टीएमसी की बागी सांसद रचना बनर्जी ने एनसीपीआई विलय पर उठाए सवाल | भाजपा के समर्थन के आरोप से छिड़ी बहस | न्यूज18

टीएमसी की बागी सांसद रचना बनर्जी ने सीमित चुनावी उपस्थिति वाले एक राजनीतिक समूह एनसीपीआई के साथ पार्टी के विलय के विवाद पर जोर दिया है। इस मुद्दे पर बोलते हुए, बनर्जी ने निर्णय को आकार देने में वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं की भूमिका पर प्रकाश डाला और इस कदम के पीछे व्यापक राजनीतिक गतिशीलता पर सवाल उठाए। उन्होंने भाजपा के कथित समर्थन का भी जिक्र किया, जिससे चल रही बहस में एक नई परत जुड़ गई। इस टिप्पणी ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक रणनीति, गठबंधन और क्षेत्रीय राजनीति की भविष्य की दिशा के बारे में चर्चा शुरू कर दी है। मुख्य विवरण और प्रतिक्रियाओं के लिए पूरी रिपोर्ट देखें। n18oc_ Indian18oc_politicsn18oc_breaking-newsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 16 जून, 2026, 23:16 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)गठबंधन राजनीति(टी)बीजेपी(टी)बीजेपी नवीनतम समाचार(टी)बीजेपी बनाम टीएमसी(टी)ब्रेकिंग न्यूज(टी)करंट अफेयर्स(टी)चुनाव राजनीति(टी)भारत समाचार(टी)भारतीय राजनीति(टी)कोलकाता समाचार(टी)ताजा राजनीतिक समाचार(टी)ममता बनर्जी(टी)विलय विवाद(टी)एनसीपीआई(टी)समाचार विश्लेषण(टी)समाचार अद्यतन(टी)राजनीतिक विवाद(टी)राजनीतिक बहस(टी)राजनीतिक घटनाक्रम(टी)राजनीतिक समाचार(टी)राजनीतिक रणनीति(टी)रचना बनर्जी(टी)क्षेत्रीय राजनीति(टी)टीएमसी(टी)टीएमसी नवीनतम समाचार(टी)टीएमसी विद्रोही एमपी(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)पश्चिम बंगाल समाचार(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति
भूमि धोखाधड़ी मामले में अभिषेक बनर्जी के पीए सुमित रॉय के खिलाफ एलओसी जारी | पुलिस की तलाश जारी है

भूमि धोखाधड़ी की चल रही जांच के सिलसिले में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, रॉय उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद लापता हैं। कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने उनका पता लगाने के अपने प्रयास तेज कर दिए हैं, पुलिस कथित तौर पर मामले से जुड़े स्थानों पर तलाशी ले रही है, जिसमें पश्चिम बंगाल में बनर्जी का आवास भी शामिल है। यह विकास जांच में एक महत्वपूर्ण वृद्धि का प्रतीक है, क्योंकि अधिकारी भूमि धोखाधड़ी मामले से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच जारी रखते हैं। नवीनतम अपडेट और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के लिए पूरी रिपोर्ट देखें। n18oc_ Indian18oc_politicsn18oc_breaking-newsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 16 जून, 2026, 23:11 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)अभिषेक बनर्जी(टी)अभिषेक बनर्जी पा(टी)गिरफ्तारी वारंट(टी)ब्रेकिंग न्यूज(टी)भ्रष्टाचार जांच(टी)करंट अफेयर्स(टी)विकासशील कहानी(टी)प्रवर्तन एजेंसियां(टी)भारत समाचार(टी)भारतीय राजनीति(टी)जांच समाचार(टी)कोलकाता समाचार(टी)भूमि धोखाधड़ी मामला(टी)भूमि घोटाला(टी)नवीनतम अपडेट(टी)कानून प्रवर्तन(टी)लोक जारी(टी)लुकआउट सर्कुलर(टी)न्यूज़ टुडे(टी)पुलिस सर्च(टी)राजनीतिक विवाद(टी)राजनीतिक समाचार(टी)सुमित रॉय(टी)टीएमसी(टी)टीएमसी नवीनतम समाचार(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)पश्चिम बंगाल समाचार(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति
‘ट्रम्प दो ध्रुवीय हैं, अमेरिका कभी उनका मित्र नहीं रहा’: आनंद रंगनाथन की विस्फोटक टिप्पणी | न्यूज18

लेखक और टिप्पणीकार आनंद रंगनाथन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और अमेरिका की विदेश नीति की तीखी आलोचना की, उन्होंने तर्क दिया कि दुनिया तेजी से द्विध्रुवीय होती जा रही है और उन्होंने ट्रम्प को “द्विध्रुवीय” बताया। रंगनाथन ने आगे कहा कि अमेरिका कभी भी सच्चा दोस्त नहीं रहा है और दावा किया कि ट्रम्प “बेशर्मी से एक आतंकवादी राज्य का समर्थन कर रहे हैं।” व्यावहारिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देते हुए, उन्होंने तर्क दिया कि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भारत का संबंध पूरी तरह से लेन-देन वाला और राष्ट्रीय हितों द्वारा निर्देशित होना चाहिए। उनकी टिप्पणी वैश्विक शक्ति गतिशीलता, भू-राजनीतिक गठबंधन और एक विकसित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में भारत की रणनीतिक स्थिति पर बढ़ती बहस के बीच आई है। n18oc_ Indian18oc_politicsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 16 जून, 2026, 21:31 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)अमेरिका विदेश नीति(टी)आनंद रंगनाथन(टी)आनंद रंगनाथन नवीनतम(टी)ब्रेकिंग न्यूज(टी)करंट अफेयर्स(टी)डोनाल्ड ट्रंप(टी)विदेश नीति बहस(टी)भूराजनीतिक विश्लेषण(टी)भूराजनीति(टी)वैश्विक राजनीति(टी)भारत अमेरिका संबंध(टी)भारत विदेश नीति(टी)भारत-अमेरिका संबंध(टी)अंतर्राष्ट्रीय समाचार(टी)अंतर्राष्ट्रीय संबंध(टी)राजनीतिक टिप्पणी(टी)राजनीतिक बहस(टी)रणनीतिक मामले(टी)ट्रम्प विवाद(टी)ट्रम्प की नवीनतम टिप्पणियाँ(टी)ट्रम्प समाचार(टी)अमेरिकी कूटनीति(टी)अमेरिका-भारत संबंध(टी)विश्व समाचार(टी)विश्व राजनीति
हॉरर-कॉमेडी फिल्म में नजर आएंगी ईशा देओल:फिल्म 'घूंघट' का एलान; पुरानी मान्यताओं को चुनौती देगी कहानी

अभिनेत्री ईशा देओल अपने करियर में पहली बार हॉरर-कॉमेडी फिल्म में नजर आने वाली हैं। उनकी इस आगामी फिल्म का नाम ‘घूंघट’ है। इस फिल्म का निर्देशन ‘माय फ्रेंड गणेशा’ फेम डायरेक्टर राजीव एस रुइया कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण बेंगलुरु के प्रोड्यूसर देवेश कुमार नेटिव सिनेमाज के बैनर तले कर रहे हैं। ईशा ने बताया कि यह फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ समाज की पुरानी मान्यताओं को चुनौती देने और महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत संदेश देगी। फिल्म में ईशा का बिल्कुल अलग अंदाज देखने को मिलेगा। स्क्रिप्ट और जॉनर ने किया आकर्षित ईशा देओल ने फिल्म से जुड़ने के अपने फैसले पर बात की। उन्होंने कहा कि हॉरर-कॉमेडी जॉनर उनके लिए मुख्य आकर्षण था। इस तरह की फिल्मों में रोमांच और हास्य का अच्छा मेल होता है, जिसे आज के समय में दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं। ईशा के मुताबिक, जॉनर के अलावा फिल्म की स्क्रिप्ट और उनका अनोखा किरदार ही मुख्य वजह थे, जिन्होंने उन्हें इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया। पुरानी मान्यताओं पर सवाल उठाएगी फिल्म अभिनेत्री ने बताया कि ‘घूंघट’ सिर्फ लोगों को डराने या हंसाने तक सीमित नहीं है। इसमें एक जरूरी सामाजिक संदेश छिपा है। यह कहानी लोगों को सालों से चली आ रही पुरानी रीतियों और मान्यताओं पर सवाल उठाने का साहस देगी। फिल्म में भरपूर ड्रामा, भावनाएं और कॉमेडी होगी, लेकिन इसका मुख्य फोकस व्यक्तिगत पहचान और अपनी बात पर मजबूती से टिके रहने के महत्व को दिखाना है। ‘माय फ्रेंड गणेशा’ के डायरेक्टर संभाल रहे कमान फिल्म का निर्देशन कर रहे राजीव एस रुइया को अलग-अलग जॉनर की फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है। उन्हें बच्चों और परिवारों के बीच बेहद लोकप्रिय रही ‘माय फ्रेंड गणेशा’ फ्रेंचाइजी से पहचान मिली थी। इसके अलावा उन्होंने ‘मैं कृष्णा हूं’, ‘डायरेक्ट इश्क’ और हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘सांसें’ का भी निर्देशन किया है। मेकर्स का मानना है कि पारिवारिक मनोरंजन और हॉरर विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ इस फिल्म को बेहतर बनाएगी। हर उम्र के दर्शकों के लिए होगी फिल्म प्रोड्यूसर देवेश कुमार इस फिल्म को एक ऐसे विजन के साथ तैयार कर रहे हैं, जिससे हर उम्र के दर्शक जुड़ाव महसूस कर सकें। मेकर्स के मुताबिक, फिल्म में मनोरंजन और सार्थकता के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। हॉरर-कॉमेडी फिल्मों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच ईशा देओल के इस नए प्रोजेक्ट ने फिल्म जगत और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
हॉरर-कॉमेडी फिल्म में नजर आएंगी ईशा देओल:फिल्म 'घूंघट' का एलान; पुरानी मान्यताओं को चुनौती देगी कहानी

अभिनेत्री ईशा देओल अपने करियर में पहली बार हॉरर-कॉमेडी फिल्म में नजर आने वाली हैं। उनकी इस आगामी फिल्म का नाम ‘घूंघट’ है। इस फिल्म का निर्देशन ‘माय फ्रेंड गणेशा’ फेम डायरेक्टर राजीव एस रुइया कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण बेंगलुरु के प्रोड्यूसर देवेश कुमार नेटिव सिनेमाज के बैनर तले कर रहे हैं। ईशा ने बताया कि यह फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ समाज की पुरानी मान्यताओं को चुनौती देने और महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत संदेश देगी। फिल्म में ईशा का बिल्कुल अलग अंदाज देखने को मिलेगा। स्क्रिप्ट और जॉनर ने किया आकर्षित ईशा देओल ने फिल्म से जुड़ने के अपने फैसले पर बात की। उन्होंने कहा कि हॉरर-कॉमेडी जॉनर उनके लिए मुख्य आकर्षण था। इस तरह की फिल्मों में रोमांच और हास्य का अच्छा मेल होता है, जिसे आज के समय में दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं। ईशा के मुताबिक, जॉनर के अलावा फिल्म की स्क्रिप्ट और उनका अनोखा किरदार ही मुख्य वजह थे, जिन्होंने उन्हें इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया। पुरानी मान्यताओं पर सवाल उठाएगी फिल्म अभिनेत्री ने बताया कि ‘घूंघट’ सिर्फ लोगों को डराने या हंसाने तक सीमित नहीं है। इसमें एक जरूरी सामाजिक संदेश छिपा है। यह कहानी लोगों को सालों से चली आ रही पुरानी रीतियों और मान्यताओं पर सवाल उठाने का साहस देगी। फिल्म में भरपूर ड्रामा, भावनाएं और कॉमेडी होगी, लेकिन इसका मुख्य फोकस व्यक्तिगत पहचान और अपनी बात पर मजबूती से टिके रहने के महत्व को दिखाना है। ‘माय फ्रेंड गणेशा’ के डायरेक्टर संभाल रहे कमान फिल्म का निर्देशन कर रहे राजीव एस रुइया को अलग-अलग जॉनर की फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है। उन्हें बच्चों और परिवारों के बीच बेहद लोकप्रिय रही ‘माय फ्रेंड गणेशा’ फ्रेंचाइजी से पहचान मिली थी। इसके अलावा उन्होंने ‘मैं कृष्णा हूं’, ‘डायरेक्ट इश्क’ और हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘सांसें’ का भी निर्देशन किया है। मेकर्स का मानना है कि पारिवारिक मनोरंजन और हॉरर विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ इस फिल्म को बेहतर बनाएगी। हर उम्र के दर्शकों के लिए होगी फिल्म प्रोड्यूसर देवेश कुमार इस फिल्म को एक ऐसे विजन के साथ तैयार कर रहे हैं, जिससे हर उम्र के दर्शक जुड़ाव महसूस कर सकें। मेकर्स के मुताबिक, फिल्म में मनोरंजन और सार्थकता के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। हॉरर-कॉमेडी फिल्मों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच ईशा देओल के इस नए प्रोजेक्ट ने फिल्म जगत और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
नेपाल ने चीन के सामने कालापानी-लिपुलेख का मुद्दा उठाया:कहा- भारत के साथ समझौता किस आधार पर हुआ; वांग यी बोले- बातचीत से विवाद सुलझाएं

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के दौरान कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख विवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे के इस्तेमाल को लेकर हुए समझौते पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यह व्यवस्था किस आधार पर बनाई गई और इसकी प्रकृति क्या है। इसके जवाब में वांग यी ने कहा कि यह मूल रूप से भारत और नेपाल के बीच का मामला है और इसका समाधान बातचीत से ही निकलेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दे संबंधित देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता के जरिए सुलझाए जाने चाहिए। नेपाल ने दोहराया कि कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख उसके क्षेत्र का हिस्सा हैं। काठमांडू पहले भी नई दिल्ली और बीजिंग को विरोध नोट भेजकर कह चुका है कि उसकी सहमति के बिना इस इलाके से जुड़ा कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। खनाल ने भारत दौरे पर नहीं उठाया था मुद्दा दिलचस्प बात यह है कि शिशिर खनाल ने हाल की भारत यात्रा के दौरान यह मुद्दा नहीं उठाया था। उस समय उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत की थी। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में भी कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख का जिक्र नहीं था। ऐसे में कूटनीतिक हलकों में इस बात पर चर्चा है कि नेपाल ने नई दिल्ली के मुकाबले बीजिंग में ज्यादा सख्त रुख दिखाया। विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल दोनों पड़ोसियों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए सीमा विवाद को जिंदा रखना चाहता है, लेकिन खुलकर टकराव से भी बचना चाहता है। भारत-नेपाल में 2020 के बाद बढ़ा विवाद कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को लेकर विवाद कई दशक पुराना है। हालांकि, 2020 में भारत और चीन के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा और व्यापार के लिए लिपुलेख दर्रे के इस्तेमाल पर सहमति बनने के बाद मामला फिर गरमा गया था। नेपाल ने उस समय इसका कड़ा विरोध किया था। उसका कहना था कि यह फैसला उसकी भागीदारी के बिना लिया गया। इसके बाद उसने भारत और चीन दोनों को विरोध पत्र भेजे थे। इसके बावजूद भारत और चीन लगातार इस रास्ते का इस्तेमाल करते रहे हैं। विवाद के बाद कुछ समय के लिए भारत-नेपाल रिश्तों में तनाव बढ़ा था, लेकिन हाल के उच्चस्तरीय दौरों से दोनों देशों के संबंधों में धीरे-धीरे सुधार आया है। दो नदियों से तय हुई भारत-नेपाल की सीमा भारत, नेपाल और चीन सीमा से लगे इस इलाके में हिमालय की नदियों से मिलकर बनी एक घाटी है, जो नेपाल और भारत में बहने वाली काली या महाकाली नदी का उद्गम स्थल है। इस इलाके को कालापानी भी कहते हैं। यहीं पर लिपुलेख दर्रा भी है। यहां से उत्तर-पश्चिम की तरफ कुछ दूरी पर एक और दर्रा है, जिसे लिंपियाधुरा कहते हैं। अंग्रेजों और नेपाल के गोरखा राजा के बीच 1816 में हुए सुगौली समझौते में काली नदी के जरिए भारत और नेपाल के बीच सीमा तय की थी। समझौते के तहत काली नदी के पश्चिमी क्षेत्र को भारत का इलाका माना गया, जबकि नदी के पूर्व में पड़ने वाला इलाका नेपाल का हो गया। काली नदी के उद्गम स्थल, यानी ये सबसे पहले कहां से निकलती है, इसे लेकर दोनों देशों के बीच विवाद रहा है। भारत पूर्वी धारा को काली नदी का उद्गम मानता है। वहीं नेपाल पश्चिमी धारा को उद्गम धारा मानता है और इसी आधार पर दोनों देश कालापानी के इलाके पर अपना-अपना दावा करते हैं। —————————– ये खबर भी पढ़ें…. नेपाल बोला- भारतीय यात्री लिपुलेख से मानसरोवर न जाएं:ये हमारा इलाका; भारत बोला- नेपाल के दावे का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं नेपाल सरकार ने पिछले महीने भारतीय तीर्थयात्रियों से लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा न करने की अपील की। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र नेपाल का हिस्सा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
नेपाल ने चीन के सामने कालापानी-लिपुलेख का मुद्दा उठाया:कहा- भारत के साथ समझौता किस आधार पर; चीन बोला- ये आप दोनों का मामला

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के दौरान कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख विवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे के इस्तेमाल को लेकर हुए समझौते पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यह व्यवस्था किस आधार पर बनाई गई और इसकी प्रकृति क्या है। इसके जवाब में वांग यी ने कहा कि यह मूल रूप से भारत और नेपाल के बीच का मामला है और इसका समाधान बातचीत से ही निकलेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दे संबंधित देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता के जरिए सुलझाए जाने चाहिए। नेपाल ने दोहराया कि कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख उसके क्षेत्र का हिस्सा हैं। काठमांडू पहले भी नई दिल्ली और बीजिंग को विरोध नोट भेजकर कह चुका है कि उसकी सहमति के बिना इस इलाके से जुड़ा कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। 2020 में हुआ था भारत-चीन समझौता भारत और चीन ने 2020 में लिपुलेख दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमा पार व्यापार को फिर से शुरू करने पर सहमति बनाई थी। दोनों देशों ने इस मार्ग को तीर्थयात्रा और व्यापार के लिए इस्तेमाल करने की व्यवस्था पर सहमति जताई थी। नेपाल ने उस समय इसका विरोध किया था। काठमांडू का कहना था कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा उसके क्षेत्र का हिस्सा हैं, इसलिए उससे बिना राय लिए इस मार्ग को लेकर कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद नेपाल ने भारत और चीन दोनों को राजनयिक विरोध नोट भेजा था। इसके बावजूद भारत और चीन कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमावर्ती व्यापार के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल करते रहे हैं। खनाल ने भारत दौरे पर नहीं उठाया था मुद्दा दिलचस्प बात यह है कि शिशिर खनाल ने हाल की भारत यात्रा के दौरान यह मुद्दा नहीं उठाया था। उस समय उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत की थी। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में भी कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख का जिक्र नहीं था। ऐसे में कूटनीतिक हलकों में इस बात पर चर्चा है कि नेपाल ने नई दिल्ली के मुकाबले बीजिंग में ज्यादा सख्त रुख दिखाया। विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल दोनों पड़ोसियों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए सीमा विवाद को जिंदा रखना चाहता है, लेकिन खुलकर टकराव से भी बचना चाहता है। भारत-चीन में लिपुलेख दर्रा से व्यापार शुरू भारत-चीन सीमा पर स्थित लिपुलेख दर्रे से व्यापार दोबारा शुरू होने जा रहा है। गलवान घाटी में 2020 में हुए संघर्ष के बाद यह मार्ग बंद हो गया था। करीब छह साल बाद अब इस रास्ते से व्यापार बहाल करने की तैयारी शुरू हो गई है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से करीब 300 व्यापारियों के नाम विदेश मंत्रालय को भेजे गए हैं। इन्हें पासपोर्ट और वीजा के बजाय ट्रेड पास के जरिए तिब्बत के तकलाकोट बाजार तक जाने की अनुमति दी जाएगी। इस बार सीमा तक सड़क पहुंचने से व्यापारियों को बड़ा फायदा मिलेगा। पहले सामान घोड़े-खच्चरों के जरिए ले जाया जाता था, लेकिन अब वाहन सीधे सीमा तक पहुंच सकेंगे। इससे व्यापार की लागत और समय दोनों कम होंगे। लिपुलेख दर्रा भारत और तिब्बत के बीच सदियों पुराने व्यापार का हिस्सा रहा है। तिब्बती व्यापारी नमक, ऊन और बोरेक्स लेकर भारत आते थे, जबकि भारतीय व्यापारी कपड़ा, अनाज और मसाले तिब्बत ले जाते थे। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह मार्ग बंद हो गया था। 1991 में दोनों देशों के बीच समझौते के बाद इसे फिर खोला गया था। हालांकि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद व्यापारिक गतिविधियां बंद हो गई हुई थीं। दो नदियों से तय हुई भारत-नेपाल की सीमा भारत, नेपाल और चीन सीमा से लगे इस इलाके में हिमालय की नदियों से मिलकर बनी एक घाटी है, जो नेपाल और भारत में बहने वाली काली या महाकाली नदी का उद्गम स्थल है। इस इलाके को कालापानी भी कहते हैं। यहीं पर लिपुलेख दर्रा भी है। यहां से उत्तर-पश्चिम की तरफ कुछ दूरी पर एक और दर्रा है, जिसे लिंपियाधुरा कहते हैं। अंग्रेजों और नेपाल के गोरखा राजा के बीच 1816 में हुए सुगौली समझौते में काली नदी के जरिए भारत और नेपाल के बीच सीमा तय की थी। समझौते के तहत काली नदी के पश्चिमी क्षेत्र को भारत का इलाका माना गया, जबकि नदी के पूर्व में पड़ने वाला इलाका नेपाल का हो गया। काली नदी के उद्गम स्थल, यानी ये सबसे पहले कहां से निकलती है, इसे लेकर दोनों देशों के बीच विवाद रहा है। भारत पूर्वी धारा को काली नदी का उद्गम मानता है। वहीं नेपाल पश्चिमी धारा को उद्गम धारा मानता है और इसी आधार पर दोनों देश कालापानी के इलाके पर अपना-अपना दावा करते हैं। —————————– ये खबर भी पढ़ें…. नेपाल बोला- भारतीय यात्री लिपुलेख से मानसरोवर न जाएं:ये हमारा इलाका; भारत बोला- नेपाल के दावे का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं नेपाल सरकार ने पिछले महीने भारतीय तीर्थयात्रियों से लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा न करने की अपील की। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र नेपाल का हिस्सा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
'वैभव सूर्यवंशी उकसाने पर श्रीलंका के खिलाड़ियों से भिड़े':कोच बोले- गिल, रोहित से लीडरशिप सीख रहे, इकाना में कल इंडिया का मैच

भारत और अफगानिस्तान के बीच बुधवार को इकाना स्टेडियम में दूसरा वनडे मैच खेला जाएगा। इससे पहले दोनों ही टीमों ने जमकर पसीना बहाया। प्रैक्टिस सेशन के बाद दोनों टीमों ने बारी-बारी प्रेस कॉन्फ्रेंस की। भारतीय बॉलिंग कोच साईं राज ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी और श्रीलंकाई खिलाड़ियों के बीच इंडिया ए के मैच के विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। बोले- वैभव बेहद शांत स्वभाव के खिलाड़ी हैं और उन्हें किस तरह उकसाया गया, इसकी पूरी जानकारी नहीं है। हां, उनके साथ मौजूद टीम के वरिष्ठ कोच उन्हें सही मार्गदर्शन देंगे। साईं राज ने कहा कि वैभव अभी युवा हैं और देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ऐसे में वह इस घटना से सीखेंगे। श्रीलंकाई खिलाड़ियों को भी खेल भावना और व्यवहार के प्रति जागरूक किए जाने की जरूरत है। दूसरे वनडे मुकाबले से पहले कोच ने अपनी रणनीति के संकेत दिए, लेकिन प्लेइंग-11 के पत्ते नहीं खोले। वहीं, अफगानिस्तान की ओर कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए। उन्होंने कहा- यहां का मौसम हमारे लिए काफी मुफीद, इकाना हमारे लिए होम ग्राउंड जैसा है। हम यहां पहले भी प्रैक्टिस करते रहे हैं। प्लेइंग-11 पर दोनों टीमों ने बनाए रखा सस्पेंस दूसरे वनडे के लिए टीम कॉम्बिनेशन को लेकर पूछे गए सवाल पर भारतीय कोच ने कहा कि अंतिम फैसला पिच देखने के बाद लिया जाएगा। कुलदीप यादव को खिलाने के सवाल पर साईं राज ने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए गेंदबाजी लाइनअप तय किया जाएगा। वहीं अफगानिस्तान के कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर अभी सब कुछ बता दिया तो कल मैच खेलने का मजा ही क्या रहेगा। रणनीति जाननी है तो बाद में अकेले में आइए। रोहित शर्मा की लीडरशिप से सीख रहे शुभमन गिल रोहित शर्मा की भूमिका पर साईं राज ने कहा कि वह सिर्फ एक बल्लेबाज नहीं, बल्कि टीम के लिए प्रेरणा और अनुभव का बड़ा स्रोत हैं। उनकी कप्तानी और अनुभव से शुभमन गिल जैसे युवा खिलाड़ियों को काफी फायदा मिल रहा है। उन्होंने केएल राहुल को टीम का अहम खिलाड़ी बताते हुए कहा कि वह किसी भी बल्लेबाजी क्रम में खुद को ढाल सकते हैं और आगामी विश्व कप की योजनाओं में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। लखनऊ की पिच और परिस्थितियों से अफगानिस्तान वाकिफ अफगानिस्तान के कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने कहा कि इकाना स्टेडियम उनके लिए नया नहीं है। यहां अफगान टीम पहले भी वेस्टइंडीज के खिलाफ और 2023 विश्व कप के दौरान खेल चुकी है। उन्होंने कहा कि लखनऊ की पिच धीमी रहती है और स्पिन गेंदबाजों को मदद मिलती है। हालांकि भारतीय टीम ने यहां उनसे ज्यादा मैच खेले हैं, लेकिन अफगानिस्तान को भी परिस्थितियों का अच्छा अनुभव है और उसी के अनुसार रणनीति बनाई जाएगी। पहले वनडे में लगातार विकेट गंवाना पड़ा भारी पहले वनडे में हार पर शाहिदी ने कहा कि टीम ने अच्छा क्रिकेट खेला, लेकिन नियमित अंतराल पर विकेट गिरने से नुकसान हुआ। रहमानुल्लाह गुरबाज की शानदार पारी के बावजूद मिडिल ऑर्डर बड़ी साझेदारी नहीं कर पाया। उन्होंने कहा कि टीम ने अपनी गलतियों पर चर्चा की है और दूसरे मुकाबले में बल्लेबाजों के बीच बेहतर साझेदारियां देखने को मिलेंगी। लखनऊ की गर्मी पर बोले- मौसम नहीं, प्रदर्शन पर है पूरा ध्यान धर्मशाला की ठंड के बाद लखनऊ की गर्मी को लेकर भारतीय कोच साईं राज ने कहा कि प्रोफेशनल खिलाड़ियों को हर तरह के मौसम में खेलने की आदत होती है। उनका पूरा ध्यान प्रदर्शन पर है। वहीं शाहिदी ने कहा कि क्रिकेट गर्मी का खेल है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौसम को बहाना नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान का जलालाबाद भी लखनऊ की तरह गर्म रहता है और खिलाड़ी हर परिस्थिति के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं। जडेजा-अश्विन की बराबरी आसान नहीं भारतीय कोच ने कहा कि रवींद्र जडेजा और आर अश्विन जैसे दिग्गजों की जगह लेना आसान नहीं है। हालांकि मानव सुथार, सारांश जैन और शिवांग जैसे युवा स्पिनरों के लिए यह संक्रमण का दौर है और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अवसर दिए जाएंगे। वहीं अफगान कप्तान ने ऑलराउंडर अजमतुल्लाह उमरजई की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी रिस्ट पोजिशन और स्विंग शानदार है। इसी वजह से वह नई गेंद और डेथ ओवरों में टीम के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं। शाहिदी बोले- मुश्किल समय में पूरा देश उनके साथ शाहिदी ने बताया कि पहले वनडे से पहले दरविश रसूली के पिता का निधन हो गया था, जिसके कारण वह स्वदेश लौट गए थे। अब वह वापस टीम से जुड़ चुके हैं और अभ्यास सत्र में हिस्सा लिया है। अफगान कप्तान ने कहा कि यह उनके लिए बेहद कठिन समय है, लेकिन पूरी टीम और पूरा देश उनके साथ खड़ा है। …………….. ये खबर भी पढ़ें… लखनऊ में दिखा मोहर्रम का चांद:26 जून को मनाया जाएगा आशूरा; जुलूस मार्ग से हटाए गए रूमी गेट के स्टोन पिलर लखनऊ में मोहर्रम का चांद नजर आ गया है। शिया मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास ने बताया कि बुधवार, 17 जून से पहला मोहर्रम होगा। 26 जून को दस मोहर्रम होगी। इसी दिन आशूरा मनाया जाएगा। वहीं सुरक्षा को देखते हुए जुलूस मार्ग से रुमी गेट से स्टोन पिलर हटाए गए हैं। पढ़िए पूरी खबर…
हैदराबाद ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास रोड का नाम बदलकर ‘डोनाल्ड ट्रम्प एवेन्यू’ रखा, जो 23 जून को खुलेगा पीतल के ढेर

तेलंगाना, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ राज्य के बढ़ते आर्थिक और राजनयिक संबंधों को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से, हैदराबाद के वित्तीय जिले में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से सटी एक सड़क, डोनाल्ड ट्रम्प एवेन्यू का उद्घाटन करने की तैयारी कर रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, एवेन्यू को औपचारिक रूप से 23 जून को खोला जाना है। मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने पहली बार दिसंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर सड़क का नामकरण करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ विवाद और पश्चिम एशिया में संघर्ष सहित वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इस योजना को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया था। तनाव कम होने के साथ, राज्य सरकार ने प्रस्ताव को पुनर्जीवित किया है और उद्घाटन के साथ आगे बढ़ रही है। $brasstacks n18oc_politicsn18oc_breaking-newsn18oc_indiaNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 16 जून, 2026, 19:49 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)राजनयिक संबंध(टी)डोनाल्ड ट्रंप(टी)डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू(टी)डोनाल्ड ट्रंप रोड(टी)आर्थिक संबंध(टी)हैदराबाद वित्तीय जिला(टी)हैदराबाद इंफ्रास्ट्रक्चर(टी)हैदराबाद नवीनतम समाचार(टी)हैदराबाद समाचार(टी)भारत अमेरिका संबंध(टी)भारत-अमेरिका संबंध(टी)रेवंत रेड्डी(टी)तेलंगाना विकास(टी)तेलंगाना सरकार(टी)तेलंगाना नवीनतम समाचार(टी)तेलंगाना समाचार(टी)तेलंगाना राजनीति(टी)ट्रम्प एवेन्यू हैदराबाद(टी)ट्रम्प भारत(टी)यूएस वाणिज्य दूतावास हैदराबाद(टी)यूएस&एलटी; भारत
फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' को पाकिस्तान से मिली तारीफ:पाकिस्तानी फिल्ममेकर बोले- बंटवारे के दर्द को इम्तियाज अली ने खूबसूरती से दिखाया

भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बैकग्राउंड पर बनी डायरेक्टर इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को पकिसातन से भी तारीफ मिली है। चर्चित पाकिस्तानी फिल्ममेकर उमर नासिर अली ने इस फिल्म की जमकर तारीफ करते हुए इसे एक बेहद खूबसूरत और गहरी भावनात्मक फिल्म बताया है। उमर नासिर के मुताबिक, यह फिल्म उनके दिल के बेहद करीब है क्योंकि वे खुद भी इसी विषय के आसपास एक फिल्म बना रहे हैं। इस बीच फिल्म को मिल रहे अच्छे रिस्पॉन्स का असर इसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर भी दिख रहा है और फिल्म की कमाई सोमवार को कामकाजी दिन होने के बावजूद बढ़ गई है। इम्तियाज से जैसी उम्मीद थी, वैसा ही पर्दे पर उतरा फीचर फिल्मों और विज्ञापनों के मशहूर पाकिस्तानी डायरेक्टर उमर नासिर अली ने इंस्टाग्राम पर फिल्म को लेकर एक नोट शेयर किया है। उमर नासिर ने बताया कि ‘मैं वापस आऊंगा’ में जिन भावनाओं को दिखाया गया है, वे उनके दिल के काफी करीब हैं। दरअसल, वे खुद भी बंटवारे के बैकग्राउंड पर ‘चोर आए हम’ नाम से एक फिल्म बना रहे हैं। उनकी आगामी फिल्म भी यादों, अपनेपन और वतन वापसी की इसी भावना को दिखाती है। उमर ने कहा कि उन्हें इम्तियाज अली से जैसी उम्मीद थी, उन्होंने बिल्कुल वैसा ही शानदार सिनेमा पर्दे पर उतारा है। नसीर की एक्टिंग को सराहा पाकिस्तानी फिल्ममेकर ने फिल्म के कलाकारों और टेक्निकल टीम के काम की भी प्रशंसा की है। उन्होंने फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे दिग्गज एक्टर नसीरुद्दीन शाह के अभिनय को असाधारण बताया। इसके साथ ही फिल्म की एडिटर आरती बजाज के काम की तारीफ करते हुए इसे सिनेमाई कहानी कहने का एक मास्टरक्लास कहा। उमर नासिर के मुताबिक, फिल्म निर्माण सीख रहे नए लोगों को इस फिल्म की एडिटिंग से बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शकों के दिमाग में लंबे समय तक बनी रहती है। बॉक्स ऑफिस बढ़ी फिल्म की कमाई फिल्म ट्रैक करने वाली वेबसाइट सैकनिल्क के मुताबिक, ‘मैं वापस आऊंगा’ ने सोमवार को अपने ओपनिंग डे यानी शुक्रवार से भी ज्यादा का बिजनेस किया है। फिल्म ने शुक्रवार को 1.15 करोड़ रुपए से शुरुआत की थी, जिसके बाद शनिवार को 1.85 करोड़ और रविवार को 2.50 करोड़ रुपए कमाए। वहीं सोमवार को फिल्म ने देश भर के 2,139 शोज से 1.25 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया। फिल्म का भारत में कुल नेट कलेक्शन 6.75 करोड़ रुपए और ग्रॉस कलेक्शन 8.10 करोड़ रुपए हो गया है। तीन पीढ़ियों के अधूरे सफर की कहानी फिल्म की कहानी तीन पीढ़ियों के भावनात्मक सफर को दिखाती है, जिसमें बंटवारे के जख्मों को एक प्रेम कहानी के साथ पेश किया गया है। कहानी पाकिस्तान के सरगोधा से भारत आए एक सिख परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। बंटवारे के समय युवा कीनू (वेदांग रैना) अपनी प्रेमिका अफसाना (शर्वरी) से अलग हो जाता है। करीब 70 साल बाद, 95 साल के हो चुके कीनू (नसीरुद्दीन शाह)अपने जीवन के आखिरी पड़ाव पर एक आखिरी बार सरगोधा वापस जाना चाहते हैं। इस यात्रा में उनका पोता निरवैर (दिलजीत दोसांझ) उनकी मदद करता है। बॉलीवुड डायरेक्टर्स से भी मिली सराहना पाकिस्तानी डायरेक्टर के अलावा बॉलीवुड फिल्ममेकर जोया अख्तर, अनुराग कश्यप और अनुभव सिन्हा ने भी फिल्म की सराहना की है। जोया अख्तर ने सोशल मीडिया पर पूरी टीम को बधाई दी। अनुभव सिन्हा ने लिखा कि इम्तियाज की फिल्म का हर फ्रेम उनके कला के प्रति विश्वास को दिखाता है। यह फिल्म इम्तियाज अली और दिलजीत दोसांझ की दूसरी फिल्म है, इससे पहले दोनों ‘अमर सिंह चमकीला’ में साथ काम कर चुके हैं। फिल्म का संगीत एआर रहमान ने तैयार किया है और गीत इरशाद कामिल ने लिखे हैं।







