अमिताभ बच्चन ने यहीं देखी पहली फिल्म:लता मंगेशकर का पहला मंचीय प्रदर्शन; रॉयल ओपेरा हाउस के दोबारा खुलने के 10 साल पूरे

अमिताभ बच्चन, लता मंगेशकर और पृथ्वीराज कपूर जैसे दिग्गजों की यादों से जुड़ा मुंबई का ऐतिहासिक रॉयल ओपेरा हाउस एक बार फिर चर्चा में है। 23 अक्टूबर को दोबारा खुलने के 10 साल पूरे होने पर यहां विशेष संगीत और इमर्सिव प्रोजेक्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर गोंडल के महाराजा हिमांशु सिंह और ओपेरा हाउस प्रबंधन से जुड़े आशीष दोषी ने इसकी विरासत, पुनरुद्धार और सांस्कृतिक सफर के बारे में बताया। बदहाली के कारण बंद पड़ा यह थिएटर अब मुंबई में कला और संगीत का प्रमुख केंद्र बन चुका है। 1908 में बनी योजना, 1911 में हुआ उद्घाटन रॉयल ओपेरा हाउस की कहानी 1908 में शुरू हुई। मनोरंजन जगत से जुड़े मौरिस बैंडमैन और पारसी कारोबारी जहांगीर फ्रामजी कराका ने मुंबई में भव्य ओपेरा हाउस बनाने की योजना बनाई। इसकी आधारशिला 1909 में रखी गई। ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम ने 1911 में भारत यात्रा के दौरान इसका उद्घाटन किया। इमारत का निर्माण 1916 में पूरा हुआ। यूरोपीय और भारतीय स्थापत्य शैली के मेल से बनी यह इमारत मुंबई की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा बन गई। पृथ्वीराज कपूर करते थे नाटक, ऋषि कपूर ने सुनाई बचपन की याद ओपेरा हाउस का रिश्ता भारतीय सिनेमा और रंगमंच के कई दिग्गजों से रहा है। पृथ्वीराज कपूर यहां नाटक प्रस्तुत करते थे। लता मंगेशकर ने यहां पहला सार्वजनिक मंचीय प्रदर्शन किया था। अमिताभ बच्चन ने 2016 में दोबारा उद्घाटन के दौरान बताया था कि मुंबई आने के बाद उन्होंने पहली बार फिल्म यहीं देखी थी। उनकी कई फिल्में यहां लंबे समय तक चली थीं। फिल्म ‘102 नॉट आउट’ के मीडिया आयोजन में ऋषि कपूर ने बताया था कि बाल कलाकार के रूप में उनका पहला मंचीय प्रदर्शन इसी ओपेरा हाउस में हुआ था। यह इमारत भारतीय सिनेमा और रंगमंच के इतिहास की गवाह भी है। 1952 में गोंडल राजपरिवार ने खरीदा, 1993 में बंद हुआ 1952 में गोंडल के महाराजा विक्रमसिंहजी ने रॉयल ओपेरा हाउस खरीदा। समय के साथ सिनेमा देखने का तरीका बदला और आधुनिक वातानुकूलित सिनेमाघर लोकप्रिय हुए। रखरखाव की चुनौतियों और दर्शकों की बदलती पसंद के चलते यह थिएटर 1993 में बंद हो गया। करीब दो दशक तक इसके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रही। पिता ने लिया पुनरुद्धार का फैसला, 2016 में फिर खुला महाराजा हिमांशु सिंह के मुताबिक, उनके पिता महाराजा ज्योतेंद्रसिंहजी जडेजा ने इस धरोहर को बचाने का फैसला किया। संरक्षण वास्तुकार आभा नारायण लांबा के मार्गदर्शन में इमारत को मूल स्वरूप के करीब लाया गया। पुराने डिजाइन और स्थापत्य विशेषताओं को सहेजते हुए इसमें आधुनिक सुविधाएं, नई सीटें, एयर कंडीशनिंग और बेहतर साउंड सिस्टम जोड़े गए। 2016 में इसे जनता के लिए दोबारा खोल दिया गया। हिमांशु सिंह ने कहा कि इस पहल का मकसद सिर्फ कमाई नहीं, बल्कि मुंबई के लोगों को उनकी ऐतिहासिक धरोहर लौटाना है। उन्होंने पुनरुद्धार में आभा नारायण लांबा के योगदान की सराहना भी की। 10 साल में नाटक से संगीत तक हजारों रंग ओपेरा हाउस प्रबंधन से जुड़े आशीष दोषी ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में यहां नाटक, संगीत, स्टोरीटेलिंग, बच्चों के कार्यक्रम और कॉर्पोरेट आयोजन हुए। वर्षगांठ पर ‘तबला एंड सन्स’ की प्रस्तुति के साथ पूरे थिएटर पर प्रोजेक्शन के जरिए इमर्सिव शो दिखाया गया। दोषी ने गोंडल राजपरिवार के योगदान को मुंबई के लिए उपहार बताया। उन्होंने कहा कि यह मंच विभिन्न विधाओं के कलाकारों के लिए खुला है। 2017 में रॉयल ओपेरा हाउस को सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के लिए यूनेस्को के एशिया-पैसिफिक अवॉर्ड ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया था।
दलेर मेहंदी को नशे में बताकर मंत्री ने किया अपमानित:गौहर खान को थप्पड़ पड़ने से लेकर, सुनील पाल को भगाए जाने तक, जानिए मंच पर हुए ऐसे ही विवाद

18 अक्टूबर को सिंगर दलेह मेहंदी उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में हुए एक मेले में परफॉर्म करने पहुंचे थे। सिंगर रुक-रुक कर परफॉर्म कर रहे थे, तभी उत्तराखंड के हेल्थ मिनिस्टर सुबोध उनियाल मंच पर आए और फटकारते हुए कहा- आप शराब पीकर लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं, गाना भी नहीं गा रहे। आपको मालूम है ना कि एक सिंगर पिट कर गया था यहां से। इतना पिटा था कि उसका बाप भी अब नहीं आ सकता यहां पर। इस सरेआम बेइज्जती पर दलेर मेहंदी कुछ कह नहीं सके और तुरंत गाना शुरू कर दिया। सामने आए वीडियो में दलेर मेहंदी काफी असमंजस में दिखे। तब तो कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ, लेकिन इस बेइज्जती से उनके छोटे भाई मीका सिंह ने कहा, “दलेर जी की जो इमेज उन्होंने खराब की, वह बहुत गलत है। मैं उनको (मंत्री) कभी माफ नहीं करूंगा।” मीका ने बताया कि दलेर मेहंदी की तबीयत खराब थी, इसके बावजूद उन्होंने करीब डेढ़ घंटे तक परफॉर्म किया। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर माफी नहीं मांगी गई, तो कलाकार उत्तराखंड आना छोड़ देंगे। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री दलेर के सपोर्ट में उतर गई। शिल्पा शेट्टी, राजपाल यादव, अनुपम खेर, बादशाह, शान, कपिल शर्मा समेत कई सेलेब्स ने मंत्री के रवैये पर कड़ी निंदा की। उनके भाई मीका ने तो ये भी दावा किया कि दलेर ने जीवन में कभी शराब पी ही नहीं। वहीं, विवाद बढ़ने के बाद मंत्री ने सफाई देते हुए कहा था कि उन्हें जानकारी नहीं थी कि सिंगर की तबीयत खराब है। इस मामले में 22 अक्टूबर को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मीका सिंह से कॉल पर बात कर खेद जताया और बीच-बचाव किया। फिर बयान में धामी ने कहा था- “उस समय मंत्री पर जनता का दबाव रहा होगा, उत्तराखंड कलाकारों की धरती है और यहां सभी का सम्मान होता है।” ये इस तरह का इकलौता मामला नहीं है। इससे पहले भी कई इंडियन और इंटरनेशनल सेलेब्स के साथ मंच पर बुरा सलूक हुआ है। एक्ट्रेस गौहर खान को मंच पर थप्पड़ मारा गया, वहीं सिंगर के चेहरे पर एक सिरफिरा फैन हमला कर चुका है। एक नजर ऐसे ही कुछ मामलों पर- 1. कपड़ों पर आपत्ति होने पर गौहर खान को मंच पर थप्पड़ मारा गया 2014 में गौहर खान शो इंडियाज रॉ स्टार होस्ट कर रही थीं, तभी एक शख्स दौड़ते हुए मंच पर आया और उन्हें जोरदार थप्पड़ मार दिया। टीम ने तुरंत उस आदमी को पकड़ लिया और पुलिस को खबर दी गई। शख्स ने पुलिस बयान में कहा कि गौहर ने छोटे कपड़े पहन रखे थे, इसलिए उसने उन्हें थप्पड़ मारा। उस शख्स के खिलाफ धारा 354, 323 और 506 के तहत शिकायत दर्ज हुई थी। 2. सुनील पाल को मंच से बेइज्जत कर भगाया गया 17 जनवरी 2026 को सुनील पाल इस्कॉन जुहू के एक मुशायरे का हिस्सा बने थे। उन्हें पहले गुलदस्ता देने के लिए मंच पर बुलाया गया, लेकिन जैसे ही वो मंच पर कुछ बोलने के लिए रुके, उन्हें बार-बार नीचे जाने को कहा गया और उनके हाथों से माइक छीन लिया गया। जब सुनील ने विनती कर कहा कि शुक्रिया तो बोलने दीजिए, तो पास खड़े शख्स ने सख्त लहजे में कहा- आप बैठिए जाकर, और माइक छीनकर उन्हें जबरदस्ती मंच से उतार दिया। 3. सिंगर करण औजला पर फेंका गया जूता सिंगर करण औजला लंदन में परफॉर्म कर रहे थे, तभी भीड़ में से एक शख्स ने उन्हें जूता फेंककर मार दिया। करण बेहद नाराज हुए और मंच से ही गालियां देनी शुरू कर दीं। 4. गुरू रंधावा ने फैन को रोका तो पड़ा मुक्का गुरु रंधावा 2019 में वैंकूर के मंच पर परफॉर्म कर रहे थे, तभी एक शख्स बार-बार मंच पर चढ़ने की कोशिश करने लगा। सिक्योरिटी ने उस शख्स को रोक दिया, लेकिन जैसे ही सिंगर कॉन्सर्ट खत्म कर मंच से उतरे, तो उस शख्स ने उनके चेहरे पर मुक्का मारा, जिससे वो जख्मी हो गए। 6. सिंगर के साथ मंच पर शख्स ने की बदसलूकी दिसंबर 2025 में बंगाली सिंगर लग्नजिता चक्रवर्ती ने पश्चिम बंगाल के स्कूल कार्यक्रम में परफॉर्मेंस दी। वो देवी पर आधारित गाना गा रही थीं, तभी एक शख्स अचानक मंच पर चढ़ आया और बदसलूकी करने लगा। सिंगर इस इंसिडेंट से काफी डर गईं। विवाद इतना बढ़ा कि सिंगर ने शिकायत दर्ज करवाई। जॉन अब्राहम को फीमेल फैन ने पहुंचाई चोट, एक्टर ने दिया धक्का 12 फरवरी 2012 को जॉन अब्राहम मंगलुरु (तब मैंगलोर) में एक ज्वेलरी शोरूम का उद्घाटन करने पहुंचे थे। उन्हें देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। इसी दौरान सेल्फी लेने आई एक महिला फैन ने उनका हाथ पकड़कर काट लिया। जॉन डर गए और धक्का देकर उस महिला को पीछे किया। परफॉर्मेंस के बीच सेलेब्स के साथ हुईं ये घटनाएं भी पढ़िए- कनिका कपूर का पकड़ा गया पैर दिसंबर 2025 में मे’गॉन्ग फेस्टिवल में गाते समय एक व्यक्ति अचानक मंच पर पहुंचा और कनिका कपूर के पैर पकड़ लिए। एक्ट्रेस डर गईं, जिसके बाद सिक्योरिटी टीम ने उस शख्स को हटाया। अरिजीत सिंह का हांथ खींचा 2023 में औरंगाबाद के लाइव कॉन्सर्ट के दौरान एक फैन ने हाथ मिलाने के लिए अरिजीत सिंह का हाथ जोर से खींच लिया। इससे उनके हाथ में चोट आई। अरिजीत ने मंच से ही फैन को समझाया कि कलाकारों के साथ इस तरह पेश नहीं आना चाहिए। कैलाश खेर पर फेंकी गई बोतल कर्नाटक में 2023 में परफॉर्मेंस के बीच कैलाश खेर पर बोतल फेंकी गई। पुलिस ने कार्रवाई की और आरोपी को पकड़ा गया। अवा मैक्स को मारा गया मंच पर थप्पड़ अमेरिकन सिंगर अवा मैक्स जून 2023 में लॉस एंजिलिस में परफॉर्मेंस दे रही थीं, तभी एक शख्स अचानक मंच पर आ गया। सिंगर समझ पातीं, उससे पहले ही शख्स ने उन्हें जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। इससे सिंगर की आंख में गहरी चोट आई थी। लिल नैस एक्स पर मंच पर फेंका गया सेक्स टॉय अमेरिकन सिंगर लिल नैस एक्स स्वीडन में एक कॉन्सर्ट के लिए पहुंचे थे, तभी दर्शकों में से एक शख्स ने उन पर सेक्स टॉय फेंका था। सिंगर पिंक पर फेंकी गई अस्थियां अमेरिकन सिंगर पिंक
अमिताभ बच्चन ने यहीं देखी पहली फिल्म:लता मंगेशकर का पहला मंचीय प्रदर्शन; रॉयल ओपेरा हाउस के दोबारा खुलने के 10 साल पूरे

अमिताभ बच्चन, लता मंगेशकर और पृथ्वीराज कपूर जैसे दिग्गजों की यादों से जुड़ा मुंबई का ऐतिहासिक रॉयल ओपेरा हाउस एक बार फिर चर्चा में है। 23 अक्टूबर को दोबारा खुलने के 10 साल पूरे होने पर यहां विशेष संगीत और इमर्सिव प्रोजेक्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर गोंडल के महाराजा हिमांशु सिंह और ओपेरा हाउस प्रबंधन से जुड़े आशीष दोषी ने इसकी विरासत, पुनरुद्धार और सांस्कृतिक सफर के बारे में बताया। बदहाली के कारण बंद पड़ा यह थिएटर अब मुंबई में कला और संगीत का प्रमुख केंद्र बन चुका है। 1908 में बनी योजना, 1911 में हुआ उद्घाटन रॉयल ओपेरा हाउस की कहानी 1908 में शुरू हुई। मनोरंजन जगत से जुड़े मौरिस बैंडमैन और पारसी कारोबारी जहांगीर फ्रामजी कराका ने मुंबई में भव्य ओपेरा हाउस बनाने की योजना बनाई। इसकी आधारशिला 1909 में रखी गई। ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम ने 1911 में भारत यात्रा के दौरान इसका उद्घाटन किया। इमारत का निर्माण 1916 में पूरा हुआ। यूरोपीय और भारतीय स्थापत्य शैली के मेल से बनी यह इमारत मुंबई की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा बन गई। पृथ्वीराज कपूर करते थे नाटक, ऋषि कपूर ने सुनाई बचपन की याद ओपेरा हाउस का रिश्ता भारतीय सिनेमा और रंगमंच के कई दिग्गजों से रहा है। पृथ्वीराज कपूर यहां नाटक प्रस्तुत करते थे। लता मंगेशकर ने यहां पहला सार्वजनिक मंचीय प्रदर्शन किया था। अमिताभ बच्चन ने 2016 में दोबारा उद्घाटन के दौरान बताया था कि मुंबई आने के बाद उन्होंने पहली बार फिल्म यहीं देखी थी। उनकी कई फिल्में यहां लंबे समय तक चली थीं। फिल्म ‘102 नॉट आउट’ के मीडिया आयोजन में ऋषि कपूर ने बताया था कि बाल कलाकार के रूप में उनका पहला मंचीय प्रदर्शन इसी ओपेरा हाउस में हुआ था। यह इमारत भारतीय सिनेमा और रंगमंच के इतिहास की गवाह भी है। 1952 में गोंडल राजपरिवार ने खरीदा, 1993 में बंद हुआ 1952 में गोंडल के महाराजा विक्रमसिंहजी ने रॉयल ओपेरा हाउस खरीदा। समय के साथ सिनेमा देखने का तरीका बदला और आधुनिक वातानुकूलित सिनेमाघर लोकप्रिय हुए। रखरखाव की चुनौतियों और दर्शकों की बदलती पसंद के चलते यह थिएटर 1993 में बंद हो गया। करीब दो दशक तक इसके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रही। पिता ने लिया पुनरुद्धार का फैसला, 2016 में फिर खुला महाराजा हिमांशु सिंह के मुताबिक, उनके पिता महाराजा ज्योतेंद्रसिंहजी जडेजा ने इस धरोहर को बचाने का फैसला किया। संरक्षण वास्तुकार आभा नारायण लांबा के मार्गदर्शन में इमारत को मूल स्वरूप के करीब लाया गया। पुराने डिजाइन और स्थापत्य विशेषताओं को सहेजते हुए इसमें आधुनिक सुविधाएं, नई सीटें, एयर कंडीशनिंग और बेहतर साउंड सिस्टम जोड़े गए। 2016 में इसे जनता के लिए दोबारा खोल दिया गया। हिमांशु सिंह ने कहा कि इस पहल का मकसद सिर्फ कमाई नहीं, बल्कि मुंबई के लोगों को उनकी ऐतिहासिक धरोहर लौटाना है। उन्होंने पुनरुद्धार में आभा नारायण लांबा के योगदान की सराहना भी की। 10 साल में नाटक से संगीत तक हजारों रंग ओपेरा हाउस प्रबंधन से जुड़े आशीष दोषी ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में यहां नाटक, संगीत, स्टोरीटेलिंग, बच्चों के कार्यक्रम और कॉर्पोरेट आयोजन हुए। वर्षगांठ पर ‘तबला एंड सन्स’ की प्रस्तुति के साथ पूरे थिएटर पर प्रोजेक्शन के जरिए इमर्सिव शो दिखाया गया। दोषी ने गोंडल राजपरिवार के योगदान को मुंबई के लिए उपहार बताया। उन्होंने कहा कि यह मंच विभिन्न विधाओं के कलाकारों के लिए खुला है। 2017 में रॉयल ओपेरा हाउस को सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के लिए यूनेस्को के एशिया-पैसिफिक अवॉर्ड ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया था।
दलेर मेहंदी को नशे में बताकर मंत्री ने किया अपमानित:गौहर खान को थप्पड़ पड़ने से लेकर, सुनील पाल को भगाए जाने तक, जानिए मंच पर हुए ऐसे ही विवाद

18 अक्टूबर को सिंगर दलेह मेहंदी उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में हुए एक मेले में परफॉर्म करने पहुंचे थे। सिंगर रुक-रुक कर परफॉर्म कर रहे थे, तभी उत्तराखंड के हेल्थ मिनिस्टर सुबोध उनियाल मंच पर आए और फटकारते हुए कहा- आप शराब पीकर लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं, गाना भी नहीं गा रहे। आपको मालूम है ना कि एक सिंगर पिट कर गया था यहां से। इतना पिटा था कि उसका बाप भी अब नहीं आ सकता यहां पर। इस सरेआम बेइज्जती पर दलेर मेहंदी कुछ कह नहीं सके और तुरंत गाना शुरू कर दिया। सामने आए वीडियो में दलेर मेहंदी काफी असमंजस में दिखे। तब तो कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ, लेकिन इस बेइज्जती से उनके छोटे भाई मीका सिंह ने कहा, “दलेर जी की जो इमेज उन्होंने खराब की, वह बहुत गलत है। मैं उनको (मंत्री) कभी माफ नहीं करूंगा।” मीका ने बताया कि दलेर मेहंदी की तबीयत खराब थी, इसके बावजूद उन्होंने करीब डेढ़ घंटे तक परफॉर्म किया। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर माफी नहीं मांगी गई, तो कलाकार उत्तराखंड आना छोड़ देंगे। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री दलेर के सपोर्ट में उतर गई। शिल्पा शेट्टी, राजपाल यादव, अनुपम खेर, बादशाह, शान, कपिल शर्मा समेत कई सेलेब्स ने मंत्री के रवैये पर कड़ी निंदा की। उनके भाई मीका ने तो ये भी दावा किया कि दलेर ने जीवन में कभी शराब पी ही नहीं। वहीं, विवाद बढ़ने के बाद मंत्री ने सफाई देते हुए कहा था कि उन्हें जानकारी नहीं थी कि सिंगर की तबीयत खराब है। इस मामले में 22 अक्टूबर को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मीका सिंह से कॉल पर बात कर खेद जताया और बीच-बचाव किया। फिर बयान में धामी ने कहा था- “उस समय मंत्री पर जनता का दबाव रहा होगा, उत्तराखंड कलाकारों की धरती है और यहां सभी का सम्मान होता है।” ये इस तरह का इकलौता मामला नहीं है। इससे पहले भी कई इंडियन और इंटरनेशनल सेलेब्स के साथ मंच पर बुरा सलूक हुआ है। एक्ट्रेस गौहर खान को मंच पर थप्पड़ मारा गया, वहीं सिंगर के चेहरे पर एक सिरफिरा फैन हमला कर चुका है। एक नजर ऐसे ही कुछ मामलों पर- 1. कपड़ों पर आपत्ति होने पर गौहर खान को मंच पर थप्पड़ मारा गया 2014 में गौहर खान शो इंडियाज रॉ स्टार होस्ट कर रही थीं, तभी एक शख्स दौड़ते हुए मंच पर आया और उन्हें जोरदार थप्पड़ मार दिया। टीम ने तुरंत उस आदमी को पकड़ लिया और पुलिस को खबर दी गई। शख्स ने पुलिस बयान में कहा कि गौहर ने छोटे कपड़े पहन रखे थे, इसलिए उसने उन्हें थप्पड़ मारा। उस शख्स के खिलाफ धारा 354, 323 और 506 के तहत शिकायत दर्ज हुई थी। 2. सुनील पाल को मंच से बेइज्जत कर भगाया गया 17 जनवरी 2026 को सुनील पाल इस्कॉन जुहू के एक मुशायरे का हिस्सा बने थे। उन्हें पहले गुलदस्ता देने के लिए मंच पर बुलाया गया, लेकिन जैसे ही वो मंच पर कुछ बोलने के लिए रुके, उन्हें बार-बार नीचे जाने को कहा गया और उनके हाथों से माइक छीन लिया गया। जब सुनील ने विनती कर कहा कि शुक्रिया तो बोलने दीजिए, तो पास खड़े शख्स ने सख्त लहजे में कहा- आप बैठिए जाकर, और माइक छीनकर उन्हें जबरदस्ती मंच से उतार दिया। 3. सिंगर करण औजला पर फेंका गया जूता सिंगर करण औजला लंदन में परफॉर्म कर रहे थे, तभी भीड़ में से एक शख्स ने उन्हें जूता फेंककर मार दिया। करण बेहद नाराज हुए और मंच से ही गालियां देनी शुरू कर दीं। 4. गुरू रंधावा ने फैन को रोका तो पड़ा मुक्का गुरु रंधावा 2019 में वैंकूर के मंच पर परफॉर्म कर रहे थे, तभी एक शख्स बार-बार मंच पर चढ़ने की कोशिश करने लगा। सिक्योरिटी ने उस शख्स को रोक दिया, लेकिन जैसे ही सिंगर कॉन्सर्ट खत्म कर मंच से उतरे, तो उस शख्स ने उनके चेहरे पर मुक्का मारा, जिससे वो जख्मी हो गए। 6. सिंगर के साथ मंच पर शख्स ने की बदसलूकी दिसंबर 2025 में बंगाली सिंगर लग्नजिता चक्रवर्ती ने पश्चिम बंगाल के स्कूल कार्यक्रम में परफॉर्मेंस दी। वो देवी पर आधारित गाना गा रही थीं, तभी एक शख्स अचानक मंच पर चढ़ आया और बदसलूकी करने लगा। सिंगर इस इंसिडेंट से काफी डर गईं। विवाद इतना बढ़ा कि सिंगर ने शिकायत दर्ज करवाई। जॉन अब्राहम को फीमेल फैन ने पहुंचाई चोट, एक्टर ने दिया धक्का 12 फरवरी 2012 को जॉन अब्राहम मंगलुरु (तब मैंगलोर) में एक ज्वेलरी शोरूम का उद्घाटन करने पहुंचे थे। उन्हें देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। इसी दौरान सेल्फी लेने आई एक महिला फैन ने उनका हाथ पकड़कर काट लिया। जॉन डर गए और धक्का देकर उस महिला को पीछे किया। परफॉर्मेंस के बीच सेलेब्स के साथ हुईं ये घटनाएं भी पढ़िए- कनिका कपूर का पकड़ा गया पैर दिसंबर 2025 में मे’गॉन्ग फेस्टिवल में गाते समय एक व्यक्ति अचानक मंच पर पहुंचा और कनिका कपूर के पैर पकड़ लिए। एक्ट्रेस डर गईं, जिसके बाद सिक्योरिटी टीम ने उस शख्स को हटाया। अरिजीत सिंह का हांथ खींचा 2023 में औरंगाबाद के लाइव कॉन्सर्ट के दौरान एक फैन ने हाथ मिलाने के लिए अरिजीत सिंह का हाथ जोर से खींच लिया। इससे उनके हाथ में चोट आई। अरिजीत ने मंच से ही फैन को समझाया कि कलाकारों के साथ इस तरह पेश नहीं आना चाहिए। कैलाश खेर पर फेंकी गई बोतल कर्नाटक में 2023 में परफॉर्मेंस के बीच कैलाश खेर पर बोतल फेंकी गई। पुलिस ने कार्रवाई की और आरोपी को पकड़ा गया। अवा मैक्स को मारा गया मंच पर थप्पड़ अमेरिकन सिंगर अवा मैक्स जून 2023 में लॉस एंजिलिस में परफॉर्मेंस दे रही थीं, तभी एक शख्स अचानक मंच पर आ गया। सिंगर समझ पातीं, उससे पहले ही शख्स ने उन्हें जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। इससे सिंगर की आंख में गहरी चोट आई थी। लिल नैस एक्स पर मंच पर फेंका गया सेक्स टॉय अमेरिकन सिंगर लिल नैस एक्स स्वीडन में एक कॉन्सर्ट के लिए पहुंचे थे, तभी दर्शकों में से एक शख्स ने उन पर सेक्स टॉय फेंका था। सिंगर पिंक पर फेंकी गई अस्थियां अमेरिकन सिंगर पिंक
जयपुर में छाईं ‘गुलाबी क्वीन’ जैस्मीन सैंडलास:‘केसरिया बालम’ की दी प्रस्तुति; बंधेज ड्रेस में आईं नजर, सिंगर के गानों पर नाची मां

पंजाबी संगीत की दुनिया में ‘गुलाबी क्वीन’ के नाम से मशहूर सिंगर जैस्मीन सैंडलास ने जयपुर में अपनी लाइव परफॉर्मेंस से समां बांध दिया। सिंगर ने फिल्म ‘किक’ का सॉन्ग ‘यार ना मिले’, ‘इश्क दा सूटा’, ‘रात जश्न दी’, ‘बंब जट्ट’, ‘मीठी मीठी’, ‘तरस’, ‘धुरंधर’ टाइटल ट्रैक और ‘शरारत’ जैसे सॉन्ग सुनाए। वहीं कॉन्सर्ट के दौरान ऑडियंस में मौजूद जैस्मीन की मां बेटी को मंच पर परफॉर्म करते देख खुद को थिरकने से रोक नहीं सकीं। जयपुर में प्रस्तुति के दौरान जैस्मीन ने राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ाव दिखाया। उन्होंने पारंपरिक राजस्थानी लोकगीत ‘केसरिया बालम’ को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत किया। वहीं पारंपरिक अंदाज वाले बंधेज ड्रेस में सजी जैस्मीन ने अपने लुक और स्टेज प्रेजेंस से भी ध्यान खींचा। सीतापुरा स्थित जेईसीसी में आयोजित कॉन्सर्ट में जैस्मीन ने शनिवार को अपने सुपरहिट गानों के साथ एल्बम के गीत भी पेश किए। उनकी गाने और डांस से दर्शक शुरू से लेकर आखिरी पलों तक झूमते रहे। जैसे-जैसे उनके लोकप्रिय गानों की धुनें गूंजती गईं। ऑडियंस भी तालियों, हूटिंग और डांस के साथ उनका उत्साह बढ़ाती नजर आईं। इवेंट के फोटोज यहां देखिए… बंधेज परिधान में मंच पर दिखा पंजाबी अंदाज जैस्मीन की परफॉर्मेंस में उनके पहनावे और मंच पर मौजूदगी का भी खास आकर्षण रहा। बंधेज परिधान में नजर आईं सिंगर ने अपने लुक को पंजाबी संगीत की ऊर्जा और अंदाज के साथ पेश किया। गानों के दौरान उनका लगातार डांस करना और दर्शकों को अपने साथ झूमने के लिए प्रेरित करना कॉन्सर्ट की खासियत रहा। जैस्मीन ने अपने लोकप्रिय गीतों को पूरे उत्साह के साथ प्रस्तुत किया। फैन ने भेंट किया लाइव स्केच, जैस्मीन ने लगाया गले कॉन्सर्ट के दौरान जैस्मीन के एक फैन ने उन्हें खास तोहफा दिया। एक फैन ने उनका लाइव स्केच तैयार कर उन्हें भेंट किया। इस कलाकृति को देखकर जैस्मीन ने जिस तरह प्रतिक्रिया दी। वह कार्यक्रम के यादगार पलों में शामिल हो गया। उन्होंने स्केच को गले लगाया और उसमें गाड़ी चलाते हुए नजर आ रहे व्यक्ति को ‘चौधरी जी’ कहकर संबोधित किया। कॉन्सर्ट के दौरान दर्शकों की पसंद भी साफ तौर पर सामने आई। ऑडियंस की ओर से ‘धुरंधर’ के गाने की सबसे ज्यादा डिमांड की गई।
बच्चों के पार्क में ड्रग्स बेचने वालों का कब्जा:कुणाल कोहली ने जताई चिंता, बोले- बिना कपड़ों के सोते हैं लोग; मुंबई पुलिस से की शिकायत

फिल्ममेकर कुणाल कोहली ने मुंबई के बांद्रा स्थित कार्टर रोड स्केटबोर्ड पार्क में कथित ड्रग्स बिक्री और नशा करने वालों की मौजूदगी पर चिंता जताई। उन्होंने X पर तस्वीरें शेयर कर मुंबई पुलिस से पार्क को सुरक्षित बनाने की अपील की। पुलिस ने बताया कि मामले की जानकारी बांद्रा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है। बच्चों के पार्क में नशा करने वालों की मौजूदगी पर सवाल कुणाल कोहली ने शनिवार को X अकाउंट पर कार्टर रोड स्केटबोर्ड पार्क की कुछ तस्वीरें शेयर कीं। मुंबई पुलिस को टैग करते हुए उन्होंने दावा किया कि पार्क में नशा करने और ड्रग्स बेचने वालों का एक समूह मौजूद है, जिससे वहां गंदगी फैल रही है। फिल्ममेकर ने कहा कि इस पार्क में हर सुबह छोटे बच्चे खेलने आते हैं। ऐसे में वहां कथित गतिविधियां बच्चों के लिए चिंता का विषय हैं। कुणाल ने पोस्ट में लिखा कि वहां मौजूद कुछ लोग कभी-कभी बिना कपड़ों के सोते हैं और ऐसी गतिविधियों में शामिल रहते हैं, जिनका जिक्र वह सोशल मीडिया पर नहीं कर सकते। उन्होंने पुलिस से पार्क को इस समूह से खाली कराने की अपील की। मुंबई पुलिस ने दिया जवाब, शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई कुणाल कोहली की पोस्ट पर मुंबई पुलिस ने प्रतिक्रिया दी। पुलिस ने बताया कि मामले की जानकारी बांद्रा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है। इसके बाद कुणाल ने त्वरित जवाब के लिए आभार जताया। ‘हम तुम’ और ‘फना’ जैसी फिल्मों के लिए मशहूर कुणाल कुणाल कोहली बॉलीवुड के जाने-माने फिल्ममेकर हैं। उन्होंने ‘मुझसे दोस्ती करोगे!’, ‘हम तुम’, ‘फना’, ‘थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक’ और ‘तेरी मेरी कहानी’ का निर्देशन किया है। ‘हम तुम’ में सैफ अली खान और रानी मुखर्जी नजर आए थे, जबकि ‘फना’ में आमिर खान और काजोल मुख्य भूमिकाओं में थे। कुणाल फिल्मों के अलावा सोशल मीडिया पर सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी राय रखते रहे हैं।
सलमान की ‘मातृभूमि’ को रक्षा मंत्रालय की मंजूरी नहीं:दूसरी स्क्रीनिंग के बाद भी अटकी फिल्म; सेंसर सर्टिफिकेट और रिलीज डेट पर सस्पेंस कायम

सलमान खान की फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ की रिलीज पर संकट बना हुआ है। अक्टूबर की शुरुआत में रक्षा मंत्रालय के लिए फिल्म की दूसरी स्क्रीनिंग हुई थी, लेकिन अब तक नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) नहीं मिला है। इसके बिना मेकर्स सेंसर बोर्ड से प्रमाणन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा सकते। फिल्म की रिलीज डेट को लेकर भी असमंजस बना हुआ है। फिल्म पहले ‘बैटल ऑफ गलवान’ नाम से बनाई जा रही थी। इसकी कहानी 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए संघर्ष पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय के सुझावों के बाद फिल्म के कुछ हिस्से दोबारा शूट किए गए और संशोधित संस्करण की स्क्रीनिंग कराई गई। इसके बावजूद अंतिम मंजूरी का इंतजार है। दूसरी स्क्रीनिंग के बाद भी नहीं मिली मंजूरी मिड-डे की रिपोर्ट के मुताबिक, पहली स्क्रीनिंग में रक्षा मंत्रालय ने कुछ बदलाव सुझाए थे। इसके बाद फिल्म की टीम ने सुझावों के आधार पर कुछ दृश्य दोबारा शूट किए और कहानी की प्रस्तुति में भी बदलाव किए। अक्टूबर की शुरुआत में फिल्म का संशोधित संस्करण मंत्रालय के सामने पेश किया गया। इस स्क्रीनिंग में सलमान खान, निर्देशक अपूर्व लाखिया और उनकी टीम शामिल थी। हालांकि, दूसरी स्क्रीनिंग के बाद भी मेकर्स को मंत्रालय की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। इस घटनाक्रम से फिल्म की रिलीज योजना प्रभावित हो सकती है। मेकर्स के लिए फिलहाल जरूरी है कि रक्षा मंत्रालय से NOC मिल जाए, ताकि आगे की औपचारिकताएं पूरी हो सकें। पहले ‘बैटल ऑफ गलवान’ था फिल्म का नाम सलमान खान की इस फिल्म की घोषणा ‘बैटल ऑफ गलवान’ नाम से हुई थी। फिल्म की कहानी 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए संघर्ष से प्रेरित है। इस दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। फिल्म में सलमान खान भारतीय सेना के एक अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को लेकर शुरुआत से ही उत्सुकता रही है, क्योंकि सलमान लंबे समय बाद भारतीय सेना और सीमा पर हुए संघर्ष से जुड़ी कहानी में नजर आने वाले हैं। बाद में फिल्म का नाम बदलकर ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ कर दिया गया। इसके बाद फिल्म की कहानी और प्रस्तुति को लेकर भी चर्चाएं हुईं। हालांकि, नाम बदलने की पूरी वजह और फिल्म में किए गए बदलावों पर मेकर्स की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। मंत्रालय के सुझावों के बाद किए गए बदलाव रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय के सुझावों के बाद फिल्म के कुछ हिस्से दोबारा शूट किए गए। इसके बाद संशोधित फिल्म की दूसरी स्क्रीनिंग हुई। हालांकि, रिपोर्ट में मंत्रालय के सभी सुझावों का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है। सेना और वास्तविक सैन्य घटनाओं पर आधारित फिल्मों में तथ्यों और उनके चित्रण को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है। ‘मातृभूमि’ के लिए भी मंत्रालय की मंजूरी आगे की प्रक्रिया में अहम है। फिलहाल स्पष्ट नहीं है कि मंत्रालय फिल्म में और बदलाव करने को कहेगा या मौजूदा संस्करण को मंजूरी देगा। आधिकारिक जानकारी आने तक मंजूरी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होगी। सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया भी मंजूरी पर निर्भर रिलीज से पहले मेकर्स को सेंसर बोर्ड से प्रमाणन लेना होगा। रक्षा मंत्रालय से NOC नहीं मिलने के कारण वे प्रमाणन के लिए आवेदन नहीं कर सकते। फिल्म की रिलीज से पहले एक अहम प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद ही सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया और रिलीज से जुड़ी योजनाओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिल्म की रिलीज को लेकर पहले भी मीडिया रिपोर्ट्स में संभावित तारीखों की चर्चा हुई थी। हालांकि, फिलहाल किसी तारीख को अंतिम मानना सही नहीं होगा। मेकर्स की आधिकारिक रिलीज डेट की घोषणा का इंतजार है।
Kuldeep Rathore Success Story | JEE Advanced Failure to IIT Madras Startup

Hindi News Career Kuldeep Rathore Success Story | JEE Advanced Failure To IIT Madras Startup 9 मिनट पहले कॉपी लिंक कुलदीप राठौर उन लोगों में से एक हैं जो अपनी हार को जीत में बदलने का हुनर जानते हैं। कुलदीप ने JEE की तैयारी के लिए एक साल का ड्रॉप लिया था लेकिन वे एग्जाम क्लियर नहीं कर सके। इसके बाद सितंबर 2023 में उन्होंने डाटा साइंस में IIT मद्रास से BS डिग्री प्रोग्राम किया। आईआईटी मद्रास दुनिया का पहला ऐसा संस्थान है जहां से 4-वर्षीय बैचलर ऑफ साइंस (BS) डिग्री प्रोग्राम ऑनलाइन और हाइब्रिड मोड में किया जाता है। इसके चलते ऑनलाइन फॉर्मेट की मदद से वे अपनी पढ़ाई जारी रखने के साथ-साथ इंटरप्रेन्योरशिप की बारिकियां भी सीख पाए। क्विक-कॉमर्स प्रोजेक्ट की शुरुआत कुलदीप ने अपने को-फाउंडर शिवांश शर्मा के साथ ZODOK नाम का फैशन क्विक-कॉमर्स प्रोजेक्ट शुरू किया। उन्होंने सूरत के निर्माताओं से संपर्क कर कम कीमत पर फैशन प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराने का मॉडल विकसित किया। जोडोक को रोज मिलने लगे 100 से ज्यादा ऑर्डर अपने बिजनेस की शुरुआत में उन्होंने एक फ्लैट किराए पर लिया। अपनी वेबसाइट बनाई और डिलीवरी सिस्टम को बेहतर बनाना शुरू किया। जल्द ही जोडोक डेली 100 से ज्यादा ऑर्डर और 10,000 से ज्यादा यूजर तक पहुंच गया। उनके इस स्टार्टअप को KNOT ने खरीद लिया, जिससे कुलदीप को बिजनेस के बारे में और अनुभव हासिल करने का मौका मिला। इस अनुभव से उन्होंने ग्राहकों की मांग, ऑर्डर पूरा करने की प्रोसेस और एक फास्ट-कॉमर्स कंपनी चलाने के दौरान आने वाली मुश्किलों के बारे में बहुत कुछ सीखा। KNOT के माध्यम से कुलदीप ने सूरत, दिल्ली एनसीआर और चीन में सप्लाई नेटवर्क तैयार किए जिसके तहत वे 100 से ज्यादा मैन्युफैक्चरर्स से जुड़े। इस अनुभव से उन्हें प्रोडक्ट सोर्सिंग, प्राइवेट लेबल प्रोडक्ट डेवलपमेंट और सप्लाई चेन के क्षेत्र में अनुभव मिला। प्रोडक्ट्स को किफायती बनाया कुलदीप ने सोर्सिंग और बिजनेस प्रोसेस को बेहतर बनाने के तरीके भी खोजे, ताकि प्रोडक्ट्स को ज्यादा किफायती बनाया जा सके। अपने इन सारे अनुभव का फायदा उन्हें तीसरे प्रोजेक्ट SamanNow को आगे बढ़ाने में मिला। कंपनी 60 मिनट में उपलब्ध कराती है प्रोडक्ट्स SamanNow का लक्ष्य टियर-2 और टियर-3 शहरों में कस्टमर को रोजमर्रा के प्रोडक्ट्स लगभग 60 मिनट के अंदर उपलब्ध कराना है। कंपनी अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों को किफायती रखने पर सबसे ज्यादा ध्यान देती है। इससे मिलने वाली कुल प्री सीड फंडिंग 1.1 मिलियन (9.5 से 10 करोड़) है। ये खबर भी पढ़ें करेंट अफेयर्स 24 अक्टूबर:सुनील कुमार ONGC के अगले चेयरमैन, तमिलनाडु में अब हर घर में ‘रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जरूरी आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
टाइगर के शूटर्स की गिरफ्तारी पर राम गोपाल वर्मा बोले:वे सिर्फ मोहरे होते हैं, जश्न मनाने से पहले अंडरवर्ल्ड को समझना होगा

बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने शूटर्स की गिरफ्तारी को बड़ी कामयाबी मानने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अंडरवर्ल्ड में गोली चलाने वाले सिर्फ मोहरे होते हैं, जबकि हमले की साजिश रचने वाले असली लोग पर्दे के पीछे रहते हैं। उन्होंने चेताया कि शूटर्स के पकड़े जाने के बावजूद बॉलीवुड में डर का माहौल खत्म होना जरूरी नहीं है। शूटर्स की गिरफ्तारी से खत्म नहीं होगा डर राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि शूटर्स की गिरफ्तारी का जश्न मनाने से पहले अंडरवर्ल्ड के काम करने के तरीके को समझना जरूरी है। उनके मुताबिक, किसी वारदात को अंजाम देने वाला शख्स आपराधिक नेटवर्क का सबसे आसानी से बदला जा सकने वाला हिस्सा होता है। उसका काम सीमित होता है और वारदात के बाद उसकी भूमिका खत्म हो जाती है। इसलिए केवल हमलावरों को पकड़ लेने से पूरे नेटवर्क को खत्म मान लेना सही नहीं होगा। राम गोपाल वर्मा का मानना है कि असली चुनौती उन लोगों तक पहुंचना है, जो हमले की योजना बनाते हैं और दूसरों के जरिए उसे अंजाम दिलाते हैं। ‘शूटर मजदूर, मास्टरमाइंड मालिक की तरह’ फिल्ममेकर ने अंडरवर्ल्ड की कार्यप्रणाली समझाने के लिए बिल्डिंग बनाने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह निर्माण में लगे मजदूर इमारत का डिजाइन तैयार नहीं करते और न ही उसके मालिक होते हैं, उसी तरह शूटर्स भी पूरे नेटवर्क को चलाने वाले लोग नहीं होते। उनके अनुसार, शूटर्स सिर्फ तय किए गए काम को अंजाम देते हैं, जबकि असली फैसले लेने वाले लोग दूर रहकर पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित करते हैं। कौन-सा काम करना है और किसे निशाना बनाना है, इसका फैसला करने वाले लोग ही नेटवर्क की असली ताकत होते हैं। राम गोपाल वर्मा ने इसी वजह से शूटर्स की गिरफ्तारी को पूरे आपराधिक तंत्र के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई मानने से इनकार किया। हालांकि, यह उनकी सोशल मीडिया पोस्ट में व्यक्त की गई राय है; इससे मामले की जांच की वास्तविक स्थिति अपने आप साबित नहीं होती। सेना के उदाहरण से समझाया सत्ता का खेल राम गोपाल वर्मा ने अपनी बात समझाने के लिए सेना की व्यवस्था का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध में राजा या सेनापति खुद मैदान में लड़ने नहीं उतरते, बल्कि सैनिकों को आदेश देते हैं। जोखिम उठाने वाले सैनिक होते हैं, जबकि फैसले लेने वाले लोग अक्सर सुरक्षित दूरी पर रहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सेना और अंडरवर्ल्ड को एक जैसा बताना नहीं है, बल्कि यह समझाना है कि ताकतवर व्यवस्था में फैसले लेने वाले और उन्हें जमीन पर लागू करने वाले अलग-अलग लोग हो सकते हैं। उनके मुताबिक, यही दूरी आपराधिक नेटवर्क के बड़े चेहरों को बचाए रखने में मदद करती है। यदि हर वारदात में सरगना खुद शामिल हो, तो उसके पकड़े जाने या मारे जाने का जोखिम बढ़ जाएगा। इसलिए ऐसे नेटवर्क दूसरे लोगों का इस्तेमाल करते हैं। टाइगर श्रॉफ केस के बाद बॉलीवुड की सुरक्षा पर सवाल राम गोपाल वर्मा ने अपनी पोस्ट के आखिर में कहा कि शूटर्स की गिरफ्तारी को न तो पुलिस की अंतिम जीत माना जा सकता है और न ही इससे अंडरवर्ल्ड को निर्णायक नुकसान पहुंचना तय है। उनके मुताबिक, जब तक पर्दे के पीछे से काम करने वाले लोगों तक नहीं पहुंचा जाता, तब तक डर बना रह सकता है। उनकी टिप्पणी ने टाइगर श्रॉफ से जुड़े मामले के बाद बॉलीवुड की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
टाइगर के शूटर्स की गिरफ्तारी पर राम गोपाल वर्मा बोले:वे सिर्फ मोहरे होते हैं, जश्न मनाने से पहले अंडरवर्ल्ड को समझना होगा

बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने शूटर्स की गिरफ्तारी को बड़ी कामयाबी मानने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अंडरवर्ल्ड में गोली चलाने वाले सिर्फ मोहरे होते हैं, जबकि हमले की साजिश रचने वाले असली लोग पर्दे के पीछे रहते हैं। उन्होंने चेताया कि शूटर्स के पकड़े जाने के बावजूद बॉलीवुड में डर का माहौल खत्म होना जरूरी नहीं है। शूटर्स की गिरफ्तारी से खत्म नहीं होगा डर राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि शूटर्स की गिरफ्तारी का जश्न मनाने से पहले अंडरवर्ल्ड के काम करने के तरीके को समझना जरूरी है। उनके मुताबिक, किसी वारदात को अंजाम देने वाला शख्स आपराधिक नेटवर्क का सबसे आसानी से बदला जा सकने वाला हिस्सा होता है। उसका काम सीमित होता है और वारदात के बाद उसकी भूमिका खत्म हो जाती है। इसलिए केवल हमलावरों को पकड़ लेने से पूरे नेटवर्क को खत्म मान लेना सही नहीं होगा। राम गोपाल वर्मा का मानना है कि असली चुनौती उन लोगों तक पहुंचना है, जो हमले की योजना बनाते हैं और दूसरों के जरिए उसे अंजाम दिलाते हैं। ‘शूटर मजदूर, मास्टरमाइंड मालिक की तरह’ फिल्ममेकर ने अंडरवर्ल्ड की कार्यप्रणाली समझाने के लिए बिल्डिंग बनाने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह निर्माण में लगे मजदूर इमारत का डिजाइन तैयार नहीं करते और न ही उसके मालिक होते हैं, उसी तरह शूटर्स भी पूरे नेटवर्क को चलाने वाले लोग नहीं होते। उनके अनुसार, शूटर्स सिर्फ तय किए गए काम को अंजाम देते हैं, जबकि असली फैसले लेने वाले लोग दूर रहकर पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित करते हैं। कौन-सा काम करना है और किसे निशाना बनाना है, इसका फैसला करने वाले लोग ही नेटवर्क की असली ताकत होते हैं। राम गोपाल वर्मा ने इसी वजह से शूटर्स की गिरफ्तारी को पूरे आपराधिक तंत्र के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई मानने से इनकार किया। हालांकि, यह उनकी सोशल मीडिया पोस्ट में व्यक्त की गई राय है; इससे मामले की जांच की वास्तविक स्थिति अपने आप साबित नहीं होती। सेना के उदाहरण से समझाया सत्ता का खेल राम गोपाल वर्मा ने अपनी बात समझाने के लिए सेना की व्यवस्था का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध में राजा या सेनापति खुद मैदान में लड़ने नहीं उतरते, बल्कि सैनिकों को आदेश देते हैं। जोखिम उठाने वाले सैनिक होते हैं, जबकि फैसले लेने वाले लोग अक्सर सुरक्षित दूरी पर रहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सेना और अंडरवर्ल्ड को एक जैसा बताना नहीं है, बल्कि यह समझाना है कि ताकतवर व्यवस्था में फैसले लेने वाले और उन्हें जमीन पर लागू करने वाले अलग-अलग लोग हो सकते हैं। उनके मुताबिक, यही दूरी आपराधिक नेटवर्क के बड़े चेहरों को बचाए रखने में मदद करती है। यदि हर वारदात में सरगना खुद शामिल हो, तो उसके पकड़े जाने या मारे जाने का जोखिम बढ़ जाएगा। इसलिए ऐसे नेटवर्क दूसरे लोगों का इस्तेमाल करते हैं। टाइगर श्रॉफ केस के बाद बॉलीवुड की सुरक्षा पर सवाल राम गोपाल वर्मा ने अपनी पोस्ट के आखिर में कहा कि शूटर्स की गिरफ्तारी को न तो पुलिस की अंतिम जीत माना जा सकता है और न ही इससे अंडरवर्ल्ड को निर्णायक नुकसान पहुंचना तय है। उनके मुताबिक, जब तक पर्दे के पीछे से काम करने वाले लोगों तक नहीं पहुंचा जाता, तब तक डर बना रह सकता है। उनकी टिप्पणी ने टाइगर श्रॉफ से जुड़े मामले के बाद बॉलीवुड की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी है।









