मूवी रिव्यू – भारत भाग्य विधाता रिव्यू:26/11 की अनसुनी बहादुरी को सामने लाती है फिल्म, कंगना रनोट ने सादगी से जीता दिल

26/11 मुंबई हमलों पर पहले भी कई फिल्में और वेब सीरीज बन चुकी हैं। ज्यादातर कहानियां पुलिस, आतंकियों या सुरक्षा बलों के इर्द-गिर्द घूमती रही हैं। लेकिन उस रात कामा अस्पताल के भीतर क्या चल रहा था, वहां मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों ने किन हालात में मरीजों को बचाया, इस पर बहुत कम बात हुई। ‘भारत भाग्य विधाता’ उसी भूले हुए अध्याय को सामने लाती है। यह सिर्फ एक हमले की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो सुर्खियों में कभी नहीं आए, लेकिन जिनकी वजह से सैकड़ों लोग सुरक्षित घर लौट सके। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 26 नवंबर 2008 की उस रात पर आधारित है जब मुंबई दहशत के साए में थी। शहर के अलग-अलग हिस्सों में गोलियां चल रही थीं और उसी दौरान कामा अस्पताल भी खतरे के दायरे में आ गया। अस्पताल के भीतर मौजूद नर्सें, वार्ड स्टाफ और दूसरे कर्मचारी अचानक ऐसे हालात में फंस जाते हैं जिनके लिए कोई प्रशिक्षण काफी नहीं होता। कहानी का केंद्र एक नर्स और उसके साथ काम करने वाले लोग हैं, जो अपनी जान बचाने से पहले मरीजों की सुरक्षा के बारे में सोचते हैं। फिल्म का अच्छा पक्ष यह है कि यह किसी एक किरदार को सुपरहीरो नहीं बनाती। यहां बहादुरी सामूहिक है। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के हिसाब से लड़ता है और यही बात कहानी को विश्वसनीय बनाती है। हालांकि फिल्म की पटकथा शुरुआत में थोड़ा समय लेती है। पहले आधे घंटे में किरदारों और उनके रिश्तों को स्थापित करने की कोशिश की गई है, जिससे गति कुछ धीमी महसूस होती है। लेकिन जैसे-जैसे खतरा करीब आता है, फिल्म पकड़ बनाती चली जाती है। फिल्म में एक्टिंग कंगना रनोट इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं। दिलचस्प बात यह है कि यहां वह अपने स्टारडम पर नहीं, बल्कि किरदार पर भरोसा करती दिखाई देती हैं। लंबे समय बाद उन्हें ऐसे रोल में देखा गया है जहां ऊंची आवाज, लंबे भाषण या नाटकीयता नहीं है। उनका अभिनय संयमित है और यही बात असर छोड़ती है। कई दृश्यों में कंगना सिर्फ आंखों और चेहरे के भावों से डर, बेचैनी और जिम्मेदारी को व्यक्त कर देती हैं। यह उनके हालिया कामों से अलग प्रदर्शन है। गिरिजा ओक, स्मिता तांबे और बाकी कलाकार भी कहानी को मजबूती देते हैं। फिल्म का एक बड़ा गुण यह है कि सहायक कलाकार सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं बनते, बल्कि कहानी का जरूरी हिस्सा लगते हैं। कई बार ऐसा महसूस होता है कि फिल्म किसी एक कलाकार की नहीं, पूरी टीम की है। फिल्म का डायरेक्शन निर्देशक मनोज तापड़िया ने विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए काम किया है। उन्होंने 26/11 को तमाशे की तरह पेश करने के बजाय इंसानी नजरिए से देखने की कोशिश की है। फिल्म आतंकियों से ज्यादा उन लोगों पर फोकस करती है जिन्होंने मुश्किल समय में अपना कर्तव्य निभाया। निर्देशन की सबसे अच्छी बात यह है कि फिल्म लगातार सम्मानजनक बनी रहती है। कहीं भी अनावश्यक देशभक्ति या भावनाओं का दबाव डालने की कोशिश नहीं की गई। कई दृश्य स्वाभाविक रूप से असर छोड़ते हैं। हालांकि कुछ जगहों पर फिल्म और ज्यादा तीखी हो सकती थी। कुछ घटनाएं पर्दे पर जितना तनाव पैदा कर सकती थीं, उतना नहीं कर पातीं। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म की सिनेमैटोग्राफी माहौल बनाने में सफल रहता है। अस्पताल के गलियारों, बंद कमरों और भय के माहौल को कैमरा प्रभावी ढंग से पकड़ता है। कई दृश्य ऐसे हैं जहां दर्शक जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है, फिर भी तनाव बना रहता है। फिल्म की एडिटिंग भी काफी टाइट है। फिल्म बेवजह लंबी नहीं लगती, हालांकि पहले हिस्से में थोड़ी काट-छांट की जा सकती थी। प्रोडक्शन डिजाइन और कॉस्ट्यूम कहानी को असलियत के करीब लाते हैं। हॉस्पिटल का माहौल बनावटी नहीं लगता। फिल्म का म्यूजिक फिल्म का म्यूजिक याद रह जाने वाला नहीं है, लेकिन यह शिकायत भी नहीं बनता। पृष्ठभूमि संगीत कई महत्वपूर्ण दृश्यों में भावनात्मक असर बढ़ाता है। अच्छी बात यह है कि संगीत कहानी पर हावी नहीं होता। फिल्म की कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी धीमी शुरुआत है। कुछ दर्शकों को लग सकता है कि कहानी मुख्य संघर्ष तक पहुंचने में ज्यादा समय लेती है। इसके अलावा कुछ सहायक किरदारों को थोड़ा और विस्तार दिया जा सकता था। जो दर्शक पूरी तरह थ्रिलर देखने की उम्मीद से जाएंगे, उन्हें फिल्म कुछ जगहों पर अपेक्षा से ज्यादा भावनात्मक और कम रोमांचक लग सकती है। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘भारत भाग्य विधाता’ उन लोगों को याद करने की कोशिश है जिनका नाम इतिहास के बड़े पन्नों में शायद नहीं लिखा गया, लेकिन जिन्होंने अपने हिस्से की बहादुरी पूरी ईमानदारी से निभाई। फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह आतंक की कहानी सुनाते-सुनाते इंसानियत की कहानी बन जाती है। कंगना रनोट का सधा हुआ अभिनय, मजबूत सहायक कलाकार और संवेदनशील निर्देशन इसे एक असरदार अनुभव बनाते हैं। यह परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन दिल से बनाई गई फिल्म जरूर है। अगर आप सच्ची घटनाओं पर आधारित और भावनात्मक मानवीय कहानियां पसंद करते हैं, तो ‘भारत भाग्य विधाता’ एक बार देखी जा सकती है।
मूवी रिव्यू – भारत भाग्य विधाता रिव्यू:26/11 की अनसुनी बहादुरी को सामने लाती है फिल्म, कंगना रनोट ने सादगी से जीता दिल

26/11 मुंबई हमलों पर पहले भी कई फिल्में और वेब सीरीज बन चुकी हैं। ज्यादातर कहानियां पुलिस, आतंकियों या सुरक्षा बलों के इर्द-गिर्द घूमती रही हैं। लेकिन उस रात कामा अस्पताल के भीतर क्या चल रहा था, वहां मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों ने किन हालात में मरीजों को बचाया, इस पर बहुत कम बात हुई। ‘भारत भाग्य विधाता’ उसी भूले हुए अध्याय को सामने लाती है। यह सिर्फ एक हमले की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो सुर्खियों में कभी नहीं आए, लेकिन जिनकी वजह से सैकड़ों लोग सुरक्षित घर लौट सके। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 26 नवंबर 2008 की उस रात पर आधारित है जब मुंबई दहशत के साए में थी। शहर के अलग-अलग हिस्सों में गोलियां चल रही थीं और उसी दौरान कामा अस्पताल भी खतरे के दायरे में आ गया। अस्पताल के भीतर मौजूद नर्सें, वार्ड स्टाफ और दूसरे कर्मचारी अचानक ऐसे हालात में फंस जाते हैं जिनके लिए कोई प्रशिक्षण काफी नहीं होता। कहानी का केंद्र एक नर्स और उसके साथ काम करने वाले लोग हैं, जो अपनी जान बचाने से पहले मरीजों की सुरक्षा के बारे में सोचते हैं। फिल्म का अच्छा पक्ष यह है कि यह किसी एक किरदार को सुपरहीरो नहीं बनाती। यहां बहादुरी सामूहिक है। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के हिसाब से लड़ता है और यही बात कहानी को विश्वसनीय बनाती है। हालांकि फिल्म की पटकथा शुरुआत में थोड़ा समय लेती है। पहले आधे घंटे में किरदारों और उनके रिश्तों को स्थापित करने की कोशिश की गई है, जिससे गति कुछ धीमी महसूस होती है। लेकिन जैसे-जैसे खतरा करीब आता है, फिल्म पकड़ बनाती चली जाती है। फिल्म में एक्टिंग कंगना रनोट इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं। दिलचस्प बात यह है कि यहां वह अपने स्टारडम पर नहीं, बल्कि किरदार पर भरोसा करती दिखाई देती हैं। लंबे समय बाद उन्हें ऐसे रोल में देखा गया है जहां ऊंची आवाज, लंबे भाषण या नाटकीयता नहीं है। उनका अभिनय संयमित है और यही बात असर छोड़ती है। कई दृश्यों में कंगना सिर्फ आंखों और चेहरे के भावों से डर, बेचैनी और जिम्मेदारी को व्यक्त कर देती हैं। यह उनके हालिया कामों से अलग प्रदर्शन है। गिरिजा ओक, स्मिता तांबे और बाकी कलाकार भी कहानी को मजबूती देते हैं। फिल्म का एक बड़ा गुण यह है कि सहायक कलाकार सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं बनते, बल्कि कहानी का जरूरी हिस्सा लगते हैं। कई बार ऐसा महसूस होता है कि फिल्म किसी एक कलाकार की नहीं, पूरी टीम की है। फिल्म का डायरेक्शन निर्देशक मनोज तापड़िया ने विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए काम किया है। उन्होंने 26/11 को तमाशे की तरह पेश करने के बजाय इंसानी नजरिए से देखने की कोशिश की है। फिल्म आतंकियों से ज्यादा उन लोगों पर फोकस करती है जिन्होंने मुश्किल समय में अपना कर्तव्य निभाया। निर्देशन की सबसे अच्छी बात यह है कि फिल्म लगातार सम्मानजनक बनी रहती है। कहीं भी अनावश्यक देशभक्ति या भावनाओं का दबाव डालने की कोशिश नहीं की गई। कई दृश्य स्वाभाविक रूप से असर छोड़ते हैं। हालांकि कुछ जगहों पर फिल्म और ज्यादा तीखी हो सकती थी। कुछ घटनाएं पर्दे पर जितना तनाव पैदा कर सकती थीं, उतना नहीं कर पातीं। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म की सिनेमैटोग्राफी माहौल बनाने में सफल रहता है। अस्पताल के गलियारों, बंद कमरों और भय के माहौल को कैमरा प्रभावी ढंग से पकड़ता है। कई दृश्य ऐसे हैं जहां दर्शक जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है, फिर भी तनाव बना रहता है। फिल्म की एडिटिंग भी काफी टाइट है। फिल्म बेवजह लंबी नहीं लगती, हालांकि पहले हिस्से में थोड़ी काट-छांट की जा सकती थी। प्रोडक्शन डिजाइन और कॉस्ट्यूम कहानी को असलियत के करीब लाते हैं। हॉस्पिटल का माहौल बनावटी नहीं लगता। फिल्म का म्यूजिक फिल्म का म्यूजिक याद रह जाने वाला नहीं है, लेकिन यह शिकायत भी नहीं बनता। पृष्ठभूमि संगीत कई महत्वपूर्ण दृश्यों में भावनात्मक असर बढ़ाता है। अच्छी बात यह है कि संगीत कहानी पर हावी नहीं होता। फिल्म की कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी धीमी शुरुआत है। कुछ दर्शकों को लग सकता है कि कहानी मुख्य संघर्ष तक पहुंचने में ज्यादा समय लेती है। इसके अलावा कुछ सहायक किरदारों को थोड़ा और विस्तार दिया जा सकता था। जो दर्शक पूरी तरह थ्रिलर देखने की उम्मीद से जाएंगे, उन्हें फिल्म कुछ जगहों पर अपेक्षा से ज्यादा भावनात्मक और कम रोमांचक लग सकती है। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘भारत भाग्य विधाता’ उन लोगों को याद करने की कोशिश है जिनका नाम इतिहास के बड़े पन्नों में शायद नहीं लिखा गया, लेकिन जिन्होंने अपने हिस्से की बहादुरी पूरी ईमानदारी से निभाई। फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह आतंक की कहानी सुनाते-सुनाते इंसानियत की कहानी बन जाती है। कंगना रनोट का सधा हुआ अभिनय, मजबूत सहायक कलाकार और संवेदनशील निर्देशन इसे एक असरदार अनुभव बनाते हैं। यह परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन दिल से बनाई गई फिल्म जरूर है। अगर आप सच्ची घटनाओं पर आधारित और भावनात्मक मानवीय कहानियां पसंद करते हैं, तो ‘भारत भाग्य विधाता’ एक बार देखी जा सकती है।
2 मिनट तक पेप्सी की फोटो देखती रहीं सपना चौधरी:पत्नी को गले लगाकर रोईं हरियाणवी सिंगर-डांसर, बच्चों के सिर पर हाथ फेरा

हरियाणवी सिंगर यशपाल शर्मा उर्फ पेप्सी शर्मा की शोक सभा में सपना चौधरी उनके पैतृक गांव पतला (गाजियाबाद) पहुंचीं। सपना ने पेप्सी शर्मा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वह दो मिनट तक पेप्सी की फोटो देखती रहीं। इसके बाद वह उनकी पत्नी से लिपट गईं और उन्हें सांत्वना दी। पेप्सी शर्मा के बच्चों के सिर पर हाथ रखते हुए सपना चौधरी भावुक नजर आईं। सपना ने पेप्सी के साथ मंच पर बिताए गए पलों और उनके साथ गाई रागनियों को भी याद किया। परिवार को ढांढस बंधाते समय उनकी आंखें नम हो गईं। पेप्सी शर्मा का 7 जून को सीने में दर्द होने के बाद निधन हो गया था। सपना और पेप्सी ने साथ में कई स्टेज कार्यक्रम और रागनी प्रतियोगिताएं की थीं। दोनों का नागिन डांस भी काफी चर्चित रहा था। शोक सभा की 2 तस्वीरें पत्नी को गले लगाकर ढांढस बंधाया पेप्सी शर्मा के घर पहुंचते ही सपना चौधरी ने सबसे पहले परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। उन्हें देखते ही पेप्सी शर्मा की पत्नी रेनू भावुक हो गईं और गले लगकर रोने लगीं। सपना ने उन्हें संभालते हुए सांत्वना दी और भरोसा दिलाया कि वह इस मुश्किल समय में परिवार के साथ हैं। इस दौरान सपना भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं और उनकी आंखें नम हो गईं। महिलाओं के साथ बैठकर सुनी परिवार की पीड़ा इसके बाद सपना चौधरी शोक सभा में मौजूद महिलाओं के बीच जमीन पर बैठीं और परिवार का हालचाल जाना। उन्होंने पेप्सी शर्मा की तस्वीर के सामने हाथ जोड़कर श्रद्धांजलि अर्पित की। फिर उनकी मां, भाइयों और अन्य परिजनों से मिलकर दुख साझा किया। पेप्सी शर्मा के साथ सपना के डांस के PHOTOS बच्चों और पत्नी को सहयोग का भरोसा दिया परिवार से बातचीत के दौरान सपना ने रेनू और बच्चों को अपने दिल्ली स्थित आवास आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में परिवार को किसी भी तरह की जरूरत हो तो वह हर संभव मदद के लिए तैयार हैं। सपना ने बच्चों का हालचाल भी जाना और उन्हें हिम्मत बनाए रखने की सलाह दी। वह करीब आधे घंटे तक परिवार के बीच रहीं। बोलीं- पेप्सी के जाने पर अब भी यकीन नहीं होता सपना चौधरी ने कहा- पेप्सी शर्मा के साथ उन्होंने कई मंच साझा किए थे और उनसे जुड़ी अनगिनत यादें हैं। वह अपने खास अंदाज से लोगों का मनोरंजन करते थे और जहां भी जाते थे, माहौल खुशनुमा बना देते थे। कभी नहीं लगा था कि वह इतनी कम उम्र में सभी को छोड़कर चले जाएंगे। भाई बोले- अब आखिरी निशानी उनका फोन पेप्सी शर्मा के बड़े भाई ऋषिपाल शर्मा ने बताया- उनके पास अब भाई की आखिरी निशानी के रूप में उनका मोबाइल फोन बचा है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत कई राज्यों से लगातार उनके चाहने वालों के फोन आ रहे हैं और लोग परिवार को सांत्वना दे रहे हैं। ऋषिपाल ने बताया कि सोनोटेक कंपनी के मालिक की ओर से परिवार को 25 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी गई है। श्रद्धांजलि सभा में मौजूद कलाकारों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि प्रत्येक वर्ष 7 जून को पेप्सी शर्मा की स्मृति में उनके गांव पतला में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 7 जून को हार्ट अटैक से हुआ था निधन यशपाल शर्मा उर्फ पेप्सी शर्मा का 7 जून को हार्ट अटैक आने से निधन हो गया था। उनकी अस्थियां ब्रजघाट पर गंगा नदी में विसर्जित की गईं थीं। पेप्सी शर्मा ने सपना चौधरी के साथ अनेक रागनी कार्यक्रमों में प्रस्तुति दी थी। पेप्सी अपनी पत्नी और बेटी के साथ नोएडा में रहते थे, जबकि उनका बेटा गांव में अपनी दादी और ताऊ के पास रहता है। ग्राफिक्स में सपना और पेप्सी के बारे में जानिए… —————————————- यह खबर भी पढ़ें… फैमिली-डिस्प्यूट के बीच सपना चौधरी ने पति पर जताया प्यार:रील बनाकर लिखा- मन्ने तेरे पै मर लेन दें; 2 दिन पहले कोर्ट से सिक्योरिटी मांगी मशहूर हरियाणवी डांसर-सिंगर सपना चौधरी और उसके पति वीर साहू के बीच चल रहा विवाद पिछले तीन दिनों से खूब चर्चा में है। पहले सपना ने दिल्ली की द्वारिका महिला कोर्ट में पति के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत की। (पूरी खबर पढ़ें)
कोच के निधन का पता चलते मनु ने मैच रोका:पिस्टल छोड़ जमीन पर बैठीं; कल शाम फोन पर जसपाल ने कहा था- अब तबीयत में सुधार

ओलिंपियन मेडलिस्ट शूटर मनू भाकर के कोच जसपाल राणा का 49 साल की उम्र में निधन हो गया। कोच के निधन की खबर सुनते ही मनु भाकर के हाथ से पिस्टल छूट गई। कुछ पल के मनु एक जगह ही खड़ी रहीं। इसके बाद भावुक होकर वहीं जमीन पर बैठ गईं। उन्होंने शूटिंग मुकाबला भी बीच में ही छोड़ दिया। मनु राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेने के लिए देहरादून गई हैं। यहां 25 मीटर एयर पिस्टल में मैच खेल रही थीं। परिजनों का कहना है कि मनु प्रतियोगिता में बिजी थी, इसीलिए कई घंटों तक उनसे ये बात छिपानी पड़ी। सुबह करीब 10 बजे उन्हें कोच के निधन की बात बताई गई, इसके बाद मनु ने बीच में ही अपना मैच रोक दिया। जसपाल के हार्ट में स्टेंट डला था एक जून की रात को म्यूनिख से लौटते समय फ्लाइट में जसपाल की तबीयत खराब हो गई थी, जहां उन्हें मेडिकल हेल्प दी गई थी। दिल्ली पहुंचते ही जसपाल को मैक्स साकेत हास्पिटल में एडमिट कराया गया। टेस्ट के बाद उन्हें हार्ट में एक स्टेंट डाला गया था। शुक्रवार सुबह उनका निधन हो गया। कल शाम तक हुई थी बातचीत कोच जसपाल की तबीयत खराब होने के बाद मनु लगातार उनके टच में थी। गुरुवार शाम भी उन्होंने फोन पर जसपाल से बातचीत की थी। बातचीत के दौरान कोच ने तबीयत में सुधार और जल्द ही ठीक होने की बात कही थी, मगर अगले दिन ही उनका निधन हो गया। मनु के करियर में कोच जसपाल का बड़ा रोल अंतिम दर्शन के लिए जाएंगी मनु कोच के निधन की खबर मिलने के बाद मनु भाकर ने अपने सभी कार्यक्रम और स्पोर्ट्स इवेंट स्थगित कर दिए हैं। देहरादून से वे सीधे कोच को अंतिम विदाई देने के लिए जाएंगी।
फिल्म 'काला हिरण' का फर्स्ट लुक रिलीज:नाम बदलकर सलमान खान और लॉरेंस का जिक्र किया गया; देखें वीडियो

सलमान खान के चर्चित काला हिरण मामले से प्रेरित फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ का फर्स्ट लुक जारी कर दिया गया है। फिल्म का पहला वीडियो शुक्रवार को रिलीज हुआ। जिसमें सलमान खान का जिक्र अयान खान और लॉरेंस का जिक्र लॉयन के नाम से किया गया है। वीडियो में काला हिरण शिकार केस और कानूनी लड़ाई से जुड़े मामले को दिखाया गया है। कई डायलॉग बिश्नोई समाज के त्याग और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं। फिल्म का निर्देशन भारत एस. श्रीनाथे ने किया है। जबकि अमित जानी इसके लेखक और निर्माता हैं। फिल्म का ग्लोबल टीजर 20 जून को रिलीज किया जाएगा। ‘काला हिरण’ को लेकर सलमान ने लीगल नोटिस भेजा ‘काला हिरण’ को लेकर सलमान की ओर से लीगल नोटिस भेजा गया था। न्यूज18 की रिपोर्ट में बताया गया था कि सलमान की ओर से लॉ फर्म DSK लीगल ने कास्टिंग डायरेक्टर अक्षय पांडे को एक लीगल नोटिस भेजा है। इस नोटिस में ‘काला हिरण’ नाम की प्रस्तावित फिल्म के प्रोडक्शन और प्रमोशन को तुरंत रोकने की मांग की गई। सलमान की ओर से मिले लीगल नोटिस को फाड़ा फिल्म ‘काला हिरण’ को लेकर जारी विवाद के बीच फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी ने सलमान खान की ओर से मिले लीगल नोटिस को फाड़ दिया। जानी ने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए वीडियो में कहा, हर कोई मुझसे पूछ रहा है, मीडिया, दोस्त, कि सलमान खान के नोटिस पर आपको क्या कहना है? इस नोटिस पर मैं क्या कहूं? पिछले 36 घंटों से उनकी डोंगरी, धारावी, जोगेश्वरी के मुस्लिम लड़कों की फैन फॉलोइंग, उनके टूलकिट ने मुझे जान से मारने, मुंबई आने और सिर कलम करने के हजारों मैसेज भेजे हैं और उनके टूलकिट के जरिए एक मैसेज, चाहे वह असली हो या नकली, मुझे नहीं पता, डी-कंपनी के नाम से भेजा गया है। डी-कंपनी छोड़ेगी नहीं। जानी ने आगे कहा कि तो मैं किसका जवाब दूं? क्या मैं सलमान खान की टूलकिट द्वारा हजारों गालियां दिलवाई गईं और धमकियां दिलवाई गईं, उनका जवाब दूं? क्या मैं इस नोटिस का जवाब दूं? वहीं, इससे पहले ऑफिशियल फेसबुक अकाउंट में पोस्ट किए वीडियो में अमित जानी ने कहा था कि हमारी पूरी फिल्म सलमान खान की बायोपिक नहीं है। हमारी पूरी फिल्म सलमान खान के नजरिए से नहीं है। वहीं ABP न्यूज के साथ बातचीत में जानी ने कहा था कि ‘काला हिरण’ बिश्नोई समाज के संघर्ष, उनकी विरासत और वन्यजीवों के प्रति उनके समर्पण को दिखाती है। सलमान खान फिल्म का सिर्फ एक पार्ट हैं। 1998 में काला हिरण शिकार मामला सामने आया सलमान खान से जुड़ा काला हिरण शिकार मामला साल 1998 में सामने आया था, जब वो जोधपुर में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग कर रहे थे। सलमान के खिलाफ कुल चार केस दर्ज किए गए थे। इनमें दो चिंकारा शिकार मामले, एक कांकाणी काला हिरण शिकार मामला और एक आर्म्स एक्ट का मामला शामिल था। काला हिरण शिकार मामले में बिश्नोई समुदाय की शिकायत पर सलमान के साथ सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था। अप्रैल 2006 में चिंकारा शिकार मामलों में सलमान को सजा सुनाई गई। जनवरी 2017 में उन्हें आर्म्स एक्ट मामले में बरी कर दिया गया। वहीं, 5 अप्रैल 2018 को काला हिरण शिकार मामले में उन्हें 5 साल की जेल और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा मिली। इसी मामले में बाकी कलाकारों को बरी कर दिया गया था। बाद में सलमान को जमानत मिल गई। फिलहाल यह मामला राजस्थान हाई कोर्ट में लंबित है। अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 के लिए तय की है। सलमान खान फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
फिल्म 'काला हिरण' का फर्स्ट लुक रिलीज:नाम बदलकर सलमान खान और लॉरेंस का जिक्र किया गया; देखें वीडियो

सलमान खान के चर्चित काला हिरण मामले से प्रेरित फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ का फर्स्ट लुक जारी कर दिया गया है। फिल्म का पहला वीडियो शुक्रवार को रिलीज हुआ। जिसमें सलमान खान का जिक्र अयान खान और लॉरेंस का जिक्र लॉयन के नाम से किया गया है। वीडियो में काला हिरण शिकार केस और कानूनी लड़ाई से जुड़े मामले को दिखाया गया है। कई डायलॉग बिश्नोई समाज के त्याग और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं। फिल्म का निर्देशन भारत एस. श्रीनाथे ने किया है। जबकि अमित जानी इसके लेखक और निर्माता हैं। फिल्म का ग्लोबल टीजर 20 जून को रिलीज किया जाएगा। ‘काला हिरण’ को लेकर सलमान ने लीगल नोटिस भेजा ‘काला हिरण’ को लेकर सलमान की ओर से लीगल नोटिस भेजा गया था। न्यूज18 की रिपोर्ट में बताया गया था कि सलमान की ओर से लॉ फर्म DSK लीगल ने कास्टिंग डायरेक्टर अक्षय पांडे को एक लीगल नोटिस भेजा है। इस नोटिस में ‘काला हिरण’ नाम की प्रस्तावित फिल्म के प्रोडक्शन और प्रमोशन को तुरंत रोकने की मांग की गई। सलमान की ओर से मिले लीगल नोटिस को फाड़ा फिल्म ‘काला हिरण’ को लेकर जारी विवाद के बीच फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी ने सलमान खान की ओर से मिले लीगल नोटिस को फाड़ दिया। जानी ने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए वीडियो में कहा, हर कोई मुझसे पूछ रहा है, मीडिया, दोस्त, कि सलमान खान के नोटिस पर आपको क्या कहना है? इस नोटिस पर मैं क्या कहूं? पिछले 36 घंटों से उनकी डोंगरी, धारावी, जोगेश्वरी के मुस्लिम लड़कों की फैन फॉलोइंग, उनके टूलकिट ने मुझे जान से मारने, मुंबई आने और सिर कलम करने के हजारों मैसेज भेजे हैं और उनके टूलकिट के जरिए एक मैसेज, चाहे वह असली हो या नकली, मुझे नहीं पता, डी-कंपनी के नाम से भेजा गया है। डी-कंपनी छोड़ेगी नहीं। जानी ने आगे कहा कि तो मैं किसका जवाब दूं? क्या मैं सलमान खान की टूलकिट द्वारा हजारों गालियां दिलवाई गईं और धमकियां दिलवाई गईं, उनका जवाब दूं? क्या मैं इस नोटिस का जवाब दूं? वहीं, इससे पहले ऑफिशियल फेसबुक अकाउंट में पोस्ट किए वीडियो में अमित जानी ने कहा था कि हमारी पूरी फिल्म सलमान खान की बायोपिक नहीं है। हमारी पूरी फिल्म सलमान खान के नजरिए से नहीं है। वहीं ABP न्यूज के साथ बातचीत में जानी ने कहा था कि ‘काला हिरण’ बिश्नोई समाज के संघर्ष, उनकी विरासत और वन्यजीवों के प्रति उनके समर्पण को दिखाती है। सलमान खान फिल्म का सिर्फ एक पार्ट हैं। 1998 में काला हिरण शिकार मामला सामने आया सलमान खान से जुड़ा काला हिरण शिकार मामला साल 1998 में सामने आया था, जब वो जोधपुर में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग कर रहे थे। सलमान के खिलाफ कुल चार केस दर्ज किए गए थे। इनमें दो चिंकारा शिकार मामले, एक कांकाणी काला हिरण शिकार मामला और एक आर्म्स एक्ट का मामला शामिल था। काला हिरण शिकार मामले में बिश्नोई समुदाय की शिकायत पर सलमान के साथ सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था। अप्रैल 2006 में चिंकारा शिकार मामलों में सलमान को सजा सुनाई गई। जनवरी 2017 में उन्हें आर्म्स एक्ट मामले में बरी कर दिया गया। वहीं, 5 अप्रैल 2018 को काला हिरण शिकार मामले में उन्हें 5 साल की जेल और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा मिली। इसी मामले में बाकी कलाकारों को बरी कर दिया गया था। बाद में सलमान को जमानत मिल गई। फिलहाल यह मामला राजस्थान हाई कोर्ट में लंबित है। अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 के लिए तय की है। सलमान खान फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
पहले टी-20 में वेस्टइंडीज ने श्रीलंका को 7 विकेट हराया:शाई होप के नाबाद 65 रन, होल्डर-जोसेफ ने 3-3 विकेट लिए

जमैका के किंग्स्टन में खेले गए पहले टी-20 मुकाबले में वेस्टइंडीज ने श्रीलंका को 7 विकेट से हरा दिया। श्रीलंका के कप्तान कुसल मेंडिस ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका ने निर्धारित 20 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर 147 रन बनाए। 148 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम ने 19.2 ओवर में 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। टीम की जीत में कप्तान शाई होप ने अहम भूमिका निभाई और 53 गेंदों पर नाबाद 65 रन की पारी खेली। उनकी कप्तानी पारी की बदौलत वेस्टइंडीज ने 4 गेंद शेष रहते मुकाबला अपने नाम कर लिया। कामिंदु मेंडिस और कुसल मेंडिस ने संभाली श्रीलंका की पारी श्रीलंका के लिए कामिंदु मेंडिस सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। उन्होंने 39 गेंदों में 51 रन बनाए, जिसमें 4 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। कप्तान कुसल मेंडिस ने 23 गेंदों में 36 रन बनाकर दूसरी सबसे बड़ी पारी खेली। उन्होंने 2 चौके और 3 छक्के लगाए। श्रीलंका की शुरुआत अच्छी रही। पथुम निसांका और कुसल मेंडिस ने पहले विकेट के लिए 43 रन जोड़े। निसांका 18 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद 43 रन पर लसित क्रूसपुले बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। टीम का तीसरा विकेट 49 रन पर गिरा, जबकि कुसल मेंडिस 65 रन के कुल स्कोर पर आउट हुए। कांमिंदु और दासुन के बीच 59 रन की साझेदारी इसके बाद कामिंदु मेंडिस और दासुन शनाका ने पांचवें विकेट के लिए 48 गेंदों में 59 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर पारी संभाली। कामिंदु ने 51 और शनाका ने 23 गेंदों पर 22 रन बनाए। इनके आउट होने के बाद श्रीलंका कोई बड़ी साझेदारी नहीं कर सका और 20 ओवर में 9 विकेट पर 147 रन ही बना सका। होल्डर-जोसेफ ने 3-3 विकेट लिए वेस्टइंडीज के लिए जेसन होल्डर और शमर जोसेफ ने 3-3 विकेट लिए, जबकि रोस्टन चेज को 1 विकेट मिला। लसिथ क्रूसपुले को मिला मौका श्रीलंका ने मैच से एक दिन पहले अपनी प्लेइंग इलेवन की घोषणा कर दी थी। नए हेड कोच गैरी कस्टर्न के आने के बाद मैच से पहले टीम का एलान करने का ट्रेंड बढ़ा है। टीम 6 बल्लेबाज और 5 गेंदबाजों के कॉम्बिनेशन के साथ उतरी। इसमें तीन तेज गेंदबाज और दो फ्रंट-लाइन स्पिनर्स शामिल थे। युवा खिलाड़ी लसिथ क्रूसपुले को प्लेइंग इलेवन में जगह मिली। यह उनके करियर का सिर्फ दूसरा टी-20 इंटरनेशनल मैच है। ब्रैंडन किंग और शाई होप ने टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई वेस्टइंडीज के सामने जीत हासिल करने के लिए 148 रनों का लक्ष्य था जिसका पीछा करते हुए मेजबान टीम के लिए ब्रैंडन किंग और कैप्टन शाई होप ने शानदार शुरुआत की। इन दोनों ने मिलकर पहले विकेट के लिए 6.2 ओवर में 67 रन जोड़े। इसके बाद ब्रैंडन किंग 22 गेंदों पर 37 रन बनाकर आउट हुए। हालांकि दूसरी तरफ से शाई होप ने एक छोर संभाले रखा और आखिर तक बैटिंग करके 54 गेंदों पर 5 चौके और 2 छक्के की मदद से नाबाद 65 रनों की पारी खेली। वेस्टइंडीज के लिए शिमरोन हेटमायर (9 गेंदों पर 17 रन), रोस्टन चेज (26 गेंदों पर 16 रन) और रोवमैन पॉवेल (06 गेंदों पर नाबाद 10 रन) ने भी कुछ अहम रन जोड़े। इन्हीं सब के दम पर वेस्टइंडीज ने 19.2 ओवर में 148 रनों का टारगेट हासिल करके 7 विकेट से जीत दर्ज की। वानिंदु हसरंगा ने 2 विकेट लिए श्रीलंकाई टीम के लिए सिर्फ वानिंदु हसरंगा (4 ओवर में 32 रन देकर 2 विकेट) और ईशान मलिंगा (4 ओवर में 26 रन देकर 1 विकेट) ही अपनी गेंदबाज़ी से सफलता हासिल कर पाए। ध्यान दें कि ये मुकाबला जीतकर वेस्टइंडीज ने तीन मैचों की टी20 सीरीज में श्रीलंका पर 1-0 की बढ़त बना ली है। वेस्टइंडीज ने गुडाकेश मोती को ड्रॉप किया, 4 तेज गेंदबाजों को खिलाया दूसरी ओर, मेजबान वेस्टइंडीज ने पिच की कंडीशन को देखते हुए एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज को शामिल किया। टीम 4 तेज गेंदबाजों के अटैक के साथ मैदान पर उतरी। इस रणनीति के कारण स्पिनर गुडाकेश मोती को प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठना पड़ा। श्रीलंका की टीम: पथुम निसांका, कुसल मेंडिस (कप्तान और विकेटकीपर), लसिथ क्रूसपुले, पवन रथनायके, कामिंदु मेंडिस, दासुन शनाका, वानिंदु हसरंगा, महीश तीक्ष्णा, दुष्मंता चमीरा, ईशान मलिंगा, दिलशान मदुशंका। वेस्टइंडीज की टीम: शाई होप (कप्तान और विकेटकीपर), ब्रैंडन किंग, शिमरॉन हेटमायर, रोस्टन चेज, शेरफेन रदरफोर्ड, रोवमैन पॉवेल, जेसन होल्डर, रोमारियो शेफर्ड, मैथ्यू फोर्ड, अकील होसेन, शमर जोसेफ।
पहले टी-20 में वेस्टइंडीज ने श्रीलंका को 7 विकेट हराया:शाई होप के नाबाद 65 रन, होल्डर-जोसेफ ने 3-3 विकेट लिए

जमैका के किंग्स्टन में खेले गए पहले टी-20 मुकाबले में वेस्टइंडीज ने श्रीलंका को 7 विकेट से हरा दिया। श्रीलंका के कप्तान कुसल मेंडिस ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका ने निर्धारित 20 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर 147 रन बनाए। 148 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम ने 19.2 ओवर में 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। टीम की जीत में कप्तान शाई होप ने अहम भूमिका निभाई और 53 गेंदों पर नाबाद 65 रन की पारी खेली। उनकी कप्तानी पारी की बदौलत वेस्टइंडीज ने 4 गेंद शेष रहते मुकाबला अपने नाम कर लिया। कामिंदु मेंडिस और कुसल मेंडिस ने संभाली श्रीलंका की पारी श्रीलंका के लिए कामिंदु मेंडिस सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। उन्होंने 39 गेंदों में 51 रन बनाए, जिसमें 4 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। कप्तान कुसल मेंडिस ने 23 गेंदों में 36 रन बनाकर दूसरी सबसे बड़ी पारी खेली। उन्होंने 2 चौके और 3 छक्के लगाए। श्रीलंका की शुरुआत अच्छी रही। पथुम निसांका और कुसल मेंडिस ने पहले विकेट के लिए 43 रन जोड़े। निसांका 18 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद 43 रन पर लसित क्रूसपुले बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। टीम का तीसरा विकेट 49 रन पर गिरा, जबकि कुसल मेंडिस 65 रन के कुल स्कोर पर आउट हुए। कांमिंदु और दासुन के बीच 59 रन की साझेदारी इसके बाद कामिंदु मेंडिस और दासुन शनाका ने पांचवें विकेट के लिए 48 गेंदों में 59 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर पारी संभाली। कामिंदु ने 51 और शनाका ने 23 गेंदों पर 22 रन बनाए। इनके आउट होने के बाद श्रीलंका कोई बड़ी साझेदारी नहीं कर सका और 20 ओवर में 9 विकेट पर 147 रन ही बना सका। होल्डर-जोसेफ ने 3-3 विकेट लिए वेस्टइंडीज के लिए जेसन होल्डर और शमर जोसेफ ने 3-3 विकेट लिए, जबकि रोस्टन चेज को 1 विकेट मिला। लसिथ क्रूसपुले को मिला मौका श्रीलंका ने मैच से एक दिन पहले अपनी प्लेइंग इलेवन की घोषणा कर दी थी। नए हेड कोच गैरी कस्टर्न के आने के बाद मैच से पहले टीम का एलान करने का ट्रेंड बढ़ा है। टीम 6 बल्लेबाज और 5 गेंदबाजों के कॉम्बिनेशन के साथ उतरी। इसमें तीन तेज गेंदबाज और दो फ्रंट-लाइन स्पिनर्स शामिल थे। युवा खिलाड़ी लसिथ क्रूसपुले को प्लेइंग इलेवन में जगह मिली। यह उनके करियर का सिर्फ दूसरा टी-20 इंटरनेशनल मैच है। ब्रैंडन किंग और शाई होप ने टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई वेस्टइंडीज के सामने जीत हासिल करने के लिए 148 रनों का लक्ष्य था जिसका पीछा करते हुए मेजबान टीम के लिए ब्रैंडन किंग और कैप्टन शाई होप ने शानदार शुरुआत की। इन दोनों ने मिलकर पहले विकेट के लिए 6.2 ओवर में 67 रन जोड़े। इसके बाद ब्रैंडन किंग 22 गेंदों पर 37 रन बनाकर आउट हुए। हालांकि दूसरी तरफ से शाई होप ने एक छोर संभाले रखा और आखिर तक बैटिंग करके 54 गेंदों पर 5 चौके और 2 छक्के की मदद से नाबाद 65 रनों की पारी खेली। वेस्टइंडीज के लिए शिमरोन हेटमायर (9 गेंदों पर 17 रन), रोस्टन चेज (26 गेंदों पर 16 रन) और रोवमैन पॉवेल (06 गेंदों पर नाबाद 10 रन) ने भी कुछ अहम रन जोड़े। इन्हीं सब के दम पर वेस्टइंडीज ने 19.2 ओवर में 148 रनों का टारगेट हासिल करके 7 विकेट से जीत दर्ज की। वानिंदु हसरंगा ने 2 विकेट लिए श्रीलंकाई टीम के लिए सिर्फ वानिंदु हसरंगा (4 ओवर में 32 रन देकर 2 विकेट) और ईशान मलिंगा (4 ओवर में 26 रन देकर 1 विकेट) ही अपनी गेंदबाज़ी से सफलता हासिल कर पाए। ध्यान दें कि ये मुकाबला जीतकर वेस्टइंडीज ने तीन मैचों की टी20 सीरीज में श्रीलंका पर 1-0 की बढ़त बना ली है। वेस्टइंडीज ने गुडाकेश मोती को ड्रॉप किया, 4 तेज गेंदबाजों को खिलाया दूसरी ओर, मेजबान वेस्टइंडीज ने पिच की कंडीशन को देखते हुए एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज को शामिल किया। टीम 4 तेज गेंदबाजों के अटैक के साथ मैदान पर उतरी। इस रणनीति के कारण स्पिनर गुडाकेश मोती को प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठना पड़ा। श्रीलंका की टीम: पथुम निसांका, कुसल मेंडिस (कप्तान और विकेटकीपर), लसिथ क्रूसपुले, पवन रथनायके, कामिंदु मेंडिस, दासुन शनाका, वानिंदु हसरंगा, महीश तीक्ष्णा, दुष्मंता चमीरा, ईशान मलिंगा, दिलशान मदुशंका। वेस्टइंडीज की टीम: शाई होप (कप्तान और विकेटकीपर), ब्रैंडन किंग, शिमरॉन हेटमायर, रोस्टन चेज, शेरफेन रदरफोर्ड, रोवमैन पॉवेल, जेसन होल्डर, रोमारियो शेफर्ड, मैथ्यू फोर्ड, अकील होसेन, शमर जोसेफ।
नेशनल कंज्यूमर फोरम से भी सलमान खान को राहत:कोटा कंज्यूमर फोरम में चल रही कार्रवाई पर स्टे; अगली सुनवाई 14 जुलाई को

राजश्री पान मसाला के भ्रामक विज्ञापन के मामले में सलमान खान को नेशनल कंज्यूमर फोरम (NCDC) से भी राहत मिली है। फिलहाल सलमान खान को FSL जांच के लिए कोटा नहीं आना पड़ेगा। नेशनल कंज्यूमर फोरम ने सलमान खान के खिलाफ कोटा कंज्यूमर फोरम में चल रही कार्रवाई पर स्टे दे दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 जून को होगी। इसी मामले में हाईकोर्ट ने 27 मई को स्टे जारी किया था। जिसकी अगली सुनवाई 14 जुलाई को होनी है। सलमान खान को पेश होने का था आदेश पान मसाला कंपनी की ओर से वकील राकेश सुवालका ने बताया कि सलमान खान की ओर से कोटा कंज्यूमर फोरम में पेश वकालतनामा और जवाब पर सलमान खान के हस्ताक्षर को लेकर याचिकाकर्ता भाजपा नेता और एडवोकेट इंद्रमोहन सिंह हनी ने आपत्ति जताई थी। इस पर जिला उपभोक्ता अदालत ने 26 दिसंबर 2025 को एक आदेश पारित किया था, जिसमें सलमान खान के हस्ताक्षरों की जांच FSL से कराने और उन्हें खुद उपस्थित होकर अपना हस्ताक्षरित शपथ पत्र पेश करने का निर्देश दिया गया था। सलमान खान के कोर्ट में पेश नहीं होने पर याचिकाकर्ता ने कोर्ट की अवमानना का प्रार्थना-पत्र पेश किया था। इसी कार्रवाई के विरोध में सलमान खान की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट और नेशनल कंज्यूमर फोरम प्रार्थना-पत्र पेश किया था। 26 दिसंबर 2025 को कोटा कंज्यूमर कोर्ट के ऑर्डर पर रोक लगाने की मांग की। अगली सुनवाई 14 जुलाई को मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 27 मई को स्टे जारी किया था। सलमान खान के वकील की ओर से हाईकोर्ट के ऑर्डर की कॉपी कोटा कंज्यूमर फोरम में पेश की थी। वहीं अब नेशनल कंज्यूमर फोरम ने मामले में सुनवाई करते हुए 10 जून को स्टे जारी कर दिया है। नेशनल कंज्यूमर फोरम के ऑर्डर की कॉपी 11 जून को कोटा कंज्यूमर फोरम में पेश की। सलमान खान के वकील की ओर से नेशनल कंज्यूमर फोरम में परिवादी इंद्र मोहन सिंह हनी द्वारा जून 25 में विमल पान मसाला के खिलाफ परिवाद विड्रो करने का प्रार्थना पत्र भी पेश किया। कोटा कंज्यूमर फोरम में इस मामले में अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी। —————————————– ये खबर भी पढ़े सलमान खान को FSL-जांच के लिए नहीं आना पड़ेगा कोटा:वकील ने हाईकोर्ट का स्टे ऑर्डर किया पेश; कोटा कंज्यूमर कोर्ट से मिली राहत फिल्म स्टार सलमान खान के डॉक्यूमेंट्स FSL ने किए खारिज:कोटा कंज्यूमर कोर्ट ने कमियों को दूर करने को कहा; 21 अप्रैल को अगली सुनवाई
नेशनल कंज्यूमर फोरम से भी सलमान खान को राहत:कोटा कंज्यूमर फोरम में चल रही कार्रवाई पर स्टे; अगली सुनवाई 14 जुलाई को

राजश्री पान मसाला के भ्रामक विज्ञापन के मामले में सलमान खान को नेशनल कंज्यूमर फोरम (NCDC) से भी राहत मिली है। फिलहाल सलमान खान को FSL जांच के लिए कोटा नहीं आना पड़ेगा। नेशनल कंज्यूमर फोरम ने सलमान खान के खिलाफ कोटा कंज्यूमर फोरम में चल रही कार्रवाई पर स्टे दे दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 जून को होगी। इसी मामले में हाईकोर्ट ने 27 मई को स्टे जारी किया था। जिसकी अगली सुनवाई 14 जुलाई को होनी है। सलमान खान को पेश होने का था आदेश पान मसाला कंपनी की ओर से वकील राकेश सुवालका ने बताया कि सलमान खान की ओर से कोटा कंज्यूमर फोरम में पेश वकालतनामा और जवाब पर सलमान खान के हस्ताक्षर को लेकर याचिकाकर्ता भाजपा नेता और एडवोकेट इंद्रमोहन सिंह हनी ने आपत्ति जताई थी। इस पर जिला उपभोक्ता अदालत ने 26 दिसंबर 2025 को एक आदेश पारित किया था, जिसमें सलमान खान के हस्ताक्षरों की जांच FSL से कराने और उन्हें खुद उपस्थित होकर अपना हस्ताक्षरित शपथ पत्र पेश करने का निर्देश दिया गया था। सलमान खान के कोर्ट में पेश नहीं होने पर याचिकाकर्ता ने कोर्ट की अवमानना का प्रार्थना-पत्र पेश किया था। इसी कार्रवाई के विरोध में सलमान खान की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट और नेशनल कंज्यूमर फोरम प्रार्थना-पत्र पेश किया था। 26 दिसंबर 2025 को कोटा कंज्यूमर कोर्ट के ऑर्डर पर रोक लगाने की मांग की। अगली सुनवाई 14 जुलाई को मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 27 मई को स्टे जारी किया था। सलमान खान के वकील की ओर से हाईकोर्ट के ऑर्डर की कॉपी कोटा कंज्यूमर फोरम में पेश की थी। वहीं अब नेशनल कंज्यूमर फोरम ने मामले में सुनवाई करते हुए 10 जून को स्टे जारी कर दिया है। नेशनल कंज्यूमर फोरम के ऑर्डर की कॉपी 11 जून को कोटा कंज्यूमर फोरम में पेश की। सलमान खान के वकील की ओर से नेशनल कंज्यूमर फोरम में परिवादी इंद्र मोहन सिंह हनी द्वारा जून 25 में विमल पान मसाला के खिलाफ परिवाद विड्रो करने का प्रार्थना पत्र भी पेश किया। कोटा कंज्यूमर फोरम में इस मामले में अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी। —————————————– ये खबर भी पढ़े सलमान खान को FSL-जांच के लिए नहीं आना पड़ेगा कोटा:वकील ने हाईकोर्ट का स्टे ऑर्डर किया पेश; कोटा कंज्यूमर कोर्ट से मिली राहत फिल्म स्टार सलमान खान के डॉक्यूमेंट्स FSL ने किए खारिज:कोटा कंज्यूमर कोर्ट ने कमियों को दूर करने को कहा; 21 अप्रैल को अगली सुनवाई






