 36 साल बाद तीसरा वर्ल्ड कप जीता था। मेसी ने 2021 कोपा अमेरिका भी जीता था, जो अर्जेंटीना के इतिहास में 28 साल बाद आया था। मेसी अर्जेंटीना के सबसे ज्यादा गोल करने वाले और सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी हैं। मिसलिनीयस केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव जर्मन पर्यावरण मंत्री से मिले 1 सितंबर को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में जर्मनी के पर्यावरण मंत्री कारस्टेन श्नाइडर से मुलाकात की। यह बैठक चौथे भारत-जर्मन पर्यावरण फोरम के दौरान हुई। इसमें जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत और जर्मनी के बीच ग्रीन डेवलपमेंट विकास के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसमें रिन्यूएबल एनर्जी, क्लाइमेट एक्शन और एनवायरमेंटल टेकनीक पर काम करना शामिल है। इस बैठक में दोनों पक्षों ने इंडस्ट्रियल डीकार्बोनाइजेशन और क्लाइमेट चेंज से जुड़ी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में वेटलैंड संरक्षण पर विशेष चर्चा की गई। आज का इतिहास अकबर ने 1573 में गुजरात फतह किया। 1798 में अंग्रेजो ने हैदराबाद के निजाम के साथ समझौता किया। 1946 में जवाहर लाल नेहरू के उप सभापतित्व में अंतरिम भारत सरकार का गठन हुआ। 1999 में भारतीय तैराक बुला चौधरी इंग्लिश चैनल दो बार पार करने वाली प्रथम एशियाई महिला बनीं। ————————– ये खबर भी पढ़ें.. 1 सितंबर के करेंट अफेयर्स:कचरे से ग्रीन एनर्जी बनाएगा इंडियन ऑइल, जर्मनी ने दूसरी बार हॉकी वर्ल्ड कप जीता आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं-पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल में बाढ़ के एक हफ्ते बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आपदा में लापता लोगों की तलाश के बावजूद कई परिवारों को अपने परिजनों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। कई इलाकों में कीचड़ और मलबा जमा होने से राहत कार्य मुश्किल बना हुआ है। 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद अब तक 1,068 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें 400 के केवल आंशिक अवशेष मिले हैं। करीब 4,606 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 500 विदेशी नागरिक हैं। नेपाल में सड़क और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कई चीनी नागरिक लापता हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में करीब 100 चीनी नागरिकों का अब तक पता नहीं चला है। नेपाल और चीन के प्रभावित परिवारों की मांग है कि उनके परिजनों की सही और स्पष्ट जानकारी दी जाए। एक नेपाली लड़की ने बताया कि इस आपदा में उसने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। बाढ़ प्रभावित बिदुर में विस्थापित परिवार अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी दोबारा बाढ़ आने का डर सता रहा है। नेपाल त्रासदी की 4 तस्वीरें… नेपाल के 5 लोगों के शव यूपी में मिले उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से मिले नेपाल के पांच नागरिकों के शव मंगलवार को सोनौली सीमा पर सौंपे गए। ये लोग नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बह गए थे। शव नेपाल पुलिस को सौंपे गए। इनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष हैं। नेपाल में शव जलाने की बजाय दफनाए जा रहे नेपाल में बाढ़ के बाद सैकड़ों अज्ञात शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि शवों के अवशेष सुरक्षित रहें और DNA जांच से पहचान कर परिजनों को सौंपे जा सकें। दरअसल, पानी और कीचड़ में लंबे समय तक दबे रहने से शवों की हालत बहुत खराब हो चुकी है। कई शव पानी में फूल गए हैं और तेजी से सड़ रहे हैं। इससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। दूसरी तरफ शवगृह और अस्थायी केंद्र भी शवों से भर चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव नहीं है। यही वजह है कि अज्ञात शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाया जा रहा है।

नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल में बाढ़ के एक हफ्ते बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आपदा में लापता लोगों की तलाश के बावजूद कई परिवारों को अपने परिजनों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। कई इलाकों में कीचड़ और मलबा जमा होने से राहत कार्य मुश्किल बना हुआ है। 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद अब तक 1,068 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें 400 के केवल आंशिक अवशेष मिले हैं। करीब 4,606 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 500 विदेशी नागरिक हैं। नेपाल में सड़क और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कई चीनी नागरिक लापता हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में करीब 100 चीनी नागरिकों का अब तक पता नहीं चला है। नेपाल और चीन के प्रभावित परिवारों की मांग है कि उनके परिजनों की सही और स्पष्ट जानकारी दी जाए। एक नेपाली लड़की ने बताया कि इस आपदा में उसने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। बाढ़ प्रभावित बिदुर में विस्थापित परिवार अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी दोबारा बाढ़ आने का डर सता रहा है। नेपाल के 5 लोगों के शव यूपी में मिले उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से मिले नेपाल के पांच नागरिकों के शव मंगलवार को सोनौली सीमा पर सौंपे गए। ये लोग नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बह गए थे। शव नेपाल पुलिस को सौंपे गए। इनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष हैं। नेपाल में शव जलाने की बजाय दफनाए जा रहे नेपाल में बाढ़ के बाद सैकड़ों अज्ञात शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि शवों के अवशेष सुरक्षित रहें और DNA जांच से पहचान कर परिजनों को सौंपे जा सकें। दरअसल, पानी और कीचड़ में लंबे समय तक दबे रहने से शवों की हालत बहुत खराब हो चुकी है। कई शव पानी में फूल गए हैं और तेजी से सड़ रहे हैं। इससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। दूसरी तरफ शवगृह और अस्थायी केंद्र भी शवों से भर चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव नहीं है। यही वजह है कि अज्ञात शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाया जा रहा है।

A 15-year-old is running for governor. His goal isn’t to win, but to raise the voice of Jane G.

A 15-year-old is running for governor. His goal isn't to win, but to raise the voice of Jane G.

Hindi News International A 15 year old Is Running For Governor. His Goal Isn’t To Win, But To Raise The Voice Of Jane G. अमेरिका7 घंटे पहले कॉपी लिंक जहां 15 साल की उम्र में ज्यादातर किशोर पढ़ाई, दोस्त व सोशल मीडिया में व्यस्त रहते हैं, वहीं अमेरिका के वरमोंट का छात्र डीन रॉय अनोखा रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। डीन अभी न वोट दे सकते हैं, न अकेले कार चला सकते हैं, पर नवंबर में होने वाले चुनाव में उनका नाम वरमोंट के गवर्नर पद के आधिकारिक प्रत्याशी के रूप में बैलेट पेपर पर होगा। इतनी कम उम्र में चुनावी मैदान में उतरकर उन्होंने सभी का ध्यान खींच लिया है। डीन रॉय ने डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियों की पारंपरिक राजनीति से अलग हटकर अपनी एक नई पार्टी बनाई है… ‘फ्रीडम एंड यूनिटी पार्टी’। वे मानते हैं कि बुजुर्ग राजनेताओं ने युवा पीढ़ी की बुनियादी समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। डीन का कहना है, ‘हमारा मकसद चुनाव जीतना ही नहीं, बल्कि ऐसा असर छोड़ना है कि सत्ता में बैठे शीर्ष नेताओं को युवाओं की आवाज सुनने के लिए मजबूर होना पड़े।’ न्यू हैंपशायर यूनिवर्सिटी के सर्वे में डीन को 3% समर्थन मिलता दिखा है, जो 15 वर्षीय निर्दलीय हाई स्कूल छात्र के लिए चौंकाने वाला आंकड़ा है। डीन पढ़ाई के साथ पैरेंट्स के पिज्जा रेस्त्रां में भी मदद करते हैं। सोशल मीडिया पर वे बेबाक और संतुलित विचारों के कारण तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। किसी एक विचारधारा से बंधने के बजाय वे मुद्दों के आधार पर राय रखते हैं। अरबपतियों की संपत्ति पर सीमा लगाने की बात करने वाले डीन बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सरकारी रोक के भी विरोधी हैं। डीन मानते हैं कि लोकप्रिय गवर्नर फिल स्कॉट को हराना मुश्किल है, पर उनकी उम्मीदवारी युवाओं की राजनीतिक भागीदारी व नई सोच का संकेत है। चुनाव के बाद कॉलेज जाएं या सक्रिय राजनीति में उतरें, इसका फैसला करने के लिए उनके पास अभी पर्याप्त समय है। चुनौती की तरह लिया शिक्षक का मजाक वरमोंट राज्य के संविधान में गवर्नर बनने के लिए न्यूनतम आयु की कोई बाध्यता नहीं है। 8वीं कक्षा में राज्य विधानसभा में इंटर्नशिप के दौरान जब एक शिक्षक ने मजाक में उनसे चुनाव लड़ने को कहा, तो डीन ने इसे चुनौती की तरह लिया। उन्होंने नियमों की पड़ताल की और मां चेसी के साथ पोस्ट ऑफिस के बाहर खड़े होकर लोगों से बात की। चुनाव लड़ने के लिए जरूरी 500 वोटर्स के साइन जुटाए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Harshita Gaur Depression Struggle | Mirzapur Actress Allu Arjun Praise

Harshita Gaur Depression Struggle | Mirzapur Actress Allu Arjun Praise

20 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक ‘डिंपी’ के किरदार ने हर्षिता गौर को घर-घर पहचान दिलाई। ‘मिर्जापुर’ की डिंपी यानी हर्षिता गौर लंबे समय से दर्शकों के बीच पहचान बना चुकी हैं। ‘साड्डा हक’ के बाद उन्हें करीब एक साल तक काम नहीं मिला। इस दौर में उन्हें खुद भी पता नहीं था कि वह डिप्रेशन से गुजर रही हैं। एक्टिंग वर्कशॉप ने उन्हें इससे बाहर निकलने में मदद की। ‘मिर्जापुर’ ने उनके करियर को नई पहचान दी और अब वह फिल्म के जरिए बड़े पर्दे पर नजर आएंगी। दैनिक भास्कर से बातचीत में हर्षिता ने करियर के उतार-चढ़ाव, लॉकडाउन, खुद को पहचानने की सीख और 2022 में अल्लू अर्जुन से हुई खास मुलाकात का किस्सा साझा किया। सवाल: ‘साड्डा हक’ के बाद आपके करियर में सबसे मुश्किल दौर कौन सा रहा? जवाब: ‘साड्डा हक’ खत्म होने के बाद करीब एक साल तक मेरे पास काम नहीं था। शो तीन साल चला था और मुझे लगा था कि अब फिल्मों में काम करूंगी। लेकिन काम मिलना आसान नहीं था। शुरुआत के एक-दो महीने घूमने-फिरने में निकल गए। उसके बाद मुंबई में बिना काम के रहना एक एक्टर के लिए काफी मुश्किल होता है। उस समय मैं डिप्रेशन में चली गई थी। सवाल: उस समय आपको पता था कि आप डिप्रेशन में जा रही हैं? जवाब: नहीं, उस समय मुझे बिल्कुल एहसास नहीं था। बाद में डिप्रेशन के लक्षणों के बारे में पता चला तो पीछे मुड़कर समझ आया कि मेरे साथ भी ऐसा ही हो रहा था। मैं मुंबई वाले घर में ही रहती थी। एक दिन पड़ोस वाली आंटी आईं और उन्होंने कहा कि काफी दिनों से दिखाई नहीं दीं। तब भी मैं किसी को ठीक से नहीं बता पा रही थी कि मेरे साथ क्या हो रहा है। एक्टिंग वर्कशॉप ने हर्षिता गौर को मुश्किल दौर से उबरने में मदद की। सवाल: फिर इस दौर से बाहर कैसे निकलीं? जवाब: मैंने अतुल मंगिया के सजेस्ट करने पर एक एक्टिंग वर्कशॉप की। मैं आज भी उन्हें अपना गुरु मानती हूं। उन्होंने मुझे एक एक्टर के तौर पर बेहतर किया और मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे बचाया भी। वह अनुभव मेरे लिए थेरेप्यूटिक रहा। उसके बाद समझ आया कि ऐसा महसूस होने पर थेरेपिस्ट से भी बात की जा सकती है। उस समय मुझे मेंटल हेल्थ या डिप्रेशन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। सवाल: ‘मिर्जापुर’ आपके करियर में कब आया? जवाब: ‘मिर्जापुर’ मैंने अक्टूबर 2017 से करना शुरू किया था। उससे पहले मेरी एक्टिंग वर्कशॉप हो चुकी थी। यह मेरे लिए बहुत बड़ा मोड़ साबित हुआ। शो ने मुझे लोगों तक पहुंचाया और डिंपी के किरदार से मुझे अलग पहचान मिली। सवाल: ‘मिर्जापुर’ की वजह से आपको आगे कितना फायदा मिला? जवाब: बहुत फायदा हुआ। ‘जहानाबाद’ का काम भी कहीं न कहीं ‘मिर्जापुर’ की वजह से मिला। साउथ की फिल्म ‘फलकनुमा दास’ भी मिली। जब लोग आपको किसी काम में देख चुके होते हैं तो उनका भरोसा बढ़ जाता है। ‘मिर्जापुर’ ने मेरे करियर में यह भरोसा बनाने में बहुत मदद की। सवाल: साउथ की फिल्म के बाद वहां आगे काम क्यों नहीं कर पाईं? जवाब: ‘फलकनुमा दास’ 2019 में रिलीज हुई थी। उसके बाद मैं वहां और काम करना चाहती थी, लेकिन लगातार दो लॉकडाउन आ गए। मैं वापस वहां जा ही नहीं पाई। वरना मेरी साउथ में और काम करने की इच्छा थी। सवाल: लॉकडाउन का समय आपके लिए कैसा रहा? जवाब: पहला लॉकडाउन मैंने मुंबई में अपने पड़ोसी अंकल-आंटी के साथ बिताया। उनके दो घर हैं और उनका परिवार जैसा माहौल मेरे लिए हमेशा अच्छा रहा है। हम साथ रहते थे, खाते थे और समय बिताते थे। इसलिए मुझे अकेलापन महसूस नहीं हुआ। सवाल: 2022 में फिर ऐसा समय आया जब आपको लगा कि एक्टिंग सही फैसला था या नहीं? जवाब: हां, 2022 में मैं पर्सनली और प्रोफेशनली दोनों स्तर पर मुश्किल दौर से गुजर रही थी। लगता था कि अब तक मुझे यह कर लेना चाहिए था, लेकिन चीजें वैसी नहीं हो रही थीं। मन में आया कि क्या मुझे कुछ और करना चाहिए? क्या एक्टिंग में पर्याप्त मौके मिल रहे हैं या मिलेंगे? क्या मुझे खुद में बदलाव करना चाहिए? उस समय मैं थोड़ा डगमगाई थी। अल्लू अर्जुन की तारीफ ने हर्षिता का डगमगाता आत्मविश्वास फिर बढ़ाया। सवाल: फिर ऐसा क्या हुआ जिससे आपका भरोसा वापस आया? जवाब: मेरे लिए वह अल्लू अर्जुन से हुई मुलाकात थी। मैं गोवा में थी और वह अपनी फैमिली के साथ थे। उन्होंने मुझे देखा और खुद पास आकर बात की। उन्होंने ‘मिर्जापुर’ और मेरे किरदार के बारे में बात की और मेरी स्क्रीन प्रेजेंस की भी तारीफ की। मुझे बहुत अच्छा लगा, क्योंकि मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानती भी नहीं थी। सवाल: क्या इसके बाद उनसे दोबारा मुलाकात हुई? जवाब: हां, कुछ दिन बाद 31 दिसंबर को मैं उनसे फिर टकरा गई। वह अपनी फैमिली के साथ थे और मैं दोस्तों के साथ। नया साल शुरू होने वाला था, तब हमने एक-दूसरे को विश किया। उन्होंने फिर मेरे किरदार और शो की बात की और मुझसे कहा कि तुम्हें और काम करना है, तुम्हारे लिए अभी बहुत लंबा रास्ता है। सवाल: उनकी इस बात का आप पर कितना असर हुआ? जवाब: उन्हें बिल्कुल नहीं पता कि उनकी उस छोटी सी बात ने एक डिमोटिवेटेड इंसान को कितनी मोटिवेशन दी। अगले दिन यानी 1 जनवरी को मुझे लगा कि यह यूनिवर्स का सिग्नल था। वह मुझे जानते नहीं थे, मेरा उनसे कोई कॉमन लिंक नहीं था और मैंने उनकी किसी फिल्म में काम भी नहीं किया था। फिर भी उन्होंने मेरे काम की तारीफ की और आगे बढ़ने के लिए कहा। यह बात आज तक मेरे साथ है। सवाल: कभी लगा कि उनसे नंबर एक्सचेंज कर लेना चाहिए था? जवाब: अब जो हो गया, वो हो गया। मेरे पास उनके साथ एक फोटो भी नहीं है। लेकिन मानती हूं कि अगर यूनिवर्स ने उस समय उनसे मिलवाया था तो शायद दोबारा भी मिलवा देगा। मैं आज भी चाहती हूं कि उनसे मिलूं और उन्हें बताऊं कि उनकी उस एक बात का मुझ पर कितना असर हुआ था। सवाल: इस पूरी जर्नी में आपकी

Harshita Gaur Depression Struggle | Mirzapur Actress Allu Arjun Praise

Harshita Gaur Depression Struggle | Mirzapur Actress Allu Arjun Praise

4 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक ‘डिंपी’ के किरदार ने हर्षिता गौर को घर-घर पहचान दिलाई। ‘मिर्जापुर’ की डिंपी यानी हर्षिता गौर लंबे समय से दर्शकों के बीच पहचान बना चुकी हैं। ‘साड्डा हक’ के बाद उन्हें करीब एक साल तक काम नहीं मिला। इस दौर में उन्हें खुद भी पता नहीं था कि वह डिप्रेशन से गुजर रही हैं। एक्टिंग वर्कशॉप ने उन्हें इससे बाहर निकलने में मदद की। ‘मिर्जापुर’ ने उनके करियर को नई पहचान दी और अब वह फिल्म के जरिए बड़े पर्दे पर नजर आएंगी। दैनिक भास्कर से बातचीत में हर्षिता ने करियर के उतार-चढ़ाव, लॉकडाउन, खुद को पहचानने की सीख और 2022 में अल्लू अर्जुन से हुई खास मुलाकात का किस्सा साझा किया। सवाल: ‘साड्डा हक’ के बाद आपके करियर में सबसे मुश्किल दौर कौन सा रहा? जवाब: ‘साड्डा हक’ खत्म होने के बाद करीब एक साल तक मेरे पास काम नहीं था। शो तीन साल चला था और मुझे लगा था कि अब फिल्मों में काम करूंगी। लेकिन काम मिलना आसान नहीं था। शुरुआत के एक-दो महीने घूमने-फिरने में निकल गए। उसके बाद मुंबई में बिना काम के रहना एक एक्टर के लिए काफी मुश्किल होता है। उस समय मैं डिप्रेशन में चली गई थी। सवाल: उस समय आपको पता था कि आप डिप्रेशन में जा रही हैं? जवाब: नहीं, उस समय मुझे बिल्कुल एहसास नहीं था। बाद में डिप्रेशन के लक्षणों के बारे में पता चला तो पीछे मुड़कर समझ आया कि मेरे साथ भी ऐसा ही हो रहा था। मैं मुंबई वाले घर में ही रहती थी। एक दिन पड़ोस वाली आंटी आईं और उन्होंने कहा कि काफी दिनों से दिखाई नहीं दीं। तब भी मैं किसी को ठीक से नहीं बता पा रही थी कि मेरे साथ क्या हो रहा है। एक्टिंग वर्कशॉप ने हर्षिता गौर को मुश्किल दौर से उबरने में मदद की। सवाल: फिर इस दौर से बाहर कैसे निकलीं? जवाब: मैंने अतुल मंगिया के सजेस्ट करने पर एक एक्टिंग वर्कशॉप की। मैं आज भी उन्हें अपना गुरु मानती हूं। उन्होंने मुझे एक एक्टर के तौर पर बेहतर किया और मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे बचाया भी। वह अनुभव मेरे लिए थेरेप्यूटिक रहा। उसके बाद समझ आया कि ऐसा महसूस होने पर थेरेपिस्ट से भी बात की जा सकती है। उस समय मुझे मेंटल हेल्थ या डिप्रेशन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। सवाल: ‘मिर्जापुर’ आपके करियर में कब आया? जवाब: ‘मिर्जापुर’ मैंने अक्टूबर 2017 से करना शुरू किया था। उससे पहले मेरी एक्टिंग वर्कशॉप हो चुकी थी। यह मेरे लिए बहुत बड़ा मोड़ साबित हुआ। शो ने मुझे लोगों तक पहुंचाया और डिंपी के किरदार से मुझे अलग पहचान मिली। सवाल: ‘मिर्जापुर’ की वजह से आपको आगे कितना फायदा मिला? जवाब: बहुत फायदा हुआ। ‘जहानाबाद’ का काम भी कहीं न कहीं ‘मिर्जापुर’ की वजह से मिला। साउथ की फिल्म ‘फलकनुमा दास’ भी मिली। जब लोग आपको किसी काम में देख चुके होते हैं तो उनका भरोसा बढ़ जाता है। ‘मिर्जापुर’ ने मेरे करियर में यह भरोसा बनाने में बहुत मदद की। सवाल: साउथ की फिल्म के बाद वहां आगे काम क्यों नहीं कर पाईं? जवाब: ‘फलकनुमा दास’ 2019 में रिलीज हुई थी। उसके बाद मैं वहां और काम करना चाहती थी, लेकिन लगातार दो लॉकडाउन आ गए। मैं वापस वहां जा ही नहीं पाई। वरना मेरी साउथ में और काम करने की इच्छा थी। सवाल: लॉकडाउन का समय आपके लिए कैसा रहा? जवाब: पहला लॉकडाउन मैंने मुंबई में अपने पड़ोसी अंकल-आंटी के साथ बिताया। उनके दो घर हैं और उनका परिवार जैसा माहौल मेरे लिए हमेशा अच्छा रहा है। हम साथ रहते थे, खाते थे और समय बिताते थे। इसलिए मुझे अकेलापन महसूस नहीं हुआ। सवाल: 2022 में फिर ऐसा समय आया जब आपको लगा कि एक्टिंग सही फैसला था या नहीं? जवाब: हां, 2022 में मैं पर्सनली और प्रोफेशनली दोनों स्तर पर मुश्किल दौर से गुजर रही थी। लगता था कि अब तक मुझे यह कर लेना चाहिए था, लेकिन चीजें वैसी नहीं हो रही थीं। मन में आया कि क्या मुझे कुछ और करना चाहिए? क्या एक्टिंग में पर्याप्त मौके मिल रहे हैं या मिलेंगे? क्या मुझे खुद में बदलाव करना चाहिए? उस समय मैं थोड़ा डगमगाई थी। अल्लू अर्जुन की तारीफ ने हर्षिता का डगमगाता आत्मविश्वास फिर बढ़ाया। सवाल: फिर ऐसा क्या हुआ जिससे आपका भरोसा वापस आया? जवाब: मेरे लिए वह अल्लू अर्जुन से हुई मुलाकात थी। मैं गोवा में थी और वह अपनी फैमिली के साथ थे। उन्होंने मुझे देखा और खुद पास आकर बात की। उन्होंने ‘मिर्जापुर’ और मेरे किरदार के बारे में बात की और मेरी स्क्रीन प्रेजेंस की भी तारीफ की। मुझे बहुत अच्छा लगा, क्योंकि मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानती भी नहीं थी। सवाल: क्या इसके बाद उनसे दोबारा मुलाकात हुई? जवाब: हां, कुछ दिन बाद 31 दिसंबर को मैं उनसे फिर टकरा गई। वह अपनी फैमिली के साथ थे और मैं दोस्तों के साथ। नया साल शुरू होने वाला था, तब हमने एक-दूसरे को विश किया। उन्होंने फिर मेरे किरदार और शो की बात की और मुझसे कहा कि तुम्हें और काम करना है, तुम्हारे लिए अभी बहुत लंबा रास्ता है। सवाल: उनकी इस बात का आप पर कितना असर हुआ? जवाब: उन्हें बिल्कुल नहीं पता कि उनकी उस छोटी सी बात ने एक डिमोटिवेटेड इंसान को कितनी मोटिवेशन दी। अगले दिन यानी 1 जनवरी को मुझे लगा कि यह यूनिवर्स का सिग्नल था। वह मुझे जानते नहीं थे, मेरा उनसे कोई कॉमन लिंक नहीं था और मैंने उनकी किसी फिल्म में काम भी नहीं किया था। फिर भी उन्होंने मेरे काम की तारीफ की और आगे बढ़ने के लिए कहा। यह बात आज तक मेरे साथ है। सवाल: कभी लगा कि उनसे नंबर एक्सचेंज कर लेना चाहिए था? जवाब: अब जो हो गया, वो हो गया। मेरे पास उनके साथ एक फोटो भी नहीं है। लेकिन मानती हूं कि अगर यूनिवर्स ने उस समय उनसे मिलवाया था तो शायद दोबारा भी मिलवा देगा। मैं आज भी चाहती हूं कि उनसे मिलूं और उन्हें बताऊं कि उनकी उस एक बात का मुझ पर कितना असर हुआ था। सवाल: इस पूरी जर्नी में आपकी

पाकिस्तान के पहले सिख एंकर के दफ्तर पर रेड:बोले- पुलिस ने वर्करों को पीटा, सामान चुराया; इमरान खान की खबर चलाने पर लगा था बैन

पाकिस्तान के पहले सिख एंकर के दफ्तर पर रेड:बोले- पुलिस ने वर्करों को पीटा, सामान चुराया; इमरान खान की खबर चलाने पर लगा था बैन

पाकिस्तान के 79 साल के इतिहास में सिख समुदाय से पहले टेलीविजन एंकर और पत्रकार के तौर पर पहचान बनाने वाले हरमीत सिंह के डिजिटल स्टूडियो पर इस्लामाबाद पुलिस की कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हरमीत सिंह ने वीडियो जारी कर बताया, करीब दो दिन पहले पुलिस ने उनके स्टूडियो में रेड कर वहां काम कर रहे कर्मचारियों को हिरासत में लिया और कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की। पुलिस वाले सामान चुराकर ले गए। हरमीत सिंह ने पाकिस्तान सरकार, पुलिस और प्रशासनिक तंत्र पर आरोप लगाते हुए कहा- टीवी से बैन और नौकरी जाने के बाद उन्होंने अपनी जमा-पूंजी से डिजिटल स्टूडियो खड़ा किया था, लेकिन अब पत्रकारिता जारी रखने के लिए उनके पास न नौकरी बची है और न जरूरी संसाधन। हालांकि हरमीत सिंह के आरोपों के बाद पुलिस का कोई बयान सामने नहीं आया। हरमीत सिंह सिख परिवार से हैं और 1947 को बंटवारे के समय हरमीत सिंह का परिवार पाकिस्तान में रह गया। इनके कई रिश्तेदार भारतीय पंजाब में रहते हैं। मौजूदा समय में वह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चाकेसर (शांगला) शहर के रहने वाले हैं। पाकिस्तान की इस्लामाबाद पुलिस की ओर से की गई बर्बरता को बताते हुए हरमीत सिंह ने क्या कहा, जानिए… टीवी से बैन के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया…6 बड़ी बातें… 1. टीवी स्क्रीन से बैन और नौकरी गई 31 अगस्त को वीडियो जारी कर हरमीत सिंह ने बताया कि वह सिख समुदाय के पहले पत्रकार हैं, जिन्होंने मुख्यधारा के पाकिस्तानी मीडिया में जगह बनाई। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा दुनिया के सामने पाकिस्तान की सकारात्मक तस्वीर पेश करने की कोशिश की। लेकिन संविधान की सर्वोच्चता, लोकतंत्र, कानून के शासन और पीड़ित लोगों की आवाज उठाने के कारण सत्ताधारियों की नाराजगी झेलनी पड़ी। इसके बाद उन्हें टीवी स्क्रीन पर आने से रोक दिया गया और नौकरी भी चली गई। 2. जमा-पूंजी से बनाया डिजिटल स्टूडियो टीवी में काम के रास्ते बंद होने के बाद हरमीत सिंह ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी और कुछ फिल्मों से मिले पैसों से दो-तीन दोस्तों के साथ मिलकर छोटा दफ्तर और डिजिटल स्टूडियो शुरू किया। इसका मकसद व्लॉग और पॉडकास्ट के जरिए अपना काम जारी रखना और आजीविका कमाना था। 3. स्टूडियो पर रेड कर सामान जब्त किया हरमीत सिंह का आरोप है कि पुलिस ने उनके दफ्तर पर 30 अगस्त को रेड की और वहां रखा सामान अपने साथ चुराकर ले गई। इसमें 5 कंप्यूटर सिस्टम, कैमरे, पॉडकास्ट माइक, स्टैंड, प्रॉम्प्टर और बैटरियां शामिल थीं। उनका आरोप है कि स्टूडियो में काम करने वाले मुल्तान निवासी सैफ और सहयोगी रजी ताहिर को हिरासत में लिया गया और उनके साथ कथित तौर पर मारपीट व प्रताड़ना की गई। 4. हरमीत ने कार्रवाई पर उठाए सवाल हरमीत सिंह ने सवाल उठाया कि अगर उनके सहयोगी रजी ताहिर ने पत्रकार के तौर पर कश्मीर (पीओके) के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, तो इसके लिए पूरे स्टूडियो का सामान और अन्य कर्मियों के कंप्यूटर जब्त करने का क्या औचित्य था। 5. परिवार ने देश छोड़ने की सलाह दी हरमीत ने बताया कि उनकी सिख बिरादरी और परिवार के लोग उन्हें कोई दूसरा कारोबार करने या देश छोड़ने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि पत्रकारिता के कारण उनकी जान को खतरा है और परिवार की जिंदगी भी मुश्किल हो गई है। इसके बावजूद उन्होंने हमेशा पाकिस्तान में रहकर काम करना पसंद किया। 6. मानवाधिकार संगठनों से मदद की अपील हरमीत सिंह ने कहा कि अब उनके पास न नौकरी है और न ही काम जारी रखने के लिए जरूरी सामान। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस उनके कैमरों और कंप्यूटर सिस्टम का क्या करेगी। उनका आरोप है कि पत्रकारों को आर्थिक रूप से खत्म किया जा रहा है। उन्होंने पाकिस्तान के नागरिक समाज और मानवाधिकार संगठनों से पत्रकारों पर हो रहे कथित अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने और जब्त सामान वापस दिलाने की अपील की। हरमीत की प्रशासन से तनातनी…2 केस केस-1 केस-2

अभिषेक के लिए ऐश्वर्या राय ने ठुकराई थी फिल्म:शाहरुख की ‘हैप्पी न्यू ईयर’ से कमबैक करने वाली थीं, पत्नी के तौर पर फैसला लिया था

अभिषेक के लिए ऐश्वर्या राय ने ठुकराई थी फिल्म:शाहरुख की ‘हैप्पी न्यू ईयर’ से कमबैक करने वाली थीं, पत्नी के तौर पर फैसला लिया था

एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन को 2014 में रिलीज हुई फिल्म ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के लिए डायरेक्टर फराह खान की पहली पसंद बताया जाता है। हालांकि, बेटी आराध्या को जन्म देने के बाद फिल्मों में वापसी कर रहीं ऐश्वर्या ने इस फिल्म को ठुकरा दिया था। फिल्म में शाहरुख खान के साथ उनकी जोड़ी बननी थी, जबकि उनके पति अभिषेक बच्चन भी फिल्म का हिस्सा थे। शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण और अभिषेक बच्चन स्टारर ‘हैप्पी न्यू ईयर’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। ऐश्वर्या ने फिल्म इसलिए नहीं की क्योंकि उन्हें लगा कि फिल्म में वह और अभिषेक एक-दूसरे के साथ कास्ट नहीं होंगे और अलग-अलग कलाकारों के साथ उनकी जोड़ी बनने से स्क्रीन पर अजीब स्थिति पैदा हो सकती है। एक पुराने इंटरव्यू में ऐश्वर्या ने बताया था कि उन्हें यह फिल्म फिल्मों से ब्रेक के बाद वापसी के लिए बिल्कुल सही लगी थी। 2018 में पत्रकार राजीव मसंद से बातचीत में उन्होंने कहा था कि बड़े ब्लॉकबस्टर और तय बॉक्स ऑफिस वाली ऐसी फिल्म उनके लिए बेहतरीन वापसी हो सकती थी। हालांकि, फिल्म में अभिषेक के पहले से होने की वजह से ऐश्वर्या को इसकी कास्टिंग का डायनेमिक सही नहीं लगा। उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें व्यक्तिगत तौर पर फिल्म ऑफर की जाती तो वह जरूर करतीं, लेकिन अभिषेक के साथ फिल्म में अलग-अलग कलाकारों के साथ जोड़ी बनाना ठीक नहीं लगता। ऐश्वर्या ने माना था कि एक प्रोफेशनल और एक्टर के तौर पर ऐसी फिल्म छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन पत्नी के तौर पर उन्होंने यह फैसला लिया। एक अन्य बातचीत में NDTV से ऐश्वर्या ने कहा था कि उन्हें फिल्म काफी मजेदार लगी थी और उन्हें पता था कि इसकी शूटिंग का अनुभव अच्छा रहेगा, लेकिन फिल्म में उनके और अभिषेक के एक-दूसरे के साथ जोड़ी न बनने की वजह से उन्होंने इसे ठुकरा दिया। ऐश्वर्या ने और कौन-सी फिल्में ठुकराईं ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के अलावा ऐश्वर्या को कई सफल फिल्मों के ऑफर मिलने की रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं। इनमें ‘ट्रॉय’, ‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.’, ‘भूल भुलैया’, ‘कृष’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ शामिल हैं। हालांकि, इन फिल्मों को ठुकराने की वजहों से जुड़ी बातें ऐश्वर्या ने खुद कंफर्म नहीं की हैं। अभिषेक-ऐश्वर्या के तलाक की अफवाहें सामने आई थीं अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन के तलाक की अफवाहें साल 2024 में काफी चर्चा में रही थीं। इन अफवाहों को तब हवा मिली, जब जुलाई 2024 में अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी में अभिषेक पूरे बच्चन परिवार के साथ पहुंचे थे। वहीं, ऐश्वर्या अपनी बेटी आराध्या के साथ अलग नजर आई थीं। इसके बाद ऐश्वर्या को पेरिस फैशन वीक और दूसरे इवेंट्स में भी सिर्फ आराध्या के साथ देखा गया। सोशल मीडिया पर अभिषेक का एक डीपफेक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह तलाक का ऐलान करते दिख रहे थे। इससे अफवाहों को और बढ़ावा मिला। हालांकि, लंबे समय तक चुप रहने के बाद अभिषेक ने इन खबरों पर नाराजगी जताई थी। दिसंबर 2025 में पीपिंग मून से बातचीत में अभिषेक ने कहा था, “अगर आप एक पब्लिक फिगर हैं, तो लोग आपकी हर छोटी बात पर अपनी राय बनाएंगे। हमारे बारे में जो भी गलत बातें लिखी गई हैं, वे पूरी तरह झूठी हैं। उनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है। ये बातें गलत हैं और जानबूझकर दुख पहुंचाने वाली हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसी अफवाहें उनकी शादी के बाद शुरू नहीं हुई थीं, बल्कि शादी से पहले से ही चल रही थीं। अभिषेक ने कहा, “शादी से पहले लोग हमारी शादी की तारीखें बताने लगे थे। शादी के बाद लोग यह तय करने लगे कि हम कब अलग होंगे। ये सब बकवास है। वह मेरी सच्चाई जानती हैं और मैं उनकी सच्चाई जानता हूं। हम अपने परिवार के साथ प्यार और खुशी से रहते हैं, और हमारे लिए यही सबसे ज्यादा मायने रखता है।” पिछले महीने अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन और उनकी बेटी आराध्या बच्चन को एक साथ मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया था। वे अमेरिका (न्यूयॉर्क) से अपनी पारिवारिक छुट्टियां बिताकर वापस लौटे थे।

अभिषेक के लिए ऐश्वर्या राय ने ठुकराई थी फिल्म:शाहरुख की ‘हैप्पी न्यू ईयर’ से कमबैक करने वाली थीं, पत्नी के तौर पर फैसला लिया था

अभिषेक के लिए ऐश्वर्या राय ने ठुकराई थी फिल्म:शाहरुख की ‘हैप्पी न्यू ईयर’ से कमबैक करने वाली थीं, पत्नी के तौर पर फैसला लिया था

एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन को 2014 में रिलीज हुई फिल्म ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के लिए डायरेक्टर फराह खान की पहली पसंद बताया जाता है। हालांकि, बेटी आराध्या को जन्म देने के बाद फिल्मों में वापसी कर रहीं ऐश्वर्या ने इस फिल्म को ठुकरा दिया था। फिल्म में शाहरुख खान के साथ उनकी जोड़ी बननी थी, जबकि उनके पति अभिषेक बच्चन भी फिल्म का हिस्सा थे। शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण और अभिषेक बच्चन स्टारर ‘हैप्पी न्यू ईयर’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। ऐश्वर्या ने फिल्म इसलिए नहीं की क्योंकि उन्हें लगा कि फिल्म में वह और अभिषेक एक-दूसरे के साथ कास्ट नहीं होंगे और अलग-अलग कलाकारों के साथ उनकी जोड़ी बनने से स्क्रीन पर अजीब स्थिति पैदा हो सकती है। एक पुराने इंटरव्यू में ऐश्वर्या ने बताया था कि उन्हें यह फिल्म फिल्मों से ब्रेक के बाद वापसी के लिए बिल्कुल सही लगी थी। 2018 में पत्रकार राजीव मसंद से बातचीत में उन्होंने कहा था कि बड़े ब्लॉकबस्टर और तय बॉक्स ऑफिस वाली ऐसी फिल्म उनके लिए बेहतरीन वापसी हो सकती थी। हालांकि, फिल्म में अभिषेक के पहले से होने की वजह से ऐश्वर्या को इसकी कास्टिंग का डायनेमिक सही नहीं लगा। उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें व्यक्तिगत तौर पर फिल्म ऑफर की जाती तो वह जरूर करतीं, लेकिन अभिषेक के साथ फिल्म में अलग-अलग कलाकारों के साथ जोड़ी बनाना ठीक नहीं लगता। ऐश्वर्या ने माना था कि एक प्रोफेशनल और एक्टर के तौर पर ऐसी फिल्म छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन पत्नी के तौर पर उन्होंने यह फैसला लिया। एक अन्य बातचीत में NDTV से ऐश्वर्या ने कहा था कि उन्हें फिल्म काफी मजेदार लगी थी और उन्हें पता था कि इसकी शूटिंग का अनुभव अच्छा रहेगा, लेकिन फिल्म में उनके और अभिषेक के एक-दूसरे के साथ जोड़ी न बनने की वजह से उन्होंने इसे ठुकरा दिया। ऐश्वर्या ने और कौन-सी फिल्में ठुकराईं ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के अलावा ऐश्वर्या को कई सफल फिल्मों के ऑफर मिलने की रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं। इनमें ‘ट्रॉय’, ‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.’, ‘भूल भुलैया’, ‘कृष’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ शामिल हैं। हालांकि, इन फिल्मों को ठुकराने की वजहों से जुड़ी बातें ऐश्वर्या ने खुद कंफर्म नहीं की हैं। अभिषेक-ऐश्वर्या के तलाक की अफवाहें सामने आई थीं अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन के तलाक की अफवाहें साल 2024 में काफी चर्चा में रही थीं। इन अफवाहों को तब हवा मिली, जब जुलाई 2024 में अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी में अभिषेक पूरे बच्चन परिवार के साथ पहुंचे थे। वहीं, ऐश्वर्या अपनी बेटी आराध्या के साथ अलग नजर आई थीं। इसके बाद ऐश्वर्या को पेरिस फैशन वीक और दूसरे इवेंट्स में भी सिर्फ आराध्या के साथ देखा गया। सोशल मीडिया पर अभिषेक का एक डीपफेक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह तलाक का ऐलान करते दिख रहे थे। इससे अफवाहों को और बढ़ावा मिला। हालांकि, लंबे समय तक चुप रहने के बाद अभिषेक ने इन खबरों पर नाराजगी जताई थी। दिसंबर 2025 में पीपिंग मून से बातचीत में अभिषेक ने कहा था, “अगर आप एक पब्लिक फिगर हैं, तो लोग आपकी हर छोटी बात पर अपनी राय बनाएंगे। हमारे बारे में जो भी गलत बातें लिखी गई हैं, वे पूरी तरह झूठी हैं। उनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है। ये बातें गलत हैं और जानबूझकर दुख पहुंचाने वाली हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसी अफवाहें उनकी शादी के बाद शुरू नहीं हुई थीं, बल्कि शादी से पहले से ही चल रही थीं। अभिषेक ने कहा, “शादी से पहले लोग हमारी शादी की तारीखें बताने लगे थे। शादी के बाद लोग यह तय करने लगे कि हम कब अलग होंगे। ये सब बकवास है। वह मेरी सच्चाई जानती हैं और मैं उनकी सच्चाई जानता हूं। हम अपने परिवार के साथ प्यार और खुशी से रहते हैं, और हमारे लिए यही सबसे ज्यादा मायने रखता है।” पिछले महीने अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन और उनकी बेटी आराध्या बच्चन को एक साथ मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया था। वे अमेरिका (न्यूयॉर्क) से अपनी पारिवारिक छुट्टियां बिताकर वापस लौटे थे।

Sadhana Shivdasani Biography | Bollywood Actress Career & Life Struggle

Sadhana Shivdasani Biography | Bollywood Actress Career & Life Struggle

2 घंटे पहले कॉपी लिंक साधना ने फिल्मी करियर में करीब 30 फिल्मों में काम किया था, हालांकि उन्हें एक्टिंग के लिए कोई अवाॅर्ड नहीं मिला। हिंदी सिनेमा के 60 और 70 के दशक में एक ऐसी अभिनेत्री आईं, जिन्होंने अपनी खूबसूरती, अभिनय और स्टाइल से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। नाम था साधना शिवदासानी। कभी उनकी फिल्में हिट होती थीं और उनका हेयरस्टाइल पूरे देश में ट्रेंड करता था, लेकिन जिंदगी के आखिरी दौर में उन्हें बीमारी, आर्थिक तंगी और अकेलेपन का सामना करना पड़ा। साधना का जन्म 2 सितंबर 1941 को ब्रिटिश इंडिया के कराची में एक सिंधी परिवार में हुआ था। 1947 के बंटवारे के बाद उनका परिवार भारत आकर मुंबई में बस गया। बचपन से ही साधना अभिनेत्री बनना चाहती थीं। करीब 14 साल की उम्र में उन्हें राज कपूर की फिल्म ‘श्री 420’ में काम करने का मौका मिला, जहां वह गाने ‘मुड़ मुड़ के’ में बैकग्राउंड डांसर के तौर पर नजर आई थीं। साधना के पिता बंगाली अभिनेत्री और नर्तकी साधना बोस के बहुत बड़े प्रशंसक थे, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी का नाम साधना रख दिया। 1 रुपए की फीस से फिल्मी सफर शुरू हुआ साधना का एक्टिंग करियर फिल्म ‘अबाना’ से शुरू हुआ। जो भारत की पहली सिंधी फिल्म थी। यह फिल्म 1958 में रिलीज हुई थी। बताया जाता है कि इस फिल्म के लिए उन्हें सिर्फ 1 रुपए की फीस मिली थी। यही छोटी सी फीस आगे चलकर उनके बड़े फिल्मी सफर की शुरुआत बनी। ‘लव इन शिमला’ ने बदली किस्मत साधना को खास पहचान 1960 में आई फिल्म ‘लव इन शिमला’ से मिली थी। आर.के. नय्यर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में वह जॉय मुखर्जी के साथ लीड रोल में थीं। फिल्म सफल रही और साधना रातोंरात स्टार बन गईं। फिल्म में उनका फ्रिंज हेयरस्टाइल इतना लोकप्रिय हुआ कि आगे चलकर इसे ‘साधना कट’ के नाम से जाना गया। ऑड्री हेपबर्न से प्रेरित इस लुक को आम महिलाओं ने भी खूब अपनाया। चूड़ीदार सलवार सूट के चलन को लोकप्रिय बनाने का श्रेय भी साधना को दिया जाता है। प्रसिद्ध अभिनेता हरि शिवदासानी (अभिनेत्री बबीता के पिता) साधना के सगे चाचा (पिता के भाई) थे। इस रिश्ते से साधना करिश्मा और करीना कपूर की बुआ की तरह थीं। इसके बाद साधना ने ‘परख’, ‘हम दोनों’, ‘मन-मौजी’, ‘एक मुसाफिर एक हसीना’, ‘मेरे महबूब’ और ‘इंतकाम’ जैसी फिल्मों में काम किया। 1960 के दशक में उनकी 19 फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें 11 फिल्में हिट थीं और इस तरह वह हिंदी सिनेमा की बड़ी स्टार बन गईं। निर्देशक से हुआ प्यार, 1966 में शादी ‘लव इन शिमला’ के सेट पर साधना को डायरेक्टर आर.के. नय्यर से प्यार हो गया। दोनों ने 1966 में शादी कर ली। शादी के बाद भी साधना ने फिल्मों में काम जारी रखा। हालांकि बाद के वर्षों में उनकी जिंदगी मुश्किलों से घिरने लगी। 1960 के दशक के आखिर में साधना हाइपरथायरॉइडिज्म की समस्या से जूझने लगीं। इलाज के कारण उन्हें फिल्मों से दूरी बनानी पड़ी और कई बड़े प्रोजेक्ट उनके हाथ से निकल गए। बाद में उन्होंने ‘इंतकाम’ और ‘एक फूल दो माली’ जैसी फिल्मों से वापसी की, लेकिन 1970 के दशक में उनके फिल्मी ऑफर कम होते गए। उन्होंने 1974 में ‘गीता मेरा नाम’ से निर्देशन में भी हाथ आजमाया। धीरे-धीरे वह फिल्मों और सार्वजनिक जीवन से दूर हो गईं। साधना के पति आर.के. नय्यर ने ‘लव इन शिमला’ (1960), ‘ये रास्ते हैं प्यार के’ (1963), ‘आओ प्यार करें’ (1964) जैसी कई फिल्में डायरेक्ट की थीं। पति की मौत के बाद बढ़ा अकेलापन 1995 में आर.के. नय्यर का निधन हो गया। दोनों की कोई संतान नहीं थी। पति के जाने के बाद साधना काफी अकेली पड़ गईं। उनकी सेहत भी लगातार खराब होती रही। आंखों की समस्या और थायरॉयड जैसी परेशानियों के कारण उनका घर से बाहर निकलना कम हो गया। हालांकि, उनके आखिरी साल कानूनी विवादों से भी घिरे रहे। साधना से जुड़े तीन मामले सामने आए। इनमें एक मामला उनके सांता क्रूज स्थित बिल्डिंग के मकान मालिक यूसुफ लकड़ावाला ने किया था। एक मामला साधना ने उन्हीं के खिलाफ उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए दर्ज कराया था। इसके बाद विवाद से जुड़ा मानहानि का मामला भी सामने आया। उस समय साधना आर्थिक और शारीरिक परेशानियों से जूझ रही थीं। उनके लिए इलाज और कानूनी खर्च उठाना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने मदद की अपील भी की, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहारा नहीं मिला। वहीदा रहमान, हेलन और साधना की पुरानी तस्वीर। बाद के समय में वहीदा रहमान, नंदा, आशा पारेख और हेलन जैसी उनकी समकालीन अभिनेत्रियां उनके करीब रहीं और उन्हें इमोशनली सहारा देती थीं। इसके बावजूद साधना का आखिरी दौर काफी अकेलेपन में बीता। 25 दिसंबर 2015 को मुंबई के एक अस्पताल में बीमारी के बाद साधना का निधन हो गया। ………….. यह खबर भी पढ़ें… सायरा बानो@82; शम्मी कपूर ने डांटा तो रोने लगीं:अखबार में पढ़ी पति दिलीप कुमार की दूसरी शादी की खबर, शाहरुख को बेटा माना साल 1955 तमिलनाडु के कोयंबटूर में फिल्म ‘आजाद’ की शूटिंग चल रही थी। इसी दौरान फिल्म प्रोड्यूसर एसएस. वासन ने दिलीप कुमार की मुलाकात एक मशहूर ज्योतिषी से कराई। ज्योतिषी ने दिलीप कुमार का चेहरा देखा, हाथ की रेखाएं पढ़ीं और फिर उनकी कुंडली बनाई। इसके बाद उन्होंने ऐसी भविष्यवाणी की, जिसे सुनकर खुद दिलीप कुमार भी हैरान रह गए। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔