Wednesday, 30 Sep 2026 | 02:55 AM

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अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगले दो साल तक ये दवाएं बिना किसी ड्यूटी के अमेरिका जा सकेंगी, लेकिन इसके बाद 100% और फिर 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रम्प के इस फैसले का भारतीय फार्मा इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा और अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया है, इसे 12 आसान सवाल-जवाब में समझिए… सवाल 1: ट्रम्प ने जेनेरिक दवाओं के टैरिफ को लेकर क्या ऐलान किया है? जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बताया कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो सालों तक शून्य टैरिफ जारी रहेगा। दो साल बाद अगले एक साल के लिए टैरिफ 100% और उसके बाद इसे 200% हो जाएगा। सवाल 2: ट्रम्प प्रशासन ने इतना भारी टैरिफ लगाने की क्या वजह बताई है? जवाब: ट्रम्प के मुताबिक, इस नीति का मुख्य उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अमेरिका के भीतर वापस लाना है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को समय सीमा दी गई है, अगर वे अमेरिका के भीतर अपने प्लांट और उपकरण नहीं लगाती हैं, तो उन्हें पेनल्टी के रूप में टैरिफ चुकाना होगा। हालांकि, पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं पर मौजूदा नीति पहले की तरह ही बनी रहेगी। सवाल 3: अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में जेनेरिक दवाओं का कितना इस्तेमाल होता है? जवाब: अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में डॉक्टरों की लिखी जाने वाली कुल दवाओं में 90% से अधिक हिस्सेदारी जेनेरिक दवाओं की ही होती है। वहां का हेल्थकेयर सिस्टम काफी हद तक सस्ती जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। सवाल 4: इस फैसले का भारत पर क्या और कितना असर पड़ेगा? जवाब: भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। अगर टैरिफ बढ़ाकर 100% और 200% किया जाता है, तो भारतीय दवाओं की लागत अमेरिकी बाजार में काफी बढ़ जाएगी। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार: साल 2025 में भारत ने कुल 25.8 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹2.49 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात किया। इसमें से 9.7 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹0.94 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात अकेले अमेरिका को हुआ। ये कुल दवाओं का 38% हैं। हेल्थकेयर एनालिटिक्स फर्म IQVIA के मुताबिक, अमेरिकी फार्मेसियों में बिकने वाली कुल जेनेरिक दवाओं के 47% प्रिस्क्रिप्शन भारतीय कंपनियां ही पूरी करती हैं। सवाल 5: क्या 100% या 200% टैरिफ के बाद भी भारतीय दवाएं अमेरिका में टिक पाएंगी? जवाब: हां, भारतीय जेनेरिक दवाएं फिर भी प्रतिस्पर्धी बनी रह सकती हैं। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय जेनेरिक दवाएं अमेरिका में ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 7 से 10 गुना सस्ती बिकती हैं। ऐसे में अगर 100% टैरिफ भी लगा दिया जाता है, तब भी भारतीय दवाएं वहां की ब्रांडेड दवाओं से सस्ती ही रहेंगी। इस अतिरिक्त लागत का अधिकांश हिस्सा अंततः अमेरिकी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मरीजों पर पड़ेगा, न कि भारतीय निर्यात पूरी तरह खत्म होगा। सवाल 6: क्या प्रमुख भारतीय दवा कंपनियों के पास पहले से अमेरिका में प्लांट हैं? जवाब: हां, भारत की कुछ कंपनियों जैसे सन फार्मा, जायडस लाइफसाइंसेस, लुपिन, अरबिंदो फार्मा, सिप्ला और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज जैसी प्रमुख कंपनियां अमेरिका में अपने प्लांट संचालित करती हैं। मैसाचुसेट्स और न्यूयॉर्क में सिप्ला अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता बढ़ा रही है। डॉ. रेड्डीज ने कहा है कि कॉमर्शियली फायदेमंद होने पर वे अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। सन फार्मा का कहना है कि अमेरिका में उनका मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त है। सवाल 7: क्या अमेरिका में जेनेरिक दवाओं का उत्पादन शिफ्ट करना आसान है? जवाब: नहीं, यह बहुत मुश्किल और महंगा सौदा है। जेनेरिक दवाओं का कारोबार ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर है। विशेष रूप से एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) के लिए कंपनियां भारत और चीन पर निर्भर हैं। अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करने के लिए भारी पूंजी की जरूरत होगी, जिससे अमेरिका में दवाओं की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। सवाल 8: इस पूरी स्थिति से निपटने के लिए भारत को क्या कदम उठाने चाहिए? जवाब: GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का सुझाव है कि भारत को दो मोर्चों पर काम करना होगा: सवाल 9: अमेरिकी हेल्थकेयर को भारतीय दवाओं से कितनी बचत होती है? जवाब: अमेरिकी लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, इंफेक्शियस डिजीज और मेंटल हेल्थ जैसी बीमारियों के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर भारतीय जेनेरिक दवाएं लेते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दवाओं ने अकेले 2022 में अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम के 219 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹21.14 लाख करोड़ बचाए थे। पिछले एक दशक में यह बचत $1.3 ट्रिलियन रही है। सवाल 10: अमेरिका में कौन-कौन सी भारतीय फार्मा कंपनियों की दवाएं ज्यादा बिकती है? जवाब: डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला और सन फार्मा जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में सप्लाई करती हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा बिकने वाली भारतीय जेनेरिक दवाओं में शामिल हैं: सवाल 11: क्या यह फैसला ट्रम्प की व्यापक टैरिफ रणनीति का हिस्सा है? जवाब: हां, ट्रम्प प्रशासन का मुख्य जोर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने पर है। इससे पहले भी ब्रांडेड दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन करने या कीमतें कम करने के बदले टैरिफ छूट दी गई थी। इसके अलावा, अमेरिका करीब 60 देशों पर 10% से 12.5% का नया टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जिसके दायरे में भारत भी आ सकता है। सवाल 12: भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर इसका क्या असर होगा? जवाब: अमेरिका और भारत लगातार यह कहते आ रहे हैं कि वे एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। ऐसे समय में जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने के इस नए ऐलान ने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। नॉलेज पार्ट: क्या होती हैं जेनेरिक दवाएं? जब कोई कंपनी रिसर्च करके नई दवा बनाती है, तो उसे कुछ सालों के लिए पेटेंट मिलता है। इसे ब्रांडेड दवा कहते हैं। पेटेंट खत्म होने के बाद अन्य कंपनियां उसी साल्ट/फार्मूले से सस्ती दवाएं बनाती हैं, जिन्हें ‘जेनेरिक दवा’ कहा जाता है। इनकी गुणवत्ता और असर ब्रांडेड दवा जैसा ही होता

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगले दो साल तक ये दवाएं बिना किसी ड्यूटी के अमेरिका जा सकेंगी, लेकिन इसके बाद 100% और फिर 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रम्प के इस फैसले का भारतीय फार्मा इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा और अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया है, इसे 12 आसान सवाल-जवाब में समझिए… सवाल 1: ट्रम्प ने जेनेरिक दवाओं के टैरिफ को लेकर क्या ऐलान किया है? जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बताया कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो सालों तक शून्य टैरिफ जारी रहेगा। दो साल बाद अगले एक साल के लिए टैरिफ 100% और उसके बाद इसे 200% हो जाएगा। सवाल 2: ट्रम्प प्रशासन ने इतना भारी टैरिफ लगाने की क्या वजह बताई है? जवाब: ट्रम्प के मुताबिक, इस नीति का मुख्य उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अमेरिका के भीतर वापस लाना है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को समय सीमा दी गई है, अगर वे अमेरिका के भीतर अपने प्लांट और उपकरण नहीं लगाती हैं, तो उन्हें पेनल्टी के रूप में टैरिफ चुकाना होगा। हालांकि, पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं पर मौजूदा नीति पहले की तरह ही बनी रहेगी। सवाल 3: अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में जेनेरिक दवाओं का कितना इस्तेमाल होता है? जवाब: अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में डॉक्टरों की लिखी जाने वाली कुल दवाओं में 90% से अधिक हिस्सेदारी जेनेरिक दवाओं की ही होती है। वहां का हेल्थकेयर सिस्टम काफी हद तक सस्ती जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। सवाल 4: इस फैसले का भारत पर क्या और कितना असर पड़ेगा? जवाब: भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। अगर टैरिफ बढ़ाकर 100% और 200% किया जाता है, तो भारतीय दवाओं की लागत अमेरिकी बाजार में काफी बढ़ जाएगी। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार: साल 2025 में भारत ने कुल 25.8 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹2.49 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात किया। इसमें से 9.7 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹0.94 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात अकेले अमेरिका को हुआ। ये कुल दवाओं का 38% हैं। हेल्थकेयर एनालिटिक्स फर्म IQVIA के मुताबिक, अमेरिकी फार्मेसियों में बिकने वाली कुल जेनेरिक दवाओं के 47% प्रिस्क्रिप्शन भारतीय कंपनियां ही पूरी करती हैं। सवाल 5: क्या 100% या 200% टैरिफ के बाद भी भारतीय दवाएं अमेरिका में टिक पाएंगी? जवाब: हां, भारतीय जेनेरिक दवाएं फिर भी प्रतिस्पर्धी बनी रह सकती हैं। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय जेनेरिक दवाएं अमेरिका में ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 7 से 10 गुना सस्ती बिकती हैं। ऐसे में अगर 100% टैरिफ भी लगा दिया जाता है, तब भी भारतीय दवाएं वहां की ब्रांडेड दवाओं से सस्ती ही रहेंगी। इस अतिरिक्त लागत का अधिकांश हिस्सा अंततः अमेरिकी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मरीजों पर पड़ेगा, न कि भारतीय निर्यात पूरी तरह खत्म होगा। सवाल 6: क्या प्रमुख भारतीय दवा कंपनियों के पास पहले से अमेरिका में प्लांट हैं? जवाब: हां, भारत की कुछ कंपनियों जैसे सन फार्मा, जायडस लाइफसाइंसेस, लुपिन, अरबिंदो फार्मा, सिप्ला और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज जैसी प्रमुख कंपनियां अमेरिका में अपने प्लांट संचालित करती हैं। मैसाचुसेट्स और न्यूयॉर्क में सिप्ला अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता बढ़ा रही है। डॉ. रेड्डीज ने कहा है कि कॉमर्शियली फायदेमंद होने पर वे अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। सन फार्मा का कहना है कि अमेरिका में उनका मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त है। सवाल 7: क्या अमेरिका में जेनेरिक दवाओं का उत्पादन शिफ्ट करना आसान है? जवाब: नहीं, यह बहुत मुश्किल और महंगा सौदा है। जेनेरिक दवाओं का कारोबार ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर है। विशेष रूप से एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) के लिए कंपनियां भारत और चीन पर निर्भर हैं। अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करने के लिए भारी पूंजी की जरूरत होगी, जिससे अमेरिका में दवाओं की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। सवाल 8: इस पूरी स्थिति से निपटने के लिए भारत को क्या कदम उठाने चाहिए? जवाब: GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का सुझाव है कि भारत को दो मोर्चों पर काम करना होगा: सवाल 9: अमेरिकी हेल्थकेयर को भारतीय दवाओं से कितनी बचत होती है? जवाब: अमेरिकी लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, इंफेक्शियस डिजीज और मेंटल हेल्थ जैसी बीमारियों के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर भारतीय जेनेरिक दवाएं लेते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दवाओं ने अकेले 2022 में अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम के 219 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹21.14 लाख करोड़ बचाए थे। पिछले एक दशक में यह बचत $1.3 ट्रिलियन रही है। सवाल 10: अमेरिका में कौन-कौन सी भारतीय फार्मा कंपनियों की दवाएं ज्यादा बिकती है? जवाब: डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला और सन फार्मा जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में सप्लाई करती हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा बिकने वाली भारतीय जेनेरिक दवाओं में शामिल हैं: सवाल 11: क्या यह फैसला ट्रम्प की व्यापक टैरिफ रणनीति का हिस्सा है? जवाब: हां, ट्रम्प प्रशासन का मुख्य जोर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने पर है। इससे पहले भी ब्रांडेड दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन करने या कीमतें कम करने के बदले टैरिफ छूट दी गई थी। इसके अलावा, अमेरिका करीब 60 देशों पर 10% से 12.5% का नया टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जिसके दायरे में भारत भी आ सकता है। सवाल 12: भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर इसका क्या असर होगा? जवाब: अमेरिका और भारत लगातार यह कहते आ रहे हैं कि वे एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। ऐसे समय में जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने के इस नए ऐलान ने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। नॉलेज पार्ट: क्या होती हैं जेनेरिक दवाएं? जब कोई कंपनी रिसर्च करके नई दवा बनाती है, तो उसे कुछ सालों के लिए पेटेंट मिलता है। इसे ब्रांडेड दवा कहते हैं। पेटेंट खत्म होने के बाद अन्य कंपनियां उसी साल्ट/फार्मूले से सस्ती दवाएं बनाती हैं, जिन्हें ‘जेनेरिक दवा’ कहा जाता है। इनकी गुणवत्ता और असर ब्रांडेड दवा जैसा ही होता

मोरिंगा पराठा रेसिपी: मोरिंगा का रामबाण इलाज है मोरिंगा, जिसमें शामिल हैं मोरिंगा के पराठे, जानें आसान रेसिपी

मोरिंगा पराठा रेसिपी

22 जुलाई 2026 को 15:00 IST पर अद्यतन किया गया मोरिंगा पराठा रेसिपी: मोरिंगा की सेहत के लिए बेहद गुणकारी मनी होती है, इसके सेवन से इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में मदद मिलती है। सहजन के नारियल के पराठे का स्वाद विटामिन, कैल्शियम और आयरन से भरपूर एक बेहतरीन सुपरफूड है जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इन बिजनेसमैन से आप स्वादिष्ट पराठा तैयार कर सकते हैं। यह मोरिंगा पराठा है सेहत का खजाना, यहां जानें इसे बनाने की आसान विधि के बारे में… अनुसरण करना : इसकी रेसिपी के लिए 1 कप मोरिंगा के पत्ते, 2 कप आपको आटे का आटा, 1 हरी मिर्च और आधा चम्मच घीसा लेना चाहिए। छवि: एआई साथ ही आधा-आधा मिश्रण और जीरा, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, स्वाद मसाला नमक और सेकने के लिए तेल या घी की जरूरत होती है। छवि: फ्रीपिक एक बड़ा आटा गूंथ लें, जिसमें सभी कटी हुई चीजें, टुकड़े और 1 से 2 घी या तेल मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पानी डालें। छवि: एआई तैयार किए गए गुंथे हुए आटे को 10 मिनट के लिए बढ़ा कर रख दें ताकि आटे पर बने आटे को अच्छी तरह से सेट किया जा सके। छवि: एआई एसोसिएट्स के छोटे लो पार्टनर उन्हें गोल या तिकोने आकार में बेल लें और डिस्प्ले पर दोनों तरफ घी तेल लगाएं और सोना रखें और क्रिस्पी होने तक सेक लें। छवि: एआई रेडी हॉटआग्राम मठिया मोरिंगा पराठे को दही, अचार या पसंद के अनुसार अपनी पसंद के साथ बना सकते हैं। ये पराठे खाने में काफी टेस्टी लगे हैं। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 22 जुलाई 2026 15:00 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)मोरिंगा पराठा रेसिपी(टी)सहजन के पत्ते का पराठा(टी)स्वस्थ नाश्ता रेसिपी(टी)मोरिंगा के फायदे हिंदी में(टी)भारतीय फ्लैटब्रेड रेसिपी

चीन बोला- भारत ने हमारे 12 नाविकों को बचाया:ये एहसान कभी नहीं भूलेंगे; 1 साल पहले केरल के पास जहाज में आग लगी थी

चीन बोला- भारत ने हमारे 12 नाविकों को बचाया:ये एहसान कभी नहीं भूलेंगे; 1 साल पहले केरल के पास जहाज में आग लगी थी

भारत में चीन के नए मिलिट्री डिप्लोमैट यू जियान ने भारतीय सेना का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने केरल तट के पास आग लगने वाले मालवाहक जहाज से 12 चीनी नागरिकों को बचाया था। चीन यह एहसान कभी नहीं भूलेगा। यू जियान ने यह बात मंगलवार को नई दिल्ली में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की स्थापना की 99वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नेताओं की कोशिशों से भारत-चीन संबंध फिर से सुधार की राह पर लौटे हैं। दरअसल, 9 जून 2025 को सिंगापुर के झंडे वाला कंटेनर जहाज एमवी वान हाई 503 केरल के अझिक्कल तट से करीब 44 समुद्री मील दूर आग लगने के बाद विस्फोट का शिकार हो गया था। यह जहाज कोलंबो से न्हावा शेवा जा रहा था और उस पर 22 चालक दल के सदस्य सवार थे। जहाज में आग लगने और बचाव से जुड़ी 5 तस्वीरें कोलंबो से मुंबई जा रहा था जहाज जहाज श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से मुंबई जा रहा था। रास्ते में जहाज के एक कंटेनर में विस्फोट हुआ, जिसके बाद उसमें आग लग गई। जहाज पर कुल 22 क्रू मेंबर्स सवार थे। भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए 18 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था। बचाए गए लोगों में से 5 लोग घायल हुए थे, जिनमें 2 गंभीर रूप से झुलसे थे। 4 लोग लापता हो गए थे, जिन्हें मृत मान लिया गया। जहाज पर चीन और ताइवान के कुल 14 लोग सवार थे। इनमें 8 चीन के और 6 ताइवान के थे। बचाव कार्य के लिए कोस्ट गार्ड के 5 जहाज, 2 विमान और 1 हेलिकॉप्टर तैनात किए गए थे।

CJP के प्रदर्शन में पिटे टीवी एक्टर सेहबान:कहा- हाथ सूज गया है, पुलिस ने कई लाठियां मारीं; 2 लड़कियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे

CJP के प्रदर्शन में पिटे टीवी एक्टर सेहबान:कहा- हाथ सूज गया है, पुलिस ने कई लाठियां मारीं; 2 लड़कियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे

बेपनाह, दिल मिल गए और तुझसे है राब्ता जैसे पॉपुलर टीवी शोज में नजर आ चुके एक्टर सेहबान अजीम लाठीचार्ज में घायल हो गए। एक्टर 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में जंतर मंतर पहुंचे थे, जहां दो लड़कियों को लाठीचार्ज से बचाते हुए एक्टर के हाथ और शरीर के कई हिस्सों पर लाठी पड़ गई। एक्टर ने दावा है कि पुलिस जानबूझ कर लाठियां चला रही थी। मिड डे को दिए इंटरव्यू में एक्टर सेहबान ने कहा, “वह मंजर बेहद दिल तोड़ देने वाला था। मैं छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल होने गया था। मेरी मुंबई से आई दो महिला दोस्त भी वहां मौजूद थीं। उन्हें लाठीचार्ज से बचाने की कोशिश में मुझे चोट लग गई। मेरा हाथ सूज गया है। पुलिस ने मेरे हाथ, पैरों और शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी कई बार लाठियां मारीं।” आगे एक्टर ने कहा, “हम जंतर-मंतर के अंदर तक भी नहीं पहुंच पाए, जहां असल में प्रदर्शन हो रहा था। पुलिस ने चारों तरफ बैरिकेडिंग कर रखी थी। हमें बीच में घेर लिया और फिर लाठीचार्ज शुरू कर दिया। उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं थी कि वे किस पर लाठी चला रहे हैं। वहां बच्चे थे, महिलाएं थीं, लेकिन किसी को नहीं बख्शा गया।” आगे अभिनेता ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह सुनियोजित लग रही थी और उसका मकसद बलपूर्वक भीड़ को वहां से हटाना था। उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि यह लाठीचार्ज जानबूझकर किया गया था। वे बस चाहते थे कि हम सभी वहां से चले जाएं। मेरा दिल उन बच्चों के लिए दुखता है, जो इस प्रदर्शन में शामिल होने आए थे। कई छात्र ट्रेन और बसों से कई दिनों का सफर तय करके पहुंचे थे। सेहबान ने दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल कई लोग घायल हुए। उन्होंने कहा, “पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बेरहमी से पीटा। कई लोगों के शरीर से खून बह रहा था। ये युवा छात्र वहीं डटे रहे और उन्होंने यह सारी मार झेली।” सेहबान अजीम के साथ प्रोटेस्ट में शामिल हुईं दोस्तों ने उनके वीडियो भी पोस्ट किए हैं, जिसमें वो लगातार इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। पोस्ट में उनकी दोस्त ने लिखा है कि लाठीचार्ज के समय एक्टर अपनी दो दोस्तों को बचाने की कोशिश कर रहे थे। इन टीवी शोज में नजर आए सेहबान अजीम सेहबान अजीम, दिल मिल गए, एक हजारों में मेरी बहना है, हमसफर्स, थपकी प्यार की, बेपनाह और तुझसे है राब्ता जैसे शोज का हिस्सा रहे हैं। इसके अलावा वो टाइम्स मोस्ट डिजायरेबल मैन की लिस्ट में लगातार तीन सालों तक शामिल हुए हैं। सेहबान को आखिरी बार स्पाय बहू टीवी शो में देखा गया था। शबाना आजमी प्रोटेस्ट में पहुंचीं, अस्थमा अटैक आया 20 जुलाई को सीनियर एक्ट्रेस शबाना आजमी, प्रकाश राज जैसे बड़े चेहरे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में शामिल हुए थे। इस दौरान शबाना आजमी की तबीयत बिगड़ गई। अब एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया है कि आंसू गैस के गोले छोड़े जाने से उन्हें अस्थमा अटैक आया। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई, लेकिन उनका पंप उनके पास था। पास की बिल्डिंग में ले जाकर उन्हें शुरुआत उपचार दिया गया। कुछ देर बाद तबीयत ठीक होने पर उन्होंने दोबारा प्रोटेस्ट जॉइन किया। बाकी कलाकारों के शामिल न होने पर शबाना का जवाब बॉलीवुड सेलिब्रिटीज के न आने पर सवाल पूछा गया, तो शबाना ने कहा कि लोग सिर्फ फिल्मी सितारों की अनुपस्थिति पर बात करते हैं। कोई भी बड़े बिजनेसमैन या उद्योगपतियों के शामिल न होने पर सवाल नहीं उठाता। ऐसे सवाल पूछकर मुख्य मुद्दे को भटकाया जाता है और गैर-जरूरी विवाद खड़ा किया जाता है। दिलजीत दोसांझ बोले- छात्रों के साथ गलत हुआ दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, आज जो हुआ, बहुत गलत हुआ। छात्रों के साथ ऐसा बर्ताव नहीं होना चाहिए था। मैं अधिकारियों से अपील करता हूं कि वे छात्रों की मांगें सुनें। लोगों की आवाज ही भगवान की आवाज होती है। मुझे पहले भी कई बार ‘एंटी-नेशनल’ कहा गया है। अब भी शायद मुझे यही कहा जाएगा। किसान आंदोलन के बाद मुझे काफी विरोध और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिनके बारे में मैं खुलकर बात भी नहीं कर सकता। बाकी सब भगवान देख रहे हैं। भगवान सबका भला करें। कंगना ने आंदोलन को बताया दबाव बनाने की कोशिश सोमवार को कंगना रनोट ने कहा था कि मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए संसद सही जगह है, न कि सड़कें। उन्होंने कहा कि जनता ने एक सरकार चुनी है और सरकार चलाने का फैसला उसी का होना चाहिए। कंगना ने कहा की ये सब जंतर-मंतर पर हुड़दंग कर रहे हैं, उत्पात मचा रहे हैं। जिस तरह से आंदोलन चल रहा है वो ठीक नहीं है। प्रदर्शन के जरिए सरकार को यह तय करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता कि किसे पद पर रखना है और किसे हटाना है। हेमा मालिनी बोलीं- छात्रों को गुमराह न करें बीजेपी सांसद हेमा मालिनी ने भी न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में इस प्रदर्शन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आंदोलन से कुछ हासिल नहीं होने वाला है। मोदी सरकार देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। हेमा मालिनी ने कहा कि इस मामले को बातचीत से हल किया जाना चाहिए और इसमें शामिल छात्रों को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इन बड़े सेलेब्रिटीज ने भी किया आंदोलन का समर्थन जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन में शबाना आजमी और प्रकाश राज के अलावा कुणाल कामरा और स्वरा भास्कर भी जमीनी स्तर पर शामिल हुए हैं। वहीं सोनी राजदान, जीनत अमान, अभय देओल, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, ओमी वैद्य और सोनाक्षी सिन्हा ने सोशल मीडिया के जरिए इस मुहिम का समर्थन किया है। गीतकार जावेद अख्तर ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला खत लिखकर इस मामले पर बातचीत शुरू करने की मांग की है। इनके अलावा विशाल ददलानी, दीया मिर्जा और फिल्म मेकर ओनिर ने भी प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता जताई है।

आमिर के सौतेले भाई ने एक्ट्रेस-पत्नी को पीटा:ईवा ग्रोवर बोलीं- शादी के तीसरे दिन इंटीमेट होते हुए मारा था, आमिर को परिवार फूंटी आंख नहीं पसंद

आमिर के सौतेले भाई ने एक्ट्रेस-पत्नी को पीटा:ईवा ग्रोवर बोलीं- शादी के तीसरे दिन इंटीमेट होते हुए मारा था, आमिर को परिवार फूंटी आंख नहीं पसंद

पॉपुलर टीवी एक्ट्रेस ईवा ग्रोवर ने आमिर खान के सौतेले भाई हैदर अली खान से शादी की थी। हालांकि, शादी के बाद घरेलु हिंसा के चलते ईवा ने तलाक ले लिया। अब सालों बाद एक्ट्रेस ने दावा किया है कि हैदर को सिजोफ्रेनिया था, वो उनके साथ मारपीट करते थे। एक्ट्रेस ने ये भी दावा किया है कि आमिर खान नहीं चाहते थे कि उनकी सौतेले भाई हैदर से शादी हो। उन्होंने ये भी कहा कि आमिर, सौतेले भाई और परिवार से दूरी बनाए रखते हैं। एक्ट्रेस ईवा ग्रोवर ने हाल ही में सिद्धार्थ कानन को दिए इंटरव्यू में शादी टूटने पर कहा, ‘बहुत उतार-चढ़ाव आए, बहुत वायलेंस हुआ, बहुत कोशिश की शादी संभालने की, लेकिन मैं नहीं संभाल पाई। मैं नहीं बर्दाश्त कर पाई। बच्चा भी पैदा किया। मुझे पहले ही पीछे हट जाना था। मैंने सोचा बच्चा होगा तो सब ठीक हो जाएगा, लेकिन हालात और बिगड़ गए। जैसे ही बच्ची पैदा हुई, वैसे ही तलाक फाइल करवा दिया गया और मुझे घर भेज दिया गया।’ एक्ट्रेस ने बताया है कि उस समय वो टीवी शो वक्त बताएगा कौन अपना कौन पराया की शूटिंग कर रही थीं। सेट पर लोगों ने उनके शरीर में चोटों के निशान देखे और उनकी तलाक लेने में मदद की। शादी के तीसरे दिन ही की गई मारपीट ईवा ने बताया है कि शादी के तीसरे दिन ही हैदर ने उन पर हाथ उठाया था। एक्ट्रेस ने इस पर कहा, ‘उन्हें सिजोफ्रेनिया था, तब मैं इसका मतलब ठीक से जानती नहीं थी। शादी के तीसरे दिन पता नहीं उन्हें क्या हुआ कि उन्होंने मुझे मारना शुरू कर दिया, फिजिकली अब्यूस करना शुरू कर दिया। तब तो मुझे नहीं समझ आया कि ऐसा क्यों हुआ।’ आगे एक्ट्रेस ने बताया कि ये घटना अचानक तब हुई जब वो इंटीमेट हो रही थीं। एक्ट्रेस ने बताया, ‘उन्हें पहले से सिजोफ्रेनिया था, लेकिन कतर एयरलाइन की नौकरी छोड़ने के बाद वो और फ्रस्टेटेड रहने लगे। उन्हें पीटने से खुशी मिलती थी। मुझे लगता था मुझ में कोई कमी है। वो मुझ पर शक करते थे कि मेरा अफेयर ड्राइवर और सेट पर मेकअप आर्टिस्ट के साथ है। तब मैं बहुत बड़े-बड़े शोज कर रही थी।’ ईवा ग्रोवर ने बताया है कि आमिर खान के पिता ताहिर अली खान ने शहनाज खान से दूसरी शादी की थी। शहनाज पहले से तलाकशुदा थीं, जिससे उन्हें दो बच्चे हैदर और नाजलीन थे। बाद में ताहिर ने उन्हें अपना नाम दिया था। ईवा ने दावा किया हैदर के बायोलॉजिकल पिता उन्हें बचपन में सेक्शुअली अब्यूज करते थे, जिससे उन्हें चाइल्डहुड ट्रॉमा था। आमिर जानते थे कि ये परिवार ठीक नहीं है- ईवा एक्ट्रेस ने कहा, ‘आमिर को ये परिवार जाहिर तौर पर फूटी आंख भी पसंद नहीं था। वो जानते थे कि ये फैमिली सही नहीं है। उन्होंने मुझसे डायरेक्टली ये नहीं कहा था, लेकिन मैंने उड़ती-उड़ती खबर सुनी थी कि आमिर सर ने कहीं कहा है कि मैं हैदर से शादी करके सही फैसला नहीं ले रही हूं।’ एक्ट्रेस ने दावा किया है कि तब आमिर के पिता ताहिर, उनकी सास और बेटे हैदर के साथ उसी घर में रहते थे, जहां वो शादी करके आई थीं। ताहिर भी सौतेले बेटे की हरकतों से परेशान रहते थे। हालांकि जब ताहिर की तबीयत बिगड़ने लगी तो आमिर उन्हें इलाज के लिए पुणे ले गए और फिर अपने साथ रखने लगे। इस समय उनकी दूसरी पत्नी शहनाज को उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी गई थी, जिससे उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी। वो सिर्फ उनका नाम लेती थीं। बाद में ब्रेन हेमरेज से उनका निधन हो गया। ईवा ने बताया है कि आमिर सौतेल भाई और इस परिवार से कोई लेना-देना नहीं रखते हैं, यही वजह है कि वो कभी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आए। ईवा के अनुसार, अब आमिर के सौतेले भाई हैदर बेघर हो चुके हैं और आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। वो कभी सिग्नल पर खड़े रहते हैं, तो कभी चॉल में रह लेते हैं और पूरी तरह शराबी बन चुके हैं। बता दें कि ईवा ग्रोवर ने हैदर से घरवालों के खिलाफ भागकर शादी की थी, जिससे उन्हें घरवालों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। तलाक के बाद जब वो घर लौटीं, तो उन पर बेटी से मिलने की पाबंदी लगा दी गई। यही वजह रही कि उन्होंने 9 साल तक बेटी को नहीं देखा। फिलहाल उनकी बेटी, हैदर की बहन के साथ रहती है और कभी-कभी उनसे मिलने आती है। इन पॉपुलर टीवी शोज में नजर आईं ईवा ईवा ग्रोवर एक दौर की मशहूर एक्ट्रेस थीं। वो जी हॉरर शो, रिश्ते, कुमकुम, करिश्मा का करिश्मा, सपना बाबुल का और बड़े अच्छे लगते हैं जैसे कई शोज में नजर आ चुकी हैं। ईवा ग्रोवर ने सलमान खान के साथ फिल्म रेडी में भी काम किया है।

आमिर के सौतेले भाई ने एक्ट्रेस-पत्नी को पीटा:ईवा ग्रोवर बोलीं- शादी के तीसरे दिन इंटीमेट होते हुए मारा था, आमिर को परिवार फूंटी आंख नहीं पसंद

आमिर के सौतेले भाई ने एक्ट्रेस-पत्नी को पीटा:ईवा ग्रोवर बोलीं- शादी के तीसरे दिन इंटीमेट होते हुए मारा था, आमिर को परिवार फूंटी आंख नहीं पसंद

पॉपुलर टीवी एक्ट्रेस ईवा ग्रोवर ने आमिर खान के सौतेले भाई हैदर अली खान से शादी की थी। हालांकि, शादी के बाद घरेलु हिंसा के चलते ईवा ने तलाक ले लिया। अब सालों बाद एक्ट्रेस ने दावा किया है कि हैदर को सिजोफ्रेनिया था, वो उनके साथ मारपीट करते थे। एक्ट्रेस ने ये भी दावा किया है कि आमिर खान नहीं चाहते थे कि उनकी सौतेले भाई हैदर से शादी हो। उन्होंने ये भी कहा कि आमिर, सौतेले भाई और परिवार से दूरी बनाए रखते हैं। एक्ट्रेस ईवा ग्रोवर ने हाल ही में सिद्धार्थ कानन को दिए इंटरव्यू में शादी टूटने पर कहा, ‘बहुत उतार-चढ़ाव आए, बहुत वायलेंस हुआ, बहुत कोशिश की शादी संभालने की, लेकिन मैं नहीं संभाल पाई। मैं नहीं बर्दाश्त कर पाई। बच्चा भी पैदा किया। मुझे पहले ही पीछे हट जाना था। मैंने सोचा बच्चा होगा तो सब ठीक हो जाएगा, लेकिन हालात और बिगड़ गए। जैसे ही बच्ची पैदा हुई, वैसे ही तलाक फाइल करवा दिया गया और मुझे घर भेज दिया गया।’ एक्ट्रेस ने बताया है कि उस समय वो टीवी शो वक्त बताएगा कौन अपना कौन पराया की शूटिंग कर रही थीं। सेट पर लोगों ने उनके शरीर में चोटों के निशान देखे और उनकी तलाक लेने में मदद की। शादी के तीसरे दिन ही की गई मारपीट ईवा ने बताया है कि शादी के तीसरे दिन ही हैदर ने उन पर हाथ उठाया था। एक्ट्रेस ने इस पर कहा, ‘उन्हें सिजोफ्रेनिया था, तब मैं इसका मतलब ठीक से जानती नहीं थी। शादी के तीसरे दिन पता नहीं उन्हें क्या हुआ कि उन्होंने मुझे मारना शुरू कर दिया, फिजिकली अब्यूस करना शुरू कर दिया। तब तो मुझे नहीं समझ आया कि ऐसा क्यों हुआ।’ आगे एक्ट्रेस ने बताया कि ये घटना अचानक तब हुई जब वो इंटीमेट हो रही थीं। एक्ट्रेस ने बताया, ‘उन्हें पहले से सिजोफ्रेनिया था, लेकिन कतर एयरलाइन की नौकरी छोड़ने के बाद वो और फ्रस्टेटेड रहने लगे। उन्हें पीटने से खुशी मिलती थी। मुझे लगता था मुझ में कोई कमी है। वो मुझ पर शक करते थे कि मेरा अफेयर ड्राइवर और सेट पर मेकअप आर्टिस्ट के साथ है। तब मैं बहुत बड़े-बड़े शोज कर रही थी।’ ईवा ग्रोवर ने बताया है कि आमिर खान के पिता ताहिर अली खान ने शहनाज खान से दूसरी शादी की थी। शहनाज पहले से तलाकशुदा थीं, जिससे उन्हें दो बच्चे हैदर और नाजलीन थे। बाद में ताहिर ने उन्हें अपना नाम दिया था। ईवा ने दावा किया हैदर के बायोलॉजिकल पिता उन्हें बचपन में सेक्शुअली अब्यूज करते थे, जिससे उन्हें चाइल्डहुड ट्रॉमा था। आमिर जानते थे कि ये परिवार ठीक नहीं है- ईवा एक्ट्रेस ने कहा, ‘आमिर को ये परिवार जाहिर तौर पर फूटी आंख भी पसंद नहीं था। वो जानते थे कि ये फैमिली सही नहीं है। उन्होंने मुझसे डायरेक्टली ये नहीं कहा था, लेकिन मैंने उड़ती-उड़ती खबर सुनी थी कि आमिर सर ने कहीं कहा है कि मैं हैदर से शादी करके सही फैसला नहीं ले रही हूं।’ एक्ट्रेस ने दावा किया है कि तब आमिर के पिता ताहिर, उनकी सास और बेटे हैदर के साथ उसी घर में रहते थे, जहां वो शादी करके आई थीं। ताहिर भी सौतेले बेटे की हरकतों से परेशान रहते थे। हालांकि जब ताहिर की तबीयत बिगड़ने लगी तो आमिर उन्हें इलाज के लिए पुणे ले गए और फिर अपने साथ रखने लगे। इस समय उनकी दूसरी पत्नी शहनाज को उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी गई थी, जिससे उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी। वो सिर्फ उनका नाम लेती थीं। बाद में ब्रेन हेमरेज से उनका निधन हो गया। ईवा ने बताया है कि आमिर सौतेल भाई और इस परिवार से कोई लेना-देना नहीं रखते हैं, यही वजह है कि वो कभी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आए। ईवा के अनुसार, अब आमिर के सौतेले भाई हैदर बेघर हो चुके हैं और आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। वो कभी सिग्नल पर खड़े रहते हैं, तो कभी चॉल में रह लेते हैं और पूरी तरह शराबी बन चुके हैं। बता दें कि ईवा ग्रोवर ने हैदर से घरवालों के खिलाफ भागकर शादी की थी, जिससे उन्हें घरवालों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। तलाक के बाद जब वो घर लौटीं, तो उन पर बेटी से मिलने की पाबंदी लगा दी गई। यही वजह रही कि उन्होंने 9 साल तक बेटी को नहीं देखा। फिलहाल उनकी बेटी, हैदर की बहन के साथ रहती है और कभी-कभी उनसे मिलने आती है। इन पॉपुलर टीवी शोज में नजर आईं ईवा ईवा ग्रोवर एक दौर की मशहूर एक्ट्रेस थीं। वो जी हॉरर शो, रिश्ते, कुमकुम, करिश्मा का करिश्मा, सपना बाबुल का और बड़े अच्छे लगते हैं जैसे कई शोज में नजर आ चुकी हैं। ईवा ग्रोवर ने सलमान खान के साथ फिल्म रेडी में भी काम किया है।

छात्रों पर हुई बर्बरता देख भावुक नसीरुद्दीन शाह:कहा- जाहिल देश चलाए, तो चाहेगा पूरा देश जाहिल बने; शबाना आजमी को प्रोटेस्ट में आया था अस्थमा अटैक

छात्रों पर हुई बर्बरता देख भावुक नसीरुद्दीन शाह:कहा- जाहिल देश चलाए, तो चाहेगा पूरा देश जाहिल बने; शबाना आजमी को प्रोटेस्ट में आया था अस्थमा अटैक

बॉलीवुड के सीनियर एक्टर नसीरुद्दीन शाह प्रोटेस्ट के बीच बच्चों के साथ हुई मारपीट और बर्बरता देख भावुक हो गए हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में सरकार की निंदा की और छात्रों को सपोर्ट दिया। एक्टर का कहना है कि अगर देश चलाने वाले जाहित हैं, तो वो यही चाहेंगे कि पूरा देश जाहिल ही बने। नसीरुद्दीन शाह ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने कहा- आदाब, नमस्कार। मैं नसीरुद्दीन शाह दो बातें अर्ज करना चाहता हूं आप सब से। पहली बात तो यह है, कि अगर एक जाहिल इस मुल्क की रहनुमाई करे, तो उसका दिल यही चाहेगा कि पूरा मुल्क उसी की तरह जाहिल, नासमझ, नाकाम और बेरहम बने। अभिनय के दो अलग-अलग कोर्स राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और पूना फिल्म इंस्टीट्यूट में पूरे करने के बावजूद मैंने अभिनय के बारे में सबसे ज्यादा जो सीखा है, वह उन बच्चों से, उन तालिब-ए-इल्म से जिन्हें सिखाने की कोशिश मैंने की है। आगे नसीरुद्दीन शाह ने कहा, मेरी पूरी हमदर्दी उनके साथ है। मैं उन्हें हजार-हजार हर सांस के साथ दुआएं देता हूं और हर टीचर्स डे पर उन्हें सलाम करता हूं। इस वक्त मेरा दिल भी भरा हुआ है और मैं गुस्से से खौल भी रहा हूं यह देखकर कि हमारे इन बच्चों के साथ किस तरह ज़ुल्म का बर्ताव किया जा रहा है उन गुंडों के हाथों, जो मुझे अमरीका के ICE एजेंट्स की याद दिलाते हैं, मुंह पर नकाब लगाए हुए, हाथ में डंडा लिए हुए। आखिर में नसीरुद्दीन शाह ने कहा, कभी अपने बच्चों के बारे में भी सोचा करो और यह भी सोचो कि तुम्हारा अंजाम तुम्हें भी एक दिन मिलेगा जरूर। इन सब बच्चों से मैं कहना चाहता हूं कि हिम्मत न हारें। बहुत से लोगों की हमदर्दी आपके साथ है, बहुत से लोग आपके साथ हैं। आप लड़ते रहें। मुझे हमारे मुल्क की युवा पीढ़ी से हमेशा उम्मीद रही है और अब वह उम्मीद और उजागर हो गई है। आप लोग अपनी लड़ाई लड़ते रहें, हम सब आपके साथ हैं। और इस मुल्क की हुकूमत को मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं, सब याद रखा जाएगा। प्रोटेस्ट में शामिल होने का था दावा कुछ समय पहले नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसके साथ दावा किया गया था कि एक्टर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट का हिस्सा बने हैं और जंतर मंतर पहुंचे हैं। हालांकि फैक्ट चैक करने पर सामने आया कि नसीरुद्दीन शाह और उनके बेटे का वो वीडियो पुराना है। शबाना आजमी प्रोटेस्ट में पहुंचीं, अस्थमा अटैक आया 20 जुलाई को सीनियर एक्ट्रेस शबाना आजमी, प्रकाश राज जैसे बड़े चेहरे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में शामिल हुए थे। इस दौरान शबाना आजमी की तबीयत बिगड़ गई। अब एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया है कि आंसू गैस के गोले छोड़े जाने से उन्हें अस्थमा अटैक आया। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई, लेकिन उनका पंप उनके पास था। पास की बिल्डिंग में ले जाकर उन्हें शुरुआत उपचार दिया गया। कुछ देर बाद तबीयत ठीक होने पर उन्होंने दोबारा प्रोटेस्ट जॉइन किया। बाकी कलाकारों के शामिल न होने पर शबाना का जवाब बॉलीवुड सेलिब्रिटीज के न आने पर सवाल पूछा गया, तो शबाना ने कहा कि लोग सिर्फ फिल्मी सितारों की अनुपस्थिति पर बात करते हैं। कोई भी बड़े बिजनेसमैन या उद्योगपतियों के शामिल न होने पर सवाल नहीं उठाता। ऐसे सवाल पूछकर मुख्य मुद्दे को भटकाया जाता है और गैर-जरूरी विवाद खड़ा किया जाता है। दिलजीत दोसांझ बोले- छात्रों के साथ गलत हुआ दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, आज जो हुआ, बहुत गलत हुआ। छात्रों के साथ ऐसा बर्ताव नहीं होना चाहिए था। मैं अधिकारियों से अपील करता हूं कि वे छात्रों की मांगें सुनें। लोगों की आवाज ही भगवान की आवाज होती है। मुझे पहले भी कई बार ‘एंटी-नेशनल’ कहा गया है। अब भी शायद मुझे यही कहा जाएगा। किसान आंदोलन के बाद मुझे काफी विरोध और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिनके बारे में मैं खुलकर बात भी नहीं कर सकता। बाकी सब भगवान देख रहे हैं। भगवान सबका भला करें। कंगना ने आंदोलन को बताया दबाव बनाने की कोशिश सोमवार को कंगना रनोट ने कहा था कि मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए संसद सही जगह है, न कि सड़कें। उन्होंने कहा कि जनता ने एक सरकार चुनी है और सरकार चलाने का फैसला उसी का होना चाहिए। कंगना ने कहा की ये सब जंतर-मंतर पर हुड़दंग कर रहे हैं, उत्पात मचा रहे हैं। जिस तरह से आंदोलन चल रहा है वो ठीक नहीं है। प्रदर्शन के जरिए सरकार को यह तय करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता कि किसे पद पर रखना है और किसे हटाना है। हेमा मालिनी बोलीं- छात्रों को गुमराह न करें बीजेपी सांसद हेमा मालिनी ने भी न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में इस प्रदर्शन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आंदोलन से कुछ हासिल नहीं होने वाला है। मोदी सरकार देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। हेमा मालिनी ने कहा कि इस मामले को बातचीत से हल किया जाना चाहिए और इसमें शामिल छात्रों को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इन बड़े सेलेब्रिटीज ने भी किया आंदोलन का समर्थन जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन में शबाना आजमी और प्रकाश राज के अलावा कुणाल कामरा और स्वरा भास्कर भी जमीनी स्तर पर शामिल हुए हैं। वहीं सोनी राजदान, जीनत अमान, अभय देओल, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, ओमी वैद्य और सोनाक्षी सिन्हा ने सोशल मीडिया के जरिए इस मुहिम का समर्थन किया है। गीतकार जावेद अख्तर ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला खत लिखकर इस मामले पर बातचीत शुरू करने की मांग की है। इनके अलावा विशाल ददलानी, दीया मिर्जा और फिल्म मेकर ओनिर ने भी प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता जताई है।

सेंसेक्स में 300 अंक की गिरावट:77,100 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 100 अंक टूटा; IT और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली

सेंसेक्स में 300 अंक की गिरावट:77,100 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 100 अंक टूटा; IT और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली

शेयर बाजार में आज यानी 22 जुलाई को गिरावट है। सेंसेक्स 300 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 77,100 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी करीब 100 अंक की गिरावट है, ये 24,100 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। IT और बैंकिंग शेयर्स में आज ज्यादा बिकवाली है। एशियाई बाजारों में आज मिला-जुला कारोबार 21 जुलाई को अमेरिकी बाजार में बढ़त रही थी 7 दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹4,660 करोड़ के शेयर खरीदे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले कल यानी 21 जुलाई को शेयर बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 238 अंक नीचे 77,470 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 51 अंक की गिरावट रही, ये 24,188 के स्तर पर आ गया था।

अमेरिका ने ईरान के 5 शहरों पर बम बरसाए:लगातार 11वीं रात हमला; जंग में US 3 लाख करोड़ खर्च कर चुका

अमेरिका ने ईरान के 5 शहरों पर बम बरसाए:लगातार 11वीं रात हमला; जंग में US 3 लाख करोड़ खर्च कर चुका

अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान के पांच शहरों में एक साथ एयर और मिसाइल स्ट्राइक की। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक चाबहार, कोनारक, तबरीज, बेहबहान और ओमीदियेह को निशाना बनाया गया। यह लगातार 11वीं रात है, जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अब तक इस युद्ध पर अमेरिका का खर्च 37.5 अरब डॉलर (करीब 3.2 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच गया है। इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ईरान के संदिग्ध परमाणु ठिकाने पिकएक्स माउंटेन पर “बहुत जल्द और बहुत भारी” हमला कर सकता है। ट्रम्प की इस चेतावनी के जवाब में ईरान ने कहा कि यदि हमले जारी रहे तो वह क्षेत्र में युद्ध का दायरा और बढ़ा सकता है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… भारत-चीन के टैंकरों ने रास्ता बदला: सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत और चीन जा रहे दो टैंकर हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद रेड सी में यू-टर्न लेकर स्वेज नहर की ओर लौट गए। अमेरिका ने माना- ईरानी हमलों में 100 सैनिक घायल: पेंटागन ने स्वीकार किया कि 7 जुलाई के बाद ईरानी हमलों में करीब 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए। इनमें से 96% सैनिक इलाज के बाद ड्यूटी पर लौट चुके हैं। कतर ने ईरान से मुआवजा मांगा: कतर ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद को पत्र भेजकर ईरान को हालिया हमलों और उनसे हुए सभी नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया और पूरा मुआवजा देने की मांग की। ट्रम्प ने माना- जॉर्डन में एक ईरानी हमला सफल रहा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने माना कि जॉर्डन में ईरान का एक हमला सफल रहा। हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हुई थी। ईरानी गृह मंत्री पाकिस्तान पहुंचे: ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी पाकिस्तान पहुंचे और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की। बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी बातचीत की।