Kartik Aaryan Wins National Award for Chandu Champion

5 मिनट पहले कॉपी लिंक कार्तिक आर्यन को मंगलवार को फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ के लिए 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट एक्टर का पुरस्कार मिला। उन्होंने यह अवॉर्ड ममूटी के साथ शेयर किया, जिन्हें ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए यह पुरस्कार मिला। फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन ने अपनी लाइफ का सबसे बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन किया था। ‘चंदू चैंपियन’ देश के पहले पैरालिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मुरलीकांत पेटकर की जिंदगी पर आधारित थी। फिल्म में मुरलीकांत का किरदार निभाने के लिए कार्तिक को अपने शरीर के साथ-साथ बॉक्सिंग स्किल्स पर भी काम करना पड़ा। इसके लिए उन्होंने करीब 14 महीने तक लगातार ट्रेनिंग ली। नेशनल लेवल के बॉक्सर और फिटनेस कोच त्रिदेव पांडे ने कार्तिक के बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन में उनकी मदद की थी। त्रिदेव ने 2024 में दैनिक भास्कर से बातचीत में कार्तिक की ट्रेनिंग से जुड़ी कई बातें बताई थीं। कार्तिक आर्यन ने 2025 में हुए 70वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ के लिए बेस्ट एक्टर का अपना पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता था। 90 किलो वजन से शुरू हुई ट्रेनिंग त्रिदेव के मुताबिक, जब फिल्म के लिए ट्रेनिंग शुरू हुई, तब कार्तिक का वजन 90 किलो था। लक्ष्य था कि उनका वजन घटाकर 69 से 75 किलो के बीच लाया जाए। इसके साथ ही उन्हें एक बॉक्सर के तौर-तरीकों के लिए तैयार करना था। त्रिदेव ने बताया था कि सिर्फ कार्तिक की बॉडी बनाना लक्ष्य नहीं था। फिल्म में बॉक्सिंग के प्रॉपर सीन थे, इसलिए उन्हें बॉक्सर की तरह तैयार करना जरूरी था। इसके लिए ट्रेनिंग में हैंड-आई कोऑर्डिनेशन पर खास ध्यान दिया गया। त्रिदेव पांडे (दाएं) खुद भी एक नेशनल लेवल के बॉक्सर रह चुके हैं। बॉक्सिंग में सामने वाले की हर मूवमेंट पर नजर रखना जरूरी होता है। त्रिदेव के मुताबिक, इस खेल में माइक्रो सेकेंड में चीजें बदल सकती हैं। इसलिए कार्तिक को निशाने पर नजर बनाए रखने और उसी के मुताबिक तेजी से प्रतिक्रिया देने की ट्रेनिंग दी गई थी। ट्रेनिंग में कई पंच भी खाने पड़े बॉक्सिंग सीखना कार्तिक के लिए आसान नहीं था। त्रिदेव ने बताया था कि ट्रेनिंग के दौरान कार्तिक को उनसे कई पंच पड़े। कई बार उनके चेहरे और पेट पर भी चोट लगी। कार्तिक को ट्रेनिंग के दौरान काफी दर्द सहना पड़ा। कई मौकों पर वह त्रिदेव से कहते थे, ‘भाई आराम से मारो।’ इसके बावजूद फिल्म की जरूरत के मुताबिक उन्होंने ट्रेनिंग जारी रखी थी। डाइट में 12 अंडे, एक साल तक मिठाई से दूरी कार्तिक की डाइट पर भी खास ध्यान दिया गया। त्रिदेव के मुताबिक, 14 महीने की ट्रेनिंग के दौरान उनके खाने में 12 अंडे शामिल थे। वह मांस नहीं खाते थे। बॉडी में फैट की मात्रा कम करने के लिए कार्तिक ने करीब एक साल तक मिठाई को हाथ नहीं लगाया। त्रिदेव ने कहा था कि लोगों में यह धारणा है कि मांस के बिना बॉडी नहीं बनाई जा सकती, लेकिन ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक की बॉडी इसका उदाहरण थी। फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन ने अपने शरीर का बॉडी फैट 39% से घटाकर मात्र 7% पर ले आए थे। पहली फिल्म के लिए मिले थे 70 हजार रुपए ग्वालियर के एक सामान्य परिवार से निकले कार्तिक आर्यन ने बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने के लिए लंबा संघर्ष किया। 22 नवंबर 1990 को जन्मे कार्तिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने मुंबई आए थे, लेकिन उनका सपना इंजीनियर बनने का नहीं, एक्टर बनने का था। कॉलेज के साथ वे फिल्मों के ऑडिशन देने लगे। परिवार को भी इसकी ज्यादा जानकारी नहीं थी। ऑडिशन की जानकारी तलाशते और फिर बेलापुर से अंधेरी तक लोकल ट्रेन से पहुंचते थे। कई बार स्टेशन के वॉशरूम में कपड़े बदलकर ऑडिशन देते थे। करीब दो-तीन साल तक उनका यही सिलसिला चलता रहा। फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ से लव रंजन ने बतौर निर्देशक डेब्यू किया था। वहीं, इस फिल्म से कार्तिक आर्यन ने भी एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था। इसी दौरान फेसबुक से उन्हें फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ के ऑडिशन की जानकारी मिली। पहली कोशिश में कार्तिक रिजेक्ट हो गए। करीब 6 महीने तक कोई कॉल नहीं आया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने प्रोडक्शन हाउस से अपनी तस्वीरें तक वापस मांगीं, ताकि दूसरे ऑडिशन में इस्तेमाल कर सकें। इसके बाद उन्हें दोबारा ऑडिशन के लिए बुलाया गया। करीब 6 महीने तक अलग-अलग राउंड हुए। फाइनल ऑडिशन में उन्हें 5 पेज का लंबा मोनोलॉग दिया गया। अगले दिन उन्हें इसे परफॉर्म करना था। कार्तिक ने इसे याद किया और ऑडिशन पास कर लिया। साल 2011 में कार्तिक ने ‘प्यार का पंचनामा’ में रजत यानी रज्जो का किरदार निभाया था। इस फिल्म के लिए उन्हें करीब 70 हजार रुपए मिले थे। फिल्म में उनका लंबा मोनोलॉग काफी चर्चा में रहा। हालांकि इसके बाद का सफर आसान नहीं रहा। 2018 में ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ ने बदला करियर ‘आकाशवाणी’ और ‘कांची’ जैसी फिल्मों को खास सफलता नहीं मिली। एक समय ऐसा भी आया जब कार्तिक को लगने लगा था कि शायद उन्हें आगे काम न मिले, लेकिन साल 2018 में ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ ने उनका करियर बदल दिया। फिल्म हिट हुई और कार्तिक की पहचान तेजी से बढ़ी। कार्तिक आर्यन की फिल्म ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ (2018) का कुल बजट लगभग 25 करोड़ रुपए था और इसने बॉक्स ऑफिस पर 152–156 करोड़ रुपए की कमाई की थी। इसके बाद ‘लुका छुपी’ और ‘पति पत्नी और वो’ जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता और मजबूत की। फिर साल 2022 में ‘भूल भुलैया 2’ ने उन्हें बड़े कमर्शियल स्टार्स की लिस्ट में पहुंचा दिया। कार्तिक ने इसके बाद अलग तरह के किरदार भी चुने। ‘सत्यप्रेम की कथा’ के बाद उन्होंने ‘चंदू चैंपियन’ में पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाया। 70 हजार से 20 करोड़ तक पहुंची फीस कभी 70 हजार में फिल्म करने वाले कार्तिक की जिंदगी में ऐसे पल भी आया, उन्हें मात्र 10 दिन के रोल के लिए 20 करोड़ मिले। कार्तिक आर्यन ने आप की अदालत में बताया था कि उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान अपनी एक फिल्म की महज 10 दिनों की शूटिंग के लिए 20 करोड़ रुपये चार्ज किए थे। हालांकि उन्होंने फिल्म का नाम नहीं लिया, लेकिन रिपोर्ट्स के







