Tuesday, 20 Oct 2026 | 11:18 AM

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Iran Embassy Hormuz Strait Minesweeper Video

ईरान ने US को चिढ़ाया- ‘हबीबी अंकल सैम, ईरान आओ’:दूतावास ने होर्मुज में माइनस्वीपर गेम का वीडियो पोस्ट किया

4 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान ने अमेरिका को चिढ़ाते हुए एक वीडियो शेयर किया है। सिएरा लियोन में ईरानी दूतावास ने 35 सेकेंड का वीडियो पोस्ट किया। इसके साथ लिखा- “हबीबी (अंकल सैम), ईरान आओ!” वीडियो में होर्मुज स्ट्रेट का 3D नक्शा दिखता है। इस पर ‘माइन्सवीपर’ गेम खेला जा रहा है। इस गेम में खिलाड़ी को छिपी हुई समुद्री माइन्स (बारुदी सुरंगो) से बचना होता है। ईरान ने यह वीडियो ऐसे समय पोस्ट किया है, जब होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री माइन्स बिछाने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका ने ईरान के रॉकेट लॉन्चर को निशाना बनाया अमेरिका ने रविवार को होर्मुज के एक द्वीप पर ईरान के रॉकेट लॉन्चरों पर हमला किया था। अमेरिका का कहना था कि ईरान इनका इस्तेमाल समुद्र में माइन्स डालने के लिए कर सकता है। अमेरिका ने पिछले हफ्ते ही होर्मुज के अंतरराष्ट्रीय जहाज मार्गों से मुद्री माइन्स हटाई थीं। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने दोबारा समुद्री माइन्स बिछाईं तो उन्हें बिछाने वाले जहाज और बोट को नष्ट कर दिया जाएगा। शादी समारोह पर अमेरिकी हमले में 5 की मौत मंगलवार रात ईरान के सिरिक में अमेरिकी हवाई हमले के दौरान एक शादी समारोह पर मिसाइल गिरने से 5 लोग मारे गए। मृतकों में 4 साल का एक बच्चा भी शामिल है। अमेरिकी सेना ने सिरिक, खुजस्तान, केशम द्वीप और बंदर अब्बास में मिसाइल और ड्रोन से हमले किए थे। इन हमलों में ईरान में कुल 19 लोगों की मौत और 68 लोग घायल हुए हैं। अमेरिका का कहना है कि उसकी सेना ने केवल ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने से इनकार किया है। ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने जॉर्डन में दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। ईरान ने भारी नुकसान का दावा किया। वहीं, जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने 8 मिसाइलों को रोक दिया। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर फिर हमला किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस, रडार, समुद्री ठिकानों, खदानें बिछाने की क्षमता और संचार केंद्रों को निशाना बनाया गया। खबर अपडेट हो रही… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

ईरान ने US को चिढ़ाया- ‘हबीबी अंकल सैम, ईरान आओ’:दूतावास ने होर्मुज में माइनस्वीपर गेम का वीडियो पोस्ट किया

ईरान ने US को चिढ़ाया- ‘हबीबी अंकल सैम, ईरान आओ’:दूतावास ने होर्मुज में माइनस्वीपर गेम का वीडियो पोस्ट किया

ईरान ने अमेरिका को चिढ़ाते हुए एक वीडियो शेयर किया है। सिएरा लियोन में ईरानी दूतावास ने 35 सेकेंड का वीडियो पोस्ट किया। इसके साथ लिखा- “हबीबी (अंकल सैम), ईरान आओ!” वीडियो में होर्मुज स्ट्रेट का 3D नक्शा दिखता है। इस पर ‘माइन्सवीपर’ गेम खेला जा रहा है। इस गेम में खिलाड़ी को छिपी हुई समुद्री माइन्स (बारुदी सुरंगो) से बचना होता है। ईरान ने यह वीडियो ऐसे समय पोस्ट किया है, जब होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री माइन्स बिछाने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका ने ईरान के रॉकेट लॉन्चर को निशाना बनाया अमेरिका ने रविवार को होर्मुज के एक द्वीप पर ईरान के रॉकेट लॉन्चरों पर हमला किया था। अमेरिका का कहना था कि ईरान इनका इस्तेमाल समुद्र में माइन्स खदानें डालने के लिए कर सकता है। अमेरिका ने पिछले हफ्ते ही होर्मुज के अंतरराष्ट्रीय जहाज मार्गों से मुद्री माइन्स हटाई थीं। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने दोबारा समुद्री माइन्स बिछाईं तो उन्हें बिछाने वाले जहाज और बोट को नष्ट कर दिया जाएगा। ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने जॉर्डन में दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। ईरान ने भारी नुकसान का दावा किया। वहीं, जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने 8 मिसाइलों को रोक दिया। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर फिर हमला किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस, रडार, समुद्री ठिकानों, खदानें बिछाने की क्षमता और संचार केंद्रों को निशाना बनाया गया। खबर अपडेट हो रही…

मैं किसी स्टार के पीछे नहीं भागता:निखिल आडवाणी बोले- 25 साल बाद मनोज बाजपेयी संग काम किया तो उन्होंने कहा- अब आए हो

मैं किसी स्टार के पीछे नहीं भागता:निखिल आडवाणी बोले- 25 साल बाद मनोज बाजपेयी संग काम किया तो उन्होंने कहा- अब आए हो

वेब सीरीज ‘द रिवोल्यूशनरीज’ आजादी की लड़ाई के उन युवा क्रांतिकारियों की कहानी है, जिनके बारे में कम चर्चा हुई। यह सीरीज संजीव सान्याल की किताब ‘रेवोल्यूशनरीज: द अदर स्टोरी ऑफ हाउ इंडिया वॉन इट्स फ्रीडम’ पर आधारित है। दैनिक भास्कर से बातचीत में डायरेक्टर निखिल आडवाणी ने बताया कि ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ के बाद उन्हें लगा कि ऐसी कहानियों में यूथ का नजरिया मिसिंग था। उन्होंने प्रतिभा रांटा की तारीफ करते हुए कहा कि अगर वह शो के लिए मना कर देतीं तो उनका दिल टूट जाता। निखिल ने मनोज बाजपेयी का किस्सा भी सुनाया, जिन्होंने 25 साल बाद साथ काम करने पर पूछा था- ‘अब आए हो?’ प्रतिभा ने किरदार की तैयारी और रोहित सराफ ने एक्शन को चुनौती बताया। सवाल: पहले भी आपने आजादी से जुड़ी कहानियां कही हैं। ‘द रिवोल्यूशनरीज’ में ऐसा क्या था, जो आपको पहले की कहानियों में मिसिंग लगा? जवाब/निखिल आडवाणी: मुझे लगा कि यूथ मिसिंग था। हमने भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, ऊधम सिंह और जलियांवाला बाग के बारे में बहुत पढ़ा है। लेकिन इनसे करीब 10 साल पहले भी एक समानांतर कहानी चल रही थी। रिसर्च करते हुए मुझे लगा कि इन युवाओं की कहानी भी बतानी चाहिए। उस समय के क्रांतिकारियों में एक अलग तरह का जुनून था। उन्होंने तय कर लिया था कि अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालना है। कैसे करेंगे, यह बाद की बात थी। यही जुनून मुझे इस कहानी में सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। सवाल: प्रतिभा रांटा में आपको वह प्रतिभा कब नजर आई, जो इस किरदार के लिए जरूरी थी? अगर वह शो करने से मना कर देतीं तो क्या होता? जवाब/निखिल आडवाणी: मेरे लिए किसी एक्टर के पास जाना सिर्फ कास्टिंग नहीं है। मैं किसी कलाकार के पास तब तक नहीं जाना चाहता, जब तक मेरे पास उसके लिए ऐसा कुछ न हो, जिसमें वह पूरी तरह डूब सके। प्रतिभा के मामले में भी ऐसा ही था। मुझे पता था कि वह बहुत अच्छी एक्टर हैं, लेकिन यह समझना भी जरूरी था कि वह किरदार को किस तरह अपने अंदर उतारेंगी। हमने कई सीन्स पर महीनों चर्चा की। एक-एक लाइन पर बात की कि इसका मतलब क्या है और इसे किस तरह करना है। अगर प्रतिभा ने इस शो के लिए मना कर दिया होता, तो मैं सच में मेरा दिल टूट हो जाता। क्योंकि उन्होंने इस किरदार के लिए जो दिया है, वह बहुत खास है। मैं हमेशा मानता हूं कि एक एक्टर के अंदर यह चुनौती होनी चाहिए कि क्या मैं इस सीन को और बेहतर कर सकता हूं? क्या मैं इसे पेपर पर लिखे हुए सीन से आगे ले जा सकता हूं? अगर यह चुनौती नहीं है तो काम बोरिंग हो जाता है। सवाल: आपने कहा कि आप किसी कलाकार को सिर्फ इसलिए नहीं लेते कि वह बड़ा नाम है। मनोज बाजपेयी का 25 साल वाला किस्सा क्या है? जवाब/निखिल आडवाणी: मनोज बाजपेयी मुझसे करीब 25 साल से कहते रहे थे कि मेरे साथ काम करना है। जब मैं आखिरकार उनके पास ‘सत्यमेव जयते’ लेकर गया तो उन्होंने मुझसे कहा- ‘अब आए हो?’ मैं किसी बिजी स्टार के पीछे भागने में विश्वास नहीं करता। मेरे लिए जरूरी है कि मेरे पास उस कलाकार के लिए सही किरदार हो। मैं किसी एक्टर के पास सिर्फ इसलिए नहीं जाता कि वह बड़ा नाम है। मुझे ऐसा किरदार लेकर जाना होता है, जिसमें वह अपने दांत गड़ा सके और पूरी तरह डूब सके। यही बात प्रतिभा के साथ भी थी। मुझे उनके लिए सही किरदार मिला और फिर हमने साथ में उसे खोजा। सवाल: प्रतिभा, निखिल सर ने आपको किरदार किस तरह समझाया? जवाब/प्रतिभा रांटा: जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो उसमें काफी कुछ पहले से मौजूद था, क्योंकि सर और उनकी टीम ने बहुत रिसर्च की थी। लेकिन प्रतिभा के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसलिए दूसरी क्रांतिकारी महिलाओं से भी प्रेरणा ली गई। मैंने भिकाजी कामा और बीबी गुलाब कौर जैसी महिलाओं के बारे में पढ़ा। मुझे फिल्म ‘लिटिल वुमन’ भी बहुत पसंद है और उससे भी मुझे प्रेरणा मिली। सर के साथ लगातार चर्चा होती थी कि प्रतिभा को किस तरह अप्रोच करना है। वह स्क्रीन पर सामान्य लड़की की तरह नहीं दिखती। उसमें आत्मविश्वास और आग है। वह बराबरी का हक मांगती है और अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटती। सवाल: शूटिंग के दौरान कौन सा सीन आपके लिए सबसे खास रहा? जवाब/प्रतिभा रांटा: बाघा जतिन और प्रतिभा के बीच का एक सीन मेरे लिए बहुत खास है। उसमें प्रतिभा उनसे कहती है कि आपको किसने हक दिया कि आप हमारे बारे में फैसला करें? अगर आप अपने लिए फैसले ले सकते हैं तो हम क्यों नहीं ले सकते? उस सीन में प्रतिभा का नजरिया साफ दिखाई देता है। वह महिलाओं को बराबरी से देखती है और अपने फैसले खुद लेना चाहती है। निखिल आडवाणी: यह सीन सुबह करीब 5 बजे शूट हुआ था। शूटिंग में देरी हो गई थी और वह लोकेशन का आखिरी दिन था, इसलिए हम वापस भी नहीं आ सकते थे। प्रतिभा और मैं उस सीन पर महीनों से बात कर रहे थे। वह उस वक्त काफी परेशान थी, लेकिन सुबह 5 बजे उसने जो परफॉर्म किया, वह शानदार था। यह उनके किरदार का बहुत महत्वपूर्ण सीन है और उन्होंने इसे बेहतरीन तरीके से निभाया। सवाल: रोहित, आपके लिए शो में सबसे चुनौतीपूर्ण क्या रहा? जवाब/रोहित सराफ: मेरे लिए राजबिहारी बोस के साथ वाले सीन्स बहुत खास रहे। मुझे ऐसा किरदार निभाने का मौका मिला, जिसे मैं बहुत मानता हूं। उनके साथ इंटरपर्सनल रिलेशनशिप वाले सीन्स करना मेरे लिए बहुत मजेदार था। लेकिन सबसे चुनौतीपूर्ण एक्शन था। मैंने पहले इतना एक्शन नहीं किया था। इसकी तैयारी की और शूटिंग के दौरान बहुत कुछ सीखा। सवाल: अगर उस दौर का कोई क्रांतिकारी आज आपके सामने आ जाए तो क्या पूछेंगे? जवाब/रोहित सराफ: मैं उनसे पूछूंगा- ‘आप क्या खाकर पैदा हुए थे?’ सच में, क्योंकि उस दौर के लोगों में जिस तरह का जज्बा और जुनून था, उसी की वजह से आज हम यहां हैं। मैं जानना चाहूंगा कि उस तरह सपने देखना कैसा था? सवाल: प्रतिभा के किरदार से आज की लड़कियां क्या सीख

मैं किसी स्टार के पीछे नहीं भागता:निखिल आडवाणी बोले- 25 साल बाद मनोज बाजपेयी संग काम किया तो उन्होंने कहा- अब आए हो

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वेब सीरीज ‘द रिवोल्यूशनरीज’ आजादी की लड़ाई के उन युवा क्रांतिकारियों की कहानी है, जिनके बारे में कम चर्चा हुई। यह सीरीज संजीव सान्याल की किताब ‘रेवोल्यूशनरीज: द अदर स्टोरी ऑफ हाउ इंडिया वॉन इट्स फ्रीडम’ पर आधारित है। दैनिक भास्कर से बातचीत में डायरेक्टर निखिल आडवाणी ने बताया कि ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ के बाद उन्हें लगा कि ऐसी कहानियों में यूथ का नजरिया मिसिंग था। उन्होंने प्रतिभा रांटा की तारीफ करते हुए कहा कि अगर वह शो के लिए मना कर देतीं तो उनका दिल टूट जाता। निखिल ने मनोज बाजपेयी का किस्सा भी सुनाया, जिन्होंने 25 साल बाद साथ काम करने पर पूछा था- ‘अब आए हो?’ प्रतिभा ने किरदार की तैयारी और रोहित सराफ ने एक्शन को चुनौती बताया। सवाल: पहले भी आपने आजादी से जुड़ी कहानियां कही हैं। ‘द रिवोल्यूशनरीज’ में ऐसा क्या था, जो आपको पहले की कहानियों में मिसिंग लगा? जवाब/निखिल आडवाणी: मुझे लगा कि यूथ मिसिंग था। हमने भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, ऊधम सिंह और जलियांवाला बाग के बारे में बहुत पढ़ा है। लेकिन इनसे करीब 10 साल पहले भी एक समानांतर कहानी चल रही थी। रिसर्च करते हुए मुझे लगा कि इन युवाओं की कहानी भी बतानी चाहिए। उस समय के क्रांतिकारियों में एक अलग तरह का जुनून था। उन्होंने तय कर लिया था कि अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालना है। कैसे करेंगे, यह बाद की बात थी। यही जुनून मुझे इस कहानी में सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। सवाल: प्रतिभा रांटा में आपको वह प्रतिभा कब नजर आई, जो इस किरदार के लिए जरूरी थी? अगर वह शो करने से मना कर देतीं तो क्या होता? जवाब/निखिल आडवाणी: मेरे लिए किसी एक्टर के पास जाना सिर्फ कास्टिंग नहीं है। मैं किसी कलाकार के पास तब तक नहीं जाना चाहता, जब तक मेरे पास उसके लिए ऐसा कुछ न हो, जिसमें वह पूरी तरह डूब सके। प्रतिभा के मामले में भी ऐसा ही था। मुझे पता था कि वह बहुत अच्छी एक्टर हैं, लेकिन यह समझना भी जरूरी था कि वह किरदार को किस तरह अपने अंदर उतारेंगी। हमने कई सीन्स पर महीनों चर्चा की। एक-एक लाइन पर बात की कि इसका मतलब क्या है और इसे किस तरह करना है। अगर प्रतिभा ने इस शो के लिए मना कर दिया होता, तो मैं सच में मेरा दिल टूट हो जाता। क्योंकि उन्होंने इस किरदार के लिए जो दिया है, वह बहुत खास है। मैं हमेशा मानता हूं कि एक एक्टर के अंदर यह चुनौती होनी चाहिए कि क्या मैं इस सीन को और बेहतर कर सकता हूं? क्या मैं इसे पेपर पर लिखे हुए सीन से आगे ले जा सकता हूं? अगर यह चुनौती नहीं है तो काम बोरिंग हो जाता है। सवाल: आपने कहा कि आप किसी कलाकार को सिर्फ इसलिए नहीं लेते कि वह बड़ा नाम है। मनोज बाजपेयी का 25 साल वाला किस्सा क्या है? जवाब/निखिल आडवाणी: मनोज बाजपेयी मुझसे करीब 25 साल से कहते रहे थे कि मेरे साथ काम करना है। जब मैं आखिरकार उनके पास ‘सत्यमेव जयते’ लेकर गया तो उन्होंने मुझसे कहा- ‘अब आए हो?’ मैं किसी बिजी स्टार के पीछे भागने में विश्वास नहीं करता। मेरे लिए जरूरी है कि मेरे पास उस कलाकार के लिए सही किरदार हो। मैं किसी एक्टर के पास सिर्फ इसलिए नहीं जाता कि वह बड़ा नाम है। मुझे ऐसा किरदार लेकर जाना होता है, जिसमें वह अपने दांत गड़ा सके और पूरी तरह डूब सके। यही बात प्रतिभा के साथ भी थी। मुझे उनके लिए सही किरदार मिला और फिर हमने साथ में उसे खोजा। सवाल: प्रतिभा, निखिल सर ने आपको किरदार किस तरह समझाया? जवाब/प्रतिभा रांटा: जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो उसमें काफी कुछ पहले से मौजूद था, क्योंकि सर और उनकी टीम ने बहुत रिसर्च की थी। लेकिन प्रतिभा के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसलिए दूसरी क्रांतिकारी महिलाओं से भी प्रेरणा ली गई। मैंने भिकाजी कामा और बीबी गुलाब कौर जैसी महिलाओं के बारे में पढ़ा। मुझे फिल्म ‘लिटिल वुमन’ भी बहुत पसंद है और उससे भी मुझे प्रेरणा मिली। सर के साथ लगातार चर्चा होती थी कि प्रतिभा को किस तरह अप्रोच करना है। वह स्क्रीन पर सामान्य लड़की की तरह नहीं दिखती। उसमें आत्मविश्वास और आग है। वह बराबरी का हक मांगती है और अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटती। सवाल: शूटिंग के दौरान कौन सा सीन आपके लिए सबसे खास रहा? जवाब/प्रतिभा रांटा: बाघा जतिन और प्रतिभा के बीच का एक सीन मेरे लिए बहुत खास है। उसमें प्रतिभा उनसे कहती है कि आपको किसने हक दिया कि आप हमारे बारे में फैसला करें? अगर आप अपने लिए फैसले ले सकते हैं तो हम क्यों नहीं ले सकते? उस सीन में प्रतिभा का नजरिया साफ दिखाई देता है। वह महिलाओं को बराबरी से देखती है और अपने फैसले खुद लेना चाहती है। निखिल आडवाणी: यह सीन सुबह करीब 5 बजे शूट हुआ था। शूटिंग में देरी हो गई थी और वह लोकेशन का आखिरी दिन था, इसलिए हम वापस भी नहीं आ सकते थे। प्रतिभा और मैं उस सीन पर महीनों से बात कर रहे थे। वह उस वक्त काफी परेशान थी, लेकिन सुबह 5 बजे उसने जो परफॉर्म किया, वह शानदार था। यह उनके किरदार का बहुत महत्वपूर्ण सीन है और उन्होंने इसे बेहतरीन तरीके से निभाया। सवाल: रोहित, आपके लिए शो में सबसे चुनौतीपूर्ण क्या रहा? जवाब/रोहित सराफ: मेरे लिए राजबिहारी बोस के साथ वाले सीन्स बहुत खास रहे। मुझे ऐसा किरदार निभाने का मौका मिला, जिसे मैं बहुत मानता हूं। उनके साथ इंटरपर्सनल रिलेशनशिप वाले सीन्स करना मेरे लिए बहुत मजेदार था। लेकिन सबसे चुनौतीपूर्ण एक्शन था। मैंने पहले इतना एक्शन नहीं किया था। इसकी तैयारी की और शूटिंग के दौरान बहुत कुछ सीखा। सवाल: अगर उस दौर का कोई क्रांतिकारी आज आपके सामने आ जाए तो क्या पूछेंगे? जवाब/रोहित सराफ: मैं उनसे पूछूंगा- ‘आप क्या खाकर पैदा हुए थे?’ सच में, क्योंकि उस दौर के लोगों में जिस तरह का जज्बा और जुनून था, उसी की वजह से आज हम यहां हैं। मैं जानना चाहूंगा कि उस तरह सपने देखना कैसा था? सवाल: प्रतिभा के किरदार से आज की लड़कियां क्या सीख

Walk-in Interview for 93 Posts in Chennai

Walk-in Interview for 93 Posts in Chennai

Hindi News Career DRDO Recruitment 2026: Walk in Interview For 93 Posts In Chennai 19 मिनट पहले कॉपी लिंक डीआरडीओ के अंतर्गत कॉमबैट व्हीकल्स रिसर्च एंड डेलवपमेंट इस्टेबलिशमेंट ने अवादि, चेन्नई में 93 पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवारों का सिलेक्शन वॉक इन इंटरव्यू के जरिये किया जाएगा। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : साल 2023, 2024, 2025, या 2026 में NCVT/SCVT बोर्ड से ITI की डिग्री ली हो। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 27 साल रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। स्टाइपेंड : 10,560 – 11,040 रुपए प्रतिमाह सिलेक्शन प्रोसेस : शॉर्टलिस्टिंग वॉक इन इंटरव्यू वॉक इन इंटरव्यू की डिटेल्स : तारीख : 8,9 सितंबर टाइम : सुबह 9 से शाम 5 बजे तक वेन्यू : CVRDE, अवादि, चेन्नई -600054 ऐसे करें आवेदन : मांगे गए डॉक्यूमेंट्स की सेल्फ अटेस्टेड कॉपी जमा करें। NCVT/SCVT MIS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करें। वेरिफिकेशन के लिए डॉक्यूमेंट्स सब्मिट करें। वॉक इन इंटरव्यू के बाद अगर आपको सिलेक्ट किया गया तो ऑन द स्पॉट जॉइनिंग लेटर दिया जाएगा। ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल वेबसाइट लिंक ———————————————————————— ये खबर भी पढ़ें 6 साल के आदित्य का आंदोलन खत्म:पेरेंट्स को जेल ले जाने से नाराज, कहा – जैसे मांझी ने पहाड़ का घमंड तोड़ा, वैसे ही मैं सरकार का घमंड तोड़ूंगा पटना में BPSC TRE-4 उम्मीदवारों के प्रदर्शन के दौरान 6 साल के बच्चे का वीडियो पहले ही दिन से खूब वायरल हुआ। इस बच्चे का नाम आदित्य कुमार है। वह पहली कक्षा का छात्र है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

ट्रम्प-सरकार ने अवैध प्रवासियों को खदेड़ने वाले गेम लॉन्च किए:पीछा करके पकड़ेंगे खिलाड़ी; मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाएंगे

ट्रम्प-सरकार ने अवैध प्रवासियों को खदेड़ने वाले गेम लॉन्च किए:पीछा करके पकड़ेंगे खिलाड़ी; मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाएंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्हाइट हाउस ने ऑनलाइन वीडियो गेम्स की एक वेबसाइट लॉन्च की है, जिसमें खिलाड़ियों को अवैध प्रवासियों को पकड़ने, डिपोर्ट करने और अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाने जैसे ऑप्शन दिए गए हैं। वेबसाइट पर मौजूद एक गेम ‘रियो रन’ क्लासिक आर्केड गेम ‘स्नेक’ पर बेस्ड है। इसमें अमेरिकी बॉर्डर प्रमुख टॉम होमन का डिजिटल किरदार रियो ग्रांडे नदी के पास माइग्रेंट्स का पीछा करता है। वहीं दूसरे गेम ‘बिल्ड द वॉल’ में खिलाड़ियों को ब्लॉक जोड़कर अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर दीवार बनाने का टास्क दिया गया है। इसमें लिखा है- “आने वाली भीड़ से सीमा की रक्षा करें।” व्हाइट हाउस बोला- उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश व्हाइट हाउस के एक्स अकाउंट ने ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ यानी MAGA लोगो से मिलता-जुलता एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें लिखा था- “जीतना बंद नहीं कर सकते। दीवार बनाओ। डिपोर्ट करो। ट्रम्प अकाउंट भरो।” व्हाइट हाउस ने कहा कि इन गेम्स के जरिए प्रशासन राष्ट्रपति की उपलब्धियों और नीतियों को ऐसे तरीके से लोगों तक पहुंचाना चाहता है, जो हर अमेरिकी से जुड़ सके। मानवाधिकार संगठनों ने जताई नाराजगी गेम्स लॉन्च होने के बाद अधिकार संगठनों ने व्हाइट हाउस की आलोचना की। टेक्सास के ईगल पास में फ्रोंटेरा फेडरेशन की सह-निदेशक अमेरिका गार्सिया ग्रेवाल ने कहा कि प्रशासन लंबे समय से लोगों की जिंदगी के साथ खेल रहा था और अब उसने इसे वीडियो गेम का रूप दे दिया है। बॉर्डर पर काम करने वाली संस्था AMIGOS सैन डिएगो कम्युनिटी की प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर एड्रियाना जासो ने कहा कि इन आर्केड गेम्स से प्रशासन की गंभीरता की कमी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन प्रवासियों को अमानवीय और मजाक का विषय बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि हिरासत केंद्रों में लोगों की मौत हो रही है। उनके मुताबिक, “यह मुद्दे को ऐसे पेश करता है जैसे यह कोई गेम हो, जबकि असल में ऐसा नहीं है।” खबर अपडेट हो रही है…

ट्रम्प-सरकार ने अवैध प्रवासियों को खदेड़ने वाले गेम लॉन्च किए:पीछा करके पकड़ेंगे खिलाड़ी; मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाएंगे

ट्रम्प-सरकार ने अवैध प्रवासियों को खदेड़ने वाले गेम लॉन्च किए:पीछा करके पकड़ेंगे खिलाड़ी; मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाएंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्हाइट हाउस ने ऑनलाइन वीडियो गेम्स की एक वेबसाइट लॉन्च की है, जिसमें खिलाड़ियों को अवैध प्रवासियों को पकड़ने, डिपोर्ट करने और अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाने जैसे ऑप्शन दिए गए हैं। वेबसाइट पर मौजूद एक गेम ‘रियो रन’ क्लासिक आर्केड गेम ‘स्नेक’ पर बेस्ड है। इसमें अमेरिकी बॉर्डर प्रमुख टॉम होमन का डिजिटल किरदार रियो ग्रांडे नदी के पास माइग्रेंट्स का पीछा करता है। वहीं दूसरे गेम ‘बिल्ड द वॉल’ में खिलाड़ियों को ब्लॉक जोड़कर अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर दीवार बनाने का टास्क दिया गया है। इसमें लिखा है- “आने वाली भीड़ से सीमा की रक्षा करें।” व्हाइट हाउस बोला- उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश व्हाइट हाउस के एक्स अकाउंट ने ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ यानी MAGA लोगो से मिलता-जुलता एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें लिखा था- “जीतना बंद नहीं कर सकते। दीवार बनाओ। डिपोर्ट करो। ट्रम्प अकाउंट भरो।” व्हाइट हाउस ने कहा कि इन गेम्स के जरिए प्रशासन राष्ट्रपति की उपलब्धियों और नीतियों को ऐसे तरीके से लोगों तक पहुंचाना चाहता है, जो हर अमेरिकी से जुड़ सके। मानवाधिकार संगठनों ने जताई नाराजगी गेम्स लॉन्च होने के बाद अधिकार संगठनों ने व्हाइट हाउस की आलोचना की। टेक्सास के ईगल पास में फ्रोंटेरा फेडरेशन की सह-निदेशक अमेरिका गार्सिया ग्रेवाल ने कहा कि प्रशासन लंबे समय से लोगों की जिंदगी के साथ खेल रहा था और अब उसने इसे वीडियो गेम का रूप दे दिया है। बॉर्डर पर काम करने वाली संस्था AMIGOS सैन डिएगो कम्युनिटी की प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर एड्रियाना जासो ने कहा कि इन आर्केड गेम्स से प्रशासन की गंभीरता की कमी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन प्रवासियों को अमानवीय और मजाक का विषय बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि हिरासत केंद्रों में लोगों की मौत हो रही है। उनके मुताबिक, “यह मुद्दे को ऐसे पेश करता है जैसे यह कोई गेम हो, जबकि असल में ऐसा नहीं है।” खबर अपडेट हो रही है…

मूवी रिव्यू- जीवन या भीमा कॉन:2 करोड़ के इंश्योरेंस के लिए रची मौत की साजिश, अरशद वारसी की कॉमेडी हंसाती है या उलझाती है?

मूवी रिव्यू- जीवन या भीमा कॉन:2 करोड़ के इंश्योरेंस के लिए रची मौत की साजिश, अरशद वारसी की कॉमेडी हंसाती है या उलझाती है?

कास्ट- अरशद वारसी, विजय राज, संजीदा शेख डायरेक्टर- अभिषेक डोगरा ड्यूरेशन: 1 घंटा 55 मिनट रेटिंग- 3/ 5 एक आदमी अपनी मौत का झूठा नाटक रचता है, करोड़ों का इंश्योरेंस पाने का सपना देखता है और फिर उसकी जिंदगी में ऐसा बवाल शुरू होता है कि संभालना मुश्किल हो जाता है। ‘जीवन या भीमा कॉन?’ का आइडिया पहली नजर में काफी मजेदार लगता है और फिल्म की शुरुआत भी इसी वजह से उम्मीद जगाती है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, कॉमेडी के साथ उलझन भी बढ़ती जाती है। कुछ सीन खूब हंसाते हैं, कलाकारों की टाइमिंग भी अच्छी है, लेकिन कहानी हर बार अपने ही सेटअप का पूरा फायदा नहीं उठा पाती। कैसी है फिल्म की कहानी? कहानी है जीवन (अरशद वारसी) की, जो एक आम आदमी है और अपनी जमा-पूंजी एक रेस्टोरेंट खोलने में लगा देता है। हालात बिगड़ते हैं, कर्ज बढ़ता है और पैसे की जरूरत ऐसी आती है कि जीवन अपनी मौत का नाटक करने की खतरनाक योजना बना लेता है। किस्मत उसका साथ कुछ इस तरह देती है कि उसे अपने हमशक्ल भीमा (अरशद वारसी) के बारे में पता चलता है। भीमा एक डायमंड स्मगलर है, जिसका संबंध गैंगस्टर विनायक (विजय राज) से है। जीवन और उसकी पत्नी योजना (संजीदा शेख) मिलकर भीमा की पहचान का फायदा उठाकर दो करोड़ रुपए का इंश्योरेंस हासिल करने की कोशिश करते हैं। लेकिन प्लान यहां से बिगड़ना शुरू होता है। भीमा के पीछे पड़े विनायक और उसका साथी मनु (बृजेंद्र काला) उनके घर तक पहुंच जाते हैं। दूसरी तरफ इंश्योरेंस इंस्पेक्टर (अतुल परचुरे) भी क्लेम की जांच में लग जाता है। घर की मालकिन याशिका (पूजा चोपड़ा) की अपनी अलग दिलचस्पी है। इसके बाद हर किरदार दूसरे को शक की नजर से देखने लगता है और शुरू होती है गलत पहचान, झूठ और पैसों के पीछे भागने की कॉमेडी। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? अरशद वारसी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। एक तरफ वह परेशान, कर्ज में डूबे जीवान बने हैं और दूसरी तरफ शराबी डायमंड स्मगलर भीमा। दोनों किरदारों के हाव-भाव, बोलने के तरीके और बॉडी लैंग्वेज में फर्क दिखाना आसान नहीं था, लेकिन अरशद इसे अच्छी तरह संभालते हैं। खासकर भीमा वाले हिस्सों में उनका कॉमिक टाइमिंग फिल्म को कई बार बचाता है। संजीदा शेख, योजना के किरदार में अच्छी लगती हैं और अरशद के साथ उनकी केमिस्ट्री भी सहज लगती है। विजय राज अपने अंदाज में फिल्म में क्राइम और कॉमेडी का अच्छा बैलेंस बनाते हैं। बृजेंद्र काला भी अपने किरदार में फिट बैठते हैं और कुछ सीन में अच्छी हंसी निकालते हैं। पूजा चोपड़ा को याशिका के रूप में कुछ मजेदार मौके मिलते हैं, हालांकि उनके किरदार को थोड़ा और इस्तेमाल किया जा सकता था। दिवंगत अतुल परचुरे इंश्योरेंस इंस्पेक्टर के छोटे लेकिन असरदार रोल में अपनी स्वाभाविक कॉमिक टाइमिंग दिखाते हैं। कैसा है डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और टेक्निकल एस्पेक्ट्स? डायरेक्टर अभिषेक डोगरा ने कहानी को ज्यादातर एक ही घर के अंदर रखा है। इससे फिल्म का सेटअप एक तरह की कमरे में बंद कॉमेडी जैसा बन जाता है, जहां कलाकारों और स्क्रीनप्ले पर पूरा दारोमदार रहता है। शुरुआत में यह तरीका काम करता है, लेकिन बाद में यही सीमित लोकेशन कहानी पर भारी पड़ने लगती है। स्क्रीनप्ले की सबसे बड़ी समस्या यह है कि फिल्म के पास एक अच्छा आइडिया होने के बावजूद उसके साथ लगातार नए और मजेदार खेल नहीं किए जाते। कुछ स्थितियां बार-बार दोहराई जाती हैं। गलत पहचान से पैदा होने वाली कॉमेडी में काफी गुंजाइश थी, लेकिन कहानी उस संभावनाओं को पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाती। फिल्म में कुछ वन-लाइनर्स हंसाते हैं, लेकिन कई जगह हास्य जरूरत से ज्यादा साधारण और जबरदस्ती का लगता है। खासकर फार्ट जोक्स और टॉयलेट ह्यूमर हर दर्शक को पसंद आए, यह जरूरी नहीं। फिल्म का दूसरा हिस्सा कुछ जगह खिंचता हुआ महसूस होता है और क्लाइमैक्स भी बहुत ज्यादा चौंकाता नहीं है। टेक्निकल तौर पर फिल्म ठीक-ठाक है। सिनेमैटोग्राफी कहानी के हिसाब से काम करती है और प्रोडक्शन डिजाइन फिल्म के मिडिल क्लास माहौल को सपोर्ट करता है। एडिटिंग पहले हिस्से में ठीक रहती है, लेकिन बाद के हिस्से में कुछ सीन और छोटे किए जा सकते थे। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? फिल्म का म्यूजिक कहानी पर हावी नहीं होता और ज्यादातर बैकग्राउंड तक ही सीमित रहता है। कोई ऐसा गाना नहीं है जो फिल्म देखने के बाद लंबे समय तक याद रह जाए। हालांकि बैकग्राउंड स्कोर कॉमेडी और क्राइम वाले हिस्सों को सपोर्ट करता है और फिल्म के माहौल के हिसाब से ठीक बैठता है। फाइनल वर्डिक्ट: फिल्म देखें या नहीं? ‘जीवन या भीमा कॉन?’ के पास एक ऐसा आइडिया है, जिससे एक शानदार कॉमेडी ऑफ एरर्स बनाई जा सकती थी। कलाकार भी अच्छे हैं और अरशद वारसी फिल्म को लगातार संभालते नजर आते हैं। लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, दोहराए गए मजाक, कुछ जबरदस्ती के जोक्स और अनुमान लगाने लायक क्लाइमैक्स फिल्म को उस स्तर तक नहीं पहुंचने देते, जहां यह यादगार कॉमेडी बन सके। फिर भी अगर आप बिना ज्यादा उम्मीद के हल्की-फुल्की कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो फिल्म एक बार मनोरंजन कर सकती है। मसाला मौजूद है, कलाकार भी दमदार हैं, बस कहानी की आंच थोड़ी और तेज होती तो स्वाद काफी बेहतर होता।

मूवी रिव्यू- जीवन या भीमा कॉन:करोड़ों का लालच और घर में बवाल; कहानी बढ़िया, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, एक जैसे घिसे-पिटे डायलॉग ने बिगाड़ा गेम

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कास्ट- अरशद वारसी, विजय राज, संजीदा शेख डायरेक्टर- अभिषेक डोगरा ड्यूरेशन: 1 घंटा 55 मिनट रेटिंग- 1.5/ 5 एक आदमी अपनी मौत का झूठा नाटक रचता है, करोड़ों का इंश्योरेंस पाने का सपना देखता है और फिर उसकी जिंदगी में ऐसा बवाल शुरू होता है कि संभालना मुश्किल हो जाता है। ‘जीवन या भीमा कॉन?’ का आइडिया पहली नजर में काफी मजेदार लगता है और फिल्म की शुरुआत भी इसी वजह से उम्मीद जगाती है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, कॉमेडी के साथ उलझन भी बढ़ती जाती है। कुछ सीन खूब हंसाते हैं, कलाकारों की टाइमिंग भी अच्छी है, लेकिन कहानी हर बार अपने ही सेटअप का पूरा फायदा नहीं उठा पाती। कैसी है फिल्म की कहानी? कहानी है जीवन (अरशद वारसी) की, जो एक आम आदमी है और अपनी जमा-पूंजी एक रेस्टोरेंट खोलने में लगा देता है। हालात बिगड़ते हैं, कर्ज बढ़ता है और पैसे की जरूरत ऐसी आती है कि जीवन अपनी मौत का नाटक करने की खतरनाक योजना बना लेता है। किस्मत उसका साथ कुछ इस तरह देती है कि उसे अपने हमशक्ल भीमा (अरशद वारसी) के बारे में पता चलता है। भीमा एक डायमंड स्मगलर है, जिसका संबंध गैंगस्टर विनायक (विजय राज) से है। जीवन और उसकी पत्नी योजना (संजीदा शेख) मिलकर भीमा की पहचान का फायदा उठाकर दो करोड़ रुपए का इंश्योरेंस हासिल करने की कोशिश करते हैं। लेकिन प्लान यहां से बिगड़ना शुरू होता है। भीमा के पीछे पड़े विनायक और उसका साथी मनु (बृजेंद्र काला) उनके घर तक पहुंच जाते हैं। दूसरी तरफ इंश्योरेंस इंस्पेक्टर (अतुल परचुरे) भी क्लेम की जांच में लग जाता है। घर की मालकिन याशिका (पूजा चोपड़ा) की अपनी अलग दिलचस्पी है। इसके बाद हर किरदार दूसरे को शक की नजर से देखने लगता है और शुरू होती है गलत पहचान, झूठ और पैसों के पीछे भागने की कॉमेडी। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? अरशद वारसी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। एक तरफ वह परेशान, कर्ज में डूबे जीवान बने हैं और दूसरी तरफ शराबी डायमंड स्मगलर भीमा। दोनों किरदारों के हाव-भाव, बोलने के तरीके और बॉडी लैंग्वेज में फर्क दिखाना आसान नहीं था, लेकिन अरशद इसे अच्छी तरह संभालते हैं। खासकर भीमा वाले हिस्सों में उनका कॉमिक टाइमिंग फिल्म को कई बार बचाता है। संजीदा शेख, योजना के किरदार में अच्छी लगती हैं और अरशद के साथ उनकी केमिस्ट्री भी सहज लगती है। विजय राज अपने अंदाज में फिल्म में क्राइम और कॉमेडी का अच्छा बैलेंस बनाते हैं। बृजेंद्र काला भी अपने किरदार में फिट बैठते हैं और कुछ सीन में अच्छी हंसी निकालते हैं। पूजा चोपड़ा को याशिका के रूप में कुछ मजेदार मौके मिलते हैं, हालांकि उनके किरदार को थोड़ा और इस्तेमाल किया जा सकता था। दिवंगत अतुल परचुरे इंश्योरेंस इंस्पेक्टर के छोटे लेकिन असरदार रोल में अपनी स्वाभाविक कॉमिक टाइमिंग दिखाते हैं। कैसा है डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और टेक्निकल एस्पेक्ट्स? डायरेक्टर अभिषेक डोगरा ने कहानी को ज्यादातर एक ही घर के अंदर रखा है। इससे फिल्म का सेटअप एक तरह की कमरे में बंद कॉमेडी जैसा बन जाता है, जहां कलाकारों और स्क्रीनप्ले पर पूरा दारोमदार रहता है। शुरुआत में यह तरीका काम करता है, लेकिन बाद में यही सीमित लोकेशन कहानी पर भारी पड़ने लगती है। स्क्रीनप्ले की सबसे बड़ी समस्या यह है कि फिल्म के पास एक अच्छा आइडिया होने के बावजूद उसके साथ लगातार नए और मजेदार खेल नहीं किए जाते। कुछ स्थितियां बार-बार दोहराई जाती हैं। गलत पहचान से पैदा होने वाली कॉमेडी में काफी गुंजाइश थी, लेकिन कहानी उस संभावनाओं को पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाती। फिल्म में कुछ वन-लाइनर्स हंसाते हैं, लेकिन कई जगह हास्य जरूरत से ज्यादा साधारण और जबरदस्ती का लगता है। खासकर फार्ट जोक्स और टॉयलेट ह्यूमर हर दर्शक को पसंद आए, यह जरूरी नहीं। फिल्म का दूसरा हिस्सा कुछ जगह खिंचता हुआ महसूस होता है और क्लाइमैक्स भी बहुत ज्यादा चौंकाता नहीं है। टेक्निकल तौर पर फिल्म ठीक-ठाक है। सिनेमैटोग्राफी कहानी के हिसाब से काम करती है और प्रोडक्शन डिजाइन फिल्म के मिडिल क्लास माहौल को सपोर्ट करता है। एडिटिंग पहले हिस्से में ठीक रहती है, लेकिन बाद के हिस्से में कुछ सीन और छोटे किए जा सकते थे। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? फिल्म का म्यूजिक कहानी पर हावी नहीं होता और ज्यादातर बैकग्राउंड तक ही सीमित रहता है। कोई ऐसा गाना नहीं है जो फिल्म देखने के बाद लंबे समय तक याद रह जाए। हालांकि बैकग्राउंड स्कोर कॉमेडी और क्राइम वाले हिस्सों को सपोर्ट करता है और फिल्म के माहौल के हिसाब से ठीक बैठता है। फाइनल वर्डिक्ट: फिल्म देखें या नहीं? ‘जीवन या भीमा कॉन?’ के पास एक ऐसा आइडिया है, जिससे एक शानदार कॉमेडी ऑफ एरर्स बनाई जा सकती थी। कलाकार भी अच्छे हैं और अरशद वारसी फिल्म को लगातार संभालते नजर आते हैं। लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, दोहराए गए मजाक, कुछ जबरदस्ती के जोक्स और अनुमान लगाने लायक क्लाइमैक्स फिल्म को उस स्तर तक नहीं पहुंचने देते, जहां यह यादगार कॉमेडी बन सके। फिर भी अगर आप बिना ज्यादा उम्मीद के हल्की-फुल्की कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो फिल्म एक बार मनोरंजन कर सकती है। मसाला मौजूद है, कलाकार भी दमदार हैं, बस कहानी की आंच थोड़ी और तेज होती तो स्वाद काफी बेहतर होता।

Estonia Defense Minister Hanno Pevkur Resigns Over Ukraine Arms Controversy

Estonia Defense Minister Hanno Pevkur Resigns Over Ukraine Arms Controversy

टालिन34 मिनट पहले कॉपी लिंक हानो पेवकुर 2022 से एस्टोनिया के रक्षा मंत्री थे। उन्होंने समझौते की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हानो पेवकुर ने इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की वजह यूक्रेन के लिए की गई करीब 768 करोड़ रुपए की एक डील है। सौदे के तहत भारतीय कंपनी से जुड़ी इटली की एक फर्म को गोला-बारूद सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। आरोप है कि कंपनी के पास तोप के गोले बनाने या बेचने का अनुभव नहीं था। इसके बावजूद उसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दिया गया और भारी रकम एडवांस में दी गई। कंपनी के साथ किए गए थे 4 समझौते 2024 में एस्टोनिया के सेंटर फॉर डिफेंस इन्वेस्टमेंट ने तोप के गोलों की खरीद के लिए डेटासेल एसआरएल के साथ चार समझौते किए। यह कंपनी इटली में रजिस्टर्ड है। नवंबर 2024 तक यूक्रेन पहुंचने थे गोले गोला-बारूद का पहला बैच नवंबर 2024 में यूक्रेन पहुंचना था, लेकिन डेटासेल ने देरी की। बाद में जो सामान पहुंचा, उसे लेकर भी सवाल उठाए गए। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ खेप अधूरी थी और उसमें गोले चलाने के लिए जरूरी हिस्से मौजूद नहीं थे। इनमें फ्यूज, प्रोपेलेंट चार्ज और प्राइमर जैसे हिस्से शामिल बताए गए हैं। इसलिए एस्टोनिया ने कुछ सामान को स्वीकार नहीं किया। कंपनी ने आरोपों को खारिज किया डेटासेल ने एस्टोनिया के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। कंपनी का कहना है कि उसने बड़ी मात्रा में सामान तैयार किया और उसकी सप्लाई के लिए बिल भी दिए। कंपनी ने यह भी कहा कि डिलीवरी में देरी के पीछे अलग-अलग देशों से मंजूरी और जरूरी दस्तावेज मिलने में हुई देरी जैसी वजहें थीं। एस्टोनिया के 768 करोड़ रुपए अटके एस्टोनिया ने इस सौदे में करीब 768 करोड़ रुपए दिए थे। अब वह इस रकम को वापस पाने की कोशिश कर रहा है। अनुबंध को लेकर मामला मध्यस्थता तक पहुंच गया है। अगर पैसा वापस नहीं मिला तो एस्टोनिया पर इस रकम का वित्तीय बोझ पड़ सकता है। यूरोपीय आयोग भी एस्टोनिया के साथ इस मामले पर बातचीत कर रहा है। EU के फंड से आया था पैसा इस सौदे में इस्तेमाल हुआ पैसा यूरोपीय संघ की यूरोपियन पीस फैसिलिटी (EPF) से आया था। यह फंड यूक्रेन को सैन्य सहायता देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। अब सवाल यह है कि अगर एस्टोनिया कंपनी से पैसा वापस नहीं ले पाया तो इस फंड का क्या होगा। यूरोपीय आयोग इस मामले में एस्टोनियाई अधिकारियों के संपर्क में है। जांच में खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल एस्टोनिया के राष्ट्रीय लेखा कार्यालय ने इस सौदे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच का एक बड़ा मुद्दा यह है कि इतने बड़े रक्षा सौदे में ऐसी कंपनी को कैसे चुना गया, जिसके पास तोप के गोले की सप्लाई का पहले का अनुभव नहीं था। यानी विवाद सिर्फ इस बात पर नहीं है कि गोले समय पर पहुंचे या नहीं। सवाल यह भी है कि कंपनी का चयन कैसे हुआ और इतनी बड़ी रकम एडवांस में क्यों दी गई। ————————- यह खबर भी पढ़ें… जयशंकर बोले- तेल खरीद पर रोक से जंग नहीं थमेगी: बातचीत से ही खत्म होगी, भारत यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए मध्यस्थता को तैयार केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन जंग का समाधान इस बात से नहीं निकलेगा कि कोई देश रूसी तेल खरीदता है या नहीं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔