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Hema Malini Birthday Interesting Facts; Dream Girl Pakistani Fan

Hema Malini Birthday Interesting Facts; Dream Girl Pakistani Fan

27 मिनट पहले कॉपी लिंक 16 अक्टूबर 1948 आज से 78 साल पहले तमिलनाडु के अम्मानकुड़ी में जया लक्ष्मी प्रसव के आखिरी चरण में थीं। दो बेटे पहले से थे, तो तीसरे बच्चे के जन्म से पहले ही उन्होंने पति वी.एस.आर.चक्रवर्ती से कहा- ‘देखना, बेटी ही होगी। मैं उसका नाम हेमा मालिनी रखूंगी, जो बड़ी होकर क्लासिकल डांसर बनेगी।’ कमरे में दुर्गा, सरस्वती के बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए। जया लक्ष्मी की कही बात सच साबित हुई, अस्पताल में किलकारी गूंजी, बेटी हुई थी। नाम रखा गया हेमा मालिनी, जिसे आज पूरा देश ड्रीम गर्ल के नाम से भी जानता है। मां के फैसले के अनुसार, हेमा मालिनी पहले क्लासिकल डांसर बनीं और फिर हीरोइन, लेकिन यही स्टारडम वजह रहा कि उन्होंने अपने पिता को खो दिया। वजह रही एक पाकिस्तानी फैन का घर में घुसना और फिर किचन नाइफ से दहशत फैलाना। आज हेमा मालिनी के बर्थडे के खास मौके पर जानिए उनकी जिंदगी की रोचक कहानी- हेमा मालिनी ने होश संभाला ही था कि मां ने उनका दाखिला क्लासिकल डांसिंग में करवा दिया। खेल-कूद की कोई गुंजाइश ही नहीं थी। स्कूल से लौटते ही हेमा कभी डांस क्लास, तो कभी सिंगिंग क्लास जातीं। कोई टीचर सिखाने में कोताही बरतता, तो मां तुरंत क्लासेस बदल देतीं। हेमा मालिनी के बचपन की तस्वीर। कुछ सालों बाद परिवार दिल्ली आकर बसा। क्लासिकल डांस की ट्रेनिंग यहां भी जारी रही। हर आम बच्चे की तरह हेमा भी दिनभर खेलना चाहती थीं, लेकिन मां ने कुछ अलग सोच रखा था। वो हेमा के बालों में तेल डालकर चोटी बनातीं, बालों में फूल लगातीं, आंखों में काजल। टिपिकल मद्रासी लड़की की तरह घाघरा चोली पहनातीं। मां उन्हें सही ढंग से कपड़े पहनना और हाव-भाव की सीख देतीं। जब इस तरह वो कभी दिल्ली की सड़कों पर निकलतीं, तो आसपास से गुजरने वाले लोग उनका मजाक उड़ाते। हेमा इससे नाराज होतीं, तो मां कहतीं- ‘वह तुम्हें साउथ इंडियन कहते हैं, तो इसमें हर्ज क्या है, तुम साउथ इंडियन ही हो।’ कुछ साल बीते ही थे कि क्लासिकल डांस ट्रेनिंग सही ढंग से न मिल पाने के डर से जया लक्ष्मी ने पति से साफ कह दिया कि वह अपना ट्रांसफर मद्रास करवा लें। परिवार मद्रास आ गया। जल्द ही हेमा स्टेज शोज करने लगीं। एक ऐसे ही स्टेज शो में 13 साल की हेमा पर तमिल डायरेक्टर सीवी श्रीधर की नजर पड़ी। उन्होंने झट से हेमा को अगली फिल्म में कास्ट कर लिया। शूटिंग शुरू हुई। हेमा बड़े उत्साह के साथ 2 दिनों तक शूटिंग के सेट पर गईं। डायरेक्टर उनके नाम से नाखुश थे। सुझाव मिला कि नाम हेमा मालिनी की जगह सुजाता रख लिया जाए। फिर तीसरे दिन उन्हें ये कहकर फिल्म से निकाल दिया गया कि तुम बहुत दुबली-पतली हो, कभी हीरोइन नहीं बन पाओगी। 13 साल की बच्ची के लिए ये रिजेक्शन काफी भावुक रहा। मां ने तब मनोबल बढ़ाते हुए कहा- ये बस एक चैलेंज है, जिसे स्वीकार करना ही पड़ेगा। हेमा फिर मंच पर लौट गईं। कुछ समय बाद 1963 की फिल्म इंदु साथियम में हेमा मालिनी को एक गाने में डांस करने का मौका मिला। इसके बाद उन्हें कई तमिल फिल्मों में छोटे रोल दिए जाने लगे। साउथ फिल्ममेकर, प्रोड्यूसर बी. अनंत स्वामी ने हेमा के लिए नए रास्ते बनाए। वो उन्हें फिल्ममेकर्स से मिलवाते और उन्हें रोल दिलवाते। बी.अनंत स्वामी हिंदी फिल्में भी प्रोड्यूस करते थे। 60 के दशक के आखिर में उन्होंने राज कपूर को लेकर फिल्म शुरू की, नाम था सपनों का सौदागर, डायरेक्टर थे महेश कौल और हीरो थे राज कपूर। अनंत स्वामी ने इस फिल्म के लिए महेश कौल को हेमा मालिनी का नाम सुझाया। वह हेमा को स्क्रीनटेस्ट दिलाने के लिए राज कपूर के स्टूडियो लेकर गए। राज कपूर ने गांव की लड़की के गेटअप में टेस्ट लेना शुरू ही किया था कि हेमा झट से बोल पड़ीं- मुझे एक्टिंग की कोई जानकारी नहीं है। टेस्ट शुरू हुआ, हेमा ने चंद लाइनें कहीं। राज कपूर ने पहले कैमरे की स्क्रीन देखी और फिर सामने खड़ीं हेमा को और फिर पास खड़े डायरेक्टर महेश कौल से कहा- ‘इस लड़की को देखिए, ये एक दिन बहुत आगे जाएगी।’ राज कपूर के कहने पर हेमा को हिंदी फिल्म सपनों के सौदागर (1968) में कास्ट किया गया। फिल्म में हेमा मालिनी ने बंजारन का किरदार निभाया। फिल्म रिलीज होने को आई। हेमा को तब कोई नहीं जानता था। तभी अनंत स्वामी ने हेमा के परिचय का एक नया आइडिया खोज निकाला। एक टैग लाइन। अखबारों में हेमा मालिनी की तस्वीरें छपवाई गईं, नीचे लिखा गया- ‘राज कपूर की ड्रीम गर्ल।’ इस टैगलाइन और प्रमोशनल स्टंट का खास फायदा नहीं मिला। फिल्म एवरेज रही, लेकिन हेमा को हर कोई ड्रीम गर्ल कहने लगा। शुरुआती फिल्म से हेमा ज्यादा सफल नहीं रहीं, लेकिन जब उन्हें कामयाबी मिली, तो हर किसी ने उन्हें ड्रीम गर्ल बुलाना शुरू कर दिया। 1977 की फिल्म ड्रीम गर्ल का टाइटल, हेमा मालिनी पर ही रखा गया था। जब हेमा हिंदी सिनेमा में आईं, तब धर्मेंद्र स्टार बन चुके थे। वो हिंदी सिनेमा के सबसे हैंडसम एक्टर माने जाते थे। 1968 में फिल्मों में आने से पहले हेमा मालिनी, ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म आसमान महल के प्रीमियर में पहुंचीं। नजर उठाई तो सामने धर्मेंद्र खड़े थे। स्वभाव से कोमल और कई चाहने वालों से घिरे हुए। हेमा ने देखा, तो देखती ही रह गईं। मन में एक आवाज आई- ‘इतना हैंडसम इंसान मैंने कभी नहीं देखा। उस दिन हेमा ने सोच लिया कि शादी करूंगी, तो ऐसे ही इंसान से करूंगी।’ एक ही इंडस्ट्री में होने के नाते दोनों का कई बार आमना-सामना हुआ। जल्द ही दोनों को फिल्म तुम हसीन मैं जवां में साथ साइन किया। साथ काम करते हुए दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे। धर्मेंद्र-हेमा मालिनी की पहली साथ की गई फिल्म का पोस्टर। हेमा की उम्र 20 साल थी और धर्मेंद्र 34 साल के। बतौर लीड हीरोइन हेमा के करियर की यह तीसरी फिल्म थी। धर्मेंद्र 50 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके थे। तुम हसीन मैं जवां फिल्म के टाइटल सॉन्ग की झलक। 24 जुलाई 1970 को फिल्म सिनेमा हॉल में रिलीज हुई, लेकिन तब तक फिल्म

Prahar Movie Review | Rajkummar Rao Ujjwal Nikam Mumbai Legal Drama

Prahar Movie Review | Rajkummar Rao Ujjwal Nikam Mumbai Legal Drama

11 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी कॉपी लिंक 26/11 के हमले ने मुंबई को दहला दिया था, गोलियां थमीं, लेकिन इंसाफ की जंग जारी रही। आतंक के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई अदालत में लड़ी गई। ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ इसी कानूनी संघर्ष की कहानी है, जहां हथियारों की जगह दलीलें हैं और हर सबूत की अहमियत। राजकुमार राव और ललित प्रभाकर का दमदार अभिनय फिल्म को खास बनाता है। अदालत में इंसाफ की लड़ाई के साथ यह कहानी एक वकील की निजी जिंदगी में झांकती है, जहां देश की जिम्मेदारी और परिवार के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं। अविनाश अरुण के निर्देशन में बनी 2 घंटे 20 मिनट की इस फिल्म को दैनिक भास्कर ने 4 स्टार रेटिंग दी है। कहानी: अदालत में मुकदमा, घर में रिश्तों का इम्तिहान फिल्म में उज्ज्वल निकम (राजकुमार राव) की कहानी दिखाई गई है, जो देश के जाने-माने सरकारी वकील हैं और 26/11 हमले के आरोपी अजमल कसाब को सजा दिलाने की कानूनी लड़ाई लड़ते हैं। कसाब (ललित प्रभाकर) के मुकदमे के साथ फिल्म उज्ज्वल की पत्नी ज्योति निकम (वामिका गब्बी) और बेटे अनिकेत के साथ उनके रिश्तों को भी दिखाती है। दूसरों को इंसाफ दिलाने की जिद में वह अपनी निजी जिंदगी को कितना वक्त दे पाते हैं, कहानी का भावनात्मक पहलू यही है। एक्टिंग: राजकुमार का ठहराव, ललित का दमदार अंदाज राजकुमार राव ने उज्ज्वल निकम के किरदार को गंभीरता और सहजता से निभाया है। उनके चेहरे के भाव और संवादों का ठहराव किरदार को विश्वसनीय बनाते हैं। वहीं, ललित प्रभाकर ने अजमल कसाब के किरदार में बेचैनी और असहजता पैदा की है। खासकर अंतिम हिस्से में उनका अभिनय ध्यान खींचता है। जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर और आशीष विद्यार्थी अपने किरदारों को मजबूती देते हैं, जबकि वामिका गब्बी कहानी में भावनात्मक जुड़ाव लाती हैं। डायरेक्शन और सिनेमैटोग्राफी: गंभीर कहानी, कहीं धीमी रफ्तार अविनाश अरुण का निर्देशन कहानी को बेवजह के फिल्मी ड्रामे से दूर रखता है। अदालत की कार्यवाही और उज्ज्वल की निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश अच्छी है। सिनेमैटोग्राफी भी फिल्म के गंभीर माहौल के अनुकूल है। हालांकि, कुछ हिस्सों में स्क्रीनप्ले धीमा पड़ता है। चर्चित घटनाओं से परिचित दर्शकों के लिए कुछ दृश्यों में और रोमांच पैदा किया जा सकता था। म्यूजिक: ‘मेरे रहते’ छोड़ता है असर फिल्म में एक ही गाना ‘मेरे रहते’ है, जो अंत में आता है और फिल्म खत्म होने के बाद भी भावनात्मक असर छोड़ता है। बैकग्राउंड स्कोर अदालत के तनाव को बढ़ाता है और कहानी की गंभीरता के साथ चलता है। फाइनल वर्डिक्ट ‘प्रहार’ की सबसे बड़ी ताकत राजकुमार राव और ललित प्रभाकर का अभिनय है। कुछ जगह धीमी रफ्तार के बावजूद फिल्म कोर्टरूम ड्रामा और वास्तविक घटनाओं पर आधारित कहानियां पसंद करने वालों को बांधे रखती है। यह याद दिलाती है कि गोलियां थमने के बाद भी इंसाफ की लड़ाई खत्म नहीं होती। ये खबर भी पढ़ें मूवी रिव्यू- ‘जेलर 2’:रजनीकांत का स्वैग बरकरार; एक्शन और सेलेब्स का मेला, कमजोर कहानी और ढीली स्क्रीनप्ले ने मजा किया किरकिरा रजनीकांत स्क्रीन पर आएं और दुश्मनों की हवा टाइट न हो, ऐसा भला कैसे हो सकता है! उनका चश्मा लगाने का अंदाज हो, चलने का स्टाइल हो या फिर विलेन को बिना ज्यादा कुछ बोले सबक सिखाने वाला स्वैग, थलाइवा के फैंस के लिए ये सब किसी ट्रीट से कम नहीं है। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔