मजरूह सुल्तानपुरी से पहली मुलाकात पर बोले ललित पंडित:उन्होंने कहा था- तुम क्यों आ गए, मैं तो अब काम नहीं करता

हिंदी सिनेमा में 90 के दशक के संगीत की बात हो और संगीतकार जोड़ी जतिन-ललित का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है। इस जोड़ी ने ‘जो जीता वही सिकंदर’, ‘खामोशी’, ‘कभी हां कभी ना’ और ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ जैसी फिल्मों के संगीत से अपनी अलग पहचान बनाई। इसी दौर में गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी के साथ उनका खास रिश्ता बना। अब मजरूह सुल्तानपुरी की बर्थ एनिवर्सरी पर संगीतकार ललित पंडित उनका लिखा पुराना गीत ‘बात नजर की है’ रिलीज करने जा रहे हैं। यह गीत कई साल पहले रिकॉर्ड किया गया था और मूल रूप से ललित और जतिन के प्राइवेट एल्बम का हिस्सा बनने वाला था। खास बात यह है कि इसकी धुन ललित पंडित ने बनाई थी और मजरूह सुल्तानपुरी ने उसी धुन पर बोल लिखे थे। ललित पंडित ने दैनिक भास्कर से बातचीत में मजरूह सुल्तानपुरी के साथ अपने रिश्ते, काम करने के अनुभव और धुन पर गीत लिखने की प्रक्रिया से जुड़े कई किस्से साझा किए। सवाल: मजरूह सुल्तानपुरी की बर्थ एनिवर्सरी पर आप उनका लिखा गीत रिलीज कर रहे हैं। इसके बारे में बताइए? जवाब: पहली अक्टूबर को मजरूह साहब का जन्मदिन होता है। जो गाना मैं रिलीज करने जा रहा हूं, वह हमने बहुत पहले रिकॉर्ड किया था। एक वक्त था जब मैं और जतिन एक एल्बम करना चाहते थे और मजरूह साहब उसके गाने लिख रहे थे। यह उन्हीं गानों में से एक है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह मजरूह साहब का लिखा हुआ गीत है और उनके जन्मदिन पर ही रिलीज हो रहा है। मजरूह साहब के साथ हमारा बहुत अच्छा रिश्ता रहा। उन्होंने हमारे साथ काफी काम किया। ‘जो जीता वही सिकंदर’ उन्हीं की लिखी हुई थी। मेरे करियर के शुरुआती दौर में फिल्म ‘यारा दिलदारा’ के गीत ‘बिन तेरे सनम’ ने जतिन-ललित को जो पहचान दिलाई, उसके बोल भी मजरूह साहब ने लिखे थे। इसके अलावा ‘कभी हां कभी ना’ और ‘खामोशी’ जैसी फिल्मों में उनके साथ काम करने का मौका मिला। मजरूह साहब से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला। मेरे मन में हमेशा था कि उनके जन्मदिन पर उनका लिखा कोई गीत रिलीज करूं। अब पहली अक्टूबर को यह गाना सभी म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगा। सवाल: मजरूह साहब के साथ काम करते हुए आपको कब एहसास हुआ कि आपके पसंदीदा कई गाने उन्हीं ने लिखे हैं? जवाब: जब मैंने उनके साथ काम करना शुरू किया था, तब मुझे भी इतनी जानकारी नहीं थी कि उन्होंने कितना बड़ा काम किया है। बाद में एहसास हुआ कि मेरे जितने पसंदीदा गाने हैं, उनमें से कई मजरूह साहब के लिखे हुए हैं। बेशक आनंद बख्शी साहब और कई दूसरे बड़े गीतकार भी थे, लेकिन मेरे व्यक्तिगत पसंदीदा गानों में, जिन्हें मैं अक्सर गाता हूं, मजरूह साहब के कई गाने शामिल हैं। इसलिए जतिन और मुझे उनसे बहुत लगाव था। हमारे संगीत के शुरुआती दौर में उनकी बहुत गाइडेंस रही। वह हमारे लिए गुरु जैसे थे। उनके गानों के अलावा उनकी बातें सुनने में भी बहुत मजा आता था। वह हमारे साथ काफी फ्रेंडली हो गए थे। वह दौर हमारे लिए बहुत यादगार रहा। सवाल: जब आपने संगीत में करियर शुरू करने के बारे में सोचा, तब मजरूह साहब से मुलाकात कैसे हुई? जवाब: जब मैं और जतिन ‘यारा दिलदारा’ फिल्म पर काम कर रहे थे, तब हम सोच रहे थे कि किस गीतकार के साथ काम किया जाए। हमारी दीदी सुलक्षणा पंडित ने मजरूह साहब के साथ काम किया था। उन्होंने ही सुझाव दिया कि तुम लोग मजरूह साहब के साथ काम करो। उस समय वह काम नहीं कर रहे थे। इसके बाद हम मजरूह साहब से मिलने उनके घर गए। रिजवी कॉलेज के पास उनका घर था। वहीं हमारी पहली मुलाकात हुई और उसके बाद एक अच्छा सिलसिला शुरू हुआ। सवाल: पहली मुलाकात में मजरूह साहब का क्या रिएक्शन था? जवाब: मजरूह साहब उस समय इंडस्ट्री से थोड़े नाराज थे, क्योंकि काफी समय से लोग उनके साथ काम नहीं कर रहे थे। उन्होंने हमसे कहा, ‘तुम क्यों आ गए हो? मैं तो काम नहीं करता। तुम मेरे पास क्यों आ गए?’ हमने कहा कि हम दोनों आपके साथ काम करना चाहते हैं और अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं। उन्होंने हमसे बात की। जब उन्हें पता चला कि हम सुलक्षणा से जुड़े हैं और हमारे परिवार का संगीत से रिश्ता है, तो वह समझ गए कि हम संगीत से जुड़े परिवार के लड़के हैं। इसके बाद उन्होंने प्यार से कहा कि वह हमारे साथ जरूर काम करेंगे। सवाल: इसके बाद जब आपके गाने सफल हुए तो मजरूह साहब के साथ आपकी बॉन्डिंग कैसी हो गई? जवाब: जब कोई काम सफल होता है तो अपने आप एक बॉन्डिंग बन जाती है। एक-दूसरे पर विश्वास बढ़ता है। मजरूह साहब ने हमारे साथ काम शुरू किया तो उनके कई शानदार गाने आए। उन्हें नॉमिनेशन मिले और अवॉर्ड भी मिले। इसके बाद इंडस्ट्री में दूसरे लोग भी उनके साथ काम करना चाहते थे। वह दौर उन्होंने भी देखा। वह हमसे बहुत खुश रहते थे, क्योंकि हमारा म्यूजिक उनके साथ बहुत अच्छा चल रहा था। काम में बहुत मेहनत होती थी, लेकिन उसके साथ बहुत मजा भी आता था। सवाल: मजरूह साहब के साथ गाने तैयार करने की प्रक्रिया कैसी होती थी? आप उन्हें सिचुएशन और धुन कैसे समझाते थे? जवाब: मजरूह साहब ने हमारे साथ जितने भी गाने लिखे, उनमें से ज्यादातर धुन पर लिखे गए थे। हम धुन बनाकर उन्हें देते थे और वह उस पर बोल लिखकर लाते थे। जो गाना अब रिलीज हो रहा है, उसकी धुन भी मैंने मजरूह साहब को दी थी। उन्होंने उसी पर बोल लिखे थे। यह उस समय की रिकॉर्डिंग है। इसमें आपको उस दौर का एनालॉग फील मिलेगा। इस गाने की खास बात यह है कि इसे उसी दौर में रिकॉर्ड किया गया था, जब हमने ‘कुछ कुछ होता है’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ जैसी बड़ी फिल्मों के गाने रिकॉर्ड किए थे। मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि यह गीत उस समय लिखा गया था, जब मजरूह साहब हमारे बीच थे और उनके साथ बैठकर तैयार हुआ था। सवाल: क्या यह गाना किसी फिल्म के लिए रिकॉर्ड
‘तेरे ही भरोसे हनुमान’ सिंगर की आंखो का इलाज होगा:हनुमान अंश की प्रोड्यूसर अनुप्रिया करेंगी मदद; गायक सुनील लोधी बचपन से दृष्टिबाधित

फिल्म ‘हनुमान अंश’ में ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ भजन गाकर फेमस हुए सुनील लोधी की आंखो का इलाज होगा। फिल्म प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने सुनील के इलाज में मदद करने की पहल की है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अनुप्रिया ने बताया कि सुनील के मुंबई आने पर उनकी आंखों की विशेषज्ञ से जांच कराई जाएगी और नवंबर से उनके ट्रीटमेंट की शुरुआत होने की उम्मीद है। हालांकि, अभी अस्पताल और इलाज की पूरी प्रक्रिया तय नहीं हुई है। सुनील लोधी बचपन से ही दृष्टिबाधित हैं। अनुप्रिया ने बताया कि सुनील जब पिछली बार मुंबई आए थे, तब उन्होंने उनके लिए आई-स्पेशलिस्ट से अपॉइंटमेंट भी लिया था, लेकिन वह जांच नहीं हो पाई। ‘मैं चाहती हूं कि सुनील प्यार को महसूस ही नहीं, देख भी सकें’ सुनील लोधी बचपन से दृष्टिबाधित हैं। अनुप्रिया ने कहा कि सुनील से बातचीत के दौरान उन्हें उनकी सोच और आस्था ने बहुत प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद सुनील अपनी सफलता और जीवन में मिले प्यार का श्रेय हनुमान जी को देते हैं। अनुप्रिया ने कहा, “जब मैं सुनील भैया से बात करती हूं, तो मैं ये महसूस करती हूं कि लोगों में इतना फ्रस्ट्रेशन रहता है। वो कभी-कभी भगवान को भी बोलते हैं कि आप मेरे साथ नहीं हो, आप मेरे अगेंस्ट हो। लेकिन जब मैं सुनील भैया से बात करती हूं, वो हमेशा अपना पूरा क्रेडिट महाराज जी, हनुमान जी को देते हैं।” इसी भावना ने उन्हें सुनील के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित किया। अनुप्रिया के शब्दों में, “वो बचपन से विजुअली इम्पेयर्ड हैं, नेत्रहीन हैं। मैं चाहती थी कि अगर वो प्यार को महसूस कर सकते हैं, तो मैं चाहती हूं कि वो प्यार को देख भी सकें।” ‘बहन होने के नाते मैं उन्हें अपना भाई मानती हूं’ अनुप्रिया ने कहा कि वह सुनील को सिर्फ एक कलाकार के तौर पर नहीं देखतीं, बल्कि उन्हें अपना भाई मानती हैं। उन्होंने कहा, “बहन होने के नाते मैं तो उनको अपना भाई ही मानती हूं। वो खुद एक यंगस्टर हैं और उनमें इतना टैलेंट कूट-कूटकर भरा है। मुझे लगा कि क्यों न हम उनकी मदद करें।” उन्होंने बताया कि अब सुनील के अगले मुंबई दौरे पर उनकी मेडिकल जांच कराने की तैयारी है। नवंबर में ट्रीटमेंट शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन डॉक्टर की जांच के बाद ही इलाज की वास्तविक दिशा और संभावनाएं स्पष्ट होंगी। ‘MP सरकार भी उनके साथ है’ सुनील के इलाज में मध्य प्रदेश सरकार की भूमिका का भी अनुप्रिया ने जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से भी उन्हें सहयोग मिल रहा है और यह बात उन्हें खास तौर पर खुशी देती है। अनुप्रिया ने कहा, “इस बार मुझे बहुत खुशी है कि भैया के साथ ना ही मैं हूं, बल्कि पूरा का पूरा गवर्नमेंट है। भारत पूरा उनके साथ है।” हालांकि, अभी किस अस्पताल में इलाज होगा, यह तय नहीं हुआ है। अनुप्रिया ने इस बारे में कहा कि अस्पताल का फैसला फिलहाल नहीं हुआ है और इस संबंध में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। पहले सुनील की विशेषज्ञ से जांच होगी और उसके बाद डॉक्टरों की सलाह के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। इस बीच, सुनील लोधी के चाहने वालों के लिए उनकी मेडिकल जांच और प्रस्तावित उपचार एक उम्मीद की खबर है। हालांकि, इलाज के बाद उनकी दृष्टि में कितना सुधार संभव है, इसका जवाब डॉक्टरों की जांच और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही मिल सकेगा। ये खबर भी पढ़ें हनुमान अंश ने वर्ल्डवाइड कमाए 400 करोड़:52वें दिन में कमाई का रिकॉर्ड बनाया, 2026 की तीसरी बड़ी फिल्म; जानिए कैसी रही दूसरी फिल्मों की कमाई महज 2 करोड़ के बजट में बनी फिल्म हनुमान अंश ने 52 दिनों में 400 करोड़ रुपए का वर्ल्डवाइड कलेक्शन कर लिया है। फिल्म ने 52वें दिन यानी रविवार को रिकॉर्ड 9 करोड़ रुपए की कमाई की है। पूरी खबर पढ़ें
‘तेरे ही भरोसे हनुमान’ सिंगर की आंखो का इलाज होगा:हनुमान अंश की प्रोड्यूसर अनुप्रिया करेंगी मदद; गायक सुनील लोधी बचपन से दृष्टिबाधित

फिल्म ‘हनुमान अंश’ में ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ भजन गाकर फेमस हुए सुनील लोधी की आंखो का इलाज होगा। फिल्म प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने सुनील के इलाज में मदद करने की पहल की है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अनुप्रिया ने बताया कि सुनील के मुंबई आने पर उनकी आंखों की विशेषज्ञ से जांच कराई जाएगी और नवंबर से उनके ट्रीटमेंट की शुरुआत होने की उम्मीद है। हालांकि, अभी अस्पताल और इलाज की पूरी प्रक्रिया तय नहीं हुई है। सुनील लोधी बचपन से ही दृष्टिबाधित हैं। अनुप्रिया ने बताया कि सुनील जब पिछली बार मुंबई आए थे, तब उन्होंने उनके लिए आई-स्पेशलिस्ट से अपॉइंटमेंट भी लिया था, लेकिन वह जांच नहीं हो पाई। ‘मैं चाहती हूं कि सुनील प्यार को महसूस ही नहीं, देख भी सकें’ सुनील लोधी बचपन से दृष्टिबाधित हैं। अनुप्रिया ने कहा कि सुनील से बातचीत के दौरान उन्हें उनकी सोच और आस्था ने बहुत प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद सुनील अपनी सफलता और जीवन में मिले प्यार का श्रेय हनुमान जी को देते हैं। अनुप्रिया ने कहा, “जब मैं सुनील भैया से बात करती हूं, तो मैं ये महसूस करती हूं कि लोगों में इतना फ्रस्ट्रेशन रहता है। वो कभी-कभी भगवान को भी बोलते हैं कि आप मेरे साथ नहीं हो, आप मेरे अगेंस्ट हो। लेकिन जब मैं सुनील भैया से बात करती हूं, वो हमेशा अपना पूरा क्रेडिट महाराज जी, हनुमान जी को देते हैं।” इसी भावना ने उन्हें सुनील के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित किया। अनुप्रिया के शब्दों में, “वो बचपन से विजुअली इम्पेयर्ड हैं, नेत्रहीन हैं। मैं चाहती थी कि अगर वो प्यार को महसूस कर सकते हैं, तो मैं चाहती हूं कि वो प्यार को देख भी सकें।” ‘बहन होने के नाते मैं उन्हें अपना भाई मानती हूं’ अनुप्रिया ने कहा कि वह सुनील को सिर्फ एक कलाकार के तौर पर नहीं देखतीं, बल्कि उन्हें अपना भाई मानती हैं। उन्होंने कहा, “बहन होने के नाते मैं तो उनको अपना भाई ही मानती हूं। वो खुद एक यंगस्टर हैं और उनमें इतना टैलेंट कूट-कूटकर भरा है। मुझे लगा कि क्यों न हम उनकी मदद करें।” उन्होंने बताया कि अब सुनील के अगले मुंबई दौरे पर उनकी मेडिकल जांच कराने की तैयारी है। नवंबर में ट्रीटमेंट शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन डॉक्टर की जांच के बाद ही इलाज की वास्तविक दिशा और संभावनाएं स्पष्ट होंगी। ‘MP सरकार भी उनके साथ है’ सुनील के इलाज में मध्य प्रदेश सरकार की भूमिका का भी अनुप्रिया ने जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से भी उन्हें सहयोग मिल रहा है और यह बात उन्हें खास तौर पर खुशी देती है। अनुप्रिया ने कहा, “इस बार मुझे बहुत खुशी है कि भैया के साथ ना ही मैं हूं, बल्कि पूरा का पूरा गवर्नमेंट है। भारत पूरा उनके साथ है।” हालांकि, अभी किस अस्पताल में इलाज होगा, यह तय नहीं हुआ है। अनुप्रिया ने इस बारे में कहा कि अस्पताल का फैसला फिलहाल नहीं हुआ है और इस संबंध में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। पहले सुनील की विशेषज्ञ से जांच होगी और उसके बाद डॉक्टरों की सलाह के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। इस बीच, सुनील लोधी के चाहने वालों के लिए उनकी मेडिकल जांच और प्रस्तावित उपचार एक उम्मीद की खबर है। हालांकि, इलाज के बाद उनकी दृष्टि में कितना सुधार संभव है, इसका जवाब डॉक्टरों की जांच और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही मिल सकेगा। ये खबर भी पढ़ें हनुमान अंश ने वर्ल्डवाइड कमाए 400 करोड़:52वें दिन में कमाई का रिकॉर्ड बनाया, 2026 की तीसरी बड़ी फिल्म; जानिए कैसी रही दूसरी फिल्मों की कमाई महज 2 करोड़ के बजट में बनी फिल्म हनुमान अंश ने 52 दिनों में 400 करोड़ रुपए का वर्ल्डवाइड कलेक्शन कर लिया है। फिल्म ने 52वें दिन यानी रविवार को रिकॉर्ड 9 करोड़ रुपए की कमाई की है। पूरी खबर पढ़ें





