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अमेरिकी राजदूत बोले- भारत-अमेरिका रिश्तों से दूसरे देश जलते हैं:PM मोदी उन नेताओं में सबसे ऊपर, जिनसे ट्रम्प मिलना चाहते हैं

अमेरिकी राजदूत बोले- भारत-अमेरिका रिश्तों से दूसरे देश जलते हैं:PM मोदी उन नेताओं में सबसे ऊपर, जिनसे ट्रम्प मिलना चाहते हैं

अमेरिकी अधिकारी सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दूसरे देश भारत और अमेरिका के मजबूत रिश्तों से जलते हैं। गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन प्रमुख नेताओं में बताया, जिनसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प मिलना चाहते हैं। खबर अपडेट हो रही है….

Dayanand Sagar University Hostel Protest

Dayanand Sagar University Hostel Protest

Hindi News Career Dayanand Sagar University Hostel Protest | Gender Curfew Controversy 6 मिनट पहले कॉपी लिंक बेंगलुरु की दयानंद सागर यूनिवर्सिटी (DSU) के S-रेसिडेंसी गर्ल्स हॉस्टल में छात्राओं ने बुनियादी सुविधाओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 26 और 31 अगस्त को हुआ। इस प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने करीब एक महीने से बंद वाई – फाई, सुबह के समय गर्म पानी की कमी, पीने के पानी की क्वालिटी, सफाई और मच्छरों की समस्या उठाई। इसके अलावा बिजली में उतार-चढ़ाव, लीक ओवरफ्लो होती पाइपलाइन, खराब लिफ्ट और खाली वेंडिंग मशीनों की शिकायत भी की। 26 अगस्त की रात को करीब 9:30 बजे छात्रों ने गर्म पानी की शिकायत को लेकर वार्डन से शिकायत की। छात्रों के मुताबिक, इसके बाद बड़ी संख्या में छात्राएं इकट्‌ठा हुईं। करीब 300–350 लड़कियों ने विरोध प्रदर्शन किया। लड़कों ने अंडे और पटाखे भी फेंके छात्राओं का आरोप था कि उनकी सुविधाओं की शिकायतों के बजाय हॉस्टल के 9:30 बजे के एंट्री टाइम के बाद बाहर रहने पर ज्यादा जोर दिया गया। प्रदर्शन के दौरान पास के बॉयज हॉस्टल से कुछ लड़कों ने अंडे और पटाखे भी फेंके। छात्रों को कुछ समस्याएं 30 अगस्त तक दूर करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन छात्रों का कहना है कि पर्याप्त सुधार नहीं हुआ। इसके बाद 31 अगस्त को दोबारा प्रदर्शन हुआ, जिसमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हुए। छात्रों की मांग है कि उन्हें हॉस्टल में बेहतर सुविधाएं, सही मैनेजमेंट और रहने का अच्छा माहौल मिले। हॉस्टल नियमों को लेकर भी सवाल छात्राओं ने सुविधाओं के साथ-साथ लड़के और लड़कियों के हॉस्टल के अलग-अलग नियमों पर भी सवाल उठाए। यहां लड़कियों के लिए 9:30 बजे और लड़कों के लिए 10 बजे की एंट्री सीमा तय की गई है। छात्राएं बाहर का खाना और इलेक्ट्रिक केतली जैसे नियमों को लेकर भी नाखुश हैं। यूनिवर्सिटी का जवाब DSU प्रबंधन ने स्टूडेंट्स की शिकायतों पर बात करते हुए कहा – हॉस्टल की बिल्डिंग नई है। यहां कॉन्ट्रैक्टर अभी कुछ समस्याओं को ठीक कर रहा है। अंडे फेंके जाने के बारे में मैनेजमेंट ने कहा कि इसका हॉस्टल मैनेजमेंट से संबंध नहीं था। सीसीटीवी के जरिए जिम्मेदार छात्रों की पहचान की जाएगी। सूरत के हॉस्टल में बदहाली के खिलाफ प्रदर्शन इससे पहले सूरत के सरकारी समरस गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं का प्रदर्शन चर्चा में रहा। 1 सितंबर से शुरू हुआ ये विरोध प्रदर्शन खाने की खराब क्वालिटी, पानी की सप्लाई और रहने की खराब व्यवस्थाओं को लेकर था। छात्राओं ने “रामधुन” गाया और कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक विरोध जारी रहेगा। विरोध करने वाली एक छात्रा ने कहा – इस हॉस्टल के खाने में कीड़े और खराब पानी के अलावा भी कई समस्याएं हैं। हॉस्टल परिसर के आस-पास कैमरे लगाने की मांग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की भावनगर जिला इकाई की अध्यक्ष दीपिका कचोट ने आरोप लगाया कि गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को अपने खाने में प्लास्टिक और सिगरेट के टुकड़े मिले हैं। उन्होंने कहा – पानी की क्वालिटी खराब है। नौ मंजिल के इस हॉस्टल में सिर्फ दो या तीन मंजिलों पर ही पानी मिलता है। ABVP अध्यक्ष ने यह भी कहा कि हॉस्टल परिसर के आस-पास सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिए। कॉलेज जाने के लिए हॉस्टल से बाहर निकलने पर छात्राओं को लड़कों की छेड़छाड़ का सामना करना पड़ता है। वार्डन के बुरे बर्ताव से परेशान छात्राएं एक छात्रा ने आरोप लगाया कि जब छात्राओं ने वार्डन से घर जाने की इजाजत मांगी, तो वार्डन ने उनके साथ बुरा बर्ताव किया। उन्होंने यह भी कहा कि खाने में कीड़े मिलने की उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। डिप्टी कलेक्टर ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसके बाद अगले दिन विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया गया। ——————————————————————- ये खबर भी पढ़ें DRDO में 93 पदों पर निकली भर्ती:11 हजार से ज्यादा स्टाइपेंड; बिना एग्जाम के होगा सिलेक्शन डीआरडीओ के अंतर्गत कॉमबैट व्हीकल्स रिसर्च एंड डेलवपमेंट इस्टेबलिशमेंट ने अवादि, चेन्नई में 93 पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवारों का सिलेक्शन वॉक इन इंटरव्यू के जरिये किया जाएगा। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Mukesh Khanna vs Sharmila Tagore

Mukesh Khanna vs Sharmila Tagore

12 मिनट पहले कॉपी लिंक मुकेश खन्ना और शर्मिला टैगोर ने किसी भी फिल्म में एक साथ काम नहीं किया है। सीनियर एक्टर मुकेश खन्ना ने वंदे मातरम् को लेकर चल रही बहस पर अपनी राय रखी। उनकी यह टिप्पणी सीनियर एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर के उस बयान के जवाब में आई है, जिसमें उन्होंने वंदे मातरम् के पूरे गीत को गाने के बजाय केवल शुरुआती अंतरों को गाने की बात कही थी। ‘द फ्री प्रेस जर्नल’ से बातचीत के दौरान मुकेश खन्ना से शर्मिला टैगोर के कथित सुझाव को लेकर कहा, “वह अपनी समझ के हिसाब से बोल रही हैं। मुझे नहीं पता कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा। शायद अपनी बात समझाते हुए उनके मुंह से यह निकल गया कि दूसरे धर्मों के लोग इसे समझ या स्वीकार नहीं कर पाएंगे।” अभिनेता मुकेश खन्ना ने हाल ही में मांग की है कि ‘जन गण मन’ को हटाकर ‘वंदे मातरम’ को भारत का राष्ट्रगान बनाया जाना चाहिए। मुकेश खन्ना ने कहा, “आप बंगाल में पली-बढ़ी हैं, जहां काली पूजा इतने बड़े स्तर पर मनाई जाती है। आप बंगाली संस्कृति और बंगाली फिल्मों के बीच बड़ी हुई हैं। फिर आज आपको समझ में आ रहा है कि एक धर्म वाला इसको एक्सेप्ट नहीं करे। उस वक्त नहीं आया था। हम क्या शादी करने के बाद आपको मालूम पड़ा?” उन्होंने सवाल उठाया, जब आप नवाब की बेगम बन गईं। तब आपको मालूम पड़ा कि अरे मुस्लिम धर्म भी है। अरे ये लोग तो मानते नहीं हैं। अल्लाह को मानते हैं। ये लोग तो हमारे देवी को भी नहीं मानते। बोलेंगे हम लोग बहुत सारे भगवान में बिलीव नहीं करते। उन्होंने आगे कहा, शादी के लिए आयशा बेगम बन गईं, लेकिन आज आप बात कर रही हैं आयशा बेगम बनकर। आज आपको मुस्लिम धर्म समझ में आ रहा है। हिंदू धर्म क्या भूल गई आप? शर्मिला टैगोर ने 27 दिसंबर 1968 को मंसूर अली खान पटौदी से शादी की थी। उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाने के बाद अपना नाम बदलकर बेगम आयशा सुल्ताना रखा था। वंदे मातरम् पर पुराने विरोध का भी किया जिक्र मुकेश खन्ना ने वंदे मातरम् को लेकर ऐतिहासिक तौर पर उठाई गई आपत्तियों पर भी बात की। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों की आपत्ति केवल गीत के बाद के हिस्सों में हिंदू देवी-देवताओं के संदर्भों को लेकर नहीं थी। उन्होंने कहा कि एक आपत्ति यह भी थी कि मुस्लिम केवल खुदा के सामने झुकते हैं। मुकेश ने दावा किया, “इस पर आपत्ति आज से शुरू नहीं हुई है। तर्क यह दिया जाता रहा है कि वे केवल खुदा के सामने झुकते हैं और इसलिए किसी और के सामने नहीं झुकेंगे।” अभिनेता ने वंदे मातरम् के अलग-अलग गायन संस्करणों का भी जिक्र किया। उन्होंने लता मंगेशकर, हेमंत कुमार और एआर रहमान से जुड़े संस्करणों का उदाहरण दिया। एआर रहमान के ‘मां तुझे सलाम’ का दिया उदाहरण मुकेश खन्ना ने मातृभूमि के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति को समझाने के लिए एआर रहमान के गीत ‘मां तुझे सलाम’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “वह कहते हैं ‘मां तुझे सलाम’। वह उसे मां कह रहे हैं और उन्हें सलाम कर रहे हैं।” अभिनेता ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करने का मतलब किसी को जबरन झुकने के लिए मजबूर करना नहीं होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने वंदे मातरम् गाने पर आपत्ति को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “हम भारत माता के सामने झुकते हैं। अगर कोई झुकना नहीं चाहता तो ठीक है, हम उसे झुकने के लिए मजबूर नहीं कर रहे। लेकिन फिर यह कहना कि वंदे मातरम् ही नहीं गाया जाना चाहिए, यह बात मेरी समझ में नहीं आती।” मुकेश खन्ना आखिरी बार 2025 में रिलीज हुई गुजराती फिल्म ‘विश्वरगुरु’ में नजर आए थे। फिल्म में उन्होंने कश्यप का किरदार निभाया था। शर्मिला टैगोर ने क्या कहा था शर्मिला टैगोर ने न्यूज एजेंसी IANS के साथ बातचीत में कहा, ‘बहुत से धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं, कई ईश्वरों में नहीं। वंदे मातरम् में एक अंतरा है, जिसमें कई देवताओं का जिक्र है। जो लोग एक धर्म, एक ईश्वर में विश्वास करते हैं, उनके लिए ‘वंदे काली, वंदे दुर्गा’ कहना मुश्किल है। अगर हम भारत के सभी धार्मिक लोगों को साथ लेकर चलें तो वंदे मातरम् के पहले दो अंतरे बहुत अच्छे हैं।’ हालांकि, शर्मिला टैगोर ने अब तक कंगना के कमेंट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। शर्मिला टैगोर की वंदे मातरम् पर टिप्पणी के बाद कंगना रनोट ने कहा था कि हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए। कंगना ने शर्मिला टैगोर के इंटरव्यू का वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किया था। उन्होंने लिखा, ‘मैं खुश हूं कि शर्मिला जी ने वंदे मातरम् को लेकर अपनी आपत्ति के बारे में बात की। किसी भी कविता या गीत में शब्द रूपक होते हैं। कवि या कलाकार मनचाहा असर पैदा करने के लिए हर तरह की कल्पना करता है और असंभव लगने वाली समानताएं खींचता है। कंगना की पोस्ट। विवेकानंद ने कहा था कि मुझे ऐसे युवा चाहिए, जो लोहे जैसे बने हों, जिनकी हड्डियां फौलाद की हों और जिनकी नसों में बिजली दौड़ती हो। विवेकानंद मौसम का अनुमान नहीं बता रहे थे। वह केवल शक्ति को जगाने की मांग कर रहे थे। कृपया हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए। भले ही हम एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ताकत को शक्ति कहते हैं। आइए, एक-दूसरे को अपनों की तरह अपनाएं। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और उस जोरदार तरीके से गले मिलने से भी मुझे परेशानी नहीं है, जैसे आप हमेशा मिलती हैं।’ ………….. यह खबर भी पढ़ें… शर्मिला टैगोर ने शादी के बाद इस्लाम अपनाया था:बेटी सबा बोलीं- हमारे घर में मंदिर नहीं था; मां ने हमें इस्लाम के बारे में बताया एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मंसूर अली खान पटौदी की बेटी सबा अली पटौदी ने हाल ही में अपने माता-पिता की अंतरधार्मिक शादी और धार्मिक परवरिश पर बात की है। उन्होंने बताया कि शादी के बाद उनकी मां ने इस्लाम अपनाया था और बच्चों को भी इसके बारे में सिखाया। सबा ने यह बात यूट्यूब चैनल ‘बिग बॉलीवुड बफ्स’ से बातचीत में कही। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता

कुवैत में फंसी तमिलनाडु की महिला ने मदद मांगी:वीडियो में कहा- 50 दिन से ठीक से खाना नहीं खाया, 2 महीने की सैलरी नहीं मिली

कुवैत में फंसी तमिलनाडु की महिला ने मदद मांगी:वीडियो में कहा- 50 दिन से ठीक से खाना नहीं खाया, 2 महीने की सैलरी नहीं मिली

कुवैत में घरेलू काम करने गई तमिलनाडु की एक महिला ने वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई है। महिला ने आरोप लगाया है कि पिछले करीब दो महीने से उसे प्रताड़ित किया जा रहा है। उसका दावा है कि उसे 50 दिनों से ठीक से खाना नहीं मिला और पिछले दो महीने की सैलरी भी नहीं दी गई। महिला ने अपनी जान को खतरा बताते हुए प्रशासन से उसे बचाकर भारत वापस लाने की अपील की है। महिला की पहचान अनीता के रूप में हुई है। वह कुछ महीने पहले घरेलू काम के लिए कुवैत गई थी। वीडियो में उसने बताया कि कुवैत पहुंचे उसे करीब 3 महीने हो चुके हैं। उसके मुताबिक, वहां पहुंचने के करीब एक महीने बाद से ही उसके साथ बुरा व्यवहार शुरू हो गया था। पिछले दो महीनों से स्थिति और खराब हो गई। कलेक्टर और SP से मदद की गुहार लगाई अनीता ने कल्लाकुरिची जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से भावुक अपील की है। उसने कहा कि उसे किसी तरह वहां से बचाया जाए और सुरक्षित भारत वापस लाया जाए। अनीता ने कहा कि वह अब यह सब सहन नहीं कर पा रही है और उसे डर है कि उसकी जान जा सकती है। वीडियो में अधिकारियों से मदद की अपील करते हुए महिला ने कहा कि उसे किसी तरह बचाकर भारत ले जाया जाए। महिला ने आशंका जताई कि उसके साथ ऐसा व्यवहार जारी रहा तो उसकी जान भी जा सकती है। अनीता दो बच्चों की मां है अनीता दो बच्चों की मां है। कुवैत जाने के बाद से परिवार उसकी स्थिति को लेकर चिंतित है। वीडियो सामने आने के बाद उसकी मां अनिला ने भी प्रशासन से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। अनिला का आरोप है कि उनकी बेटी को कुवैत भेजने वाले एजेंट ने परिवार के साथ धोखा किया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी के साथ वहां बेहद क्रूर व्यवहार किया जा रहा है और उसे प्रताड़ित किया जा रहा है। खबर अपडेट की जा रही है…

कुवैत में फंसी तमिलनाडु की महिला ने मदद मांगी:वीडियो में कहा- 50 दिन से ठीक से खाना नहीं खाया, 2 महीने की सैलरी नहीं मिली

कुवैत में फंसी तमिलनाडु की महिला ने मदद मांगी:वीडियो में कहा- 50 दिन से ठीक से खाना नहीं खाया, 2 महीने की सैलरी नहीं मिली

कुवैत में घरेलू काम करने गई तमिलनाडु की एक महिला ने वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई है। महिला ने आरोप लगाया है कि पिछले करीब दो महीने से उसे प्रताड़ित किया जा रहा है। उसका दावा है कि उसे 50 दिनों से ठीक से खाना नहीं मिला और पिछले दो महीने की सैलरी भी नहीं दी गई। महिला ने अपनी जान को खतरा बताते हुए प्रशासन से उसे बचाकर भारत वापस लाने की अपील की है। महिला की पहचान अनीता के रूप में हुई है। वह कुछ महीने पहले घरेलू काम के लिए कुवैत गई थी। वीडियो में उसने बताया कि कुवैत पहुंचे उसे करीब 3 महीने हो चुके हैं। उसके मुताबिक, वहां पहुंचने के करीब एक महीने बाद से ही उसके साथ बुरा व्यवहार शुरू हो गया था। पिछले दो महीनों से स्थिति और खराब हो गई। कलेक्टर और SP से मदद की गुहार लगाई अनीता ने कल्लाकुरिची जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से भावुक अपील की है। उसने कहा कि उसे किसी तरह वहां से बचाया जाए और सुरक्षित भारत वापस लाया जाए। अनीता ने कहा कि वह अब यह सब सहन नहीं कर पा रही है और उसे डर है कि उसकी जान जा सकती है। वीडियो में अधिकारियों से मदद की अपील करते हुए महिला ने कहा कि उसे किसी तरह बचाकर भारत ले जाया जाए। महिला ने आशंका जताई कि उसके साथ ऐसा व्यवहार जारी रहा तो उसकी जान भी जा सकती है। अनीता दो बच्चों की मां है अनीता दो बच्चों की मां है। कुवैत जाने के बाद से परिवार उसकी स्थिति को लेकर चिंतित है। वीडियो सामने आने के बाद उसकी मां अनिला ने भी प्रशासन से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। अनिला का आरोप है कि उनकी बेटी को कुवैत भेजने वाले एजेंट ने परिवार के साथ धोखा किया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी के साथ वहां बेहद क्रूर व्यवहार किया जा रहा है और उसे प्रताड़ित किया जा रहा है। खबर अपडेट की जा रही है…

मूवी रिव्यू- मिर्जापुरः द फिल्म:मुन्ना का पागलपन, कालीन भैया का ठहराव और गुड्डू का गुस्सा, ‘मिर्जापुर’ में फिर गरजी बंदूकें, लेकिन कहानी हुई लंबी

मूवी रिव्यू- मिर्जापुरः द फिल्म:मुन्ना का पागलपन, कालीन भैया का ठहराव और गुड्डू का गुस्सा, ‘मिर्जापुर’ में फिर गरजी बंदूकें, लेकिन कहानी हुई लंबी

स्टारकास्ट- अली फजल, पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु शर्मा, रवि किशन, जीतेंद्र कुमार, रसिका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी, अभिषेक बनर्जी, श्रेया पिलगांवकर डायरेक्टर- गुरमीत सिंह ड्यूरेशन- 3 घंटे 17 मिनट रेटिंग- 3.5/ 5 मिर्जापुर की दुनिया में कानून से ज्यादा ताकतवर है बंदूक और बंदूक से ज्यादा ताकतवर है सही वक्त पर चली गई चाल। तीन सीजन तक ओटीटी पर इस दुनिया का भौकाल देखने के बाद अब गुरमीत सिंह इसे बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म को सिर्फ सीरीज का लंबा एपिसोड बनाने की कोशिश नहीं की गई है। इसे सिनेमाई विस्तार दिया गया है। लेकिन 3 घंटे 17 मिनट की इस फिल्म में जहां कई सीक्वेंस बड़े पर्दे पर खूब असर करते हैं, वहीं कुछ जगह कहानी को अपनी मंजिल तक पहुंचने में जरूरत से ज्यादा वक्त लगता है। कैसी है फिल्म की कहानी? ‘मिर्जापुर: द मूवी’ की कहानी फ्रेंचाइजी की उसी दुनिया में लौटती है, जहां सत्ता की कुर्सी खाली होते ही बंदूकें खुद अपनी भाषा बोलने लगती हैं। फिल्म दरअसल मिर्जापुर की कहानी में एक ऐसा अध्याय खोलती है, जो सीरीज की टाइमलाइन के बीच का हिस्सा है। यानी यह कहानी अचानक किसी दूसरी दुनिया में नहीं चली जाती, बल्कि पुराने किरदारों और उनके रिश्तों के बीच एक नया खेल जोड़ती है। कालीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी के लिए सत्ता सिर्फ गद्दी नहीं, विरासत और दबदबे का सवाल है। दूसरी तरफ गुड्डू पंडित यानी अली फजल की दुनिया बदले और ताकत के इर्द-गिर्द घूमती है। और फिर मुन्ना त्रिपाठी यानी दिव्येंदु की मौजूदगी इस पूरे समीकरण को फिर से खतरनाक बना देती है। मुन्ना की वापसी फिल्म का सबसे बड़ा तुरुप का पत्ता है, लेकिन कहानी सिर्फ पुराने चेहरों की वापसी पर निर्भर नहीं रहती। रवि किशन का बब्बुआ यादव इस सत्ता के खेल में नया रंग भरता है। उसके आते ही कहानी में एक अलग किस्म की आक्रामकता दिखाई देती है। बीना त्रिपाठी यानी रसिका दुग्गल भी अपनी चालें चलती हैं और यही मिर्जापुर की खासियत है। यहां कोई किरदार सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं होता, हर कोई किसी न किसी खेल का खिलाड़ी है। कहानी आगे बढ़ती है तो मिर्जापुर की गलियों से निकलकर राजस्थान के रेगिस्तान तक पहुंचती है। बदला, सत्ता, धोखा और वर्चस्व की यह लड़ाई धीरे-धीरे ऐसे मुकाम पर जाती है, जहां पुरानी दुश्मनी और नए समीकरण आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। कैसी है कहानी और स्क्रीनप्ले में क्या खास है? पुनीत कृष्णा की लिखाई अब भी इस फ्रेंचाइजी की रीढ़ है। मिर्जापुर का संवाद सिर्फ संवाद नहीं होता, वह किरदार की पहचान बन जाता है। फिल्म में भी कई जगह बातचीत इतनी धारदार है कि गोली चलने से पहले ही सीन में तनाव पैदा हो जाता है। खास बात यह है कि यहां हास्य भी उसी अंधेरी दुनिया से निकलता है। हिंसा के बीच अचानक आने वाला देसी हास्य फिल्म को लगातार गंभीर बने रहने से बचाता है। लेकिन यहीं स्क्रीनप्ले थोड़ी परेशानी पैदा करता है। फिल्म के पास किरदार बहुत हैं, पुराने रिश्ते बहुत हैं और नए समीकरण भी बहुत हैं। इन्हें संभालने की कोशिश में दूसरे हिस्से में कहानी कई जगह आगे बढ़ने के बजाय अपने ही बनाए चक्कर में घूमती हुई लगती है। कुछ हिस्सों को छोटा किया जाता तो फिल्म का असर और तेज हो सकता था। कैसी है स्टारकास्ट कि एक्टिंग? दिव्येंदु शर्मा- दिव्येंदु को मुन्ना के रूप में दोबारा देखना सिर्फ प्रशंसकों के लिए पुरानी याद नहीं है, अभिनय के स्तर पर भी यह फिल्म का बड़ा आकर्षण है। मुन्ना की बेपरवाही, सनक और खतरनाक मासूमियत का जो मिश्रण दिव्येंदु ने बनाया है, वह अब भी काम करता है। पंकज त्रिपाठी- कालीन भैया, दिव्येंदु के किरदार मुन्ना से ठीक उलट है। वह कम बोलते हैं और ज्यादा महसूस कराते हैं। उनका अभिनय शोर नहीं करता, लेकिन सीन पर कब्जा कर लेता है। अली फजल- अली का गुड्डू अब पहले से ज्यादा कठोर और सत्ता के खेल को समझने वाला किरदार है। उनके गुस्से में अब सिर्फ बदला नहीं, सत्ता की भूख भी दिखाई देती है। रवि किशन- इनकी एंट्री फिल्म को जरूरी ऊर्जा देती है। बब्बुआ यादव के किरदार में उनका देसी अंदाज और आक्रामकता मिर्जापुर की दुनिया में नया तड़का लगाती है। रसिका दुग्गल, जितेंद्र कुमार, अभिषेक बनर्जी, राजेश तैलंग और बाकी कलाकार भी अपने किरदारों को उसी दुनिया का हिस्सा बनाए रखते हैं। बड़े पर्दे पर मिर्जापुर का असली फायदा मिर्जापुर की बंदूकें ओटीटी पर भी चलती थीं, लेकिन सिनेमाघर में उनका असर अलग है। गोलियों की आवाज, हाथापाई, खून-खराबा और बड़े एक्शन सीक्वेंस फिल्म को थिएटर वाला स्केल देते हैं। खासकर राजस्थान के रेगिस्तान में फिल्म का प्री-क्लाइमैक्स और क्लाइमैक्स हिस्सा शानदार तरीके से फिल्माया गया है। यहां निर्देशक गुरमीत सिंह को अपनी सबसे ज्यादा आजादी मिलती है और कैमरा लोकेशन को सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं रहने देता, बल्कि उसे एक्शन का हिस्सा बना देता है। सिनेमैटोग्राफी भी फिल्म के स्केल को बढ़ाती है। 3 घंटे 17 मिनट भारी पड़ती है फिल्म की सबसे बड़ी कमी उसकी लंबाई है। पहला हिस्सा कहानी, किरदार और टकराव को तेजी से स्थापित करता है। इंटरवल तक कई जगह फिल्म काफी मनोरंजक रहती है। लेकिन इंटरवल के बाद कुछ हिस्सों में स्क्रीनप्ले जरूरत से ज्यादा समझाता है और रफ्तार गिरती है। यह वही जगह है जहां फिल्म को थोड़ा कसने की जरूरत थी। ताजा प्रतिक्रियाओं में भी ओवर-एक्सप्लेनिंग और पेसिंग को लेकर यही बात सामने आई है। कुछ दृश्य ऐसे लगते हैं जिन्हें कहानी के लिए जरूरी समझा गया है, लेकिन वे फिल्म की गति को उतना आगे नहीं बढ़ाते। यही वजह है कि करीब 15-20 मिनट की कटौती फिल्म को और प्रभावी बना सकती थी। फिर आखिरी हिस्से में फिल्म दोबारा रफ्तार पकड़ती है और एक्शन के साथ कहानी अपना वजन वापस हासिल करती है। कैसा है डायरेक्शन, टेक्निकली कैसी बनी फिल्म? गुरमीत सिंह ने सबसे मुश्किल काम यह किया है कि मिर्जापुर की ओटीटी वाली पहचान को बड़े पर्दे की भाषा में बदला जाए। इस मामले में वह काफी हद तक सफल रहते हैं। फिल्म में मास एलिवेशन है, लेकिन वह पूरी तरह अपनी मूल दुनिया से बाहर नहीं जाती। बैकग्राउंड स्कोर कई एक्शन और एंट्री सीक्वेंस को जरूरी ताकत

कनाडा में पंजाबी मूल का पुलिस अफसर गिरफ्तार:घर से दस्तावेजों से भरे बक्से ले गई पुलिस; धोखाधड़ी-चोरी और विश्वासघात के 9 केस

कनाडा में पंजाबी मूल का पुलिस अफसर गिरफ्तार:घर से दस्तावेजों से भरे बक्से ले गई पुलिस; धोखाधड़ी-चोरी और विश्वासघात के 9 केस

कनाडा के वैनकूवर पुलिस विभाग (VPD) में करीब 20 साल से सेवा दे रहे पंजाबी मूल के पुलिस अफसर और युवाओं के लिए काम करने वाली संस्था किड्स प्ले यूथ के प्रमुख कुलविंदर सिंह उर्फ काल दोसांझ को लंबी जांच के बाद गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके कथित सहयोगी सरबजीत सिंह गिल को भी गिरफ्तार किया है। काल दोसांझ पर धोखाधड़ी, चोरी और विश्वासघात समेत 9 केस दर्ज हैं, जबकि सरबजीत सिंह गिल पर धोखाधड़ी और चोरी से जुड़े 6 मामले दर्ज हैं। इधर, काल दोसांझ की पत्नी और सरी से पार्षद पद की उम्मीदवार सैंडी दोसांझ ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पुलिस घर पहुंची, उस समय उनकी बेटी सो रही थी और उनकी सास घर पर थीं, जबकि काल दोसांझ घर पर नहीं थे। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना के उनके परिवार को घर से बाहर निकाल दिया। सैंडी ने कार्रवाई का संबंध उनके पार्षद चुनाव लड़ने से होने की आशंका भी जताई और कहा कि उन्होंने या उनके परिवार ने कोई अपराध नहीं किया, वे निर्दोष हैं। सरे स्थित घर पर पुलिस की छापेमारी पुलिस ने सरे में 129 स्ट्रीट और 59 एवेन्यू के पास स्थित काल दोसांझ के घर पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों को घर से दस्तावेजों से भरे कई बक्से बाहर ले जाते हुए देखा गया।ब्रिटिश कोलंबिया प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने दोसांझ और सरबजीत सिंह गिल के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि की है। दोसांझ पर 9, साथी पर 6 केस दर्ज पुलिस के अनुसार, काल दोसांझ पर कुल 9 आपराधिक आरोप लगाए गए हैं। इनमें: वहीं, सरबजीत सिंह गिल पर धोखाधड़ी और चोरी से जुड़े कुल 6 मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों के खिलाफ दर्ज मामलों से जुड़े कथित अपराध 8 दिसंबर 2017 से 25 जुलाई 2025 के बीच हुए। ये मामले वैनकूवर, सरे और ब्रिटिश कोलंबिया के अन्य क्षेत्रों से जुड़े बताए गए हैं। रियल एस्टेट निवेश के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप मामले से जुड़ी शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह कथित मामला एक बड़े निवेश घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ लोगों से रियल एस्टेट में निवेश करने और उस पर भारी रिटर्न देने का वादा करके बड़ी रकम ली गई थी। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इन आरोपों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। फगवाड़ा के पास गांव के रहने वाले हैं दोसांझ कुलविंदर सिंह उर्फ काल दोसांझ मूल रूप से पंजाब में फगवाड़ा के पास एक गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने करीब 20 वर्षों तक वैनकूवर पुलिस विभाग में सेवा दी है। पुलिस सेवा के अलावा वे सरे स्थित ‘किड्सप्ले फाउंडेशन’ से भी जुड़े हुए थे। यह संस्था युवाओं को अपराध और नशे से दूर रखने और उन्हें सकारात्मक अवसरों की ओर प्रेरित करने के लिए काम करती है। स्थानीय समुदाय में दोसांझ अपने सामाजिक और धर्मार्थ कार्यों के लिए भी पहचाने जाते थे। पत्नी सैंडी दोसांझ की बड़ी बातें… ************* ये खबर भी पढ़ें: कांग्रेस MLA ने CM की पत्नी का लीगल नोटिस फाड़ा: खैहरा बोले- जो चाहे कर लो, मैं जवाब नहीं दूंगा; रेप केस में ₹5 करोड़ रिश्वत के आरोपों का मामला पंजाब के CM भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा और अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को लीगल नोटिस भेजा है। नोटिस में दोनों से 24 घंटे के भीतर माफी मांगने को कहा गया है। नोटिस में कहा गया है कि अगर दोनों ने ऐसा नहीं किया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। (पढ़ें पूरी खबर)

Sayani Gupta Defamation Case | Mumbai Court Grants Interim Relief

Sayani Gupta Defamation Case | Mumbai Court Grants Interim Relief

25 मिनट पहले कॉपी लिंक मुंबई सिटी सिविल कोर्ट ने गुरुवार को एक्ट्रेस और फिल्ममेकर सयानी गुप्ता के खिलाफ मानहानिकारक कंटेंट प्रकाशित या प्रसारित करने पर अंतरिम रोक लगा दी। यह मामला उनकी शॉर्ट फिल्म ‘आसमानी’ से जुड़ा है, जिस पर फिल्ममेकर विनीता नेगी ने चोरी के आरोप लगाए थे। लीगल वेबसाइट बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, एडिशनल सेशंस जज शुद्धिकुमार मुरलीधरराव बुके ने सयानी गुप्ता की ओर से दायर अंतरिम राहत की अर्जी मंजूर की। सयानी गुप्ता ने फिल्ममेकर विनीता नेगी के खिलाफ 9 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया है। नेगी ने आरोप लगाया था कि सयानी गुप्ता की फिल्म में उनकी अधूरी डॉक्यूमेंट्री ‘प्रभा’ के कुछ अहम हिस्सों की नकल की गई है। फिल्म आसमानी से सयानी गुप्ता, डायरेक्टोरियल डेब्यू कर रही हैं। कोर्ट ने नेगी और अन्य प्रतिवादियों को सयानी गुप्ता के खिलाफ मानहानिकारक कंटेंट प्रकाशित करने, प्रसारित करने या उसे आगे भी प्रकाशित करते रहने से रोक दिया है। इस अंतरिम राहत में मेटा, रेडिट और डेकन क्रॉनिकल जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने का निर्देश भी शामिल है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश का मतलब सच्चे तथ्यों पर आधारित जानकारी के प्रकाशन पर पूरी तरह रोक लगाना नहीं है। जानिए क्या है पूरा मामला? सयानी गुप्ता की डायरेक्टोरियल डेब्यू शॉर्ट फिल्म ‘आसमानी’ को लेकर विनीता नेगी ने कहानी चोरी, कॉपीराइट और धोखाधड़ी के आरोप लगाए। FTII की पूर्व छात्रा और फिल्ममेकर विनीता नेगी का दावा था कि वह डॉक्यूमेंट्री प्रभा बना रही हैं, लेकिन सयानी गुप्ता ने डायरेक्टोरियल डेब्यू शॉर्ट फिल्म आसमानी में उस डॉक्यूमेंट्री के सीन चोरी कर इस्तेमाल किए हैं। सयानी गुप्ता ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने आरोपों को झूठा, भ्रामक और बिना ठोस आधार वाला बताया। सयानी ने स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन में भी इसकी शिकायत की, लेकिन कार्रवाई होने से पहले ही विनीता ने सोशल मीडिया पर चोरी के आरोप लगाते हुए सयानी के खिलाफ बयान देना शुरू कर दिया। सयानी ने विनीता के खिलाफ 9 करोड़ की मानहानि की याचिका दायर की थी। सयानी ने गुप्ता के मुताबिक, मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया के जरिए विनीता ने इन आरोपों को और व्यापक स्तर पर प्रसारित किया गया, जिससे उनकी पेशेवर छवि और काम को नुकसान पहुंचा। फिल्म फेस्टिवल को मेल भेजा, फिल्म को हुआ नुकसान सयानी ने अपनी याचिका में दावा किया कि उनकी फिल्म ‘आसमानी’ को इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ न्यूजीलैंड में स्क्रीनिंग के लिए चुना गया था, लेकिन बाद में इसे फेस्टिवल से हटा लिया गया। दीया मिर्जा फिल्म आसमानी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। गुप्ता ने कोर्ट से 9 करोड़ रुपये के हर्जाने, कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने और विनीता नेगी की ओर से सार्वजनिक तौर पर बयान वापस लेने और माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने कथित मानहानिकारक सामग्री वाली प्रतियों या डिवाइस को अपने कब्जे में लेने के लिए कोर्ट रिसीवर नियुक्त करने की मांग भी की थी। जल्द होगी केस की अगली सुनवाई सयानी को अंतरिम राहत देने के बाद अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। सयानी गुप्ता की ओर से एडवोकेट मोनिल पंजाबी, एडवोकेट प्रियंका सिन्हा और एडवोकेट भाव्या शाह व मुजतबा अंबेकर पेश हुए। वहीं विनीता नेगी की ओर से एडवोकेट सायली शिंदे और लक्ष्मी जेनकिंस ने पैरवी की। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Sayani Gupta Defamation Case | Mumbai Court Grants Interim Relief

Sayani Gupta Defamation Case | Mumbai Court Grants Interim Relief

10 मिनट पहले कॉपी लिंक मुंबई सिटी सिविल कोर्ट ने गुरुवार को एक्ट्रेस और फिल्ममेकर सयानी गुप्ता के खिलाफ मानहानिकारक कंटेंट प्रकाशित या प्रसारित करने पर अंतरिम रोक लगा दी। यह मामला उनकी शॉर्ट फिल्म ‘आसमानी’ से जुड़ा है, जिस पर फिल्ममेकर विनीता नेगी ने चोरी के आरोप लगाए थे। लीगल वेबसाइट बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, एडिशनल सेशंस जज शुद्धिकुमार मुरलीधरराव बुके ने सयानी गुप्ता की ओर से दायर अंतरिम राहत की अर्जी मंजूर की। सयानी गुप्ता ने फिल्ममेकर विनीता नेगी के खिलाफ 9 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया है। नेगी ने आरोप लगाया था कि सयानी गुप्ता की फिल्म में उनकी अधूरी डॉक्यूमेंट्री ‘प्रभा’ के कुछ अहम हिस्सों की नकल की गई है। फिल्म आसमानी से सयानी गुप्ता, डायरेक्टोरियल डेब्यू कर रही हैं। कोर्ट ने नेगी और अन्य प्रतिवादियों को सयानी गुप्ता के खिलाफ मानहानिकारक कंटेंट प्रकाशित करने, प्रसारित करने या उसे आगे भी प्रकाशित करते रहने से रोक दिया है। इस अंतरिम राहत में मेटा, रेडिट और डेकन क्रॉनिकल जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने का निर्देश भी शामिल है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश का मतलब सच्चे तथ्यों पर आधारित जानकारी के प्रकाशन पर पूरी तरह रोक लगाना नहीं है। जानिए क्या है पूरा मामला? सयानी गुप्ता की डायरेक्टोरियल डेब्यू शॉर्ट फिल्म ‘आसमानी’ को लेकर विनीता नेगी ने कहानी चोरी, कॉपीराइट और धोखाधड़ी के आरोप लगाए। FTII की पूर्व छात्रा और फिल्ममेकर विनीता नेगी का दावा था कि वह डॉक्यूमेंट्री प्रभा बना रही हैं, लेकिन सयानी गुप्ता ने डायरेक्टोरियल डेब्यू शॉर्ट फिल्म आसमानी में उस डॉक्यूमेंट्री के सीन चोरी कर इस्तेमाल किए हैं। सयानी गुप्ता ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने आरोपों को झूठा, भ्रामक और बिना ठोस आधार वाला बताया। सयानी ने स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन में भी इसकी शिकायत की, लेकिन कार्रवाई होने से पहले ही विनीता ने सोशल मीडिया पर चोरी के आरोप लगाते हुए सयानी के खिलाफ बयान देना शुरू कर दिया। सयानी ने विनीता के खिलाफ 9 करोड़ की मानहानि की याचिका दायर की थी। सयानी ने गुप्ता के मुताबिक, मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया के जरिए विनीता ने इन आरोपों को और व्यापक स्तर पर प्रसारित किया गया, जिससे उनकी पेशेवर छवि और काम को नुकसान पहुंचा। फिल्म फेस्टिवल को मेल भेजा, फिल्म को हुआ नुकसान सयानी ने अपनी याचिका में दावा किया कि उनकी फिल्म ‘आसमानी’ को इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ न्यूजीलैंड में स्क्रीनिंग के लिए चुना गया था, लेकिन बाद में इसे फेस्टिवल से हटा लिया गया। दीया मिर्जा फिल्म आसमानी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। गुप्ता ने कोर्ट से 9 करोड़ रुपये के हर्जाने, कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने और विनीता नेगी की ओर से सार्वजनिक तौर पर बयान वापस लेने और माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने कथित मानहानिकारक सामग्री वाली प्रतियों या डिवाइस को अपने कब्जे में लेने के लिए कोर्ट रिसीवर नियुक्त करने की मांग भी की थी। जल्द होगी केस की अगली सुनवाई सयानी को अंतरिम राहत देने के बाद अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। सयानी गुप्ता की ओर से एडवोकेट मोनिल पंजाबी, एडवोकेट प्रियंका सिन्हा और एडवोकेट भाव्या शाह व मुजतबा अंबेकर पेश हुए। वहीं विनीता नेगी की ओर से एडवोकेट सायली शिंदे और लक्ष्मी जेनकिंस ने पैरवी की। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

पीएम मोदी ने मेलोनी को दी बधाई:सबसे लंबे समय तक लगातार इटली की प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाया

पीएम मोदी ने मेलोनी को दी बधाई:सबसे लंबे समय तक लगातार इटली की प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी है। मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में मेलोनी को अपनी मित्र बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि इटली के लोगों के उनके नेतृत्व पर भरोसे और विश्वास को दिखाती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मेलोनी की दोस्ती भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के समृद्ध भविष्य के लिए आगे भी मिलकर काम करने की उम्मीद जताई। मोदी ने मेलोनी के आने वाले वर्षों में सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं। खबर अपडेट हो रही है…