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यमन में हूती विद्रोहियों के हमले में 129 की मौत:बाब अल-मंदब पर कब्जे की कोशिश, निपटने को सरकार ने फोर्स भेजी

यमन में हूती विद्रोहियों के हमले में 129 की मौत:बाब अल-मंदब पर कब्जे की कोशिश, निपटने को सरकार ने फोर्स भेजी

यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी फोर्स के बीच भीषण लड़ाई में 129 लोगों की मौत हुई है। यह हाल के वर्षों में यमन में हुई सबसे घातक झड़पों में से एक है। हूती विद्रोही लाल सागर के प्रवेश द्वार माने जाने वाले बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के करीब अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। लड़ाई गुरुवार को शुरू हुई। हूतियों ने तटीय इलाकों के पास जमीनी हमला करने के साथ रॉकेट और ड्रोन का भी इस्तेमाल किया। इस दौरान उन्होंने लाल सागर के किनारे कई रणनीतिक ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया। इन इलाकों से मोखा बंदरगाह और समुद्री रास्ते पर नजर रखना आसान है। एएफपी के मुताबिक यमनी सेना के एक अधिकारी ने बताया कि उसके 66 जवान मारे गए हैं। वहीं हूती विद्रोहियों से जुड़े सूत्रों ने कम से कम 62 विद्रोहियों के मारे जाने का दावा किया है। एक नागरिक की भी मौत हुई है। इस तरह अलग-अलग पक्षों से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, लड़ाई में मरने वालों की संख्या 120 से ज्यादा हो गई है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। बाब अल-मंदेब इतना अहम क्यों? बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ने वाला बेहद अहम समुद्री रास्ता है। इसके उत्तर में लाल सागर स्वेज नहर के जरिए भूमध्य सागर से जुड़ता है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा की आवाजाही होती है। इसलिए यहां लंबे समय तक संघर्ष या समुद्री रास्ते में किसी तरह की रुकावट का असर सिर्फ यमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी पड़ सकता है। मौजूदा हमले में हूतियों का फोकस मोखा बंदरगाह और उसके आसपास के इलाकों पर भी है। रणनीतिक ऊंचाइयों पर कब्जे से उन्हें तटीय इलाके में सरकारी बलों पर दबाव बनाने और मोखा तथा बाब अल-मंदेब की तरफ जाने वाले रास्तों पर नजर रखने में मदद मिल सकती है। सैन्य सूत्रों के मुताबिक, हूतियों ने लाल सागर के पास और ताइज शहर के आसपास कई ऊंचाई वाले ठिकानों पर कब्जा किया है। सरकार ने हूती विद्रोहियों से लड़ने सेना भेजी हूती विद्रोहियों की बढ़त को देखते हुए यमनी सरकार ने भी ताइज में अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं। एक यमनी अधिकारी के मुताबिक, सरकार ने सऊदी अरब के कहने पर अदन से ताइज के लिए सैनिक भेजे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर हूती मोखा बंदरगाह या बाब अल-मंदेब के आसपास के रणनीतिक इलाकों पर अपनी पकड़ मजबूत कर लेते हैं, तो इससे यमनी सरकार और सऊदी अरब के साथ किसी भी बातचीत में उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है। हूती विद्रोही कौन हैं? हूती विद्रोही यमन के उत्तरी हिस्से में रहने वाले जायदी शिया समुदाय का एक सशस्त्र संगठन है। इसकी शुरुआत 1990 के दशक में एक धार्मिक-सामाजिक आंदोलन के रूप में हुई थी। हूती सरकार पर भेदभाव करने का आरोप लगाते थे। 2011 में ट्यूनीशिया से शुरू हुई अरब क्रांति की लहर यमन भी पहुंची। उस समय राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह करीब 33 साल से सत्ता में थे। युवाओं के प्रदर्शन की वजह से उनकी गद्दी छीन गई। फरवरी 2012 में अब्दरब्बू मंसूर हादी राष्ट्रपति बने। लेकिन उनकी सरकार कमजोर थी। हूती विद्रोहियों ने इसका फायदा उठाया और सितंबर 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। हालात इतने बिगड़ गए कि 2015 में राष्ट्रपति हादी को देश छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी। हादी के पद छोड़ने के बाद से यमन पर किसी एक सरकार का कंट्रोल नहीं है। अभी यमन कई हिस्सों में बंटा हुआ है। हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन मिलता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों का समर्थन मिलता है।

दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में आज वोटिंग:अफ्रीका को फायदा, यूरोप, रूस और कनाडा का साइज छोटा होगा

दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में आज वोटिंग:अफ्रीका को फायदा, यूरोप, रूस और कनाडा का साइज छोटा होगा

क्या आपको पता है कि दुनिया का जो नक्शा हम बचपन से देखते आए हैं, उसमें देशों का आकार असल में वैसा नहीं दिखता जैसा जमीन पर है? अगर संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश प्रस्ताव पास हो जाता है, तो दुनिया का नक्शा काफी अलग नजर आ सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा शुक्रवार को एक प्रस्ताव पर मतदान करेगी। इसमें दुनिया का ऐसा नक्शा अपनाने की बात है, जिसमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनकी वास्तविक जमीन के हिसाब से ज्यादा सही दिखे। इस मुहिम की अगुआई अफ्रीकी देश कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा नक्शे ने सदियों से अफ्रीका और दुनिया के दूसरे हिस्सों को उनके वास्तविक आकार से छोटा दिखाया है। मौजूदा नक्शे में क्या गड़बड़ी है? आज दुनिया के बहुत से नक्शे मर्केटर प्रोजेक्शन पर आधारित हैं। इसे यूरोपीय नक्शानवीस जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था। यह नक्शा समुद्री यात्रा और नेविगेशन के लिए काफी उपयोगी है। इसकी वजह यह है कि इसमें उत्तर-दक्षिण की दिशा वाली रेखाएं भूमध्य रेखा के मुकाबले सही दिशा बनाए रखती हैं। लेकिन पूरी दुनिया को एक साथ दिखाने के लिए इसमें एक बड़ी समस्या है—देशों का आकार वास्तविकता से अलग दिखाई देता है। जैसे-जैसे कोई जगह भूमध्य रेखा से दूर होती जाती है, नक्शे पर उसका आकार जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखने लगता है। इसका सबसे चर्चित उदाहरण ग्रीनलैंड है। मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका से भी बड़ा दिखाई देता है और उसका आकार अफ्रीका के आसपास नजर आता है। लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है। ग्रीनलैंड लगभग कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जितना बड़ा है, जबकि अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है। यानी नक्शे को देखकर किसी को लग सकता है कि ग्रीनलैंड और अफ्रीका लगभग एक ही आकार के हैं, जबकि जमीन पर दोनों के क्षेत्रफल में बहुत बड़ा अंतर है। अफ्रीकी देशों ने उठाया सवाल अफ्रीकी देशों का कहना है कि यह सिर्फ नक्शे की तकनीकी समस्या नहीं है। इसका असर इस बात पर भी पड़ता है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों को लोग किस नजर से देखते हैं। संयुक्त राष्ट्र के सामने रखे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि मौजूदा नक्शे में अफ्रीका का छोटा दिखाई देना लोगों की सामूहिक सोच में भी उसके महत्व और आकार को कम कर सकता है। प्रस्ताव में इस विकृति को ‘सांकेतिक रूप से छोटा दिखाना’ बताया गया है। इसके अलावा प्रस्ताव में कहा गया है कि नक्शे की यह असमानता अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया के आकार को लोगों की नजर में कम कर सकती है। इससे इन क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, बुनियादी ढांचे की जरूरत, विकास की क्षमता और समृद्धि को लेकर भी दुनिया की समझ प्रभावित हो सकती है। अफ्रीकी देशों का यह भी मानना है कि ऐसी धारणाएं पर्यावरण, भू-राजनीति और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पूर्वाग्रह को बढ़ावा दे सकती हैं। खबर अपडेट हो रही है…

RSS Chief Mohan Bhagwat London Visit

RSS Chief Mohan Bhagwat London Visit

लंदन1 मिनट पहले कॉपी लिंक मोहन भागवत 3 देशों के दौरे पर हैं। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को लंदन के मंदिरों और गुरुद्वारे के दौरे के साथ अपने विदेश दौरे के ब्रिटेन चरण की शुरुआत की। यह जानकारी RSS ने दी। RSS के केंद्रीय कार्यकारी दल के सदस्य सुनील अंबेकर और ब्रिटेन दौरे के समन्वयक संगठन Integral UK के संयोजक रोहित अंबेकर ने मीडिया कॉन्फ्रेंस में बताया कि भागवत इस दौरान धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, रिसर्चर्स और अन्य प्रमुख लोगों से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि भागवत RSS के निस्वार्थ सेवा और सामाजिक सद्भाव के अनुभव के साथ ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, का संदेश साझा करेंगे। RSS के मुताबिक, लंदन का कार्यक्रम भागवत के अमेरिका और कनाडा दौरे में दिए गए संदेश को आगे बढ़ाता है। यह RSS की शताब्दी वर्ष से जुड़े तीन देशों के आउटरीच कार्यक्रम का हिस्सा है। मंदिर और गुरुद्वारे पहुंचे सुनील अंबेकर और रोहित अंबेकर ने बताया कि अंतरधार्मिक संवाद के तहत भागवत विल्सडन स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर और खालसा जथा ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारा जा चुके हैं। उन्हें लंदन के एक जैन मंदिर में भी जाना है। ब्रिटेन दौरे का मुख्य कार्यक्रम रविवार को होगा। इसमें ‘सेलिब्रेशन ऑफ वननेस’ थीम पर सामुदायिक नेताओं का स्वागत समारोह और ‘सभ्यतागत संवाद’ रखा गया है। यह कार्यक्रम ब्रिटेन में 1966 में स्थापित हिंदू सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन हिंदू स्वयंसेवक संघ (HSS) UK ने शुरू किया है। इसे Integral UK का समर्थन मिला है। प्रवक्ताओं के मुताबिक, पूरे ब्रिटेन के 310 से ज्यादा सामुदायिक संगठन और एसोसिएशन इसमें शामिल होने की उम्मीद है। बंद कमरे में बैठकें और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात भागवत बुधवार को लंदन पहुंचे थे। गुरुवार को उन्होंने ‘बंद कमरे में हुई गोलमेज बैठकों’ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद कारोबार और राजनीति से जुड़े प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रमुख लोगों की बड़ी सभा हुई। सुनील अंबेकर ने बताया कि ब्रिटेन के लोग RSS को समझने में काफी रुचि रखते हैं। उन्होंने कहा कि भागवत ने लोगों की ओर से उठाए गए सभी मुद्दों पर बात की। उनके मुताबिक, कार्यक्रम में भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिकों के साथ ब्रिटेन के नेता, संसद से जुड़े लोग, कारोबारी, करोड़पति और अरबपति तथा FTSE 100 कंपनियों और अन्य कॉरपोरेट्स से जुड़े लोग शामिल थे। हालांकि, प्रवक्ता ने कार्यक्रम में शामिल लोगों के बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को गोपनीय तरीके से आयोजित किया गया था, ताकि चर्चा खुलकर हो सके। भागवत के दौरे पर उठी चिंताओं पर RSS का जवाब ब्रिटेन में कुछ सिविल सोसाइटी समूहों और सांसदों ने भागवत के दौरे को लेकर चिंता जताई है। इस पर सुनील अंबेकर ने कहा, “हम शांति, एकीकरण और एकता के लिए यहां हैं। इसलिए हम हर किसी से बातचीत के लिए तैयार हैं। लोकतंत्र में अलग-अलग आवाजें हो सकती हैं। ऐसी आवाजें उठना सामान्य बात है।” उन्होंने कहा कि RSS को लेकर कई गलतफहमियां हैं, क्योंकि बुनियादी समझ में कमी है। उनके मुताबिक, “भारत किसी राष्ट्र-राज्य की राजनीतिक अवधारणा जैसा नहीं है। यह एक सांस्कृतिक अवधारणा है।” सुनील अंबेकर ने कहा कि हिंदुत्व कोई स्थिर अवधारणा नहीं है। इसमें हर तरह के धर्म और सभी धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान और सत्य में विश्वास की बात है। उन्होंने कहा, “यही हिंदुत्व है, यही भारत है। मुझे लगता है कि यह दौरा इन विचारों को साफ करने में मदद करेगा।” रविवार को सार्वजनिक संबोधन RSS प्रमुख का रविवार को प्रवासी भारतीय समुदाय को दिया जाने वाला सार्वजनिक संबोधन लाइव प्रसारित किए जाने की उम्मीद है। RSS प्रमुख के साथ ब्रिटेन के मीडिया के लिए कोई बातचीत नहीं रखी गई है। भागवत के कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोगों की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… न्यूयॉर्क में भागवत बोले- भारत के DNA में एकता-विविधता: हम अलग होकर भी एकदूसरे से जुड़े RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त को करीब 42 मिनट स्पीच दी। उन्होंने कहा कि एकता और विविधता भारत के DNA में है। लोग अलग दिखते हैं, उनके रहने के तरीके हैं, लेकिन सभी के बीच एक जन्मजात जुड़ाव है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Madhya Pradesh School Merger Crisis

Madhya Pradesh School Merger Crisis

Hindi News Career Madhya Pradesh School Merger Crisis | 51 Percent Schools Closed In MP 16 मिनट पहले कॉपी लिंक देशभर में एक और जहां स्कूल को बेहतर करने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं आए दिन स्कूलों की अव्यवस्थाओं की तस्वीरें सामने आ रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में बीते 10 सालों में 94 हजार से ज्यादा स्कूल बंद हुए हैं और इनमें सबसे ज्यादा स्कूल मध्य प्रदेश के शामिल हैं। लगभग 26 लाख बच्चे ड्रॉप आउट हुए ये स्कूल कम एनरोलमेंट की वजह से मर्ज कर दिए गए हैं या अस्थाई तौरपर बंद कर दिए गए हैं। UDISE की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में पिछले 5 सालों में सरकारी स्कूल में छात्रों का ड्रॉप आउट रेट लगातार बढ़ रहा है। 2024-25 में छात्रों का एनरोलमेंट 12.15 था जो सेशन 2025-26 में घटकर 11.89% पर आ गया है। इसके साथ ही प्राइवेट स्कूल का एनरोलमेंट पिछले 5 सालों में बढ़ा है। इसी दौरान सरकारी स्कूलों में एनरोलमेंट 26 लाख से ज्यादा घटा है, 2024-25 के करीब 12.15 करोड़ था, जो घटकर 2025-26 में 11.89 करोड़ हो गया है। ड्रॉप आउट रेट भी बढ़ा वहीं देश भर में ड्रॉप आउट रेट में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मेघालय और मध्यप्रदेश टॉप पर हैं। मप्र में 15.25 लाख छात्र ड्रॉपबॉक्स हुए रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल प्रदेश के स्कूलों से 15.25 लाख छात्र गायब रहे और इस साल फिर 11.12 लाख छात्र स्कूल से ड्रॉपबॉक्स यानी बाहर हो सकते हैं। ऐसे बच्चे जो किन्हीं कारणों से पिछले स्कूल से तो निकल चुके हैं लेकिन नए स्कूल में एडमिशन नहीं लिया है। ऐसे बच्चों को ट्रैक करना मुश्किल है। छात्रों के रजिस्ट्रेशन में 17 लाख का अंतर सत्र 2025-26 में राज्य के शिक्षा पोर्टल पर रजिस्टर्ड छात्र 1.35 करोड़ थे, जबकि यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) रिपोर्ट में ये डेटा 1.52 करोड़ था। वहीं इस डेटा पर अधिकारियों का तर्क है कि ये अंतर इसलिए है, क्योंकि इस डेटा में 17 लाख का प्री-प्राइमरी डेटा भी फीड होता है। इसलिए ये अंतर आता है। UDISE के मुताबिक राज्य में क्लास 1 से 12वीं तक का रिटेंशन रेट 37.3% पर है, जो नेशनल एवरेज 51.9% से काफी पीछे है। इस डेटा के मुताबिक 12वीं तक पहुंचते-पहुंचते 62.7% बच्चे स्कूल की मुख्यधारा से दूर हो चुके हैं। देशभर के 50% स्कूल सिर्फ मध्य प्रदेश में बंद या मर्ज मध्य प्रदेश में 2025-26 के दौरान 2,426 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं या किसी दूसरे स्कूलों में मर्ज (विलय) कर दिए गए हैं। यह आंकड़ा UDISE+ 2025-26 से संबंधित रिपोर्टों में सामने आया है। अब तक मध्य प्रदेश में 2,426 स्कूल या तो बंद हुए हैं या मर्ज कर दिए गए हैं। वहीं देशभर में स्कूल का ये आंकड़ा 4,791 हैं यानी, 50.6% स्कूल सिर्फ मध्य प्रदेश में बंद हुए हैं। स्कूलों की दूसरी 1-5 किमी तक बढ़ी वहीं स्कूलों को बंद करने की बड़ी वजह कम नामांकन बताकर प्राथमिक स्कूलों को बंद कर दिया जाना है। स्कूल बंद होने से बच्चों के लिए स्कूल की दूरी 1 से 5 किमी तक बढ़ गई है। वहीं ट्रांसपोर्ट की कोई सुविधान नहीं होने से इन बच्चों को 1-5 किमी तक पैदल स्कूल जाना पड़ रहा है। वहीं स्कूल बंद होने की वजह से पेरेंट्स के ऊपर बच्चों के लिए स्कूल की दूरी और सुरक्षा का भी बोझ बढ् गया है। इसी आर्थिक बोझ के चलते गरीब परिवार बच्चों की पढ़ाई छुड़वाने को मजबूर हैं या उन्हें अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा ड्रॉपबॉक्स इंदौर में वहीं यदि बच्चों की बात की जाए तो सबसे ज्यादा बच्चे 45,233 इंदौर में ड्रॉपबॉक्स हुए हैं। इसके बाद सबसे ज्यादा मुरैना में 44,466, ग्वालियर में 40,663, भोपाल में 38,072 और सागर में 35,953 ड्रॉपबॉक्स हुए हैं। हाल ही में स्कूल मर्ज को लेकर प्रदर्शन भी हुए हाल ही में उज्जैन में सराफा कन्या विद्यालय को दाऊदखेड़ी शिफ्ट करने का फैसला लिया गया था, जिसके विरोध में छात्राओं ने प्रदर्शन किया था। इस विरोध प्रदर्शन में छात्राओं का कहना था कि स्कूल मर्ज होने से वे 10 किमी दूर हो जाएंगी, जिससे उनके लिए स्कूल जाना मुश्किल होगा। प्रशासन के स्कूल शिफ्ट करने का फैसला वापस लेने के बाद छात्राएं। स्कूल मर्जर के बाद छात्राओं की संख्या घटी हाल ही में उज्जैन में सराफा कन्या विद्यालय को दाऊदखेड़ी शिफ्ट करने का आदेश दिया गया था।स्कूल के दूर शिफ्ट किये जाने के आदेश के बाद स्कूल में छात्राओं की संख्या में बड़ी गिरावट आई थी। पहले स्कूल में करीब 580 छात्राएं थीं, जो घटकर 415 रह गईं, यानी 165 छात्राओं की संख्या कम हुई। कक्षा 9वीं में भी छात्राओं की संख्या 180 से घटकर करीब 120 रह गई। प्रशासन ने कहा- 3.16 लाख बच्चे जोड़े गए शिक्षा केंद्र के अपर संचालक के मुताबिक, 2025-26 के मुकाबले 2026-27 में नामांकन बड़े हैं। चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम से 3.16 लाख बाहर हुए बच्चों को दोबारा जोड़ा गया है। इस बार ट्रेकिंग के लिए शिक्षकों को समय पोर्टल के जरिए 6 साल के बच्चों को जोड़ा गया है। —————————- ये खबर भी पढ़ें.. 4 सितंबर के करेंट अफेयर्स:तमिलनाडु में ओलिंपिक सिटी डेवलप की जाएगी, तेलंगाना का गोल्लाला गुड़ी मंदिर राष्ट्रीय स्मारक घोषित आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं-पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

बेल्जियम PM बोले- भारत ने हमें पहले ही चेताया था:यूरोप बूढ़ा हो चुका है, अमेरिका और चीन के भरोसे रहने से नुकसान पहुंचा

बेल्जियम PM बोले- भारत ने हमें पहले ही चेताया था:यूरोप बूढ़ा हो चुका है, अमेरिका और चीन के भरोसे रहने से नुकसान पहुंचा

बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने कहा है कि यूरोप को दूसरे देशों पर जरूरत से ज्यादा व्यापारिक निर्भरता की कीमत अब समझ आ रही है। उन्होंने माना कि भारत ने यूरोपीय देशों को इस खतरे के बारे में काफी पहले चेताया था, लेकिन तब उसकी बात नहीं सुनी गई। CII के एक कार्यक्रम में डी वेवर ने कहा कि दुनिया में आर्थिक ताकत अब सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं है। बड़े देश और ब्लॉक अपनी आर्थिक पकड़ का इस्तेमाल दूसरे देशों पर दबाव बनाने के लिए भी कर सकते हैं। ऐसे में यूरोप को अपनी सप्लाई चेन और व्यापारिक रिश्तों में ज्यादा विकल्प रखने होंगे। ‘भारत ने कहा था, हमने ध्यान नहीं दिया’ डी वेवर ने कहा कि भारत और यूरोप आज एक जैसी चुनौती का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री ने यूरोप को पहले ही बता दिया था कि किसी एक देश या क्षेत्र पर ज्यादा निर्भरता आगे चलकर परेशानी पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा, “आप इस दौर से गुजर चुके हैं। आपके प्रधानमंत्री ने यूरोप को बहुत पहले चेताया था, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। अब हम सुन रहे हैं। यूरोप को यह समझ थोड़ी देर से आई है, लेकिन अब यह बदलाव हो रहा है।” चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारा साफ था बेल्जियम PM ने यूरोप की मौजूदा स्थिति को ‘रूड अवेकनिंग’ यानी देर से हुई कड़वी समझ बताया। उन्होंने कहा कि यूरोप ने लंबे समय तक ऐसे विदेशी सामान को अपने बाजार में जगह दी, जिनकी कीमत स्थानीय उत्पादन की लागत से भी कम थी। इससे यूरोप की अपनी इंडस्ट्री कमजोर हुई। डी वेवर ने कहा कि इस व्यवस्था से सबसे ज्यादा फायदा जिस देश को हुआ, वह यूरोप के काफी करीब है और उसे सभी जानते हैं। उनका इशारा चीन की तरफ था। भारत को बताया नंबर-1 रणनीतिक पार्टनर भारत और यूरोप के रिश्तों पर बात करते हुए डी वेवर ने भारत को यूरोप का सबसे अहम रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि यूरोप को ऐसे देशों के साथ मिलकर काम करना चाहिए, जो नियमों, सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था में भरोसा रखते हैं। उन्होंने कहा, “अगर भारत उस सूची में नहीं है तो आपने कुछ बहुत बुनियादी बात मिस कर दी है। भारत उस सूची में है। नंबर-1।” डी वेवर ने भारत की बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, बड़ी टैलेंट पूल और टेक्नोलॉजी क्षमता का जिक्र किया। उनके मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। अब भारत-यूरोप को व्यापार के नए रास्ते तलाशने होंगे डी वेवर ने कहा कि भारत और यूरोप को अपने व्यापारिक रिश्ते कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ज्यादा विविध बनाना चाहिए। इससे किसी एक देश पर निर्भरता घटेगी और सप्लाई में रुकावट आने का जोखिम भी कम होगा। उन्होंने साथ ही कहा कि ग्लोबल मार्केट के लिए दरवाजे खुले रखने जरूरी हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि देश अपने रणनीतिक हितों को नजरअंदाज कर दें। ‘भारत की आवाज के बिना दुनिया नहीं बन सकती’ भारत और यूरोप की सोच और इतिहास में अंतर के बावजूद डी वेवर ने दोनों के बीच कई समानताएं गिनाईं। उन्होंने भारत को बड़ी लोकतांत्रिक ताकत और इनोवेशन का लीडर बताया। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र और समृद्ध दुनिया बनाने की कोशिश में भारत की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। डी वेवर का बयान ऐसे वक्त आया है, जब यूरोप अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने और चीन समेत कुछ बड़े व्यापारिक साझेदारों पर निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में भारत के साथ व्यापार और रणनीतिक सहयोग यूरोप के लिए और अहम होता जा रहा है।

100 कंटेस्टेंट, बिना दर्शकों का एरिना और दिमागी खेल:ऐसा है अनिल कपूर के ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट

100 कंटेस्टेंट, बिना दर्शकों का एरिना और दिमागी खेल:ऐसा है अनिल कपूर के ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट

मुंबई में ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट किसी सामान्य क्विज शो के सेट जैसा नहीं है। यहां न दर्शकों के लिए अलग सीटिंग है और न ही एक कंटेस्टेंट हॉट सीट पर बैठकर सवालों का जवाब देता है। इसके बजाय पूरे एरिना में देशभर से आए 100 प्रतिभागी एक साथ खेलते हैं। सेट के बीचों-बीच अनिल कपूर के लिए कोई पारंपरिक हॉट सीट भी नहीं है। वे इन 100 कंटेस्टेंट्स के बीच घूमते हुए सवाल पूछेंगे। करीब एक महीने में तैयार किए गए इस विशाल सेट पर 100 से ज्यादा लोगों ने काम किया। सेट डिजाइनर वर्षा जैन के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी चुनौती एक साथ 100 प्रतिभागियों के लिए तकनीकी व्यवस्था तैयार करना था। आंखों देखा हाल: 100 लोगों के लिए तैयार किया गया विशाल एरिना सेट में कदम रखते ही सबसे पहले इसका विशाल आकार ध्यान खींचता है। पूरा एरिना इस तरह डिजाइन किया गया है कि एक साथ 100 प्रतिभागी बैठकर गेम खेल सकें। यहां पारंपरिक क्विज शो की तरह दर्शकों की भीड़ नहीं है। जो लोग दिखाई देंगे, वे सभी खेल का हिस्सा होंगे। सेट का पूरा डिजाइन प्रतिभागियों और होस्ट अनिल कपूर के बीच सीधा कनेक्शन बनाने के हिसाब से तैयार किया गया है। अनिल कपूर किसी एक कंटेस्टेंट के सामने बैठकर सवाल नहीं पूछेंगे, बल्कि 100 लोगों के बीच मौजूद रहकर उनसे सवाल करेंगे। अनिल कपूर के लिए नहीं है पारंपरिक ‘हॉट सीट’ सेट के बीच में एक खास सीट नजर आती है, जिसे देखकर पहली नजर में इसे हॉट सीट समझा जा सकता है। हालांकि, यह पारंपरिक हॉट सीट नहीं है। अनिल कपूर इस सीट पर बैठकर गेम होस्ट नहीं करेंगे। वे इसके आसपास घूमते हुए पूरे एरिना में मौजूद 100 प्रतिभागियों से सवाल करेंगे। यानी होस्ट और कंटेस्टेंट के बीच की दूरी को सेट डिजाइन के स्तर पर ही कम रखा गया है। छत पर लगी हैं 100 खास लाइट्स इस सेट की सबसे दिलचस्प चीजों में से एक इसकी लाइटिंग है। वर्षा जैन के मुताबिक सेट की छत पर 100 लाइट पॉइंट लगाए गए हैं। हर लाइट एक प्रतिभागी के लिए है। गेम के दौरान किसी सवाल के जवाब के हिसाब से इन लाइट्स को प्रोग्राम किया जाएगा। सही और गलत जवाब के साथ लाइटिंग में बदलाव होगा, जिससे पूरे एरिना में गेम का असर दिखाई देगा। वर्षा जैन ने बताया कि 100 लोगों के लिए एक साथ कैमरा और लाइटिंग को प्रोग्राम करना तकनीकी तौर पर काफी चुनौतीपूर्ण था। यही वजह है कि सेट तैयार होने के बाद भी करीब 10 दिन तक तकनीकी जांच और रिहर्सल चलती रही। एक महीने में तैयार हुआ सेट इस विशाल सेट को तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगा। हालांकि, इसकी प्लानिंग इससे पहले ही शुरू हो गई थी और डिजाइन तैयार करने में करीब दो महीने लगे। वर्षा जैन के मुताबिक सेट पर काम करने के दौरान रोजाना 100 से ज्यादा लोग जुटे रहे। सेट तैयार होने के बाद कैमरों, लाइट्स और तकनीकी सिस्टम की लगातार जांच की गई, ताकि शूटिंग के दौरान 100 प्रतिभागियों के साथ गेम को आसानी से संचालित किया जा सके। वर्षा जैन ने बताया कि इंटरनेशनल फॉर्मेट होने के कारण सेट डिजाइन में तय गाइडलाइन का भी पालन करना था। इसके साथ भारतीय दर्शकों और शो की जरूरत के मुताबिक अपनी क्रिएटिव व्याख्या भी जोड़ी गई। ‘केबीसी’ जैसा दिखता है, लेकिन गेम बिल्कुल अलग पहली नजर में ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट देखने पर इसे अमिताभ बच्चन के ‘कौन बनेगा करोड़पति’ से जोड़ा जा सकता है, लेकिन दोनों के फॉर्मेट में बड़ा अंतर है। वर्षा जैन के मुताबिक ‘केबीसी’ में होस्ट एक समय में एक कंटेस्टेंट के साथ खेलते हैं और आसपास दर्शक मौजूद रहते हैं। ‘इंडिया के टॉप 1%’ में ऐसा नहीं है। यहां अनिल कपूर एक साथ पूरे 100 प्रतिभागियों के साथ खेलते हैं और सेट पर अलग से दर्शकों की मौजूदगी नहीं है। उनके मुताबिक शो की वाइब, होस्ट की एनर्जी, सवालों का अंदाज और सेट का लुक- सब कुछ ‘केबीसी’ से अलग रखा गया है। क्या है ‘इंडिया के टॉप 1%’ का कॉन्सेप्ट? ‘इंडिया के टॉप 1%’ लोकप्रिय ब्रिटिश गेम शो ‘द 1% क्लब’ का भारतीय संस्करण है। शो में देशभर से अलग-अलग पेशों और बैकग्राउंड के 100 लोग एक साथ गेम खेलते हैं। इसकी खासियत यह है कि इसमें इतिहास, भूगोल या किताबों से जुड़े सामान्य ज्ञान के सवालों पर ज्यादा जोर नहीं है। यहां कंटेस्टेंट की रीजनिंग, लॉजिक, ऑब्जर्वेशन, पैटर्न पहचानने की क्षमता, कॉमन सेंस और प्रेजेंस ऑफ माइंड को परखा जाता है। शो के कंसल्टेंट सिद्धार्थ बसु के मुताबिक इसका मकसद सिर्फ यह देखना नहीं है कि किसी व्यक्ति ने कितना किताबी ज्ञान हासिल किया है, बल्कि यह देखना है कि वह अपने सामने मौजूद चीजों को किस तरह समझता और उसका लॉजिक पकड़ता है। 90% से शुरू होकर 1% तक पहुंचता है खेल इस गेम का तरीका भी दूसरे क्विज शो से अलग है। शुरुआत में सवाल ऐसा होता है, जिसका जवाब देश के करीब 90% लोग दे सकते हैं। इसके बाद सवालों का स्तर धीरे-धीरे कठिन होता जाता है। इसके बाद 80%, 70%, 60% और आगे बढ़ते हुए सवालों का स्तर उस मुकाम तक पहुंचता है, जहां सिर्फ 1% लोग ही उसका सही जवाब दे पाते हैं। यही इस शो का मूल कॉन्सेप्ट है- देखना कि कौन-सा प्रतिभागी अपनी सोच और समझ के दम पर भारत के उस 1% लोगों में शामिल हो सकता है, जो सबसे मुश्किल सवाल का जवाब दे पाए। हर एपिसोड में 100 नए खिलाड़ी शो में हर एपिसोड 100 लोग गेम खेलते हैं। खास बात यह है कि इसमें प्राइज मनी का सफर भी इसी गेम के साथ आगे बढ़ता है। शो में प्रतिभागियों को पहले से एक लाख रुपए की राशि दी जाती है और गेम के दौरान वे आगे बढ़ते हुए बड़ी रकम जीत सकते हैं। शो में अधिकतम प्राइज मनी 1 करोड़ रुपए तक है। सिद्धार्थ बसु के मुताबिक हर एपिसोड में यह देखा जाएगा कि 100 में से कौन प्रतिभागी गेम में सबसे आगे तक पहुंच पाता है। इसमें किसी एक एपिसोड की रकम को अगले एपिसोड में ले जाने वाला रोलओवर सिस्टम नहीं

100 कंटेस्टेंट, बिना दर्शकों का एरिना और दिमागी खेल:ऐसा है अनिल कपूर के ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट

100 कंटेस्टेंट, बिना दर्शकों का एरिना और दिमागी खेल:ऐसा है अनिल कपूर के ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट

मुंबई में ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट किसी सामान्य क्विज शो के सेट जैसा नहीं है। यहां न दर्शकों के लिए अलग सीटिंग है और न ही एक कंटेस्टेंट हॉट सीट पर बैठकर सवालों का जवाब देता है। इसके बजाय पूरे एरिना में देशभर से आए 100 प्रतिभागी एक साथ खेलते हैं। सेट के बीचों-बीच अनिल कपूर के लिए कोई पारंपरिक हॉट सीट भी नहीं है। वे इन 100 कंटेस्टेंट्स के बीच घूमते हुए सवाल पूछेंगे। करीब एक महीने में तैयार किए गए इस विशाल सेट पर 100 से ज्यादा लोगों ने काम किया। सेट डिजाइनर वर्षा जैन के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी चुनौती एक साथ 100 प्रतिभागियों के लिए तकनीकी व्यवस्था तैयार करना था। आंखों देखा हाल: 100 लोगों के लिए तैयार किया गया विशाल एरिना सेट में कदम रखते ही सबसे पहले इसका विशाल आकार ध्यान खींचता है। पूरा एरिना इस तरह डिजाइन किया गया है कि एक साथ 100 प्रतिभागी बैठकर गेम खेल सकें। यहां पारंपरिक क्विज शो की तरह दर्शकों की भीड़ नहीं है। जो लोग दिखाई देंगे, वे सभी खेल का हिस्सा होंगे। सेट का पूरा डिजाइन प्रतिभागियों और होस्ट अनिल कपूर के बीच सीधा कनेक्शन बनाने के हिसाब से तैयार किया गया है। अनिल कपूर किसी एक कंटेस्टेंट के सामने बैठकर सवाल नहीं पूछेंगे, बल्कि 100 लोगों के बीच मौजूद रहकर उनसे सवाल करेंगे। अनिल कपूर के लिए नहीं है पारंपरिक ‘हॉट सीट’ सेट के बीच में एक खास सीट नजर आती है, जिसे देखकर पहली नजर में इसे हॉट सीट समझा जा सकता है। हालांकि, यह पारंपरिक हॉट सीट नहीं है। अनिल कपूर इस सीट पर बैठकर गेम होस्ट नहीं करेंगे। वे इसके आसपास घूमते हुए पूरे एरिना में मौजूद 100 प्रतिभागियों से सवाल करेंगे। यानी होस्ट और कंटेस्टेंट के बीच की दूरी को सेट डिजाइन के स्तर पर ही कम रखा गया है। छत पर लगी हैं 100 खास लाइट्स इस सेट की सबसे दिलचस्प चीजों में से एक इसकी लाइटिंग है। वर्षा जैन के मुताबिक सेट की छत पर 100 लाइट पॉइंट लगाए गए हैं। हर लाइट एक प्रतिभागी के लिए है। गेम के दौरान किसी सवाल के जवाब के हिसाब से इन लाइट्स को प्रोग्राम किया जाएगा। सही और गलत जवाब के साथ लाइटिंग में बदलाव होगा, जिससे पूरे एरिना में गेम का असर दिखाई देगा। वर्षा जैन ने बताया कि 100 लोगों के लिए एक साथ कैमरा और लाइटिंग को प्रोग्राम करना तकनीकी तौर पर काफी चुनौतीपूर्ण था। यही वजह है कि सेट तैयार होने के बाद भी करीब 10 दिन तक तकनीकी जांच और रिहर्सल चलती रही। एक महीने में तैयार हुआ सेट इस विशाल सेट को तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगा। हालांकि, इसकी प्लानिंग इससे पहले ही शुरू हो गई थी और डिजाइन तैयार करने में करीब दो महीने लगे। वर्षा जैन के मुताबिक सेट पर काम करने के दौरान रोजाना 100 से ज्यादा लोग जुटे रहे। सेट तैयार होने के बाद कैमरों, लाइट्स और तकनीकी सिस्टम की लगातार जांच की गई, ताकि शूटिंग के दौरान 100 प्रतिभागियों के साथ गेम को आसानी से संचालित किया जा सके। वर्षा जैन ने बताया कि इंटरनेशनल फॉर्मेट होने के कारण सेट डिजाइन में तय गाइडलाइन का भी पालन करना था। इसके साथ भारतीय दर्शकों और शो की जरूरत के मुताबिक अपनी क्रिएटिव व्याख्या भी जोड़ी गई। ‘केबीसी’ जैसा दिखता है, लेकिन गेम बिल्कुल अलग पहली नजर में ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट देखने पर इसे अमिताभ बच्चन के ‘कौन बनेगा करोड़पति’ से जोड़ा जा सकता है, लेकिन दोनों के फॉर्मेट में बड़ा अंतर है। वर्षा जैन के मुताबिक ‘केबीसी’ में होस्ट एक समय में एक कंटेस्टेंट के साथ खेलते हैं और आसपास दर्शक मौजूद रहते हैं। ‘इंडिया के टॉप 1%’ में ऐसा नहीं है। यहां अनिल कपूर एक साथ पूरे 100 प्रतिभागियों के साथ खेलते हैं और सेट पर अलग से दर्शकों की मौजूदगी नहीं है। उनके मुताबिक शो की वाइब, होस्ट की एनर्जी, सवालों का अंदाज और सेट का लुक- सब कुछ ‘केबीसी’ से अलग रखा गया है। क्या है ‘इंडिया के टॉप 1%’ का कॉन्सेप्ट? ‘इंडिया के टॉप 1%’ लोकप्रिय ब्रिटिश गेम शो ‘द 1% क्लब’ का भारतीय संस्करण है। शो में देशभर से अलग-अलग पेशों और बैकग्राउंड के 100 लोग एक साथ गेम खेलते हैं। इसकी खासियत यह है कि इसमें इतिहास, भूगोल या किताबों से जुड़े सामान्य ज्ञान के सवालों पर ज्यादा जोर नहीं है। यहां कंटेस्टेंट की रीजनिंग, लॉजिक, ऑब्जर्वेशन, पैटर्न पहचानने की क्षमता, कॉमन सेंस और प्रेजेंस ऑफ माइंड को परखा जाता है। शो के कंसल्टेंट सिद्धार्थ बसु के मुताबिक इसका मकसद सिर्फ यह देखना नहीं है कि किसी व्यक्ति ने कितना किताबी ज्ञान हासिल किया है, बल्कि यह देखना है कि वह अपने सामने मौजूद चीजों को किस तरह समझता और उसका लॉजिक पकड़ता है। 90% से शुरू होकर 1% तक पहुंचता है खेल इस गेम का तरीका भी दूसरे क्विज शो से अलग है। शुरुआत में सवाल ऐसा होता है, जिसका जवाब देश के करीब 90% लोग दे सकते हैं। इसके बाद सवालों का स्तर धीरे-धीरे कठिन होता जाता है। इसके बाद 80%, 70%, 60% और आगे बढ़ते हुए सवालों का स्तर उस मुकाम तक पहुंचता है, जहां सिर्फ 1% लोग ही उसका सही जवाब दे पाते हैं। यही इस शो का मूल कॉन्सेप्ट है- देखना कि कौन-सा प्रतिभागी अपनी सोच और समझ के दम पर भारत के उस 1% लोगों में शामिल हो सकता है, जो सबसे मुश्किल सवाल का जवाब दे पाए। हर एपिसोड में 100 नए खिलाड़ी शो में हर एपिसोड 100 लोग गेम खेलते हैं। खास बात यह है कि इसमें प्राइज मनी का सफर भी इसी गेम के साथ आगे बढ़ता है। शो में प्रतिभागियों को पहले से एक लाख रुपए की राशि दी जाती है और गेम के दौरान वे आगे बढ़ते हुए बड़ी रकम जीत सकते हैं। शो में अधिकतम प्राइज मनी 1 करोड़ रुपए तक है। सिद्धार्थ बसु के मुताबिक हर एपिसोड में यह देखा जाएगा कि 100 में से कौन प्रतिभागी गेम में सबसे आगे तक पहुंच पाता है। इसमें किसी एक एपिसोड की रकम को अगले एपिसोड में ले जाने वाला रोलओवर सिस्टम नहीं

सलमान खान ने कैफे को दी चेतावनी:बोले- हाइजीन मेंटेन रखना, वरना उनको भेज दूंगा; क्या तुकाराम मुंढे की ओर किया इशारा

सलमान खान ने कैफे को दी चेतावनी:बोले- हाइजीन मेंटेन रखना, वरना उनको भेज दूंगा; क्या तुकाराम मुंढे की ओर किया इशारा

सलमान खान ने अपनी दोस्त सृष्टि साहनी के मुंबई के बांद्रा में खुले नए कैफे ‘द टक शॉप एट सेवियोज’ का वीडियो शुक्रवार को इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया। साथ ही सलमान ने दोस्त को कैफे की हाइजीन बनाए रखने की मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी। सलमान ने लिखा, “सृष्टि मेरी कॉफी रिफिल करना प्लीज। कीमत मत बढ़ाना, क्वालिटी मेंटेन करना। हाइजीन मेंटेन रखना, वरना मैं HIM को भेज दूंगा और काम हो जाएगा, बहन।” सलमान ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन “HIM” का इशारा महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे की ओर माना जा रहा है। यह बात ऐसे समय में आई है, जब महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी को लेकर कार्रवाई तेज है। सलमान ने अपने मशहूर “इट्स डन, ब्रो” कैचफ्रेज को भी अलग अंदाज में इस्तेमाल किया। उन्होंने मैसेज के आखिर में “इट्स डन, सिस” लिखा। सलमान की चेतावनी महाराष्ट्र में खाने-पीने की जगहों पर बढ़ी निगरानी के बीच आई। पिछले कुछ महीनों में FDA ने फूड सेफ्टी, हाइजीन और लाइसेंस से जुड़े उल्लंघनों को लेकर रेस्टोरेंट्स और दूसरे संस्थानों पर जांच और कार्रवाई तेज की है। तुकाराम मुंढे ने 26 मई 2026 को महाराष्ट्र FDA कमिश्नर का पद संभाला था। उनके पद संभालने के बाद विभाग ने रेस्टोरेंट्स, होटल्स, क्लब्स, फास्ट-फूड आउटलेट्स और संस्थागत किचन में जांच बढ़ाई है। मुंढे के कमिश्नर बनने के शुरुआती दो महीनों में FDA ने 3,000 से ज्यादा जांच कीं। करीब 165 फूड संस्थानों के लाइसेंस सस्पेंड किए गए। इस कार्रवाई में खराब हाइजीन, खाने में मिलावट, नकली पनीर, मिलावटी दूध और जरूरी लाइसेंस के बिना कारोबार करने जैसी शिकायतों पर ध्यान दिया गया। मुंढे के सख्त रवैये के चलते सोशल मीडिया पर उन्हें रियल-लाइफ सिंघम का नाम भी मिला है। स्वतंत्रता दिवस पर छात्रों को संबोधित करते हुए मुंढे ने फूड सेफ्टी और पब्लिक हेल्थ की जरूरत पर बात की थी। उन्होंने कहा था, “मेरा मानना है कि स्वस्थ देश के लिए स्वस्थ लोगों का होना जरूरी है। स्वस्थ लोगों के लिए अच्छा खाना और दवाइयां जरूरी हैं। इसके लिए रेगुलेटर्स को इस लक्ष्य की दिशा में काम करना चाहिए।” FDA ने शाहरुख, अजय और टाइगर को नोटिस भेजा गौरतलब है कि महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने 11 अगस्त को शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इन तीनों अभिनेताओं ने ‘विमल इलायची’ का विज्ञापन किया था। इस मामले में अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को अपना जवाब भेज दिया। वहीं, शाहरुख खान की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। तीनों एक्टर्स को नोटिस मिलने के 15 दिन के अंदर जवाब देने को कहा गया था। ‘सीएनएन-न्यूज18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, रेगुलेटर को अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ के जवाब मिल गए हैं। शाहरुख खान का जवाब अभी तक नहीं मिला है और FDA उनके रिप्लाई का इंतजार कर रहा है। रेगुलेटर ने सवाल उठाया है कि क्या यह विज्ञापन विमल पान मसाला के सरोगेट प्रमोशन के बराबर हो सकता है। FDA का कहना है कि भले ही विज्ञापन इलायची प्रोडक्ट के लिए है, लेकिन इसकी ब्रांडिंग पान मसाला ब्रांड से अप्रत्यक्ष कनेक्शन बना सकती है। तीनों एक्टर्स से मांगे गए थे सबूत FDA ने अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ से इस बात के सबूत मांगे थे कि उन्होंने विमल इलायची का जो विज्ञापन किया है, वह पूरी तरह अलग प्रोडक्ट है। इसके साथ ही उनसे यह भी साबित करने को कहा गया था कि यह विज्ञापन बैन किए गए विमल पान मसाला और तंबाकू के दूसरे प्रोडक्ट्स के प्रमोशन के लिए बनाया गया सरोगेट विज्ञापन नहीं है। FDA ने उनसे विज्ञापन से जुड़े एग्रीमेंट, कैंपेन ब्रीफ और अन्य दस्तावेज भी मांगे थे। शाहरुख ने जवाब नहीं दिया तो लगेगा जुर्माना अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ का जवाब मिलने के बाद अब FDA शाहरुख खान के जवाब का इंतजार कर रहा है। शाहरुख की तरफ से जवाब नहीं मिलने पर FDA क्या कार्रवाई करेगा, यह अभी साफ नहीं है। जानकारी के मुताबिक, समय सीमा तक जवाब न देने या जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। भ्रामक खाद्य विज्ञापन के मामले में FSS एक्ट की धारा 53 के तहत 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

Pakistan Punjab Hindu Temple Demolition Controversy

Pakistan Punjab Hindu Temple Demolition Controversy

7 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान ने पंजाब प्रांत में करीब 100 साल पुराने हिंदू मंदिर गिराए जाने की खबरों को गलत बताया है। उसका कहना है कि 21 जुलाई को भारी बारिश के कारण मंदिर क्षतिग्रस्त होकर गिर गया था। वहीं, स्थानीय लोगों और हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों का आरोप है कि मंदिर को जानबूझकर गिराया गया और उसकी जमीन पास के मदरसे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। दूसरी ओर, रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मंदिर की इमारत को 21 अगस्त को गिराया गया। दोनों तारीखों के बीच करीब एक महीने का अंतर है। इसी वजह से मंदिर गिराए जाने की घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। TLP पर मंदिर गिराने के आरोप पाकिस्तान मसिहा मिल्लत पार्टी (PMMP), स्थानीय लोगों और हिंदू समुदाय ने आरोप लगाया था कि मंदिर को स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने गिराया। इन लोगों ने इस मामले में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) से जुड़े लोगों की भूमिका होने का भी आरोप लगाया है। TLP पाकिस्तान का एक कट्टरपंथी इस्लामी संगठन है, जिस पर वहां प्रतिबंध लगा हुआ है। खबर अपडेट हो रही है… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

अमेरिकी राजदूत बोले- भारत-अमेरिका रिश्तों से दूसरे देश जलते हैं:PM मोदी उन नेताओं में सबसे ऊपर, जिनसे ट्रम्प मिलना चाहते हैं

अमेरिकी राजदूत बोले- भारत-अमेरिका रिश्तों से दूसरे देश जलते हैं:PM मोदी उन नेताओं में सबसे ऊपर, जिनसे ट्रम्प मिलना चाहते हैं

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों से कई दूसरे देश ‘जलते’ हैं। गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त मानते हैं और दिसंबर में होने वाले G20 समिट के दौरान जिन नेताओं से वह मिलना चाहते हैं, उनमें मोदी का नाम सबसे ऊपर होगा। G20 में मोदी-ट्रम्प की अलग मुलाकात संभव सर्जियो गोर ने इंडिया टुडे टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रम्प और मोदी के बीच अच्छे व्यक्तिगत रिश्ते हैं। ऐसे में दिसंबर में G20 समिट के लिए मोदी के फ्लोरिडा पहुंचने पर दोनों नेताओं की अलग से मुलाकात भी हो सकती है। हालांकि, मोदी और ट्रम्प के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गोर ने ट्रम्प के 2027 में भारत दौरे की संभावना के भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि ट्रम्प 2020 में अपनी भारत यात्रा को अब भी याद करते हैं। अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, जब भी ट्रम्प भारत की बात करते हैं तो वह यहां के लोगों से मुलाकात और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने रिश्तों को याद करते हैं। गोर ने कहा कि अगला साल आने में ज्यादा समय नहीं है। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के भारत दौरे की कोई तारीख या आधिकारिक कार्यक्रम नहीं बताया। ट्रेड डील पर बोले- समझौते के काफी करीब भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर गोर ने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद डील से जुड़े मुद्दों पर दोबारा काम किया जा रहा है। उन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में दोनों देश समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। गोर ने कहा कि इतने बड़े व्यापार समझौते में समय लगना सामान्य है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े व्यापारिक समझौतों में कई साल लग सकते हैं। 240 अरब डॉलर का व्यापार, 500 अरब डॉलर का लक्ष्य गोर के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच अभी करीब 240 अरब डॉलर का व्यापार है। दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है। उन्होंने कहा कि ट्रेड डील से दोनों देशों को आर्थिक फायदा हो सकता है। अमेरिका एक मजबूत और स्थिर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है। गोर के बयान से साफ है कि भारत-अमेरिका के रिश्तों में व्यापार के साथ दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी भी अहम है।