Bhiwani Lawyer Files Complaint Against Singer Masoom Sharma

10 अप्रैल को देहरादून में शो के दौरान मासूम शर्मा ने स्टेज से गालियां दी थीं। हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा के देहरादून में शो के दौरान स्टेज से गालियां देने पर विवाद बढ़ता जा रहा है। भिवानी के एडवोकेट अशोक आर्य ने बहल थाने में मासूम के खिलाफ शिकायत दी है। . उन्होंने मांग की है कि स्टेज से अश्लील शब्दों का प्रयोग करने पर मासूम शार्म के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही सोशल मीडिया से इन वीडियो को डिलीट कराया जाए। स्टेज से गालियां देने के बाद मासूम शर्मा सोशल मीडिया पर भी जमकर ट्रोल हो रहे हैं। कोई यूजर उन्हें गुंडा कह रहा है तो कोई मासूम शर्मा की गिरफ्तारी की मांग करते हुए 10 साल तक सजा देने की मांग कर रहा है। फेसबुक पर मासूम शर्मा के खिलाफ कमेंट… जानिए एडवोकेट ने अपनी शिकायत में क्या कहा… मंच से अश्लील गांलियां और हिंसक बयानबाजी बहल के रहने वाले एडवोकेट अशोक आर्य ने अपनी शिकायत में कहा कि रविवार सुबह वह अपनी फेसबुक आईडी चला रहा था। इसी दौरान एक वीडियो सामने आया, जिसमें हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा मंच पर बहुत अश्लील गालियां और हिंसक बयानबाजी कर रहा था। यह समाज में अत्यधिक अश्लीलता फैलाने वाला व गैरकानूनी है। बहुत सी फेसबुक आईडी पर मासूम का वह वीडियो चल रहा है। सोशल मीडियो से रील्स डिलीट करवाई जाएं एडवोकेट ने आगे कहा कि फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मासूम शर्मा की रील्स को जल्दी डिलीट कराया जाए और मासूम शर्मा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि समाज में फैल रही अश्लीलता पर अंकुश लगे और मासूम शर्मा जैसे सिंगर भविष्य में इस तरह की हरकत न दोहराए। एडवोकेट अशोक आर्य ने भिवानी के बहल पुलिस थाने में मासूम शर्मा के खिलाफ शिकायत दी है।-फाइल फोटो SHO बोले- संबंधित थाने में भेजेंगे शिकायत बहल थाने के SHO संजय कुमार ने कहा कि एडवोकेट अशोक आर्य ने मासूम शर्मा के खिलाफ शिकायत दी है। शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। जांच के बाद शिकायत को संबंधित थाने में भेज दी जाएगी। आगे की कार्रवाई संबंधित थाने द्वारा ही की जाएगी। विवाद के बाद मासूम शर्मा ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर माफी मांगी थी। देहरादून के शो में बदमाश को गालियां दी थीं यह मामला 10 अप्रैल से शुरू हुआ। मासूम शर्मा देहरादून के DAV कॉलेज में एक शो करने पहुंचे थे। यहां मंच से उन्होंने एक बदमाश को गालियां दीं। बाद में, मासूम ने वीडियो जारी कर माफी मांगी। मासूम ने बताया कि एक बदमाश होटल में हथियार लेकर आया था और वह उनका पीछा कर रहा था। उसने अमेरिका में रह रहे चचेरे भाई को भी फोन करके धमकी दी थी। इसी बात का तनाव शो में निकल गया। इस विवाद के बाद देहरादून पुलिस ने मासूम शर्मा को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा है। वहीं, हरियाणा महिला आयोग ने भी मासूम को नोटिस जारी किया है। मासूम को 18 अप्रैल की सुबह 11 बजे आयोग के ऑफिस में पेश होने के लिए कहा गया है। —————————— ये खबर भी पढ़ें :- दावा- मासूम शर्मा को स्टेज पर मारने की धमकी मिली:देहरादून पुलिस ने गालियां देने पर जवाब मांगा; हरियाणा महिला आयोग का भी नोटिस हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा के देहरादून शो में स्टेज पर गालियां देने के मामले में खुलासा हुआ है। इवेंट ऑर्गेनाइज कराने वाली टीम के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर दैनिक भास्कर को बताया कि शो से पहले मासूम शर्मा को धमकी दी गई थी। एक बदमाश ने कहा था कि अगर शो किया तो स्टेज पर ही मार देंगे। पढ़ें पूरी खबर…
John Nolan Death | Badminton Asia Championship India Silver

Hindi News Career John Nolan Death | Badminton Asia Championship India Silver | April 13 Current Affairs 3 मिनट पहले कॉपी लिंक जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं… नेशनल (NATIONAL) 1. केंद्रीय मंत्री गडकरी उन्नत कृषि महोत्सव का समापन करेंगे 13 अप्रैल को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में 3 दिवसीय उन्नत कृषि महोत्सव का समापन करेंगे। कृषि महोत्सव 11 अप्रैल को शुरू हुआ था, इसमें ड्रोन, पंप और सिंचाई सहित एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को लाइव दिखाया गया। महोत्सव में सीएम डॉ. मोहन यादव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के डायरेक्टर जनरल डॉ. मांगी लाल जाट समेत देशभर के कृषि वैज्ञानिक भी शामिल हुए। कृषि महोत्सव का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण बीज एवं उर्वरक की जानकारी देना, सिंचाई और बागवानी की बारीकियां बताना है। कृषि महोत्सव में किसानों को बिजनेस मार्केट और क्रेडिट सिस्टम की जानकारी भी दी गई। कृषि महोत्सव में चार सेमिनार हॉल में 20 विषयों पर किसानों से सीधे बातचीत की गई, जिसमें कृषि में AI के उपयोग से लेकर एकीकृत खेती तक के विषय शामिल थे। 11 अप्रैल को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रायसेन में उन्नत कृषि महोत्सव का उद्घाटन किया था। कृषि महोत्सव में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल रहे। कृषि महोत्सव में एप और प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया गया सॉइल (मृदा) मोबाइल एप : कृषि महोत्सव में सॉइल (मृदा) मोबाइल एप लॉन्च किया, जिससे सॉइल टेस्टिंग की जा सके। ई- फॉर्म्स प्लेटफॉर्म: कृषि महोत्सव में ई- फॉर्म्स प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया गया, ताकी इस प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों तक योजना और बाजार की जानकारी पहुंच सके। कृषि महोत्सव में 300 से ज्यादा स्टॉल लगाए गए और इसमें 20 हजार से ज्यादा किसानों ने हिस्सा लिया। निधन (DEATH) 2. सिंगर आशा भोसले का निधन 12 अप्रैल को सिंगर आशा भोसले का निधन हो गया। आशा भोसले 92 साल की थीं और उन्हें लंग्स (फेफड़े) इंफेक्शन के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। आशा ने 14 से ज्यादा भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गीत गाए। वे पॉप, गजल, शास्त्रीय संगीत जैसी शैली में गाने के लिए मशहूर थीं। आशा का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। 1943 में 10 साल की उम्र में मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ के लिए पहला गाना गाया था। आशा ने 1948 में पहला हिंदी गाना फिल्म ‘चुनरिया’ का ‘सावन आया’ गाया था। आशा ने 1960-70 के दशक में हिंदी सिनेमा में ‘कैबरे’ और ‘डिस्को’ गानों को एक नई ऊंचाई दी। आशा 1997 में ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट होने वाली पहली भारतीय सिंगर बनीं। आशा को साल 2000 में दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड मिला। आशा को 2008 में भारत सरकार ने पद्म विभूषण से सम्मानित किया। 2011 में आशा का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। आशा के गाए मशहूर गानों की फेहरिस्त बहुत लंबी है, जिसमें पिया तू अब तो आजा, दम मारो दम, उड़े जब-जब जुल्फें जैसे गाने शामिल हैं। आशा महशूर थियेटर एक्टर और सिंगर दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और स्वर कोकिला लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। आशा भोसले ने 50 से 90 के दशक के बीच ओपी नैयर, आरडी बर्मन, खय्याम और बप्पी लहरी जैसे कई संगीतकारों के साथ काम किया। आशा भोसले का आखिरी गाना ‘सैंया बिना’ है। इस गाने में उन्होंने परफॉर्म भी किया है। निधन (DEATH) 3. एक्टर जॉन नोलन का निधन 11 अप्रैल को मशहूर ब्रिटिश एक्टर जॉन नोलन का निधन हो गया। वे 87 साल के थे। जॉन 2005 में आई बैटमैन बिगिन्स और पर्सन ऑफ इंटरेस्ट जैसी फिल्मों में अपने किरदारों के लिए जाने जाते थे। नोलन प्रशंसित फिल्म निर्माता क्रिस्टोफर नोलन के अंकल थे और उनकी कई फिल्मों में दिखाई भी दिए। नोलन की सबसे मशहूर फिल्मों में 2012 में द डार्क नाइट राइजेस हैं। नोलन लंदन के प्रतिष्ठित ड्रामा सेंटर से ग्रेजुएट थे और इसमें हिस्सा लेने वाले पहले स्टूडेंट थे। नोलन ने शुरुआती करियर में रिचमंड थिएटर में रोमियो का किरदार निभाया था। नोलन ने रॉयल शेक्सपियर कंपनी थियेटर के साथ भी काम किया। नोलन के स्टेज पेरफॉर्मेस में बीक्वेस्ट टू द नेशन, टेरर और द वर्ल्ड इज फुल ऑफ मैरिड मेन शामिल हैं। इसके साथ-साथ टीवी सीरीज जनरल हॉस्पिटल और एनिमी एट द डोर थियेटर में भी नोलन नजर आए। ‘द डार्क नाइट राइजेज’ नोलन की सबसे चर्चित फिल्म थी। स्पोर्ट्स (SPORTS) 4. आयुष शेट्टी ने बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप 2026 में सिल्वर जीता 13 अप्रैल को भारत के आयुष शेट्टी ने बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप 2026 मेंस सिंगल में सिल्वर जीता। पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के निंगबो में खेले गए फाइनल में आयुष वर्ल्ड चैंपियन चीनी प्लेयर शी युकी से हारे। आयुष मेंस सिंगल में सिल्वर जीतने वाले भारत के पहले और 61 साल में मेडल जीतने वाले दूसरे प्लेयर हैं। बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में आयुष से पहले दिनेश खन्ना ने 1965 में गोल्ड जीता था। दिनेश खन्ना बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाले एकमात्र भारतीय हैं। आयुष ने 8 साल की उम्र में बेडमिंटन की ट्रेनिंग लेना शुरू की थी। आयुष ने 2023 में BWF वर्ल्ड जूनियर चैम्पियनशिप में ब्रॉन्ज जीता था। आयुष ने 2025 में BWF वर्ल्ड टूर टाइटल में US ओपन सुपर 300 जीता। 2025 में आयुष वर्ल्ड रैंकिंग टॉप 30 में शामिल हुए। 20 साल के आयुष बैडमिंटन वर्ल्ड रैंकिंग में 25वें नंबर पर हैं। मिसलीनियस (MISCELLANEOUS) 5. विदेश सचिव विक्रम मिस्री पेरिस और बर्लिन की यात्रा पर 12 अप्रैल को विदेश सचिव विक्रम मिस्री पेरिस और बर्लिन की आधिकारिक यात्रा पर हैं। ये यात्रा 2 दिन की होगी। विक्रम मिस्री, फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के महासचिव मार्टिन ब्रिएन्स के साथ भारत-फ्रांस फॉरेंन ऑफिस कंसल्टेशन की सह-अध्यक्षता करेंगे। दोनों देशों के प्रमुख इसमें फॉरेन अफेयर्स, सिविल न्यूक्लियर एनर्जी, स्पेस सायबर एंड डिजिटल सिक्युरिटी, आर्टिफिशियल इनोवेशन पर बात करेंगे। दोनों देशों के प्रमुख इस बैठक में ग्लोबल और रीजनल डेवलपमेंट पर भी बात करेंगे। बर्लिन में विक्रम, जर्मन फॉरेन ऑफिस के स्टेट सेक्रेटरी डॉ गेजा एंड्रियास वॉन गेयर के साथ भारत-जर्मनी फॉरेंन ऑफिस कंसल्टेशन की सह-अध्यक्षता करेंगे। दोनों देशों के प्रमुख बिजनेस और इंवेस्टमेंट, डिफेंस एंड सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और एजुकेशन पर बात
Khabar Hatke- China AI Son | UP Youth Hookah

चीन में एक बूढ़ी मां के लिए उसके मृतक बेटे का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वर्जन तैयार किया गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश में एक युवक का जलती चिता से हुक्का सुलगाने का वीडियो वायरल हो रहा है। उधर, वियतनाम में गोबर का सूप लोगों का फेवरेट बन गया है। . आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…
Sarcopenia Symptoms; Muscle Weakness Prevention Tips

Hindi News Lifestyle Sarcopenia Symptoms; Muscle Weakness Prevention Tips | National Library Of Medicine Research 16 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक फर्ज करिए, आपकी उम्र 35 साल है। सीढ़ियां चढ़ते वक्त अब पहले जैसी फुर्ती नहीं रही। थोड़ा सा वजन उठाते ही सांस फूलने लगती है। ये बदलाव शरीर के अंदर चल रही एक साइलेंट समस्या ‘सार्कोपेनिया’ का संकेत हो सकता है। आमतौर पर ये समस्या बूढ़े लोगों को होती है, लेकिन सिडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण 30-40 की उम्र से ही ये शुरु हो सकती है। ऐसे मामलों में यह समस्या बुढ़ापे तक गंभीर हो जाती है। साल 2024 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश की एक स्टडी के मुताबिक, भारत में 35 से 70 साल के लगभग 28% लोग सार्कोपेनिया से पीड़ित हैं। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में जानेंगे कि- सार्कोपेनिया क्या है? इसके शुरुआती संकेत क्या हैं? इससे बचाव के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करें? सवाल- सार्कोपेनिया क्या है? जवाब- सार्कोपेनिया एक मेडिकल कंडीशन है, जिसमें– उम्र बढ़ने के साथ मसल मास (बॉडी में मौजूद मसल्स) घटने लगता है। मांसपेशियों की ताकत कम होेने लगती है। चलने-फिरने में परेशानी होती है। रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भी भारी लगने लगते हैं। आमतौर पर ये समस्या बुजुर्गों को ज्यादा होती है। सवाल- सार्कोपेनिया क्यों होता है? जवाब- सार्कोपेनिया उम्र के साथ शरीर में होने वाले कई बदलावों का नतीजा है। इसके लिए शरीर में होने वाले ये बदलाव जिम्मेदार होते हैं- नर्व सेल्स कम होने लगती हैं। इससे मसल्स को सही सिग्नल नहीं मिल पाते हैं। ग्रोथ हॉर्मोन का लेवल घटता है। टेस्टोस्टेरोन और IGF-1 हॉर्मोन प्रभावित होते हैं। टेस्टोस्टेरोन हाॅर्मोन शरीर में मसल्स, ताकत, एनर्जी और सेक्स ड्राइव को कंट्रोल करता है। IGF-1 हाॅर्मोन शरीर में ग्रोथ, मसल्स बनने और सेल रिपेयर के लिए जिम्मेदार है। शरीर भाेजन से मिलने वाले प्रोटीन को मसल्स बनाने और उसे रिपेयर करने में पहले जितना प्रभावी तरीके से उपयोग नहीं कर पाता है। क्रॉनिक बीमारियों के कारण शरीर में इंफ्लेमेशन बढ़ता है। आमतौर पर मसल्स उम्र के साथ घटती हैं, लेकिन सार्कोपेनिया में यह रफ्तार ज्यादा तेज हो जाती है। सवाल- सार्कोपेनिया के लक्षण क्या हैं? जवाब- इसका असर व्यक्ति डेली लाइफ और कामकाज पर पड़ता है। इसके कारण चलने-फिरने में परेशानी होती है, बैलेंस बिगड़ने लगता है। ग्राफिक में इसके सभी लक्षण देखिए- सवाल- सार्कोपेनिया शरीर को किस तरह प्रभावित करता है? जवाब- सार्कोपेनिया का असर सिर्फ मसल्स तक सीमित नहीं रहता है। इसका असर शरीर की ताकत, बैलेंस और डेली लाइफ पर भी पड़ता है। डेली लाइफ पर असर- शरीर की ताकत कम हो जाती है। जल्दी थकान महसूस होती है। चलने की गति धीमी हो जाती है। बैलेंस बिगड़ने लगता है। गिरने और चोट लगने का खतरा बढ़ता है। सीढ़ियां चढ़ना मुश्किल होता है। वजन उठाने में दिक्कत होती है। लंबे समय तक खड़े रहना कठिन हो जाता है। छोटे-छोटे काम भी भारी लगने लगते हैं। हेल्थ पर असर- हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। फ्रैक्चर का रिस्क बढ़ता है। मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है। मोटापा तेजी से बढ़ सकता है। गंभीर मामलों में व्यक्ति को दूसरों पर निर्भर होना पड़ सकता है। सवाल- सार्कोपेनिया कैसे डायग्नोज होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझते हैं- आमतौर पर डॉक्टर इसकी डायग्नोसिस फिजिकल टेस्ट और लक्षणों के आधार पर करते हैं। इसमें पेशेंट से उसकी डेली एक्टिविटी और कमजोरी से जुड़े सवाल पूछे जाते हैैं। सेल्फ-रिपोर्टेड क्वेश्चनायर से मांसपेशियों की ताकत का आकलन किया जाता है। अगर इस शुरुआती जांच के सेल्फ एसेसमेंट में स्कोर ज्यादा आता है, तो आगे के टेस्ट किए जाते हैं। सवाल- सार्कोपेनिया के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं? जवाब- सार्कोपेनिया अचानक होने वाली बीमारी नहीं है। इसके लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं। कुछ खराब आदतें और हेल्थ कंडीशंस इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं। ग्राफिक में इसके प्रमुख रिस्क फैक्टर्स देखिए- सवाल- किन लोगों को सार्कोपेनिया का रिस्क ज्यादा है? जवाब- यह समस्या किसी भी वयस्क को हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों को इसका जोखिम ज्यादा होता है। ग्राफिक से समझते हैं- सवाल- क्या महिलाओं में मेनोपॉज के बाद सार्कोपेनिया का रिस्क बढ़ जाता है? जवाब- हां, मेनोपॉज के बाद हॉर्मोनल बदलाव के कारण इसका रिस्क बढ़ जाता है। पॉइंटर्स से इसके सभी कारण समझते हैं- मेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन तेजी से घटता है। यह हॉर्मोन मसल्स की ताकत और रिकवरी के लिए जरूरी होता है। इसकी कमी से मसल्स तेजी से ब्रेक होने लगती हैं। नए मसल्स बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, महिलाओं में सार्कोपेनिया की दर- प्री-मेनोपॉज में 5.5% होती है। पोस्ट-मेनोपॉज में ये बढ़कर 7.43% हो जाती है। लेट पोस्ट-मेनोपॉज में जोखिम इससे भी ज्यादा बढ़ जाता है। सवाल- क्या डाइट से सार्कोपेनिया के रिस्क को कम किया जा सकता है? जवाब- हां, हेल्दी और संतुलित डाइट (आहार) की मदद से सार्कोपेनिया का रिस्क काफी हद तक कम किया जा सकता है। ‘जर्नल ऑफ फूड बायोकेमेस्ट्री’ के मुताबिक, बैलेंस्ड डाइट मांसपेशियों को हेल्दी बनाए रखने में मदद करती है। जरूरी न्यूट्रिएंट्स उनकी कार्यक्षमता सुधारने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ग्राफिक में देखिए कि हेल्दी मसल्स के लिए क्या खाना चाहिए- सवाल- सार्कोपेनिया से कैसे बचें? जवाब- सार्कोपेनिया से बचाव के लिए नियमित एक्सरसाइज और हेल्दी डाइट का कॉम्बिनेशन फायदेमंद माना जाता है। ग्राफिक में देखिए सार्कोपेनिया से बचाव के टिप्स- समय पर पहचान और लाइफस्टाइल में जरूरी बदलावों से मसल्स की कमजोरी को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है। उम्र बढ़ना तय है, लेकिन मसल्स को मजबूत बनाए रखना काफी हद तक हमारी लाइफस्टाइल चॉइस पर निर्भर करता है। …………………………………. ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- हर रात सिर्फ 11 मिनट ज्यादा सोएं:10% घटेगा हार्ट अटैक का रिस्क, स्टडी में खुलासा, हेल्दी हार्ट के गोल्डन रूल्स मार्च 2026 में ‘यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी’ में एक स्टडी पब्लिश हुई। इसके मुताबिक, रोज 11 मिनट ज्यादा नींद और 5 मिनट एक्स्ट्रा एक्सरसाइज से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम 10% तक कम हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Asha Bhosle Passes Away at 92

18 मिनट पहले कॉपी लिंक आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली जिले में हुआ था। सिंगर आशा भोसले का आज 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनका रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया था। वे 92 साल की थीं। आशा को कई मेडिकल समस्याएं होने के चलते शनिवार रात अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मल्टी-ऑर्गन फेल्योर (शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था) के कारण डॉक्टर उन्हें नहीं बचा सके। आशा भोसले ने 82 साल के सिंगिंग करियर में 9 फिल्फमेयर समेत 100 से अधिक अवॉर्ड जीते। उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित थीं। इसलिए उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने रविवार देर शाम आशा भोसले के घर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। 10 साल की उम्र में गाया पहला गाना आशा भोसले क्लासिकल सिंगर दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। जब वो सिर्फ 9 साल की थीं तब उनके पिता का निधन हो गया था। इस कारण लता की तरह आशा को भी कम उम्र में ही सिंगिंग की शुरुआत करनी पड़ी। आशा ने पहला गाना 10 साल की उम्र में गाया था। आशा भोसले ने अपने करियर में 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए। उनके गाने ‘इन आंखों की मस्ती’, ‘दम मारो दम’, ‘पिया तू अब तो आजा’ और ‘चुरा लिया है तुमने’ आज भी लोकप्रिय हैं। पीएम मोदी समेत कई लोगों ने दुख जताया आशा भोसले के निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी, शाहरुख खान, हेमा मालिनी समेत कई लोगों ने दुख जताया। नरेंद्र मोदी ने कहा, भारत की सबसे प्रतिष्ठित और बहुमुखी आवाजों में से एक आशा भोसले जी के निधन से मैं बेहद दुखी हूं।उनका असाधारण संगीत सफर, जो दशकों तक चला, हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करता रहा और दुनिया भर के अनगिनत दिलों को छू गया। चाहे उनकी भावपूर्ण धुनें हों या जीवंत रचनाएं, उनकी आवाज में एक कालातीत चमक थी।मैं उनके साथ हुई मुलाकातों को हमेशा संजोकर रखूंगा। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के साथ हैं। वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और उनके गीत हमेशा लोगों के जीवन में गूंजते रहेंगे। शाहरुख खान ने कहा, आशा ताई के निधन की खबर बेहद दुखद है। उनकी आवाज भारतीय सिनेमा के स्तंभों में से एक रही है और सदियों तक दुनिया भर में गूंजती रहेगी। वह ऐसी प्रतिभा थीं, जो समय से परे है। उन्होंने हमेशा मुझ पर अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखा, मैं उन्हें बहुत मिस करूंगा। रेस्ट इन पीस आशा ताई। लव यू। आशा भोसले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… नहीं रहीं सुरों की मल्लिका आशा भोसले:गरीबी में बहन लता के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, कभी बीच रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाला गया स्कूल जाते हुए महज दो दिन ही हुए थे कि मास्टरजी ने चोरी पकड़ ली। उन्होंने दोनों को क्लासरूम से बाहर कर दिया और कहा कि एक फीस में एक ही बच्चा स्कूल आ सकता है। दोनों घर लौट गए। पूरी खबर यहां पढ़ें… इंदौर में बीता आशा भोसले का बचपन:सराफा की गुलाब जाबुन और रबड़ी से था खास लगाव; सीहोर के शरबती गेहूं की रोटियां थीं पसंद आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। रविवार दोपहर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। शनिवार शाम उन्हें यहां भर्ती कराया गया था। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Calcium Carbide Ripening Fruits Health Risk; Chemical Mango Seized

हाल ही में ‘हैदराबाद फूड एडल्टरेशन सर्विलांस टीम’ (H-FAST) ने केमिकल से पके फलों की बिक्री के खिलाफ अभियान चलाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 200 किलो केमिकल से पके आम सीज किए गए। इन्हें पकाने के लिए ‘कैल्शियम कार्बाइड’ यूज किया गया था। . कैल्शियम कार्बाइड से पके आम खाने से कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। ऐसे में बाजार से आम खरीदते समय सावधानी बरतनी जरूरी है। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज केमिकल से पके आम के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे- इससे क्या हेल्थ रिस्क हो सकते हैं? केमिकल से पके आम कैसे पहचानें? एक्सपर्ट: डॉ. उमेश कुमार, फूड एनालिस्ट, फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, उत्तर प्रदेश डॉ. नरेंद्र कुमार सिंगला, प्रिंसिपल कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- कैल्शियम कार्बाइड क्या है? इससे आम कैसे पकाए जाते हैं? जवाब- ये एक इंडस्ट्रियल केमिकल है, जिसका इस्तेमाल गैस ‘वेल्डिंग’ के काम में होता है। कैल्शियम कार्बाइड नमी के संपर्क में आते ही एक गैस बनाता है, जिसे एसीटिलीन कहते हैं। यह गैस प्राकृतिक रूप से फल पकाने वाली गैस (एथिलीन) की तरह काम करती है, इसलिए फल जल्दी पक जाते हैं। व्यापारी ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इसका यूज करते हैं। कार्बाइड से आम कैसे पकाया जाता है? कच्चे आम को बॉक्स में बंद कमरे में रखा जाता है। बीच-बीच में कैल्शियम कार्बाइड के छोटे टुकड़े/पाउडर के पैकेट रखे जाते हैं। केमिकल पर हल्का पानी डाला जाता है। इसके रिएक्शन से एसीटिलीन गैस निकलती है। यह फल पकाने वाली गैस (एथिलीन) की तरह काम करती है। इससे 1–2 दिन में ही आम पक जाते हैं। सवाल- कार्बाइड से पके आम और पेड़ पर नेचुरल तरीके से पके आम में क्या फर्क होता है? जवाब- कार्बाइड से पके आम और नेचुरली पके आम में स्वाद, न्यूट्रिशन और क्वालिटी का फर्क होता है। इसे ग्राफिक से समझिए- सवाल- क्या कार्बाइड से पका आम खाना सेफ है? जवाब- नहीं, कार्बाइड से पका आम खाना सेफ नहीं है। इसमें आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे टॉक्सिन्स हो सकते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। सवाल- क्या फल को अच्छे से धोकर, छिलका उतारकर खाना सेफ है? जवाब- नहीं, सिर्फ धोने और छिलका उतारने से कार्बाइड का असर पूरी तरह खत्म नहीं होता है। धोने और छीलने से बाहरी केमिकल कम हो सकते हैं, लेकिन आम पूरी तरह सेफ नहीं होता है। कैल्शियम कार्बाइड से निकलने वाली एसीटिलीन गैस आम के गूदे (पल्प) को भी प्रभावित करती है। ऐसे में इसे खाने से टॉक्सिन्स शरीर के अंदर पहुंच सकते हैं। इसके कई हेल्थ रिस्क हो सकते हैं। सवाल- कार्बाइड से पका आम खाने से सेहत को क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- कुछ मामलों में असर तुरंत दिखाई देता है। कुछ में यह लंबे समय में सेहत को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इसके सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- कार्बाइड फलों के जरिए शरीर में कैसे प्रवेश करता है और बॉडी को धीरे-धीरे कैसे डैमेज करता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- कार्बाइड शरीर में कैसे पहुंचता है? फल धोने के बाद भी सतह पर कुछ केमिकल रह जाते हैं। ये खाने के साथ पेट में जा सकते हैं। कार्बाइड से निकलने वाली एसीटिलीन गैस और आर्सेनिक, फॉस्फोरस जैसे टॉक्सिन्स सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचते हैं। केमिकल का असर फल के गूदे में भी होता है। खाने पर यह सीधे ब्लडस्ट्रीम में पहुंच जाता है। यह सेहत को कैसे प्रभावित करता है? डाइजेस्टिव सिस्टम को इरिटेट करता है। इससे एसिडिटी, गैस, अल्सर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। टॉक्सिन्स खून के जरिए पूरे शरीर में फैलते हैं। यह धीरे-धीरे लिवर, किडनी, नर्व्स और सेल्स को नुकसान पहुंचाते हैं। लिवर की कार्यक्षमता घटती है। टॉक्सिन्स शरीर में फ्री रेडिकल्स बढ़ाते हैं। इससे सेल्स डैमेज होते हैं। लॉन्ग टर्म में कैंसर का रिस्क बढ़ सकता है। धीरे-धीरे असर क्यों दिखता है? रोज थोड़ा-थोड़ा एक्सपोजर होता है। टॉक्सिन्स शरीर में जमा होते जाते हैं। शुरुआत में हल्के लक्षण दिखते हैं। लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। सवाल- आम खरीदते हुए कैसे पहचानें कि ये नेचुरली पका है या केमिकल से पकाया गया है? जवाब- इसकी पहचान रंग, खुशबू, टेक्सचर और स्मेल से की जा सकती है। सभी तरीके ग्राफिक में देखिए- सवाल- बाजार से खरीदा आम खाने से पहले क्या सावधानी बरतें? जवाब- बाजार से खरीदा आम खाने से पहले सावधानी जरूरी है, ताकि गंदगी या केमिकल का असर कम हो सके। सभी सावधानियां ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या आम को बिना केमिकल के भी पका सकते हैं? जवाब- हां, घर पर नेचुरल तरीके से आम पकाया जा सकता है। सभी तरीके पॉइंटर्स में देखिए- अखबार/पेपर बैग में रखकर कच्चे आम को अखबार/पेपर बैग में लपेट दें। कमरे के तापमान पर 5 से 7 दिन रखें। आम नेचुरल एथिलीन गैस छोड़ता है, जिससे धीरे-धीरे पकता है। घास या भूसे (हस्क) में दबाकर आम को सूखी घास/भूसे में दबाकर 5 से 7 दिन रखें। गर्मी से समान रूप से पकते हैं। चावल के डिब्बे में रखकर आम को चावल से भरे कंटेनर में 5 से 7 दिन रखें। गर्माहट से पकने की प्रक्रिया तेज होती है। केला या सेब के साथ रखकर आम के साथ पका हुआ केला या सेब 2-3 दिन तक रखें। यह नेचुरल एथिलीन गैस छोड़ते हैं। इससे पकने की प्रक्रिया तेज होती है। कपड़े में लपेटकर आम को सूती कपड़े में लपेटकर किसी गर्म जगह पर रखें। यह नमी और गर्माहट बनाए रखता है। इससे आम करीब एक हफ्ते में पक जाता है। कार्डबोर्ड बॉक्स में रखकर आम को ढीले-ढाले तरीके से बॉक्स में रखें और ऊपर से ढक दें। अंदर की गर्मी से पकने में मदद मिलती है। नेचुरल तरीके से आम पकाने में क्या गलतियां न करें? फ्रिज में रखकर पकाने की कोशिश न करें। धूप में सीधे न रखें। खराब हो सकता है। कार्बाइड का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। क्यों बेहतर है नेचुरल पकाना? स्वाद ज्यादा मीठा और असली होता है। सभी पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित होता है। नेचुरल तरीके से पका आम सबसे स्वादिष्ट और हेल्दी होता है। थोड़ी देर ज्यादा लगती है, लेकिन सेहत के लिए यही सही है।
Asha Bhosle Passes Away | Mumbai Singer World Record Career

15 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय संगीत जगत की सबसे वर्सेटाइल और दिग्गज सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। आशा जी बीते 70 सालों से अधिक समय से हिंदी सिनेमा का अभिन्न हिस्सा थीं और शनिवार रात उन्हें चेस्ट इन्फेक्शन के चलते अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। 10 साल की उम्र में अपना पहला गाना गाने वाली आशा का सिंगिंग करियर 82 साल का रहा, जिसमें उन्होंने 12 हजार से ज्यादा गाने गाकर अपना नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज कराया। शास्त्रीय संगीत से लेकर कैबरे, पॉप, जैज और गजल तक, हर विधा में उन्होंने अपनी महारत साबित की। आशा भोसले ने 9 फिल्मफेयर जीते हैं। इनमें 7 बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर अवॉर्ड शामिल हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, आशा को 100 से ज्यादा प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स मिले। आशा को कुल 18 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया। आशा का आखिरी गाना 2026 में रिलीज हुआ। पहले पढ़िए आशा जी के जीवन से जुड़े कुछ अनोखे किस्से… जब शाहरुख ने उठाया आशा जी का झूठा कप साल 2023 के क्रिकेट वर्ल्ड कप फाइनल के दौरान शाहरुख, आशा भोसले के साथ बैठे थे। जब आशा जी ने चाय पी ली, तो शाहरुख ने बड़े सम्मान के साथ उनके हाथ से खाली कप लिया और खुद उठाकर दूसरी तरफ रखने चले गए। आशा जी और उनकी पोती जनाई ने उन्हें मना भी किया, लेकिन किंग खान ने अपनी सीट से उठकर यह काम किया। सोशल मीडिया पर यह वीडियो उनके निधन के बाद दोबारा वायरल हो रहा है। रफी साहब से लगी 500 की शर्त आशा भोसले ने एक बार बताया था कि ‘आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा’ गाने को लेकर उन्होंने मोहम्मद रफी से 500-500 रुपए की शर्त लगाई थी कि दोनों में से कौन बेहतर गाएगा। यह शर्त आशा जी ने जीती थी। इसी गाने के रियाज को लेकर उन्होंने मजेदार किस्सा सुनाया था कि वे इस गाने का इतना अभ्यास कर रही थीं कि उनके ड्राइवर को लगा उन्हें सांस लेने की कोई दिक्कत हो रही है। सोनू निगम ने धोए थे पैर सिंगर सोनू निगम ने आशा जी के निधन पर यादगार तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वे आशा भोसले के पैर पानी से धोते हुए नजर आ रहे हैं। फोटो में तो सोनू खुशी-खुशी आशा जी के पैरों को पानी से धो रहे हैं। इसमें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी बैठे नजर आते हैं। वहीं दूसरी फोटो में वो स्टेज पर आशा भोसले के पांव को छू रहे हैं। रोते हुए रिकॉर्ड किया ‘अब के बरस भेज भैया’ फिल्म ‘बंदिनी’ का गाना ‘अब के बरस भेज भैया’ औरतों के दर्द को बयां करता था। आशा जी ने बताया था कि इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान उन्हें अपने भाई की इतनी याद आई कि वे रो पड़ी थीं। उन्होंने रोते हुए ही इस गाने को सिर्फ एक टेक में रिकॉर्ड कर दिया था। वहीं, उनके मशहूर गाने ‘दम मारो दम’ को रेडियो और टीवी पर बैन कर दिया गया था, लेकिन इसी गाने के लिए उन्हें बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिला। लता दीदी के साथ प्रेशर और दूध-मलाई का शौक आशा जी बचपन में खेल-कूद और खाने-पीने की शौकीन थीं, खासकर दूध और मलाई उनकी कमजोरी थी। गायिकी के दौरान अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ उनके रिश्ते खास थे। उन्होंने बताया था कि जब वे दीदी के साथ ‘मन क्यों बहका’ गाना गाती थीं, तो एक-दूसरे की नजरों को देखकर लाइन उठाती थीं। उन्हें हमेशा लगता था कि दीदी के सामने उनकी गायिकी कम न पड़े। अब पढ़िए जन्म से आखिरी गाने तक की कहानी… सांगली में जन्म और गरीबी का संघर्ष 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मीं आशा भोसले का बचपन बेहद तंगहाली में बीता। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक रंगमंच कलाकार और शास्त्रीय गायक थे। घर में संगीत का माहौल तो था, लेकिन आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। गरीबी का आलम यह था कि फीस न होने के चलते उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। बचपन का एक भावुक किस्सा है कि बड़ी बहन लता मंगेशकर जब स्कूल जाती थीं, तो वे आशा को चोरी-छिपे अपने साथ ले जाकर क्लास में बैठा लेती थीं। मास्टरजी से छिपकर दो दिन तो पढ़ाई चली, लेकिन तीसरे दिन पकड़ी गईं। आशा भोसले की 3 बहनें और एक भाई था। मास्टरजी ने साफ कह दिया कि एक फीस में एक ही बच्चा पढ़ सकता है और दोनों को बाहर कर दिया।उस दिन लता ने फैसला किया कि वह खुद नहीं पढ़ेंगी बल्कि छोटी बहन को पढ़ाएंगी। उन्होंने अपना नाम कटवाकर आशा का एडमिशन कराया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जब आशा महज 9 साल की थीं (1942), तब उनके पिता का निधन हो गया। परिवार पर अचानक आर्थिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा। तब बड़ी बहन लता ने जिम्मेदारी संभाली और मंगेशकर परिवार पुणे से मुंबई आकर बस गया। परिवार को सहारा देने के लिए लता और आशा दोनों ने ही कम उम्र में फिल्मों में गाना और छोटी भूमिकाएं करना शुरू कर दिया। करियर की शुरुआत और 1947 में रिजेक्शन आशा ने अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत 1943 में मराठी फिल्म ‘माझा बाळ’ के गाने ‘चला चला नव बाड़ा’ से की थी। इसके बाद 15 साल की उम्र में उन्हें 1948 में हिंदी फिल्म ‘चुनरिया’ का गाना ‘सावन आया’ मिला। उस दौर में नूर जहां, शमशाद बेगम और गीता दत्त जैसी बड़ी गायिकाओं का दबदबा था। आशा को केवल वही गाने मिलते थे जिन्हें बड़ी सिंगर्स या तो छोड़ देती थीं या उनकी फीस फिल्ममेकर्स नहीं दे पाते थे। आशा भोसले और किशोर कुमार। इसी संघर्ष के दौरान 1947 में आशा भोसले के साथ एक ऐसी घटना घटी जिसने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। वे किशोर कुमार के साथ ‘फेमस स्टूडियो’ में फिल्म ‘जान पहचान’ के लिए गाना रिकॉर्ड करने गई थीं। संगीतकार खेमचंद प्रकाश वहां मौजूद थे। जैसे ही आशा और किशोर दा ने माइक के सामने गाना शुरू किया, रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने म्यूजिक डायरेक्टर से बंगाली में कहा- “इन दोनों
Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos and More From Dainik Bhaskar

Hindi News National Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos And More From Dainik Bhaskar 2 मिनट पहले कॉपी लिंक ओडिशा गृह विभाग में अतिरिक्त सचिव आईएएस आराधना दास पर एक दिव्यांग व्यक्ति ने 95 लाख रुपए की धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि दास ने कटक में सीडीए में जमीन दिलाने के नाम पर पैसे लिए, लेकिन जमीन नहीं दिलाई। यह मामला सीडीए पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। पीड़ित कमल कुमार भावसिंका के मुताबिक, उनकी पत्नी ने आराधना दास के खाते में भुगतान किया था। आज की अन्य बड़ी खबरें… दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ दुर्व्यवहार से एससी-एसटी एक्ट नहीं लगेगा, डीयू प्रोफेसर के खिलाफ केस रद्द दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि केवल दुर्व्यवहार या विवाद के आधार पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति (एससी-एसटी) अत्याचार निवारण अधिनियम लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की एक महिला प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि इस कानून के तहत अपराध तभी बनता है, जब जाति के आधार पर अपमान करने की स्पष्ट मंशा साबित हो। अगस्त 2021 में लक्ष्मीबाई कॉलेज की दो एसोसिएट प्रोफेसरों के बीच विभागीय बैठक में दस्तावेज पर हस्ताक्षर को लेकर विवाद हुआ, जो कथित हाथापाई तक पहुंच गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया। कोर्ट ने पाया कि शुरुआती शिकायत में जातिसूचक टिप्पणी का जिक्र नहीं था और बाद में जोड़े गए आरोप भी स्पष्ट नहीं थे। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द कर दी। गुजरात में एक ही प्रत्याशी ने तीन पार्टियों भाजपा, कांग्रेस और AAP से पर्चा भरा गुजरात के दाहोद जिले की पिपेरो जिला पंचायत सीट पर पंचायत चुनाव से पहले अनोखा मामला सामने आया है। यहां भरत सिंह वाखला नाम के उम्मीदवार ने एक साथ भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) की ओर से नामांकन दाखिल कर दिया है। नियमों के मुताबिक किसी भी उम्मीदवार को पार्टी का आधिकारिक प्रत्याशी तभी माना जाता है, जब वह पार्टी की ओर से जारी अधिकृत पत्र तय समय सीमा के भीतर जमा कर दे। नामांकन वापसी और अधिकृत पत्र जमा करने की आखिरी तारीख 15 अप्रैल है। घर में राइफल चलने से 22 साल की महिला की मौत, युवक गिरफ्तार गोवा के कुशावती जिले के संगुएम गांव में रविवार को एक घर में दोस्तों की बैठक के दौरान राइफल से गोली चलने से 22 साल की महिला की मौत हो गई। पुलिस ने मामले में 22 साल के युवक श्वेत गावड़े को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर राइफल निकालकर तन्वी घाडी पर तान दी और मजाक में पूछा कि क्या गोली चलानी चाहिए। इसके बाद उसने लापरवाही से ट्रिगर दबा दिया। गोली तन्वी की गर्दन में लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि राइफल घर में कैसे आई और क्या वह लाइसेंसी थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | dk shivakumar

Hindi News National Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | Dk Shivakumar | Siddaramaiah बेंगलुरु/नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक कर्नाटक कांग्रेस में कैबिनेट फेरबदल की मांग कर रहे 40 सीनियर विधायकों में 30 विधायक रविवार को दिल्ली पहुंचे। यहां वे पार्टी हाईकमान से मिलकर मंत्रिमंडल में फेरबदल और नए चेहरों को मौका देने की मांग करेंगे। तीन से ज्यादा बार विधायक बन चुके करीब 40 विधायकों की मांग है कि मौजूदा मंत्रियों को लगभग तीन साल का समय मिल चुका है, इसलिए अब सीनियर विधायकों को मौका दिया जाए। दूसरी ओर पहली बार चुने गए विधायकों ने भी दबाव बढ़ाते हुए मंत्री बनाने की मांग दोहराई है। कर्नाटक कांग्रेस के विधायक अशोक पट्टन ने कहा कि पोर्टफोलियो बांटते समय रणदीप सुरजेवाला ने भरोसा दिया था कि सभी को मौका मिलेगा, लेकिन वही लोग बार-बार चौथी बार भी उन्हीं मंत्रालयों में नियुक्त किए जा रहे हैं। विधायक किसी को ब्लैकमेल नहीं कर रहे, बल्कि पार्टी नेतृत्व को सिर्फ उसका पुराना वादा याद दिलाने आए हैं। पहली बार चुने गए 38 MLA ने भी मंत्री पद मांगा कैबिनेट फेरबदल की मांग सिर्फ सीनियर विधायकों तक सीमित नहीं है। पहली बार विधायक बने 38 कांग्रेस MLA भी लामबंद हो गए हैं। इन विधायकों ने हाल ही में पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर मांग की है कि फेरबदल के दौरान उनमें से कम से कम 5 को मंत्री बनाया जाए। मांड्या से पहली बार विधायक बने रविकुमार गौड़ा (रवि गनीगा) ने कहा कि मंत्री बनने की इच्छा हर विधायक की होती है और नए चेहरों को भी मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारी मांग है कि पहली बार चुने गए विधायकों में से कम से कम पांच लोगों को कैबिनेट में शामिल किया जाए। मांग करना गलत नहीं है।” उन्होंने कुछ मौजूदा मंत्रियों के कामकाज पर भी सवाल उठाए और कहा कि कुछ मंत्री न तो उपलब्ध रहते हैं और न ही काम ठीक से हो रहा है। 2 कैबिनेट पद पहले से खाली कर्नाटक में मुख्यमंत्री समेत कुल 34 मंत्रियों की मंजूरी है। फिलहाल दो मंत्री पद पहले से खाली हैं। इनमें एक पद बी नागेंद्र के इस्तीफे के बाद खाली हुआ, जिन पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि एसटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में गबन के आरोप लगे थे। दूसरा पद पार्टी हाईकमान के निर्देश पर केएन राजन्ना को हटाए जाने के बाद खाली हुआ। ऐसे में विधायकों की मांग है कि इन पदों को भरने के साथ व्यापक फेरबदल किया जाए। दिल्ली पहुंचे नेताओं में टीबी जयचंद्र, अशोक पट्टन, एसएन नारायणस्वामी, के. शदाक्षरी, एआर कृष्णमूर्ति, पुट्टारंगा शेट्टी और बेलूर गोपाल कृष्ण समेत कई विधायक शामिल हैं। ये नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला और संभव हो तो राहुल गांधी से भी मुलाकात करेंगे। वरिष्ठ विधायक टीबी जयचंद्र ने कहा कि यह एक नियमित राजनीतिक प्रक्रिया है और उनका मुख्य एजेंडा सिर्फ कैबिनेट फेरबदल है। उन्होंने साफ किया कि नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा उनके एजेंडे में नहीं है। उन्होंने कहा, “सरकार को तीन साल पूरे हो चुके हैं और अब केवल दो साल का कार्यकाल बचा है। ऐसे में वरिष्ठ विधायकों को भी मंत्री बनने का अवसर मिलना चाहिए।” फेरबदल के पीछे नेतृत्व की खींचतान भी कर्नाटक कांग्रेस में यह हलचल ऐसे समय तेज हुई है, जब पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर भी खींचतान जारी है। 2023 में सरकार बनने के समय मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी CM डीके शिवकुमार के बीच कथित पावर-शेयरिंग फॉर्मूले की चर्चा रही थी। अब सरकार अपने कार्यकाल के मध्य चरण में पहुंच रही है, जिसके बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें भी तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में हैं, जबकि शिवकुमार चाहते हैं कि पहले नेतृत्व परिवर्तन पर फैसला हो। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि हाईकमान कैबिनेट फेरबदल को मंजूरी देता है, तो इसका संकेत यह माना जा सकता है कि सिद्धारमैया पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। इससे शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। शिवकुमार ने कहा था- सब मंत्री या मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं इस बीच डिप्टी CM डीके शिवकुमार ने भी गुरुवार को कहा था कि यदि मुख्यमंत्री ने फेरबदल के संकेत दिए हैं तो हर विधायक का मंत्री या मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा था- इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हर कोई कोशिश कर सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
खंडवा में ट्रेन से एलपीजी गैस लीकेज, एक वैगन आइसोलेट:पनवेल से जबलपुर जा रही थी ट्रेन; पीथमपुर से बुलाए एक्सपर्ट

मध्यप्रदेश के खंडवा में रविवार देर रात एक होने से हादसा टल गया। खंडवा रेलवे स्टेशन के आउटर पर एक मालगाड़ी ट्रेन से एलपीजी गैस लीकेज हो गई हैं। देखिए तस्वीरें…