‘वे कानून नहीं जानते’: महुआ मोइत्रा ने 19 टीएमसी ‘गद्दारों’ को इस्तीफा देने और बीजेपी के टिकट पर जनादेश मांगने की चुनौती दी | भारत समाचार

आखरी अपडेट:12 जून, 2026, 12:59 IST काकोली दस्तीदार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में स्थिति “बद से बदतर होती जा रही है” और उन्होंने शासन और कथित वित्तीय अनियमितताओं पर चिंताओं का हवाला दिया। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा (छवि पीटीआई) हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बढ़ते तनाव के बीच, पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा ने शुक्रवार को उन 19 सांसदों पर तीखा हमला बोला, जिन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने की घोषणा की है, उन्हें “देशद्रोही” कहा और जोर देकर कहा कि उन्हें इस्तीफा देना चाहिए और भाजपा के टिकट पर मतदाताओं से नया जनादेश लेना चाहिए। एक्स पर एक पोस्ट में, इस दावे को खारिज कर दिया गया कि विद्रोही सांसद दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत अयोग्यता से बच सकते हैं, यह तर्क देते हुए कि संविधान के 91 वें संशोधन ने विभाजन या अलग गुट के प्रावधान को हटा दिया है। उन्होंने कहा, “देशद्रोही टीएमसी सांसदों को कानून की जानकारी नहीं है। संविधान के 91वें संशोधन 2003 ने विभाजन/अलग गुट के प्रावधान को हटा दिया। सांसदों की संख्या अप्रासंगिक है – मूल राजनीतिक दल के 2/3 को किसी अन्य पार्टी के साथ विलय करना होगा। सभी 19 गद्दारों को इस्तीफा देने और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की जरूरत है।” गद्दार टीएमसी विधायक कानून नहीं जानते। संविधान के 91वें संशोधन 2003 ने विभाजन/पृथक गुट के प्रावधान को हटा दिया। सांसदों की संख्या अप्रासंगिक है- मूल राजनीतिक दल के 2/3 को किसी अन्य पार्टी के साथ विलय करना होगा। सभी 19 गद्दारों को इस्तीफा देने और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की जरूरत है।- महुआ मोइत्रा (@MahuaMoitra) 12 जून, 2026 उनकी टिप्पणी काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 19 असंतुष्ट टीएमसी सांसदों के एक समूह द्वारा पिछले महीने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र सौंपने के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया है कि दस्तीदार सदन में पार्टी के मुख्य सचेतक बने रहेंगे और उन्हें एनडीए का समर्थन करने के अपने फैसले के बारे में सूचित किया जाएगा। विद्रोहियों ने तर्क दिया है कि हालांकि ममता बनर्जी ने दस्तीदार को मुख्य सचेतक के पद से हटा दिया और उनके स्थान पर कल्याण बनर्जी को नियुक्त किया, लेकिन कथित तौर पर इस बदलाव के बारे में लोकसभा सचिवालय को औपचारिक रूप से सूचित नहीं किया गया था। उनका तर्क है कि दस्तीदार इसलिए आधिकारिक रिकॉर्ड में पद पर बने हुए हैं। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, दस्तीदार ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में स्थिति “बद से बदतर होती जा रही है” और शासन और कथित वित्तीय अनियमितताओं पर चिंताओं का हवाला दिया। द इंडियन एक्सप्रेस के साथ एक अलग साक्षात्कार में, मोइत्रा ने भाजपा पर चुनाव जीतने के बजाय दलबदल कराकर अपनी संसदीय ताकत बढ़ाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बागी सांसदों ने अपनी चुनावी जीत का श्रेय ममता बनर्जी को दिया और उन पर पार्टी नेतृत्व को धोखा देने का आरोप लगाया। मोइत्रा ने कहा, “लालच और विश्वासघात की कोई सीमा नहीं है। भाजपा लोकसभा में हार के बाद से हताश थी, जब उन्हें दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला था। इसलिए, उन्होंने अपनी गणना कर ली है, और किसी भी तरह से वे 40-50 सांसद और लाना चाहते हैं। वे इसे चुनावों के माध्यम से प्राप्त करने में विश्वास नहीं करते हैं; वे इसे जोड़-तोड़ (पार्टियों को तोड़ना) के माध्यम से करना चाहते हैं।” टीएमसी संकट का जिक्र करते हुए, मोइत्रा ने टिप्पणी की कि “लालच और विश्वासघात की कोई सीमा नहीं है”, इस बात पर जोर दिया कि सभी विद्रोही सांसद पूरी तरह से ममता बनर्जी के कारण चुने गए थे। उन्होंने कहा, ”पार्टी किसकी है, इस बारे में रत्ती भर भी अनिश्चितता नहीं है। पार्टी ममता बनर्जी हैं।” विधानसभा चुनाव में हार के बाद विद्रोह ने टीएमसी में सबसे बड़े संकटों में से एक को जन्म दिया है, जिसमें पार्टी के भीतर इस्तीफे और खुले असंतोष सामने आए हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में शोभित गुप्ता शोभित गुप्ता News18.com में उप-संपादक हैं और भारत और अंतर्राष्ट्रीय समाचारों को कवर करते हैं। वह भारत के रोजमर्रा के राजनीतिक मामलों और भू-राजनीति में रुचि रखते हैं। उन्होंने बीए पत्रकारिता (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘वे कानून नहीं जानते’: महुआ मोइत्रा ने 19 टीएमसी ‘गद्दारों’ को इस्तीफा देकर बीजेपी के टिकट पर जनादेश मांगने की चुनौती दी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)टीएमसी बागी सांसद(टी)महुआ मोइत्रा हमला(टी)ममता बनर्जी संकट(टी)टीएमसी आंतरिक दरार(टी)एनडीए समर्थन विवाद(टी)दलबदल विरोधी कानून भारत(टी)बीजेपी इंजीनियरिंग दलबदल(टी)लोकसभा विद्रोह
आज दुनिया के पहले ट्रिलिनियर बन सकते हैं मस्क:रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स अमेरिकी बाजार में लिस्ट होगी; ये दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ

दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स आज, 12 जून को अमेरिकी शेयर बाजार नैस्डैक पर लिस्ट होगी। गुरुवार को कंपनी ने अपने आईपीओ का फाइनल प्राइस 135 डॉलर तय कर दिया है। 1.77 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 168 लाख करोड़ रुपए के वैल्यूएशन पर हो रही इस लिस्टिंग के बाद इलॉन मस्क दुनिया के पहले ट्रिलिनियर बन सकते हैं। सवाल-जवाब में समझते हैं आज की लिस्टिंग की पूरी एबीसीडी सवाल 1: आज होने जा रही स्पेसएक्स की लिस्टिंग इतनी ऐतिहासिक क्यों है? जवाब: स्पेसएक्स इस इश्यू के जरिए रिकॉर्ड 75 बिलियन डॉलर यानी करीब 7.15 लाख करोड़ रुपए जुटा रही है। यह अकेला आईपीओ साल 2024 और 2025 में आए सभी अमेरिकी आईपीओ की कुल जुटाई रकम से भी ज्यादा है। यह दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है। सवाल 2: क्या इस लिस्टिंग से इलॉन मस्क दुनिया के पहले ‘ट्रिलिनेयर’ बन जाएंगे? जवाब: हां, इसकी पूरी संभावना है। फोर्ब्स के अनुसार इलॉन मस्क की नेटवर्थ 982 बिलियन डॉलर यानी करीब 94 लाख करोड़ रुपए है। उनके पास स्पेसएक्स में करीब 866 बिलियन डॉलर के शेयर हैं। आज जैसे ही ट्रेडिंग शुरू होगी तो टेस्ला और अपनी बाकी कंपनियों की वेल्थ मिलाकर मस्क की कुल नेटवर्थ 1 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 95 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच जाएगी। सवाल 3: एक ट्रिलियन डॉलर की रकम कितनी बड़ी होती है, इसे आम भाषा में कैसे समझें? जवाब: 1 ट्रिलियन डॉलर एक ऐसी रकम है जो दुनिया के अधिकांश देशों की जीडीपी से भी बड़ी है। दुनिया के केवल 20 देश ऐसे हैं जिनकी जीडीपी इससे ज्यादा है। मस्क अकेले ताइवान, स्विट्जरलैंड, स्वीडन और सिंगापुर जैसे अमीर देशों की कुल अर्थव्यवस्था से ज्यादा अमीर हो जाएंगे। अगर कोई व्यक्ति हर घंटे 10 लाख डॉलर यानी करीब 9.54 करोड़ रुपए भी खर्च करे, तो उसे 1 ट्रिलियन डॉलर खत्म करने में 114 साल से ज्यादा का समय लगेगा। जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमन ने तो मस्क को ‘हमारे समय का एडिसन और आइंस्टीन’ तक कह दिया है। सवाल 4: मार्केट एक्सपर्ट्स जिस ‘इलॉन प्रीमियम’ की बात कर रहे हैं, वो क्या है? जवाब: रेनेसां कैपिटल के सीनियर स्ट्रेटेजिस्ट मैट कैनेडी का कहना है कि ट्रेडिशनल फाइनेंस के नियम स्पेसएक्स पर लागू नहीं होते। जब कोई कंपनी पारंपरिक वित्तीय पैमानों जैसे मुनाफा या रेवेन्यू से परे जाकर सिर्फ अपने मालिक के विजन और साख के दम पर इतना बड़ा वैल्यूएशन पाती है, तो उसे बाजार की भाषा में ‘इलॉन प्रीमियम’ या ‘मस्कोनॉमी’ कहा जाता है। निवेशक उनके पिछले ट्रैक रिकॉर्ड को देखकर उनके इस नए विजन पर आंख मूंदकर दांव लगा रहे हैं। सवाल 5: कंपनी में आम निवेशकों की भागीदारी और मस्क का कंट्रोल कैसा रहेगा? जवाब: कंपनी ने आम निवेशकों के लिए रिकॉर्ड 30% का कोटा रिजर्व रखा है, जो करीब 22.5 बिलियन डॉलर बैठता है। जहां तक कंट्रोल की बात है, मस्क इस आईपीओ में अपना एक भी शेयर नहीं बेच रहे हैं और लिस्टिंग के बाद भी कंपनी के मेजॉरिटी वोटिंग राइट्स उन्हीं के पास रहेंगे। सवाल 6: बाजार के तकनीकी एक्सपर्ट्स को आज लिस्टिंग के समय किस बात का डर है? जवाब: इस ऐतिहासिक आईपीओ के कारण आज खुद मार्केट के सिस्टम का भी बड़ा टेस्ट होना है। जब 2012 में फेसबुक का बड़ा आईपीओ नैस्डैक पर आया था, तब तकनीकी गड़बड़ियों के कारण उसकी ओपनिंग में देरी हुई थी। चूंकि स्पेसएक्स का आईपीओ फेसबुक से कहीं ज्यादा बड़ा है, इसलिए वॉल स्ट्रीट की नजरें नैस्डैक के तकनीकी सिस्टम पर टिकी हैं कि वह इस लोड को कैसे संभालता है। सवाल 7: क्या स्पेसएक्स के मजबूत फाइनेंशियल्स इसके ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहराते हैं? जवाब: नहीं, बिल्कुल नहीं। यही सबसे बड़ा विवाद है। स्पेसएक्स ने पिछले साल लगभग 19 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू तो कमाया, लेकिन कंपनी ने अब तक कोई मुनाफा नहीं कमाया है। रेटिंग एजेंसी ‘मॉर्निंगस्टार’ के विश्लेषकों ने साफ लिखा है कि कंपनी ‘ओवरवैल्यूड’ है और इसका सही वैल्यूएशन 780 बिलियन डॉलर होना चाहिए, जबकि इसे 1.77 ट्रिलियन डॉलर पर लिस्ट किया जा रहा है। सवाल 8: आज शाम भारतीय समय अनुसार लिस्टिंग कितने बजे होगी? जवाब: अमेरिकी बाजार नैस्डैक भारतीय समयानुसार आज शाम 7:00 बजे (प्री-मार्केट) खुलेगा। अत्यधिक वॉल्यूम और भारी डिमांड के कारण शुरुआती कुछ घंटों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। रात 11:30 बजे के बाद इस पर नॉर्मल ट्रेडिंग और प्राइज मूवमेंट पूरी तरह स्पष्ट दिखने लगेगा।
आज दुनिया के पहले ट्रिलिनियर बनेंगे मस्क:रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स अमेरिकी बाजार में लिस्ट होगी; ये दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ

दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स आज, 12 जून को अमेरिकी शेयर बाजार नैस्डैक पर लिस्ट होगी। गुरुवार को कंपनी ने अपने आईपीओ का फाइनल प्राइस 135 डॉलर तय कर दिया है। 1.77 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 168 लाख करोड़ रुपए के वैल्यूएशन पर हो रही इस लिस्टिंग के बाद इलॉन मस्क दुनिया के पहले ट्रिलिनियर बन सकते हैं। सवाल-जवाब में समझते हैं आज की लिस्टिंग की पूरी एबीसीडी सवाल 1: आज होने जा रही स्पेसएक्स की लिस्टिंग इतनी ऐतिहासिक क्यों है? जवाब: स्पेसएक्स इस इश्यू के जरिए रिकॉर्ड 75 बिलियन डॉलर यानी करीब 7.15 लाख करोड़ रुपए जुटा रही है। यह अकेला आईपीओ साल 2024 और 2025 में आए सभी अमेरिकी आईपीओ की कुल जुटाई रकम से भी ज्यादा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ है। सवाल 2: क्या इस लिस्टिंग से इलॉन मस्क दुनिया के पहले ‘ट्रिलिनेयर’ बन जाएंगे? जवाब: हां, इसकी पूरी संभावना है। फोर्ब्स के अनुसार इलॉन मस्क की नेटवर्थ 982 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹94 लाख करोड़ हैं। उनके पास स्पेसएक्स में करीब 866 बिलियन डॉलर के शेयर हैं। आज जैसे ही ट्रेडिंग शुरू होगी तो बाकी कंपनियों की वेल्थ मिलाकर मस्क की कुल नेटवर्थ 1 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब ₹95 लाख करोड़ के पार पहुंच जाएगी। सवाल 3: एक ट्रिलियन डॉलर की रकम कितनी बड़ी होती है, इसे आम भाषा में कैसे समझें? जवाब: 1 ट्रिलियन डॉलर एक ऐसी रकम है जो दुनिया के अधिकांश देशों की जीडीपी से भी बड़ी है। दुनिया के केवल 20 देश ऐसे हैं जिनकी जीडीपी इससे ज्यादा है। मस्क अकेले ताइवान, स्विट्जरलैंड, स्वीडन और सिंगापुर जैसे अमीर देशों की कुल अर्थव्यवस्था से ज्यादा अमीर हो जाएंगे। अगर कोई व्यक्ति हर घंटे 10 लाख डॉलर यानी करीब 9.54 करोड़ रुपए भी खर्च करे, तो उसे 1 ट्रिलियन डॉलर खत्म करने में 114 साल से ज्यादा का समय लगेगा। जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमन ने तो मस्क को ‘हमारे समय का एडिसन और आइंस्टीन’ तक कह दिया है। सवाल 4: मार्केट एक्सपर्ट्स जिस ‘इलॉन प्रीमियम’ की बात कर रहे हैं, वो क्या है? जवाब: रेनेसां कैपिटल के सीनियर स्ट्रेटेजिस्ट मैट कैनेडी का कहना है कि ट्रेडिशनल फाइनेंस के नियम स्पेसएक्स पर लागू नहीं होते। जब कोई कंपनी पारंपरिक वित्तीय पैमानों जैसे मुनाफा या रेवेन्यू से परे जाकर सिर्फ अपने मालिक के विजन और साख के दम पर इतना बड़ा वैल्यूएशन पाती है, तो उसे बाजार की भाषा में ‘इलॉन प्रीमियम’ या ‘मस्कोनॉमी’ कहा जाता है। निवेशक उनके पिछले ट्रैक रिकॉर्ड को देखकर उनके इस नए विजन पर आंख मूंदकर दांव लगा रहे हैं। सवाल 5: कंपनी में आम निवेशकों की भागीदारी और मस्क का कंट्रोल कैसा रहेगा? जवाब: कंपनी ने आम निवेशकों के लिए रिकॉर्ड 30% का कोटा था, जो करीब 22.5 बिलियन डॉलर बैठता है। जहां तक कंट्रोल की बात है, मस्क इस आईपीओ में अपना एक भी शेयर नहीं बेच रहे हैं और लिस्टिंग के बाद भी मेजॉरिटी वोटिंग राइट्स उन्हीं के पास रहेंगे। सवाल 6: बाजार के तकनीकी एक्सपर्ट्स को आज लिस्टिंग के समय किस बात का डर है? जवाब: आज मार्केट के सिस्टम का भी बड़ा टेस्ट होना है। जब 2012 में फेसबुक का बड़ा आईपीओ नैस्डैक पर आया था, तब तकनीकी गड़बड़ियों के कारण उसकी ओपनिंग में देरी हुई थी। चूंकि स्पेसएक्स का आईपीओ फेसबुक से कहीं ज्यादा बड़ा है, इसलिए वॉल स्ट्रीट की नजरें नैस्डैक के तकनीकी सिस्टम पर टिकी हैं कि वह इस लोड को कैसे संभालता है। सवाल 7: क्या स्पेसएक्स के मजबूत फाइनेंशियल्स इसके ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहराते हैं? जवाब: नहीं, बिल्कुल नहीं। यही सबसे बड़ा विवाद है। स्पेसएक्स ने पिछले साल लगभग 19 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू तो कमाया, लेकिन कंपनी ने अब तक कोई मुनाफा नहीं कमाया है। रेटिंग एजेंसी ‘मॉर्निंगस्टार’ के विश्लेषकों ने साफ लिखा है कि कंपनी ‘ओवरवैल्यूड’ है और इसका सही वैल्यूएशन 780 बिलियन डॉलर होना चाहिए। सवाल 8: आज शाम भारतीय समय अनुसार लिस्टिंग कितने बजे होगी? जवाब: अमेरिकी बाजार नैस्डैक भारतीय समयानुसार आज शाम 7:00 बजे (प्री-मार्केट) खुलेगा। भारी डिमांड के कारण शुरुआती कुछ घंटों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। रात 11:30 बजे के बाद इस पर नॉर्मल ट्रेडिंग और प्राइज मूवमेंट पूरी तरह स्पष्ट दिखने लगेगा। स्पेसएक्स: रियूजेबल रॉकेट के जरिए स्पेस सेक्टर बदला साल 2002 में इलॉन मस्क ने स्पेस-एक्स कंपनी बनाई थी। स्पेस-एक्स ने तब इतिहास रचा था जब 31 मई 2020 को कंपनी ने दुनिया का पहला प्राइवेट ह्यूमन मिशन लॉन्च किया था। इस मिशन के तहत दो एस्ट्रोनॉट -रॉबर्ट बेहेनकेन और डगलस हर्ले स्पेस गए थे। करीब 63 दिन अंतरिक्ष में रहने के बाद ये दोनों वापस धरती पर लौटे थे। मस्क की कंपनी ने रियूजेबल रॉकेट टेक्नोलॉजी डेवलप कर सैटेलाइट लॉन्चिंग और दूसरे स्पेस मिशन्स को सस्ता बनाया है।
महिला आयोग का प्रणित मोरे-हिमांशु जांगड़ा को नोटिस:सेजल पवार के कमेंट्स पर AIMSA ने कार्रवाई की मांग की; तीनों पर FIR भी दर्ज

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने गुरुग्राम में हुए कॉमेडियन प्रणित मोरे के स्टैंड-अप कॉमेडी शो से जुड़े विवाद का स्वतः संज्ञान लिया है। 370 की बिरयानी वाली वीडियो के मामले में आयोग ने प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा को सुनवाई नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई 22 जून को शाम 4 बजे आयोग के सामने तय की गई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, NCW ने कहा कि वायरल वीडियो का कंटेंट और उसे मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत किए जाने पर गंभीर चिंता है। मामले को गंभीरता से लेते हुए NCW की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा है। उन्होंने मामले में जल्द, सख्त और तय समय के भीतर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही आयोग ने पुलिस से सात दिनों के अंदर की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट भी मांगी है। आयोग ने एफआईआर दर्ज होने की स्थिति, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य लागू कानूनों के तहत की गई कार्रवाई, वायरल वीडियो की जांच और वेरिफिकेशन, तथा आयोजकों, कलाकारों और वेन्यू मैनेजमेंट की भूमिका से संबंधित जानकारी मांगी है। वहीं, ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) ने प्रणित मोरे के दूसरे स्टैंड-अप शो के दौरान MBBS स्टूडेंट सेजल पवार द्वारा कैडवर और बॉडी डोनर्स पर की गई कमेंट्स की निंदा की है। AIMSA ने कहा कि शवों और बॉडी डोनर्स को एंटरटेनमेंट या कॉमेडी का टॉपिक बनाना असंवेदनशील और अपमानजनक है। ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, हर बॉडी डोनर मेडिकल एजुकेशन में योगदान देकर भविष्य के डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने और जानें बचाने में अहम भूमिका निभाता है। एसोसिएशन ने कहा कि शवों का मजाक उड़ाना या उन्हें हल्के में लेना मंजूर नहीं है और इससे मेडिकल शिक्षा की गरिमा कम होती है। AIMSA ने संबंधित लोगों से तुरंत माफी मांगने और सख्त कार्रवाई की मांग की। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि अगर सही कार्रवाई नहीं की गई तो वह कानूनी कार्रवाई कर सकता है। महाराष्ट्र साइबर ने FIR दर्ज की महाराष्ट्र साइबर ने कॉमेडियन प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा, डॉ. सेजल पवार और इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। FIR इंडियन पीनल कोड (IPC) 2023 की अलग-अलग धाराओं और IT एक्ट 2000 की धारा 67 के तहत दर्ज की गई है। आरोप है कि शो और उससे जुड़े ऑनलाइन वीडियो में महिलाओं, सहमति और मृत लोगों के बारे में आपत्तिजनक कमेंट्स थे।
महिला आयोग का प्रणित मोरे-हिमांशु जांगड़ा को नोटिस:सेजल पवार के कमेंट्स पर AIMSA ने कार्रवाई की मांग की; तीनों पर FIR भी दर्ज

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने गुरुग्राम में हुए कॉमेडियन प्रणित मोरे के स्टैंड-अप कॉमेडी शो से जुड़े विवाद का स्वतः संज्ञान लिया है। 370 की बिरयानी वाली वीडियो के मामले में आयोग ने प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा को सुनवाई नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई 22 जून को शाम 4 बजे आयोग के सामने तय की गई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, NCW ने कहा कि वायरल वीडियो का कंटेंट और उसे मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत किए जाने पर गंभीर चिंता है। मामले को गंभीरता से लेते हुए NCW की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा है। उन्होंने मामले में जल्द, सख्त और तय समय के भीतर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही आयोग ने पुलिस से सात दिनों के अंदर की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट भी मांगी है। आयोग ने एफआईआर दर्ज होने की स्थिति, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य लागू कानूनों के तहत की गई कार्रवाई, वायरल वीडियो की जांच और वेरिफिकेशन, तथा आयोजकों, कलाकारों और वेन्यू मैनेजमेंट की भूमिका से संबंधित जानकारी मांगी है। वहीं, ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) ने प्रणित मोरे के दूसरे स्टैंड-अप शो के दौरान MBBS स्टूडेंट सेजल पवार द्वारा कैडवर और बॉडी डोनर्स पर की गई कमेंट्स की निंदा की है। AIMSA ने कहा कि शवों और बॉडी डोनर्स को एंटरटेनमेंट या कॉमेडी का टॉपिक बनाना असंवेदनशील और अपमानजनक है। ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, हर बॉडी डोनर मेडिकल एजुकेशन में योगदान देकर भविष्य के डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने और जानें बचाने में अहम भूमिका निभाता है। एसोसिएशन ने कहा कि शवों का मजाक उड़ाना या उन्हें हल्के में लेना मंजूर नहीं है और इससे मेडिकल शिक्षा की गरिमा कम होती है। AIMSA ने संबंधित लोगों से तुरंत माफी मांगने और सख्त कार्रवाई की मांग की। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि अगर सही कार्रवाई नहीं की गई तो वह कानूनी कार्रवाई कर सकता है। महाराष्ट्र साइबर ने FIR दर्ज की महाराष्ट्र साइबर ने कॉमेडियन प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा, डॉ. सेजल पवार और इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। FIR इंडियन पीनल कोड (IPC) 2023 की अलग-अलग धाराओं और IT एक्ट 2000 की धारा 67 के तहत दर्ज की गई है। आरोप है कि शो और उससे जुड़े ऑनलाइन वीडियो में महिलाओं, सहमति और मृत लोगों के बारे में आपत्तिजनक कमेंट्स थे।
मूवी रिव्यू – गवर्नर:देश को दिवालिया होने से बचाने की कहानी, मनोज बाजपेयी ने कठिन विषय को भी दिलचस्प बना दिया

आज का भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब देश के पास जरूरी सामान आयात करने तक के पैसे नहीं बचे थे। विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा था और देश आर्थिक संकट के कगार पर खड़ा था। ‘गवर्नर’ उसी दौर की कहानी लेकर आती है। यह फिल्म बंदूक, बम और एक्शन की नहीं, बल्कि फाइलों, बैठकों और फैसलों की लड़ाई दिखाती है। हैरानी की बात यह है कि इतना गंभीर विषय होने के बावजूद फिल्म कई जगह दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहती है। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 1990-91 के उस आर्थिक संकट पर आधारित है जब भारत दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच गया था। ऐसे समय में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ए. रामानन को देश की आर्थिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी मिलती है। एक तरफ बढ़ती महंगाई, घटता विदेशी मुद्रा भंडार और अंतरराष्ट्रीय दबाव है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक अस्थिरता। ऐसे हालात में रामानन और उनकी टीम ऐसे फैसले लेने की कोशिश करती है जो देश को आर्थिक संकट से बाहर निकाल सकें। कहानी का बड़ा हिस्सा इसी संघर्ष और रणनीति पर आधारित है। फिल्म की अच्छी बात यह है कि यह इतिहास की किताब जैसा महसूस नहीं होती। जटिल आर्थिक मुद्दों को भी आसान तरीके से समझाने की कोशिश की गई है। फिल्म में एक्टिंग मनोज बाजपेयी पूरी फिल्म की जान हैं। लगभग हर दृश्य उनके कंधों पर टिका है और वह इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हैं। एक ऐसे व्यक्ति का दबाव, चिंता और जिम्मेदारी वह बिना ज्यादा शोर किए दर्शकों तक पहुंचा देते हैं। अदा शर्मा पत्रकार की भूमिका में ठीक लगती हैं। हालांकि उनके हिस्से में बहुत ज्यादा प्रभावशाली दृश्य नहीं आए हैं, लेकिन वह कहानी को आगे बढ़ाने का काम करती हैं। मधु ने सीमित स्क्रीन टाइम में अच्छा काम किया है। वहीं सहायक कलाकार भी अपने-अपने किरदारों में विश्वसनीय लगते हैं। फिल्म में डायरेक्शन निर्देशक चिन्मय डी. मांडलेकर का सबसे बड़ा काम यह है कि उन्होंने अर्थव्यवस्था जैसे कठिन विषय को समझने लायक बनाया है। फिल्म कई बार डॉक्यूमेंट्री बनने के खतरे के करीब पहुंचती है, लेकिन निर्देशन उसे नीरस होने से बचा लेता है। हालांकि कुछ जगह फिल्म जरूरत से ज्यादा सरल समाधान पेश करती हुई महसूस होती है। कुछ घटनाओं और फैसलों के पीछे की जटिलता को और विस्तार से दिखाया जा सकता था। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन उस दौर का माहौल बनाने में सफल रहता है। दफ्तर, सरकारी बैठकें और उस समय का माहौल विश्वसनीय लगता है। छायांकन साधारण है, लेकिन कहानी की जरूरत पूरी करता है। संपादन भी ठीक है, हालांकि कुछ हिस्सों में फिल्म थोड़ी लंबी महसूस होती है। फिल्म में कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी गति है। कुछ दृश्यों में कहानी ठहरती हुई लगती है। आर्थिक फैसलों को लेकर जो तनाव महसूस होना चाहिए था, वह हर जगह पूरी तरह नहीं बन पाता। इसके अलावा कुछ दर्शकों को लग सकता है कि फिल्म कई जटिल राजनीतिक पहलुओं को छूकर आगे बढ़ जाती है। अगर उन हिस्सों को थोड़ा और विस्तार मिलता तो कहानी और मजबूत बन सकती थी। फिल्म में म्यूजिक फिल्म में संगीत कहानी का मुख्य हिस्सा नहीं है। पृष्ठभूमि संगीत माहौल बनाने में मदद करता है और जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया गया है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। फिल्म क्यों देखें? ‘गवर्नर’ उन फिल्मों में से है जो मनोरंजन के साथ-साथ जानकारी भी देती हैं। यह फिल्म बताती है कि देश का भविष्य सिर्फ सीमा पर लड़ी जाने वाली लड़ाइयों से नहीं, बल्कि बंद कमरों में लिए गए फैसलों से भी तय होता है। मनोज बाजपेयी का मजबूत अभिनय और एक कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण विषय इसे देखने लायक बनाता है। हालांकि इसकी धीमी रफ्तार और कुछ सतही हिस्से इसे बहुत ऊंचाई तक नहीं ले जा पाते, लेकिन फिर भी यह एक ईमानदार और दिलचस्प कोशिश है।
कूलर में पानी भरने के टिप्स: लोकतंत्र में पानी भरते समय भूलकर भी न करें ये 5 नलियां, कभी भी लग सकते हैं कूलर में पानी भरने का समय

12 जून 2026 को 11:41 IST पर अपडेट किया गया कूलर में पानी भरने के टिप्स: गर्मी से राहत पाने का सबसे अच्छा तरीका है गर्मी में ब्लॉकचेन। लेकिन लोग बार-बार इसका इस्तेमाल करते समय कुछ न कुछ ऐसी स्थिति कर देते हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है। कई बार मलेशिया में पानी भरे वक्त लोग करंट मछली जैसी मछली का शिकार हो जाते हैं। फॉक्सवैगन के गलत इस्तेमाल से फंगस, बैक्टीरिया और मच्छरों का खतरा भी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं चॉकलेट का इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। अनुसरण करना : अर्थशास्त्र का एक ही पानी के इस्तेमाल से रुका हुआ पानी विद्वान-मशत्रों के पठने की जगह बन जाता है। संक्रमण, मलेरिया और अन्य गंभीर संक्रमणों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। समय पर पानी चलाना बहुत जरूरी है छवि: एआई डेंजरस के टैंकों में काई और गंदगी जमा हो जाती है, जो बिकाऊ उत्पाद बनाती है। हवा के माध्यम से रोग संबंधी रोग हो सकते हैं। सप्ताह में कम से कम एक बार मैनचेस्टर के टैंक और उसके पैड की अच्छी तरह से सफाई करें। छवि: एआई समय रहते पानी भी खतरनाक हो सकता है क्योंकि इसके साथ ही ब्लैक करंट भी खतरनाक हो सकता है। दुर्घटना से बचने के लिए डेमोक्रेट का स्विच बंद करें, दूसरा कारण, उसके बाद ही पानी भरना छवि: इंस्टाग्राम लंबे समय तक पैड की सफाई न की जाए या उसे बदला न जाए, तो हवा के साथ एलर्जी पैदा होने वाले कण और स्कैनर पूरे कमरे में फेल हो सकते हैं। पैड साफ करें, खराब को बदलें बेहतर है। छवि: एआई लोहे के पेंसिल में करंट आने की समस्या होती है, जिससे हाथ में झटका महसूस होता है। अगर आपके लेबल में भी ऐसा हो रहा है, तो तुरंत उसका ढांचा हटा दें। अर्थशास्त्र के सभी सिद्धांतों की जाँच करें छवि: एआई टैंक का पानी पूरी तरह से खाली और ज़रूरत पर उसकी मोटर की जाँच करवाएँ। किसी भी जोखिम से बचने के लिए अंतिम की सलाह अवश्य लें। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 12 जून 2026 11:41 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)कूलर सुरक्षा युक्तियाँ(टी)कूलर में पानी कैसे भरें(टी)कूलर में बिजली का झटका(टी)कूलर का रखरखाव(टी)कूलर से डेंगू को रोकें(टी)ग्रीष्मकालीन सुरक्षा(टी)घरेलू उपकरणों की देखभाल
मूवी रिव्यू – गवर्नर:देश को दिवालिया होने से बचाने की कहानी, मनोज बाजपेयी ने कठिन विषय को भी दिलचस्प बना दिया

आज का भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब देश के पास जरूरी सामान आयात करने तक के पैसे नहीं बचे थे। विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा था और देश आर्थिक संकट के कगार पर खड़ा था। ‘गवर्नर’ उसी दौर की कहानी लेकर आती है। यह फिल्म बंदूक, बम और एक्शन की नहीं, बल्कि फाइलों, बैठकों और फैसलों की लड़ाई दिखाती है। हैरानी की बात यह है कि इतना गंभीर विषय होने के बावजूद फिल्म कई जगह दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहती है। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 1990-91 के उस आर्थिक संकट पर आधारित है जब भारत दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच गया था। ऐसे समय में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ए. रामानन को देश की आर्थिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी मिलती है। एक तरफ बढ़ती महंगाई, घटता विदेशी मुद्रा भंडार और अंतरराष्ट्रीय दबाव है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक अस्थिरता। ऐसे हालात में रामानन और उनकी टीम ऐसे फैसले लेने की कोशिश करती है जो देश को आर्थिक संकट से बाहर निकाल सकें। कहानी का बड़ा हिस्सा इसी संघर्ष और रणनीति पर आधारित है। फिल्म की अच्छी बात यह है कि यह इतिहास की किताब जैसा महसूस नहीं होती। जटिल आर्थिक मुद्दों को भी आसान तरीके से समझाने की कोशिश की गई है। फिल्म में एक्टिंग मनोज बाजपेयी पूरी फिल्म की जान हैं। लगभग हर दृश्य उनके कंधों पर टिका है और वह इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हैं। एक ऐसे व्यक्ति का दबाव, चिंता और जिम्मेदारी वह बिना ज्यादा शोर किए दर्शकों तक पहुंचा देते हैं। अदा शर्मा पत्रकार की भूमिका में ठीक लगती हैं। हालांकि उनके हिस्से में बहुत ज्यादा प्रभावशाली दृश्य नहीं आए हैं, लेकिन वह कहानी को आगे बढ़ाने का काम करती हैं। मधु ने सीमित स्क्रीन टाइम में अच्छा काम किया है। वहीं सहायक कलाकार भी अपने-अपने किरदारों में विश्वसनीय लगते हैं। फिल्म में डायरेक्शन निर्देशक चिन्मय डी. मांडलेकर का सबसे बड़ा काम यह है कि उन्होंने अर्थव्यवस्था जैसे कठिन विषय को समझने लायक बनाया है। फिल्म कई बार डॉक्यूमेंट्री बनने के खतरे के करीब पहुंचती है, लेकिन निर्देशन उसे नीरस होने से बचा लेता है। हालांकि कुछ जगह फिल्म जरूरत से ज्यादा सरल समाधान पेश करती हुई महसूस होती है। कुछ घटनाओं और फैसलों के पीछे की जटिलता को और विस्तार से दिखाया जा सकता था। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन उस दौर का माहौल बनाने में सफल रहता है। दफ्तर, सरकारी बैठकें और उस समय का माहौल विश्वसनीय लगता है। छायांकन साधारण है, लेकिन कहानी की जरूरत पूरी करता है। संपादन भी ठीक है, हालांकि कुछ हिस्सों में फिल्म थोड़ी लंबी महसूस होती है। फिल्म में कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी गति है। कुछ दृश्यों में कहानी ठहरती हुई लगती है। आर्थिक फैसलों को लेकर जो तनाव महसूस होना चाहिए था, वह हर जगह पूरी तरह नहीं बन पाता। इसके अलावा कुछ दर्शकों को लग सकता है कि फिल्म कई जटिल राजनीतिक पहलुओं को छूकर आगे बढ़ जाती है। अगर उन हिस्सों को थोड़ा और विस्तार मिलता तो कहानी और मजबूत बन सकती थी। फिल्म में म्यूजिक फिल्म में संगीत कहानी का मुख्य हिस्सा नहीं है। पृष्ठभूमि संगीत माहौल बनाने में मदद करता है और जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया गया है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। फिल्म क्यों देखें? ‘गवर्नर’ उन फिल्मों में से है जो मनोरंजन के साथ-साथ जानकारी भी देती हैं। यह फिल्म बताती है कि देश का भविष्य सिर्फ सीमा पर लड़ी जाने वाली लड़ाइयों से नहीं, बल्कि बंद कमरों में लिए गए फैसलों से भी तय होता है। मनोज बाजपेयी का मजबूत अभिनय और एक कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण विषय इसे देखने लायक बनाता है। हालांकि इसकी धीमी रफ्तार और कुछ सतही हिस्से इसे बहुत ऊंचाई तक नहीं ले जा पाते, लेकिन फिर भी यह एक ईमानदार और दिलचस्प कोशिश है।
वर्ल्ड अपडेट्स:POK के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलीबारी से 16 की मौत

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की फायरिंग में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 37 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना उस समय हुई जब हजारों लोग महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि और बुनियादी राजनीतिक-आर्थिक अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक रावलाकोट के ईदगाह मैदान में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों ने भीड़ पर गोलीबारी की। फायरिंग के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। POK में पिछले कई दिनों से सस्ती बिजली, सब्सिडी वाला गेहूं-चावल और अधिक अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है। हाल ही में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद तनाव और बढ़ गया। प्रशासन ने कई गिरफ्तारियां की हैं तथा कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी हैं। रावलाकोट की घटना के बाद खाई गाला समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। बाजार बंद रहे और लोगों ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ मार्च निकाला। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। स्थानीय दावों के अनुसार 5 जून से जारी आंदोलन के दौरान अब तक 53 नागरिकों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शन नेताओं ने कहा है कि वे आर्थिक राहत और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे। भारत ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे “नरसंहार” बताया है और कहा है कि यह पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में लोगों के अधिकारों के दमन को दर्शाता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मामले का संज्ञान लेने और पाकिस्तान से लोगों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है।
वर्ल्ड अपडेट्स:POK के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलीबारी से 16 की मौत

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की फायरिंग में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 37 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना उस समय हुई जब हजारों लोग महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि और बुनियादी राजनीतिक-आर्थिक अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक रावलकोट के ईदगाह मैदान में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों ने भीड़ पर गोलीबारी की। फायरिंग के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। POK में पिछले कई दिनों से सस्ती बिजली, सब्सिडी वाला गेहूं-चावल और अधिक अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है। हाल ही में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद तनाव और बढ़ गया। प्रशासन ने कई गिरफ्तारियां की हैं तथा कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी हैं। रावलकोट की घटना के बाद खाई गाला समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। बाजार बंद रहे और लोगों ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ मार्च निकाला। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। स्थानीय दावों के अनुसार 5 जून से जारी आंदोलन के दौरान अब तक 53 नागरिकों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शन नेताओं ने कहा है कि वे आर्थिक राहत और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे। भारत ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे “नरसंहार” बताया है और कहा है कि यह पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में लोगों के अधिकारों के दमन को दर्शाता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मामले का संज्ञान लेने और पाकिस्तान से लोगों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… 3 साल से ज्यादा समय तक कोमा में रहीं थाई राजकुमारी बज्रकिटियाभा का निधन थाईलैंड की राजकुमारी बज्रकिटियाभा का 47 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह दिसंबर 2022 से कोमा में थीं। थाई शाही परिवार ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि लगातार चिकित्सा प्रयासों के बावजूद उनकी हालत बिगड़ती रही और गुरुवार शाम बैंकॉक के चुलालॉन्गकॉर्न अस्पताल में उनका निधन हो गया। राजकुमारी बज्रकिटियाभा दिसंबर 2022 में अपने कुत्तों के साथ व्यायाम कर रही थीं, तभी अचानक बेहोश हो गई थीं। डॉक्टरों ने बाद में बताया कि उनके हृदय में मायकोप्लाज्मा संक्रमण हुआ था, जिससे गंभीर अनियमित धड़कन की समस्या पैदा हुई और वह कोमा में चली गईं। 7 दिसंबर 1978 को जन्मीं बज्रकिटियाभा, थाईलैंड के राजा महा वजिरालोंगकोर्न की सबसे बड़ी संतान थीं। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से दो स्नातकोत्तर डिग्रियां हासिल कीं। संयुक्त राष्ट्र में थाई मिशन के साथ काम करने के बाद उन्होंने थाईलैंड में अटॉर्नी जनरल कार्यालय में सेवाएं दीं। वर्ष 2012 से 2014 तक वह ऑस्ट्रिया में थाईलैंड की राजदूत रहीं। इस दौरान उन्होंने जेल सुधार और महिला कैदियों के अधिकारों के मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में वह संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स एवं अपराध कार्यालय (UNODC) की ‘रूल ऑफ लॉ’ एम्बेसडर भी रहीं। 2021 में राजा वजिरालोंगकोर्न ने उन्हें अपनी निजी सुरक्षा इकाई का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया और जनरल का दर्जा दिया। उनकी प्रशासनिक क्षमता और सार्वजनिक छवि के कारण उन्हें थाई राजशाही के संभावित उत्तराधिकारियों में भी देखा जाता था। राजा ने अब तक अपना आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है। ऐसे में राजकुमारी बज्रकिटियाभा के निधन ने थाई राजपरिवार में उत्तराधिकार को लेकर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। कई राजभक्त उन्हें भविष्य में रानी या रीजेंट की भूमिका निभाने वाली संभावित शख्सियत मानते थे। उ. कोरिया में ड्रोन भेजने पर द. कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति को 30 साल अतिरिक्त जेल दक्षिण कोरिया की सियोल जिला अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को उत्तर कोरिया में ड्रोन भेजकर तनाव भड़काने के मामले में 30 साल अतिरिक्त जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि इस अभियान का मकसद उत्तर कोरिया को उकसाकर आपात स्थिति पैदा करना और बाद में मार्शल लॉ लागू करने के लिए माहौल तैयार करना था। अदालत ने यून सुक योल, पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून, डिफेंस काउंटर इंटेलिजेंस कमांड के पूर्व प्रमुख यो इन-ह्युंग और ड्रोन ऑपरेशन कमांड के पूर्व प्रमुख किम योंग-डे को देशद्रोह और सत्ता के दुरुपयोग का दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि इन अधिकारियों ने सैन्य अभियान की आड़ में उत्तर कोरिया को उकसाया, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष का खतरा बढ़ गया। फैसले में कहा गया कि अक्टूबर 2024 में प्योंगयांग में प्रचार सामग्री गिराने के लिए ड्रोन भेजे गए थे। अदालत के अनुसार यह कार्रवाई यून सुक योल के निर्देश पर हुई थी और उन्हें उम्मीद थी कि उत्तर कोरिया जवाबी प्रतिक्रिया देगा। अभियोजन पक्ष का दावा था कि यह अभियान दिसंबर 2024 में मार्शल लॉ लागू करने की तैयारी का हिस्सा था। यून ने 3 दिसंबर को मार्शल लॉ लागू करते हुए कहा था कि देश को “राष्ट्र-विरोधी ताकतों” से बचाने की जरूरत है, लेकिन भारी जनविरोध के बाद उन्हें फैसला वापस लेना पड़ा। यून सुक योल पहले ही विद्रोह के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। इसके अलावा उन्हें सत्ता के दुरुपयोग और गिरफ्तारी में बाधा डालने के मामले में पांच साल की अलग सजा भी मिल चुकी है। बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि ड्रोन अभियान उत्तर कोरिया द्वारा कचरे से भरे गुब्बारे भेजने की कार्रवाई का जवाब था। हालांकि अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए अभियोजन पक्ष के आरोपों को सही माना। इस मामले ने दक्षिण कोरिया में राजनीतिक संकट को और गहरा कर दिया था। बाद में हुए चुनाव में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ली जे-म्युंग सत्ता में आए और देश में राजनीतिक नेतृत्व बदल गया।






