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एक रील बनाने के ₹76 लाख लेते हैं ओरी:बोले- शादी-बर्थडे पार्टी में बुलाने पर 25 लाख रुपए चार्ज करता हूं

एक रील बनाने के ₹76 लाख लेते हैं ओरी:बोले- शादी-बर्थडे पार्टी में बुलाने पर 25 लाख रुपए चार्ज करता हूं

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ओरी, जिनका असली नाम ओरहान अवत्रामानी है, लंबे समय से अपनी कमाई और प्रोफेशन को लेकर चर्चा में रहे हैं। अब उन्होंने खुद इस बात का खुलासा किया है कि वे पैसे कैसे कमाते हैं। एक पॉडकास्ट में ओरी ने बताया कि ब्रांड एंडोर्समेंट और स्पॉन्सर्ड कंटेंट उनकी कमाई का बड़ा जरिया है। उन्होंने एक रील के लिए 76 लाख रुपए तक लेने की बात स्वीकार की है। इसके अलावा, ओरी प्राइवेट इवेंट्स में शामिल होने के लिए भी मोटी फीस वसूलते हैं। उन्होंने अपने बिजनेस मॉडल और पर्सनल फाइनेंस मैनेजमेंट से जुड़ी कई बातें साझा की हैं। ओरी को पहली बार अंबानी परिवार के कार्यक्रमों शामिल होकर चर्चा में आए थे। शादियों में गेस्ट बनकर कमाते हैं लाखों ओरी ने के के क्रीऐशन के साथ अपने पॉडकास्ट में बताया कि कोई भी व्यक्ति उन्हें निजी कार्यक्रमों के लिए हायर कर सकता है। इसमें शादी, जन्मदिन, लंच या डिनर जैसे इवेंट्स शामिल हैं। ओरी के मुताबिक, इन इवेंट्स में शामिल होने के लिए वे 15 लाख से लेकर 25 लाख रुपए तक की फीस चार्ज करते हैं। उन्होंने इसे ‘खरीदे जा सकने वाले अनुभव’ के रूप में परिभाषित किया। ओरी ने कहा कि इतने पैसे में वे उस व्यक्ति के साथ घुल-मिलकर रहेंगे, स्पीच देंगे और परिवार के साथ समय भी बिताएंगे। शाहरुख खान से की अपनी सिग्नेचर पोज की तुलना पॉडकास्ट के दौरान ओरी ने अपने सिग्नेचर पोज का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि भारत में शाहरुख खान के अलावा केवल वही एक ऐसे व्यक्ति हैं, जो अपने सिग्नेचर पोज के लिए जाने जाते हैं। ओरी अक्सर बॉलीवुड सितारों के साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं, जिसमें उनका हाथ सामने वाले सेलिब्रिटी की छाती पर होता है। यह पोज सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रहता है और उनकी इसी पहचान को वे सेलिब्रिटी स्टारडम की तरह देखते हैं। देखें बॉलीवुड सेलेब्स के साथ ओरी कि तस्वीरें… पेरेंट्स संभालते हैं ओरी का पैसा सफल पर्सनल ब्रांड बनाने के बावजूद ओरी ने बताया कि वे आज भी अपनी कमाई का मैनेजमेंट खुद नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ही उनका पैसा संभालते हैं और उन्हें नहीं लगता कि भविष्य में इसमें कोई बदलाव आएगा। ओरी का मानना है कि वे इस मामले में अपने माता-पिता पर ही निर्भर रहेंगे। उनके इस जवाब ने लोगों को हैरान कर दिया, क्योंकि वे अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए काफी चर्चित रहते हैं। कौन हैं ओरहान अवत्रामानी? ओरी को पहली बार अंबानी परिवार के कार्यक्रमों और बॉलीवुड हस्तियों के साथ वैकेशन्स पर स्पॉट किया गया था। इंस्टाग्राम पर उनके 2.5 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। वे अक्सर जान्हवी कपूर, खुशी कपूर और इंडस्ट्री के अन्य बड़े सितारों के साथ देखे जाते हैं। ओरी ने अब तक बॉलीवुड के कई हाई-प्रोफाइल इवेंट्स में अपनी मौजूदगी से एक खास जगह बना ली है। वे अक्सर अपने क्रिप्टिक जवाबों के कारण भी चर्चा में रहते हैं।

एक रील बनाने के ₹76 लाख लेते हैं ओरी:बोले- शादी-बर्थडे पार्टी में बुलाने पर 25 लाख रुपए चार्ज करता हूं

एक रील बनाने के ₹76 लाख लेते हैं ओरी:बोले- शादी-बर्थडे पार्टी में बुलाने पर 25 लाख रुपए चार्ज करता हूं

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ओरी, जिनका असली नाम ओरहान अवत्रामानी है, लंबे समय से अपनी कमाई और प्रोफेशन को लेकर चर्चा में रहे हैं। अब उन्होंने खुद इस बात का खुलासा किया है कि वे पैसे कैसे कमाते हैं। एक पॉडकास्ट में ओरी ने बताया कि ब्रांड एंडोर्समेंट और स्पॉन्सर्ड कंटेंट उनकी कमाई का बड़ा जरिया है। उन्होंने एक रील के लिए 76 लाख रुपए तक लेने की बात स्वीकार की है। इसके अलावा, ओरी प्राइवेट इवेंट्स में शामिल होने के लिए भी मोटी फीस वसूलते हैं। उन्होंने अपने बिजनेस मॉडल और पर्सनल फाइनेंस मैनेजमेंट से जुड़ी कई बातें साझा की हैं। ओरी को पहली बार अंबानी परिवार के कार्यक्रमों शामिल होकर चर्चा में आए थे। शादियों में गेस्ट बनकर कमाते हैं लाखों ओरी ने के के क्रीऐशन के साथ अपने पॉडकास्ट में बताया कि कोई भी व्यक्ति उन्हें निजी कार्यक्रमों के लिए हायर कर सकता है। इसमें शादी, जन्मदिन, लंच या डिनर जैसे इवेंट्स शामिल हैं। ओरी के मुताबिक, इन इवेंट्स में शामिल होने के लिए वे 15 लाख से लेकर 25 लाख रुपए तक की फीस चार्ज करते हैं। उन्होंने इसे ‘खरीदे जा सकने वाले अनुभव’ के रूप में परिभाषित किया। ओरी ने कहा कि इतने पैसे में वे उस व्यक्ति के साथ घुल-मिलकर रहेंगे, स्पीच देंगे और परिवार के साथ समय भी बिताएंगे। शाहरुख खान से की अपनी सिग्नेचर पोज की तुलना पॉडकास्ट के दौरान ओरी ने अपने सिग्नेचर पोज का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि भारत में शाहरुख खान के अलावा केवल वही एक ऐसे व्यक्ति हैं, जो अपने सिग्नेचर पोज के लिए जाने जाते हैं। ओरी अक्सर बॉलीवुड सितारों के साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं, जिसमें उनका हाथ सामने वाले सेलिब्रिटी की छाती पर होता है। यह पोज सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रहता है और उनकी इसी पहचान को वे सेलिब्रिटी स्टारडम की तरह देखते हैं। देखें बॉलीवुड सेलेब्स के साथ ओरी कि तस्वीरें… पेरेंट्स संभालते हैं ओरी का पैसा सफल पर्सनल ब्रांड बनाने के बावजूद ओरी ने बताया कि वे आज भी अपनी कमाई का मैनेजमेंट खुद नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ही उनका पैसा संभालते हैं और उन्हें नहीं लगता कि भविष्य में इसमें कोई बदलाव आएगा। ओरी का मानना है कि वे इस मामले में अपने माता-पिता पर ही निर्भर रहेंगे। उनके इस जवाब ने लोगों को हैरान कर दिया, क्योंकि वे अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए काफी चर्चित रहते हैं। कौन हैं ओरहान अवत्रामानी? ओरी को पहली बार अंबानी परिवार के कार्यक्रमों और बॉलीवुड हस्तियों के साथ वैकेशन्स पर स्पॉट किया गया था। इंस्टाग्राम पर उनके 2.5 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। वे अक्सर जान्हवी कपूर, खुशी कपूर और इंडस्ट्री के अन्य बड़े सितारों के साथ देखे जाते हैं। ओरी ने अब तक बॉलीवुड के कई हाई-प्रोफाइल इवेंट्स में अपनी मौजूदगी से एक खास जगह बना ली है। वे अक्सर अपने क्रिप्टिक जवाबों के कारण भी चर्चा में रहते हैं।

G7 समिट के बीच कई खालिस्तान समर्थक अरेस्ट:फ्रांस में PM मोदी के काफिले को रोकने की साजिश रच रहे थे, SFJ से जुड़े

G7 समिट के बीच कई खालिस्तान समर्थक अरेस्ट:फ्रांस में PM मोदी के काफिले को रोकने की साजिश रच रहे थे, SFJ से जुड़े

फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के बीच पुलिस ने प्रतिबंधित संगठन सिख फार जस्टिस (SFJ) से जुड़े कई खालिस्तान समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है। फ्रांस की खुफिया एजेंसी के अनुसार, ये सभी पीएम मोदी के दौरे के दौरान काफिले को रोकने की साजिश रच रहे थे। फ्रांस पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच बैठक के बाद ये खालिस्तानी समर्थक विरोध-प्रदर्शन करने वाले थे। और पीएम मोदी के काफिले को भी घेरने वाले थे। इसके बाद फ्रांसीसी सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत एक्शन लेते हुए सभी को गिरफ्तार कर लिया। पढ़ें क्या है पूरा मामला… भारत-फ्रांस के बीच खुफिया सहयोग की भूमिका जानकारी के अनुसार, पुलिस के इस एक्शन में भारत-फ्रांस के बीच सुरक्षा एवं खुफिया सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों देशों की एजेंसियों के बीच समन्वय के चलते किसी भी संभावित सुरक्षा खतरे को पहले ही खत्म किय गया। भारत-फ्रांस के मजबूत कूटनीतिक संबंध का उदाहरण हालांकि, फ्रांसीसी अधिकारियों की ओर से गिरफ्तार व्यक्तियों की संख्या और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, इस कार्रवाई को भारत-फ्रांस के मजबूत सुरक्षा और कूटनीतिक सहयोग का उदाहरण माना जा रहा है। G7 सम्मेलन के दौरान कार्रवाई गौरतलब है कि खालिस्तान समर्थक गतिविधियों और SFJ से जुड़े मामलों को लेकर भारत लगातार विभिन्न देशों के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर देता रहा है। G7 सम्मेलन के दौरान हुई यह कार्रवाई उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। G-7 समिट में मोदी 16 महीने बाद ट्रम्प से मिले G-7 समिट के लिए मंगलवार दोपहर एवियन पहुंचने पर मोदी का फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्वागत किया। G-7 के देशों के राष्ट्राध्याक्षों ने ग्रुप फोटो भी खिंचवाई। पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच फ्रांस के एवियन शहर में G-7 समिट के दौरान मुलाकात हुई। दोनों के बीच करीब 5 मिनट तक बात हुई। मीटिंग में दोनों एक-साथ बैठे नजर आए। यह मुलाकात 16 महीनों के बाद हुई है। प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति G7 आउटरीच सेशन में भी साथ-साथ बैठे नजर आए। दोनों की पिछली मुलाकात फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में हुई थी। इसी बीच मोदी और इटालियन पीएम जॉर्जिया मेलोनी की बातचीत भी हुई। मेलोनी ने मोदी से कहा- दोबारा मिलकर अच्छा लगा, हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस हैं। मोदी पिछले महीने 5 देशों के दौरे पर गए थे। जहां उन्होंने रोम में पीएम मेलोनी को मेलोडी टॉफी दी थी। जिसका वीडियो वायरल हो गया था।

डबल-इंजन ड्राइव: क्यों जितिन प्रसाद आश्वस्त हैं कि बीजेपी यूपी चुनाव में जीत हासिल करेगी | News18 इंडिया अमृत रत्न सम्मान | भारत समाचार

England vs New Zealand Live Score: Follow the latest updates from Day 1 of the 2nd Test. (AP Photo)

आखरी अपडेट:17 जून, 2026, 17:15 IST मंत्री ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में एकजुट मोर्चा बनाने के विपक्ष के नए प्रयासों को पूरी तरह से खारिज कर दिया प्रसाद ने जोर देकर कहा कि भाजपा की दुर्जेय संगठनात्मक मशीनरी पहले से ही राज्य के हर मतदान केंद्र पर सभी सिलेंडरों पर काम कर रही है। फ़ाइल चित्र/पीटीआई आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनावी संभावनाओं के बारे में पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए, केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि पार्टी भारी जनादेश हासिल करने के लिए तैयार है। बुधवार को न्यूज 18 इंडिया अमृत रत्न सम्मान कॉन्क्लेव में, मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अभियान का मुख्य आधार “डबल-इंजन” शासन मॉडल की दृश्यमान उपलब्धियां होंगी, जिसमें नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने के साथ कानून और व्यवस्था पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अडिग रुख को शामिल किया जाएगा। प्रसाद ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में एकजुट मोर्चा बनाने के विपक्ष के नए प्रयासों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता ऐतिहासिक रूप से अस्थिरता, प्रणालीगत नीतिगत पक्षाघात और जाति-आधारित गठबंधन से जुड़े समझौता कानून प्रवर्तन से पीड़ित रहे हैं। मंत्री के अनुसार, मतदाता पूरी तरह से खंडित पहचान की राजनीति से आगे निकल चुके हैं और शासन मॉडल में किसी भी प्रतिगामी वापसी को दृढ़ता से खारिज कर देंगे जो अराजकता को सहन करते हैं या सांप्रदायिक समझौतों के लिए विकास की गति को रोकते हैं। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश के मतदाता पहले ही अवसरवादी, जाति-संचालित गठबंधनों की अराजक अस्थिरता का स्वाद चख चुके हैं। वे प्रशासनिक पंगुता की वापसी के लिए पारदर्शी शासन और व्यक्तिगत सुरक्षा का सौदा नहीं करेंगे।” परिचालन तत्परता की ओर मुड़ते हुए, प्रसाद ने जोर देकर कहा कि भाजपा की दुर्जेय संगठनात्मक मशीनरी पहले से ही राज्य के हर मतदान केंद्र पर सभी सिलेंडरों पर काम कर रही है। प्रतिद्वंद्वी गुटों के विपरीत, जो मौसमी गठबंधनों और ग्यारहवें घंटे की सीट-बंटवारे की व्यवस्था पर भरोसा करते हैं, सत्तारूढ़ पार्टी के जमीनी स्तर के कैडर निरंतर सार्वजनिक जुड़ाव बनाए रखते हैं, राज्य कल्याण पहलों को सीधे जमीनी स्तर की सद्भावना में अनुवाद करते हैं। मंत्री ने दोहराया कि भाजपा का अभियान समावेशी विकास और पारदर्शी प्रशासन के उसके सत्यापित ट्रैक रिकॉर्ड से सख्ती से जुड़ा रहेगा। विपक्ष के जाति-केंद्रित अंकगणित में शामिल होने से इनकार करके, प्रसाद ने संकेत दिया कि प्रदर्शन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए उनकी पार्टी की सीधी अपील क्षेत्रीय विखंडन को खत्म कर देगी, जिससे राज्य विधानसभा में अजेय बहुमत का रास्ता साफ हो जाएगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया डबल-इंजन ड्राइव: क्यों जितिन प्रसाद आश्वस्त हैं कि बीजेपी यूपी चुनाव में जीत हासिल करेगी | न्यूज18 इंडिया अमृत रत्न सम्मान अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)उत्तर प्रदेश(टी)चुनाव(टी)बीजेपी(टी)योगी आदित्यनाथ(टी)डबल इंजन(टी)नरेंद्र मोदी(टी)यूपी

‘घुटन और खंडित’: कैसे जितिन प्रसाद को विपक्ष के सुलझने की आशंका | News18 इंडिया अमृत रत्न सम्मान | भारत समाचार

England vs New Zealand Live Score: Follow the latest updates from Day 1 of the 2nd Test. (AP Photo)

आखरी अपडेट:17 जून, 2026, 16:49 IST मंत्री के अनुसार, कई विपक्षी सांसद निजी तौर पर अपनी पार्टी के आलाकमानों द्वारा अपनाए गए पूरी तरह से अवरोधक दृष्टिकोण से निराश हैं। जितिन प्रसाद केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री हैं। फ़ाइल चित्र/पीटीआई विपक्षी गुट पर तीखा हमला करते हुए, केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि आंतरिक असंतोष और संरचनात्मक विखंडन तेजी से प्रतिद्वंद्वी दलों की एकता को खत्म कर रहे हैं। बुधवार को न्यूज18 इंडिया अमृत रत्न सम्मान कॉन्क्लेव में बोलते हुए, मंत्री ने दावा किया कि विपक्षी सांसदों के बीच विद्रोह की लहर पनप रही है, जो अपने शीर्ष नेतृत्व की दिशाहीन रणनीति और वंशवादी राजनीति पर निर्भरता से घुटन महसूस कर रहे हैं। प्रसाद के अनुसार, कई विपक्षी सांसद निजी तौर पर संसद में अपनी पार्टी के आलाकमानों द्वारा अपनाए गए पूरी तरह से अवरोधक दृष्टिकोण से निराश हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इन निर्वाचित प्रतिनिधियों को स्थानीय विकासात्मक परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अपने संबंधित मतदाताओं से भारी दबाव का सामना करना पड़ता है। नतीजतन, रचनात्मक नीति निर्धारण के बजाय निरंतर राजनीतिक टकराव के चक्र में मजबूर होने के कारण कई लोग वास्तविक प्रगति के लिए एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के विकास-केंद्रित एजेंडे की ओर देखने लगे हैं। उन्होंने कहा, “विपक्षी सांसद तेजी से एक वैचारिक शून्यता में फंसे हुए महसूस कर रहे हैं, जहां व्यक्तिगत वंशवादी हित नियमित रूप से आम नागरिक की विकास संबंधी जरूरतों पर हावी हो जाते हैं।” मंत्री ने इस आंतरिक कलह को एक अलग घटना के रूप में नहीं बल्कि विपक्ष के संयुक्त मोर्चे की संस्थागत विफलता के रूप में बताया। प्रसाद ने इस बात पर प्रकाश डाला कि महत्वपूर्ण राज्य विधानसभा चुनावों से पहले ये आंतरिक दरारें अनिवार्य रूप से चौड़ी हो गई हैं, सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिरता और पारदर्शी शासन मॉडल उन सांसदों को आकर्षित करना जारी रखेगा जो अपने निर्वाचन क्षेत्रों के प्रति जवाबदेह हैं। कॉन्क्लेव का संबोधन सत्तारूढ़ भाजपा की पूर्ण नीतिगत एकजुटता की छवि पेश करने की रणनीति को रेखांकित करता है, जबकि विपक्ष को एक खंडित, अस्थिर गठबंधन के रूप में चित्रित करता है जो अपरिहार्य टूटने की ओर बढ़ रहा है। मंत्री ने संकेत दिया कि विघटनकारी राजनीति के प्रति जनता का धैर्य पूरी तरह खत्म हो गया है, जिससे विपक्ष का शीर्ष नेतृत्व मतदाताओं और अपने स्वयं के सामान्य सदस्यों दोनों से अलग-थलग पड़ गया है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘घुटन और खंडित’: कैसे जितिन प्रसाद को विपक्ष के सुलझने की आशंका | न्यूज18 इंडिया अमृत रत्न सम्मान अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

न्यूज़18 इंडिया अमृत भारत सम्मान 2026 में, किरेन रिजिजू ने संजय राउत के अवैध शिकार के आरोपों को खारिज कर दिया: ‘हम लिप्त नहीं हैं…’ | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:17 जून, 2026, 16:09 IST मंत्री ने संजय राउत की भाषा और राजनीतिक आचरण की भी आलोचना की और कहा कि जन प्रतिनिधियों को अपनी टिप्पणियों में मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। रिजिजू की टिप्पणी तब आई जब राउत ने आरोप लगाया कि शिवसेना (यूबीटी) को विभाजित करने के प्रयास चल रहे हैं और दावा किया गया है कि पार्टी के सांसदों को बड़ी रकम की पेशकश की गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के आरोपों को खारिज कर दिया कि सत्तारूढ़ दल मौद्रिक प्रलोभन के माध्यम से दलबदल कराने का प्रयास कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि भाजपा “पैसे की राजनीति” में शामिल नहीं होती है। नई दिल्ली में न्यूज18 इंडिया अमृत भारत सम्मान 2026 कार्यक्रम में बोलते हुए, रिजिजू ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) खेमे के भीतर चल रहे घटनाक्रम में भाजपा की कोई भूमिका नहीं है और सवाल किया कि जब संबंधित सांसद भाजपा में शामिल नहीं हो रहे हैं तो उनकी पार्टी को कैसे दोषी ठहराया जा सकता है। रिजिजू ने राउत के आरोपों के जवाब में कहा, “ऐसा कुछ नहीं है। उन्हें ऐसे बयान देने की आदत है। हम पैसे की राजनीति नहीं करते। हम अच्छी राजनीति करते हैं। हम अच्छा काम करना चाहते हैं। जो लोग हमसे जुड़ना चाहते हैं वे हमसे जुड़ सकते हैं।” मंत्री ने राउत की अभद्र भाषा और राजनीतिक आचरण की भी आलोचना की और कहा कि जन प्रतिनिधियों को अपनी टिप्पणियों में मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। रिजिजू ने कहा, “मैंने उन्हें राज्यसभा में देखा है और उनके भाषण सुने हैं। वह अनुचित भाषा का इस्तेमाल करते हैं। हम सभी को सभ्य भाषा का इस्तेमाल करने के लिए कहते हैं। उन्हें लोगों को गाली नहीं देनी चाहिए। इससे स्थिति नहीं बदलेगी।” शिवसेना (यूबीटी) के भीतर अशांति की रिपोर्टों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “अगर उनके सांसद उन्हें छोड़ रहे हैं, तो हम क्या कर सकते हैं? वे भाजपा में शामिल नहीं हो रहे हैं। अगर दो पार्टियां एक-दूसरे से बात कर रही हैं, तो मैं उस प्रक्रिया में कैसे हस्तक्षेप कर सकता हूं?” रिजिजू की टिप्पणी तब आई जब राउत ने आरोप लगाया कि शिवसेना (यूबीटी) को विभाजित करने के प्रयास चल रहे हैं और दावा किया गया है कि पार्टी के सांसदों को बड़ी रकम की पेशकश की गई है। इससे पहले दिन में, राउत ने कहा कि उन्हें जानकारी है कि विद्रोह में कथित रूप से शामिल प्रत्येक सांसद को 15 करोड़ रुपये पहुंचाए गए थे। “मुझे जानकारी है कि प्रत्येक सांसद को 15 करोड़ रुपये दिए गए, जिसके बाद वे नांदेड़ और पुणे सहित तीन स्थानों से चार्टर उड़ानों में सवार हुए। हमने कल संसदीय दल की बैठक के लिए व्हिप जारी किया है। अरविंद जी (अरविंद सावंत) ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा है, “राउत ने कहा। इस बीच, भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने भी कथित तौर पर संदिग्ध विद्रोही सांसदों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के लिए राउत की आलोचना की। पाल ने कहा, “क्या राजनीतिक जीवन इतने निचले स्तर पर गिर जाएगा? उन्होंने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है, वह एक सामान्य व्यक्ति के लिए भी अकल्पनीय है। शायद यह उनकी हताशा है। उन्हें आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और विचार करना चाहिए कि पार्टी ऐसी स्थिति में क्यों पहुंच गई है। इसका मतलब है कि किसी को भी अपने नेतृत्व पर भरोसा नहीं है।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में -सौरभ वर्मावरिष्ठ उपसंपादक सौरभ वर्मा मुख्य उप-संपादक के रूप में News18.com के लिए सामान्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दैनिक समाचारों को कवर करते हैं। वह राजनीति पर गहरी नजर रखते हैं। आप उन्हें ट्विटर –twitter.com/saurbhkverma19 पर फ़ॉलो कर सकते हैं न्यूज़ इंडिया न्यूज18 इंडिया अमृत भारत सम्मान 2026 में किरेन रिजिजू ने संजय राउत के अवैध शिकार के आरोपों को खारिज किया: ‘हम इसमें शामिल नहीं हैं…’ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)किरेन रिजिजू पर पैसे की राजनीति के आरोप(टी)किरेन रिजिजू(टी)संजय राउत(टी)शिवसेना यूबीटी(टी)भाजपा दलबदल(टी)पैसे की राजनीति से इनकार(टी)15 करोड़ रुपये की पेशकश(टी)विद्रोही सांसद

मेस्सी की कोलकाता यात्रा के दौरान सुरक्षा उल्लंघन का आरोप | टीम मेसी ने जताई चिंताएं | न्यूज18

मेस्सी की कोलकाता यात्रा के दौरान सुरक्षा उल्लंघन का आरोप | टीम मेसी ने जताई चिंताएं | न्यूज18

कोलकाता में लियोनेल मेस्सी की बहुप्रतीक्षित उपस्थिति ने कार्यक्रम के दौरान गंभीर सुरक्षा प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप सामने आने के बाद विवाद को जन्म दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टीएमसी के एक मंत्री अरूप ने सुरक्षा प्रतिबंधों के बावजूद मैदान में प्रवेश किया, जबकि लगभग 40 गैर-मान्यता प्राप्त फोटोग्राफरों ने कथित तौर पर प्रतिबंधित क्षेत्रों तक पहुंच प्राप्त की, जिससे भीड़ प्रबंधन और कार्यक्रम सुरक्षा पर चिंता बढ़ गई। सूत्रों का सुझाव है कि टीम मेस्सी ने पहुंच नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था में कथित खामियों पर चिंता व्यक्त की है। आरोपों ने हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के दौरान इवेंट प्रबंधन मानकों और वीआईपी प्रोटोकॉल अनुपालन पर बहस शुरू कर दी है। n18oc_ Indian18oc_politicsn18oc_breaking-newsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 17 जून, 2026, 15:43 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)अरूप बिस्वास(टी)ब्रेकिंग न्यूज(टी)भीड़ नियंत्रण(टी)इवेंट मैनेजमेंट(टी)इवेंट सुरक्षा(टी)फुटबॉल समाचार(टी)फुटबॉल अपडेट(टी)भारत समाचार(टी)अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल(टी)कोलकाता इवेंट(टी)कोलकाता समाचार(टी)नवीनतम खेल समाचार(टी)लियोनेल मेसी(टी)मेस्सी(टी)मेस्सी उपस्थिति(टी)मेस्सी प्रशंसक(टी)मेस्सी भारत यात्रा(टी)मेसी कोलकाता(टी)मेस्सी नवीनतम समाचार(टी)सुरक्षा उल्लंघन(टी)सुरक्षा चूक(टी)खेल विवाद(टी)खेल समाचार(टी)खेल अपडेट(टी)टीम मेसी(टी)टीएमसी मंत्री(टी)गैर मान्यता प्राप्त फोटोग्राफर(टी)वायरल समाचार(टी)पश्चिम बंगाल समाचार

परप्लेक्सिटी के सीईओ अरविंद श्रीनिवास का गुरुमंत्र:एआई के दौर में आइडिया खोने के डर को फ्यूल बनाएं, शीर्ष पर बने रहेंगे

परप्लेक्सिटी के सीईओ अरविंद श्रीनिवास का गुरुमंत्र:एआई के दौर में आइडिया खोने के डर को फ्यूल बनाएं, शीर्ष पर बने रहेंगे

‘बिलियन डॉलर की कंपनी बनाना मुश्किल है, लेकिन उससे भी बड़ी चुनौती है दूसरों को अपना आइडिया चुराने से रोकना और उससे बेहतर बनाने से बचाना’… एआई सर्च इंजन ‘परप्लेक्सिटी’ के सीईओ अरविंद श्रीनिवास ने हाल में एक पॉडकॉस्ट में टेक दिग्गजों से मिली सीख साझा की, पढ़िए… बढ़ती चुनौतियों पर – ‘अगर आपका आइडिया बड़ा है और वह करोड़ों डॉलर कमा सकता है, तो मानकर चलिए कि बड़ी कंपनियां आपकी नकल जरूर करेंगी। आपको इस डर के साथ जीना और इसे गले लगाना सीखना होगा। उस डर के साथ सोना, उसी के साथ उठना, और हर दिन यह उत्साह रखना कि आप क्या बना रहे हैं- यही आगे बढ़ाता है। स्टार्टअप की यात्रा लंबी होती है। थकान आती है। अनिश्चितता रहती है। ऐसे में वही लोग टिकते हैं जो दबाव को ऊर्जा में बदलते हैं। मैं इसे ‘फ्यूल’ की तरह देखता हूं। यानी डर आपको तेज बनाता है। सतर्क रखता है। सुधार के लिए मजबूर करता है। यह बात एआई जैसे क्षेत्र में अहम है, जहां बदलाव तेज है और प्रतिस्पर्धी हर तरफ हैं। इनोवेशन पर – बढ़त तेजी से मूव करने और पहचान बनाने से आती है। फीचर कॉपी हो सकते हैं, पर ब्रांड, भरोसा, आदतें व यूजर एक्सपीरियंस कॉपी करना मुश्किल है। अंत में फर्क यूजर को पड़ता है… कौन बेहतर सर्च अनुभव व उपयोगी जवाब दे रहा है और तेजी से सुधार कर रहा है। इसी सोच से परप्लेक्सिटी ने एआई-पावर्ड सर्च इंजन बनाया, जो गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ओपनएआई, एंथ्रोपिक जैसे प्लेयर्स की इनोवेशन रेस में चर्चा में रहा। भविष्य पर – एआई की यह जंग जितनी डरावनी है, उतनी ही रोमांचक भी। जीत उसी की होगी जो डरकर रुकने के बजाय लगातार दौड़ता रहेगा। सैम ऑल्टमैन और मार्क क्यूबन जैसी दिग्गज भविष्यवाणी कर रहे हैं कि एआई आने वाले समय में नए अरबपतियों और ट्रिलियनेयर्स की बाढ़ ला देगा, ऐसे में स्टार्टअप्स को बढ़ती प्रतियोगिता से डरने के बजाय इसे अपनी ताकत बनाना चाहिए। वर्क-लाइफ बैलेंस पर – दुख की बात है कि मैं काम के अलावा और कुछ नहीं करता। जब भी समय मिलता है, पॉडकास्ट या ऑडियोबुक्स सुन लेता हूं। हालांकि वीकेंड पर परिवार के लिए वक्त निकालता हूं। हफ्ते में तीन दिन जिम भी जाता हूं… कड़ी मेहनत का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। हर सुबह इस रोमांच के साथ उठना जरूरी है कि आप कुछ नया बना रहे हैं दिग्गजों से सीख – शीर्ष पर होते हुए भी सहज कैसे रहा जा सकता है ये मैंने दो टेक दिग्गजों से सीखा। दुनिया की सबसे एडवांस एआई चिप्स बनाने वाले जेंसेन हुआंग हमेशा इस खौफ और मानसिकता के साथ काम करते हैं कि उनकी कंपनी दिवालिया होने से महज 30 दिन दूर है। यही डर उन्हें कभी सुस्त नहीं होने देता। दूसरी तरफ, इलॉन मस्क से सीखा कि काम सिर्फ पैसों के लिए नहीं होना चाहिए। मस्क की दौलत नहीं, बल्कि मंगल ग्रह पर 10 लाख लोगों को बसाने का उनका जुनून मुझे प्रेरित करता है।’

ब्रिटेन में सबसे पुराने भारतीय-रेस्तरां पर बंद होने का खतरा:वीरास्वामी की 100 साल पुरानी लीज खत्म, मालिक कोर्ट पहुंचे

ब्रिटेन में सबसे पुराने भारतीय-रेस्तरां पर बंद होने का खतरा:वीरास्वामी की 100 साल पुरानी लीज खत्म, मालिक कोर्ट पहुंचे

ब्रिटेन में मौजूद सबसे पुराना भारतीय रेस्तरां वीरास्वामी बंद होने का खतरा बढ़ गया है। जिस इमारत में यह रेस्तरां चलता है, उसका मालिक क्राउन एस्टेट है। क्राउन एस्टेट ब्रिटेन की एक बड़ी सरकारी संपत्ति संस्था है, जो राजा या रानी के नाम पर चलती है। अब क्राउन एस्टेट वीरास्वामी की इमारत में कुछ बदलाव और नया निर्माण करना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने रेस्तरां का किराये का समझौता (लीज) आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। वीरास्वामी रेस्तरां की जून 2025 में लीज खत्म हो गई थी। रेस्तरां का कहना है कि अगर लीज नहीं बढ़ाई गई तो उसे 100 साल पुरानी अपनी जगह छोड़नी पड़ेगी। इसलिए उसने इस फैसले को चुनौती देने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। 100 साल से चल रहा रेस्तरां वीरास्वामी की शुरुआत अप्रैल 1926 में हुई थी। यह सिर्फ एक रेस्तरां नहीं बल्कि ब्रिटेन में भारतीय खाने के इतिहास का अहम हिस्सा माना जाता है। पिछले एक सदी में यहां कई मशहूर लोग आ चुके हैं। इनमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल, अभिनेत्री विवियन ली, अभिनेता मार्लन ब्रैंडो, लॉरेंस ओलिवियर, चार्ली चैपलिन और यहां तक कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय भी शामिल हैं। रेस्तरां का मेन्यू भारत में जन्मे एडवर्ड पामर ने तैयार किया था। उन्हें हैदराबाद के शाही महल में बनने वाले व्यंजनों की रेसिपी अपनी दादी से मिली थी और उसी से प्रेरित होकर उन्होंने यहां का खाना तैयार किया। करी के साथ बीयर पीने की परंपरा यहीं से शुरू हुई वीरास्वामी को 2016 में मिशेलिन स्टार मिला था। यह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित रेस्तरां सम्मानों में से एक है। रेस्तरां से जुड़ा एक दिलचस्प दावा भी किया जाता है। कहा जाता है कि इंग्लैंड में करी के साथ बीयर पीने की आदत सबसे पहले इसी रेस्तरां से शुरू हुई थी। रेस्तरां के मालिकों के मुताबिक, डेनमार्क के राजा जब भी लंदन आते थे, तो वीरास्वामी में खाना खाने जरूर पहुंचते थे। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी पसंदीदा कार्ल्सबर्ग बीयर का एक पूरा पीपा रेस्तरां में रखवा दिया था ताकि जब भी वे करी खाने आएं, वही बीयर उन्हें परोसी जा सके। यह रेस्तरां दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मन बमबारी (ब्लिट्ज) से भी बच गया। उसने रेस्तरां उद्योग के उतार-चढ़ाव भी देखे, लेकिन अब एक साल से चल रही कानूनी लड़ाई के बाद उसके अस्तित्व पर सवाल खड़ा हो गया है। 29 जून से 5 दिन चलेगी सुनवाई वीरास्वामी की मूल कंपनी एमडब्ल्यू ईट (MW Eat) 29 जून से शुरू होने वाली पांच दिन की सुनवाई में सेंट्रल लंदन काउंटी कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी। क्राउन एस्टेट का कहना है कि वह विक्ट्री हाउस नाम की इमारत के ऊपरी मंजिलों पर मौजूद दफ्तरों में बदलाव करना चाहता है। ये दफ्तर 2023 में आई बाढ़ के बाद बिजली व्यवस्था प्रभावित होने से खाली पड़े हैं। योजना के तहत रेस्तरां और दफ्तरों की एंट्री पॉइंट के बीच की दीवार हटाकर एक बड़ा रिसेप्शन एरिया बनाया जाएगा। क्राउन एस्टेट का कहना है कि इससे वह ऑफिस का किराया काफी बढ़ा सकेगा। हालांकि, रेस्तरां के मालिक इस तर्क से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि मरम्मत और नवीनीकरण का काम रेस्तरां को हटाए बिना भी किया जा सकता है। क्राउन एस्टेट ने जून 2025 में वीरास्वामी रेस्तरां की सालाना 2.05 लाख पाउंड (करीब 2.6 करोड़ रुपए) की लीज को रेन्यू करने से मना कर दिया था। अगर अदालत में रेस्तरां हार जाता है तो जिस जगह पर वह अभी चल रहा है, उसे दफ्तरों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। 50 लाख पाउंड तक पहुंच सकता है खर्च रेस्तरां की मालिक कंपनी एमडब्ल्यू ईट का कहना है कि अगर उसे 100 साल पुरानी इस जगह को छोड़ना पड़ा, तो मामला सिर्फ सामान उठाकर दूसरी जगह जाने का नहीं होगा। कंपनी के मुताबिक, सबसे पहले उसे लंदन के वेस्ट एंड जैसे महंगे इलाके में कोई नई जगह ढूंढनी पड़ेगी। इसके बाद उस जगह को वीरास्वामी जैसे प्रतिष्ठित रेस्तरां के स्तर के अनुरूप तैयार करना होगा। इसमें रसोई, डाइनिंग एरिया, इंटीरियर, फर्नीचर, बिजली-पानी की व्यवस्था और लाइसेंस जैसी कई चीजों पर बड़ा खर्च आएगा। इसके अलावा, स्थानांतरण के दौरान रेस्तरां को कुछ समय के लिए बंद भी करना पड़ सकता है। इस दौरान उसकी आय पूरी तरह रुक जाएगी, जबकि कर्मचारियों का वेतन, प्रशासनिक खर्च और अन्य भुगतान जारी रहेंगे। कंपनी का कहना है कि 100 साल पुरानी पहचान वाली जगह छोड़ने से ग्राहकों का एक हिस्सा भी खो सकता है, जिसका आर्थिक असर अलग होगा। इन्हीं सभी खर्चों को जोड़कर एमडब्ल्यू ईट का अनुमान है कि नई जगह पर जाने की कुल लागत करीब 50 लाख पाउंड (लगभग 57-58 करोड़ रुपये) तक पहुंच सकती है। कंपनी का आरोप है कि क्राउन एस्टेट ने जो आर्थिक मुआवजा देने की पेशकश की है, वह इस अनुमानित खर्च का केवल एक छोटा हिस्सा ही कवर करेगा। इसलिए उनके लिए दूसरी जगह जाना आर्थिक रूप से बेहद मुश्किल होगा।

ब्रिटेन में सबसे पुराने भारतीय-रेस्तरां पर बंद होने का खतरा:वीरास्वामी की 100 साल पुरानी लीज खत्म, मालिक कोर्ट पहुंचे

ब्रिटेन में सबसे पुराने भारतीय-रेस्तरां पर बंद होने का खतरा:वीरास्वामी की 100 साल पुरानी लीज खत्म, मालिक कोर्ट पहुंचे

ब्रिटेन में मौजूद सबसे पुराना भारतीय रेस्तरां वीरास्वामी बंद होने का खतरा बढ़ गया है। जिस इमारत में यह रेस्तरां चलता है, उसका मालिक क्राउन एस्टेट है। क्राउन एस्टेट ब्रिटेन की एक बड़ी सरकारी संपत्ति संस्था है, जो राजा या रानी के नाम पर चलती है। अब क्राउन एस्टेट वीरास्वामी की इमारत में कुछ बदलाव और नया निर्माण करना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने रेस्तरां का किराये का समझौता (लीज) आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। वीरास्वामी रेस्तरां की जून 2025 में लीज खत्म हो गई थी। रेस्तरां का कहना है कि अगर लीज नहीं बढ़ाई गई तो उसे 100 साल पुरानी अपनी जगह छोड़नी पड़ेगी। इसलिए उसने इस फैसले को चुनौती देने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। 100 साल से चल रहा रेस्तरां वीरास्वामी की शुरुआत अप्रैल 1926 में हुई थी। यह सिर्फ एक रेस्तरां नहीं बल्कि ब्रिटेन में भारतीय खाने के इतिहास का अहम हिस्सा माना जाता है। पिछले एक सदी में यहां कई मशहूर लोग आ चुके हैं। इनमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल, अभिनेत्री विवियन ली, अभिनेता मार्लन ब्रैंडो, लॉरेंस ओलिवियर, चार्ली चैपलिन और यहां तक कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय भी शामिल हैं। रेस्तरां का मेन्यू भारत में जन्मे एडवर्ड पामर ने तैयार किया था। उन्हें हैदराबाद के शाही महल में बनने वाले व्यंजनों की रेसिपी अपनी दादी से मिली थी और उसी से प्रेरित होकर उन्होंने यहां का खाना तैयार किया। करी के साथ बीयर पीने की परंपरा यहीं से शुरू हुई वीरास्वामी को 2016 में मिशेलिन स्टार मिला था। यह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित रेस्तरां सम्मानों में से एक है। रेस्तरां से जुड़ा एक दिलचस्प दावा भी किया जाता है। कहा जाता है कि इंग्लैंड में करी के साथ बीयर पीने की आदत सबसे पहले इसी रेस्तरां से शुरू हुई थी। रेस्तरां के मालिकों के मुताबिक, डेनमार्क के राजा जब भी लंदन आते थे, तो वीरास्वामी में खाना खाने जरूर पहुंचते थे। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी पसंदीदा कार्ल्सबर्ग बीयर का एक पूरा पीपा रेस्तरां में रखवा दिया था ताकि जब भी वे करी खाने आएं, वही बीयर उन्हें परोसी जा सके। यह रेस्तरां दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मन बमबारी (ब्लिट्ज) से भी बच गया। उसने रेस्तरां उद्योग के उतार-चढ़ाव भी देखे, लेकिन अब एक साल से चल रही कानूनी लड़ाई के बाद उसके अस्तित्व पर सवाल खड़ा हो गया है। 29 जून से 5 दिन चलेगी सुनवाई वीरास्वामी की मूल कंपनी एमडब्ल्यू ईट (MW Eat) 29 जून से शुरू होने वाली पांच दिन की सुनवाई में सेंट्रल लंदन काउंटी कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी। क्राउन एस्टेट का कहना है कि वह विक्ट्री हाउस नाम की इमारत के ऊपरी मंजिलों पर मौजूद दफ्तरों में बदलाव करना चाहता है। ये दफ्तर 2023 में आई बाढ़ के बाद बिजली व्यवस्था प्रभावित होने से खाली पड़े हैं। योजना के तहत रेस्तरां और दफ्तरों की एंट्री पॉइंट के बीच की दीवार हटाकर एक बड़ा रिसेप्शन एरिया बनाया जाएगा। क्राउन एस्टेट का कहना है कि इससे वह ऑफिस का किराया काफी बढ़ा सकेगा। हालांकि, रेस्तरां के मालिक इस तर्क से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि मरम्मत और नवीनीकरण का काम रेस्तरां को हटाए बिना भी किया जा सकता है। क्राउन एस्टेट ने जून 2025 में वीरास्वामी रेस्तरां की सालाना 2.05 लाख पाउंड (करीब 2.6 करोड़ रुपए) की लीज को रेन्यू करने से मना कर दिया था। अगर अदालत में रेस्तरां हार जाता है तो जिस जगह पर वह अभी चल रहा है, उसे दफ्तरों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। 50 लाख पाउंड तक पहुंच सकता है खर्च रेस्तरां की मालिक कंपनी एमडब्ल्यू ईट का कहना है कि अगर उसे 100 साल पुरानी इस जगह को छोड़ना पड़ा, तो मामला सिर्फ सामान उठाकर दूसरी जगह जाने का नहीं होगा। कंपनी के मुताबिक, सबसे पहले उसे लंदन के वेस्ट एंड जैसे महंगे इलाके में कोई नई जगह ढूंढनी पड़ेगी। इसके बाद उस जगह को वीरास्वामी जैसे प्रतिष्ठित रेस्तरां के स्तर के अनुरूप तैयार करना होगा। इसमें रसोई, डाइनिंग एरिया, इंटीरियर, फर्नीचर, बिजली-पानी की व्यवस्था और लाइसेंस जैसी कई चीजों पर बड़ा खर्च आएगा। इसके अलावा, स्थानांतरण के दौरान रेस्तरां को कुछ समय के लिए बंद भी करना पड़ सकता है। इस दौरान उसकी आय पूरी तरह रुक जाएगी, जबकि कर्मचारियों का वेतन, प्रशासनिक खर्च और अन्य भुगतान जारी रहेंगे। कंपनी का कहना है कि 100 साल पुरानी पहचान वाली जगह छोड़ने से ग्राहकों का एक हिस्सा भी खो सकता है, जिसका आर्थिक असर अलग होगा। इन्हीं सभी खर्चों को जोड़कर एमडब्ल्यू ईट का अनुमान है कि नई जगह पर जाने की कुल लागत करीब 50 लाख पाउंड (लगभग 57-58 करोड़ रुपये) तक पहुंच सकती है। कंपनी का आरोप है कि क्राउन एस्टेट ने जो आर्थिक मुआवजा देने की पेशकश की है, वह इस अनुमानित खर्च का केवल एक छोटा हिस्सा ही कवर करेगा। इसलिए उनके लिए दूसरी जगह जाना आर्थिक रूप से बेहद मुश्किल होगा।