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India Nepal Flood Relief | Rescue Expert Forensic Team Support

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नई दिल्ली/काठमांडू6 मिनट पहले

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नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में इस आपदा से 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। शहरों, सड़कों, पुलों और कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है।

बाढ़ के कुछ घंटों के भीतर ही भारत ने राहत सामग्री भेजनी शुरू कर दी थी। 3 सितंबर तक भारत पांच खेप में कुल 74 टन राहत सामग्री भेज चुका है, जिसमें करीब 5 टन जरूरी दवाइयां शामिल हैं।

भारत की मदद सिर्फ राहत सामग्री तक सीमित नहीं रही। डॉक्टर, पैरामेडिक्स, बचाव दल, सुरंग विशेषज्ञ, बेली ब्रिज और फोरेंसिक एक्सपर्ट भी नेपाल भेजे गए हैं।

यानी सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश से लेकर शवों की DNA जांच और पुनर्निर्माण तक भारत कई मोर्चों पर नेपाल की मदद कर रहा है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भी संसद में भारत की सहायता के लिए धन्यवाद दिया है।

भारत की मदद से बना अस्पताल बाढ़ पीड़ितों के लिए बना सहारा

नेपाल के नुवाकोट में नेपाल-भारत मैत्री भवन बाढ़ के बाद लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है। इस इमारत में आयुर्वेद और वैकल्पिक अस्पताल भी है।

भारत सरकार ने 2015 के भूकंप के बाद इस अस्पताल का पुनर्निर्माण कराया था। ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से भोटेकोशी बाढ़ में घर छोड़ने को मजबूर सैकड़ों लोगों ने यहां शरण ली है।

अस्पताल में 11 डॉक्टर बाढ़ प्रभावित लोगों का इलाज कर रहे हैं। यहां से जिले के अलग-अलग राहत केंद्रों में पहुंचाए गए लोगों को भी मेडिकल मदद दी जा रही है।

भारत की मदद से चल रहा अस्पताल लोगों को रहने की जगह, इलाज और दूसरी जरूरी सुविधाएं दे रहा है।

भारत की मदद से चल रहा अस्पताल लोगों को रहने की जगह, इलाज और दूसरी जरूरी सुविधाएं दे रहा है।

जहां पुल बह गए, वहां बेली ब्रिज से फिर जुड़ेंगे रास्ते

बाढ़ में कई सड़कें और पुल बहने से दूरदराज के इलाकों का संपर्क टूट गया है। इसे बहाल करने के लिए भारत नेपाल को बेली ब्रिज भेज रहा है।

बेली ब्रिज लोहे के हिस्सों से तैयार होने वाला अस्थायी पुल होता है। इसके हिस्सों को प्रभावित इलाके तक ले जाकर मौके पर जोड़ा जा सकता है। इससे स्थायी पुल बनने का इंतजार किए बिना सड़क संपर्क जल्दी बहाल किया जा सकता है।

भारतीय दूतावास के मुताबिक, 230 फीट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के उपकरण लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं। सात और बेली ब्रिज लगाने के लिए उपकरण भी जल्द भेजे जाएंगे। इन्हें लगाने के लिए तकनीकी टीमें भी नेपाल पहुंचेंगी।

नेपाल में 26 अगस्त को त्रिशूली नदी के ऊपर रसुवा जिले में एक पुल बाढ़ के साथ ही बह गया था।

नेपाल में 26 अगस्त को त्रिशूली नदी के ऊपर रसुवा जिले में एक पुल बाढ़ के साथ ही बह गया था।

हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में भारतीय एक्सपर्ट

बाढ़ के बाद नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे मजदूरों को ढूंढना है। नेपाल सरकार के मुताबिक कई सुरंगों में करीब 900 से ज्यादा कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है।

30 अगस्त को भारतीय सुरंग बचाव विशेषज्ञों की टीम नेपाल पहुंची। टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग के बाढ़ प्रभावित इलाकों में हाइड्रोपावर सुरंगों में कर्मचारियों की तलाश कर रही है।

दिल्ली-एनसीआर के ‘रैट माइनर्स’ की टीम ने भी नेपाल के बचाव अभियान में शामिल होने की पेशकश की है। इसी टीम ने 2023 में उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई थी।

भारतीय टनल रेस्क्यू टीम नेपाल में लगातार काम कर रही है।

भारतीय टनल रेस्क्यू टीम नेपाल में लगातार काम कर रही है।

शवों के पहचान के लिए DNA जांच में भारत की मदद

बाढ़ का पानी घटने के बाद अब नेपाल के सामने एक और बड़ी चुनौती बरामद शवों और लापता लोगों की पहचान करना है। इसके लिए भारत ने 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम नेपाल भेजी है।

भारतीय विशेषज्ञ नेपाली टीम के साथ मिलकर DNA सैंपल की जांच कर रहे हैं। काठमांडू घाटी की दो लैब में यह काम किया जा रहा है। इनमें नेपाल पुलिस सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और खुमलटार की नेशनल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी शामिल हैं।

नेपाल पुलिस के मुताबिक मंगलवार शाम तक 1,068 शव बरामद किए जा चुके थे। इनमें करीब 400 मामलों में सिर्फ शरीर के कुछ हिस्से मिले हैं। ऐसे मामलों में DNA जांच के जरिए मृतकों की पहचान करना बेहद जरूरी हो गया है।

भारतीय टीम शवों के अवशेषों की DNA जांच कर रही है। ताकि शव परिजनों को सौंपे जा सकें।

भारतीय टीम शवों के अवशेषों की DNA जांच कर रही है। ताकि शव परिजनों को सौंपे जा सकें।

बाढ़ में तबाह स्कूल को भी दोबारा बनाएगा भारत

भारत की मदद राहत और बचाव अभियान तक सीमित नहीं है। भारत ने नुवाकोट के बिदुर में बाढ़ से क्षतिग्रस्त त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल को दोबारा बनाने का फैसला भी किया है।

यह स्कूल भारत-नेपाल सहयोग के लिहाज से भी अहम है। इसके पुराने भवन का संबंध भारत की विकास सहायता से रहा है। अब नई इमारत भी भारत के हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत बनाई जाएगी।

आपदा के समय पड़ोसी देशों के साथ खड़ा रहा है भारत

नेपाल में मौजूदा राहत अभियान आपदा के समय दूसरे देशों की मदद करने की भारत की नीति की एक और मिसाल है।

  • 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने ऑपरेशन मैत्री के तहत बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया था।
  • मार्च में म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भी भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत राहत और बचाव कार्यों में मदद की थी।

नेपाल में इस बार भी भारत की भूमिका सिर्फ शुरुआती राहत तक सीमित नहीं है। इलाज से लेकर बचाव, सुरंगों में तलाश, टूटे रास्तों को जोड़ने, शवों की पहचान और पुनर्निर्माण तक भारत नेपाल की मदद में हर स्तर पर जुटा है।

——————

नेपाल बाढ़ से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

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जहां पुल बह गए, वहां बेली ब्रिज से फिर जुड़ेंगे रास्ते

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भारतीय दूतावास के मुताबिक, 230 फीट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के उपकरण लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं। सात और बेली ब्रिज लगाने के लिए उपकरण भी जल्द भेजे जाएंगे। इन्हें लगाने के लिए तकनीकी टीमें भी नेपाल पहुंचेंगी।

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30 अगस्त को भारतीय सुरंग बचाव विशेषज्ञों की टीम नेपाल पहुंची। टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग के बाढ़ प्रभावित इलाकों में हाइड्रोपावर सुरंगों में कर्मचारियों की तलाश कर रही है।

दिल्ली-एनसीआर के ‘रैट माइनर्स’ की टीम ने भी नेपाल के बचाव अभियान में शामिल होने की पेशकश की है। इसी टीम ने 2023 में उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई थी।

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नेपाल पुलिस के मुताबिक मंगलवार शाम तक 1,068 शव बरामद किए जा चुके थे। इनमें करीब 400 मामलों में सिर्फ शरीर के कुछ हिस्से मिले हैं। ऐसे मामलों में DNA जांच के जरिए मृतकों की पहचान करना बेहद जरूरी हो गया है।

भारतीय टीम शवों के अवशेषों की DNA जांच कर रही है। ताकि शव परिजनों को सौंपे जा सकें।

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यह स्कूल भारत-नेपाल सहयोग के लिहाज से भी अहम है। इसके पुराने भवन का संबंध भारत की विकास सहायता से रहा है। अब नई इमारत भी भारत के हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत बनाई जाएगी।

आपदा के समय पड़ोसी देशों के साथ खड़ा रहा है भारत

नेपाल में मौजूदा राहत अभियान आपदा के समय दूसरे देशों की मदद करने की भारत की नीति की एक और मिसाल है।

  • 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने ऑपरेशन मैत्री के तहत बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया था।
  • मार्च में म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भी भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत राहत और बचाव कार्यों में मदद की थी।

नेपाल में इस बार भी भारत की भूमिका सिर्फ शुरुआती राहत तक सीमित नहीं है। इलाज से लेकर बचाव, सुरंगों में तलाश, टूटे रास्तों को जोड़ने, शवों की पहचान और पुनर्निर्माण तक भारत नेपाल की मदद में हर स्तर पर जुटा है।

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